Tukaram Mundhe: ‘सिर्फ टी-शर्ट पहनना काफी नहीं’, प्रीति जिंटा की ‘टीम तुकाराम मुंढे’ वाली टी-शर्ट पर FDA चीफ ने किया रिएक्ट

Tukaram Mundhe: हाल ही में प्रीति जिंटा ने महाराष्ट्र के फूड-सेफ्टी अभियान की तारीफ करते हुए “टीम तुकाराम मुंढे” लिखी टी-शर्ट पहनी थी। अब FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने खुद प्रीति जिंटा के समर्थन पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया कि न तो उन्होंने प्रीति से बात की है और न ही वे उनसे मिले हैं, लेकिन वे आभारी हैं कि उन्होंने उनका जिक्र किया।

PTI से बात करते हुए अपने काम के लिए प्रीति जिंटा के समर्थन को स्वीकार करते हुए मुंढे ने कहा- “मैंने उनसे व्यक्तिगत रूप से बात नहीं की है और न ही हमारी फोन पर कोई बातचीत हुई है। लेकिन मैं आभारी हूं कि उन्होंने ‘टीम तुकाराम मुंढे’ का जिक्र किया।”उन्होंने आगे कहा- “मुझे लगता है कि समाज के हर स्तर और हर क्षेत्र में अच्छे इरादों वाले लोग मौजूद हैं। इन अच्छे कामों के लिए एक टीम बनाई जानी चाहिए। अच्छे विचारों, सोच और कार्यों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।”

हालांकि वे प्रीति के इस कदम की सराहना करते हैं, लेकिन उन्होंने यह भी कहा, “सिर्फ ‘टीम तुकाराम मुंढे’ लिखी टी-शर्ट पहनना ही काफी नहीं है। केवल नाम दिखाने से काम नहीं चलेगा। असल काम करना होगा और सही सोच अपनानी होगी।”

‘टीम तुकाराम मुंढे’ टी-शर्ट

इस महीने की शुरुआत में प्रीति ने नीली जींस और सफेद स्पोर्ट्स शूज के साथ ‘टीम मुंढे’ टी-शर्ट पहनी थी। उन्होंने एक स्लीक घड़ी के साथ अपना लुक पूरा किया और अपने बाल खुले रखे थे। उनका मेकअप मिनिमल था। लेकिन सादगी भरी स्टाइलिंग के बावजूद उनकी टी-शर्ट पर लिखा संदेश सबसे अलग और आकर्षक था।

कौन हैं तुकाराम मुंडे?

तुकाराम मुंढे अभी महाराष्ट्र के फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के कमिश्नर के तौर पर काम कर रहे हैं। यह विभाग राज्य में खाने-पीने की चीजों, दवाओं और कॉस्मेटिक्स को रेगुलेट करने और यह सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है कि सभी संस्थान सुरक्षा से जुड़े जरूरी नियमों का पालन करें। हाल ही में रेस्तरां और खाने-पीने के अन्य व्यवसायों के निरीक्षण के बाद मुंढे मुंबई में फ़ूड-सेफ्टी से जुड़ी चर्चाओं के केंद्र में रहे हैं।

New CBFC Film Certification Rules: ड्रग्स, हिंसा या समाज-विरोधी कामों को नहीं देना होगा बढ़ावा, जानें CBFC के फिल्म सर्टिफिकेशन के नए नियम

New CBFC Film Certification Rules: सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने फिल्म सर्टिफिकेशन के लिए नई गाइडलाइंस की घोषणा की है। हाल ही में, प्रीति ज़िंटा, सुनील शेट्टी, पंकज त्रिपाठी और रूपाली गांगुली जैसे कलाकार सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) से जुड़े हैं। अब फिल्मों को मंज़ूरी देने के लिए नई गाइडलाइंस लागू की गई हैं।

