वतन वापसी पर कॉमनवेल्थ मेडलिस्ट का हुआ देश में जोरदार स्वागत (Video)

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राष्ट्रमंडल खेल 2026 में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले भारतीय एथलीट्स की वतन वापसी पर भव्य स्वागत हुआ। गौरतलब है कि भारत ने इन खेलों में उम्मीद से बढ़कर प्रदर्शन किया जब कई वैश्विक खेल जिनमें भारत दर्जन भर मेडल लाता था इन खेलों से नदारद थे। इस बार हॉकी, बैडमिंटन, शूटिंग, कुश्ती नहीं शामिल हुए थे।

इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) हवाई अड्डे से बाहर निकलते ही खिलाड़ियों का ढोल-नगाड़ों, देशभक्ति गीतों और फूल-मालाओं से स्वागत किया गया। परिजन और समर्थक खिलाड़ियों के साथ तस्वीरें खिंचवाने के लिए उत्साहित नजर आए।भारतीय पैरा एथलेटिक्स दल ने भी इतिहास रचते हुए रिकॉर्ड सात पदक अपने नाम किए, जिसके दम पर भारत समग्र पदक तालिका में चौथे स्थान पर पहुंचा।

खिलाड़ी मंगलवार तड़के करीब चार बजे जैसे ही हवाई अड्डे के टर्मिनल से बाहर निकले, ढोल-नगाड़ों की गूंज और देशभक्ति गीतों से पूरा माहौल उत्साह से भर उठा। परिजनों ने पदक विजेता खिलाड़ियों का फूल-मालाएं पहनाकर गर्मजोशी से स्वागत किया, जबकि बड़ी संख्या में मौजूद समर्थकों ने उनके साथ तस्वीरें खिंचवाने के लिए मौजूद थे।

राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले जूडो खिलाड़ी हर्ष सिंह और अस्मिता डे मंगलवार तड़के हवाई अड्डे से बाहर निकलने वाले शुरुआती खिलाड़ियों में शामिल रहे। उनका भी यहां गर्मजोशी से स्वागत किया गया। हर्ष ने कहा, ‘‘ मैंने कभी नहीं सोचा था कि इस तरह का स्वागत मिलेगा। सभी से मिलकर बेहद अच्छा लग रहा है।’’ उत्तर प्रदेश पुलिस में उपनिरीक्षक अस्मिता डे ने कहा, ‘‘मुझे जीवन में पहली बार ऐसा स्वागत मिल रहा है और मेरे लिए यह अनुभव बेहद खास है।’’

खेल मंत्रालय ने दिए नकद पुरुस्कार

खेल मंत्री ने कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार उपलब्धियों के लिए गोल्ड मेडल जीतने वालों को 30 लाख रुपये, सिल्वर मेडल जीतने वालों को 20 लाख रुपये और ब्रॉन्ज़ मेडल जीतने वालों को 10 लाख रुपये का नकद इनाम दिया। इन खेलों में भारतीय वेटलिफ्टरों ने देश का अब तक का सबसे मजबूत प्रदर्शन किया।

खिलाड़ियों को बधाई देते हुए डॉ. मांडविया ने कहा कि पूरे देश ने उनकी उपलब्धियों का जश्न मनाया। उन्होंने कहा, “संसद में भी, हर बार जब आपने मेडल जीते, तो घोषणाएं की गईं। उन पलों ने हर भारतीय को गौरवान्वित किया।”

खेल मंत्री ने कोचों, जिनमें द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता विजय शर्मा भी शामिल थे की जमकर तारीफ की और चैंपियन बनाने में उनकी अहम भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “एक खिलाड़ी के सफर में गुरु की सबसे बड़ी भूमिका होती है। चैंपियन बनाने में कोच के योगदान से बड़ी कोई चीज नहीं है।”

