चाइना मास्टर्स के पहले मुकाबले में लक्ष्य सेन को मिल सकता है वॉकओवर, हटा यह फ्रेंच चैंपियन

Lakshya Sen

मंगलवार को शेनझेन स्पोर्ट्स सेंटर जिम्नेजियम में 1 से 6 सितंबर तक होने वाले सुपर 750 बैडमिंटन टूर्नामेंट चाइना मास्टर्स 2026 में भारत के शीर्ष बैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्य सेन, सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी खेलते हुए नज़र आएंगे।दुनिया के 13वें नंबर के खिलाड़ी लक्ष्य का पहला मुकाबला फ्रांस के नए वर्ल्ड चैंपियन एलेक्स लैनियर के खिलाफ होना था लेकिन उन्होंने अंतिम लम्हों से टूर्नामेंट से नाम वापस ले लिया। यह बुरे फॉर्म से गुजर रहे लक्ष्य सेन के लिए राहत की बात है।

21 साल के लैनियर अगस्त में नई दिल्ली में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप के फाइनल में जापान के कोडाई नारोका को हराकर पुरुष सिंगल्स का वर्ल्ड टाइटल जीतने वाले पहले फ्रांसीसी खिलाड़ी बने थे।

लैनियर और लक्ष्य के बीच पिछली भिड़ंत पिछले साल डेनमार्क ओपन के क्वार्टर फाइनल में हुई थी, जिसमें फ्रांसीसी शटलर ने 21-9, 21-14 से जीत हासिल की थी।25 साल के भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी वर्ल्ड चैंपियनशिप में अमेरिका के दुनिया के 92वें नंबर के खिलाड़ी गैरेट टैन से दूसरे राउंड में मिली हार के बाद वापसी करने की कोशिश करेंगे।

आयुष शेट्टी, जिन्होंने नई दिल्ली में पहले राउंड में चीन के 2025 वर्ल्ड चैंपियन शी युकी को हराया था, इस टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले रहे हैं।दो बार की ओलंपिक मेडलिस्ट पीवी सिंधु भी भारतीय टीम में शामिल नहीं हैं। पूर्व वर्ल्ड नंबर 1 किदांबी श्रीकांत पुरुष सिंगल्स में भारत के दूसरे प्रतिनिधि होंगे। 33 साल के भारतीय खिलाड़ी जून में सुपर 300 टूर्नामेंट, यूएस ओपन में रनर-अप रहे थे।

दुनिया के नंबर 5 खिलाड़ी सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी शेनझेन में भारत की डबल्स चुनौती की अगुवाई करेंगे। चौथी वरीयता प्राप्त इस जोड़ी ने मई में सिंगापुर बैडमिंटन ओपन (एक और सुपर 750 टूर्नामेंट) जीता था और नई दिल्ली में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय किया था।

भारत महिला सिंगल्स में तीन होनहार युवा खिलाड़ियों – उन्नति हुड्डा, तन्वी शर्मा और देविका सिहाग – को उतारेगा।ताज़ा बैडमिंटन रैंकिंग में दुनिया की नंबर 25 खिलाड़ी, 18 साल की उन्नति ने नई दिल्ली में अपने पहले वर्ल्ड चैंपियनशिप में दूसरे राउंड तक जगह बनाई थी, जहाँ उन्हें कनाडा की मिशेल ली से तीन गेम के कड़े मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा था।

दुनिया की नंबर 26 खिलाड़ी तन्वी के लिए यह सीज़न शानदार रहा है और उन्होंने ताइपे ओपन में अपना पहला बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर खिताब जीता है। वहीं, देविका ने इस साल की शुरुआत में सुपर 300 टूर्नामेंट, थाईलैंड मास्टर्स जीता था। ये तीनों खिलाड़ी आइची-नागोया में होने वाले आगामी एशियाई खेलों के लिए भारत की महिला टीम का हिस्सा हैं।

मिक्स्ड डबल्स में भी भारत का प्रतिनिधित्व ध्रुव कपिला-तनीषा क्रास्टो और रोहन कपूर-रुत्विका शिवानी गद्दे करेंगे।शेनझेन में महिला डबल्स में भारत का कोई प्रतिनिधित्व नहीं होगा। ट्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद, जिन्होंने पिछले हफ़्ते नई दिल्ली में वर्ल्ड चैंपियनशिप में ऐतिहासिक ब्रॉन्ज़ मेडल जीता था, इस टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले रही हैं।

चाइना मास्टर्स, एशियाई खेलों के लिए भारत की 20 सदस्यीय बैडमिंटन टीम के कई सदस्यों के लिए तैयारी का एक अच्छा मौका भी होगा। एशियाई खेल जापान के आइची-नागोया में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक आयोजित होंगे।

लक्ष्य, श्रीकांत, उन्नति, तन्वी, देविका, सात्विक, चिराग, अर्जुन, हरिहरन, ध्रुव और तनीषा – एशियाई खेलों की बैडमिंटन टीम के ये 11 सदस्य शेनझेन में मुकाबला करेंगे।2005 में इस टूर्नामेंट की शुरुआत के बाद से किसी भी भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी ने चाइना मास्टर्स नहीं जीता है।

इस युवा भारतीय ने स्क्वैश में जीता बूडापेस्ट ओपन का खिताब

भारत के वेलावन सेंथिलकुमार ने बुडापेस्ट ओपन 2026 के फाइनल में हंगरी के नंबर 1 बालाज़ फार्कस को सीधे गेम में हराकर अपना पहला पीएसए कॉपर-लेवल स्क्वैश खिताब जीता। शुक्रवार को खेले गये मुकाबले में दुनिया के नंबर 54 खिलाड़ी और आठवीं वरीयता प्राप्त सेंथिलकुमार ने खिताबी मुकाबले में नौवीं वरीयता प्राप्त फार्कस को 11-4, 11-2, 11-3 से हराकर हंगरी की राजधानी में एक शानदार सप्ताह का समापन किया।

