टिकटों के लिए 1.5 करोड़ से ज्यादा आवेदन, एकदिवसीय विश्वकप 27 देखने के लिए फैंस में भारी उत्साह

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने पहले बताया था कि 2027 वनडे विश्व कप में खेले जाने वाले भारत बनाम पाकिस्तान मुकाबले के लिए प्रशंसकों में भारी उत्साह है औऱ इस मैच की टिकटों के  लिए 75 हजार से ज्यादा आवेदन आ चुके हैं। हालांकि हालिया बयान के अनुसार पूरे टूर्नामेंट को लेकर ही प्रशंसकों में भारी उत्साह दिख रहा है।

ICC के मुताबिक टिकटों के आवेदन की संख्या 1.5 करोड़ पार कर चुकी है।आईसीसी के इस 50 ओवर के शीर्ष टूर्नामेंट की मेजबानी दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया संयुक्त रूप से करेंगे और इसका आयोजन दो अक्टूबर से 21 नवंबर तक किया जाएगा।

ICC ने एक बयान में कहा, ‘‘अब तक टिकटों के लिए 1 करोड़ 50 लाख 83 हजार 752 आवेदन मिले हैं जिसके लिए 142 देशों के प्रशंसकों ने 44 लाख 23 हजार 417 पंजीकरण कराए हैं।’’टिकटों के लिए पंजीकरण 21 नवंबर 2026 तक कराया जा सकता है जिसके ठीक एक साल बाद जोहानिसबर्ग के वांडरर्स में फाइनल का आयोजन होगा।

आईसीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजोग गुप्ता ने कहा, ‘‘टिकटों की भारी मांग क्रिकेट विश्व कप की लोकप्रियता और प्रतिष्ठा, पर्यटन स्थल के रूप में अफ्रीका के आकर्षण तथा टूर्नामेंट के आगाज से पहले आईसीसी और उसके साझेदारों की प्रचार गतिविधियों से पैदा हुई उत्सुकता का प्रमाण है।’’

क्रिकेट विश्व कप 24 साल के अंतराल के बाद दक्षिण अफ्रीका लौट रहा है।गुप्ता ने कहा, ‘‘टूर्नामेंट शुरू होने में एक साल शेष है और आईसीसी ने इस दौरान व्यापक स्तर पर प्रचार गतिविधियों, विभिन्न मंचों पर अभियान और विशेष सामग्री की शृंखला की योजना बनाई है। इससे आईसीसी क्रिकेट विश्व कप 2027 को लेकर प्रशंसकों का उत्साह और बढ़ेगा।’’

सात नवंबर को होने वाले भारत-पाकिस्तान के सुपर-7 मुकाबले के लिए अब तक करीब 75 हजार आवेदन मिल चुके हैं। यह मांग के मामले में चौथे स्थान पर है।जोहानिसबर्ग के वांडरर्स में होने वाले विश्व कप फाइनल के लिए भी करीब 65 हजार आवेदन आ चुके हैं।

आईसीसी के अनुसार, ‘‘टिकटों की कीमत 9.62 डॉलर (लगभग 930 रुपये) से शुरू होकर सबसे महंगी श्रेणी के लिए 31.31 डॉलर (लगभग 3018 रुपये) तक है। परिवारों के लिए पैकेज, छात्रों और पेंशनभोगियों के लिए विशेष कीमत, स्थानीय लोगों के लिए शुरुआती टिकट और स्कूल-क्लब समूहों के लिए भी अलग व्यवस्था की गई है।

ट्रम्प ने नोबेल नहीं मिलने पर जताई नाराजगी:कहा- मैंने 8 युद्ध रोके, हर युद्ध पर शातिं पुरस्कार मिलना चाहिए था, पिल्लै को कोई नहीं जानता

ट्रम्प ने नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलने पर एक बार फिर नाराजगी जताई है। उन्होंने शुक्रवार को कहा कि यह पुरस्कार उन्हें नहीं देकर नॉर्वे ने अपने ऊपर ऐसा दाग लगा लिया है, जो कभी नहीं मिटेगा। ट्रम्प ने इस फैसले को शर्मनाक और अपमानजनक बताते हुए कहा कि उन्हें हर सुलझी जंग के लिए आठ बार पुरस्कार मिलना चाहिए था। इस साल नोबेल शांति पुरस्कार दक्षिण अफ्रीका की पूर्व UN मानवाधिकार प्रमुख नवी पिल्ले को दिया गया है। ट्रम्प ने कहा कि उनके बारे में कोई नहीं जानता। ट्रम्प बोले, नोबेल पुरस्कार आज एक उदारवादी व्यक्ति को दिया गया, जो संयुक्त राष्ट्र में काम करती हैं और जिनके बारे में किसी ने नहीं सुना। ‘भारत-पाकिस्तान युद्ध रोका, 5 करोड़ लोगों की जान बचाई’ ट्रम्प ने एक बार फिर दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाया था। उन्होंने कहा कि परमाणु हथियार रखने वाले दोनों देशों को युद्ध से रोककर उन्होंने 5 करोड़ लोगों की जान बचाई। ट्रम्प ने कहा कि वह ईरान और रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने की दिशा में भी काम कर रहे हैं। उनके मुताबिक, अमेरिका को नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके लिए अमेरिका नॉर्वे को कभी नहीं भूलेगा। ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि उन्होंने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोका। अगर ऐसा नहीं होता, तो पूरे मध्य-पूर्व के साथ यूरोप और अमेरिका तक तबाही फैल सकती थी। उन्होंने कहा, ‘मैंने इतिहास में किसी भी दूसरे व्यक्ति से ज्यादा लोगों की जान बचाई है।’ 2018 से नोबेल प्राइज मांग रहे ट्रम्प 4 अमेरिकी राष्ट्रपतियों को नोबेल मिल चुका है अब तक चार अमेरिकी राष्ट्रपतियों को नोबेल शांति पुरस्कार मिल चुका है। इनमें थियोडोर रूजवेल्ट, वुडरो विल्सन, जिमी कार्टर और बराक ओबामा शामिल हैं। बराक ओबामा को 2009 में यह पुरस्कार मिला था। वह राष्ट्रपति पद के पहले साल में थे। ट्रम्प ओबामा को मिले पुरस्कार से खास तौर पर नाराज रहे हैं। ट्रम्प ने कहा था कि ओबामा को यह पुरस्कार मिलने की वजह उन्हें खुद भी पता नहीं थी। ट्रम्प ने कहा, ओबामा को सिर्फ 8 महीने में यह मिल गया जबकि उन्होंने कुछ किया भी नहीं था। ओबामा को भी आज तक पता नहीं है कि उन्हें यह किसलिए मिला था। नॉर्वे की नोबेल समिति ने ओबामा को दूसरे देशों से बातचीत बढ़ाने और दुनिया को परमाणु हथियारों से मुक्त करने की उनकी कोशिशों के लिए चुना था। हालांकि, ओबामा को इतने कम समय में पुरस्कार देने का फैसला उस समय भी चर्चा और विवाद का विषय बना था।

