CJP नेता आशुतोष रांका और सौरव दास की बढ़ीं मुश्किलें, कोर्ट ने दो दिन बढ़ाई न्यायिक हिरासत

दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत 21 अक्टूबर तक बढ़ा दी है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 21 अक्टूबर को होगी। फिलहाल दोनों नेता फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद हैं। इससे पहले 14 अक्टूबर को उन्हें स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) में पेश किया गया था। कोर्ट ने उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। दोनों पर शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड की शर्तें तोड़ने और जंतर-मंतर में बिना अनुमति प्रवेश करने का आरोप है। जंतर-मंतर को पहले ही विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित सूची से हटा दिया गया था।

दो दिन तक बढ़ी न्यायिक हिरासत

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की कानूनी टीम ने जमानत से जुड़े दस्तावेज जमा करने के बाद आशुतोष रांका और सौरव दास को रिहा करने की मांग की। इससे पहले, जमानतदार नहीं मिलने के कारण दोनों नेताओं को जेल भेज दिया गया था। सोमवार को पुलिस ने उनकी हिरासत बढ़ाने की मांग की, जिसके बाद मजिस्ट्रेट ने दोनों को दो दिन और जेल में रखने का आदेश दिया।

13 अक्टूबर को लिया था हिरासत में

सौरव दास और आशुतोष रांका को मंगलवार सुबह 13 अक्टूबर 2026 को हिरासत में लिया गया था। आरोप है कि दोनों ने बैरिकेड तोड़कर बिना अनुमति जंतर-मंतर में प्रवेश किया। इस दौरान उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए नारेबाजी भी की। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया। उन पर बिना अनुमति किसी जगह में घुसने, प्रतिबंधों का उल्लंघन करने, शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड की शर्तें तोड़ने और एक सरकारी कर्मचारी को उसकी ड्यूटी करने से रोकने के आरोप लगाए गए हैं।

साइन किया था बॉन्ड

सूत्रों के अनुसार, शनिवार को प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने के बाद सौरव दास और आशुतोष रांका ने एक साल तक शांति बनाए रखने का बॉन्ड भरा था। ये मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और अन्य संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। इन संगठनों ने मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान कथित गड़बड़ियों का आरोप लगाया है। विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है।

‘लंदन की लाखों की कमाई और आरामदायक जिंदगी छोड़ देश के लिए लड़े आशुतोष और सौरभ…’ , CJP नेता अभिजीत दिपके ने लिखी इमोशनल पोस्ट

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फांउडर अभिजीत दिपके ने पार्टी के सदस्य आशुतोष रांका और सौरव दास के समर्थन में एक इमोशनल नोट लिखा है। आशुतोष रांका और सौरव दास सोमवार को लगातार छठे दिन न्यायिक हिरासत में रहे। सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट में अभिजीत दिपके ने बताया कि दोनों ही लंदन में लाखों की कमाई कर रहे थे। अभिजीत ने उनकी पुरानी जिंदगी, देश के लिए कुछ बेहतर करने के फैसले और दूसरों के हक में आवाज उठाने के जज्बे को याद किया। उन्होंने बताया कि कैसे दोनों ने अपनी आरामदायक जिंदगी छोड़कर उन लोगों के लिए लड़ने का रास्ता चुना, जिन्हें मदद की जरूरत है।

दिपके ने किया इमोशनल पोस्ट

X पर किए गए पोस्ट में अभिजीत दिपके ने लिखा, “कुछ साल पहले आशुतोष रांका लंदन में अच्छी सैलरी वाली कॉर्पोरेट नौकरी करते थे, जहां से उन्हें लाखों रुपये मिलते थे। वहीं, सौरव दास देश की कानूनी व्यवस्था पर लिख रहे थे और अपनी जिंदगी अच्छे से जी रहे थे। दोनों के पास सफल करियर, फाइनेंशियल सिक्योरिटी और अपनी बनाई हुई जिंदगी को आगे बढ़ाने के कई मौके थे।”

उन्होंने आगे लिखा, “लेकिन दोनों ने देश को बेहतर बनाने की उम्मीद में अपनी पुरानी जिंदगी छोड़ने का फैसला किया। उनके पास आरामदायक जीवन छोड़कर सड़कों पर उतरने, मुश्किलों का सामना करने और जेल जाने की कोई मजबूरी नहीं थी। इसके बावजूद, उन्होंने यह रास्ता चुना और देश के लिए कुछ बेहतर करने की कोशिश में जुट गए।”

बिता सकते थे आराम की जिंदगी

दिपके ने आगे लिखा, “इन दोनों की सबसे खास बात यह है कि अच्छी बैकग्राउंड से आने के बावजूद उन्होंने उन लोगों के हक में आवाज उठाने का फैसला किया, जिनके पास उनके जैसे मौके और सुविधाएं नहीं थीं। वे चाहते तो दूसरों की परेशानियों से दूर रहकर अपनी जिंदगी आराम से बिता सकते थे। वे उन लोगों की समस्याओं को भी नजरअंदाज कर सकते थे, जिन्हें वे जानते तक नहीं थे।”

यहीं है उनकी सबसे बड़ी खूबी

दिपके ने आगे लिखा, “उनसे किसी ने अपनी सुख-सुविधाएं छोड़ने या इतना बड़ा त्याग करने के लिए नहीं कहा था। इसके बावजूद उन्होंने ऐसा किया, क्योंकि वे सिर्फ अपनी नहीं, बल्कि दूसरों की जिंदगी की भी परवाह करते थे। मेरे हिसाब से, किसी इंसान की सबसे बड़ी खूबी यही होती है कि वह अनजान लोगों के लिए भी आवाज उठाए, ऐसी लड़ाइयां लड़े जिनका सीधा संबंध उससे न हो और दूसरों की जिंदगी बेहतर बनाने के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगाने को तैयार रहे। आशु और सौरव भी ऐसे ही इंसान हैं।” बता दें इससे पहले भी अभिजीत दिपके ने आशुतोष रांका और सौरव दास के लिए इमोशनल पोस्ट डाला था।

दिल्ली में तिरंगा मार्च से पहले CJP संस्थापक अभिजीत दिपके हिरासत में, नेहा बोरा ने सरकार पर उठाए सवाल

