Asia Cup में INDvsPAK मैच कल, एकतरफा जीत या होगा उलटफेर?

INDvsPAK

INDvsPAK  महिला एशिया कप के सेमीफाइनल में जगह पक्की कर चुकी भारतीय टीम की नजरें अब शनिवार को चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ जीत के साथ लीग चरण का शानदार अंत करने पर हैं। पुरुष हों या महिला, बहु-टीम टूर्नामेंट में भारत-पाकिस्तान मुकाबलों को लेकर मैदान के बाहर काफी रोमांच रहता है लेकिन पिछले काफी समय से मैदान पर मुकाबले उतने प्रतिस्पर्धी नहीं रहे हैं। दुबई अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में होने वाले मुकाबले में भारत का पलड़ा काफी मजबूत दिख रहा है।

भारत के लिए यह मैच केवल औपचारिकता नहीं होगा। विश्व कप में पिछले कुछ मौकों पर समय से पहले बाहर होने के बाद भारतीय टीम को टी20 प्रारूप में कुछ क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है। ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम के वर्चस्व को चुनौती देने के लिए भारत को बेहतर पावर-हिटर और तेज गेंदबाजों का मजबूत पूल तैयार करना होगा।

एशियाई स्तर पर हालांकि भारत के आसपास भी कोई टीम नजर नहीं आती। पिछली बार भारत किसी तरह श्रीलंका के खिलाफ फाइनल में उपविजेता रहा था। दूसरी ओर, पाकिस्तान ने अपने शुरुआती मुकाबले में थाईलैंड को हराया है और अब भी सेमीफाइनल की दौड़ में बना हुआ है।  भारत की सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना और शेफाली वर्मा भी शानदार फॉर्म में हैं। मंधाना ने हांगकांग के खिलाफ यादगार शतक लगाते हुए कई रिकॉर्ड अपने नाम किए और प्रतियोगिता की अन्य टीमों को अपनी बल्लेबाजी क्षमता का संकेत दे दिया।

दुबई की पिचों पर बल्लेबाजी आसान नहीं रही है। बल्लेबाजों को आमतौर पर पिच की गति और उछाल को समझने में करीब 10 गेंद लगती हैं और उसी के अनुसार पारी की योजना बनानी पड़ती है। मंधाना और शेफाली ने भी बृहस्पतिवार रात इसी रणनीति को अपनाया था।

मध्यक्रम में प्रतिका रावल, ऋचा घोष और कप्तान हरमनप्रीत कौर की भूमिका अहम होगी। तीनों अच्छी शुरुआत को बड़ी पारियों में तब्दील नहीं कर सकी हैं। खासकर नंबर तीन पर बल्लेबाजी कर रहीं रावल पर दबाव बढ़ रहा है। वनडे में सफल रही रावल टी20 प्रारूप की मांगों के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाई हैं।

गेंदबाजी में नंदनी शर्मा का शामिल होना भारत के लिए सकारात्मक कदम रहा है। वह प्रमुख तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ के साथ नई गेंद संभालते हुए अपनी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन कर रही हैं।  पाकिस्तान को भारत को चुनौती देने के लिए अपनी बल्लेबाजी में बड़े सुधार की जरूरत है। बल्लेबाजी की कमजोरी लंबे समय से टीम की परेशानी रही है।

थाईलैंड के खिलाफ पिछले मैच में भी पाकिस्तान ने पावरप्ले में तीन विकेट गंवाकर खुद को मुश्किल में डाल लिया था, हालांकि बाद में उसने 119 रन के मामूली लक्ष्य का सफलतापूर्वक बचाव कर लिया। टीम अब भी सलामी बल्लेबाज मुनीबा अली और कप्तान एवं गेंदबाजी ऑलराउंडर फातिमा सना पर काफी निर्भर है। भारत जैसी मजबूत टीम को चुनौती देने के लिए पाकिस्तान को इस निर्भरता से बाहर निकलना होगा।

टीम इस प्रकार हैं:

भारत: हरमनप्रीत कौर (कप्तान), स्मृति मंधाना (उप-कप्तान), भारती फुलमाली, ऋचा घोष (विकेटकीपर), गुनालन कमलिनी (विकेटकीपर), प्रतिका रावल, शेफाली वर्मा, दीप्ति शर्मा, क्रांति गौड़, प्रेमा रावत, अरुंधति रेड्डी, रेणुका सिंह ठाकुर, नंदनी शर्मा, श्री चरणी, राधा यादव।

पाकिस्तान: फातिमा सना (कप्तान), आयशा जफर, ईमान नसीर, ऐमान फातिमा, गुल फिरोजा, मोमिना रियासत, मुनीबा अली सिद्दीकी (विकेटकीपर), सदफ शमास, नशरा संधू, सादिया इकबाल, सायरा जाबीन, शवाल जुल्फिकार, तुबा हसन, उम्म-ए-हानी और वहीदा अख्तर।

समय:- रात आठ बजे से 

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आज का एक्सप्लेनर:आसिम मुनीर ने गुपचुप ‘तख्तापलट’ कर दिया; कैसे पाकिस्तान में सबसे ताकतवर बने, आखिर हासिल क्या करना चाहते हैं

