Salman Khan: ‘सफाई बनाए रखो, वरना मैं उन्हें भेज दूंगा’, सलमान खान ने बांद्रा के एक कैफे को तुकाराम मुंडे के नाम से दी चेतावनी

Salman Khan: सलमान खान ने अपने दोस्त के नए बांद्रा कैफे को बेसिक चीजों का ध्यान रखने के लिए मजाकिया अंदाज में याद दिलाया है। अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर ‘द टक शॉप एट सेवियोज’ का वीडियो शेयर करते हुए, एक्टर ने अपनी कॉफ़ी दोबारा भरने के लिए कहा और मज़ाक में कैफ़े से कहा कि वे कीमत, क्वालिटी या साफ़-सफ़ाई से कोई समझौता न करें। उनकी यह चेतावनी महाराष्ट्र FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे की ओर भी एक मज़ाकिया इशारा लग रही थी, जो फ़ूड आउटलेट्स के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई के लिए जाने जाते हैं।

तुकाराम मुंडे चर्चा का विषय क्यों बने हैं?

26 मई, 2026 को FDA कमिश्नर का पद संभालने के बाद से तुकाराम मुंडे महाराष्ट्र में फ़ूड सेफ़्टी के लिए की जा रही सख़्त कार्रवाई में एक जाना-माना नाम बन गए हैं। बताया जाता है कि सिर्फ़ दो महीनों में उनकी टीम ने 3,000 से ज़्यादा जगहों का निरीक्षण किया और लगभग 165 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस सस्पेंड कर दिए।

सख़्त और बिना किसी ढिलाई वाले रवैये की वजह से सोशल मीडिया पर उन्हें “असली सिंघम” का नाम भी दिया गया है। उनकी देखरेख में, FDA ने रेस्तरां, होटल, क्लब, फ़ास्ट-फ़ूड आउटलेट और संस्थागत किचनों में अचानक निरीक्षण बढ़ा दिए हैं। अधिकारी ख़राब साफ़-सफ़ाई, खाने में मिलावट, नकली पनीर, मिलावटी दूध और बिना लाइसेंस के काम करने जैसी समस्याओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर रहे हैं।

स्वतंत्रता दिवस पर छात्रों से बात करते हुए उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि एक स्वस्थ राष्ट्र के लिए स्वस्थ लोगों का होना ज़रूरी है। स्वस्थ लोगों के लिए स्वस्थ भोजन और दवा ज़रूरी है। और इसके लिए, रेगुलेटर्स को उस लक्ष्य की दिशा में काम करने की ज़रूरत है।”

सलमान खान का अगला प्रोजेक्ट क्या है?

काम की बात करें तो, सलमान खान ‘बिग बॉस 20’ के होस्ट के तौर पर वापसी करने वाले हैं। नया सीज़न 6 सितंबर, 2026 को JioHotstar और Colors TV पर शुरू होगा। इसके बाद सलमान ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ (Maatrubhumi: May War Rest in Peace) में नज़र आएंगे, जिसका पहले नाम ‘बैटल ऑफ़ गलवान’ (Battle of Galwan) था।

फ़िलहाल इस फ़िल्म की दोबारा शूटिंग चल रही है। उनके पास वामशी पैदिपल्ली की फ़िल्म ‘मॉन्स्टर’ (Monster) भी है, जिसमें उनके साथ नयनतारा हैं और इसके 2027 में ईद के आस-पास रिलीज़ होने की उम्मीद है।

अमेरिका में $1 के सिक्के पर ट्रम्प की तस्वीर:250वीं वर्षगांठ पर जारी हुआ, बिक्री शुरू होने के कुछ घंटे बाद आउट ऑफ स्टॉक

अमेरिका ने अपनी 250वीं वर्षगांठ के मौके पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तस्वीर वाला $1 का खास सिक्का जारी किया है। अमेरिकी मिंट ने बुधवार दोपहर 12 बजे इसकी बिक्री शुरू की। बिक्री शुरू होने के कुछ घंटे बाद ही सिक्का आउट ऑफ स्टॉक हो गया। दोपहर करीब 3 बजे अमेरिकी मिंट की वेबसाइट पर 25 सिक्कों का रोल उपलब्ध नहीं था। वहीं, 100 सिक्कों का बैग भी आउट ऑफ स्टॉक दिख रहा था। सिक्के के एक तरफ ट्रम्प की तस्वीर है। इसके साथ ‘IN GOD WE TRUST’ और ‘LIBERTY’ लिखा है। दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति की मुहर और अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के लिए ‘250’ लिखा गया है। 25 सिक्कों के रोल की कीमत 61 डॉलर अमेरिकी मिंट के मुताबिक, 25 सिक्कों के रोल की कीमत 61 डॉलर और 100 सिक्कों के बैग की कीमत 154.50 डॉलर है। बिक्री शुरू होने के करीब आधे घंटे बाद ही वेबसाइट पर लोगों को वेटिंग एरिया में भेजा जाने लगा। वहां करीब 1 घंटे का वेटिंग टाइम बताया गया। गुरुवार दोपहर 2 बजे तक एक परिवार अधिकतम 2 खरीदारी कर सकता था। अमेरिकी मिंट ने बताया कि 2.5 लाख सिक्कों को खास ‘4 जुलाई’ निशान के साथ रैंडम तरीके से रोल और बैग में रखा गया है। ये सिक्के 4 जुलाई को बनाए गए थे। अमेरिका में इसी दिन स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है। 1926 के बाद पहली बार जीवित राष्ट्रपति की तस्वीर अमेरिकी मिंट के मुताबिक, इससे पहले किसी जीवित राष्ट्रपति की तस्वीर 1926 में सिक्के पर दिखाई गई थी। उस समय राष्ट्रपति कैल्विन कूलिज की तस्वीर अमेरिका की स्वतंत्रता की घोषणा पर हस्ताक्षर की 150वीं वर्षगांठ के मौके पर जारी आधे डॉलर के सिक्के पर लगाई गई थी। अमेरिकी कानून के तहत किसी जीवित राष्ट्रपति या जीवित पूर्व राष्ट्रपति की तस्वीर सिक्के पर लगाना प्रतिबंधित है। हालांकि, अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के लिए कांग्रेस नेसर्कुलेटिंग कलेक्टिबल कॉइन रीडिजाइन एक्ट पास किया। इसके तहत ट्रेजरी को इस अवसर पर खास $1 के सिक्के जारी करने की अनुमति मिली। कानून में यह भी कहा गया है कि सिक्के के पीछे वाले हिस्से पर किसी जीवित व्यक्ति का पोर्ट्रेट नहीं हो सकता। ट्रम्प की तस्वीर सिक्के के आगे वाले हिस्से पर है, इसलिए इसे कानून के मुताबिक माना गया है। —————————– ये खबर भी पढ़ें… नीदरलैंड्स ने अमेरिका-कनाडा से 86 टन सोना हटाकर लंदन भेजा:बैंक ऑफ इंग्लैड में रखा, कहा- संकट आने पर यहां आसानी से बेच सकेंगे नीदरलैंड्स ने अमेरिका और कनाडा में रखा अपना 86 टन सोना निकालकर लंदन भेज दिया है। डच सेंट्रल बैंक (DNB) के मुताबिक, यह ट्रांसफर मार्च से अगस्त के बीच कई महीनों में किया गया। अब यह सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड में रखा गया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

