Gold Silver Price: MCX पर सोने-चांदी में बढ़त, क्या आज की तेजी हालिया गिरावट को करेगी खत्म, एक्सपर्ट्स से जानें अब क्या करें निवेश

Gold Silver Price: घरेलू वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में आई तेजी, US ट्रेजरी यील्ड में कमी और कमजोर डॉलर से कीमतों को सपोर्ट मिला है । हालांकि, महंगाई की चिंताएं और US फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों को लेकर नजरिया निवेशकों के लिए अहम बातें बनी हुई हैं।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर, दिसंबर गोल्ड फ्यूचर्स ₹1,690 या 1.13% बढ़कर ₹1.51 लाख प्रति 10 ग्राम हो गया। दिसंबर सिल्वर फ्यूचर्स ₹3,626 या 1.64% बढ़कर ₹2.24 लाख प्रति किलोग्राम हो गया।

PTI के अनुसार, इंटरनेशनल बाजारों में गोल्ड फ्यूचर्स 1.43% बढ़कर $4,191.51 प्रति औंस हो गया, जबकि सिल्वर फ्यूचर्स 2.16% बढ़कर $60.44 प्रति औंस हो गया।

कीमतों में तेजी क्यों?

शुक्रवार को US ट्रेजरी यील्ड में कमी और डॉलर में गिरावट से कीमती धातुओं को सहारा मिला। सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता है, इसलिए जब बॉन्ड यील्ड बढ़ती है तो यह कम आकर्षक होता है और जब यील्ड कम होती है तो यह अधिक आकर्षक हो जाता है।

आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स में कमोडिटीज और करेंसी की रिसर्च एनालिस्ट वेदिका नार्वेकर ने कहा कि US में 30 साल के ट्रेजरी बॉन्ड की नीलामी से लॉन्ग-टर्म यील्ड ऊंचे स्तरों से नीचे आ गई, जिससे सोने की कीमतों को राहत मिली।

उन्होंने ईरान पर संभावित हमले को टालने और बातचीत को प्रोडक्टिव बताने के बारे में US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणियों के बाद तेल की कीमतों में नरमी का भी जिक्र किया। तेल की कीमतें बुलियन मार्केट के लिए मायने रखती हैं क्योंकि एनर्जी की लागत महंगाई की उम्मीदों और ब्याज दरों के फैसलों पर असर डाल सकती है।

निवेश की मांग से भी अतिरिक्त सहारा मिला है। नार्वेकर ने कहा कि इस हफ्ते ग्लोबल गोल्ड ETF होल्डिंग्स में 0.3% की बढ़ोतरी हुई, जिससे उनकी बढ़त लगातार 12वें हफ्ते भी जारी रह सकती है। सेंट्रल बैंक की खरीदारी से भी सहारा मिला है।

क्या सोना अपनी रिकवरी बनाए पाएगा?

सोना $4,100 प्रति औंस के स्तर से सुधरा है, जिसे नार्वेकर ने एक अहम सपोर्ट लेवल बताया था। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि अगर महंगाई की चिंताएं बनी रहती हैं, तो यह तेजी कम समय के लिए हो सकती है। उन्होंने $4,220 प्रति औंस (जो घरेलू स्तर पर लगभग ₹1,52,000 के बराबर है) के आसपास तुरंत रेजिस्टेंस और $4,300 प्रति औंस (या लगभग ₹1,55,400) के पास मज़बूत रेजिस्टेंस की पहचान की।

VT मार्केट्स के सीनियर मार्केट एनालिस्ट (APAC) जस्टिन खू ने कहा कि सितंबर की फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की मीटिंग के मिनट्स से पता चला है कि 18 में से 16 अधिकारियों को उम्मीद थी कि 2026 में ब्याज दरों में और बढ़ोतरी होगी, ताकि महंगाई को फेडरल रिज़र्व के 2% के लक्ष्य से लगातार ऊपर जाने से रोका जा सके।

हालांकि, खू ने कहा कि उम्मीद से कम पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) महंगाई और कमज़ोर रोज़गार डेटा ने अक्टूबर में तुरंत ब्याज दरें बढ़ने की संभावना को कम कर दिया है। 14 अक्टूबर को आने वाली सितंबर की US कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) रिपोर्ट से महंगाई और फेड के अगले कदम के बारे में और संकेत मिलेंगे।

ब्याज दरें बढ़ने से सोने पर दबाव पड़ सकता है क्योंकि इससे बिना रिटर्न देने वाली एसेट को रखने की अपॉर्चुनिटी कॉस्ट बढ़ जाती है। इसलिए, निवेशक महंगाई के डेटा और बॉन्ड यील्ड पर नज़र रखेंगे ताकि यह पता चल सके कि शुक्रवार की रिकवरी जारी रह सकती है या नहीं।