नई गाइडलाइंस के तहत ज्यादा सख्त नियम लागू किए गए हैं। ड्रग्स, हिंसा, यौन हिंसा, बच्चों के साथ दुर्व्यवहार और अन्य संवेदनशील विषयों से निपटने में ज्यादा सावधानी बरती जाएगी। गाइडलाइंस में किए गए ये बदलाव दिसंबर 1991 में लागू हुए पुराने नियमों की जगह लेंगे।

अपडेट के अनुसार एक बड़ा बदलाव यह है कि ड्रग्स के इस्तेमाल या गैर-कानूनी बिक्री को दिखाने वाले सीन्स के लिए एक अनिवार्य चेतावनी दिखाना जरूरी होगा। चेतावनी में लिखा होगा- “गैर-कानूनी नशीले पदार्थ सेहत को बर्बाद करते हैं और जेल की सजा दिलाते हैं। ड्रग्स को ना कहें।”

एक और बदलाव यह है कि शराब पीने, ड्रग्स की लत या तंबाकू के सेवन को बढ़ावा देने वाले सीन्स नहीं दिखाए जाएंगे। CBFC इस बात का भी ध्यान रखेगा कि समाज-विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा न दिया जाए। छेड़छाड़ के सीन्स से बचना चाहिए और बच्चों के साथ किसी भी तरह की हिंसा नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही जानवरों के साथ बेवजह क्रूरता दिखाने से भी बचना चाहिए। फिल्में भारत की संप्रभुता और अखंडता पर सवाल नहीं उठा सकतीं और न ही देश की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं।

इन गाइडलाइंस में ऐसे कंटेंट पर रोक लगाई गई है जो नस्लीय, धार्मिक या अन्य समुदायों का अपमान करते हों, साथ ही ऐसी सामग्री पर भी जो सांप्रदायिकता, अंधविश्वास, विज्ञान-विरोधी मान्यताओं या राष्ट्र-विरोधी विचारों को बढ़ावा देती हो।

भारत सरकार ने हाल ही में 18 सदस्यों के साथ सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) का पुनर्गठन किया है। नए बोर्ड में अभिनेता प्रीति जिंटा, सुनील शेट्टी, पंकज त्रिपाठी और रूपाली गांगुली जैसे नाम शामिल हैं। फिल्म निर्माता प्रियदर्शन और संगीतकार रिकी केज भी इस 18-सदस्यीय बोर्ड का हिस्सा हैं।

CBFC के पुनर्गठन के बारे में बात करते हुए I&B मंत्रालय के एक अधिकारी ने NDTV को बताया- “पुनर्गठन का काम कुछ समय से लंबित था। पिछले बोर्ड के कुछ सदस्य अब सक्रिय नहीं थे और कुछ अन्य का कार्यकाल समाप्त हो गया था।”

CBFC क्या करता है?

CBFC भारत में सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए फिल्मों को प्रमाणित करने के लिए जिम्मेदार है। यह बोर्ड सिनेमैटोग्राफ एक्ट और लागू नियमों के तहत निर्धारित सर्टिफिकेशन सिस्टम के माध्यम से काम करता है।

नीम करौली बाबा पर बनी मूवी हनुमान अंश देखने के बाद प्रीति जिंटा को कैसा फील हुआ?

‘हनुमान अंश’ की चर्चा अब आम दर्शकों से निकलकर बॉलीवुड सितारों तक पहुंच गई है। फिल्म देखने के बाद अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने इसकी जमकर तारीफ की। थिएटर में फिल्म देखते हुए उन्होंने अपनी एक झलक भी सोशल मीडिया पर शेयर की और पोस्ट के साथ ‘सिया राम’ और ‘Wow’ लिखा।

इसके बाद प्रीति ने एक और पोस्ट करते हुए अपने फैंस से फिल्म को सिनेमाघरों में देखने की अपील की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इसे मिस नहीं करना चाहिए।

