IDBI Bank की 60% हिस्सेदारी खरीदेगी Fairfax, लेकिन डील का इस शेयर पर भी दिखेगा असर

CSB Bank Share Price: केरलम के थ्रिसूर की प्राइवेट लेंडर सीएसबी बैंक के शेयरों पर आज इसलिए नजर रहेगी क्योंकि इसके प्रमोटर ने एक और बैंक पर दांव लगाया है। एक कारोबारी दिन पहले सामने आया कि आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) की कंट्रोलिंग हिस्सेदारी फेयरफैक्स (Fairfax) खरीदने जा रही है, जोकि सीएसबी बैंक की प्रमोटर है। अभी सीएसबी बैंक के शेयरों की बात करें तो एक कारोबारी दिन पहले 14 अक्टूबर को बीएसई पर यह 4.07% की बढ़त के साथ ₹320.95 पर बंद हुआ था। आईडीबीआई बैंक का भी शेयर बीएसई पर 9.07% के उछाल के साथ ₹90.44 पर बंद हुआ।

IDBI Bank में कितनी हिस्सेदारी खरीदेगी Fairfax और क्या है CSB Bank से कनेक्शन

केंद्रीय कैबिनेट ने आईडीबीआई बैंक की रीस्ट्रक्चरिंग को मंजूरी दे दी है। फेयरफैक्स सरकार और एलआईसी से आईडीबीआई बैंक में 60.72% हिस्सेदारी ₹52,878 करोड़ में खरीदेगी। इसमें से 30.48% हिस्सेदारी सरकार और 30.24% हिस्सेदारी एलआईसी बेचेगी, जिसे कनाडा इंक खरीदेगी। इसकी पेरेंट कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स है। इस डील के पूरा होने के बाद यह फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर में अब तक की सबसे बड़ी एफडीआई डील होगी।

अब सवाल उठता है कि आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी बिक्री का सीएसबी बैंक से क्या लेना-देना है। सितंबर तिमाही के आखिरी में एफआईएच मॉरीशस इंवेस्टमेंट्स की इसमें 40% हिस्सेदारी है, जोकि फेयरफैक्स की एक एंटिटी है।

क्या दो बैंक में हो सकती है होल्डिंग?

बैंक ओनरशिप और कंट्रोल को लेकर आरबीआई के नियमों के मुताबिक कोई प्रमोटर एंटिटी एक समय में दो प्रतिस्पर्धी बैंक नहीं चला सकती है। ऐसे में अगर आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी खरीदने के लिए फेयरफैक्स को मंजूरी मिलती है तो इसे या तो सीएसबी बैंक में हिस्सा बेचना होगा या आईडीबीआई बैंक के साथ विलय का रास्ता निकालना होगा यानी कि इंटीग्रेशन प्रोसेस और अधिक कॉम्प्लेक्स हो सकता है। सीएसबी बैंक बात करें तो इसमें फेयरफैक्स इकलौती प्रमोटर एंटिटी है और बाकी 60% पब्लिक शेयरहोल्डर्स हैं। सितंबर तिमाही के शेयरहोल्डिंग पैटर्न के हिसाब से इसमें म्यूचुअल फंड्स की हिस्सेदारी 13.15% है। साथ ही ₹2 लाख तक के निवेश वाले करीब 63 हजार खुदरा निवेशकों की इसमें 12.56% हिस्सेदारी है।

कैसी है सेहत

सीएसबी बैंक ने हाल ही में सितंबर तिमाही का बिजनेस अपडेट जारी किया है, जिसमें सामने आया कि बैंक का ग्रास एडवांसेज सालाना 22% और डिपॉजिट्स 18% की रफ्तार से बढ़ा। इस दौरान टर्म डिपॉजिट्स भी 22% बढ़ा तो गोल्ड लोन बिजनेस की ग्रोथ 36% रही। अब एक साल में शेयरों के चाल की बात करें इसने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया है। 5 जनवरी 2026 को बीएसई पर यह एक साल के रिकॉर्ड हाई लेवल ₹574.70 पर था, जिससे आठ महीने में यह 48.65% टूटकर 15 सितंबर 2026 को एक साल के निचले स्तर पर आ गया। हालांकि अभी भी यह ₹197 के आईपीओ प्राइस से ऊपर है।

IDBI Bank की रीस्ट्रक्चरिंग को कैबिनेट की मंजूरी, फेयरफैक्स खरीदेगी सरकार और LIC से हिस्सेदारी

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stocks to Watch: Sensex की एक्सपायरी; IDBI Bank, HDB Financial और OM Power समेत 15 स्टॉक्स फोकस में

Stocks to Watch: एशियाई बाजारों में भारी बिकवाली के बीच गिफ्ट निफ्टी से आज घरेलू स्टॉक मार्केट में भी हल्की गिरावट के साथ शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी फिलहाल 10.50 प्वाइंट्स यानी 0.05% की फिसलन के साथ 22,612.00 पर है। चूंकि आज सेंसेक्स की वीकली एक्सपायरी है तो मार्केट में तेज हलचल दिख सकती है। एक कारोबारी दिन पहले 14 अक्टूबर को सेंसेक्स (Sensex) 251.89 प्वाइंट्स यानी 0.34% की गिरावट के साथ 72,781.89 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 99.25 प्वाइंट्स यानी 0.44% की फिसलन के साथ 22,622.70 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।

Stocks to Watch: आज इन स्टॉक्स पर फोकस

ICICI Lombard General Insurance Company Q2 (YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर आईसीआईसीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी का मुनाफा 15.47% बढ़कर ₹946.4 करोड़, प्रीमियम से नेट कमाई 17.7% उछलकर ₹6,651.87 करोड़ और टोटल इनकम 19.2% बढ़कर ₹7,843.7 करोड़ पर पहुंच गया। हालांकि इस दौरान बीमा कंपनी का अंडरराइटिंग लॉस भी ₹178.36 करोड़ से ₹318.38 करोड़ पर पहुंच गया। साथ ही बोर्ड ने हर शेयर पर ₹7 के अंतरिम डिविडेंड को भी मंजूरी दी है।

HDB Financial Services Q2 (YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर एचडीबी फाइनेंशियल सर्विसेज का मुनाफा 34.2% बढ़कर ₹780.2 करोड़ और प्रीमियम से नेट कमाई 15.6% उछलकर ₹2,533.7 करोड़ पर पहुंच गया।

Bajaj Consumer Care Q2 (Consolidated YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर बजाज कंज्यूमर केयर का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 65.9% बढ़कर ₹70.2 करोड़ और रेवेन्यू 25.5% उछलकर ₹332.8 करोड़ पर पहुंच गया।

Tata Technologies Q2 (Consolidated YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर टाटा टेक्नोलॉजीज का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 3.6% बढ़कर ₹171.44 करोड़ और रेवेन्यू 28.4% उछलकर ₹1698.8 करोड़ पर पहुंच गया।

Ceat Q2 (Consolidated YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर सिएट का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 39.8% फिसलकर ₹112 करोड़ पर आ गया लेकिन रेवेन्यू 26.2% उछलकर ₹4,762 करोड़ पर पहुंच गया। इस दौरान कंपनी जीरो से ₹13 करोड़ के एक्सपेश्नल लॉस में आ गई, जो कि वालंटरी रिटायरमेंट स्कीम से जुड़ा है।

Mangalore Refinery and Petrochemicals Q2 (Consolidated YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर मंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 203% बढ़कर ₹1900.8 करोड़ और रेवेन्यू (एक्साइज ड्यूटी छोड़कर) 43.6% उछलकर ₹32,516.2 करोड़ पर पहुंच गया।

Hathway Cable and Datacom Q2 (Consolidated YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर हाथवे केबल एंड डेटाकॉम का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 44.3% बढ़कर ₹10.16 करोड़ और रेवेन्यू 5.7% उछलकर ₹567.5 करोड़ पर पहुंच गया।

Reliance Industries

रिलायंस इंडस्ट्रीज की सब्सिडियरी जियो प्लेटफॉर्म्स का ₹30,187.6 करोड़ का आईपीओ पब्लिक सब्सक्रिप्शन के लिए 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा। इस आईपीओ के लिए प्राइस बैंड प्रति शेयक ₹1,065–₹1,119 फिक्स किया है। इस इश्यू के तहत 27 करोड़ नए शेयर जारी होंगे। इसमें ₹500 करोड़ के शेयर तो जियो प्लेटफॉर्म्स के एलिजिबल एंप्लॉयीज और ₹2500 करोड़ के शेयर रिलायंस इंडस्ट्रीज के एलिजिबल शेयरहोल्डर्स के लिए आरक्षित हैं।

IDBI Bank

फेयरफैक्स फाइेंशियल होल्डिंग्स की कनाडा इंक को आईडीबीआई बैंक खरीदने की मंजूरी मिल गई है। सरकार और एलआईसी इसमें कुल मिलाकर 60.72% हिस्सेदारी ₹52,878 करोड़ में बेच रही है। सरकार बैंक में अपनी 30.48% और एलआईसी 30.24% हिस्सेदारी बेच रही है। कनाडा इंक इसे प्रति शेयर ₹81 के भाव पर खरीद रही है। सौदे के बाद सरकार की बैंक में 15% और एलआईसी के पास 19% हिस्सेदारी रह जाएगी।

Dr Reddy’s Laboratories

अमेरिकी दवा नियामक एफडीए ने आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में डॉ रेड्डीज की एफटीओ-9 मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी की PAI (प्री-अप्रूवल इंस्पेक्शन) पूरी कर ली है। 8-9 अक्टूबर की जां के बाद तीन ऑब्जर्वेशन के साथ फॉर्म 483 जारी हुआ है।