आज मिलेगा शांति का नोबेल,ट्रम्प 7 साल से मांग रहे:कनाडा के PM दावेदार, इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन का नाम भी चर्चा में

2026 के नोबेल शांति पुरस्कार का ऐलान आज नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प करीब 7 साल से नोबेल मांग रहे हैं। उनके लिए नोबेल शांति पुरस्कार की चर्चा 2019 में तेज हुई थी। उस वक्त ट्रम्प ने उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन से बातचीत की थी। ट्रम्प के समर्थकों ने इसे दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की कोशिश बताया। जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने भी कथित तौर पर ट्रम्प को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किया था। इस बार ट्रम्प के साथ कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, पोप लियो XIV और यहां तक कि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) का नाम भी चर्चा में है। नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में होगी। 2025 में की विजेता ने अपना नोबेल ट्रम्प को सौंपा पिछले साल भी ट्रम्प ने कई बार नोबेल देने की मांग की थी। उन्होंने भारत-पाकिस्तान समेत 8 युद्धों को रोकने का दावा किया। ट्रम्प खुद कई बार कह चुके हैं कि उन्होंने शांति के लिए काम किया है और उन्हें नोबेल मिलना चाहिए। 2025 का पुरस्कार वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो को मिला। बाद में मचाडो ने अपना नोबेल मेडल ट्रम्प को सौंप दिया। उन्होंने इसे वेनेजुएला की आजादी के लिए ट्रम्प के समर्थन के सम्मान के तौर पर बताया। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन का नाम क्यों आया इस साल की नोबेल रेस में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन का नाम सबसे अलग है। ISS पर अमेरिका, रूस, फ्रांस और कनाडा के अंतरिक्ष यात्री साथ काम करते हैं। धरती पर इन देशों के बीच राजनीतिक तनाव और मतभेद हैं, लेकिन अंतरिक्ष स्टेशन पर उनके वैज्ञानिक एक साथ काम करते हैं। ओस्लो पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक हाकोन जेरलोव ने इसे अंतरराष्ट्रीय सहयोग का उदाहरण बताया है। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पृथ्वी से करीब 400 किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष में मौजूद है। यह करीब 28 हजार किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी का चक्कर लगाता है। सूडान का आम लोगों का नेटवर्क भी दावेदार सूडान के इमरजेंसी रिस्पॉन्स रूम्स (ईआरआर) का नाम भी प्रमुख दावेदारों में है। 2023 में सूडान में गृहयुद्ध शुरू होने के बाद विदेशी राहतकर्मी बड़ी संख्या में देश छोड़कर चले गए। इसके बाद स्थानीय लोगों ने खुद अपने इलाकों में राहत का काम संभाला। उन्होंने सामुदायिक रसोई और क्लिनिक चलाए। विदेश में रहने वाले सूडानी लोगों ने भी पैसे भेजकर इन अभियानों की मदद की। अंतरराष्ट्रीय सहायता कम होने के बावजूद यह नेटवर्क लोगों तक जरूरी मदद पहुंचाता रहा। शांति का नोबेल स्वीडन की बजाय नॉर्वे में क्यों? नोबेल के बाकी पुरस्कार स्वीडन में दिए जाते हैं, लेकिन शांति का नोबेल नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में दिया जाता है। इसकी वजह करीब 130 साल पुरानी है। यह व्यवस्था खुद अल्फ्रेड नोबेल ने अपनी वसीयत में तय की थी। 1895 में लिखी अपनी वसीयत में नोबेल ने तय किया था कि शांति पुरस्कार का फैसला नॉर्वे की संसद द्वारा चुनी गई समिति करेगी। उस समय स्वीडन और नॉर्वे एक ही राजा के अधीन थे, हालांकि दोनों की अपनी संसद और अलग राजनीतिक व्यवस्था थी। नोबेल ने यह नहीं बताया था कि शांति पुरस्कार के लिए उन्होंने नॉर्वे को ही क्यों चुना।
नोबेल की 1896 में मौत हुई और 1901 से पुरस्कार दिए जाने लगे। उस समय स्वीडन और नॉर्वे एक संघ में थे। 1905 में दोनों देश अलग हो गए, लेकिन नोबेल की वसीयत में शांति पुरस्कार के लिए नॉर्वे को दी गई जिम्मेदारी जारी रही। इसी वजह से आज भी फिजिक्स, केमिस्ट्री, मेडिसिन, साहित्य और अर्थशास्त्र के नोबेल स्वीडन में, जबकि शांति का नोबेल नॉर्वे में दिया जाता है। ——————— ये खबर भी पढ़ें… 2026 का साहित्य नोबेल कनाडाई लेखिका ऐन कार्सन को:ग्रीक-रोमन साहित्य को आधुनिक दुनिया से जोड़ा, चर्चित किताब ‘द ब्यूटी ऑफ द हसबैंड’ कनाडा की लेखिका और कवयित्री ऐन कार्सन को 2026 का साहित्य नोबेल पुरस्कार दिया गया है। नोबेल समिति ने उन्हें ऐसी रचनाओं के लिए सम्मानित किया है, जिनमें उन्होंने पुराने यूनानी-रोमन साहित्य को आज की जिंदगी, प्यार, रिश्तों और दुख से जोड़ा। पूरी खबर यहां पढ़ें…

विराट के आउट होते ही खाना छोड़ देते थे नाना पाटेकर, क्रिकेट ही नहीं शूटिंग में भी थे माहिर, देखें Video

