नेतन्याहू ने मच्छार को बताया ‘दुनिया का नायक’

दुबई। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शनिवार को भारतीय पायलट स्मित मच्छार से फोन पर बात की और फ्लाईदुबई के विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने की सह-पायलट की कथित साजिश नाकाम करने के लिए उन्हें इजराइल, भारत और पूरी दुनिया का ‘नायक’ बताया। उन्होंने मच्छार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इजराइल के स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में मशाल प्रज्वलित करने के लिए आमंत्रित भी किया।

कैप्टन मच्छार पर बुधवार को फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड1073 के कॉकपिट में उनके सह-पायलट ने हमला किया था, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए। उस समय विमान दुबई से तेल अवीव जा रहा था।

नेतन्याहू ने संयुक्त अरब अमीरात के एक अस्पताल में उपचार करा रहे 38 वर्षीय भारतीय पायलट से बात कर उनका हालचाल जाना। ‘लाउडस्पीकर मोड’ पर हुई इस बातचीत की एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर भी साझा की गई।

कैप्टन मच्छार से बातचीत में नेतन्याहू ने कहा, ‘यह हमारे लिए सबसे बड़ा सम्मान है, जो हम अपने स्वतंत्रता दिवस पर प्रदान करते हैं। आमतौर पर यह केवल इजराइल के नागरिकों के लिए है, लेकिन मुझे लगता है कि इस मामले में इजराइल का हर नागरिक आपका सम्मान करेगा। हम उम्मीद करते हैं कि आप जल्द ही इजराइल आएंगे।’

इजराइल के स्वतंत्रता दिवस को ‘योम हाअत्जमाउत’ कहा जाता है। यह हिब्रू कैलेंडर के इयार महीने की पांचवीं तारीख को मनाया जाता है, जो अप्रैल के अंत या मई की शुरुआत में पड़ती है।

इजराइल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने शनिवार को ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा, ‘आप इजराइल, भारत और पूरी दुनिया के नायक हैं। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं आपको इजराइल के स्वतंत्रता दिवस पर मशाल प्रज्वलित करने के लिए आमंत्रित करता हूं।’

‘को-पायलट नमाज पढ़ने उठा, फिर सिर पर किया हमला…’; Flydubai के कैप्टन स्मित मच्छार ने सुनाई कॉकपिट की अनसुनी कहानी

Flydubai Incident: फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 के भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार ने विमान के कॉकपिट में हुए उस खौफनाक घटनाक्रम के बारे में नए और चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उनके ओमानी को-पायलट ने 34,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ रहे विमान में उनके सिर पर हमला कर दिया था। विमान में उस वक्त 174 लोग सवार थे। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत के दौरान कैप्टन मच्छार ने बताया कि उड़ान हर रोज की तरफ सामान्य थी। उनका को-पायलट नमाज पढ़ने के लिए अपनी सीट से उठा था। इस दौरान सम्मान के चलते उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। लेकिन कुछ मिनट बाद अचानक उनके सिर के पीछे जोरदार वार हुआ।

उन्होंने कहा, “यह सामान्य उड़ान थी। को-पायलट नमाज पढ़ना चाहता था, जैसा कि कई स्थानीय लोग करते हैं। वह नमाज पढ़ रहा था। इस दौरान सम्मान के कारण मैंने पीछे की ओर नहीं देखा। करीब चार-पांच मिनट बाद अचानक मेरे सिर के पीछे जोरदार चोट लगी।” बुधवार को दुबई से तेल अवीव जा रहे फ्लाईदुबई के विमान एफजेड1073 के कॉकपिट में उनके को-पायलट ने मच्छार पर चाकू से हमला किया था, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। विमान में 27 बच्चों समेत 174 यात्री सवार थे।

पहले लगा विमान में कोई बड़ी खराबी हो गई

कैप्टन मच्छार ने बताया कि शुरुआती हमले के बाद लगातार वार होते रहे। पहले उन्हें लगा कि शायद विमान में ही कोई गंभीर तकनीकी समस्या आ गई है। उन्होंने कहा, “लेकिन उसके बाद लगातार वार होते रहे। तभी मुझे समझ आया कि समस्या विमान में नहीं है। बल्कि कॉकपिट में मेरे साथ मौजूद दूसरे व्यक्ति ने मुझ पर हमला किया है।” हमले को रोकने की कोशिश में उनकी नजर धुंधली होने लगी। उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश भी की। लेकिन हमलावर ने दरवाजा फिर बंद कर दिया, जिससे वह जमीन पर गिर पड़े।

‘मेरे अंदर आखिरी लड़ाई बाकी थी’

