पैरों से लिखकर 70 बच्चों को मुफ्त पढ़ाते हैं ये शिक्षक | Teacher Without Hands | Teachers Day

पैरों से लिखकर 70 बच्चों को मुफ्त पढ़ाते हैं ये शिक्षक | Teacher Without Hands | Teachers Day

#जिनके खुद दोनों हाथ नहीं हैं, वही आज 70 जरूरतमंद बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं।
जगन्नाथ महारा ने अपनी मुश्किलों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। पैरों से लिखकर पढ़ाई पूरी की और आज उन बच्चों को मुफ्त शिक्षा दे रहे हैं, जिन्हें शायद हालात पढ़ने का मौका भी न दें।
उनकी पाठशाला सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि उम्मीद और बदलाव की मिसाल है।
एक शिक्षक, जो खुद संघर्ष से निकले और अब दूसरों के अंधेरे में शिक्षा की रोशनी जला रहे हैं।
आइए, जगन्नाथ सर की इस मुहिम में उनका साथ दें और इन बच्चों की पढ़ाई जारी रखने में मदद करें।

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4 बार Gold जीतकर भी खिलाड़ी सब्ज़ी बेचने को मजबूर |Amardeep Kumar | Throwball Player |Gold Medalist

4 बार Gold जीतकर भी खिलाड़ी सब्ज़ी बेचने को मजबूर |Amardeep Kumar |  Throwball Player |Gold Medalist

देश के लिए International level पर 4 Gold Medal जीत चुके झारखंड के Amardeep Kumar आज अपनी practice और घर का खर्च चलाने के लिए कभी Cab चलाते हैं, तो कभी परिवार के साथ सब्ज़ियाँ बेचते हैं। रात में Cab चलाकर सुबह Practice करने वाले Amardeep की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि उस संघर्ष की है जो कई प्रतिभाशाली athletes को अपने सपने के साथ करना पड़ता है।
अगर आप Amardeep के इस संघर्ष को आसान बनाने में किसी भी तरह मदद करना चाहते हैं, तो इस Email ID पर संपर्क करें: Ad22784amar@gmail.com

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ट्रेन में गाने से लेकर Hanuman Ansh तक दृष्टिहीन गायक Suneel Lodhi का शानदार सफर | Maine Tere Hi

ट्रेन में गाने से लेकर Hanuman Ansh तक दृष्टिहीन गायक Suneel Lodhi का शानदार सफर | Maine Tere Hi

मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड के एक छोटे से गाँव में जन्मे 25 साल के सुनील लोधी जन्म से दृष्टिहीन हैं। लेकिन जो उन्हें आँखों से नहीं मिला, वो उन्हें अपनी आवाज़ में मिल गया।
गाँव की महफ़िलों और धार्मिक कार्यक्रमों से लेकर लोकल ट्रेनों तक, सुनील भजन और बुंदेली लोकगीत गाते रहे।
फिर सोशल मीडिया पर उनके गानों ने लाखों लोगों का दिल जीत लिया। और इसी दौरान फिल्ममेकर Pankaj VRK की नजर उन पर पड़ी।
आज सुनील की आवाज़ ‘हनुमान अंश’ में “Maine Tere Hi Bharose” गाने में सुनाई दे रही है। लोकल ट्रेन से बड़े पर्दे तक का ये सफर सिर्फ एक गायक की कहानी नहीं ये कहानी है उम्मीद, हुनर और कभी हार न मानने की।

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100 बच्चों को मुफ्त पढ़ा रहे 23 साल के कृष्णा | Aapka Krishna | Free Education | Rajasthan

100 बच्चों को मुफ्त पढ़ा रहे 23 साल के कृष्णा | Aapka Krishna | Free Education | Rajasthan

कृष्णा ने बचपन से ही एयरफोर्स में जाकर देश की सेवा का सपना देखा था, लेकिन एक्सीडेंट के बाद ऐसा हो ना सका। लेकिन 23 की उम्र में उन्होंने हार मानने के बजाय देश सेवा का एक नया रास्ता चुन लिया।

आज राजस्थान का ये लड़का अपने गाँव के 100 बच्चों को मुफ्त पढ़ा रहा है, ताकि जिन हाथों में कभी मजबूरी ने काम थमाया था, उनमें कल किताबें हों और अपने सपने चुनने की आज़ादी हो।