अपनी दमदार अदाकारी, बेबाक अंदाज और यादगार किरदारों से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाने वाले दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं हैं। 75 साल की उम्र में उनके निधन से फिल्म जगत के साथ-साथ उनके चाहने वालों में भी शोक की लहर है। नाना पाटेकर को भले ही फिल्मों में उनके शानदार अभिनय के लिए जाना जाता हो, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि उनका क्रिकेट और शूटिंग जैसे खेलों से भी गहरा रिश्ता था। क्रिकेट के प्रति उनका जुनून इतना ज्यादा था कि पसंदीदा खिलाड़ी विराट कोहली के जल्दी आउट होने पर उनका खाना तक खाने का मन नहीं करता था।

 

2007 में शूटिंग चैंपियनशिप में जीता था ब्रॉन्ज मेडल

 

नाना पाटेकर सिर्फ क्रिकेट के शौकीन ही नहीं थे, बल्कि शूटिंग में भी अपना हुनर दिखा चुके थे। साल 2007 में उन्होंने महाराष्ट्र की टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए इंदौर के पास महू में आयोजित नेशनल 300 मीटर बिग बोर शूटिंग चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया था।

 

इस प्रतियोगिता में उन्होंने 49 प्रतिभागियों के बीच 13वां स्थान हासिल किया था। उनके प्रदर्शन के लिए उन्हें ‘रिनाउंड शॉट’ का खिताब भी मिला था। यानी पर्दे पर किरदारों में जान डालने वाले नाना असल जिंदगी में भी निशानेबाजी के अच्छे खिलाड़ी थे।

नाना पाटेकर 4 दिन पहले ही बोले थे- ‘हम सबको एक दिन जाना है’

नाना पाटेकर 4 दिन पहले ही बोले थे- ‘हम सबको एक दिन जाना है’

 

बचपन में करते थे ऑफ स्पिन गेंदबाजी

 

नाना पाटेकर का क्रिकेट प्रेम बचपन से ही था। एक पुराने इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि वह बचपन में क्रिकेट अच्छा खेलते थे और ऑफ स्पिन गेंदबाज* किया करते थे।

 

हालांकि, उस दौर में क्रिकेट की ट्रेनिंग लेने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे। ऐसे में वह मुंबई के शिवाजी पार्क पहुंच जाते थे और वहां अभ्यास करने वाले खिलाड़ियों को गेंदबाजी करके अपना शौक पूरा करते थे। नाना ने यह भी कहा था कि क्रिकेट के प्रति उनका जुनून उम्र बढ़ने के बाद भी कम नहीं हुआ और कुछ दिन अभ्यास करने के बाद वह आज भी अच्छी गेंदबाजी कर सकते हैं।

 

विराट कोहली थे नाना के फेवरेट क्रिकेटर

 

क्रिकेट की बात हो और विराट कोहली का जिक्र नाना पाटेकर के इंटरव्यू में न आए, ऐसा कम ही हुआ। नाना ने खुलकर बताया था कि विराट कोहली उनके पसंदीदा क्रिकेटर हैं।

 

उन्होंने कहा था कि अगर विराट जल्दी आउट हो जाएं तो उनका खाना खाने का मन तक नहीं करता। नाना के इस बयान ने यह साफ कर दिया था कि वह क्रिकेट को सिर्फ देखते नहीं थे, बल्कि खेल से भावनात्मक रूप से भी जुड़े हुए थे।

 

भारत-पाकिस्तान का मुकाबला होने पर तो नाना टीवी से हटते ही नहीं थे। उनके लिए क्रिकेट का रोमांच आज भी वैसा ही था, जैसा बचपन में हुआ करता था।

 

 क्रिकेट और एक्टिंग को लेकर कही थी खास बात

 

नाना पाटेकर ने क्रिकेट और एक्टिंग के बीच एक दिलचस्प समानता भी बताई थी। उनके मुताबिक, क्रिकेटर और अभिनेता दोनों को लगातार परीक्षा से गुजरना पड़ता है। फर्क सिर्फ इतना है कि क्रिकेटर की परीक्षा कुछ दिनों में पूरी हो जाती है, जबकि एक कलाकार की परीक्षा कई साल तक चल सकती है।

 

उन्होंने अपने क्रिकेट प्रेम को लेकर कहा था कि क्रिकेटरों की तरह कलाकारों को भी हर बार जनता के सामने खुद को साबित करना पड़ता है और आखिरकार फैसला दर्शक ही करते हैं।

एक्टर नहीं शेफ भी थे नाना पाटेकर! सेट पर खुद बनाते थे मटन, पूरी यूनिट को खिलाने का था शौक

एक्टर नहीं शेफ भी थे नाना पाटेकर! सेट पर खुद बनाते थे मटन, पूरी यूनिट को खिलाने का था शौक

 

विराट के आउट होने पर वायरल होते थे मीम्स

 

नाना का विराट कोहली को लेकर दिया गया बयान सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा में रहा। जब भी विराट जल्दी आउट होते या बड़ी पारी खेलते, सोशल मीडिया पर नाना पाटेकर के उस बयान को याद करते हुए मजेदार मीम्स और पोस्ट वायरल होने लगते थे।

 

यही नाना की खासियत थी उनका अंदाज बिल्कुल सीधा, बेबाक और दिल से निकला हुआ होता था। क्रिकेट को लेकर उनका जुनून उनके प्रशंसकों को उनकी फिल्मों से अलग उनकी एक और दिलचस्प तस्वीर दिखाता था।

 

 नाना के निधन पर विराट कोहली ने दी श्रद्धांजलि

 

नाना पाटेकर के निधन की खबर के बाद क्रिकेट जगत से भी उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। विराट कोहली ने नाना की तस्वीर साझा करते हुए उन्हें भारतीय सिनेमा का सच्चा लीजेंड बताया और उनके काम व विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक याद किए जाने की बात कही।

नाना पाटेकर का जाना सिर्फ सिनेमा के लिए एक बड़ी क्षति नहीं है। उनके निधन से क्रिकेट ने भी अपना एक ऐसा जुनूनी प्रशंसक खो दिया, जिसके लिए मैच महज खेल नहीं बल्कि भावनाओं से जुड़ा अनुभव था।

 

पर्दे पर दमदार किरदार निभाने वाले नाना पाटेकर की यादें अब उनकी फिल्मों, उनके बेबाक किस्सों और क्रिकेट के प्रति उनके जुनून के जरिए हमेशा जिंदा रहेंगी।

 