देवरिया के रहने वाले पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा बने राम मंदिर के पहले CEO, ऑपरेशन सिंदूर के समय की इनकी कहानी जानिए

Ram Mandir CEO: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में अपनी भूमिका के लिए ‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल’ पाने वाले रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को श्री राम जन्मभूमि मंदिर का चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) चुना गया है। यह फैसला तब लिया गया जब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बुधवार को अयोध्या में हुई एक बैठक में CEO की नियुक्ति पर विचार विमर्श किया।

इसके अलावा, ट्रस्ट ने तीन नए ट्रस्टी भी नियुक्त किए: दिल्ली के महेश भागचंदका (जो VHP के दिवंगत नेता अशोक सिंघल के रिश्तेदार हैं), अयोध्या के मदन मोहन पांडे और शिकोहाबाद की निर्मला यादव।

भारतीय वायु सेना के सम्मानित पूर्व कमांडर अप्रैल 2026 में रिटायर हुए थे और अब वे मंदिर ट्रस्ट के कामकाज के विस्तार के साथ एक अहम प्रशासनिक भूमिका संभालेंगे।

बता दें कि मिश्रा उन सीनियर मिलिट्री कमांडरों में शामिल थे जिन्हें ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान उनकी लीडरशिप के लिए सम्मानित किया गया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी शानदार सेवाओं और महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें ‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल’ से सम्मानित किया था।

यह मेडल युद्ध, संघर्ष या सैन्य कार्रवाई के दौरान सबसे बेहतरीन सेवा के लिए दिया जाता है और यह भारत के सबसे बड़े युद्ध-कालीन मिलिट्री सम्मानों में से एक है।

जितेंद्र मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर के हवाई हमलों के बारे में बताया

हाल ही में एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में, मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चलाए गए हवाई अभियान के बारे में बात की और बताया कि कैसे भारतीय सेना ने पाकिस्तान के अंदर काफी दूर मौजूद ठिकानों की पहचान की और उन पर हमला किया।

उन्होंने एक ऑपरेशन का जिक्र करते हुए बताया कि करीब 314 किलोमीटर दूर स्थित एक टारगेट को नष्ट किया गया था। मिश्रा के मुताबिक, इस कार्रवाई के दौरान सिर्फ एक छोटा सा ऑपरेशनल निर्देश दिया गया और इसके बाद टारगेट को सफलतापूर्वक तबाह कर दिया गया।

ऑपरेशन के बारे में बात करते हुए, मिश्रा ने प्लानिंग, सटीकता, टेक्नोलॉजी और सशस्त्र बलों की अलग-अलग शाखाओं के बीच तालमेल के महत्व पर जोर दिया। हालांकि, ऑपरेशन से जुड़ी कई बातें अभी भी गोपनीय रखी गई हैं।

उनकी बातों से एयर कैंपेन की प्लानिंग और उसे अंजाम देने के बारे में कुछ खास जानकारी मिली, हालांकि, उन्होंने ऐसी कोई संवेदनशील जानकारी साझा नहीं की, जिसका सार्वजनिक किया जाना सुरक्षा के लिहाज से ठीक न हो।

जितेंद्र मिश्रा का उत्तर प्रदेश से है खास कनेक्शन

मिश्रा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के भोपतपुरा के रहने वाले हैं, जो अयोध्या से सड़क मार्ग से लगभग तीन घंटे की दूरी पर है। वे एक मध्यम-वर्गीय परिवार से आते हैं और उनके पिता बतौर लेक्चरर काम करते थे।

अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर में एक अहम प्रशासनिक पद संभालने के बाद अब उनका उत्तर प्रदेश से और खास जुड़ाव हो गया है।

राम मंदिर ट्रस्ट के CEO के तौर पर जितेंद्र मिश्रा क्या करेंगे?

CEO के तौर पर, मिश्रा से उम्मीद है कि वे मंदिर ट्रस्ट के रोजमर्रा के कामकाज को संभालेंगे और इसके बढ़ते हुए ऑपरेशन्स में तालमेल बिठाएंगे।

उनकी जिम्मेदारियों में तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाएं, वित्तीय इंतजाम, स्टाफ के बीच तालमेल, सुरक्षा से जुड़ा तालमेल और बड़े धार्मिक आयोजनों का प्रबंधन शामिल हो सकता है।

अपने मिलिट्री करियर के दौरान बड़े संगठनों को संभालने, ऑपरेशनल प्लानिंग और तालमेल बिठाने का उनका अनुभव इस भूमिका के लिए काम का साबित हो सकता है।

रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा कौन हैं?

रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा (SYSM, AVSM, VSM) भारतीय वायु सेना के पूर्व अधिकारी हैं, जिन्होंने वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के तौर पर काम किया है।

रिटायरमेंट से पहले, मिश्रा ने इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशन्स) के डिप्टी चीफ के तौर पर काम किया। इससे पहले, उन्होंने इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में डिप्टी चीफ (डॉक्ट्रिन, ऑर्गनाइज़ेशन और ट्रेनिंग) के तौर पर भी काम किया था।

मिश्रा को 6 दिसंबर, 1986 को एयर फोर्स एकेडमी से ट्रेनिंग पूरी करने के बाद भारतीय वायु सेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन किया गया था।

जितेंद्र मिश्रा का 38 साल का IAF करियर

मिश्रा का मिलिट्री करियर 38 साल से ज्यादा का रहा, जिसमें उन्होंने 3,000 घंटे से ज्यादा की फ्लाइंग का अनुभव हासिल किया।

उन्होंने 18 से ज्यादा तरह के फाइटर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलिकॉप्टर उड़ाए और फाइटर पायलट, फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट के तौर पर काम किया। उन्होंने कई इंस्ट्रक्शनल और स्टाफ पद भी संभाले।

स्क्वाड्रन लीडर के तौर पर, मिश्रा उस टीम का हिस्सा थे जिसने कारगिल युद्ध की शुरुआत में मिराज 2000 एयरक्राफ्ट पर लेजर-गाइडेड बमों को ऑपरेशनल किया था। इन हथियारों का इस्तेमाल बाद में ऑपरेशन सफेद सागर के दौरान टाइगर हिल और मुंथो ढालो पर हमलों में किया गया था।

कारगिल युद्ध में जितेंद्र मिश्रा की भूमिका

IAF में अपने करियर के दौरान मिश्रा ने कई अहम ऑपरेशनल जिम्मेदारियां निभाईं। उन्होंने ईस्टर्न सेक्टर में एक फाइटर स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर के तौर पर काम किया और बाद में विंग कमांडर के पद पर रहते हुए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के नासिक डिवीन में चीफ टेस्ट पायलट बने।

ग्रुप कैप्टन के तौर पर, उन्होंने एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट में चीफ टेस्ट पायलट और नई दिल्ली में एयर हेडक्वार्टर में ऑपरेशनल प्लानिंग एंड असेसमेंट ग्रुप के डायरेक्टर के तौर पर काम किया।

जून 2010 में, फ्रांस में होने वाली मल्टीनेशनल एयर एक्सरसाइज ‘गरुड़ IV’ में भारतीय वायु सेना की टुकड़ी का नेतृत्व करने के लिए मिश्रा को चुना गया।

जितेंद्र मिश्रा की सीनियर IAF पोस्टिंग

एयर कमोडोर के तौर पर, मिश्रा ने एयर फोर्स स्टेशन बरेली में 15 विंग और एयर फोर्स स्टेशन पठानकोट में 18 विंग की कमान संभाली।