Abhijeet Dipke: दिल्ली में तिरंगा फहराने को लेकर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके को हिरासत में लिया गया था। अब उन्हें एहतियातन हिरासत में रखा गया है। पार्टी ने कनॉट प्लेस में ‘लहरा दो तिरंगा’ नाम से प्रदर्शन करने की योजना बनाई थी।

वहीं, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की प्रमुख नेहा बोरा को रविवार को रिहा कर दिया गया। दिल्ली पुलिस एक्ट की धारा 65 के तहत जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें छोड़ा गया।

पुलिस के अनुसार, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत दिपके के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है। उन्हें आज, 17 अक्टूबर को एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पेश किया जाएगा।

पुलिस ने बताया कि CJP के संस्थापक को दो नोटिस भेजे गए थे, जिनमें उन्हें प्रस्तावित आंदोलन के लिए कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में न जाने का निर्देश दिया गया था, लेकिन कथित तौर पर उन्होंने इन निर्देशों का पालन नहीं किया।

पुलिस के मुताबिक, उन्होंने 50,000 रुपये का एक बॉन्ड भी भरा था और उन्हें एक साल तक सार्वजनिक शांति भंग न करने का निर्देश दिया गया था।

‘कानून-व्यवस्था की हर तरह से धज्जियां उड़ाई जा रही हैं’

अपनी रिहाई के बाद ANI से बात करते हुए, AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।

बोरा ने सवाल किया, “कानून-व्यवस्था की हर तरह से धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। आम नागरिकों के साथ ऐसा बर्ताव किया जाता है जैसे वे कोई खूंखार अपराधी हों; हमारे देश में लंबे समय से यही चलन चला आ रहा है। मौजूदा आंदोलन ने साफ कर दिया है कि लोगों को किस तरह हिरासत में लिया जा रहा है—चाहे दिन हो या शाम, उन्हें पूरी रात हिरासत में रखा जाता है और अगले दिन सुबह या शाम को ही छोड़ा जाता है। आखिर किस अधिकार के तहत इसे सही ठहराया जा सकता है? किस कानून या आदेश के तहत हिरासत में लिए गए लोगों को पूरी रात कैद में रखना जायज है?”

उन्होंने विवादित ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) प्रक्रिया को लेकर, मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग चलाने की CJP की मांग को फिर से दोहराया।

बोरा ने कहा, “कानूनी तौर पर, लोगों को-खासकर महिलाओं को सूर्यास्त के बाद रिहा कर दिया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। इसके अलावा, एक नया नैरेटिव (विमर्श) फैलाया जा रहा है-अराजकता और अव्यवस्था का। कैसी अराजकता और अव्यवस्था? वैसी ही, जैसी आपने सेंट्रल दिल्ली में फैलाई थी? दिल्ली के लोग चैन की सांस भी नहीं ले पा रहे हैं; वे काम पर जाने के लिए जो भी रास्ता चुनते हैं, वह बंद मिलता है। आप पूरे देश में अराजकता और अव्यवस्था फैला रहे हैं। कृपया, भारत के लोगों को बख्श दें। ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग (impeachment) चलाएं और SIR को रोकें, ताकि इस देश के आम नागरिक चैन की सांस ले सकें, सुकून महसूस कर सकें और उनके मतदान के अधिकार सुरक्षित रह सकें।”

बोरा ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस उन्हें अपने वकीलों से बात नहीं करने दे रही थी।

उन्होंने कहा, “उन्होंने (पुलिस ने) मेरा नाम, पता और अन्य विवरण मांगे। काफी देर तक, उन्होंने मुझे किसी कानूनी सलाहकार (वकील) से बात करने या सलाह लेने भी नहीं दिया। हमारे वकील 5-6 घंटे तक मुझसे संपर्क करने की कोशिश करते रहे; जब हमने किसी तरह उन्हें फोन किया, तब जाकर उन्हें मुझसे मिलने की अनुमति मिली। ये लोग लंबे समय से इसी तरह की हरकतें करते आ रहे हैं।”

CJP ने दिपके के ठिकाने के बारे में जानकारी मांगी

CJP ने आरोप लगाया है कि दिपके को किसी अज्ञात जगह पर ले जाया गया है और उनके वकीलों को उनसे बात नहीं करने दी जा रही है।

X पर एक पोस्ट में, CJP ने लिखा, “अभिजीत दिपके को दिल्ली पुलिस ने अगवा कर लिया है। उन्हें उठाए हुए 10 घंटे से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन अभी तक उनके माता-पिता, वकीलों या CJP की टीम को उनके ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है।”

यह घटनाक्रम CJP के अन्य सदस्यों, जिनमें सौरव दास और आशुतोष रांका शामिल हैं, को हिरासत में लिए जाने के बाद हुआ है। इन दोनों नेताओं को जंतर-मंतर में घुसने के आरोप में हिरासत में लिया गया था, जिसे अब विरोध-प्रदर्शन की जगह के रूप में मान्यता नहीं दी गई है।

बता दें कि CJP, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को वापस लेने और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रही है।

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CJP Protest News: दिल्ली में इस प्रोटेस्टर को जिन 4 ने पीटा उनकी पहचान हुई और पुलिस ने ट्रेस भी कर लिया! अब होगा ये एक्शन

CJP Protest News: राजधानी में एक प्रदर्शनकारी के साथ कथित मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद दिल्ली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। दिल्ली पुलिस ने मामले में चार लोगों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। यह घटना 10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध-प्रदर्शन के दौरान सामने आई थी। पुलिस के मुताबिक, घटना दिल्ली के डीडीयू मार्ग पर हुई, जो कमला मार्केट थाना क्षेत्र में आता है। मामले में किसी औपचारिक शिकायत का इंतजार किए बिना पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई शुरू कर दी है।

दिल्ली पुलिस ने रविवार को X पर लिखा, “सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो का दिल्ली पुलिस (कमला मार्केट थाना) ने खुद संज्ञान लिया। इस वीडियो में चार लोग एक पुरुष प्रदर्शनकारी के साथ मारपीट करते हुए दिख रहे थे। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।”

पुलिस ने सोशल मीडिया पोस्ट में आगे लिखा, “घटना में शामिल चारों लोगों की पहचान कर ली गई है और उनका पता लगा लिया गया है। कानून के मुताबिक आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। दिल्ली पुलिस हिंसा की घटनाओं के खिलाफ उचित कार्रवाई करने और ऐसी शिकायतों पर तुरंत ध्यान देने के लिए प्रतिबद्ध है।”

कौन हैं मारपीट के आरोप में गिरफ्तार चारों आरोपी?

