Awarapan 2 box office collection day 12: दूसरे हफ्ते में भी धमाकेदार कमाई, 143 करोड़ पार हुआ कलेक्शन, 150 करोड़ से बस इतनी दूर फिल्म

‘आवारापन 2’ बॉक्स ऑफिस पर लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही है। स्वतंत्रता दिवस से पहले रिलीज हुई इस फिल्म का मुकाबला ‘बटवारा 1947’ से हुआ, लेकिन इसका असर फिल्म की कमाई पर खास नहीं पड़ा। करीब 45 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने कमाई के मामले में जबरदस्त रफ्तार पकड़ी है। शुरुआती दिनों में शानदार कलेक्शन के बाद फिल्म ने पहले हफ्ते में ही अपनी पकड़ मजबूत कर ली। खास बात यह है कि अब तक फिल्म अपने बजट से कई गुना ज्यादा कमाई कर चुकी है और 200 फीसदी से अधिक मुनाफा दर्ज कर चुकी है।

दूसरे हफ्ते में भी दर्शकों का साथ मिलने से फिल्म की कमाई जारी है। अब सबकी नजर इसके अगले पड़ाव पर है। सवाल यही है कि क्या ‘आवारापन 2’ जल्द ही 150 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर बॉक्स ऑफिस पर एक और बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर पाएगी?

पहले दिन से दिखा दम

‘Awarapan 2’ ने सिनेमाघरों में पहले दिन 22 करोड़ रुपये की कमाई के साथ शुरुआत की। इसके बाद दूसरे दिन फिल्म की कमाई में जबरदस्त उछाल देखने को मिला और इसने 33.75 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। पहले हफ्ते के अंत तक फिल्म ने भारत में 113.50 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन कर लिया था, जबकि इसका वर्ल्डवाइड ग्रॉस 161.67 करोड़ रुपये पहुंच गया।

दूसरे वीकेंड में भी दर्शकों ने नहीं छोड़ा साथ

पहला हफ्ता पूरा होने के बाद भी फिल्म की रफ्तार कमजोर नहीं पड़ी। आठवें दिन ‘Awarapan 2’ ने 5.75 करोड़ रुपये कमाए। नौवें दिन कमाई बढ़कर 8.25 करोड़ और दसवें दिन 8.75 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। हालांकि 11वें दिन कलेक्शन गिरकर 2.75 करोड़ रुपये रहा।

मंगलवार को फिर दिखी कमाई में तेजी

दिलचस्प बात यह रही कि दूसरे मंगलवार को फिल्म ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ी। 12वें दिन ‘Awarapan 2’ ने करीब 4 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। टिकटों की कीमतों में मिली छूट ने दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में मदद की। Sacnilk के मुताबिक, फिल्म का भारत में कुल नेट कलेक्शन अब 143 करोड़ रुपये हो चुका है।

अब सामने है असली बॉक्स ऑफिस चुनौती

फिल्म के लिए आगे का सफर इतना आसान नहीं रहने वाला है। जहां ‘Batwara 1947’ दर्शकों पर खास असर नहीं छोड़ पाई, वहीं ‘Hanuman Ansh’ तीसरे हफ्ते में भी मजबूत बना हुआ है। इसके अलावा Toxic की रिलीज के साथ ‘Awarapan 2’ को कई सिनेमाघरों में स्क्रीन कम होने का सामना करना पड़ सकता है।

₹150 करोड़ क्लब के लिए थोड़ा और इंतजार?

स्क्रीन की संख्या घटने और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच ‘Awarapan 2’ की कमाई की रफ्तार आने वाले दिनों में धीमी पड़ सकती है। फिल्म ने पहले 12 दिनों में मजबूत आधार जरूर तैयार कर लिया है, लेकिन अब 150 करोड़ रुपये के भारत नेट कलेक्शन तक पहुंचने के लिए इसे थोड़ा और वक्त लग सकता है।

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34वां Birthday और 34 बच्चियां-प्रीति ज़िंटा का दिल छू लेने वाला फैसला |Preity Zinta Adopted 34Girls

34वां Birthday और 34 बच्चियां-प्रीति ज़िंटा का दिल छू लेने वाला फैसला |Preity Zinta  Adopted 34Girls

अगर अपने Birthday पर खुद को महंगी कार देने का मौका हो… तो क्या आप वो छोड़कर 34 बच्चियों की जिम्मेदारी उठाएंगे?
साल था 2009।
Preity Zinta अपने 34वें birthday पर खुद को एक महंगी car gift करने वाली थीं। लेकिन एक बच्ची की कहानी ने उनका पूरा फैसला बदल दिया।
उन्होंने ऋषिकेश के Mother Miracle Orphanage की 34 बच्चियों की पढ़ाई, खाना, कपड़े और परवरिश की जिम्मेदारी लेने का फैसला किया।
और ये सिर्फ एक birthday decision नहीं था। Preity इससे पहले भी महिलाओं और बच्चों से जुड़े कई causes के लिए काम करती रही हैं।
और शायद यही वजह है कि आज भी उनकी ये कहानी याद की जाती है।
क्या आपको लगता है कि किसी की जिंदगी बदलने के लिए सिर्फ पैसे नहीं, बल्कि जिम्मेदारी लेना ज्यादा मायने रखता है?