शुरुआत में धीमी थी रफ्तार

‘हनुमान अंश’ 7 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। रिलीज के शुरुआती दो हफ्तों में फिल्म की कमाई कुछ खास नहीं रही। ऐसा लग रहा था कि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ज्यादा लंबा सफर तय नहीं कर पाएगी। लेकिन तीसरे हफ्ते में कहानी ने अचानक करवट ली। नीम करोली बाबा के अनुयायियों के बीच फिल्म को लेकर चर्चा बढ़ी और पॉजिटिव वर्ड ऑफ माउथ ने दर्शकों को थिएटर तक पहुंचाना शुरू कर दिया।

अब 170 करोड़ के पार पहुंची फिल्म

धीरे-धीरे बढ़ती लोकप्रियता का असर फिल्म की कमाई पर भी नजर आया। रिपोर्ट के मुताबिक, ‘हनुमान अंश’ भारत में 170 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार कर चुकी है। फिल्म की इस अप्रत्याशित सफलता ने इसे 2026 की सरप्राइज हिट्स में शामिल कर दिया है।

प्रीति से पहले वरुण धवन भी कर चुके हैं तारीफ

प्रीति जिंटा पहली बॉलीवुड हस्ती नहीं हैं, जिन्होंने फिल्म को पसंद किया है। इससे पहले वरुण धवन भी अपनी मां के साथ थिएटर में ‘हनुमान अंश’ देखने पहुंचे थे। फिल्म देखने के बाद वरुण ने लोगों से इसे थिएटर में देखने की अपील की थी। उन्होंने इसे अपने लिए एक बेहद खास और आध्यात्मिक अनुभव बताया था। वरुण ने यह भी बताया था कि बचपन से ही उनका भगवान हनुमान से एक खास जुड़ाव रहा है और इसी वजह से फिल्म ने उन्हें काफी प्रभावित किया।

आदित्य धर ने भी बढ़ाया फिल्म का हौसला

फिल्म की तारीफ करने वालों में निर्देशक आदित्य धर का नाम भी शामिल है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए ‘हनुमान अंश’ के प्रति अपना समर्थन जाहिर किया। लगातार मिल रहे ऐसे रिएक्शन से फिल्म को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी और बढ़ती दिखाई दे रही है।

नीम करोली बाबा के किरदार में दिखे शोभिनव सत्य

‘हनुमान अंश’ का निर्देशन और निर्माण डॉ. विशाल चतुर्वेदी ने किया है। फिल्म में शोभिनव सत्य ने नीम करोली बाबा की भूमिका निभाई है। यह उनका बॉलीवुड डेब्यू भी बताया गया है। फिल्म में चंदन आनंद, निखिल दुबे, उदयसिंह राजपूत, पूर्णिमा तिवारी और मनीष चौधरी भी अहम भूमिकाओं में नजर आते हैं।

यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ से भी हुई टीम की मुलाकात

फिल्म की सफलता के बीच इसकी टीम ने लखनऊ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात की। इस दौरान टीम ने उन्हें फिल्म के कुछ महत्वपूर्ण अंश दिखाए। इन दृश्यों में गुरु गोरखनाथ जी से जुड़े पवित्र मंत्रों और नाथ परंपरा से संबंधित प्रसंग शामिल थे।

एक फिल्म, जिसने धीरे-धीरे बना लिया अपना दर्शक वर्ग

‘हनुमान अंश’ की कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू यही है कि फिल्म ने शुरुआत में भले ही धीमी रफ्तार पकड़ी हो, लेकिन बाद में दर्शकों की जुबानी चर्चा ने इसकी तस्वीर बदल दी। अब प्रीति जिंटा जैसे सितारों की तारीफ और बॉक्स ऑफिस पर लगातार मजबूत प्रदर्शन ने फिल्म को लेकर उत्सुकता और बढ़ा दी है।

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Preity Zinta: मुंबई में ‘टीम तुकाराम मुंडे’ वाली टी-शर्ट में दिखीं प्रीति जिंटा, फैंस हुए एक्साइटेड