पाकिस्तान में 5वीं बार सेना के जनरल ने ‘तख्तापलट’ कर दिया है। फर्क बस इतना है कि इस बार ये टैकों के जरिए नहीं, संसद के रास्ते हुआ है। नए कानून से फील्ड मार्शल आसिम मुनीर पाकिस्तान के सबसे ताकतवर शख्स बन गए हैं। इससे जुड़े 5 जरूरी सवालों के जवाब, आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: आसिम मुनीर को कौन-सी नई ताकतें मिल गई हैं?
जवाब: नवंबर 2022 में आसिम मुनीर पाकिस्तान के 17वें आर्मी चीफ बने थे। उनका कार्यकाल खत्म होने से 6 महीने पहले, यानी मई 2025 में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ लॉन्च कर दिया। पाकिस्तान ने जीत का झूठा दावा किया और आसिम मुनीर को ‘हीरो’ बताया। इसके बाद आसिम मुनीर की ताकत बढ़ती चली गई… 20 मई 2025 को मुनीर फील्ड मार्शल बने। ये पाकिस्तानी सेना की सबसे ऊंची रैंक होती है। आम बोलचाल में इसे ‘फाइव स्टार जनरल’ कहते हैं। इससे पहले पाकिस्तान में सिर्फ जनरल अयूब खान इस रैंक तक पहुंचे थे। नवंबर 2025 को पाकिस्तानी संविधान के आर्टिकल 243 में 27वां संशोधन करके सेना में नया चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज, CDF का पद बनाया गया। मुनीर देश के पहले CDF बने। वो 2030 तक इस पद पर रहेंगे। संशोधन के जरिए इसे बढ़ाया भी जा सकता है। 20 अगस्त 2026 को पाकिस्तानी संसद में 2 नए कानून पारित हुए, जिससे CDF को 5 बड़ी शक्तियां मिल गई हैं। डिफेंस फोर्सेज ऑफ पाकिस्तान एक्ट, 2026 के तहत 3 ताकतें… नेशनल कमांड अथॉरिटी एक्ट, 2026 के तहत 2 ताकतें… यानी आसिम मुनीर तीनों सेनाओं के प्रमुख हैं, न्यूक्लियर हथियारों से जुड़े फैसले लेने की भी ताकत है। सैन्य अफसरों से जुड़ा हर फैसला भी निर्णायक रूप से वही लेंगे और सबसे बड़ी बात- मुनीर पर कोई मुकदमा नहीं चल सकता। सवाल-2: मदरसे में पढ़े मुनीर पाकिस्तान के सबसे ताकतवर शख्स कैसे बन गए?
जवाब: मुनीर के पिता सैयद सरवर मुनीर 1947 में पंजाब के जालंधर से पलायन कर पाकिस्तान पहुंचे थे। वो रावलपिंडी के मशहूर एफजी टेक्निकल स्कूल के हेडमास्टर बने। साथ ही मस्जिद में इमामत करते और इस्लामिक उपदेश देते। गहरे धार्मिक झुकाव वाले इस घर में 1968 में आसिम मुनीर का जन्म हुआ। पाकिस्तानी जर्नलिस्ट एजाज सैयद के मुताबिक, घर वाले चाहते थे कि आसिम कुरआन हिफ्ज करे। मुनीर सातवीं तक मदरसे में पढ़े और कुरआन रटी। फिर कुछ दिन एफजी टेक्निकल स्कूल पढ़ने गए। इसके बाद रावलपिंडी के सर सैयद कॉलेज गए, जहां से पूर्व आर्मी चीफ कमर जावेद बाजवा ने पढ़ाई की थी। क्रिकेट के शौकीन मुनीर कॉलेज के दिनों में तेज गेंदबाज थे। स्कूल के बाद मुनीर ने जापान के फूजी स्कूल, क्वेटा के कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और मलेशिया के आर्म्ड फोर्सेज कॉलेज से पढ़ाई की। उसके बाद इस्लामाबाद की नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी से पब्लिक पॉलिसी और स्ट्रेटेजिक सिक्योरिटी मैनेजमेंट में मास्टर्स किया। 1986 में मिलिट्री करियर शुरू हुआ, सऊदी में दोबारा कुरआन रटी 25 अप्रैल 1986 को मुनीर को पाकिस्तान आर्मी में के फ्रंटियर फोर्स रेजिमेंट की 23वीं बटालियन में पहली तैनाती मिली। जब मुनीर लेफ्टिनेंट कर्नल बने, तो उन्हें सऊदी अरब में पाकिस्तानी दूतावास में तैनाती मिली। वहां मुनीर को महसूस हुआ कि वे कुरआन भूल रहे हैं। ऐसे में लगातार 3 साल वह छुट्टियों में घर नहीं गए और इस दौरान दोबारा कुरआन रटी। इसके बाद आसिम सियाचिन ग्लेशियर में भी रहे। आसिम का काफी वक्त पाकिस्तान के कब्जाए कश्मीर यानी PoK में भी गुजरा। फिर 2014 में मेजर जनरल, 2016 में पाकिस्तान के मिलिट्री इंटेलिजेंस के डायरेक्टर जनरल और सितंबर 2018 में लेफ्टिनेंट जनरल की पोस्ट तक पहुंचे। सिर्फ 8 महीने ISI चीफ रहे मुनीर, पीएम इमरान से झगड़ा भारी पड़ा 25 अक्टूबर 2018 को मुनीर ISI के डीजी बने। 8 ही महीने बाद जून 2019 में उन्हें हटाकर लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद को नया ISI डीजी बनाया गया। इसकी वजह थी- मुनीर का इमरान खान से झगड़ा। मुनीर ने इमरान खान की पत्नी बुशरा बीबी के करप्शन के एक मामले को उजागर कर दिया था। इसलिए इमरान खान के कहने पर तब के आर्मी चीफ बाजवा ने मुनीर को ISI से बाहर का रास्ता दिखाया था। इमरान पीएम पद से हटाए गए, तो मुनीर नए आर्मी चीफ बने मुनीर नवंबर 2022 तक करीब एक साल क्वार्टरमास्टर जनरल रहे। ये भी ISI चीफ के मुकाबले काफी छोटा पद होता है। हालांकि 2022 की शुरुआत में इस्लामाबाद का सियासी माहौल बदलने लगा। 10 अप्रैल को इमरान अविश्वास प्रस्ताव लाकर पीएम पद से हटाए गए। अगले ही दिन नवाज शरीफ के गुट वाली मुस्लिम लीग के नेता और नवाज के छोटे भाई शहबाज शरीफ पीएम बन गए। मुनीर शहबाज के करीबी थे। माना जाता है कि इमरान को सत्ता से हटाने के हथकंडों में मुनीर ने अंदरखाने साथ दिया। मुनीर को भी इसका ‘रिटर्न गिफ्ट’ मिला। 29 नवंबर को बाजवा को हटाकर मुनीर को नया आर्मी चीफ बना दिया गया। मुनीर पहले आर्मी चीफ बने, जो पाकिस्तान की दोनों खुफिया एजेंसियों- ISI और मिलिट्री इंटेलिजेंस के चीफ रहे थे। अब मुनीर पहले ऐसे आर्मी चीफ हैं, जिनके पास एक साथ 3 पद हैं- आर्मी चीफ के अलावा फील्ड मार्शल का मिलिट्री ओहदा और नया नवेला सबसे ताकतवर पद- CDF। सवाल-3: आसिम मुनीर आखिर हासिल क्या करना चाहते हैं?
जवाब: आसिम मुनीर खुद को ऐसे शासक के तौर पर स्थापित करना चाहते हैं, जिसके लिए कोई खतरा या चुनौती न पैदा हो सके। मुनीर ने अपने लिए ये शील्ड 3 तरह से बनाई है…. 1. मुनीर के आगे बेबस मौजूदा सरकार 2. चुनाव के जरिए आसिम को हटाना मुश्किल 3. सरकार के जरिए कोर्ट पर भी सेना कंट्रोल सवाल-4: पाकिस्तान के पुराने सैन्य तानाशाहों के साथ क्या हुआ था?
जवाब: पिछले सैन्य तानाशाहों ने इस्तीफा दिया, गिरफ्तार हुए या सबकुछ छोड़कर भागना पड़ा…. 1. जनरल अयूब खान: 27 अक्टूबर 1958 को राष्ट्रपति इस्कंदर मिर्जा का तख्तापलट किया। मिर्जा को इंग्लैंड भागना पड़ा और अयूब खुद राष्ट्रपति बने। 1965 की जंग में भारत से हार के बाद अयूब खान के बुरे दिन शुरू हो गए। मार्च 1969 में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। 2. जनरल याह्या खान: जनरल याह्या खान मार्शल लॉ लगाकर राष्ट्रपति बने। 1971 में भारत-पाकिस्तान जंग में पाकिस्तान की हार हुई और बांग्लादेश का जन्म हुआ। भारी बेइज्जती के बाद दिसंबर 1971 में याह्या को इस्तीफा देना पड़ा। नई सरकार ने उन्हें हाउस अरेस्ट कर दिया। 1980 में उनकी गुमनाम मौत हुई। 3. जनरल जिया-उल-हक: सेना प्रमुख जिया ने साल 1977 में पीएम जुल्फिकार अली भुट्टो का तख्तापलट किया। बाद में भुट्टो पर एक मर्डर केस चलाकर 1979 में उन्हें फांसी दे दी।
जिया ने पाकिस्तान में सबसे लंबे समय तक राज किया। 17 अगस्त 1988 को एक प्लेन क्रैश में उनकी मौत हो गई। 4. जनरल परवेज मुशर्रफ: 12 अक्टूबर 1999 को मुशर्रफ, पीएम नवाज शरीफ का तख्तापलट कर राष्ट्रपति बन बैठे। नवाज को जेल में डाल दिया। बाद में वे सऊदी अरब भाग गए। मुशर्रफ के खिलाफ विरोध हुए, उन्होंने इमरजेंसी भी लगाई, आखिरकार अगस्त 2008 में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। वे दुबई और फिर लंदन भाग गए। 2019 में उन्हें देशद्रोह के मामले में फांसी की सजा मिली। फरवरी 2023 में दुबई में उनकी मौत हो गई। सवाल-5: क्या मुनीर की सत्ता कायम होने से भारत को कोई खतरा है?
जवाब: मुनीर का रुख पूरी तरह एंटी इंडिया है… 7 अगस्त 2026 को पाकिस्तान, सऊदी और तुर्किये में एक डिफेंस डील हुई। इसके तहत किसी एक देश पर हमला, तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। पाकिस्तान को इस पैक्ट का पहला जनरल सेक्रेटरी जनरल बनाया गया है। ताकतें बढ़ने से आसिम मुनीर को अपने एंटी इंडिया एजेंडे पर काम करना आसान हो जाएगा। ये भारत के लिए चिंता का सबब हो सकता है। ———————— ये खबर भी पढ़ें… आज का एक्सप्लेनर:पाकिस्तान पर हमला हुआ तो लड़ने आएंगे सऊदी-तुर्किये, आखिर क्या है मक्का एग्रीमेंट; भारत कैसे काउंटर करेगा पाकिस्तान पर हमला हुआ, तो सऊदी और तुर्किये भी साथ लड़ने आएंगे। 7 अगस्त 2026 को मक्का में तीनों देशों में बीच एक खास रक्षा समझौता हुआ है। अब किसी एक पर हमला, तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…