बाद में उन्होंने एयर हेडक्वार्टर में एयर कमोडोर (एयर स्टाफ रिक्वायरमेंट्स) के तौर पर काम किया।

एयर वाइस मार्शल के पद पर प्रमोट होने के बाद, मिश्रा ने एयर हेडक्वार्टर में असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ (प्रोजेक्ट्स) और एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट के कमांडेंट के तौर पर काम किया।

ऑपरेशन सिंदूर में जितेंद्र मिश्रा की भूमिका

मिश्रा को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी भूमिका के लिए 2025 में स्वतंत्रता दिवस पर ‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल’ से सम्मानित किया गया था।

उन्हें मिले अन्य सम्मानों में 2024 में मिला ‘अति विशिष्ट सेवा मेडल’ (AVSM) और 2013 में मिला ‘विशिष्ट सेवा मेडल’ (VSM) शामिल हैं।

‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल’ ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी बेहतरीन सेवा को मान्यता दी और उनके करियर में मिले सैन्य सम्मानों की लंबी सूची में एक और सम्मान जोड़ा।

जितेंद्र मिश्रा वेस्टर्न एयर कमांड के प्रमुख कब बने?

मिश्रा को एयर मार्शल के पद पर प्रमोट किया गया और उन्होंने 9 जनवरी, 2023 को इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (डॉक्ट्रिन, ऑर्गनाइज़ेशन और ट्रेनिंग) के डिप्टी चीफ के तौर पर कार्यभार संभाला।

इसके बाद, 5 दिसंबर, 2023 को वे इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशन्स) के डिप्टी चीफ बने।

1 जनवरी, 2025 को मिश्रा ने वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ का पद संभाला। उन्होंने एयर मार्शल पंकज मोहन सिन्हा की जगह ली, जो 31 दिसंबर, 2024 को रिटायर हुए थे।

बता दें कि 38 साल से ज्यादा के करियर के बाद, मिश्रा अप्रैल 2026 में इंडियन एयर फोर्स से रिटायर हुए।

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Shivani Mehrotra: ‘उम्र के साथ सपने धुंधले नहीं पड़ते’; 43 साल की शिवानी ने हौसलों से फतह की यूरोप की सबसे ऊंची चोटी, माउंट एल्ब्रुस पर फहराया तिरंगा

Who is Shivani Mehrotra: कुछ सपने उम्र के साथ धुंधले नहीं पड़ते, बल्कि जिम्मेदारियों के बीच और मजबूत होते जाते हैं। इसका जीवंत उदाहरण 43 साल की शिवानी मेहरोत्रा हैं, जिन्होंने 18 वर्षीय बेटी की परवरिश, परिवार की जिम्मेदारियां एवं रोजमर्रा की जिंदगी के बीच अपने पर्वतारोहण के जुनून को कभी पीछे नहीं छोड़ा। उन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों पर लगातार अपने हौसले तथा हदों को परखती रहीं।

मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले की निवासी शिवानी मेहरोत्रा की शादी 24 साल की उम्र में लखनऊ में हुई और अब वह अपने परिवार के साथ मुंबई में रहती हैं। इस साल स्वतंत्रता दिवस पर उन्होंने यूरोप की सबसे ऊंची चोटी रूस स्थित ‘माउंट एल्ब्रुस’ पर तिरंगा फहराकर इस दिन को अपने लिए यादगार बना दिया।

‘हौसले की परीक्षा थी’

शिवानी ने रूस से भारत लौटने के दौरान न्यूज एजेंसी पीटीआई से फोन पर कहा कि 15 अगस्त को चोटी तक पहुंचना जितना शरीर की ताकत का इम्तिहान था। उतना ही मन के हौसले की भी परीक्षा थी।उन्होंने कहा, उम्र सिर्फ एक नंबर भर है। असली ताकत लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प और उसे पाने के लिए जरूरी अनुशासन में होती है।”

शिवानी के लिए पर्वतारोहण अपने सपनों और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन की कहानी भी है। वह अपने माता-पिता, पति, बेटी और दोस्तों को अपनी ताकत मानती हैं। शिवानी बताती हैं कि खासकर 40 वर्ष की उम्र पार कर चुकी महिला पर्वतारोहियों और ट्रेकर की संख्या बहुत कम है।

शिवानी ने कहा, “मुझे पहाड़ों पर 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाएं बहुत कम ही दिखाई देती हैं।” उन्होंने कहा, “मेरे परिवार ने हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया और मुझे यह करने का साहस दिया।” वह अपने पर्वतारोहण अभियानों का खर्च भी काफी हद तक अपनी बचत से उठाने की कोशिश करती हैं।

कैसे हुआ पहाड़ों से लगाव?

शिवानी ने बताया कि पहाड़ों से उनका लगाव 2019 में गहरा हुआ, जब उन्होंने अपनी सबसे करीबी दोस्त के साथ ‘माउंट एवरेस्ट’ आधार शिविर तक ट्रेकिंग की योजना बनाई थी। एक यात्रा की वह छोटी-सी योजना कब जुनून में बदल गई, उन्हें खुद पता नहीं चला। इसके बाद कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और हिमालय के कई हिस्से उनकी मंजिल बनते चले गए।

इसके बाद शिवानी ने ‘फ्रेंडशिप पीक’ और ‘माउंट किलिमंजारो’ जैसी कठिन चोटियों पर भी चढ़ाई की। कैलाश से जुड़े पांच प्रमुख पर्वत अभियानों में से चार वह अब तक पूरा कर चुकी हैं। हालांकि, उनका सबसे बड़ा सपना अभी बाकी है ‘माउंट एवरेस्ट’ फतह करना। साथ ही दुनिया की सातों सबसे ऊंची चोटियों पर भारतीय तिरंगा फहराना।

दुबई होते हुए पहुंचीं रूस

‘माउंट एल्ब्रुस’ अभियान के लिए शिवानी ने आठ अगस्त को मुंबई से अपनी यात्रा शुरू की। दुबई होते हुए वह रूस के मिनरल्नी वोडी पहुंचीं। 10 दिन के इस अभियान का आयोजन रूस की ‘चतुर टूर्स’ नामक कंपनी ने किया था। शिखर पर मौसम के अचानक बदलने की आशंका को देखते हुए अभियान में एक अतिरिक्त दिन भी रखा गया था।

खराब मौसम ने चढ़ाई को और कठिन बना दिया। तेज बर्फबारी, बारिश, कड़ाके की ठंड और ऊंचाई की चुनौती के बीच दल ने अंतिम चढ़ाई से पहले खुद को मौसम और ऊंचाई के अनुकूल बनाने के लिए कई अभ्यास चढ़ाइयां कीं। इनमें करीब 3,000, 4,000 और 4,700 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचना शामिल था।

“रुकना नहीं है, चलते रहना है…”

शिखर पर पहुंचने वाले दिन दल ने रात करीब दो बजे चढ़ाई शुरू की। इस दौरान अंधेरा से लेकर जमा देने वाली ठंड, तेज हवाएं, भारी सामान और कम ऑक्सीजन लेवल तक… हर कदम मुश्किल था। लेकिन शिवानी के भीतर एक ही बात गूंजती रही- “रुकना नहीं है, चलते रहना है।” करीब साढ़े चार घंटे की कठिन चढ़ाई के बाद उन्होंने शिखर पर कदम रखा।