कैप्टन ने बताया कि इसी दौरान विमान अचानक तेजी से नीचे की ओर झुकने लगा और यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। उस समय उन्हें लगा कि अगर उन्होंने कुछ नहीं किया तो विमान में सवार सभी लोगों की जान जा सकती है। उन्होंने कहा, “मेरे अंदर एक आखिरी लड़ाई बाकी थी। आप इसे निजी लड़ाई कहें या लोगों के लिए लड़ाई, लेकिन मैंने वह किया। अगर मैं ऐसा नहीं करता तो मैं मर जाता।” उन्होंने आगे बताया कि पूरी ताकत लगाकर उन्होंने कॉकपिट के दरवाजे तक पहुंचने की कोशिश की और आखिरकार उसे खोलने में सफल रहे। इसके बाद बाहर मौजूद लोगों ने स्थिति संभाल ली और विमान का अपने कंट्रोल में वापस ले लिया।

कोड के बावजूद कैसे खुला कॉकपिट का दरवाजा?

मच्छार ने बताया कि कॉकपिट के दरवाजे में बाहर से खोलने के लिए कोड की व्यवस्था थी। उनके सहयोगी बाहर से कोड डालकर दरवाजा खोलने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन हमलावर उन्हें दरवाजा खोलने नहीं दे रहा था। ऐसे में उनके पास एक ही रास्ता बचा था दरवाजे के अंदर मौजूद नॉब तक पहुंचना। उन्होंने कहा, “यह एक छोटा और तेज ट्विस्ट था। जैसे ही मेरे हाथ नॉब तक पहुंचे, मैंने उसे घुमाया और दरवाजा खोल दिया।” इसके बाद बाहर मौजूद लोगों ने कॉकपिट में पहुंचकर स्थिति को संभाला और विमान को सुरक्षित कंट्रोल में लिया।

नेतन्याहू ने बताया ‘किस्मत का मोड़’, इजरायल आने का दिया न्योता

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की तारीफ करते हुए इसे ‘किस्मत का एक मोड़’ करार दिया। नेतन्याहू ने बातचीत के दौरान मच्छार से कहा कि वह इजरायल, भारत और पूरी दुनिया के हीरो हैं। उन्होंने उन्हें इजरायल के स्वतंत्रता दिवस समारोह में मशाल जलाने के लिए आमंत्रित भी किया। यह घटना उस समय बेहद गंभीर हो गई थी जब 34,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ रहे विमान के कॉकपिट में ही पायलट पर हमला हुआ। कैप्टन मच्छार की सूझबूझ और आखिरी क्षण तक विमान को बचाने की कोशिश ने संभावित बड़े हादसे को टालने में अहम भूमिका निभाई। इस वक्त उनकी पूरी दुनिया में तारीफ हो रही है।

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Smit Machchhar: जिस पायलट ने आसमान में टाली तबाही, उसे नेतन्याहू का आया खास न्योता; कैप्टन स्मित संग PM मोदी भी होंगे साथ!

Captain Smit Machchhar: फ्लाईदुबई विमान में हुए हाई-स्टेक्स मिड-एयर हमले के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर से खास बातचीत की। इस दौरान नेतन्याहू ने संकट की घड़ी में कैप्टन मच्छर के अदम्य साहस और सूझबूझ की जमकर सराहना की। उन्होंने कैप्टन मच्छर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इजरायल के आगामी स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होने का औपचारिक न्योता भी दिया। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से शनिवार (3 अक्तूबर) रात फोन पर बातचीत के दौरान कैप्टन स्मित मच्छार ने बताया कि हमले से पहले को-पायलट ने प्रार्थना करने की इच्छा जताई थी। उसका सम्मान करते हुए वह दूसरी ओर मुड़ गए थे।

मच्छार ने बताया कि कुछ मिनट बाद उन्हें सिर के पीछे जोरदार प्रहार महसूस हुआ और इसके बाद उन पर लगातार हमले किए गए। नेतन्याहू ने उनसे कहा कि इतनी कठिन परिस्थितियों में उनके साहस और संयम बनाए रखने की क्षमता से वह हैरान हैं। उन्होंने कहा, “आपने इतनी सारी जानें बचाईं… आपने दुनिया की आत्मा को बचाया।”

उन्होंने कहा, “मैं आपको और मेरे प्रिय मित्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हमारे अगले स्वतंत्रता दिवस पर जश्न की मशाल जलाने के लिए आमंत्रित करना चाहता हूं। आप भारत और इज़राइल के बहादुर लोगों के सच्चे हीरो हैं। आप पूरी दुनिया के हीरो हैं। मैं आपके जल्द और पूरी तरह से ठीक होने की कामना करता हूं।”

नेतन्याहू ने आगे कहा, “आम तौर पर यह सम्मान इज़राइली नागरिकों को ही दिया जाता है। लेकिन मुझे लगता है कि इस मामले में इजरायल के सभी नागरिक आपका स्वागत करेंगे। इसलिए हमें उम्मीद है कि आप जल्द ही इजरायल आएंगे… मैं आपको यहां फिर से देखने के लिए उत्सुक हूं। लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए मुझे लगता है कि यह यात्रा यादगार और ऐतिहासिक होगी।”