चांदी में निवेश के लिए किन बातों का रखें ध्यान

शुक्रवार को चांदी की कीमतों में भी तेज़ी आई, लेकिन इसकी कीमतों में उतार-चढ़ाव ज़्यादा हो सकता है क्योंकि यह मेटल निवेश की मांग और औद्योगिक इस्तेमाल, दोनों से प्रभावित होता है।

Giottus.com के CEO विक्रम सुब्बुराज ने ₹2.19 लाख–₹2.20 लाख प्रति किलोग्राम को एक अहम सपोर्ट ज़ोन और ₹2.24 लाख को चांदी के रिकवर करने के लिए पहला ज़रूरी लेवल बताया। शुक्रवार की तेज़ी ने कॉन्ट्रैक्ट को उस लेवल से ऊपर पहुंचा दिया।

गुरुवार (8 अक्टूबर) को कीमतों में इंट्राडे के दौरान जो तेज़ी से उतार-चढ़ाव देखे गए, वे भी अस्थिरता के जोखिम को दिखाते हैं। रिकवरी के दौरान चांदी में तेज़ी से उछाल आ सकता है, लेकिन निवेशकों को उतनी ही तेज़ी से गिरावट की संभावना को भी ध्यान में रखना चाहिए।

रुपये का घरेलू कीमतों पर क्या असर पड़ सकता है?

भारत में सोने और चांदी की कीमतें न केवल अंतरराष्ट्रीय दरों पर, बल्कि रुपये-डॉलर एक्सचेंज रेट पर भी निर्भर करती हैं। रुपया कमज़ोर होने से डॉलर में कीमत वाली चीज़ों को आयात करने की लागत बढ़ जाती है और इससे घरेलू कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। लेमन (Lemonn) में रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा कि रुपये की कमजोरी से इम्पोर्ट की गई चीज़ों की घरेलू लागत बढ़ रही है। 9 अक्टूबर के उनके मार्केट अपडेट में यह भी बताया गया कि डॉलर की मजबूती में कमी कीमती धातुओं के लिए मददगार साबित हो रही है, जबकि तेल बाज़ार में अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।

अब निवेशकों को क्या करना चाहिए?

सिर्फ़ शुक्रवार की बढ़त से यह साबित नहीं होता कि बुलियन (सोने-चांदी) में हालिया कमजोरी खत्म हो गई है। सोने के लिए, अहम सपोर्ट लेवल से ऊपर बने रहना और नार्वेकर द्वारा बताए गए रेजिस्टेंस लेवल को पार करना ज़रूरी होगा। चांदी में निवेश करने वालों को इसके सपोर्ट ज़ोन और कीमतों में होने वाले बड़े उतार-चढ़ाव पर खास ध्यान देना चाहिए।

जो लोग योजना बनाकर फिजिकल सोना खरीद रहे हैं, वे एक ही ट्रेडिंग सेशन के आधार पर फैसला लेने के बजाय समय के साथ-साथ खरीदारी करने पर विचार कर सकते हैं। जो निवेशक गोल्ड और सिल्वर ETF का इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हें अपने पोर्टफोलियो एलोकेशन, निवेश की अवधि और उतार-चढ़ाव सहने की क्षमता का आकलन करना चाहिए।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Price Today: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से पहले सोना ₹3400 महंगा हुआ, चांदी भी ₹5000 उछली

Gold Price Today: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में गुरुवार, 3 सितंबर को सोने की कीमत में जोरदार तेजी आई। 6 कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद सोना ₹3,400 उछलकर ₹1,59,500 प्रति 10 ग्राम पहुंच गया। इससे पहले बुधवार को 24 कैरेट वाला वाला सोना ₹1,56,100 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था।

चांदी की कीमत में भी बड़ी तेजी देखने को मिली। चांदी ₹5,000 बढ़कर ₹2,40,500 प्रति किलो पहुंच गई। पिछले कारोबारी सत्र में इसका भाव ₹2,35,500 प्रति किलो था।

क्यों बढ़े सोने-चांदी के दाम?

ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म लेमॉन के हेड ऑफ रिसर्च गौरव गर्ग के मुताबिक, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड हाल की ऊंचाई से नीचे आई है। इसके अलावा, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण सुरक्षित निवेश की मांग बनी हुई है। इससे सोने और चांदी को सपोर्ट मिला।

HDFC Securities के सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी के मुताबिक, अमेरिका के निजी रोजगार के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख को लेकर बाजार की धारणा बदली।

कमजोर रोजगार आंकड़ों के बाद डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट आई। डॉलर कमजोर होने से दूसरे देशों के निवेशकों के लिए सोना सस्ता पड़ता है। इससे कीमतों को सहारा मिलता है।

इंटरनेशनल मार्केट में भी तेज उछाल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड $55.76 यानी 1.27% बढ़कर $4,443.93 प्रति औंस पहुंच गया। चांदी भी करीब 1% की तेजी के साथ $65.77 प्रति औंस पर पहुंच गई।

निवेश प्लेटफॉर्म Mudrex के लीड क्वांट एनालिस्ट अक्षत सिद्धांत ने कहा कि सोना एक महीने के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद फिर $4,440 के आसपास लौट आया। कमजोर डॉलर ने कीमती धातुओं की कीमतों को सहारा दिया।

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आगे क्या रहेगा रुख?

अमेरिकी जॉब मार्केट के अहम आंकड़ों से पहले सोने और चांदी की आगे की चाल को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। कमजोर आंकड़े आने पर डॉलर और कमजोर हो सकता है, जिससे सोने को और सपोर्ट मिल सकता है।

वहीं, अगर रोजगार के आंकड़े मजबूत रहे या फेड ने सख्त रुख अपनाया, तो ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद फिर मजबूत हो सकती है। ऐसे में सोने और चांदी पर दबाव आ सकता है।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

बिटकॉइन, गोल्ड और सिल्वर में किसने सबसे ज्यादा रिटर्न दिया? जानिए वक्त के साथ तस्वीर कैसे बदली

बिटकॉइन, गोल्ड और सिल्वर ने पिछले कुछ महीनों में काफी उतार-चढ़ाव देखा है। तीनों ने अलग-अलग समय में अलग रिटर्न दिया है। कुछ अवधि में बिटकॉइन आगे रहा। वहीं लंबी अवधि में सिल्वर ने भी शानदार प्रदर्शन किया।

कम अवधि में बिटकॉइन आगे

1 महीने और 6 महीने के रिटर्न में बिटकॉइन सबसे आगे रहा। 1 महीने में इसका रिटर्न 17.23% रहा। 6 महीने में यह बढ़कर 22.26% हो गया। गोल्ड ने भी लगातार बढ़त दिखाई। हालांकि, शॉर्ट टर्म में बिटकॉइन की तेजी ज्यादा रही।

3 साल में सिल्वर ने मारी बाजी

3 साल की अवधि में तस्वीर बदल जाती है। यहां सिल्वर सबसे आगे रहा। इसका सालाना औसत रिटर्न 48.97% रहा। इसी अवधि में बिटकॉइन ने 47.46% और गोल्ड ने 41.06% का सालाना औसत रिटर्न दिया। यानी लंबी अवधि में सिल्वर ने बिटकॉइन और गोल्ड दोनों को पीछे छोड़ दिया।

₹10,000 की SIP का क्या हुआ?

एक साल की अवधि में अगर हर महीने ₹10,000 की SIP बिटकॉइन, गोल्ड और सिल्वर में की जाती, तो तीनों में निवेश का नतीजा अलग होता। इससे पता चलता है कि नियमित निवेश करने पर अलग-अलग एसेट ने कैसा प्रदर्शन किया। यहां SIP का मतलब हर महीने एक तय रकम निवेश करना है। इससे बाजार के अलग-अलग भाव पर निवेश होता रहता है।

बिटकॉइन ने 3 साल में भी शानदार कमाई की

CoinDCX की ग्रोथ और क्रिप्टो बिजनेस हेड मीनल ठुकराल के मुताबिक, बिटकॉइन का लंबी अवधि का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा है।

उनके मुताबिक, 24 अगस्त 2023 को लगाए गए $26,162 बढ़कर $77,472 हो गए। यानी निवेश पर 244% से ज्यादा रिटर्न मिला। रकम करीब 3.44 गुना हो गई। हालांकि, इस दौरान बिटकॉइन में कई बड़ी गिरावट भी आईं। इसलिए सिर्फ तेजी देखकर निवेश करना सही नहीं है। लंबी अवधि तक निवेश बनाए रखना अहम रहा।

बिटकॉइन का सफर काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा

बिटकॉइन ने 7 अक्टूबर 2025 को $1,25,752 का ऑल टाइम हाई बनाया था। 2026 में यह 15 जनवरी को $96,931 तक पहुंचा। इसके बाद कीमत में गिरावट आई। 1 जुलाई को बिटकॉइन $58,562 तक फिसल गया।

अगस्त के पहले हफ्ते में यह करीब $62,000 से $65,000 के स्तर पर था। 26 अगस्त तक बिटकॉइन करीब $80,000 से $80,300 के बीच कारोबार कर रहा था।

