वोटर लिस्ट पर चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, यूपी-पंजाब समेत 17 राज्यों में होगा SSR

Voter List Revision: वोटर लिस्ट में अपना नाम जुड़वाने या उसमें किसी तरह का बदलाव कराने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए अहम खबर है। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है। गुरुवार को जारी नोटिस के मुताबिक, इन जगहों पर स्पेशल समरी रिवीजन (SSR) किया जाएगा। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब देशभर में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विवाद चल रहा है।

इस प्रक्रिया के दायरे में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा समेत 17 राज्य शामिल हैं। चुनाव आयोग ने इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21 के तहत मतदाता सूची की जांच और उसे अपडेट करने का निर्देश दिया है।

आयोग ने इस प्रक्रिया के लिए 1 जनवरी 2027 को पात्रता की तारीख तय किया है।

इस पुनरीक्षण (रिवीजन) में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, मणिपुर, पुडुचेरी, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल शामिल होंगे।

यह अधिसूचना तब आई है, जब सुप्रीम कोर्ट ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी और ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के नौ अन्य नेताओं द्वारा दायर एक याचिका पर ECI (चुनाव आयोग), CEC ज्ञानेश कुमार, और चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी को नोटिस जारी किया है। इस याचिका में मतदाता सूचियों के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) को चुनौती दी गई है।

आयोग ने कहा है कि जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) चल रहा है या हाल ही में पूरा हुआ है, वहां SSR (स्पेशल समरी रिवीजन) का कार्यक्रम बाद में घोषित किया जाएगा।

बता दें कि यह याचिका 12 अक्टूबर को गांधी के नेतृत्व में विपक्ष द्वारा सुप्रीम कोर्ट की ओर निकाले गए मार्च के बाद दायर की गई है, जो SIR (विशेष पुनरीक्षण) प्रक्रिया के खिलाफ था।

खड़गे, अखिलेश और तेजस्वी समेत कई विपक्षी नेताओं ने दायर की याचिका

इस याचिका को गांधी के साथ-साथ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, तृणमूल कांग्रेस नेता सौगत रॉय, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, RJD नेता तेजस्वी प्रसाद यादव, शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के नेता एम.ए. बेबी, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के नेता डी. राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माजी, नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) की सुप्रिया सुले, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के नेता मोहम्मद बशीर, विदुथलाई चिरुथैगल काची (VCK) के अध्यक्ष थोल. थिरुमावलवन और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मंत्री सज्जाद अहमद किचलू ने दायर किया है।

इसमें SIR प्रक्रिया की वैधता को चुनौती दी गई है। साथ ही, चुनाव आयोग के रिकॉर्ड को सार्वजनिक करने, हटाए गए मतदाताओं का विवरण जारी करने, मनमाने ढंग से नाम हटाए जाने के खिलाफ सुरक्षा उपाय करने और नाम वापस जोड़ने के लिए एक व्यवस्था बनाने की मांग की गई है।

नेताओं ने वोटर लिस्ट ने संशोधन प्रक्रिया के न्यायिक ऑडिट की भी मांग की और यह भी कहा कि जब तक इस मामले पर कोई फैसला नहीं आ जाता, तब तक सभी राज्यों में यह प्रक्रिया रोक दी जानी चाहिए।

इससे पहले, विपक्षी नेताओं ने SIR प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंताएं जताने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करने के लिए CJI सूर्य कांत से मिलने का समय मांगा था। लेकिन CJI ने इसे अस्वीकार कर दिया और कहा कि ये मुद्दे पहले से ही कोर्ट के सामने लंबित हैं, इसलिए नेता न्यायिक कार्यवाही के जरिए राहत मांग सकते हैं।

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Neha Bora: प्रोटेस्ट में पुलिस को खूब छकाने के बाद देशभर में चर्चा का केंद्र बनीं नेहा बोरा JNU से कर रही हैं कैसी पढ़ाई?

