Video: बिस्किट में गड़बड़ी पर दुकानदार से भिड़ा शख्स, ऑनलाइन शिकायत की बात सुनकर मिला ऐसा जवाब

कई बार रोजमर्रा की खरीदारी के दौरान लोग छोटी-मोटी कमियों को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कुछ लोग सवाल उठाने से पीछे नहीं हटते। ऐसा ही एक मामला बिस्किट के पैकेट को लेकर सामने आया है, जहां एक कंटेंट क्रिएटर ने दुकानदार से ऑनलाइन शिकायत करने की बात कही। दुकानदार के जवाब और दोनों के बीच हुई बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इसे देखने के बाद लोग उपभोक्ता जागरूकता और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर चर्चा करने लगे। कई यूजर्स ने शिकायत करने के कदम की तारीफ की, तो कुछ ने खाद्य सुरक्षा विभाग की भूमिका पर ध्यान दिलाया।

इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि अगर किसी पैकेटबंद खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता पर संदेह हो, तो उपभोक्ता को क्या करना चाहिए और अपनी शिकायत कहां दर्ज करानी चाहिए।

दुकानदार से पूछा- ऑनलाइन शिकायत कर दूं?

राघव दुबे नाम के कंटेंट क्रिएटर ने यह वीडियो शेयर किया है। इसमें वह बिस्किट के पैकेट की गुणवत्ता को लेकर सवाल करते हैं और दुकानदार से पूछते हैं, “Complaint online daalu chalega” यानी क्या वह ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं?

इस पर दुकानदार जवाब देता है, “हां, डाल दो।” वीडियो में हुई इस छोटी-सी बातचीत ने लोगों का ध्यान खींचा। रिपोर्ट के मुताबिक, वीडियो को 1.4 करोड़ से ज्यादा बार देखा गया। कई यूजर्स ने कहा कि किसी उत्पाद की गुणवत्ता पर संदेह होने पर ग्राहक को आवाज उठानी चाहिए, न कि मामले को अनदेखा करना चाहिए।

सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या कहा?

वीडियो पर कई लोगों ने कंटेंट क्रिएटर के कदम की तारीफ की। कुछ यूजर्स ने इसे उपभोक्ता जागरूकता से जोड़कर देखा, तो कुछ ने खाद्य सुरक्षा विभाग के काम की सराहना की। एक यूजर ने लिखा, “Good Job”, जबकि दूसरे ने खाद्य सुरक्षा विभाग की तारीफ की। कुछ लोगों ने यह भी पूछा कि शिकायत कहां दर्ज की गई और कार्रवाई होने में कितना समय लगा। यूजर्स का कहना था कि खाने-पीने की चीजों की गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

महाराष्ट्र FDA में ऑनलाइन शिकायत की सुविधा

महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के पास खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतें दर्ज कराने की ऑनलाइन सुविधा है। इसके माध्यम से मिलावट, असुरक्षित खाद्य उत्पादों और पैकेट पर गलत जानकारी जैसी समस्याओं की शिकायत की जा सकती है। जुलाई 2026 में विभाग ने आयुक्त तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में AI की मदद से शिकायतों को संभालने वाला प्लेटफॉर्म शुरू किया था। इसका उद्देश्य शिकायत दर्ज कराने और उनकी स्थिति जानने की प्रक्रिया को आसान बनाना है।

खाद्य पदार्थ में गड़बड़ी दिखे तो क्या करें?

अगर किसी बिस्किट या पैकेटबंद खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता पर संदेह हो, तो उसका पैकेट संभालकर रखें। उत्पाद, बैच नंबर और एक्सपायरी तारीख की तस्वीरें लें। खरीदारी का बिल भी सुरक्षित रखें और संदिग्ध उत्पाद का सेवन न करें। इसके बाद निर्माता या संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग में शिकायत दर्ज कराएं।

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महाराष्ट्र FDA ने Cipla के दवा गोदाम का लाइसेंस किया रद्द, क्या सोमवार को शेयर में मचेगी भगदड़

महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड के खिलाफ एक एक्शन लिया है। इसके तहत कंपनी के पुणे के वडकी स्थित कैरिंग एंड फॉरवर्डिंग (C&F) वेयरहाउस का सेल और डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस रद्द कर दिया गया है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, FDA ने शुक्रवार को बयान में कहा कि यह कार्रवाई बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में नए सिरे से कार्यवाही पूरी करने के बाद की गई है। सिप्ला फार्मा, सिप्ला लिमिटेड की सब्सिडियरी है।