Enviro Infra Engineers

एनवायरो इंफ्रा इंजीनियर्स की सब्सिडियरी सुयोग ऊर्जा को एरी एनर्जी एलएलपी से ₹228 करोड़ के प्रोजेक्ट के लिए LoI (लेटर ऑफ इंटेंट) मिला है। इस प्रोजेक्ट में महाराष्ट्र के लातूर में 100 MW के अजनी विंड पावर प्रोजेक्ट के डेवलपमेंट के लिए EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन) टर्न्की काम शामिल हैं।

Om Power Transmission

ओम पावर ट्रांसमिशन को उत्तर गुजरात विज कंपनी से ₹101.56 करोड़ के टर्न्की कॉन्ट्रैक्ट के लिए LoA (लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस) मिला है। इस कॉन्ट्रैक्ट में अंबाजी में मौजूदा इलेक्ट्रिकल लाइन नेटवर्क को अंडरग्राउंड केबल नेटवर्क में बदलने और उससे जुड़े अन्य काम हैं।

AceVector

ICICI सिक्योरिटीज प्राइमरी डीलरशिप ने ऐसवेक्टर के 32.91 लाख शेयर (0.6% हिस्सेदारी) ₹8.6 करोड़ में प्रति शेयर ₹26.27 के भाव पर बेच दिए।

Devson Catalyst

इंडिया मैक्स इन्वेस्टमेंट फंड ने डेवसन कैटलिस्ट के 72,000 इक्विटी शेयर (0.53% हिस्सेदारी) ₹2.75 करोड़ में प्रति शेयर ₹382.50 के भाव पर बेच दिए। 15 जुलाई, 2026 तक डेवसन कैटलिस्ट में इंडिया मैक्स इन्वेस्टमेंट फंड की 2.41% हिस्सेदारी (3.27 लाख शेयर) थी।

Fine Line Circuits

वॉलफोर्ट फाइनेंशियल सर्विसेज ने फाइन लाइन सर्किट्स के 25,000 शेयर (0.52% हिस्सेदारी) ₹20.71 लाख में प्रति शेयर ₹82.87 के भाव पर खरीदे।

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stocks to Watch: फटाफट चेक करें पूरी लिस्ट; Hero Motors, Lemon Tree, BoB और Hyundai समेत 17 स्टॉक्स फोकस में

Stocks to Watch: एशियाई बाजारों में रौनक के बीच गिफ्ट निफ्टी से आज घरेलू स्टॉक मार्केट में लाल शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी फिलहाल 83.00 प्वाइंट्स यानी 0.36% की फिसलन के साथ 22,767.50 पर है। एक कारोबारी दिन पहले 13 अक्टूबर को निफ्टी की वीकली एक्सपायरी के दिन सेंसेक्स 1109.10 प्वाइंट्स यानी 1.54% की बढ़त के साथ 73,073.88 और निफ्टी भी 358.60 प्वाइंट्स यानी 1.60% की मजबूती के साथ 22,721.95 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।

Stocks to Watch: आज इन स्टॉक्स पर फोकस

Hero Motors Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर हीरो मोटर्स का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 115.3% बढ़कर ₹10.2 करोड़ और रेवेन्यू 24.9% उछलकर ₹319.3 करोड़ पर पहुंच गया।

Tata Elxsi Q2 (YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर टाटा एलेक्सी का प्रॉफिट 10% बढ़कर ₹170.3 करोड़ और रेवेन्यू 15% उछलकर ₹1,055.7 करोड़ पर पहुंच गया।

SS Retail Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर एसएस रिटेल का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 59.4% बढ़कर ₹23.7 करोड़ और रेवेन्यू 58.6% उछलकर ₹789 करोड़ पर पहुंच गया।

Anand Rathi Share and Stock Brokers Q2 (Consolidated YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 50.3% बढ़कर ₹41.9 करोड़ और रेवेन्यू 20.3% उछलकर ₹273.2 करोड़ पर पहुंच गया।

Transformers and Rectifiers India Q2 (Consolidated YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर ट्रांसफॉर्मर्स एंड रेक्टिफायर्स इंडिया का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 135.3% बढ़कर ₹79.8 करोड़ और रेवेन्यू 60.7% उछलकर ₹739.4 करोड़ पर पहुंच गया।

GTPL Hathway Q2 (Consolidated YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर जीटीपीएल हाथवे ₹9.2 करोड़ के कंसालिडेटेड प्रॉफिट से ₹90 लाख के घाटे में आ गई तो लेकिन रेवेन्यू 19.2% उछलकर ₹1,143.1 करोड़ पर पहुंच गया।

Den Networks Q2 (Consolidated YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर डेन नेटवर्क्स का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 3.7% बढ़कर ₹36.5 करोड़ पर पहुंच गया लेकिन रेवेन्यू 3.7% फिसलकर ₹232.6 करोड़ पर पहुंच गया।

Zydus Lifesciences

अमेरिकी दवा नियामक एफडीए ने जाइडस लाइफसाइंसेज की अहमदाबाद के मोरैया में स्थित मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी की जांच की। 5-13 अक्टूबर तक चली जांच के बाद पांच ऑब्जर्वेशंस जारी हुए हैं।

Hyundai Motor India

हुंडई मोटर ग्रुप ने भारत के लिए एक बड़ी निवेश योजना का ऐलान किया है, जिसके तहत 2026 और 2032 के बीच $1550 करोड़ का निवेश होगा।

Bharat Electronics Ltd (BEL)

भारत इलेक्ट्रॉनिक्स को 17 सितंबर से ₹533 करोड़ के अतिरिक्त ऑर्डर मिले हैं। ये ऑर्डर्स कम्युनिकेशन इक्विपमेंट, एवियोनिक्स, साइबर सिक्योरिटी सॉल्यूशन, ड्रोन, जैमर, सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन, अपग्रेड, स्पेयर पार्ट्स और सर्विस से जुड़े हैं।

SBI Funds Management

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के बोर्ड ने आर एस श्रीनिवास जैन को 13 अक्टूबर से ज्वाइंट सीईओ नियुक्त किया है।

Bank of Baroda

यूएई एक्सचेंज और एनएमसी हेल्थकेयर ग्रुप के फाउंडर बीआर शेट्टी ने बैंक ऑफ बड़ौदा समेत 26 से $1500 करोड़ का हर्जाना मांगा है। उनका आरोप है कि सरकारी बैंक और उसके कुछ अधिकारी ग्रुप की कंपनियों से जुड़े फर्जीवाड़े में शामिल थे और उन गारंटी के आधार पर उनके खिलाफ दावे किए, जिन पर उन्होंने कभी साइन नहीं किए थे। उन्होंने मुकदमा दायर करने की तारीख से लेकर पेमेंट या वसूली की तारीख तक हर्जाने पर सालाना 18% की दर से ब्याज भी मांगा है।

Hindustan Oil Exploration Company

हिंदुस्तान ऑयल एक्सप्लोरेशन कंपनी के बोर्ड ने देबब्रत दास को 16 अक्टूबर से सीएफओ नियुक्त किया है। मौजूदा सीएफओ ने निजी कारणों से 15 अक्टूबर से CFO पद छोड़ने का फैसला किया है, लेकिन वह कंपनी के वित्तीय सलाहकार की भूमिका में कंपनी से जुड़े रहेंगे।

Adani Enterprises

अदाणी एंटरप्राइजेज ने देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा सेंटर इक्विपमेंट बनाने और एसेंबली को लेकर जैबिल के साथ 50:50 जॉइंट वेंचर बनाएगी, जिसके लिए नॉन-बाइंडिंग एमओयू हुआ है।

Polycab India

NCLAT (नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल), नई दिल्ली ने NCLT (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ), अहमदाबाद के 7 अक्टूबर के उस आदेश पर रोक लगा दी है और उसे फिलहाल टाल दिया है, जिसमें एसियर मेटल्स की IBC (इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड) के तहत पॉलीकैब इंडिया के खिलाफ दायर याचिका को स्वीकार करने और CIRP (कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस) शुरू करने का निर्देश दिया गया था। यह मामला ₹2.79 करोड़ के ऑपरेशनल डेट से जुड़ा है।

Ujjivan Small Finance Bank

उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक के बोर्ड की 16 अक्टूबर को बैठक में कारोबारी नतीजे के साथ-साथ इक्विटी शेयरों के प्रेफरेंशियल इश्यू के जरिए फंड जुटाने पर भी विचार करेगा।

Lemon Tree Hotels

लेमनट्री होटल्स ने अपने होटल पोर्टफोलियो को बढ़ाते हुए ‘कीज सेलेक्ट बाय लेमन ट्री होटल्स’ की साइनिंग का ऐलान किया है। यह प्रॉपर्टी फ्रेंचाइजी एग्रीमेंट के तहत ऑपरेट होगी।

Stocks to Watch: इन पर भी रहेगी नजर

आज इन कंपनियों के आएंगे रिजल्ट: आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी, एचडीबी फाइनेंशियल सर्विसेज़, केनरा बैंक, बजाज कंज्यूमर केयर, भेल, आदित्य बिड़ला मनी, सिएट, एलेकॉन इंजीनियरिंग कंपनी, एमवी फोटोवोल्टिक पावर, बिलियनब्रेन्स गैराज वेंचर्स (ग्रो), सोनासेलेक्शन इंडिया, टाटा टेक्नोलॉजीज, लीला पैलेस होटल्स एंड रिसॉर्ट्स

एक्स-डिविडेंड: टीसीएस, वेदांता

एक्स-राइट्स: कॉन्टिनेंटल कंट्रोल्स

एक्स-इनकम डिस्ट्रीब्यूशन: एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रस्ट

F&O बैन: अंबुजा सीमेंट्स, कीन्स टेक्नोलॉजी इंडिया

स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचल के लिए यहां जुड़ें

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Dr Reddy’s Share Price: वित्त वर्ष बताने में गलती अमेरिकी इकाई पर पड़ी भारी, अब 5 अक्टूबर को शेयर फोकस में