Neha Bora Qualification: राजधानी दिल्ली में निर्वाचन आयोग (ECI) और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शनों के बीच जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) की छात्रा और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। प्रदर्शन के दौरान पुलिस बैरिकेडिंग पार करने, पुलिसकर्मियों से बचते हुए आगे बढ़ने और हिरासत में लिए जाने से जुड़ी उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं। इसके बाद उनकी एजुकेशन क्वालीफिकेशन, पारिवारिक बैकग्राउंड और छात्र राजनीति में उनके सफर को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है।

प्रदर्शन के बाद भारत समेत दुनियाभर में नेहा की बढ़ती लोकप्रियता के साथ ही लोग उनकी पढ़ाई-लिखाई और उत्तराखंड से छात्र राजनीति तक के सफर के बारे में भी जानना चाहते हैं। आइए जानते हैं कि नेहा बोरा जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में फिलहाल क्या पढ़ाई कर रही हैं और वह राजनीति में कैसे आईं…

कहां की रहने वाली हैं नेहा बोरा?

नेहा बोरा उत्तराखंड के खटीमा की रहने वाली हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके पिता भारतीय सेना में कार्यरत हैं। सेना में तैनाती के कारण परिवार को अलग-अलग शहरों और सैन्य छावनियों में रहना पड़ा। इसी वजह से नेहा का बचपन देश के अलग-अलग शहरों में बीता।

कहां से की 10वीं और 12वीं की पढ़ाई?

हमारे सहयोगी ‘News18 हिंदी’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नेहा बोरा ने अपनी 10वीं और 12वीं की पढ़ाई पश्चिम बंगाल से पूरी की। रिपोर्ट्स के अनुसार, स्कूल के दिनों में ही उनकी रुचि सामाजिक और राजनीतिक विचारों में बढ़ने लगी थी। इसी दौरान उन्होंने कम्युनिस्ट एवं क्रांतिकारी विचारक चारू मजूमदार, कवि पाब्लो नेरुदा और लेखिका अरुंधति रॉय के विचारों तथा लेखन में दिलचस्पी ली।

बताया जाता है कि उनके शुरुआती वैचारिक अनुभवों ने सामाजिक मुद्दों और राजनीति के प्रति उनकी समझ विकसित करने में भूमिका निभाई।

DU से ग्रेजुएशन, अंबेडकर यूनिवर्सिटी से मास्टर्स

नेहा बोरा ने देश की राजधानी में दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने डॉ. बी.आर. अंबेडकर यूनिवर्सिटी दिल्ली से परफॉर्मेंस स्टडीज में मास्टर डिग्री हासिल की। परफॉर्मेंस स्टडीज में थिएटर, कला, अभिव्यक्ति और सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों का स्टडी किया जाता है। नेहा की परफॉर्मेंस स्टडीज में थिएटर और सामाजिक विषयों की अहम भूमिका रही है।

JNU में थिएटर और परफॉर्मेंस स्टडीज में कर रहीं PhD

ग्रेजुएशन और मास्टर्स के बाद नेहा बोरा ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में एडमिशन लिया। वह फिलहाल JNU के स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स में थिएटर एंड परफॉर्मेंस स्टडीज विषय में PhD कर रही हैं। वह अभी यूनिवर्सिटी में डॉक्टोरल स्कॉलर हैं। इस तरह उनकी शैक्षणिक यात्रा दिल्ली विश्वविद्यालय से शुरू होकर अंबेडकर यूनिवर्सिटी और फिर जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी तक पहुंची। पढ़ाई के साथ-साथ वह सामाजिक गतिविधियों और छात्र राजनीति में भी लगातार एक्टिव रहीं।