Preity Zinta: मुंबई में प्रीति जिंटा का एक आम सा आउटिंग तब चर्चा का विषय बन गया जब उन्हें “Team Tukaram Mundhe” लिखी काली टी-शर्ट पहने देखा गया। एक्ट्रेस का लुक कैज़ुअल था, लेकिन उनकी टी-शर्ट पर लिखा नाम तुरंत लोगों का ध्यान खींचने लगा, खासकर ऐसे समय में जब महाराष्ट्र फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के कमिश्नर तुकाराम मुंडे अपने फ़ूड-सेफ़्टी अभियान को लेकर चर्चा में हैं।

यह घटना तब हुई है जब प्रीति अपनी आने वाली फ़िल्म ‘वाइब’ (Vibe) का प्रमोशन कर रही हैं। प्रीति ज़िंटा ने पहनी ‘Team Tukaram Mundhe’ वाली टी-शर्ट है। बाहर जाने के लिए, प्रीति ने काली टी-शर्ट को नीली जींस और सफ़ेद स्पोर्ट्स शूज़ के साथ पहना। उन्होंने एक स्लीक घड़ी के साथ अपना लुक पूरा किया और बालों को खुला रखा।

उनका मेकअप भी बहुत हल्का था – साफ़ आईलाइनर, नैचुरल बेस, गुलाबी गाल और हल्का लिप कलर। लेकिन सादगी भरे स्टाइल के बावजूद, उनकी टी-शर्ट पर लिखा मैसेज सबसे अलग और खास था। “Team Tukaram Mundhe” शब्द महाराष्ट्र FDA कमिश्नर की ओर इशारा करते हैं, जिनकी हालिया जांच और फ़ूड बिज़नेस के ख़िलाफ़ की गई कार्रवाई ने मुंबई में काफ़ी ध्यान खींचा है। प्रीति ने इस आउटफ़िट के साथ अपनी पसंद के बारे में कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया। हालांकि, टी-शर्ट में उनके दिखने से मुंडे और उनके चल रहे काम के बारे में लोगों में उत्सुकता ज़रूर पैदा हुई है।

कौन हैं तुकाराम मुंडे?

तुकाराम मुंडे अभी महाराष्ट्र के फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के कमिश्नर के तौर पर काम कर रहे हैं। यह विभाग राज्य में खाने-पीने की चीज़ों, दवाओं और कॉस्मेटिक्स को रेगुलेट करने और यह पक्का करने के लिए ज़िम्मेदार है कि बिज़नेस से जुड़े संस्थान सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन करें। हाल ही में रेस्टोरेंट और खाने-पीने के दूसरे बिज़नेस की जांच के बाद मुंडे मुंबई में फ़ूड-सेफ़्टी से जुड़ी चर्चाओं के केंद्र में रहे हैं।

तुकाराम मुंडे के फ़ूड-सेफ़्टी अभियान पर बॉलीवुड का ध्यान

FDA की हालिया कार्रवाई के बीच मुंडे का ज़िक्र करने वाली प्रीति पहली बॉलीवुड हस्ती नहीं हैं। इससे पहले ट्विंकल खन्ना ने अपने ‘मिसेज़ फ़नीबोन्स’ कॉलम में फ़ूड-सेफ़्टी अभियान का ज़िक्र किया था और इस विषय पर अपने खास अंदाज़ में मज़ाकिया टिप्पणी की थी। सलमान खान ने भी मुंडे का ज़िक्र किया है। अभिनेता ने मुंबई में अपने एक दोस्त के कैफ़े को सही स्टैंडर्ड बनाए रखने के बारे में मज़ाक-मज़ाक में चेतावनी देते हुए FDA कमिश्नर का ज़िक्र किया था। अब, प्रीति की “टीम तुकाराम मुंडे” वाली टी-शर्ट ने एक बार फिर उनके नाम को चर्चा में ला दिया है।

चार किरदार, एक अनोखी ‘वाइब’ और ढेर सारे सवाल, ‘वाइब’ का नया पोस्टर किया जारी, कल रिलीज होगा टीजर