CWG 2026 Medal List: ग्लासगो में भारत ने जीते कितने मेडल? देखें गोल्ड-सिल्वर-ब्रॉन्ज की पूरी लिस्ट और मेडल टैली

Commonwealth Games 2026 Medal List: 11 दिनों तक चले रोमांचक मुकाबलों के बाद ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026 का शानदार समापन हो गया है। रविवार 2 अगस्त को एक रंगारंग समापन समारोह के साथ राष्ट्रमंडल खेलों का फ्लैग और बेटन अगले मेजबान देश भारत को सौंप दिया गया। भारतीय दल ने ग्लासगो में कई पारंपारिक और पदक दिलाने वाले खेलों (जैसे शूटिंग, कुश्ती, बैडमिंटन, हॉकी और टेबल टेनिस) को शामिल न किए जाने के बावजूद शानदार प्रदर्शन किया। भारत ने कुल 39 पदक (13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य) जीतकर मेडल टैली में चौथा स्थान हासिल किया है।

2030 में अहमदाबाद करेगा शताब्दी संस्करण की मेजबानी

समारोह के दौरान स्कॉटलैंड के अधिकारियों ने राष्ट्रमंडल खेल संघ का ध्वज और बेटन भारतीय प्रतिनिधियों ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा, भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की अध्यक्ष पीटी उषा और गुजरात के उप मुख्यमंत्री हर्ष सांघवी को सौंपा।

वर्ष 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन भारत के अहमदाबाद शहर में होगा। ये इन खेलों का 100वां यानी शताब्दी संस्करण होगा। भारत इससे पहले 2010 में नई दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेलों का सफल आयोजन कर चुका है। इसके साथ ही भारत, ऑस्ट्रेलिया के बाद एक से अधिक बार इन खेलों की मेजबानी करने वाला दुनिया का दूसरा देश बन जाएगा।

राष्ट्रमंडल खेल 2026: अंतिम मेडल टैली में टॉप 5 देश

ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026 की पदक तालिका में ऑस्ट्रेलिया ने एक बार फिर अपना वर्चस्व कायम करते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया। ऑस्ट्रेलिया कुल 171 पदकों के साथ पहले स्थान पर रहा, जिसमें 70 स्वर्ण, 45 रजत और 56 कांस्य पदक शामिल हैं। इंग्लैंड ने 29 स्वर्ण, 45 रजत और 36 कांस्य पदक जीतकर कुल 110 पदकों के साथ दूसरा स्थान प्राप्त किया। जबकि कनाडा 19 स्वर्ण, 20 रजत और 23 कांस्य मिलाकर कुल 62 पदकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा।

भारत के खाते में आए 39 मेडल

भारत ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदकों के साथ कुल 39 मेडल जीतकर तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। मेजबान स्कॉटलैंड ने भी कुल 39 पदक जीते। लेकिन उसके खाते में 13 स्वर्ण, 9 रजत और 17 कांस्य पदक आए। भारत के पास स्कॉटलैंड से अधिक रजत पदक (17) होने के कारण भारतीय दल पदक तालिका में पांचवें स्थान पर रहे स्कॉटलैंड से ऊपर चौथे स्थान पर रहा।

खेलों में भारत का प्रदर्शन: बॉक्सिंग का रहा दबदबा

भारतीय एथलीटों ने मुक्केबाजी, एथलेटिक्स, जूडो, पैरा स्पोर्ट्स और भारोत्तोलन में बेहतरीन प्रदर्शन किया। मुक्केबाजी भारत का सबसे सफल खेल रहा, जिसने कुल 10 पदक दिलाए (7 स्वर्ण और 3 रजत)। ट्रैक एंड फील्ड और पैरा एथलीट्स ने कई ऐतिहासिक पदक जीते। जूडोकाओं ने अहम पदक जोड़े, जबकि वेटलिफ्टरों ने भारत के मेडल खाते को मजबूती दी। हालांकि जुडोका तुलिका मान को एंटी-डोपिंग नियमों के तहत सस्पेंड होने के कारण खेलों से बाहर होना पड़ा, जो भारत के लिए एक शुरुआती झटका था।

