Ceigall India Share Price: गुजरात-महाराष्ट्र में ₹609 करोड़ का मिला REC पावर प्रोजेक्ट, शेयर 4% चढ़ा

Ceigall India Share Price: इंफ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्रीज कंपनी Ceigall India के शेयर 26 अगस्त को एनएसई पर 4% से ज्यादा की छलांग लगाते नजर आए। दरअसल, REC पावर डेवलपमेंट एंड कंसल्टेंसी (RECPDCL) की ओर से दिए गए एक बड़े इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी (L-1) बनी है ।

सिविल इंजीनियरिंग कंपनी ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के लिए 35 साल की अवधि तक सालाना ट्रांसमिशन चार्ज ₹6,086.70 मिलियन (यानी ₹608.67 करोड़) होगा।Ceigall India के शेयरों में लगातार चार दिनों से बढ़त देखी जा रही है और इस दौरान इनमें लगभग 9% की बढ़ोतरी हुई है।

टैरिफ-आधारित ग्लोबल कॉम्पिटिटिव बिडिंग और ई-रिवर्स ऑक्शन के ज़रिए मिले इस प्रोजेक्ट में लकाडिया फेज़-II (7.5 GW), जाम खंभालिया फेज़-II (5.5 GW) और जामनगर फेज़-I (1 GW) से बिजली पहुंचाने (इवैक्यूएशन) के लिए एक कॉमन ट्रांसमिशन सिस्टम बनाना शामिल है।

फाइलिंग के अनुसार, इसके दायरे में 765/400 kV का एयर-इंसुलेटेड सबस्टेशन (AIS) और गुजरात व महाराष्ट्र में लगभग 300 km लंबी ट्रांसमिशन लाइनें बनाना शामिल है।

प्रोजेक्ट को पूरा करने की अवधि 36 महीने है, जबकि ऑपरेशनल अवधि तय कमीशनिंग तारीख से 35 साल होगी। यह प्रोजेक्ट RECPDCL (एक घरेलू कंपनी) ने टैरिफ-आधारित कॉम्पिटिटिव बिडिंग फ्रेमवर्क के तहत ट्रांसमिशन सर्विस प्रोवाइडर चुनने की प्रक्रिया के हिस्से के तौर पर दिया था।

कंपनी ने कहा कि यह कॉन्ट्रैक्ट ‘रिलेटेड-पार्टी ट्रांज़ैक्शन’ (आपसी हितों से जुड़े लेन-देन) के दायरे में नहीं आता है और न तो प्रमोटर, न ही प्रमोटर ग्रुप और न ही ग्रुप की कंपनियों का प्रोजेक्ट देने वाली कंपनी में कोई हित है।

इस ट्रांसमिशन सिस्टम का मकसद पहचाने गए बिजली उत्पादन क्षेत्रों से बिजली पहुंचाने में मदद करना और इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करना है।

बुधवार को Ceigall India के शेयर इंट्राडे में 6.5% तक बढ़कर ₹345.35 पर पहुंच गए। दोपहर 2.14 बजे तक स्टॉक लगभग 5% की बढ़त के साथ ₹340.75 पर ट्रेड कर रहा था। पिछले महीने इसमें 0.74% की बढ़त हुई है और इस साल अब तक यह लगभग 25% ऊपर है।

सीगल इंडिया को फ्रंटियर हाईवे का ऑर्डर मिला

25 अगस्त, 2026 की कंपनी एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, सीगल इंडिया को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) से अरुणाचल प्रदेश में फ्रंटियर हाईवे के एक हिस्से के लिए ₹704.70 करोड़ का सड़क निर्माण ऑर्डर मिला है। इस कॉन्ट्रैक्ट की कीमत में GST शामिल नहीं है।

यह प्रोजेक्ट सुशी इंफ्रा एंड माइनिंग के साथ एक जॉइंट वेंचर के ज़रिए पूरा किया जाएगा, जिसमें सीगल इंडिया की 74% हिस्सेदारी होगी, जबकि सुशी इंफ्रा के पास बाकी 26% हिस्सेदारी होगी। इस कॉन्ट्रैक्ट में NH-913 के लाडा-सारली सेक्शन के 82.4 किलोमीटर लंबे हिस्से (km 85.60 से km 168.00 तक) का निर्माण इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) आधार पर किया जाएगा।

Advait Energy Share Price: मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी से मिला ऑर्डर, शेयर को लगे पंख, 8% उछला

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

महोबा में हाईवे जाम कर रहे Gen-अल्फा के बीच पहुंचीं DM, जमीन पर बैठकर सुनी समस्याएं; दिया जल्द समाधान का भरोसा

महोबा में हाईवे जाम कर रहे Gen-अल्फा के बीच पहुंचीं DM, जमीन पर बैठकर सुनी समस्याएं; दिया जल्द समाधान का भरोसा

gen alpha protest

उत्तर प्रदेेश में महोबा के रैपुरा कला गांव में सड़क की बदहाली को लेकर जेन अल्फा की उठी आवाज अब प्रशासन के कानों तक पहुंच चुकी है। जिस सड़क निर्माण के लिए गांव के छात्रों ने झांसी-मिर्जापुर हाईवे यानी NH-35 तक जाम लगा दिया था। जेन अल्फा के विरोध से यातायात प्रभावित हुआ, जिसके चलते जिलाधिकारी गजल भारद्वाज आज गांव में खुद छात्रों के बीच पहुंच गई। जब डीएम साहिबा छात्रों से मिली तो वातावरण बदला हुआ नजर आया, इस बार न तो नारों की गूंज थी और न पुलिस से टकराव। 

 

