केरल सरकार ने 20 साल पुराना मामला खोला

कांग्रेस पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक नया मोर्चा खोल दिया है। हालांकि किसी ने उनका नाम नहीं लिया है लेकिन ऐसा लग रहा है कि निशाने पर ज्ञानेश कुमार ही है। केरल की कांग्रेस सरकार ने 2006 के एक मामले को खोलते हुए विजिलेंस जांच की इजाजत दे दी है। मामला सड़क निर्माण से जुड़ा है। असल में भारत और मलेशिया की सरकार मिल कर एक सड़क बना रही थी, जो पीडब्लुडी की सड़क थी। इस मामले से जुड़े मलेशिया के एक इंजीनियर ने आत्महत्या कर ली थी।

उस समय केरल सरकार के पीडब्लुडी सचिव ज्ञानेश कुमार थे। आत्महत्या करने वाले मलेशियाई इंजीनियर ने आरोप लगाया था कि सरकारी अधिकारी रिश्वत मांग रहे थे और रिश्वत नहीं देने पर काम में अड़ंगा लगा रहे थे। उस समय मामले को दबा दिया गया था। जांच आगे नहीं बढ़ पाई थी। अब कांग्रेस ने इस मामले की जांच विजिलेंस को सौंप दी है। 20 साल बाद पता नहीं क्या सबूत मिलेंगे और क्या जांच होगी लेकिन इसी बहाने एक दूसरे मामले में ज्ञानेश कुमार पर फोकस बन गया है।

दम है तो आ जाओ; दिल्ली में क्यों हथौड़ा लेकर सड़क पर निकल गए भाजपा के विधायक

दिल्ली के तिलक नगर में सड़क निर्माण को लेकर भाजपा और आप के बीच जुबानी जंग जारी है। इस बीच भाजपा विधायक रविंदर सिंह नेगी ने हथौड़ा मारकर सड़क की मजबूती दिखाते हुए केजरीवाल और आप नेताओं पर ड्रामेबाजी करने का आरोप लगाया।

Video: दिल्ली पुलिसकर्मी की AAP कार्यकर्ताओं ने सरेआम कर दी पिटाई, केजरीवाल के दौरे के दौरान सादे कपड़ों में था हेड कांस्टेबल

Video: राजधानी के तिलक नगर इलाके में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के दौरे के दौरान एक पुलिसकर्मी के साथ कथित तौर पर मारपीट और धक्का-मुक्की करने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस का एक हेड कॉन्स्टेबल सादे कपड़ों में मोबाइल फोन से केजरीवाल के दौरे की रिकॉर्डिंग कर रहा था। इसी दौरान कुछ आम आदमी पार्टी (AAP) कार्यकर्ताओं ने उसे घेर लिया। इस दौरान उसके साथ कथित तौर पर हाथापाई और मारपीट की।

घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। इसमें सादे कपड़ों में मौजूद पुलिसकर्मी को भीड़ के बीच घिरा हुआ देखा जा सकता है। वीडियो में लोग उसे धक्का देते और उसके साथ बहस करते नजर आ रहे हैं। पुलिसकर्मी ने जींस और शर्ट पहन रखी थी। इससे एक दिन पहले ही दिल्ली के मंत्री प्रवेश वर्मा और AAP से जुड़े एक युवक के बीच हुई झड़प ने इलाके में राजनीतिक और पुलिस विवाद खड़ा कर दिया था।

फ्लाईओवर के नीचे घेरकर जाने नहीं दिया

बताया गया है कि AAP कार्यकर्ताओं की भीड़ पुलिसकर्मी को घेरते हुए फ्लाईओवर के नीचे तक ले गई। आरोप है कि भीड़ ने कथित तौर पर उसे वहां से निकलने नहीं दिया। स्थिति बिगड़ने पर वर्दी में मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर अपने साथी को भीड़ से बाहर निकालने की कोशिश की।

