Rahul Gandhi SC Petition: राहुल गांधी की सुप्रीम कोर्ट याचिका में 14 खामियां! दस्तावेज अधूरे, खड़गे के ID कार्ड की कॉपी धुंधली, कोर्ट फीस भी ₹220 कम

Rahul Gandhi SC Petition: सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने सोमवार (12 अक्तूबर) को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य लोगों की ओर से वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाने और गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर दायर याचिका में 14 से ज्यादा खामियां बताईं। सूत्रों के मुताबिक, रजिस्ट्री ने याचिका दायर करने वाले वकील से कहा कि वह मामले में सह-याचिकाकर्ता कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की साफ कॉपी जमा करे।

सूत्रों के मुताबिक, रजिस्ट्री ने याचिका में कुछ ऐसे पन्नों की ओर भी इशारा किया जो पढ़े जाने योग्य नहीं थे या गायब थे। इसके अलावा, रजिस्ट्री ने अदालत शुल्क में 200 रुपये से अधिक की कमी की बात भी बताई। इससे पहले दिन में, गांधी और विपक्ष के कई अन्य नेता याचिका दायर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करके गए।

इसमें अनुरोध किया गया है कि एसआईआर के दौरान किए गए बदलावों और हटाए गए नामों का एक तय समय में स्वतंत्र ऑडिट करने के लिए एक स्वतंत्र समिति बनाई जाए। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज करेंगे। जबकि तकनीकी विशेषज्ञ एवं गणमान्य नागरिक उनकी मदद करेंगे।

खामियों को करना होगा दूर

रजिस्ट्री की ओर से इन आपत्तियों को दर्ज किए जाने के बाद अब याचिकाकर्ताओं को पहले सभी खामियों को दूर करना होगा। इसके बाद ही मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सकेगा। इस घटनाक्रम से चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की कानूनी लड़ाई में एक प्रक्रियागत बाधा सामने आई है। हालांकि, रजिस्ट्री की आपत्तियों का मतलब यह नहीं है कि अदालत ने याचिका में उठाए गए आरोपों या मांगों पर कोई फैसला सुना दिया है।

याचिका में क्या-क्या खामियां मिलीं?

न्यूज 18 के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने याचिका की प्रारंभिक जांच के दौरान कुल 14 आपत्तियां दर्ज की हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, याचिका के साथ कुछ जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे। इसके अलावा नौ याचिकाकर्ताओं के प्राधिकरण से जुड़े कागजात भी अधूरे पाए गए। याचिका में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की कॉपी भी स्पष्ट नहीं थी। दस्तावेज की गुणवत्ता को लेकर आपत्ति दर्ज की गई है। इसके साथ ही कोर्ट फीस में 220 रुपये की कमी पाई गई। इन कमियों को दूर करने के लिए याचिकाकर्ताओं को जरूरी दस्तावेज पूरे करने, प्राधिकरण संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने और निर्धारित कोर्ट फीस जमा करने सहित रजिस्ट्री की आपत्तियों का समाधान करना होगा।

SIR पर रोक और चुनाव आयोग के फैसलों को चुनौती

राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के अन्य नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर SIR पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की है। याचिका में चुनाव प्रक्रिया के दौरान कथित अनियमितताओं को लेकर भी कार्रवाई की मांग की गई है।

याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में कुल 10 तरह की राहत मांगी हैं। इन मांगों का संबंध SIR की प्रक्रिया और भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) की ओर से लिए गए फैसलों से है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर हस्तक्षेप की जरूरत है। हालांकि, इन आरोपों की सत्यता और याचिका में की गई मांगों पर फैसला अदालत को सुनवाई के दौरान करना होगा।

राहुल गांधी बनाम चुनाव आयोग के नाम से दर्ज है मामला

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर इस मामले को Rahul Gandhi v. Election Commission of India के नाम से दर्ज किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कांग्रेस की कानूनी टीम ने याचिका राहुल गांधी के अदालत पहुंचने से करीब एक से दो घंटे पहले दाखिल की थी। राहुल गांधी सोमवार शाम 4:30 बजे की समयसीमा से पहले नहीं पहुंच सके थे। ऐसे में वकील एस. प्रसन्ना ने उनकी ओर से याचिका दाखिल की। इसके बाद राहुल गांधी सैकड़ों समर्थकों के साथ INDIA गठबंधन के मार्च में शामिल हुए। इस मार्च का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक विपक्ष की आवाज पहुंचाना था।