CWG 2026: भारत के पदक विजेताओं की पूरी लिस्ट

1- बॉक्सिंग (Boxing) – 10 मेडल (7 Gold, 3 Silver)

गोल्ड: प्रीति पवार (महिला 51 किग्रा)

गोल्ड: साक्षी चौधरी (महिला 54 किग्रा)

गोल्ड: जैस्मिन लंबोरिया (महिला 57 किग्रा)

गोल्ड: प्रिया घनघस (महिला 60 किग्रा)

गोल्ड: अरुंधति चौधरी (महिला 66 किग्रा)

गोल्ड: सचिन सिवाच (पुरुष 55 किग्रा)

गोल्ड: अंकुश पंघाल (पुरुष 65 किग्रा)

सिल्वर: लवलीना बोरगोहेन (महिला 75 किग्रा)

सिल्वर: जादुमणि सिंह (पुरुष 50 किग्रा)

सिल्वर: नरेंद्र बेरवाल (पुरुष +90 किग्रा)

2- पैरा एथलेटिक्स – 6 मेडल (3 Gold, 2 Silver, 1 Bronze)

गोल्ड: शर्मीला ढाका (महिला शॉट पुट F57)

गोल्ड: दिलीप गावित (पुरुष 100 मीटर T47)

गोल्ड: सोमन राणा (पुरुष शॉट पुट F57)

सिल्वर: मोहम्मद बासिल (पुरुष 100 मीटर T47)

सिल्वर: शुभम जुयाल (पुरुष शॉट पुट F57)

कांस्य: शिल्पा शैला (महिला शॉट पुट F57)

3- जूडो – 4 मेडल (2 Gold, 1 Silver, 1 Bronze)

गोल्ड: अस्मिता डे (महिला 48 किग्रा)

गोल्ड: हर्ष सिंह (पुरुष 60 किग्रा)

सिल्वर: यामिनी मौर्या (महिला 57 किग्रा)

कांस्य: उन्नति शर्मा (महिला 63 किग्रा)

4- भारोत्तोलन – 8 मेडल (1 Gold, 6 Silver, 1 Bronze)

गोल्ड: सायखोम मीराबाई चानू (महिला 48 किग्रा)

सिल्वर: ऋषिकान्त सिंह (पुरुष 60 किग्रा)

सिल्वर: मुथुपंडी राजा (पुरुष 65 किग्रा)

सिल्वर: ज्ञानेश्वरी यादव (महिला 53 किग्रा)

सिल्वर: वल्लूरी अजय बाबू (पुरुष 79 किग्रा)

सिल्वर: हरजिंदर कौर (महिला 69 किग्रा)

सिल्वर: लवप्रीत सिंह (पुरुष +110 किग्रा)

कांस्य: बिंद्यारानी देवी (महिला 58 किग्रा)

5- एथलेटिक्स – 10 मेडल (5 Silver, 5 Bronze)

सिल्वर: नीरज चोपड़ा (पुरुष भाला फेंक / Javelin Throw)

सिल्वर: मुरली श्रीशंकर (पुरुष लंबी कूद / Long Jump)

सिल्वर: प्रवीण चित्रवेल (पुरुष ट्रिपल जंप / Triple Jump)

सिल्वर: सर्वेश अनिल कुशारे (पुरुष ऊंची कूद / High Jump)

सिल्वर: गुलवीर सिंह (पुरुष 10,000 मीटर दौड़)

कांस्य: यशवीर सिंह (पुरुष भाला फेंक / Javelin Throw)

कांस्य: सेल्वा प्रभु थिरुमारन (पुरुष ट्रिपल जंप / Triple Jump)

कांस्य: गुलवीर सिंह (पुरुष 5,000 मीटर दौड़)

