नीदरलैंड के पहले गे PM जल्द पिता बनेंगे:सोशल मीडिया पर लिखा- 2027 में आएगा नया मेहमान; दो महिला दोस्तों ने की मदद

नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन 2027 में पिता बनेंगे। उन्होंने सोमवार को सोशल मीडिया पर इसकी घोषणा की। जेटेन के पार्टनर निकोलस कीनन अर्जेंटीना के हॉकी खिलाड़ी हैं। जेटेन और उनके पार्टनर कीनन ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए लिखा, हमारी जिंदगी में एक बहुत खास मेहमान आने वाला है। नन्हे बच्चे, 2027 में तुमसे मुलाकात होगी। डच मीडिया के मुताबिक बच्चे के जन्म के लिए सरोगेसी की मदद ली गई है। उनकी दो महिला दोस्तों ने इस प्रक्रिया में मदद की। एक ने अंडाणु दान किया, जबकि दूसरी बच्चे को जन्म देंगी। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद जेटेन ऐसे पहले डच प्रधानमंत्री होंगे, जिनके कार्यकाल में उनके बच्चे का जन्म होगा। टिकटॉक वीडियो से शुरू हुई कहानी, सुपरमार्केट में मिले साल 2021 में, जेटन और उनके एक साथी डच नेता के बीच का एक ब्रोमांस वाला ट्रेडिंग वीडियो टिकटॉक पर बहुत वायरल हुआ था। इसमें दोनों नेता एक दूसरे के साथ मस्ती करते, हंसते और डांस करते दिखे थे। वीडियो वायरल होने के बाद रॉब जेटन युवाओं के बीच मशहूर हो गए। साल 2022 में कीनन ने एक सुपरमार्केट में जेटेन को देखा और उन्हें वायरल वीडियो की वजह से पहचान गए। इस दौरान दोनों की बातचीत शुरू हुई। कीनन ने बाद में एक इंटरव्यू में बताया था कि जेटेन ने उन्हें इंस्टाग्राम पर मैसेज भेजकर बातचीत शुरू की थी। शुरुआत में दोनों का रिश्ता निजी रहा लेकिन अगस्त 2023 में दोनों ने अपने रिश्ते को सार्वजनिक कर दिया। नवंबर 2024 में दोनों ने सगाई की घोषणा की। दोनों की शादी जून 2026 में होनी थी, लेकिन जेटेन के प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने इसे कुछ समय के लिए टाल दिया है। नीदरलैंड समलैंगिक विवाह को मान्यता देने वाला पहला देश नीदरलैंड दुनिया का पहला देश था, जिसने 2001 में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता दी। जेटेन देश के पहले खुले तौर पर समलैंगिक प्रधानमंत्री हैं। हालांकि, वे दुनिया के पहले समलैंगिक प्रधानमंत्री नहीं हैं। उनसे पहले भी दूसरे देशों में खुले तौर पर समलैंगिक नेता सरकार के प्रमुख रह चुके हैं। सिर्फ 39 साल की उम्र में प्रधानमंत्री बने जेटेन दुनिया के 8 समलैंगिक प्रधानमंत्री 1. योहाना सिगुर्दार्दोतिर – आइसलैंड (2009–2013): वे दुनिया की पहली खुले तौर पर समलैंगिक सरकार प्रमुख बनीं। वे लेस्बियन थीं। उनकी 1970 में शादी हुई थी। उनके 2 बच्चे भी हुए। 1985 में वह एक महिला पत्रकार के करीब आईं। इसके 2 साल बाद उन्होंने तलाक ले लिया। जून 2010 में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता मिलने पर दोनों ने शादी कर ली। 2. एलियो दी रूपो – बेल्जियम (2011–2014): वे बेल्जियम ही नहीं दुनिया के पहले खुले तौर पर गे प्रधानमंत्री बने। 1996 में उप-प्रधानमंत्री रहने के दौरान उन पर 16 साल के बच्चे के साथ संबंध बनाने का आरोप लगा था। तब पहली बार उनकी पहचान उजागर हुई थी। 3. जेवियर बेटेल – लक्जमबर्ग (2013–2023): बेटेल ने 2008 में पहली बार बताया था कि वे समलैंगिक हैं। PM बनने के डेढ़ साल बाद 2015 में उन्होंने अपने पुरुष पार्टनर गौथियर डेस्टने से शादी की। वे पहले ऐसे गे प्रधानमंत्री बने जिन्होंने पद पर रहते हुए शादी की। 4. लियो वराडकर – आयरलैंड (2017–2024): आयरलैंड में मई 2015 में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने के लिए जनमत संग्रह होना था। भारतीय मूल के लियो वराडकर तब स्वास्थ्य मंत्री थे। उन्होंने इस जनमत संग्रह को समर्थन देने के लिए पहली बार अपनी समलैंगिक पहचान सार्वजनिक की। 5. एना ब्रनाबिच – सर्बिया (2017–2024): वे सर्बिया की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं। वे लेस्बियन हैं। फरवरी 2019 में उनकी पार्टनर ने एक बेटे को जन्म दिया। ऐसे में वे पहली समलैंगिक प्रधानमंत्री बनीं, जिनकी महिला पार्टनर ने उनके कार्यकाल के दौरान बच्चे को जन्म दिया। 6. जेवियर एस्पोट – अंडोरा (2019 से): वे अंडोरा के प्रधानमंत्री हैं और खुले तौर पर समलैंगिक हैं। प्रधानमंत्री बनने के 4 साल बाद 2023 में उन्होंने अपनी समलैंगिक पहचान सार्वजनिक की। 7. गैब्रियल अत्ताल – फ्रांस (2024): वे फ्रांस के पहले खुले तौर पर समलैंगिक प्रधानमंत्री बने। 2018 में जब वे मैक्रों की पार्टी के सांसद थे तब पहली बार उनके एक बचपन के दोस्त ने खुलासा किया था कि उनका संबंध एक नेता स्तेफान सेजुर्ने से है। दोस्त ने आरोप लगाया कि सेजुर्ने की वजह से अत्ताल का राजनीतिक करियर आगे बढ़ा। 8. रॉब जेटेन- नीदरलैंड (2026 से): वे नीदरलैंड के पहले खुले तौर पर समलैंगिक प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने फरवरी 2026 में पद संभाला। 17 साल की उम्र में पहली बार एक लड़के से प्यार होने के बाद उन्होंने अपने परिवार और दोस्तों के सामने अपनी पहचान का खुलासा किया था।

