अगले 5 साल में क्रिटिकल मिनरल्स बिजनेस 5 गुना बढ़ाएगा वर्ल्ड बैंक ग्रुप, जानिए क्या है भारत और दुनिया के लिए प्लान

वर्ल्ड बैंक ने कहा है कि वह अगले पांच सालों में क्रिटिकल मिनरल्स के कारोबार को पांच गुना बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है। वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा ने शुक्रवार को बताया कि स्थानीय उद्योगों को विकसित करने के लिए संभावित साझेदारियों के वास्ते 20 देशों की पहचान की गई है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के भीतर ही अधिक नौकरियां और इकोनॉमिक वैल्यू बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।

बैंकॉक में वर्ल्ड बैंक की वार्षिक बैठकों के एक सेशन को संबोधित करते हुए, अजय बंगा ने कहा, “हम अगले पांच सालों में क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में अपने कारोबार को पांच गुना करने की योजना पर काम कर हैं। इस सप्ताह, हमने अन्य MDB (मल्टीलेटरल डेवलपमेंट बैंक) साझेदारों के साथ मिलकर अपने पहले ‘कंट्री कॉम्पैक्ट्स'(देश-स्तरीय समझौते) शुरू किए हैं। इसका मकसद लोकल स्तर पर उद्योगों की स्थापना करना और खनिज कारोबार से मिलने वाले मूल्य और नौकरियों को संबंधित देश के भीतर ही बनाए रखना है।” उन्होंने आगे बताया कि इस काम के लिए उन्होंने 20 देशों की पहचान की है, जिनके साथ वे साझेदारी करेंगे।

आर्थिक गलियारों के विकास पर दिया जा रहा जोर

उन्होंने आगे कहा कि वर्ल्ड बैंक ग्रुप आर्थिक गलियारों (economic corridors)पर अपना फोकस और बढ़ा रहा है, जो बुनियादी ढांचे के विकास को निवेश के अवसरों के साथ जोड़ते हैं। इस संस्था ने पिछले साल 52 नई आर्थिक गलियारा परियोजनाएं शुरू कीं, जबकि इससे एक साल पहले इनकी संख्या सिर्फ 23 थी।

अजय बंगा ने एक ऐसे कॉरिडोर का उदाहरण दिया, जिसे शुरू में मुख्य रूप से खनिजों के परिवहन के लिए बनाया गया था, लेकिन बाद में किसान अपनी फसलों को बाजारों तक पहुंचाने के लिए इसका इस्तेमाल करने लगे, जिससे इस रास्ते के किनारे बसे कस्बों और शहरों के विकास में मदद मिली।

विकास के लिए निजी पूंजी जुटाने पर फोकस बढ़ा

इन प्रयासों के साथ-साथ, वर्ल्ड बैंक ग्रुप विकास कार्यों के लिए निजी पूंजी जुटाने के अपने प्रयासों का विस्तार कर रहा है। बंगा ने बताया कि पिछले साल इस संस्था ने 112 अरब अमेरिकी डॉलर की निजी पूंजी जुटाई, जो वित्त वर्ष 2022 के लगभग 35 अरब अमेरिकी डॉलर के मुकाबले तीन गुना से भी अधिक है।

उन्होंने कहा,”पिछले साल 112 अरब अमेरिकी डॉलर जुटाए गए,जो कि तीन गुना बढ़त है।” उन्होंने आगे बताया कि संस्था की अपनी फंडिंग को मिलाकर कुल फंडिंग 230 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गई है।

उन्होंने यह भी बताया कि निम्न-मध्यम आय वाले देशों में निजी पूंजी जुटाने की मात्रा लगभग तीन गुना हो गई, जबकि उच्च-मध्यम आय वाले देशों में यह चार गुना हो गई। वहीं, पूरे अफ्रीका में इसमें दोगुने से अधिक की वृद्धि हुई। हालांकि,कम आय वाली,कमजोर और संघर्ष-ग्रस्त अर्थव्यवस्थाओं में निजी पूंजी जुटाने की स्थिति स्थिर रही है,जहां व्यावसायिक निवेश आकर्षित करना अब भी मुश्किल बना हुआ है।

