कैंसर की 137 दवाइयां हो सकती हैं 70% तक सस्ती, NPPA ने मुनाफे पर लगाई 30% की कैप

ड्रग प्राइसिंग रेगुलेटर NPPA ने शनिवार को 137 कैंसर-रोधी (Anti-Cancer) नॉन-शेड्यूल्ड दवाओं के ट्रेड मार्जिन यानि कि मुनाफे को 30 प्रतिशत तक सीमित कर दिया। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने बयान में कहा कि यह फैसला 9 नवंबर से प्रभावी होगा। इससे इन दवाओं की खुदरा कीमतें मौजूदा प्राइस स्ट्रक्चर के आधार पर 70 प्रतिशत तक घटने की उम्मीद है।

नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने शनिवार को एक गजट नोटिफिकेशन जारी होने के बाद ड्रग्स (प्राइसेज कंट्रोल) ऑर्डर, 2013 के पैराग्राफ 19 के तहत ट्रेड मार्जिन रेशनलाइजेशन (TMR) व्यवस्था लागू की है। NPPA, डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्यूटिकल्स के तहत काम करता है।

मंत्रालय के अनुसार, यह कदम स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) के तहत गठित विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों पर बेस्ड है। इस समिति में देशभर के नामी कैंसर विशेषज्ञ, मेडिकल स्पेशलिस्ट्स, अस्पतालों के प्रतिनिधि और सरकारी अधिकारी शामिल थे। समिति ने ट्रेड मार्जिन को तर्कसंगत बनाने के लिए 137 दवाओं की सिफारिश की थी। इस लिस्ट को समय-समय पर अपडेट किया जाएगा।

2019 में भी की थी ऐसी पहल

यह पहल NPPA के 2019 के एक पायलट पर बेस्ड है। उस समय 42 कैंसर रोधी दवाओं पर ट्रेड मार्जिन 30 प्रतिशत तय किया गया था। इसके परिणामस्वरूप 526 ब्रांड्स की दवाओं के मैक्सिमम रिटेल प्राइस (MRP) में 90 प्रतिशत तक की कमी आई थी। मंत्रालय ने कहा है कि नई व्यवस्था के तहत अब कहीं अधिक संख्या में कैंसर की दवाओं को शामिल किया गया है।

दवा कंपनियों को दवाओं की रिवाइज्ड प्राइस लिस्ट अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर पब्लिश करने और खुदरा विक्रेताओं व अस्पतालों तक इसकी जानकारी व्यापक रूप से पहुंचाने का निर्देश दिया गया है। खुदरा विक्रेताओं और अस्पतालों को 9 नवंबर से संशोधित दरों पर ही दवाएं बेचनी होंगी और अपनी फार्मेसी में नई कीमतों को डिस्प्ले करना होगा। जो अस्पताल कैंसर की दवाओं का एक बड़ा हिस्सा सीधे खरीदते हैं, उन्हें अपनी वेबसाइट्स पर नई कीमतें प्रमुखता से दर्शानी होंगी। साथ ही यह सुनिश्चित करने की सीधी जिम्मेदारी भी उन्हीं की होगी कि इन संशोधित कीमतों को वास्तव में लागू किया जाए।

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उपभोक्ता ऐसे पता कर सकते हैं सही कीमतें

उपभोक्ता NPPA की वेबसाइट और ‘फार्मा सही दाम’ मोबाइल ऐप के जरिए दवाओं की अपडेटेड कीमतों की जांच कर सकते हैं। इन नियमों का सख्ती से पालन कराने के लिए राज्यों के ड्रग कंट्रोलरों को निर्देश दिया गया है कि वे मैन्युफैक्चरर्स, डीलर्स, खुदरा विक्रेताओं, अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों में इनका अनुपालन सुनिश्चित कराएं। दवा कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे नोटिफाइड दवाओं के अपने मौजूदा उत्पादन और आपूर्ति स्तर को बनाए रखें, ताकि देश भर के मरीजों को जरूरी दवाएं बिना किसी रुकावट के और समय पर मिलती रहें।

बांग्लादेश में पिस्तौल लेकर ड्रग्स तस्करों को पकड़ने पहुंचे मंत्री:6 लोगों को पकड़ा, पुलिस बोली- उन्हें ऐसा करने का अधिकार नहीं

बांग्लादेश में एक मंत्री का हाथ में पिस्तौल लेकर ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई करने का वीडियो सामने आया है। मंत्री इशराक हुसैन राजधानी ढाका की एक बस्ती में अपने साथियों के साथ पिस्तौल लेकर घूमते, लोगों से बात करते दिख रहे हैं। उनके साथ के लोग स्थानीय निवासियों को पकड़ते और तिरपाल से बनी झोपड़ियां तोड़ते दिख रहे हैं। यह घटना शनिवार को गेंडारिया इलाके में हुई। मंत्री और उनके लोगों ने 6 लोगों को पकड़कर पुलिस के हवाले किया। वीडियो सामने आने के बाद मंत्री के ऐसा करने को लेकर आलोचना हो रही है। पुलिस ने भी साफ किया है कि छापेमारी का अधिकार कानून लागू करने वाली एजेंसियों के पास है। मंत्री की कार्रवाई से जुड़े 3 फुटेज… मंत्री ने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट किया बांग्लादेश के राज्य मंत्री इशराक हुसैन ने बाद में अपने फेसबुक पेज पर कार्रवाई का वीडियो पोस्ट किया। उन्होंने दावा किया कि कार्रवाई के दौरान 6 लोगों को पकड़ा गया। हालांकि, ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस के डिप्टी कमिश्नर मलिक अहसान उद्दीन सामी ने बताया कि पुलिस 10 लोगों को गेंडारिया थाने लेकर गई। उनके मुताबिक, मंत्री ने कुछ लोगों को पकड़ने के बाद पुलिस को सूचना दी थी। पुलिस ने जांच के बाद उन्हें हिरासत में लिया। पुलिस अधिकारी ने कहा कि छापेमारी करने का अधिकार केवल कानून लागू करने वाली एजेंसियों को है। हालांकि, बांग्लादेश में कोई भी नागरिक अपराध के संदिग्ध व्यक्ति को पकड़कर पुलिस के हवाले कर सकता है। गेंडारिया थाने के प्रभारी मोनिरुज्जमान मोनिर ने बताया कि पकड़े गए लोगों के पास से सफेद पाउडर जैसा पदार्थ मिला है। लेकिन यह ड्रग्स है या नहीं, इसकी पुष्टि प्रयोगशाला में जांच के बाद ही होगी। अपनी पार्टी के लोगों को भी चेतावनी दी इशराक ने कहा कि ड्रग्स की वजह से देश के युवा बर्बाद हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि वे पिछले 6 महीने से इस मामले में जानकारी जुटा रहे थे। मंत्री ने कहा कि अगर उनकी अपनी पार्टी का कोई व्यक्ति ड्रग्स के कारोबार में शामिल पाया गया, तो उसे और कड़ी सजा मिलनी चाहिए। यह उनकी कार्रवाई का सबसे अहम राजनीतिक पहलू है। उन्होंने कहा, ड्रग्स के खिलाफ यह अभियान मेरे निर्वाचन क्षेत्र से शुरू हुआ है। यह पूरे बांग्लादेश में फैलेगा। देश में कहीं भी ड्रग्स के लिए जगह नहीं होगी। मंत्री ने कहा कि जो लोग बाहर से आकर ड्रग्स की सप्लाई करने वालों को पकड़ने में मदद करेंगे, उन्हें वे सम्मान देंगे। लोगों ने हाथ जोड़कर छोड़ने की गुहार लगाई खबर के मुताबिक, पकड़े गए लोगों ने हाथ जोड़कर छोड़ने की अपील की। इस पर मंत्री ने उन्हें भरोसा दिलाया कि कोई उन्हें मारेगा नहीं। उन्हें पुलिस के हवाले किया जाएगा और कानून के मुताबिक कार्रवाई होगी। मंत्री ने कहा, “कोई तुम्हें हाथ नहीं लगाएगा और न ही तुम्हें नुकसान पहुंचाएगा। तुम्हें थाने ले जाया जाएगा और पुलिस जरूरी कार्रवाई करेगी। हम यहां तुम्हें पीटने नहीं आए हैं। देश कानून से चलेगा। तुम्हारा मुकदमा चलेगा और न्यायिक प्रक्रिया के तहत सजा मिलेगी।”