पुलिस ने हेड कॉन्स्टेबल की मेडिकल जांच कराई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसे किसी तरह की चोट लगी है या नहीं। पुलिसकर्मी के साथ ड्यूटी के दौरान कथित मारपीट को लेकर FIR दर्ज करने पर भी विचार किया जा रहा है।

तिलक नगर में सड़क की क्वालिटी पर केजरीवाल ने उठाए सवाल

यह घटना पश्चिमी दिल्ली के तिलक नगर में सोमवार (28 सितंबर) को अरविंद केजरीवाल के दौरे के दौरान हुई। केजरीवाल के साथ AAP सांसद संजय सिंह, स्थानीय विधायक जरनैल सिंह और पार्टी के अन्य नेता भी मौजूद थे। केजरीवाल ने इलाके में हाल ही में बनी सड़क की क्वालिटी को लेकर दिल्ली की BJP सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि सड़क निर्माण के कुछ ही दिनों बाद उसकी हालत खराब हो गई है।

केजरीवाल ने कहा कि सड़क को हाथ से ही उखाड़ा जा सकता है। उन्होंने दिल्ली में इस तरह का निर्माण पहले कभी नहीं देखा। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी पिछली AAP सरकार के दौरान इस तरह के सड़क निर्माण पर पांच साल की गारंटी होती थी।

एक दिन पहले मंत्री प्रवेश वर्मा का वीडियो हुआ था वायरल

अरविंद केजरीवाल का तिलक नगर दौरा ऐसे समय हुआ, जब इससे एक दिन पहले दिल्ली के मंत्री प्रवेश वर्मा का एक वीडियो सामने आया था। वायरल वीडियो में उन्हें इलाके में नई बनी सड़क का निरीक्षण करते समय एक व्यक्ति को कथित तौर पर थप्पड़ मारते हुए देखा गया था।

हालांकि, बाद में पुलिस से जुड़ी जानकारी में सामने आया कि थप्पड़ खाने वाला व्यक्ति भी एक मामले में आरोपी है। 22 वर्षीय साहिब सिंह पर इस साल की शुरुआत में दिल्ली नगर निगम (MCD) के एक कर्मचारी के साथ कथित मारपीट के संबंध में पुलिस शिकायत और एफआईआर दर्ज होने की बात सामने आई।

ये भी पढ़ें- Sambhal Violence: संभल हिंसा मामले में आरोपी को बड़ी राहत! सुप्रीम कोर्ट ने NSA के तहत मुल्ला अफरोज की हिरासत रद्द की, UP सरकार पर लगाया ₹10 लाख का जुर्माना

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच सामने आई घटना

तिलक नगर की घटना ने दिल्ली में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विपक्षी AAP के बीच चल रहे राजनीतिक टकराव के बीच एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। एक तरफ केजरीवाल ने सड़क निर्माण की क्वालिटी पर सवाल उठाए। वहीं, उनके दौरे के दौरान पुलिसकर्मी के साथ कथित मारपीट का वीडियो सामने आने से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस अब वीडियो की जांच कर रही है। मामले में पुलिस कार्रवाई कर सकती है। NDTV के मुताबिक, पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। फिलहाल, दिल्ली पुलिस के आधिकारिक बयान का इंतजार है।

आम आदमी को थप्पड़ मार कर फंसे प्रवेश वर्मा

नई दिल्ली। दिल्ली की भाजपा सरकार के वरिष्ठ मंत्री प्रवेश वर्मा एक आम आदमी को थप्पड़ मारने के विवाद में फंस गए हैं। आम आदमी पार्टी ने थप्पड़ मारने का वीडियो शेयर करते हुए उनके ऊपर आरोप लगाया है कि एक व्यक्ति खराब सड़क निर्माण का वीडियो बना रहा था तो उसे रोकने के लिए मंत्री ने थप्पड़ मार दिया। दूसरी ओर मंत्री प्रवेश वर्मा का कहना है कि उस व्यक्ति ने उनके परिवार के लिए अपशब्द कहे थे।

अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने रविवार को वीडिया साझा करते हुए आरोप लगाया कि तिलक नगर में सड़क बनाने में हुए भ्रष्टाचार को लेकर कुछ लोग उनसे सवाल कर रहे थे। इस बीच उन्होंने वहां खड़े एक युवक को थप्पड़ मार दिया। इसके बाद उनके गार्ड और मौजूद साथियों ने युवक को दूर हटाया। पीड़ित युवक का आरोप है कि पुलिस के सामने उसे पीटा गया। जान से मारने की धमकी दी गई। उसने पुलिस को शिकायत दी है और कहा है कि मंत्री को लिखित में माफी मांगनी होगी।

थप्पड़ विवाद के बाद प्रवेश वर्मा करीब तीन मिनट का एक वीडियो जारी किया है, जिसमें उन्होंने घटना पर सफाई दी है। उन्होंने इसमें कहा है कि आम आदमी पार्टी के नेता जरनैल सिंह रात में बनी सड़क सुबह उखाड़ रहे हैं। उन्होंने कमीशन मांगा था, नहीं मिलने पर विवाद खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि तिलक नगर की घटना का एक और वीडियो सामने आया है, जिसमें प्रवेश वर्मा और विधायक जरनैल सिंह के बीच बहस होती दिख रही है। बाद में जनरैल सिंह उनके पीछे पीछे गाड़ी तक पहुंच गए। वहीं प्रवेश वीडियो बना रहे युवक को थप्पड़ मार देते हैं।

Noida-Ganga Expressway Link: नोएडा-ग्रेटर नोएडा से ‘गंगा एक्सप्रेसवे’ की दूरी होगी कम! 105 मीटर चौड़ी सड़क का प्लान तैयार

Noida-Ganga Expressway Link: देश की राजधानी दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा से ‘गंगा एक्सप्रेसवे’ तक पहुंचना आने वाले समय में और आसान हो सकता है। जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने के बाद क्षेत्र में यात्रियों और वाहनों की आवाजाही बढ़ने की संभावना को देखते हुए ग्रेटर नोएडा के मास्टर प्लान-2041 में संशोधन करने की तैयारी है। इसके तहत नोएडा-ग्रेटर नोएडा को ‘गंगा एक्सप्रेसवे’ से बेहतर तरीके से जोड़ने के लिए नई कनेक्टिविटी विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है।

सोमवार (7 सितंबर) को लखनऊ स्थित पिकअप भवन में इस नई परियोजना का प्रेजेंटेशन हुआ। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने की। बैठक में अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार समेत ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

लखनऊ में हुए प्रेजेंटेशनके बाद अब मास्टर प्लान में प्रस्तावित बदलाव और कनेक्टिविटी से जुड़े तकनीकी एवं नियोजन संबंधी पहलुओं पर आगे की प्रक्रिया की जाएगी। प्रस्ताव को अंतिम रूप मिलने के बाद सड़क निर्माण और कनेक्टिविटी विकसित करने की दिशा में आगे कदम बढ़ाया जाएगा।

कुल मिलाकर, यह योजना जमीन पर लागू होती है तो नोएडा-ग्रेटर नोएडा से ‘गंगा एक्सप्रेसवे’ की दूरी और पहुंच दोनों आसान हो सकती हैं। करीब 15 किलोमीटर की प्रस्तावित कनेक्टिविटी और 105 मीटर चौड़ी सड़क से क्षेत्र के यात्रियों को राहत मिलने के साथ ही जेवर एयरपोर्ट और औद्योगिक क्षेत्रों के बढ़ते ट्रैफिक को संभालने में भी मदद मिल सकती है।