Dr Reddy’s Share Price: डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज की पूर्ण मालिकाना हक वाली स्टेप-डाउन सब्सिडियरी डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज इंक (DRL Inc) पर अमेरिका में लाखों का जुर्माना लगा है। कंपनी ने इसके बारे में शनिवार 3 अक्टूबर की शाम एक्सचेंज फाइलिंग में जानकारी दी। इसे लेकर कंपनी ने बताया कि अमेरिकी इंटर्नल रेवेन्यू सर्विस (IRS) ने टैक्स पेमेंट के समय वित्त वर्ष के गलत तरीके से रेफरेंस पर $32,350.20 यानी करीब ₹31 लाख का जुर्माना लगाया है। अब इसका असर सोमवार 5 अक्टूबर को इसके शेयरों की चाल पर दिख सकता है। अभी की बात करें तो एक कारोबारी दिन पहले 1 अक्टूबर को बीएसई पर इसका शेयर 2.90% की गिरावट के साथ ₹1200.10 पर बंद हुआ था।

Dr Reddy’s पर जुर्माने का क्या है पूरा मामला

डॉ रेड्डीज के मुताबिक उसकी अमेरिकी सब्सिडयरी पर इंटरनल रेवेन्यू सर्विस (IRS) ने $32,350.20 का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना टैक्स पेमेंट के समय फाइनेंशियल ईयर (वित्तीय वर्ष) के रेफरेंस को गलत तरीके से बताने की वजह से लगाया गया है। DRL Inc को US डिपार्टमेंट ऑफ ट्रेजरी, इंटरनल रेवेन्यू सर्विस, सिनसिनाटी, ओहियो से 25 सितंबर, 2026 की तारीख वाला फाइनल ट्रांसक्रिप्ट 2 अक्टूबर, 2026 को मिला। हालांकि डॉ रेड्डीज का कहना है कि एवैल्युएशन के आधार पर इसका कंपनी के फाइनेंशियल, ऑपरेशंस और अन्य एक्टिविटीज पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा।

इससे पहले 11 सितंबर को एक डॉ रेड्डीज ने बताया था कि अमेरिकी दवा नियामक एफडीए ने मेक्सिको में इसकी API (एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट) बनाने वाली फैसिलिटी में रिकॉर्ड्स की जांच पूरी कर ली है और जांच के आखिर में दो ऑब्जर्वेशन जारी किया। यह एसेसमेंट 17 जुलाई से 8 सितंबर के बीच हुआ था।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

डॉ रेड्डीज के शेयरों ने बहुत ही शॉर्ट पीरियड में एक साल के हाई लेवल से एक साल के निचले स्तर का सफर तय किया। बीएसई पर 29 जून 2026 को इसके शेयर ₹1,414.40 पर थे, जोकि इसके लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से महज 1 ही महीने में यह 23.64% टूटकर 23 जुलाई 2026 को ₹1,080.05 पर आ गया, जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।

SIP संभाल सकता है FIIs की बिकवाली? विदेशी निवेशकों की 11% निकासी सिर्फ एक महीने सितंबर में

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stocks to Watch: सात हफ्ते टूटकर संभलेगा मार्केट! आज 3 लिस्टिंग्स और Fortis समेत 11 शेयर फोकस में

Stocks to Watch: एशियाई बाजारों से मिले-जुले रुझानों के बीच गिफ्ट निफ्टी से आज 28 सितंबर को घरेलू स्टॉक मार्केट में लाल शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी फिलहाल 76.00 प्वाइंट्स यानी 0.33% की गिरावट के साथ 23,112.00 पर है। एक कारोबारी दिन पहले 25 सितंबर को सेंसेक्स (Sensex) 315.20 प्वाइंट्स यानी 0.43% की बढ़त के साथ 73,895.74 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 77.40 प्वाइंट्स यानी 0.34% की तेजी के साथ 23,140.50 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।

Stocks to Watch: आज इन स्टॉक्स पर फोकस

Clean Max Enviro Energy Solutions

सीएनबीसी-टीवी18 की सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट के मुताबिक ऑगमेंट इंडिया I होल्डिंग्स एलएलसी क्लीन मैक्स एंवायरों एनर्जी सॉल्यूशंस के 85 लाख शेयर (7.25% हिस्सेदारी) बेच सकती है। इस ऑफर का साइज ₹1,062.8 करोड़ और फ्लोर प्राइस प्रति शेयर ₹1,250 तय किया गया है। जून 2026 तक कंपनी में ऑगमेंट इंडिया की हिस्सेदारी 9.5% थी।

Unichem Laboratories

अमेरिकी दवा नियामक एफडीए ने यूनिकेम लैब की गोवा के पिलर्ने में स्थित फॉर्म्यूलेशन फैसिलिटी की 21-26 सितंबर, 2026 के बीच जांच की, जिसके बाद पांच ऑब्जर्वेशन जारी हुए।

Zydus Lifesciences

अमेरिकी दवा नियामक एफडीए ने अमेरिका के न्यू जर्सी में जाइडस लाइफसाइंसेज के ऑफिस में फार्माकोविजिलेंस और पोस्ट-मार्केटिंग सर्विलांस सिस्टम का ऑन-साइट इंस्पेक्शन किया। यह इंस्पेक्शन 22 से 25 सितंबर, 2026 के बीच हुआ और इसमें कोई ऑब्जर्वेशन नहीं मिला

Wheels India

व्हील्स इंडिया ने 25 सितंबर को अपना क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) इश्यू बंद किया और प्रति शेयर ₹2,088 के भाव पर 11.97 लाख शेयरों के अलॉटमेंट को मंजूरी दी। इश्यू प्राइस प्रति शेयर ₹2,197.10 के फ्लोर प्राइस से ₹109.10 डिस्काउंट पर है। इस इश्यू के तहत आदिक्य बिड़ला सनलाइफ एएमसी, एसबीआई म्यूचुअल फंड, व्हाइटओक कैपिटल और अशोक इंडिया इक्विटी इंवेस्टमेंट ट्रस्ट जैसे निवेशकों ने पैसे डाले।

Aequs

एक्वस के बोर्ड ने प्रमोटर ग्रुप के सदस्य मेलवुड ट्रस्टी सर्विसेज को 2.8 करोड़ तक के वारंट के प्रेफरेंशियल इश्यू को मंजूरी दी है, जिसकी कुल वैल्यू लगभग ₹650 करोड़ है। इसमें से ₹325 करोड़ तो वारंट के अलॉटमेंट के समय तुरंत चुकाने होंगे, जो इश्यू साइज का 50% और रेगुलेटरी मिनिमम का दोगुना है। बाकी रकम वारंट के इस्तेमाल यानी एक्सरसाइज के समय चुकानी होगी।

Signatureglobal (India)

सिग्नेचरग्लोबल ने गुरुग्राम के फर्रुखनगर में लगभग 194.22 एकड़ जमीन हासिल की। इससे उसके डेवलपमेंट पाइपलाइन में लगभग 67.7 करोड़ स्क्वेयर फुट का डेवलप करने लायक एरिया जुड़ गया है। इस प्रोजेक्ट की अनुमानित ग्रॉस डेवलपमेंट वैल्यू (GDV) लगभग ₹5,500-₹6,000 करोड़ है।

Prestige Estates Projects

प्रेस्टीज एस्टेट्स प्रोजेक्ट्स की सब्सिडियरी प्रेस्टीज हॉस्पिटैलिटी वेंचर्स (PHVL) ने रणनीतिक कारणों और मार्केट की अनिश्चित स्थितियों का हवाला देते हुए अपने आईपीओ का ड्राफ्ट यानी ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) वापस लेने का फैसला किया है। बाद में यह फिर आईपीओ के लिए सेबी के पास नया ड्राफ्ट दाखिल करने पर विचार कर सकती है।

Fortis Healthcare

फोर्टिस हेल्थकेयर ने दाइची सैंक्यो और सिंह ब्रदर्स के बीच चल रहे कानूनी विवाद में अपना पक्ष रखा है। कंपनी का कहना है कि वह इस विवाद से पूरी तरह अनजान थी और पुराने प्रमोटरों की हिस्सेदारी कम होने के मामले में उसकी कोई भूमिका नहीं थी। फोर्टिस के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने 25 सितंबर के अपने आदेश में कंपनी की स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) का निपटारा कर दिया और स्वतंत्र रूप से फोरेंसिक ऑडिट का आदेश दिया है।

लिस्टिंग

आज एफएक्स मल्टीटेक, रोबोकिड्ज एडुवेंचर्स और विवेकानंद कॉटस्पिन के शेयर बीएसई एसएमई पर लिस्ट होंगे।

Stocks to Watch: इन पर भी रहेगी नजर

आज इन कंपनियों के आएंगे रिजल्ट: दीपा ज्वैलर्स, रेज ऑफ बिलीफ, प्रसोल केमिकल्स

एक्स-बोनस: आस्था स्पिंटेक्स

F&O बैन: आज कीन्स टेक्नोलॉजी इंडिया, मणप्पुरम फाइनेंस, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस, SAIL

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

व्यवस्था को चुभने वाले अधिकारी

मुंढे मई 2026 में एफडीए आयुक्त बने। कुछ ही महीनों में विभाग ने हजारों निरीक्षण किए, सैकड़ों लाइसेंस निलंबित किए, करोड़ों रुपये का मिलावटी या असुरक्षित माल जब्त किया और गुटखा-पान मसाला के अवैध कारोबार पर कठोर कार्रवाई की। बड़े ब्रांड, पुराने होटल, क्विक-कॉमर्स गोदाम, यहाँ तक कि मुंबई हाईकोर्ट की कैंटीन भी इस दायरे से बाहर नहीं रहे। संदेश साफ था, नियम छोटे-बड़े के भेद से नहीं चलेंगे। अब वही सख्ती निजी अस्पतालों के उपभोग्य सामान पर दिख रही है।

महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषध प्रशासन के आयुक्त तुकाराम मुंढे इन दिनों एक बार फिर उन अधिकारियों की पंक्ति में खड़े दिखते हैं, जिनकी उपस्थिति व्यवस्था को असहज कर देती है। होटल-रेस्तरां की रसोइयों से शुरू हुआ उनका अभियान अब अस्पतालों के बिलों तक पहुँच गया है। सवाल केवल एक अधिकारी के तेवर का नहीं है। सवाल यह है कि जनता के स्वास्थ्य और जेब के बीच खड़ी लूट को रोकने वाले अधिकारी भारत में इतने दुर्लभ क्यों हैं? और जब वे दिखते हैं तो उनकी पदावधि इतनी छोटी क्यों रह जाती है?