मस्क ने यूक्रेन में स्टारलिंक इंटरनेट की स्पीड घटाई:रूस के खिलाफ सेना के ऑपरेशन पर असर; यही सर्विस भारत में शुरू करना चाहते है मस्क

अमेरिकी अरबपति इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने यूक्रेन में स्टारलिंक इंटरनेट की स्पीड पर लिमिट लगा दी है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के सलाहकार सेरही बेस्क्रेस्टनोव ने बुधवार को बताया कि इस फैसले से रूस के खिलाफ लड़ रही यूक्रेनी सेना के कई ऑपरेशन पर असर पड़ा है। उनके मुताबिक, सेना को इस बदलाव की पहले से जानकारी नहीं दी गई थी। यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने भी कनेक्टिविटी में रुकावट की पुष्टि की है। खास बात यह है कि मस्क यही स्टारलिंक सर्विस भारत में शुरू करना चाहते हैं। इसे लेकर हाल ही में उन्होंने भारत सरकार पर भेदभाव के आरोप लगाए थे। 160 की रफ्तार से तेज चलते ही इंटनेट धीमा जेलेंस्की के सलाहकार सेरही के मुताबिक अब 160 किमी प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार से चलने पर स्टारलिंक का इंटरनेट धीमा हो रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि यह फैसला मौजूदा राजनीतिक हालात से जुड़ा हो सकता है। हालांकि उन्होंने इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी। BBC ने यूक्रेनी रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी के हवाले से बताया कि इंटरनेट की रफ्तार धीमी होने से सेना के सामान पहुंचाने, ड्रोन चलाने और हमले से जुड़े मिशनों में परेशानी आ रही है। स्पेसएक्स ने इस मामले पर अब तक सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है। रूस के ड्रोन रोकने में भी काम आता है स्टारलिंक स्टारलिंक अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट के जरिए इंटरनेट देता है। यूक्रेनी सेना इसका इस्तेमाल सैनिकों के बीच संपर्क बनाए रखने और दूर बैठे ड्रोन चलाने के लिए करती है। इन ड्रोन से रूसी ठिकानों पर हमले किए जाते हैं। सलाहकार सेरही के मुताबिक, स्टारलिंक की मदद से ऐसे ड्रोन भी चलाए जाते हैं, जो रूस के नए जेट इंजन वाले ड्रोन को हवा में रोकने की कोशिश करते हैं। इससे पहले मस्क ने फरवरी में रूसी सेना के लिए स्टारलिंक बंद कर दिया था। इससे रूस को यूक्रेन में लड़ाई लड़ने में परेशानी हुई और उसके कमांडरों और सैनिकों के बीच तालमेल बिगड़ गया था। रूस के हमलों से 6 लाख लोग बिना बिजली के रहे राष्ट्रपति जेलेंस्की के मुताबिक, रूस के मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद यूक्रेन में कम से कम 6 लाख लोग बिजली के बिना रहने पर मजबूर हैं। रूस ने राजधानी कीव, उसके आसपास के इलाकों में बिजली से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, कीव में तीन लोगों की मौत हुई। यूक्रेन की वायुसेना के मुताबिक, रूस ने रातभर में 39 मिसाइलें और 128 ड्रोन दागे। इनमें से चार मिसाइलों और 115 ड्रोन को मार गिराया गया। वहीं, रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि रातभर में रूस के अलग-अलग इलाकों में यूक्रेन के 902 ड्रोन मार गिराए गए। इनमें मॉस्को और क्रीमिया के ऊपर गिराए गए ड्रोन भी शामिल हैं। क्रीमिया पर रूस ने 2014 में कब्जा कर लिया था। ट्रम्प के सीजफायर के दावे के बाद भी हमले जारी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को दावा किया था कि रूस और यूक्रेन ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए सहमत हो गए हैं। यह रोक तुरंत लागू होनी थी, लेकिन हमले जारी रहे। जेलेंस्की ने कहा था कि यूक्रेन रूस की तेल रिफाइनरियों और दूसरे ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोक देगा, अगर रूस भी ऐसा करता है। जेलेंस्की ने आरोप लगाया कि ट्रम्प प्रशासन ने सीजफायर पर सहमति नहीं बनने पर यूक्रेन को खुफिया जानकारी देना बंद करने की धमकी दी थी। ट्रम्प ने मंगलवार को इस आरोप से इनकार किया। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि यूक्रेन सीजफायर से राहत पाने का हकदार नहीं है। उन्होंने आशंका जताई कि इस दौरान यूरोपीय देश यूक्रेन को और हथियार दे सकते हैं। रूस ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर हमला शुरू किया था। फिलहाल यूक्रेन का करीब 20% इलाका रूस के कब्जे में है। भारत में भी स्टारलिंक शुरू करना चाहते हैं मस्क यूक्रेन में स्टारलिंक की स्पीड घटाने की खबर ऐसे समय आई है, जब मस्क भारत में भी यही इंटरनेट सर्विस शुरू करना चाहते हैं। स्टारलिंक की खासियत यह है कि यह जमीन पर बिछी इंटरनेट केबल या मोबाइल टावर के बजाय अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट से इंटरनेट देता है। इससे उन गांवों, पहाड़ी इलाकों और दूरदराज की जगहों पर इंटरनेट पहुंचाया जा सकता है, जहां मोबाइल नेटवर्क या ब्रॉडबैंड की सुविधा नहीं है। मस्क भारत में सस्ते प्लान लाने की बात कह चुके हैं। उनका कहना है कि नई कंपनी आने से इंटरनेट कंपनियों के बीच मुकाबला बढ़ेगा और इसका फायदा ग्राहकों को मिलेगा। भारत में स्टारलिंक का मुकाबला रिलायंस जियो और एयरटेल जैसी कंपनियों से होगा। ये कंपनियां पहले से कम कीमत पर इंटरनेट सेवाएं दे रही हैं। इसलिए भारत में स्टारलिंक की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि वह ग्राहकों को किस कीमत पर इंटरनेट देती है। भारत में सर्विस शुरू करने के लिए अभी मंजूरियां जरूरी भारत सरकार ने सैटेलाइट इंटरनेट सेवा के लिए जियो सैटकॉम, एयरटेल की सहयोगी कंपनी यूटेलसेट वनवेब और स्टारलिंक को लाइसेंस दिए हैं। लेकिन सिर्फ लाइसेंस मिलने से सर्विस शुरू नहीं की जा सकती। इसके लिए सुरक्षा से जुड़ी मंजूरियां और सैटेलाइट के जरिए इंटरनेट देने में इस्तेमाल होने वाली रेडियो फ्रीक्वेंसी की कीमत तय होना भी जरूरी है। भारत में स्टारलिंक की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि उसके प्लान कितने सस्ते होते हैं, नेटवर्क कितना अच्छा चलता है और कंपनी को कब तक सभी जरूरी मंजूरियां मिलती हैं। अंडमान और मणिपुर में मिले थे स्टारलिंक डिवाइस 2024 में भारतीय एजेंसियों को अंडमान-निकोबार में ड्रग्स तस्करी की जांच के दौरान और मणिपुर में सेना के एक ऑपरेशन के समय स्टारलिंक डिवाइस मिले थे। उस समय मस्क ने कहा था कि स्टारलिंक की सर्विस भारत में कभी चालू ही नहीं हुई। उन्होंने दावा किया था कि मिले हुए उपकरण स्टारलिंक के सैटेलाइट नेटवर्क का इस्तेमाल नहीं कर सकते थे। स्टारलिंक के उपकरणों में एक डिश, वाई-फाई राउटर, बिजली की केबल और डिश को लगाने के लिए स्टैंड होता है। इंटरनेट चलाने के लिए डिश को ऐसी जगह रखा जाता है, जहां से आसमान साफ दिखाई दे। कंपनी का मोबाइल ऐप इसे सेट करने और नेटवर्क की स्थिति देखने में मदद करता है। यूक्रेन में स्पीड रोकने से स्टारलिंक पर सवाल उठे यूक्रेन में स्टारलिंक की स्पीड पर लगी रोक से यह सवाल उठा है कि जब सेना किसी निजी कंपनी की इंटरनेट सर्विस पर निर्भर हो, तो कंपनी के तकनीकी फैसलों का उसके काम पर कितना असर पड़ सकता है। भारत में स्टारलिंक का इस्तेमाल मुख्य रूप से इंटरनेट की सुविधा से वंचित इलाकों तक कनेक्टिविटी पहुंचाने के लिए हो सकता है। इसलिए यूक्रेन के मामले का यह मतलब नहीं है कि भारत में भी ऐसी ही स्थिति बनेगी। लेकिन यह जरूर दिखाता है कि सैटेलाइट इंटरनेट देने वाली कंपनियों की तकनीक पर निर्भरता बढ़ने के साथ उनके फैसलों का महत्व भी बढ़ जाता है।

NPPA Cancer Drug Pricing: कैंसर की दवाओं के दाम पर सरकार का बड़ा फैसला, 70% तक सस्ती हो सकती हैं दवाएं

NPPA Cancer Drug Pricing: कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जिसकी चपेट में आने वाले मरीज के साथ-साथ उसका पूरा परिवार जूझता है। यह बीमारी शरीर ही नहीं, आत्मबल और आर्थिक स्थिति को भी चोट पहुंचाती है। बहुत से मरीज और उनके परिजन इसका इलाज तक पूरा नहीं कर पाते हैं। लेकिन सरकार के इस कदम से कैंसर की बीमारी से जूझ रहे मरीजों और उनके परिजनों को बड़ी राहत मिल सकती है। सरकार इस जानलेवा बीमारी की दवाओं के दाम 70% तक घटाने की तैयारी कर रही है। सरकार ने कुछ कैंसर दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन अधिकतम 30% तक सीमित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

कैंसर की अन्य दवाओं को मूल्य सुरक्षा देना

सरकार ने गैर सूचीबद्ध कैंसररोधी दवाओं की आपूर्ति और बिक्री में लगने वाले मार्जिन को सीमित करने को मंजूरी दे दी है। ये मार्जिन अधिकतम बिक्री मूल्य (MRP) के 30% तक सीमित होंगे। इस कदम से दवाओं की कीमतें 70% तक कम होने और कैंसर के मरीजों को हर साल ₹2,500 करोड़ बचाने में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे उनकी जेब से चुकाने वाली रकम में काफी कमी आएगी।