कॉकपिट में अचानक हुआ हमला

कैप्टन स्मित मच्छार ने नेतन्याहू को उस खौफनाक घटना के बारे में बताया, जब फ्लाईदुबई की उड़ान सामान्य रूप से आगे बढ़ रही थी। इसी दौरान उनके को-पायलट ने प्रार्थना करने की अनुमति मांगी। मच्छार ने बताया कि स्थानीय क्रू सदस्यों के लिए यह सामान्य बात थी, इसलिए उन्होंने पेशेवर रवैया अपनाते हुए अपना ध्यान उड़ान पर बनाए रखा। लेकिन करीब चार-पांच मिनट बाद उनके सिर के पीछे जोरदार हमला हुआ।

उन्होंने कहा कि शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद विमान में कोई गंभीर तकनीकी खराबी हुई है। लेकिन जल्द ही उन्हें एहसास हुआ कि कॉकपिट के अंदर ही उन पर हमला किया जा रहा है। हमले के बाद उनकी आंखों के सामने धुंध छाने लगी और वह बुरी तरह भ्रमित हो गए। इसी दौरान विमान तेजी से नीचे की ओर जाने लगा। कॉकपिट के फर्श पर पड़े होने के बावजूद उन पर लगातार वार किए जाते रहे।

‘अगर दरवाजा नहीं खोलता तो मेरी मौत हो जाती’

कैप्टन मच्छर ने बताया कि उस वक्त उन्हें एहसास हुआ कि विमान को बचाने का एकमात्र रास्ता कॉकपिट का दरवाजा खोलना था। उन्होंने अपनी बची हुई ताकत जुटाई और दरवाजे की तरफ बढ़ने का फैसला किया। उन्होंने कहा, “मेरे अंदर बस एक आखिरी लड़ाई बाकी थी। आप इसे निजी लड़ाई कहें या लोगों के लिए लड़ाई। लेकिन मैंने सोचा कि अगर मैंने ऐसा नहीं किया तो मैं मर जाऊंगा। इसके बाद मैंने अपनी पूरी ताकत लगाई और दरवाजे की तरफ गया और उसे खोल दिया।”

नेतन्याहू ने पूछा- सुरक्षित कॉकपिट का दरवाजा कैसे खोला?

बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कैप्टन मच्छार से पूछा कि आखिर इतनी गंभीर स्थिति में उन्होंने कॉकपिट का सुरक्षित दरवाजा कैसे खोला? इस पर मच्छार ने कॉकपिट डोर की पूरी कार्यप्रणाली समझाई। उन्होंने बताया कि बाहर से कॉकपिट में एंट्री के लिए सिक्योरिटी कोड की जरूरत होती है।

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स्मित ने बताया कि विमान के अंदर मौजूद क्रू को उस समय प्रवेश करने से रोका गया था। हालांकि, कॉकपिट के अंदर की तरफ से दरवाजा एक सामान्य मैनुअल टर्न-नॉब के जरिए खोला जा सकता है। इसी व्यवस्था का फायदा उठाते हुए कैप्टन मच्छार ने अपनी जान जोखिम में डालकर दरवाजा खोला और विमान को एक संभावित बड़ी त्रासदी से बचाने की कोशिश की।

यह बातचीत फ्लाईदुबई विमान में हुई उस भयावह घटना के बाद हुई है, जिसमें कॉकपिट के भीतर हिंसा के बावजूद कैप्टन मच्छार ने कंट्रोल बनाए रखा और विमान में सवार यात्रियों की सुरक्षा के लिए आखिरी क्षण तक संघर्ष किया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने कैप्टन स्मित मच्छार के लिए ‘अशोक चक्र’ की मांग की है।

नेतन्याहू ने भारतीय कैप्टन स्मित से बात की:बोले- आप पूरी दुनिया के हीरो; इजराइल के स्वतंत्रता दिवस पर मशाल जलाने का न्योता दिया

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फ्लाईदुबई के पायलट कैप्टन स्मित मच्छर से फोन पर बात की। उन्होंने कैप्टन स्मित से कहा कि वे भारत और इजराइल के लोगों के हीरो हैं। नेतन्याहू ने उन्हें अगले इजराइली स्वतंत्रता दिवस पर उनके साथ मिलकर जश्न की लौ जलाने का न्योता दिया। नेतन्याहू ने कैप्टन स्मित से घटना के बारे में भी पूछा। स्मित ने बताया कि हमले से पहले को-पायलट ने प्रेयर करने की इच्छा जताई थी। इसके कुछ मिनट बाद उसने उन पर हमला कर दिया। नेतन्याहू ने कैप्टन स्मित को जल्दी ठीक होने की शुभकामना दी और कहा कि वे उन्हें और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्वतंत्रता दिवस पर इजराइल आने का न्योता देते हैं। यह खबर लगातार अपडेट की जा रही है…