15 किलोमीटर की नई कनेक्टिविटी पर जोर

इस प्रस्ताव के मुताबिक, नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए करीब 15 किलोमीटर लंबी कनेक्टिविटी विकसित की जाएगी। इसके लिए दादरी क्षेत्र से होकर गुजरने वाले मार्ग को बेहतर बनाने की योजना है। प्रस्ताव में करीब 105 मीटर चौड़ी सड़क का भी उल्लेख किया गया है। इस कनेक्टिविटी के विकसित होने से नोएडा और ग्रेटर नोएडा के लोगों को गंगा एक्सप्रेसवे तक पहुंचने के लिए मौजूदा रास्तों पर निर्भरता कम होगी। इससे यात्रा का समय भी कम होने की उम्मीद है।

नोएडा से ‘गंगा एक्सप्रेसवे’ तक पहुंचने में 30 से 45 मिनट की बचत

योजना के लागू होने के बाद नोएडा-ग्रेटर नोएडा से गंगा एक्सप्रेसवे तक पहुंचने में वर्तमान की तुलना में करीब 30 से 45 मिनट तक की बचत हो सकती है। इससे खासतौर पर उन यात्रियों और वाहनों को फायदा मिलेगा जिन्हें गंगा एक्सप्रेसवे के रास्ते पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों और अन्य क्षेत्रों की ओर जाना है। बेहतर कनेक्टिविटी से नोएडा, ग्रेटर नोएडा और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों से एक्सप्रेसवे नेटवर्क तक पहुंच भी आसान होगी।

क्यों है इस कनेक्टिविटी की जरूरत?

जेवर स्थित इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने के बाद नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में यात्री और वाहन आवागमन बढ़ने की उम्मीद है। इसी को ध्यान में रखते हुए भविष्य की जरूरतों के अनुरूप सड़क और एक्सप्रेसवे नेटवर्क को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए केवल मौजूदा सड़कों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। ऐसे में नए और चौड़े संपर्क मार्ग विकसित करने की जरूरत होगी। इससे एयरपोर्ट, औद्योगिक क्षेत्रों और प्रमुख एक्सप्रेसवे के बीच आवागमन सुगम बनाया जा सके।

मास्टर प्लान-2041 में होगा बदलाव

इस प्रोजेक्ट को भविष्य की परिवहन जरूरतों से जोड़ते हुए ‘ग्रेटर नोएडा मास्टर प्लान-2041’ में आवश्यक संशोधन किया जाएगा। इसके लिए लखनऊ में संबंधित विभागों और प्राधिकरण के अधिकारियों के सामने प्रस्ताव का प्रस्तुतीकरण किया गया। योजना का उद्देश्य ग्रेटर नोएडा के मौजूदा और प्रस्तावित विकास क्षेत्रों को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ना है, ताकि आने वाले वर्षों में बढ़ने वाले यातायात का दबाव कम किया जा सके।

औद्योगिक विकास को भी मिलेगा फायदा

नोएडा और ग्रेटर नोएडा पहले से ही बड़े औद्योगिक और व्यावसायिक केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं। ऐसे में ‘गंगा एक्सप्रेसवे’ से सीधी और बेहतर कनेक्टिविटी मिलने से औद्योगिक आवागमन और माल परिवहन को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। नई कनेक्टिविटी बनने से क्षेत्र के लोगों को एक्सप्रेसवे तक पहुंचने के लिए कम दूरी तय करनी पड़ेगी। साथ ही यात्रा का समय घट सकता है। इससे नोएडा-ग्रेटर नोएडा को यूपी के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाला सड़क नेटवर्क और मजबूत होगा।

ये भी पढ़ें- Delhi traffic advisory: दिल्ली पुलिस ने जारी की ट्रैफिक एडवाइजरी! ब्रिक्स समिट के कारण 3 दिन बंद रहेंगी ये सड़कें, 22 डायवर्जन पॉइंट तय

रेडलाइट और क्रिमिनल इलाके में मिले मुझे ज्यादा Vote, नितिन गडकरी ने नागपुर में बताया वोटों का गणित

रेडलाइट और क्रिमिनल इलाके में मिले मुझे ज्यादा Vote, नितिन गडकरी ने नागपुर में बताया वोटों का गणित