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान रमन सैनी (50), विवेकानंद उर्फ विवेक (32), कपिल कुमार (27) और रविंदर सिंह उर्फ गोविंद हिंदू (35) के रूप में हुई है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, चारों ने खुद को हिंदू रक्षा दल से जुड़ा हुआ बताया है। इस संबंध में सामने आई जानकारी आरोपियों के कथित जुड़ाव पर आधारित है। पुलिस ने वीडियो सामने आने के बाद उसकी जांच की और सुरक्षा व्यवस्था में तैनात कर्मियों से जानकारी जुटाई। इसके बाद घटनास्थल की पहचान डीडीयू मार्ग के रूप में की गई। शुरुआती दौर में वीडियो कहां का है, यह स्पष्ट नहीं था।

बिना शिकायत के पुलिस ने क्यों लिया संज्ञान?

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, घटना को लेकर पुलिस के पास उस समय तक पीड़ित या किसी अन्य व्यक्ति अथवा संगठन की ओर से औपचारिक शिकायत नहीं पहुंची थी। हालांकि, वीडियो के तेजी से वायरल होने और आरोपियों के दिल्ली-एनसीआर से बाहर जाने की आशंका संबंधी जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई की। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आशंका थी कि आरोपी क्षेत्र छोड़कर कहीं और जा सकते हैं। इसके बाद पुलिस ने उनकी पहचान की और उन्हें हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

वायरल वीडियो में क्या दिखाई दिया?

सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में कुछ लोगों को प्रदर्शनकारियों के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की और मारपीट करते हुए देखा जा सकता है। रिपोर्टों के मुताबिक, वीडियो में युवाओं को धक्का देते और पीटते हुए दिखाया गया है। इसमें महिलाओं के साथ भी कथित तौर पर धक्का-मुक्की और मारपीट होती दिखाई देती है।

वीडियो सामने आने के बाद इसे कई सोशल मीडिया अकाउंट्स ने साझा किया। इनमें युवा कांग्रेस, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और CJP से जुड़े अकाउंट भी शामिल बताए गए हैं। घटना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। हालांकि, वायरल वीडियो अपने आप में घटना के सभी पहलुओं या आरोपियों की कानूनी जिम्मेदारी का अंतिम प्रमाण नहीं है। इसकी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

CJP के प्रदर्शन के दौरान सामने आई घटना

यह मामला दिल्ली में 10 अक्टूबर को हुए CJP के प्रदर्शन से जुड़ा है। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया था। वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर पार्टी विरोध कर रही है। प्रदर्शन के दौरान राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी थी। पुलिस ने कई स्थानों पर लोगों को जुटने से रोकने के लिए कार्रवाई की थी। इसी घटनाक्रम के बीच डीडीयू मार्ग पर कथित मारपीट का वीडियो सामने आया, जिसने पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा को लेकर बहस तेज कर दी।

अब आरोपियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी?

चारों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद मामले में पुलिस की जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। जांच के दौरान पुलिस घटना के वीडियो, गवाहों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल कर सकती है। इसके आधार पर यह स्पष्ट किया जाएगा कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और किसकी क्या भूमिका थी।

दिल्ली पुलिस ने अपने बयान में कहा है कि मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कानून के अनुसार की जा रही है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में आरोपियों के खिलाफ दर्ज FIR की धाराओं, उन्हें अदालत में पेश किए जाने या अदालत के किसी आदेश का विस्तृत डिटेल्स नहीं दिया गया है।

दीपके, रांका और दास रिहा

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से पहले दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत में लिए जाने के बाद एहतियातन गिरफ्तार किया गया था। लेकिन रविवार को उन्हें कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने के बाद रिहा कर दिया गया।

CJP की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने बताया कि उन्हें इस शर्त पर रिहा किया गया है कि वे एक साल तक शांति भंग नहीं करेंगे। इससे पहले, रविवार सुबह पुलिस ने बताया था कि उसने राष्ट्रीय राजधानी में CJP नेताओं को उनका विमान उतरने के बाद हिरासत में ले लिया था और फिर उन्हें एहतियातन गिरफ्तार कर लिया गया था।

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सूत्रों के अनुसार, CJP नेताओं के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 (शांति बनाए रखने के लिए प्रतिभूति) और धारा 170 (संज्ञेय अपराधों को रोकने के लिए गिरफ्तारी) के तहत कार्रवाई की गई। शनिवार को CJP नेताओं को हिरासत में लिया गया था। यह कार्रवाई दिल्ली में सुरक्षा के अत्यधिक कड़े इंतजामों के बीच हुई, जहां प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर पहुंचने से रोकने के लिए विभिन्न स्थानों पर 7,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया था।

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Delhi traffic advisory for October 11: मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा फिर से विरोध-प्रदर्शन का ऐलान किए जाने के बीच, रविवार को लगातार दूसरे दिन दिल्ली के कई इलाकों में ट्रैफिक संबंधी कड़े प्रतिबंध लागू रहे। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस द्वारा जारी एडवाइजरी के अनुसार, रविवार सुबह छह बजे से ही वाहनों के मार्गों में बदलाव किया गया है। लुटियंस दिल्ली में जंतर-मंतर, कनॉट प्लेस, मंडी हाउस, पटेल चौक और कई अन्य प्रमुख चौराहों के आसपास ट्रैफिक प्रभावित रहने की आशंका है।

प्रभावित रूट्स में अशोक रोड-जंतर-मंतर रोड गोलचक्कर, टॉलस्टॉय मार्ग-जनपथ चौराहा, जय सिंह रोड-संसद मार्ग चौराहा, रेल भवन गोलचक्कर, पटेल चौक, गोल डाकखाना और कनॉट प्लेस के आसपास के कई चौराहे शामिल हैं। इसके अलावा, मंडी हाउस, मिंटो रोड-दीन दयाल उपाध्याय मार्ग चौराहा, लोधी रोड फ्लाईओवर, नीला गुंबद गोलचक्कर, सम्राट होटल गोलचक्कर, सरदार पटेल मार्ग-पंचशील मार्ग चौराहा तथा भीकाजी कामा प्लेस और मोती बाग फ्लाईओवर के नीचे बने अंडरपास पर भी यातायात प्रभावित रहने की आशंका है।