महोबा डीएम ने बच्चों को अपनत्व दिखाते हुए उनके मध्य बैठ गई, उनकी बातें सुनीं और उन्हें भरोसा दिलाया कि उनकी सड़क की समस्या का जल्दी ही समाधान कराया जाएगा। गौरतलब है कि  रैपुरा कला गांव की क्षतिग्रस्त सड़क लंबे समय से ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। सड़क की हालत खराब होने के कारण छात्रों को विद्यालय आने जाने में परेशानी होती है।

गांव की उपेक्षा से नाराज जेन अल्फा ने बीते रोज अपनी आवाज प्रशासन तक पहुंचाने के लिए झांसी-मिर्जापुर हाईवे को जाम कर दिया था। हाईवे पर यातायात रुकने के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच जमकर विवाद भी हुआ। पुलिस और छात्रों के साथ विवाद का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ। विपक्ष ने इसे लेकर राजनीतिक मुद्दा बनाने लगा है। 

 

इसी कड़ी में महोबा की डीएम गजल भारद्वाज ने मामले की गंभीरता को समझते हुए गांव पहुंचीं। उन्होंने बच्चों और उनके अभिभावकों के साथ बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं। बच्चों ने सड़क की बदहाली से होने वाली परेशानियां डीएम के सामने रखीं। डीएम ने उनकी बातों को ध्यान से सुना और भरोसा दिलाया कि क्षतिग्रस्त सड़क के निर्माण के लिए जल्द कार्रवाई की जाएगी।

 

छात्रों से इस मुलाकात में सिर्फ सड़क की बात नहीं हुई। डीएम ने बच्चों को अपने जीवन से जुड़ा एक अनुभव भी सुनाया।

 

उन्होंने बताया कि एक बार वह अपने पिता को लेकर एंबुलेंस से जा रही थीं। रास्ते में हाईवे पर जाम लगा था और एंबुलेंस भी उसी जाम में फंस गई। उस घटना को याद करते हुए उन्होंने बच्चों को समझाया कि अपनी समस्या के लिए आवाज उठाना जरूरी है, लेकिन ऐसा रास्ता नहीं अपनाना चाहिए जिससे किसी दूसरे की जिंदगी खतरे में पड़ जाए या किसी जरूरतमंद को परेशानी उठानी पड़े।

 

डीएम ने छात्रों से कहा कि उनकी समस्या प्रशासन की जिम्मेदारी है और अपनी बात रखने के लिए हाईवे जाम करना जरूरी नहीं। उन्होंने बच्चों को भरोसा दिलाया कि उनकी मांग को गंभीरता से लिया जा रहा है और सड़क निर्माण के लिए जल्द कदम उठाए जाएंगे।

 

डीएम और बच्चों के बीच यह मुलाकात इसलिए भी खास रही क्योंकि एक दिन पहले जहां सड़क के मुद्दे पर बच्चे पुलिस के सामने खड़े थे, वहीं अगले दिन जिले की सबसे बड़ी प्रशासनिक अधिकारी उन्हीं बच्चों के बीच बैठकर उनकी बात सुन रही थीं।

 

इस दौरान पुलिस अधीक्षक समेत जिले के तमाम प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। अब ग्रामीणों और बच्चों को इंतजार उस भरोसे के पूरा होने का है, जो उन्हें डीएम ने दिया है।

 

हंगामे से शुरू हुई कहानी अब उम्मीद पर आकर ठहरी है। बच्चों ने सड़क के लिए आवाज उठाई है, अब उन्हें इंतजार है कि रैपुरा गांव की बदहाल सड़क कब राहगीरों के पक्की सड़क में बदलती दिखाई देगी।

Stock in Focus: इंफ्रा कंपनी को राजस्थान सरकार से ₹241 करोड़ का प्रोजेक्ट मिला, 10 साल तक ITI को ऑपरेट करेगी

Stock in Focus: इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी HG Infra Engineering को राजस्थान सरकार से नया प्रोजेक्ट मिला है। कंपनी को इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (ITI), भिवाड़ी क्लस्टर के संचालन और मैनेजमेंट के लिए लेटर ऑफ अवॉर्ड (LOA) मिला है। यह प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री PM-SETU योजना के तहत दिया गया है।

प्रोजेक्ट में कंपनी की हिस्सेदारी ₹17.1 करोड़

इस प्रोजेक्ट में HG Infra Anchor Industry Partner की भूमिका निभाएगी। कंपनी के हिस्से की वैल्यू करीब 17.1 करोड़ रुपये है। यह अनुमानित 241 करोड़ रुपये के कुल प्रोजेक्ट कॉस्ट का करीब 7% है।

प्रोजेक्ट को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर चलाया जाएगा। HG Infra को ITI के संचालन और मैनेजमेंट की जिम्मेदारी 10 साल तक निभानी होगी। कंपनी को LOA 11 अगस्त 2026 को मिला है।

पहले के दो महाराष्ट्र प्रोजेक्ट ऑर्डर बुक से बाहर

HG Infra ने मई 2026 में महाराष्ट्र के दो प्रोजेक्ट्स को अपनी ऑर्डर बुक में शामिल नहीं करने का फैसला किया था। कंपनी ने इसके पीछे प्रोजेक्ट के समय पर शुरू होने को लेकर अनिश्चितता बताई थी।

ये दोनों प्रोजेक्ट नागपुर-चंद्रापुर एक्सेस सुपर कम्युनिकेशन एक्सप्रेसवे से जुड़े थे। कंपनी को मई 2024 में दोनों पैकेज के लिए L1 bidder घोषित किया गया था। HG Infra के मुताबिक, इन दोनों प्रोजेक्ट्स के लिए जमा की गई बैंक गारंटी MSRDC ने वापस कर दी। हालांकि, इसकी कोई वजह नहीं बताई गई।