6 ग्राम का कंगन, 22 एकड़ की सोसाइटी और 2000 लोगों की भीड़… ऐसे वापस मिला खोया सोना

हैदराबाद की एक गेटेड कम्युनिटी में गुम हुआ सोने का ब्रेसलेट मिलने की कहानी इन दिनों चर्चा में है। करीब 22 एकड़ में फैले इस रिहायशी परिसर में रहने वाली कंटेंट क्रिएटर स्वाति बांदला को तब परेशानी हुई, जब उनका 6-7 ग्राम का ब्रेसलेट अचानक गायब हो गया। उन्हें याद ही नहीं था कि आखिर ज्वेलरी कब और कहां गिरी। काफी तलाश के बाद भी जब कोई सुराग नहीं मिला, तो उन्होंने सोसाइटी की सिक्योरिटी टीम से मदद मांगी। इसके बाद CCTV फुटेज ने पूरी कहानी का रुख बदल दिया। सिक्योरिटी कर्मचारियों ने उनके आने-जाने के रास्तों और कॉमन एरिया की फुटेज खंगाली और एक खास जगह को चिन्हित किया।

खास बात यह थी कि वहां स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 2,000 से ज्यादा लोग मौजूद थे। इसके बावजूद स्वाति और उनके पति ने रात में वहां पहुंचकर तलाश जारी रखी और आखिरकार घास में चमकता ब्रेसलेट मिल गया।

6-7 ग्राम का ब्रेसलेट हुआ अचानक गायब

हैदराबाद की कंटेंट क्रिएटर स्वाति बांदला ने इंस्टाग्राम वीडियो में अपना अनुभव शेयर किया। उन्होंने बताया कि ब्रेसलेट करीब 6-7 ग्राम का था और उन्हें बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि वह कब और कहां गिरा। 16 अगस्त को जब उन्हें ब्रेसलेट हाथ में नहीं मिला, तो सबसे पहले उन्होंने सोसाइटी की सिक्योरिटी टीम से संपर्क किया। उन्होंने यह भी पता किया कि कहीं किसी निवासी ने ब्रेसलेट को सिक्योरिटी या लॉस्ट एंड फाउंड में तो जमा नहीं कराया है।

एक वीडियो बना पूरी तलाश का सुराग

जब शुरुआती कोशिशों से कुछ पता नहीं चला तो स्वाति ने अपने फोन में मौजूद पुराने फोटो और वीडियो खंगालने शुरू किए। इसी दौरान उन्हें 15 अगस्त की सुबह का एक वीडियो मिला, जिसमें ब्रेसलेट उनकी कलाई पर साफ दिखाई दे रहा था। यह छोटा-सा सुराग सिक्योरिटी टीम के लिए बेहद काम का साबित हुआ। वीडियो को आधार बनाकर टीम ने स्वाति की उस दिन की गतिविधियों को CCTV में ट्रैक करना शुरू किया।

CCTV ने जो दिखाया, वहीं से शुरू हुई असली खोज

सिक्योरिटी कर्मचारियों ने सोसाइटी के अलग-अलग हिस्सों की फुटेज देखी। एंट्री और एग्जिट पॉइंट, लिफ्ट, लॉबी और कॉमन एरिया तक के कैमरों को खंगाला गया। काफी फुटेज देखने के बाद टीम को एक ऐसी जगह नजर आई, जहां संभावना थी कि स्वाति के वहां से गुजरने से कुछ सेकंड पहले ब्रेसलेट जमीन पर गिरा होगा। लेकिन समस्या यह थी कि उसी जगह 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस का कार्यक्रम आयोजित किया गया था।

2000 से ज्यादा लोगों के बीच कैसे मिलता ब्रेसलेट?

जिस जगह ब्रेसलेट गिरने की आशंका थी, वहां दिनभर 2,000 से ज्यादा लोग आ-जा चुके थे। ऐसे में कुछ ग्राम का सोने का ब्रेसलेट घास में तलाशना किसी चुनौती से कम नहीं था। फिर भी स्वाति और उनके पति ने हार नहीं मानी। रात में दोनों उसी जगह पहुंचे, जिसे CCTV फुटेज के आधार पर चिन्हित किया गया था।

अंधेरे में चमकी उम्मीद की एक किरण

रात में रोशनी के बीच घास में तलाश करते हुए अचानक उन्हें कुछ चमकता हुआ दिखाई दिया। पास जाकर देखा तो वह वही गुम हुआ सोने का ब्रेसलेट था। जिस ज्वेलरी को वापस मिलने की उम्मीद लगभग खत्म हो चुकी थी, वह आखिरकार मिल गई। इस पूरे घटनाक्रम में CCTV और सिक्योरिटी टीम की तेजी ने अहम भूमिका निभाई।