इससे पहले FDA ने 27 अगस्त 2026 को एक कार्रवाई की थी। उस समय विभाग ने रिएक्टिन प्लस टैबलेट की पैकेजिंग, स्टोरेज, डॉक्युमेंटेशन और बाजार से दवा वापस लेने की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के चलते गोदाम के खिलाफ एक्शन लिया था। FDA ने तब कहा था कि डॉक्टर की पर्ची पर मिलने वाली इस ‘शेड्यूल एच’ दवा ‘रिएक्टिन प्लस’ की पैकेजिंग पर अनऑथराइज्ड दावे किए गए थे। साथ ही गोदाम में कई कमियां पाई गई थीं।

FDA का नया आदेश 1 अक्टूबर को असिस्टेंट कमिश्नर (ड्रग्स), डिवीजन 3, FDA पुणे ने पास किया। विभाग की ओर से बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में अपनी पिछली कार्यवाही वापस लेने के बाद यह आदेश जारी किया गया।

Cipla का क्या है कहना

FDA के एक्शन पर एक बयान में सिप्ला ने कहा है कि वह दवाओं की क्वालिटी और मरीजों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। कंपनी के मुताबिक, ‘पुणे में हमारे वडकी C&FA को लेकर महाराष्ट्र FDA का फैसला निराशाजनक है। हमारा मानना ​​है कि हमारा पुणे C&FA वेयरहाउस डिस्ट्रीब्यूशन और स्टोरेज प्रोटोकॉल और डिजिटल रिकॉर्ड-कीपिंग स्टैंडर्ड्स के मुताबिक काम करता है।’ कंपनी आदेश की समीक्षा कर रही है और आगे के विकल्पों पर विचार कर रही है।

संशोधित कारण बताओ नोटिस हुआ था जारी

बयान के अनुसार, FDA ने 4 सितंबर को सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज को संशोधित कारण बताओ नोटिस जारी किया था। सिप्ला ने 11 सितंबर को अपना लिखित जवाब दिया और उसे 21 सितंबर को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया गया। प्राधिकरण ने नया आदेश जारी करने से पहले कंपनी के जवाब, सुनवाई के दौरान दी गई दलीलों, निरीक्षण के निष्कर्षों, उपलब्ध रिकॉर्ड और लागू कानूनी प्रावधानों पर विचार किया। FDA ने कहा कि इसलिए यह फैसला केवल पिछली कार्रवाई को दोहराना नहीं है, बल्कि अदालत के निर्देशों के अनुरूप पूरी प्रक्रिया नए सिरे से पूरी करने के बाद लिया गया स्वतंत्र नियामकीय निर्णय है।

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FDA की त्योरियां चढ़ने की मुख्य वजह

इस मामले में प्रमुख मुद्दों में से एक है- ‘शेड्यूल एच’ दवा रिएक्टिन प्लस। सिप्ला फार्मा के वडकी गोदाम के निरीक्षण के दौरान FDA ने पाया कि दवा की पैकेजिंग पर इसे दर्द निवारक बताया गया था। सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, कमर दर्द, जोड़ों के दर्द, मोच, शरीर में दर्द और दांत दर्द जैसी स्थितियों में इसके इस्तेमाल को बढ़ावा देने वाले दावे किए गए थे। FDA का कहना है कि दवा की पैकेजिंग पर एक मानव आकृति भी थी और दवा को मांसपेशियों के दर्द से राहत देने वाली बताया गया था।

विभाग के अनुसार, पैकेज पर किए गए दावे, शब्द और चित्र लागू कानूनी प्रावधानों के अनुरूप नहीं थे और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत गलत लेबलिंग का मामला बनता था। FDA ने दवा के मार्केटर के रूप में कंपनी की कानूनी जिम्मेदारियों पर भी विचार किया। इसका कहना है कि केवल मैन्युफैक्चरर की भूमिका का हवाला देकर इन जिम्मेदारियों से बचा नहीं जा सकता। FDA ने दवा का स्टॉक जब्त कर उसे बाजार से वापस लेने का निर्देश दिया था।

विभाग ने स्टोरेज और वेयरहाउस मैनेजमेंट में कई कमियां भी गिनाईं। इनमें निर्धारित फॉर्म-35 इंस्पेक्शन बुक का नहीं होना, पर्याप्त पैलेट या रैक नहीं होने के कारण दवाओं के डिब्बों का सीधे फर्श पर रखा जाना, दवाओं के स्टॉक पर धूल जमा होना और साफ-सफाई में कमी शामिल हैं। FDA ने यह भी पाया कि एक्सपायर हो चुकी दवाओं के लिए अलग से ऐसा कोई निर्धारित स्थान नहीं था, जिस पर स्पष्ट रूप से ‘एक्सपायरी-नॉट फॉर सेल’ लिखा हो। एक्सपायर हो चुकी दवाओं के निपटान यानि डिस्पोजल से जुड़े आवश्यक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर और रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं थे। रेगुलेटर ने खरीद और बिक्री के चालानों में भी कमियां पाईं। इनमें बिक्री चालानों की डुप्लीकेट कॉपी पर साइन न होना, कंप्यूटराइज्ड या एसएपी रिकॉर्ड और दवा के फिजिकल स्टॉक में अंतर शामिल था।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