आज का एक्सप्लेनर:क्या बांग्लादेश मक्का पैक्ट में शामिल होकर सऊदी-पाक-तुर्किये के साथ लड़ेगा; भारत के तीन तरफ से घिरने का खतरा

18 दिन पहले सऊदी, तुर्किये और पाकिस्तान के बीच मक्का में एक डिफेंस एग्रीमेंट हुआ। इसमें NATO की तरह करार है कि तीनों में से किसी एक देश पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा। अब इसमें कुछ और इस्लामिक देशों के शामिल होने की अटकलें लग रही हैं। इनमें सबसे बड़ा नाम है भारत का पड़ोसी- बांग्लादेश। क्या वाकई ‘इस्लामिक NATO’ जॉइन करेगा बांग्लादेश, ये भारत के लिए कितना बड़ा खतरा और सरकार कैसे काउंटर करेगी; आज के एक्सप्लेनर में जानेंगे… सवाल-1: मक्का एग्रीमेंट में बांग्लादेश के शामिल होने की चर्चा क्यों उठी? जवाबः कोई औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन बांग्लादेश के दो मंत्रियों ने बयानों से चर्चा शुरू हुई…
सवाल-2: तो बांग्लादेश मक्का पैक्ट में शामिल होगा या नहीं? जवाब: सीनियर डिफेंस जर्नलिस्ट मनोज जोशी कहते हैं, ‘अगर ये सुन्नी देशों के बीच का पैक्ट है, तो बांग्लादेश भी इसमें शामिल हो सकता है। अगर इसका मकसद मिडिल ईस्ट की रीजनल सिक्योरिटी है, तो इसमें बांग्लादेश की कोई खास अहमियत नहीं है।’ स्ट्रैटेजिक एनालिस्ट ब्रह्म चेलानी भी कहते हैं, ‘ये पैक्ट 4 सुन्नी देशों का गठबंधन बन सकता है। सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी, BNP के इस्लामिक ताकतों के साथ गहरे रिश्ते रहे हैं। रहमान की विदेश नीति उनकी पार्टी की उसी पुरानी स्ट्रैटेजी की तरफ जाती दिख रही है।’ दरअसल, बांग्लादेश में इस वक्त BNP की सरकार है, जो अपने कट्टर सुन्नी इस्लामिक रुख के लिए जानी जाती है। बीते कुछ समय से ये कट्टर रुख बढ़ रहा है, इसके कुछ संकेत हैं… पैक्ट में शामिल होने से बांग्लादेश को सऊदी अरब से विदेशी रोजगार, निवेश और तेल मिल सकता है। तुर्किये से डिफेंस टेक्नोलॉजी, हथियार और ट्रेनिंग मिल सकती है। पाकिस्तान इस्लामी मंचों पर राजनीतिक समर्थन दे सकता है। हालांकि बांग्लादेश के पूर्व राजनयिक एम शाहिदुल इस्लाम लिखते हैं, ‘बांग्लादेश को अपने फैसले दूसरों को खुश करने के लिए नहीं लेने चाहिए। मक्का पैक्ट की लागत बहुत ज्यादा है, लेकिन फायदा स्पष्ट नहीं है। समझौते में शामिल दूसरे देश बांग्लादेश जैसे छोटे देश पर दबाव भी बना सकते हैं। बांग्लादेश को पूछना होगा कि क्या उसे भारत-पाकिस्तान या ईरान-सऊदी के संघर्ष से दूर रहने की आजादी होगी।’
सवाल-3: अगर बांग्लादेश मक्का-पैक्ट में शामिल हुआ, तो भारत के लिए क्या खतरा? जवाब: दो बड़े खतरे हैं… 1. साउथ एशिया में भारत का प्रभाव, सिक्योरिटी, आर्थिक रिश्तों पर असर 2. पाकिस्तान से जंग हुई, तो मुश्किल बढ़ेगी सवाल-4: भारत इसे कैसे काउंटर करेगा? जवाब: भारत को घेरने का इरादा तो दिखता है, लेकिन लंबे समय तक भारत जैसी इकॉनोमिक पावर का विरोध करना मुमकिन नहीं है। भारत 2 तरह की तैयारी कर सकता है… 1. सऊदी, तुर्किये जैसे देशों से रिश्ते बेहतर करना 2. अहम समुद्री रूट्स पर नेवी को मजबूत करना 3. मक्का पैक्ट का उद्देश्य साफ नहीं, भारत को कड़ी नजर रखनी चाहिए ———— ये खबर भी पढ़िए… क्या जम्मू-कश्मीर पर भारत के पाले में अमेरिका, अमेरिकी राजदूत सर्जियो बोले- ये भारत का अहम हिस्सा; ट्रम्प का असली मकसद क्या 19 अगस्त 2026 को भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर जम्मू-कश्मीर में सीएम उमर अब्दुल्ला से मिले। उन्होंने वहीं से बयान दिया- ‘जम्मू-कश्मीर भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मैं यहां पहली बार आया। ये बहुत खूबसूरत जगह है।’ पूरी खबर पढ़िए…