पीएसए टूर पर सेंथिलकुमार और फार्कस के बीच यह तीसरा मुकाबला था, जिसमें अब भारतीय खिलाड़ी हेड-टू-हेड रिकॉर्ड में 2-1 से आगे है। 2019 में अपनी पहली मुलाकात में फार्कस की जीत के बाद, सेंथिलकुमार ने 2024 में पिछला मुकाबला जीता था। वेलावन सेंथिलकुमार के लिए इस सप्ताह का सबसे बड़ा नतीजा क्वार्टर फाइनल में आया, जब उन्होंने मलेशिया के दुनिया के नंबर 18 और शीर्ष वरीयता प्राप्त खिलाड़ी ईन यो एनजी को सीधे गेम में चौंका दिया। भारतीय खिलाड़ी ने मौजूदा एशियाई खेलों के चैंपियन पर 11-2, 11-9, 11-8 से शानदार जीत दर्ज की, जो उनके करियर की सबसे बड़ी जीतों में से एक रही।

सेंथिलकुमार ने इंग्लैंड के विल साल्टर को 11-9, 11-6, 11-5 से सीधे गेम में हराकर बुडापेस्ट ओपन में अपने अभियान की शुरुआत की थी। इसके बाद 28 वर्षीय भारतीय स्क्वैश खिलाड़ी ने दूसरे दौर में जर्मनी के पांचवीं वरीयता प्राप्त राफेल कांड्रा को 11-9, 6-11, 11-7, 11-2 से हराकर एनजी के साथ अपना मुकाबला तय किया। मलेशियाई शीर्ष वरीयता प्राप्त खिलाड़ी को हराने के बाद, सेंथिलकुमार का सामना सेमीफ़ाइनल में अपने ही देश के और तीसरी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी वीर चोटरानी से हुआ।पूरी तरह से भारतीयों के बीच हुआ यह मुकाबला टूर्नामेंट का उनका सबसे कठिन मैच साबित हुआ।

पहला गेम हारने के बाद सेंथिलकुमार ने वापसी की और अंततः पांच गेम में 9-11, 11-8, 11-7, 1-11, 12-10 से जीत हासिल कर फ़ाइनल में जगह बनाई। इसके बाद उन्हें फार्कास को हराने और अपना 11वां पीएसए स्क्वैश टूर खिताब जीतने के लिए सिर्फ़ तीन गेम की ज़रूरत पड़ी। ह जीत आइची-नागोया में होने वाले 2026 एशियाई खेलों से पहले मिली है, जहां सेंथिलकुमार के पास पुरुष एकल स्पर्धा में बेहतर प्रदर्शन करने का एक अतिरिक्त प्रोत्साहन होगा। स्क्वैश लॉए एंजिल्स 2028 में ओलंपिक में डेब्यू करेगा, और 2026 एशियाई खेलों के पुरुष और महिला एकल चैंपियन ओलंपिक के लिए क्वालिफ़िकेशन हासिल करेंगे।

Asian Games में इस तारीख से शुरु होंगे भारतीय पुरुष और महिला टीम के मुकाबले

एशियन गेम्स में अपने खिताब की रक्षा के लिए भारत की तैयारियां क्रिकेट अभियान शुरू होने से काफी पहले ही शुरू हो जाएंगी। पुरुष और महिला दोनों टीमों के सितंबर के मध्य में जापान जाने की उम्मीद है, ताकि वे वहां के माहौल में ढल सकें और अपनी तैयारियों को बेहतर बना सकें।

भारतीय टीमों के 14 या 15 सितंबर के आसपास नागोया के लिए रवाना होने की संभावना है, जिससे उन्हें प्रतियोगिता शुरू होने से पहले वहां सेटल होने के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा। महिला टूर्नामेंट 17 सितंबर से शुरू होगा, जबकि पुरुषों का अभियान 28 सितंबर से शुरू होगा।

हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली महिला टीम को अपना अभियान जल्दी शुरू करने का अतिरिक्त फायदा मिलेगा और उनका पहला मुकाबला 18 सितंबर को मेजबान जापान से होगा। श्रेयस अय्यर की कप्तानी वाली पुरुष टीम प्रतियोगिता में उतरने से पहले अपनी तैयारियों के तहत दो क्लब टीमों और जापान के खिलाफ प्रैक्टिस मैच खेल सकती है।

कई रिपोर्टों के अनुसार, एशियन क्रिकेट काउंसिल (एसीसी) का एक प्रतिनिधिमंडल भी जापान का दौरा कर सकता है ताकि भाग लेने वाले टेस्ट खेलने वाले देशों के लिए लॉजिस्टिकल व्यवस्थाओं का जायजा लिया जा सके। दोनों भारतीय टीमें डिफेंडिंग चैंपियन के तौर पर प्रतियोगिता में उतरेंगी और उन्हें क्वार्टर फाइनल में सीधे एंट्री मिली है। भारत ने चीन में हुए पिछले संस्करण में पुरुष और महिला दोनों इवेंट में गोल्ड मेडल जीता था।

शुरुआती चरण पूरे होने के बाद, पुरुष टीम का मुकाबला ग्रुप ए की दूसरे स्थान पर रहने वाली टीम से होगा, जिसमें अफगानिस्तान, जापान और नेपाल शामिल हैं। पुरुषों की प्रतियोगिता में भारत, बंगलादेश, पाकिस्तान और श्रीलंका चार सीडेड टीमें हैं।

महिला इवेंट में, भारत के लिए क्वार्टर फाइनल का प्रतिद्वंद्वी पहले ही तय हो चुका है, जिसमें डिफेंडिंग चैंपियन सहित आठ टीमें सीडेड हैं। महिला फाइनल 22 सितंबर को होना है, जबकि पुरुषों का गोल्ड-मेडल मैच 3 अक्टूबर को खेला जाएगा। एशियन गेम्स की ओपनिंग सेरेमनी 19 सितंबर को नागोया के पास कोरोगी एथलेटिक पार्क में होनी है।

विश्व चैंपियनशिप ब्रॉंज के बाद 27वीं रैंक तक पहुंची त्रिसा और गायत्री

Treesa Jolly Gayatri Gopichand

भारत की महिला डबल्स जोड़ी ट्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने हाल ही में यहाँ हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में ऐतिहासिक ब्रॉन्ज़ मेडल जीतने के बाद बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड रैंकिंग में बड़ी छलांग लगाई है। भारतीय जोड़ी 12 स्थान ऊपर चढ़कर वर्ल्ड नंबर 39 से नंबर 27 पर पहुँच गई है। उनके रैंकिंग पॉइंट्स भी 33,692 से बढ़कर 44,192 हो गए हैं।

