पिछली बार से 21 मेडल कम लाने के बावजूद भारत की चौथी रैंक बरकरार

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जापान के आइची-नागोया में खेले गए एशियाई खेलों में भारत ने धीमी शुरुआत करने के बावजूद अक्टूबर की शुरुआत में तेज रफ्तार से पदक जीतना शुरु किए जिसमें गोल्ड मेडल की अच्छी खासी संख्या रही। शुक्रवार को ही भारत ने विभिन्न खेलों में 6 गोल्ड मेडल जीते जिसमें महिला हॉकी टीम का फाइनल में चीन के खिलाफ आया गोल्ड सबसे खास रहा जो 44 साल बाद आया। यही कारण रहा कि भारत का आंकड़ा 80 पार जा पाया।अगर अंतिम दो दिनों में भारत ने 11 स्वर्ण पदकों की शानदार झड़ी नहीं लगाई होती तो शीर्ष पांच में जगह बनाना भी मुश्किल होता।

भारत 85 पदकों (21 स्वर्ण, 27 रजत, 37 कांस्य) के साथ पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा जो चीन के हांग्झोउ में हुए पिछले चरण से 21 कम है।चीन लगातार 12वें चरण में तालिका में शीर्ष पर रहा उसने 169 स्वर्ण, 89 रजत और 83 कांस्य सहित कुल 341 पदक जीते जो विदेश में आयोजित एशियाई खेलों में उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। मेजबान जापान 269 पदकों (83 स्वर्ण, 95 रजत और 91 कांस्य) के साथ दूसरे स्थान पर रहा। उसके बाद दक्षिण कोरिया के 39 स्वर्ण, 43 रजत और 68 कांस्य पदक थे।

मुक्केबाजों और तीरंदाजों के बेहतरीन प्रदर्शन का परिणाम है कि भारत पदकों की संख्या में 80 का आंकड़ा पार कर पाया। शनिवार को भारतीय पुरुष टीम मलेशिया के खिलाफ गोल्ड मेडल मैच में 5-1 से जीत दर्ज की। इसके अलावा पहलवानी में अमन सहरावत ने स्वर्ण, अंतिम पंघाल ने रजत और दीपक पुनिया ने कांस्य पदक जीतकर भारत का अभियान समाप्त किया।

भारत की महिला क्रिकेट टीम और पुरुष क्रिकेट टीम ने गोल्ड मेडल जीता है। वहीं भारत की कबड्डी की महिला और पुरुष टीम ने ईरान को हराकर गोल्ड जीता है। मीराबाई चानू ने पहली बार एशियाड में गोल्ड जीता। चोटिल होकर बाहर हो चुके नीरज चोपड़ा की गैर मौजूदगी में भी भारत के रोहित यादव और यशवीर सिंह ने रजत और कांस्य पदक जीता।

इसके अलावा कई एतिहासिक गोल्ड मेडल भारत को इन खेलों में मिले। कई खिलाड़ियों ने गोल्ड जीतकर लॉस एंजलिस ओलंपिक्स के लिए अपनी जगह बनाई। खासकर तीरंदाजी में भारत ने चौंकाने वाला प्रदर्शन किया रिकर्व तीरंदाजी महिला और पुरुष टीम ने गोल्ड जीतकर स्वत ओलंपिक क्वालिफाय किया। कुमद ने भी व्यक्तिगत स्पर्धा में गोल्ड जीता। इसके अलावा नीरू हांडा सबसे सफल एथलीट रहीं जिनको समापन समारोह में ध्वजवाहक बनने का गौरव प्राप्त हुआ।

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उन्होंने आइची-नागोया में तीन मेडल – दो गोल्ड और एक सिल्वर – जीते। नीरू ने महिलाओं के ट्रैप इवेंट में गोल्ड मेडल जीता और एशियन गेम्स 2026 में व्यक्तिगत गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय बनीं। उन्होंने महिलाओं के ट्रैप टीम इवेंट में सिल्वर मेडल भी जीता और इसके बाद मिक्स्ड ट्रैप टीम इवेंट में एक और गोल्ड मेडल अपने नाम किया।

ग्रीको रोमन वर्ग में नितेश सिवाच और सुनील कुमार ने भी शानदार प्रदर्शन किया जिससे कुश्ती का कुल प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा।

भारत को शुरुआत में बैडमिंटन, शूटिंग, टेबल टेनिस और कनोइंग में निराशा हाथ लगी अन्यथा हांगजाउ में आए 107 पदकों से आगे या बराबरी पर भारतीय दल रहता। बैडमिंटन की स्टार जोड़ी सात्विकसाइराज रंकी रेड्डी और चिराग शेट्टी एकल प्रतियोगिता के क्वार्टर फाइनल में ही हार गए। यही हाल पीवी सिंधू का रहा। बैडमिंटन की पुरुष टीम ने टीम इवेंट में ब्रॉंज मेडल जीतकर इज्जत बचाई। टेबल टेनिस की टीम  ईरान जैसी टीम के सामने हार गई। वहीं

एक और स्टार खिलाड़ी जिन्होंने निराश किया वह थी मनु भाकर जो 10 मीटर और 25 मीटर की निशानेबाजी स्पर्धा में एक भी पदक नहीं ला सकी।सबसे बड़ा उलटफेर वॉलीबॉल टीम के साथ हुआ जुलाई से बड़ी बड़ी टीमों को हराने वाली टीम पाकिस्तान से हारकर खेलों से बाहर हो जाएगी किसी ने सोचा ना था।टेनिस में भारत को बड़ा झटका लगा और भारतीय खिलाड़ी 40 साल में पहली बार बिना किसी पदक के लौटे।

Oman Cricket Team: 11 में से 7 खिलाड़ियों का एक ही सरनेम! ओमान की प्लेइंग इलेवन देखकर चकराया सबका सिर