ट्रैफिक पुलिस ने लोगों को गैर-जरूरी यात्रा से बचने और विशेष रूप से रेलवे स्टेशन, अंतरराज्यीय बस अड्डों तथा एयरपोर्ट जाने के लिए पर्याप्त अतिरिक्त समय लेकर घर से निकलने की सलाह दी है। पुलिस ने बताया कि स्थिति का आकलन करने के बाद प्रतिबंधों में ढील दी जाएगी या उनमें बदलाव किया जाएगा। ये पाबंदियां सुबह 6 बजे से शुरू हो गई हैं। अधिकारियों ने बताया कि जमीनी हालात के आधार पर इन्हें लागू या बदला जा सकता है।

इन रास्तों को करें इग्नोर

शंकर रोड-वंदे मातरम टी-पॉइंट गोलचक्कर (नई दिल्ली की ओर)

धौला कुआं फ्लाईओवर

झंडेवालान गोलचक्कर

पंचकुइयाँ गोलचक्कर

मंडी हाउस गोलचक्कर

डॉ. दिनेश नंदिनी डालमिया चौक (W-पॉइंट)

राम चरण अग्रवाल चौक (A-पॉइंट)

मिंटो रोड और दीन दयाल उपाध्याय मार्ग

गुरु नानक चौक

चेम्सफ़ोर्ड रोड-आउटर सर्कल कनॉट प्लेस टी-पॉइंट

भैरौं रोड-MGM (रिंग रोड) टी-पॉइंट

लोधी रोड फ़्लाईओवर

नीला गुंबद गोलचक्कर

मदरसा टी-पॉइंट

सम्राट होटल गोलचक्कर

सरदार पटेल मार्ग-पंचशील मार्ग क्रॉसिंग

भीकाजी कामा प्लेस के नीचे

मोती बाग फ़्लाईओवर के नीचे

रिंग रोड-सैन मार्टिन मार्ग टी-पॉइंट

अशोक रोड-जंतर मंतर रोड गोलचक्कर

विंडसर पैलेस गोलचक्कर

टॉल्स्टॉय-जनपथ क्रॉसिंग

रेल भवन गोलचक्कर

जय सिंह रोड-संसद मार्ग क्रॉसिंग

आउटर सर्कल कनॉट प्लेस-बाराखंभा रोड टी-पॉइंट

गोल डाक खाना गोलचक्कर

पटेल चौक गोलचक्कर

जय सिंह रोड-अशोक रोड टी-पॉइंट

RML हॉस्पिटल गोलचक्कर

आउटर सर्कल कनॉट प्लेस-संसद मार्ग टी-पॉइंट।

दिल्ली में सुरक्षा के कड़े प्रबंध

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना प्रदर्शन जारी रखने की कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की घोषणा के मद्देनजर दिल्ली में रविवार को लगातार दूसरे दिन भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। पुलिस और अर्धसैनिक बलों के 30,000 से अधिक जवानों की तैनाती की योजना है। दिल्ली पुलिस ने शनिवार को प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर पहुंचने से रोकने के लिए व्यापक अभियान चलाया था। प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बाद बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था।

अवैध सभाओं को रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। दिल्ली से लगती सीमाओं, रेलवे स्टेशनों, बस टर्मिनलों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर निगरानी कड़ी कर दी गई है। CJP की ओर से अपना आंदोलन जारी रखने की घोषणा के बाद सुरक्षा के ये इंतजाम किए गए हैं।

सुरक्षा व्यवस्था संभालने में दिल्ली पुलिस की मदद के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) की 120 से अधिक कंपनियां तैनात की गई हैं। नई दिल्ली जिले को 20 जोन में बांटा गया है। संयुक्त पुलिस आयुक्त, पुलिस उपायुक्त और अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त जमीनी स्तर पर स्थिति पर नजर रख रहे हैं।विभिन्न इकाइयों का नेतृत्व करने वाले विशेष पुलिस आयुक्त भी स्थिति पर कड़ी निगरानी रख रहे हैं।

पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी की सीमाओं पर भी सुरक्षा कड़ी कर दी है। वाहनों की जांच बढ़ा दी गई है और होटलों, गेस्ट हाउस, लॉज तथा धर्मशालाओं में लोगों के सत्यापन की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। प्रदर्शनकारियों को जुटाने की कोशिशों का पता लगाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी नजर रखी जा रही है।

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पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने और सुरक्षा कर्मियों के साथ सहयोग करने की अपील की है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा पर निकलने से पहले आधिकारिक घोषणाओं की जानकारी ले लें।

CJP Protest Updates: अभिजीत दीपके, रांका और दास गिरफ्तार! थोड़ी देर में मजिस्ट्रेट के सामने पेशी! आज जंतर-मंतर पर फिर प्रदर्शन का ऐलान, ध्रुव राठी रिहा

CJP Protest Updates: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को गिरफ्तार किए जाने के बाद आज यानी रविवार (11 अक्तूबर) को दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन में एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा। न्यूज एजेंसी ANI ने पार्टी की लीगल हेड रत्ना सिंह के हवाले से यह जानकारी दी है। वरिष्ठ वकील वृंदा ग्रोवर के नेतृत्व में वकीलों की एक टीम CJP नेताओं की ओर से पैरवी कर सकती है। इस बीच, CJP ने चुनावी वोटर लिस्ट में कथित अनियमितताओं के विरोध में आज जंतर-मंतर पर एक बार फिर प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।

हिरासत के बाद अरेस्ट हुए CJP नेता

एक अधिकारी ने पीटीआई को बताया, “कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को एहतियातन गिरफ्तार किया गया है। उन्हें आज रविवार को दिल्ली कैंट पुलिस थाने में कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा।”

पुलिस ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने शनिवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से पहले राष्ट्रीय राजधानी में उनका विमान उतरने के बाद उन्हें हिरासत में लिया था, जिसके बाद उन्हें एहतियातन गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने शनिवार को सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर पहुंचने से रोक दिया था।

रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट कर बताया कि अभिजीत, आशुतोष और सौरव दास को सुबह दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन में एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने उन्हें सुबह इस बारे में जानकारी दी। CJP की लीगल हेड होने के नाते वह अन्य वकीलों के साथ पुलिस स्टेशन पहुंचेंगी।

दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान से हिरासत में लिए गए CJP नेता

