CJP Protest: ‘आंतरिक मामलों में दखल बर्दाश्त नहीं’; दिल्ली विरोध-प्रदर्शनों पर UN की टिप्पणियों पर भारत का पलटवार

CJP Protest: संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) ने शनिवार (10 अक्तूबर) को राजधानी दिल्ली में बड़े पैमाने पर हुए प्रदर्शनों के दौरान लोगों को हिरासत में लिए जाने पर चिंता जताई। संयुक्त राष्ट्र ने भारतीय अधिकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने के अधिकार का सम्मान करने और मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए लोगों को तत्काल रिहा करने का आग्रह किया। इसके बाद जिनेवा में भारत के स्थायी मिशन ने इन चिंताओं को खारिज करते हुए उन्हें गलतफहमी पर आधारित और देश के आंतरिक मामलों में अनुचित हस्तक्षेप बताया।

भारत ने स्पष्ट किया कि देश में शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने का अधिकार संविधान के तहत प्राप्त है। लेकिन यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के हित में लगाए गए उचित प्रतिबंधों के अधीन है। जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र में भारत के आधिकारिक प्रतिनिधित्व से जुड़े एक्स (X) अकाउंट पर जारी पोस्ट में भारत ने अपना पक्ष रखा।

भारत के स्थायी मिशन ने कहा, “शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने का अधिकार हमारे संविधान में निहित है और मजबूत संस्थाओं, स्वतंत्र न्यायपालिका तथा स्वतंत्र मीडिया द्वारा इसकी रक्षा की जाती है।” उसने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, “हर लोकतंत्र की तरह, भारत के नागरिक भी सार्वजनिक व्यवस्था के हित में लगाए गए उचित प्रतिबंधों के अधीन इस अधिकार का इस्तेमाल करते हैं।”

सुरक्षा बलों ने ‘जेन-जी’ के नेतृत्व वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शनकारियों को मध्य दिल्ली के जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोक दिया, जिसके बाद सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। यह प्रदर्शन मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं को लेकर चुनावी सुधारों और मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के लिए आयोजित किया गया था। निर्वाचन आयोग और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इन आरोपों से इनकार किया है।

UN ने क्या कहा?

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के प्रवक्ता थमीम अल-खीथान ने शनिवार को एक बयान में कहा कि कार्यालय दिल्ली में आज बड़े पैमाने पर हुए प्रदर्शनों से पहले और उनके दौरान प्रदर्शनकारियों, आंदोलन के नेताओं, नागरिक समाज संगठनों के सदस्यों, वकीलों और पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने की खबरों को लेकर चिंतित है। बयान में कहा गया, “हम अधिकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने के अधिकार का पूरी तरह सम्मान करने और उसे सुनिश्चित करने का आग्रह करते हैं।”

अल-खीथान ने भारतीय अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया कि कानून लागू करने वाले कर्मी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों से निपटते समय अत्यंत संयम बरतें। उन्होंने कहा कि ऐसा देश की लोकतांत्रिक परंपराओं और मानवाधिकारों के प्रति उसकी प्रतिबद्धताओं के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने कहा, “मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए सभी लोगों को तत्काल और बिना किसी शर्त के रिहा किया जाना चाहिए।” संयुक्त राष्ट्र ने अधिकारियों से व्यापक स्तर पर व्यक्त की गई चिंताओं का समाधान करने के लिए अर्थपूर्ण संवाद करने का भी आग्रह किया।

क्या है पूरा मामला?

CJP ने मध्य दिल्ली के प्रमुख स्थल जंतर-मंतर पर प्रदर्शन आयोजित करने की योजना बनाई थी। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। भारी सुरक्षा व्यवस्था और सड़क मार्गों पर लगाए गए अवरोधकों के कारण अधिकतर प्रदर्शनकारी इलाके में नहीं पहुंच सके। CJP ने बताया कि उसके संस्थापक अभिजीत दीपके और उनके साथी सौरव दास तथा आशुतोष रांका को मुंबई से दिल्ली पहुंचे उनके विमान के उतरने के तुरंत बाद हिरासत में ले लिया गया। शनिवार के प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों, कार्यकर्ताओं और राजनीतिक नेताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद CJP के राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे ने कहा कि संगठन इस कार्रवाई के बावजूद पीछे नहीं हटेगा।

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CJP के प्रमुख नेताओं के हिरासत में रहने के बीच प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे शिंदे ने कहा, “आप चाहे जितने लोगों को हिरासत में लें। लेकिन जब तक सबसे बड़े गद्दार और देशद्रोही ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, हम पीछे नहीं हटेंगे। हम कल सुबह 10 बजे फिर जंतर-मंतर जाएंगे।” उन्होंने लोगों से बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल होने और पुलिस द्वारा रोके जाने पर भी विरोध जारी रखने की अपील की। शिंदे ने कहा, “बड़ी संख्या में जंतर-मंतर पहुंचें और दिल्ली पुलिस जहां भी आपको रोके, वहीं प्रदर्शन करें।”

नंदीग्राम में BJP का रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन, हासी रानी रथ ने 1,22,800 वोटों से मारी बाजी

Nandigram Bypoll Results: पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर बीजेपी ने ऐसी बाजी मारी, जिसने पुराने चुनावी रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। दरअसल, पार्टी की उम्मीदवार हासी रानी रथ ने उपचुनाव में 1,22,800 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की हैं। ​​उनकी इस जीत से मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की नंदीग्राम में राजनीतिक पकड़ और मजबूत हो गई है।

हासी रानी रथ ने जीत के अंतर के मामले में सुवेंदु अधिकारी का पुराना रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है। अधिकारी ने 2016 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट से 82,000 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। जबकि इस बार बीजेपी उम्मीदवार ने उससे कहीं ज्यादा अंतर से जीत हासिल की।