Oman Cricket Team: ओमान की पुरुष क्रिकेट टीम ने शुक्रवार को हांगकांग, चीन के खिलाफ मैच के साथ एशियन गेम्स 2026 में अपने अभियान की शुरुआत की। लेकिन नतीजा निराशाजनक रहा, क्योंकि सुफियान महमूद की कप्तानी वाली टीम को निसिन के कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में 41 रन से हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, मैच के नतीजे से ज्यादा एक और चीज ने दुनियाभर के क्रिकेट फैंस का ध्यान खींचा और वह था ओमान की प्लेइंग इलेवन में एक ही सरनेम वाले सात खिलाड़ियों का शामिल होना। जिसे देखकर सभी क्रिकेट फैंस भी हैरान रह गए।

हॉन्ग कॉन्ग (चीन) के खिलाफ खेले जा रहे मैच में ओमान की टीम में मोहम्मद अल बलुशी, शुएब अल बलुशी, जुबैर अल बलुशी, वहीद अल बलुशी, ईसा अल बलुशी, नवीद अल बलुशी और फारिस अल बलुशी शामिल थे। इसके अलावा, टीम में इसी सरनेम वाले दो और खिलाड़ी भी हैं – वसीम अल बलुशी और कैस अल बलुशी, जिससे कुल खिलाड़ियों की संख्या 9 हो जाती है।

मोहम्मद अल बलुशी, शुएब अल बलुशी, जुबैर अल बलुशी और वहीद अल बलुशी ने ओमान के टॉप-ऑर्डर की कमान संभाली। इन चारों ने नंबर 1 से 4 तक के स्लॉट पर बैटिंग की और क्रमशः 2, 20, 0 और 1 रन बनाए। जबकि ईसा अल बलुशी ने नंबर 7 पर बैटिंग करते हुए 7 रन बनाए।

वहीं, गेंदबाजी में शोएब, नवीद और मोहम्मद अल बलुशी ने भी अपना जलवा दिखाया और कुल मिलाकर 5 विकेट लिए। इनमें से मोहम्मद ने 17 रन देकर तीन विकेट चटकाए।

इन सात खिलाड़ियों के बारे में आपको जो कुछ भी जानना चाहिए

मोहम्मद अल बलुशी ने ओमान के लिए छह T20I मैच खेले हैं; उन्होंने इसी साल सिंगापुर के खिलाफ अपना डेब्यू किया था। उनका सबसे ज्यादा स्कोर 81 रन है, जो उन्होंने 3 जून, 2026 को बहरीन के खिलाफ बनाया था। शोएब की बात करें तो उन्होंने भी मोहम्मद जितने ही T20I मैच खेले हैं। 30 साल के इस ऑलराउंडर ने अब तक 117 रन बनाए हैं और चार विकेट लिए हैं।

जुबैर अल बलुशी ने भी नेशनल टीम के लिए छह मैच खेले हैं। हालांकि, हांगकांग, चीन के खिलाफ एशियन गेम्स 2026 के शुरुआती मैच में वह अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए और बिना खाता खोले ही आउट हो गए।

वहीं वहीद की बात करें तो उन्होंने शुक्रवार को एशियाई गेम्स के मुकाबले में ओमान के लिए अपना T20I डेब्यू किया; हालांकि, उनका यह मैच काफी निराशाजनक रहा और वे बल्ले से सिर्फ एक रन ही बना पाए। जबकि ईसा अल बलूशी ने कुल मिलाकर अब तक 5 मैच खेले हैं। लेकिन उनका भी प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है और वे सिर्फ 23 रन ही बना पाए हैं।

फास्ट-बॉलिंग ऑल-राउंडर नवीद अल बलुशी की बात करें तो, उन्होंने ओमान के लिए 5 मैच खेले हैं और कुल 7 विकेट लिए हैं। उनका सबसे अच्छा प्रदर्शन सिंगापुर के खिलाफ अपने डेब्यू मैच में 4/22 का रहा है।

जबकि 29 साल के फारिस अल बलुशी ने ओमान के लिए दो है मैच खेले हैं। बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने 10 रन बनाए हैं, लेकिन उनके नाम कोई विकेट नहीं है।

हांगकांग, चीन और ओमान के बीच हुए मैच में क्या हुआ?

पहले बल्लेबाजी करते हुए हांगकांग ने 20 ओवर में 8 विकेट खोकर 121 रन बनाए। इस स्कोर का बचाव करने में टीम को कोई खास परेशानी नहीं हुई क्योंकि ओमान की टीम 6 विकेट पर सिर्फ 80 रन ही बना सकी और हांगकांग ने यह मैच 41 रनों से जीत लिया।

अब ओमान का अगला मुकाबला शनिवार को मलेशिया से होगा। क्वार्टर-फाइनल में जगह बनाने की उम्मीद बनाए रखने के लिए उन्हें यह मैच जीतना जरूरी है।

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Asian Games का सूखा खत्म कर मीराबाई चानू ने जीता एतिहासिक सिल्वर मेडल

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भारत की स्टार भारोत्तोलक मीराबाई चानू ने बुधवार को महिलाओं के 49 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतकर एशियाई खेलों में पदक का अपना लंबा इंतजार खत्म किया।तोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता मीराबाई ने स्नैच में 88 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 111 किलोग्राम भार के साथ कुल 198 किलोग्राम वजन उठाया। यह भारत का 1998 में कर्णम मल्लेश्वरी के कांस्य पदक जीतने के बाद एशियाई खेलों में भारोत्तोलन में पहला पदक है।

मीराबाई ने अभी तक ओलंपिक से लेकर विश्व चैंपियनशिप में भी पदक जीते थे लेकिन वह एशियाई खेलों में यह उपलब्धि हासिल नहीं कर पाई थी।मीराबाई ने ओलंपिक में रजत पदक, विश्व चैंपियनशिप में एक स्वर्ण सहित तीन पदक तथा राष्ट्रमंडल खेलों और राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक के अलावा एशियाई चैंपियनशिप में कांस्य पदक भी जीता है।