CJP के नेता अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को शनिवार को दिल्ली एयरपोर्ट पर एक विमान से हिरासत में लिया गया था। ये नेता जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन से पहले हिरासत में लिए गए। पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करने की तैयारी में थी।

यह प्रदर्शन वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में कथित अनियमितताओं के आरोपों को लेकर आयोजित किया जाना था। राजधानी में प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए और प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया।

आज फिर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेगी CJP

CJP ने हिरासत और पुलिस कार्रवाई के बावजूद अपने आंदोलन को जारी रखने का ऐलान किया है। पार्टी ने आज जंतर-मंतर पर फिर से प्रदर्शन करने की घोषणा की है। पार्टी की मांग है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं की जिम्मेदारी लेते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब एक दिन पहले ही दिल्ली में CJP के आह्वान पर प्रस्तावित जुटान को रोकने के लिए पुलिस ने बड़े स्तर पर कार्रवाई की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, राजधानी में करीब 3,000 लोगों को हिरासत में लिया गया था।

चार पूर्व मुख्यमंत्री भी हिरासत में लिए गए

दिल्ली में हिरासत में लिए गए लोगों में चार पूर्व मुख्यमंत्री भी शामिल थे। इनमें आम आदमी पार्टी (AAP) के अरविंद केजरीवाल, तृणमूल कांग्रेस (TMC) की संस्थापक ममता बनर्जी, वामपंथी नेता पिनराई विजयन और माणिक सरकार के नाम शामिल हैं। प्रदर्शन को लेकर पुलिस और आयोजकों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है। उसका कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। वहीं, CJP ने वोटर लिस्ट में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर अपना विरोध जारी रखने का फैसला किया है।

ध्रुव राठी को छोड़ा गया, जंतर-मंतर पहुंचने पर फिर कार्रवाई की चेतावनी

इस पूरे घटनाक्रम के बीच यूट्यूबर ध्रुव राठी को भी दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार देर रात रिहा कर दिया था। हालांकि, पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यदि वह जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश करते हैं तो उनके खिलाफ दोबारा कार्रवाई की जा सकती है। एक अधिकारी ने रविवार सुबह बताया, “हरियाणा के गुरुग्राम में हिरासत में लिए जाने के बाद यूट्यूबर ध्रुव राठी को देर रात रिहा कर दिया गया।” राठी को आज तड़के 3 बजे रिहा किया गया।

दिल्ली में लगातार हो रही हिरासत की कार्रवाइयों और CJP के नए प्रदर्शन के ऐलान के बाद राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था पर नजर बनी हुई है। अब सबकी निगाहें आज होने वाली मजिस्ट्रेट के समक्ष पेशी और जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन पर टिकी हैं।

सीईसी के इस्तीफा देने तक पीछे नहीं हटेंगे

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने शनिवार को वोटर लिस्ट में कथित अनियमितताओं के खिलाफ तब तक प्रदर्शन जारी रखने का संकल्प जताया, जब तक मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं दे देते। CJP ने रविवार सुबह 10 बजे जंतर-मंतर पर फिर से प्रदर्शन करने की घोषणा की है।

इस बीच, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने नई दिल्ली और मध्य दिल्ली में संभावित पाबंदियों को लेकर चेतावनी जारी की है। शनिवार के प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों, कार्यकर्ताओं और राजनीतिक नेताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कॉजपा के राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे ने कहा कि संगठन इस कार्रवाई के बावजूद पीछे नहीं हटेगा।

CJP के प्रमुख नेताओं के हिरासत में रहने के बीच प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे शिंदे ने कहा, “आप चाहे जितने लोगों को हिरासत में लें। लेकिन जब तक सबसे बड़े गद्दार और देशद्रोही ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, हम पीछे नहीं हटेंगे। हम कल सुबह 10 बजे फिर जंतर-मंतर जाएंगे।’” उन्होंने लोगों से बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल होने और पुलिस द्वारा रोके जाने पर भी विरोध जारी रखने की अपील की।

शिंदे ने CJP संस्थापक अभिजीत दीपके और सह-संयोजकों सौरव दास तथा आशुतोष रांका की हिरासत के बारे में भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हिरासत में लिए जाने के 12 घंटे बाद भी तीनों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई।

CJP Protest: ‘आंतरिक मामलों में दखल बर्दाश्त नहीं’; दिल्ली विरोध-प्रदर्शनों पर UN की टिप्पणियों पर भारत का पलटवार

CJP Protest: संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) ने शनिवार (10 अक्तूबर) को राजधानी दिल्ली में बड़े पैमाने पर हुए प्रदर्शनों के दौरान लोगों को हिरासत में लिए जाने पर चिंता जताई। संयुक्त राष्ट्र ने भारतीय अधिकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने के अधिकार का सम्मान करने और मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए लोगों को तत्काल रिहा करने का आग्रह किया। इसके बाद जिनेवा में भारत के स्थायी मिशन ने इन चिंताओं को खारिज करते हुए उन्हें गलतफहमी पर आधारित और देश के आंतरिक मामलों में अनुचित हस्तक्षेप बताया।

भारत ने स्पष्ट किया कि देश में शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने का अधिकार संविधान के तहत प्राप्त है। लेकिन यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के हित में लगाए गए उचित प्रतिबंधों के अधीन है। जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र में भारत के आधिकारिक प्रतिनिधित्व से जुड़े एक्स (X) अकाउंट पर जारी पोस्ट में भारत ने अपना पक्ष रखा।

भारत के स्थायी मिशन ने कहा, “शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने का अधिकार हमारे संविधान में निहित है और मजबूत संस्थाओं, स्वतंत्र न्यायपालिका तथा स्वतंत्र मीडिया द्वारा इसकी रक्षा की जाती है।” उसने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, “हर लोकतंत्र की तरह, भारत के नागरिक भी सार्वजनिक व्यवस्था के हित में लगाए गए उचित प्रतिबंधों के अधीन इस अधिकार का इस्तेमाल करते हैं।”

सुरक्षा बलों ने ‘जेन-जी’ के नेतृत्व वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शनकारियों को मध्य दिल्ली के जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोक दिया, जिसके बाद सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। यह प्रदर्शन मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं को लेकर चुनावी सुधारों और मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के लिए आयोजित किया गया था। निर्वाचन आयोग और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इन आरोपों से इनकार किया है।

UN ने क्या कहा?

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के प्रवक्ता थमीम अल-खीथान ने शनिवार को एक बयान में कहा कि कार्यालय दिल्ली में आज बड़े पैमाने पर हुए प्रदर्शनों से पहले और उनके दौरान प्रदर्शनकारियों, आंदोलन के नेताओं, नागरिक समाज संगठनों के सदस्यों, वकीलों और पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने की खबरों को लेकर चिंतित है। बयान में कहा गया, “हम अधिकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने के अधिकार का पूरी तरह सम्मान करने और उसे सुनिश्चित करने का आग्रह करते हैं।”

अल-खीथान ने भारतीय अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया कि कानून लागू करने वाले कर्मी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों से निपटते समय अत्यंत संयम बरतें। उन्होंने कहा कि ऐसा देश की लोकतांत्रिक परंपराओं और मानवाधिकारों के प्रति उसकी प्रतिबद्धताओं के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने कहा, “मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए सभी लोगों को तत्काल और बिना किसी शर्त के रिहा किया जाना चाहिए।” संयुक्त राष्ट्र ने अधिकारियों से व्यापक स्तर पर व्यक्त की गई चिंताओं का समाधान करने के लिए अर्थपूर्ण संवाद करने का भी आग्रह किया।

क्या है पूरा मामला?

CJP ने मध्य दिल्ली के प्रमुख स्थल जंतर-मंतर पर प्रदर्शन आयोजित करने की योजना बनाई थी। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। भारी सुरक्षा व्यवस्था और सड़क मार्गों पर लगाए गए अवरोधकों के कारण अधिकतर प्रदर्शनकारी इलाके में नहीं पहुंच सके। CJP ने बताया कि उसके संस्थापक अभिजीत दीपके और उनके साथी सौरव दास तथा आशुतोष रांका को मुंबई से दिल्ली पहुंचे उनके विमान के उतरने के तुरंत बाद हिरासत में ले लिया गया। शनिवार के प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों, कार्यकर्ताओं और राजनीतिक नेताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद CJP के राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे ने कहा कि संगठन इस कार्रवाई के बावजूद पीछे नहीं हटेगा।

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CJP के प्रमुख नेताओं के हिरासत में रहने के बीच प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे शिंदे ने कहा, “आप चाहे जितने लोगों को हिरासत में लें। लेकिन जब तक सबसे बड़े गद्दार और देशद्रोही ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, हम पीछे नहीं हटेंगे। हम कल सुबह 10 बजे फिर जंतर-मंतर जाएंगे।” उन्होंने लोगों से बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल होने और पुलिस द्वारा रोके जाने पर भी विरोध जारी रखने की अपील की। शिंदे ने कहा, “बड़ी संख्या में जंतर-मंतर पहुंचें और दिल्ली पुलिस जहां भी आपको रोके, वहीं प्रदर्शन करें।”

CJP के ‘जंतर-मंतर 2.0’ प्रदर्शन से पहले दिल्ली में बड़ी कार्रवाई, 500 से ज्यादा लोग हिरासत में

दिल्ली पुलिस ने शनिवार को जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए अलग-अलग राज्यों से राजधानी आए 500 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई प्रदर्शन से पहले दिल्ली में बढ़ाई गई सुरक्षा के बीच की गई है। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के लिए बुलाया गया है, जिन पर मतदाता सूची के ‘विशेष गहन संशोधन’ (SIR) से जुड़े आरोप लगे हैं।

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में 35,000 से ज्यादा पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों को तैनात किया गया है। प्रशासन ने यह कदम बिना अनुमति भीड़ जुटने से रोकने और राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया है।

इस तैनाती में सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज (CAPF) की 120 से ज्यादा कंपनियां शामिल हैं, जिनके जवानों को अहम चौराहों, ट्रांसपोर्ट हब और दूसरी संवेदनशील जगहों पर तैनात किया गया है।

इसके अलावा, निगरानी को मजबूत करने के लिए नई दिल्ली जिले को 20 जोन में बांटा गया है, जिसमें जॉइंट कमिश्नर, डिप्टी कमिश्नर और एडिशनल डिप्टी कमिश्नर को सुपरविजन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अलग-अलग यूनिट के हेड स्पेशल कमिश्नर भी सुरक्षा इंतजामों की देखरेख कर रहे हैं।

वहीं, सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए उत्तर प्रदेश और हरियाणा से महिला पुलिसकर्मियों को भी दिल्ली बुलाया गया है। इसके अलावा, किसी भी तरह की गड़बड़ी से निपटने की तैयारी जांचने के लिए मॉक ड्रिल भी की गई है।

ANI के अनुसार, पुलिस टीमों को निर्देश दिया गया है कि वे किसी भी जगह पर बिना इजाजत प्रदर्शन करने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति को हिरासत में लें।

प्रदर्शन के दौरान तैनात केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के जवानों को हथियार साथ न रखने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, दिल्ली पुलिस के जवान लाठी और डंडे लेकर तैनात रह सकते हैं। पुलिस अधिकारियों को प्रदर्शनकारियों के साथ बहस करने से भी बचने की सलाह दी गई है। इसकी एक वजह यह चिंता है कि पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत या बहस के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो सकते हैं।

सुरक्षा के लिए बॉडी कैमरे, ड्रोन और फेस रिकग्निशन सिस्टम तैनात

सुरक्षा इंतजामों में टेक्नोलॉजी को शामिल किया गया है। पुलिस हालात पर नजर रखने के लिए रिकॉर्डिंग डिवाइस का इस्तेमाल कर रही है और हवा व छतों से निगरानी कर रही है।

विरोध-प्रदर्शन की ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी अपनी यूनिफॉर्म पर बॉडी कैमरे पहने हुए हैं। ये डिवाइस कम रोशनी में भी फुटेज रिकॉर्ड कर सकते हैं, जिससे पुलिस अधिकारियों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई बातचीत का रिकॉर्ड रखने में मदद मिलती है।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि अगर बदसलूकी के आरोप लगते हैं, तो ये रिकॉर्डिंग सच का पता लगाने में मदद कर सकती हैं।

पुलिसकर्मी ने कहा, “ये बॉडी कैमरे हमारी और दूसरों की सुरक्षा के लिए हैं। बदसलूकी की स्थिति में दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाए जाते हैं। इसलिए, ये बॉडी कैमरे साबित करेंगे कि हमने किसी के साथ कुछ किया या नहीं। यह सब कुछ रिकॉर्ड करेगा…”

ANI के अनुसार, सुरक्षा योजना में सेंट्रल दिल्ली में फेशियल रिकग्निशन सिस्टम, अतिरिक्त CCTV कैमरे, ड्रोन और छतों पर तैनात स्पॉटर्स भी शामिल हैं।

इसके अलावा, पुलिस सोशल मीडिया पर भी नजर रख रही है। प्रस्तावित प्रदर्शन से जुड़ी ऑनलाइन गतिविधियों की जांच की जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, 200 से ज्यादा कंटेंट क्रिएटर्स भी पुलिस की निगरानी में हैं। अधिकारी ऐसे पोस्ट और मैसेज की जांच कर रहे हैं, जिनके जरिए लोगों को प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जुटाने की कोशिश की जा सकती है।

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Delhi Protest: दिल्ली में CJP प्रदर्शन से पहले वकीलों की हिरासत पर बवाल, SCAORA और SCBA ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत से की ये अपील

सुप्रीम कोर्ट के पास शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के लिए जुटे वकीलों को हिरासत में लिए जाने की खबर ने न्यायिक व्यवस्था और विरोध-प्रदर्शन की आजादी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में लॉयर एसोसिएशन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन (LAFC) ने भी चिंता जताई है। एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA), सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) और बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन के साथ मिलकर शनिवार (10 अक्टूबर) को दिल्ली में पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शन पर लगाई गई पाबंदियों पर चिंता जताई है।

CJI सूर्यकांत से दखल देने की अपील

10 अक्टूबर को जारी एक प्रेस रिलीज में LAFC ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत से इस मामले में तुरंत दखल देने की अपील की है। एसोसिएशन ने कहा कि हिरासत में लिए गए वकीलों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, उन्हें कानूनी मदद दी जाए और जिन वकीलों को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लिया गया है, उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।

एसोसिएशन ने कहा, “शांतिपूर्ण विरोध का जवाब ताकत, गोपनीयता या अंधाधुंध हिरासत से नहीं दिया जा सकता।” साथ ही, एसोसिएशन ने कानून के मुताबिक जवाबदेही तय करने की भी मांग की।

इसके साथ ही LAFC ने हिरासत में लिए गए हर वकील के नाम, उनके ठिकाने, सुरक्षा और उन्हें हिरासत में लेने के कानूनी आधार की जानकारी मांगी। एसोसिएशन ने उन वकीलों को रिहा करने की मांग की जिन्हें हिरासत में लेने का कोई ठोस और कानूनी आधार नहीं था। इसके अलावा, उन्हें वकील, परिवार के सदस्यों और जरूरी मेडिकल मदद तक पहुंच देने की भी मांग की।

पुलिस कार्रवाई से जुड़े सबूत सुरक्षित रखने की मांग

एसोसिएशन ने विरोध-प्रदर्शन, कथित बल प्रयोग और उसके बाद की हिरासत से जुड़े CCTV फुटेज, बॉडी-कैमरा रिकॉर्डिंग, पुलिस स्टेशन के रिकॉर्ड, हिरासत रजिस्टर और अन्य सबूतों को सुरक्षित रखने की मांग की। एसोसिएशन ने बल प्रयोग की खबरों—खासकर महिला वकीलों के खिलाफ—की एक तय समय-सीमा वाली, स्वतंत्र जांच की भी मांग की, और जहां भी गैर-कानूनी कार्रवाई साबित हो, वहां जवाबदेही तय करने और उचित राहत देने की बात कही।

प्रदर्शन करने पर वकीलों को परेशान न किया जाए

LAFC ने यह भी मांग की है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने के कारण किसी वकील के खिलाफ बदले की भावना से FIR दर्ज न की जाए। वकीलों को डराने-धमकाने या उनके पेशेवर काम पर असर डालने वाली कार्रवाई से भी सुरक्षा मिलनी चाहिए।

इसके अलावा, एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट परिसर के आसपास भविष्य में होने वाले शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए स्पष्ट और पारदर्शी नियम बनाने की मांग की है, ताकि प्रदर्शन करने वालों के अधिकारों और सुरक्षा का ध्यान रखा जा सके।

इस बीच, बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन ने भी एक प्रस्ताव पास करके केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा सार्वजनिक विरोध-प्रदर्शनों और लोगों की आवाजाही पर लगाई गई पाबंदियों को तुरंत हटाने की मांग की। एसोसिएशन ने मौजूदा हालात को “अघोषित इमरजेंसी” करार देते हुए कहा कि ये हालात इमरजेंसी के दिनों की याद दिलाते हैं।

प्रस्ताव में कहा गया, “यह तय किया गया है कि केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा सार्वजनिक विरोध-प्रदर्शन पर लगाई गई मौजूदा पाबंदियों को तुरंत हटाया जाए। लोगों की आवाजाही पर लगाई गई सभी पाबंदियां भी फौरन हटाई जाएं, क्योंकि ये मौजूदा सरकार की असंवैधानिक और गैर-कानूनी गतिविधियां हैं।”

एसोसिएशन ने बताया कि यह प्रस्ताव 10 अक्टूबर को हुई एक आपातकालीन बैठक में सर्वसम्मति से पास किया गया। साथ ही, एसोसिएशन ने इस प्रस्ताव की एक कॉपी बॉम्बे बार एसोसिएशन और एडवोकेट्स एसोसिएशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया के अध्यक्षों को भेजने का भी फैसला किया।

सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) ने भी मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को पत्र लिखकर वकीलों को हिरासत में लिए जाने का मुद्दा उठाया है। एसोसिएशन ने कहा कि ऐसी खबरें सामने आई हैं कि पुलिस ने वरिष्ठ और युवा वकीलों के साथ-साथ महिला वकीलों को भी हिरासत में लिया। आरोप है कि हिरासत में लेने वाले कुछ पुलिसकर्मियों ने अपनी वर्दी पर बैज भी नहीं लगा रखे थे।

एसोसिएशन ने हिरासत में लिए गए लोगों के ठिकाने का पता बताने, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और उन्हें वकीलों व परिवार के सदस्यों से मिलने की सुविधा देने की मांग की। साथ ही, यह भी कहा कि अगर हिरासत में रखने का कोई कानूनी आधार नहीं है, तो उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।

इसी तरह, SCBA ने भी CJI से अनुरोध किया कि वे अधिकारियों के साथ इस मामले पर बात करें, हिरासत में लिए गए वकीलों का पता लगाएं और हिरासत में लेने की परिस्थितियों व कथित बल प्रयोग की जांच करें। इस प्रस्ताव पर मानद सचिव प्रज्ञा बघेल ने हस्ताक्षर किए।

ये मांगें ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के प्रस्तावित “जंतर-मंतर 2.0” प्रदर्शन के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सामने आई हैं। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के लिए बुलाया गया है, जिन पर मतदाता सूची में गड़बड़ी और ‘विशेष गहन संशोधन प्रक्रिया’ (Special Intensive Revision process) से जुड़े आरोप हैं।

मेट्रो पर लगी पाबंदियों को लेकर अवमानना ​​याचिका

इसके अलावा, वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) के खिलाफ अवमानना ​​की कार्रवाई की मांग करते हुए याचिका दायर की। उन्होंने आरोप लगाया कि कोर्ट के 9 अक्टूबर के निर्देशों का पालन नहीं किया गया।

10 अक्टूबर को सुबह 8.17 बजे डायरी नंबर 63801/2026 के तहत दायर इस याचिका में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार और DMRC की चेयरपर्सन डी. थारा को प्रतिवादी बनाया गया है। इसमें संविधान के अनुच्छेद 129 और ‘कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट, 1971’ की धारा 12 का हवाला दिया गया है।

त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि कोर्ट के इस स्पष्टीकरण के बावजूद कि सेवाओं को रेगुलेट किया जा सकता है लेकिन पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता, मेट्रो स्टेशन के गेट बंद रखे गए। बता दें कि 9 अक्टूबर को CJI सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा था कि “मेट्रो ट्रेनों की आवाजाही पर पूरी तरह से रोक नहीं लगाई जाएगी” और अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे ट्रांसपोर्ट से जुड़े नियमों का प्रचार करें और चार दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट सौंपें।

लगभग 500 लोगों को हिरासत में लिया गया

ANI के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने एहतियाती उपायों के तहत समूहों में आ रहे लगभग 500 लोगों को हिरासत में लिया और आपराधिक बैकग्राउंड वाले करीब 50 लोगों को पकड़ा। बता दें कि नई दिल्ली को 20 जोन में बांटा गया था और स्टेडियमों में डिटेंशन सेंटर बनाए गए थे। पुलिस सूत्रों के अनुसार, कनॉट प्लेस में हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या लगभग 200 थी।

मुंबई से आने के बाद CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके और नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में ले लिया गया। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि उसकी कानूनी टीम की प्रमुख रत्ना सिंह और तीन अन्य वकीलों को बिना कारण बताए हिरासत में ले लिया गया। पार्टी ने गुरुग्राम स्थित आवास से ध्रुव राठी को हिरासत में लिए जाने की भी निंदा की।

सुरक्षा के लिए RAF और CRPF की तैनाती

सुरक्षा व्यवस्था में रैपिड एक्शन फोर्स, दिल्ली पुलिस पिंक फोर्स और CRPF शामिल थे। साथ ही मोहन एस्टेट में ड्रोन, मजबूत बैरिकेड्स और स्पाइक स्ट्रिप्स भी तैनात किए गए थे। इस दौरान CJP ने प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों के लिए 12-सूत्रीय एडवाइजरी जारी कर हिंसा, तोड़फोड़, आगजनी, नफरत फैलाने वाले भाषण और अफवाहों से बचने, आपातकालीन रास्तों को खाली रखने, कानूनी निर्देशों का पालन करने और हिरासत में लिए जाने पर कानूनी सहायता लेने का आग्रह किया है।

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Jantar Mantar Protest: दिल्ली पुलिस ने अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, वृंदा करात समेत कई नेताओं को लिया हिरासत में

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने शनिवार, 10 अक्टूबर को राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन का आह्वान किया है। इस बीच दिल्ली पुलिस ने अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, वृंदा करात समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया है। दिल्ली पुलिस ने मुंबई से दिल्ली आए CJP फाउंडर अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को राष्ट्रीय राजधानी में उनका प्लेन उतरते ही हिरासत में ले लिया था।

CEC ज्ञानेश कुमार पर मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की आड़ में मतदाता सूचियों में गड़बड़ी करने का आरोप लगा है। साथ ही वोटर रजिस्ट्रेशन के दस्तावेज ‘फॉर्म 6’ में बदलाव के लिए दो सहयोगी निर्वाचन आयुक्तों की आपत्ति को दरकिनार करने के आरोप भी हैं।

आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को कहा था कि वह अपने परिवार के साथ 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन में शामिल होंगे। उन्होंने पूरे देश के लोगों से अपील की थी कि वे अधिक से अधिक संख्या में जंतर-मंतर पहुंचें। शनिवार को AAP ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस ने केजरीवाल के आवास के आसपास कड़ा पहरा लगा दिया।

गोपाल राय भी हिरासत में

ताजा अपडेट के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान केजरीवाल को हिरासत में ले लिया गया है। AAP के नेता गोपाल राय को भी हिरासत में लिया गया है। इसके अलावा दिल्ली पुलिस ने ममता बनर्जी समेत TMC के दूसरे MPs को भी हिरास​त में लिया है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव एम. ए. बेबी, पार्टी की वरिष्ठ नेता वृंदा करात और कई अन्य नेताओं को भी प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया।

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पंजाब में मनीष सिसोदिया डिटेन

न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, शनिवार को AAP के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया को पंजाब में कई पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ पुलिस ने हिरासत में ले लिया। सिसोदिया चंडीगढ़ में CEC ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के दफ्तर के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। इस प्रदर्शन के दौरान AAP नेता और कार्यकर्ता CEO के दफ्तर की ओर मार्च कर रहे थे, चुनाव आयोग के खिलाफ नारे लगा रहे थे और जवाबदेही की मांग कर रहे थे। जब प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश की तो तनाव बढ़ गया, जिसके बाद पुलिस को दखल देना पड़ा। इसके बाद सिसोदिया, हरपाल सिंह चीमा और पंजाब के प्रमुख पार्टी नेताओं समेत कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया गया।

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