अब बेबी फूड को लेकर तुकाराम मुंढे का बड़ा ऐक्शन, महाराष्ट्र FDA ने इन चीजों पर लगाया बैन

मुंबई। महाराष्ट्र में छोटे बच्चों के फॉर्मूला मिल्क और बेबी फूड को लेकर अब नियम सख्त हो गए हैं। महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने मंगलवार को आदेश जारी किया। जिसका मकसद बच्चों के खाने की क्वालिटी बेहतर रखना और माता-पिता को सही जानकारी देना है। इसके लिए FDA ने बेबी फूड की पैकेजिंग, विज्ञापन और प्रमोशन को लेकर कई नियम बनाए हैं।

लेबल से लेकर खराब प्रोडक्ट तक जारी हुए नए नियम

  • पैकेट पर “जरूरी सूचना: मां का दूध बच्चे के लिए सबसे अच्छा है” लिखना होगा और छह महीने के बाद ही ऊपरी खाना देने की जानकारी देनी होगी।
  • पैकेट पर बच्चों या महिलाओं की तस्वीर नहीं लगा सकेंगे। साथ ही ‘ह्यूमनाइज्ड’, ‘मैटरनाइज्ड’, ‘कम्प्लीट फूड’ और ‘हेल्थ फूड’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल भी नहीं होगा।
  • पैकेट पर बच्चे को दूध पिलाने से जुड़ी जरूरी जानकारी भी साफ तौर पर देनी होगी।
  • बच्चे में साइड इफेक्ट दिखने पर हॉस्पिटल और डॉक्टरों को जानकारी देनी होगी और गंभीर मामले में कंपनी को 48 घंटे में रिपोर्ट करनी होगी।
  • कंपनियों को हर बैच का रिकॉर्ड रखना होगा और खराब प्रोडक्ट की पहचान कर उसे बाजार से वापस लेना होगा।

नए नियमों के तहत फॉर्मूला मिल्क और बेबी फूड के प्रमोशन पर रोक रहेगी। कंपनियां इनके विज्ञापन, फ्री सैंपल, गिफ्ट, कूपन या कैशबैक नहीं दे सकेंगी। सोशल मीडिया और इन्फ्लुएंसर के जरिए भी प्रमोशन की परमिशन नहीं होगी। साथ ही मेडिकल कार्यक्रम या रिसर्च के नाम पर डॉक्टरों और हॉस्पिटल्स को स्पॉन्सरशिप, गिफ्ट या दूसरी सुविधाएं देने पर भी रोक रहेगी।

नियम तोड़ने पर भरना होगा इतना जुर्माना

  • गलत विज्ञापन या बिना लाइसेंस काम करने पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है।
  • घटिया क्वालिटी का खाना बेचने पर 5 लाख रुपये तक और गलत जानकारी के साथ प्रोडक्ट बेचने पर 3 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
  • ‘नो एडेड शुगर’ जैसे दावों और प्रिजर्वेटिव, कलर व फ्लेवर के इस्तेमाल में भी तय नियमों का पालन करना होगा।

लागू होंगे नियम, नहीं माने तो कार्रवाई

FDA के नए नियम फॉर्मूला मिल्क, फॉलो-अप फॉर्मूला, बेबी फूड और फीडिंग बॉटल समेत बच्चों के कई प्रोडक्ट्स पर लागू होंगे। इन नियमों में कंपनियों के साथ इंपोर्टर, डिस्ट्रीब्यूटर, दुकानदार, फार्मेसी, अस्पताल सप्लायर और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म भी आएंगे। तुकाराम मुंढे ने कहा कि दो साल से कम उम्र के बच्चे बहुत संवेदनशील होते हैं। इसलिए माता-पिता को प्रोडक्ट की सही जानकारी और साफ लेबल मिलना जरूरी है।

महाराष्ट्र FDA ने फूड सेफ्टी को लेकर दूसरी कार्रवाई भी की है। बुलढाणा के खामगांव में करीब 3.51 करोड़ रुपये का रिफाइंड सोयाबीन तेल जब्त किया गया। वहीं मुंबई-नासिक रूट पर पालघर से कसारा घाट के बीच करीब 1.26 करोड़ रुपये का प्रतिबंधित गुटखा भी पकड़ा गया।