स्वाति ने सिक्योरिटी टीम को दिया पूरा श्रेय

इस अनुभव के बाद स्वाति ने कहा कि गेटेड कम्युनिटी की अहमियत सिर्फ सुविधाओं और इमारतों तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, मजबूत सिक्योरिटी सिस्टम, CCTV कैमरे और मदद के लिए मौजूद स्टाफ मुश्किल समय में बेहद काम आते हैं। उन्होंने माना कि अगर सिक्योरिटी टीम ने तुरंत कार्रवाई नहीं की होती और CCTV फुटेज को इतनी बारीकी से ट्रैक नहीं किया होता, तो शायद उनका ब्रेसलेट हमेशा के लिए खो जाता।

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

Bengaluru: ट्रैफिक और महंगे किराए से अलग दिखा शहर का खूबसूरत चेहरा, चेन्नई के शख्स ने बताई दिल की बात

Kangana Ranaut: ‘हम अच्छी जिंदगी क्यों नहीं जी सकते?’ रोल्स-रॉयस खरीदने पर ट्रोल हुईं मैथिली ठाकुर के सपोर्ट में आईं कंगना रनौत

Kangana Ranaut: एक्टर और BJP सांसद कंगना रनौत ने MLA मैथिली ठाकुर का समर्थन किया है। मैथिली ठाकुर को कुछ दिन पहले मुंबई के मशहूर लालबागचा राजा पंडाल में एक लग्जरी नीली रोल्स-रॉयस कलिनन कार में आने के लिए ट्रोल किया गया था। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि अपनी राजनीतिक यात्रा के एक साल के भीतर ही बिहार की MLA और सिंगर के पास इतनी महंगी लग्जरी SUV कैसे हो सकती है, जिसकी मुंबई में ऑन-रोड कीमत 13 करोड़ से ज्यादा हो सकती है। कंगना ने सवाल किया कि जब राजनेता अपनी जिंदगी बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं तो ट्रोलर्स को हमेशा बुरा क्यों लगता है।

कंगना ने क्या कहा

इंस्टाग्राम स्टोरीज पर कंगना ने लिखा, “कुछ लोगों को तब बहुत जलन होती है जब वे राजनेता को अच्छी जिंदगी जीते हुए देखते हैं। अब हमारी युवा MLA को लग्जरी कार इस्तेमाल करने के लिए ट्रोल किया जा रहा है। हम भले ही समाज सेवा में लगे हों, लेकिन हमारे अपने करियर, जिंदगी और लोकप्रियता भी होती है। हम निस्वार्थ भाव से जनहित में काम करते हैं, लेकिन कुछ लोगों को हमारे अच्छे से रहने पर इतनी तकलीफ क्यों होती है? हम अच्छी जिंदगी क्यों नहीं जी सकते? हमें जनता के पैसे में कोई दिलचस्पी नहीं है, लेकिन हमसे यह उम्मीद करना कि हम गरीब और बेजान जिंदगी जिएं, बहुत बेतुका है।”

कौन हैं मैथिली ठाकुर?

लोक गायिका से राजनेता बनीं मैथिली ठाकुर 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों में एक बड़े उलटफेर का कारण बनीं और RJD के दिग्गज नेता बिनोद मिश्रा को बड़े अंतर से हराया। वह बिहार की सबसे युवा MLA हैं। मैथिली ठाकुर एक लोकप्रिय गायिका हैं, जिन्होंने बिहार विधानसभा चुनावों के दौरान BJP उम्मीदवार के तौर पर राजनीति में कदम रखा। भारतीय शास्त्रीय संगीत और लोक परंपराओं में प्रशिक्षित, उनके गायन में मैथिली, भोजपुरी, भक्ति भजन और फिल्मी-शैली के गाने शामिल हैं।

मैथिली बिहार के मधुबनी जिले के बेनीपट्टी की रहने वाली हैं। बाद में उनका परिवार उनकी संगीत की ट्रेनिंग और करियर को आगे बढ़ाने के लिए द्वारका- नई दिल्ली आ गया। उनके पिता रमेश ठाकुर संगीत शिक्षक हैं और उन्होंने बहुत कम उम्र से ही अपने पिता और दादा दोनों से संगीत सीखा।

2017 में, रियलिटी सिंगिंग शो ‘राइजिंग स्टार इंडिया’ में भाग लेने के बाद उन्हें बड़ी पहचान मिली। तब से उन्होंने सोशल मीडिया, खासकर YouTube पर अपनी मज़बूत उपस्थिति बनाई है, जहां वह शास्त्रीय और लोक संगीत की प्रस्तुतियां पोस्ट करती हैं। कुछ दिन पहले कंगना ने एक्ट्रेस तृषा कृष्णन के समर्थन में बात की थी। पिछले महीने चेन्नई में स्वतंत्रता दिवस 2026 के समारोह में शामिल होने की वजह से तृषा एक विवाद में फंस गई थीं। तृषा का नाम लिए बिना उन्होंने कहा, “आपने देखा होगा कि तमिलनाडु में क्या हुआ, जहां एक बहुत सम्मानित कलाकार और एक्ट्रेस एक ऐसे मामले में शामिल थीं, जिसमें दोनों पक्षों के बीच संबंध था। हालांकि जब गाली-गलौज और चरित्र हनन की बात आती है तो हमेशा महिला को ही निशाना बनाया जाता है।”