HG Infra के शेयरों का हाल

मंगलवार को HG Infra Engineering का शेयर 0.97%% गिरकर 548 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 21.29% गिरा है। वहीं, 1 साल में इसने करीब 45% का नेगेटिव रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 3.58 हजार करोड़ रुपये है।

HG Infra का बिजनेस क्या है

HG Infra Engineering इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी है, जो मुख्य तौर पर सड़क, हाईवे, एक्सप्रेसवे और रेलवे से जुड़े EPC प्रोजेक्ट्स पर काम करती है। कंपनी सड़क निर्माण, पुल, फ्लाईओवर और दूसरी सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं तैयार करती है। इसके अलावा, कंपनी अब इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (ITI) के संचालन और मैनेजमेंट जैसे प्रोजेक्ट्स में भी कदम बढ़ा रही है।

L&T अपना डेटा सेंटर और क्लाउड बिजनेस ट्रांसफर करेगी, ₹1400 करोड़ में समझौता हुआ

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Agra : बीच सड़क इतना बड़ा गड्ढा, सीढ़ी डालकर गहराई नापने उतरे सपा नेता, वीडियो वायरल

आगरा में हुई तेज बारिश के बाद सड़क धंसने से एक बड़ा गड्ढा बन गया। इस गड्ढे में समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता नितिन कोहली लकड़ी की सीढ़ी के सहारे नीचे उतर गए। इस दौरान वहां मौजूद लोगों की भीड़ जुट गई और पूरा घटनाक्रम चर्चा का विषय बन गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। नितिन कोहली ने इस मौके का इस्तेमाल करते हुए खुद को ‘स्मार्ट सिटी’ कहे जाने वाले आगरा में विकास को लेकर सरकार के दावों पर सवाल उठाए।

यह घटना आगरा के कमला नगर क्षेत्र की कर्मयोगी कॉलोनी की है। लगातार हुई भारी बारिश के बाद सड़क अचानक धंस गई, जिससे गहरा गड्ढा बन गया। इस घटना के बाद सड़क निर्माण की गुणवत्ता और प्रशासन की तैयारियों पर भी सवाल उठने लगे हैं।

बीच सड़क इतना बड़ा गड्ढा

सपा नेता नितिन कोहली का यह अनोखा विरोध प्रदर्शन सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वायरल वीडियो में वह लकड़ी की सीढ़ी के सहारे गड्ढे में उतरते नजर आ रहे हैं, जबकि उनके समर्थक सीढ़ी को पकड़े हुए हैं। गड्ढे के अंदर खड़े होकर कोहली ने बीजेपी सरकार के विकास के दावों पर सवाल उठाए और आगरा की सड़कों की हालत पर तंज कसा। वीडियो में नितिन कोहली कहते सुनाई दे रहे हैं, “हम एक बार फिर विकास की तलाश में निकले हैं। पूरे आगरा की यही हालत हो गई है। मैं विधायक से पूछना चाहता हूं कि क्या यही विकास है? जहां भी सड़क बनती है, वहां कुछ ही समय बाद इतने गहरे गड्ढे हो जाते हैं कि लगता है जैसे पाताल लोक में नया शहर बसाया जा रहा हो। आगरा को स्मार्ट सिटी कहने के बजाय अब ऐसा लग रहा है कि पाताल लोक में नया स्मार्ट सिटी बन रहा है।”

सीढ़ी डालकर गहराई नापने उतरे सपा नेता

गनीमत रही कि इस हादसे में कोई घायल नहीं हुआ, क्योंकि जिस समय सड़क धंसी उस वक्त वहां से कोई वाहन नहीं गुजर रहा था। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही अधिकारी मौके पर पहुंचे, हालात का जायजा लिया और सुरक्षा के लिए धंसी हुई जगह के आसपास बैरिकेडिंग कर दी। इसके बाद सड़क की मरम्मत का काम भी शुरू कर दिया गया। यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब उत्तर प्रदेश में सड़कों और अन्य सार्वजनिक निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे को लेकर भी विवाद हुआ था। उद्घाटन के कुछ ही हफ्तों बाद सड़क पर दरारें पड़ने और कुछ जगहों पर धंसने की खबरें सामने आई थीं, जिसके बाद निर्माण की गुणवत्ता को लेकर कई सवाल खड़े हुए थे।

कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे करीब 4,200 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। लेकिन ट्रैफिक के लिए खोले जाने के एक महीने के भीतर ही एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में दरारें, सड़क धंसने और सतह खराब होने की शिकायतें सामने आने लगीं। इन शिकायतों के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने सख्त कदम उठाए। प्राधिकरण ने परियोजना से जुड़े तीन इंजीनियरों को हटा दिया और निर्माण कंपनी पीएनसी इंफ्राटेक के खिलाफ भी कार्रवाई की। साथ ही मरम्मत का काम पूरा होने तक पूरे एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली भी रोक दी गई।

मुफ्त योजनाओं से दूरी, विकास पर जोर! चुनाव से पहले योगी सरकार ने खोला 59 हजार करोड़ का खजाना