थिएटर से भी जुड़ी रही हैं नेहा

नेहा बोरा की पहचान केवल एक छात्र नेता के तौर पर नहीं है। वह लंबे समय तक थिएटर से भी जुड़ी रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने दिल्ली के स्ट्रीट थिएटर समूह ‘संगवारी’ के साथ काम किया है। स्ट्रीट थिएटर के माध्यम से सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को आम लोगों तक पहुंचाया जाता है। इस तरह की गतिविधियों में भागीदारी नेहा के लिए सामाजिक सवालों पर संवाद करने और अपनी बात लोगों तक पहुंचाने का एक माध्यम रही।

CAA विरोध-प्रदर्शन के दौरान बढ़ी राजनीतिक सक्रियता

नेहा बोरा की छात्र राजनीति में सक्रियता 2019-20 के नागरिकता संशोधन कानून (CAA) विरोधी प्रदर्शनों के दौरान तेजी से बढ़ी। उस समय देश के कई यूनिवर्सिटी में नागरिकता कानून को लेकर विरोध-प्रदर्शन हो रहे थे। इसी दौर में नेहा की सामाजिक मुद्दों, कैंपस चर्चाओं और थिएटर से जुड़ी गतिविधियों में भागीदारी के साथ छात्र राजनीति में सक्रियता भी बढ़ी। बाद में वह वामपंथी छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) से जुड़ गईं। AISA एजुकेशन, छात्र अधिकारों और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर अभियान चलाने वाला छात्र संगठन है। नेहा आगे चलकर इस संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं।

प्रदर्शन के बाद फिर चर्चा में क्यों आईं?

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के बाद नेहा बोरा एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं। प्रदर्शन से जुड़े वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उनकी एजुकेशन और छात्र राजनीति में भूमिका को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। नेहा की यात्रा में उच्च शिक्षा, थिएटर और छात्र आंदोलनों के तीन प्रमुख पहलू दिखाई देते हैं। उत्तराखंड से निकलकर दिल्ली के विश्वविद्यालयों में पढ़ाई और फिर छात्र संगठन के राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंचने का उनका सफर अब सार्वजनिक चर्चा का विषय बना हुआ है।

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Rahul Gandhi SC Petition: राहुल गांधी की सुप्रीम कोर्ट याचिका में 14 खामियां! दस्तावेज अधूरे, खड़गे के ID कार्ड की कॉपी धुंधली, कोर्ट फीस भी ₹220 कम

Rahul Gandhi SC Petition: सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने सोमवार (12 अक्तूबर) को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य लोगों की ओर से वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाने और गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर दायर याचिका में 14 से ज्यादा खामियां बताईं। सूत्रों के मुताबिक, रजिस्ट्री ने याचिका दायर करने वाले वकील से कहा कि वह मामले में सह-याचिकाकर्ता कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की साफ कॉपी जमा करे।

सूत्रों के मुताबिक, रजिस्ट्री ने याचिका में कुछ ऐसे पन्नों की ओर भी इशारा किया जो पढ़े जाने योग्य नहीं थे या गायब थे। इसके अलावा, रजिस्ट्री ने अदालत शुल्क में 200 रुपये से अधिक की कमी की बात भी बताई। इससे पहले दिन में, गांधी और विपक्ष के कई अन्य नेता याचिका दायर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करके गए।

इसमें अनुरोध किया गया है कि एसआईआर के दौरान किए गए बदलावों और हटाए गए नामों का एक तय समय में स्वतंत्र ऑडिट करने के लिए एक स्वतंत्र समिति बनाई जाए। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज करेंगे। जबकि तकनीकी विशेषज्ञ एवं गणमान्य नागरिक उनकी मदद करेंगे।

खामियों को करना होगा दूर

रजिस्ट्री की ओर से इन आपत्तियों को दर्ज किए जाने के बाद अब याचिकाकर्ताओं को पहले सभी खामियों को दूर करना होगा। इसके बाद ही मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सकेगा। इस घटनाक्रम से चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की कानूनी लड़ाई में एक प्रक्रियागत बाधा सामने आई है। हालांकि, रजिस्ट्री की आपत्तियों का मतलब यह नहीं है कि अदालत ने याचिका में उठाए गए आरोपों या मांगों पर कोई फैसला सुना दिया है।

याचिका में क्या-क्या खामियां मिलीं?