जीत के बाद शुक्रवार को राज्य सचिवालय नबन्ना में सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि उन्हें पहले से ही हासी रानी रथ की बड़ी जीत का भरोसा था। उन्होंने बताया, “जब मैं नंदीग्राम में चुनाव प्रचार कर रहा था, तब मैंने सभी से कहा था कि हासी रानी रथ यहां 82,000 वोटों के मेरे जीत के अंतर को भी पार कर जाएंगी।”

रथ की जीत को अधिकारी ने बताया ऐतिहासिक

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में, अधिकारी ने रथ को ऐतिहासिक और रिकॉर्ड तोड़ने वाली जीत के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह नतीजा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास के एजेंडे और बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व में वोटरों के भरोसे को दिखाता है।

उन्होंने इस नतीजे को पश्चिम बंगाल में बीजेपी के कामकाज पर मुहर बताया और पार्टी के विकास के एजेंडे की तुलना अपने विरोधियों के कुशासन और अव्यवस्था से की। उन्होंने इस जीत का श्रेय पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं और संगठनात्मक नेतृत्व को भी दिया। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं ने लगातार प्रचार किया और जमीनी स्तर पर मेहनत की, जिसका फायदा पार्टी को मिला।

बता दें कि यह उपचुनाव इसलिए कराना पड़ा क्योंकि सुवेंदु अधिकारी ने भवानीपुर विधानसभा सीट अपने पास रखने के लिए नंदीग्राम सीट छोड़ दी थी। हासी रानी रथ के बेटे चंद्रनाथ रथ मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी थे।

फिलहाल, इस नतीजे से नंदीग्राम में बीजेपी की स्थिति मजबूत हुई है। यह सीट 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद से पश्चिम बंगाल की राजनीति में काफी अहम रही है। उस चुनाव में सुवेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी को नंदीग्राम सीट पर हराया था।

रेजीनगर विधानसभा सीट पर भी बीजेपी ने दर्ज की जीत

इसके अलावा, रेजीनगर विधानसभा सीट पर भी बीजेपी ने बड़ी जीत दर्ज की। पार्टी के उम्मीदवार शंखराव सरकार को 1,29,914 वोट मिले, उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी AJUP के गुलाम नबी आजाद उर्फ रॉबिन को 75,816 वोटों के बड़े अंतर से हराकर इतिहास रच दिया। गुलाम नबी आजाद को 54,098 वोट मिले।

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Mithun Chakraborty: मशहूर अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती बंगाल सरकार के सलाहकार नियुक्त! कैबिनेट मंत्री का मिला दर्जा, सैलरी और अन्य सुविधाएं

Mithun Chakraborty: मशहूर अभिनेता और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता मिथुन चक्रवर्ती को बुधवार (7 अक्टूबर) को पश्चिम बंगाल सरकार का सांस्कृतिक सलाहकार नियुक्त किए जाने के साथ ही कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया। एक आधिकारिक अधिसूचना के मुताबिक, मिथुन को सूचना और सांस्कृतिक मामलों के विभाग में तत्काल प्रभाव से सांस्कृतिक सलाहकार नियुक्त किया गया है। बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने हाल में घोषणा की थी कि मिथुन को पश्चिम बंगाल सरकार का सांस्कृतिक सलाहकार बनाया जाएगा। ताजा आदेश तुरंत लागू हो गया है। यह अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा।

इस नियुक्ति की औपचारिक सूचना कार्मिक और प्रशासनिक सुधार विभाग (IAS सेल) द्वारा 6 अक्टूबर, 2026 को जारी की गई थी। आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, सरकार की मंजूरी के बाद पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के आदेश से जारी की गई थी। प्रशासन ने इस बात पर जोर दिया कि यह रणनीतिक फैसला पूरी तरह से जनसेवा के हित में लिया गया है, जो सांस्कृतिक नीति और क्षेत्रीय मनोरंजन पहलों को सुव्यवस्थित करने के राज्य के बड़े प्रयासों को दर्शाता है।

सुविधा और सैलरी

मिथुन चक्रवर्ती को पश्चिम बंगाल सरकार में सूचना एवं सांस्कृतिक मामलों के विभाग में कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला है। इसके तहत उन्हें कैबिनेट मंत्री के समकक्ष सुविधाएं मिलेंगी। इनमें सरकारी बंगला, आधिकारिक कार, सुरक्षा, स्टाफ, मेडिकल और यात्रा की सुविधाएं शामिल हैं। मूल सैलरी पश्चिम बंगाल में कैबिनेट मंत्री का ₹51,000 प्रति माह है। साथ में सत्कार भत्ता और क्षतिपूर्ति भत्ता आदि शामिल है। हालांकि, सलाहकार पद का सटीक पैकेज अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं हुआ है। इसलिए अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

मुख्य सचिवालय से मंजूरी

इस प्रशासनिक आदेश पर पश्चिम बंगाल सरकार के मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल ने आधिकारिक तौर पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। यह निर्देश चक्रवर्ती को सांस्कृतिक पहलों, सिनेमा के बुनियादी ढांचे के विस्तार और राज्य समर्थित कला कार्यक्रमों की देखरेख के लिए एक पूर्ण कैबिनेट मंत्री के समान कानूनी अधिकार और संस्थागत विशेषाधिकार देता है। यह हाई-प्रोफाइल नियुक्ति राज्य के प्रशासनिक तंत्र और सांस्कृतिक क्षेत्र के बीच एक महत्वपूर्ण संस्थागत कड़ी का काम करती है, जिससे यह मशहूर अभिनेता पश्चिम बंगाल की रणनीतिक सांस्कृतिक पहलों की कमान संभालेंगे।