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। ऐसे में योगी आदित्यनाथ सरकार ने 59,019.54 करोड़ रुपये का सप्लीमेंट्री बजट पेश किया है। इस बजट में योगी सरकार ने नई योजनाओं की घोषणा करने के बजाय सड़क, उद्योग, बिजली और गांवों के विकास पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया है। मंगलवार को विधानसभा में पेश किए गए इस बजट में अतिरिक्त राशि का बड़ा हिस्सा सड़क निर्माण, ग्रामीण संपर्क मार्ग, औद्योगिक ढांचे और बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के लिए रखा गया है। इससे साफ संकेत मिलता है कि सरकार चुनाव से पहले विकास कार्यों को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में जनता के सामने रखना चाहती है।

 महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगों का खास ख्याल 

यूपी सरकार द्वारा पेश किए गए इस बजट में महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगों के लिए पहले से चल रही कई योजनाओं के लिए अतिरिक्त धन का प्रावधान किया गया है। लेकिन इस बजट में बुजुर्गों, विधवाओं और निराश्रित लोगों की पेंशन बढ़ाने का कोई ऐलान नहीं किया गया है। इसके अलावा, किसी नई नकद सहायता योजना या लड़कियों को मुफ्त स्कूटी देने जैसी नई योजना की भी घोषणा नहीं की गई है।

ग्रामीण क्षेत्रों को भी मिलेगा फायदा

इस सप्लीमेंट्री बजट का सबसे बड़ा फायदा ग्रामीण विकास क्षेत्र को मिलेगा। सरकार ने गांवों के विकास से जुड़ी योजनाओं के लिए 16,432.46 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया है। यह पूरे सप्लीमेंट्री बजट का सबसे बड़ा हिस्सा है। इसके अलावा, सड़क और परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए 15,750.01 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इसका उद्देश्य गांवों को बेहतर सड़क संपर्क देना और दूर-दराज के इलाकों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।

कनेक्टिविटी पर ज्यादा जोर

सरकार का यह बजट साफ दिखाता है कि वह विकास के लिए सड़क, एक्सप्रेसवे, उद्योग और बेहतर कनेक्टिविटी पर लगातार जोर दे रही है। नए एक्सप्रेसवे, औद्योगिक गलियारों (इंडस्ट्रियल कॉरिडोर) और लॉजिस्टिक्स से जुड़े ढांचे के विकास के लिए भी अच्छी-खासी रकम रखी गई है। सरकार को उम्मीद है कि इससे राज्य में निवेश बढ़ेगा, उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

एयरपोर्ट पर भी फोकस 

सरकार ने कई बड़े विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त बजट का प्रावधान किया है। इनमें जेवर एयरपोर्ट को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाला नया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, हरदोई और फर्रुखाबाद के रास्ते आगरा-लखनऊ और गंगा एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाली सड़क, गंगा एक्सप्रेसवे का हरिद्वार तक विस्तार और सोनभद्र तक विंध्य एक्सप्रेसवे का निर्माण शामिल है। इसके अलावा, एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक क्षेत्रों के विकास पर भी जोर दिया जाएगा। उद्योग क्षेत्र को भी इस बजट में अच्छी-खासी राशि दी गई है। इसके लिए 2,220.89 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है। विदेशी निवेश (एफडीआई) और बड़ी कंपनियों को उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए प्रोत्साहित करने की नीति के तहत 1,302.61 करोड़ रुपये दिए गए हैं।

वहीं, अटल औद्योगिक आधारभूत ढांचा मिशन के लिए 1,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री औद्योगिक क्षेत्र विस्तार योजना के तहत नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास और विस्तार के लिए 3,000 करोड़ रुपये का ऋण भी उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा, प्रस्तावित आईटी सदन, स्टेट डेटा सेंटर 2.0 और केंद्र सरकार की ‘भव्य’ (BHAVYA) योजना के तहत सात औद्योगिक आधारभूत ढांचा परियोजनाओं के लिए भी अतिरिक्त धन दिया गया है।

इस सप्लीमेंट्री बजट में बिजली क्षेत्र पर भी खास ध्यान दिया गया है। सरकार ने इसके लिए 7,358 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया है। इसमें से 6,958 करोड़ रुपये संशोधित बिजली वितरण योजना के तहत बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के घाटे को पूरा करने के लिए दिए जाएंगे। इसके अलावा, प्रयागराज के मेजा-द्वितीय ताप बिजली परियोजना (मेजा-II थर्मल पावर प्रोजेक्ट) के लिए 400 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार का उद्देश्य बिजली व्यवस्था को और मजबूत बनाना, लोगों को बेहतर बिजली आपूर्ति देना और बिजली कंपनियों की आर्थिक स्थिति में सुधार करना है। हालांकि, चुनावी साल में पेश होने वाले कई बजटों की तरह इस बार कोई बड़ी लोकलुभावन घोषणा नहीं की गई है। इस अनुपूरक बजट में नई मुफ्त योजनाओं या बड़े कल्याणकारी ऐलानों के बजाय विकास कार्यों और आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने पर ज्यादा जोर दिया गया है।