उन्होंने कहा कि इतनी ऊंचाई पर पहुंचकर छोटे से छोटा काम भी मुश्किल हो जाता है। 5,000 मीटर के बाद ऑक्सीजन का स्तर तेजी से कम होने लगता है। बर्फीले मौसम से बचाव के लिए भारी भरकम कपड़ों और जूतों में लगे कांटेदार उपकरणों के साथ एक-एक कदम बढ़ाना भी शरीर के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है।

‘सेल्फ-अरेस्ट’ तकनीकों की ट्रेनिंग भी ली

इस अभियान में शिवानी ने खुद को बचाने की तकनीक का ट्रेनिंग भी लिया। बर्फ पर फिसलने की स्थिति में खुद को रोकना और आपात स्थिति में सही तरीके से प्रतिक्रिया देना इसका हिस्सा था। शिवानी ने कहा कि चढ़ाई का आखिरी पड़ाव अक्सर शरीर से ज्यादा मन के हौसले की परीक्षा लेता है।

उन्होंने कहा, “पहले की यात्राओं में जहां मुझे लगता था कि अब मैं इससे आगे नहीं जा सकती, वहीं मैंने सीखा कि असल शुरुआत तो वहीं से होती है।” शिखर पर पहुंचते ही वह घुटनों के बल बैठ गईं। उन्होंने पहाड़, अपने दोस्तों और उन पर विश्वास जताने वालों के प्रति आभार जताया।

उस पल को याद करते हुए उन्होंने कहा, “मैंने माउंट एल्ब्रुस के सामने सिर झुकाया और कहा-धन्यवाद।” उनके लिए यह चोटी उस बड़े सपने की एक सीढ़ी थी, जिसे वह अभी पूरा करना चाहती हैं।

फिटनेस पर काफी ध्यान देती हैं शिवानी

शिवानी फिटनेस पर भी बहुत ध्यान देती हैं। वह फुल मैराथन, हाफ मैराथन के अलावा 50 किलोमीटर की दौड़ भी पूरी कर चुकी हैं। कोरोना वायरस महामारी के दौरान उन्होंने योग को अपनाया। बाद में उन्होंने एडवांस्ड योग इंस्ट्रक्टर और थेरेपिस्ट के तौर पर ट्रेनिंग लिया। करीब छह वर्षों से वह योग सिखा रही हैं। इनमें गर्भावस्था से पहले और बाद की महिलाओं तथा कैंसर रोगियों के लिए विशेष योग कार्यक्रम भी शामिल हैं।

कैसी है दिनचर्या?

उनकी दिनचर्या भी उनके संकल्प जैसी ही सख्त है। वह तड़के करीब साढ़े तीन बजे उठती हैं और योग, जिम में कसरत, दौड़ तथा पर्वतारोहण की तैयारी करती हैं। खान-पान को लेकर भी वह बेहद अनुशासित रहती हैं। शिवानी के लिए पर्वतारोहण सिर्फ किसी निश्चित ऊंचाई तक पहुंचने का नाम नहीं है।

Shivani Mehrotra

वह कहती हैं, “मैं नहीं मानती कि ऊंचाई के आधार पर कोई चोटी कम या ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। हर पहाड़ अपने साथ एक अलग अनुभव लाता है और हर पहाड़ सम्मान मांगता है।” अब उनकी नजर नेपाल की ऊंचाई वाली चोटियों पर है। यह तैयारी उन्हें अपने सबसे बड़े लक्ष्य माउंट एवरेस्ट तक ले जाएगी।

पैसे की चुनौती आई सामने

उन्होंने विश्वास के साथ कहा, “एवरेस्ट मेरा मुख्य लक्ष्य है। मुझे इसे करना ही है।” हालांकि, इस सपने की राह में पैसे भी बड़ी चुनौती है। एवरेस्ट अभियान पर करीब 40 से 50 लाख रुपये खर्च हो सकते हैं। दूसरे अंतरराष्ट्रीय पर्वत अभियानों का खर्च भी कई लाख रुपये तक पहुंच जाता है।

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शिवानी ने अब तक अपने योग पेशे से हुई बचत से ही अधिकांश अभियानों का खर्च उठाया है। उन्होंने कहा, “मैं यह अपने दम पर करना चाहती हूं।” इस उम्र में भी शिवानी के कदम रुके नहीं हैं। उनका कहना है, “अगर आपने मन में ठान लिया है कि आपको कुछ हासिल करना है, तो आप उसे कर सकते हैं। बस अपने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखना होता है।”

Awarapan 2 box office collection day 12: दूसरे हफ्ते में भी धमाकेदार कमाई, 143 करोड़ पार हुआ कलेक्शन, 150 करोड़ से बस इतनी दूर फिल्म

‘आवारापन 2’ बॉक्स ऑफिस पर लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही है। स्वतंत्रता दिवस से पहले रिलीज हुई इस फिल्म का मुकाबला ‘बटवारा 1947’ से हुआ, लेकिन इसका असर फिल्म की कमाई पर खास नहीं पड़ा। करीब 45 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने कमाई के मामले में जबरदस्त रफ्तार पकड़ी है। शुरुआती दिनों में शानदार कलेक्शन के बाद फिल्म ने पहले हफ्ते में ही अपनी पकड़ मजबूत कर ली। खास बात यह है कि अब तक फिल्म अपने बजट से कई गुना ज्यादा कमाई कर चुकी है और 200 फीसदी से अधिक मुनाफा दर्ज कर चुकी है।

दूसरे हफ्ते में भी दर्शकों का साथ मिलने से फिल्म की कमाई जारी है। अब सबकी नजर इसके अगले पड़ाव पर है। सवाल यही है कि क्या ‘आवारापन 2’ जल्द ही 150 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर बॉक्स ऑफिस पर एक और बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर पाएगी?

पहले दिन से दिखा दम

‘Awarapan 2’ ने सिनेमाघरों में पहले दिन 22 करोड़ रुपये की कमाई के साथ शुरुआत की। इसके बाद दूसरे दिन फिल्म की कमाई में जबरदस्त उछाल देखने को मिला और इसने 33.75 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। पहले हफ्ते के अंत तक फिल्म ने भारत में 113.50 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन कर लिया था, जबकि इसका वर्ल्डवाइड ग्रॉस 161.67 करोड़ रुपये पहुंच गया।

दूसरे वीकेंड में भी दर्शकों ने नहीं छोड़ा साथ

पहला हफ्ता पूरा होने के बाद भी फिल्म की रफ्तार कमजोर नहीं पड़ी। आठवें दिन ‘Awarapan 2’ ने 5.75 करोड़ रुपये कमाए। नौवें दिन कमाई बढ़कर 8.25 करोड़ और दसवें दिन 8.75 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। हालांकि 11वें दिन कलेक्शन गिरकर 2.75 करोड़ रुपये रहा।

मंगलवार को फिर दिखी कमाई में तेजी

दिलचस्प बात यह रही कि दूसरे मंगलवार को फिल्म ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ी। 12वें दिन ‘Awarapan 2’ ने करीब 4 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। टिकटों की कीमतों में मिली छूट ने दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में मदद की। Sacnilk के मुताबिक, फिल्म का भारत में कुल नेट कलेक्शन अब 143 करोड़ रुपये हो चुका है।

अब सामने है असली बॉक्स ऑफिस चुनौती

फिल्म के लिए आगे का सफर इतना आसान नहीं रहने वाला है। जहां ‘Batwara 1947’ दर्शकों पर खास असर नहीं छोड़ पाई, वहीं ‘Hanuman Ansh’ तीसरे हफ्ते में भी मजबूत बना हुआ है। इसके अलावा Toxic की रिलीज के साथ ‘Awarapan 2’ को कई सिनेमाघरों में स्क्रीन कम होने का सामना करना पड़ सकता है।

₹150 करोड़ क्लब के लिए थोड़ा और इंतजार?