नीदरलैंड के पहले गे PM जल्द पिता बनेंगे:सोशल मीडिया पर लिखा- 2027 में आएगा नया मेहमान; दो महिला दोस्तों ने की मदद

नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन 2027 में पिता बनेंगे। उन्होंने सोमवार को सोशल मीडिया पर इसकी घोषणा की। जेटेन के पार्टनर निकोलस कीनन अर्जेंटीना के हॉकी खिलाड़ी हैं। जेटेन और उनके पार्टनर कीनन ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए लिखा, हमारी जिंदगी में एक बहुत खास मेहमान आने वाला है। नन्हे बच्चे, 2027 में तुमसे मुलाकात होगी। डच मीडिया के मुताबिक बच्चे के जन्म के लिए सरोगेसी की मदद ली गई है। उनकी दो महिला दोस्तों ने इस प्रक्रिया में मदद की। एक ने अंडाणु दान किया, जबकि दूसरी बच्चे को जन्म देंगी। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद जेटेन ऐसे पहले डच प्रधानमंत्री होंगे, जिनके कार्यकाल में उनके बच्चे का जन्म होगा। टिकटॉक वीडियो से शुरू हुई कहानी, सुपरमार्केट में मिले साल 2021 में, जेटन और उनके एक साथी डच नेता के बीच का एक ब्रोमांस वाला ट्रेडिंग वीडियो टिकटॉक पर बहुत वायरल हुआ था। इसमें दोनों नेता एक दूसरे के साथ मस्ती करते, हंसते और डांस करते दिखे थे। वीडियो वायरल होने के बाद रॉब जेटन युवाओं के बीच मशहूर हो गए। साल 2022 में कीनन ने एक सुपरमार्केट में जेटेन को देखा और उन्हें वायरल वीडियो की वजह से पहचान गए। इस दौरान दोनों की बातचीत शुरू हुई। कीनन ने बाद में एक इंटरव्यू में बताया था कि जेटेन ने उन्हें इंस्टाग्राम पर मैसेज भेजकर बातचीत शुरू की थी। शुरुआत में दोनों का रिश्ता निजी रहा लेकिन अगस्त 2023 में दोनों ने अपने रिश्ते को सार्वजनिक कर दिया। नवंबर 2024 में दोनों ने सगाई की घोषणा की। दोनों की शादी जून 2026 में होनी थी, लेकिन जेटेन के प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने इसे कुछ समय के लिए टाल दिया है। नीदरलैंड समलैंगिक विवाह को मान्यता देने वाला पहला देश नीदरलैंड दुनिया का पहला देश था, जिसने 2001 में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता दी। जेटेन देश के पहले खुले तौर पर समलैंगिक प्रधानमंत्री हैं। हालांकि, वे दुनिया के पहले समलैंगिक प्रधानमंत्री नहीं हैं। उनसे पहले भी दूसरे देशों में खुले तौर पर समलैंगिक नेता सरकार के प्रमुख रह चुके हैं। सिर्फ 39 साल की उम्र में प्रधानमंत्री बने जेटेन दुनिया के 8 समलैंगिक प्रधानमंत्री 1. योहाना सिगुर्दार्दोतिर – आइसलैंड (2009–2013): वे दुनिया की पहली खुले तौर पर समलैंगिक सरकार प्रमुख बनीं। वे लेस्बियन थीं। उनकी 1970 में शादी हुई थी। उनके 2 बच्चे भी हुए। 1985 में वह एक महिला पत्रकार के करीब आईं। इसके 2 साल बाद उन्होंने तलाक ले लिया। जून 2010 में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता मिलने पर दोनों ने शादी कर ली। 2. एलियो दी रूपो – बेल्जियम (2011–2014): वे बेल्जियम ही नहीं दुनिया के पहले खुले तौर पर गे प्रधानमंत्री बने। 1996 में उप-प्रधानमंत्री रहने के दौरान उन पर 16 साल के बच्चे के साथ संबंध बनाने का आरोप लगा था। तब पहली बार उनकी पहचान उजागर हुई थी। 3. जेवियर बेटेल – लक्जमबर्ग (2013–2023): बेटेल ने 2008 में पहली बार बताया था कि वे समलैंगिक हैं। PM बनने के डेढ़ साल बाद 2015 में उन्होंने अपने पुरुष पार्टनर गौथियर डेस्टने से शादी की। वे पहले ऐसे गे प्रधानमंत्री बने जिन्होंने पद पर रहते हुए शादी की। 4. लियो वराडकर – आयरलैंड (2017–2024): आयरलैंड में मई 2015 में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने के लिए जनमत संग्रह होना था। भारतीय मूल के लियो वराडकर तब स्वास्थ्य मंत्री थे। उन्होंने इस जनमत संग्रह को समर्थन देने के लिए पहली बार अपनी समलैंगिक पहचान सार्वजनिक की। 5. एना ब्रनाबिच – सर्बिया (2017–2024): वे सर्बिया की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं। वे लेस्बियन हैं। फरवरी 2019 में उनकी पार्टनर ने एक बेटे को जन्म दिया। ऐसे में वे पहली समलैंगिक प्रधानमंत्री बनीं, जिनकी महिला पार्टनर ने उनके कार्यकाल के दौरान बच्चे को जन्म दिया। 6. जेवियर एस्पोट – अंडोरा (2019 से): वे अंडोरा के प्रधानमंत्री हैं और खुले तौर पर समलैंगिक हैं। प्रधानमंत्री बनने के 4 साल बाद 2023 में उन्होंने अपनी समलैंगिक पहचान सार्वजनिक की। 7. गैब्रियल अत्ताल – फ्रांस (2024): वे फ्रांस के पहले खुले तौर पर समलैंगिक प्रधानमंत्री बने। 2018 में जब वे मैक्रों की पार्टी के सांसद थे तब पहली बार उनके एक बचपन के दोस्त ने खुलासा किया था कि उनका संबंध एक नेता स्तेफान सेजुर्ने से है। दोस्त ने आरोप लगाया कि सेजुर्ने की वजह से अत्ताल का राजनीतिक करियर आगे बढ़ा। 8. रॉब जेटेन- नीदरलैंड (2026 से): वे नीदरलैंड के पहले खुले तौर पर समलैंगिक प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने फरवरी 2026 में पद संभाला। 17 साल की उम्र में पहली बार एक लड़के से प्यार होने के बाद उन्होंने अपने परिवार और दोस्तों के सामने अपनी पहचान का खुलासा किया था।