यूपी के 59,020 करोड़ रुपये के सप्लीमेंट्री बजट की बड़ी बातें

  • 59,019.54 करोड़ रुपये का सप्लीमेंट्री बजट: योगी आदित्यनाथ सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए 59,019.54 करोड़ रुपये का सप्लीमेंट्री बजट पेश किया है। इसमें सड़क, बिजली और अन्य विकास कार्यों पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया है।
  • गांवों के विकास के लिए सबसे ज्यादा राशि: ग्रामीण विकास की योजनाओं के लिए 16,432.46 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है। इससे गांवों में सड़क, बुनियादी सुविधाओं और विकास कार्यों को गति मिलेगी।
  • सड़क और परिवहन पर बड़ा निवेश: सड़क, पुल और परिवहन व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए 15,750.01 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इस राशि से नए एक्सप्रेसवे और औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ने वाले मार्ग विकसित किए जाएंगे।
  • कई नए एक्सप्रेसवे परियोजनाओं को मंजूरी: बजट में विंध्य एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे का हरिद्वार तक विस्तार, जेवर एयरपोर्ट को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाली सड़क, आगरा-लखनऊ और गंगा एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाली परियोजना तथा एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के लिए धन रखा गया है।
  • उद्योग क्षेत्र को 2,220.89 करोड़ रुपये: उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए 2,220.89 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है। इससे विदेशी निवेश, बड़े उद्योगों, औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार, आईटी सदन, स्टेट डेटा सेंटर 2.0 और अन्य औद्योगिक परियोजनाओं को मदद मिलेगी।
  • बिजली क्षेत्र के लिए 7,358 करोड़ रुपये: बिजली व्यवस्था मजबूत करने के लिए 7,358 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इसमें बिजली वितरण कंपनियों के घाटे को पूरा करने के लिए 6,958 करोड़ रुपये और प्रयागराज की मेजा-द्वितीय ताप बिजली परियोजना के लिए 400 करोड़ रुपये शामिल हैं।
  • पुरानी योजनाओं के लिए अतिरिक्त धन: सरकार ने महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगों से जुड़ी पहले से चल रही योजनाओं के लिए अतिरिक्त राशि दी है। हालांकि, पेंशन या अन्य लाभ की राशि बढ़ाने का कोई ऐलान नहीं किया गया है।
  • किसानों और बुनकरों को भी राहत: कृषि क्षेत्र के लिए 254.15 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे आलू भंडारण पर सब्सिडी, मूल्य स्थिरीकरण कोष और बागवानी को बढ़ावा मिलेगा। वहीं, हथकरघा और बुनकरों के लिए 140.03 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जिनका उपयोग बुनकर कल्याण योजनाओं और संत कबीर टेक्सटाइल एवं परिधान पार्क के विकास में किया जाएगा।

योगी सरकार ने पेश किया 59019.54 करोड़ का अनुपूरक बजट

Yogi Government Supplementary Budget 2026-27: उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹59,019.54 करोड़ का अनुपूरक बजट सदन में प्रस्तुत किया। अनुपूरक मांगों के अनुरूप प्रस्तावित अनुपूरक बजट प्रस्तुत करते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित अनुपूरक बजट का कुल आकार ₹59,019.54 करोड़ है। प्रस्तावित अनुपूरक बजट का आकार इस वर्ष के मूल बजट का 6.47 प्रतिशत है। इसमें राजस्व लेखे का व्यय ₹17,399.50 करोड़ तथा पूंजी लेखे का व्यय ₹41,620.04 करोड़ रखा गया है।

 

उन्होंने कहा कि पूंजीगत व्यय पर विशेष बल देने का उद्देश्य प्रदेश में सड़क, ऊर्जा, उद्योग, चिकित्सा, ग्रामीण विकास तथा अन्य आधारभूत संरचनाओं का तेजी से विस्तार करना है, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती मिले। इस अनुपूरक बजट के माध्यम से योगी सरकार का उद्देश्य प्रदेश में चल रही विकास परियोजनाओं को गति देना, नई जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना तथा आधारभूत संरचना को और अधिक मजबूत बनाना है। उन्होंने बताया कि इस प्रस्तावित अनुपूरक बजट में नई मांगों के लिए ₹7,854.25 करोड़ की व्यवस्था की गई है। इससे सरकार नई विकास परियोजनाओं के साथ-साथ पहले से चल रही योजनाओं को भी और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा सकेगी। 

उद्योग और निवेश को सबसे बड़ी प्राथमिकता

वित्त मंत्री ने बताया कि अनुपूरक बजट में भारी एवं मध्यम उद्योग विभाग के लिए ₹22,107.88 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके माध्यम से औद्योगिक निवेश, रोजगार सृजन और प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को नई गति प्रदान की जा सकेगी। 

गांवों के विकास पर विशेष फोकस

सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को भी बड़ी प्राथमिकता दी है। इसके लिए ग्राम विकास विभाग के लिए ₹17,942.73 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस राशि का उपयोग ग्रामीण अधोसंरचना, पंचायत विकास, ग्रामीण आजीविका, मूलभूत सुविधाओं तथा गांवों में विकास कार्यों को गति देने में किया जाएगा।

ऊर्जा क्षेत्र को मिलेगा बड़ा निवेश

प्रदेश में बिजली व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने तथा ऊर्जा अवसंरचना के विस्तार के लिए ऊर्जा विभाग को ₹7,422.27 करोड़ की अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध कराई गई है। सरकार का उद्देश्य प्रदेश में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ औद्योगिक एवं घरेलू उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना है।

स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी मजबूती

अनुपूरक बजट में चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के लिए ₹2,000.25 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस राशि से अस्पतालों की सुविधाओं का विस्तार, चिकित्सा सेवाओं का सुदृढ़ीकरण तथा स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में सहायता मिलेगी।

समाज कल्याण और महिला सशक्तीकरण पर भी जोर

सरकार ने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को और प्रभावी बनाने के लिए समाज कल्याण विभाग को ₹1,655 करोड़ आवंटित किए हैं। वहीं महिला कल्याण विभाग के लिए ₹1,094.40 करोड़ की व्यवस्था की गई है, जिससे महिलाओं के सशक्तीकरण, सुरक्षा और कल्याण से जुड़ी योजनाओं को मजबूती मिलेगी।