गृह मंत्रालय ने शहजाद भट्टी नेटवर्क को आतंकवादी संगठन घोषित किया

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हथियारों और मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले शहजाद भट्टी नेटवर्क को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आतंकवादी संगठन घोषित किया है।

गृह मंत्रालय ने बुधवार को एक अधिसूचना जारी कर कहा कि शहजाद भट्टी नेटवर्क को आतंकवादी संगठन घोषित किया गया है। अधिसूचना में कहा गया है कि यह नेटवर्क सीमा पार हथियार, विस्फोटक और मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल है। 

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इसके अलावा, यह युवाओं और छोटे अपराधियों को आतंकवादी गतिविधियों के लिए उकसाने, भारत की लोकतांत्रिक संरचना और सामुदायिक सौहार्द को निशाना बनाने के साथ-साथ घृणास्पद डिजिटल सामग्री प्रकाशित करने में भी शामिल है।

अधिसूचना के अनुसार यह कार्रवाई यूएपीए की धारा 35 की उपधारा (1) के खंड (क) द्वारा प्रदत शक्तियों का प्रयोग करते हुए की गयी है। यह नेटवर्क कथित रूप से पाकिस्तान की खुफिया एजेन्सी आईएसआई से जुड़ा है। स्वतंत्रता दिवस से पहले भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और राज्य पुलिस बलों ने 14 राज्यों में एक संयुक्त अभियान चलाकर इस नेटवर्क के 200 से अधिक गुर्गों को गिरफ्तार किया था।

Pic Credit : ANI

ब्रिटेन के किले पर पाकिस्तान का झंडा फहराने पर विवाद:दक्षिणपंथी रिफॉर्म पार्टी ने विरोध किया, कहा- ऐतिहासिक इमारत पर विदेशी झंडा क्यों

ब्रिटेन के वेल्स में कार्डिफ कैसल (किले) पर पाकिस्तान का झंडा फहराने को लेकर विवाद हो गया है। दक्षिणपंथी रिफॉर्म पार्टी ने इसका विरोध किया है। रिफॉर्म के सीनियर नेता रॉबर्ट जेनरिक ने सोशल मीडिया पर कार्डिफ कैसल पर पाकिस्तानी झंडा फहराए जाने का वीडियो शेयर किया। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक इमारतों पर विदेशी झंडे फहराया जाना बंद होना चाहिए।उन्होंने लिखा, कार्डिफ कैसल पर पाकिस्तान का झंडा फहराया गया है। हम अपनी संस्कृति पर कब्जे की इस कोशिश को क्यों होने दे रहे हैं? अब यह हर जगह दिखाई देता है। कार्डिफ काउंसिल ने बताया कि पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 14 अगस्त को कैसल पर पाकिस्तान का झंडा फहराया गया था। इससे पहले 9 अगस्त को भी एक कार्यक्रम में झंडा फहराया गया था और वह रातभर लगा रहा। कंजरवेटिव नेता बोलीं- यह सम्मान है, कब्जा नहीं वेल्श कंजरवेटिव सांसद नताशा असगर ने रिफॉर्म के रुख की आलोचना की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी, भारतीय और पोलिश समुदायों के झंडा फहराने के कार्यक्रमों में वह खुद शामिल हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों में अलग-अलग राजनीतिक दलों के लोग शामिल होते हैं। यह किसी समुदाय का कब्जा नहीं, बल्कि एक-दूसरे के प्रति सम्मान दिखाने का तरीका है। असगर ने कहा, “मैं रिफॉर्म की ओर से नस्लीय विवाद भड़काने की कोशिशों से तंग आ चुकी हूं।” उन्होंने रिफॉर्म नेताओं को ऐसे कार्यक्रमों में शामिल होने की सलाह दी, ताकि वे देख सकें कि अलग-अलग समुदायों के बीच मेल-जोल कैसे होता है। काउंसिल ने कहा- भारत का झंडा भी फहराया था कार्डिफ काउंसिल के लेबर नेता क्रिस वीवर ने कहा कि पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस पर झंडा फहराने का मकसद कार्डिफ में रहने वाले पाकिस्तानी समुदाय के योगदान को सम्मान देना था। उन्होंने बताया कि 15 अगस्त को भारत के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भारतीय झंडा भी फहराया गया था। वीवर ने कहा कि काउंसिल लंबे समय से महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मौकों पर अलग-अलग देशों के झंडे फहराती रही है। कार्डिफ कैसल पर वेल्स और ब्रिटेन के झंडे भी लगे रहते हैं। उन्होंने कहा, “यह पूरा विवाद गलत जानकारी की वजह से खड़ा हुआ है और अब इसे बंद होना चाहिए।” विवाद में 2024 की पुरानी तस्वीर भी रिफॉर्म वेल्स के नेता डैन थॉमस ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, “अब लेबर कार्डिफ कैसल पर पाकिस्तान का झंडा फहरा रही है।” लेकिन यह तस्वीर नई नहीं थी। इसे 14 अगस्त 2024 को एक BBC पत्रकार ने पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पोस्ट किया था। सोमवार को कार्डिफ कैसल पर पाकिस्तान का झंडा नहीं दिखा। BBC Wales ने रिफॉर्म से पूछा कि थॉमस ने दो साल पुरानी तस्वीर का इस्तेमाल क्यों किया और पोस्ट में ऐसे क्यों लिखा जैसे झंडा अभी फहराया गया हो। रिफॉर्म वेल्स ने इस सवाल का जवाब नहीं दिया। स्थानीय नेता बोले- वेल्स की पहचान को खतरा नहीं वेल्स की एक स्थानीय पार्टी की वेस्टमिंस्टर नेता लिज सेविल रॉबर्ट्स ने भी रिफॉर्म पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि किसी दूसरे देश का झंडा फहराने से वेल्स की पहचान को कोई खतरा नहीं है। उनके मुताबिक, रॉबर्ट जेनरिक अपनी पार्टी की समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए ऐसे मुद्दे उठा रहे हैं। रिफॉर्म वेल्स इससे पहले कार्डिफ बे में वेल्स की संसद Senedd के बाहर यूक्रेन का झंडा फहराने का भी विरोध कर चुकी है। पाकिस्तानी समुदाय के योगदान को सम्मान देने की बात कार्डिफ काउंसिल ने कहा कि कार्डिफ कैसल शहर की प्रमुख ऐतिहासिक और सार्वजनिक इमारतों में से एक है। ऐसे मौकों पर यहां झंडा फहराने से शहर अलग-अलग स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अवसरों को सम्मान देता है। काउंसिल के मुताबिक, पाकिस्तान का झंडा फहराना कार्डिफ के बहुसांस्कृतिक समाज और यहां रहने वाले पाकिस्तानी समुदाय के योगदान को पहचानने का हिस्सा था। खबर अपडेट हो रही है…