स्क्रीन की संख्या घटने और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच ‘Awarapan 2’ की कमाई की रफ्तार आने वाले दिनों में धीमी पड़ सकती है। फिल्म ने पहले 12 दिनों में मजबूत आधार जरूर तैयार कर लिया है, लेकिन अब 150 करोड़ रुपये के भारत नेट कलेक्शन तक पहुंचने के लिए इसे थोड़ा और वक्त लग सकता है।

Salman Khan: कौन हैं बॉडी डबल परवेज काजी जिनकी तबीयत बिगड़ते ही बड़े भाई बन गए सलमान खान और सारी टेंशन अपने माथे ले ली?

यूक्रेन को सीक्रेट मिसाइल तकनीक देगा ब्रिटेन:कीव में बनेगी लंबी दूरी की SCALP मिसाइल; रूस में अंदर तक हमला करने में सक्षम

रूस के खिलाफ जंग में मदद के लिए ब्रिटेन यूक्रेन को अपनी सीक्रेट मिसाइल तकनीक देगा। इससे कीव में ही लंबी दूरी की SCALP क्रूज मिसाइल बनाने का रास्ता साफ होगा। ब्रिटेन में इस मिसाइल को स्टॉर्म शैडो कहा जाता है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम सोमवार को अपनी पहली विदेश यात्रा पर यूक्रेन पहुंचे। इसी दौरान मिसाइल तकनीक साझा करने का ऐलान किया गया है। वे राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से मुलाकात करेंगे। फ्रांस और यूक्रेन की योजना है कि इस साल के आखिर तक यूक्रेन में SCALP की उत्पादन लाइन शुरू की जाए। इससे यूक्रेन को मिसाइल की तकनीक समझने और उसे देश में बनाने में मदद मिलेगी। ब्रिटेन ने यूक्रेन को लंबे साथ का भरोसा दिया यूक्रेन के स्वतंत्रता दिवस के मौके ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम सोमवार को राजधानी कीव पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कहा कि उनका देश यूक्रेन के साथ लंबे समय तक खड़ा रहेगा। उन्होंने कहा कि यूक्रेन की सुरक्षा ब्रिटेन की सुरक्षा से जुड़ी है। यूक्रेन अपनी लंबी दूरी की मिसाइलों पर भी काम कर रहा है। यूक्रेनी कंपनी फायर प्वाइंट ने एफपी-5 फ्लेमिंगो क्रूज मिसाइल बनाई है, जिसकी बताई गई मारक क्षमता करीब 3,000 किमी है। वहीं, रूसी मिसाइल और ड्रोन हमलों से बचाव के लिए यूक्रेन को हवाई हमले रोकने वाली मिसाइलों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिकी पैट्रियट प्रणाली के लिए जरूरी मिसाइलों की कमी भी उसकी बड़ी परेशानी है।
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वंदे मातरम पर राष्ट्रवाद की सियासत!, किसका फायदा, किसका नुकसान?

वंदे मातरम पर राष्ट्रवाद की सियासत!, किसका फायदा, किसका नुकसान?

भारतीय जनता पार्टी के वंदे मातरम पर देश में सियासी घमासान मचा हुआ है। कांग्रेस के वंदे मातरम के केवल एक अंतरे (दो पद) को पार्टी के कार्यक्रमों के गाने के फैसले को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के तीखे हमले के बाद इस पर सियासी बयानबाजी थमने का नाम नहीं ले  रही है। कांग्रेस ने वंदे मातरम को लेकर यह फ़ैसला ऐसे समय किया जब स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में भाजपा ने सोनिया गांधी पर वंदे मातरम का अपमान करने का आरोप लगाया था। 
 
कांग्रेस वर्किंग कमेटी में वंदे मातरम के गाने के फैसले पर गृहमंत्री अमित शाह की आपत्ति पर  कांग्रेस ने भाजपा पर पलटवार करते हुए दिखावटी राष्ट्रवाद का आरोप लगाया। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह जनता से जुड़े मुद्दों पर अपनी नाकामियों से ध्यान भटकाने के लिए वंदे मातरम के मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे है।
 
वंदे मातरम पर विवाद की शुरुआत कैसे?- वंदे मातरम पर नए विवाद पर स्वतंत्रता दिवस पर नई दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में हुए कार्यक्रम मे वंदे मातरम के गायन के दौरान सोनिया गांधी के व्यवहार को लेकर हुई। भाजपा ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी ने वंदे मातरम को बीच में रोकने की कोशिश की। इसके बाद बुधवार को हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में पार्टी के नेताओं ने वंदे मातरम के गायन का मुद्दा उठाया था।
 
बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए पार्टी के कार्यक्रमों में वंदे मातरम के दो पद गाने की बात कही। इसके लिए खरगे ने  28 अक्टूबर 1937 को कांग्रेस कार्यसमिति की ओर से पारित प्रस्ताव का हवाला दिया।
 
दरअसल 1937 में कोलकाता मे हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में वंदेमातम को लेकर चर्चा हुई और एक प्रस्ताव तैयार किया गया। इस प्रस्ताव को तैयार करने में जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, मौलाना अबुल कलाम आजाद, गोविंद बल्लभ पंत और आचार्य नरेंद्र देव जैसे नेताओं की भूमिका थी। यह प्रस्ताव गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर तैयार किया गया था।
 
25 जनवरी 1950 को संविधान सभा की आखिरी बैठक में संविधान सभा के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद ने घोषणा की थी कि ‘जन गण मन’ देश का राष्ट्रगान और ‘वंदे मातरम’ राष्ट्रीय गीत होगा। उन्होंने कहा कि ‘जन गण मन’ में भी पांच में से केवल एक अंतरे को राष्ट्रगान के तौर पर अपनाया गया है।
 
अमित शाह ने कांग्रेस की तुष्टिकरण की सियासत से जोड़ा- कांग्रेस कार्यसमिति में वंदेमातरम पर हुए इस फैसले को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कांग्रेस की तुष्टिकरण की सियासत से जोड़ दिया। मीडिया एजेंसी से चर्चा करते हुए अमित शाह ने कहा कि “कांग्रेस पार्टी की कार्यसमिति ने एक आश्चर्यजनक और देशविरोधी फैसला लिया है। उन्होंने अपनी पार्टी के 1937 के रिजोल्यूशन को फॉलो करते हुए महान वंदे मातरम् गीत के दो ही छंद गाने का फैसला लिया है”।
 
