चीन को चटाई धूल, वर्ल्ड रिकॉर्ड की बराबरी! भारतीय महिला कंपाउंड तीरंदाजी टीम के एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने की पूरी कहानी

Asian Games 2026: आइची-नागोया में एशियाई खेलों के दौरान भारत की महिला कंपाउंड तीरंदाजी टीम ने शानदार प्रदर्शन किया। फाइनल मुकाबले में भारतीय तीरंदाजों का सामना चीन की मजबूत टीम से था। मुकाबले की शुरुआत में दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली, लेकिन भारतीय तीरंदाजों ने शुरू से ही अच्छा निशाना साधा।

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भारत की ओर से ज्योति सुरेखा वेन्नम, चिकिता तनिपर्थी और पृथिका प्रदीप मैदान में उतरीं। तीनों ने पहले राउंड से ही लगातार अच्छे स्कोर किए। पहले राउंड में भारत ने 60-58 से बढ़त हासिल की। इसके बाद दूसरे राउंड में भी भारतीय टीम ने 60-58 से बाजी मारी। दो राउंड के बाद भारत 178-176 से आगे था। आखिरी राउंड में चीन को वापसी के लिए अच्छा स्कोर करना था। लेकिन भारतीय तीरंदाजों ने अपनी बढ़त बनाए रखी। चीन की टीम ने दो बार 9 का स्कोर किया, जबकि भारत ने कई बार परफेक्ट 10 लगाए।

आखिरी राउंड में भारतीय टीम ने छह परफेक्ट 10 लगाए। इसके साथ ही कुल स्कोर 238 तक पहुंच गया और भारत ने चीन को 238-234 से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया। पहले यह रिकॉर्ड दक्षिण कोरिया के नाम था।

ये स्ट्रेटेजी रही फाइनल तक पहुंचने के लिए

गोल्ड मेडल के मुकाबले से पहले भारत को सेमीफाइनल में दक्षिण कोरिया की चुनौती का सामना करना पड़ा था। यहां मुकाबला बेहद करीबी रहा और भारतीय टीम ने सिर्फ एक अंक के अंतर से 234-233 से जीत दर्ज कर फाइनल में जगह बनाई।

फाइनल में भारतीय टीम ने चीन के खिलाफ भी अच्छा खेल जारी रखा। दो राउंड में बढ़त बनाने के बाद टीम ने आखिरी राउंड में भी शानदार निशाना लगाया और गोल्ड मेडल जीत लिया।

लगातार दूसरी बार जीता गोल्ड

भारतीय महिला कंपाउंड टीम ने 2023 के हांगझोऊ एशियाई खेलों में भी गोल्ड मेडल जीता था। इन खेलों में यह भारत का सातवां गोल्ड मेडल रहा।

फाइनल में चीन को सिल्वर मेडल मिला। वहीं दक्षिण कोरिया ने चीनी ताइपे को हराकर ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। भारत के लिए यह जीत इसलिए भी खास रही क्योंकि टीम ने गोल्ड बचाने के साथ वर्ल्ड रिकॉर्ड स्कोर की बराबरी भी की।

दूसरे गोल्ड का इंतजार खत्म किया शूटिंग टीम ने, दिलाया एक सिल्वर भी

भारतीय निशानेबाज कमलजीत और सुरुचि सिंह ने व्यक्तिगत स्पर्धाओं में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद जोरदार वापसी करते हुए शुक्रवार को एशियाई खेलों की 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम स्पर्धा में हुए स्वर्ण पदक जीता।

ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर, रुद्रांक्ष पाटिल और नीरज कुमार की भारतीय तिकड़ी ने पुरुषों की 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशन टीम स्पर्धा में 1762 अंक के साथ रजत पदक जीता। चीन ने 1766 अंक के साथ स्वर्ण, जबकि कोरिया ने 1751 अंक के साथ कांस्य पदक हासिल किया।

तोमर ने 589 और नीरज ने 588 अंक के साथ व्यक्तिगत 3पी स्पर्धा के फाइनल में भी जगह बनाई। दोनों क्रमश: तीसरे और चौथे स्थान पर रहे।

