Tripura Civic Polls: स्थानीय निकाय चुनाव के लिए त्रिपुरा SEC ने बुलाई सर्वदलीय बैठक, नवंबर में होंगे अगरतला सहित 21 नगरपालिकाओं में चुनाव

Tripura Civic Polls: देश पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा में नवंबर में नगरपालिकाओं का चुनाव कराया जाएगा। इस दौरान राज्य की राजधानी अगरतला सहित 21 नगरपालिकाओं में चुनाव होंगे। राज्य में अर्बन लोकल बॉडी चुनाव की तैयारियों के तहत राज्य चुनाव आयोग ने बुधवार को सर्वदलीय बैठक का आयोजन किया था। इस बैठक की अध्यक्षता राज्य चुनाव आयुक्त प्रदीप कुमार ने की। बैठक के बाद कुमार ने कहा कि सर्वदलीय बैठक में चुनावों के लिए उठाए जा रहे तैयारी के कदमों पर चर्चा की गई। बैठक में राज्य के पुलिस पुलिस प्रमुख भी मौजूद थे। उन्होंने राज्य में उपस्थित केंद्रीय सुरक्षा बलों के चुनाव में उपयोग का मुद्दा उठाया।

बैठक के बाद स्टेट सेक्रेटेरिएट में रिपोर्टर्स से बात करते हुए, राज्य चुनाव आयुक्त (SEC) प्रदीप कुमार ने कहा कि उन्होंने चुनावों के लिए उठाए जा रहे तैयारी के कदमों पर चर्चा की, जिसमें सुरक्षा बल की तैनाती और अलग-अलग स्तरों पर दूसरे उपाय शामिल हैं। त्रिपुरा में नवंबर में अर्बन लोकल बॉडी चुनावों की तैयारियों के मद्देनजर स्टेट इलेक्शन कमीशन ने बुधवार को एक ऑल-पार्टी मीटिंग बुलाई थी। अगरतला म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन समेत 21 म्युनिसिपल बॉडीज में चुनाव होंगे।

एसईसी ने कहा, “यह पहली ऑल-पार्टी मीटिंग थी। चुनावों से पहले एक जरूरी काम ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल का पब्लिकेशन है, जिसके बाद उसका फाइनल पब्लिकेशन होगा।” उन्होंने पत्रकारवार्ता में कहा, “हमने नामांकन प्रक्रिया, नॉमिनेशन फाइल करने का तरीका, स्क्रूटनी और नाम वापस लेने जैसे कई मुद्दों पर चर्चा की। हमने मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट, चुनावों की घोषणा के बाद अलग-अलग राजनीतिक दलों की जिम्मेदारियों और अधिकारियों की ड्यूटी पर भी चर्चा की।”

चक्रवर्ती ने कहा, “हमने राजनीतिक दलों से चुनाव के दौरान शांति बनाए रखने की अपील की। हमने चुनाव के दौरान सिक्योरिटी फोर्स की तैनाती पर भी चर्चा की। पॉलिटिकल पार्टियों ने सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स की तैनाती की मांग की है।” उन्होंने आगे कहा, “स्टेट पुलिस चीफ (इनचार्ज) जी एस राव ने बैठक में कहा कि राज्य में मौजूद केंद्रीय सुरक्षा बल का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।”

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Hyundai to invest USD 15.5 billion in India by 2032

Hyundai to invest USD 15.5 billion in India by 2032
Hyundai

Hyundai has announced plans to invest USD 15.5 billion in India between 2026 and 2032. The investment will cover research and development, manufacturing capacity, local supplier development and businesses such as electric vehicle charging and automotive financing. The announcement follows a meeting between prime minister Narendra Modi and Hyundai Motor Group executive chair Euisun Chung in New Delhi on October 13.

“India remains one of Hyundai Motor Group’s most important and strategic markets globally. The past 30 years have been defined by our commitment to India. This investment reaffirms our commitment to India for the next 30 years and beyond,” Chung said.

Hyundai investment: R&D and manufacturing plans

The company plans to invest around USD 700 million in its Indian R&D centre, including a vehicle testing track. The investment is intended to expand engineering facilities and support the development of automotive technologies and local talent.

The group also plans to increase manufacturing capacity across Hyundai and Kia. Their combined annual production capacity in India currently exceeds 1.4 million vehicles, across Hyundai’s facilities in Chennai and Pune, and Kia’s plant in Anantapur.

Capacity at Hyundai’s Pune facility is scheduled to increase in phases. The group is also assessing a third manufacturing location to meet its longer-term requirements. 

Our sister publication, Autocar Professional reported on September 29 that Chhatrapati Sambhaji Nagar in Maharashtra and Sanand in Gujarat were among the locations under consideration. According to people familiar with the plans, the proposed facility could eventually add around 500,000 units of annual capacity, with investment potentially exceeding USD 2 billion over time. The plant could come up around 2030, with capacity added in phases over five to seven years. The October 13 announcement did not confirm the location, investment schedule or additional capacity.

The company will also invest in local suppliers and regional partners to increase parts localisation and strengthen its supply chain. It plans to establish a dedicated investment entity in India to oversee the programme and identify suppliers, technology partners and investment opportunities.

Hyundai to explore new mobility businesses

Beyond vehicle manufacturing, Hyundai Motor Group plans to explore automotive financing, EV charging infrastructure and end-of-life vehicle recycling. It also intends to support promising start-ups and expand into mobility services linked to its vehicle business.

Hyundai is developing electric three-wheelers with TVS Motor Company under a joint development agreement. The partnership is aimed at commercialising electric three-wheelers for India and other markets.