न्यूज 18 के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने याचिका की प्रारंभिक जांच के दौरान कुल 14 आपत्तियां दर्ज की हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, याचिका के साथ कुछ जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे। इसके अलावा नौ याचिकाकर्ताओं के प्राधिकरण से जुड़े कागजात भी अधूरे पाए गए। याचिका में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की कॉपी भी स्पष्ट नहीं थी। दस्तावेज की गुणवत्ता को लेकर आपत्ति दर्ज की गई है। इसके साथ ही कोर्ट फीस में 220 रुपये की कमी पाई गई। इन कमियों को दूर करने के लिए याचिकाकर्ताओं को जरूरी दस्तावेज पूरे करने, प्राधिकरण संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने और निर्धारित कोर्ट फीस जमा करने सहित रजिस्ट्री की आपत्तियों का समाधान करना होगा।

SIR पर रोक और चुनाव आयोग के फैसलों को चुनौती

राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के अन्य नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर SIR पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की है। याचिका में चुनाव प्रक्रिया के दौरान कथित अनियमितताओं को लेकर भी कार्रवाई की मांग की गई है।

याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में कुल 10 तरह की राहत मांगी हैं। इन मांगों का संबंध SIR की प्रक्रिया और भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) की ओर से लिए गए फैसलों से है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर हस्तक्षेप की जरूरत है। हालांकि, इन आरोपों की सत्यता और याचिका में की गई मांगों पर फैसला अदालत को सुनवाई के दौरान करना होगा।

राहुल गांधी बनाम चुनाव आयोग के नाम से दर्ज है मामला

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर इस मामले को Rahul Gandhi v. Election Commission of India के नाम से दर्ज किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कांग्रेस की कानूनी टीम ने याचिका राहुल गांधी के अदालत पहुंचने से करीब एक से दो घंटे पहले दाखिल की थी। राहुल गांधी सोमवार शाम 4:30 बजे की समयसीमा से पहले नहीं पहुंच सके थे। ऐसे में वकील एस. प्रसन्ना ने उनकी ओर से याचिका दाखिल की। इसके बाद राहुल गांधी सैकड़ों समर्थकों के साथ INDIA गठबंधन के मार्च में शामिल हुए। इस मार्च का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक विपक्ष की आवाज पहुंचाना था।

INDIA गठबंधन के कई बड़े नेता मार्च में हुए शामिल

सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव समेत कई विपक्षी नेता शामिल हुए। मल्लिकार्जुन खड़गे, तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय, समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की लोकसभा सदस्य सुप्रिया सुले, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता संजय राउत, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के नेता डी. राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की सांसद महुआ माजी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव एम. ए. बेबी और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के नेता ई. टी. मोहम्मद बशीर ने भी यह याचिका दायर की है। इस याचिका पर आज यानी मंगलवार को सुनवाई हो सकती है। इसमें अनुरोध किया गया है कि एसआईआर के दौरान किए गए बदलावों और हटाए गए नामों का एक तय समय में स्वतंत्र ऑडिट करने के लिए एक स्वतंत्र समिति बनाई जाए।

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CJP Protest News: दिल्ली में इस प्रोटेस्टर को जिन 4 ने पीटा उनकी पहचान हुई और पुलिस ने ट्रेस भी कर लिया! अब होगा ये एक्शन

CJP Protest News: राजधानी में एक प्रदर्शनकारी के साथ कथित मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद दिल्ली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। दिल्ली पुलिस ने मामले में चार लोगों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। यह घटना 10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध-प्रदर्शन के दौरान सामने आई थी। पुलिस के मुताबिक, घटना दिल्ली के डीडीयू मार्ग पर हुई, जो कमला मार्केट थाना क्षेत्र में आता है। मामले में किसी औपचारिक शिकायत का इंतजार किए बिना पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई शुरू कर दी है।