वसूली के आरोपों पर FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे का पलटवार, अब कर दिया ये बड़ा चैलेंज

महाराष्ट्र में होटल, रेस्टोरेंट और क्विक कॉमर्स कंपनियों से कथित तौर पर पैसे वसूलने के आरोपों ने खाद्य सुरक्षा विभाग को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन आरोपों पर अब महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के कमिश्नर तुकाराम मुंडे ने प्रतिक्रिया दी है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि ये आरोप काफी सामान्य है और अपील की कि जिनके पास भी सबूत हों, वे सामने आएं।

संजय राउत ने लगाया था आरोप

बता दें कि ये आरोप शिवसेना नेता संजय राउत ने लगाए थे। उन्होंने कथित तौर पर एक चिट्ठी लिखकर दावा किया था कि FDA अधिकारी पैसे वसूलने के लिए कारोबारियों को लाइसेंस रद्द करने की धमकी दे रहे थे। हालांकि, मुंधे ने कहा कि उन्हें ऐसी कोई चिट्ठी नहीं मिली है।

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक, मुंडे ने कहा कि उन्हें इन आरोपों के बारे में सिर्फ मीडिया रिपोर्ट से पता चला। उन्होंने आगे कहा कि अगर राउत के पास कोई सबूत है, तो उन्हें वह सबूत उनके साथ या एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) के साथ शेयर करना चाहिए।

इससे पहले, राउत ने आरोप लगाया था कि FDA के डेजिग्नेटेड ऑफिसर (DOs), असिस्टेंट कमिश्नर (ACs) और फूड सेफ्टी ऑफिसर (FSOs) खुलेआम कारोबारियों से पैसे मांग रहे थे। आरोप के मुताबिक, मुंडे के FDA कमिश्नर बनने से पहले अधिकारी नोटिस बंद करने के लिए 10,000 से 12,000 रुपये लेते थे, लेकिन उनके चार्ज संभालने के बाद यह रकम बढ़कर 75,000 से 2 लाख रुपये के बीच हो गई।

मुंडे ने आरोपों को किया खारीज

इन आरोपों को खारिज करते हुए, मुंडे ने सीधे उन कारोबारियों से अपील की जिनसे रिश्वत मांगी गई हो। उन्होंने कहा कि जिस किसी ने भी पैसे दिए हैं या जिनसे पैसे मांगे गए हैं, वे उनसे संपर्क करें और शामिल अधिकारी की जानकारी और लेन-देन का कोई सबूत दें।

शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रहेगी

मुंडे ने यह भी कहा कि शिकायत करने वाले लोगों को अगर अधिकारियों की ओर से परेशान किए जाने का डर है, तो उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।

उन्होंने कहा कि FDA का शिकायत पोर्टल भी शिकायत करने वाले की पहचान छिपाकर रखता है और वे खुद यह पक्का करेंगे कि नाम जाहिर न हों। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी भ्रष्ट अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सबूत जरूरी हैं।

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कोई कानून से ऊपर नहीं… सेलिब्रिटी और स्टार्स के लिए FDA चीफ तुकाराम मुंढे ने फिर कह दी सीरियस बात

22 सितंबर को 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मशहूर फिल्म आर्टिस्ट की जिम्मेदारी पर बात की थी। उन्होंने कहा था कि पॉपुलर आर्टिस्ट का युवाओं की सोच पर गहरा असर होता है। उनके मुताबिक, एक सच्चे स्टार को समाज में अच्छी सोच और पॉजिटिविटी फैलाने की कोशिश करनी चाहिए।

तुकाराम मुंडे ने सोशल मीडिया पर रखा अपना पक्ष

राष्ट्रपति की अपील के बाद तुकाराम मुंडे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि आर्टिस्ट का लोगों पर असर होना अच्छी बात है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह कानून का उल्लंघन करें। उन्होंने आर्टिस्ट से कहा कि उन्हें अपने प्रभाव का इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए और ऐसे उत्पादों या आदतों का प्रचार नहीं करना चाहिए, जो लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

महाराष्ट्र में जारी हो चुके हैं नोटिस

मुंडे ने बताया कि महाराष्ट्र में FDA पहले ही कुछ ऐसे आर्टिस्ट को नोटिस जारी कर चुका है। उन्होंने बताया कि जब किसी पॉपुलर चेहरे का इस्तेमाल खाने-पीने या दूसरे उत्पादों के प्रचार के लिए किया जाता है, तो उसके स्वास्थ्य से जुड़े असर को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