शेड्यूल्ड लिस्ट में शामिल जरूरी कैंसर की दवाएं पहले से ही सरकार द्वारा तय की गई सख्त सीलिंग प्राइस के तहत हैं। लेकिन इस सूची से बाहर गैर सूचीबद्ध कैंसर दवाओं को सरकार के नए फैसले से मूल्य सुरक्षा मिलेगी। मरीजों तक पहुंचने से पहले दवाओं पर जोड़े जाने वाले मार्जिन को सीमित किया जाएगा।

डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) के तहत एक विशेषज्ञ समिति कवर की जाने वाली दवाओं की सूची को अंतिम रूप देगी। नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) फिर फैसला लेगी और अधिसूचना जारी करेगी।

कम होगा कैंसर के इलाज का भारी खर्च

भारत में कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं, हर एक लाख की आबादी पर लगभग 60 लोग कैंसर से प्रभावित हैं। इलाज से मरीजों और उनके परिवारों पर पैसे का भारी बोझ पड़ता है। एनपीपीए के मार्केट डेटा के एनालिसिस में पाया गया कि गैर सूचीबद्ध कैंसररोधी दवाओं की कीमत में औसतन लगभग 170% का मार्क-अप होता है। कुछ मामलों में यह 700% या उससे भी अधिक हो जाता है। आसान शब्दों में कहें तो, मरीज तक पहुंचने से पहले सप्लाई चेन से गुजरने वाली दवा की कीमत तेजी से बढ़ जाती है। रिटेल फार्मेसी, हॉस्पिटल फार्मेसी या ऑनलाइन फार्मेसी से खरीदी गई दवाओं की कीमतें भी काफी अलग-अलग होती हैं।

महाराष्ट्र, राजस्थान और कर्नाटक सहित राज्य अधिकारियों ने, मरीजों और सिविल सोसाइटी के साथ मिलकर दवाओं की बहुत ज्यादा कीमतों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। इन चिंताओं पर सार्वजनिक मंचों पर भी आवाज उठाई गई है। खासकर जिस कीमत पर दवाएं बेचने के लिए खरीदी जाती हैं और कंज्यूमर से ली जाने वाली MRP के बीच बड़े अंतर को लेकर।

महंगी कैंसर की दवाओं पर इतना अधिक मार्जिन मरीजों के इलाज का खर्च काफी बढ़ा देता है। नई लिमिट से बहुत ज्यादा मुनाफाखोरी पर रोक लगेगी, बाजार में गलत कीमत तय करने के तरीकों पर ध्यान दिया जाएगा और मरीजों के लिए सही कीमतें पक्का करने में मदद मिलेगी।

2019 के फैसले से मिली राहत को आगे बढ़ाना

फरवरी 2019 में, सरकार के निर्देश पर, एनपीपीए ने ड्रग्स (प्राइस कंट्रोल) ऑर्डर, 2013 के पैराग्राफ 19 के तहत 42 चुनी हुई नॉन-शेड्यूल्ड एंटी-कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन की लिमिट लगा दी थी। सरकार के इस दखल से पता चलता है कि मार्जिन को सीमित करने से मरीजों को बड़ी राहत मिल सकती है।

उस फैसले से MRP 91% तक कम हो गई, जिससे 526 ब्रांड पर सालाना ₹984 करोड़ की बचत हुई। इससे कैंसर के मरीजों पर पैसे का बोझ काफी कम हुआ और उनकी जिंदगी आसान हुई। इससे सबक लेते हुए और सप्लाई चेन में कीमत की समस्याओं को दूर करते हुए, सरकार ने अब बड़ी लिमिट को मंजूरी दे दी है।

उत्पादन बनाए रखना और लगातार उपलब्धता पक्का करना

कैंसर की जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए नॉन-शेड्यूल्ड एंटी-कैंसर दवाओं के मैन्युफैक्चरर्स को अपने मौजूदा उत्पादन स्तर को बनाए रखना होगा। इस हस्तक्षेप में ब्रांडेड और जेनेरिक, देश में बनी और आयातित, पेटेंटेड और नॉन-पेटेंटेड, सभी श्रेणी की गैर सूचीबद्ध कैंसररोधी दवाएं शामिल होंगी। इससे मरीजों को कम कीमतों का काफी फायदा होगा। साथ ही, उन्हें जरूरी दवाएं लगातार मिलती रहेंगी।

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महाराष्ट्र FDA ने Cipla के दवा गोदाम का लाइसेंस किया रद्द, क्या सोमवार को शेयर में मचेगी भगदड़

महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड के खिलाफ एक एक्शन लिया है। इसके तहत कंपनी के पुणे के वडकी स्थित कैरिंग एंड फॉरवर्डिंग (C&F) वेयरहाउस का सेल और डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस रद्द कर दिया गया है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, FDA ने शुक्रवार को बयान में कहा कि यह कार्रवाई बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में नए सिरे से कार्यवाही पूरी करने के बाद की गई है। सिप्ला फार्मा, सिप्ला लिमिटेड की सब्सिडियरी है।

इससे पहले FDA ने 27 अगस्त 2026 को एक कार्रवाई की थी। उस समय विभाग ने रिएक्टिन प्लस टैबलेट की पैकेजिंग, स्टोरेज, डॉक्युमेंटेशन और बाजार से दवा वापस लेने की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के चलते गोदाम के खिलाफ एक्शन लिया था। FDA ने तब कहा था कि डॉक्टर की पर्ची पर मिलने वाली इस ‘शेड्यूल एच’ दवा ‘रिएक्टिन प्लस’ की पैकेजिंग पर अनऑथराइज्ड दावे किए गए थे। साथ ही गोदाम में कई कमियां पाई गई थीं।

FDA का नया आदेश 1 अक्टूबर को असिस्टेंट कमिश्नर (ड्रग्स), डिवीजन 3, FDA पुणे ने पास किया। विभाग की ओर से बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में अपनी पिछली कार्यवाही वापस लेने के बाद यह आदेश जारी किया गया।

Cipla का क्या है कहना

FDA के एक्शन पर एक बयान में सिप्ला ने कहा है कि वह दवाओं की क्वालिटी और मरीजों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। कंपनी के मुताबिक, ‘पुणे में हमारे वडकी C&FA को लेकर महाराष्ट्र FDA का फैसला निराशाजनक है। हमारा मानना ​​है कि हमारा पुणे C&FA वेयरहाउस डिस्ट्रीब्यूशन और स्टोरेज प्रोटोकॉल और डिजिटल रिकॉर्ड-कीपिंग स्टैंडर्ड्स के मुताबिक काम करता है।’ कंपनी आदेश की समीक्षा कर रही है और आगे के विकल्पों पर विचार कर रही है।