विकास के लिए साझा सिस्टम विकसित करने पर जोर

अजय बंगा ने कहा कि यह संस्था गारंटी, इक्विटी और स्थानीय मुद्रा में फाइनेंसिंग के ज़रिए करेंसी रिस्क और फाइनेंस तक सीमित पहुंच जैसी बाधाओं को दूर कर रही है। यह अन्य बहुपक्षीय विकास बैंकों के साथ मिलकर ऐसे साझा सिस्टम विकसित करने पर भी काम कर रही है, जिससे निवेश को दूसरे निवेशकों तक पहुंचाया जा सके और नई विकास परियोजनाओं के लिए पूंजी जुटाई जा सके। इसका मेन मकसद उन क्षेत्रों में निवेश बढ़ाना है जो उत्पादकता में सुधार करते हैं और रोजगार पैदा करते हैं। इनमें बुनियादी ढांचा और ऊर्जा, कृषि-व्यवसाय, स्वास्थ्य सेवा, पर्यटन और वैल्यू एडेड मैन्यूफैक्चरिंग (value-added manufacturing) जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

नौकरी कोई आंकड़ा नहीं, नौकरी सम्मान है

अजय बंगा ने ग्लोबल लेवल पर लगभग 80 करोड़ नौकरियों की अनुमानित कमी की ओर भी इशारा किया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर युवाओं के लिए अवसर पैदा नहीं किए गए,तो पूरी दुनिया में इसके खराब परिणाम देखने को मिल सकते हैं। उन्होंने युवाओं को अपना भविष्य बनाने में सक्षम बनाने के लिए रोज़गार के महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा “नौकरी कोई आंकड़ा नहीं है। नौकरी सम्मान है।”

वर्ल्ड बैंक ग्रुप का विकास मॉडल कई चीजों का मेल

उन्होंने आगे कहा कि वर्ल्ड बैंक ग्रुप का विकास मॉडल कई चीजों का मेल है। पब्लिक फाइनेंलिंग (वहां,जहां बाजार नहीं पहुंच पाते), निजी पूंजी (वहां, जहां बड़े पैमाने पर नौकरियां पैदा की जा सकती हैं), शुरुआती जोखिमों में मदद के लिए परोपकारी निवेश और फाइनेंशिग को अधिक प्रभावी बनाने के लिए तकनीक शामिल हैं। अजय बंगा ने कहा,”नौकरियों की कमी केवल एक अनुमान है। जरूरी नहीं कि हमारा भविष्य भी ऐसा ही हो।” उन्होंने विकास से जुड़ी पहलों को और बड़े पैमाने पर तथा तेजी से लागू करने का आह्वान किया।

 

 

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Hyundai inaugurates Pune plant, to invest Rs 11,000 crore

Hyundai inaugurates Pune plant, to invest Rs 11,000 crore
Hyundai

Hyundai Motor India has inaugurated its manufacturing plant in Talegaon, Pune, marking its first major manufacturing expansion outside Tamil Nadu. The facility currently has an installed annual production capacity of 1.7 lakh units, which is planned to increase to 3.2 lakh units by 2030. Managing director and CEO Tarun Garg announced that the company will invest Rs 11,000 crore in phases at the plant.

Hyundai Pune plant: Capacity and investment

Maharashtra Chief Minister Devendra Fadnavis inaugurated the plant on October 14, 2026. Hyundai Motor Group executive chair Euisun Chung and Hyundai Motor Company president and CEO Jose Munoz were also present.

Garg said, “We will invest INR 11,000 crore in phases at this facility. Beyond expanding manufacturing capacity, the facility will drive industrial development, innovation and employment generation in the region.”

The expansion will take Hyundai Motor India’s combined annual production capacity at its Pune and Chennai plants to nearly 11.4 lakh units by 2030, according to the company. The Pune facility also has an engine shop with an annual capacity of 1.5 lakh units.

The plant uses Hyundai’s E-FOREST digital factory platform, with AI-based quality checks, predictive maintenance, digital simulations and augmented reality-based worker training. Its production lines can support multiple internal combustion engine and hybrid models.

Hyundai Venue to be made at Pune plant

The Hyundai Venue will be manufactured exclusively at the Pune plant and exported to global markets. Hyundai plans to expand exports of the model to more than 35 countries.

The inauguration coincided with Hyundai Motor India marking cumulative exports of 40 lakh passenger vehicles since 1999 and domestic sales of nearly 1 crore passenger vehicles over its 30 years in India.