10 साल लगातर जीत, श्रीजेश ने कहा कि पाक अब कोई मुकाबला नहीं देती

भारत की पाकिस्तान की हॉकी टीम पर लगातार दसवीं जीत के बाद पूर्व भारतीय गोलकीपर श्रीजेश ने कहा कि यह अब सांसो को थाम देने वाला मुकाबला नहीं रहा। गौरतलब है कि भारतीय टीम आखिरी बार पाकिस्तान से साल 2016 में खेली गई चैंपियन्स ट्रॉफी में हारी थी। वहीं आखिरी बार विश्वकप में पाकिस्तान ने भारत को साल 1986 में हराया था।

भारत के पूर्व कप्तान और गोलकीपर पीआर श्रीजेश ने भारत-पाकिस्तान की प्रतिद्वंद्विता, भारत के डिफेंसिव अप्रोच और दबाव वाली स्थितियों में शांत रहने की अहमियत पर अपनी राय रखी। पूर्व कप्तान पीआर श्रीजेश ने कहा, “भारतीय पुरुष हॉकी टीम पिछले डेढ़ साल से एक नए फॉर्मेशन के साथ खेल रही है। वह फॉर्मेशन ज़्यादातर हमें डिफेंस करने पर मजबूर करता है, लेकिन हाल ही में प्रो लीग में, हमने कई मैचों में आगे बढ़कर ज़ोरदार दबाव बनाया।

एक ज़रूरी बात यह है कि यूरोपीय टीमों के खिलाफ़ खेलते समय हमें डिफेंस में एकजुट रहना होगा। इसके अलावा, हमें विश्व कप में अपना स्वाभाविक खेल खेलना चाहिए। डिफेंस में, हमने ज़ोनल मार्किंग का इस्तेमाल किया, इसलिए हमें उस क्षेत्र में अपनी समझ को बेहतर बनाने की ज़रूरत है। हमें बहुत पीछे नहीं हटना चाहिए। हमें आगे बढ़कर, हाई प्रेसिंग करनी चाहिए और सेंटर लाइन के आगे भी डिफेंस करना चाहिए।” हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी पर श्रीजेश ने कहा, “हरमनप्रीत एक बहुत अच्छे कप्तान हैं। पिच पर कप्तान का असर सीमित होता है क्योंकि आप हर चाल या खिलाड़ी को कंट्रोल नहीं कर सकते। जिसके पास गेंद होती है, उसे ही फ़ैसला लेना होता है।

कप्तान का ज़्यादातर काम पिच के बाहर होता है – टीम को एकजुट रखना, युवा खिलाड़ियों का समर्थन करना, उन्हें जमने में मदद करना, टीम का सकारात्मक माहौल बनाना, खिलाड़ियों की चिंताओं को कोच तक पहुँचाना, संदेह दूर करना और यह पक्का करना कि हर कोई कोच के निर्देशों को समझे। इसलिए, हॉकी कप्तान के लिए मैदान के बाहर का काम मैदान पर किए जाने वाले काम से कहीं ज़्यादा अहम होता है।” श्रीजेश ने भारतीय हॉकी टीम के विकास और भारत-पाकिस्तान की प्रतिद्वंद्विता पर कहा, “आखिरी क्वार्टर या आखिरी मिनटों में गोल खाना हमारे लिए एक समस्या हुआ करती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है।

अब, हम मैच जीतने के लिए देर से गोल करते हैं। पहले, 35 मिनट के हाफ के दौरान, हम फिटनेस या खराब फैसले लेने की वजह से गलतियां करते थे और गोल खा जाते थे। लेकिन जब से चार-क्वार्टर वाला सिस्टम आया है, और उससे पहले भी, हमने अपनी फिटनेस, ताकत, खेल की समझ और फैसले लेने की क्षमता में काफी सुधार किया है। इसी वजह से, पाकिस्तान के खिलाफ मैच अब उतने मुश्किल नहीं रहे जितने पहले हुआ करते थे। पहले, भारत बनाम पाकिस्तान के मैच बहुत कड़े मुकाबले वाले होते थे, जो अक्सर 1-0 या 2-1 पर खत्म होते थे। पाकिस्तान की मौजूदा टीम का स्तर पहले जैसा नहीं रहा है, उनके द्वारा किए गए 3 गोलों में भारतीय रक्षापंक्ति की गलतियां ज्यादा रही।”

पाकिस्तान बोला- ऑपरेशन सिंदूर पर बनी डॉक्यूमेंट्री प्रोपेगेंडा:फिल्म कहानी से हकीकत नहीं बदलेंगी; 15 अगस्त को रिलीज हुई फिल्म