ट्रीसा और गायत्री ने घरेलू वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत के लिए एकमात्र मेडल जीता। सेमीफाइनल तक पहुँचने के साथ ही वे 2011 में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा के बाद इस इवेंट में मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला डबल्स जोड़ी बन गईं।

भारतीय जोड़ी ने क्वार्टर फाइनल में टूर्नामेंट का एक बड़ा उलटफेर करते हुए चौथी वरीयता प्राप्त चीनी जोड़ी जिया यी फैन और झांग शू जियान को 16-21, 21-15, 21-13 से हराया, जबकि वे पहला गेम हार गई थीं।

इसके बाद सेमीफाइनल में उनका सामना वर्ल्ड नंबर 1 और मौजूदा चैंपियन लियू शेंग शू और टैन निंग से हुआ। ट्रीसा और गायत्री ने पहला गेम तो जीता, लेकिन अपनी बढ़त बनाए नहीं रख सकीं और अगले दो गेम हारकर उन्हें ब्रॉन्ज़ मेडल से संतोष करना पड़ा। इस नतीजे के साथ ही 2011 से वर्ल्ड चैंपियनशिप के हर संस्करण में कम से कम एक मेडल जीतने का भारत का सिलसिला भी जारी रहा।

पुरुष सिंगल्स रैंकिंग में भी शीर्ष पर बड़ा बदलाव हुआ। इंडोनेशिया के जोनाथन क्रिस्टी दो स्थान ऊपर चढ़कर नए वर्ल्ड नंबर 1 बन गए, जबकि वे केवल राउंड ऑफ़ 16 तक ही पहुँच पाए थे।

शी यूकी, जो शीर्ष स्थान पर थे, भारत के आयुष शेट्टी से शुरुआती दौर में हारने के बाद पाँच स्थान गिरकर नंबर 6 पर आ गए। वहीं, शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय खिलाड़ी आयुष शेट्टी दो स्थान ऊपर चढ़कर नंबर 20 पर पहुँच गए। लक्ष्य सेन भी एक स्थान ऊपर चढ़कर नंबर 13 पर आ गए।

अन्य खिलाड़ियों में, कुनलावुत वितिदसर्न और एंडर्स एंटोनसेन भी एक-एक स्थान गिरकर क्रमशः नंबर 3 और नंबर 5 पर आ गए। क्रिस्टो पोपोव तीन स्थान ऊपर चढ़कर दूसरे नंबर पर आ गए, जबकि चाउ टिएन चेन दो स्थान ऊपर चढ़कर चौथे नंबर पर पहुंच गए। वर्ल्ड चैंपियन एलेक्स लैनियर तीन स्थान ऊपर चढ़कर सातवें नंबर पर आ गए।

लक्ष्य के बाद सिंधु और आयुष समेत 3 भारतीय दिग्गज World Championship में हारकर बाहर

पी वी सिंधु और आयुष शेट्टी वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप के चौथे दिन गुरूवार को राउंड ऑफ़ 16 से बाहर हो गए, जबकि ध्रुव कपिला और तनीषा क्रास्टो भी मिक्स्ड डबल्स से बाहर हो गए। गौरतलब है कि बुधवार को लक्ष्य सेन 92 रैंक के अमेरिकी खिलाड़ी  जी टैन से 21-19, 19-21, 17-21 से हारकर बाहर हो गए थे।

दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में चौथे दिन भारत को पुरुष और महिला सिंगल्स, दोनों में हार का सामना करना पड़ा। आयुष शेट्टी का वर्ल्ड चैंपियनशिप का सफ़र प्री-क्वार्टर फ़ाइनल में खत्म हो गया, जब इंडोनेशिया के अल्वी फरहान ने उन्हें 21-19, 21-11 से हराया। सिंधु भी राउंड ऑफ़ 16 से बाहर हो गईं; वे चीन की वांग झी यी से कड़े मुकाबले में 11-21, 21-15, 17-21 से हार गईं। वांग झी यी ने क्रैम्प्स (मांसपेशियों में ऐंठन) के बावजूद क्वार्टर फ़ाइनल में जगह बनाई।

दिल्ली में घरेलू दर्शकों के लिए यह दिन निराशाजनक रहा, क्योंकि पीवी सिंधु भी चीन की वांग झी यी से ‘राउंड ऑफ़ 16’ के 88 मिनट चले मुकाबले में हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गईं। पांच बार की वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडलिस्ट सिंधु ने कड़ी टक्कर दी, लेकिन 11-21, 21-15, 17-21 से हार गईं; वहीं वांग ने क्रैम्प्स (मांसपेशियों में ऐंठन) के बावजूद जीत हासिल कर क्वार्टर-फ़ाइनल में अपनी जगह पक्की की। इस हार के साथ ही वर्ल्ड चैंपियनशिप में चीनी खिलाड़ियों के खिलाफ सिंधु का 8-0 का शानदार रिकॉर्ड भी टूट गया।

Treesa Jolly Gayatri Gopichand

सिर्फ महिला और पुरुष जोड़ी पहुंची क्वार्टरफाइनल में

महिला डबल्स में घरेलू टीम के लिए खुशी की बात रही, क्योंकि ट्रेसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने जापान की सातवीं वरीयता प्राप्त जोड़ी रिन इवानागा और की नाकानिशी को 21-16, 21-12 से हराकर क्वार्टर फ़ाइनल में प्रवेश किया।इसके अलावा सात्विक सांइराज रंकी रेड्डी और चिराग शेट्टी ने मलेशियाई जोड़ी से पहला सेट 21-23 से हारने के बाद दूसरे सेट को 21-19 और तीसरे सेट को 21 -17 से जीतकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई।

BWF World Championship में भारत की बेटियों ने किया बड़ा उलटफेर, 7वीं रैंक की जोड़ी को हराया