Chung said, “India remains one of Hyundai’s most important and strategic markets globally.” He added that the Pune plant reflected the group’s long-term commitment to India and that the export milestone highlighted the role of Indian manufacturing in its global operations.

Hyundai said 55 Tier-1 suppliers have invested nearly Rs 4,600 crore in Maharashtra. Nearly half of its supplier network is located within 50km of the plant. The combined Tier-1 and Tier-2 supplier network has generated more than 18,000 employment opportunities in the state, according to the company.

Hyundai also cited nearly 40 ongoing research projects with seven Indian academic institutions, covering battery technology, electrification and future mobility.

Hyundai to invest USD 15.5 billion in India by 2032

Hyundai to invest USD 15.5 billion in India by 2032
Hyundai

Hyundai has announced plans to invest USD 15.5 billion in India between 2026 and 2032. The investment will cover research and development, manufacturing capacity, local supplier development and businesses such as electric vehicle charging and automotive financing. The announcement follows a meeting between prime minister Narendra Modi and Hyundai Motor Group executive chair Euisun Chung in New Delhi on October 13.

“India remains one of Hyundai Motor Group’s most important and strategic markets globally. The past 30 years have been defined by our commitment to India. This investment reaffirms our commitment to India for the next 30 years and beyond,” Chung said.

Hyundai investment: R&D and manufacturing plans

The company plans to invest around USD 700 million in its Indian R&D centre, including a vehicle testing track. The investment is intended to expand engineering facilities and support the development of automotive technologies and local talent.

The group also plans to increase manufacturing capacity across Hyundai and Kia. Their combined annual production capacity in India currently exceeds 1.4 million vehicles, across Hyundai’s facilities in Chennai and Pune, and Kia’s plant in Anantapur.

Capacity at Hyundai’s Pune facility is scheduled to increase in phases. The group is also assessing a third manufacturing location to meet its longer-term requirements. 

Our sister publication, Autocar Professional reported on September 29 that Chhatrapati Sambhaji Nagar in Maharashtra and Sanand in Gujarat were among the locations under consideration. According to people familiar with the plans, the proposed facility could eventually add around 500,000 units of annual capacity, with investment potentially exceeding USD 2 billion over time. The plant could come up around 2030, with capacity added in phases over five to seven years. The October 13 announcement did not confirm the location, investment schedule or additional capacity.

The company will also invest in local suppliers and regional partners to increase parts localisation and strengthen its supply chain. It plans to establish a dedicated investment entity in India to oversee the programme and identify suppliers, technology partners and investment opportunities.

Hyundai to explore new mobility businesses

Beyond vehicle manufacturing, Hyundai Motor Group plans to explore automotive financing, EV charging infrastructure and end-of-life vehicle recycling. It also intends to support promising start-ups and expand into mobility services linked to its vehicle business.

Hyundai is developing electric three-wheelers with TVS Motor Company under a joint development agreement. The partnership is aimed at commercialising electric three-wheelers for India and other markets.

The group said the investment programme is expected to create employment in manufacturing, R&D, engineering and supply chains, including through suppliers and new mobility businesses. It currently employs more than 24,000 people across India.

Hyundai Motor Group has not disclosed how the USD 15.5 billion investment will be divided between Hyundai and Kia, or how much will be allocated to individual projects.

Tamil Nadu CM Vijay announces plans for new Motor Sports City

Tamil Nadu CM Vijay announces plans for new Motor Sports City
Tamil Nadu CM Vijay Motor Sports City

Tamil Nadu Chief Minister C. Joseph Vijay has revealed plans to develop a dedicated motorsport city in Chennai. This will include a new race track, capable of hosting F1, F2, F3, F4 and other international races.

“An Olympic city will be set up in Chennai. A Motor Sports city will also be set up in Chennai to host Formula 1 races. The talents of youth in motor sports will be identified, and training and racing opportunities will be provided to create national and international level champions,” Vijay said during the state Assembly.

He added, “Establishing world-class motor vehicle car racing arenas will provide opportunities for tourism, special vehicle manufacturing industries, employment, and economic development.”

  1. New Chennai race track aims to host F1, F2 and more
  2. Venue will also include training facilities

Chennai Motor Sports City plans revealed

F4 India

Tamil Nadu is at the very heart of the motorsport scene in India, with tracks like the Madras International Circuit and Kari Motor Speedway hosting majority of our national championship races. There’s also the Madras International Karting arena, which is the first karting track in the country to meet global CIK (Commission Internationale de Karting) standards. 