The group said the investment programme is expected to create employment in manufacturing, R&D, engineering and supply chains, including through suppliers and new mobility businesses. It currently employs more than 24,000 people across India.

Hyundai Motor Group has not disclosed how the USD 15.5 billion investment will be divided between Hyundai and Kia, or how much will be allocated to individual projects.

CJI Video: कांग्रेस नेताओं से मिलने से इनकार के बाद चीफ जस्टिस सूर्यकांत का पहला रिएक्शन, बोले- सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सबके लिए खुले

Delhi Protest Update: चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार (12 अक्टूबर) को कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे हर किसी के लिए खुले हैं। कोई भी आम नागरिक या निर्वाचित जनप्रतिनिधि अपनी शिकायत लेकर अदालत आ सकता है। उन्होंने विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ ब्लॉक के नेताओं से मुलाकात नहीं करने के फैसले पर पहला बयान दिया है। CJI ने बताया कि उन्हें रविवार 11 अक्टूबर को मुलाकात के अनुरोध से जुड़ा पत्र मिला था। इसके बाद उन्होंने उसी रात जवाब देकर मुलाकात नहीं कर पाने की वजह बता दी थी।

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक CJI जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “मुझे कल बैठक के अनुरोध के संबंध में एक पत्र मिला था। और मैंने कल रात ही उसका जवाब दे दिया था, जिसमें उन कारणों का उल्लेख किया गया था कि मैं क्यों नहीं मिल पाऊंगा।” उन्होंने यह भी कहा, “सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं। किसी भी आम नागरिक या निर्वाचित निकाय के सदस्य की किसी भी याचिका का स्वागत है। हर भारतीय नागरिक को अदालत का दरवाजा खटखटाने का अधिकार है, और हम उनकी चिंताओं को सुनेंगे और कानून के तहत जो भी उचित होगा, वह करेंगे।”

CJI सूर्यकांत ने यह बयान राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के 33वें स्थापना दिवस समारोह के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिया। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के नेता चुनाव आयोग के खिलाफ अपनी शिकायतों को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने की तैयारी कर रहे हैं। चीफ जस्टिस के इस बयान को विपक्षी नेताओं के उस अनुरोध के संदर्भ में देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने कथित चुनावी अनियमितताओं के मुद्दे पर CJI से मुलाकात कर अपना पक्ष रखने और ज्ञापन सौंपने की मांग की थी।

विपक्षी नेताओं से मुलाकात क्यों नहीं करेंगे CJI?

इससे पहले CJI जस्टिस सूर्यकांत ने INDIA ब्लॉक के नेताओं के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करने से इनकार कर दिया था। पीटीआई के मुताबिक, सीजेआई सूर्यकांत ने ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी से यह कहते हुए मुलाकात से इनकार कर दिया कि इस तरह के मुद्दे पहले ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन हैं। सूत्रों ने बताया कि राहुल गांधी के मुलाकात के अनुरोध पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर कोई आदेश पारित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कांग्रेस नेता से याचिका दायर करने को कहा, जिस पर मंगलवार को सुनवाई हो सकती है।

सूत्रों के मुताबिक, सीजेआई ने कहा कि यदि किसी नागरिक के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो सुप्रीम कोर्ट उसके लिए 24 घंटे उपलब्ध है। सूत्रों ने बताया कि जस्टिस सूर्यकांत ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट प्रशासनिक स्तर पर कार्यपालिका के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। इससे पहले, अपनी मांगों को लेकर विपक्षी दलों ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय तक विरोध मार्च निकालने की घोषणा की थी। कांग्रेस ने इसे ‘चलो दिल्ली- लोकतंत्र के लिए मार्च’ का नाम दिया है। विपक्षी दलों की मांग है कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े उनके आरोपों पर उचित कार्रवाई हो।

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दिल्ली में सुरक्षा कड़ी, कई जगह बैरिकेडिंग

विपक्षी नेताओं के प्रस्तावित मार्च को देखते हुए मध्य दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। बाराखंभा रोड और मंडी हाउस के आसपास सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। दिल्ली पुलिस के साथ रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवान भी तैनात हैं। सुरक्षा कारणों से दिल्ली मेट्रो के 6 स्टेशनों पर एंट्री-एग्जिट गेट बंद कर दी गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 12 अक्टूबर को शाम 4 बजे तक कुछ स्टेशनों के गेट बंद रहेंगे।

ऑनलाइन शॉपिंग की डिलीवरी महंगी होगी? GST काउंसिल ने 5% टैक्स का प्रस्ताव दिया

GST काउंसिल ने 8 अक्टूबर को ई-कॉमर्स डिलीवरी से जुड़े एक बड़े बदलाव का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत कुछ डिलीवरी सर्विस पर 5% GST लगेगा। इसमें इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC का फायदा नहीं मिलेगा। इससे ई-कॉमर्स से होने वाली डिलीवरी का टैक्स सिस्टम बदल सकता है।

किन डिलीवरी सर्विस पर लगेगा GST?