@realpz

34वां Birthday और 34 बच्चियां- प्रीति ज़िंटा का दिल छू लेने वाला फैसला | Preity Zinta Adopted 34 Girls

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Sunny Deol: हम कलीग हैं दोस्त नहीं…, ‘डर’ के दौरान हुई लड़ाई के बाद शाहरुख खान संग अपने बॉन्ड पर बोले सनी देओल

Sunny Deol: ‘डर’ फिल्म की शूटिंग के दौरान सनी देओल और शाहरुख खान के बीच हुई अनबन किसी से छिपी नहीं है। दोनों एक्टर्स 1993 की इस फिल्म के क्लाइमेक्स को लेकर सहमत नहीं थे और सनी इतने गुस्से में थे कि उन्होंने अपनी जीन्स को अपने हाथों से ही फाड़ दिया था। उनकी लड़ाई इतनी जबरदस्त थी कि उन्होंने एक-दूसरे से बात करना बंद कर दिया था। 2023 में ‘गदर 2’ की सफलता के बाद ही वे फिर से दोस्त बने। सनी ने हाल ही में इस झगड़े के बारे में बात की और बताया कि क्या अब वे शाहरुख के दोस्त हैं।

सनी और शाहरुख की लड़ाई इनसिक्योरिटी की वजह से हुई…

शुभंकर मिश्रा के साथ बातचीत में सनी ने गुस्से में अपनी जींस फाड़ने की बात याद की। उन्होंने कहा कि वह खुद से नाराज हैं और उन्होंने कहा, “छोटी उम्र में मैं ये तो नहीं कहूंगा कि एक दूसरे से वो चीज नहीं होती है। वो होती है। मैं असुरक्षित व्यक्ति नहीं हूं, लेकिन असुरक्षा के कारण, कितने अभिनेता बहुत कुछ ऐसी चीजें कर जाते हैं जो उन्हें करने की कोई जरूरी नहीं है।”

सनी ने समझाया, “हम वही किरदार निभा सकते हैं जो हम हैं। उससे अलग कुछ नहीं बन सकते। लेकिन कई बार एक्टर्स असुरक्षित महसूस करते हैं और इस वजह से माहौल खराब हो जाता है। ऐसी चीजें हो जाती हैं, जिनकी कोई जरूरत नहीं थी। लेकिन यही तो फिल्म बनाने की सच्चाई है।”

शाहरुख खान साथी हैं, दोस्त नहीं- सनी देओल

जब उनसे पूछा गया कि क्या आज शाहरुख खान उनके दोस्त हैं, तो ‘बंटवारा 1947’ के एक्टर ने कहा, “उस समय भी हम दुश्मन तो नहीं थे। हां, दोस्त का मतलब है कि हम सब साथी (colleagues) हैं। फ़िल्म इंडस्ट्री में मैं कहूंगा कि हम सब साथी ज़्यादा हैं, बजाय इसके कि…” एक्टर ने कहा कि उनके असली दोस्त वे हैं, जो स्कूल के समय बने थे, न कि बॉलीवुड वाले, क्योंकि “दोस्ती वो होती है जहां आप पूरी तरह खुले और बेझिझक हों और ऐसी दोस्ती बचपन में ही होती है।”

सनी देओल और शाहरुख खान के बीच झगड़ा किस बात पर हुआ था?