मुंढे मई 2026 में एफडीए आयुक्त बने। कुछ ही महीनों में विभाग ने हजारों निरीक्षण किए, सैकड़ों लाइसेंस निलंबित किए, करोड़ों रुपये का मिलावटी या असुरक्षित माल जब्त किया और गुटखा-पान मसाला के अवैध कारोबार पर कठोर कार्रवाई की। बड़े ब्रांड, पुराने होटल, क्विक-कॉमर्स गोदाम, यहाँ तक कि मुंबई हाईकोर्ट की कैंटीन भी इस दायरे से बाहर नहीं रहे। संदेश साफ था, नियम छोटे-बड़े के भेद से नहीं चलेंगे। अब वही सख्ती निजी अस्पतालों के उपभोग्य सामान पर दिख रही है।

एक सर्वे में सामने आया कि अस्पताल ने आईवी इन्फ्यूजन सेट 11.05 रुपये में खरीदा, पर मरीज के बिल में उसकी कीमत 325 रुपये लिखी गई। यह करीब 2,841 प्रतिशत का अंतर है। सिरिंज 6.75 रुपये में खरीदी गई, बिल में 57.20 रुपये। कैथेटर 29.41 रुपये में लिया गया, मरीज से 310 रुपये वसूले गए। मुंढे ने राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण और केंद्रीय औषध विभाग को पत्र लिखकर ट्रेड मार्जिन पर लगाम लगाने की माँग की है।

यह महज मूल्य का खेल नहीं है। अस्पताल के बिल का सबसे मोटा हिस्सा अक्सर वह होता है जिसका उपचार से सीधा संबंध कम और खरीद-बिक्री की श्रृंखला से ज्यादा होता है। उल्लेखनीय है कि जब मरीज सरकारी योजना या निजी बीमा के दायरे में होता है, तो यह लूट और निर्लज्ज हो जाती है। मरीज सोचता है कि खर्च कंपनी या सरकार उठाएगी। अस्पताल जानता है कि क्लेम पास होने की प्रक्रिया जटिल है, मरीज कमजोर है और पूछताछ कम होती है। नतीजा यह कि खपत की वस्तुएँ मनमाने मार्जिन पर चढ़ जाती हैं, कमरे-जांच-उपकरण के पैकेज फुला दिए जाते हैं और बीमा का पैसा अंततः समाज के उसी वर्ग से वसूला जाता है जो प्रीमियम चुकाता है। सरकारी योजनाओं में भी यही तर्क काम करता है और सार्वजनिक धन निजी लाभ में बदल जाता है।

भारत को तुकाराम जैसे अधिकारियों की जरूरत है क्योंकि हमारे नियामक ढांचे में कानून पर्याप्त हैं, पर प्रवर्तन चयनात्मक है। खाद्य सुरक्षा, औषधि नियंत्रण और अस्पताल शुल्क, तीनों क्षेत्र उन जगहों पर हैं जहाँ आम आदमी सबसे असहाय होता है। वह मेनू नहीं पढ़ सकता कि पनीर असली है या नहीं; वह बिल नहीं काट सकता कि सेट ग्यारह का है या तीन सौ पच्चीस का; वह बीमा कंपनी से नहीं लड़ सकता जब अस्पताल कहता है कि पैकेज में सब शामिल है।

ऐसे में यदि कोई अधिकारी बिना चेतावनी निरीक्षण करता है, लाइसेंस निलंबित करता है और आंकड़े सार्वजनिक करता है, तो वह केवल विभाग नहीं चला रहा होता, वह बाजार की नैतिक सीमा खींच रहा होता है। गौरतलब है कि तुकाराम मुंढे प्रभाव तेज़ी से फैल रहा है। रसोई साफ होने लगीं, मेनू पर एनालॉग पनीर लिखा जाने लगा और अस्पताल अब कम से कम कीमतों की चर्चा से बच नहीं सकते। यह डर सुधार का पहला कदम है। स्थायी सुधार तभी आएगा जब एक व्यक्ति का अभियान संस्था की आदत बनेगी।

सवाल उठता है कि ऐसे अधिकारी बार-बार तबादले का शिकार क्यों होते हैं? मुंढे 2005 बैच के महाराष्ट्र काडर के आईएएस हैं। करीब इक्कीस वर्ष की सेवा में उनके पच्चीस के आसपास तबादले हुए हैं। सोलापुर में रेत माफिया, नवी मुंबई में अनावश्यक परियोजनाओं का विरोध, पुणे परिवहन में अनुपस्थित ड्राइवरों की छँटनी, स्वास्थ्य आयुक्त रहते सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक, हर जगह उन्होंने स्वार्थी हितों से टकराव चुना। तबादला सजा नहीं कहा जाता, पर व्यवहार में वह सजा ही है। ईमानदार अधिकारी को बार-बार हटाकर व्यवस्था यह संकेत देती है कि स्थिरता सुविधा के पक्ष में है, असुविधा के नहीं। राजनेता, स्थानीय व्यापारिक लॉबी, कभी विभाग के भीतर के कर्मचारी, सभी को एक ही शिकायत होती है: काम का दबाव, अचानक छापे, छवि खराब होना। जनसमर्थन सोशल मीडिया पर दिखता है, पर फाइलें सचिवालय में चलती हैं। जब तक तबादले की शक्ति बिना पारदर्शी कारण के बनी रहेगी, मुंढे जैसे अधिकारी अपवाद रहेंगे, आदर्श नहीं।

ऐसे में आलोचना भी जरूरी है। व्यवसाय जगत कहता है कि बिना सुधार का समय दिए लाइसेंस काटना अति है। अदालत ने कभी कहा कि मच्छर मारने के लिए तलवार न चलाई जाए। विभाग के कुछ कर्मचारियों ने कार्यभार की शिकायत की। ये बातें अनसुनी नहीं की जानी चाहिए। प्रवर्तन कठोर हो, पर पूर्वानुमान योग्य और समान भी हो। छोटे ढाबे और बड़े अस्पताल दोनों पर एक ही पैमाना लगे। मूल्य नियंत्रण ऐसा हो कि गुणवत्ता न गिरे और इनोवेटर का मार्जिन भी पूरी तरह न मिटे। बीमा कंपनियों और सरकारी योजनाओं को अस्पताल के खरीद मूल्य से बिल का मिलान अनिवार्य बनाना चाहिए। मरीज को बाहरी फार्मेसी से दवा लेने की स्वतंत्रता कागज पर नहीं, व्यवहार में मिलनी चाहिए।

आखिरकार प्रश्न व्यक्ति का नहीं, संस्कृति का है। भारत में सेवा भाव वाले अधिकारी भी पैदा होते हैं, गाँव के किसान परिवार से आईएएस बनने वाले मुंढे इसका जीवंत उदाहरण हैं। कमी यह है कि व्यवस्था उन्हें टिकाए नहीं रखती। जब तक ईमानदारी को करियर का जोखिम माना जाएगा, रसोई में कीड़े और बिल में दो हजार प्रतिशत मुनाफा सामान्य बने रहेंगे। देश को मुंढे जैसे और अधिकारियों की जरूरत है। उससे भी ज्यादा जरूरत है ऐसी प्रशासनिक सुरक्षा की, जिसमें वे एक पद पर पूरा कार्यकाल काट सकें, आंकड़े सुधार सकें और लॉबी के दबाव में विस्थापित न हों। स्वास्थ्य और भोजन मौलिक जरूरतें हैं। इन पर लूट को सहना शासन की विफलता है। एक अधिकारी का अभियान चेतावनी है। चेतावनी को नीति बनाना अब बाकी है।

Nestle Controversies: कभी बेबी फूड, कभी किटकैट, कभी मैगी…नेस्ले के लिए नया नहीं है विवादों में घिरना, लंबा है इतिहास

एफएमसीजी कंपनी नेस्ले (Nestle) एक बार फिर विवादों में है। ताजा मामला इसकी भारतीय यूनिट नेस्ले इंडिया से जुड़ा है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पाया है कि शिशु पोषण (Infant Nutrition) के 3 उत्पादों में खाद्य सुरक्षा मानकों का कथित रूप से पालन नहीं किया गया। इसे लेकर FSSAI ने नेस्ले इंडिया लिमिटेड के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है। हालांकि कंपनी का कहना है कि वह लागू नियमों का पूरी तरह पालन कर रही है। FSSAI का कहना है कि उसने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध NAN एक्सेला प्रो स्टेज 1, लैक्टोजेन प्रो 1 और एक फॉलो-अप फॉर्मूला की जांच शुरू की है।