Nitin Gadkari Voting Statement

Nitin Gadkari Voting Statement: केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी अपने बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते हैं। इस बार नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपने वोटरों के गणित को लेकर ऐसा दावा कर दिया, जिसकी चर्चा हर जगह हो रही है। गडकरी ने कहा कि उन्हें पढ़े-लिखे इलाकों की तुलना में रेडलाइट, क्रिमिनल और अंडरवर्ल्ड वाले इलाकों से सबसे ज्यादा वोट मिले हैं।

 

'रोडमैन' के नाम से मशहूर गडकरी ने कहा कि चुनाव में उन्हें शिक्षित और संभ्रांत इलाकों से लगभग 70 से 75 प्रतिशत वोट मिले, जबकि क्रिमिनल, अंडरवर्ल्ड और रेड लाइट एरिया से जुड़े इलाकों से करीब 92 प्रतिशत वोट हासिल हुए। ALSO READ: क्या राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी का बदलेगा विभाग? मोदी कैबिनेट में फेरबदल की अटकलों के बीच उठे बड़े सवाल

हाथोंहाथ सफाई भी दे डाली

अपने इस बयान पर किसी भी तरह के विवाद से बचने के लिए गडकरी ने तुरंत स्थिति भी साफ कर दी। उन्होंने कहा कि उनके इस आंकड़े का यह मतलब बिलकुल नहीं निकाला जाना चाहिए कि उनके उन लोगों से कोई निजी संबंध हैं या वे किसी तरह के गैर-कानूनी कामों का समर्थन करते हैं। उन्होंने बताया कि उन पिछड़े और आपराधिक छवि वाले इलाकों में उन्होंने बुनियादी जरूरतें, जैसे सड़कें बनवाईं और कई सामाजिक काम किए। इसी वजह से वहां की जनता ने उन पर इतना भरोसा जताया और वोट दिया। ALSO READ: नितिन गडकरी का संन्यास वाला बयान संगठन के बाद सरकार में पीढ़ी परिवर्तन का संकेत?

पहले भी बयानों से बटोर चुके हैं सुर्खियां

नितिन गडकरी का यह पहला बयान नहीं है जो इस तरह चर्चा में आया हो। वे समय-समय पर अपने बयानों से राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा करते रहे हैं। हाल ही में उनका एक बयान खूब वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे पिछले 30 सालों से सार्वजनिक जीवन में हैं, लेकिन अब ज्यादा काम नहीं कर सकते और नई पीढ़ी को मौका मिलना चाहिए। इस बयान को उनके राजनीति से संन्यास लेने से जोड़कर देखा जाने लगा था।

 

हालांकि बाद में उनके दफ्तर ने स्पष्ट किया था कि वे अपने बनाए 'लक्ष्मणराव मानकर ट्रस्ट' (जो आदिवासी इलाकों में स्कूल चलाता है) के संदर्भ में बात कर रहे थे, राजनीति छोड़ने के संदर्भ में नहीं। गडकरी कई बार सार्वजनिक मंचों से सड़क निर्माण में घटिया काम करने वाले ठेकेदारों और काम में ढिलाई बरतने वाले अफसरों को चेतावनी देने के लिए भी मशहूर रहे हैं।

Ceigall India Share Price: गुजरात-महाराष्ट्र में ₹609 करोड़ का मिला REC पावर प्रोजेक्ट, शेयर 4% चढ़ा

Ceigall India Share Price: इंफ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्रीज कंपनी Ceigall India के शेयर 26 अगस्त को एनएसई पर 4% से ज्यादा की छलांग लगाते नजर आए। दरअसल, REC पावर डेवलपमेंट एंड कंसल्टेंसी (RECPDCL) की ओर से दिए गए एक बड़े इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी (L-1) बनी है ।