Salman Khan: ‘सफाई बनाए रखो, वरना मैं उन्हें भेज दूंगा’, सलमान खान ने बांद्रा के एक कैफे को तुकाराम मुंडे के नाम से दी चेतावनी

Salman Khan: सलमान खान ने अपने दोस्त के नए बांद्रा कैफे को बेसिक चीजों का ध्यान रखने के लिए मजाकिया अंदाज में याद दिलाया है। अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर ‘द टक शॉप एट सेवियोज’ का वीडियो शेयर करते हुए, एक्टर ने अपनी कॉफ़ी दोबारा भरने के लिए कहा और मज़ाक में कैफ़े से कहा कि वे कीमत, क्वालिटी या साफ़-सफ़ाई से कोई समझौता न करें। उनकी यह चेतावनी महाराष्ट्र FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे की ओर भी एक मज़ाकिया इशारा लग रही थी, जो फ़ूड आउटलेट्स के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई के लिए जाने जाते हैं।

तुकाराम मुंडे चर्चा का विषय क्यों बने हैं?

26 मई, 2026 को FDA कमिश्नर का पद संभालने के बाद से तुकाराम मुंडे महाराष्ट्र में फ़ूड सेफ़्टी के लिए की जा रही सख़्त कार्रवाई में एक जाना-माना नाम बन गए हैं। बताया जाता है कि सिर्फ़ दो महीनों में उनकी टीम ने 3,000 से ज़्यादा जगहों का निरीक्षण किया और लगभग 165 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस सस्पेंड कर दिए।

सख़्त और बिना किसी ढिलाई वाले रवैये की वजह से सोशल मीडिया पर उन्हें “असली सिंघम” का नाम भी दिया गया है। उनकी देखरेख में, FDA ने रेस्तरां, होटल, क्लब, फ़ास्ट-फ़ूड आउटलेट और संस्थागत किचनों में अचानक निरीक्षण बढ़ा दिए हैं। अधिकारी ख़राब साफ़-सफ़ाई, खाने में मिलावट, नकली पनीर, मिलावटी दूध और बिना लाइसेंस के काम करने जैसी समस्याओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर रहे हैं।

स्वतंत्रता दिवस पर छात्रों से बात करते हुए उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि एक स्वस्थ राष्ट्र के लिए स्वस्थ लोगों का होना ज़रूरी है। स्वस्थ लोगों के लिए स्वस्थ भोजन और दवा ज़रूरी है। और इसके लिए, रेगुलेटर्स को उस लक्ष्य की दिशा में काम करने की ज़रूरत है।”

सलमान खान का अगला प्रोजेक्ट क्या है?