900 से 3 हजार रुपए तक का टिकट, INDvsPAK WC मैच के लिए आए 75 हजार आवेदन

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने कहा कि अगले साल होने वाले एकदिवसीय विश्व कप में भारत और पाकिस्तान के बीच 10 अक्टूबर को होने वाले मुकाबले के टिकटों के लिए अब तक एक लाख से ज्यादा आवेदन मिल चुके हैं।दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया 2027 वनडे विश्व कप की मेजबानी करेंगे। टूर्नामेंट दो अक्टूबर से 21 नवंबर तक खेला जाएगा। बीते एक अक्टूबर को टिकटों के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के बाद अब तक 3.20 लाख से ज्यादा प्रशंसक टिकट के लिए आवेदन कर चुके हैं।

आईसीसी की वेबसाइट के मुताबिक, ‘‘ भारत-पाकिस्तान मुकाबले के टिकटों के लिए सबसे ज्यादा मांग है और इसके लिए एक लाख से अधिक आवेदन मिल चुके हैं। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका-भारत मैच के लिए 86 हजार से ज्यादा और भारत-ऑस्ट्रेलिया मुकाबले के लिए 80 हजार से ज्यादा आवेदन आए हैं।’’

सात नवंबर को होने वाले भारत-पाकिस्तान के सुपर-7 मुकाबले के लिए अब तक करीब 75 हजार आवेदन मिल चुके हैं। यह मांग के मामले में चौथे स्थान पर है।जोहानिसबर्ग के वांडरर्स में होने वाले विश्व कप फाइनल के लिए भी करीब 65 हजार आवेदन आ चुके हैं।

आईसीसी के अनुसार, ‘‘टिकटों की कीमत 9.62 डॉलर (लगभग 930 रुपये) से शुरू होकर सबसे महंगी श्रेणी के लिए 31.31 डॉलर (लगभग 3018 रुपये) तक है। परिवारों के लिए पैकेज, छात्रों और पेंशनभोगियों के लिए विशेष कीमत, स्थानीय लोगों के लिए शुरुआती टिकट और स्कूल-क्लब समूहों के लिए भी अलग व्यवस्था की गई है।’’आईसीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) संजोग गुप्ता ने कहा, ‘‘ टिकट आवेदन शुरू होने के महज 48 घंटे से कुछ अधिक समय में इतनी बड़ी संख्या में आवेदन मिलना विश्व कप की लोकप्रियता को दिखाता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ आईसीसी के बड़े टूर्नामेंट अब सिर्फ खेल आयोजन नहीं रह गए हैं, बल्कि वे अलग-अलग देशों और संस्कृतियों के लोगों को जोड़ने वाले बड़े मंच बन चुके हैं।’’उन्होंने कहा, ‘‘करीब दो दशक बाद अफ्रीकी महाद्वीप में आईसीसी का कोई बड़ा पुरुष क्रिकेट आयोजन लौट रहा है, ऐसे में यह अफ्रीका के लिए खास मौका है। इस टूर्नामेंट की नजर दुनिया के 120 से ज्यादा देशों के करीब 2.5 अरब क्रिकेट प्रशंसकों पर होगी।टिकटों के लिए आवेदन करने और पसंदीदा मैच चुनने की प्रक्रिया 21 नवंबर तक आईसीसी की वेबसाइट पर जारी रहेगी।

क्यों मनाया जाता है भारतीय वायुसेना दिवस? जानें दुनिया की चौथी सबसे बड़ी ताकत का इतिहास

क्यों मनाया जाता है भारतीय वायुसेना दिवस? जानें दुनिया की चौथी सबसे बड़ी ताकत का इतिहास

Why is Indian Air Force Day celebrated, Learn about history of world's fourth largest air power

Indian Air Force Day 2026: हर साल 8 अक्टूबर को भारतीय वायुसेना दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह वह पावन अवसर है जब पूरा देश अपनी वायुसेना के शौर्य, अदम्य साहस और समर्पण को नमन करता है। ‘नभः स्पृशं दीप्तम्’ (गर्व के साथ आकाश को छूना) के अमर ध्येय वाक्य को जीने वाली भारतीय वायुसेना केवल हमारी सीमाओं की रक्षा ही नहीं करती, बल्कि देशवासियों के विश्वास का वो मज़बूत आधार है जो हर संकट में ढाल बनकर खड़ा रहता है। 8 अक्टूबर 1932 को भारतीय वायुसेना की स्थापना हुई थी। आइए जानते हैं भारतीय वायुसेना दिवस पर उसके इतिहास और महत्‍व के बारे में विस्‍तार से… 

 

भारतीय वायुसेना का इतिहास

8 अक्टूबर 1932 को ब्रिटिश शासनकाल के दौरान ‘रॉयल इंडियन एयर फोर्स’ (RIAF) के रूप में इसकी नींव रखी गई। 1 अप्रैल 1933 को महज 4 वेस्टलैंड वापिटी विमानों और 6 निडर भारतीय अधिकारियों के साथ वायुसेना के पहले स्क्वाड्रन ने सांसें लीं। द्वितीय विश्व युद्ध में अदम्य साहस दिखाने के लिए इसे ‘रॉयल’ उपाधि मिली थी।

इसे 1950 में पूर्ण गणतंत्र घोषित होने से पहले ‘रॉयल इंडियन एयरफोर्स’ के नाम से जाना जाता था। इसने 1945 के द्वितीय विश्वयुद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 1950 में आजादी यानी पूर्ण गणतंत्र घोषित होने के बाद इसमें से ‘रॉयल’ शब्द हटाकर उसे सिर्फ इंडियन एयर फोर्स (Indian Air Force) कर दिया गया। दुनियाभर में सिर्फ अमेरिका, चीन और रूस के पास भारत से बड़ी वायुसेना मौजूद है।

 

शौर्य और अभियानों की गाथा

भारतीय वायुसेना दुनिया की चौथी सबसे बड़ी और ताकतवर वायुसेना है, जिसने इतिहास के हर मोड़ पर अपनी श्रेष्ठता साबित की है। साल 1947, 1965, 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्धों से लेकर 1962 के भारत-चीन युद्ध और 1999 के कारगिल युद्ध की बर्फीली चोटियों तक वायुसेना ने दुश्मनों के हौसले पस्त किए हैं।

सियाचिन की शून्य से नीचे की बर्फ में ‘ऑपरेशन मेघदूत’, मालदीव में लोकतंत्र बचाने का ‘ऑपरेशन कैक्टस’ और 2019 में सीमा पार जाकर की गई ‘बालाकोट सर्जिकल स्ट्राइक’ वायुसेना की अचूक क्षमता का प्रमाण हैं। 