सिविल इंजीनियरिंग कंपनी ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के लिए 35 साल की अवधि तक सालाना ट्रांसमिशन चार्ज ₹6,086.70 मिलियन (यानी ₹608.67 करोड़) होगा।Ceigall India के शेयरों में लगातार चार दिनों से बढ़त देखी जा रही है और इस दौरान इनमें लगभग 9% की बढ़ोतरी हुई है।

टैरिफ-आधारित ग्लोबल कॉम्पिटिटिव बिडिंग और ई-रिवर्स ऑक्शन के ज़रिए मिले इस प्रोजेक्ट में लकाडिया फेज़-II (7.5 GW), जाम खंभालिया फेज़-II (5.5 GW) और जामनगर फेज़-I (1 GW) से बिजली पहुंचाने (इवैक्यूएशन) के लिए एक कॉमन ट्रांसमिशन सिस्टम बनाना शामिल है।

फाइलिंग के अनुसार, इसके दायरे में 765/400 kV का एयर-इंसुलेटेड सबस्टेशन (AIS) और गुजरात व महाराष्ट्र में लगभग 300 km लंबी ट्रांसमिशन लाइनें बनाना शामिल है।

प्रोजेक्ट को पूरा करने की अवधि 36 महीने है, जबकि ऑपरेशनल अवधि तय कमीशनिंग तारीख से 35 साल होगी। यह प्रोजेक्ट RECPDCL (एक घरेलू कंपनी) ने टैरिफ-आधारित कॉम्पिटिटिव बिडिंग फ्रेमवर्क के तहत ट्रांसमिशन सर्विस प्रोवाइडर चुनने की प्रक्रिया के हिस्से के तौर पर दिया था।

कंपनी ने कहा कि यह कॉन्ट्रैक्ट ‘रिलेटेड-पार्टी ट्रांज़ैक्शन’ (आपसी हितों से जुड़े लेन-देन) के दायरे में नहीं आता है और न तो प्रमोटर, न ही प्रमोटर ग्रुप और न ही ग्रुप की कंपनियों का प्रोजेक्ट देने वाली कंपनी में कोई हित है।

इस ट्रांसमिशन सिस्टम का मकसद पहचाने गए बिजली उत्पादन क्षेत्रों से बिजली पहुंचाने में मदद करना और इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करना है।

बुधवार को Ceigall India के शेयर इंट्राडे में 6.5% तक बढ़कर ₹345.35 पर पहुंच गए। दोपहर 2.14 बजे तक स्टॉक लगभग 5% की बढ़त के साथ ₹340.75 पर ट्रेड कर रहा था। पिछले महीने इसमें 0.74% की बढ़त हुई है और इस साल अब तक यह लगभग 25% ऊपर है।

सीगल इंडिया को फ्रंटियर हाईवे का ऑर्डर मिला

25 अगस्त, 2026 की कंपनी एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, सीगल इंडिया को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) से अरुणाचल प्रदेश में फ्रंटियर हाईवे के एक हिस्से के लिए ₹704.70 करोड़ का सड़क निर्माण ऑर्डर मिला है। इस कॉन्ट्रैक्ट की कीमत में GST शामिल नहीं है।

यह प्रोजेक्ट सुशी इंफ्रा एंड माइनिंग के साथ एक जॉइंट वेंचर के ज़रिए पूरा किया जाएगा, जिसमें सीगल इंडिया की 74% हिस्सेदारी होगी, जबकि सुशी इंफ्रा के पास बाकी 26% हिस्सेदारी होगी। इस कॉन्ट्रैक्ट में NH-913 के लाडा-सारली सेक्शन के 82.4 किलोमीटर लंबे हिस्से (km 85.60 से km 168.00 तक) का निर्माण इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) आधार पर किया जाएगा।

Advait Energy Share Price: मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी से मिला ऑर्डर, शेयर को लगे पंख, 8% उछला

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

महोबा में हाईवे जाम कर रहे Gen-अल्फा के बीच पहुंचीं DM, जमीन पर बैठकर सुनी समस्याएं; दिया जल्द समाधान का भरोसा