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‘बंगाल का गौरव’ माने जाने वाले मिथुन चक्रवर्ती भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता हैं, जिन्होंने दशकों से राष्ट्रीय मंच पर पश्चिम बंगाल के सांस्कृतिक समुदाय का प्रतिनिधित्व किया है। उन्होंने मृणाल सेन की 1976 की प्रशंसित आर्ट-हाउस फिल्म ‘मृगया’ से अभिनय की शुरुआत की। उन्होंने अपने पहले ही फिल्मी प्रदर्शन के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का प्रतिष्ठित राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता। इस बड़ी सफलता के बाद, चक्रवर्ती हिंदी और बंगाली दोनों तरह के सिनेमा में स्टार बन गए। और देखते ही देखते उन्होंने देश के सबसे मशहूर जन-नायकों और लंबे समय तक सांस्कृतिक राजदूतों में से एक के रूप में अपनी पहचान बनाई।

Form 6 controversy: चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के दावे को बताया भ्रामक, कांग्रेस नेता ने CEC ज्ञानेश कुमार पर फॉर्म-6 में अवैध बदलाव का लगाया आरोप

Form 6 controversy: कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म-6 में अवैध और एकतरफा तरीके से बदलाव किए। साथ ही कांग्रेस सांसद ने कहा कि यह भारतीय जनता पार्टी (BJP) को मदद पहुंचाने के लिए अपने पद के दुरुपयोग का एक और सबूत है। हालांकि, निर्वाचन आयोग ने गांधी के इस आरोप को भ्रामक बताते हुए कहा कि बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) का आदेश 24 जून 2025 को आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी किया गया था। इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई, 2026 के अपने फैसले में बरकरार रखा है।

राहुल गांधी ने 26 सितंबर के निर्वाचन आयोग के प्रेस नोट का हवाला देते हुए X पर एक पोस्ट में कहा, अब यह संदेह से परे स्थापित हो चुका है कि ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म-6 में अवैध और एकतरफा तरीके से बदलाव किया। उन्होंने आरोप लगाया, “यह भाजपा की मदद करने के लिए उनके पद का दुरुपयोग करने का एक और सबूत है।” लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि लोकतंत्र पर इस आपराधिक हमले में शामिल ज्ञानेश कुमार और अन्य सभी लोगों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।

चुनाव आयोग का जवाब

हालांकि, निर्वाचन आयोग ने बाद में राहुल गांधी के आरोप को भ्रामक बताते हुए उनका फैक्ट-चेक जारी किया है। आयोग ने X पर कहा कि बिहार में SIR का आदेश 24 जून 2025 को निर्वाचन आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी किया गया था। इस आदेश को उच्चतम न्यायालय ने 27 मई, 2026 के अपने फैसले में बरकरार रखा है।

आयोग ने अपने 26 सितंबर 2026 के प्रेस नोट संख्या 120 के बिंदु 1(3) का हवाला देते हुए कहा कि एसआईआर के लिए फॉर्म-6 के साथ संलग्न घोषणा को भी सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है। कांग्रेस नेता ने जिस प्रेस नोट का उल्लेख किया, उसमें निर्वाचन आयोग ने कहा था कि SIR प्रक्रिया के दौरान फॉर्म-6 के साथ संलग्न घोषणा-पत्र को उच्चतम न्यायालय द्वारा सही ठहराया गया है।

सुुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

दूसरी तरफ, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने सोमवार को स्पष्ट किया कि उच्चतम सुप्रीम कोर्ट ने विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले फॉर्म-6 के किसी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी है। उन्होंने यह टिप्पणी मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अभियोग चलाए जाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान की।

बीजेपी भी भड़की

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने निर्वाचन आयोग के कुछ फैसलों से संबंधित जनहित याचिका की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान हुई कार्यवाही के बारे में राहुल गांधी पर झूठ बोलने और देश को गुमराह करने का सोमवार को आरोप लगाया। सत्ताधारी पार्टी ने कहा कि कांग्रेस नेता को इसके परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

BJP प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा, “भारत के चीफ जस्टिस ने यह नहीं कहा कि फॉर्म-6 अवैध है। राहुल गांधी झूठ बोल रहे हैं कि उच्चतम न्यायालय ने ऐसा कहा है।” पात्रा ने आगे कहा, “यह ठीक वैसा ही है, जब राहुल गांधी ने दावा किया था कि उच्चतम न्यायालय ने राफेल सौदे में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की बात कही है। बाद में उन्हें उच्चतम न्यायालय में हलफनामा दाखिल करना पड़ा और बिना शर्त माफी मांगनी पड़ी।”

उन्होंने कहा, “यहां भी यही होने वाला है। झूठ बोलने की सजा होती है।” पात्रा ने आरोप लगाया कि गांधी मामले की उच्चतम न्यायालय में हुई सुनवाई और 26 सितंबर को निर्वाचन आयोग द्वारा जारी बयान के बारे में देश को ‘गुमराह’ करने की कोशिश कर रहे हैं।

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BJP सांसद ने कहा, “दोनों ही मामलों में राहुल गांधी लोगों को गुमराह करके देश में अराजकता पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि उनकी रैलियों को कुछ मजबूती मिल सके।” उन्होंने कहा, “उनकी X पर की गई पोस्ट झूठ से भरी थी। एक जिम्मेदार नेता प्रतिपक्ष से इसकी उम्मीद नहीं की जाती। इस तरह झूठ का दुष्प्रचार करके देश में अराजकता पैदा करने का प्रयास करना अपराध है।”

Rejinagar Bypolls election voting: रेजीनगर उपचुनाव में वोटिंग के दौरान भारी हंगामा, पश्चिम बंगाल पुलिस ने हुमायूं कबीर को किया गिरफ्तार