काम की बात करें तो, सलमान खान ‘बिग बॉस 20’ के होस्ट के तौर पर वापसी करने वाले हैं। नया सीज़न 6 सितंबर, 2026 को JioHotstar और Colors TV पर शुरू होगा। इसके बाद सलमान ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ (Maatrubhumi: May War Rest in Peace) में नज़र आएंगे, जिसका पहले नाम ‘बैटल ऑफ़ गलवान’ (Battle of Galwan) था।

फ़िलहाल इस फ़िल्म की दोबारा शूटिंग चल रही है। उनके पास वामशी पैदिपल्ली की फ़िल्म ‘मॉन्स्टर’ (Monster) भी है, जिसमें उनके साथ नयनतारा हैं और इसके 2027 में ईद के आस-पास रिलीज़ होने की उम्मीद है।

अमेरिका में $1 के सिक्के पर ट्रम्प की तस्वीर:250वीं वर्षगांठ पर जारी हुआ, बिक्री शुरू होने के कुछ घंटे बाद आउट ऑफ स्टॉक

अमेरिका ने अपनी 250वीं वर्षगांठ के मौके पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तस्वीर वाला $1 का खास सिक्का जारी किया है। अमेरिकी मिंट ने बुधवार दोपहर 12 बजे इसकी बिक्री शुरू की। बिक्री शुरू होने के कुछ घंटे बाद ही सिक्का आउट ऑफ स्टॉक हो गया। दोपहर करीब 3 बजे अमेरिकी मिंट की वेबसाइट पर 25 सिक्कों का रोल उपलब्ध नहीं था। वहीं, 100 सिक्कों का बैग भी आउट ऑफ स्टॉक दिख रहा था। सिक्के के एक तरफ ट्रम्प की तस्वीर है। इसके साथ ‘IN GOD WE TRUST’ और ‘LIBERTY’ लिखा है। दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति की मुहर और अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के लिए ‘250’ लिखा गया है। 25 सिक्कों के रोल की कीमत 61 डॉलर अमेरिकी मिंट के मुताबिक, 25 सिक्कों के रोल की कीमत 61 डॉलर और 100 सिक्कों के बैग की कीमत 154.50 डॉलर है। बिक्री शुरू होने के करीब आधे घंटे बाद ही वेबसाइट पर लोगों को वेटिंग एरिया में भेजा जाने लगा। वहां करीब 1 घंटे का वेटिंग टाइम बताया गया। गुरुवार दोपहर 2 बजे तक एक परिवार अधिकतम 2 खरीदारी कर सकता था। अमेरिकी मिंट ने बताया कि 2.5 लाख सिक्कों को खास ‘4 जुलाई’ निशान के साथ रैंडम तरीके से रोल और बैग में रखा गया है। ये सिक्के 4 जुलाई को बनाए गए थे। अमेरिका में इसी दिन स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है। 1926 के बाद पहली बार जीवित राष्ट्रपति की तस्वीर अमेरिकी मिंट के मुताबिक, इससे पहले किसी जीवित राष्ट्रपति की तस्वीर 1926 में सिक्के पर दिखाई गई थी। उस समय राष्ट्रपति कैल्विन कूलिज की तस्वीर अमेरिका की स्वतंत्रता की घोषणा पर हस्ताक्षर की 150वीं वर्षगांठ के मौके पर जारी आधे डॉलर के सिक्के पर लगाई गई थी। अमेरिकी कानून के तहत किसी जीवित राष्ट्रपति या जीवित पूर्व राष्ट्रपति की तस्वीर सिक्के पर लगाना प्रतिबंधित है। हालांकि, अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के लिए कांग्रेस नेसर्कुलेटिंग कलेक्टिबल कॉइन रीडिजाइन एक्ट पास किया। इसके तहत ट्रेजरी को इस अवसर पर खास $1 के सिक्के जारी करने की अनुमति मिली। कानून में यह भी कहा गया है कि सिक्के के पीछे वाले हिस्से पर किसी जीवित व्यक्ति का पोर्ट्रेट नहीं हो सकता। ट्रम्प की तस्वीर सिक्के के आगे वाले हिस्से पर है, इसलिए इसे कानून के मुताबिक माना गया है। —————————– ये खबर भी पढ़ें… नीदरलैंड्स ने अमेरिका-कनाडा से 86 टन सोना हटाकर लंदन भेजा:बैंक ऑफ इंग्लैड में रखा, कहा- संकट आने पर यहां आसानी से बेच सकेंगे नीदरलैंड्स ने अमेरिका और कनाडा में रखा अपना 86 टन सोना निकालकर लंदन भेज दिया है। डच सेंट्रल बैंक (DNB) के मुताबिक, यह ट्रांसफर मार्च से अगस्त के बीच कई महीनों में किया गया। अब यह सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड में रखा गया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…