दिल्ली पुलिस ने रविवार को X पर लिखा, “सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो का दिल्ली पुलिस (कमला मार्केट थाना) ने खुद संज्ञान लिया। इस वीडियो में चार लोग एक पुरुष प्रदर्शनकारी के साथ मारपीट करते हुए दिख रहे थे। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।”

पुलिस ने सोशल मीडिया पोस्ट में आगे लिखा, “घटना में शामिल चारों लोगों की पहचान कर ली गई है और उनका पता लगा लिया गया है। कानून के मुताबिक आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। दिल्ली पुलिस हिंसा की घटनाओं के खिलाफ उचित कार्रवाई करने और ऐसी शिकायतों पर तुरंत ध्यान देने के लिए प्रतिबद्ध है।”

कौन हैं मारपीट के आरोप में गिरफ्तार चारों आरोपी?

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान रमन सैनी (50), विवेकानंद उर्फ विवेक (32), कपिल कुमार (27) और रविंदर सिंह उर्फ गोविंद हिंदू (35) के रूप में हुई है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, चारों ने खुद को हिंदू रक्षा दल से जुड़ा हुआ बताया है। इस संबंध में सामने आई जानकारी आरोपियों के कथित जुड़ाव पर आधारित है। पुलिस ने वीडियो सामने आने के बाद उसकी जांच की और सुरक्षा व्यवस्था में तैनात कर्मियों से जानकारी जुटाई। इसके बाद घटनास्थल की पहचान डीडीयू मार्ग के रूप में की गई। शुरुआती दौर में वीडियो कहां का है, यह स्पष्ट नहीं था।

बिना शिकायत के पुलिस ने क्यों लिया संज्ञान?

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, घटना को लेकर पुलिस के पास उस समय तक पीड़ित या किसी अन्य व्यक्ति अथवा संगठन की ओर से औपचारिक शिकायत नहीं पहुंची थी। हालांकि, वीडियो के तेजी से वायरल होने और आरोपियों के दिल्ली-एनसीआर से बाहर जाने की आशंका संबंधी जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई की। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आशंका थी कि आरोपी क्षेत्र छोड़कर कहीं और जा सकते हैं। इसके बाद पुलिस ने उनकी पहचान की और उन्हें हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

वायरल वीडियो में क्या दिखाई दिया?

सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में कुछ लोगों को प्रदर्शनकारियों के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की और मारपीट करते हुए देखा जा सकता है। रिपोर्टों के मुताबिक, वीडियो में युवाओं को धक्का देते और पीटते हुए दिखाया गया है। इसमें महिलाओं के साथ भी कथित तौर पर धक्का-मुक्की और मारपीट होती दिखाई देती है।

वीडियो सामने आने के बाद इसे कई सोशल मीडिया अकाउंट्स ने साझा किया। इनमें युवा कांग्रेस, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और CJP से जुड़े अकाउंट भी शामिल बताए गए हैं। घटना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। हालांकि, वायरल वीडियो अपने आप में घटना के सभी पहलुओं या आरोपियों की कानूनी जिम्मेदारी का अंतिम प्रमाण नहीं है। इसकी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

CJP के प्रदर्शन के दौरान सामने आई घटना

यह मामला दिल्ली में 10 अक्टूबर को हुए CJP के प्रदर्शन से जुड़ा है। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया था। वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर पार्टी विरोध कर रही है। प्रदर्शन के दौरान राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी थी। पुलिस ने कई स्थानों पर लोगों को जुटने से रोकने के लिए कार्रवाई की थी। इसी घटनाक्रम के बीच डीडीयू मार्ग पर कथित मारपीट का वीडियो सामने आया, जिसने पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा को लेकर बहस तेज कर दी।

अब आरोपियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी?