Rejinagar Bypolls election voting: आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के प्रमुख और विधायक हुमायूं कबीर को मंगलवार (6 अक्टूबर) को पश्चिम बंगाल के रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव में वोट डालने के बाद हिरासत में ले लिया गया। उन्होंने कई बूथों पर वोटिंग प्रक्रिया में पुलिस के दखल का आरोप लगाया था। वोटिंग के बाद कबीर ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी मतदान प्रक्रिया में बाधा डाल रहे थे। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार पहले से ही सत्ता में है, तो ऐसी दखलअंदाजी की क्या जरूरत है।

इस दौरान उन्होंने काफी हंगामा किया। फिर कुछ देर बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। हुमायूं कबीर को पुलिस ने उनके रेजीनगर पार्टी ऑफिस से हिरासत में लिया और फिर रेजीनगर पुलिस स्टेशन ले गई। आम जनता उन्नयन पार्टी ने रेजीनगर उपचुनाव में कबीर के बेटे गुलाम नबी आजाद को चुनावी मैदान में उतारा है।

उपचुनाव के लिए मतदान जारी

पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए मंगलवार सुबह सात बजे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान शुरू हुआ। मुर्शिदाबाद की रेजीनगर सीट उस समय खाली हुई जब 2026 के विधानसभा चुनाव में रेजीनगर और नवादा दोनों सीटों से जीतने वाले हुमायूं कबीर ने नवादा सीट बरकरार रखी।

कबीर ने अपने बेटे को बनाया उम्मीदवार

हुमायूं कबीर की पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) ने उनके बेटे गुलाम नबी आजाद को उम्मीदवार बनाया है। चुनाव मैदान में BJP के उम्मीदवार और मुर्शिदाबाद जिले के पूर्व अध्यक्ष सखराव सरकार, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल धड़े के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी, तृणमूल के प्रतिद्वंद्वी धड़े के उम्मीदवार सफीउज्जमान शेख, कांग्रेस उम्मीदवार मोहम्मद अब्दुल्लाहिल काफी और माकपा के सैयद असद अली शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने कई स्तरों वाली सुरक्षा व्यवस्था की है।

नंदीग्राम में भी वोटिंग जारी, 71 कंपनियां तैनात

अधिकारियों ने बताया कि उपचुनाव के लिए केंद्रीय बलों की कुल 71 कंपनियां तैनात की गई हैं। मतदान शाम छह बजे तक चलेगा। शुभेंदु अधिकारी ने 2026 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीट से जीत हासिल की थी। लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद भवानीपुर सीट बरकरार रखी, जिसके कारण नंदीग्राम में उपचुनाव की जरूरत पड़ी।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने चंद्रनाथ रथ की मां हासिरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है। चंद्रनाथ, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी थे। विधानसभा चुनाव में BJP की जीत के दो दिन बाद छह मई को चंद्रनाथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल धड़े की उम्मीदवार संचित प्रधानी डे ने शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद अपना नाम वापस ले लिया। इसके बाद बनर्जी के पास अपना कोई उम्मीदवार नहीं बचा और उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान का समर्थन किया। उन्होंने इसे इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस (इंडिया) को मजबूत करने की कोशिश बताया।

ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल के प्रतिद्वंद्वी धड़े ने मोहम्मद एतेशामुल हक को लिफाफा चुनाव चिह्न और एक अलग अस्थायी पार्टी पहचान के साथ मैदान में उतारा है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने शांतिगोपाल गिरि को उम्मीदवार बनाया है। वहीं,

मतगणना नौ अक्टूबर को होगी।

Punjab Politics: पंजाब के स्कूलों में शिक्षकों की कमी पर AAP विधायक ने उठाई आवाज, कुछ ही देर बाद केजरीवाल की पार्टी ने किया सस्पेंड

Punjab Politics: पंजाब से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक सुखवीर सिंह मैसरखाना ने शनिवार (3 अक्टूबर) को अपनी पार्टी के नेतृत्व और पंजाब सरकार पर आरोप लगाया कि वे उनके निर्वाचन क्षेत्र के कुछ सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी की समस्या का समाधान नहीं कर रहे हैं। हालांकि, इसके कुछ देर बाद ही मैसरखाना को पार्टी से बाहर कर दिया गया। आम आदमी पार्टी ने मैसरखाना के आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें कथित तौर पर पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित कर दिया।

इससे पहले, पंजाब के बठिंडा जिले की मौर विधानसभा सीट से विधायक सुखवीर सिंह मैसरखाना (Maur AAP MLA Sukhveer Singh Maiserkhanal) ने फेसबुक पर कहा कि शिक्षकों की कमी से जुड़ी उनकी शिकायत का समाधान नहीं होने से परेशान होकर उन्होंने सोशल मीडिया का सहारा लिया। पंजाब में आप सरकार के तहत स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में उपलब्धियों के पार्टी के दावों पर सवाल उठाते हुए विधायक ने आरोप लगाया कि जमीनी स्तर पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है।

टीचर्स की कमी का उठाया था मुद्दा

सुखवीर सिंह मैसरखाना ने एक इमोशनल वीडियो जारी कर पंजाब सरकार पर राज्य के सरकारी स्कूलों में टीचरों की कमी को दूर करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया था। रूंधे गले से AAP विधायक ने कहा कि उनका बेटा भी सरकार के ‘उत्कृष्ट विद्यालय’ में पढ़ता है, जहां शिक्षकों की कमी है। उन्होंने दावा किया कि सत्तारूढ़ दल के विधायकों में वह अकेले ऐसे विधायक हैं, जिनके बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं। विधायक ने दावा किया कि पार्टी नेतृत्व के सामने यह मुद्दा उठाने के बाद उन्हें बताया गया कि मुख्यमंत्री ने उन्हें बुलाया है। उन्होंने दावा किया, “लेकिन उन्होंने मुझसे मुलाकात नहीं की। मैं आखिर कब तक इसे बर्दाश्त करूंगा? मैंने पार्टी का क्या बिगाड़ा है?”