महोबा में हाईवे जाम कर रहे Gen-अल्फा के बीच पहुंचीं DM, जमीन पर बैठकर सुनी समस्याएं; दिया जल्द समाधान का भरोसा

gen alpha protest

उत्तर प्रदेेश में महोबा के रैपुरा कला गांव में सड़क की बदहाली को लेकर जेन अल्फा की उठी आवाज अब प्रशासन के कानों तक पहुंच चुकी है। जिस सड़क निर्माण के लिए गांव के छात्रों ने झांसी-मिर्जापुर हाईवे यानी NH-35 तक जाम लगा दिया था। जेन अल्फा के विरोध से यातायात प्रभावित हुआ, जिसके चलते जिलाधिकारी गजल भारद्वाज आज गांव में खुद छात्रों के बीच पहुंच गई। जब डीएम साहिबा छात्रों से मिली तो वातावरण बदला हुआ नजर आया, इस बार न तो नारों की गूंज थी और न पुलिस से टकराव। 

 

महोबा डीएम ने बच्चों को अपनत्व दिखाते हुए उनके मध्य बैठ गई, उनकी बातें सुनीं और उन्हें भरोसा दिलाया कि उनकी सड़क की समस्या का जल्दी ही समाधान कराया जाएगा। गौरतलब है कि  रैपुरा कला गांव की क्षतिग्रस्त सड़क लंबे समय से ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। सड़क की हालत खराब होने के कारण छात्रों को विद्यालय आने जाने में परेशानी होती है।

गांव की उपेक्षा से नाराज जेन अल्फा ने बीते रोज अपनी आवाज प्रशासन तक पहुंचाने के लिए झांसी-मिर्जापुर हाईवे को जाम कर दिया था। हाईवे पर यातायात रुकने के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच जमकर विवाद भी हुआ। पुलिस और छात्रों के साथ विवाद का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ। विपक्ष ने इसे लेकर राजनीतिक मुद्दा बनाने लगा है। 

 

इसी कड़ी में महोबा की डीएम गजल भारद्वाज ने मामले की गंभीरता को समझते हुए गांव पहुंचीं। उन्होंने बच्चों और उनके अभिभावकों के साथ बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं। बच्चों ने सड़क की बदहाली से होने वाली परेशानियां डीएम के सामने रखीं। डीएम ने उनकी बातों को ध्यान से सुना और भरोसा दिलाया कि क्षतिग्रस्त सड़क के निर्माण के लिए जल्द कार्रवाई की जाएगी।

 

छात्रों से इस मुलाकात में सिर्फ सड़क की बात नहीं हुई। डीएम ने बच्चों को अपने जीवन से जुड़ा एक अनुभव भी सुनाया।

 

उन्होंने बताया कि एक बार वह अपने पिता को लेकर एंबुलेंस से जा रही थीं। रास्ते में हाईवे पर जाम लगा था और एंबुलेंस भी उसी जाम में फंस गई। उस घटना को याद करते हुए उन्होंने बच्चों को समझाया कि अपनी समस्या के लिए आवाज उठाना जरूरी है, लेकिन ऐसा रास्ता नहीं अपनाना चाहिए जिससे किसी दूसरे की जिंदगी खतरे में पड़ जाए या किसी जरूरतमंद को परेशानी उठानी पड़े।

 

डीएम ने छात्रों से कहा कि उनकी समस्या प्रशासन की जिम्मेदारी है और अपनी बात रखने के लिए हाईवे जाम करना जरूरी नहीं। उन्होंने बच्चों को भरोसा दिलाया कि उनकी मांग को गंभीरता से लिया जा रहा है और सड़क निर्माण के लिए जल्द कदम उठाए जाएंगे।

 

डीएम और बच्चों के बीच यह मुलाकात इसलिए भी खास रही क्योंकि एक दिन पहले जहां सड़क के मुद्दे पर बच्चे पुलिस के सामने खड़े थे, वहीं अगले दिन जिले की सबसे बड़ी प्रशासनिक अधिकारी उन्हीं बच्चों के बीच बैठकर उनकी बात सुन रही थीं।