Retirement Planning: सुकन्या समृद्धि, पीपीएफ और SIP में मंथली ₹10000 इनवेस्ट करने से कितना बड़ा फंड बनेगा? समझें पूरा कैलकुलेशन

रिटायरमेंट प्लानिंग जल्द करने के कई फायदे हैं। निवेश के लिए ज्यादा समय मिलता है। पैसे को बढ़ने के लिए भी पर्याप्त समय मिल जाता है। करियर की शुरुआत में व्यक्ति पर आर्थिक जिम्मेदारी कम होती है। इससे निवेश करने में दिक्कत नहीं आती है। सवाल है कि अगर 40 साल का कोई व्यक्ति अगले 15 साल के लिए निवेश करना चाहता है तो उसके लिए बेस्ट इनवेस्टमेंट ऑप्शन क्या होगा?

15 साल में निवेश से बनेगा बड़ा फंड

एक्सपर्ट्स का कहना है कि 15 साल का पीरियड निवेश के लिए अच्छा है। अगर हर महीने 10000 रुपये का निवेश 15 साल तक किया जाए तो अच्छा फंड तैयार हो सकता है। लंबी अवधि के निवेश के लिए कुछ अच्छे विकल्प हैं। इनमें पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) और म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में SIP शामिल हैं।

पीपीएफ और SSY सरकारी की स्कीम

पीपीएफ और एसएसवाय सरकारी की स्कीम हैं। ये फिक्स्ड रिटर्न स्कीम हैं। इसका मतलब है कि निवेश से पहले आपको अंदाजा मिल जाता है कि किसी खास अवधि तक निवेश करने के बाद आपके लिए कितना बड़ा फंड तैयार होगा। सरकार की स्कीम होने की वजह से यह पूरी तरह सुरक्षित हैं। इनमें पैसा डूबने का डर ना के बराबर है। इसके अलावा इनके रिटर्न पर शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव का कोई असर नहीं पड़ता है।

SIP से मंथली निवेश करने में रिस्क

म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में SIP उन लोगों के लिए सही है, जो निवेश पर रिस्क ले सकते हैं। इसकी वजह यह है कि म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम सिप से हर महीने निवेश के पैसे को शेयर बाजार में लगाती है। इसलिए स्कीम के रिटर्न पर शेयर बाजार के प्रदर्शन का सीधा असर पड़ता है। शेयर बाजार का प्रदर्शन अच्छा रहने पर ज्यादा रिटर्न मिलता है, जबकि प्रदर्शन खराब होने पर रिटर्न भी कम रह सकता है।

एसएसवाय में निवेश का पीरियड 15 साल

अब हम देखेंगे कि तीनों इनवेस्टमेंट ऑप्शंस में मंथली 10,000 रुपये के निवेश से 15 साल में कितना बड़ा फंड तैयार होता है। सबसे पहले हम SSY का उदाहरण लेते हैं। यह स्कीम उन लोगों के लिए है, जिनकी बेटियां हैं। माता-पिता मैक्सिमम दो बेटियों के नाम से सुकन्या समृद्धि अकाउंट ओपन कर सकते हैं। एक बेटी के नाम से सिर्फ एक अकाउंट ओपन होगा। बेटी की उम्र 10 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

एसएसवाय का इंटरेस्ट रेट सालाना 8.2 फीसदी

सुकन्या समृद्धि स्कीम का इंटरेस्ट रेट 8.2 फीसदी है। इस स्कीम में सिर्फ 15 साल तक निवेश करना होता है। अकाउंट ओपन करने के 21 साल बाद स्कीम मैच्योर हो जाती है। इसका मतलब है कि अगर बेटी की उम्र अभी 5 साल है तो मंथली 10,000 रुपये 15 साल तक निवेश करने पर साल 2047 तक करीब 55,42,062 लाख रुपये का फंड तैयार हो जाएगा। इसमें 15 साल में कुल निवेश 18,00,000 रुपये होगा। इस पर आपको 37,42,062 रुपये का इंटरेस्ट मिलेगा। मैच्योरिटी अमाउंट पर टैक्स नहीं लगेगा।

retirement table

पीपीएफ का इंटरेस्ट रेट सालाना 7.1 फीसदी 

PPF की स्कीम 15 साल में मैच्योर हो जाती है। इसका इंटरेस्ट रेट अभी 7.1 फीसदी है। इस तरह आप 15 साल में कुल 18,00,000 रुपये निवेश करेंगे। इस पर आपको कुल 14,54,567 रुपये का इंटरेस्ट मिलेगा। कुल मिलाकर 15 साल बाद आपको कुल 32,54,567 लाख रुपये मिलेंगे। इस पैसे पर आपको कोई टैक्स नहीं चुकाना होगा। अगर आप इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम का इस्तेमाल करते हैं तो आप निवेश के पैसे पर डिडक्शंस क्लेम कर सकते हैं।