संशोधित कारण बताओ नोटिस हुआ था जारी

बयान के अनुसार, FDA ने 4 सितंबर को सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज को संशोधित कारण बताओ नोटिस जारी किया था। सिप्ला ने 11 सितंबर को अपना लिखित जवाब दिया और उसे 21 सितंबर को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया गया। प्राधिकरण ने नया आदेश जारी करने से पहले कंपनी के जवाब, सुनवाई के दौरान दी गई दलीलों, निरीक्षण के निष्कर्षों, उपलब्ध रिकॉर्ड और लागू कानूनी प्रावधानों पर विचार किया। FDA ने कहा कि इसलिए यह फैसला केवल पिछली कार्रवाई को दोहराना नहीं है, बल्कि अदालत के निर्देशों के अनुरूप पूरी प्रक्रिया नए सिरे से पूरी करने के बाद लिया गया स्वतंत्र नियामकीय निर्णय है।

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FDA की त्योरियां चढ़ने की मुख्य वजह

इस मामले में प्रमुख मुद्दों में से एक है- ‘शेड्यूल एच’ दवा रिएक्टिन प्लस। सिप्ला फार्मा के वडकी गोदाम के निरीक्षण के दौरान FDA ने पाया कि दवा की पैकेजिंग पर इसे दर्द निवारक बताया गया था। सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, कमर दर्द, जोड़ों के दर्द, मोच, शरीर में दर्द और दांत दर्द जैसी स्थितियों में इसके इस्तेमाल को बढ़ावा देने वाले दावे किए गए थे। FDA का कहना है कि दवा की पैकेजिंग पर एक मानव आकृति भी थी और दवा को मांसपेशियों के दर्द से राहत देने वाली बताया गया था।

विभाग के अनुसार, पैकेज पर किए गए दावे, शब्द और चित्र लागू कानूनी प्रावधानों के अनुरूप नहीं थे और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत गलत लेबलिंग का मामला बनता था। FDA ने दवा के मार्केटर के रूप में कंपनी की कानूनी जिम्मेदारियों पर भी विचार किया। इसका कहना है कि केवल मैन्युफैक्चरर की भूमिका का हवाला देकर इन जिम्मेदारियों से बचा नहीं जा सकता। FDA ने दवा का स्टॉक जब्त कर उसे बाजार से वापस लेने का निर्देश दिया था।

विभाग ने स्टोरेज और वेयरहाउस मैनेजमेंट में कई कमियां भी गिनाईं। इनमें निर्धारित फॉर्म-35 इंस्पेक्शन बुक का नहीं होना, पर्याप्त पैलेट या रैक नहीं होने के कारण दवाओं के डिब्बों का सीधे फर्श पर रखा जाना, दवाओं के स्टॉक पर धूल जमा होना और साफ-सफाई में कमी शामिल हैं। FDA ने यह भी पाया कि एक्सपायर हो चुकी दवाओं के लिए अलग से ऐसा कोई निर्धारित स्थान नहीं था, जिस पर स्पष्ट रूप से ‘एक्सपायरी-नॉट फॉर सेल’ लिखा हो। एक्सपायर हो चुकी दवाओं के निपटान यानि डिस्पोजल से जुड़े आवश्यक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर और रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं थे। रेगुलेटर ने खरीद और बिक्री के चालानों में भी कमियां पाईं। इनमें बिक्री चालानों की डुप्लीकेट कॉपी पर साइन न होना, कंप्यूटराइज्ड या एसएपी रिकॉर्ड और दवा के फिजिकल स्टॉक में अंतर शामिल था।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

अमेरिका-मौत के 2 इंजेक्शन देने के बाद भी महिला बची:धड़कन चल रही थी, नींद में खर्राटे लेती रही; मौत की सजा टली