Treesa Jolly Gayatri Gopichand

त्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद की भारतीय महिला युगल जोड़ी ने बृहस्पतिवार को जापान की सातवीं वरीयता प्राप्त रिन इवानागा और की नाकानिशी को सीधे गेम में हराकर विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया।भारत की गैर वरीयता प्राप्त जोड़ी ने एकतरफा मुकाबले में रिन और नाकानिशी की विश्व में सातवें नंबर की जोड़ी को 21-16 21-12 से हराया।

हाल में अर्जुन पुरस्कार पाने वाली त्रीसा और गायत्री ने शुरू से अच्छा प्रदर्शन किया और अपनी प्रतिद्वंद्वी टीम को कोई मौका नहीं दिया। यह भारतीय जोड़ी 2022 और 2023 में लगातार दो वर्ष ऑल इंग्लैंड ओपन के सेमीफाइनल में पहुंची थीं।इस साल की शुरुआत में त्रीसा के टखने में चोट लगने के कारण यह जोड़ी कुछ टूर्नामेंट में नहीं खेल पाई थी। उन्होंने इंडोनेशिया ओपन में वापसी की और इस महीने की शुरुआत में फिलीपीन इंटरनेशनल चैलेंज जीता।

बिना मैच जीते विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप के प्री क्वार्टफाइनल में पहुंचे सात्विक और चिराग

Satvik Chirag

सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की भारतीय पुरुष युगल जोड़ी ने दूसरे दौर में वॉकओवर मिलने के बाद बुधवार को बीडब्ल्यूएफ विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप के प्री-क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया।

विश्व चैंपियनशिप में पहले दो कांस्य पदक जीत चुकी पांचवीं वरीयता प्राप्त भारतीय जोड़ी को पहले दौर में बाई मिली थी तथा दूसरे दौर में उनका मुकाबला स्कॉटलैंड के एलेक्जेंडर डन और एडम प्रिंगल से होना था।स्कॉटलैंड की जोड़ी ने हालांकि आखिरी क्षण में नाम वापस ले लिया, जिससे सात्विक और चिराग को कोर्ट में उतरे बिना ही ‘राउंड ऑफ 16’ में जगह मिल गई।

तनीशा क्रास्टो और ध्रुव कपिला की मिश्रित युगल जोड़ी ने भी मकाऊ के लियोन इओक चोंग और एनजी वेंग ची को 21-11 21-11 से हराकर प्री-क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली।भारतीय खिलाड़ियों में दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधू, आयुष शेट्टी और लक्ष्य सेन को भी बुधवार को अपने मैच खेलने हैं।

कंधे की बार-बार उभरने वाली चोट ने सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी के लिए मुश्किलें बढ़ाई हैं और कई बार उनके जोड़ीदार चिराग शेट्टी के लिए भी यह स्थिति “परेशान करने वाली” रही है, लेकिन भारतीय पुरुष युगल जोड़ी घरेलू सरजमीं पर विश्व चैंपियनशिप में अपने पदक के रंग को बेहतर करने के लक्ष्य के साथ अपने आक्रामक और तेजतर्रार खेल पर कायम रहेगी।

सात्विक पिछले कुछ वर्षों से कंधे की इस समस्या से जूझ रहे हैं, जिसके कारण शानदार टूर्नामेंट के बाद भी उनके लिए लय बरकरार रखना मुश्किल रहा है। इस जोड़ी ने दो साल के अंतराल के बाद अपना पहला खिताब जीतते हुए सिंगापुर ओपन सुपर 750 अपने नाम किया था, लेकिन इसके बाद चोट फिर उभर आई और उन्हें इंडोनेशिया ओपन में मुकाबले के बीच से हटना पड़ा तथा जापान ओपन से नाम वापस लेना पड़ा।

सात्विक और चिराग पुरुष युगल वर्ग की उन शीर्ष पांच जोड़ियों में शामिल हैं, जिन पर विश्व चैंपियनशिप में खास नजर रहेगी। पुरुष युगल का मुकाबला परंपरागत रूप से बेहद खुला रहा है और पिछले छह संस्करणों में पांच देशों की छह अलग-अलग जोड़ियां खिताब जीत चुकी हैं।

विश्व नंबर एक किम वोन हो और सियो सेउंग जे ने 2025 की अपनी शानदार फॉर्म को इस सत्र की शुरुआत में भी जारी रखा था, लेकिन मई में थॉमस कप फाइनल के बाद उनकी कमजोरियां नजर आई हैं। इससे फजार अल्फियां-मुहम्मद शोहिबुल फिकरी, गोह से फी-नूर इज्जुद्दीन और भारतीय जोड़ी जैसी चुनौती पेश करने वाली जोड़ियों के लिए उम्मीदें बढ़ी हैं।


पहला सेट हारने के बाद लक्ष्य सेन ने की जोरदार वापसी, विश्व चैंपियनशिप में जीत से आगाज

स्टार भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्य सेन ने मंगलवार को पहला गेम गंवाने के बाद जोरदार वापसी करते हुए ऑस्ट्रिया के कॉलिन्स वैलेंटाइन फिलिमोन को तीन गेम तक चले कड़े मुकाबले में हराकर बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप के पुरुष एकल के दूसरे दौर में प्रवेश किया।

लक्ष्य ने 45 मिनट तक चले मुकाबले में फिलिमोन को 16-21, 21-8, 21-4 से हराया।दूसरे दौर में लक्ष्य का सामना अमेरिका के गैरेट टैन से होगा जिन्होंने स्विट्जरलैंड के टोबियास कुएंजी को 21-4, 21-15 से हराया।लक्ष्य ने धीमी शुरुआत की और उनके कम रैंकिंग वाले प्रतिद्वंद्वी ने पहले गेम में उन्हें लगातार दबाव में रखा। स्टार भारतीय खिलाड़ी लय हासिल करने के लिए जूझता दिखा। दोनों खिलाड़ी एक समय लगभग बराबरी पर चल रहे थे लेकिन लक्ष्य के लचर खेल और सहज गलतियों का फायदा उठाते हुए फिलिमोन ने लगातार छह अंक जुटाकर 17-12 की बढ़त बना ली।