गोल्ड में भी तेज उतार-चढ़ाव

गोल्ड जनवरी 2026 में $5,500 प्रति औंस तक पहुंचा था। जुलाई में इसकी कीमत $4,000 प्रति औंस से नीचे आ गई। इसके बाद गोल्ड में फिर तेजी आई। 26 अगस्त तक यह $4,630 प्रति औंस के ऊपर कारोबार कर रहा था। कमजोर डॉलर और अमेरिका की वित्तीय स्थिति को लेकर बढ़ती चिंता ने गोल्ड को सपोर्ट दिया है।

सिल्वर भी तेजी से पलटा

सिल्वर जनवरी में करीब $120 प्रति औंस पर था। जुलाई में यह गिरकर $55 से $60 के दायरे में आ गया। इसके बाद सिल्वर में तेजी लौटी। 26 अगस्त तक इसकी कीमत करीब $63 से $70 प्रति औंस के बीच थी। सिल्वर की तेजी को गोल्ड की मजबूती से भी सपोर्ट मिला।

निवेश से पहले क्या समझें?

बिटकॉइन, गोल्ड और सिल्वर का प्रदर्शन हर अवधि में अलग रहा है। छोटी अवधि में बिटकॉइन आगे रहा। वहीं 3 साल में सिल्वर ने सबसे ज्यादा सालाना औसत रिटर्न दिया।

इसलिए सिर्फ पुराने रिटर्न देखकर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए। बिटकॉइन और सिल्वर में कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव हो सकता है। निवेश से पहले जोखिम और अपने निवेश के लक्ष्य को जरूर देखना चाहिए।

Gold Price Today: रक्षाबंधन पर सोना ₹3300 सस्ता हुआ, चांदी का ₹5000 गिरा भाव

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Gold-silver Price : कमोडिटी में मजबूत रैली कायम रहने की उम्मीद, सोने-चांदी में अभी भी 10% तेजी की गुंजाइश

Gold-silver Price : 360 ONE के प्रेसिडेंट और हेड-ब्रोकरेज,विरल शाह का कहना है कि अगर US बॉन्ड यील्ड में नरमी आती है तो अगले 6 से 8 महीनों में सोना और चांदी में मौजूदा स्तरों से 10% तक की तेजी आ सकती है। उनका मानना ​​है कि जियोपॉलिटिकल घटनाओं और हाई बॉन्ड यील्ड को लेकर US का रुख कीमती धातुओं को सपोर्ट करता रहेगा।

कमजोर डॉलर,US में कमजोर जॉब आंकड़ों और US ट्रेजरी विभाग की बॉन्ड-खरीद की घोषणा की वजह से सोने और चांदी की कीमतों में पहले ही जबरदस्त तेजी आ चुकी है। हालांकि,विरल शाह को लगता है कि सोने में 4,700–4,800 डॉलर और चांदी में 70–72 डॉलर के आस-पास कुछ टेक्निकल सेलिंग देखने को मिल सकती है। उन्हें उम्मीद है कि जैक्सन होल में फेडरल रिजर्व का बयान निकट भविष्य में के लिए एक अहम ट्रिगर साबित होगा।

डॉलर में कमजोरी से कमोडिटी को मिलेगा सपोर्ट

उन्होंने आगे कहा कि अगर डॉलर और कमजोर होता है तो कमोडिटीज को और फायदा मिल सकता है। डॉलर इंडेक्स के लिए 100-101 के आस-पास रेजिस्टेंस दिख रहा है। उनका मानना ​​है कि डॉलर इंडेक्स के 97 की तरफ जाने से सोने,चांदी और बेस मेटल्स को सपोर्ट मिल सकता है।

कॉपर के फंडामेंटल्स मजबूत

प्रेशियस मेटल के अलावा,विरल शाह कॉपर और जिंक को लेकर भी पॉज़िटिव हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा सेंटर्स और ग्लोबल इलेक्ट्रिफिकेशन की वजह से कॉपर में लगभग एक साल से स्ट्रक्चरल बुल ट्रेंड बना हुआ है। उन्हें कॉपर के फंडामेंटल्स मजबूत दिख रहे हैं। हालांकि उनका मानना ​​है कि कॉपर में अब तक की जोरदार बढ़त के बाद आगे और बढ़त का अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है।

जिंक और कॉपर को सप्लाई में तंगी से मिल रहा फायदा

जिंक पर अपनी राय जाहिर करते हुए विरल शाह ने कहा कि सप्लाई से जुड़ी चिंताओं,खासकर चीन में बाढ़ के कारण कम उत्पादन होने से जिंक को सपोर्ट मिल रहा है। इसके चलते लंदन मेटल एक्सचेंज पर इन्वेंट्री कम हो रही है और सप्लाई तंग है,जबकि इसकी मांग मज़बूत बनी हुई है। शाह को उम्मीद है कि जब तक सप्लाई मांग के बराबर नहीं हो जाती,तब तक कॉपर और जिंक दोनों को सपोर्ट मिलता रहेगा।