‘मैं थक गया हूं, शिक्षकों की मांग करते-करते’

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, AAP विधायक ने कहा कि वह लगातार सरकार और पार्टी नेतृत्व से स्कूलों में शिक्षक उपलब्ध कराने की अपील करते रहे, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। उन्होंने कहा कि उन्होंने दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को बताया था कि उनके बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं और वहां भी पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं। उन्होंने सवाल किया कि अगर सरकारी स्कूलों की स्थिति नहीं सुधरी तो चुनाव के समय सरकार जनता से वोट कैसे मांगेगी।

अब पार्टी पंजाब चुनाव में टिकट नहीं देगी?

AAP विधायक ने कहा कि उन्हें पता है कि आगामी चुनाव में पार्टी उन्हें टिकट नहीं देगी। मैसरखाना ने कहा, “लेकिन मैं लोगों के लिए लड़ता रहूंगा।” विधायक ने कहा कि उन्होंने अपनी शिकायत पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाई, लेकिन उसका कोई समाधान नहीं हुआ। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे बताइए कि मैं कहां गलत हूं।’’ मैसरखाना ने आशंका जताई कि उनके खिलाफ FIR दर्ज की जा सकती है।

विधायक के इस तरह खुलकर नाराजगी जताने के बाद आप की पंजाब इकाई के महासचिव हरचंद सिंह बरसट ने कहा कि मैसरखाना को तत्काल प्रभाव से पार्टी से निलंबित कर दिया गया है। AAP विधायक के बयान का हवाला देते हुए प्रदेश BJP ने कहा कि उनकी स्थिति ने राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी के शिक्षा क्रांति के दावे की पोल खोल दी है।

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शिक्षा मंत्री ने आरोपों को बताया ‘राजनीति से प्रेरित’

पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने इस मामले में विधायक के आरोपों को ‘राजनीति से प्रेरित’ बताया है। उन्होंने कहा कि मैसरखाना के विधानसभा क्षेत्र में 90 प्रतिशत से अधिक शिक्षक पद भरे हुए हैं। मंत्री के मुताबिक, रामनगर स्थित School of Eminence में 30 स्वीकृत पदों के मुकाबले 25 शिक्षक कार्यरत हैं। जबकि स्कूल में करीब 580 स्टूडेंट हैं। यानी सरकार और विधायक की ओर से स्कूल में शिक्षकों की स्थिति को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। इस घटनाक्रम ने पंजाब में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता, AAP सरकार के शिक्षा सुधारों और पार्टी के भीतर असहमति को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।

TMC के हाथ से फिसले दो पार्लियामेंट्री पैनल से अध्यक्ष का पद, डोला सेन और काकोली घोष को लगा करारा झटका

राज्यसभा अध्यक्ष सीपी राधाकृष्णन और लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने शनिवार को अलग-अलग विभागों से जुड़ी संसद की स्थायी समितियों को फिर से बनाया। इस फैसले से सबसे ज्यादा असर ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस पर पड़ा है। पार्टी को दो अहम संसदीय समितियों के अध्यक्ष के पदों से हाथ धोना पड़ा है। इस फैसले से टीएमसी सांसद डोला सेन और कीर्ति आजाद को बड़ा झटका लगा है।

वाणिज्य मामलों पर संसद की स्थायी समिति का नया अध्यक्ष बीजेपी के सुधांशु त्रिवेदी को बनाया गया है। उन्होंने डोला सेन की जगह ली है। वहीं टीएमसी के बागी गुट की लीडर काकोली घोष दस्तीदार उनकी पुरानी पार्टी के सहयोगी कीर्ति आजाद की जगह केमिकल्स और फर्टिलाइजर पर पैनल की चेयरपर्सन बनाई गई हैं। डीएमके एमपी तिरुचि शिवा और के कनिमोझी को उद्योग मामलों पर पार्लियामेंट्री कमिटी और फूड, कंज्यूमर अफेयर्स और पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन पर पैनल का फिर से अध्यक्ष बनाया गया है। बीजेपी के कुछ जरूरी सहयोगी दलों, JD-U, शिवसेना और TDP – के नेताओं को भी अलग-अलग पार्लियामेंट्री कमेटियों के हेड बनाए रखा गया है।

कांग्रेस के शशि थरूर और चरणजीत सिंह चन्नी समेत कुछ विपक्षी नेताओं को भी क्रमशः एक्सटर्नल अफेयर्स और एग्रीकल्चर कमेटियों के चेयरपर्सन के तौर पर बनाए रखा गया है। कांग्रेस के मुकुल वासनिक को एजुकेशन, महिला, बच्चे और युवा मामलों पर पार्लियामेंट्री पैनल का हेड बनाए रखा गया है, जबकि समाजवादी पार्टी के राम गोपाल वर्मा को हेल्थ और फैमिली वेलफेयर पर पैनल का चेयरपर्सन बनाए रखा गया है। BJP के राधा मोहन सिंह डिफेंस पर पैनल को हेड करेंगे।

JD-U के संजय कुमार झा को ट्रांसपोर्ट, टूरिज्म और कल्चर पर पार्लियामेंट्री पैनल का चेयरपर्सन फिर से अपॉइंट किया गया है, जबकि शिवसेना के श्रीरंग बार्ने को एनर्जी पर पैनल का हेड बनाए रखा गया है। BJP के सुजीत कुमार ने अपनी पार्टी के MP बृज लाल की जगह पर पर्सनेल, पब्लिक ग्रीवांस, लॉ और जस्टिस पर पार्लियामेंट्री पैनल का चेयरपर्सन बनाया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर को कोल, माइंस और स्टील पर पैनल का हेड फिर से अपॉइंट किया गया है, जबकि BJP के राजीव प्रताप रूडी को वॉटर रिसोर्स पर पैनल का चेयरपर्सन बनाए रखा गया है।