INDIA गठबंधन के कई बड़े नेता मार्च में हुए शामिल

सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव समेत कई विपक्षी नेता शामिल हुए। मल्लिकार्जुन खड़गे, तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय, समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की लोकसभा सदस्य सुप्रिया सुले, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता संजय राउत, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के नेता डी. राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की सांसद महुआ माजी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव एम. ए. बेबी और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के नेता ई. टी. मोहम्मद बशीर ने भी यह याचिका दायर की है। इस याचिका पर आज यानी मंगलवार को सुनवाई हो सकती है। इसमें अनुरोध किया गया है कि एसआईआर के दौरान किए गए बदलावों और हटाए गए नामों का एक तय समय में स्वतंत्र ऑडिट करने के लिए एक स्वतंत्र समिति बनाई जाए।

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CJI Video: कांग्रेस नेताओं से मिलने से इनकार के बाद चीफ जस्टिस सूर्यकांत का पहला रिएक्शन, बोले- सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सबके लिए खुले

Delhi Protest Update: चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार (12 अक्टूबर) को कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे हर किसी के लिए खुले हैं। कोई भी आम नागरिक या निर्वाचित जनप्रतिनिधि अपनी शिकायत लेकर अदालत आ सकता है। उन्होंने विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ ब्लॉक के नेताओं से मुलाकात नहीं करने के फैसले पर पहला बयान दिया है। CJI ने बताया कि उन्हें रविवार 11 अक्टूबर को मुलाकात के अनुरोध से जुड़ा पत्र मिला था। इसके बाद उन्होंने उसी रात जवाब देकर मुलाकात नहीं कर पाने की वजह बता दी थी।

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक CJI जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “मुझे कल बैठक के अनुरोध के संबंध में एक पत्र मिला था। और मैंने कल रात ही उसका जवाब दे दिया था, जिसमें उन कारणों का उल्लेख किया गया था कि मैं क्यों नहीं मिल पाऊंगा।” उन्होंने यह भी कहा, “सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं। किसी भी आम नागरिक या निर्वाचित निकाय के सदस्य की किसी भी याचिका का स्वागत है। हर भारतीय नागरिक को अदालत का दरवाजा खटखटाने का अधिकार है, और हम उनकी चिंताओं को सुनेंगे और कानून के तहत जो भी उचित होगा, वह करेंगे।”

CJI सूर्यकांत ने यह बयान राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के 33वें स्थापना दिवस समारोह के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिया। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के नेता चुनाव आयोग के खिलाफ अपनी शिकायतों को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने की तैयारी कर रहे हैं। चीफ जस्टिस के इस बयान को विपक्षी नेताओं के उस अनुरोध के संदर्भ में देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने कथित चुनावी अनियमितताओं के मुद्दे पर CJI से मुलाकात कर अपना पक्ष रखने और ज्ञापन सौंपने की मांग की थी।

विपक्षी नेताओं से मुलाकात क्यों नहीं करेंगे CJI?

इससे पहले CJI जस्टिस सूर्यकांत ने INDIA ब्लॉक के नेताओं के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करने से इनकार कर दिया था। पीटीआई के मुताबिक, सीजेआई सूर्यकांत ने ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी से यह कहते हुए मुलाकात से इनकार कर दिया कि इस तरह के मुद्दे पहले ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन हैं। सूत्रों ने बताया कि राहुल गांधी के मुलाकात के अनुरोध पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर कोई आदेश पारित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कांग्रेस नेता से याचिका दायर करने को कहा, जिस पर मंगलवार को सुनवाई हो सकती है।

सूत्रों के मुताबिक, सीजेआई ने कहा कि यदि किसी नागरिक के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो सुप्रीम कोर्ट उसके लिए 24 घंटे उपलब्ध है। सूत्रों ने बताया कि जस्टिस सूर्यकांत ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट प्रशासनिक स्तर पर कार्यपालिका के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। इससे पहले, अपनी मांगों को लेकर विपक्षी दलों ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय तक विरोध मार्च निकालने की घोषणा की थी। कांग्रेस ने इसे ‘चलो दिल्ली- लोकतंत्र के लिए मार्च’ का नाम दिया है। विपक्षी दलों की मांग है कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े उनके आरोपों पर उचित कार्रवाई हो।

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दिल्ली में सुरक्षा कड़ी, कई जगह बैरिकेडिंग

विपक्षी नेताओं के प्रस्तावित मार्च को देखते हुए मध्य दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। बाराखंभा रोड और मंडी हाउस के आसपास सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। दिल्ली पुलिस के साथ रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवान भी तैनात हैं। सुरक्षा कारणों से दिल्ली मेट्रो के 6 स्टेशनों पर एंट्री-एग्जिट गेट बंद कर दी गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 12 अक्टूबर को शाम 4 बजे तक कुछ स्टेशनों के गेट बंद रहेंगे।