कृष्णा का सफर याद दिलाता है कि देश सेवा सिर्फ वर्दी पहनकर नहीं होती। कभी-कभी एक बच्चे को पढ़ने का मौका देना भी देश का भविष्य संवारना होता है। :heart:

आप भी कृष्णा से पढ़ने वाले एक बच्चे की मदद करें: ₹130 = 1 Stationery Kit & 1 Meal
Donation Now! UPI ID- 917300369081@cnrb
Bank Details:
Account Holder Name: Kanheya Lal
Account Number: 4331119000551
Bank Name: Canara Bank
IFSC Code: CNRB0004331

@aapka_krishnaaa

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August 2026: इन गुमनाम नायकों को आपने दी पहचान

August 2026: इन गुमनाम नायकों को आपने दी पहचान

एक 23 साल का युवा, जिसने अकेले अपने कस्बे और शहर की सफाई करने का फैसला किया था, आज पटवाई की तस्वीर ही बदल चुका है!

हाथों में सफाई का सामान लेकर आकाश यादव अपने दोस्तों के साथ निकल पड़ते हैं और घंटों सार्वजनिक जगहों की सफाई करते हैं। उन्होंने कई गंगा घाट साफ किए, एक टन कचरा निकला और हज़ार पेड़ भी लगाए हैं।

जिस काम को कभी लोग बेकार समझते थे, आज उसी काम के लिए उनकी हर तरफ तारीफ हो रही है। उन्होंने लोगों की सोच भी बदल दी है।
https://www.facebook.com/share/v/195D2y8n6D/

The Better India Hindi ने आपको आकाश यादव की कहानी से परिचित कराया। जिसकी वजह से आज उनकी और उनकी टीम की पहल को देशभर में पहचान मिल रही है। लोग उनसे जुड़ रहे हैं, उनके काम के बारे में जान रहे हैं, उन्हें नए सुझाव दे रहे हैं और इस शानदार पहल के लिए उनकी सराहना कर रहे हैं।

हमारा वीडियो आने के बाद, आकाश और उनकी टीम को The Times of India द्वारा आयोजित UP Creators Summit & Awards 2026 में Civic Awareness Creator of the Year कैटेगरी के लिए नॉमिनेट किया गया।

हाल ही में उन्हें प्रधानमंत्री ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में सराहा, जिससे देश के युवाओं को भी कुछ अच्छा करने की प्रेरणा मिली है।


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सांवले रंग की वजह से हुआ मज़ाक, फिर बनी Award-Winning Actress | Nimisha Sajayan | Babita Singh

सांवले रंग की वजह से हुआ मज़ाक, फिर बनी Award-Winning Actress | Nimisha Sajayan | Babita Singh

“तुम हीरोइन जैसी नहीं दिखती” निमिषा साजयन ने ये बात कई बार सुनी थी। उनके सांवले रंग और लुक्स का मज़ाक उड़ाया गया। लेकिन उन्होंने खुद को बदलने के बजाय अपना रास्ता बदल दिया। 19 साल की उम्र में Thondimuthalum Driksakshiyum से शुरुआत की। फिर ऐसे किरदार चुने जिन्होंने खूबसूरती के पुराने पैमानों को चुनौती दी। Chola में उनकी परफॉर्मेंस ने उन्हें Kerala State Award for Best Actress दिलाया।
और अब Babita Singh Reporting में बबीता बनकर वो और कई साँचे तोड़ रही है, क्योंकि निमिषा कभी Beauty Standards में फिट होने नहीं निकलीं थी, वो Beauty Standards तोड़ने निकली थीं।

@nimisha_sajayan

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सांवले रंग की वजह से हुआ मज़ाक, फिर बनी Award-Winning Actress | Nimisha Sajayan | Babita Singh Reporting | Chola
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लागत जीरो मुनाफा 100%, ऐसे 6 बिजनेस आईडिया जो कभी फेल नहीं होते!