Vijay highlighted the business case behind setting up the new motorsport city in the state. Tamil Nadu is currently a leading state for the production of various two-wheelers and four-wheelers, as well as racing vehicles. He added that setting up “world class” racing venues will provide opportunities to boost tourism, specialised vehicle manufacturing industries and well as employment and the local economy in general.

While the precise location of this new motorsport city hasn’t been revealed, Vijay did share that the goal is for the venue to be capable of hosting international-level racing like F4, F3, F2 and even F1. 

Driver development will be another key focus area. Vijay stated that the venue will also include training facilities to identify and nurture local racing talent in a bid to give them opportunities on the national and international stage. 

India eyes F1 return

F1 Indian GP

This announcement follows renewed interest from the Indian government to bring F1 back to India.

The Buddh International Circuit last hosted The F1 Indian GP from 2011 to 2013. But the race was then dropped, mainly due to the Uttar Pradesh government’s taxation policy at the time, which classified F1 as entertainment rather than sport. 

However, speaking to media earlier this year, sports minister Mansukh Mandaviya shared that the government is working to make India a viable host country for international racing. “For instance, if the entertainment tax cannot be altogether repealed, we will try to ensure that reimbursements are provided to incentivise the project for the organisers. Discussions are ongoing on this issue. It is an interministerial matter, and we are trying our best to make it attractive for Formula 1,” he said at the time.

F1 CEO Stefano Domenicali has stated that there is “big interest” for the championship to return to India, but also stressed that this won’t happen any time soon and will require several conditions to be met. “There are the right things that we need to do – to again find back the right promoters, the right collaboration and the right timing, which will not be in the very short term. But when we talk about five years in Formula 1, it seems to be very far away, but it’s not,” he told F1 India broadcaster FanCode.

दो साल का अनुभव लेकर 600 जगह भेजा आवेदन, फिर भी नहीं मिली नौकरी, Reddit पर छिड़ी बहस

भारत के तकनीकी क्षेत्र में नौकरी पाना इन दिनों कई युवाओं के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसी बीच रेडिट पर एक नौकरी तलाश रहे शख्स की पोस्ट ने लोगों का ध्यान खींचा है। करीब दो साल के अनुभव वाले इस व्यक्ति ने दावा किया कि वह सैकड़ों नौकरियों के लिए आवेदन कर चुका है, लेकिन उसे बहुत कम जगहों से जवाब मिला। शख्स ने बताया कि करीब 500-600 आवेदन भेजने के बावजूद उसकी स्थिति में खास सुधार नहीं हुआ। इसके उलट, सोशल मीडिया और रेडिट पर उसे लगातार ऐसी कहानियां दिखाई दे रही थीं, जिनमें लोगों को नौकरी से निकाले जाने के कुछ ही महीनों बाद बड़ी तकनीकी कंपनियों से नए प्रस्ताव मिल रहे थे।

किसी को अमेजन के बाद गूगल, तो किसी को मेटा के बाद कई ऑफर

रेडिट उपयोगकर्ता ने कुछ ऐसी पोस्ट का जिक्र किया, जिन्हें देखकर वह खुद को दूसरों से बिल्कुल अलग स्थिति में महसूस करने लगा। एक व्यक्ति ने दावा किया कि अमेजन से नौकरी जाने के करीब पांच महीने बाद उसे गूगल में नौकरी मिल गई। एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि नौकरी जाने के सिर्फ तीन महीने के भीतर उसे 25 प्रतिशत अधिक वेतन वाली नई नौकरी मिल गई। इतना ही नहीं, नौकरी की तलाश के दौरान वह विदेश यात्रा पर भी गया।

सबसे ज्यादा हैरानी एक अन्य दावे से हुई, जिसमें एक व्यक्ति ने बताया कि मेटा से नौकरी जाने के बाद उसने गूगल, एप्पल और ओपनएआई में साक्षात्कार दिए और तीनों जगह से उसे नौकरी के प्रस्ताव मिले। आखिर में उसने गूगल को चुना।

दूसरी तरफ 500-600 आवेदन के बाद भी इंतजार

इन कहानियों की तुलना करते हुए मूल पोस्ट लिखने वाले शख्स ने सवाल किया कि क्या वह किसी अलग ही दुनिया में रह रहा है। उसके मुताबिक, जहां कुछ लोग बड़ी तकनीकी कंपनियों के प्रस्ताव आसानी से हासिल कर रहे हैं, वहीं उसे सैकड़ों आवेदन भेजने के बाद भी मुश्किल से कोई प्रतिक्रिया मिल रही है। उसने बताया कि अब तक उसका सबसे अच्छा नतीजा एक अस्थायी छह महीने की नौकरी के लिए बातचीत तक पहुंचना रहा है।

क्या बड़ी कंपनियों का अनुभव ही सबसे बड़ा फर्क है?

पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए एक उपयोगकर्ता ने सवाल उठाया कि क्या नौकरी तलाश रहे व्यक्ति का दो साल का अनुभव भी मेटा या अमेजन जैसी कंपनियों में रहा है। उसका तर्क था कि बड़ी तकनीकी कंपनियों में पहले से काम कर चुके लोगों के लिए नई नौकरी पाना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है, क्योंकि ऐसी कंपनियों में चयन अपने आप में कठिन माना जाता है। एक अन्य व्यक्ति ने इसी चर्चा के बीच नौकरी के लिए मदद और संदर्भ की मांग भी कर दी।

कुछ लोगों ने सोशल मीडिया की सफलता की कहानियों पर उठाए सवाल

हर किसी ने इन सफलता की कहानियों को सच नहीं माना। कुछ रेडिट उपयोगकर्ताओं ने कहा कि इंटरनेट पर दिखाई जाने वाली ऐसी पोस्ट पूरी तस्वीर नहीं दिखातीं। एक टिप्पणी में इन्हें प्रभावशाली लोगों द्वारा लोगों को झूठी उम्मीद देने वाला प्रचार तक बताया गया। यानी ऑनलाइन कुछ लोगों की तेज सफलता देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि हर तकनीकी पेशेवर के लिए नौकरी का बाजार एक जैसा है।

एक जवाब ने कहा- समस्या औसत होने की भी हो सकती है

चर्चा में एक टिप्पणी ने सबसे सीधा जवाब दिया। उपयोगकर्ता ने तर्क दिया कि अत्यधिक कुशल लोग अक्सर कई कंपनियों के लिए आकर्षक उम्मीदवार होते हैं। ऐसे लोग कम समय में जटिल समस्याओं को हल करने की क्षमता रखते हैं, इसलिए उन्हें नौकरी के ज्यादा अवसर मिल सकते हैं। हालांकि, उस टिप्पणी में यह भी कहा गया कि औसत होना कोई बुरी बात नहीं है। कौशल को लगातार मेहनत और सीखने के जरिए बेहतर बनाया जा सकता है। यही वजह है कि इस पूरी चर्चा ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है क्या तकनीकी क्षेत्र में नौकरी पाने के लिए सिर्फ अनुभव काफी है, या सही कौशल और क्षमता भी उतनी ही जरूरी है?

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Gold Silver price: फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीद हुई कम, फिर भी सोने-चांदी की कीमतें स्थिर, आखिर क्या है इसकी वजह

Gold Silver price: इंटरनेशनल मार्केट में सोने और चांदी की कीमतें स्थिर रहीं। दरअसल, सितंबर में अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें कम हो गईं और निवेशक केंद्रीय बैंक की पॉलिसी की दिशा के बारे में संकेत पाने के लिए फेडरल रिजर्व की हालिया बैठक के मिनट्स का इंतजार कर रहे थे।

COMEX पर, सोना $4,467.70 प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा था, जो पिछले बंद भाव $4,473.40 प्रति औंस से $6 या 0.13% कम था। धातु की कीमत $4,493.10 प्रति औंस के उच्चतम और $4,466 प्रति औंस के निचले स्तर के बीच रही।

चांदी $66.07 प्रति औंस पर थी, जो पिछले बंद भाव $65.895 प्रति औंस से 0.161 या 0.24% कम थी। इसने दिन के दौरान $66.685 प्रति औंस का उच्चतम और $65.760 प्रति औंस का निचला स्तर छुआ।स्पॉट मार्केट में, सोना 0.2% बढ़कर $4,424.28 प्रति औंस हो गया, जबकि दिसंबर डिलीवरी के लिए अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.2% बढ़कर $4,480.90 प्रति औंस हो गए। स्पॉट सिल्वर 0.9% बढ़कर $66.40 प्रति औंस हो गई।

सोने और चांदी की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?