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सिप से निवेश करने में बनेगा सबसे बड़ा फंड

म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में मंथली 10000 रुपये का निवेश करने पर कुल 47,59,314 रुपये का फंड बनेगा। इस कैलकुलेशन में सालाना 12 फीसदी रिटर्न माना गया है। इसका मतलब है कि 15 साल में आपका 18 लाख रुपये का निवेश कंपाउंडिंग की वजह से 29,59,314 रुपये का रिटर्न जेनरेट करता है। लेकिन, ध्यान देने वाली बात यह है कि इस पैसे पर आपको कैपिटल गेंस टैक्स चुकाना होगा। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस का रेट 12.5 फीसदी है। इस रेट से कुल 5,94,914.25 रुपये टैक्स लगेगा। इसके बावजूद 15 साल का रिटर्न पीपीएफ और सुकन्या समृद्धि योजना से ज्यादा है।

यूसुफ पठान को 500 वर्ग मीटर जमीन मुफ्त देगी गुजरात सरकार? 14 साल पुराने विवाद का होगा अंत

Yusuf Pathan Land Dispute: पश्चिम बंगाल चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की हार के बाद पार्टी छोड़ने वाले सांसद यूसुफ पठान को गुजरात सरकार से 900 वर्ग मीटर से ज्यादा जमीन मिलने वाली है। इसके साथ ही राज्य सरकार के साथ उनका 14 साल पुराना जमीन विवाद भी खत्म होने जा रहा है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह जमीन गुजरात के वडोदरा के तांदलजा इलाके में है। जो कि यूसुफ पठान के परिवार के घर के पास स्थित है।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत, 500 वर्ग मीटर जमीन उन्हें घर बनाने के लिए उपहार के तौर पर दी जाएगी। वहीं, बाकी 478 वर्ग मीटर जमीन उसके तय मूल्य के 55 फीसदी भुगतान पर उन्हें दी जाएगी। बता दें कि यह जमीन वडोदरा नगर निगम (VMC) की है।

पठान ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस से की थी। 2024 में, उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर पश्चिम बंगाल की बहरामपुर लोकसभा सीट जीती। हालांकि, जून 2026 में, वह उन सांसदों में शामिल थे जिन्होंने TMC से अलग होकर ‘नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ जॉइन कर ली।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पठान के राजनीतिक जुड़ावों पर फिर से चर्चा हो रही है, और साथ ही इसने राज्य के साथ ज़मीन से जुड़े विवाद के पुराने इतिहास को भी फिर से सुर्खियों में ला दिया है।

यूसुफ पठान का जमीन विवाद क्या था?

पठान – जो उस समय एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर थे – ने सबसे पहले 2012 में VMC (वडोदरा नगर निगम) से संपर्क किया था। उन्होंने बिना किसी सार्वजनिक नीलामी के, 99 साल की लीज पर एक प्लॉट की मांग की। उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर होने के नाते अपनी सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया और अपने पारिवारिक घर से सटी जमीन मांगी।

2014 में गुजरात सरकार के शहरी विकास विभाग ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया।

हालांकि, जून 2024 में यह विवाद फिर से सामने आया – जो कि TMC के साथ पठान के राजनीतिक करियर की शुरुआत के 2 महीने बाद की बात है। VMC ने पठान को एक नोटिस जारी किया, जिसमें उनसे उस जमीन से ‘अतिक्रमण’ हटाने के लिए कहा गया।

पठान ने गुजरात हाई कोर्ट में इस नोटिस को चुनौती दी। जून 2026 में, कोर्ट ने सवाल उठाया कि बिना किसी औपचारिक आवंटन या भुगतान के, जमीन पर कब्जं कैसे किया जा सकता है और वहाँ बाड़ कैसे लगाई जा सकती है। इसके बाद, यह कानूनी विवाद कोर्ट के बाहर सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ा।

इस प्लॉट की कीमत कितनी है?

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, 978 वर्ग मीटर के इस प्लॉट की अनुमानित बाजार कीमत लगभग 20.5 करोड़ रुपये है, जो कि 2.10 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर के मूल्यांकन पर आधारित है।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत, पठान को 500 वर्ग मीटर जमीन उपहार के तौर पर मिलेगी, जबकि बाकी 478 वर्ग मीटर के लिए उन्हें रियायती दर पर भुगतान करना होगा। सरकार के प्रस्ताव में यह भी प्रावधान है कि राज्य का राजस्व विभाग VMC को इतनी ही कीमत की जमीन आवंटित करेगा।

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दिग्गज निवेशक आशीष कचोलिया ने एक्सप्रो इंडिया में लगभग 1% हिस्सेदारी बेची, ऋषि कजारिया ने स्वराज सूटिंग में बढ़ाई हिस्सेदार

जाने-माने निवेशक आशीष कचोलिया ने सोमवार को ओपन-मार्केट ट्रांजैक्शन के जरिए, बिड़ला समूह से जुड़ी पॉलीमर प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग कंपनी ‘एक्सप्रो इंडिया’ में अपनी लगभग 1 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच दी। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) द्वारा 19 अक्टूबर को जारी बल्क डील डेटा के मुताबिक आशीष कचोलिया ने 21.53 करोड़ रुपये मूल्य के 2.22 लाख इक्विटी शेयर बेचे हैं जो कंपनी की पेड-अप इक्विटी कैपिटल का 0.94 प्रतिशत है। ये शेयर 970.11 रुपये प्रति शेयर के औसत भाव पर बेचे गए हैं।