नियामक ने NAN एक्सेला प्रो स्टेज-1 में ‘5HMOs’ और ‘व्हे प्रोटीन’ से जुड़े दावों पर आपत्ति जताई है। वहीं, लैक्टोजेन प्रो 1 में ‘व्हे प्रोटीन’ को आसानी से पचने वाला बताने के दावे पर सवाल उठाया है। इसके अलावा नेस्ले इंडिया के एक फॉलो-अप फॉर्मूला का सैंपल लैब टेस्ट में बायोटिन की मात्रा के मामले में स्टैंडर्ड्स के मुताबिक नहीं पाया गया। नेस्ले इंडिया के ये तीनों प्रोडक्ट प्रावधानों का उल्लंघन करते हैं। इसलिए FSSAI ने कंपनी के खिलाफ 3 अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं। हालांकि नेस्ले इंडिया का कहना कि उसके बच्चों के पोषण वाले प्रोडक्ट सभी लागू नियमों का पूरी तरह से पालन करते हैं।

नेस्ले और विवादों का नाता नया नहीं है। कंपनी भारत के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर भी पहले भी कई बार विवादों के साए में रह चुकी है। कभी गलत मार्केटिंग प्रैक्टिसेज, कभी प्रोडक्ट की प्राइस फिक्सिंग तो कभी अनहेल्दी प्रोडक्ट्स को लेकर कंपनी आलोचनाएं झेल चुकी है। आइए डालते हैं एक नजर नेस्ले से जुड़े प्रमुख विवादों पर…

बेबी फॉर्मूला मार्केटिंग विवाद

साल 1977 में अमेरिका में नेस्ले को जबरदस्त बॉयकॉट झेलना पड़ा था। वजह थी नेस्ले के ब्रेस्ट मिल्क सब्सटिट्यूट की एग्रेसिव मार्केटिंग। यह मार्केटिंग कुछ इस तरह की गई कि कंपनी पर मांओं को स्तनपान कराने से हतोत्साहित करने और अपने बेबी फॉर्मूले को मां के दूध से ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक यानि हेल्दी बताने का आरोप लग गया। कैंपेनिंग में इस तरह का संकेत दिया गया कि इस फॉर्मूले का इस्तेमाल हेल्थ प्रोफेशनल्स करते हैं। नेस्ले ने मैटरनिटी यूनिट्स में अपने फॉर्मूले के फ्री सैंपल बांटना शुरू किया और सेल्सपर्सन को नर्स के जैसे तैयार करके पेश करने लगी।

हालांकि नेस्ले का बेबी फॉर्मूला, मां के दूध से ज्यादा पौष्टिक है, इस बात का कोई सबूत नहीं था। लेकिन विवाद तो खड़ा हो गया था और 1977 में अमेरिका में नेस्ले का बहिष्कार शुरू हो गया। फिर यह धीरे-धीरे यूरोप में भी फैल गया। बहिष्कार आधिकारिक तौर पर 1984 में बंद हुआ, वह भी तब जब नेस्ले, WHO द्वारा समर्थित इंटरनेशनल मार्केटिंग कोड का पालन करने पर राजी हुई। लेकिन 1989 में बॉयकॉट फिर शुरू हो गया। इसके बाद नेस्ले पर 1990 के दशक में भी पाकिस्तान जैसे विकासशील देशों में इसी तरह की मार्केटिंग प्रैक्टिसेज अपनाने के आरोप लगते रहे।

KitKat: चॉकलेट या वेफर

बात 1998 की है। नेस्ले इंडिया अपनी किटकैट को भारत में वेफर की कैटेगरी में रखना चाहती थी और इसी के हिसाब से 10 प्रतिशत सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी भरना चाहती थी। लेकिन टैक्स अथॉरिटीज को यह मंजूर न था। उनका मानना था कि किटकैट एक चॉकलेट है और इसलिए इस पर 20 प्रतिशत ड्यूटी लगनी चाहिए। उनका यह भी कहना था कि नेस्ले इंडिया, किटकैट का विज्ञापन तो चॉकलेट के तौर पर कर रही है, लेकिन ड्यूटी वेफर वाली भरना चाहती है। लेकिन नेस्ले भी कहां कम थी। उसने सफाई दी कि वह किटकैट को चॉकलेट बताकर नहीं बेचती, लोग इसे वेफर और चॉकलेट का कॉम्बिनेशन समझकर खरीदते हैं।

टैक्स अथॉरिटी का कहना था कि किटकैट में 68-70 प्रतिशत चॉकलेट मिल्क है, इसलिए इसे चॉकलेट माना जाना चाहिए। उस वक्त सेंट्रल एक्साइज डिपार्टमेंट ने नेस्ले इंडिया पर 24 करोड़ रुपये की ड्यूटी लगाई थी। इसमें किटकैट के कथित मिसक्लासिफिकेशन के लिए 100 प्रतिशत अनिवार्य जुर्माना शामिल था। नेस्ले इंडिया को सेंट्रल एक्साइज एक्ट के सेक्शन 11 AB के प्रावधानों के मुताबिक ब्याज भरने का भी निर्देश दिया गया था।

मामला बढ़ते-बढ़ते ‘कस्टम्स, एक्साइज एंड गोल्ड ट्राइब्यूनल, मुंबई’ में पहुंचा- ‘नेस्ले इंडिया वर्सेज कमिश्नर ऑफ सेंट्रल एक्साइज (एड्ज्यूडिकेशन), मुंबई’। ट्राइब्यूनल को तय करना था कि किटकैट में वेफर पर चॉकलेट की कोटिंग है या चॉकलेट के अंदर वेफर। फैसला नेस्ले के पक्ष में आया, किटकैट को वेफर माना गया और इसे 10 प्रतिशत सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी की कैटेगरी में ही रखा गया।

चॉकलेट प्राइस फिक्सिंग

कनाडा में प्रतिस्पर्धा ब्यूरो ने चॉकलेट की प्राइसिंग के मामले की जांच के लिए 2007 में नेस्ले कनाडा के ऑफिसेज में छापा मारा था। हर्शी कनाडा और मार्स कनाडा के ऑफिस में भी छापे मारे गए थे। आरोप था कि कीमतों को बढ़ाने के लिए नेस्ले के अधिकारियों ने कनाडा में अपने कॉम्पिटीटर्स के साथ मिलीभगत की। कॉम्पिटीटर्स के अधिकारियों ने रेस्टोरेंट, कॉफी की दुकानों और सम्मेलनों में मुलाकात की। यह आरोप भी था कि नेस्ले कनाडा के तत्कालीन सीईओ रॉबर्ट लियोनिडास ने एक बार एक कॉम्पिटीटर को अपनी कंपनी की प्राइसिंग की जानकारी वाला एक लिफाफा दिया था।

2007 में छापेमारी के सार्वजनिक होने के बाद नेस्ले और अन्य कंपनियों के खिलाफ प्राइसिंग के लिए क्लास एक्शन मुकदमे दायर किए गए। नेस्ले ने किसी भी तरह की जिम्मेदारी माने बिना, 90 लाख डॉलर का समझौता किया। इसके बाद भी संयुक्त राज्य अमेरिका में बड़े पैमाने पर क्लास एक्शन मुकदमे चले।

मिल्क प्रोडक्ट विवाद

सितंबर 2008 के आखिर में, हांगकांग सरकार को चीन में बने नेस्ले के दूध के एक प्रोडक्ट में मेलामाइन मिला। किडनी खराब होने से 6 बच्चों की मौत हो गई और 860 अन्य बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। हालांकि नेस्ले ने कहा कि उसके सभी प्रोडक्ट सुरक्षित हैं और उन्हें मेलामाइन-मिलावटी दूध से नहीं बनाया गया है। अक्टूबर 2008 में ताइवान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने घोषणा की कि चीन में नेस्ले द्वारा बनाए गए 6 तरह के मिल्क पाउडर में मेलामाइन की थोड़ी मात्रा पाई गई है, और उन्हें बाजार से हटा दिया गया।

जब मैगी पर हुआ बड़ा बवाल, हो गई थी बैन

सितंबर 2026 में सामने आया नया वाकया FSSAI और नेस्ले इंडिया के बीच दूसरा बड़ा रेगुलेटरी विवाद है। इससे पहले 2015 में भारत में नेस्ले की मैगी को लेकर एक बड़ा बवाल हुआ था। लेड की ज्यादा मात्रा और लेबलिंग से जुड़ी चिंताओं के कारण नेस्ले इंडिया अपने इंस्टेंट नूडल्स लिए घिरी थी। मई 2015 में बाराबंकी, उत्तर प्रदेश के फूड सेफ्टी रेगुलेटर्स ने रिपोर्ट दी कि मैगी नूडल्स में मोनोसोडियम ग्लूटामेट (MSG) का लेवल बहुत ही हाई है। साथ ही लेड का स्तर, जितनी मात्रा की इजाजत है उससे 17 गुना ज्यादा है। बस फिर क्या था। मैगी के सेहत के लिए हानिकारक होने, खासकर बच्चों की सेहत के लिए हानिकारक होने को लेकर वाद-विवाद होने लगे। देश में और विदेश में कई जांच हुईं। मामले ने इतना तूल पकड़ा कि भारत सरकार ने जून 2015 में मैगी नूडल्स को पूरे देश में बैन कर दिया।

हालांकि नेस्ले हमेशा से यही कहती आई है कि उसके नूडल प्रोडक्ट सुरक्षित हैं। भारत में जब बैन लगा तो मैगी को लगभग 320 करोड़ रुपये का स्टॉक रिकॉल करना पड़ा यानि कि बाजार से वापस मंगाना पड़ा। इतना ही नहीं ऐसी भी खबर आई कि उसने एक सीमेंट फैक्ट्री को स्टॉक जलाने के लिए 20 करोड़ रुपये दिए। मैगी में MSG और लेड, उचित मात्रा से अधिक होने के चलते भारत के कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने नेस्ले इंडिया पर 640 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था।