यह प्रस्ताव कूरियर और पोस्टल सर्विस को छोड़कर बाकी डिलीवरी सर्विस पर लागू होगा। इसमें इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स ऑपरेटर यानी ECO के जरिए दी जाने वाली डिलीवरी शामिल है। खास बात यह है कि यह नियम उन सर्विस प्रोवाइडर्स पर लागू होगा, जिनके लिए GST रजिस्ट्रेशन जरूरी नहीं है।

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए ऑर्डर या सप्लाई किए गए सामान की डिलीवरी पर भी 5% GST लगाने का प्रस्ताव है। इस पर भी ITC का फायदा नहीं मिलेगा। यानी डिलीवरी सर्विस पर दिया गया GST आगे एडजस्ट नहीं किया जा सकेगा।

GTA की GST छूट भी खत्म होगी

GST काउंसिल ने Goods Transport Agencies यानी GTA को लेकर भी बदलाव का प्रस्ताव दिया है। अभी कुछ मामलों में GTA के जरिए सामान पहुंचाने पर GST से छूट मिलती है। अब ई-कॉमर्स के जरिए सप्लाई या ऑर्डर किए गए सामान पर यह छूट हटाने का प्रस्ताव है।

अगर आसाना में कहें तो ई-कॉमर्स के सामान की डिलीवरी पर अब ट्रांसपोर्ट के तरीके से फर्क नहीं पड़ेगा। चाहे सामान किसी भी माध्यम से पहुंचाया जाए, उस पर 5% GST लगेगा।

सरकार ने क्या कहा?

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, ई-कॉमर्स सामान की डिलीवरी किसी भी चैनल से होने पर 5% GST लगेगा। पहले Goods Transport Agencies के जरिए सामान की ढुलाई पर GST से छूट थी। अब इस छूट को हटाकर सभी तरह के ट्रांसपोर्ट पर 5% GST लागू करने की बात कही गई है।

इस बदलाव से ई-कॉमर्स से जुड़े डिलीवरी कारोबार में टैक्स को लेकर स्थिति साफ हो सकती है। हालांकि, कुछ मामलों में डिलीवरी और ट्रांसपोर्ट की लागत बढ़ सकती है। इसका असर आखिरकार कारोबारियों और ग्राहकों की लागत पर भी पड़ सकता है।

GST Council Meeting: 57वीं बैठक में बड़े बदलाव, रिफंड से लेकर रजिस्ट्रेशन और गिरफ्तारी तक बदलेगा सिस्टम

GST Council Meeting: 57वीं बैठक में बड़े बदलाव, रिफंड से लेकर रजिस्ट्रेशन और गिरफ्तारी तक बदलेगा सिस्टम

GST Council Meeting: GST काउंसिल की 57वीं बैठक में कारोबारियों और टैक्सपेयर्स के लिए कई बड़े प्रोसेस सुधारों को मंजूरी दी गई है। इनका मकसद GST को समझना और उसका पालन करना आसान बनाना है। साथ ही रिफंड की प्रक्रिया तेज होगी और टैक्स अधिकारियों का फिजिकल इंटरवेंशन कम किया जाएगा।

ये बदलाव GST के दो-दर वाले स्ट्रक्चर लागू होने के करीब एक साल बाद किए गए हैं। सरकार के मुताबिक, टैक्सेबल सप्लाई 25.8% बढ़कर हर महीने 50.58 लाख करोड़ रुपये हो गई है। पहले यह 40.19 लाख करोड़ रुपये थी। वहीं, कंज्यूमर्स को रिपोर्ट की गई सप्लाई 26.7% बढ़कर 7.58 लाख करोड़ रुपये हो गई है।

इस दौरान घरेलू सप्लाई पर प्रभावी टैक्स रेट भी घटा है। यह 14.55% से कम होकर 13.13% रह गया है। अब Council का फोकस टैक्स रेट से हटकर GST के रोजमर्रा के कामकाज पर है। इसमें रजिस्ट्रेशन, रिटर्न, रिफंड, मुकदमे और टैक्स कार्रवाई जैसे मुद्दे शामिल हैं।

GST रिफंड अब तेजी से मिलेगा

सबसे बड़ा बदलाव रिफंड की प्रक्रिया में किया गया है। रिफंड क्लेम को स्वीकार करने की समयसीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन करने का प्रस्ताव है। अगर 10 दिन के भीतर न तो एक्नॉलेजमेंट जारी होता है और न ही डेफिशिएंसी मेमो, तो क्लेम को अपने आप एक्नॉलेज्ड माना जाएगा।

अब सिस्टम रिस्क असेसमेंट के आधार पर रिफंड क्लेम की 90% रकम को मंजूर करेगा। इसमें अधिकारी की भूमिका कम होगी। एक्नॉलेजमेंट के तीन वर्किंग डे के भीतर रिफंड ऑर्डर जारी करना होगा। अभी इसके लिए सात दिन का समय है।

कैश लेजर में पड़े अतिरिक्त बैलेंस का रिफंड भी पूरी तरह ऑटोमैटिक होगा। इसमें अधिकारी के दखल की जरूरत नहीं होगी। इसका फायदा खासकर एक्सपोर्टर्स और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के तहत काम करने वाले कारोबारियों को मिल सकता है। करीब 65% रिफंड क्लेम एक्सपोर्ट या इनवर्टेड रेट से जुड़े हैं, जबकि 19% क्लेम कैश लेजर में पहले से पड़े बैलेंस से जुड़े हैं।

GST रजिस्ट्रेशन भी ज्यादा ऑटोमैटिक होगा

GST रजिस्ट्रेशन और उसमें बदलाव की प्रक्रिया को भी और ऑटोमैटिक करने का प्रस्ताव है। अभी कम जोखिम वाले आवेदकों को बिना अधिकारी की मंजूरी के सिस्टम के जरिए तीन वर्किंग डे में रजिस्ट्रेशन मिल सकता है। कुल रजिस्ट्रेशन में ऐसे मामलों की हिस्सेदारी 61% है।