अमेजन एमजीएम स्टूडियोज ने आज अपनी आने वाली थिएटर फिल्म ‘वाइब’ का टीजर पोस्टर जारी किया है। यह पोस्टर कुणाल खेमू की इस हाई-स्टेक्स एक्शन कॉमेडी की एक और झलक दिखाता है और साथ ही कई सवाल भी खड़े करता है कि आखिर इस अनोखी चौकड़ी के साथ क्या होने वाला है।

नए पोस्टर में प्रीति जिंटा एक दमदार बॉस-लेडी अवतार में नजर आ रही हैं, वहीं इसके बिल्कुल उलट कुणाल खेमू, स्पर्श श्रीवास्तव और वंशिका धीर काफी परेशान दिखाई दे रहे हैं। इससे इशारा मिल रहा है कि आखिर वे जिस मुसीबत में फंसे हैं, वह पूरी तरह से उनके हाथ से निकल चुकी है।

‘वाइब’ की कहानी दो ऐसे जिगरी दोस्तों के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनकी सीधी-सादी जिंदगी अचानक एक अनजान और हाई-एनर्जी एडवेंचर में बदल जाती है। यह सफर उनकी जान बचाने की काबिलियत और उनकी दोस्ती, दोनों की कड़ी परीक्षा लेता है।

कुणाल खेमू ने फिल्म को लिखा और डायरेक्ट किया है। ‘वाइब’ को कुणाल खेमू और चिराग निहलानी ने ड्रोंगो फिल्म्स के बैनर तले प्रोड्यूस किया है। फिल्म में कुणाल खेमू के साथ प्रीति जी जिंटा, स्पर्श श्रीवास्तव और डेब्यू कर रहीं वंशिका धीर लीड रोल में हैं। कल टीजर रिलीज होने वाला है और इसके साथ ही फिल्म दर्शकों को एक हाई-एनर्जी एडवेंचर पर ले जाने के लिए तैयार है। अमेजन एमजीएम स्टूडियोज की फिल्म ‘वाइब’ 18 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

अमेजन एमजीएम स्टूडियोज के बारे में

अमेजन एमजीएम स्टूडियोज एक प्रमुख एंटरटेनमेंट कंपनी है, जो फिल्मों और टीवी कंटेंट के निर्माण और दुनियाभर में डिस्ट्रीब्यूशन पर फोकस करती है। इसकी ओरिजिनल सीरीज प्राइम वीडियो पर रिलीज होती हैं, जिसे दुनियाभर के 240 से ज्यादा देशों और क्षेत्रों में सैकड़ों तरह के कंपैटिबल डिवाइस पर देखा जा सकता है। अमेजन एमजीएम स्टूडियोज थिएटर रिलीज और खास तौर पर प्राइम वीडियो के लिए ओरिजिनल फिल्मों का निर्माण और अधिग्रहण भी करता है। इसके अलावा, अमेजन एमजीएम स्टूडियोज प्रीमियम पे टेलीविजन नेटवर्क एमजीएम+ के लिए भी कंटेंट तैयार करता है।

ड्रोंगो फिल्म्स के बारे में

ड्रोंगो फिल्म्स एक प्रोडक्शन बैनर है, जिसे एक्टर-डायरेक्टर-राइटर कुणाल खेमू और प्रोड्यूसर चिराग निहलानी ने मिलकर शुरू किया है। यह दोनों की ईमानदार और दिलचस्प कहानियां पेश करने के जुनून से बना है। क्रिएटिविटी और बिजनेस के बीच संतुलन बनाने के विजन के साथ यह कंपनी ऐसी कहानियों को सपोर्ट करने पर फोकस करती है, जो असली, दिलचस्प और सोच-समझकर तैयार की गई हों। क्रिएटिविटी के साथ-साथ मजबूत और साफ तरीके से काम करने पर फोकस करते हुए ड्रोंगो फिल्म्स ऐसी नई और दिल को छू लेने वाली कहानियों को पर्दे पर लाने के लिए प्रतिबद्ध है, जो लंबे समय तक दर्शकों के दिलों में अपनी छाप छोड़ें।

34वां Birthday और 34 बच्चियां-प्रीति ज़िंटा का दिल छू लेने वाला फैसला |Preity Zinta Adopted 34Girls

34वां Birthday और 34 बच्चियां-प्रीति ज़िंटा का दिल छू लेने वाला फैसला |Preity Zinta  Adopted 34Girls

अगर अपने Birthday पर खुद को महंगी कार देने का मौका हो… तो क्या आप वो छोड़कर 34 बच्चियों की जिम्मेदारी उठाएंगे?
साल था 2009।
Preity Zinta अपने 34वें birthday पर खुद को एक महंगी car gift करने वाली थीं। लेकिन एक बच्ची की कहानी ने उनका पूरा फैसला बदल दिया।
उन्होंने ऋषिकेश के Mother Miracle Orphanage की 34 बच्चियों की पढ़ाई, खाना, कपड़े और परवरिश की जिम्मेदारी लेने का फैसला किया।
और ये सिर्फ एक birthday decision नहीं था। Preity इससे पहले भी महिलाओं और बच्चों से जुड़े कई causes के लिए काम करती रही हैं।
और शायद यही वजह है कि आज भी उनकी ये कहानी याद की जाती है।
क्या आपको लगता है कि किसी की जिंदगी बदलने के लिए सिर्फ पैसे नहीं, बल्कि जिम्मेदारी लेना ज्यादा मायने रखता है?

@realpz

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Batwara 1947 Review: विभाजन के दर्द के बीच इंसानियत ने कायम कि मिसाल, सनी देओल की फिल्म ने जीता लोगों का दिल

Batwara 1947 Review: 1947 का विभाजन भारतीय इतिहास के सबसे दर्दनाक अध्यायों में से एक रहा है। इस विषय पर बनी फिल्मों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होती है कि कहानी कहीं धर्म, राजनीति और हिंसा के दायरे तक सीमित न रह जाए। Batwara 1947 की खासियत यह है कि राजकुमार संतोषी विभाजन की त्रासदी के बीच भी अपना ध्यान इंसान और उसके रिश्तों पर बनाए रखते हैं।

यह फिल्म सिर्फ भारत-पाकिस्तान की सीमा बनने की कहानी नहीं है, बल्कि उन लोगों की कहानी है जिनकी जिंदगी उस सीमा के साथ ही बदल गई। जो घर अपना था, वह अचानक पराया हो गया। जो पड़ोसी वर्षों से परिवार का हिस्सा था, वह धर्म के नाम पर अजनबी बना दिया गया। इसी माहौल में फिल्म इंसानियत का सबसे जरूरी सवाल सामने रखती है-क्या नफरत के दौर में भी इंसान दूसरे इंसान के लिए खड़ा हो सकता है?

सनी देओल के करियर का नया चैप्टर

सनी देओल के लिए ‘कमबैक’ शब्द पिछले कुछ समय से लगातार इस्तेमाल होता रहा है, लेकिन Batwara 1947 देखने के बाद लगता है कि यह सिर्फ वापसी नहीं, बल्कि उनके अभिनय के एक नए दौर की शुरुआत है। सिकंदर मिर्जा के किरदार में सनी देओल अपनी आवाज, व्यक्तित्व और गुस्से का प्रभावी इस्तेमाल करते हैं। हालांकि उनका सबसे असरदार अभिनय उन सीन्स में दिखाई देता है, जहां वह ऊंची आवाज में नहीं, बल्कि अपनी आंखों और भावनाओं से बात करते हैं।

सिकंदर का गुस्सा सिर्फ हिंसा के खिलाफ नहीं है, बल्कि उस इंसानियत के लिए है जो उसके आसपास खत्म होती जा रही है। एक बुजुर्ग हिंदू महिला को बचाने के लिए भीड़ के सामने खड़े होने वाला उसका किरदार फिल्म के मूल संदेश को मजबूती देता है।

शबाना आजमी का काम

शबाना आजमी की ‘माई’ इस कहानी का भावनात्मक केंद्र हैं। वह सिर्फ एक पीड़ित महिला नहीं हैं। उनके किरदार में आत्मसम्मान, जिद, हंसी, समझदारी और अपने घर से गहरा लगाव है। शबाना इस भूमिका को इतनी सहजता से निभाती हैं कि धीरे-धीरे माई किसी फिल्मी किरदार की बजाय अपने परिवार की किसी बुजुर्ग महिला जैसी महसूस होने लगती हैं। सनी देओल और शबाना आजमी के बीच का रिश्ता फिल्म का सबसे खूबसूरत हिस्सा है। धर्म की दीवारों के बीच पनपता मां-बेटे जैसा यह रिश्ता दिखाता है कि इंसानी रिश्ते किसी धर्म या सीमा के मोहताज नहीं होते।

करण देओल की एक्टिंग

सनी देओल के सामने स्क्रीन शेयर करना करण देओल के लिए आसान चुनौती नहीं थी। इसके बावजूद वह कई दृश्यों में आत्मविश्वास के साथ अपनी जगह बनाते हैं। उनकी संवाद अदायगी में विश्वास है और भावनात्मक तथा टकराव वाले दृश्यों में उनकी ऊर्जा दिखाई देती है। सबसे अच्छी बात यह है कि वह अपने पिता की शैली को दोहराने के बजाय अपने किरदार के लिए अलग अंदाज तलाशते हैं।

प्रीति जिंटा और अली फजल का प्रभाव

प्रीति जिंटा की वापसी फिल्म में सिर्फ नॉस्टैल्जिया नहीं जोड़ती, बल्कि कहानी के भावनात्मक पक्ष को मजबूती देती है। अली फजल अपने शांत और संवेदनशील अभिनय से फिल्म की तीव्रता के बीच कुछ सुकून भरे पल लेकर आते हैं। वहीं अभिमन्यु सिंह का याकूब पहलवान कट्टर सोच का प्रतिनिधित्व करता है, जहां इंसान की पहचान से पहले उसका धर्म देखा जाता है। पूरी सपोर्टिंग कास्ट मिलकर उस दौर के टूटते समाज की तस्वीर को विश्वसनीय बनाती है।

1947 का लाहौर दिखा पर्दे पर

फिल्म का प्रोडक्शन डिजाइन, सिनेमैटोग्राफी, कॉस्ट्यूम, लोकेशन और बैकग्राउंड स्कोर मिलकर 1947 के लाहौर का माहौल तैयार करते हैं। राजकुमार संतोषी मूल कहानी को सिर्फ मंचीय प्रस्तुति की तरह शूट नहीं करते, बल्कि उसे बड़े पर्दे के लिए विस्तार देते हैं। गलियां, घर, भीड़ और बदलता सामाजिक माहौल फिल्म को एक मजबूत सिनेमाई पहचान देते हैं। दूसरे हिस्से में कहानी का भावनात्मक असर और गहरा होता जाता है। क्लाइमैक्स के बारे में ज्यादा बताना उचित नहीं होगा, क्योंकि उसका प्रभाव तभी महसूस होगा जब दर्शक उसे खुद देखें।

Batwara 1947 की सबसे बड़ी सफलता यह है कि यह विभाजन की हिंसा दिखाते हुए भी नफरत को बढ़ावा नहीं देती। इसके बजाय यह इंसानियत को केंद्र में रखती है। फिल्म एक बेहद जरूरी सवाल छोड़ जाती है-जब पूरी दुनिया आपको किसी से नफरत करने की वजह दे रही हो, तब क्या आप फिर भी इंसानियत और प्रेम को चुन सकते हैं? सनी देओल और राजकुमार संतोषी की जोड़ी इस बार अपने गुस्से को ज्यादा संवेदनशील और परिपक्व रूप देती है। फिल्म का जवाब तलवार या हिंसा में नहीं, बल्कि रिश्तों और इंसानियत में मिलता है। हम फिल्म को 5 में से 4 स्टार रेटिंग देते हैं।