सड़क और आधारभूत ढांचे का होगा विस्तार

अनुपूरक बजट में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के लिए ₹700.01 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस राशि का उपयोग सड़क निर्माण, पुलों तथा अन्य आधारभूत ढांचागत परियोजनाओं को गति देने में किया जाएगा।

वित्तीय अनुशासन पर सरकार का जोर

वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने सदन को भरोसा दिलाया कि प्रदेश की वित्तीय स्थिति पूरी तरह मजबूत है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश का राजकोषीय घाटा (फिसकल डेफिसिट) निर्धारित सीमा के भीतर है, जो सरकार के वित्तीय अनुशासन और बेहतर आर्थिक प्रबंधन का प्रमाण है। सरकार विकास कार्यों को गति देने के साथ-साथ वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

₹9.71 लाख करोड़ से अधिक हुआ राज्य का कुल बजट 

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए उत्तर प्रदेश सरकार का मूल बजट ₹9,12,696.35 करोड़ था, जिसमें राजस्व व्यय ₹6,64,470.55 करोड़ तथा पूंजीगत व्यय ₹2,48,225.80 करोड़ निर्धारित किया गया था। अब ₹59,019.54 करोड़ के अनुपूरक बजट को शामिल किए जाने के बाद राज्य का कुल बजट बढ़कर ₹9,71,715.89 करोड़ हो जाएगा। इसमें राजस्व व्यय बढ़कर ₹6,81,870.05 करोड़ तथा पूंजीगत व्यय ₹2,89,845.84 करोड़ हो जाएगा। इससे स्पष्ट है कि सरकार ने अतिरिक्त संसाधनों का बड़ा हिस्सा विकास परियोजनाओं, आधारभूत संरचना और जनकल्याणकारी योजनाओं के विस्तार के लिए पूंजीगत निवेश पर केंद्रित किया है।

सेक्टरवार अनुपूरक बजट का बंटवारा

वित्तीय वर्ष 2026-27 के अनुपूरक बजट में सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए धनराशि का प्रावधान किया है। कुल ₹59,019.14 करोड़ की अनुपूरक मांग में सबसे अधिक ₹45,568.63 करोड़ (लगभग 77%) आर्थिक सेवाओं के लिए प्रस्तावित किए गए हैं, जिससे स्पष्ट है कि सरकार का प्रमुख फोकस आधारभूत संरचना, उद्योग, ऊर्जा, कृषि और विकास कार्यों पर है। इसके अलावा सामाजिक सेवाओं के लिए ₹9,707.74 करोड़ (लगभग 16%), सामान्य सेवाओं के लिए ₹633.19 करोड़ (लगभग 1%) तथा कर्ज एवं उधार संबंधी दायित्वों के लिए ₹3,110.02 करोड़ (लगभग 6%) की व्यवस्था की गई है। (फाइल फोटो)

UP के मजदूरों को बड़ी राहत, अब हर दिन मिलेंगे कम से कम ₹300, 125 दिन रोजगार की भी गारंटी

उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश की ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में 1 जुलाई 2026 से बड़ा बदलाव लागू हो गया है। केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी-जी राम जी) योजना को आधिकारिक तौर पर लागू कर दिया है। इस नई योजना के तहत अब प्रदेश के पात्र ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिनों की रोजगार गारंटी मिलेगी।

इस योजना के समुचित कार्यान्वयन के लिए योगी सरकार ने कमर कस ली है। करीब 20 वर्षों तक ग्रामीण रोजगार की रीढ़ रहे मनरेगा की जगह अब यह नया ढांचा ले रहा है। यह कानून ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा, रोजगार बढ़ाएगा और गांवों में स्थायी विकास कार्यों को गति देगा।

 

यूपी के ग्रामीण परिवारों को होगा फायदा

 

उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े ग्रामीण आबादी वाले राज्यों में शामिल है, जहां लाखों परिवार रोजगार के लिए मनरेगा पर निर्भर रहे हैं। नई योजना लागू होने के बाद यूपी के ग्रामीण मजदूरों को कई बड़े लाभ मिलने वाले हैं। अब प्रदेश के पात्र ग्रामीण परिवारों को सालाना 100 दिनों के बजाय 125 दिनों की रोजगार गारंटी मिलेगी। साथ ही नई व्यवस्था के तहत अब राज्य में मजदूरी 300 रुपये प्रतिदिन से कम नहीं होगी। इससे राज्य के लाखों ग्रामीण मजदूरों को सीधा फायदा मिलेगा। राष्ट्रीय औसत मजदूरी 298.8 रुपये प्रतिदिन से बढ़कर 327.4 रुपये प्रतिदिन हो गई है। योगी सरकार ने बढ़ी हुई मजदूरी देने के लिए सारे प्रबंध पहले से कर रखे हैं। 

 

वैज्ञानिक तरीके से विकास योजनाएं तैयार की जाएंगी 

 

मनरेगा की तुलना में सबसे बड़ा बदलाव जियोस्पेशियल प्लानिंग को लेकर देखा जा रहा है। पहले जहां स्थानीय मांग के आधार पर कार्यों को मंजूरी दी जाती थी, वहीं अब गांवों में सैटेलाइट डेटा, भूमि रिकॉर्ड और बुनियादी ढांचे की जरूरतों के आधार पर वैज्ञानिक तरीके से विकास योजनाएं तैयार की जाएंगी। इन्हीं योजनाओं के अनुसार तय होगा कि सरकारी धन कहां और किस कार्य पर खर्च किया जाएगा। वहीं अब पहले की तरह केवल मांग के आधार पर रोजगार नहीं मिलेगा। प्रदेश के गांवों में पहले से तैयार विकास योजनाओं के आधार पर काम तय किए जाएंगे।