कांस्य: तेजस्विन शंकर (पुरुष डेकाथलॉन / Decathlon)

कांस्य: सीमा कालीरामना (महिला डिस्क थ्रो / Discus Throw)

6 – पैरा पावरलिफ्टिंग – 1 मेडल (1 Bronze)

कांस्य : झंडू कुमार (पुरुष हैवीवेट)

ग्लासगो 2026 के सफल समापन के बाद अब भारतीय खेल जगत की निगाहें 2030 अहमदाबाद राष्ट्रमंडल खेलों पर टिक गई हैं।

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मलेशिया को मात देकर भारत की पुरुष और महिला टीम ने जीता गोल्ड मेडल

भारत की पुरुष और महिला टेबल टेनिस टीम ने स्कॉटलैंड के ग्लासगो में जारी राष्ट्रमंडल खेल 2026 में मलेशिया की टीम को हराकर स्वर्ण पदक हासिल कर लिया है। भारत की महिली टीम ने मलेशिया को 3-0 से हराया वहीं भारत की पुरुष टीम ने मलेशिया को 3-2 से हराया। यह जीत एक ही दिन और एक ही प्रतिद्वंदी के खिलाफ आई इस कारण से यह जीत टीम के लिए खास है।

भारत की पुरुष टीम ने पिछली बार भी स्वर्ण पदक जीता था जबकि महिला टीम ने 12 साल बाद स्वर्ण पदक जीता है। भारतीय पुरुष टीम में मानव ठक्कर, मानुष शाह, साथियन गणानाशेकरन, हरमीत देसाई और पायस जैन शामिल थे।

भारत ने इससे पहले ग्रुप स्टेज में भी जिमबाब्वे और मलेशिया को 3-0 से हराया था। इसके बाद टीम ने श्रीलंका, वेल्स, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, सिंगापुर और इंग्लैंड पर विजय हासिल की।

खिताबी मुकाबले में मानव ठक्कर, मानुष शाह विजेता रहे जबकि साथियन गणानाशेकरन को हार मिली।

वहीं दूसरी वरीयता प्राप्त महिला टीम ने दबदबा बनाकर छठी वरीयता प्राप्त मलेशिया को  3-0 से हराकर खिताब पाया। भारत की महिला टीम में सिंड्रेला दास, श्रीजा अकुला, यशस्वी घोरपड़े, सुतीर्था मुखर्जी और स्वस्तिका घोष शामिल थीं।

पुरषों की भांति इस टूर्नामेंट में महिला टीम भी बिना कोई मैच हारे खिताब जीती। महिला टीम ने मालदीव, दक्षिण अफ्रीका, उत्तरी आयरलैंड, श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के खिलाफ बिना कोई सेट गंवाए 3-0 से जीत दर्ज की। वहीं सेमीफाइनल में इंग्लैंड को 3-1 से हराया।

पैरा एथलेटिक्स में भारत ने रचा इतिहास, इन 2 रनर्स ने जीते गोल्ड और सिल्वर

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स्कॉटलैंड के ग्लासगो में चल रहे राष्ट्रमंडल खेल 2026 की पैरा एथलेटिक्स की टी47 स्पर्धा की 100 मीटर दौड़ में दिलीप महादू गवित ने सिर्फ 10.71 सेकेंड में सबसे पहले बाधा पार कर ली और भारत को स्वर्ण पदक जिताया।  इसके अलावा त्रिवेंद्रम के एथलीट मोहम्मद बेसिल मोरसिंगनाथ ने 10.83 सेकेंड में इस दौड़ को पूरा किया और सिल्वर मेडल जीता।

यह पैरा एथलेटिक्स में भारत के लिए एक एतिहासिक दिन रहा।  दिलीप महादू गवित पहले ऐसे एथलीट बने जिन्होंने पैरा एथलेटिक्स में  भारत के लिए गोल्ड जीता। इंग्लैंड के केविन सैंटोस ने 10.85 सेकेंड के सत्र के अपने सर्वश्रेष्ठ का समय के साथ कांस्य पदक जीता।