रुद्रांक्ष हालांकि व्यक्तिगत फाइनल में जगह नहीं बना सके क्योंकि एक देश से अधिकतम दो निशानेबाज ही व्यक्तिगत फाइनल में प्रवेश कर सकते हैं। कमलजीत और सुरुचि ने फाइनल में कुल 484.6 अंक हासिल किए। दक्षिण कोरिया की सुह्योन होंग और गाउन चू की जोड़ी 478.0 अंक के साथ दूसरे स्थान पर रही, जबकि ईरान ने 415.8 अंक के साथ कांस्य पदक जीता। भारतीय जोड़ी ने रजत पदक विजेता जोड़ी से 6.6 अंक की बढ़त बनाई।

इससे पहले कमलजीत और सुरुचि ने क्वालीफिकेशन में शीर्ष स्थान हासिल कर फाइनल में प्रवेश किया था। उन्होंने पहली सीरीज में 196 अंक, दूसरी में 195 और तीसरी में 196 अंक जुटाकर कुल 587 अंक हासिल किए, जिसमें 29 इनर-10 शामिल थे।

यह 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धाओं में भारत का पदक जीतने का आखिरी मौका था। कमलजीत व्यक्तिगत क्वालीफिकेशन में नौवें और सुरुचि 26वें स्थान पर रही थीं और दोनों व्यक्तिगत फाइनल में जगह नहीं बना सकी थीं। भारत पुरुष और महिला टीम स्पर्धाओं में भी पदक से चूक गया था।

फाइनल में भारतीय जोड़ी ने शुरुआत से ही बढ़त बनाए रखी। पहले 10 शॉट के बाद वे 202.4 अंक के साथ शीर्ष पर थीं। सुरुचि ने पहली कोशिश में 10.4 और कमलजीत ने 9.7 अंक हासिल किए, जबकि दूसरी कोशिश में सुरुचि ने 10.2 और कमलजीत ने 9.8 अंक जुटाए। इसके बाद 101.3 अंक की अगली सीरीज के साथ भी भारतीय जोड़ी ने अपनी बढ़त बरकरार रखी।

Asian Games का पहला गोल्ड दिलाया महिला क्रिकेट टीम ने, श्रीलंका को 147 रनों से रौंदा

स्मृति मंधाना और ऋचा घोष की तूफानी पारियों के बाद स्पिनरों के फिरकी के जादू से गत चैंपियन भारत ने एशियाई खेलों की महिला टी20 क्रिकेट प्रतियोगिता के फाइनल में मंगलवार को श्रीलंका को 147 रन से रौंदकर स्वर्ण पदक जीता जो मौजूदा खेलों में देश का सोने का पहला तमगा है।

भारत के 217 रन के बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए श्रीलंका की टीम दीप्ति शर्मा (छह रन पर तीन विकेट), शेफाली वर्मा (तीन रन पर दो विकेट), श्रेयंका पाटिल (नौ रन पर दो विकेट) और श्री चरणी (13 रन पर दो विकेट) की बलखाती गेंदों के सामने 15.4 ओवर में सिर्फ 69 रन पर ढेर हो गई। श्रीलंका की ओर से कप्तान चामरी अटापट्टूी ने सर्वाधिक 29 रन बनाए जबकि उनके अलावा सिर्फ कौशिनी नुथ्यांगना (14) और कविशा दिलहारी (11) ही दोहरे अंक में पहुंच सकी।भारत ने इसी महीने श्रीलंका को ही हराकर एशिया कप का खिताब भी जीता था।