अमेरिका में मौत की सजा पाने वाली एक महिला कैदी को बुधवार को मौत के 2 इंजेक्शन दिए गए लेकिन इसके बाद भी उसकी जान नहीं गई। उसकी धड़कन चलती रही और वह नींद में खर्राटे ले रही थी। मामला अमेरिका के टेनेसी राज्य का है। क्रिस्टा गेल पाइक नाम की महिला 1995 में हत्या के मामले में दोषी करार की गई थी। उसे एक साल बाद मौत की सजा सुनाई गई थी। हालांकि अब उसकी सजा टाल दी गई है। मौत का इंजेक्शन देने के दौरान क्या हुआ अमेरिका में इंजेक्शन देने के बाद भी जान बचने का यह पहला मामला डेथ पेनल्टी इंफॉर्मेशन सेंटर की कार्यकारी निदेशक रॉबिन एम. माहेर ने इसे बेहद असाधारण मामला बताया। उनके मुताबिक, अब तक 7 लोग ऐसे रहे हैं जिनकी नस में मौत का इंजेक्शन देने में दिक्कत हुई और प्रक्रिया के दौरान मेडिकल टीम की गलती की वजह से वे बच गए। लेकिन मौत के इंजेक्शन में इस्तेमाल होने वाली दवा शरीर में पहुंचने के बाद किसी व्यक्ति के जिंदा रहने का ऐसा मामला पहले सामने नहीं आया था। राज्य के नियमों के मुताबिक, पहले इंजेक्शन के बाद अगर कैदी की मौत नहीं होती तो दूसरा इंजेक्शन दिया जाता है। लेकिन दूसरे इंजेक्शन के बाद भी व्यक्ति जिंदा रहे तो क्या करना है, इसके बारे में नियमों में साफ जानकारी नहीं है। 1995 में 19 साल की सहपाठी की हत्या की थी क्रिस्टा पाइक को 1995 में अपनी 19 साल की सहपाठी कोलीन स्लेमर की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। जनवरी 1995 में पाइक, उनके उस समय के बॉयफ्रेंड तादारिल शिप और एक दोस्त ने स्लेमर को टेनेसी यूनिवर्सिटी के कैंपस के पास जंगल में बुलाया था। अदालत में सामने आया कि वहां तीनों ने स्लेमर की पिटाई की और धारदार चीज से हमला किया। अपराध के समय पाइक 18 साल की थीं। वहीं, उनके बॉयफ्रेंड शिप की उम्र 17 साल थी। शिप ने बाद में मामले में गवाही दी। नाबालिग होने के कारण उसे मौत की सजा नहीं दी गई और उम्रकैद की सजा सुनाई गई। टेनेसी में 200 साल बाद पहली बार महिला को मौत की सजा पाइक अमेरिकी राज्य टेनेसी की मौत की सजा पाने वाली अकेली महिला कैदी थीं। अगर बुधवार की प्रक्रिया सफल होती, अगर प्रक्रिया पूरी हो जाती तो 200 साल से ज्यादा समय में टेनेसी में मौत की सजा पाने वाली वह पहली महिला होती। जेल में रहने के दौरान पाइक ने अपने अपराध पर पछतावा जताया था। उनका मानसिक बिमारियों का इलाज भी हुआ था। उनके वकीलों ने कहना था कि बचपन में उनके साथ हुई कुछ बुरी घटनाओं और मानसिक परेशानियों का उनके व्यवहार पर असर पड़ा था। वहीं, पीड़ित कोलीन स्लेमर के परिवार ने पाइक को मौत की सजा दिए जाने का समर्थन किया था। स्लेमर की मां ने कहा था कि पाइक उनकी बेटी को वापस नहीं ला सकतीं, इसलिए उन्हें अपने किए की सजा मिलनी चाहिए। इस साल होने वाली बाकी मौत की सजाओं पर रोक टेनेसी अमेरिका के उन राज्यों में है, जहां हाल के सालों में मौत की सजा लागू की गई है। अगस्त में टेनेसी, अलबामा और ओक्लाहोमा में एक ही दिन तीन लोगों को मौत की सजा दी गई थी। अमेरिका में 10 साल से ज्यादा समय बाद पहली बार एक ही दिन तीन लोगों को मौत की सजा दी गई थी। टेनेसी के गवर्नर ने अब पाइक को इंजेक्शन देते वक्त आखिर क्या हुआ इसकी जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने बताया कि इस साल होने वाली बाकी सभी मौत की सजाओं पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। पाइक के वकीलों ने बुधवार देर रात कोर्ट में दाखिल दस्तावेजों में बताया कि अधिकारियों ने उसे पेंटोबार्बिटल ड्रग्स के 2 इंजेक्शन दिए। इसके बावजूद उसकी मौत नहीं हुई। टेनेसी डिपार्टमेंट ऑफ करेक्शन ने कहा कि अधिकारियों ने कोर्ट से मंजूर मौत के इंजेक्शन की प्रक्रिया के हर कदम का पालन किया था। लेकिन फिर भी यह फेल हो गया। ——————- यह खबर भी पढ़ें… जिम्बाब्वे में हेलिकॉप्टर क्रैश, चर्चित बिजनेसमैन समेत 6 की मौत जिम्बाब्वे के मरोनडेरा इलाके में बुधवार शाम एक हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया। इसमें सवार सभी 6 लोगों की मौत हो गई। हादसे के बाद हेलिकॉप्टर में आग लग गई। पूरी खबर पढ़ें…

अरब सागर में कोस्ट गार्ड का बड़ा एक्शन, ईरानी नाव से ₹3,000 करोड़ की ड्रग्स जब्त, 5 पाकिस्तानी गिरफ्तार

Drugs seized in Gujarat: गुजरात एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (ATS) के साथ मिलकर किए गए एक जॉइंट ऑपरेशन में इंडियन कोस्ट गार्ड ने अरब सागर में एक ईरानी नाव से 526 किलोग्राम मेथम्फेटामाइन और हेरोइन जब्त की है। इसकी कीमत ₹3,000 करोड़ से ज्यादा है। कोस्ट गार्ड ने बुधवार (30 सितंबर) को बताया कि 25 सितंबर को लक्षद्वीप के पास चलाए गए इस ऑपरेशन के दौरान नाव पर सवार पांच पाकिस्तानी नागरिकों को भी हिरासत में लिया गया।

इंडियन कोस्ट गार्ड और गुजरात ATS ने 25 सितंबर को अरब सागर में लक्षद्वीप के पश्चिम में एक ईरानी पारंपरिक समुद्री नाव (धो) को रोका। तलाशी के दौरान 526 किलो हेरोइन और मेथामफेटामाइन बरामद हुई है।

5 पाकिस्तानी गिरफ्तार

इस कार्रवाई में 5 पाकिस्तानी नागरिकों को पकड़ा गया। नाव, क्रू और जब्त ड्रग्स को आगे की जांच के लिए मुंबई लाया गया है। खुफिया जानकारी के आधार पर कोस्ट गार्ड की यूनिट्स ने संदिग्ध नाव का पता लगाने के लिए समुद्री और हवाई निगरानी की। इसके बाद लक्षद्वीप के पश्चिम में नाव को रोका गया। फिर उस पर चढ़कर तलाशी ली गई। कोस्ट गार्ड के अनुसार, जब्त की गई ड्रग्स में अच्छी क्वालिटी की मेथम्फेटामाइन और हेरोइन शामिल हैं।

गुजरात ATS के साथ मिलकर हुई कार्रवाई

पूछताछ और आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए नाव, उसके क्रू और जब्त किए गए सामान को कड़ी सुरक्षा के बीच मुंबई लाया गया है। यह ऑपरेशन गुजरात एंटी-टेररिज्म स्क्वाड के साथ मिलकर किया गया। राज्य की ATS ने भी पांच पाकिस्तानी नागरिकों को हिरासत में लिए जाने की पुष्टि की है। ATS आज इस ऑपरेशन के बारे में मीडिया को जानकारी देगी।

यह ज़ब्ती ऐसे समय में हुई है जब सुरक्षा एजेंसियां ​​समुद्री रास्तों से होने वाली इंटरनेशनल ड्रग तस्करी को रोकने के लिए अपनी कोशिशें तेज़ कर रही हैं। कोस्ट गार्ड ने कहा कि यह ऑपरेशन उसकी निगरानी क्षमताओं, समुद्री ड्रग तस्करी को रोकने की क्षमता और भारत के समुद्री इलाकों में गैर-कानूनी गतिविधियों को रोकने के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दिखाता है।