सितंबर 2026 तक,एक्सप्रो इंडिया  में कचोलिया की 2.01 प्रतिशत हिस्सेदारी थी, जो 4.71 लाख शेयरों के बराबर है। हिस्सेदारी बेचे जाने के बावजूद, सोमवार को एक्सप्रो इंडिया के शेयरों में 1.79 प्रतिशत की तेजी आई और ये 995 रुपये पर बंद हुए। इसके साथ ही इसमें लगातार पांच दिनों से जारी गिरावट का सिलसिला भी थम गया।

हालांकि,बीच-बीच में आने वाली खरीदारी के बावजूद, सितंबर के अपने स्विंग हाई पर पहुंचने के बाद से ही यह स्टॉक दबाव में बना हुआ है। यह स्टॉक सितंबर 2026 में बने 1,408.70 रुपये के हाई से लगभग 31 प्रतिशत गिर चुका है।

ऋषि कजारिया ने स्वराज सूटिग में खरीदी 0.73% अतिरिक्त हिस्सेदारी

इस बीच एक दूसरे दिग्गज निवेशक ऋषि कजारिया ने स्वराज सूटिग में 0.73% अतिरिक्त हिस्सेदारी खरीदी है। हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल (HNI) निवेशक ऋषि कजारिया ने स्वराज सूटिग में 1.94 लाख और इक्विटी शेयर खरीदे हैं, जो कंपनी की पेड-अप इक्विटी कैपिटल का 0.73 प्रतिशत है। ये शेयर 6.29 करोड़ रुपये में खरीदे गए हैं, जिनकी औसत कीमत 323.38 रुपये प्रति शेयर रही। सितंबर 2026 तक, स्वराज सूटिग में कजारिया की 1.24 प्रतिशत हिस्सेदारी थी,जो 3.26 लाख शेयरों के बराबर है। बता दें कि स्वराज सूटिंग सूती और सिंथेटिक कपड़े बनाती है।

FIIs ने की बिकवाली, DIIs से मिला सपोर्ट

उधर विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने सोमवार को भारतीय बाजारों में 1,148.64 करोड़ रुपये की बिकवाली की। यह इस महीने की उनकी सबसे कम नेट सेलिंग रही थी। यह 15 अक्टूबर को हुई 5,285.37 करोड़ रुपये की बिक्री से कम है। एक्सचेंज के प्रोविजनल आंकड़ों के मुताबिक घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 3,201.19 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

कल के सेशन में FIIs ने 11,240.64 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे और 12,389.28 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। DIIs ने 14,781.31 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे और 11,580.12 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वहीं, शुक्रवार, 16 अक्टूबर को FIIs नेट बॉयर रहे थे और उन्होंने 1,165.92 करोड़ रुपये की खरीदारी की थी। यह इस महीने उनका एकमात्र ऐसा सत्र था जिसमें उन्होंने नेट बाइंग की। हालांकि, शुक्रवार DIIs ने 3,661.28 करोड़ रुपये की नेट सेलिंग की थी।

बाजार पर एक नजर

सोमवार को भारतीय बाजारों में गिरावट आई। निफ्टी257.20 अंक या 1.11% गिरकर 22,888.95 पर बंद हुआ। वहीं, सेंसेक्स 876.37 अंक या 1.17% की गिरावट के साथ 73,852.90 पर बंद हुआ। इस गिरावट में प्राइवेट बैंकों की अहम भूमिका रही। निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स में 1.85% की गिरावट आई। FMCG में 1.44% और IT में 1.28% की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स में लगभग 2.4% की तेजी आई।

निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 1.09% और 1.01% की गिरावट आई। सोमवार को FIIs ने अपनी बिकवाली काफी कम कर दी,लेकिन फिर भी बेंचमार्क सूचकांकों में 1% से ज़्यादा की गिरावट आई।

 

 

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Delhi Weather: दशहरे पर नहीं होगी बारिश, लेकिन प्रदूषण बढ़ा रहा चिंता; जानें अगले 5 दिन का मौसम और AQI

Delhi Weather: दिल्ली में मंगलवार, 20 अक्टूबर को दशहरा मनाने की तैयारी चल रही है। इस बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राहत भरी खबर दी है। मौसम विभाग के मुताबिक, आज दिल्ली में बारिश होने की संभावना नहीं है। आसमान ज्यादातर साफ रहेगा। वहीं, दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) मध्यम से खराब श्रेणी के बीच दर्ज किया गया।

मौसम विभाग के अनुसार, आज दिल्ली में अधिकतम तापमान 31 से 33 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। वहीं, न्यूनतम तापमान 17 से 19 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।

दिल्ली में अगले हफ्ते कैसा रहेगा मौसम?

दिल्ली में अगले एक हफ्ते तक बारिश होने की संभावना नहीं है। ज्यादातर दिनों में आसमान साफ रहने का अनुमान है। मौसम विभाग के मुताबिक, 21, 22 और 23 अक्टूबर को आसमान मुख्य रूप से साफ रहेगा। वहीं, 24 और 25 अक्टूबर को आसमान में हल्के बादल छाए रह सकते हैं।

21 अक्टूबर: दिल्ली में दिन का तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। वहीं, सुबह और रात के समय न्यूनतम तापमान 18 से 20 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।

22 अक्टूबर: मौसम में खास बदलाव की उम्मीद नहीं है। अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 18 से 20 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है।

23 अक्टूबर: दिन में गर्मी थोड़ी बढ़ सकती है। अधिकतम तापमान 33 से 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है, जबकि न्यूनतम तापमान 18 से 20 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है।