 लक्ष्य ने कुछ अंक जुटाकर वापसी की कोशिश की लेकिन ऑस्ट्रियाई खिलाड़ी ने धैर्य बरकरार रखते पहला गेम अपने नाम कर लिया।दूसरे गेम में दोनों खिलाड़ी 7-7 की बराबरी पर थे जिसके बाद भारतीय खिलाड़ी ने आक्रामक खेल के दम पर 11-8 की बढ़त हासिल कर ली।

इसके बाद लक्ष्य ने अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए लगातार 10 अंक जुटाए और प्रतिद्वंद्वी को कोई मौका नहीं देते हुए दूसरा गेम जीतकर स्कोर 1-1 कर दिया। इस दौरान फिलिमोन की लय भी टूटती नजर आई।इसके बाद लक्ष्य को रोकना मुश्किल हो गया। उन्होंने अपना आक्रामक खेल जारी रखा और फिलिमोन से लगातार सहज गलतियां कराईं। भारतीय खिलाड़ी ने 15-1 की बढ़त के साथ मैच पर पूरी तरह पकड़ बना ली और आसानी से मुकाबला अपने नाम कर लिया।

इससे पहले त्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद की गैरवरीयता प्राप्त भारतीय जोड़ी ने महिला युगल में लॉरेन लैम और एलिसन क्विन ली की अमेरिका की 16वीं वरीय जोड़ी को सीधे गेम में हराकर प्री क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया।त्रीसा और गायत्री ने दूसरे दौर में महज 38 मिनट में विरोधी जोड़ी को 21-15, 21-12 से हराकर अगले दौर में जगह बनाई।

भारतीय जोड़ी ने शुरुआत से ही आक्रामक रवैया अपनाते हुए आत्मविश्वास के साथ खेल शुरू किया। त्रीसा ने अपने दमदार स्मैश से अंक जुटाए जबकि गायत्री ने शटल को खेल में बनाए रखने के साथ सटीक ड्रॉप शॉट लगाए और दोनों ने पहला गेम आसानी से अपने नाम किया।दूसरे गेम में भी भारतीय जोड़ी ने इसी अंदाज में शुरुआत की और ब्रेक तक 11-4 की बढ़त बना ली।

भारतीय खिलाड़ियों ने आक्रामक खेल जारी रखा और उनकी प्रतिद्वंद्वियों की कुछ सहज गलतियों का भी उन्हें फायदा मिला।कविप्रिया सेल्वम और सिमरन सिंघी को दूसरे दौर में हार का सामना करना पड़ा। उन्हें गैब्रिएला स्टोएवा और स्टेफनी स्टोएवा की बुल्गारिया की नौवीं वरीय जोड़ी ने 32 मिनट में सीधे गेम में 21-7, 21-14 से हराया।मिश्रित युगल में भारत का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। रोहन कपूर और रुत्विका शिवानी गड्डे तथा असित सूर्या और अमृता प्रमुथेश की जोड़ियां पहले दौर में ही बाहर हो गईं।

 रोहन और रुत्विका की जोड़ी को जोनाथन बिंग सान लाई और क्रिस्टल लाई की कनाडा की जोड़ी के खिलाफ कड़े मुकाबले में 22-20, 19-21, 17-21 से हार मिली।असित और अमृता को एमरे सोनमेज और यासेमेन बेक्टास की तुर्किये की जोड़ी के खिलाफ कड़े मुकाबले में 21-16, 29-30, 22-24 से हार का सामना करना पड़ा।

भारत की एक अन्य मिश्रित युगल जोड़ी ध्रुव कपिला और तनिषा क्रास्टो अभी प्रतियोगिता में बनी हुई है। इस 15वीं वरीय जोड़ी को पहले दौर में बाई मिली थी और वह दूसरे दौर में मकाऊ के इओक चोंग लियोंग और वेंग ची एनजी से भिड़ेगी।उभरती हुई भारतीय महिला एकल खिलाड़ी उन्नति हुड्डा ने भी दूसरे दौर में जगह बना ली। उन्होंने 40 मिनट चले मुकाबले में म्यांमार की थेट हतार थुजार को 22-20, 21-16 से हराया।उन्नति का अगले दौर में सामना कनाडा की 13वीं वरीय मिशेल ली से होगा।

रियल लाइफ में कब विश्वकप जीतेंगी चक दे गर्ल्स, 15 में से सिर्फ 8 बार करा है क्वालिफाय

शाहरुख खान अभिनीत फिल्म चकदे इंडिया को देखा जाए तो भारतीय महिला हॉकी टीम साल 2007 में ही विश्वकप जीत चुकी है। लेकिन असल मैदान यानि कि एस्ट्रो टर्फ पर भारतीय महिला हॉकी टीम अन्य हॉकी टीमों के आगे कमजोर नजर आती है। बीच बीच में आए संघर्ष के पलों को छोड़ दिया जाए तो 15 बार में से 8 बार तो चकदे गर्ल्स विश्वकप के लिए क्वालिफाय भी नहीं कर पाई हैं।

विश्व कप 1974 से 2022 तक , फ्रांस से स्पेन तक भारतीय महिला हॉकी टीम का सफर :

1974 फ्रांस :

अजिंदर कौर की कप्तानी में भारतीय टीम ने नीदरलैंड जैसी मजबूत टीम को ग्रुप चरण में हराकर सभी को चौंका दिया था। मैक्सिको और स्पेन को हराने वाली यह टीम बेल्जियम से एकमात्र पराजय के बाद ग्रुप में शीर्ष पर रही लेकिन सेमीफाइनल में अर्जेंटीना एक गोल से हार गई। कांस्य पदक के मुकाबले में उसे पश्चिम जर्मनी ने 2-0 से हराया।

भारतीय टीम भले ही पदक नहीं जीत पाई लेकिन इस ऐतिहासिक प्रदर्शन ने देश में महिला हॉकी को गंभीरता से लेने पर मजबूर किया। नीदरलैंड ने अर्जेंटीना को एक गोल से हराकर खिताब जीता और पूरे टूर्नामेंट में नीदरलैंड को हराया तो सिर्फ भारत ने।

1976 बर्लिन :

पहले विश्व कप में चौथे स्थान पर रहने के बावजूद भारतीय महिला हॉकी टीम आर्थिक दिक्कतों, संस्थागत प्रायोजन के अभाव और भारतीय महिला हॉकी संघ के पास कोष नहीं होने के कारण दूसरे विश्व कप में भाग नहीं ले सकी।