फोर्स ने कहा कि इस ज़ब्ती से इंटरनेशनल ड्रग कार्टेल के फाइनेंशियल नेटवर्क को तोड़ने और सिंथेटिक ड्रग्स को देश में आने से रोकने में मदद मिलेगी। कोस्ट गार्ड ने कहा, “पकड़ी गई नाव, क्रू और ज़ब्त किए गए नशीले पदार्थों को हथियारों से लैस सुरक्षा के साथ मुंबई लाया गया है, ताकि संयुक्त पूछताछ और कई एजेंसियों द्वारा कानूनी कार्रवाई की जा सके।” समुद्र में यह ऑपरेशन गुजरात एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (ATS) के साथ मिलकर किया गया।

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ज़ब्त किए गए नशीले पदार्थों में 526 किलो हेरोइन और मेथामफेटामाइन शामिल हैं। एक बयान में कहा गया, “पुख्ता जानकारी के आधार पर समुद्र और हवा से सटीक निगरानी करते हुए, भारतीय तटरक्षक बल ने लगातार पीछा किया और 25 सितंबर 2026 को संदिग्ध ईरानी नाव को रोककर उस पर कार्रवाई की।” कोस्ट गार्ड ने कहा कि यह सफलता समुद्र में कोस्ट गार्ड के मज़बूत दबदबे, निगरानी के कड़े सिस्टम और भारत के समुद्री इलाकों में गैर-कानूनी गतिविधियों के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस की नीति को बनाए रखने के पक्के इरादे को दिखाती है।

अमेरिका में गोल्डी बराड़ पर ₹10 करोड़ का इनाम:FBI की टॉप 10 मोस्ट वांटेंड लिस्ट में शामिल, लॉरेंस गैंग से जुड़ा, निज्जर की हत्या करवाने का आरोप

अमेरिकी जांच एजेंसी FBI ने गैंगस्टर सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ को टॉप 10 मोस्ट वांटेड की सूची में शामिल किया है। बराड़ की जानकारी देने वाले को 10 लाख डॉलर (करीब 9.5 करोड़ रुपए) तक का इनाम देने की घोषणा की गई है। बराड़ को लॉरेंस ऑर्गनाइज्ड क्राइम ग्रुप का उत्तरी अमेरिका में प्रमुख ऑपरेशनल लीडर बताया गया है। लॉरेंस और गोल्डी बराड़ पर 2023 में खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप है। इसी साल जुलाई में निज्जर की हत्या को लेकर अमेरिका ने पहली बार चार्जशीट दाखिल की थी। अमेरिकी सरकार के मुताबिक, लॉरेंस भारतीय जेल में रहते हुए भी अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क चला रहा था। वह जेल में तस्करी से पहुंचाए गए मोबाइल फोन और इंटरनेट कॉलिंग डिवाइस के जरिए हत्या, रंगदारी, अपहरण, ड्रग्स और मानव तस्करी जैसी गतिविधियों का निर्देश देता था। जुलाई में आई अमेरिकी रिपोर्ट में गैंग को लेकर 5 दावे किए गए थे 1. आरोप सिर्फ अपराधियों पर, सरकार का जिक्र नहीं पूरे अमेरिकी आरोप पत्र और प्रेस रिलीज में भारत सरकार, RAW, NIA या किसी भारतीय सरकारी अधिकारी पर कोई आरोप नहीं लगाया गया। आरोप केवल कथित आपराधिक गिरोहों और उनके सदस्यों पर हैं। 2. ऑपरेशन हार्ड बॉल के तहत 37 पर आरोप, 24 गिरफ्तार अमेरिका, कनाडा और यूरोप ने संयुक्त अभियान ‘ऑपरेशन हार्ड बॉल’ चलाकर भारत से जुड़े तीन अंतरराष्ट्रीय अपराध गिरोहों पर कार्रवाई की। इसमें 37 लोगों पर आरोप लगाए गए और 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया। 3. बिश्नोई पर जेल से गैंग चलाने का आरोप अमेरिकी आरोपपत्र के मुताबिक, लॉरेंस बिश्नोई भारत की जेल में रहते हुए मोबाइल और इंटरनेट कॉलिंग (VoIP) डिवाइस के जरिए हत्या, रंगदारी, अपहरण, ड्रग्स और मानव तस्करी जैसे अपराधों का संचालन करता था। 4. निज्जर हत्या का आदेश देने का आरोप अमेरिकी न्याय विभाग का आरोप है कि 18 जून 2023 को कनाडा में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आदेश लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ ने दिया था। 5. रंगदारी और ड्रग्स तस्करी का नेटवर्क रिपोर्ट के मुताबिक, गिरोह वॉट्सऐप और अन्य एन्क्रिप्टेड ऐप के जरिए धमकी देकर रंगदारी वसूलता था। साथ ही ड्रग्स तस्करी और प्रतिद्वंद्वी गिरोहों से कोकीन लूटकर अपना नेटवर्क चलाता था। 2023 में हुई थी निज्जर की हत्या ———– ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका के खुलासे के बाद होशियारपुर SHO हटाया, अटॉर्नी जनरल ने कहा था- 4 लाख डॉलर फिरौती मांगी होशियारपुर के पुलिस थाना टांडा के SHO गुरिंदरजीत सिंह नागरा को 4 लाख डॉलर की फिरौती केस में लाइन हाजिर कर दिया गया है। अमेरिका के अटॉर्नी जनरल ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में नागरा का नाम लिया था। जनरल ने फिरौती के मामले में कई खुलासे किए। (पढ़ें पूरी खबर)

अमेरिका में गोल्डी बराड़ पर ₹10 करोड़ का इनाम:FBI की टॉप 10 मोस्ट वांटेंड लिस्ट में शामिल, लॉरेंस गैंग से जुड़ा, निज्जर की हत्या करवाने का आरोप

अमेरिकी जांच एजेंसी FBI ने गैंगस्टर सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ को टॉप 10 मोस्ट वांटेड की सूची में शामिल किया है। बराड़ की गिरफ्तारी में मदद करने वाली जानकारी देने वाले को 10 लाख डॉलर (करीब 9.5 करोड़ रुपए) तक का इनाम देने की घोषणा की गई है। यह घोषणा FBI के लॉस एंजिलिस फील्ड ऑफिस ने की। अमेरिका में बराड़ के खिलाफ साजिश रचने, जबरन वसूली और ड्रग्स की तस्करी समेत कई आरोप हैं। बराड़ को लॉरेंस ऑर्गनाइज्ड क्राइम ग्रुप का उत्तरी अमेरिका में प्रमुख ऑपरेशनल लीडर बताया गया है। लॉरेंस और गोल्डी बराड़ पर 2023 में खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप है। इसी साल जुलाई में निज्जर की हत्या को लेकर अमेरिका ने पहली बार चार्जशीट दाखिल की गई थी। इसमें दावा है कि हत्या का आदेश भारतीय जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई और फरार चल रहे गोल्डी बराड़ ने दिया था। अमेरिकी सरकार के मुताबिक, लॉरेंस बिश्नोई भारतीय जेल में रहते हुए भी अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क चला रहा था। वह जेल में तस्करी से पहुंचाए गए मोबाइल फोन और इंटरनेट कॉलिंग डिवाइस के जरिए हत्या, रंगदारी, अपहरण, ड्रग्स और मानव तस्करी जैसी गतिविधियों का निर्देश देता था।