अमित शाह ने आगे कहा कि “मैं पूरे देश को याद दिलाना चाहता हूं, 1937 में कांग्रेस पार्टी ने मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए वंदे मातरम् के दो टुकड़े कर देश के विभाजन की नींव डाली थी और वहीं से द्वि-राष्ट्र सिद्धांत को ताकत मिली थी। अंततोगत्वा देश का विभाजन हुआ और पाकिस्तान का जन्म हुआ। आज जब उस ऐतिहासिक गलती को वंदे मातरम् गीत के प्राकट्य के 150वें साल में सुधार कर बंकिम बाबू की इस अमर कृति को पूरा गीत गाकर राष्ट्रीय एकात्मता को सुदृढ़ करने का प्रयास किया गया है, और सभी सरकारी कार्यक्रमों में इसे पूर्ण रूप से गाने का निर्णय किया गया है और इस निर्णय को कानूनी जामा भी पहनाया गया है। इसी की अवहेलना करने का निर्णय कांग्रेस ने कल किया है”।

अमित शाह ने आगे कहा कि “कांग्रेस का यह निर्णय केवल और केवल इनकी घोर तुष्टिकरण की नीति की पुष्टि करता है। वोट बैंक के लिए इन्होंने न सिर्फ बंकिम बाबू की इस अमर कृति का अपमान किया, बल्कि उन लाखों शहीदों का भी अपमान किया, जो वंदे मातरम् का नारा लगाते हुए देश की आजादी के लिए फांसी पर चढ़ गए।  आज कांग्रेस पार्टी 1937 के अपनी पार्टी के रिजोल्यूशन को मान रही है और पार्लियामेंट के एक्ट को नकार रही है। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी फिर एक बार तुष्टिकरण की राजनीति को पुरजोर तरीके से आगे बढ़ा रही है”।
 
वहीं केंद्रीय शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस के खिलाफ तीखा राजनीतिक प्रहार करते हुए कहा कि वंदे मातरम को अधूरा गाने का फैसला देश की भावना और राष्ट्रगीत का अपमान है। उन्होंने कहा  कि यह किसी पार्टी का नहीं बल्कि भारत माता के सम्मान का प्रश्न है। शिवराज सिंह ने कहा कि जो गीत स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणा रहा, उसे पूरा गाना हर भारतीय का कर्तव्य है। उन्होंने कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि कुछ दल देश की एकता और संस्कृति से जुड़े प्रतीकों को भी राजनीतिक लाभ के लिए तोड़-मरोड़ देते हैं।
 
कांग्रेस का भाजपा पर पलटवार-भाजपा के वंदे मातरम के मुद्दें को राजनीतिक तूल देने पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा ने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय और रवींद्रनाथ टैगोर को लेकर एक अलग राजनीतिक नैरेटिव बनाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि यह मुद्दे का राजनीतिकरण है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके जरिए जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों और सरकार की कथित नाकामियों से ध्यान भटकाने की कोशिश हो रही है, जिसमें छात्रों से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं।
 
कांग्रेस के कानूनी प्रकोष्ठ के प्रमुख और राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने इस पूरे विवाद में कानूनी पहलू सामने रखा है। कानून को उसकी मौजूदा स्थिति के हिसाब से देखा जाना चाहिए। उन्होंने सार्वजनिक और निजी कार्यक्रमों के बीच अंतर बताया। सिंघवी के मुताबिक मौजूदा कानून सरकारी आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के गायन से जुड़ी बात करता है। पार्टी के आंतरिक कार्यक्रमों के बारे में उसमें वैसी स्पष्ट व्यवस्था नहीं है। यही तर्क कांग्रेस के उस फैसले को समझने की कोशिश में अहम हो जाता है, जिस पर अब पार्टी के भीतर ही अलग-अलग राय सामने आ रही है।

अमिताभ बच्चन ने किया यूपी की ‘खाकी’ को सलाम, ‘खाकी का सितारा’ में दिखी पुलिस के जज्बे की पूरी कहानी

अमिताभ बच्चन ने किया यूपी की 'खाकी' को सलाम, ‘खाकी का सितारा’ में दिखी पुलिस के जज्बे की पूरी कहानी

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उत्तरप्रदेश पुलिस के पहले आधिकारिक एंथम ‘खाकी का सितारा’ का 6.5 मिनट का पूरा वीडियो यूट्यूब पर रिलीज हो गया है। महानायक अमिताभ बच्चन ने भी उत्तर प्रदेश पुलिस के पोस्ट को कोट ट्वीट करते हुए इस एंथम को अपने खास अंदाज में सलाम किया। अमिताभ बच्चन ने लिखा, 'कुछ सितारे आसमान में चमकते हैं… कुछ ख़ाकी पहनकर ज़मीन पर। ख़ाकी का सितारा।'

 

‘खाकी का सितारा’ सिर्फ एक म्यूजिक वीडियो नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश पुलिस की जिम्मेदारियों और उसके कामकाज के अलग-अलग पहलुओं को सामने लाने की कोशिश है। एंथम में कानून-व्यवस्था से लेकर महिला सुरक्षा, ट्रैफिक मैनेजमेंट, तकनीक, आपदा एवं राहत कार्य, जनसेवा और रोजमर्रा की पुलिसिंग तक खाकी के अलग-अलग रंग दिखाई देते हैं।

 

खास बात यह है कि इस एंथम की शूटिंग एक-दो दिन में नहीं, बल्कि महाकुंभ 2025 से स्वतंत्रता दिवस 2026 तक अलग-अलग मौकों और परिस्थितियों में की गई। उत्तर प्रदेश पुलिस के इस इन-हाउस क्रिएटिव प्रोडक्शन को तैयार करने में एक वर्ष से अधिक का समय लगा। महाकुंभ की विशाल पुलिस व्यवस्था से लेकर अलग-अलग मौकों पर कानून-व्यवस्था संभालते पुलिसकर्मियों तक, कैमरे ने खाकी की ड्यूटी के कई पहलुओं को रिकॉर्ड किया।

 

दरअसल, उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में रही है। ऐसे में ‘खाकी का सितारा’ के जरिए पुलिस की उसी भूमिका को एक अलग अंदाज में पेश किया गया है। वीडियो में पुलिस को केवल कार्रवाई करने वाली एजेंसी के तौर पर नहीं, बल्कि संकट के समय सबसे पहले पहुंचने वाली और आम लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाने वाली व्यवस्था के रूप में दिखाया गया है।

 

त्योहार हो या आपदा, भीड़ का दबाव हो या कानून-व्यवस्था की चुनौती- खाकी हर जगह मौजूद दिखाई देती है। यही इस एंथम का मूल संदेश है। वीडियो में वर्दी के पीछे के उस इंसान को भी दिखाने की कोशिश की गई है, जो अपने परिवार और निजी जीवन से दूर रहकर ड्यूटी करता है और कई बार बिना किसी पहचान या अपेक्षा के अपना कर्तव्य निभाता है।

 

इस एंथम को देश के जाने-माने कलाकारों ने अपनी आवाज और प्रतिभा दी है। इसमें अमिताभ बच्चन की प्रभावशाली आवाज, पद्मश्री शंकर महादेवन का स्वर और संगीत तथा जाने-माने कवि एवं गीतकार आलोक श्रीवास्तव के शब्द हैं। अभिनेता करण आनंद ने इसमें पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाई है।

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14 अगस्त को लोक भवन में हुआ था लॉन्च

 

‘खाकी का सितारा’ का औपचारिक लॉन्च 14 अगस्त को लोक भवन, लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था। इस मौके पर पद्मश्री शंकर महादेवन, पद्मश्री नाना पाटेकर, गीतकार आलोक श्रीवास्तव, अभिनेता करण आनंद सहित फिल्म और संगीत जगत से जुड़े कई कलाकार मौजूद रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और पुलिसकर्मी भी शामिल हुए।