 

निगरानी जीआईएस मैपिंग, सैटेलाइट इमेजरी और डिजिटल प्लानिंग टूल्स के जरिए होगी 

 

अब यूपी के गांवों में विकास कार्यों की योजना और निगरानी जीआईएस मैपिंग, सैटेलाइट इमेजरी और डिजिटल प्लानिंग टूल्स के जरिए होगी। इससे काम की गुणवत्ता और पारदर्शिता बढ़ाने का दावा किया जा रहा है। वीबी-जी राम जी एक्ट के तहत उत्तर प्रदेश में ऐसे कार्यों को प्राथमिकता मिलेगी जो लंबे समय तक ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करें। इसमें सड़क निर्माण, सिंचाई व्यवस्था, जल संरक्षण परियोजनाएं और स्थायी सामुदायिक इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल है। अब विभिन्न ग्रामीण विकास योजनाओं को आपस में जोड़कर परियोजनाओं को लागू किया जा सकेगा। इससे कार्यों के दोहराव को रोका जा सकेगा, संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और विकास कार्यों की दक्षता में सुधार आएगा।

खेत में उतरे-बोया धान, किसानों से इस अंदाज में सीएम डॉ. मोहन ने की ‘दिल की बात’

भोपाल। 'खेत में उतरे, धान बोया, हाथ में लेकर खाना खाया और किसानों से आत्मीय संवाद किया,' मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 1 जुलाई को सिवनी जिले में अनोखे अंदाज में नजर आए। उन्होंने जनता को एक बार फिर बताया कि वे भी आम इंसान ही हैं। वे लगातार जनकल्याण का सोचते हैं। उनकी सादगी किसानों और आम लोगों को भा गई। लोग उनसे बातचीत करके उत्साहित नजर आए।

सीएम डॉ. मोहन ने बुधवार को सिवनी के लिए खजाना खोल दिया। उन्होंने सिवनी में धान महोत्सव में शिरकत की, कोदो कुटकी बोनस का वितरण किया और विकास कार्यों की सौगात दी। सीएम डॉ. यादव ने सिवनी में 349.33 करोड़ रुपए लागत के 586 विकास कार्यों का लोकार्पण और 144.8 करोड़ के भूमि-पूजन किए। उन्होंने यहां आयोजित कार्यक्रम में प्रदर्शनी का अवलोकन और कन्या पूजन किया। इसके अलावा सीएम यादव ने बालाघाट से सिवनी फोर लेन सड़क निर्माण, सिवनी के चमारा विकासखंड में शासकीय महाविद्यालय और स्टेडियम सहित अन्य विकास कार्यों की घोषणा की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश की धान की फसल को जीआई टैग मिला है। मां लक्षमी की कृपा से रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत आज प्रदेश के 3941 किसानों को 1000 रुपए मान से कोदो कुटकी बोनस के रूप में 282.99 करोड़ राशि दी गई है। राज्य सरकार श्रीअन्न उत्पादक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ-साथ बोनस भी दे रही है। प्रदेश में पहली बार शासकीय स्तर पर कोदो कुटकी खरीदने के लिए अभियान शुरू हुआ है। इसके साथ ही आज मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल) 2.0 योजना के अंतर्गत पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से प्रदेश के 16,754 श्रमिक परिवारों को 365 करोड़ की अनुग्रह सहायता राशि सिंगल क्लिक से अंतरित की है। 

 

गरीबों का ध्यान रख रही राज्य सरकार-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि विपक्ष की सरकारों ने गरीब-जरूरतमंदों को कभी संबल योजना का नाम नहीं दिया। संबल योजना में सरकार दुर्घटना में मृत्यु पर 4 लाख, सामान्य मृत्यु पर 2 लाख और अपंगता आने पर 1 लाख रुपए की सहायता राशि प्रदान करती है। श्रमिक परिवारों को आयुष्मान भारत योजना में 5 लाख रुपए तक के फ्री इलाज की सुविधा भी दी जा रही है। राज्य सरकार हर वर्गों के गरीब, वंचित और आखिरी पंक्ति में बैठे लोगों के कल्याण के लिए कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना से वंचित रहे सभी पात्र लोगों को आवास देने के लिए सर्वे कराया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि आज सिवनी जिले के समग्र विकास के लिए 349.33  करोड़ रुपए लागत के 586 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं 144.8 करोड़ के 43 कार्यों के भूमि-पूजन किए गए हैं। उन्होंने कहा कि पहले कोदो-कुटकी, ज्वार, बाजरा, मक्का को गरीबों की फसल कहा जाता था। प्रधानमंत्री मोदी ने श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना शुरू कर देश-दुनिया में इसका मान बढ़ाया। श्रीअन्न में मौजूद तत्व सबसे जल्दी पचता है। राज्य सरकार ने पिछले साल से श्रीअन्न खरीदने की शुरुआत की है। इस वर्ष मानसून पर अलनीनो का प्रभाव नजर आ रहा है। अगर बारिश कम होती है तो किसानों को तैयार रहना चाहिए कि वे कोदो कुटकी सहित सभी फसलों को तैयार कर लें। 

 