सनी देओल और शाहरुख खान के बीच अनबन 1993 में शुरू हुई थी, जब वे अपनी फ़िल्म ‘डर’ की शूटिंग कर रहे थे। खबरों के मुताबिक भले ही सनी फिल्म के हीरो थे, लेकिन वे इस बात से खुश नहीं थे कि शाहरुख खान के विलेन वाले किरदार के मुकाबले उनके किरदार को कैसे दिखाया गया था। ‘डर’ के रिलीज होने के बाद, दोनों एक्टर्स ने 16 साल तक एक-दूसरे से बात नहीं की।

Batwara 1947 Review: विभाजन के दर्द के बीच इंसानियत ने कायम कि मिसाल, सनी देओल की फिल्म ने जीता लोगों का दिल

Batwara 1947 Review: 1947 का विभाजन भारतीय इतिहास के सबसे दर्दनाक अध्यायों में से एक रहा है। इस विषय पर बनी फिल्मों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होती है कि कहानी कहीं धर्म, राजनीति और हिंसा के दायरे तक सीमित न रह जाए। Batwara 1947 की खासियत यह है कि राजकुमार संतोषी विभाजन की त्रासदी के बीच भी अपना ध्यान इंसान और उसके रिश्तों पर बनाए रखते हैं।

यह फिल्म सिर्फ भारत-पाकिस्तान की सीमा बनने की कहानी नहीं है, बल्कि उन लोगों की कहानी है जिनकी जिंदगी उस सीमा के साथ ही बदल गई। जो घर अपना था, वह अचानक पराया हो गया। जो पड़ोसी वर्षों से परिवार का हिस्सा था, वह धर्म के नाम पर अजनबी बना दिया गया। इसी माहौल में फिल्म इंसानियत का सबसे जरूरी सवाल सामने रखती है-क्या नफरत के दौर में भी इंसान दूसरे इंसान के लिए खड़ा हो सकता है?

सनी देओल के करियर का नया चैप्टर

सनी देओल के लिए ‘कमबैक’ शब्द पिछले कुछ समय से लगातार इस्तेमाल होता रहा है, लेकिन Batwara 1947 देखने के बाद लगता है कि यह सिर्फ वापसी नहीं, बल्कि उनके अभिनय के एक नए दौर की शुरुआत है। सिकंदर मिर्जा के किरदार में सनी देओल अपनी आवाज, व्यक्तित्व और गुस्से का प्रभावी इस्तेमाल करते हैं। हालांकि उनका सबसे असरदार अभिनय उन सीन्स में दिखाई देता है, जहां वह ऊंची आवाज में नहीं, बल्कि अपनी आंखों और भावनाओं से बात करते हैं।

सिकंदर का गुस्सा सिर्फ हिंसा के खिलाफ नहीं है, बल्कि उस इंसानियत के लिए है जो उसके आसपास खत्म होती जा रही है। एक बुजुर्ग हिंदू महिला को बचाने के लिए भीड़ के सामने खड़े होने वाला उसका किरदार फिल्म के मूल संदेश को मजबूती देता है।

शबाना आजमी का काम

शबाना आजमी की ‘माई’ इस कहानी का भावनात्मक केंद्र हैं। वह सिर्फ एक पीड़ित महिला नहीं हैं। उनके किरदार में आत्मसम्मान, जिद, हंसी, समझदारी और अपने घर से गहरा लगाव है। शबाना इस भूमिका को इतनी सहजता से निभाती हैं कि धीरे-धीरे माई किसी फिल्मी किरदार की बजाय अपने परिवार की किसी बुजुर्ग महिला जैसी महसूस होने लगती हैं। सनी देओल और शबाना आजमी के बीच का रिश्ता फिल्म का सबसे खूबसूरत हिस्सा है। धर्म की दीवारों के बीच पनपता मां-बेटे जैसा यह रिश्ता दिखाता है कि इंसानी रिश्ते किसी धर्म या सीमा के मोहताज नहीं होते।

करण देओल की एक्टिंग

सनी देओल के सामने स्क्रीन शेयर करना करण देओल के लिए आसान चुनौती नहीं थी। इसके बावजूद वह कई दृश्यों में आत्मविश्वास के साथ अपनी जगह बनाते हैं। उनकी संवाद अदायगी में विश्वास है और भावनात्मक तथा टकराव वाले दृश्यों में उनकी ऊर्जा दिखाई देती है। सबसे अच्छी बात यह है कि वह अपने पिता की शैली को दोहराने के बजाय अपने किरदार के लिए अलग अंदाज तलाशते हैं।

प्रीति जिंटा और अली फजल का प्रभाव

प्रीति जिंटा की वापसी फिल्म में सिर्फ नॉस्टैल्जिया नहीं जोड़ती, बल्कि कहानी के भावनात्मक पक्ष को मजबूती देती है। अली फजल अपने शांत और संवेदनशील अभिनय से फिल्म की तीव्रता के बीच कुछ सुकून भरे पल लेकर आते हैं। वहीं अभिमन्यु सिंह का याकूब पहलवान कट्टर सोच का प्रतिनिधित्व करता है, जहां इंसान की पहचान से पहले उसका धर्म देखा जाता है। पूरी सपोर्टिंग कास्ट मिलकर उस दौर के टूटते समाज की तस्वीर को विश्वसनीय बनाती है।