महाराष्ट्र FDA ने अभिनेता शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को नोटिस जारी किए थे। आर्टिस्ट ने विमल इलायची का विज्ञापन किया था। FDA का कहना था कि यह विज्ञापन प्रतिबंधित विमल पान मसाला के सरोगेट प्रमोशन का है। जिसके कारण आर्टिस्ट के विज्ञापन को लेकर कार्रवाई की गई थी।

मुंडे ने कहा कि किसी आर्टिस्ट की पॉपुलैरिटी उसे कानून से ऊपर नहीं बनाती। उनके मुताबिक, कलाकारों को भी दूसरे लोगों की तरह कानून का पालन करना चाहिए और यह समझना चाहिए कि उनके प्रचार का लोगों की पसंद और आदतों पर असर पड़ सकता है। खासकर खाने-पीने की चीजों के प्रचार में लोगों के स्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

Tukaram Mundhe: तुकाराम मुंढे का एक और बड़ा एक्शन! 2,841% वाले मुनाफे पर इस रिपोर्ट से हंगामा

Tukaram Mundhe Action: अपनी कड़क कार्यशैली और भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिए चर्चित आईएएस अधिकारी और महाराष्ट्र FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे एक बार फिर जबर्दस्त चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने प्राइवेट अस्पतालों और मेडिकल डिवाइस कंपनियों पर चाबुक चलाई है।

महाराष्ट्र एफडीए के एक चौकाने वाले सर्वे में सामने आया है कि अस्पताल जो सर्जिकल सामान (IV सेट्स, सिरिंज, कैथेटर) कौड़ियों के भाव खरीदते हैं, उन पर मरीजों से 2,841% (28 गुना से भी ज्यादा) तक का भारी-भरकम मुनाफा वसूला जा रहा है। तुकाराम मुंढे ने इस ‘अस्पताल लूट’ का कच्चा चिट्ठा केंद्र सरकार के पाले में फेंकते हुए सख्त नियम बनाने की मांग की है।

FDA के सर्वे में आए होश उड़ाने वाले आंकड़े

महाराष्ट्र एफडीए के सर्वे ‘सर्जिकल आइटम्स की खरीद और बिक्री कीमत में अंतर’ की रिपोर्ट में जो खुलासे हुए हैं, वे हर किसी को हैरान कर रहे हैं। IV इंफ्यूजन सेट जिससे सलाइन चढ़ाया जाता है उसे प्राइवेट अस्पताल कंपनियों से महज ₹11.05 में खरीदते हैं, लेकिन मरीज के बिल में एमआरपी चिपकाकर ₹325 वसूले जाते हैं। वैसे ही कैथेटर अस्पतालों को मात्र ₹29.41 में मिलता है, लेकिन मरीज से इसकी कीमत ₹310 ली जाती है।

सिरिंज, नेबुलाइजर, ऑक्सीजन मास्क और कैथेटर जैसे रोजमर्रा के मेडिकल सामानों पर खरीद मूल्य और एमआरपी के बीच 2841% तक का विशाल अंतर पाया गया।

तुकाराम मुंढे ने इस सर्वे रिपोर्ट के आधार पर फार्मास्यूटिकल्स विभाग और नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइजिंग अथॉरिटी (NPPA) को चिट्ठी लिखकर ट्रेड मार्जिन पर कैपिंग लगाने की मांग की है।

मुंढे ने डे दी सख्त चेतावनी

तुकाराम मुंढे अपने सख्त और बेबाक फैसलों के लिए जाने जाते हैं। इस मामले पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने साफ कहा, ‘यह केवल कीमत का मामला नहीं है, बल्कि यह मरीज के अधिकारों और सुरक्षा का मुद्दा है। अस्पताल में भर्ती लाचार मरीज के पास यह जांचने का कोई जरिया या जानकारी नहीं होती कि उससे जो सामान का दाम वसूला जा रहा है, वह जायज है या नहीं।’

वैसे इस बड़े खुलासे के बाद केंद्र सरकार का प्राइजिंग रेगुलेटर राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण(NPPA) हरकत में आ गया है। एनपीपीए अधिकारियों के अनुसार, वे कंपनियों की फाइलिंग्स और अंदरूनी रेट लिस्ट का मिलान महाराष्ट्र एफडीए के सर्वे से कर रहे हैं।

केवल महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि पंजाब, राजस्थान और तमिलनाडु के ड्रग कंट्रोल

अधिकारियों ने भी अस्पतालों द्वारा सर्जिकल सामानों पर वसूले जा रहे इस मोटे मार्जिन की शिकायत केंद्र से की है।

नियम क्या कहते हैं और अस्पताल क्या दे रहे सफाई?