 

आपदा में सबसे पहली उम्मीद

वायुसेना केवल विनाशकारी युद्धों के लिए ही नहीं, बल्कि संकटग्रस्त जिंदगियों को बचाने के लिए भी जानी जाती है। प्राकृतिक आपदाओं (चाहे उत्तराखंड की विनाशकारी बाढ़ हो, गुजरात का भूकंप या केरल की सुनामी) हर जगह वायुसेना के चॉपर संकटमोचन बनकर पहुंचे हैं। महामारी या विदेशों में गृहयुद्ध के दौरान फंसे भारतीयों और मित्र देशों के नागरिकों को सुरक्षित निकालने में वायुसेना के सी-17 ग्लोबमास्टर जैसे विशाल विमानों ने हमेशा मिसाल कायम की है।

 

जब वायुसेना नीले गगन में रचती है इतिहास

वायुसेना दिवस का जश्न सिर्फ एक औपचारिक परेड नहीं, बल्कि भारत की सैन्य ताकत और एयरोबेटिक कलाबाजी का अद्भुत संगम है। कार्यक्रम की शुरुआत वायुसेना प्रमुख द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराने, भव्य परेड के निरीक्षण और अदम्य साहस दिखाने वाले वीर वायु सैनिकों को वीरता पदकों से अलंकृत करने के साथ होती है।

 

देश के अलग-अलग हिस्सों में आयोजित होने वाले भव्य एयर शो में जब राफेल, सुखोई Su-30MKI, स्वदेशी तेजस, जगुआर और मिराज जैसे घातक लड़ाकू विमान एक साथ उड़ान भरते हैं, तो धरती से आसमान तक गर्व की लहर दौड़ जाती है। एयरोबेटिक टीम ‘सूर्य किरण’ के लाल-सफेद विमान और ‘सारंग’ हेलीकॉप्टर दल जब हवा में जटिल और हैरतअंगेज फॉर्मेशन्स बनाते हैं, तो दर्शक दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर हो जाते हैं।

 

भारतीय वायुसेना की भविष्य की ओर उड़ान

आज भारतीय वायुसेना केवल अपनी पुरानी विरासत पर निर्भर नहीं है, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए तेज़ी से खुद को बदल रही है। ‘मेक इन इंडिया’ के तहत ‘तेजस’ (LCA), प्रचंड अटैक हेलीकॉप्टर और आधुनिक ड्रोन प्रणालियों को शामिल कर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाए गए हैं। अब वायुसेना केवल हवाई सीमा तक सीमित नहीं है, बल्कि स्पेस (अंतरिक्ष) और साइबर सुरक्षा के नए आयामों में भी अपनी पकड़ मज़बूत कर रही है।

 

भारतीय वायुसेना का महत्व

वर्तमान युग में युद्ध की स्थिति में सबसे अधिक महत्व वायुसेना का होता है, इसलिए सेना के इस अंग का सबसे मजबूत होना अति आवश्यक है। भारतीय वायुसेना दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वायुसेना है। दुनियाभर में सिर्फ अमेरिका, चीन और रूस के बाद भारत में बड़ी वायुसेना मौजूद है। भारतीय वायुसेना कई ऐसे लड़ाकू विमान हैं जो इसे दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वायुसेना होने का दर्जा दिलाती है। भारतीय वायुसेना बल, वीरता और पराक्रम का प्रतीक है।

 

वायुसेना दिवस पर भारतीय वायु सैनिकों की बहादुरी, शौर्य और पराक्रम के लिए उन्हें सलाम करती है। यह दिवस हर भारतीय के दिल में देशभक्ति का जज़्बा जगाता है और उन वीर सपूतों को नमन करने का अवसर देता है जो दिन-रात हमारी नींद की हिफाज़त के लिए आसमान में पहरा देते हैं। 

आज का एक्सप्लेनर:हूतियों से लड़ने सऊदी जा रहीं पाक-तुर्किये की सेनाएं, पाकिस्तान ने पहले इनकार किया, आखिर किस मजबूरी में एक्टिवेट हुआ ‘मक्का पैक्ट’

पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब ने पहली बार ‘मक्का पैक्ट’ एक्टिवेट कर दिया है। 2 महीने पहले हुए करार के तहत किसी एक देश पर हमला, तीनों पर हमला माना जाएगा। यानी, अब हूतियों से जंग में उलझे सऊदी की मदद के लिए पाक-तुर्किये को सेनाएं भेजनी पड़ेंगी। आखिर मदद मांगने को कैसे मजबूर हुआ सऊदी, क्या वाकई दूसरे देश के लिए लड़ेंगी पाकिस्तान-तुर्किये की सेनाएं और क्या इससे भारत को चिंता करनी चाहिए; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: हूतियों ने सऊदी अरब को मदद मांगने पर कैसे मजबूर किया? जवाब: सऊदी अरब के पड़ोस में है यमन। यहां की कुल 4 करोड़ की आबादी में करीब 35% जैदी शिया हैं। इन्हीं शियाओं का हथियारबंद समूह और राजनीतिक ऑर्गेनाइजेशन है हूती। यमन की मान्यता प्राप्त सरकार को सऊदी अरब का समर्थन हासिल है। सऊदी के जवान सरकार की सेना के साथ मिलकर कई इलाकों में डेरा डाले हुए हैं। वहीं सरकार के खिलाफ विद्रोह करके यमन के उत्तर-पश्चिम इलाके, राजधानी सना और लाल सागर के तटीय इलाके में हूतियों का कब्जा है। इन्हें ईरान से हथियार और पैसे की मदद मिलती है। 2015 से ही हूतियों और सऊदी समर्थित यमन की सेना में इलाकों पर कब्जे को लेकर छिटपुट संघर्ष चलता रहा। 2022 में संयुक्त राष्ट्र ने सीजफायर करवाया। बीते साल शुरू हुई ईरान-अमेरिका जंग के दौरान ईरान ने अमेरिका के सहयोगी सऊदी पर भी हमले किए। हूतियों ने भी कई बार सऊदी पर हमला करने की धमकी दी। 5 अगस्त 2026 को हूतियों ने सऊदी समर्थित यमन सेना के कैंपों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले शुरू कर दिए. हूतियों ने आरोप लगाया कि यहां सऊदी गठबंधन सेना जमावड़ा बढ़ा रही थी। इसी के साथ 4 साल पुराना सीजफायर टूट गया… सवाल-2: पाकिस्तान ने पहले टाला, फिर जमीनी सेना भेजने को क्यों तैयार हुआ? जवाब: 10 सितंबर को पाकिस्तान ने कहा, ‘सऊदी पर हूतियों के हमले के खिलाफ मक्का पैक्ट के तहत कोई कार्रवाई करने पर कोई बातचीत नहीं हुई है। जब वक्त आएगा, तब कदम उठाएंगे।’ पाकिस्तान के इस रुख के पीछे 3 वजहें थीं… 1. साझा सैन्य कमांड का कोई ढांचा नहींः तुर्किये के डिप्लोमेट रहे मुस्तफा एनेस एसेन के मुताबिक, ‘मक्का पैक्ट प्रतीकात्मक है, क्योंकि इसका एक जॉइंट सैन्य कमांड स्ट्रक्चर नहीं है। तुर्किये और पाकिस्तान का सीधे टकराव में शामिल होना मुश्किल है। 2. मध्यस्थ की भूमिका को खतराः पाकिस्तान, अमेरिका-ईरान जंग में मध्यस्थता की भूमिका में है। उसने ईरान से हूतियों पर लगाम कसने के लिए कहा और सऊदी पर हमलों की निंदा भी की। लेकिन इससे आगे बढ़ने से पाकिस्तान की मध्यस्थता वाली भूमिका खतरे में पड़ सकती थी। 3. शिया-सुन्नी की लड़ाई में नहीं उलझना चाहताः पाकिस्तान में शियाओं की भी बड़ी आबादी है। 2015 में सऊदी ने हूतियों के खिलाफ जंग में मदद मांगी थी, तब भी पाकिस्तान ने इनकार कर दिया था। तब के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा था, ‘हम किसी सांप्रदायिक जंग का हिस्सा नहीं बनना चाहते, क्योंकि इसकी दरारें पाकिस्तान के अंदर भी नजर आएंगी।’ इधर 10 सितंबर को सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प से फोन पर हूतियों पर हवाई हमले करने को कहा था। ट्रम्प ने मदद ठुकरा दी। फिर 15 सितंबर को हूतियों और अमेरिका में सीक्रेट मीटिंग हुई, जिसमें हूतियों ने वादा किया कि वो लाल सागर में अमेरिका और इजराइल के जहाजों पर हमला नहीं करेंगे। इससे सऊदी को अमेरिकी मदद मिलने की उम्मीद और कम हो गई। सऊदी ने दावा किया कि 15-16 सितंबर की रात हूतियों ने सऊदी के पवित्र शहर मक्का की तरफ ड्रोन छोड़े। हूतियों के प्रवक्ता याह्या सिरी का कहना था, ‘हमारा निशाना सऊदी के तेल और सैन्य ठिकाने थे, जो कि पवित्र स्थलों से काफी दूर हैं।’ हालांकि ड्रोन को रोकने के दौरान मक्का प्रांत के ताइफ शहर में एक व्यक्ति की मौत हो गई और दो लोग घायल हो गए। इसके बाद पाकिस्तान का रुख बदलने लगा… सवाल-3: तो क्या वाकई पाक-तुर्किये की सेनाएं हूतियों से लड़ेंगी? जवाब: साझा बयान में कहा गया है, ‘तीनों देश सऊदी में ‘तेजी से’ जॉइंट फोर्सेज और दूसरी ताकत (यानी हथियार, इंटेलिजेंस वगैरह) तैनात करेंगे।’ हालांकि पाकिस्तानी सैनिकों का सऊदी जाना नई बात नहीं है…. वहीं तुर्किये के विदेश मंत्री फिदान ने कहा है कि मक्का पैक्ट, नाटो की तरह काम करेगा, लेकिन मदद का पैमाना आगे की बातचीत से तय होगा। तुर्किये के सामने अपनी सेना भेजने में एक अड़चन ये भी है कि उसके कानून के तहत विदेश में सेना भेजने के लिए संसद की मंजूरी लेनी होगी। 5 अक्टूबर के फैसले में भी कहा गया है कि सऊदी की मदद में सेनाओं की तैनाती तीनों देशों के राष्ट्रीय कानूनों और आपसी सहमति के आधार पर होगी। सवाल-4: पाकिस्तान-भारत जंग छिड़ी, तो क्या तुर्किये-सऊदी भी लड़ने आएंगे? जवाब: सऊदी और तुर्किये भारत को दुश्मन नहीं मानते, इसलिए जंग में उनके हमले की आशंका बेहद कम है। लेकिन 3 बातें गौर करनी चाहिए… पाकिस्तान पैक्ट का फायदा उठाएगा: कार्नेगी इंडिया थिंकटैंक में सिक्योरिटी स्टडीज प्रोग्राम के फेलो दिनकर पेरी के मुताबिक, ‘यह पैक्ट पश्चिम एशिया के लिए बना है, लेकिन पाकिस्तान इसे भारत के साथ संघर्षों में इस्तेमाल करने की कोशिश करेगा। खासकर ऑपरेशन सिंदूर के बाद बनी हालात के चलते।’ सऊदी भारत पर हमला नहीं करेगा: भारत और सऊदी अरब के अच्छे कूटनीतिक संबंध हैं। सऊदी और भारत में सालाना 40 बिलियन डॉलर से ज्यादा का व्यापार होता है। सऊदी-पाकिस्तान से यह 5 बिलियन डॉलर से भी कम है। इसलिए पूर्व भारतीय राजदूत नवदीप सूरी कहते हैं, ‘अगर भारत पाकिस्तान पर हमला करे या ऑपरेशन सिंदूर जैसी स्थिति दोबारा पैदा हो, तो सऊदी पाकिस्तान का रक्षक बनकर नहीं आएगा।’ तुर्किये हथियार सप्लाई जारी रखेगा: रिपोर्ट्स के मुताबिक 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्किये ने पाकिस्तान को 350 से ज्यादा ड्रोन्स भेजे थे। पाकिस्तान के समर्थन में स्टेटमेंट जारी किया था। पाकिस्तान में भारत के पूर्व उच्चायुक्त अजय बिसारिया के मुताबिक, ‘इस पैक्ट से भारत-पाकिस्तान की स्थिति नहीं बदलेगी। तुर्किये पाकिस्तान को ड्रोन सप्लाई करता रहेगा और सऊदी खुद को पाकिस्तान का समर्थक दिखाने से बचेगा।’ सवाल-5: भारत के पास इस नई चुनौती की क्या काट है? जवाब: भारत की सबसे बड़ी काट उसके खाड़ी देशों से डिप्लोमैटिक और व्यापारिक रिश्ते हैं। खाड़ी देशों में 89 लाख भारतीय रहते हैं। भारत सऊदी अरब का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है। सऊदी अरब अपना करीब 16% तो UAE करीब 11% कच्चा तेल भारत को बेचता है। मई 2026 में ही भारत ने UAE के साथ रक्षा समझौता किया है। यह रिश्ते और मजबूत किए जा सकते हैं… ——– ये एक्सप्लेनर भी पढ़िए… पैरों में हवाई चप्पल, कमर में लुंगी, मुंह में कात दबाए हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब का F-15 फाइटर जेट गिरा दिया है। वो भी अपनी देसी बैलिस्टिक मिसाइल से। यमन की सऊदी समर्थित सेना की बख्तरबंद गाड़ियां छीन लीं और निशाना चूकी DF-15 मिसाइल भी उठा ले गए। हूतियों के हमले से इस्लाम का सबसे पवित्र शहर मक्का तक हाई अलर्ट पर है। पूरी खबर पढ़िए…