पुलिस हिरासत के समय राहुल गांधी की नाक से बहता दिखा खून, पीएम आवास के बाहर प्रदर्शन के दौरान हुए चोटिल

मंगलवार को दिल्ली पुलिस ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस के कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। यह कार्रवाई तब हुई जब सुरक्षाकर्मियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के बाहर हो रहे कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को हटाने की कोशिश की। पुलिस ने राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और विपक्ष के अन्य नेताओं को लोक कल्याण मार्ग पर प्रदर्शन स्थल से जबरदस्ती हटाने की भी कोशिश की। हटाए जाते समय राहुल गांधी ने कहा, “भारत में लोकतंत्र अभी चल रहा है।” IANS द्वारा शेयर की गई तस्वीरों में उनकी नाक से खून बहता हुआ दिखाई दिया।

बता दें कि विपक्ष के नेताओं और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे राहुल गांधी को हिरासत में ले लिया गया है। पुलिस ने उनके साथ-साथ कई सांसदों, कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिया है। इनमें कन्हैया कुमार भी शामिल हैं। प्रदर्शन को देखते हुए इलाके में बड़ी संख्या में अर्धसैनिक बलों की भी तैनाती की गई है।

हिरासत में लिए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने ANI से कहा, “सब कुछ आपके सामने है। देखिए किस तरह हमारे नेताओं, जिनमें राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी शामिल हैं, के साथ बदसलूकी की गई। क्या हम आज के देश में ऐसा माहौल चाहते हैं? क्या आपको देश में लोकतंत्र दिखाई दे रहा है? हम यहां फिर से विरोध प्रदर्शन करने आएंगे।”

हिरासत में लिए जाने से पहले, राहुल गांधी ने लोगों से विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की और छात्रों के खिलाफ की गई कथित कार्रवाई को देश पर हमला बताया।

X पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, “छात्रों पर हमला हर भारतीय परिवार पर हमला है।”

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए गांधी ने कहा, “पीएम मोदी को लगता है कि वे बिना जवाब दिए और बिना किसी नतीजे का सामना किए बच निकलेंगे। वे ऐसा नहीं कर सकते। इस बार तो बिल्कुल नहीं।”

लोगों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील करते हुए राहुल गांधी ने कहा, “मैं हर उस देशभक्त भारतीय से कहता हूं जो मानता है कि हमारे छात्रों को न्याय मिलना चाहिए, वे सभी प्रधानमंत्री आवास के सामने धरने में हमारे साथ शामिल हों। भारत के छात्रों की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।”

इस विरोध प्रदर्शन की अगुवाई कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने की और इसमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, केसी वेणुगोपाल, पवन खेड़ा और कांग्रेस के कई सांसद शामिल हुए। पार्टी ने NEET-UG पेपर लीक मामले और प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।

यह प्रदर्शन संसद के दोनों सदनों में बार-बार हुए हंगामे के बाद हुआ, जहां विपक्षी दलों ने शिक्षा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों, जिसमें कथित NEET-UG पेपर लीक का मामला भी शामिल था, पर चर्चा की मांग की थी। वहीं, लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित होने के बाद, कांग्रेस सांसद प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च करते हुए गए।

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन लोक कल्याण मार्ग पहुंचे और राहुल गांधी से कुछ देर बातचीत की। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को धरना खत्म करने के लिए मनाने की कोशिश की।

X पर एक पोस्ट में, जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार ने उन्हें और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन को राहुल गांधी और कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं से बात करने के लिए भेजा था। सिंह के अनुसार, राहुल गांधी ने शुरुआत में कहा था कि अगर केंद्र सरकार संसद में NEET और उससे जुड़े आंदोलन से जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा कराने का आश्वासन दे देती है, तो वे प्रदर्शन खत्म कर देंगे।

सिंह ने दावा किया कि सरकार ने वह मांग मान ली थी, लेकिन बाद में गांधी ने कहा, “अब मेरी दो मांगें हैं: संसद में चर्चा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा।”

इस घटनाक्रम को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताते हुए सिंह ने आरोप लगाया कि “राहुल गांधी जैसे वरिष्ठ नेता और विपक्ष के नेता का अपनी बात से पीछे हटना… लोकतंत्र के हर नियम के खिलाफ है,” साथ ही उन्होंने कहा कि “सरकार NEET और उससे जुड़े आंदोलन से संबंधित सभी मुद्दों पर संसद में चर्चा करने के लिए तैयार है।”