 

लॉन्च के दौरान शंकर महादेवन ने ‘खाकी का सितारा’ से जुड़ने को अपने जीवन के खास पलों में से एक बताया। उन्होंने इस एंथम को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पूरे उत्तर प्रदेश पुलिस परिवार को समर्पित किया। उन्होंने गीत की पंक्तियां “सुरक्षा आपकी, संकल्प हमारा” और “हम डटे रहे, हम खड़े रहे, चट्टानों जैसे अड़े रहे” सुनाते हुए कहा कि संगीत के जरिए पुलिस की सेवा, साहस और संकल्प को आवाज देना उनके लिए बेहद खास अनुभव रहा।

 

खाकी के कई रंग, एक ही संकल्प

 

‘खाकी का सितारा’ में पुलिस की सख्ती के साथ उसकी संवेदनशीलता को भी जगह दी गई है। कहीं कानून-व्यवस्था संभालते जवान नजर आते हैं, तो कहीं महिला सुरक्षा और जनसेवा में जुटी पुलिस दिखाई देती है। कहीं महाकुंभ जैसे विशाल आयोजन की जिम्मेदारी है, तो कहीं आपदा और राहत के बीच लोगों तक पहुंचती खाकी।

यानी यह एंथम सिर्फ पुलिस की वर्दी का गीत नहीं, बल्कि उस जिम्मेदारी की कहानी है जिसे उत्तर प्रदेश पुलिस हर दिन निभाती है। “सुरक्षा आपकी, संकल्प हमारा” के संदेश के साथ ‘खाकी का सितारा’ योगी सरकार के उस कानून-व्यवस्था मॉडल की भी तस्वीर पेश करता है, जिसमें पुलिस को अपराध नियंत्रण के साथ-साथ जनता की सुरक्षा, सेवा और भरोसे की जिम्मेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है।

 

अमिताभ बच्चन के शब्दों में कहें तो कुछ सितारे आसमान में चमकते हैं और कुछ खाकी पहनकर जमीन पर- ‘खाकी का सितारा’ इसी जमीन पर चमकने वाली खाकी को समर्पित है।

CJP आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, पुलिस बलप्रयोग की जांच के लिए हाईलेवल कमेटी, उधर सरकारी स्कूल में बदली तस्वीर

CJP आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, पुलिस बलप्रयोग की जांच के लिए हाईलेवल कमेटी, उधर सरकारी स्कूल में बदली तस्वीर

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कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से 20 जुलाई को दिल्ली में आयोजित 'संसद चलो मार्च' के दौरान प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस बलप्रयोग का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस की कथित ज्यादती के आरोपों की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने की बात कही है। हालांकि, CJP ने समिति के गठन को लेकर अपनी कुछ शर्तें रखी हैं। पार्टी का कहना है कि यदि सुप्रीम कोर्ट समिति गठित करता है तो उसके सभी सदस्य पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष होने चाहिए।

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सुप्रीम कोर्ट बनाएगा हाई लेवल कमेटी

 

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस की कथित ज्यादती की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया जाएगा। इसमें रिटायर्ड जज, पूर्व डीजीपी, सीबीआई के पूर्व निदेशक समेत अन्य सदस्य शामिल हो सकते हैं। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची तथा वी. मोहना की पीठ ने कहा कि समिति में शामिल किए जाने वाले अन्य सदस्यों को लेकर अलग-अलग पक्षों से सुझाव लिए जाएंगे। इसके बाद समिति के गठन का आदेश बुधवार को जारी किया जाएगा।

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CJP ने कहा- समिति स्वतंत्र होनी चाहिए

 

सुप्रीम कोर्ट के बाहर CJP के सह संयोजक सौरभ दास ने कहा कि यदि अदालत को लगता है कि प्रदर्शनकारियों को न्याय दिलाने के लिए उच्चस्तरीय समिति जरूरी है तो पार्टी अदालत के फैसले का सम्मान करेगी। हालांकि, उन्होंने समिति के सदस्यों के चयन को लेकर स्पष्ट शर्त रखी। दास के मुताबिक, समिति के सदस्य ऐसे होने चाहिए जिनकी निष्पक्षता और स्वतंत्रता पर कोई सवाल न उठे। उन्होंने कहा कि समिति में ऐसे लोगों को शामिल नहीं किया जाना चाहिए जिनका पिछला रिकॉर्ड पहले से सवालों के घेरे में रहा हो। उन्होंने कहा कि यह सरकार की समिति नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट की समिति होगी और देश के युवा इस पूरी प्रक्रिया पर नजर रख रहे हैं।

 

CJP ने अपने सदस्यों को समिति में शामिल करने की मांग की

 

CJP की लीगल मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से उन्हें भरोसा दिया गया था कि प्रदर्शन से जुड़े सभी एफआईआर रद्द किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी प्रदर्शन खत्म होने के एक सप्ताह के भीतर इस आश्वासन पर कार्रवाई चाहती थी। रत्ना सिंह ने कहा कि अगर जांच समिति बनाई जा रही है तो वह पूरी तरह स्वतंत्र होनी चाहिए और उसके सभी सदस्यों के नाम सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

 

उन्होंने यह भी मांग की कि CJP के सदस्यों को समिति में शामिल किया जाए, ताकि समिति के सामने रखी जाने वाली सूचनाओं का सत्यापन किया जा सके। उनका कहना है कि व्यक्तिगत रूप से पार्टी उच्चस्तरीय समिति नहीं चाहती, बल्कि वह सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन को पूरा किए जाने की मांग कर रही है। 

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क्या है पूरा मामला?

20 जुलाई : दिल्ली में 'संसद चलो मार्च' के दौरान पुलिस बलप्रयोग के आरोप।

सुप्रीम कोर्ट : प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस ज्यादती की जांच के लिए हाई लेवल कमेटी बनाने की घोषणा।

प्रस्तावित समिति : रिटायर्ड जज, पूर्व डीजीपी, पूर्व सीबीआई निदेशक समेत अन्य सदस्य।

CJP की मांग : समिति पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष हो।

दूसरी मांग : समिति के सदस्यों के नाम सार्वजनिक किए जाएं।

CJP की अतिरिक्त मांग : पार्टी के सदस्यों को भी समिति में शामिल किया जाए।


 जंतर-मंतर आंदोलन के बाद 'स्कूल ठीक करो' अभियान

संसद मार्च और सुप्रीम कोर्ट में जांच समिति की मांग के बीच CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके अब सरकारी स्कूलों की बदहाल व्यवस्था को लेकर अभियान चला रहे हैं। उनके अभियान का असर उनके पैतृक गांव महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के संतुक पिंपरी में भी दिखाई देने लगा है।

 

दीपके ने 15 अगस्त को अपने पैतृक गांव के जिला परिषद स्कूल का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की कमी और टूटी खिड़कियों समेत कई समस्याओं को सामने रखा था। इसके बाद स्थानीय प्रशासन ने स्कूल में मरम्मत कार्य शुरू करा दिया।

मिलीं नई बेंच-डेस्क और कंप्यूटर

अभिजीत दीपके ने मंगलवार, 18 अगस्त को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर स्कूल की तस्वीरें साझा कीं। उन्होंने बताया कि उनके गांव के स्कूल के बच्चों को अब नई बेंच-डेस्क मिल गई हैं। उन्होंने गांव के लोगों और स्कूल स्टाफ का आभार जताते हुए इसे अपने जीवन के सबसे खुशी भरे पलों में से एक बताया। एक अन्य वीडियो में उन्होंने बताया कि स्कूल में अब कंप्यूटर भी लगाए गए हैं। दीपके ने कहा कि जब सरकारें विफल होती हैं तो आम लोग मदद के लिए आगे आते हैं।