1978 मैड्रिड :

रूपा सैनी की कप्तानी में भारतीय महिला हॉकी टीम ने स्पेन में तीसरे विश्व कप में भाग लिया और दस टीमों में सातवें स्थान पर रही। पूल ए में भारत को एकमात्र जीत चेकोस्लोवाकिया पर मिली जबकि उसे नीदरलैंड और अर्जेंटीना ने हराया। कनाडा से भारत ने 1-1 से ड्रॉ खेला। क्रासओवर मुकाबले में भारत ने जापान से तीन गोल से हारने के बाद स्पेन को एक गोल से हराया।नीदरलैंड ने पश्चिम जर्मनी को हराकर खिताब जीता जबकि अर्जेंटीना तीसरे स्थान पर रहा।

1981 ब्यूनस आयर्स :

मॉस्को ओलंपिक 1980 में चौथे स्थान पर रहने के बावजूद भारतीय महिला हॉकी टीम अर्जेंटीना में 12 टीमों के विश्व कप में जगह नहीं बना सकी। राष्ट्रीय महासंघ के सामने आर्थिक और प्रशासनिक दिक्कतों के कारण भारतीय महिला टीम की भागीदारी उपमहाद्वीपीय टूर्नामेंटों और आमंत्रण टूर्नामेंटों तक ही सिमटकर रह गई थी।पश्चिम जर्मनी ने नीदरलैंड को हराकर खिताब जीता जबकि सोवियत संघ तीसरे स्थान पर रहा।

1983 कुआलालम्पुर :

एशियाई खेल 1982 की स्वर्ण पदक विजेता भारतीय टीम की विश्व कप में वापसी हुई लेकिन सलमा डिसिल्वा की कप्तानी वाली टीम ग्रुप चरण में पांच में से चार मैच हारकर और वेल्स से एक ड्रॉ के बाद आखिरी स्थान पर रही। क्लासीफिकेशन मैच में अर्जेंटीना से एक गोल से हारकर उसे बारह टीमों में 11वें स्थान से संतोष करना पड़ा।नीदरलैंड ने कनाडा को हराकर खिताब जीता जबकि आस्ट्रेलिया तीसरे स्थान पर रहा।

1986 एम्सटेलवीन :

ब्यूनस आयर्स में 1985 में हुए विश्व कप क्वालीफायर में पांचवें स्थान पर रही भारतीय टीम टूर्नामेंट में जगह बनाने में नाकाम रही। भारत ने 1986 में सियोल एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीता था।नीदरलैंड ने पश्चिम जर्मनी को हराकर चौथी बार खिताब जीता जबकि कनाडा तीसरे स्थान पर रहा।

1990 सिडनी :

इस विश्व कप का क्वालीफायर 1989 इंटर कांटिनेंटल कप दिल्ली के मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम पर खेला गया जिसमें 12 टीमों में से शीर्ष चार को विश्व कप में जगह मिली। भारत ने पांच में से दो मैच जीते लेकिन तीन हारे। 15 गोल किये लेकिन नौ गंवाये और पूल बी में चौथे स्थान पर रहकर विश्व कप में जगह नहीं बना सकी।नीदरलैंड ने दक्षिण कोरिया को हराकर पांचवीं बार खिताब जीता और इंग्लैंड तीसरे स्थान पर रहा।

1994 डबलिन :

भारतीय टीम मामूली अंतर से इस विश्व कप में जगह बनाने से चूक गई। फिलाडेल्फिया में 1993 में हुए क्वालीफायर में 12 टीमों ने भाग लिया जिनमें से शीर्ष पांच को जगह मिली थी लेकिन भारतीय टीम छठे स्थान पर रही।आस्ट्रेलिया ने अर्जेंटीना को हराकर खिताब जीता जबकि अमेरिका तीसरे स्थान पर रहा।

1998 यूट्रेक्ट :

प्रीतम रानी सिवाच की कप्तानी में भारतीय महिला टीम लगातार तीन बार बाहर रहने के बाद विश्व कप में लौटी। पूल ए में पांचों मैच हारने के बाद भारतीय टीम बारहवें और आखिरी स्थान पर रही।आस्ट्रेलिया ने नीदरलैंड को 3 . 2 से हराकर खिताब जीता जबकि जर्मनी तीसरे स्थान पर रही।

2002 पर्थ :

जून 2002 में कठिन क्वालीफाइंग दौर में अमेरिका से हारने के बाद भारतीय टीम विश्व कप में जगह तो नहीं बना सकी लेकिन जुलाई अगस्त 2002 में मैनचेस्टर राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर धूम मचा दी और यह जीत बाद में शाहरूख खान की फिल्म ‘चक दे इंडिया’ की प्रेरणा भी बनी।अर्जेंटीना ने नीदरलैंड को पेनल्टी शूटआउट में 4- 3 से हराकर खिताब जीता जबकि चीन तीसरे स्थान पर रहा।

2006 मैड्रिड :

इस विश्व कप में भारत की सुरिंदर कौर सर्वाधिक गोल करने वालों की सूची में नीदरलैंड की किम लामेर्स के साथ पांच गोल करके दूसरे स्थान पर रही। नीदरलैंड की ही सिल्विया कारेस ने छह गोल दागे थे।भारतीय टीम पूल ए में पांच में से चार मैच हारकर और एक ड्रॉ के बाद आखिरी स्थान पर और 12 टीमों में 11वें स्थान पर रही। नीदरलैंड ने आस्ट्रेलिया को हराकर खिताब जीता जबकि अर्जेंटीना तीसरे स्थान पर रहा।

2010 रोसारियो :

इस विश्व कप ने भारत को रानी रामपाल जैसा बेहतरीन मिडफील्डर दिया जिसने सात गोल दागकर सभी का ध्यान खींचा। पूल चरण में भारत को एकमात्र जीत जापान के खिलाफ मिली जबकि बाकी चार मैच हारकर टीम पांचवें स्थान पर रही। क्लासीफिकेशन मैच में दक्षिण अफ्रीका को 4-3 से हराकर भारत नौवे स्थान पर रहा।अर्जेंटीना ने नीदरलैंड को हराकर स्वर्ण पदक जीता जबकि इंग्लैंड तीसरे स्थान पर रहा।