भारत ने इससे पहले स्मृति (45 गेंद में 79 रन, सात छक्के, पांच चौके) के अर्धशतक और शेफाली (48 रन, 29 गेंद, तीन छक्के, तीन चौके) के साथ उनकी पहले विकेट की 99 रन की तेजतर्रार साझेदारी की बदौलत तीन विकेट पर 216 रन का बड़ा स्कोर खड़ा किया। ऋचा घोष (22 गेंद में नाबाद 49 रन, छह चौके, तीन छक्के) ने डेथ ओवरों में तूफानी बल्लेबाजी करते हुए भारत का स्कोर 200 रन के पार पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।श्रीलंका को रजत पदक मिला जबकि पाकिस्तान ने बांग्लादेश को 31 रन से हराकर कांस्य पदक जीता।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने पर भारतीय महिला क्रिकेट टीम को बधाई दी।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि टीम का प्रदर्शन शानदार रहा, जिसमें आत्मविश्वास, कौशल और बेहतरीन टीम वर्क देखने को मिला। उन्होंने कहा कि इस जीत के साथ भारत ने इन खेलों में अपना पहला स्वर्ण पदक भी हासिल किया है। टीम ने देश का मान बढ़ाया है और देशभर के अनगिनत युवा क्रिकेटरों को प्रेरित करेगी। उन्होंने पूरी टीम को शुभकामनाएं दीं।

4 बार Gold जीतकर भी खिलाड़ी सब्ज़ी बेचने को मजबूर |Amardeep Kumar | Throwball Player |Gold Medalist

4 बार Gold जीतकर भी खिलाड़ी सब्ज़ी बेचने को मजबूर |Amardeep Kumar |  Throwball Player |Gold Medalist

देश के लिए International level पर 4 Gold Medal जीत चुके झारखंड के Amardeep Kumar आज अपनी practice और घर का खर्च चलाने के लिए कभी Cab चलाते हैं, तो कभी परिवार के साथ सब्ज़ियाँ बेचते हैं। रात में Cab चलाकर सुबह Practice करने वाले Amardeep की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि उस संघर्ष की है जो कई प्रतिभाशाली athletes को अपने सपने के साथ करना पड़ता है।
अगर आप Amardeep के इस संघर्ष को आसान बनाने में किसी भी तरह मदद करना चाहते हैं, तो इस Email ID पर संपर्क करें: Ad22784amar@gmail.com

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सब्जी बेचने से लेकर भारत के लिए 4 गोल्ड मेडल जीतने तक, झारखंड के एथलीट अमरदीप कुमार की कहानी वायरल, हेमंत सोरेन ने किया रिएक्ट

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें झारखंड के रांची में अरगोरा चौक पर एक आदमी सब्ज़ियां बेचता हुआ दिख रहा है। जल्द ही लोगों को पता चला कि यह कोई और नहीं, बल्कि राज्य के थ्रोबॉल खिलाड़ी और गोल्ड मेडलिस्ट अमरदीप कुमार हैं। इंटरनेशनल टूर्नामेंट में भारत के लिए चार गोल्ड मेडल जीतने के बावजूद, 29 साल के यह एथलीट अब गुज़ारा करने और अपने परिवार की मदद के लिए सब्ज़ियां बेच रहे हैं और कैब चला रहे हैं।

ऑनलाइन लोगों का ध्यान खींचने वाले इस वीडियो क्लिप में अमरदीप अपनी दुकान पर बैठे हुए और आस-पास कई तरह की सब्ज़ियां रखे हुए दिखाई दिए। उन्हें ग्राहक को सब्ज़ियां देने से पहले तराज़ू पर उन्हें तौलते हुए देखा गया। चर्चा की खास बात यह थी कि उन्होंने अपनी कामचलाऊ दुकान की दीवार पर अपने गोल्ड मेडल लटका रखे थे।

झारखंड के रहने वाले अमरदीप ने कई इंटरनेशनल थ्रो-बॉल इवेंट्स में भारत का प्रतिनिधित्व किया है और चार गोल्ड मेडल जीते हैं। हालांकि, इतनी उपलब्धियों के बावजूद, उन्हें सरकारी नौकरी पाने या राज्य से कोई आर्थिक मदद मिलने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा है।

जब से सोशल मीडिया पर यह क्लिप सामने आया है, लोगों ने इस स्थिति पर निराशा जताई है। कुछ लोगों ने इसे “दिल तोड़ने वाला” बताया है, तो कुछ ने सरकार से अपील की है कि वे हर संभव तरीके से उनकी मदद करें। एक यूजर ने पूछा- “दीवार पर गोल्ड मेडल और सड़क किनारे सब्ज़ियां—यह सिर्फ़ दिल तोड़ने वाली तस्वीर नहीं है, यह सिस्टम के लिए एक असहज करने वाला सवाल है। जिस खिलाड़ी ने भारत का प्रतिनिधित्व किया और गोल्ड मेडल जीता, उसे अपनी बुनियादी ज़िंदगी गुज़ारने के लिए संघर्ष नहीं करना चाहिए। जब ​​खिलाड़ी जीतते हैं तो हम जश्न मनाते हैं, लेकिन कैमरे हटने के बाद उनका क्या होता है?”