ऑपरेशन सिंदूर पर बनी डॉक्यूमेंट्री को लेकर पाकिस्तान ने नाराजगी जताई है। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने डॉक्यूमेंट्री को प्रोपेगेंडा बताया। उन्होंने कहा कि फिल्म में घटनाओं को भारत के पक्ष में दिखाया गया है और इससे असली घटनाएं नहीं बदल सकतीं। अहमद शरीफ ने मंगलवार तड़के करीब 2 बजे सोशल मीडिया X पर यह बयान दिया। उन्होंने डॉक्यूमेंट्री को ‘ट्रेजेडी और कॉमेडी’ तक बताया। उनका आरोप है कि फिल्म में कुछ चुनिंदा इंटरव्यू, भावुक कहानी और फिल्मी अंदाज का इस्तेमाल किया गया है। डिस्कवरी की डॉक्यूमेंट्री ‘डिक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर’ 15 अगस्त को रिलीज हुई थी। इसमें ऑपरेशन सिंदूर में शामिल भारतीय सैन्य अधिकारियों के इंटरव्यू हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी इसमें नजर आए हैं। पाकिस्तान बोला- सैन्य नाकामी को जीत बताया पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि भारत ने ऑपरेशन के नतीजे को अपनी जीत के तौर पर दिखाया है। उन्होंने कहा कि फिल्म में कहानी और वीडियो के जरिए सैन्य नाकामी को सफल ऑपरेशन बताया गया है। उनका कहना था कि फिल्म बनाने से उस समय हुई असली घटनाएं नहीं बदल सकतीं। अहमद शरीफ दावा किया कि भारत-पाकिस्तान के बीच हुए चार दिन के संघर्ष में उनकी सेना ने 8 भारतीय सैन्य विमान गिराए थे। हालांकि भारत इन दावों को पहले ही नकार चुका है। सीजफायर पर भी पाकिस्तान ने सवाल उठाए पाकिस्तानी सेना ने कहा कि लड़ाई दोनों देशों के DGMO यानी सैन्य ऑपरेशन के प्रमुख अधिकारियों के बीच बातचीत के बाद रुकी थी। इसलिए इसे भारत की एकतरफा जीत बताना सही नहीं है। पाकिस्तान ने कहा कि डॉक्यूमेंट्री में एक तरफ भारत की बड़ी और सटीक सैन्य कार्रवाई की बात कही गई है, तो दूसरी तरफ यह भी कहा गया है कि भारत ने लड़ाई को सीमित रखा और पाकिस्तान को पीछे हटने का मौका दिया। पाकिस्तान ने इसे विरोधाभासी दावा बताया। पहलगाम हमले से ऑपरेशन सिंदूर तक 19 दिनों में क्या-क्या हुआ? 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव तेजी से बढ़ा। 7 मई को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत आतंकी ठिकानों पर हमला किया। इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष बढ़ा और 10 मई को DGMO स्तर की बातचीत के बाद सीजफायर पर सहमति बनी। ————————
ये खबर भी पढ़ें…. इमरान खान से बहन और पत्नी ने मुलाकात की:सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अडियाला जेल पहुंचीं; पूर्व PM अस्पताल शिफ्ट किए जाएंगे पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से उनकी बहन नोरीन नियाजी और पत्नी बुशरा बीबी ने अडियाला जेल में मुलाकात की। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह मुलाकात हुई। नोरीन 9 महीने बाद इमरान से मिलीं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Hockey World Cup: भारत-पाकिस्तान में हाईवोल्टेज मुकाबला…दांव पर सेमीफाइनल की टिकट, जानें कहां देखें लाइव एक्शन

IND vs PAK: हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी वाली भारतीय हॉकी टीम एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप के अपने आखिरी लीग मैच में पाकिस्तान का सामना करेगी। भारत और पाकिस्तान की टीमें 19 अगस्त को एम्सटेलवीन में एक दूसरे के आमने-सामने होंगी। दोनों टीमों के बीच रोमांचक मुकाबला होने की उम्मीद है। इंग्लैंड के खिलाफ 2-4 से मिली हार के बाद भारत के लिए ये मुकाबला काफी अहम हो गया है। सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए भारत टीम को पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबला जीतना बहुत जरुरी है। भारत के दो मैचों में 3 अंक हैं और अगले दौर में पहुंचने के लिए उसे कम से कम पाकिस्तान के खिलाफ मैच ड्रॉ करना होगा।

वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के खाते में सिर्फ 1 अंक है, इसलिए उसे आगे बढ़ने की उम्मीद बनाए रखने के लिए हर हाल में जीत दर्ज करनी होगी। इंग्लैंड ने अपने दोनों मुकाबले जीतकर अगले दौर में जगह पक्की कर ली है।

कैसा रहा है भारत का टूर्नामेंट

भारत ने हॉकी वर्ल्ड कप में वेल्स के खिलाफ 3-1 की जीत से अभियान शुरू किया था। हालांकि, दूसरे मुकाबले में इंग्लैंड के खिलाफ टीम को 2-4 से हार झेलनी पड़ी। इस मैच में दूसरे हाफ के दौरान भारत ने तीन गोल गंवाए। टीम की डिफेंस में हुई गलतियां और पेनल्टी कॉर्नर का फायदा नहीं उठा पाना कोच क्रेग फुल्टन के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। भारत का पाकिस्तान के खिलाफ हालिया रिकॉर्ड काफी मजबूत रहा है। इस साल प्रो लीग के यूरोपियन लेग में भी भारत ने पाकिस्तान को लगातार दो मैचों में 7-1 और 4-3 से हराया था। पाकिस्तान ने आखिरी बार 2016 की चैंपियंस ट्रॉफी में भारत को शिकस्त दी थी।

पाकिस्तान का टूर्नामेंट

पाकिस्तान को टूर्नामेंट में अब तक इंग्लैंड के खिलाफ 1-4 से हार का सामना करना पड़ा, जबकि वेल्स के खिलाफ उसका मुकाबला 3-3 से बराबरी पर खत्म हुआ। ऐसे में टीम को भारत के खिलाफ जीत दर्ज करने के लिए अपने प्रदर्शन में काफी सुधार करना होगा। खासकर पेनल्टी कॉर्नर का सही इस्तेमाल और डिफेंस को मजबूत करना पाकिस्तान के लिए अहम होगा।

कब शुरू होगा मुकाबला

भारत और पाकिस्तान के बीच एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप का मुकाबला बुधवार, 19 अगस्त को खेला जाएगा। दोनों टीमें एम्सटेलवीन के वैगनर हॉकी स्टेडियम में आमने-सामने होंगी। ये मैच भारतीय समयानुसार शाम 6:30 बजे शुरू होगा।

कहां पर देखें भारत-पाक का मुकाबला

भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप मुकाबले का लाइव टेलीकास्ट स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क पर किया जाएगा। वहीं, जो दर्शक मैच ऑनलाइन देखना चाहते हैं, वे JioHotstar पर इसकी लाइव स्ट्रीमिंग देख सकते हैं।

Hockey World Cup: इंग्लैंड से हारने के बाद सेमीफाइनल में कैसे पहुंचेगी टीम इंडिया, पाकिस्तान के खिलाफ करो या मरो का मुकाबला