Sanjay Gupta: एंटी-स्मोकिंग विज्ञापनों का क्या? संजय गुप्ता ने रणबीर कपूर, रणवीर सिंह से लेकर विक्की कौशल के स्मोकिंग वाले पोस्टर्स पर उठाए सवाल

Sanjay Gupta: फिल्ममेकर संजय गुप्ता ने बॉलीवुड में हीरो की ऑन-स्क्रीन इमेज और खासकर पोस्टर्स में स्मोकिंग के लगातार इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं। रविवार को डायरेक्टर ने संदीप रेड्डी वांगा की ‘एनिमल’ में रणबीर कपूर, आदित्य धर की ‘धुरंधर’ में रणवीर सिंह और संजय लीला भंसाली की ‘लव एंड वॉर’ में विक्की कौशल के पोस्टर्स शेयर किए, जिनमें तीनों एक्टर्स अपने-अपने लुक्स में स्मोकिंग करते हुए दिख रहे हैं।

X पर उन्होंने क्या कहा

संजय ने रविवार को X पर तीनों एक्टर्स का एक कोलाज शेयर किया। उनकी पोस्ट में उन एंटी-स्मोकिंग मैसेज पर सवाल उठाया गया, जो दर्शकों को थिएटर में फिल्मों से पहले और फिल्म के दौरान दिखाए जाते हैं, जबकि पोस्टर्स पर स्मोकिंग की इजाजत होती है। उन्होंने पूछा, “जब फिल्मों के पोस्टर्स ऐसे होते हैं तो फिल्मों से पहले और बीच में दिखाए जाने वाले उन बुरे एंटी-स्मोकिंग रील्स का क्या मतलब है, जिन्हें हमें झेलना पड़ता है?”

इस पोस्ट के बाद कमेंट्स में चर्चा शुरू हो गई। एक यूजर ने गुप्ता की 2002 की फिल्म ‘कांटे’ का जिक्र किया और फिल्म के एक गाने की ओर इशारा किया, जिसमें स्मोकिंग का जिक्र है। यूजर ने लिखा, “हैरानी की बात है कि यह बात ‘कांटे’ फिल्म के डायरेक्टर कह रहे हैं, जिसकी एक फिल्म में गाना है – ‘सिगरेट के धुएं का छल्ला बनाकर, कॉलर को थोड़ा सा ऊपर चढ़ाकर’… कितनी अजीब बात है।”

उन्होंने सीधे उस कमेंट का जवाब देते हुए कहा कि उस समय स्मोकिंग से जुड़े नियम और लोगों तक पहुंचाए जाने वाले मैसेज अलग थे। उन्होंने लिखा, “तब स्मोकिंग न करने वाले विज्ञापन नहीं होते थे, जीनियस।”

इंटरनेट पर चर्चा हो गई शुरू

कई अन्य यूजर्स भी चर्चा में शामिल हुए और फिल्मों में स्मोकिंग के इस्तेमाल को लेकर फिल्ममेकर की चिंता से सहमत दिखे। एक व्यक्ति ने इस स्थिति की तुलना स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट देखते समय दर्शकों को दिखाई जाने वाली वॉर्निंग से की और लिखा, “यह एक मजाक है, यह नेटफ्लिक्स और एप्पल पर शो देखने और शराब पीने के बारे में वॉर्निंग मिलने जैसा है।”

एक अन्य यूजर ने भारतीय सिनेमा में सिगरेट और मर्दानगी के बीच बार-बार दिखाए जाने वाले संबंध पर सवाल उठाया। कमेंट में लिखा था, “क्योंकि इन लोगों को लगता है कि सिगरेट ही वो चीज है जो किसी आदमी को मर्दाना दिखाती है। यह क्रिएटिविटी की कमी है। भारत की सभी फिल्म इंडस्ट्रीज ‘मर्दानगी की चापलूसी’ का शिकार हैं। कंटेंट, कहानी और क्रिएटिविटी भाड़ में जाए।” एक और यूजर ने उनकी बात का समर्थन करते हुए लिखा, “पूरी तरह सहमत हूं, बिल्कुल सही बात है।”

CBFC के नए नियम

यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब फिल्मों में नशीले पदार्थों के इस्तेमाल को लेकर नियम कड़े किए जा रहे हैं। सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) ने स्क्रीन पर क्या दिखाया जा सकता है और कुछ विषयों को कैसे दिखाया जाना चाहिए, इसके लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने 16 सितंबर को सिनेमैटोग्राफ एक्ट के तहत इन नए नियमों की घोषणा की। इन नियमों के तहत, नशीले पदार्थों को दिखाने वाली फिल्मों में ड्रग्स के ख़िलाफ चेतावनी दिखाना जरूरी कर दिया गया है। साथ ही, हिंसा, संवेदनशील विषयों और ऐसे कंटेंट पर पाबंदियों को भी दोहराया गया है, जो दूसरे देशों के साथ भारत के रिश्तों पर असर डाल सकते हैं। ये बदलाव केंद्र सरकार द्वारा 18 सदस्यों वाले नए बोर्ड के साथ CBFC के पुनर्गठन के साथ ही किए गए हैं।

सबसे बड़े बदलावों में से एक है उन फिल्मों के लिए जरूरी चेतावनी का नियम, जिनमें नशीले पदार्थों या साइकोट्रोपिक पदार्थों के सेवन, इस्तेमाल या तस्करी को दिखाया जाता है। ऐसे दृश्यों में अब स्क्रीन पर यह संदेश दिखाना होग-: “अवैध नशीले पदार्थ सेहत को बर्बाद करते हैं और जेल की सजा दिलाते हैं। ड्रग्स को ना कहें।”