सबसे बड़ा कारण अमेरिकी ब्याज दरों के बारे में बदलता नजरिया है।हालिया अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों ने सितंबर में ब्याज दर में बढ़ोतरी की उम्मीदों को कम कर दिया है। जुलाई में अप्रत्याशित रूप से नौकरियों का नुकसान, कंज्यूमर प्राइस इन्फ्लेशन में नरमी और कमजोर रिटेल बिक्री ने बाजारों को सख्त मॉनेटरी पॉलिसी की संभावना का फिर से आकलन करने के लिए प्रेरित किया है।

यह सोने और चांदी के लिए मायने रखता है क्योंकि दोनों ही नॉन-यील्डिंग एसेट्स (जिनसे कोई निश्चित रिटर्न नहीं मिलता) हैं। जब ब्याज दरें अधिक होती हैं, तो निवेशक बॉन्ड जैसी ब्याज देने वाली एसेट्स से अपेक्षाकृत आकर्षक रिटर्न कमा सकते हैं। अगर दर-वृद्धि की उम्मीदें कम हो जाती हैं, तो कीमती धातुओं को रखने की अपॉर्चुनिटी कॉस्ट (अवसर लागत) कम हो जाती है।इससे बुलियन (सोना-चांदी) अधिक आकर्षक हो सकता है।

कमजोर डॉलर बुलियन करता है सपोर्ट

अमेरिकी डॉलर कई प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले कई महीनों के निचले स्तर के करीब बना हुआ है।कमजोर डॉलर आम तौर पर सोने को सपोर्ट करता है क्योंकि धातु की कीमत डॉलर में तय होती है। इससे अन्य मुद्राओं वाले निवेशकों के लिए बुलियन अपेक्षाकृत सस्ता हो जाता है, जिससे संभावित रूप से मांग को सपोर्ट मिलता है।

डॉलर का यही असर चांदी की कीमतों को भी सपोर्ट कर सकता है। सोने और चांदी के लिए फेड (Fed) क्यों अहम है?

फेडरल रिजर्व की पॉलिसी का नजरिया बाजार के लिए एक अहम ट्रिगर बन गया है। 12 से 17 अगस्त के बीच हुए रॉयटर्स के एक सर्वे में पाया गया कि ज्यादातर अर्थशास्त्रियों का मानना ​​है कि फेड 2026 के आखिर तक अपनी मुख्य ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं करेगा।

बाजार अब फेड की हालिया बैठक के मिनट्स (बैठक का ब्योरा) का इंतजार कर रहा है, जो बुधवार (19 अगस्त) को आने वाले हैं। इन मिनट्स से इस बात का अंदाजा लग सकता है कि पॉलिसी बनाने वाले महंगाई, रोजगार और ब्याज दरें और बढ़ाने की जरूरत के बारे में क्या सोचते हैं। अगर फेड कम सख्त रुख का संकेत देता है, तो सोने और चांदी को और सपोर्ट मिल सकता है। दूसरी ओर, अगर रुख सख्त (हॉकिश) रहता है, तो डॉलर और बॉन्ड यील्ड बढ़ सकते हैं और कीमती धातुओं पर दबाव पड़ सकता है।

चांदी के लिए एक और वजह

चांदी की चाल सिर्फ ब्याज दरों की उम्मीदों पर निर्भर नहीं करती।इस धातु की औद्योगिक मांग भी काफी है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर से जुड़े इस्तेमाल शामिल हैं। इससे सोने के मुकाबले चांदी की कीमत पर असर डालने वाला एक और कारक जुड़ जाता है।हालांकि, अभी के लिए मॉनेटरी पॉलिसी, डॉलर और निवेशकों की आम धारणा दोनों धातुओं के लिए अहम कारक बने हुए हैं।

निवेशकों को किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?