1947 का लाहौर दिखा पर्दे पर

फिल्म का प्रोडक्शन डिजाइन, सिनेमैटोग्राफी, कॉस्ट्यूम, लोकेशन और बैकग्राउंड स्कोर मिलकर 1947 के लाहौर का माहौल तैयार करते हैं। राजकुमार संतोषी मूल कहानी को सिर्फ मंचीय प्रस्तुति की तरह शूट नहीं करते, बल्कि उसे बड़े पर्दे के लिए विस्तार देते हैं। गलियां, घर, भीड़ और बदलता सामाजिक माहौल फिल्म को एक मजबूत सिनेमाई पहचान देते हैं। दूसरे हिस्से में कहानी का भावनात्मक असर और गहरा होता जाता है। क्लाइमैक्स के बारे में ज्यादा बताना उचित नहीं होगा, क्योंकि उसका प्रभाव तभी महसूस होगा जब दर्शक उसे खुद देखें।

Batwara 1947 की सबसे बड़ी सफलता यह है कि यह विभाजन की हिंसा दिखाते हुए भी नफरत को बढ़ावा नहीं देती। इसके बजाय यह इंसानियत को केंद्र में रखती है। फिल्म एक बेहद जरूरी सवाल छोड़ जाती है-जब पूरी दुनिया आपको किसी से नफरत करने की वजह दे रही हो, तब क्या आप फिर भी इंसानियत और प्रेम को चुन सकते हैं? सनी देओल और राजकुमार संतोषी की जोड़ी इस बार अपने गुस्से को ज्यादा संवेदनशील और परिपक्व रूप देती है। फिल्म का जवाब तलवार या हिंसा में नहीं, बल्कि रिश्तों और इंसानियत में मिलता है। हम फिल्म को 5 में से 4 स्टार रेटिंग देते हैं।

Batwara 1947: ‘बंटवारा 1947’ में सनी देओल का किरदार सबसे ताकतवर, राजकुमार संतोषी का बड़ा दावा

Batwara 1947: आमिर खान प्रोडक्शंस की ‘बंटवारा 1947’, जिसका निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है और जिसमें शबाना आज़मी, सनी देओल और प्रीति जी जिंटा मुख्य भूमिकाओं में हैं, 14 अगस्त 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी। हाल ही में रिलीज़ हुए फिल्म के ट्रेलर ने भारत के बंटवारे के दर्दनाक इतिहास की दमदार झलक दिखाकर दर्शकों के बीच फिल्म को लेकर उत्साह और भी बढ़ा दिया है।

आमिर खान प्रोडक्शंस की ‘बंटवारा 1947’ भारतीय सिनेमा की सबसे बहुप्रतीक्षित फिल्मों में से एक है। शबाना आज़मी, सनी देओल और प्रीति जी जिंटा स्टारर इस फिल्म ने अपने दमदार टीजर से पहले ही जबरदस्त चर्चा बटोरी थी और अब हाल ही में रिलीज़ हुए ट्रेलर ने दर्शकों का उत्साह और बढ़ा दिया है। ट्रेलर अपनी भावुक कहानी और दमदार परफॉर्मेंस से लोगों का दिल जीत रहा है। यह भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास के सबसे दर्दनाक दौर की झलक दिखाते हुए इंसानियत को धर्म से ऊपर रखने का मैसेज देता है।

ट्रेलर में सनी देओल एक बार फिर दमदार किरदार में नजर आ रहे हैं। हाल ही में निर्देशक राजकुमार संतोषी ने साफ किया कि ‘बंटवारा 1947’ में सनी देओल का किरदार ‘गदर’ के तारा सिंह से बिल्कुल अलग है और दोनों किरदारों की तुलना नहीं की जा सकती।

राजकुमार संतोषी ने कहा, “तारा सिंह अपने हक के लिए लड़ता है। हमारी फिल्म का किरदार किसी और के लिए लड़ता है और इसके लिए वह अपने परिवार तक की परवाह नहीं करता। मुझे भरोसा है कि मैं अच्छे एक्शन हीरो लिख सकता हूं, चाहे ‘घातक’ हो या ‘घायल’। लेकिन इस फिल्म में मैंने सनी के लिए जो किरदार लिखा है, मैं उसे सुपरमैन, आयरन मैन और बाकी सभी सुपरहीरोज़ से भी बेहतर मानता हूं। क्योंकि कोई इंसान किसी एक व्यक्ति, एक समूह या एक सेना से तो लड़ सकता है, लेकिन यहां सनी कट्टरता के खिलाफ लड़ रहे हैं। दुनिया का कोई भी सुपरहीरो उसके सामने टिक नहीं सकता।”