News18 ने सूत्रों के हवाले से बताया कि गांधी रात तक विरोध स्थल पर ही रह सकते थे, हालांकि बाद में पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

इससे पहले दिन में, गांधी ने X पर पोस्ट किया, “कल युवा छात्रों के साथ हुई बर्बरता के बारे में जवाब मांगने के लिए हम पीएम मोदी के घर तक मार्च कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि “सरकार न तो कोई जिम्मेदारी लेना चाहती है और न ही संसद में इस पर बहस करना चाहती है। भारत के युवाओं का भविष्य बर्बाद करने के लिए प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए।”

विपक्ष का पक्ष रखते हुए कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा, “हमारी एक सीधी-सी मांग है। हमारे विपक्ष के नेताओं ने लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में यह मांग उठाई है। मांग यह है कि गृह मंत्री संसद में इस बारे में स्पष्टीकरण दें और सदन में इस मुद्दे पर चर्चा हो।”

उन्होंने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि गृह मंत्री इस बात का जवाब दें कि “किस तरह लोकतंत्र और हमारे संविधान की हत्या की जा रही है और छात्रों पर जुल्म किए जा रहे हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी पिछले 45 दिनों से प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि संसद में चर्चा की बार-बार की गई मांगों पर कोई जवाब न मिलने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाया।

राजीव शुक्ला ने कहा, “हमारे पास कोई और विकल्प नहीं बचा था। वे संसद में बहस नहीं करवा रहे हैं। तो हम और क्या कर सकते थे? हमें सड़कों पर उतरना ही पड़ा।”

सैयद नसीर हुसैन ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और खड़गे को किसी भी सदन में बोलने नहीं दिया गया और कहा कि छात्रों को “लाठी-चार्ज, वॉटर कैनन और आंसू गैस” का सामना करना पड़ा। उन्होंने आगे कहा, “प्रधानमंत्री संसद भी नहीं आते हैं। इसीलिए विपक्ष के सभी सांसद उनके आवास पर आए हैं, ताकि हमारी आवाज सुनी जा सके।”

मणिकम टैगोर ने कहा कि कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री से मिलकर शिक्षा मंत्री को हटाने की मांग करना चाहता था। उन्होंने कहा, “उन्हें शिक्षा मंत्री को हटा देना चाहिए। दिल्ली पुलिस के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। इसके लिए गृह मंत्री जिम्मेदार हैं। पीएम मोदी इसके लिए जिम्मेदार हैं। हमें प्रधानमंत्री से मिलने के लिए अंदर नहीं जाने दिया गया। इसलिए, वे यहां सभी सांसदों को हिरासत में ले रहे हैं।”

के. सुरेश ने आरोप लगाया, “वे हमें बेरहमी से हिरासत में ले रहे हैं। हम प्रधानमंत्री आवास के सामने विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, क्योंकि कल दिल्ली पुलिस ने हमारे छात्रों पर बेरहमी से हमला किया था।”

लोगों को हिरासत में लिए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा, “यह बीजेपी का आतंकवाद है। वे छात्रों की बात नहीं सुनते।” सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा, “अगर सांसदों का यह हाल है, तो सोचिए छात्रों के साथ क्या हो रहा होगा,” वहीं इमरान मसूद ने आरोप लगाया, “वे हमारे साथ बुरा बर्ताव कर रहे हैं। छात्रों की पिटाई की गई। हमें धक्का-मुक्की का सामना करना पड़ रहा है। वे संसद में भी हमारी बात सुनने को तैयार नहीं हैं।”

इससे पहले मंगलवार को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और केसी वेणुगोपाल ने दिल्ली में पुलिस कार्रवाई के दौरान घायल हुए छात्रों से मुलाकात की। वहीं दूसरी ओर, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने आरएमएल अस्पताल में घायल प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की।

सोमवार को नड्डा ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के एक प्रतिनिधिमंडल से भी मुलाकात की, जिसने प्रधान के इस्तीफे, NEET उम्मीदवारों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा (जिनमें से “20 से ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है”) और एक अन्य मांग रखी। बैठक के बाद, CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने X पर पोस्ट किया, “हमें अभी तक सरकार से कोई जवाब नहीं मिला है। हम अपने प्रदर्शनकारियों का ख्याल रख रहे हैं। सरकार को सिर्फ फोटो खिंचवाने के बजाय प्रधान को बर्खास्त करना चाहिए!”