24 अक्टूबर: दिल्ली में दिन के समय गर्मी बनी रह सकती है। अधिकतम तापमान 33 से 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 18 से 20 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।

25 अक्टूबर: दिन का तापमान 33 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। वहीं, न्यूनतम तापमान गिरकर 17 से 19 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जिससे सुबह और रात में मौसम थोड़ा ठंडा महसूस हो सकता है।

दिल्ली AQI

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की वेबसाइट के अनुसार, मंगलवार सुबह 6 बजे दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में AQI ‘मध्यम’ (मॉडरेट) श्रेणी में रहा।

दिल्ली के प्रमुख इलाकों में AQI का हाल

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के ज्यादातर इलाकों में हवा की गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है। हालांकि, चांदनी चौक और IIT दिल्ली में प्रदूषण का स्तर खराब श्रेणी में पहुंच गया है। अलग-अलग इलाकों में AQI का हाल इस तरह है:

  • आनंद विहार: AQI 119 (मध्यम)
  • अशोक विहार: AQI 112 (मध्यम)
  • आया नगर: AQI 159 (मध्यम)
  • चांदनी चौक: AQI 210 (खराब)
  • IGI एयरपोर्ट (T3): AQI 165 (मध्यम)
  • IIT दिल्ली: AQI 208 (खराब)
  • वजीरपुर: AQI 199 (मध्यम)
  • JNU: AQI 131 (मध्यम)
  • नरेला: AQI 178 (मध्यम)
  • विवेक विहार: AQI 164 (मध्यम)

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ट्रम्प बोले- पेरिस जल्द मुस्लिम शहर बन जाएगा:मैक्रों को 8 साल पहले चेताया था; फ्रांस में हिंसा के लिए इमिग्रेशन नीति को जिम्मेदार ठहराया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को कहा कि पेरिस जल्द मुस्लिम शहर बन जाएगा। उन्होंने फ्रांस में जारी हिंसा के लिए राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की इमिग्रेशन नीति को जिम्मेदार ठहराया। ट्रम्प लंबे समय से इमिग्रेशन पर सख्ती करने की वकालत करते रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि फ्रांस सरकार ने दूसरे देशों से आने वाले लोगों पर रोक लगाने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए। ट्रम्प ने दावा किया कि उन्होंने करीब 8 साल पहले मैक्रों को चेतावनी दी थी कि दूसरे देशों से आने वाले लोगों को इतनी बड़ी संख्या में फ्रांस में आने देना बड़ी गलती है। फ्रांस में महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन में हिंसा और तोड़फोड़ फ्रांस के कई शहरों में 17 अक्टूबर को प्रदर्शन के दौरान हिंसक झड़पें हुई। इन घटनाओं में सरकारी इमारतों में आग लगाने, दुकानों में लूटपाट करने और ऐतिहासिक इमारतों को निशाना बनाने जैसी घटनाएं सामने आई हैं। फ्रांस की पुलिस ने 2400 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया है। वहीं, हिंसा रोकने की कोशिश में करीब 1000 पुलिसकर्मी और सैना के जवान घायल हुए हैं। इसके बाद प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने सोमवार को सरकार की इमरजेंसी मीटिंग बुलाई। उन्होंने सोमवार शाम से पेरिस, लिली, नीस समेत कई शहरों में कर्फ्यू लगाने को कहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो देश में आपातकाल भी लगाया जा सकता है। एक्सपर्ट- हिंसा के पीछे सिर्फ इमिग्रेशन को वजह मानना सही नहीं ट्रम्प ने फ्रांस में हो रही हिंसा को दूसरे देशों से लोगों को आने देने की नीति से जोड़ा है। हालांकि, एक्सपर्ट्स के मुताबिक फ्रांस के हालात के पीछे महंगाई, रोजमर्रा की चीजों के बढ़ते दाम, आर्थिक परेशानियां, सरकारी सुविधाओं पर बढ़ता दबाव और युवाओं की नाराजगी जैसे मुद्दे भी हैं। फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिणपंथी नेता और कुछ टिप्पणीकार इमिग्रेशन पर सख्ती करने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, हिंसा के लिए इमिग्रेशन कितना जिम्मेदार है, यह अलग सवाल है। मैक्रों बोले- तोड़फोड़ करने वालों को कीमत चुकानी होगी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हिंसक प्रदर्शन के बाद रविवार को सख्त कार्रवाई का वादा किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने तोड़फोड़ और लूटपाट की है, उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी। मैक्रों ने माना कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोगों की कुछ मांगें जायज हो सकती हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों की मांगों को हिंसा और तोड़फोड़ करने वालों की हरकतों के साथ नहीं जोड़ना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि फ्रांस के नागरिक अपने ही देश के खिलाफ ऐसी हरकतें कैसे कर सकते हैं। मैक्रों को देश का सबसे कमजोर राष्ट्रपति माना जा रहा फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों अपने राजनीतिक करियर के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। उनके विरोधी उन्हें अब तक का सबसे कमजोर राष्ट्रपति करार दे रहे हैं। हाल ही में हुए एक सर्वे में सिर्फ 15% लोगों ने उनके प्रति सकारात्मक राय जताई, जबकि 82% लोगों ने उनके कामकाज पर नाराजगी जताई। महंगाई, कमजोर अर्थव्यवस्था, बढ़ता सरकारी कर्ज और शिक्षा व दूसरी सरकारी सेवाओं को लेकर लोगों का गुस्सा बढ़ रहा है। गूगल पर ट्रेंड कर रहा फ्रांस प्रोटेस्ट ———————— यह खबर भी पढ़ें… फ्रांस में बार-बार क्यों भड़कते हैं प्रदर्शन: पेंशन से लेकर महंगाई तक, आंदोलन के पीछे 5 बड़ी वजहें समझिए फ्रांस दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। यहां आधुनिक शहर हैं और शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी सरकारी सुविधाओं का बड़ा तंत्र है। इसके बावजूद, सरकार के फैसलों को लेकर यहां बार-बार बड़े आंदोलन होते हैं। पूरी खबर पढ़ें…