2014 द हेग :

कुआलालम्पुर में 2013 में हुए एशिया कप के चैम्पियन को विश्व कप में जगह मिलनी थी लेकिन भारत सेमीफाइनल में दक्षिण कोरिया से हार गया। चीन को पेनल्टी शूटआउट में हराकर भारतीय टीम ने तीसरा स्थान हासिल किया लेकिन इस महाद्वीपीय क्वालीफायर से जापान ने विश्व कप में जगह बनाई।नीदरलैंड ने आस्ट्रेलिया को 2- 0 से हराकर सातवीं बार खिताब जीता जबकि अर्जेंटीना तीसरे स्थान पर रहा।

2018 लंदन :

रानी रामपाल की कप्तानी में भारतीय टीम इस विश्व कप के क्वार्टर फाइनल तक पहुंची। पूल बी में इंग्लैंड और अमेरिका से ड्रॉ खेलने के बाद आयरलैंड से हारी भारतीय टीम तीसरे स्थान पर रही। क्रॉसओवर में लालरेम्सियामी, वंदना कटारिया और नेहा गोयल के गोल से भारत ने इटली को हराया लेकिन क्वार्टर फाइनल में आयरलैंड से पेनल्टी शूटआउट में हार गई।नीदरलैंड ने आयरलैंड को 6-0 से हराकर खिताब जीता जबकि स्पेन तीसरे स्थान पर रहा।

2022 एम्सटेलवीन, नीदरलैंड और टेरासा, स्पेन :

सविता पूनिया की कप्तानी में भारतीय टीम ने स्पेन में पूल बी के मैचों में इंग्लैंड और चीन से ड्रॉ खेला लेकिन न्यूजीलैंड से हार गई। क्रॉसओवर में भारतीय टीम ने कनाडा को पेनल्टी शूटआउट में 3-2 से हराया और जापान को 3- से मात देकर चीन के साथ नौवे स्थान पर रही।नीदरलैंड ने अर्जेंटीना को 3-1 से हराकर खिताब जीता जबकि आस्ट्रेलिया तीसरे स्थान पर रहा।

51 साल पहले भारत ने जीता था हॉकी विश्वकप, 1971 से 2023 तक ऐसा रहा है सफर

भारत को हॉकी विश्वकप जीते हुए 51 साल हो गए हैं। पिछले संस्करण में भारत मेजबान था और आशा थी कि वह इंतजार खत्म होगा लेकिन न्यूजीलैंड की टीम ने पेनल्टी शूटआउट में हराकर भारत को विश्वकप से बाहर कर दिया था। ओलंपिक में भारत ने सबसे ज्यादा मेडल इस खेल में जीते हों लेकिन विश्वकप में संघर्ष करना पड़ा है क्योंकि जब विश्वकप शुरु हुआ तब भारतीय हॉकी का स्तर ढलान पर था और एस्टरो टर्फ के आने के बाद भारतीय टीम कभी खड़ी ही नहीं हो पाई। जान लेते हैं कि भारतीय हॉकी टीम का सफर कैसा रहा-  

1971 बार्सीलोना

भारत और पाकिस्तान ने मिलकर मार्च 1969 में FIH परिषद की बैठक में फुटबॉल की तर्ज पर हॉकी विश्व कप कराने का प्रस्ताव रखा जिसे अगले साल ब्रसेल्स में हुई बैठक में मंजूरी मिली। पाकिस्तान को मेजबानी दी गई लेकिन 1971 में दोनों देशों के बीच राजनीतिक तनाव के चलते पहला विश्व कप स्पेन के बार्सीलोना में हुआ।

पांच उपमहाद्वीपों की दस टीमों ने FIH के आमंत्रण पर इसमें भाग लिया।ओलंपिक की सबसे कामयाब टीम भारत पूल ए में फ्रांस, अर्जेंटीना, कीनिया और पश्चिम जर्मनी को हराकर शीर्ष पर रहा। सेमीफाइनल में पाकिस्तान ने भारत को 2-1 से हराया और फिर स्पेन को हराकर पहला विश्व कप जीता। भारत ने कीनिया को 2-1 से हराकर कांस्य पदक जीता।

1973 एम्सटर्डम :

एम्सटेलवीन के वेगनेर स्टेडियम पर खेले गए इस विश्व कप में मेजबान नीदरलैंड ने पेनल्टी शूटआउट में भारत को 4-2 से हराकर खिताब जीता ।भारत पूल ए में पांच जीत और तीन ड्रॉ के साथ पश्चिम जर्मनी के बाद दूसरे स्थान पर रहा।सेमीफाइनल में बी पी गोविंदा के गोल के दम पर भारत ने पाकिस्तान को हराया। फाइनल में अतिरिक्त समय तक मैच 2-2 से बराबर था लेकिन पेनल्टी शूटआउट में नीदरलैंड ने भारत को हराया।

1975 कुआलालम्पुर :

भारतीय हॉकी के विश्व कप इतिहास का सबसे सुनहरा अध्याय लिखा गया 15 मार्च 1975 को कुआलालम्पुर में जब फाइनल में अजित पाल सिंह की कप्तानी में भारत ने पाकिस्तान को 2-1 से हराया।फाइनल में पाकिस्तान ने बढत बना ली थी लेकिन सुरजीत सिंह ने 44वें और अशोक कुमार ने 51वें मिनट में गोल करके भारत को खिताब दिलाया। पूल चरण में शीर्ष पर रहे भारत ने सेमीफाइनल में मलेशिया को मात दी थी। तब तक सात ओलंपिक स्वर्ण जीत चुकी भारतीय टीम का यह पहला विश्व कप खिताब था।

1978 ब्यूनस आयर्स :

गत चैम्पियन भारत बेहद निराशाजनक प्रदर्शन के बाद सेमीफाइनल तक नहीं पहुंच सका और छठे स्थान पर रहा। पूल चरण में भारत ने छह में से तीन मैच जीते और दो गंवाये जिसमें पश्चिम जर्मनी से 7.0 से मिली हार शामिल थी। पाकिस्तान ने नीदरलैंड को 3-2 से हराकर खिताब जीता और आस्ट्रेलिया को कांस्य पदक मिला।