FIH मेन्स हॉकी वर्ल्ड कप 2026 में भारत को इंग्लैंड के खिलाफ 2-4 से हार का सामना करना पड़ा। एम्सटेलवीन के वैगनर स्टेडियम में खेले गए पूल D के इस मुकाबले में भारत ने शुरुआत में एक गोल गंवाया, लेकिन दूसरे क्वार्टर में दो गोल कर 2-1 की बढ़त बना ली। इसके बाद इंग्लैंड ने शानदार वापसी करते हुए दूसरे हाफ में तीन गोल दागे और मैच 4-2 से अपने नाम कर लिया। इंग्लैंड ने भारत को हराकर FIH मेन्स हॉकी वर्ल्ड कप 2026 में लगातार दूसरी जीत दर्ज की और छह अंकों के साथ सेमीफाइनल में जगह बना ली।

वहीं भारत के खाते में दो मैचों से तीन अंक हैं और टीम पूल D की अंक तालिका में दूसरे स्थान पर बनी हुई है। आइए जानते हैं भारत कैसे पहुंच सकता है सेमीफाइनल में

पाकिस्तान के खिलाफ मैच अहम

भारत के पास अभी भी FIH मेन्स हॉकी वर्ल्ड कप 2026 के सेमीफाइनल (दूसरे राउंड) में पहुंचने का मौका है। टीम का अगला मुकाबला 19 अगस्त को पाकिस्तान के खिलाफ होगा। अगर हरमनप्रीत सिंह की अगुवाई वाली भारतीय टीम इस मैच में जीत हासिल कर लेती है, तो वह टूर्नामेंट के अगले दौर के लिए क्वालिफाई कर जाएगी। पाकिस्तान के खिलाफ होने वाला मुकाबला भारत के लिए बेहद अहम है। अगर भारत जीत जाता है तो वह इंग्लैंड के साथ दूसरे राउंड में पहुंच जाएगा। वहीं पाकिस्तान से हार मिलने पर भारतीय टीम टूर्नामेंट से बाहर हो जाएगी। अगर मैच ड्रॉ रहता है, तो भी भारत के पास आगे बढ़ने का मौका रहेगा, लेकिन इसके लिए वेल्स को इंग्लैंड के खिलाफ जीत नहीं मिलनी चाहिए।

भारत-पाकिस्तान ड्रॉ हुआ तो कैसे होगा फैसला

अगर भारत और पाकिस्तान का मुकाबला ड्रॉ रहता है और वेल्स इंग्लैंड को हरा देता है, तो पूल D में भारत और वेल्स के बीच गोल डिफरेंस के आधार पर फैसला होगा। जिस टीम का गोल डिफरेंस बेहतर रहेगा, वह दूसरे स्थान पर रहकर अगले राउंड में पहुंचेगी। फिलहाल भारत का गोल डिफरेंस 0 है, जबकि वेल्स का -2 है। वेल्स को अपने पहले पूल D मुकाबले में भारत के खिलाफ 1-3 से हार मिली थी। अब भारत के अगले मुकाबले का नतीजा पूल D की तस्वीर तय करेगा।

पाकिस्तान ग्रुप में सबसे नीचे

अगर भारत पाकिस्तान से हार जाता है और वेल्स इंग्लैंड को नहीं हरा पाता, तो इंग्लैंड पूल में पहले स्थान पर रहेगा। वहीं पाकिस्तान चार अंकों के साथ दूसरे स्थान पर पहुंचकर FIH मेन्स हॉकी वर्ल्ड कप 2026 के दूसरे राउंड के लिए क्वालिफाई कर जाएगा। पाकिस्तान की टीम फिलहाल पूल D की अंक तालिका में सबसे निचले स्थान पर है। टीम ने अब तक दो मुकाबले खेले हैं, लेकिन उसे एक भी जीत नहीं मिली है। पहले मैच में पाकिस्तान को इंग्लैंड के हाथों 1-4 से हार मिली थी, जबकि वेल्स के खिलाफ उसका मुकाबला 3-3 की बराबरी पर खत्म हुआ। अब भारत के खिलाफ होने वाला मैच पाकिस्तान के लिए काफी अहम रहने वाला है।

IND vs PAK: ‘भारतीय टीम हमसे बेहतर..’ हॉकी वर्ल्ड कप के मुकाबले से पहले PAK कप्तान ने मानी हार? जानें क्या कहा

FIH वर्ल्ड कप में भारत और पाकिस्तान की टीमों का मुकाबला 19 अगस्त को होगा। भारत ने वेल्स को 3-1 से हराकर शानदार अंदाज में टूर्नामेंट की शुरुआत की है। वहीं, पाकिस्तान को अपने पहले मैच में इंग्लैंड के हाथों 1-4 से हार का सामना करना पड़ा। अब दोनों टीमें अगले मुकाबले में बेहतर प्रदर्शन के साथ मैदान पर उतरेंगी। भारत और पाकिस्तान को दोनों टीमों को एक ही ग्रुप में रखा गया है। वहीं मुकाबले से पहले पाकिस्तान हॉकी टीम के कप्तान अबू बकर महमूद ने बड़ा बयान दिया है। अबू बकर महमूद को उम्मीद है कि उनकी टीम वर्ल्ड कप में भारत के खिलाफ हार का सिलसिला खत्म करेगी।

भारत की रैंकिंग काफी अच्छा

इस बड़े मुकाबले से पहले पाकिस्तान के कप्तान अबू बकर महमूद ने PTI से कहा कि, “मुझे यह मानने में कोई झिझक नहीं है कि भारतीय टीम रैंकिंग में हमसे बहुत बेहतर है, लेकिन भारत-पाकिस्तान मैच में रैंकिंग मायने नहीं रखती। उस दिन का प्रदर्शन जरूरी है। ये मैच के दिन ही तय होगा कि कौन सी टीम अच्छा खेल रही है और जीतेगी।” पाकिस्तान ने आखिरी बार जून 2016 में लंदन में चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान भारत को 4-3 से हराया था। इसके बाद भारत ने हाल ही में FIH प्रो लीग के लंदन लेग में पाकिस्तान को 4-3 और 7-1 से मात दी थी। पाकिस्तान की हॉकी टीम आठ साल बाद वर्ल्ड कप में वापसी कर रही है।

भारत ने जीते लगातार 2 मेडल

महमूद ने कहा, “भारत इकलौती एशियाई टीम है, जिसने लगातार दो ओलंपिक में मेडल जीते हैं। यह एशियाई हॉकी के लिए अच्छी बात है और हम उन्हें वर्ल्ड कप के लिए शुभकामनाएं देते हैं। हालांकि, इस बार हम पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरे हैं।” महमूद को प्रो लीग में टीम के खराब प्रदर्शन के बाद कप्तानी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