ड्रग्स प्राइज कंट्रोल ऑर्डर (DPCO) के तहत एनपीपीए कुछ जरूरी दवाओं और डिवाइसेस (जैसे- कोरोनरी स्टेंट या नी इम्प्लांट) की अधिकतम कीमत तय करता है। लेकिन गैर-सूचीबद्ध डिवाइसेस पर केवल इतना नियम है कि कोई कंपनी 12 महीने में 10% से ज्यादा एमआरपी नहीं बढ़ा सकती। इसी ढील का फायदा उठाकर कंपनियां शुरू से ही एमआरपी कई गुना बढ़ाकर प्रिंट करती हैं।

आकाश हेल्थकेयर के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. आशीष चौधरी के मुताबिक, नियमों में पारदर्शिता जरूर होनी चाहिए, लेकिन यह भी ध्यान रखना होगा कि अस्पतालों को अपना ढांचा, तकनीक और मरीज की सुरक्षा बनाए रखने के लिए वित्तीय रूप से मजबूत रहना जरूरी है।

एक्शन मोड में ‘सिंघम’ अधिकारी

आईएएस तुकाराम मुंढे अपने पूरे करियर में सिस्टम की खामियों पर कड़ा प्रहार करने के लिए जाने जाते हैं। इस साल की शुरुआत में ही मुंबई के फूड सेक्टर में चले उनके सख्त चेकिंग अभियान के बाद स्वच्छता मानकों का उल्लंघन करने पर कई बड़े ईटिंग जॉइंट्स और रेस्टोरेंट्स पर ताले लटक गए थे। अब मेडिकल सेक्टर में उनकी इस एंट्री से अस्पतालों और डिवाइस निर्माताओं के बीच हड़कंप मचा हुआ है।

अस्पतालों में मिलने वाले सर्जिकल कंज्यूमेबल्स पर मार्जिन की कोई सीमा न होना स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र की सबसे बड़ी कमियों में से एक है। जब तक केंद्र सरकार एनपीपीए के जरिए इन मेडिकल डिवाइसेस पर ट्रेड मार्जिन रशनलाइजेशन लागू नहीं करती, तब तक आम जनता को एमआरपी के नाम पर होने वाली इस लीगल लूट से राहत मिलना मुश्किल है।

Preity Zinta: मुंबई में ‘टीम तुकाराम मुंडे’ वाली टी-शर्ट में दिखीं प्रीति जिंटा, फैंस हुए एक्साइटेड

Preity Zinta: मुंबई में प्रीति जिंटा का एक आम सा आउटिंग तब चर्चा का विषय बन गया जब उन्हें “Team Tukaram Mundhe” लिखी काली टी-शर्ट पहने देखा गया। एक्ट्रेस का लुक कैज़ुअल था, लेकिन उनकी टी-शर्ट पर लिखा नाम तुरंत लोगों का ध्यान खींचने लगा, खासकर ऐसे समय में जब महाराष्ट्र फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के कमिश्नर तुकाराम मुंडे अपने फ़ूड-सेफ़्टी अभियान को लेकर चर्चा में हैं।

यह घटना तब हुई है जब प्रीति अपनी आने वाली फ़िल्म ‘वाइब’ (Vibe) का प्रमोशन कर रही हैं। प्रीति ज़िंटा ने पहनी ‘Team Tukaram Mundhe’ वाली टी-शर्ट है। बाहर जाने के लिए, प्रीति ने काली टी-शर्ट को नीली जींस और सफ़ेद स्पोर्ट्स शूज़ के साथ पहना। उन्होंने एक स्लीक घड़ी के साथ अपना लुक पूरा किया और बालों को खुला रखा।

उनका मेकअप भी बहुत हल्का था – साफ़ आईलाइनर, नैचुरल बेस, गुलाबी गाल और हल्का लिप कलर। लेकिन सादगी भरे स्टाइल के बावजूद, उनकी टी-शर्ट पर लिखा मैसेज सबसे अलग और खास था। “Team Tukaram Mundhe” शब्द महाराष्ट्र FDA कमिश्नर की ओर इशारा करते हैं, जिनकी हालिया जांच और फ़ूड बिज़नेस के ख़िलाफ़ की गई कार्रवाई ने मुंबई में काफ़ी ध्यान खींचा है। प्रीति ने इस आउटफ़िट के साथ अपनी पसंद के बारे में कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया। हालांकि, टी-शर्ट में उनके दिखने से मुंडे और उनके चल रहे काम के बारे में लोगों में उत्सुकता ज़रूर पैदा हुई है।

कौन हैं तुकाराम मुंडे?