1982 मुंबई :

अपने देश में पहली बार विश्व कप खेलते हुए भारत फिर अंतिम चार में नहीं पहुंच सका और पांचवें स्थान से ही संतोष करना पड़ा। पाकिस्तान ने अपराजेय रहकर वानखेड़े स्टेडियम पर फाइनल में पश्चिम जर्मनी को 3-1 से हराकर तीसरी बार खिताब जीता। भारत के राजिंदर सिंह सीनियर ने टूर्नामेंट में सर्वाधिक 12 गोल दागे थे।

1986 लंदन :

इस विश्व कप में भारतीय टीम अब तक के सबसे खराब प्रदर्शन के बाद 12वें और आखिरी स्थान पर रही लेकिन इसी टीम के एक सितारे मोहम्मद शाहिद ने अपने जबर्दस्त खेल से दुनिया को चौंका दिया। ड्रिबलिंग के जादूगर शाहिद को टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया।आस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को 2-1 से हराकर खिताब जीता जबकि पश्चिम जर्मनी तीसरे स्थान पर रहा । तीन बार का चैम्पियन पाकिस्तान 11वें स्थान पर रहा।

1990 लाहौर :

राजनीतिक तनाव, मेजबान दर्शकों की आक्रामकता और सुरक्षा चिंताओं के बीच भारतीय टीम ने परगट सिंह की कप्तानी में लाहौर में विश्व कप खेला। भारत दसवें स्थान पर रहा लेकिन इतनी प्रतिकूल परिस्थितियों में भी आपा नहीं खोने के कारण FIH ‘फेयरप्ले’ पुरस्कार भारतीय टीम को मिला।नीदरलैंड ने पाकिस्तान को हराकर खिताब जीता जबकि आस्ट्रेलिया तीसरे स्थान पर रहा।

1994 सिडनी:

जूड फेलिक्स की कप्तानी में भारतीय टीम ने कृत्रिम टर्फ पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए पांचवां स्थान हासिल किया था। पाकिस्तान ने नीदरलैंड को पेनल्टी शूटआउट में 4-3 से हराकर खिताब जीता जबकि आस्ट्रेलिया तीसरे स्थान पर रहा।

1998 यूट्रेक्ट :

इस विश्व कप में पूरी तरह से यूरोपीय टीमों का दबदबा रहा। मेजबान नीदरलैंड ने स्पेन को हराकर तीसरा खिताब जीता जबकि जर्मनी तीसरे स्थान पर रहा। धनराज पिल्लै की कप्तानी वाली भारतीय टीम नीदरलैंड में परिस्थितियों से सामंजस्य बिठाने में नाकाम रही और निराशाजनक नौवें स्थान पर रही।

2002 कुआलालम्पुर :

पहली बार 16 टीमों की भागीदारी में हुए विश्व कप में जर्मनी ने आस्ट्रेलिया को हराकर पहली बार खिताब जीता जबकि नीदरलैंड तीसरे स्थान पर रहा। भारत नौ मैचों में तीन जीत, एक ड्रॉ और पांच हार के साथ दसवें स्थान पर रहा।

2006 मोंशेंग्लाबाख , जर्मनी :

दिलीप टिर्की की कप्तानी में भारतीय टीम पूल चरण में एक भी मैच नहीं जीत सकी और एकमात्र ड्रॉ दक्षिण अफ्रीका से खेलने के बाद आखिरी स्थान पर रही। क्लासीफिकेशन मैच में राजपाल सिंह के एक गोल से दक्षिण अफ्रीका को हराने के बाद 12 टीमों में 11वें स्थान पर रही। जर्मनी ने आस्ट्रेलिया को हराकर लगातार दूसरा खिताब जीता जबकि स्पेन तीसरे स्थान पर रहा।

2010 दिल्ली :

दिल्ली में हुए इस विश्व कप में खचाखच भरे मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम पर पूल चरण में पाकिस्तान को 4-1 से हराना ही मेजबान भारत की सबसे बड़ी उपलब्धि रही। पूल चरण में चौथे स्थान पर रही भारतीय टीम सेमीफाइनल में जगह नहीं बना सकी और आठवां स्थान हासिल किया। आस्ट्रेलिया ने जर्मनी को 2-1 से हराकर खिताब जीता जबकि नीदरलैंड तीसरे स्थान पर रहा।

 2014 द हेग :

पूल चरण में बेल्जियम, इंग्लैंड, आस्ट्रेलिया से करारी हार झेलने वाली भारतीय टीम नौवे स्थान पर रही। आकाशदीप सिंह ने टूर्नामेंट में पांच गोल किये । आस्ट्रेलिया ने नीदरलैंड को 6-1 से हराकर खिताब जीता और अर्जेंटीना तीसरे स्थान पर रहा।

2018 भुवनेश्वर :

हॉकी के गढ ओडिशा में पहली बार हुए विश्व कप में भारत ने पूल चरण में बेल्जियम जैसे दिग्गज को ड्रॉ पर रोका और दक्षिण अफ्रीका तथा कनाडा को हराकर शीर्ष पर रहा। मनप्रीत सिंह की कप्तानी वाली मेजबान टीम क्वार्टर फाइनल में नीदरलैंड से कड़े मुकाबले में 1-2 से हारकर छठे स्थान पर रही जो कई साल में उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। बेल्जियम ने पेनल्टी शूटआउट में नीदरलैंड को हराकर खिताब जीता जबकि आस्ट्रेलिया तीसरे स्थान पर रहा।

2023 भुवनेश्वर और राउरकेला:

लगातार दूसरी बार अपनी मेजबानी में हुए विश्व कप में भारत पूल चरण में दूसरे स्थान पर रहा। क्रासओवर मैच में न्यूजीलैंड ने उसे पेनल्टी शूट आउट में हराया। हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी में भारतीय टीम नौवे स्थान पर रही। जर्मनी ने बेल्जियम को शूटआउट में हराकर खिताब जीता जबकि नीदरलैंड तीसरे स्थान पर रहा।