आज के समय में अपना काम शुरू करने के लिए बड़ी दुकान, हैवी इन्वेस्टमेंट या महंगे सेटअप की जरूरत नहीं है। यदि आपके पास कोई हुनर है और आप लोगों की जरूरत को समझकर काम शुरू करते हैं, तो छोटे लावेल से भी अच्छी कमाई की जा सकती है। शुरुआत में खर्च कम होने की वजह से नुकसान का रिस्क भी ज्यादा नहीं रहता और काम चलने पर इसे धीरे-धीरे बड़ा किया जा सकता है।

किसी भी बिजनेस को शुरू करने से पहले यह समझना जरूरी है कि आपके आसपास के लोगों को किस चीज की सबसे ज्यादा जरूरत है। इसके लिए आप अपने आसपास के 10-15 लोगों से बात करके उनकी पसंद, जरूरत और बजट के बारे में जान सकते हैं। अपनी पसंद और हुनर के हिसाब से सही बिजनेस चुनकर आप धीरे-धीरे कस्टमर बना सकते हैं।

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1. पौधों से कमाई

पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का शौक को छोटे बिजनेस में बदला जा सकता है। इसके लिए किसी छोटी नर्सरी से कम कीमत पर मनी प्लांट, एलोवेरा, स्नेक प्लांट, तुलसी और छोटे सजावटी पौधे खरीदें। शुरुआत में ज्यादा स्टॉक रखने की जरूरत नहीं है, 10-20 पौधों से भी काम शुरू किया जा सकता है। पौधों की अच्छी फोटो खींचकर WhatsApp और सोशल मीडिया पर डालें और आसपास के लोगों को इसकी जानकारी दें। कस्टमर खुद पौधे लेने आ सकते हैं या आसपास डिलीवरी की फैसिलिटी भी दी जा सकती है।

2. क्लाउड किचन

खाना बनाने का शौक है, तो बिना रेस्टोरेंट खोले घर से क्लाउड किचन शुरू किया जा सकता है। शुरुआत में कुछ चुनिंदा डिश जैसे पराठे, थाली, स्नैक्स या घर का खाना रखें और आसपास के इलाके में डिलीवरी की फैसिलिटी दें। व्हाट्सएप और सोशल मीडिया से ऑर्डर लिए जा सकते हैं। अच्छा टेस्ट, साफ-सफाई और समय पर डिलीवरी मिलने पर धीरे-धीरे कस्टमर बढ़ाए जा सकते हैं।

3. कार-बाइक क्लीनिंग

कार और बाइक रखने वाले कई लोगों के पास रोज सफाई करने का समय नहीं होता, ऐसे में घर जाकर सफाई की सर्विस देना कमाई का अच्छा तरीका बन सकता है। शुरुआत में बाल्टी, माइक्रोफाइबर कपड़े, कार शैम्पू, ब्रश और सफाई का जरूरी सामान खरीदकर करीब 1 हजार रुपये के आसपास से काम शुरू किया जा सकता है। इसके लिए दुकान किराए पर लेने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि आसपास की सोसाइटी, कॉलोनी और मोहल्लों में जाकर ग्राहकों के घर पर ही सर्विस दे सकते हैं।

4. डिजिटल मार्केटिंग

छोटे दुकानदारों और लोकल बिजनेस को सोशल मीडिया पर प्रमोट करने की जरूरत होती है। आपको Instagram, Facebook, पोस्ट डिजाइन, रील या ऑनलाइन प्रमोशन की जानकारी है, तो आप उनके लिए डिजिटल मार्केटिंग की सर्विस दे सकते हैं। शुरुआत में 2-3 लोकल बिजनेस को सैंपल काम दिखाकर क्लाइंट बनाया जा सकता है और बाद में हर महीने के पैकेज के हिसाब से कमाई की जा सकती है।

5. स्किल से कमाई

किसी सब्जेक्ट में आपकी अच्छी पकड़ है या आपको ड्राइंग, म्यूजिक, कंप्यूटर या इंग्लिश जैसी कोई स्किल आती है, तो इसे कमाई का जरिया बनाया जा सकता है। इस काम के लिए दुकान या महंगे सेटअप की जरूरत नहीं होती और घर के एक कमरे से ही शुरुआत की जा सकती है। करीब 1 हजार रुपये में व्हाइटबोर्ड, मार्कर और जरूरी स्टेशनरी खरीदकर मोहल्ले के 4-5 बच्चों को छोटे बैच में पढ़ाना शुरू करें। कम बच्चों से शुरुआत करने पर हर बच्चे पर अच्छी तरह ध्यान दिया जा सकेगा।