उत्तर कोरिया की दो बार की विश्व चैंपियन री सोंग गम ने उम्मीदों पर खरे उतरते हुए कुल 215 किलोग्राम (94 और 121 किलोग्राम) वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता और एशियाई खेलों में खिताबी हैट्रिक पूरी की।मीराबाई ने स्नैच में 83 किलोग्राम के साथ शुरुआत की और फिर अपने अगले दो प्रयासों में 85 किलोग्राम और 87 किलोग्राम वजन उठाकर प्रतियोगिता के पहले चरण में तीसरा स्थान हासिल किया।

इसके बाद उन्होंने क्लीन एंड जर्क में 111 किलोग्राम का भार उठाकर एशियाई खेलों में अपना पहला पदक जीता। उन्होंने इससे पहले दो बार एशियाई खेलों में भाग लिया था लेकिन पदक नहीं जीत पाई थी।

PM मोदी और मांडविया ने एशियाई खेलों में रजत पदक जीतने वाली मीराबाई चानू को दी बधाई 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केन्द्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियाई खेलों की भरोत्तोलन प्रतियोगिता के 49 किग्रा भार वर्ग में बुधवार को रजत पदक जीतने वाली स्टार एथलीट मीराबाई चानू को बधाई दी है।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, “मीराबाई चानू के लिए एक खास रजत पदक। महिलाओं के 49 किग्रा वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में पदक जीतने पर उन्हें बधाई। उनका दृढ़ संकल्प और निरंतरता देश को प्रेरित करते रहते हैं। भारत को उन पर गर्व है। उनके भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं।” प्रधानमंत्री ने इस मंच पर मीराबाई चानू की तस्वीर भी साझा की।

वहीं डॉ. मांडविया ने सोशल मीडिया मंच इंस्टाग्राम पर लिखा, “मीराबाई चानू के लिए ऐतिहासिक रजत पदक। एशियाई खेल 2026 में महिलाओं के 49 किग्रा वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में रजत पदक जीतने पर बधाई।यह उनका पहला एशियाई खेलों का पदक है और 28 साल बाद भारत को इन खेलों में एक और मेडल मिला है! पूरे देश को आप पर गर्व है।”

Asian Games में मेडल जीते बिना घर नहीं जाएंगी मीराबाई चानू, खा ली कसम

भारत की मीराबाई चानू का मानना है कि जापान के आइची, नागोया में होने वाले एशियाई खेल 2026 उनके इंटरनेशनल वेटलिफ्टिंग करियर की “सबसे मुश्किल प्रतियोगिताओं” में से एक होंगे।

मीराबाई चानू एशियाई खेलों में पांच सदस्यों वाली भारतीय वेटलिफ्टिंग टीम की अगुवाई करेंगी। तीन बार ओलंपिक में हिस्सा ले चुकीं मीराबाई टीम की चार महिला खिलाड़ियों में से एक होंगी। एशियाई खेलों में वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता 22 से 28 सितंबर तक आइची के टोकाई सिटिज़न जिम्नेजियम में होगी।

कॉमनवेल्थ गेम्स में अपना तीसरा गोल्ड मेडल जीतने के बाद, टोक्यो 2020 की सिल्वर मेडलिस्ट मीराबाई को लगता है कि एशियाई खेलों में मुकाबला “ओलंपिक स्तर” का होगा। मीराबाई ने कहा, “मेरी वेट कैटेगरी (49 किग्रा) में सबसे मजबूत लिफ्टर एशिया से ही आते हैं और आपको जापान में ओलंपिक जैसी झलक देखने को मिलेगी।”

इससे पहले चोटों की वजह से मीराबाई चानू एशियाई खेलों में मेडल नहीं जीत पाई थीं। हांगझोऊ में हुए पिछले खेलों में, हिप और जांघ की चोट के कारण स्नैच राउंड में ही उनका अभियान खराब हो गया था और वह 49 किग्रा कैटेगरी में चौथे स्थान पर रही थीं। जकार्ता में हुए 2018 के खेलों में, पीठ की गंभीर चोट के कारण मीराबाई चानू बाहर हो गई थीं।

आगामी एशियाई खेलों से पहले चोट से दूर रहना मीराबाई की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।उत्तर प्रदेश के मोदीनगर में एक सेंटर पर उनकी ट्रेनिंग की देखरेख करने वाले दो लोग कोच विजय शर्मा और अमेरिकी स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच डॉ. एरन हॉर्शिग हैं। डॉ. हॉर्शिग के साथ उनका जुड़ाव नवंबर 2020 में शुरू हुआ था और आज भी जारी है।

मीराबाई ने कहा, “हम हर गुरुवार उनसे वीडियो कॉल पर बात करते हैं और ट्रेनिंग, रिकवरी और आगे के कदमों के बारे में चर्चा करते हैं।” “हर चीज़ की बारीकी से समीक्षा की जाती है और चूंकि डॉ. हॉर्शिंग खुद एक वेटलिफ्टर थे, इसलिए उन्हें शरीर की हर मांसपेशी के बारे में जानकारी है। इस लगातार समीक्षा ने मुझे फिट रखा है।”

एशियाई खेलों की तैयारी ज़ोर-शोर से चल रही है। ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने के बाद मीराबाई और उनकी टीम ने एक भी दिन बर्बाद नहीं किया। कॉमनवेल्थ गेम्स के आयोजकों ने वेटलिफ्टिंग हॉल हटा दिया था, लेकिन मीराबाई, विजय शर्मा और फिजियो रोहित छाबड़िया ने ग्लासगो में एक जिम ढूंढा और ट्रेनिंग सेशन के लिए पैसे दिए।