‘लंदन की लाखों की कमाई और आरामदायक जिंदगी छोड़ देश के लिए लड़े आशुतोष और सौरभ…’ , CJP नेता अभिजीत दिपके ने लिखी इमोशनल पोस्ट

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फांउडर अभिजीत दिपके ने पार्टी के सदस्य आशुतोष रांका और सौरव दास के समर्थन में एक इमोशनल नोट लिखा है। आशुतोष रांका और सौरव दास सोमवार को लगातार छठे दिन न्यायिक हिरासत में रहे। सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट में अभिजीत दिपके ने बताया कि दोनों ही लंदन में लाखों की कमाई कर रहे थे। अभिजीत ने उनकी पुरानी जिंदगी, देश के लिए कुछ बेहतर करने के फैसले और दूसरों के हक में आवाज उठाने के जज्बे को याद किया। उन्होंने बताया कि कैसे दोनों ने अपनी आरामदायक जिंदगी छोड़कर उन लोगों के लिए लड़ने का रास्ता चुना, जिन्हें मदद की जरूरत है।

दिपके ने किया इमोशनल पोस्ट

X पर किए गए पोस्ट में अभिजीत दिपके ने लिखा, “कुछ साल पहले आशुतोष रांका लंदन में अच्छी सैलरी वाली कॉर्पोरेट नौकरी करते थे, जहां से उन्हें लाखों रुपये मिलते थे। वहीं, सौरव दास देश की कानूनी व्यवस्था पर लिख रहे थे और अपनी जिंदगी अच्छे से जी रहे थे। दोनों के पास सफल करियर, फाइनेंशियल सिक्योरिटी और अपनी बनाई हुई जिंदगी को आगे बढ़ाने के कई मौके थे।”

उन्होंने आगे लिखा, “लेकिन दोनों ने देश को बेहतर बनाने की उम्मीद में अपनी पुरानी जिंदगी छोड़ने का फैसला किया। उनके पास आरामदायक जीवन छोड़कर सड़कों पर उतरने, मुश्किलों का सामना करने और जेल जाने की कोई मजबूरी नहीं थी। इसके बावजूद, उन्होंने यह रास्ता चुना और देश के लिए कुछ बेहतर करने की कोशिश में जुट गए।”

बिता सकते थे आराम की जिंदगी

दिपके ने आगे लिखा, “इन दोनों की सबसे खास बात यह है कि अच्छी बैकग्राउंड से आने के बावजूद उन्होंने उन लोगों के हक में आवाज उठाने का फैसला किया, जिनके पास उनके जैसे मौके और सुविधाएं नहीं थीं। वे चाहते तो दूसरों की परेशानियों से दूर रहकर अपनी जिंदगी आराम से बिता सकते थे। वे उन लोगों की समस्याओं को भी नजरअंदाज कर सकते थे, जिन्हें वे जानते तक नहीं थे।”

यहीं है उनकी सबसे बड़ी खूबी

दिपके ने आगे लिखा, “उनसे किसी ने अपनी सुख-सुविधाएं छोड़ने या इतना बड़ा त्याग करने के लिए नहीं कहा था। इसके बावजूद उन्होंने ऐसा किया, क्योंकि वे सिर्फ अपनी नहीं, बल्कि दूसरों की जिंदगी की भी परवाह करते थे। मेरे हिसाब से, किसी इंसान की सबसे बड़ी खूबी यही होती है कि वह अनजान लोगों के लिए भी आवाज उठाए, ऐसी लड़ाइयां लड़े जिनका सीधा संबंध उससे न हो और दूसरों की जिंदगी बेहतर बनाने के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगाने को तैयार रहे। आशु और सौरव भी ऐसे ही इंसान हैं।” बता दें इससे पहले भी अभिजीत दिपके ने आशुतोष रांका और सौरव दास के लिए इमोशनल पोस्ट डाला था।

जिस IIT-IIM की डिग्री के लिए लाखों युवा मेहनत करते हैं, उससे बच्चों को दूर क्यों रखना चाहते हैं ये शख्स?

भारत में IIT-IIM में दाखिला मिलना बड़ी कामयाबी माना जाता है, लेकिन क्या अच्छी जिंदगी के लिए प्रतिष्ठित डिग्री जरूरी है? IIM अहमदाबाद से पढ़े एक शख्स की सोच ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। वह नहीं चाहते कि उनके बच्चे सिर्फ समाज की उम्मीदों पर खरे उतरने के लिए IIT या IIM का रास्ता चुनें। उनके मुताबिक, जिंदगी में अपनी पसंद से काम करना और खुश रहना भी उतना ही मायने रखता है। उनकी यह सोच ऐसे समय में सामने आई है, जब लाखों छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सालों लगा देते हैं और परिवार भी उनसे बड़ी उपलब्धियों की उम्मीद करते हैं।

IIM से पढ़े पिता की सोच ने क्यों खींचा ध्यान?