BJP के भर्तृहरि महताब फाइनेंस पैनल के हेड बने रहेंगे, जबकि उनके पार्टी साथी राधा मोहन दास अग्रवाल को होम अफेयर्स पैनल का हेड बनाए रखा गया है। BJP के निशिकांत दुबे को भी कम्युनिकेशन और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी पैनल का हेड फिर से बनाया गया है, जबकि महाराष्ट्र से पार्टी MP मेधा विश्राम कुलकर्णी को साइंस और टेक्नोलॉजी, एनवायरनमेंट, फॉरेस्ट और क्लाइमेट चेंज कमेटी का चेयरपर्सन बनाए रखा गया है।

BJP के सुधीर गुप्ता ने रेलवे पैनल के चेयरपर्सन के तौर पर पार्टी साथी सी एम रमेश की जगह ली है, जबकि कांग्रेस के सप्तगिरी शंकर उलाका को रूरल डेवलपमेंट और पंचायती राज पैनल का हेड फिर से बनाया गया है।

Captain Smit Machchhar भारत का नया हीरो, इजरायल ने फ्लाईदुबई के पायलट के सम्मन में मुंबई में लगाए बिलबोर्ड

ममता बनर्जी के पैर में लगी चोट नकली थी? फ्रैक्चर केस में शुभेंदु अधिकारी का बड़ा दावा, बंगाल सरकार ने जांच के दिए आदेश

Mamata Banerjee Leg Injury: पश्चिम बंगाल सरकार 2021 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पैर में लगी चोट के कथित झूठे दावों की फिर से जांच शुरू करेगी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार (3 अक्टूबर) को यह बड़ी घोषणा की। इसी के साथ अधिकारी ने नंदीग्राम में 2021 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान ममता बनर्जी के पैर में लगी चोट से जुड़े विवाद को फिर से हवा दी है। अधिकारी ने आरोप लगाया है कि बनर्जी ने चोट का नाटक किया था। उन्होंने अपने दावे के समर्थन में बांगुर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज के मेडिकल रिकॉर्ड का हवाला दिया है।

राज्य सचिवालय ‘नबान्न’ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अधिकारी ने आरोप लगाया कि बनर्जी ने चुनाव के दौरान अपनी चोट का नाटक किया था। अधिकारी ने बांगुर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंस द्वारा जारी बनर्जी की मेडिकल रिपोर्ट दिखाते हुए कहा, “ममता बनर्जी ने 2021 में नंदीग्राम में चुनाव प्रचार के दौरान पैर में चोट लगने का नाटक किया था। हमारे पास मेडिकल रिपोर्ट है, जिसमें कहा गया है कि फ्रैक्चर या हड्डी खिसकने का कोई प्रमाण नहीं है। हम इस मामले की जांच शुरू करेंगे।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “उनके झूठे आरोप से नंदीग्राम के लोगों का अपमान हुआ। 9 अक्टूबर के बाद आदर्श आचार संहिता हटने पर मैं इस बारे में और जानकारी सामने रखूंगा। मैं कल किए गए अपने दावों के समर्थन में आज यह बात कह रहा हूं।” नंदीग्राम में छह अक्टूबर को उपचुनाव होना है। जबकि इसके नतीजे 9 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे।

मार्च, 2021 में लगी थी पैर में चोट

सीएम अधिकारी ने इससे पहले नंदीग्राम-2 विकासखंड के बिरुलिया बाजार में एक रैली को संबोधित करते हुए यह दावा किया था। यही वह स्थान है, जहां पांच साल पहले बनर्जी घायल हुई थीं। तत्कालीन मुख्यमंत्री बनर्जी को 10 मार्च, 2021 को चुनाव प्रचार के दौरान नंदीग्राम के बिरुलिया के रेयापाड़ा इलाके में बाएं पैर और कमर में चोट लगी थी। बनर्जी ने शुरुआत में कहा था कि कुछ अज्ञात लोगों ने जानबूझकर उन्हें उनकी कार के दरवाजे की ओर धक्का दिया, जिससे दरवाजा उनके बाएं पैर से जोर से टकराया और भारी भीड़ के बीच पैर चोटिल हो गया।

बाद में अस्पताल से जारी एक वीडियो संदेश में बनर्जी ने बताया था कि समर्थकों का अभिवादन करते समय भारी भीड़ उनकी कार के पास आ गई थी, जिससे उनका पैर दब गया और उन्हें चोट लगी। उन्हें आधिकारिक तौर पर बाएं टखने और पैर की हड्डियों में गंभीर चोट के साथ-साथ दाहिने कंधे, हाथ, गर्दन और कमर में चोट एवं दर्द की जानकारी दी गई थी। इसके बाद उन्हें कोलकाता लाया गया और राज्य संचालित एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया।

विस्तृत जांच के बाद बनर्जी को 12 मार्च को अस्पताल से छुट्टी दी गई। उस समय उनके बाएं पैर पर प्लास्टर था और उन्होंने बाद में व्हीलचेयर पर बैठकर चुनाव प्रचार जारी रखा। इन चुनावों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने 294 में से 216 सीटें जीतकर बड़ी जीत दर्ज की थी। जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) 77 सीटों पर सिमट गई थी।

रिपोर्ट में क्या है?

अधिकारी द्वारा शेयर किए गए मेडिकल दस्तावेजों से पता चलता है कि 11 मार्च, 2021 के सीटी स्कैन में जांच किए गए क्षेत्रों में कथित तौर पर कोई फ्रैक्चर नहीं दिखा। हालांकि, केवल इन रिपोर्टों से यह साबित नहीं होता है कि बनर्जी की कुल चोटें बनावटी थीं। एसएसकेम (SSKM) अस्पताल की उस समय की रिपोर्टों में उनके बाएं टखने और पैर में चोटों के साथ-साथ कंधे, अग्रबाहु (forearm) और गर्दन में चोटों का भी जिक्र था।

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अधिकारी द्वारा घोषित नई जांच से 2021 की घटना से जुड़ी परिस्थितियों की और जांच होने की उम्मीद है। नंदीग्राम उपचुनाव से ठीक पहले यह विवाद फिर से उठ खड़ा हुआ है, जिससे 2021 के चुनाव का घटनाक्रम एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है।

UP-Bihar MLC polls: यूपी-बिहार MLC चुनाव के लिए BJP ने जारी की 10 उम्मीदवारों की लिस्ट, नवल किशोर यादव और केदारनाथ सिंह को मिला टिकट

UP-Bihar MLC polls 2026: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मंगलवार (29 सितंबर) को बिहार और उत्तर प्रदेश में होने वाले 2026 के विधान परिषद (MLC) चुनाव के लिए 10 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया। भगवा पार्टी ने स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए भी उम्मीदवार घोषित किए हैं। बिहार के लिए पार्टी ने नवल किशोर यादव और डॉ. एनके यादव समेत उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश के लिए घोषित छह प्रमुख उम्मीदवारों में केदारनाथ सिंह और हरि किशोर तिवारी के नाम शामिल हैं।

BJP की ओर से जारी लिस्ट में दोनों राज्यों की विधान परिषद की संबंधित स्नातक और शिक्षक सीटों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों का चयन किया गया है। इन चुनावों के जरिए विधान परिषद में संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों का चुनाव होगा। BJP के इस ऐलान के साथ ही बिहार और उत्तर प्रदेश में आगामी MLC चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।

बिहार MLC चुनाव के लिए BJP उम्मीदवारों के प्रमुख नाम

पटना शिक्षक: श्री नवल किशोर यादव

कोशी स्नातक: डॉ० एन.के. यादव

दरभंगा स्नातक: श्री सर्वेश कुमार

तिरहुत शिक्षक: श्री नरेंद्र प्रसाद सिंह

उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव 2026 के प्रमुख उम्मीदवार

वाराणसी स्नातक: केदार नाथ सिंह

मेरठ स्नातक: दिनेश गोयल

इलाहाबाद-झांसी स्नातक: अशोक कुमार राठौर

वाराणसी शिक्षक: डॉ. प्रमोद मिश्रा

आगरा शिक्षक: इंजीनियर हरि किशोर तिवारी

गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक: ध्रुव त्रिपाठी

राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव के लिए जोड़तोड़ तेज

उत्तर प्रदेश में आगामी राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों में जोड़तोड़ और लामबंदी तेज हो गई है। राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर और विधान परिषद की 11 सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान होगा। विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के आधार पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और समाजवादी पार्टी (SP) ही अपने उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने की स्थिति में हैं। ऐसे में दोनों दलों में उम्मीदवारों के चयन और रणनीति को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं।

निर्वाचन आयोग के अनुसार, राज्यसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की 10 सीट शामिल हैं। इन सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। चुनाव के लिए अधिसूचना 29 सितंबर को जारी होगी। जबकि नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख छह अक्टूबर और मतगणना 16 अक्टूबर को होगी।

ये होने वाले हैं रिटायर

उत्तर प्रदेश से रिटायर होने वाले राज्यसभा सदस्यों में BJP के अरुण सिंह, गीता शाक्य, नीरज शेखर, बृजलाल, बी.एल. वर्मा, सीमा द्विवेदी और हरदीप सिंह पुरी, सपा के रामगोपाल यादव तथा बहुजन समाज पार्टी (BSP) के रामजी गौतम शामिल हैं। पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा की सीट 11 सितंबर से रिक्त है। अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह के उपराज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद उनका इस्तीफा प्रभावी हुआ था। निवर्तमान 10 सीटों में से आठ भाजपा, एक सपा और एक बसपा के पास थीं।

मौजूदा विधानसभा में संख्या बल के आधार पर BJP को सर्वाधिक सीटें मिलने की संभावना है। जबकि उसके बाद सपा का प्रतिनिधित्व होगा। हाल ही में आगरा की फतेहाबाद सीट से BJP विधायक छोटेलाल वर्मा के निधन के बाद 403 सदस्यीय विधानसभा में BJP गठबंधन के 288 विधायक हैं। इनमें BJP के 255, अपना दल (सोनेलाल) के 13, राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के नौ, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के छह और निषाद पार्टी के पांच विधायक शामिल हैं।

सपा-कांग्रेस गठबंधन के पास करीब 103 विधायक हैं, जिनमें SP के 101 विधायक शामिल हैं। जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के दो और तीन निर्दलीय विधायक हैं। इन तीन निर्दलीय विधायकों में उत्तर प्रदेश सरकार के खाद्य मंत्री मनोज कुमार पांडेय भी शामिल हैं। ये तीनों विधायक सपा के टिकट पर चुनाव जीते थे। लेकिन राज्यसभा चुनाव के दौरान पार्टी से उनकी दूरियां बढ़ गई थीं।

23 अक्टूबर को होगा MLC चुनाव

विधान परिषद की 11 सीटों के लिए चुनाव 23 अक्टूबर को होगा। जबकि मतगणना 27 अक्टूबर को की जाएगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के अनुसार, पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए अधिसूचना 29 सितंबर को जारी होगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि छह अक्टूबर, नामांकन पत्रों की जांच सात अक्टूबर और नाम वापसी की अंतिम तारीख नौ अक्टूबर होगी।