‘बंटवारा 1947’ में शबाना आज़मी, सनी देओल, प्रीति जी जिंटा, करण देओल, अली फज़ल और अभिमन्यु सिंह जैसे दमदार कलाकार नजर आएंगे। खास बात यह है कि करीब 30 साल बाद राजकुमार संतोषी और सनी देओल की सुपरहिट जोड़ी फिर से साथ आ रही है।

आमिर खान प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी ‘बंटवारा 1947’ का निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है। फिल्म का संगीत ए. आर. रहमान ने दिया है, जबकि गीत जावेद अख्तर ने लिखे हैं। फिल्म को आमिर खान और अपर्णा पुरोहित ने प्रोड्यूस किया है। ‘बंटवारा 1947’ 14 अगस्त 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी। ‘बंटवारा 1947’ में सनी देओल का किरदार सबसे ताकतवर, राजकुमार संतोषी का बड़ा दावा

आमिर खान प्रोडक्शंस की ‘बंटवारा 1947’, जिसका निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है और जिसमें शबाना आज़मी, सनी देओल और प्रीति जी जिंटा मुख्य भूमिकाओं में हैं, 14 अगस्त 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी। हाल ही में रिलीज़ हुए फिल्म के ट्रेलर ने भारत के बंटवारे के दर्दनाक इतिहास की दमदार झलक दिखाकर दर्शकों के बीच फिल्म को लेकर उत्साह और भी बढ़ा दिया है।

Upcoming Movies 2026: ‘बंटवारा 1947’ से लेकर ‘किंग’ तक, आने वाली ये 7 बिग बजट फिल्में तोड़ पाएंगी ‘धुरंधर 2’ का रिकॉर्ड?

Upcoming Movies 2026: बीते सात महीनों के बॉक्स ऑफिस के आंकड़े देखें तो धुरंधर द रिवेंज (Dhurandhar The Revenge) सबसे आगे है। करीब 1800 करोड़ रुपये से ज्यादा की ग्लोबल कमाई के साथ यह साल की सबसे बड़ी हिंदी फिल्म बनी है। हाल में रिलीज हुई ‘धमाल 4’ से लेकर ‘वेलकम टू द’ जंगल भी 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर चुकी हैं, लेकिन धुरंधर 2 का रिकॉर्ड नहीं तोड़ पाई। 2026 का बॉक्स ऑफिस अब एक बार फिर धुरंधर जैसी आंधी का वेट कर रहा है।

थिएटर्स में आने वालीं बड़ी फिल्में

आवारापन 2 – 14 अगस्त

कलाकार- इमरान हाशमी, दिशा पाटनी

बंटवारा 1947 – 14 अगस्त

कलाकार- सनी देओल, वरुण बडोला, सिमोन सिंह

टॉक्सिक – 26 अगस्‍त

कलाकार- यश, कियारा आडवाणी,

मिर्जापुर द फिल्म- 4 सितंबर

कलाकार- पंकज त्रिपाठी, अली फजल, दिव्येंदु, जितेंद्र कुमार, रवि किशन

दृश्यम 3 – 2 अक्टूबर

कलाकार- अजय देवगन, तब्बू, श्रिया सरन, जयदीप अहलावत, प्रकाश राज

रामायणम् पार्ट 1 – 6 नवंबर

कलाकार- रणबीर कपूर, साई पल्लवी, यश, सनी देओल, रवि दुबे, अरुण गोविल, लारा दत्ता

रेंजर – 4 दिसंबर

कलाकार- अजय देवगन, संजय दत्त, तमन्ना भाटिया

किंग – 24 दिसंबर

कलाकार- शाह रुख खान, सुहाना खान, दीपिका पादुकोण, अभिषेक बच्चन

सफलता की गारंटी?

फिल्मी विश्‍लेषकों का कहना है कि अब इंडियन सिनेमा में सिर्फ स्टारडम बॉक्स ऑफिस की सफलता की गारंटी नहीं रह गया है। आज के दौर में सक्सेस की सबसे बडी गारंटी कंटेंट बन चुका है। स्टार्स शुरुआती ओपनिंग करा सकते हैं, लेकिन किसी फिल्म को लंबी दौड में शामिल होने के लिए मजबूत कहानी की जरूरत होगी। जिस फिल्म का कंटेंट मजबूत होगी, वह जनता दिल जीतेगा। ऐसे में त्योहारी सीजन में निगाहें एक्टर्स के फेस पर नहीं बल्कि कंटेंट पर होंगी।