चारों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद मामले में पुलिस की जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। जांच के दौरान पुलिस घटना के वीडियो, गवाहों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल कर सकती है। इसके आधार पर यह स्पष्ट किया जाएगा कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और किसकी क्या भूमिका थी।

दिल्ली पुलिस ने अपने बयान में कहा है कि मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कानून के अनुसार की जा रही है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में आरोपियों के खिलाफ दर्ज FIR की धाराओं, उन्हें अदालत में पेश किए जाने या अदालत के किसी आदेश का विस्तृत डिटेल्स नहीं दिया गया है।

दीपके, रांका और दास रिहा

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से पहले दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत में लिए जाने के बाद एहतियातन गिरफ्तार किया गया था। लेकिन रविवार को उन्हें कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने के बाद रिहा कर दिया गया।

CJP की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने बताया कि उन्हें इस शर्त पर रिहा किया गया है कि वे एक साल तक शांति भंग नहीं करेंगे। इससे पहले, रविवार सुबह पुलिस ने बताया था कि उसने राष्ट्रीय राजधानी में CJP नेताओं को उनका विमान उतरने के बाद हिरासत में ले लिया था और फिर उन्हें एहतियातन गिरफ्तार कर लिया गया था।

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सूत्रों के अनुसार, CJP नेताओं के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 (शांति बनाए रखने के लिए प्रतिभूति) और धारा 170 (संज्ञेय अपराधों को रोकने के लिए गिरफ्तारी) के तहत कार्रवाई की गई। शनिवार को CJP नेताओं को हिरासत में लिया गया था। यह कार्रवाई दिल्ली में सुरक्षा के अत्यधिक कड़े इंतजामों के बीच हुई, जहां प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर पहुंचने से रोकने के लिए विभिन्न स्थानों पर 7,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया था।

CJP Protest Updates: अभिजीत दीपके, रांका और दास गिरफ्तार! थोड़ी देर में मजिस्ट्रेट के सामने पेशी! आज जंतर-मंतर पर फिर प्रदर्शन का ऐलान, ध्रुव राठी रिहा

CJP Protest Updates: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को गिरफ्तार किए जाने के बाद आज यानी रविवार (11 अक्तूबर) को दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन में एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा। न्यूज एजेंसी ANI ने पार्टी की लीगल हेड रत्ना सिंह के हवाले से यह जानकारी दी है। वरिष्ठ वकील वृंदा ग्रोवर के नेतृत्व में वकीलों की एक टीम CJP नेताओं की ओर से पैरवी कर सकती है। इस बीच, CJP ने चुनावी वोटर लिस्ट में कथित अनियमितताओं के विरोध में आज जंतर-मंतर पर एक बार फिर प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।

हिरासत के बाद अरेस्ट हुए CJP नेता

एक अधिकारी ने पीटीआई को बताया, “कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को एहतियातन गिरफ्तार किया गया है। उन्हें आज रविवार को दिल्ली कैंट पुलिस थाने में कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा।”

पुलिस ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने शनिवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से पहले राष्ट्रीय राजधानी में उनका विमान उतरने के बाद उन्हें हिरासत में लिया था, जिसके बाद उन्हें एहतियातन गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने शनिवार को सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर पहुंचने से रोक दिया था।

रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट कर बताया कि अभिजीत, आशुतोष और सौरव दास को सुबह दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन में एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने उन्हें सुबह इस बारे में जानकारी दी। CJP की लीगल हेड होने के नाते वह अन्य वकीलों के साथ पुलिस स्टेशन पहुंचेंगी।

दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान से हिरासत में लिए गए CJP नेता

CJP के नेता अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को शनिवार को दिल्ली एयरपोर्ट पर एक विमान से हिरासत में लिया गया था। ये नेता जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन से पहले हिरासत में लिए गए। पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करने की तैयारी में थी।

यह प्रदर्शन वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में कथित अनियमितताओं के आरोपों को लेकर आयोजित किया जाना था। राजधानी में प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए और प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया।