ये भी पढ़ें- Video: दिल्ली पुलिसकर्मी की AAP कार्यकर्ताओं ने सरेआम कर दी पिटाई, केजरीवाल के दौरे के दौरान सादे कपड़ों में था हेड कांस्टेबल

इन सीटों के लिए मतदान 23 अक्टूबर को सुबह आठ बजे से शाम चार बजे तक होगा। पूरी चुनाव प्रक्रिया 31 अक्टूबर तक पूरी कर ली जाएगी। संबंधित सदस्यों का कार्यकाल छह दिसंबर को समाप्त हो रहा है। विधान परिषद के जिन सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें BJP के अवनीश कुमार सिंह, मानवेन्द्र प्रताप सिंह, दिनेश कुमार गोयल, उमेश द्विवेदी, श्रीचंद शर्मा और हरि सिंह ढिल्लों; सपा के लाल बिहारी यादव, आशुतोष सिन्हा और डॉ. मान सिंह यादव, निर्दलीय आकाश अग्रवाल तथा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से ध्रुव कुमार त्रिपाठी शामिल हैं।

Video: दिल्ली पुलिसकर्मी की AAP कार्यकर्ताओं ने सरेआम कर दी पिटाई, केजरीवाल के दौरे के दौरान सादे कपड़ों में था हेड कांस्टेबल

Video: राजधानी के तिलक नगर इलाके में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के दौरे के दौरान एक पुलिसकर्मी के साथ कथित तौर पर मारपीट और धक्का-मुक्की करने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस का एक हेड कॉन्स्टेबल सादे कपड़ों में मोबाइल फोन से केजरीवाल के दौरे की रिकॉर्डिंग कर रहा था। इसी दौरान कुछ आम आदमी पार्टी (AAP) कार्यकर्ताओं ने उसे घेर लिया। इस दौरान उसके साथ कथित तौर पर हाथापाई और मारपीट की।

घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। इसमें सादे कपड़ों में मौजूद पुलिसकर्मी को भीड़ के बीच घिरा हुआ देखा जा सकता है। वीडियो में लोग उसे धक्का देते और उसके साथ बहस करते नजर आ रहे हैं। पुलिसकर्मी ने जींस और शर्ट पहन रखी थी। इससे एक दिन पहले ही दिल्ली के मंत्री प्रवेश वर्मा और AAP से जुड़े एक युवक के बीच हुई झड़प ने इलाके में राजनीतिक और पुलिस विवाद खड़ा कर दिया था।

फ्लाईओवर के नीचे घेरकर जाने नहीं दिया

बताया गया है कि AAP कार्यकर्ताओं की भीड़ पुलिसकर्मी को घेरते हुए फ्लाईओवर के नीचे तक ले गई। आरोप है कि भीड़ ने कथित तौर पर उसे वहां से निकलने नहीं दिया। स्थिति बिगड़ने पर वर्दी में मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर अपने साथी को भीड़ से बाहर निकालने की कोशिश की।

पुलिस ने हेड कॉन्स्टेबल की मेडिकल जांच कराई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसे किसी तरह की चोट लगी है या नहीं। पुलिसकर्मी के साथ ड्यूटी के दौरान कथित मारपीट को लेकर FIR दर्ज करने पर भी विचार किया जा रहा है।

तिलक नगर में सड़क की क्वालिटी पर केजरीवाल ने उठाए सवाल

यह घटना पश्चिमी दिल्ली के तिलक नगर में सोमवार (28 सितंबर) को अरविंद केजरीवाल के दौरे के दौरान हुई। केजरीवाल के साथ AAP सांसद संजय सिंह, स्थानीय विधायक जरनैल सिंह और पार्टी के अन्य नेता भी मौजूद थे। केजरीवाल ने इलाके में हाल ही में बनी सड़क की क्वालिटी को लेकर दिल्ली की BJP सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि सड़क निर्माण के कुछ ही दिनों बाद उसकी हालत खराब हो गई है।

केजरीवाल ने कहा कि सड़क को हाथ से ही उखाड़ा जा सकता है। उन्होंने दिल्ली में इस तरह का निर्माण पहले कभी नहीं देखा। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी पिछली AAP सरकार के दौरान इस तरह के सड़क निर्माण पर पांच साल की गारंटी होती थी।

एक दिन पहले मंत्री प्रवेश वर्मा का वीडियो हुआ था वायरल

अरविंद केजरीवाल का तिलक नगर दौरा ऐसे समय हुआ, जब इससे एक दिन पहले दिल्ली के मंत्री प्रवेश वर्मा का एक वीडियो सामने आया था। वायरल वीडियो में उन्हें इलाके में नई बनी सड़क का निरीक्षण करते समय एक व्यक्ति को कथित तौर पर थप्पड़ मारते हुए देखा गया था।

हालांकि, बाद में पुलिस से जुड़ी जानकारी में सामने आया कि थप्पड़ खाने वाला व्यक्ति भी एक मामले में आरोपी है। 22 वर्षीय साहिब सिंह पर इस साल की शुरुआत में दिल्ली नगर निगम (MCD) के एक कर्मचारी के साथ कथित मारपीट के संबंध में पुलिस शिकायत और एफआईआर दर्ज होने की बात सामने आई।

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राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच सामने आई घटना

तिलक नगर की घटना ने दिल्ली में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विपक्षी AAP के बीच चल रहे राजनीतिक टकराव के बीच एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। एक तरफ केजरीवाल ने सड़क निर्माण की क्वालिटी पर सवाल उठाए। वहीं, उनके दौरे के दौरान पुलिसकर्मी के साथ कथित मारपीट का वीडियो सामने आने से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस अब वीडियो की जांच कर रही है। मामले में पुलिस कार्रवाई कर सकती है। NDTV के मुताबिक, पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। फिलहाल, दिल्ली पुलिस के आधिकारिक बयान का इंतजार है।