एक और व्यक्ति ने कहा, “इसीलिए हमें ओलंपिक में ज़्यादा मेडल नहीं मिलते। दुखद स्थिति है।” एक ने कहा कि दुख की बात यह नहीं है कि वह सब्ज़ियां बेच रहे हैं। ईमानदारी से किए गए काम में कुछ भी गलत नहीं है… चिंता की बात यह है कि उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया और गोल्ड मेडल जीते, लेकिन शायद खेल में या अपनी उपलब्धियों के आधार पर करियर बनाने के लिए उनके पास कोई भविष्य का रास्ता नहीं था। समस्या संस्थागत समर्थन की कमी है, न कि नौकरी की,”।

एक अन्य ने कहा कि “सरकार को उनके जैसे लोगों को, जिन्होंने देश के लिए कुछ किया है, कम से कम मासिक सहायता राशि देनी चाहिए, न कि किसी विधायक को निजी कारणों से विधायक बनने के लिए जीवन भर पेंशन देनी चाहिए,।

कौन हैं अमरदीप कुमार?

अमरदीप ने 2015 में मलेशिया में हुई एशियन जूनियर थ्रो-बॉल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर इंटरनेशनल लेवल पर अपनी पहचान बनाई। इसके बाद 2017 में काठमांडू में हुई इंडो-नेपाल थ्रो-बॉल चैंपियनशिप में उन्होंने एक और गोल्ड मेडल जीता। 2019 में, वह उस भारतीय टीम का हिस्सा थे जिसने बेंगलुरु में साउथ एशियन थ्रो-बॉल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता था। उनका चौथा इंटरनेशनल गोल्ड मेडल 2026 में रांची में आयोजित साउथ एशियन थ्रो-बॉल चैंपियनशिप के दूसरे एडिशन में मिला।

आज, अमरदीप गुज़ारा करने के लिए सब्ज़ियाँ बेचते हैं और कैब भी चलाते हैं, क्योंकि उनका परिवार कमाई के कई ज़रिया पर निर्भर है। मुश्किलों के बावजूद, वह थ्रो-बॉल खेलना जारी रखे हुए हैं, क्योंकि अक्टूबर 2026 के आखिर में उनके श्रीलंका का प्रतिनिधित्व करने की उम्मीद है।

हालांकि अमरदीप ने 2016 में किसी इनाम या प्रोत्साहन के लिए झारखंड सरकार से संपर्क किया था, लेकिन कैश इनाम और सरकारी नौकरी के लिए उनकी अर्ज़ियाँ अभी भी पेंडिंग हैं। छत्तीसगढ़, हरियाणा और बिहार जैसे राज्यों के उनके कई साथियों को सरकारी नौकरी मिल चुकी है।

CM हेमंत सोरेन ने लिया संज्ञान

अमरदीप की कहानी ऑनलाइन वायरल होने के बाद, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने X पर इस मामले के बारे में पोस्ट किया और खेल विभाग को निर्देश दिया कि वे तुरंत इस मामले का संज्ञान लें और कार्रवाई शुरू करें।

वतन वापसी पर कॉमनवेल्थ मेडलिस्ट का हुआ देश में जोरदार स्वागत (Video)

commonwealth games

राष्ट्रमंडल खेल 2026 में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले भारतीय एथलीट्स की वतन वापसी पर भव्य स्वागत हुआ। गौरतलब है कि भारत ने इन खेलों में उम्मीद से बढ़कर प्रदर्शन किया जब कई वैश्विक खेल जिनमें भारत दर्जन भर मेडल लाता था इन खेलों से नदारद थे। इस बार हॉकी, बैडमिंटन, शूटिंग, कुश्ती नहीं शामिल हुए थे।

इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) हवाई अड्डे से बाहर निकलते ही खिलाड़ियों का ढोल-नगाड़ों, देशभक्ति गीतों और फूल-मालाओं से स्वागत किया गया। परिजन और समर्थक खिलाड़ियों के साथ तस्वीरें खिंचवाने के लिए उत्साहित नजर आए।भारतीय पैरा एथलेटिक्स दल ने भी इतिहास रचते हुए रिकॉर्ड सात पदक अपने नाम किए, जिसके दम पर भारत समग्र पदक तालिका में चौथे स्थान पर पहुंचा।

खिलाड़ी मंगलवार तड़के करीब चार बजे जैसे ही हवाई अड्डे के टर्मिनल से बाहर निकले, ढोल-नगाड़ों की गूंज और देशभक्ति गीतों से पूरा माहौल उत्साह से भर उठा। परिजनों ने पदक विजेता खिलाड़ियों का फूल-मालाएं पहनाकर गर्मजोशी से स्वागत किया, जबकि बड़ी संख्या में मौजूद समर्थकों ने उनके साथ तस्वीरें खिंचवाने के लिए मौजूद थे।

राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले जूडो खिलाड़ी हर्ष सिंह और अस्मिता डे मंगलवार तड़के हवाई अड्डे से बाहर निकलने वाले शुरुआती खिलाड़ियों में शामिल रहे। उनका भी यहां गर्मजोशी से स्वागत किया गया। हर्ष ने कहा, ‘‘ मैंने कभी नहीं सोचा था कि इस तरह का स्वागत मिलेगा। सभी से मिलकर बेहद अच्छा लग रहा है।’’ उत्तर प्रदेश पुलिस में उपनिरीक्षक अस्मिता डे ने कहा, ‘‘मुझे जीवन में पहली बार ऐसा स्वागत मिल रहा है और मेरे लिए यह अनुभव बेहद खास है।’’

खेल मंत्रालय ने दिए नकद पुरुस्कार

खेल मंत्री ने कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार उपलब्धियों के लिए गोल्ड मेडल जीतने वालों को 30 लाख रुपये, सिल्वर मेडल जीतने वालों को 20 लाख रुपये और ब्रॉन्ज़ मेडल जीतने वालों को 10 लाख रुपये का नकद इनाम दिया। इन खेलों में भारतीय वेटलिफ्टरों ने देश का अब तक का सबसे मजबूत प्रदर्शन किया।

खिलाड़ियों को बधाई देते हुए डॉ. मांडविया ने कहा कि पूरे देश ने उनकी उपलब्धियों का जश्न मनाया। उन्होंने कहा, “संसद में भी, हर बार जब आपने मेडल जीते, तो घोषणाएं की गईं। उन पलों ने हर भारतीय को गौरवान्वित किया।”

खेल मंत्री ने कोचों, जिनमें द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता विजय शर्मा भी शामिल थे की जमकर तारीफ की और चैंपियन बनाने में उनकी अहम भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “एक खिलाड़ी के सफर में गुरु की सबसे बड़ी भूमिका होती है। चैंपियन बनाने में कोच के योगदान से बड़ी कोई चीज नहीं है।”

14 साल की उम्र में भारत के नाम Boxing में Gold Medal | Yasser Boxer | Asian Under-15 Boxing

14 साल के यासिर ने Boxing में जीता Gold Medal! जम्मू-कश्मीर के इस युवा Boxer ने Asian Under-15 Boxing Championship में भारत का नाम रोशन किया। यासिर की जीत सिर्फ एक मेडल नहीं, बल्कि उस हौसले की कहानी है, जिसने मुश्किल हालातों के बावजूद सपनों का पीछा करना नहीं छोड़ा। देश में ऐसे कई युवा खिलाड़ी हैं, जिनमें आगे बढ़ने का हुनर है। जरूरत है उन्हें सही सपोर्ट, बेहतर सुविधाएं और आगे बढ़ने के मौके देने की… ताकि वो अपने खेल को ही अपनी पहचान और भविष्य बना सकें।
आइए, यासिर जैसे खिलाड़ियों की मेहनत को पहचान दें और उनका समर्थन करें, ताकि वो अपने खेल के जरिए अपने सपनों को पूरा कर सकें।
@yassertheboxer