मीराबाई ने कहा, “मैं सीधे मोदीनगर में ट्रेनिंग के लिए लौट आई। असल में, मैं घर नहीं गई और मैंने खुद को एक चुनौती दी है कि ‘जब तक मैं एशियाई खेलों में मेडल नहीं जीत लेती, तब तक घर नहीं जाऊंगी’।”

कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीन गोल्ड मेडल जीतने के बावजूद, यह भारतीय वेटलिफ्टर ग्लासगो में मुकाबले के स्तर को बहुत ज़्यादा अहमियत नहीं दे रही हैं। मीराबाई ने कहा, “सच कहूं तो, कॉमनवेल्थ गेम्स में मुकाबला मेरे लिए मुश्किल नहीं था। मुझे ग्लासगो में बहुत ज़्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी। असली परीक्षा एशियाई खेलों में होगी।”

ग्लासगो में, मीराबाई ने महिलाओं के 48 किग्रा वर्ग में कुल 190 किग्रा (स्नैच – 85 किग्रा; क्लीन एंड जर्क – 105 किग्रा) वजन उठाकर गोल्ड मेडल जीता और स्नैच, क्लीन एंड जर्क और कुल वज़न में नए कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड बनाए।

नाइजीरिया की रूथ असुकुओ न्योंग ने कुल 168 किग्रा (75 किग्रा 93 किग्रा) वजन उठाकर सिल्वर मेडल जीता, जबकि मलेशिया की आइरीन जेन हेनरी ने 167 किग्रा (77 किग्रा 90 किग्रा) वजन उठाकर ब्रॉन्ज़ मेडल जीता।

मीराबाई का अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन 205 किग्रा (89 किग्रा 116 किग्रा) है, जो उन्होंने 2021 एशियाई चैंपियनशिप और हाल ही में फरवरी 2026 में राष्ट्रीय चैंपियनशिप में किया था। “मैं देखना चाहती हूं कि मैं जापान में कितना आगे जा सकती हूं। एशियाई खेल मेरे लिए सबसे मुश्किल रहे हैं।”

मीराबाई का कहना है कि उन्हें चीन, उत्तर कोरिया, जापान और थाईलैंड के वेटलिफ्टरों से सबसे कड़े मुकाबले की उम्मीद है। पेरिस 2024 में, थाईलैंड की सुरोदचाना खाम्बाओ ने मीराबाई को सिर्फ़ एक किलो के अंतर से चौथे स्थान पर धकेल दिया। थाई एथलीट ने कुल 200 किलो वज़न उठाया था।

मीराबाई ने कहा, “हम फ़िटनेस को लेकर सावधान रहे हैं और अब तक मुझे अपने शरीर में अच्छा महसूस हुआ है।” उन्होंने आगे कहा कि एशियाई खेल ही उनका एकमात्र लक्ष्य है। “मैं देखूँगी कि एशियाई खेलों में कैसा प्रदर्शन रहता है। लॉस एंजेलिस में वेट क्लास 53 किलो होगी और मुझे अपना वज़न बढ़ाना होगा। “यह कोई समस्या नहीं होनी चाहिए, लेकिन सब कुछ एशियाई खेलों के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा और उसके बाद हम दिसंबर में होने वाले ओलंपिक क्वालीफ़ायर के लिए योजना बना सकते हैं। मुझे लगता है कि जो भी जापान में मुक़ाबला करेंगे, वे लॉस एंजेलिस 2028 को लक्ष्य बनाएँगे, लेकिन अभी मेरे लिए मिशन एशियाई खेल ही है।”

Asian Games में इस बार किसी भी हाल में पदक का सूखा खत्म करना चाहती हैं मीराबाई

साइखोम मीराबाई चानू आइची-नागोया में होने वाले 2026 एशियाई खेलों में हिस्सा लेंगी और उस बड़े मेडल को जीतने की कोशिश करेंगी जो उनके शानदार वेटलिफ्टिंग करियर में अभी तक नहीं मिल पाया है। ओलंपिक मेडल विजेता और पूर्व विश्व चैंपियन को एशियाई खेलों के लिए भारत की पांच सदस्यीय वेटलिफ्टिंग टीम में शामिल किया गया है। ये खेल जापान में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक आयोजित होंगे।

एशियाई खेल 2026 में वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता 22 से 28 सितंबर तक टोकाई सिटिजन्स जिम्नेजियम में होगी।मीराबाई चानू, जो महिलाओं के 49 किग्रा वर्ग में प्रतिस्पर्धा करेंगी, ने अभी तक एशियाई खेलों में कोई मेडल नहीं जीता है। वह हांगझोऊ 2023 में मेडल जीतने के बहुत करीब थीं, लेकिन चौथे स्थान पर रहीं।

मीराबाई ने कहा है, “एशियाई खेलों का मेडल मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण होगा। मैं अपनी पूरी कोशिश करूंगी क्योंकि मुझे वहां जीतना है जहां मैंने पहले कभी मेडल नहीं जीता है। इसलिए, एशियाई खेल मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।” आइची-नागोया में मेडल जीतने से मीराबाई चानू का तीन बड़े मल्टी-स्पोर्ट इवेंट्स – ओलंपिक, एशियाई खेल और कॉमनवेल्थ गेम्स – में मेडल का कलेक्शन पूरा हो जाएगा। मीराबाई चानू ने पिछले महीने लगातार तीसरा गोल्ड और कुल मिलाकर चौथा कॉमनवेल्थ गेम्स मेडल जीता था।

एशियाई खेलों के लिए भारत की वेटलिफ्टिंग टीम में चार महिलाएं और एक पुरुष शामिल हैं; इनमें से पांच में से चार ने पिछले महीने ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल जीते थे। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की सिल्वर मेडल विजेता ज्ञानेश्वरी यादव और हरजिंदर कौर क्रमशः महिलाओं के 53 किग्रा और 69 किग्रा वर्ग में प्रतिस्पर्धा करेंगी। सेराम निरुपमा देवी 61किग्रा कैटेगरी में महिला टीम को पूरा करती हैं।