6. शेयर मार्केट फाइनेंस कवर पेज

आपको फाइनेंस और शेयर मार्केट की अच्छी जानकारी है, तो इस विषय पर कंटेंट बनाकर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम शुरू किया जा सकता है। शेयर मार्केट की बेसिक जानकारी, बजटिंग, सेविंग और पर्सनल फाइनेंस जैसे सब्जेक्ट पर वीडियो, पोस्ट या ब्लॉग तैयार किए जा सकते हैं। शुरुआत में लगातार उपयोगी और आसान भाषा में कंटेंट बनाकर ऑडियंस तैयार करें और आगे चलकर ब्रांड सहयोग या डिजिटल प्रोडक्ट्स से कमाई के रास्ते बनाए जा सकते हैं।

बेघरों के लिए घर बनाते हैं राजस्थान के किसान राम वैष्णव| Rajasthan | Social Work

बेघरों के लिए घर बनाते हैं राजस्थान के किसान राम वैष्णव| Rajasthan | Social Work

राजस्थान के भीलवाड़ा के रहने वाले राम वैष्णव ने करीब दो साल पहले अपनी नौकरी छोड़ दी। वजह थी—उन लोगों के लिए कुछ करना, जिनके पास रहने के लिए एक सुरक्षित घर तक नहीं था। इस सफर में उन्हें कई बार लोगों के सवाल, ताने और मुश्किलों का सामना करना पड़ा। लेकिन पत्नी के साथ और लोगों के भरोसे से राम लगातार आगे बढ़ते रहे। अब उनका मकसद सिर्फ घर बनाना नहीं, बल्कि उन लोगों तक मदद पहुंचाना है, जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।

देखिए, कैसे एक शख्स ने अपनी नौकरी और आराम छोड़कर दूसरों के लिए छत बनाने को अपना काम बना लिया
@the_ram_vaishnav_51

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बेघरों के लिए घर बनाते हैं राजस्थान के किसान राम वैष्णव
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नेपाल की बाढ़ से बिहार को बचा रहा है 57 साल पुराना गंडक बैराज | Gandak Barrage Valmikinagar | Nepal

नेपाल की बाढ़ से बिहार को बचा रहा है 57 साल पुराना गंडक बैराज | Gandak Barrage Valmikinagar | Nepal

हिमालय की तबाही भारत की चौखट तक पहुँच गई।
नेपाल में आई भयानक बाढ़ के बाद त्रिशूली और नारायणी नदियों में पानी का सैलाब उमड़ पड़ा, जो गंडक नदी के रास्ते बिहार पहुँचा।

वाल्मीकिनगर में इंजीनियरों ने 57 साल पुराने गंडक बैराज के सभी 36 गेट खोल दिए, और करीब 1.5 लाख क्यूसेक पानी नियंत्रित तरीके से छोड़ा गया, ताकि अचानक बढ़े पानी के दबाव को संभाला जा सके।

हालांकि, निचले इलाकों के कई गांवों में बाढ़ आई और लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुँचाना पड़ा।
फिर भी, इस पुराने Engineering Marvel ने बाढ़ के पानी को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाई।

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Music Vine: CKSFLC4KFG1IEXTB

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200 कैदियों के बच्चों की माँ आभा रानी!Aabharani Choudhury | Odisha | Mother to Prisoner’s Children

200 कैदियों के बच्चों की माँ  आभा रानी!Aabharani Choudhury | Odisha | Mother to Prisoner’s Children

कुछ बच्चे अपने माता-पिता के किए की सज़ा भुगतते हुए अपना बचपन जेल की चारदीवारी में बिताने को मजबूर हो जाते हैं। लेकिन ओडिशा की आभा रानी चौधरी ने ऐसे बच्चों को सिर्फ सहारा नहीं, बल्कि एक घर और माँ का प्यार दिया।
पिछले 23 वर्षों में उन्होंने 200+ कैदियों के बच्चों को बेहतर जिंदगी की राह दिखाई है। आज भी उनके आश्रम में 36 बच्चे प्यार और देखभाल के साथ बड़े हो रहे हैं।
आखिर कैसे आभा रानी बनीं 200 कैदियों के बच्चों की माँ?

200 कैदियों के बच्चों की माँ आभा रानी!Aabharani Choudhury | Odisha | Mother to Prisoner’s Children | Changemaker

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