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अस्मिता और हर्ष के एतिहासिक स्वर्ण पदक, जूडो में 3 पदक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन

हर्ष सिंह और अस्मिता डे ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को पहली बार जूडो कराटे में मेडल दिलवाया वह भी गोल्ड। अस्मिता कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो में गोल्ड जीतने वाली पहली महिला जूडोका बनी वहीं इसके बाद हर्ष सिंह भी पहले पुरष जूडोका बने जिन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स  में गोल्ड जीता। इसके अलावा यामिनी ने भी 48.किग्रा वर्ग में सिल्वर मेडल जीता।

भारत ने जूडो में दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीता जो 1990 के ऑकलैंड राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो के पदक खेल बनने के बाद भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।

त्रिपुरा की 23 वर्षीय अस्मिता डे जूडो स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय बन गई जिन्होंने 48 किग्रा से कम भार वर्ग में कनाडा की हेडी क्वाच को नाटकीय ‘गोल्डन स्कोर’ मुकाबले में हराकर खिताब जीता।

हर्ष सिंह राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारत के पहले पुरूष खिलाड़ी बन गए जिन्होंने आस्ट्रेलिया के अनुभवी जोशुआ कैट्ज को हराकर पुरूषों के 60 किलो फाइनल में स्वर्ण पदक जीता ।

पहली बार इन खेलों में उतरे 23 वर्ष के हर्ष ने खिताब के प्रबल दावेदार माने जा रहे जूडोका के खिलाफ संयम खोये बिना जबर्दस्त खेल दिखाया । यामिनी काफी करीब से स्वर्ण पदक जीतने से चूक गईं और उन्हें महिलाओं के 57 किग्रा से कम भार वर्ग के ‘गोल्डन स्कोर’ तक पहुंचे फाइनल में इंग्लैंड की अनुभवी एसिल्या टॉपराक से हारकर रजत पदक से संतोष करना पड़ा।

CWG 2026: कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स में मीराबाई चानू ने रचा इतिहास, जीता गोल्ड मेडल

Mirabai Chanu Commonwealth Games: ग्लासगो कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स 2026 में भारत को पहला गोल्ड मेडल मिल गया है। भारतीय स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने महिलाओं की 48 किलोग्राम वर्ग में शानदार प्रदर्शन किया। उनके इस दमदार प्रदर्शन की बदौलत भारत को गोल्ड मेडल मिला। मीराबाई चानू ने 48 किलोग्राम वर्ग में कुल 190 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसी के साथ उन्होंने भारत को इस सीजन का पहला गोल्ड मेडल भी दिलाया। शुरुआती स्नैच प्रयास में असफल रहने के बाद मीराबाई ने शानदार वापसी की और लगातार दो सफल लिफ्ट लगाते हुए कॉमनवेल्थ गेम्स के नए रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिए।

मीराबाई चानू ने जीत गोल्ड मेडल

क्लीन एंड जर्क में मीराबाई चानू ने पहली कोशिश में 105 किलोग्राम वजन नहीं उठा सकीं, लेकिन दूसरी कोशिश में उन्होंने सफलतापूर्वक यह वजन उठाया। इस लिफ्ट के साथ उन्होंने एक और कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड बनाया और अपना गोल्ड मेडल भी पक्का कर लिया। मीराबाई चानू ने स्नैच में 85 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 105 किलोग्राम वजन उठाकर कुल 190 किलोग्राम के साथ पहला स्थान हासिल किया। उनके शानदार प्रदर्शन से भारत को 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स का पहला स्वर्ण पदक मिला। इस जीत के साथ मीराबाई ने अपने करियर में एक और कॉमनवेल्थ गोल्ड मेडल जोड़ लिया। मीराबाई चानू ने लगातार तीसरी बार कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स में सोना जीता।