अगस्त 2015 में यूएस हेल्थ रेगुलेटर एफडीए ने टेस्ट किए, जिनमें सामने आया कि मैगी में लेड की मात्रा खतरनाक स्तर पर नहीं है। 13 अगस्त 2015 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने देश में मैगी पर लगे बैन को हटा दिया। कोर्ट का कहना था कि बैन लगाते हुए प्रॉपर प्रोसिजर फॉलो नहीं किया गया। इसके अलावा कोर्ट ने भारत में हुए टेस्ट के नतीजों पर भी सवाल खड़े किए, जिसकी वजह थी कि टेस्ट नेशनल एक्रेडिएशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज की अधिकृत लैब्स में नहीं हुए थे। नवंबर 2015 में मैगी की भारतीय बाजारों में फिर वापसी हो गई।

2021 में जब फूड प्रॉडक्ट्स और ड्रिंक्स अनहेल्दी होने पर घिरी

जून 2021 में नेस्ले के फूड प्रोडक्ट्स पर एक बड़ा खुलासा हुआ। कंपनी के एक इंटर्नल डॉक्युमेंट में माना गया कि उसके 60 प्रतिशत से ज्यादा फूड प्रोडक्ट और ड्रिंक्स अनहेल्दी हैं। कंपनी ने यह भी माना है कि इसके कुछ फूड प्रोडक्ट कभी भी हेल्दी नहीं होंगे, फिर चाहे वह कितना भी सुधार क्यों न कर ले। यह बात सामने आते ही नेस्ले की फिर से आलोचना होने लगी। एक प्रेजेंटेशन में कहा गया था कि ऑस्ट्रेलिया के हेल्थ स्टार रेटिंग सिस्टम के तहत कंपनी के 37 प्रतिशत प्रोडक्ट्स को ही 3.5 स्टार या इससे ज्यादा की रेटिंग मिली। 3.5 स्टार की रेटिंग ‘रिकग्नाइज्ड डेफिनेशन ऑफ हेल्थ’ मानी जाती है। सामने आया था कि नेस्ले के 60 प्रतिशत फूड प्रोडक्ट इस मानक पर खरे नहीं उतरे।

भगवान जगन्नाथ की तस्वीर वाली पैकेजिंग पर विवाद

जनवरी 2022 में नेस्ले इंडिया को सोशल मीडिया पर ग्राहकों की पुरजोर नाराजगी का सामना करना पड़ा था। कारण था किटकैट के रैपर पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा की तस्वीरें। यह नया स्टॉक आते ही विवादों में घिर गया। कंपनी पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगा। नेस्ले इंडिया की सफाई थी कि उसके इस कदम का उद्देश्य केवल भारत के खूबसूरत और दर्शनीय स्थलों को उकेरना था। किटकैट के डिब्बे पर पट्टचित्र के जरिए ओडिशा की संस्कृति को उकेरा गया था।

लेकिन तगड़ी आलोचना को देखते हुए कंपनी ने अपने कदम पर खेद जताया। कहा कि उसने साल 2021 में ही विवादास्पद पैकेजिंग वाली किटकैट के डिब्बों को बाजार से वापस ले लिया था। बाकी बचा हुआ माल भी जल्द ही बाजार से गायब हो गया। इससे पहले अप्रैल 2021 में नेस्ले इंडिया ने किटकैट चॉकलेट के पैकेट पर मणिपुर के कीबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान को मेघालय में दिखाए जाने के लिए माफी मांगी थी। राज्य सरकार के अधिकारियों की आपत्ति के बाद कंपनी ने यह कदम उठाया था।

बेबी फूड में चीनी

अप्रैल 2024 में स्विस NGO ‘पब्लिक आई’ और ‘इंटरनेशनल बेबी फूड एक्शन नेटवर्क’ (IBFAN) की एक जांच से पता चला कि कम और मध्यम आय वाले देशों में बेचे जाने वाले नेस्ले के लोकप्रिय बेबी सीरियल प्रोडक्ट्स और फॉर्मूलाज में यूरोप और अन्य विकसित देशों में बेचे जाने वाले उत्पादों की तुलना में काफी ज्यादा मात्रा में एडेड शुगर है। एक रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में जांचे गए सभी सेरेलक बेबी सीरियल प्रोडक्ट्स में एडेड शुगर थी और मात्रा औसतन प्रति सर्विंग लगभग 3 ग्राम थी। वहीं नेस्ले के यूरोपीय बाजार में बिना चीनी वाले शिशु पोषण उत्पाद उपलब्ध थे। विकासशील देशों में नेस्ले के सबसे ज्यादा बिकने वाले बेबी-फूड ब्रांड्स में काफी ज्यादा मात्रा में एडेड शुगर पाई गई, जबकि स्विट्जरलैंड में इसके प्रोडक्ट शुगर-फ्री थे।

Stocks to Watch: 9 लिस्टिंग्स और Sensex की एक्सपायरी; Groww, ITC और Fortis समेत 22 स्टॉक्स फोकस में

Stocks to Watch: अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों की बढ़ोतरी और आगे भी इसमें हाइक के आसार के बाद अधिकतर एशियाई बाजारों में रौनक दिखी। वहीं गिफ्ट निफ्टी से आज घरेलू मार्केट में लाल शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी फिलहाल 27.00 प्वाइंट्स यानी 0.12% की गिरावट के साथ 23,240.00 पर है। चूंकि आज सेंसेक्स की वीकली एक्सपायरी है तो मार्केट में तेज उठा-पटक दिख सकती है। एक कारोबारी दिन पहले 16 सितंबर को सेंसेक्स (Sensex) 332.63 प्वाइंट्स यानी 0.45% की बढ़त के साथ 74,336.45 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 99.00 प्वाइंट्स यानी 0.43% के उछाल के साथ 23,217.60 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।

Stocks to Watch: आज इन स्टॉक्स पर फोकस

Tempsens Instruments India Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर टेंपसेंस इंस्ट्रूमेंट्स का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 14.2% बढ़कर ₹15.2 करोड़ और रेवेन्यू 33.4% उछलकर ₹118.7 करोड़ पर पहुंच गया।

Infosys

इन्फोसिस ने मध्य भारत में अपनी स्थिति और मजबूत करने के लिए इंदौर डेवलपमेंट सेंटर (DC) के विस्तार का ऐलान किया है। इसमें एआई, क्लाउड, साइबर सिक्योरिटी और अगली पीढ़ी की डिजिटल सर्विसेज की बढ़ी हुई कैपिबिलिटीज होंगी।।

Alembic Pharmaceuticals

अमेरिकी दवा नियामक एफडीए ने गुजरात के वडोदरा में एलेम्बिक फार्मा की बॉयोइक्विवैलेंस फैसिलिटी की जांच के बाद एक EIR (एस्टेब्लिशमेंट इंस्पेक्शन रिपोर्ट (EIR) जारी किया है।

Highway Infrastructure

हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर को उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी से ₹220.66 करोड़ का ऑर्डर मिला है। इसमें गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के लिए यूजर फीस वसूलना, टोल प्लाजा को चलाने और चार पेट्रोल-कम-सेफ्टी गाड़ियां लगाने का काम है।

Mazagon Dock Shipbuilders

मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स ने महाराष्ट्र के दिघी में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग इंडस्ट्रियल क्लस्टर में एंकर शिपयार्ड के तौर पर शामिल होने के लिए नेशनल शिपबिल्डिंग एंड हेवी इंडस्ट्रीज पार्क महाराष्ट्र (NSHIPML) के साथ एक एमओयू किया है। इस शिपयार्ड की सालाना जहाज निर्माण क्षमता कम से कम 1.2 मिलियन ग्रॉस टनेज होने का अनुमान है।

GR Infraprojects

जीआर इंफ्राप्रोजेक्ट्स ने एनटीपीसी के मौदा सुपर थर्मल पावर स्टेशन पर बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) लगाने के ईपीसी पैकेज प्रोजेक्ट के लिए एनटीपीसी को कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने का नोटिस जारी किया है।

Fortis Healthcare

फोर्टिस हेल्थकेयर ने नई दिल्ली के अशोक विहार में 400 से अधिक बेड वाले सुपर-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में हेल्थकेयर सर्विसेज देने के लिए सेठ सुंदर लाल जैन चैरिटेबल आई हॉस्पिटल के साथ डेफिनिटिव एग्रीमेंट किए हैं। अस्पताल के तीन से चार साल में काम शुरू करने की उम्मीद है।

Venus Pipes and Tubes

वीनस पाइप्स एंड ट्यूब्स ने प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के जरिए 18 निवेशकों को प्रति शेयर ₹1,670 के भाव पर ₹372 करोड़ में 22.27 लाख इक्विटी शेयर जारी करने का फैसला किया है।

Gujarat Narmada Valley Fertilizers & Chemicals

गुजरात नर्मदा वैली फर्टिलाइजर्स ने संजीव कुमार को 9 सितंबर से पांच साल के लिए कंपनी का एमडी नियुक्त किया है।

ITC

आईटीसी ने दो ब्रांड्स- क्लासिक कनेक्ट और गोल्ड फ्लेक सुपरस्टार की कीमतें बढ़ा दी हैं। सीएनबीसी-टीवी18 के सूत्रों के अनुसार क्लासिक कनेक्ट के 20 के पैक की कीमत ₹390 से बढ़ाकर ₹428 तो गोल्ड फ्लेक सुपरस्टार के 10 के पैक की कीमत ₹79 से बढ़ाकर ₹89 कर दी है।

Billionbrains Garage Ventures (Groww)

वेंचर कैपिटल फर्म पीक XV पार्टनर्स के इन्वेस्टमेंट फंड पीक XV पार्टनर्स इंवेस्टमेंट्स VI-1 ने ग्रो में अपनी 1.46% हिस्सेदारी (9.17 करोड़ इक्विटी शेयर) ₹1,756.2 करोड़ में प्रति शेयर ₹191.49 के भाव पर बेच दी। यह Groww की पैरेंट कंपनी में पीक XV पार्टनर्स की 15.68% हिस्सेदारी का एक हिस्सा था।