कप्तान ने क्या कहा

वर्ल्ड कप के लिए टीम के रवाना होने से पहले पाकिस्तान के डच हेड कोच हरमन क्रुइस अपने घर लौट गए। इसके बाद गोलकीपिंग कोच बॉब-जोहान वेल्डहोफ ने टीम की जिम्मेदारी संभाली। कप्तान अबू बकर महमूद ने कहा कि, “कोच अदनान जाकिर, बॉब और सपोर्ट स्टाफ ने पिछले एक महीने में टीम के साथ काफी मेहनत की है, जिसका अच्छा असर खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर भी दिख रहा है। उन्होंने कहा कि टीम को हर मैच में बेहतर खेल दिखाना होगा। पाकिस्तान का मुख्य लक्ष्य एशियन गेम्स है, लेकिन वर्ल्ड कप में टीम की कोशिश अंतिम आठ में जगह बनाने की होगी।”

अब रैंकिंग में 12वें स्थान पर हैं हम

28 साल के महमूद ने कहा कि वर्ल्ड कप और ओलंपिक हॉकी के सबसे बड़े टूर्नामेंट हैं। अगर कोई टीम इन दोनों में नहीं खेलती है, तो वह विश्व हॉकी का हिस्सा नहीं मानी जाती। उन्होंने कहा, “यह हमारी किस्मत है या फिर हमारी कड़ी मेहनत का नतीजा कि हम आठ साल बाद एक बार फिर वर्ल्ड कप में खेलने जा रहे हैं।” कैप्टन ने कहा, “प्रो लीग शुरू होने से पहले हम दुनिया में 14वें नंबर पर थे, लेकिन अब 12वें स्थान पर पहुंच गए हैं। हमने प्रो लीग में दुनिया की टॉप टीमों के खिलाफ खेला, जिससे हमें काफी कुछ सीखने का मौका मिला। प्रो लीग के पहले दो चरणों के बाद हमने वर्ल्ड कप क्वालिफायर में हिस्सा लिया और फाइनल तक पहुंचकर वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई किया।”

उन्होंने आगे कहा, “हमने प्रो लीग के आखिरी दो चरणों में कुछ नई चीजों को आजमाया। हम प्रो लीग में खिताब जीतने के इरादे से नहीं, बल्कि सीखने के लिए गए थे, क्योंकि हमने काफी समय से दुनिया की बड़ी टीमों के खिलाफ अच्छे मुकाबले नहीं खेले थे। अब वर्ल्ड कप में हमारा प्रदर्शन बताएगा कि हमने वहां से कितना सीखा है।”

अमेरिकी सर्वे-10 में 9 पाकिस्तानी भारत को खतरा मानते हैं:भारतीयों के लिए रूस सबसे अहम पार्टनर, पाकिस्तानियों की पसंद चीन

अमेरिका के प्यू रिसर्च सेंटर के नए सर्वे में सामने आया है कि करीब 10 में से 9 पाकिस्तानी भारत को खतरा मानते हैं। वहीं भारतीय भी पाकिस्तान को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानता है। सर्वे में दावा किया गया है कि दोनों देशों के लोग अपने पड़ोसी के साथ अच्छे रिश्ते चाहते हैं। लेकिन दोनों के बीच भरोसे की कमी साफ नजर आ रही है। दूसरी ओर, भारत रूस को अपना सबसे बड़ा दोस्त मानता है। वहीं, पाकिस्तान ने चीन को अपना सबसे बड़ा सहयोगी देश माना है। 21% भारतीय मुस्लिमों ने पाकिस्तान पर पॉजिटिव राय रखी प्यू के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में पाकिस्तान को लेकर नेगेटिव सोच कोई नई बात नहीं है। हालांकि, भारत के अलग-अलग समुदायों में राय एक जैसी नहीं है। 21% भारतीय मुस्लिमों ने पाकिस्तान के बारे में पॉजिटिव राय जताई। हिंदुओं में यह आंकड़ा 6% रहा। खतरे के सवाल पर भी अंतर दिखा। 34% भारतीय मुस्लिमों ने पाकिस्तान को भारत का सबसे बड़ा भू-राजनीतिक खतरा बताया, जबकि हिंदुओं में यह आंकड़ा 57% था। दूसरी ओर, सर्वे में पाकिस्तानियों की भारत को लेकर यह नेगेटिव सोच पाकिस्तान के अलग-अलग साजाजिक समूहों में ज्यादा दिखाई दी है। पहलगाम हमले के बाद रिश्ते और बिगड़े सर्वे में भारत-पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव का भी जिक्र है। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने 26 लोगों की हत्या कर दी थी। इनमें ज्यादातर पर्यटक थे। इसके बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव बढ़ गया। इसके बाद भारत सरकार ने 1960 की सिंधु जल संधि को रोकने का फैसला किया। सिंधु जल संधि पाकिस्तान के लिए खास तौर पर अहम है। पाकिस्तान की खेती और पानी की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है। 58% भारतीयों की रूस को लेकर पॉजिटिव राय भारत में 36% लोगों ने रूस को अपना सबसे जरूरी सहयोगी बताया। अमेरिका को 16% लोगों ने चुना। वहीं, पाकिस्तान में 75% लोगों ने चीन को अपना बड़ा सहयोगी माना। 12% ने सऊदी अरब को देश का दोस्त बताया। रूस चीन अमेरिका भारत की विदेश नीति किसी एक देश के साथ नहीं जुड़ी सर्वे से भारत की विदेश नीति की एक और अहम बात सामने आती है। भारत में किसी एक विदेशी देश को लेकर पाकिस्तान जैसी एकतरफा मजबूत पसंद नहीं दिखती। भारत की विदेश नीति में कई बड़े देशों के साथ एक साथ रिश्ते बनाए रखने की कोशिश दिखाई देती है। भारत अमेरिका के साथ रक्षा, तकनीक और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ा रहा है। दूसरी तरफ रूस के साथ उसके पुराने रक्षा संबंध हैं। चीन के साथ सीमा पर तनाव और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा है, लेकिन बहुपक्षीय मंचों पर दोनों देश कई मुद्दों पर साथ भी काम करते हैं। इसे भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और मल्टी-अलाइनमेंट की नीति से जोड़कर देखा जा सकता है। मल्टी-अलाइनमेंट यानी कई देशों के साथ अपने हित के हिसाब से रिश्ते रखना। यानी भारत किसी एक बड़े देश के खेमे में पूरी तरह जाने के बजाय अलग-अलग देशों के साथ अपने हित के हिसाब से रिश्ते बनाए रखना चाहता है। ——————- पाकिस्तान से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… पाकिस्तानी PM की धमकी- पानी रोका तो मुंहतोड़ जवाब देंगे: कश्मीर पर रुख कभी नहीं बदलेंगे, मुनीर की लीडरशिप में हमने दुश्मन को हराया पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सिंधु जल समझौते को लेकर भारत को एक बार फिर धमकी दी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी पर कोई समझौता नहीं होगा। अगर इसे रोकने या कम करने की कोशिश हुई तो उसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…