तुकाराम मुंडे अभी महाराष्ट्र के फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के कमिश्नर के तौर पर काम कर रहे हैं। यह विभाग राज्य में खाने-पीने की चीज़ों, दवाओं और कॉस्मेटिक्स को रेगुलेट करने और यह पक्का करने के लिए ज़िम्मेदार है कि बिज़नेस से जुड़े संस्थान सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन करें। हाल ही में रेस्टोरेंट और खाने-पीने के दूसरे बिज़नेस की जांच के बाद मुंडे मुंबई में फ़ूड-सेफ़्टी से जुड़ी चर्चाओं के केंद्र में रहे हैं।

तुकाराम मुंडे के फ़ूड-सेफ़्टी अभियान पर बॉलीवुड का ध्यान

FDA की हालिया कार्रवाई के बीच मुंडे का ज़िक्र करने वाली प्रीति पहली बॉलीवुड हस्ती नहीं हैं। इससे पहले ट्विंकल खन्ना ने अपने ‘मिसेज़ फ़नीबोन्स’ कॉलम में फ़ूड-सेफ़्टी अभियान का ज़िक्र किया था और इस विषय पर अपने खास अंदाज़ में मज़ाकिया टिप्पणी की थी। सलमान खान ने भी मुंडे का ज़िक्र किया है। अभिनेता ने मुंबई में अपने एक दोस्त के कैफ़े को सही स्टैंडर्ड बनाए रखने के बारे में मज़ाक-मज़ाक में चेतावनी देते हुए FDA कमिश्नर का ज़िक्र किया था। अब, प्रीति की “टीम तुकाराम मुंडे” वाली टी-शर्ट ने एक बार फिर उनके नाम को चर्चा में ला दिया है।

Salman Khan: ‘सफाई बनाए रखो, वरना मैं उन्हें भेज दूंगा’, सलमान खान ने बांद्रा के एक कैफे को तुकाराम मुंडे के नाम से दी चेतावनी

Salman Khan: सलमान खान ने अपने दोस्त के नए बांद्रा कैफे को बेसिक चीजों का ध्यान रखने के लिए मजाकिया अंदाज में याद दिलाया है। अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर ‘द टक शॉप एट सेवियोज’ का वीडियो शेयर करते हुए, एक्टर ने अपनी कॉफ़ी दोबारा भरने के लिए कहा और मज़ाक में कैफ़े से कहा कि वे कीमत, क्वालिटी या साफ़-सफ़ाई से कोई समझौता न करें। उनकी यह चेतावनी महाराष्ट्र FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे की ओर भी एक मज़ाकिया इशारा लग रही थी, जो फ़ूड आउटलेट्स के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई के लिए जाने जाते हैं।

तुकाराम मुंडे चर्चा का विषय क्यों बने हैं?

26 मई, 2026 को FDA कमिश्नर का पद संभालने के बाद से तुकाराम मुंडे महाराष्ट्र में फ़ूड सेफ़्टी के लिए की जा रही सख़्त कार्रवाई में एक जाना-माना नाम बन गए हैं। बताया जाता है कि सिर्फ़ दो महीनों में उनकी टीम ने 3,000 से ज़्यादा जगहों का निरीक्षण किया और लगभग 165 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस सस्पेंड कर दिए।

सख़्त और बिना किसी ढिलाई वाले रवैये की वजह से सोशल मीडिया पर उन्हें “असली सिंघम” का नाम भी दिया गया है। उनकी देखरेख में, FDA ने रेस्तरां, होटल, क्लब, फ़ास्ट-फ़ूड आउटलेट और संस्थागत किचनों में अचानक निरीक्षण बढ़ा दिए हैं। अधिकारी ख़राब साफ़-सफ़ाई, खाने में मिलावट, नकली पनीर, मिलावटी दूध और बिना लाइसेंस के काम करने जैसी समस्याओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर रहे हैं।

स्वतंत्रता दिवस पर छात्रों से बात करते हुए उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि एक स्वस्थ राष्ट्र के लिए स्वस्थ लोगों का होना ज़रूरी है। स्वस्थ लोगों के लिए स्वस्थ भोजन और दवा ज़रूरी है। और इसके लिए, रेगुलेटर्स को उस लक्ष्य की दिशा में काम करने की ज़रूरत है।”

सलमान खान का अगला प्रोजेक्ट क्या है?