Kanohar Electricals

ग्रो म्यूचुअल फंड ने ₹35.2 करोड़ में प्रति शेयर ₹740.38 के भाव पर पावर ट्रांसफॉर्मर बनाने वाली कंपनी कनोहर इलेक्ट्रिकल्स के 4.75 लाख शेयर (0.6% हिस्सेदारी) ₹35.2 करोड़ में खरीदे।

Glass Wall Systems India

प्राइवेट इक्विटी फर्म फर्स्ट ब्रिज इंडिया ग्रोथ फंड की प्रमोटेड फर्स्ट ब्रिज इंडिया ग्रोथ फंड ने लिस्टिंग के दिन ग्लास वाल सिस्टम्स के अतिरिक्त 6.03 लाख शेयर (0.68% हिस्सेदारी) ₹12 करोड़ में प्रति शेयर ₹198.75 के भाव पर खरीदे। लिस्टिंग के पहले इस फंड के पास कंपनी में 2.19% हिस्सेदारी थी। ऑथम इंवेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर ने प्रति शेयर ₹193.12 के भाव पर पर ₹19.13 करोड़ में 10 लाख शेयर, सीएसआईएम इंडिया अपॉर्च्यूनिटीज फंड 1 ने ₹194.31 के भाव पर ₹10.2 करोड़ में 5.25 लाख शेयर और एसआई इंवेस्टमेंट्स ब्रोकिंग ने ₹203.81 के भाव पर ₹10.19 करोड़ में 5 लाख शेयर खरीदे।

मेनबोर्ड लिस्टिंग: 6 स्टॉक्स

मणिपाल पेमेंट एंड आइडेंटिटी सॉल्यूशंस (Manipal Payment & Identity Solutions), रेंटोमोजो (Rentomojo), एसेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनी इंडिया (Asset Reconstruction Company India), स्टीम हाउस इंडिया (Steamhouse India), करमतारा इंजीनियरिंग (Karamtara Engineering) और एलसीसी प्रोजेक्ट्स (LCC Projects) के शेयर आज बीएसई और एनएसई पर लिस्ट होंगे।

एसएमई लिस्टिंग: 3 स्टॉक्स

आज विनोद टेक्सवर्ल्ड (Vinod Texworld) की एनएसई एसएमई पर एंट्री होगी तो इंफ्राक्स रिन्यूएबल (Infrax Renewable) और एमटेक एस्टर्स (Amtech Esters) के शेयर बीएसई एसएमई पर लिस्ट होंगे।

Stocks to Watch: इन पर भी रहेगी नजर

आज इन कंपनियों के आएंगे रिजल्ट: स्काईवेज एयर सर्विसेज, ओडिशा मिनरल्स डेवलपमेंट कंपनी

एक्स-डिविडेंड: एक्यूटस केमिकल्स, अग्रवाल इंडस्ट्रियल कॉर्पोरेशन, एशियन एनर्जी सर्विसेज, ऑसम एंटरप्राइज, बाल फार्मा, भारत रसायन, क्राफ्टरूट रिटेल, एस्टर इंडस्ट्रीज, एक्सेल इंडस्ट्रीज, फिल्ट्रा कंसल्टेंट्स एंड इंजीनियर्स, गुजरात फ्लोरोकेमिकल्स, हिमतसिंगका साइड, एचपीएल इलेक्ट्रिक एंड पावर, इंडो एमाइन्स, इंटरनेशनल कन्वेयर्स, इरकॉन इंटरनेशनल, केसीपी शुगर एंड इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन, लैंडमार्क कार्स, मेघना इन्फ्राकॉन इंफ्रास्ट्रक्चर, एमएसटीसी, ओरिएंट सेराटेक, पटेल इंटीग्रेटेड लॉजिस्टिक्स, प्रीमियर पॉलीफिल्म, रॉसेल टेकसिस, रूबी मिल्स, सनसेरा इंजीनियरिंग, श्री जगदंबा पॉलिमर्स, स्टार पेपर मिल्स, सनटेक रियल्टी, तमिलनाडु पेट्रोप्रोडक्ट्स, तमिलनाडु न्यूज़प्रिंट एंड पेपर्स, वेल्थ फर्स्ट पोर्टफोलियो मैनेजर्स

F&O बैन: आज बंधन बैंक, आईनॉक्स विंड, कीन्स टेक्नोलॉजी इंडिया, मणप्पुरम फाइनेंस, SAIL

स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचल के लिए यहां जुड़ें

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stocks to Watch: 18 स्टॉक्स; तीन लिस्टिंग और Groww, NBCC, BHEL समेत ये शेयर फोकस में

Stocks to Watch: अधिकतर एशियाई बाजारों से मजबूत रुझानों के बीच गिफ्ट निफ्टी से आज घरेलू मार्केट में ग्रीन शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी फिलहाल 32.50 प्वाइंट्स यानी 0.14% की बढ़त के साथ 23,235.00 पर है। एक कारोबारी दिन पहले 15 सितंबर को निफ्टी की वीकली एक्सपायरी के दिन सेंसेक्स (Sensex) 777.94 प्वाइंट्स यानी 1.04% की गिरावट के साथ 74,003.82 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 279.50 प्वाइंट्स यानी 1.19% की फिसलन के साथ 23,118.60 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।

Stocks to Watch: आज इन स्टॉक्स पर फोकस

Sunshine Pictures Q1 (YoY)

जून तिमाही में सालाना आधार पर सनशाइन पिक्चर्स ₹1.08 करोड़ के घाटे से ₹25 लाख के मुनाफे में आ गई तो इस दौरान रेवेन्यू रॉकेट की स्पीड से ₹4 लाख से ₹6.48 करोड़ पर पहुंच गया।

GMR Airports (August YoY)

अगस्त महीने में सालाना आधार पर जीएमआर एयरपोर्ट्स का पैसेंजर ट्रैफिक 0.9% बढ़कर 94.35 लाख पर पहुंच गया। इसमें डोमेस्टिक पैसेंजर ट्रैफिक 1.1% गिरकर 71 लाख पर आ गया तो इंटरनेशनल पैसेंजर ट्रैफिक 0.5% बढ़कर 24 लाख पर पहुंच गया। जहाजों की आवाजाही 6.3% बढ़कर 62,498 हो गई।

Billionbrains Garage Ventures (Groww)

सूत्रों के हवाले से सीएनबीसी-टीवी18 की रिपोर्ट के मुताबिक पीक XV पार्टनर्स इंवेस्टमेंट्स और सिकोईया कैपिटल ब्लॉक डील के जरिए ग्रो की पैरेंट कंपनी बिलियनब्रेन्स गैराज वेंचर्स के 10.02 करोड़ इक्विटी शेयर (1.6% हिस्सेदारी) बेच सकती है। ₹1918.3 करोड़ के इस इश्यू के लिए फ्लोर प्राइस प्रति शेयर ₹191.45 तय किया गया है।

VIP Industries

सात्विक ग्रीन एनर्जी को SECI (सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) से सोलर पीवी मॉड्यूल की सप्लाई के लिए ₹1041.63 करोड़ का ऑर्डर मिला है।

Sonata Software

सोनाटा सॉफ्टवेयर ने देश में क्लाउड ट्रांसफॉर्मेशन के मौकों को भुनाने को लेकर एमेजॉन वेब सर्विसेज (AWS) के साथ पांच साल का स्ट्रैटेजिक कोलैबोरेशन एग्रीमेंट किया है।

Bharat Heavy Electricals Ltd (BHEL)

भेल और टीटागढ़ रेल सिस्टम्स मिलकर 50:50 ज्वाइंट वेंचर कंपनी बनाएगी जो 35 वर्षों तक सप्लाई की गई वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट के मेंटेनेंस का काम संभालेगी।

NBCC (India)

एनबीसीसी (इंडिया) को नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन, SAIL, दामोदर वैली कॉरपोरेशन और एंफोर्समेंट डायरेक्टोरेट, भुवनेश्वर से ₹144.98 करोड़ के वर्क ऑर्डर मिले हैं।

India Pesticides

इंडिया पेस्टिसाइड्स को यूके में एक कीटनाशक प्रोडक्ट के लिए टेक्निकल इक्विवेलेंस अप्रूवल मिल गया है। इसके अलावा कंपनी को अर्जेंटीना में भी खरपतवार खत्म करने वाले एक प्रोडक्ट के लिए भी रजिस्ट्रेशन मिल गया है।

Blue Star

डब्ल्यूजे टोवेल एंड कंपनी यानी WJT ने दुबई कोर्ट ऑफ अपील में ब्लू स्टार के पक्ष में आए आर्बिट्रेशन अवार्ड को रद्द करने की मांग की है। इसे लेकर कंपनी का कहना है कि WJT ने बेबुनियाद आधार पर यह अपील की है और वह कोर्ट में इसके खिलाफ अपना पक्ष रखेगी।

GMM Pfaudler

अलेक्जेंडर पोम्पनर ने जीएमएफ फॉडलर के ग्रुप सीएफओ पद से इस्तीफा दे दिया है, जो 4 नवंबर, 2026 से प्रभावी होगा। बोर्ड ने 4 नवंबर से अंकित नय्यर को कंपनी का ग्रुप सीएफओ नियुक्त किया है।

VIP Industries

इक्विटी शेयर, डेट सिक्योरिटीज और कन्वर्टिबल सिक्योरिटीज जारी करके एक या इससे अधिक किश्तों में फंड जुटाने के प्रस्ताव पर विचार करने के लिए 18 सितंबर को वीआईपी इंडस्ट्रीज के बोर्ड की बैठक होनी है।

Aurobindo Pharma

अमेरिकी दवा नियामक एफडीए ने 7 से 15 सितंबर, 2026 के बीच तेलंगाना में अरबिंदो फार्मा की सब्सिडियरी एपिटोरिया फार्मा की एपीआई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट-II का निरीक्षण किया, और इसके बाद एक ऑब्जर्वेशन जारी हुआ।