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर फाउंडर आबिद हसन ने अपने IIM अहमदाबाद से पढ़े एक दोस्त के साथ हुई बातचीत साझा की। उन्होंने बताया कि उनका दोस्त नहीं चाहता कि उसके बच्चे IIT या IIM में जाने को अपनी जिंदगी का लक्ष्य बनाएं। अगर वे इन संस्थानों में पढ़ने के बजाय अपनी जिंदगी का आनंद लेना चुनते हैं, तो उसे इससे भी खुशी होगी।

आबिद हसन ने इस सोच को शिक्षा और करियर की सफलता का एक अलग नजरिया बताया। उनके मुताबिक, शायद प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ने का असली फायदा यही है कि इंसान एक ऐसे मुकाम पर पहुंचे, जहां उसे अपनी जिंदगी के फैसले लेने के लिए किसी डिग्री या सामाजिक पहचान की जरूरत न पड़े।

बड़ी डिग्री ही सफलता की गारंटी नहीं

इस पोस्ट पर एक अन्य IIM ग्रेजुएट ने भी अपनी राय साझा की। उन्होंने कहा कि वह भी अपने बच्चों पर प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ने का दबाव नहीं डालना चाहेंगे। उनके मुताबिक, कई IIM ग्रेजुएट आगे चलकर अपना कारोबार शुरू करते हैं। ऐसे में बच्चों को उद्यमी बनने के लिए MBA करना ही क्यों जरूरी हो?

उन्होंने व्यावहारिक अनुभव, हुनर और अपनी रुचि के मुताबिक काम करने की आजादी को अहम बताया। उनके अनुसार, कई बार माता-पिता डिग्री को इतना महत्व देने लगते हैं कि बच्चों की वास्तविक दिलचस्पी पीछे छूट जाती है।

आर्थिक सुरक्षा से मिल सकती है सपनों को उड़ान

चर्चा में एक यूजर ने कहा कि इतिहास के कई प्रभावशाली कवि, लेखक और स्वतंत्रता सेनानी संपन्न परिवारों से आते थे। आर्थिक सुरक्षा होने पर लोगों को रचनात्मक और बौद्धिक रुचियों को आगे बढ़ाने का ज्यादा अवसर मिल सकता है।

रणजी ट्रॉफी में नाबाद 400 रन बनाने वाले दूसरे बल्लेबाज बने चिन्मय सुतार

29 साल के मिजोरम के बल्लेबाज चिन्मय सुतार ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट की एक पारी में चौहरा शतक लगाने वाले दूसरे भारतीय बनने का कारनामा किया है।

अपने करियर का दूसरा प्रथम श्रेणी मुकाबला खेल रहे सुतार ने सोमवार को यह उपलब्धि नागालैंड के खिलाफ मुकाबले में हासिल की। उन्होंने सोविमा में प्लेट लीग के मैच में पृथ्वी शॉ के 379 रन के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। अब वह रणजी ट्रॉफ़ी के इतिहास में दूसरा सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर बनाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। सुतार ने अपनी पारी में 517 गेंदों का सामना किया और 46 चौके और सात छक्के लगाये। सुतार से आगे अब केवल बीबी निंबालकर का स्कोर है। उन्होंने 1948-49 सीज़न में महाराष्ट्र के लिए काठियावाड़ के खिलाफ नाबाद 443 रन बनाए थे। हालांकि सुतार के पास उनको भी पीछे छोड़ने का मौका था, लेकिन मिजोरम के कप्तान ने उनके चौहरे शतक के ठीक बाद पारी घोषित कर दी।

चाय के समय सुतार 392 रन बनाकर नाबाद थे। इसके बाद उन्होंने पारी के 155वें ओवर में 400 रन का आंकड़ा पार किया। तभी मिजोरम ने नौ विकेट पर 581 रन बनाकर पारी घोषित कर दी। उस समय सुतार और लालरेमपुनिया छकछुआक के बीच दसवें विकेट के लिए नाबाद 190 रन की साझेदारी हो चुकी थी।

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रणजी ट्रॉफी के इतिहास में आखिरी विकेट के लिए यह तीसरी सबसे बड़ी साझेदारी है। सबसे बड़ी साझेदारी का रिकॉर्ड 233 रन का है, जो दिल्ली के अजय शर्मा (259) और मनिंदर सिंह (78) के नाम है। दोनों ने 1991-92 सीज़न में मुंबई के ख़िलाफ़ यह साझेदारी की थी।

सुतार ने इस साल की शुरुआत में घरेलू 50 ओवरों के टूर्नामेंट विजय हजारे ट्रॉफी में मुंबई का प्रतिनिधित्व किया था। स्थानीय लीग में शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें यह अवसर मिला था। जून में उन्होंने मुंबई टी-20 लीग में एमएससी मराठा रॉयल्स को लगातार दूसरी बार चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई। टूर्नामेंट के आख़िरी दो मैचों में उन्होंने लगातार अर्धशतक लगाए। सुतार ने छह पारियों में 212 रन बनाए और उनका स्ट्राइक रेट क़रीब 120 रहा।

2026-27 सीज़न शुरू होने से पहले सुतार ने मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (एमसीए) से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लिया था और पिछले हफ़्ते मिजोरम के लिए रणजी ट्रॉफी में डेब्यू किया। मणिपुर के खिलाफ सीजन के पहले मुकाबले में उन्होंने पहली पारी में 35 और दूसरी पारी में 99 रन बनाए। मिज़ोरम को इस मुकाबले में तीन विकेट से करीबी हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन पहली पारी में 68 रन से पिछड़ने के बाद टीम ने जो वापसी की, उसमें सुतार की दूसरी पारी की बल्लेबाजी की अहम भूमिका रही थी।

चिन्मय सुतार ने मिजोरम के कुल 581/9 रन में से 68.85 प्रतिशत रन बनाए। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 500 या उससे अधिक रन के टीम स्कोर में किसी एक बल्लेबाज का यह दूसरा सबसे बड़ा योगदान है। इस मामले में सबसे आगे न्यूज़ीलैंड के बर्ट सटक्लिफ हैं। उन्होंने 1952 में कैंटरबरी के ख़िलाफ़ ओटागो के कुल 500 रनों में से 385 रन बनाए थे, जो टीम के स्कोर का 77 प्रतिशत था।

Pic Credit : UNI