काम की बात करें तो, सलमान खान ‘बिग बॉस 20’ के होस्ट के तौर पर वापसी करने वाले हैं। नया सीज़न 6 सितंबर, 2026 को JioHotstar और Colors TV पर शुरू होगा। इसके बाद सलमान ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ (Maatrubhumi: May War Rest in Peace) में नज़र आएंगे, जिसका पहले नाम ‘बैटल ऑफ़ गलवान’ (Battle of Galwan) था।

फ़िलहाल इस फ़िल्म की दोबारा शूटिंग चल रही है। उनके पास वामशी पैदिपल्ली की फ़िल्म ‘मॉन्स्टर’ (Monster) भी है, जिसमें उनके साथ नयनतारा हैं और इसके 2027 में ईद के आस-पास रिलीज़ होने की उम्मीद है।

‘क्या आपको लगता है आप भगवान हैं?’ MCA परिसर में 5 रेस्टोरेंट पर कार्रवाई को लेकर बॉम्बे HC ने FDA को लगाई फटकार

Bombay High Court: बॉम्बे हाई कोर्ट ने शनिवार को सुनवाई करते हुए महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) को जमकर फटकार लगाई और मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) के BKC परिसर में मौजूद पांच आउटलेट्स के फूड लाइसेंस सस्पेंड करने के उसके आदेशों को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि FDA ने इस मामले में बहुत जल्दबाजी में कार्रवाई की और व्यावहारिक तरीके से फैसला नहीं लिया।

इस दौरान हाई कोर्ट ने FDA के अधिकारियों के खिलाफ ‘अदालत की अवमानना’ की कार्रवाई की चेतावनी भी दी। यह कार्रवाई तब की गई जब एक नए निरीक्षण में पाया गया कि पांचों रेस्टोरेंट फूड सेफ्टी नियमों का 88% पालन कर रहे थे, फिर भी विभाग ने उनके फूड लाइसेंस का सस्पेंशन हटाने से इनकार कर दिया था।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड़ की खंडपीठ ने फूड लाइसेंस पर लगी रोक हटा दी, जिससे इन रेस्टोरेंट को दोबारा खोलने की अनुमति मिल गई, जबकि FDA अलग से किसी तीसरे पक्ष द्वारा उनके संचालन से जुड़े मुद्दों की जांच कर रहा है।

पीठ ने कहा कि मामले पर पुनर्विचार करने के अदालत के पिछले निर्देश के बावजूद FDA ने “व्यावहारिक दृष्टिकोण के बजाय किताबी दृष्टिकोण” अपनाया।

‘बहुत जल्दबाजी में की गई कार्रवाई’

बता दें कि MCA ने FDA के उस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की थी, जिसमें साफ-सफाई के नियमों के उल्लंघन और थर्ड-पार्टी ऑपरेशन से जुड़ी गड़बड़ियों के आरोप में पांच रेस्टोरेंट का कामकाज रोक दिया गया था। वहीं, दोबारा जांच के बावजूद, FDA ने सस्पेंशन जारी रखा। उनका तर्क था कि रेस्टोरेंट M/s शिर्के इंफ्रास्ट्रक्चर चला रहा था, जबकि लाइसेंस MCA के नाम पर थे।

हालांकि, कोर्ट ने कहा कि उसने FDA अधिकारियों से साफ तौर पर व्यावहारिक नजरिया अपनाने को कहा था। कोर्ट ने कहा, “साफ तौर पर कहने के बावजूद, FDA ने हमारे आदेश को नहीं माना और व्यावहारिक नजरिए के बजाय लकीर का फकीर बनने वाला नजरिया अपनाया। हम हर समय विभाग और अधिकारियों को डांट-फटकार कर थक चुके हैं। अब सख्त आदेश देने का समय आ गया है। हम संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट की अवमानना ​​की कार्रवाई करेंगे। वे हमें समझा लें या जेल जाएं।”

बेंच ने यह भी सवाल किया कि FDA ने कानूनी स्थिति का पूरी तरह से विश्लेषण किए बिना “बेवजह जल्दबाजी” में कदम क्यों उठाया। बेंच ने पूछा, “हम कितनी बार समझाने और संतुलन बनाने की कोशिश करें ताकि विभाग का मनोबल न गिरे? हम क्यों कहते हैं कि मच्छर को मारने के लिए तलवार का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए? क्या आपको लगता है कि आप कोई भगवान हैं और कुछ भी कर सकते हैं?”

यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के खिलाफ FDA की कार्रवाई जारी है। पिछले कुछ हफ्तों में कई खाद्य कंपनियों को नोटिस दिए गए हैं। अधिकारी खाद्य पदार्थों में मिलावट, एक्सपायर्ड सामान की बिक्री और नियमों से जुड़ी दूसरी गड़बड़ियों को लेकर लगातार जांच कर रहे हैं।

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