Tata Communications

टाटा कम्युनिकेशंस, कनाडा और कनाडा रेवेन्यू एजेंसी के बीच कंपनी के इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशंस सर्विस बिजनेस से होने वाली कमाई पर टैक्स के दावों से जुड़े मामले को सुलझाने के लिए सैद्धांतिक रूप से सहमति बन गई है।

Blue Dart Express

बाल्फोर मैनुअल ने ब्लू डार्ट के एमडी पद से इस्तीफा दे दिया है, जो 29 नवंबर, 2026 से प्रभावी होगा। उनकी जगह आरएस सुब्रमण्यन 30 नवंबर से पद संभालेंगे।

Welspun Enterprises

ऑथम इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर ने ₹183.8 करोड़ में प्रति शेयर ₹765.02 के भाव पर वेलस्पन एंटरप्राइजेज के 24.02 लाख शेयर (1.73% हिस्सेदारी) बेच दी। वहीं फिडेलिटी सिक्योरिटीज फंड ने फिडेलिटी ब्लू चिप ग्रोथ फंड के जरिए प्रति शेयर ₹765 के भाव पर कंपनी के 19.23 लाख शेयर (1.38% हिस्सेदारी) ₹147.15 करोड़ में खरीदे।

Kanohar Electricals, Prasol Chemicals, Glass Wall Systems

आज बीएसई और एनएसई पर कनोहर इलेक्ट्रिकल्स, प्रसोल केमिकल्स और ग्लास वाल सिस्टम्स के शेयरों की एंट्री होगी।

Stocks to Watch: इन पर भी रहेगी नजर

आज आएगा रिजल्ट: टेंपसेंस इंस्ट्रूमेंट्स (इंडिया)

एक्स-डिविडेंड: 63 मून्स टेक्नोलॉजीज, एक्सेडेरे, अजमेरा रियल्टी एंड इंफ्रा इंडिया, एरेक्स इंडस्ट्रीज, एएसआई इंडस्ट्रीज, एटम वॉल्व्स, बेद फिनसर्व, बजाज स्टील, बन्नारी अम्मान शुगर्स, BLS इंटरनेशनल सर्विसेज, सिनेलाइन इंडिया, डी डेवलपमेंट इंजीनियर्स, डी नोरा इंडिया, डेंटा वॉटर एंड इंफ्रा सॉल्यूशंस, एल्डेको हाउसिंग एंड इंडस्ट्रीज, एम्बी इंडस्ट्रीज, गरवारे हाई-टेक फिल्म्स, गुजरात क्राफ्ट इंडस्ट्रीज, हिंदुस्तान कॉपर, इंडो टेक ट्रांसफॉर्मर्स, जश इंजीनियरिंग, मंगल कम्प्यूसॉल्यूशन, नॉर्दर्न स्पिरिट्स, द फॉस्फेट कंपनी, प्रकाश पाइप्स, प्रकाश इंडस्ट्रीज, रीगल रिसोर्सेज, राजपूताना स्टेनलेस, सलोना कॉटस्पिन, शिल्प ग्रेव्यूर्स, सिग्मा सॉल्व, स्टेलेंट सिक्योरिटीज (इंडिया), टैनफैक इंडस्ट्रीज, यूनाइटेड ड्रिलिंग टूल्स, विजया डायग्नोस्टिक सेंटर, विनती ऑर्गेनिक्स, वीएसटी टिलर्स ट्रैक्टर्स, डब्ल्यूएसएफएक्स ग्लोबल पे, जोडिएक एनर्जी

एक्स-राइट्स: टुनी टेक्सटाइल मिल्स

F&O बैन: आज बंधन बैंक, आईनॉक्स विंड, कीन्स टेक्नोलॉजी इंडिया, मणप्पुरम फाइनेंस, SAIL

स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचल के लिए यहां जुड़ें

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Tukaram Mundhe: तुकाराम मुंढे का एक और बड़ा एक्शन! 2,841% वाले मुनाफे पर इस रिपोर्ट से हंगामा

Tukaram Mundhe Action: अपनी कड़क कार्यशैली और भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिए चर्चित आईएएस अधिकारी और महाराष्ट्र FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे एक बार फिर जबर्दस्त चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने प्राइवेट अस्पतालों और मेडिकल डिवाइस कंपनियों पर चाबुक चलाई है।

महाराष्ट्र एफडीए के एक चौकाने वाले सर्वे में सामने आया है कि अस्पताल जो सर्जिकल सामान (IV सेट्स, सिरिंज, कैथेटर) कौड़ियों के भाव खरीदते हैं, उन पर मरीजों से 2,841% (28 गुना से भी ज्यादा) तक का भारी-भरकम मुनाफा वसूला जा रहा है। तुकाराम मुंढे ने इस ‘अस्पताल लूट’ का कच्चा चिट्ठा केंद्र सरकार के पाले में फेंकते हुए सख्त नियम बनाने की मांग की है।

FDA के सर्वे में आए होश उड़ाने वाले आंकड़े

महाराष्ट्र एफडीए के सर्वे ‘सर्जिकल आइटम्स की खरीद और बिक्री कीमत में अंतर’ की रिपोर्ट में जो खुलासे हुए हैं, वे हर किसी को हैरान कर रहे हैं। IV इंफ्यूजन सेट जिससे सलाइन चढ़ाया जाता है उसे प्राइवेट अस्पताल कंपनियों से महज ₹11.05 में खरीदते हैं, लेकिन मरीज के बिल में एमआरपी चिपकाकर ₹325 वसूले जाते हैं। वैसे ही कैथेटर अस्पतालों को मात्र ₹29.41 में मिलता है, लेकिन मरीज से इसकी कीमत ₹310 ली जाती है।

सिरिंज, नेबुलाइजर, ऑक्सीजन मास्क और कैथेटर जैसे रोजमर्रा के मेडिकल सामानों पर खरीद मूल्य और एमआरपी के बीच 2841% तक का विशाल अंतर पाया गया।

तुकाराम मुंढे ने इस सर्वे रिपोर्ट के आधार पर फार्मास्यूटिकल्स विभाग और नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइजिंग अथॉरिटी (NPPA) को चिट्ठी लिखकर ट्रेड मार्जिन पर कैपिंग लगाने की मांग की है।

मुंढे ने डे दी सख्त चेतावनी

तुकाराम मुंढे अपने सख्त और बेबाक फैसलों के लिए जाने जाते हैं। इस मामले पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने साफ कहा, ‘यह केवल कीमत का मामला नहीं है, बल्कि यह मरीज के अधिकारों और सुरक्षा का मुद्दा है। अस्पताल में भर्ती लाचार मरीज के पास यह जांचने का कोई जरिया या जानकारी नहीं होती कि उससे जो सामान का दाम वसूला जा रहा है, वह जायज है या नहीं।’

वैसे इस बड़े खुलासे के बाद केंद्र सरकार का प्राइजिंग रेगुलेटर राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण(NPPA) हरकत में आ गया है। एनपीपीए अधिकारियों के अनुसार, वे कंपनियों की फाइलिंग्स और अंदरूनी रेट लिस्ट का मिलान महाराष्ट्र एफडीए के सर्वे से कर रहे हैं।

केवल महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि पंजाब, राजस्थान और तमिलनाडु के ड्रग कंट्रोल

अधिकारियों ने भी अस्पतालों द्वारा सर्जिकल सामानों पर वसूले जा रहे इस मोटे मार्जिन की शिकायत केंद्र से की है।

नियम क्या कहते हैं और अस्पताल क्या दे रहे सफाई?

ड्रग्स प्राइज कंट्रोल ऑर्डर (DPCO) के तहत एनपीपीए कुछ जरूरी दवाओं और डिवाइसेस (जैसे- कोरोनरी स्टेंट या नी इम्प्लांट) की अधिकतम कीमत तय करता है। लेकिन गैर-सूचीबद्ध डिवाइसेस पर केवल इतना नियम है कि कोई कंपनी 12 महीने में 10% से ज्यादा एमआरपी नहीं बढ़ा सकती। इसी ढील का फायदा उठाकर कंपनियां शुरू से ही एमआरपी कई गुना बढ़ाकर प्रिंट करती हैं।

आकाश हेल्थकेयर के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. आशीष चौधरी के मुताबिक, नियमों में पारदर्शिता जरूर होनी चाहिए, लेकिन यह भी ध्यान रखना होगा कि अस्पतालों को अपना ढांचा, तकनीक और मरीज की सुरक्षा बनाए रखने के लिए वित्तीय रूप से मजबूत रहना जरूरी है।

एक्शन मोड में ‘सिंघम’ अधिकारी

आईएएस तुकाराम मुंढे अपने पूरे करियर में सिस्टम की खामियों पर कड़ा प्रहार करने के लिए जाने जाते हैं। इस साल की शुरुआत में ही मुंबई के फूड सेक्टर में चले उनके सख्त चेकिंग अभियान के बाद स्वच्छता मानकों का उल्लंघन करने पर कई बड़े ईटिंग जॉइंट्स और रेस्टोरेंट्स पर ताले लटक गए थे। अब मेडिकल सेक्टर में उनकी इस एंट्री से अस्पतालों और डिवाइस निर्माताओं के बीच हड़कंप मचा हुआ है।

अस्पतालों में मिलने वाले सर्जिकल कंज्यूमेबल्स पर मार्जिन की कोई सीमा न होना स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र की सबसे बड़ी कमियों में से एक है। जब तक केंद्र सरकार एनपीपीए के जरिए इन मेडिकल डिवाइसेस पर ट्रेड मार्जिन रशनलाइजेशन लागू नहीं करती, तब तक आम जनता को एमआरपी के नाम पर होने वाली इस लीगल लूट से राहत मिलना मुश्किल है।