 

इस दौरान पुलिस अधीक्षक समेत जिले के तमाम प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। अब ग्रामीणों और बच्चों को इंतजार उस भरोसे के पूरा होने का है, जो उन्हें डीएम ने दिया है।

 

हंगामे से शुरू हुई कहानी अब उम्मीद पर आकर ठहरी है। बच्चों ने सड़क के लिए आवाज उठाई है, अब उन्हें इंतजार है कि रैपुरा गांव की बदहाल सड़क कब राहगीरों के पक्की सड़क में बदलती दिखाई देगी।

Stock in Focus: इंफ्रा कंपनी को राजस्थान सरकार से ₹241 करोड़ का प्रोजेक्ट मिला, 10 साल तक ITI को ऑपरेट करेगी

Stock in Focus: इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी HG Infra Engineering को राजस्थान सरकार से नया प्रोजेक्ट मिला है। कंपनी को इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (ITI), भिवाड़ी क्लस्टर के संचालन और मैनेजमेंट के लिए लेटर ऑफ अवॉर्ड (LOA) मिला है। यह प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री PM-SETU योजना के तहत दिया गया है।

प्रोजेक्ट में कंपनी की हिस्सेदारी ₹17.1 करोड़

इस प्रोजेक्ट में HG Infra Anchor Industry Partner की भूमिका निभाएगी। कंपनी के हिस्से की वैल्यू करीब 17.1 करोड़ रुपये है। यह अनुमानित 241 करोड़ रुपये के कुल प्रोजेक्ट कॉस्ट का करीब 7% है।

प्रोजेक्ट को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर चलाया जाएगा। HG Infra को ITI के संचालन और मैनेजमेंट की जिम्मेदारी 10 साल तक निभानी होगी। कंपनी को LOA 11 अगस्त 2026 को मिला है।

पहले के दो महाराष्ट्र प्रोजेक्ट ऑर्डर बुक से बाहर

HG Infra ने मई 2026 में महाराष्ट्र के दो प्रोजेक्ट्स को अपनी ऑर्डर बुक में शामिल नहीं करने का फैसला किया था। कंपनी ने इसके पीछे प्रोजेक्ट के समय पर शुरू होने को लेकर अनिश्चितता बताई थी।

ये दोनों प्रोजेक्ट नागपुर-चंद्रापुर एक्सेस सुपर कम्युनिकेशन एक्सप्रेसवे से जुड़े थे। कंपनी को मई 2024 में दोनों पैकेज के लिए L1 bidder घोषित किया गया था। HG Infra के मुताबिक, इन दोनों प्रोजेक्ट्स के लिए जमा की गई बैंक गारंटी MSRDC ने वापस कर दी। हालांकि, इसकी कोई वजह नहीं बताई गई।

HG Infra के शेयरों का हाल

मंगलवार को HG Infra Engineering का शेयर 0.97%% गिरकर 548 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 21.29% गिरा है। वहीं, 1 साल में इसने करीब 45% का नेगेटिव रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 3.58 हजार करोड़ रुपये है।

HG Infra का बिजनेस क्या है

HG Infra Engineering इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी है, जो मुख्य तौर पर सड़क, हाईवे, एक्सप्रेसवे और रेलवे से जुड़े EPC प्रोजेक्ट्स पर काम करती है। कंपनी सड़क निर्माण, पुल, फ्लाईओवर और दूसरी सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं तैयार करती है। इसके अलावा, कंपनी अब इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (ITI) के संचालन और मैनेजमेंट जैसे प्रोजेक्ट्स में भी कदम बढ़ा रही है।

L&T अपना डेटा सेंटर और क्लाउड बिजनेस ट्रांसफर करेगी, ₹1400 करोड़ में समझौता हुआ

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।