Batwara 1947 Review: विभाजन के दर्द के बीच इंसानियत ने कायम कि मिसाल, सनी देओल की फिल्म ने जीता लोगों का दिल

Batwara 1947 Review: 1947 का विभाजन भारतीय इतिहास के सबसे दर्दनाक अध्यायों में से एक रहा है। इस विषय पर बनी फिल्मों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होती है कि कहानी कहीं धर्म, राजनीति और हिंसा के दायरे तक सीमित न रह जाए। Batwara 1947 की खासियत यह है कि राजकुमार संतोषी विभाजन की त्रासदी के बीच भी अपना ध्यान इंसान और उसके रिश्तों पर बनाए रखते हैं।

यह फिल्म सिर्फ भारत-पाकिस्तान की सीमा बनने की कहानी नहीं है, बल्कि उन लोगों की कहानी है जिनकी जिंदगी उस सीमा के साथ ही बदल गई। जो घर अपना था, वह अचानक पराया हो गया। जो पड़ोसी वर्षों से परिवार का हिस्सा था, वह धर्म के नाम पर अजनबी बना दिया गया। इसी माहौल में फिल्म इंसानियत का सबसे जरूरी सवाल सामने रखती है-क्या नफरत के दौर में भी इंसान दूसरे इंसान के लिए खड़ा हो सकता है?

सनी देओल के करियर का नया चैप्टर

सनी देओल के लिए ‘कमबैक’ शब्द पिछले कुछ समय से लगातार इस्तेमाल होता रहा है, लेकिन Batwara 1947 देखने के बाद लगता है कि यह सिर्फ वापसी नहीं, बल्कि उनके अभिनय के एक नए दौर की शुरुआत है। सिकंदर मिर्जा के किरदार में सनी देओल अपनी आवाज, व्यक्तित्व और गुस्से का प्रभावी इस्तेमाल करते हैं। हालांकि उनका सबसे असरदार अभिनय उन सीन्स में दिखाई देता है, जहां वह ऊंची आवाज में नहीं, बल्कि अपनी आंखों और भावनाओं से बात करते हैं।

सिकंदर का गुस्सा सिर्फ हिंसा के खिलाफ नहीं है, बल्कि उस इंसानियत के लिए है जो उसके आसपास खत्म होती जा रही है। एक बुजुर्ग हिंदू महिला को बचाने के लिए भीड़ के सामने खड़े होने वाला उसका किरदार फिल्म के मूल संदेश को मजबूती देता है।

शबाना आजमी का काम

शबाना आजमी की ‘माई’ इस कहानी का भावनात्मक केंद्र हैं। वह सिर्फ एक पीड़ित महिला नहीं हैं। उनके किरदार में आत्मसम्मान, जिद, हंसी, समझदारी और अपने घर से गहरा लगाव है। शबाना इस भूमिका को इतनी सहजता से निभाती हैं कि धीरे-धीरे माई किसी फिल्मी किरदार की बजाय अपने परिवार की किसी बुजुर्ग महिला जैसी महसूस होने लगती हैं। सनी देओल और शबाना आजमी के बीच का रिश्ता फिल्म का सबसे खूबसूरत हिस्सा है। धर्म की दीवारों के बीच पनपता मां-बेटे जैसा यह रिश्ता दिखाता है कि इंसानी रिश्ते किसी धर्म या सीमा के मोहताज नहीं होते।

करण देओल की एक्टिंग

सनी देओल के सामने स्क्रीन शेयर करना करण देओल के लिए आसान चुनौती नहीं थी। इसके बावजूद वह कई दृश्यों में आत्मविश्वास के साथ अपनी जगह बनाते हैं। उनकी संवाद अदायगी में विश्वास है और भावनात्मक तथा टकराव वाले दृश्यों में उनकी ऊर्जा दिखाई देती है। सबसे अच्छी बात यह है कि वह अपने पिता की शैली को दोहराने के बजाय अपने किरदार के लिए अलग अंदाज तलाशते हैं।

प्रीति जिंटा और अली फजल का प्रभाव

प्रीति जिंटा की वापसी फिल्म में सिर्फ नॉस्टैल्जिया नहीं जोड़ती, बल्कि कहानी के भावनात्मक पक्ष को मजबूती देती है। अली फजल अपने शांत और संवेदनशील अभिनय से फिल्म की तीव्रता के बीच कुछ सुकून भरे पल लेकर आते हैं। वहीं अभिमन्यु सिंह का याकूब पहलवान कट्टर सोच का प्रतिनिधित्व करता है, जहां इंसान की पहचान से पहले उसका धर्म देखा जाता है। पूरी सपोर्टिंग कास्ट मिलकर उस दौर के टूटते समाज की तस्वीर को विश्वसनीय बनाती है।

1947 का लाहौर दिखा पर्दे पर

फिल्म का प्रोडक्शन डिजाइन, सिनेमैटोग्राफी, कॉस्ट्यूम, लोकेशन और बैकग्राउंड स्कोर मिलकर 1947 के लाहौर का माहौल तैयार करते हैं। राजकुमार संतोषी मूल कहानी को सिर्फ मंचीय प्रस्तुति की तरह शूट नहीं करते, बल्कि उसे बड़े पर्दे के लिए विस्तार देते हैं। गलियां, घर, भीड़ और बदलता सामाजिक माहौल फिल्म को एक मजबूत सिनेमाई पहचान देते हैं। दूसरे हिस्से में कहानी का भावनात्मक असर और गहरा होता जाता है। क्लाइमैक्स के बारे में ज्यादा बताना उचित नहीं होगा, क्योंकि उसका प्रभाव तभी महसूस होगा जब दर्शक उसे खुद देखें।

Batwara 1947 की सबसे बड़ी सफलता यह है कि यह विभाजन की हिंसा दिखाते हुए भी नफरत को बढ़ावा नहीं देती। इसके बजाय यह इंसानियत को केंद्र में रखती है। फिल्म एक बेहद जरूरी सवाल छोड़ जाती है-जब पूरी दुनिया आपको किसी से नफरत करने की वजह दे रही हो, तब क्या आप फिर भी इंसानियत और प्रेम को चुन सकते हैं? सनी देओल और राजकुमार संतोषी की जोड़ी इस बार अपने गुस्से को ज्यादा संवेदनशील और परिपक्व रूप देती है। फिल्म का जवाब तलवार या हिंसा में नहीं, बल्कि रिश्तों और इंसानियत में मिलता है। हम फिल्म को 5 में से 4 स्टार रेटिंग देते हैं।