रजिस्ट्रेशन फॉर्म को भी बदला जाएगा। इसमें आवेदक को वही फील्ड दिखाई जाएंगी, जो उसके लिए जरूरी हैं। साथ ही, मांगे जा रहे दस्तावेजों का मकसद भी बताया जाएगा। इससे आवेदन भरने की प्रक्रिया ज्यादा आसान हो सकती है।

ट्रेड नेम, डायरेक्टर या पार्टनर और कारोबार की अतिरिक्त जगहों में बदलाव जैसे कई सामान्य संशोधन अपने आप मंजूर किए जाएंगे। नवंबर 2025 से सितंबर 2026 के बीच दाखिल 16.73 लाख रजिस्ट्रेशन अमेंडमेंट एप्लिकेशन में से 65.45% इन्हीं कैटेगरी से जुड़े थे।

Input Tax Credit में कारोबारियों को राहत

Council ने कई क्षेत्रों में Input Tax Credit यानी ITC का दायरा बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। अब कर्मचारियों के लिए लिए गए हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पर भी ITC मिल सकेगा। फैक्ट्री के बाहर लगे टेलीकॉम टावर और पाइपलाइन पर भी इसका फायदा मिलेगा।

एक्सपायरी के कारण खराब स्टॉक पर भी ITC मिलेगा, अगर कानून के तहत उस सामान को नष्ट करना जरूरी है। फ्री सैंपल पर भी ITC उपलब्ध होगा। इससे उन कारोबारियों को राहत मिल सकती है, जिनके कारोबार में ऐसे खर्च नियमित रूप से होते हैं।

सरकार ने कुछ B2B सर्विस चेन में डबल टैक्सेशन रोकने की भी पहल की है। एजेंट के जरिए बुक किए गए 7,500 रुपये प्रति रात तक के होटल कमरे, रेस्टोरेंट और कैटरिंग सर्विस और पैसेंजर ट्रांसपोर्ट जैसी सेवाओं पर टैक्स दो बार लेने के बजाय एक बार ही लिया जाएगा।

इनवर्टेड ड्यूटी में ITC रिफंड का दायरा बढ़ेगा

मैन्युफैक्चरर्स और एक्सपोर्टर्स के लिए भी एक बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। इनवर्टेड रेट स्ट्रक्चर में रिफंड का दायरा बढ़ाया जाएगा। अभी रिफंड सिर्फ गुड्स इनपुट तक सीमित है। अब 1 नवंबर 2026 या उसके बाद लिए गए ITC पर इनपुट सर्विसेज को भी रिफंड में शामिल किया जाएगा।

प्लांट और मशीनरी को रिफंड से बाहर रखने का नियम भी हटाया जाएगा। 1 अप्रैल 2027 या उसके बाद लिए गए ITC पर प्लांट और मशीनरी के रिफंड की गणना हर महीने क्रेडिट के 1/60वें हिस्से के आधार पर होगी। यह अवधि उस एसेट की वर्किंग लाइफ से जुड़ी होगी।

इस बदलाव से फार्मा और FMCG जैसे सेक्टरों के वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट में सुधार की उम्मीद है। खासकर ऐसे कारोबारों में जहां इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के कारण ITC लंबे समय तक फंसा रहता है, वहां रिफंड का दायरा बढ़ने से कैश फ्लो में मदद मिल सकती है।

छोटे कारोबारियों को साल में एक बार रिटर्न का विकल्प

काउंसिल ने सालाना 5 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाले और सिर्फ कंज्यूमर्स को सामान या सर्विस बेचने वाले टैक्सपेयर्स के लिए एक वैकल्पिक स्कीम को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इसके तहत ऐसे कारोबारी साल में सिर्फ एक बार रिटर्न दाखिल कर सकेंगे। हालांकि, टैक्स का भुगतान तिमाही आधार पर करना होगा।

सरकार के मुताबिक, 1.05 करोड़ एक्टिव टैक्सपेयर्स में से 16.85 लाख सिर्फ कंज्यूमर सप्लाई रिपोर्ट करते हैं। इनमें 99% का टर्नओवर 5 करोड़ रुपये से कम है। ये सभी मिलकर GST की कुल रिपोर्टेड देनदारी का 1% से भी कम हिस्सा रखते हैं।

इस स्कीम का पूरा फ्रेमवर्क और जरूरी कानूनी बदलाव अगली GST काउंसिल बैठक में देखे जाएंगे। यानी अभी यह प्रस्ताव शुरुआती स्तर पर है। इसके लागू होने से पहले इसके नियम और प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।

रास्ते में माल की जांच भी कम होगी

माल लेकर जा रहे वाहनों की फिजिकल जांच को लेकर भी नए नियम प्रस्तावित हैं। किसी वाहन को तभी रोका जा सकेगा, जब उसके खिलाफ कोई खास इंटेलिजेंस या सूचना हो। इसके लिए जॉइंट कमिश्नर या उससे ऊपर के अधिकारी की पहले से मंजूरी जरूरी होगी।

किसी गाड़ी में जा रहे माल की जांच सिर्फ सोर्स स्टेट और डेस्टिनेशन स्टेट कर सकेंगे। रास्ते में पड़ने वाले दूसरे राज्यों को वाहन रोकने की अनुमति नहीं होगी। इससे कारोबारियों को रास्ते में बार-बार होने वाली जांच से राहत मिल सकती है।

यानी अगर कोई कंसाइनमेंट पांच राज्यों से होकर गुजरता है, तो अभी हर राज्य में उसकी जांच हो सकती है। नए सिस्टम में फिजिकल चेकिंग सिर्फ शुरुआत और अंतिम राज्य तक सीमित रहेगी। इससे सामान की आवाजाही में समय भी बच सकता है।

GST में गिरफ्तारी की शक्ति खत्म होगी

GST से जुड़े प्रवर्तन के मोर्चे पर भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। GST के तहत गिरफ्तारी की शक्ति हटाई जा रही है। किसी आरोपी पर मुकदमा चलाने की सीमा 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये की जाएगी। न्यूनतम सजा का प्रावधान भी हटाया जाएगा।

इसके बाद जुर्माना, जेल या दोनों में से क्या सजा दी जाए, यह न्यायिक विवेक पर निर्भर करेगा। जहां कोई खास पेनल्टी तय नहीं है, वहां लगने वाली सामान्य पेनल्टी भी 25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये की जाएगी।

सरकार का कहना है कि अब GST सिस्टम खरीदार और विक्रेता के इनवॉइस का मिलान कर सकता है। इससे फर्जी ITC को उसी जगह के करीब पकड़ा जा सकता है, जहां वह बनाया जाता है। इसी वजह से सिस्टम में ज्यादा ऑटोमेशन पर जोर दिया जा रहा है।

सर्विस एक्सपोर्टर्स को भी फायदा

GST काउंसिल ने सर्विस एक्सपोर्ट से जुड़े कुछ नियमों में भी बदलाव का प्रस्ताव रखा है। अगर कोई भारतीय कंपनी अपनी विदेशी ब्रांच के जरिए किसी विदेशी ग्राहक को सर्विस देती है, तो उसे एक्सपोर्ट बेनिफिट मिल सकेगा। इसके लिए मौजूदा कानूनी शर्त हटाई जाएगी।

इससे एनालिटिक्स कंपनियों, डिजाइन स्टूडियो, इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी और भारत से काम करने वाले ग्लोबल कंपनियों के ऑफिस को फायदा हो सकता है। ऐसे कारोबारों के लिए विदेशी ग्राहकों को दी जाने वाली सर्विस को एक्सपोर्ट मानने का रास्ता आसान होगा।

अगर किसी विदेशी ग्राहक के सामान पर भारत में टेस्टिंग, रिपेयर, सर्टिफिकेशन, रिसर्च या प्रोसेसिंग का काम किया जाता है, तो वह भी सर्विस एक्सपोर्ट माना जाएगा। इसके लिए जरूरी नहीं होगा कि वह सामान भारत से बाहर जाए।

ई-कॉमर्स पर छोटे विक्रेताओं के लिए रास्ता आसान

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए कारोबार करने वाले छोटे विक्रेताओं के लिए दूसरे राज्य में कारोबार की जगह दर्ज करना आसान हो सकता है। प्रस्ताव के तहत कोई विक्रेता दूसरे राज्य में ई-कॉमर्स ऑपरेटर के वेयरहाउस को अपना प्रिंसिपल प्लेस ऑफ बिजनेस घोषित कर सकेगा।

इसके लिए ई-कॉमर्स ऑपरेटर की मंजूरी जरूरी होगी। यह मंजूरी सिस्टम के जरिए अपने आप दी जाएगी। हालांकि, विक्रेता की कम से कम एक राज्य में फिजिकल मौजूदगी बनी रहनी चाहिए। यही उसका होम स्टेट होगा।

यह रजिस्ट्रेशन सिर्फ प्लेटफॉर्म के जरिए की गई सप्लाई तक सीमित रहेगा। काउंसिल अलग-अलग ई-कॉमर्स बिजनेस मॉडल में टैक्सेशन को भी एक जैसा करना चाहती है। यानी टैक्स इस बात पर निर्भर करेगा कि वास्तव में कौन-सी सर्विस दी गई है, न कि प्लेटफॉर्म ने कॉन्ट्रैक्ट किस तरह बनाया है।

इस बैठक में GST रेट में कोई बदलाव नहीं

57वीं GST काउंसिल बैठक में GST रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया। आगे से GST रेट से जुड़े मामलों पर साल में एक बार अलग बैठक में चर्चा होगी। यह बैठक सिर्फ रेट से जुड़े मुद्दों के लिए होगी।

इस बार काउंसिल का फोकस पिछले साल के GST 2.0 बदलावों के बाद बची विसंगतियों और अस्पष्टताओं को दूर करने पर रहा। यानी इस बैठक में टैक्स रेट बदलने के बजाय GST के रोजमर्रा के सिस्टम को आसान बनाने पर ज्यादा जोर दिया गया।

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RBI Policy : RBI ने वित्त वर्ष 2027 के GDP ग्रोथ का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% किया, दूसरी और तीसरी तिमाही के अनुमान भी बढ़े

RBI Policy : RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने 7 अक्टूबर को घोषणा की कि रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने वित्त वर्ष 2027 के लिए अपनी वास्तविक GDP ग्रोथ का अनुमान 6.7 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है। साथ ही, दूसरी और तीसरी तिमाही के ग्रोथ अनुमान भी बढ़ाए गए हैं। सेंट्रल बैंक ने Q2FY27 के ग्रोथ का अनुमान 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.2 प्रतिशत और Q3FY27 के ग्रोथ अनुमान 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.9 प्रतिशत कर दिया है। उसने Q4FY27 के ग्रोथ अनुमान को 6.8 प्रतिशत पर ही बनाए रखा गया है। हालांकि, Q1FY28 के लिए RBI ने ग्रोथ का अनुमान 7.3 प्रतिशत से घटाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है।

मार्च 2027 में खत्म होने वाले फाइनेंशियल ईयर के लिए पूरे साल का नया अनुमान, पहले के अनुमान से 0.4 प्रतिशत ज़्यादा है। संजय मल्होत्रा ​​ने कहा कि घरेलू आर्थिक ग्रोथ मजबूत स्तर पर है और मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी को उम्मीद है कि अर्थव्यवस्था मज़बूत बनी रहेगी। गवर्नर ने कहा कि पहली तिमाही में ग्रोथ की वजह प्राइवेट खपत रही। लोगों की खर्च करने की इच्छा (डिस्क्रीशनरी स्पेंडिंग) से लगातार मिल रहे सपोर्ट के कारण खपत का स्तर काफी हद तक मजबूत बना रहा।

उन्होंने आगे कहा कि हाई-फ़्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स से पता चलता है कि दूसरी तिमाही में भी आर्थिक गतिविधि की रफ़्तार बनी रही, हालांकि पहली तिमाही की तुलना में इसमें थोड़ी कमी आई। उन्होंने कहा कि लागत के दबाव के बावजूद मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियां बनी रहीं।

भारत की विकास दर के अनुमान में ऐसे समय में बढ़ोतरी हुई है जब ग्लोबल इकोनॉमी कमजोर है। मल्होत्रा ​​ने कहा कि पिछले साल की तुलना में इस साल वैश्विक विकास दर धीमी रहने का अनुमान है।

उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के फिर से बढ़ने से ग्लोबल इकोनॉमिक सेंटीमेंट खराब हो गया है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट में अस्थिरता बढ़ा दी है। ट्रेड को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण ग्लोबल सेंटीमेंट में घबराहट बनी हुई है और युद्ध तथा सख्त नीतियों से ग्लोबल इकोनॉमी के लिए जोखिम पैदा हो रहे हैं।

बता दें कि आज MPC ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत से 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया और अपने पॉलिसी रुख को ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया। चार सदस्यों ने इस बदलाव का समर्थन किया, जबकि दो ने इसका विरोध किया।

इस पर संजय मल्होत्रा ​​ने कहा कि महंगाई का आउटलुक पिछले साल के मुकाबले कम अनुकूल है। इसी लिए कमिटी ने पॉलिसी रेट में बदलाव करना ज़रूरी समझा। RBI ने वित्त वर्ष 2027 के लिए कोर महंगाई दर 4.4 प्रतिशत और वित्त वर्ष की बाकी तीन तिमाहियों में कंज्यूमर प्राइस इन्फ्लेशन (खुदरा महंगाई दर) औसतन 5.8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।

 

 

RBI MPC Meeting Live: RBI ने 0.25% बढ़ाया रेपो रेट: महंगे होंगे लोन और बढ़ेगी EMI, लेकिन मजबूत FDI और FD ब्याज दरों से मिलेगी राहत

Home loan EMI : RBI ने 0.25% बढ़ाया रेपो रेट, जानें आपके होम लोन पर क्या होगा इसका असर

Home loan EMI: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) ने बुधवार को रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स (bps) की बढ़ोतरी की है। जिससे लोन लेना महंगा हो गया है। यह कदम सख्त मॉनेटरी पॉलिसी का संकेत है, क्योंकि सेंट्रल बैंक ग्लोबल और घरेलू जोखिमों के बीच महंगाई के दबाव को कम करना चाहता है।

होम लोन लेने वालों के लिए, रेट में इस बढ़ोतरी का मतलब है कि EMI बढ़ सकती है। खासकर उन लोगों के लिए जिनका लोन फ्लोटिंग-रेट वाला है और रेपो रेट जैसे बाहरी बेंचमार्क से जुड़ा है। उम्मीद है कि बैंक रीसेट साइकिल और ट्रांसमिशन टाइमलाइन के आधार पर धीरे-धीरे इस बढ़ोतरी का असर ग्राहकों पर डालेंगे।

25 bps की बढ़ोतरी का होम लोन EMI पर असर

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टेबल से पता चलता है कि 50 लाख रुपये के होम लोन और 20 साल की अवधि (tenure) के मामले में, ब्याज दरों में 25 bps की बढ़ोतरी से मासिक EMI लगभग 780 रुपये बढ़ सकती है। अगर लोन लेने वाले अवधि को नहीं बदलते हैं, तो लोन की पूरी अवधि के दौरान कुल ब्याज का बोझ लगभग 1.88 लाख रुपये बढ़ जाएगा।

फ्लोटिंग-रेट वाले लोन लेने वालों पर इसका असर तब दिखेगा जब उनके लोन ऊंचे बेंचमार्क पर रीसेट होंगे। कुछ बैंक लोन लेने वालों को EMI के बजाय लोन की अवधि बढ़ाने का विकल्प दे सकते हैं; इससे तुरंत मासिक EMI पर पड़ने वाला असर तो कम हो सकता है, लेकिन समय के साथ कुल ब्याज का खर्च बढ़ जाता है।

फिक्स्ड-रेट होम लोन वाले ग्राहकों पर कोई तुरंत असर नहीं पड़ेगा, हालांकि इस पॉलिसी के बाद रीफाइनेंसिंग और नए लोन की लागत बढ़ने की संभावना है।

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जानकारों का कहना है कि लोन लेने वालों को इस बात पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए कि बैंक कितनी तेजी से ब्याज दरों में बढ़ोतरी का असर ग्राहकों पर डालते हैं। साथ ही, ज़्यादा ब्याज के बोझ को संभालने के लिए उन्हें आंशिक प्री-पेमेंट (समय से पहले कुछ हिस्सा चुकाना), लेंडर बदलना या कम अवधि का लोन लेने जैसे विकल्पों पर भी विचार करना चाहिए। अब बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि RBI आने वाली पॉलिसी समीक्षाओं में और सख्ती का संकेत देता है या ‘ wait-and-watch का रुख अपनाता है।

RBI MPC Meeting Live: 0.25% बढ़ा रेपो रेट, महंगी होगी आपकी EMI! जुलाई के 4.5% से बढ़कर अगस्त में 4.8% पहुंची खुदरा महंगाई

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

RBI MPC Meeting: फरवरी 2023 के बाद पहली बार बढ़ सकता है रेपो रेट, महंगाई बनी बड़ी वजह

RBI MPC Meeting: RBI की 21 लगातार MPC बैठकों में ब्याज दर नहीं बढ़ी है। अब 7 अक्टूबर की बैठक में तस्वीर बदल सकती है। माना जा रहा है कि RBI रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर सकता है। ऐसा हुआ तो रेपो रेट 5.25% से बढ़कर 5.50% हो जाएगा।

फरवरी 2023 के बाद यह पहली बार होगा, जब RBI रेपो रेट बढ़ाएगा। हालांकि, बाजार में इसकी उम्मीद पहले से बनी हुई है। इसलिए असली नजर इस बात पर होगी कि RBI आगे कितनी बढ़ोतरी के संकेत देता है।

आगे कितनी बढ़ सकती हैं दरें?

Moneycontrol के 19 एक्सपर्ट्स के पोल में 15 ने 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है। वहीं, चार एक्सपर्ट्स को दरों में कोई बदलाव की उम्मीद है।

IDFC First Bank की चीफ इकोनॉमिस्ट गौरा सेनगुप्ता के मुताबिक, फरवरी तक रेपो रेट में कुल करीब 75 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में पहली बढ़ोतरी के बाद RBI का अगला इशारा बाजार के लिए ज्यादा अहम होगा।

महंगाई बढ़ने की चिंता

महंगाई RBI के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है। पिछली समीक्षा में केंद्रीय बैंक ने FY27 के लिए CPI महंगाई का अनुमान 5% रखा था।

अगस्त में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82% हो गई। जुलाई में यह 4.45% थी। अब कच्चे तेल और दूसरी कमोडिटी की बढ़ती कीमतों से महंगाई पर और दबाव आ सकता है।

GDP ग्रोथ मजबूत, लेकिन आगे चुनौती

भारतीय अर्थव्यवस्था ने पहली तिमाही में 7.8% की मजबूत ग्रोथ दर्ज की है। इससे RBI को महंगाई पर फोकस करने की थोड़ी गुंजाइश मिलती है।

अधिकांश एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि RBI FY27 के लिए 6.7% GDP ग्रोथ का अनुमान बरकरार रखेगा। हालांकि, महंगा कच्चा तेल और दुनिया में बढ़ती ब्याज दरें दूसरी छमाही में परेशानी बढ़ा सकती हैं।

बैंकिंग सिस्टम में ज्यादा पैसा

बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त पैसा भी RBI के लिए बड़ा मुद्दा है। सितंबर में लिक्विडिटी सरप्लस करीब 12 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया था।

अब यह घटकर करीब 4-6 लाख करोड़ रुपये रह गया है। 6 अक्टूबर को बैंकिंग सिस्टम में करीब 5.03 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त लिक्विडिटी थी। RBI इसे कम करने के लिए OMO बिक्री और VRRR जैसे कदम उठा रहा है।

कच्चा तेल और रुपया भी चिंता

RBI के सामने बाहरी मोर्चे पर भी मुश्किलें बढ़ी हैं। ब्रेंट क्रूड हाल में करीब 107 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। अमेरिकी 10 साल की बॉन्ड यील्ड भी 5.2% तक चली गई। रुपया 96 रुपये प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गया है। वहीं, भारत की 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड 7.2% के ऊपर पहुंच गई है।

यानी इस बार बाजार सिर्फ 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी नहीं देखेगा। असली सवाल यह होगा कि RBI आगे कितनी दरें बढ़ा सकता है और महंगाई, ग्रोथ और रुपये के बीच संतुलन कैसे बनाएगा।

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RBI MPC Meeting Live: आज होगा रेपो रेट पर बड़ा ऐलान! जानिए होम लोन EMI, FD और आपकी जेब पर क्या पड़ेगा असर

RBI Monetary Policy Committee Live Updates: देश के करोड़ों आम लोगों, होम लोन ग्राहकों और निवेशकों की निगाहें आज, 7 अक्टूबर सुबह 10 बजे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर के ऐलान पर टिकी हुई है। महंगाई के बढ़ते दबाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपये के बीच आज केंद्रीय बैंक अपनी नई मौद्रिक नीति का ऐलान करने जा रहा है।

वैसे बाजार के अधिकांश विशेषज्ञों और रॉयटर्स के पोल में शामिल 60% से अधिक इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि आज रिजर्व बैंक रेपो रेट में 0.25% (25 बेसिस पॉइंट) की बढ़ोतरी कर सकता है। अगर ऐसा होता है, तो रेपो रेट वर्तमान 5.25% से बढ़कर 5.50% हो जाएगी।

होम लोन EMI पर कितना पड़ेगा असर?