अफगानिस्तान ने चीन तक बनाई सड़क, भारत के लिए चिंता:121 किमी का वाखान कॉरिडोर चीन के लिए सीधा रास्ता, लद्दाख के पास बढ़ेगा असर

अफगानिस्तान ने उत्तर-पूर्वी बदख्शां प्रांत में वाखान कॉरिडोर के जरिए चीन के शिनजियांग को जोड़ने वाली 121 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण पूरा कर इसका उद्घाटन कर दिया है। करीब साढ़े पांच मिलियन डॉलर की लागत से तैयार यह सड़क दोनों देशों के बीच सीधा पहला जमीनी संपर्क मार्ग बन गई है। दरअसल, तालिबान सरकार अपने प्राकृतिक संसाधनों और सोने की खदानों के लिए चीनी बाजार तक सीधी पहुंच बनाना चाहती है। इससे उसकी विदेशी कंपनियों समेत दूसरे देशों पर निर्भरता काफी हद तक घट जाएगी। इसके अलावा पाकिस्तान से तनाव के बीच यह मार्ग रणनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है। नई दिल्ली में अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी के साथ मुलाकात के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वाखान में हो रही गतिविधियों पर नई दिल्ली की नजर होने की बात कही थी। चीन के लिए खनिज-कनेक्टिविटी का रास्ता चीन के लिए यह क्षेत्र शिनजियांग की सुरक्षा और संभावित व्यापारिक कनेक्टिविटी के लिहाज से अहम है। चीन ने इसी साल यहां नया प्रशासनिक कॉरिडोर भी बनाया है। दरअसल, चीन यहां से नजदीकी, छोटे और सीधे सोने जैसे खनिजों पर भी है। अब चीन को मलक्का जलडमरूमध्य या समुद्री संकट से बेपरवाह होकर सीधे ईरान और मध्य पूर्व के बाजारों व तेल आपूर्ति तक सबसे छोटा जमीनी मार्ग भी मिल जाएगा। भारत के लिए चिंता का विषय क्यों यह कॉरिडोर भारत के दावे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान की सीमा से सटा है। ऐसे में यहां चीन का बढ़ता प्रभाव भारतीय सामरिक हितों के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है। इसके अलावा, लद्दाख से बेहद पास होने के कारण भारत को उत्तरी सीमा पर अपनी खुफिया निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ानी पड़ेगी। भारत को रणनीतिक मौजूदगी बढ़ानी होगी रक्षा विशेषज्ञ एनसी विपिन द्विवेदी के मुताबिक, वाखान में चीन और मध्य एशिया के सामरिक हित मिलते हैं और भारत-पाकिस्तान का भू-राजनीतिक समीकरण भी अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ता है। अफगानिस्तान-पाकिस्तान संबंधों में तनाव और क्षेत्र में चीन की बढ़ती मौजूदगी ने इसका महत्व और बढ़ा दिया है। भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों के साथ संपर्क बढ़ाकर कूटनीतिक और राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करनी चाहिए।

Asian Games: हॉकी से लेकर क्रिकेट तक…भारत-पाकिस्तान मुकाबले का क्रेज, टूटे व्यूअरशिप के कई रिकॉर्ड

Asian Games 2026: एशियन गेम्स 2026 के आइची-नागोया संस्करण को लेकर ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया (OCA) ने बड़ी जानकारी साझा की है। ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया (OCA) के अनुसार, भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट फाइनल और हॉकी सेमीफाइनल को दर्शकों ने काफी पसंद किया। दोनों ही खेलों में भारत ने पाकिस्तान को मात दी थी। OCA ने बताया कि इस बार खिलाड़ियों को शानदार सुविधाओं और बेहतर माहौल के साथ खेलों में हिस्सा लेने का मौका मिला। OCA ने 212 एशियन गेम्स रिकॉर्ड टूटने का भी जिक्र किया और कहा कि आइची-नागोया गेम्स कई मायनों में खास रहे।

भारत ने पाकिस्तान को दी मात

फैंस को भारत और पाकिस्तान के बीच मुकबला हमेशा से काफी पसंद रहा है। एशियन गेम्स में भारत ने हॉकी और क्रिकेट दोनों में पाकिस्तान को हराकर शानदार प्रदर्शन किया। पुरुष हॉकी के सेमीफाइनल में भारत ने पाकिस्तान को 4-3 से हराया और फाइनल में पहुंचा। इसके बाद भारत ने फाइनल में मलेशिया को हराकर गोल्ड मेडल जीता। वहीं, पुरुष क्रिकेट के फाइनल में भारतीय टीम ने पाकिस्तान को 19 रन से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इस तरह भारत ने दोनों खेलों में जीत हासिल कर देश को दो गोल्ड मेडल दिलाए।

मैच ने तोड़ा सभी रिकॉर्ड

OCA कोऑर्डिनेशन कमेटी के अध्यक्ष तैयब इकराम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि, “इस बार एशियन गेम्स की ब्रॉडकास्ट व्यूअरशिप ने अब तक के सभी रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिए। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच हुए दो बड़े मुकाबलों ने दर्शकों का सबसे ज्यादा ध्यान खींचा।” उनके मुताबिक, “शनिवार को खेला गया भारत-पाकिस्तान क्रिकेट फाइनल सबसे ज्यादा देखा गया मैच रहा। वहीं इससे एक दिन पहले गुरुवार को हुआ भारत-पाकिस्तान हॉकी मुकाबला एशियन गेम्स के इतिहास में सबसे ज्यादा देखा जाने वाला हॉकी मैच बना।”

शेयर नहीं किया कोई आकड़ा

उन्होंने व्यूअरशिप से जुड़ा कोई आंकड़ा साझा नहीं किया और न ही यह बताया कि भारत-पाकिस्तान क्रिकेट और हॉकी मैच में से किस मुकाबले को ज्यादा दर्शकों ने देखा। उन्होंने कहा कि पहली बार OCA ने इन एशियन गेम्स में सुरक्षा को लेकर एक नया तरीका अपनाया। उनके मुताबिक, पूरे आयोजन के दौरान सुरक्षा का खास ध्यान रखा गया और एथलीट्स, एशियन फेडरेशन और राष्ट्रीय ओलंपिक समितियों के लिए गेम्स को सुरक्षित बनाया गया। एशियन गेम्स के दौरान खिलाड़ियों और अधिकारियों के रहने की व्यवस्था को लेकर आयोजकों की काफी आलोचना हुई थी।

IND vs PAK Pitch Report: गोल्ड के लिए भिड़ेंगे भारत-पाकिस्तान, अगर रद्द हुआ मैच तो किस टीम को होगा फायदा? जानें सबकुछ

IND vs PAK Pitch Report: एशियन गेम्स 2026 के क्रिकेट में शनिवार को भारत और पाकिस्तान के बीच धमाकेदार मुकाबला होने वाला है। दोनों टीमें निशिन के कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में आमने-सामने होंगी। फाइनल से पहले भारत ने सेमीफाइनल में श्रीलंका को 124 रन से हराकर शानदार अंदाज में अपनी जगह पक्की की। वहीं पाकिस्तान ने बांग्लादेश को छह विकेट से मात देकर फाइनल का टिकट हासिल किया। वहीं अब दोनों टीमें गोल्ड मेडल के लिए एक दूसरे भिड़ेगी। वहीं इस महामुकाबले से पहले फैंस के मन में ये सवाल है कि क्वार्टरफाइनल मुकाबले की तरह फाइनल मुकाबला बारिश की वजह से रद्द हो जाएगा। वहीं अगर मैच रद्द होता है तो किस टीम को फायदा होगा।

भारत ने श्रीलंका को दी मात

भारत ने सेमीफाइनल में श्रीलंका को 124 रन से हराकर शानदार अंदाज में अपनी जगह पक्की की। पहले बल्लेबाजी करते हुए श्रेयस अय्यर की अगुवाई वाली भारतीय टीम ने 20 ओवर में 169 रन बनाए और 7 विकेट गंवाए। लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंकाई टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सकी और सिर्फ 45 रन पर पूरी टीम आउट हो गई। भारत की ओर से जसप्रीत बुमराह, अक्षर पटेल और अभिषेक शर्मा ने दो-दो विकेट लेकर श्रीलंका की पारी को समेटने में अहम भूमिका निभाई। वहीं पाकिस्तान ने बारिश से प्रभावित मुकाबले में बांग्लादेश को छह विकेट से मात देकर फाइनल का टिकट हासिल कर लिया। अब एशियन गेम्स के स्वर्ण पदक के लिए भारत और पाकिस्तान आमने-सामने होंगे।

कैसा होगा मौसम

भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले एशियन गेम्स के फाइनल से पहले मौसम भी अहम भूमिका निभा सकता है। मौसम पूर्वानुमान के मुताबिक, मैच के दिन सुबह बारिश होने की संभावना करीब 62 प्रतिशत है, वहीं दोपहर तक इसके घटकर लगभग 25 प्रतिशत रहने का अनुमान है। तापमान करीब 20 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है, जबकि आसमान में लगभग 37 प्रतिशत बादल छाए रहने की संभावना है। ऐसे में बारिश के कारण मुकाबले में रुकावट पड़ने की आशंका बनी हुई है और दोनों टीमों को मौसम की स्थिति पर भी नजर रखनी होगी।

बारिश से रद्द हुआ मैच तो किसे होगा फायदा

2023 के हांग्जो एशियन गेम्स में बारिश के कारण पुरुष क्रिकेट का फाइनल पूरा नहीं हो पाया था। इसके बाद भारत को अफगानिस्तान के खिलाफ विजेता घोषित किया गया था। लेकिन इस बार निशिन में नियम अलग हैं। अगर भारत और पाकिस्तान के बीच फाइनल बारिश की वजह से नहीं हो पाता या मैच का कोई नतीजा नहीं निकलता, तो किसी एक टीम को विजेता नहीं माना जाएगा। ऐसी स्थिति में दोनों टीमों को संयुक्त रूप से गोल्ड मेडल दिया जाएगा।

कैसी है निशिन की पिच

निशिन के मैदान की पिच बल्लेबाजों के लिए आसान नहीं मानी जा रही है। यहां गेंद की गति धीमी रहने के साथ उछाल भी हर गेंद पर एक जैसा नहीं रहता, जिससे बल्लेबाजों को शॉट खेलने में परेशानी हो सकती है। पिच पर दरारें भी दिखाई दे रही हैं और ऐसे हालात में स्पिन गेंदबाजों को काफी मदद मिलने की उम्मीद है। इस मैदान पर आमतौर पर 135 से 145 रन के आसपास का स्कोर बनता है, इसलिए अच्छी गेंदबाजी करने वाली टीम के लिए इस तरह के लक्ष्य का बचाव करना संभव हो सकता है।

भारत और पाकिस्तान की संभावित प्लेइंग 11

भारत की संभावित प्लेइंग 11: वैभव सूर्यवंशी, अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन (विकेट कीपर), श्रेयस अय्यर (कप्तान), ईशान किशन, तिलक वर्मा, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, वाशिंगटन सुंदर, रवि बिश्नोई, जसप्रीत बुमराह

पाकिस्तान की संभावित प्लेइंग 11: साहिबज़ादा फरहान (कप्तान), सैम अयूब, उस्मान खान (विकेट कीपर), माज़ सदाकत, हसन नवाज, अब्दुल समद, अराफात मिन्हास, अहमद दानियाल, मोहम्मद वसीम जूनियर, अबरार अहमद, सुफ़यान मोकिम