आज फिर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेगी CJP

CJP ने हिरासत और पुलिस कार्रवाई के बावजूद अपने आंदोलन को जारी रखने का ऐलान किया है। पार्टी ने आज जंतर-मंतर पर फिर से प्रदर्शन करने की घोषणा की है। पार्टी की मांग है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं की जिम्मेदारी लेते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब एक दिन पहले ही दिल्ली में CJP के आह्वान पर प्रस्तावित जुटान को रोकने के लिए पुलिस ने बड़े स्तर पर कार्रवाई की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, राजधानी में करीब 3,000 लोगों को हिरासत में लिया गया था।

चार पूर्व मुख्यमंत्री भी हिरासत में लिए गए

दिल्ली में हिरासत में लिए गए लोगों में चार पूर्व मुख्यमंत्री भी शामिल थे। इनमें आम आदमी पार्टी (AAP) के अरविंद केजरीवाल, तृणमूल कांग्रेस (TMC) की संस्थापक ममता बनर्जी, वामपंथी नेता पिनराई विजयन और माणिक सरकार के नाम शामिल हैं। प्रदर्शन को लेकर पुलिस और आयोजकों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है। उसका कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। वहीं, CJP ने वोटर लिस्ट में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर अपना विरोध जारी रखने का फैसला किया है।

ध्रुव राठी को छोड़ा गया, जंतर-मंतर पहुंचने पर फिर कार्रवाई की चेतावनी

इस पूरे घटनाक्रम के बीच यूट्यूबर ध्रुव राठी को भी दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार देर रात रिहा कर दिया था। हालांकि, पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यदि वह जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश करते हैं तो उनके खिलाफ दोबारा कार्रवाई की जा सकती है। एक अधिकारी ने रविवार सुबह बताया, “हरियाणा के गुरुग्राम में हिरासत में लिए जाने के बाद यूट्यूबर ध्रुव राठी को देर रात रिहा कर दिया गया।” राठी को आज तड़के 3 बजे रिहा किया गया।

दिल्ली में लगातार हो रही हिरासत की कार्रवाइयों और CJP के नए प्रदर्शन के ऐलान के बाद राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था पर नजर बनी हुई है। अब सबकी निगाहें आज होने वाली मजिस्ट्रेट के समक्ष पेशी और जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन पर टिकी हैं।

सीईसी के इस्तीफा देने तक पीछे नहीं हटेंगे

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने शनिवार को वोटर लिस्ट में कथित अनियमितताओं के खिलाफ तब तक प्रदर्शन जारी रखने का संकल्प जताया, जब तक मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं दे देते। CJP ने रविवार सुबह 10 बजे जंतर-मंतर पर फिर से प्रदर्शन करने की घोषणा की है।

इस बीच, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने नई दिल्ली और मध्य दिल्ली में संभावित पाबंदियों को लेकर चेतावनी जारी की है। शनिवार के प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों, कार्यकर्ताओं और राजनीतिक नेताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कॉजपा के राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे ने कहा कि संगठन इस कार्रवाई के बावजूद पीछे नहीं हटेगा।

CJP के प्रमुख नेताओं के हिरासत में रहने के बीच प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे शिंदे ने कहा, “आप चाहे जितने लोगों को हिरासत में लें। लेकिन जब तक सबसे बड़े गद्दार और देशद्रोही ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, हम पीछे नहीं हटेंगे। हम कल सुबह 10 बजे फिर जंतर-मंतर जाएंगे।’” उन्होंने लोगों से बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल होने और पुलिस द्वारा रोके जाने पर भी विरोध जारी रखने की अपील की।

शिंदे ने CJP संस्थापक अभिजीत दीपके और सह-संयोजकों सौरव दास तथा आशुतोष रांका की हिरासत के बारे में भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हिरासत में लिए जाने के 12 घंटे बाद भी तीनों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई।