₹30 हजार से शुरू किया सैंडविच का ठेला, आज ₹25 लाख महीना! फेल इंटरनेट कैफे के बाद ऐसे बदली अभिषेक की किस्मत

कारोबार में पहली कोशिश नाकाम हो जाए तो बहुत से लोग दोबारा जोखिम लेने से बचते हैं। लेकिन भोपाल के अभिषेक साहू की कहानी कुछ अलग है। करीब 15 साल पहले शुरू किया गया उनका इंटरनेट कैफे एक साल के अंदर बंद हो गया। इसके बाद उन्होंने हार मानने के बजाय महज ₹30 हजार के लोन से एक छोटे से सैंडविच कार्ट की शुरुआत की। आज उनका यही छोटा कारोबार सोशल मीडिया पर चर्चा में है।

पहला बिजनेस एक साल में ही हो गया बंद

अभिषेक साहू करीब 15 साल पहले भोपाल पहुंचे थे। उन्होंने शुरुआत इंटरनेट कैफे से की। उस दौर में इंटरनेट कैफे एक अच्छा बिजनेस आइडिया माना जाता था, लेकिन उनका कारोबार उम्मीद के मुताबिक नहीं चला।

करीब एक साल बाद ही उन्हें इंटरनेट कैफे बंद करना पड़ा। पहली कोशिश की असफलता के बावजूद अभिषेक ने कारोबार करने का विचार नहीं छोड़ा। इस बार उन्होंने ऐसा बिजनेस चुना, जिसमें कम पूंजी लगाकर शुरुआत की जा सके।

₹30 हजार जुटाए और बदल दी दिशा

पहले कारोबार के बाद अभिषेक ने फूड बिजनेस की तरफ रुख किया। उन्होंने ₹30 हजार का लोन लिया और एक छोटा सा सैंडविच कार्ट शुरू किया। खास बात यह थी कि उनके पास सैंडविच बनाने की कोई बड़ी प्रोफेशनल ट्रेनिंग नहीं थी। उन्होंने YouTube की मदद से अलग-अलग सैंडविच की रेसिपी सीखीं और फिर उन्हें अपने छोटे से कार्ट पर आजमाना शुरू किया। यानी दूसरी शुरुआत बड़े निवेश या बड़े सेटअप से नहीं, बल्कि सीमित पैसे और खुद सीखने की कोशिश से हुई।

धीरे-धीरे लोगों को पसंद आने लगा स्वाद

शुरुआत में यह एक छोटा सा सैंडविच कार्ट था, लेकिन समय के साथ ग्राहकों की संख्या बढ़ने लगी। लोगों को सैंडविच पसंद आने लगे और धीरे-धीरे इस छोटे कारोबार ने अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी। अभिषेक के बिजनेस की कहानी में सोशल मीडिया ने भी अहम भूमिका निभाई। नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उनके सैंडविच कार्ट पर बनी एक Instagram Reel वायरल हो गई। इसके बाद भोपाल के अलग-अलग हिस्सों से लोग उनके सैंडविच का स्वाद लेने पहुंचने लगे।

अब 30-50 मिनट तक इंतजार करते हैं ग्राहक

कभी जिस कारोबार की शुरुआत एक छोटे कार्ट से हुई थी, आज उसकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ग्राहक सैंडविच के लिए इंतजार करने को भी तैयार रहते हैं।रिपोर्ट के मुताबिक, कई ग्राहकों को ऑर्डर के लिए करीब 30 से 50 मिनट तक इंतजार करना पड़ता है। इसके बावजूद लोगों की भीड़ कम नहीं हुई।

हर दिन सैकड़ों सैंडविच की बिक्री

सोशल मीडिया पर अभिषेक की कहानी शेयर करने वाले यूजर प्रथम के मुताबिक, उनका Hari Har Sandwich अब हर दिन लगभग 600 से ज्यादा सैंडविच बेचता है। वीकेंड पर यह संख्या और बढ़ जाती है। पोस्ट में दावा किया गया है कि शनिवार और रविवार जैसे दिनों में 1,000 से ज्यादा सैंडविच बिकते हैं। इसी पोस्ट के अनुसार, इस छोटे से फूड बिजनेस का मासिक टर्नओवर करीब ₹25 लाख तक पहुंच चुका है।

असफलता से शुरुआत, लेकिन वहीं नहीं रुके

अभिषेक साहू की कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा सिर्फ ₹25 लाख का टर्नओवर नहीं है। असली बात यह है कि पहला बिजनेस बंद होने के बाद उन्होंने खुद को दोबारा आजमाया।

इंटरनेट कैफे के अनुभव के बाद उन्होंने कम पैसे वाला बिजनेस चुना, YouTube से स्किल सीखी और धीरे-धीरे ग्राहकों का भरोसा बनाया। यही छोटा कदम आगे चलकर बड़े कारोबार में बदलता गया।

सोशल मीडिया पर क्यों हो रही चर्चा?

प्रथम ने X पर अभिषेक की कहानी शेयर करते हुए उनके सफर को उजागर किया। पोस्ट के वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने उनकी दोबारा शुरुआत करने की हिम्मत की तारीफ की। एक यूजर ने लिखा कि इस कहानी की सबसे खास बात ₹25 लाख का टर्नओवर नहीं, बल्कि पहली असफलता के बाद सिर्फ ₹30 हजार से दोबारा शुरुआत करने का फैसला है। दूसरे यूजर ने इसे एक शानदार ‘कमबैक’ बताया।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

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Personal Loan Rejection: पर्सनल लोन नहीं मिल रहा है? ये 5 कारण हो सकते हैं जिम्मेदार

Personal Loan Rejection: पर्सनल लोन लेना पहले से काफी आसान हो गया है। कई बैंक और ऐप कुछ मिनटों में लोन देने का दावा करते हैं। लेकिन हर आवेदन मंजूर नहीं होता। कई बार अच्छी सैलरी होने के बाद भी लोन रिजेक्ट हो जाता है।

अच्छी बात यह है कि ज्यादातर वजहें पहले से पता हों, तो उनसे बचा जा सकता है। आइए जानते हैं वो 5 कारण, जिनकी वजह से आपका पर्सनल लोन अटक सकता है।

1. क्रेडिट स्कोर खराब होना

यह सबसे बड़ी वजह होती है। बैंक सबसे पहले आपका क्रेडिट स्कोर देखते हैं। इससे उन्हें पता चलता है कि आपने पुराने लोन और क्रेडिट कार्ड का भुगतान समय पर किया या नहीं।

अगर स्कोर 750 या उससे ज्यादा है, तो मंजूरी मिलने की संभावना बेहतर रहती है। वहीं कम स्कोर होने पर बैंक लोन देने से मना कर सकते हैं या ज्यादा ब्याज वसूल सकते हैं।

2. पहले से बहुत ज्यादा EMI चलना

बैंक सिर्फ आपकी सैलरी नहीं देखते। वे यह भी देखते हैं कि हर महीने आपकी कमाई का कितना हिस्सा पहले से EMI में जा रहा है।

मान लीजिए आपकी महीने की सैलरी ₹60,000 है। अगर पहले से ₹30,000 EMI कट रही है, तो नया लोन मिलना मुश्किल हो सकता है। आमतौर पर बैंक चाहते हैं कि कुल EMI आपकी कमाई का लगभग 40-50% से ज्यादा न हो।

3. नौकरी या आय स्थिर नहीं होना

अगर आपने हाल ही में नौकरी बदली है या आपकी आय नियमित नहीं है, तो बैंक सावधानी बरतते हैं।

उदाहरण के लिए, किसी कंपनी में सिर्फ एक-दो महीने पहले जॉइन किया है, तो बैंक थोड़ा इंतजार करने को कह सकते हैं। वहीं फ्रीलांसर और सेल्फ-एम्प्लॉयड लोगों से अक्सर अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जाते हैं।

4. बार-बार लोन के लिए आवेदन करना

कई लोग एक साथ कई बैंकों में आवेदन कर देते हैं। यह उल्टा नुकसान कर सकता है।

हर आवेदन का रिकॉर्ड आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में दिख सकता है। कम समय में बहुत ज्यादा आवेदन देखकर बैंक मान सकते हैं कि आपको पैसों की ज्यादा जरूरत है। इससे मंजूरी की संभावना घट सकती है।

5. दस्तावेजों में गलती

कई बार छोटी सी गलती भी बड़ी परेशानी बन जाती है।

नाम में अंतर, गलत पता, अधूरी बैंक स्टेटमेंट या आय का सही सबूत न देना आवेदन रोक सकता है। इसलिए आवेदन करने से पहले सभी दस्तावेज एक बार जरूर जांच लें।

लोन मंजूर होने की संभावना कैसे बढ़ाएं?

अगर आप पर्सनल लोन लेने की तैयारी कर रहे हैं, तो ये बातें मदद कर सकती हैं।

  • क्रेडिट स्कोर 750 या उससे ऊपर रखने की कोशिश करें।
  • पुरानी EMI कम रखें।
  • समय पर बिल और EMI भरें।
  • एक साथ कई जगह आवेदन न करें।
  • सभी दस्तावेज सही और अपडेटेड रखें।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Home Loan: सस्ता लोन पड़ न जाए महंगा! होम लोन लेने से पहले इन 6 पॉइंट्स में समझ लें प्रोसेसिंग फीस और हिडन चार्जेस का पूरा गणित

Home Loan Hidden Charges: नया घर खरीदने के लिए होम लोन लेते समय ज्यादातर लोग सिर्फ बैंक की ब्याज दरों की तुलना करते हैं। लेकिन सच यह है कि लोन लेने का कुल खर्च सिर्फ ब्याज तक सीमित नहीं होता।

बैंक और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां (HFCs) आपकी लोन एप्लिकेशन की जांच और प्रोसेसिंग के नाम पर एक अच्छी-खासी रकम ‘प्रोसेसिंग फीस’ और अन्य चार्जेस के रूप में वसूलती हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के मुताबिक, लोन लेने से पहले इन सभी खर्चों को समझना बेहद जरूरी है, ताकि बाद में कोई छिपा हुआ खर्च आपकी जेब पर भारी न पड़े।

1. क्या होती है होम लोन प्रोसेसिंग फीस?

प्रोसेसिंग फीस वह प्रशासनिक शुल्क है, जो बैंक आपके लोन आवेदन की क्रेडिट जांच, दस्तावेजों के वेरिफिकेशन और अन्य कागजी कार्रवाई के लिए लेता है। यह फीस हर बैंक में अलग-अलग होती है। कुछ बैंक एक तय राशि वसूलते हैं, तो कुछ लोन राशि का 0.25% से लेकर 2% तक चार्ज करते हैं। त्योहारों या विशेष स्कीम के दौरान बैंक इस फीस पर पूरी या आंशिक छूट भी देते हैं।

2. लोन रिजेक्ट होने पर क्या प्रोसेसिंग फीस वापस मिलती है?

अक्सर लोग मान लेते हैं कि अगर लोन मंजूर नहीं हुआ, तो बैंक फीस वापस कर देगा लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता। रिजर्व बैंक की गाइडलाइंस के अनुसार, बैंकों को आवेदन के समय ही साफ-साफ बताना होगा कि लोन रिजेक्ट या डिसबर्स न होने की स्थिति में प्रोसेसिंग फीस का कितना हिस्सा रिफंडेबल है। एप्लिकेशन फीस देने से पहले बैंक अधिकारी से रिफंड पॉलिसी लिखित में जरूर समझ लें।

3. प्रोसेसिंग फीस के अलावा ये ‘अतिरिक्त खर्च’ भी समझें

केवल प्रोसेसिंग फीस देखकर किसी लोन को सस्ता न समझें। इसके साथ कई अन्य अपफ्रंट खर्च भी जुड़ते हैं:

लीगल और टाइटिल फीस: प्रॉपर्टी के मालिकाना हक और कानूनी जांच के लिए।

टेक्निकल और वैल्युएशन चार्ज: प्रॉपर्टी की बाजार में सही कीमत और निर्माण की गुणवत्ता जांचने के लिए।

डॉक्यूमेंटेशन फीस: एग्रीमेंट और स्टांप ड्यूटी से जुड़े खर्च।

इस बात का ध्यान दें कि जिस बैंक की प्रोसेसिंग फीस कम दिख रही हो, हो सकता है कि उसके लीगल या टेक्निकल चार्जेस दूसरे बैंकों से ज्यादा हों!

4. केवल ब्याज दर नहीं, ‘ऑल-इन कॉस्ट’ की तुलना करें

दो बैंकों के लोन की तुलना करते समय सिर्फ विज्ञापनों में दिख रही ब्याज दर न देखें।RBI के आदेशानुसार, बैंक को लोन एग्रीमेंट से पहले ग्राहक को ‘की फैक्ट्स स्टेटमेंट’ (KFS) देना अनिवार्य है। इसमें लोन की असली कुल लागत यानी Annual Percentage Rate (APR) लिखा होता है। स्मार्ट तरीका ये है कि दो लोन की तुलना करते समय ब्याज दर + प्रोसेसिंग फीस + अन्य सभी चार्ज को जोड़कर ही फैसला लें।

5. क्या प्रोसेसिंग फीस कम या माफ कराई जा सकती है?

जी हां! बैंक अक्सर ग्राहकों के क्रेडिट प्रोफाइल के आधार पर फीस में मोलभाव की गुंजाइश रखते हैं। अगर आपका क्रेडिट स्कोर 750 या उससे अधिक है और आपकी जॉब प्रोफाइल स्थिर है, तो आप बैंक से फीस माफ करने या घटाने की मांग कर सकते हैं। बैंक प्रतिनिधि या एजेंट द्वारा दी गई किसी भी छूट या छूट के मौखिक वादे पर भरोसा न करें, इसे आधिकारिक ईमेल या लेटर हेड पर लिखित रूप में ही लें।

6. पेमेंट करने से पहले एग्रीमेंट को ध्यान से पढ़ें

आवेदन जमा करने से पहले बैंक से फीस की पूरी सूची मांगें। अगर लोन मंजूर होने के बाद कोई ऐसा चार्ज जोड़ा जाता है जिसका खुलासा पहले नहीं किया गया था, तो आप बैंक से जवाब मांग सकते हैं। RBI के नियमों के अनुसार, बिना पूर्व जानकारी के ग्राहकों पर नए चार्ज थोपना अनुचित व्यापार प्रथा के अंतर्गत आता है।

Home Loan: एक नजर में होम लोन के प्रमुख चार्जेस की लिस्ट

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gold Loan कंपनियों के शेयरों में तूफानी तेजी, आपको आगे भी मालामाल कर सकते हैं ये शेयर

गोल्ड लोन देने वाली कंपनियों के शेयरों में 21 अगस्त को तूफानी तेजी दिखी। इसकी वजह यह है कि विदेशी ब्रोकरेज फर्म जेपी मॉर्गन ने आईआईएफएल फाइनेंस, मुथूट फाइनेंस और मण्णपुरम फाइनेंस के शेयरों को कवर करना शुरू किया है। उसने इन शेयरों को ‘ओवरवेट’ रेटिंग दी है।

IIFL Finance के शेयर के लिए 750 रुपये का टारगेट प्राइस

IIFL Finance, Muthoot Finance और Manappuram Finance के शेयरों में 2 से 8 फीसदी की तेजी दिखी। सबसे ज्यादा 7.26 फीसदी की तेजी IIFL Finance के शेयर में दिखी। इससे शेयर का भाव 682.90 रुपये पर पहुंच गया। जेपी मॉर्गन ने आईआईएफएल के शेयर के लिए 750 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। इसका मतलब है कि यह शेयर करीब 18 फीसदी चढ़ सकता है।

IIFL Finance का शेयर बीते एक साल में 48 फीसदी चढ़ा है

सीएनबीसी-टीवी18 की खबर के मुताबिक, जेपी मॉर्गन का मानना है कि आईआईएफएल फाइनेंस टर्नअराउंड की शुरुआती अवस्था में है। प्रॉफिट बनाने की बढ़ती क्षमता को देखते हुए इसके शेयरों की रिरेटिंग हो सकती है। बीते एक साल में आईआईएफएल फाइनेंस का शेयर 48 फीसदी से ज्यादा चढ़ा है।

मुथूट फाइनेंस के शेयरों में भा सकती है तेजी

मुथूट फाइनेंस के शेयरों के बारे में भी जेपी मॉर्गन की राय पॉजिटिव है। उसने इस शेयर के लिए 3,400 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। इसका मतलब है कि यह शेयर 14 फीसदी चढ़ सकता है। ब्रोकरेज फर्म ने कहा है कि इस शेयर का प्रदर्शन इस साल दूसरी गोल्ड लोन कंपनियों के शेयरों से कमजोर रहा है। ऐसे में अभी निवेश करने से आगे अच्छी कमाई हो सकती है। Muthoot Finance का शेयर 21 अगस्त को 2.29 फीसदी चढ़कर 3,038 रुपये पर बंद हुआ। बीते एक साल में यह 13.54 फीसदी चढ़ा है।

Manappuram Finance के शेयरों में भी निवेश से भी होगी कमाई

Manappuram Finance के शेयरों में भी निवेश करने पर अच्छी कमाई हो सकती है। जेपी मॉर्गन ने इस शेयर के लिए 395 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। इसका मतलब है कि इस शेयर में 13 फीसदी तेजी आ सकती है। उसने कहा है कि कंपनी के जून तिमाही के नतीजों से इसके टर्नअराउंड के संकेत मिले हैं। मण्णपुरम फाइनेंस का शेयर 21 अगस्त को 2.35 फीसदी चढ़कर 357.45 रुपये पर बंद हुआ। बीते एक साल में यह शेयर करीब 35 फीसदी उछला है।

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शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में नाममात्र की तेजी 

गोल्ड लोन कंपनियों के शेयरों में तब जोरदार तेजी दिखी, जब बाजार के प्रमुख सूचकांक सीमित दायरे में बने रहे। 21 अगस्त को निफ्टी 0.08 फीसदी यानी 20 अंक चढ़कर 24,252 पर बंद हुआ। सेंसेक्स सिर्फ 3 अंक चढ़कर 77,540 पर क्लोज हुआ। हालांकि, बैंक निफ्टी में 0.46 फीसदी की मजबूती दिखी।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

6 updates Mahindra BE 6 Sporteq gets over its predecessor

6 updates Mahindra BE 6 Sporteq gets over its predecessor
2026 Mahindra BE 6 Sporteq front quarter static

Mahindra launched the 2026 BE 6 recently, adding the ‘Sporteq’ moniker and pricing it from Rs 19.45 lakh to Rs 26.95 lakh (ex-showroom). Along with a new name, Mahindra has also introduced some updates to the midsize electric SUV to keep it modern in the segment. Here’s a detailed list of these updates:

New 70kWh battery pack

New battery pack offers 651km range and is mated to a 241hp rear motor

The 2026 Mahindra BE 6 Sporteq gets a new 70kWh battery pack in addition to the previously available 59kWh and 79kWh batteries. This new 70kWh battery offers an ARAI-claimed range of 651km and a rear-axle-mounted (RWD) electric motor that produces 241hp and 360Nm. It supports a 7.2kW AC, a 11.2kW AC and a 160kW DC charger. The DC fast charger recharges the battery pack from 20-80 percent in a claimed 20 minutes.

Mahindra is offering the 70kWh battery with the Three and Three+ trims, priced at Rs 22.95 lakh and Rs 23.95 lakh, respectively (ex-showroom). 

Battery-as-a-Service (BaaS) scheme

Battery rental scheme makes the 59kWh battery variants Rs 8 lakh more affordable

Along with a new battery, Mahindra is also offering the BE 6 with a battery-as-a-service (BaaS) scheme, which is also a first for the brand. However, the BaaS scheme is offered only with the 59kWh battery pack available in the One and Two trims. The battery rental scheme essentially lowers the BE 6’s initial price by Rs 8 lakh, but requires a monthly subscription fee for the battery. Here are the details:

Mahindra BE 6 battery-as-a-service (BaaS) price vs standard price

 

Standard price

BaaS price*

Difference^

One

Rs 19.45 lakh

Rs 11.45 lakh + Rs 3.75/km

– Rs 8 lakh

Two

Rs 20.95 lakh

Rs 12.95 lakh + Rs 3.75/km

– Rs 8 lakh

Notes: BaaS scheme requires a minimum monthly payment of Rs 6,750, calculated assuming usage of 60km per day and an 8-year battery loan, as per Mahindra’s terms and conditions. The price difference calculated above is on the initial price and does not include the BaaS scheme’s battery subscription charges.

Triple-screen setup on dashboard

Offers an additional third screen for the front passenger now

The 2026 update also brought a major redesign to the BE 6’s dashboard, now offered with an additional 12.30-inch screen for the front passenger, in addition to the similarly sized digital driver’s display and touchscreen infotainment system. The new front passenger display also removed the halo-like design element connecting the dashboard to the centre console, allowing the addition of two cupholders on the centre console, something that was sorely missing on the older model.

Mahindra is offering a triple-screen setup on all trims of the BE 6 Sporteq except the base-spec One and the sportier Formula E editions. 

Redesigned Formula E edition

The 2026 Formula E Freedom looks nothing like the older Formula E edition

2026 Mahindra BE 6 Formula E Freedom Edition
2026 Mahindra BE 6 Formula E Edition
 

With the 2026 update, Mahindra has also rejigged the exterior design of the Formula E edition. Unlike the previous model, which had a different fascia from the standard model with circular-shaped LED headlights and a revised bumper, the 2026 Formula E Freedom edition gets the same design as the standard BE 6 Sporteq, with some Formula E badges and FIA decals. Moreover, the Formula E edition is only offered with the older model’s dual-screen dashboard and a halo design element for a sporty appeal.

Mahindra is offering the 2026 Formula E edition at the Three and Four trim levels, priced at Rs 24.45 lakh and Rs 26.95 lakh, respectively (ex-showroom).

Fresh exterior and interior colours

Both the BE 6 Sporteq and Formula E edition get new colour themes

Mahindra BE 6 Sporteq Ruby Velvet exterior colour.

The 2026 Mahindra BE 6 Sporteq is being offered with fresh exterior and interior colour options. It is available in a new ‘Ruby Red’ exterior theme and new Racing Tan and Black interior hues for the Two, Three, Three+ and Four trims. The base-spec One is offered with the same Sage Green and Grey theme as before. A Sporteq Launch Edition, based on the fully loaded Four trim, is also available, which offers a new Graphite Storm exterior paint and Racing Tan interior theme. 

Mahindra BE 6 Formula E Freedom edition Rosso Impulso exterior colour.

While the 2026 BE 6 Formula E edition is offered with a new Rosso Impulso exterior hue, the all-black interior with orange elements for contrast is the same as the outgoing model.

New ‘TEQ’ suite

The suite enables Gemini-based interactions, unlocks additional drive modes and Revive functionalities

Another addition to the BE 6 Sporteq is the new ‘TEQ’ suite, which Mahindra says is designed to make the vehicle more intuitive, engaging, secure and responsive to individual customer needs. At its core is a Gemini-based AI conversation assistant that allows natural voice interactions for functions such as vehicle controls, navigation and music. The suite also introduces a Karaoke mode, along with support for Dolby Vision and Dolby Audio.

The TEQ suite also adds several performance and convenience features, including Custom Drive Mode, Drift Mode and an acceleration boost mode for the Formula E Freedom Edition, which enables a claimed 0-100 kph time of 6.44 seconds. It also includes Revive and Revive SOS, which can provide additional range even after the battery has run out. Another new feature is ‘TEQ_xting’, which lets owners display personalised messages on the vehicle’s tailgate.

The Mahindra BE 6 Sporteq is priced from Rs 19.45 lakh to Rs 26.95 lakh (ex-showroom), and it rivals the Hyundai Creta Electric, Tata Sierra EV, Tata Curvv EV, MG ZS EV, Maruti Suzuki e Vitara and Toyota Ebella.

Prices are ex-showroom, India, and do not include a wall charger or its installation cost.

RBI का लोन प्राइसिंग प्रपोजल: कर्ज लेने वालों पर इसका क्या हो सकता है असर?

RBI loan pricing proposal: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने लोन प्राइसिंग के लिए एक नया फ़्रेमवर्क प्रस्तावित किया है। इसका मकसद छोटे लोन के लिए फ़्लोटिंग इंटरेस्ट रेट, स्प्रेड और कुल लागत में बदलाव को उधार लेने वालों के लिए ज़्यादा पारदर्शी बनाना है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (लोन और एडवांस पर इंटरेस्ट रेट) निर्देश, 2026 का ड्राफ़्ट कमर्शियल बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, को-ऑपरेटिव बैंकों, ऑल-इंडिया फ़ाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन और नॉन-बैंकिंग फ़ाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) – जिनमें हाउसिंग फ़ाइनेंस कंपनियां भी शामिल हैं उनपर लागू होगा। प्रस्तावित निर्देश 1 अप्रैल, 2027 से लागू होने वाले हैं।

यहां वे मुख्य प्रस्ताव दिए गए हैं जिनके बारे में कर्ज लेने वालों को पता होना चाहिए।

फ़्लोटिंग लोन रेट के लिए साफ रीसेट फ़्रेमवर्क

प्रस्तावित फ़्रेमवर्क के तहत, लेंडर को फ़िक्स्ड और फ़्लोटिंग-रेट लोन की कीमत तय करने के लिए इंटरनल या एक्सटर्नल बेंचमार्क के साथ रिस्क-बेस्ड स्प्रेड का इस्तेमाल करना होगा। बेंचमार्क, रीसेट फ़्रीक्वेंसी और रीसेट की तारीख लोन एग्रीमेंट में बताई जानी चाहिए।

फ़्लोटिंग-रेट लोन के लिए, बेंचमार्क रीसेट की अवधि तीन महीने से ज़्यादा नहीं हो सकती। हालांकि, यह जरूरत कुछ छोटी रेगुलेटेड संस्थाओं(जिनमें बेस लेयर की NBFCs शामिल हैं) के लिए अनिवार्य नहीं होगी।

इजी होम फाइनेंस के चीफ फ़ाइनेंशियल ऑफ़िसर विकास कुमार मिश्रा ने कहा कि प्रस्तावित फ़्रेमवर्क से फ़्लोटिंग-रेट पर लोन लेना ज़्यादा अनुमान लगाने लायक हो सकता है। मिश्रा ने कहा, “हर फ़्लोटिंग रेट को ज़्यादा से ज़्यादा तीन महीने के रीसेट साइकल वाले साफ़ बेंचमार्क से जोड़ने से उन उधार लेने वालों के लिए ज़रूरी अनुमान लगाने की सुविधा मिलती है जिन्होंने पहले असमान ट्रांसमिशन देखा है।”

कर्ज लेने वालों के लिए, इसका मतलब यह नहीं है कि EMI में कोई बदलाव नहीं होगा। फ़्लोटिंग-रेट लोन तब भी महंगा हो सकता है जब बेस बेंचमार्क बढ़ता है। इसके बजाय, प्रस्तावित नियमों का मकसद बेंचमार्क और रीसेट मैकेनिज़्म को ज़्यादा साफ़ बनाना है।

लेंडर के लिए लोन स्प्रेड बदलने पर सीमाएं

RBI ने इस बात पर पाबंदियां प्रस्तावित की हैं कि लेंडर बेंचमार्क पर लिए जाने वाले स्प्रेड में कैसे बदलाव कर सकते हैं।

स्प्रेड में क्रेडिट रिस्क प्रीमियम, ऑपरेटिंग कॉस्ट, टर्म प्रीमियम और बिज़नेस स्ट्रैटेजी से जुड़ी बातें शामिल हो सकती हैं। क्रेडिट रिस्क प्रीमियम में तब बदलाव किया जा सकता है जब उधार लेने वाले का क्रेडिट प्रोफाइ बदलता है, बशर्ते उसकी समीक्षा की जाए। हालांकि, फ़्लोटिंग-रेट लोन पर स्प्रेड के अन्य हिस्सों में तीन साल तक कोई बदलाव नहीं किया जा सकता है। तीन साल की अवधि की गिनती पहली बार लोन की रकम मिलने या पिछली बार स्प्रेड में बदलाव होने (जो भी बाद में हुआ हो)से की जाएगी। मिश्रा ने कहा कि ज़्यादातर स्प्रेड कंपोनेंट्स में तीन साल की प्रस्तावित स्थिरता से कर्जदाता के लिए EMI में होने वाले बदलावों को समझना आसान हो सकता है।

उन्होंने कहा, “लोन स्प्रेड पर तीन साल की प्रस्तावित स्थिरता एक अहम बदलाव है।” “लोन मिलने या उसमें बदलाव के बाद ज़्यादातर स्प्रेड कंपोनेंट्स को तीन साल के लिए फिक्स करने से अनिश्चितता कम होनी चाहिए और EMI में होने वाले बदलावों को समझना आसान हो जाना चाहिए।”

JSA एडवोकेट्स एंड सॉलिसिटर्स के पार्टनर सिद्धार्थ मनचंदा ने भी ‘स्प्रेड’ से जुड़े प्रावधान को ड्राफ्ट के अहम हिस्सों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि तीन साल की अवधि के दौरान स्प्रेड के नॉन-क्रेडिट-रिस्क वाले हिस्से को बढ़ाने की इजाज़त नहीं होगी, जबकि इसमें कटौती बिना किसी भेदभाव के करनी होगी।

₹50,000 तक के लोन के लिए APR की एक तय सीमा (सीलिंग) हो सकती है

प्रस्तावित फ्रेमवर्क में छोटे लोन (स्मॉल-टिकट बॉरोइंग) के लिए भी एक खास प्रावधान है। RBI चाहता है कि लेंडर माइक्रोफाइनेंस लोन और कम रकम वाले लोन के लिए सालाना ब्याज दर (APR) की एक तय सीमा (सीलिंग) लागू करें। APR में ब्याज दर के साथ-साथ बाकी सभी चार्ज और फीस भी शामिल होंगे। कम रकम वाले लोन का मतलब ₹50,000 तक का पर्सनल लोन है।

इससे लोन लेने की कुल लागत की तुलना करना आसान हो सकता है, खासकर तब जब फीस और दूसरे चार्ज लागत का एक बड़ा हिस्सा हों। मनचंदा ने कहा कि छोटे लोन के मामले में, बताई गई ब्याज दर (हेडलाइन इंटरेस्ट रेट) से हमेशा उधार लेने वाले की कुल लागत का पता नहीं चलता।

उन्होंने कहा, “उस सेगमेंट में हेडलाइन रेट कभी भी असल बात नहीं होती थी। असल बात फीस का पूरा ढांचा होती थी। सब कुछ एक ही नंबर में समेटना ही वह बदलाव है जिसे असल में महसूस किया जाएगा।”

ब्याज की गणना का तरीका होगा एक जैसा

RBI ने ब्याज की गणना के लिए एक कॉमन तरीका भी सुझाया है। ज़्यादातर लोन के लिए, ब्याज हर महीने के आधार पर लिया जाएगा और इसकी गणना ‘एक्चुअल/एक्चुअल डे-काउंट कन्वेंशन’ का इस्तेमाल करके रोजाना कम होते बैलेंस पर की जाएगी। खेती से जुड़े लोन के लिए कुछ खास छूट होंगी। इस कदम से रेगुलेटेड लेंडर्स (कर्ज़ देने वाली संस्थाओं) के बीच ब्याज की गणना का तरीका एक जैसा हो जाएगा।

मौजूदा लोन 2029 तक नए फ्रेमवर्क में आ जाएंगे

सुझाए गए बदलावों का असर आखिरकार मौजूदा बेंचमार्क-लिंक्ड लोन पर भी पड़ेगा। RBI ने सुझाव दिया है कि इंटरनल या एक्सटर्नल बेंचमार्क से जुड़े सभी मौजूदा लोन को 1 अप्रैल 2029 तक एक बार की मैपिंग प्रक्रिया के ज़रिए नए फ्रेमवर्क में बदल दिया जाए। इस बदलाव के लिए उधार लेने वाले की मंज़ूरी ज़रूरी होगी।

बदली हुई ब्याज दर, बदलाव से ठीक पहले लागू दर से ज़्यादा नहीं हो सकती, और लेंडर्स बदलाव के लिए कोई फ़ीस नहीं ले सकते।

मिश्रा ने कहा कि नए लोन के लिए प्रस्तावित लागू होने की तारीख और मौजूदा लोन के लिए बदलाव की समय-सीमा के बीच दो साल का समय लेंडर्स को अपने सिस्टम और कम्युनिकेशन प्रोसेस को अपडेट करने का मौका देता है। उन्होंने कहा, “समय-सीमा भी महत्वपूर्ण है। नए नियम 1 अप्रैल 2027 से नए लोन पर लागू करने का प्रस्ताव है, जबकि सभी मौजूदा फ्लोटिंग रेट लोन के 1 अप्रैल 2029 तक नए फ्रेमवर्क में बदलने की उम्मीद है।”

NBFC लोन अपने-आप रेपो-लिंक्ड नहीं होंगे

ड्राफ़्ट में सभी लेंडर्स के लिए एक्सटर्नल बेंचमार्क का इस्तेमाल करना ज़रूरी नहीं है।

कमर्शियल बैंकों को फ्लोटिंग-रेट पर्सनल लोन और फ्लोटिंग-रेट MSME लोन को एक्सटर्नल बेंचमार्क से जोड़ना होगा। NBFC, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, को-ऑपरेटिव बैंकों और अखिल भारतीय वित्तीय संस्थानों के लिए, एक्सटर्नल बेंचमार्क से जुड़ना वैकल्पिक रहेगा।

इसलिए, NBFC से फ्लोटिंग-रेट लोन लेने वालों को यह नहीं सोचना चाहिए कि लोन अपने-आप RBI रेपो रेट से जुड़ जाएगा। ड्राफ़्ट अभी फ़ाइनल नहीं है। प्रस्तावित निर्देश 1 अप्रैल 2027 से लागू होने हैं, बशर्ते RBI फ्रेमवर्क को फ़ाइनल कर ले।

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