क्रूड की कीमतों में 7-8% की और गिरावट मुमकिन

कच्चे तेल पर अपनी राय जाहिर करते हुए विरल शाह ने कहा कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली तेल की सप्लाई बेहतर होती है और भू-राजनीतिक तनाव कम होता है,तो क्रूड की कीमतों में 7-8% की और गिरावट आ सकती है। हालांकि,उन्हें नहीं लगता कि यह लंबे समय तक बनी रहने वाली गिरावट होगी,क्योंकि तमाम देशों को आखिरकार अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को फिर से भरना ही होगा।

 

 

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Price Today: 5 महीने के हाई पर सोना, दिल्ली में ₹1.64 लाख के पार; चांदी ₹3500 उछली

Gold Price Today: दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोमवार, 24 अगस्त को सोने की कीमत 5 महीने से ज्यादा के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। 24 कैरेट वाला सोना ₹900 बढ़कर ₹1,64,400 प्रति 10 ग्राम हो गया। शुक्रवार को इसका भाव ₹1,63,500 प्रति 10 ग्राम था।

5 महीने के हाई पर सोना

ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक, सोना आखिरी बार इस स्तर के आसपास 9 मार्च को था। उस समय इसका भाव ₹1,64,300 प्रति 10 ग्राम था।

सोने में तेजी के पीछे वैश्विक बाजार में मजबूत संकेत और सुरक्षित निवेश की मांग को अहम वजह माना जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है।

चांदी भी लगातार तीसरे दिन चढ़ी

चांदी की कीमत में भी सोमवार को तेजी रही। यह लगातार तीसरा कारोबारी सत्र था, जब चांदी महंगी हुई। इसकी कीमत ₹3,500 बढ़कर ₹2,53,500 प्रति किलो हो गई।

पिछले सत्र में चांदी ₹2,50,000 प्रति किलो पर बंद हुई थी। यह स्तर आखिरी बार 17 अप्रैल को देखा गया था, जब चांदी ₹2,53,000 प्रति किलो पर थी।

कमजोर डॉलर से मिला सोने को सहारा

Lemonn Markets Desk के रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा कि घरेलू बाजार में सोने की तेजी के पीछे कमजोर अमेरिकी डॉलर और सुरक्षित निवेश की मांग बड़ी वजह रही। अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने से निवेशकों का रुझान सुरक्षित एसेट्स की तरफ बढ़ा है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमत बढ़ी। स्पॉट गोल्ड 42.45 डॉलर यानी करीब 1% बढ़कर 4,646.54 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। वहीं चांदी करीब 69 डॉलर प्रति औंस पर स्थिर रही।

अब महंगाई पर होगी नजर

विश्लेषकों के मुताबिक सोने की अगली चाल सिर्फ भू-राजनीतिक तनाव से तय नहीं होगी। अब महंगाई और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख पर भी बाजार की नजर रहेगी।

Kotak Securities की AVP Commodity Research कायनात चेनवाला के मुताबिक, ईरान तनाव के कारण अगर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो फेडरल रिजर्व के सामने महंगाई को लेकर चुनौती बढ़ सकती है। बाजार यह देखेगा कि फेड इस बढ़ोतरी को अस्थायी मानता है या इससे महंगाई का बड़ा जोखिम पैदा होता है।

FD vs Lump Sum: ₹10 लाख की FD या ₹10 लाख का लंप सम, 10 साल बाद किसमें ज्यादा पैसा बनेगा?

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Stock Market Updates: सेंसेक्स और निफ्टी फ्लैट, फिर भी निवेशकों ने गंवाए ₹96547 करोड़

शेयर बाजार ने शुक्रवार, 21 अगस्त को फ्लैट कारोबार किया। सेंसेक्स 3.11 अंकों की मामूली बढ़त के साथ 77,540.83 रुपये पर और निफ्टी 20.1 अंकों की बढ़त के साथ 24,252 पर बंद हुआ। इस बीच BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 96547 करोड़ रुपये घट गया। दिन में सेंसेक्स ने 77,725.67 का हाई और 77,445.86 का लो देखा। निफ्टी 50 दिन में 24,284.05 के हाई और 24,206.80 के लो तक गया। वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी बाजारों में तेज गिरावट के बीच निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।

गुरुवार, 20 अगस्त को शेयर मार्केट बंद होने पर BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4,92,71,879.619 करोड़ रुपये रहा था। शुक्रवार को यह घटकर 4,91,75,332.89 करोड़ रुपये हो गया। यानि कि 96,546.729 करोड़ रुपये की कमी।

निफ्टी पर पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, HDFC लाइफ इंश्योरेंस कंपनी, कोटक महिंद्रा बैंक, नेस्ले इंडिया और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड टॉप गेनर रहे। वहीं मारुति सुजुकी इंडिया, ट्रेंट, HCL टेक्नोलॉजीस, इंडिगो की पेरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन और ONGC टॉप लूजर रहे।

गुरुवार को कैसा रहा था कारोबार

गुरुवार को सेंसेक्स 628.04 अंक या 0.82 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,537.72 पर बंद हुआ था। निफ्टी भी 7 दिन की गिरावट से उबरते हुए 153.55 अंक या 0.64 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,231.85 पर बंद हुआ था। BSE स्मॉलकैप सेलेक्ट सूचकांक 0.83 प्रतिशत और मिडकैप सेलेक्ट सूचकांक 0.56 प्रतिशत चढ़ा।

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रुपये में तेजी

शुक्रवार को भारतीय करेंसी रुपया, अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 3 पैसे चढ़कर 95.71 प्रति डॉलर (अस्थायी) पर रहा। अमेरिकी डॉलर में कमजोरी से घरेलू मुद्रा को सपोर्ट मिला। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों की चुनौती के चलते कमजोर डॉलर का असर कम रहा। रुपया गुरुवार को 1 पैसे की गिरावट के साथ 95.74 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

वैश्विक बाजारों का हाल

एशियाई बाजारों में तेजी है। हेंग सेंग, कॉस्पी, ताइवान वेटेड अच्छी बढ़त में हैं। SET कंपोजिट, जकार्ता कंपोजिट और शंघाई कंपोजिट भी हरे निशान में हैं। वहीं निक्केई 225 में गिरावट है। अमेरिकी बाजार गुरुवार को गिरावट में बंद हुए। यूरोपीय बाजारों में तेजी है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gold Silver price: फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीद हुई कम, फिर भी सोने-चांदी की कीमतें स्थिर, आखिर क्या है इसकी वजह

Gold Silver price: इंटरनेशनल मार्केट में सोने और चांदी की कीमतें स्थिर रहीं। दरअसल, सितंबर में अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें कम हो गईं और निवेशक केंद्रीय बैंक की पॉलिसी की दिशा के बारे में संकेत पाने के लिए फेडरल रिजर्व की हालिया बैठक के मिनट्स का इंतजार कर रहे थे।

COMEX पर, सोना $4,467.70 प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा था, जो पिछले बंद भाव $4,473.40 प्रति औंस से $6 या 0.13% कम था। धातु की कीमत $4,493.10 प्रति औंस के उच्चतम और $4,466 प्रति औंस के निचले स्तर के बीच रही।

चांदी $66.07 प्रति औंस पर थी, जो पिछले बंद भाव $65.895 प्रति औंस से 0.161 या 0.24% कम थी। इसने दिन के दौरान $66.685 प्रति औंस का उच्चतम और $65.760 प्रति औंस का निचला स्तर छुआ।स्पॉट मार्केट में, सोना 0.2% बढ़कर $4,424.28 प्रति औंस हो गया, जबकि दिसंबर डिलीवरी के लिए अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.2% बढ़कर $4,480.90 प्रति औंस हो गए। स्पॉट सिल्वर 0.9% बढ़कर $66.40 प्रति औंस हो गई।

सोने और चांदी की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?

सबसे बड़ा कारण अमेरिकी ब्याज दरों के बारे में बदलता नजरिया है।हालिया अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों ने सितंबर में ब्याज दर में बढ़ोतरी की उम्मीदों को कम कर दिया है। जुलाई में अप्रत्याशित रूप से नौकरियों का नुकसान, कंज्यूमर प्राइस इन्फ्लेशन में नरमी और कमजोर रिटेल बिक्री ने बाजारों को सख्त मॉनेटरी पॉलिसी की संभावना का फिर से आकलन करने के लिए प्रेरित किया है।

यह सोने और चांदी के लिए मायने रखता है क्योंकि दोनों ही नॉन-यील्डिंग एसेट्स (जिनसे कोई निश्चित रिटर्न नहीं मिलता) हैं। जब ब्याज दरें अधिक होती हैं, तो निवेशक बॉन्ड जैसी ब्याज देने वाली एसेट्स से अपेक्षाकृत आकर्षक रिटर्न कमा सकते हैं। अगर दर-वृद्धि की उम्मीदें कम हो जाती हैं, तो कीमती धातुओं को रखने की अपॉर्चुनिटी कॉस्ट (अवसर लागत) कम हो जाती है।इससे बुलियन (सोना-चांदी) अधिक आकर्षक हो सकता है।

कमजोर डॉलर बुलियन करता है सपोर्ट

अमेरिकी डॉलर कई प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले कई महीनों के निचले स्तर के करीब बना हुआ है।कमजोर डॉलर आम तौर पर सोने को सपोर्ट करता है क्योंकि धातु की कीमत डॉलर में तय होती है। इससे अन्य मुद्राओं वाले निवेशकों के लिए बुलियन अपेक्षाकृत सस्ता हो जाता है, जिससे संभावित रूप से मांग को सपोर्ट मिलता है।

डॉलर का यही असर चांदी की कीमतों को भी सपोर्ट कर सकता है। सोने और चांदी के लिए फेड (Fed) क्यों अहम है?

फेडरल रिजर्व की पॉलिसी का नजरिया बाजार के लिए एक अहम ट्रिगर बन गया है। 12 से 17 अगस्त के बीच हुए रॉयटर्स के एक सर्वे में पाया गया कि ज्यादातर अर्थशास्त्रियों का मानना ​​है कि फेड 2026 के आखिर तक अपनी मुख्य ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं करेगा।

बाजार अब फेड की हालिया बैठक के मिनट्स (बैठक का ब्योरा) का इंतजार कर रहा है, जो बुधवार (19 अगस्त) को आने वाले हैं। इन मिनट्स से इस बात का अंदाजा लग सकता है कि पॉलिसी बनाने वाले महंगाई, रोजगार और ब्याज दरें और बढ़ाने की जरूरत के बारे में क्या सोचते हैं। अगर फेड कम सख्त रुख का संकेत देता है, तो सोने और चांदी को और सपोर्ट मिल सकता है। दूसरी ओर, अगर रुख सख्त (हॉकिश) रहता है, तो डॉलर और बॉन्ड यील्ड बढ़ सकते हैं और कीमती धातुओं पर दबाव पड़ सकता है।

चांदी के लिए एक और वजह

चांदी की चाल सिर्फ ब्याज दरों की उम्मीदों पर निर्भर नहीं करती।इस धातु की औद्योगिक मांग भी काफी है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर से जुड़े इस्तेमाल शामिल हैं। इससे सोने के मुकाबले चांदी की कीमत पर असर डालने वाला एक और कारक जुड़ जाता है।हालांकि, अभी के लिए मॉनेटरी पॉलिसी, डॉलर और निवेशकों की आम धारणा दोनों धातुओं के लिए अहम कारक बने हुए हैं।

निवेशकों को किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?

फेड की बैठक के मिनट्स तुरंत असर डालने वाली घटना हैं। इसके अलावा, बाजार सितंबर में होने वाले पॉलिसी फैसले के संकेतों के लिए अमेरिका में महंगाई और रोजगार के आंकड़ों पर नजर रखेगा।बाजार की कमेंट्री के मुताबिक, सोना अभी $4,450-$4,460 प्रति औंस के दायरे में रेजिस्टेंस (बाधा) का सामना कर रहा है, जबकि चांदी $63 प्रति औंस के स्तर से ऊपर बनी हुई है।

भारतीय निवेशकों के लिए, ग्लोबल कीमतें समीकरण का सिर्फ एक हिस्सा हैं। घरेलू स्तर पर सोने और चांदी की कीमतें रुपये-डॉलर एक्सचेंज रेट, इंपोर्ट कॉस्ट, टैक्स और स्थानीय बाजार की स्थितियों पर भी निर्भर करती हैं।इसलिए, भले ही इंटरनेशनल बुलियन की कीमतें बढ़ें, भारतीय कीमतों में उसी अनुपात में बदलाव न हो।

फिलहाल, फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदों में कमी, डॉलर का कमजोर होना और लगातार बनी हुई जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता की वजह से कीमती धातुओं को सपोर्ट मिल रहा है।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Price Today: सोना ₹600 उछलकर ₹1.56 लाख के पार, कमजोर डॉलर से बढ़ी चमक

Gold Price Today: कमजोर अमेरिकी डॉलर और ग्लोबल बाजार में तेजी के चलते सोमवार को सोने की कीमतों में जोरदार उछाल आया। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट वाला सोना ₹600 चढ़कर ₹1,56,800 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। शुक्रवार को इसका भाव ₹1,56,200 प्रति 10 ग्राम था।

वहीं, चांदी की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ। यह लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में ₹2,40,000 प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही।

सोने के दाम क्यों बढ़ रहे हैं?

HDFC Securities के सीनियर एनालिस्ट (कमोडिटी) सौमिल गांधी के मुताबिक, अमेरिका के कमजोर आर्थिक आंकड़ों के बाद फेडरल रिजर्व के सख्त रुख की उम्मीद कम हुई है। इससे डॉलर पर दबाव बढ़ा और सोने की मांग को सहारा मिला।

पिछले हफ्ते अमेरिका में महंगाई, रोजगार और रिटेल सेल्स के आंकड़े उम्मीद से नरम रहे। इससे बाजार को लगने लगा कि फेड जल्द ब्याज दरें बढ़ाने से बच सकता है।

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ग्लोबल बाजार में भी तेजी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना मजबूत रहा। स्पॉट गोल्ड करीब 0.5% बढ़कर 4,398 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गया। वहीं, चांदी 1% से ज्यादा चढ़कर 65.58 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

Mirae Asset ShareKhan के हेड ऑफ कमोडिटीज प्रवीण सिंह का कहना है कि कमजोर डॉलर और कच्चे तेल की सीमित कीमतें फिलहाल सोने को सहारा दे रही हैं।

इस हफ्ते किन बातों पर रहेगी नजर?

जियोपॉलिटिकल मोर्चे पर अमेरिका-ईरान तनाव अब भी बाजार की नजर में है। हालांकि, इस हफ्ते निवेशकों की सबसे बड़ी नजर अमेरिकी फेड की FOMC बैठक के मिनट्स पर रहेगी।

LKP Securities के VP रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटी और करेंसी) जतीन त्रिवेदी के मुताबिक, फेड के मिनट्स से ब्याज दरों के अगले संकेत मिल सकते हैं। इससे सोने की कीमतों की अगली दिशा तय होने में मदद मिलेगी।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gold Price Today: सोने-चांदी की कीमतों में आया बड़ा उछाल! कमजोर डॉलर और US Fed के फैसले से रॉकेट बने दाम, देखें नया भाव!

Gold Price Today: कमजोर डॉलर और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अगली ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीद घटने से सोमवार को सोने की कीमतों में तेजी आई। स्पॉट गोल्ड 0.5% चढ़कर 4,398.58 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। वहीं दिसंबर डिलीवरी वाला अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.4% बढ़कर 4,455.50 डॉलर प्रति औंस हो गया।

क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?

अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 0.2% गिरावट आई। इससे दूसरी मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए सोना सस्ता हो गया। Saxo Bank के कमोडिटी स्ट्रैटेजी हेड ओले हैनसेन का कहना है कि अमेरिका में महंगाई, रोजगार और उपभोक्ता खर्च के नरम आंकड़ों से फेड की अगली बड़ी चाल अब ब्याज दर बढ़ाने की बजाय कटौती की तरफ झुकती दिख रही है।

सितंबर में रेट बढ़ने की उम्मीद घटी

हाल में आए कमजोर पेरोल डेटा और नियंत्रित महंगाई के बाद बाजार की धारणा बदली है। CME FedWatch Tool के मुताबिक, सितंबर में फेड के ब्याज दर बढ़ाने की संभावना अब 31% रह गई है। एक महीने पहले यह 51% थी।

UBS के विश्लेषक जियोवानी स्टाउनोवो ने कहा कि अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें अब भी 4 डॉलर प्रति गैलन से ऊपर हैं। इससे अगले महंगाई आंकड़ों पर कुछ दबाव बना रह सकता है।

इस हफ्ते किन स्तरों पर रहेगी नजर?

LKP Securities में VP रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटी और करेंसी) जतीन त्रिवेदी के मुताबिक, COMEX पर सोना 4,395 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है। इसके लिए 4,410-4,415 डॉलर का दायरा नजदीकी रेजिस्टेंस है। 4,375 डॉलर के आसपास मजबूत सपोर्ट बना हुआ है। वहीं MCX Gold में ₹1,54,750 का स्तर अहम सपोर्ट और ₹1,55,500 का स्तर रेजिस्टेंस माना जा रहा है।

दूसरे कीमती धातुओं का हाल

दूसरी कीमती धातुओं में भी तेजी दिखी। चांदी 1.5% बढ़कर 65.61 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। प्लैटिनम 0.7% चढ़कर 1,759.72 डॉलर और पैलेडियम 1.6% बढ़कर 1,333.25 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।

निवेशक अब बुधवार को आने वाली फेड की जुलाई बैठक के मिनट्स का इंतजार कर रहे हैं। इससे आगे की मौद्रिक नीति को लेकर संकेत मिल सकते हैं।

(रॉयटर्स से इनपुट के साथ)

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