'अब रुकना नहीं है, स्कूल ठीक करके ही रहेंगे'

 

दीपके ने इससे पहले एक वीडियो में कहा था कि हिंगोली जिले के लिंबाला गांव के लोगों की यह पहली बड़ी जीत है। उन्होंने बताया कि स्कूल के प्रिंसिपल को निलंबित किया गया है। उन्होंने इस जीत को अब्दुल और उसके पिता को समर्पित करते हुए कहा कि अब स्कूल सुधार का अभियान रुकना नहीं चाहिए।

 

15 अगस्त से शुरू किया 'स्कूल ठीक करो' अभियान

 

अभिजीत दीपके ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 'स्कूल ठीक करो' अभियान की शुरुआत अपने पैतृक गांव के स्कूल से की थी। ध्वजारोहण समारोह में शामिल होने के बाद उन्होंने स्कूल परिसर का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कक्षाओं की टूटी खिड़कियों, खराब सीसीटीवी कैमरों और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी को उजागर किया। दीपके के दौरे के बाद स्थानीय ग्राम पंचायत ने स्कूल की समस्याओं को दूर करने के लिए काम शुरू कराया।

 

खिड़कियां बदली जा रहीं, नए CCTV कैमरे लगाए जा रहे

 

संतुक पिंपरी के सरपंच विजय पुरी ने बताया कि दीपके ने स्कूल में उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया था और जिन कमियों की ओर ध्यान दिलाया गया, उन्हें दूर करने का काम शुरू कर दिया गया है। स्कूल की क्षतिग्रस्त खिड़कियों को बदला जा रहा है और खराब सीसीटीवी कैमरों की जगह नए कैमरे लगाए जा रहे हैं।

इसके अलावा शौचालयों में पानी की समस्या को भी दूर किया गया है और चौबीसों घंटे पानी की आपूर्ति की व्यवस्था की गई है। राज्य के शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी स्कूल प्रबंधन को बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मरम्मत कार्य जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

सरकारी स्कूलों को लेकर दीपके का बड़ा सवाल

अभिजीत दीपके ने सरकारी स्कूलों की व्यवस्था को लेकर सरकार और शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि अगर मंत्री, शिक्षा विभाग के अधिकारी, प्रिंसिपल, शिक्षक और दूसरे कर्मचारी अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाएं तो इन स्कूलों की स्थिति में तेजी से सुधार हो सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकारी अधिकारी अपने बच्चों को निजी स्कूलों में क्यों पढ़ाते हैं? क्या उन्हें अपने ही सरकारी स्कूलों की व्यवस्था पर भरोसा नहीं है? दीपके का कहना है कि सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति में सुधार के लिए केवल घोषणाओं की नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और जवाबदेही की जरूरत है।

मोदी की टिप्पणी के बाद ‘दिमागी नक्सल पार्टी’ इंस्टाग्राम पर 4 लाख से अधिक फॉलोअर्स के साथ हुई लोकप्रिय

मोदी की टिप्पणी के बाद 'दिमागी नक्सल पार्टी' इंस्टाग्राम पर 4 लाख से अधिक फॉलोअर्स के साथ हुई लोकप्रिय

Dimagi naxal Party

dimagi naxal party: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण में इस्तेमाल किया गया शब्द 'दिमागी नक्सल' सोशल मीडिया पर एक बड़े राजनीतिक व्यंग्य में बदल गया है। पीएम के भाषण के ठीक एक दिन बाद इंस्टाग्राम पर 'दिमागी नक्सल पार्टी' नाम से बना एक पेज महज कुछ घंटों में 4,00,000 से अधिक फॉलोअर्स के साथ इंटरनेट पर छा गया है।

एक शब्द से खड़ा हुआ नया ऑनलाइन मूवमेंट

सोशल मीडिया की दुनिया में कब क्या ट्रेंड कर जाए, कोई नहीं जानता! स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से पीएम मोदी ने जैसे ही 'दिमागी नक्सल' शब्द का जिक्र किया, इंटरनेट पर एक नया डिजिटल आंदोलन खड़ा हो गया। 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) की तर्ज पर शुरू हुआ यह व्यंग्यात्मक इंस्टाग्राम पेज युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

अपने ही नेता से असहमत होना पहली शर्त

इस व्यंग्यात्मक पेज ने अपनी कार्यशैली और सदस्यता के नियमों को काफी अनोखे अंदाज में पेश किया है। इस पेज पर पहली शर्त रखी गई है कि कि “आप हमारी पार्टी में तभी शामिल हो सकते हैं जब आप अपने ही नेताओं से असहमत होने की हिम्मत रखते हों।” बायो में इस ग्रुप ने लिखा— “हम सोचते हैं। हम शोध करते हैं। हम विरोध करते हैं।”

भगत सिंह से प्रेरणा

इस पेज के संचालकों का दावा है कि वे शहीद-ए-आजम भगत सिंह की सोच पर चलते हैं। उन्होंने लिखा कि अगर उन्हें देश विरोधी बताया गया या उनका अकाउंट बंद किया गया, तो यह भगत सिंह की विचारधारा का अनादर होगा।

ऑरवेल के '1984' और 'थॉट क्राइम' से तुलना

पेज पर कई ऐसे पोस्ट शेयर किए गए हैं जिनमें पीएम मोदी की टिप्पणी की तुलना जॉर्ज ऑरवेल के प्रसिद्ध उपन्यास 1984 की 'थॉट क्राइम' (सोच से जुड़े अपराध) की अवधारणा से की गई है। पेज ने 'दिमागी नक्सल' की परिभाषा देते हुए लिखा— “एक ऐसा दिमाग जो दमनकारी शासनों के व्यवस्थित पैटर्न को पहचान सकता है।”

साइबर हमला या बैन का डर?

सोमवार को जब फॉलोअर्स का आंकड़ा 2 लाख पार कर गया, तो यह पेज अचानक कुछ समय के लिए दिखना बंद हो गया। इसके संचालकों ने 'एक्स' (ट्विटर) पर दावा किया कि उन्हें साइबर हमलों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बाद इंटरनेट यूजर्स ने “हटाए जाने से पहले फॉलो करें” की अपील के साथ इस पेज को तेजी से रीपोस्ट करना शुरू कर दिया।

पीएम मोदी ने भाषण में क्या कहा था?

दरअसल, 15 अगस्त के भाषण में प्रधानमंत्री ने कहा था कि सरकार ने सशस्त्र माओवादी उग्रवाद पर तो लगभग काबू पा लिया है, लेकिन अब इस विचारधारा ने अपना रूप बदल लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि माओवादी सोच वाले लोग लंबे समय से व्यवस्था के भीतर, सरकारी समितियों और सलाहकार मंडलों में बैठकर नीतियों को प्रभावित करते रहे हैं।

 

पीएम मोदी की इसी टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर एक तरफ राजनीतिक बहस छिड़ गई है, तो दूसरी तरफ 'दिमागी नक्सल पार्टी' के रूप में इंटरनेट का नया 'मीम कल्चर' भी देखने को मिल रहा है।