पुरुषों की 100 मीटर टी47 स्पर्धा पैरा एथलेटिक्स की फर्राटा प्रतियोगिता है जिसमें एक हाथ में शारीरिक अक्षमता या उसके अभाव वाले खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। इससे शरीर के एक हिस्से की ताकत, गति या समन्वय प्रभावित होता है।इन दो पदकों के साथ भारत पदक तालिका में तीन स्वर्ण, नौ रजत और तीन कांस्य पदक लेकर आठवें स्थान पर पहुंच गया।


Commonwealth Games में 10 हजार मीटर की दौड़ में एतिहासिक सिल्वर मेडल पाया इस एथलीट ने

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Commonwealth Games 2026 में भारतीय एथलीटों ने यह बता दिया है कि भारत को पदक जीतने के लिए अब सिर्फ नीरज चोपड़ा की तरफ देखने की जरूरत नहीं। अन्य एथलीट भी ओलंपिक नहीं तो कम से कम कॉमनवेल्थ गेम्स जीतने की काबिलियत रखते। 

पांचवें दिन धावक गुलवीर सिंह ने ऐतिहासिक प्रदर्शन कर पुरुषों की 10 हजार मीटर दौड़ में रजत पदक जीता ।मंगलवार को गुलवीर सिंह ने राष्ट्रमंडल खेल 2026 में इतिहास रच दिया। वे राष्ट्रमंडल खेलों में पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए।

मौजूदा एशियाई चैंपियन गुलवीर ने स्कॉट्सटाउन स्टेडियम में 27:49.78 का समय लिया और ऑस्ट्रेलिया के काई रॉबिन्सन (27:48.93) के बाद दूसरे स्थान पर रहे, जबकि आइल ऑफ मैन के डेविड मुल्लार्की ने 27:50.28 के समय के साथ कांस्य पदक जीता।वहीं दूसरी ओर, टीनएज हाई जम्पर पूजा सिंह अपने पहले कॉमनवेल्थ गेम्स में आठवें स्थान पर रहीं, जबकि विशाल टीके पुरुषों की 400 मीटर दौड़ के सेमीफाइनल में पहुँच गए।

25-लैप की इस दौड़ के ज़्यादातर हिस्से में लगातार बारिश के बीच दौड़ते हुए, गुलवीर शुरू से ही आगे रहने वाले ग्रुप के साथ बने रहे। उन्होंने 3000 मीटर की दूरी 8:39.2 में पूरी की, पांचवें स्थान पर खिसकने के बावजूद 6000 मीटर तक मुकाबले में बने रहे, और आखिरी लैप का संकेत देने वाली घंटी बजने से पहले तीसरे स्थान पर आ गए। इसके बाद भारत के इस बेहतरीन लंबी दूरी के धावक ने शानदार फ़िनिशिंग की और रजत पदक पक्का किया।

यह 1986 के कॉमनवेल्थ गेम्स के बाद पहली बार था जब पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में कोई भी अफ़्रीकी एथलीट टॉप तीन में जगह नहीं बना पाया। यह मेडल पिछले दो सालों में गुलवीर की शानदार तरक्की में एक और उपलब्धि है।

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28 वर्षीय भारतीय एथलीट ने 2023 एशियाई खेलों में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता था, 2024 से कई बार भारतीय 10,000 मीटर का रिकॉर्ड तोड़ा है और उनके नाम 27:00.22 का नेशनल रिकॉर्ड है। इस साल की शुरुआत में, उन्होंने इस इवेंट में वर्ल्ड एथलेटिक्स रैंकिंग के टॉप 10 में भी जगह बनाई थी।गुलवीर ग्लासगो में 5000 मीटर दौड़ में भी हिस्सा लेंगे।

ऊंची कूद में पहला सिल्वर मेडल जीतने वाले भारतीय एथलीट बने सर्वेश कुशारे (Video)

ग्लास्गो में जारी राष्ट्रमंडल खेल 2026 में सर्वेश कुशारे ने ऐतिहासिक रजत पदक अपने नाम कर लिया है। इस टूर्नामेंट में ऊंची कूद स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाले वह पहले भारतीय एथलीट बन गए हैं।

कुशारे ने 2.25 मीटर की ऊंचाई पार कर दूसरा स्थान हासिल किया। जमैका के रोमेन बेकफोर्ड ने स्वर्ण पदक जीता। दोनों खिलाड़ी 2.25 मीटर के बाद 2.28 मीटर पार करने में असफल रहे, लेकिन काउंटबैक नियम के आधार पर बेकफोर्ड को विजेता घोषित किया गया। इंग्लैंड के जैक किमानी ने 2.20 मीटर के प्रयास के साथ कांस्य पदक जीता।अन्य भारतीय खिलाड़ी आदर्श राम 2.15 मीटर की छलांग के साथ पांचवें स्थान पर रहे।

इससे पहले राष्ट्रमंडल खेलों में ऊंची कूद में भारत का एकमात्र पदक तेजस्विन शंकर ने 2022 बर्मिंघम खेलों में कांस्य पदक के रूप में जीता था लेकिन 31 वर्षीय कुशारे ने रजत पदक जीतकर उस उपलब्धि को पीछे छोड़ दिया।

तेजस्विन ने भी सोमवार को स्पर्धा में हिस्सा लिया, लेकिन गुरुवार से शुरू होने वाली पुरुषों की डेकाथलॉन स्पर्धा की तैयारी को देखते हुए उन्होंने 2.05 मीटर के पहले प्रयास में असफल रहने के बाद हटने का फैसला किया। 27 वर्षीय तेजस्विन का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2.29 मीटर है और पिछले दो वर्षों में उन्होंने डेकाथलॉन पर ध्यान केंद्रित करने के कारण व्यक्तिगत ऊंची कूद प्रतियोगिताओं में ज्यादा हिस्सा नहीं लिया है।

मां करती थीं खेतों में मजदूरी और पिता ट्रक ड्राइवर, खुद भी की दिहाड़ी और फिर राष्ट्रमंडल में जीत गए सिल्वर! ऋषिकांत की गजब कहानी

मणिपुर के इंफाल पश्चिम जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर राष्ट्रमंडल खेलों के मंच तक का सफर तय करने वाले वेटलिफ्टर चनांबम ऋषिकांत सिंह की कहानी अदम्य साहस, कड़ी मेहनत और पारिवारिक त्याग की मिसाल है। राष्ट्रमंडल खेलों में पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में सिल्वर मेडल जीतने वाले 28 वर्षीय ऋषिकांत ने एक समय तक जेब खर्च के लिए खेतों और कंस्ट्रक्शन साइट्स पर दिहाड़ी मजदूर के रूप में भी काम किया था। PTI की रिपोर्ट के मुताबिक ऋषिकांत के बड़े भाई अमरजीत ने उनके इस प्रेरणादायक सफर और कठिनाइयों की पूरी कहानी साझा की है।

गरीबी में बीता बचपन, 200 रुपये दिहाड़ी पर काम करती थीं मां

फाल से लगभग 15-20 किलोमीटर दूर स्थित नगैरांगबाम गांव के रहने वाले ऋषिकांत के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी। नकी मां चंद्रजिनी देवी पास के खेतों में मजदूरी करती थीं। खेती के सीजन में उन्हें रोजाना 200 से 300 रुपये मिलते थे और बाकी समय में वह दूसरे छोटे-मोटे काम करती थीं। उनके पिता चनामबम इराभोट सिंह बस और ट्रक ड्राइवर थे। परिवार के पास खेती के लिए अपनी एक टुकड़ा जमीन भी नहीं थी और छह लोगों के परिवार का गुजारा रोजमर्रा की कमाई पर ही टिका था।

जेब खर्च के लिए खुद भी की मजदूरी

भाई के मुताबिक ऋषिकांत को करीब 2008 या 2009 में कक्षा 6 में खूमन लंपक स्थित नेशनल स्पोर्ट्स एकेडमी में प्रवेश मिल गया। यह एक आवासीय अकादमी थी, जहां पढ़ाई और खेल प्रशिक्षण मुफ्त था। इसके बावजूद ऋषिकांत को जेब खर्च की जरूरत तो थी ही। पर इसके लिए भी ऋषिकांत ने अपनी मां पर कभी कोई बोझ नहीं डाला। जब भी वे गर्मी या सर्दी की छुट्टियों में घर आते थे, तो अपनी मां के साथ खेतों में मजदूरी करते थे और कंस्ट्रक्शन साइट्स पर भी काम करते थे। इन मुश्किलों ने उन्हें मानसिक रूप से और अधिक मजबूत बनाया।

बॉक्सर बनने का था सपना, लेकिन किस्मत में लिखा था वेटलिफ्टिंग

ऋषिकांत की पहली पसंद मुक्केबाजी थी। वे डिंको सिंह, मैरी कॉम और सरिता देवी जैसे मणिपुर के खेल दिग्गजों से प्रभावित थे। जब नेशनल स्पोर्ट्स एकेडमी में दाखिले का ट्रायल हुआ तो उनका चयन वेटलिफ्टिंग के लिए हो गया। शुरुआत में उन्होंने बॉक्सिंग चुनने की काफी जिद की और उनके बड़े भाई ने अधिकारियों से गुहार भी लगाई। लेकिन नियम के मुताबिक खेल बदलना संभव नहीं था। इसके बाद उन्होंने वेटलिफ्टिंग को अपनाया और धीरे-धीरे उन्हें इस खेल से प्यार हो गया। लगभग पांच साल पहले उन्होंने अपने भाई से वादा किया था कि वे राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतने वाले मणिपुर के पहले पुरुष वेटलिफ्टर बनेंगे।

राष्ट्रमंडल खेलों में रचा इतिहास

रविवार को ऋषिकांत ने पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में 264 किलो (स्नैच में 121 किलो और क्लीन एंड जर्क में 143 किलो) वजन उठाकर सिल्वर मेडल जीत लिया। घुटने की चोट की वजह से वो गोल्ड मेडल जीतने से चूक गए लेकिन इसके बावजूद वे राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतने वाले मणिपुर के पहले पुरुष वेटलिफ्टर बन गए। मणिपुर ने देश को मीराबाई चानू और कुंजारानी देवी जैसी महिला वेटलिफ्टर दी हैं लेकिन पुरुषों के वर्ग में यह उपलब्धि हासिल कर ऋषिकांत ने इतिहास रच दिया।

टीवी पर पहली बार माता-पिता ने देखा लाइव प्रदर्शन

अभी भारतीय नौसेना में काम कर रहे और गुजरात में तैनात ऋषिकांत चार भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर हैं। उनके बड़े भाई अमरजीत भारतीय वायुसेना में बाड़मेर (राजस्थान) में एयरमैन के पद पर तैनात हैं, जबकि उनकी दो बहनें शादीशुदा हैं। ऋषिकांत के माता-पिता फिलहाल राजस्थान में अमरजीत के साथ हैं, जहां उनके पिता का इलाज चल रहा है। उनके माता-पिता ने पहली बार टीवी पर ऋषिकांत को लाइव खेलते और राष्ट्रमंडल खेलों में मेडल जीतते देखा। अमरजीत के मुताबिक गांव वाले घर में ऋषिकांत का कमरा जूनियर और सीनियर स्तर पर जीती गई मेडल से भरा पड़ा है। ये सब उनकी मां के त्याग का परिणाम है।

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