अगर आज आरबीआई रेपो रेट बढ़ाता है, तो फ्लोटिंग रेट पर होम लोन लेने वाले ग्राहकों की जेब पर असर पड़ना तय है:

बढ़ेगी EMI या लोन की अवधि: रेपो रेट बढ़ते ही बैंकों की फंडिंग कॉस्ट बढ़ेगी, जिसे बैंक सीधे ग्राहकों पर डालेंगे। यदि आपका ₹50 लाख का होम लोन लंबे समय के लिए चल रहा है, तो 0.25% की बढ़ोतरी से बैंक या तो आपकी मासिक EMI बढ़ा देंगे या लोन की समयावधि को लंबा कर देंगे।

क्या करें उधारकर्ता?:  तुरंत पूरा लोन चुकाने की हड़बड़ी न करें। पहले अपने लोन की मौजूदा ब्याज दर, शेष अवधि, बैंक के स्प्रेड की जांच करें और जरूरत पड़ने पर दूसरे बैंक में बैलेंस ट्रांसफर के विकल्प पर विचार करें।

पर्सनल और कार लोन भी हो सकते हैं महंगे

होम लोन ही नहीं, बल्कि नए पर्सनल लोन, व्हीकल लोन और अन्य क्रेडिट प्रोडक्ट्स की दरें भी धीरे-धीरे बढ़ सकती हैं। चूंकि पर्सनल लोन की दरें पहले से ही ऊंची होती हैं, इसलिए इस समय नया असुरक्षित कर्ज सोच-समझकर ही लें।

फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के निवेशकों के लिए खुशखबरी

दरों में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा फायदा बचत करने वालों को मिलेगा। कर्ज की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए बैंक नए डिपॉजिट आकर्षित करने के लिए FD पर मिलने वाले ब्याज में बढ़ोतरी करेंगे। वैसे आपकी पहले से चल रही फिक्स्ड डिपॉजिट पर पुरानी दर ही लागू रहेगी। फायदा केवल नई FD कराने या पुरानी FD को रिन्यू करने पर ही मिलेगा।

सेविंग्स अकाउंट की ब्याज दरें

सेविंग्स अकाउंट की ब्याज दरों में तुरंत कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना कम है, क्योंकि ये दरें प्रत्येक बैंक की लिक्विडिटी और प्रतिस्पर्धात्मक नीतियों पर निर्भर करती हैं।

आरबीआई क्यों ले सकता है दरें बढ़ाने का फैसला?

महंगाई: अगस्त में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82% पर पहुंच गई, जो आरबीआई के 4% के लक्ष्य से लगातार तीसरे महीने ऊपर है।

कच्चा तेल और रुपया: पश्चिम एशिया में तनाव से कच्चे तेल के दाम ऊंचे हैं और रुपया कमजोर हो रहा है, जिससे आयात महंगा हो रहा है।

मजबूत GDP ग्रोथ: चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ 7.8% रही है, जो आर्थिक मजबूती को दर्शाती है और आरबीआई को महंगाई पर ध्यान केंद्रित करने का मौका देती है।

RBI की नई पॉलिसी के पल पल के अपडेट के लिए जुगए रहें मनीकंट्रोल के आरबीआई मॉनेटरी पॉलिसी के नए ऐलानों के लिए बने इस स्पेशल लाइव ब्लॉग से।

GST Council Meeting: 7 अक्टूबर को नहीं होगी GST काउंसिल की बैठक, नई तारीख का हुआ ऐलान, जानें क्या है वजह

GST Council Meeting: गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) काउंसिल की 57वीं बैठक की तारीख में बदलाव किया गया है। GST काउंसिल की 57वीं बैठक पहले 7 अक्टूबर को होनी थी, लेकिन अब इसे एक दिन आगे बढ़ाकर 8 अक्टूबर कर दिया गया है। GST काउंसिल सेक्रेटेरिएट के मुताबिक, जरूरी परिस्थितियों (अनअवॉइडेबल सर्कम्स्टैंसेज) के कारण ये बदलाव किया गया है। ये बैठक 8 अक्टूबर को सुबह 11 बजे नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम के समिट रूम में आयोजित की जाएगी।

वित्त मंत्री की अध्यक्षता में होगी बैठक

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में होने वाली GST काउंसिल की बैठक में सभी राज्यों के वित्त मंत्री भी शामिल होंगे। करीब एक साल से अधिक समय बाद होने जा रही इस बैठक को लेकर 5 अक्टूबर को नया मेमोरेंडम जारी किया गया। राजस्व सचिव की मंजूरी से जारी इस पत्र में बैठक की तारीख बदलने की जानकारी दी गई है। वहीं GST काउंसिल के सभी सदस्यों को इसकी सूचना देने के लिए कहा गया है।

पिछले साल कब हुई थी बैठक

गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) काउंसिल की 56वीं बैठक 3 और 4 सितंबर 2025 को आयोजित हुई थी। इस बैठक में केंद्र और राज्यों ने GST व्यवस्था में बड़े बदलावों पर सहमति बनाई थी। खास तौर पर GST की दरों और अलग-अलग टैक्स स्लैब में बदलाव का फैसला लिया गया था। 22 सितंबर 2025 से नई GST व्यवस्था लागू हुई, जिसमें मुख्य रूप से 5% और 18% के दो टैक्स स्लैब रखे गए। वहीं, लग्जरी और कुछ खास महंगे सामान पर 40% की सबसे ज्यादा GST दर तय की गई। इससे पहले 1 जूलाई 2017 से 5%, 12%, 18% और 28% के चार स्लैब लागू थे।

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