ऋषिकांत सिंह चनमबम एशियाई खेलों में भारत के अकेले पुरुष वेटलिफ्टर होंगे। उन्होंने पिछले महीने कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीता था और वे 60किग्रा कैटेगरी में हिस्सा लेंगे।भारत ने एशियाई खेलों में वेटलिफ़्टिंग में 14 मेडल जीते हैं – पांच सिल्वर और नौ ब्रॉन्ज़ – लेकिन अभी तक कोई गोल्ड मेडल नहीं जीता है।


मीराबाई चानू ने PM को बताया, क्यों गोल्ड जीतने के बाद छलक आए थे आंसू (Video)

Mirabai Chanu

Mirabai Chanu

 

जब प्रधानमंत्री ने मीराबाई से उनसे सम्मान समारोह में भावुक होने का कारण पूछा तो मीराबाई ने पेरिस ओलंपिक में खाली हाथ आने को कारण बताया। राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान  मीराबाई ने कुल 190 किलोग्राम, स्नैच में 85 किलोग्राम और क्लीन एंव जर्क में 105 किलोग्राम वजन उठाया और स्वर्ण पदक जीता। मीरबाई चानू ने 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स और 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में भी भारत के लिए गोल्ड मेडल जीता था।

पदक मंच पर सबसे ऊंचे स्थान पर खड़े होकर राष्ट्रगान गाते समय उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। उनके बालों में तिरंगे के रंग की रिबन भी सजी हुई थी।मीराबाई ने तब  पत्रकारों से बातचीत में सबसे पहले कहा था, ‘‘जल्दी-जल्दी करो, मैंने दो दिन से कुछ खाया नहीं है। ’’

प्रधानमंत्री मोदी ने जब इसका कारण पूछा तो मीराबाई ने कहा , ‘सर, वह खुशी के आंसू थे। रोने का कारण पेरिस ओलंपिक में विफलता था। इसके बाद चोटों का एक लंबा सिलसिला चला। इस दौरान परिवार में भी काफी कुछ चला लेकिन पदक मंच पर जब राष्ट्रगान बजा तो मेरे आंसू बह निकले।

टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता मीराबाई के लिए वह दिन बेहद भावुक रहा। अपनी मां और कोच विजय शर्मा के समर्थन का जिक्र करते हुए वह एक बार फिर भावुक हो गईं थी।

उन्होंने कहा था, ‘‘उन्होंने हर अच्छे-बुरे समय में मेरा साथ दिया है। परिवार और दोस्तों की उम्मीदों का मुझ पर काफी दबाव था। भारत के लिए तीसरा स्वर्ण पदक जीतकर बहुत खुशी  है। मैं इन खेलों में खुद पर ज्यादा जोर नहीं डालना चाहती थी, लेकिन मेरा पहला प्रयास असफल रहा। कोच और मैंने पहले से तय किया था कि मैं दोनों स्पर्धाओं में केवल दो-दो प्रयास ही करूंगी। ’’

CWG 2026 Medal List: ग्लासगो में भारत ने जीते कितने मेडल? देखें गोल्ड-सिल्वर-ब्रॉन्ज की पूरी लिस्ट और मेडल टैली

Commonwealth Games 2026 Medal List: 11 दिनों तक चले रोमांचक मुकाबलों के बाद ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026 का शानदार समापन हो गया है। रविवार 2 अगस्त को एक रंगारंग समापन समारोह के साथ राष्ट्रमंडल खेलों का फ्लैग और बेटन अगले मेजबान देश भारत को सौंप दिया गया। भारतीय दल ने ग्लासगो में कई पारंपारिक और पदक दिलाने वाले खेलों (जैसे शूटिंग, कुश्ती, बैडमिंटन, हॉकी और टेबल टेनिस) को शामिल न किए जाने के बावजूद शानदार प्रदर्शन किया। भारत ने कुल 39 पदक (13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य) जीतकर मेडल टैली में चौथा स्थान हासिल किया है।

2030 में अहमदाबाद करेगा शताब्दी संस्करण की मेजबानी

समारोह के दौरान स्कॉटलैंड के अधिकारियों ने राष्ट्रमंडल खेल संघ का ध्वज और बेटन भारतीय प्रतिनिधियों ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा, भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की अध्यक्ष पीटी उषा और गुजरात के उप मुख्यमंत्री हर्ष सांघवी को सौंपा।

वर्ष 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन भारत के अहमदाबाद शहर में होगा। ये इन खेलों का 100वां यानी शताब्दी संस्करण होगा। भारत इससे पहले 2010 में नई दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेलों का सफल आयोजन कर चुका है। इसके साथ ही भारत, ऑस्ट्रेलिया के बाद एक से अधिक बार इन खेलों की मेजबानी करने वाला दुनिया का दूसरा देश बन जाएगा।

राष्ट्रमंडल खेल 2026: अंतिम मेडल टैली में टॉप 5 देश

ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026 की पदक तालिका में ऑस्ट्रेलिया ने एक बार फिर अपना वर्चस्व कायम करते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया। ऑस्ट्रेलिया कुल 171 पदकों के साथ पहले स्थान पर रहा, जिसमें 70 स्वर्ण, 45 रजत और 56 कांस्य पदक शामिल हैं। इंग्लैंड ने 29 स्वर्ण, 45 रजत और 36 कांस्य पदक जीतकर कुल 110 पदकों के साथ दूसरा स्थान प्राप्त किया। जबकि कनाडा 19 स्वर्ण, 20 रजत और 23 कांस्य मिलाकर कुल 62 पदकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा।

भारत के खाते में आए 39 मेडल

भारत ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदकों के साथ कुल 39 मेडल जीतकर तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। मेजबान स्कॉटलैंड ने भी कुल 39 पदक जीते। लेकिन उसके खाते में 13 स्वर्ण, 9 रजत और 17 कांस्य पदक आए। भारत के पास स्कॉटलैंड से अधिक रजत पदक (17) होने के कारण भारतीय दल पदक तालिका में पांचवें स्थान पर रहे स्कॉटलैंड से ऊपर चौथे स्थान पर रहा।

खेलों में भारत का प्रदर्शन: बॉक्सिंग का रहा दबदबा

भारतीय एथलीटों ने मुक्केबाजी, एथलेटिक्स, जूडो, पैरा स्पोर्ट्स और भारोत्तोलन में बेहतरीन प्रदर्शन किया। मुक्केबाजी भारत का सबसे सफल खेल रहा, जिसने कुल 10 पदक दिलाए (7 स्वर्ण और 3 रजत)। ट्रैक एंड फील्ड और पैरा एथलीट्स ने कई ऐतिहासिक पदक जीते। जूडोकाओं ने अहम पदक जोड़े, जबकि वेटलिफ्टरों ने भारत के मेडल खाते को मजबूती दी। हालांकि जुडोका तुलिका मान को एंटी-डोपिंग नियमों के तहत सस्पेंड होने के कारण खेलों से बाहर होना पड़ा, जो भारत के लिए एक शुरुआती झटका था।

CWG 2026: भारत के पदक विजेताओं की पूरी लिस्ट

1- बॉक्सिंग (Boxing) – 10 मेडल (7 Gold, 3 Silver)

गोल्ड: प्रीति पवार (महिला 51 किग्रा)

गोल्ड: साक्षी चौधरी (महिला 54 किग्रा)

गोल्ड: जैस्मिन लंबोरिया (महिला 57 किग्रा)

गोल्ड: प्रिया घनघस (महिला 60 किग्रा)

गोल्ड: अरुंधति चौधरी (महिला 66 किग्रा)

गोल्ड: सचिन सिवाच (पुरुष 55 किग्रा)

गोल्ड: अंकुश पंघाल (पुरुष 65 किग्रा)

सिल्वर: लवलीना बोरगोहेन (महिला 75 किग्रा)

सिल्वर: जादुमणि सिंह (पुरुष 50 किग्रा)

सिल्वर: नरेंद्र बेरवाल (पुरुष +90 किग्रा)

2- पैरा एथलेटिक्स – 6 मेडल (3 Gold, 2 Silver, 1 Bronze)

गोल्ड: शर्मीला ढाका (महिला शॉट पुट F57)

गोल्ड: दिलीप गावित (पुरुष 100 मीटर T47)

गोल्ड: सोमन राणा (पुरुष शॉट पुट F57)

सिल्वर: मोहम्मद बासिल (पुरुष 100 मीटर T47)

सिल्वर: शुभम जुयाल (पुरुष शॉट पुट F57)

कांस्य: शिल्पा शैला (महिला शॉट पुट F57)

3- जूडो – 4 मेडल (2 Gold, 1 Silver, 1 Bronze)

गोल्ड: अस्मिता डे (महिला 48 किग्रा)

गोल्ड: हर्ष सिंह (पुरुष 60 किग्रा)

सिल्वर: यामिनी मौर्या (महिला 57 किग्रा)

कांस्य: उन्नति शर्मा (महिला 63 किग्रा)

4- भारोत्तोलन – 8 मेडल (1 Gold, 6 Silver, 1 Bronze)

गोल्ड: सायखोम मीराबाई चानू (महिला 48 किग्रा)

सिल्वर: ऋषिकान्त सिंह (पुरुष 60 किग्रा)

सिल्वर: मुथुपंडी राजा (पुरुष 65 किग्रा)

सिल्वर: ज्ञानेश्वरी यादव (महिला 53 किग्रा)

सिल्वर: वल्लूरी अजय बाबू (पुरुष 79 किग्रा)

सिल्वर: हरजिंदर कौर (महिला 69 किग्रा)

सिल्वर: लवप्रीत सिंह (पुरुष +110 किग्रा)

कांस्य: बिंद्यारानी देवी (महिला 58 किग्रा)

5- एथलेटिक्स – 10 मेडल (5 Silver, 5 Bronze)

सिल्वर: नीरज चोपड़ा (पुरुष भाला फेंक / Javelin Throw)

सिल्वर: मुरली श्रीशंकर (पुरुष लंबी कूद / Long Jump)

सिल्वर: प्रवीण चित्रवेल (पुरुष ट्रिपल जंप / Triple Jump)

सिल्वर: सर्वेश अनिल कुशारे (पुरुष ऊंची कूद / High Jump)

सिल्वर: गुलवीर सिंह (पुरुष 10,000 मीटर दौड़)

कांस्य: यशवीर सिंह (पुरुष भाला फेंक / Javelin Throw)

कांस्य: सेल्वा प्रभु थिरुमारन (पुरुष ट्रिपल जंप / Triple Jump)

कांस्य: गुलवीर सिंह (पुरुष 5,000 मीटर दौड़)

कांस्य: तेजस्विन शंकर (पुरुष डेकाथलॉन / Decathlon)

कांस्य: सीमा कालीरामना (महिला डिस्क थ्रो / Discus Throw)

6 – पैरा पावरलिफ्टिंग – 1 मेडल (1 Bronze)

कांस्य : झंडू कुमार (पुरुष हैवीवेट)

ग्लासगो 2026 के सफल समापन के बाद अब भारतीय खेल जगत की निगाहें 2030 अहमदाबाद राष्ट्रमंडल खेलों पर टिक गई हैं।

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Commonwealth Games भारोत्तोलन में सिर्फ एक दिन में भारत जीता 3 मेडल

commonwealth games

ग्लासगो में खेले जा रहे 2026 में यह साबित हो गया कि भारत भारोत्तोलन में सिर्फ मीराबाई चानू पर निर्भर नहीं है। भारत ने सोमवार को ही भारोत्तोलन में 3 मेडल जीते। भारोत्तोलन के महिला 53 किग्रा वर्ग में एशियाई चैंपियनशिप कांस्य पदक विजेता ज्ञानेश्वरी ने लगातार बनते-बिगड़ते रिकॉर्ड के बीच सोमवार को रजत पदक जीता।

छत्तीसगढ़ के भोंडिया गांव की 23 साल की ज्ञानेश्वरी ने स्नैच में 88 किलो और क्लीन एंड जर्क में 111 किलो समेत कुल 199 किलो वजन उठाया। नाइजीरिया की ओनोमे ओमोलोला ने राष्ट्रमंडल खेलों का रिकॉर्ड तोड़कर 206 किलो वजन उठाते हुए स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने स्नैच में 93 किलो और क्लीन एंड जर्क में 113 किलो वजन उठाया।

वल्लुरी अजय बाबू ने पुरुषों के 79 किग्रा वर्ग में सिल्वर मेडल जीता

वल्लुरी अजय बाबू ने पुरुषों के 79 किग्रा वर्ग के फ़ाइनल में कुल 330 किग्रा (149 किग्रा स्नैच 181 किग्रा क्लीन एंड जर्क) वज़न उठाकर सिल्वर मेडल जीता। उनका 149 किग्रा का स्नैच कॉमनवेल्थ गेम्स का रिकॉर्ड था। वल्लुरी अजय बाबू ने 145 किग्रा से शुरुआत की, भारतीय अपने दूसरे प्रयास में 149 किग्रा वजन उठाने में असफल रहे, लेकिन अपने अंतिम प्रयास में उन्होंने सफलतापूर्वक उतना ही वजन उठा लिया।

अजय बाबू ने अपने पिता वल्लुरी श्रीनिवास राव के नक्शेकदम पर चलते हुए यह उपलब्धि हासिल की; उनके पिता ने भी 2010 में नई दिल्ली में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता था। अजय बाबू स्वर्ण पदक जीतने से मामूली अंतर से चूक गए। वह मलेशिया के एरी हिदायत मुहम्मद से एक किग्रा पीछे रहे। एरी हिदायत मुहम्मद ने 331 किग्रा (147 184) वजन उठाकर नया गेम्स रिकॉर्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक जीता जबकि इंग्लैंड के क्रिस मरे ने 325 किग्रा (148 177) वजन उठाकर कांस्य पदक अपने नाम किया।

बिंद्यारानी देवी ने जीता कांस्य पदक

भारत की बिंद्यारानी देवी ने महिलाओं के 58 किग्रा वर्ग में कुल 199 किग्रा वज़न उठाकर तीसरा स्थान हासिल किया और कॉमनवेल्थ गेम्स में अपना दूसरा मेडल जीता।बर्मिंघम 2022 में सिल्वर मेडल जीतने वाली बिंद्यारानी ने स्नैच में 87 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 112 किग्रा वज़न उठाकर ब्रॉन्ज़ मेडल पक्का किया। यह भारत का भारोत्तोलन में पांचवां पदक है।

कॉमनवेल्थ गेम्स मेडलिस्ट बिंद्यारानी देवी ने स्नैच राउंड में 87 किग्रा के बेस्ट लिफ़्ट के साथ चौथे स्थान पर थीं। उन्होंने 83किग्रा से शुरुआत की, फिर इसे बेहतर करते हुए 85किग्रा और अपने तीसरे प्रयास में 87किग्रा वज़न उठाया। उन्होंने क्लीन एंड जर्क में 112 किग्रा वज़न उठाकर कांस्य पदक अपने नाम किया।नाइजीरिया की राफियातु फोलाशाडे लावल ने 229 किग्रा (103 126) वजन उठाकर राष्ट्रमंडल खेल रिकॉर्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक जीता जबकि कनाडा की एन सोफी टैस्चेरो ने 215 किग्रा (94 121) वजन उठाकर रजत जीता।

मां करती थीं खेतों में मजदूरी और पिता ट्रक ड्राइवर, खुद भी की दिहाड़ी और फिर राष्ट्रमंडल में जीत गए सिल्वर! ऋषिकांत की गजब कहानी

मणिपुर के इंफाल पश्चिम जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर राष्ट्रमंडल खेलों के मंच तक का सफर तय करने वाले वेटलिफ्टर चनांबम ऋषिकांत सिंह की कहानी अदम्य साहस, कड़ी मेहनत और पारिवारिक त्याग की मिसाल है। राष्ट्रमंडल खेलों में पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में सिल्वर मेडल जीतने वाले 28 वर्षीय ऋषिकांत ने एक समय तक जेब खर्च के लिए खेतों और कंस्ट्रक्शन साइट्स पर दिहाड़ी मजदूर के रूप में भी काम किया था। PTI की रिपोर्ट के मुताबिक ऋषिकांत के बड़े भाई अमरजीत ने उनके इस प्रेरणादायक सफर और कठिनाइयों की पूरी कहानी साझा की है।

गरीबी में बीता बचपन, 200 रुपये दिहाड़ी पर काम करती थीं मां

फाल से लगभग 15-20 किलोमीटर दूर स्थित नगैरांगबाम गांव के रहने वाले ऋषिकांत के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी। नकी मां चंद्रजिनी देवी पास के खेतों में मजदूरी करती थीं। खेती के सीजन में उन्हें रोजाना 200 से 300 रुपये मिलते थे और बाकी समय में वह दूसरे छोटे-मोटे काम करती थीं। उनके पिता चनामबम इराभोट सिंह बस और ट्रक ड्राइवर थे। परिवार के पास खेती के लिए अपनी एक टुकड़ा जमीन भी नहीं थी और छह लोगों के परिवार का गुजारा रोजमर्रा की कमाई पर ही टिका था।

जेब खर्च के लिए खुद भी की मजदूरी

भाई के मुताबिक ऋषिकांत को करीब 2008 या 2009 में कक्षा 6 में खूमन लंपक स्थित नेशनल स्पोर्ट्स एकेडमी में प्रवेश मिल गया। यह एक आवासीय अकादमी थी, जहां पढ़ाई और खेल प्रशिक्षण मुफ्त था। इसके बावजूद ऋषिकांत को जेब खर्च की जरूरत तो थी ही। पर इसके लिए भी ऋषिकांत ने अपनी मां पर कभी कोई बोझ नहीं डाला। जब भी वे गर्मी या सर्दी की छुट्टियों में घर आते थे, तो अपनी मां के साथ खेतों में मजदूरी करते थे और कंस्ट्रक्शन साइट्स पर भी काम करते थे। इन मुश्किलों ने उन्हें मानसिक रूप से और अधिक मजबूत बनाया।

बॉक्सर बनने का था सपना, लेकिन किस्मत में लिखा था वेटलिफ्टिंग

ऋषिकांत की पहली पसंद मुक्केबाजी थी। वे डिंको सिंह, मैरी कॉम और सरिता देवी जैसे मणिपुर के खेल दिग्गजों से प्रभावित थे। जब नेशनल स्पोर्ट्स एकेडमी में दाखिले का ट्रायल हुआ तो उनका चयन वेटलिफ्टिंग के लिए हो गया। शुरुआत में उन्होंने बॉक्सिंग चुनने की काफी जिद की और उनके बड़े भाई ने अधिकारियों से गुहार भी लगाई। लेकिन नियम के मुताबिक खेल बदलना संभव नहीं था। इसके बाद उन्होंने वेटलिफ्टिंग को अपनाया और धीरे-धीरे उन्हें इस खेल से प्यार हो गया। लगभग पांच साल पहले उन्होंने अपने भाई से वादा किया था कि वे राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतने वाले मणिपुर के पहले पुरुष वेटलिफ्टर बनेंगे।

राष्ट्रमंडल खेलों में रचा इतिहास

रविवार को ऋषिकांत ने पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में 264 किलो (स्नैच में 121 किलो और क्लीन एंड जर्क में 143 किलो) वजन उठाकर सिल्वर मेडल जीत लिया। घुटने की चोट की वजह से वो गोल्ड मेडल जीतने से चूक गए लेकिन इसके बावजूद वे राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतने वाले मणिपुर के पहले पुरुष वेटलिफ्टर बन गए। मणिपुर ने देश को मीराबाई चानू और कुंजारानी देवी जैसी महिला वेटलिफ्टर दी हैं लेकिन पुरुषों के वर्ग में यह उपलब्धि हासिल कर ऋषिकांत ने इतिहास रच दिया।

टीवी पर पहली बार माता-पिता ने देखा लाइव प्रदर्शन

अभी भारतीय नौसेना में काम कर रहे और गुजरात में तैनात ऋषिकांत चार भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर हैं। उनके बड़े भाई अमरजीत भारतीय वायुसेना में बाड़मेर (राजस्थान) में एयरमैन के पद पर तैनात हैं, जबकि उनकी दो बहनें शादीशुदा हैं। ऋषिकांत के माता-पिता फिलहाल राजस्थान में अमरजीत के साथ हैं, जहां उनके पिता का इलाज चल रहा है। उनके माता-पिता ने पहली बार टीवी पर ऋषिकांत को लाइव खेलते और राष्ट्रमंडल खेलों में मेडल जीतते देखा। अमरजीत के मुताबिक गांव वाले घर में ऋषिकांत का कमरा जूनियर और सीनियर स्तर पर जीती गई मेडल से भरा पड़ा है। ये सब उनकी मां के त्याग का परिणाम है।

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मीराबाई चानू ने रचा इतिहास, कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीसरी बार जीता गोल्ड

meerabai chanu wins gold in common wealth games 2026

राष्ट्रमंडल खेल 2026 के चौथे दिन भारत ने ग्लास्को में एक स्वर्ण और दो रजत पदक जीते। वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने 48 किग्रा वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर न सिर्फ भारत के लिए गोल्ड मेडल का खाता खोला बल्कि एक नया इतिहास रच दिया है। इस जीत के साथ ही उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीसरा गोल्ड मेडल जीतकर अपनी हैट्रिक पूरी की। 

 

मीराबाई ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया है। उन्होंने स्नैच राउंड में 85 किग्रा वजन उठाया। यह वजन कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में अब तक किसी भी खिलाड़ी द्वारा उठाया गया सबसे ज्यादा वजन है। इसके बाद क्लीन एंड जर्क में अपने दूसरे प्रयास में उन्होंने 105 किलो वजन उठाया।  

 

वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने रविवार को भारत को दिलाया पहला गोल्ड जीता तो भारोत्तोलक राजा मुथुपांडी और ऋषिकांत सिंह भी रजत पदक जीतने में सफल रहे। भारत के जादूमणि सिंह ने पाकिस्तान के मुक्केबाज सुमामा रेहमान को पुरुष 55 किग्रा के राउंड ऑफ 16 में हराया।

 

पीएम मोदी ने दी बधाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि भारतीय भारोत्तोलन में एक और गौरवशाली अध्याय!

प्रतिभाशाली मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स में 48 किलोग्राम वर्ग में एक बार फिर शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। राष्ट्रमंडल खेलों में लगातार स्वर्ण पदक जीतने और अपने नाम कुल चार पदक करने वाली मीराबाई हर भारतीय के लिए प्रेरणा बनी हुई हैं। उन्हें ढेरों बधाई! आगे के सभी प्रयासों के लिए ढेरों शुभकामनाएं।

मीरबाई चानू ने 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स और 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में भी भारत के लिए गोल्ड मेडल जीता था। वे ओलंपिक में भी भारत के लिए स्वर्ण पदक जीत चुकी है।