किसानों को कई योजनाओं का लाभ दे रही सरकार- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज प्रदेश के 3941 किसानों को 2829 मीट्रिक टन कोदो कुटकी के लिए 1000 रुपए मान से 2 हजार 83 लाख रुपए बोनस राशि दी गई है। राज्य में कोटो कुटकी के ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग के लिए भी काम जारी हैं। डिंडोरी की सीताही कुटकी, नागदमन कुटकी, बैगनी अरहर को जीआई टैग मिला है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसान कल्याण वर्ष में अन्नदाता को अनेक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दे रही है। सोयाबीन उत्पादक किसानों को भी भावांतर योजना के माध्यम से लाभ दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में प्रदेश में धान की फसल के लिए भी भावांतर योजना लागू की जाएगी। राज्य सरकार धान उत्पादक किसानों को एमएसपी और बाजार मूल्य के अंतर का भुगतान करेगी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार खेत से लेकर बाजार तक हर क्षेत्र में मूल्य संवर्धन पर काम कर रही है।

यूरोप में 40°C पर पिघलने लगीं सड़कें पर भारत में 45°C+ की गर्मी कैसे झेल जाते हैं हाईवे? Science Explained

अपनी ठंडी और बर्फीली वादियों के लिए मशहूर यूरोप के कई देश इन दिनों भीषण गर्मी और हीटवेव (Heatwave) की मार झेल रहे हैं। स्पेन, जर्मनी, स्विटजरलैंड, पुर्तगाल, डेनमार्क और फ्रांस समेत ज्यादातर देशों में तापमान करीब 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। इस भीषण गर्मी के बीच ब्रिटेन (यूके) के कुछ इलाकों में तेज गर्मी के कारण सड़कें नरम पड़ने और कुछ जगहों पर पिघलने की खबरें सामने आई हैं। इसके बाद लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि जब भारत में गर्मियों के दौरान तापमान अक्सर 45 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर पहुंच जाता है, तब यहां सड़कें इस तरह क्यों नहीं पिघलतीं?

दरअसल, इसकी सबसे बड़ी वजह सड़क निर्माण की गुणवत्ता नहीं, बल्कि स्थानीय मौसम के अनुसार सड़क बनाने की तकनीक है। हर देश में सड़कें वहां के मौसम और तापमान को ध्यान में रखकर तैयार की जाती हैं। इसलिए भारत और ब्रिटेन की सड़कों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और तकनीक अलग-अलग होती है।

क्यों पिघल रही हैं यूरोपीय देशों की सड़कें

ब्रिटेन समेत यूरोप के कई देशों में सड़कें वहां की कड़ाके की ठंड को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं। इन देशों में सर्दियों के दौरान तापमान कई बार शून्य से नीचे चला जाता है और बर्फ बार-बार जमती और पिघलती रहती है। ऐसे मौसम का सामना करने के लिए सड़क निर्माण में ऐसे डामर (अस्फाल्ट) और बिटुमेन का इस्तेमाल किया जाता है, जो ठंड में लचीले बने रहें और सड़क में दरारें न पड़ें।

लेकिन यही सामग्री तेज गर्मी में समस्या बन जाती है। जब तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक पहुंच जाता है, तो बिटुमेन नरम पड़ने लगता है। ऐसे में भारी वाहनों के लगातार गुजरने से सड़क की सतह दब सकती है, उभर सकती है या कुछ जगहों पर पिघली हुई दिखाई देने लगती है। यही वजह है कि इन दिनों यूरोप के कई इलाकों में सड़कों के नरम पड़ने और खराब होने की घटनाएं सामने आ रही हैं।

भारत की सड़कें तेज गर्मी में क्यों नहीं पिघलतीं?

भारत में सड़कें यहां की भीषण गर्मी को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं। देश के कई हिस्सों में गर्मियों के दौरान तापमान 45 डिग्री सेल्सियस या उससे भी अधिक पहुंच जाता है। इसलिए सड़क निर्माण में ऐसी सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है, जो तेज गर्मी को आसानी से सह सके। सड़क बनाने के लिए आमतौर पर वीजी-30 और वीजी-40 ग्रेड का सख्त बिटुमेन और बड़े पत्थरों (एग्रीगेट्स) वाले डामर का उपयोग किया जाता है। ये सामग्री ऊंचे तापमान में भी अपनी मजबूती बनाए रखती है और आसानी से नरम नहीं पड़ती।

यही वजह है कि भीषण गर्मी के बावजूद भारत की सड़कें यूरोप के कई देशों की तुलना में अधिक मजबूत रहती हैं और उनके पिघलने या खराब होने की संभावना काफी कम होती है।

भारत की सड़कें ज्यादा मजबूत क्यों रहती हैं?

भारत में सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाला बिटुमेन ज्यादा गाढ़ा और मजबूत होता है। यही वजह है कि सड़कें तेज गर्मी के साथ-साथ भारी ट्रैफिक का दबाव भी आसानी से सहन कर लेती हैं। इससे सड़कों पर गड्ढे बनने, सतह उखड़ने या सड़क का आकार बिगड़ने जैसी समस्याएं कम होती हैं। इसलिए 45 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तापमान में भी भारत की सड़कें सामान्य रूप से काम करती रहती हैं।

यूरोप और भारत की सड़कों के बीच सबसे बड़ा अंतर यह है कि दोनों जगह सड़कें वहां के मौसम को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं। यूरोप में सड़कें कड़ाके की ठंड और बर्फबारी को झेलने के लिए तैयार की जाती हैं, इसलिए उनमें लचीली सामग्री का इस्तेमाल होता है। वहीं, भारत में सड़कें भीषण गर्मी को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं, इसलिए इनमें ऐसी सामग्री इस्तेमाल की जाती है जो ऊंचे तापमान में भी मजबूत बनी रहती है। इसी कारण यूरोप में असामान्य गर्मी पड़ने पर कुछ जगहों पर सड़कें नरम पड़ जाती हैं, जबकि भारत की सड़कें ऐसे ही, बल्कि इससे भी अधिक तापमान को आसानी से सहन कर लेती हैं।