फेड की बैठक के मिनट्स तुरंत असर डालने वाली घटना हैं। इसके अलावा, बाजार सितंबर में होने वाले पॉलिसी फैसले के संकेतों के लिए अमेरिका में महंगाई और रोजगार के आंकड़ों पर नजर रखेगा।बाजार की कमेंट्री के मुताबिक, सोना अभी $4,450-$4,460 प्रति औंस के दायरे में रेजिस्टेंस (बाधा) का सामना कर रहा है, जबकि चांदी $63 प्रति औंस के स्तर से ऊपर बनी हुई है।

भारतीय निवेशकों के लिए, ग्लोबल कीमतें समीकरण का सिर्फ एक हिस्सा हैं। घरेलू स्तर पर सोने और चांदी की कीमतें रुपये-डॉलर एक्सचेंज रेट, इंपोर्ट कॉस्ट, टैक्स और स्थानीय बाजार की स्थितियों पर भी निर्भर करती हैं।इसलिए, भले ही इंटरनेशनल बुलियन की कीमतें बढ़ें, भारतीय कीमतों में उसी अनुपात में बदलाव न हो।

फिलहाल, फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदों में कमी, डॉलर का कमजोर होना और लगातार बनी हुई जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता की वजह से कीमती धातुओं को सपोर्ट मिल रहा है।

नहीं थम रही सोने-चांदी की तेजी, रुपया और ग्लोबल फैक्टर्स कैसे डाल रहे है असर, अब क्या करें निवेशक!

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

नहीं थम रही सोने-चांदी की तेजी, रुपया और ग्लोबल फैक्टर्स कैसे डाल रहे है असर, अब क्या करें निवेशक!

Gold Silver price: भारत में सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखी गई। इसकी वजह ग्लोबल मार्केट में मजबूती का ट्रेंड था, जिसमें कमज़ोर अमेरिकी डॉलर और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदों ने कीमती धातुओं की मांग को सहारा दिया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर, अक्टूबर डिलीवरी के लिए सोने के वायदा भाव ₹676 या 0.44% बढ़कर ₹1.55 लाख प्रति 10 ग्राम हो गए। सितंबर डिलीवरी के लिए चांदी के वायदा भाव ₹2,270 या 0.96% बढ़कर ₹2.38 लाख प्रति किलोग्राम हो गए।

ग्लोबल स्तर पर, सोने के वायदा भाव लगभग 0.40% बढ़कर $4,394.01 प्रति औंस हो गए, जबकि चांदी के वायदा भाव 1.64% बढ़कर $65.74 प्रति औंस हो गए।

क्यों बढ़ रही कीमतें हैं?

इसका एक मुख्य कारण अमेरिकी मॉनेटरी पॉलिसी (मौद्रिक नीति) को लेकर बदलता नज़रिया है। हाल ही में अमेरिका में महंगाई, रोजगार और कंज्यूमर एक्टिविटी के आंकड़े कमज़ोर रहे हैं, जिससे फेडरल रिज़र्व द्वारा और सख्ती बरतने की उम्मीदें कम हो गई हैं। इसका असर अमेरिकी डॉलर पर पड़ा है और सोने को इससे सहारा मिला है।

आमतौर पर डॉलर के कमज़ोर होने से सोने को फायदा होता है क्योंकि दूसरी करेंसी रखने वालों के लिए यह धातु सस्ती हो जाती है। कम ब्याज दरों की उम्मीदें भी सोने को सहारा दे सकती हैं, क्योंकि सोने जैसी ऐसी एसेट (संपत्ति) को रखने की ‘अपॉर्चुनिटी कॉस्ट’ (वैकल्पिक लागत) कम हो जाती है जिससे कोई रेगुलर इनकम नहीं होती।

भारत के लिए खास वजह क्या है?

घरेलू कीमतें करेंसी में होने वाले उतार-चढ़ाव को भी दिखाती हैं। सोमवार (17 अगस्त) को शुरुआती कारोबार में रुपया कमज़ोर होकर लगभग ₹95.59 प्रति डॉलर पर आ गया। रुपया कमज़ोर होने से सोने और चांदी जैसी इंटरनेशनल कीमत वाली कमोडिटीज़ की ‘लैंडेड कॉस्ट’ (आयात लागत) बढ़ सकती है, जिससे घरेलू कीमतों को और सहारा मिलता है।

कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का भी रुपये पर दबाव रहा है। लेमन (Lemonn) में रिसर्च हेड गौरव गर्ग के अनुसार, WTI क्रूड लगभग $82.83 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था, जबकि ब्रेंट $89 के आसपास बना हुआ था। गर्ग ने कहा कि डॉलर के कमज़ोर होने और आर्थिक आंकड़े कमज़ोर रहने से फेड द्वारा जल्द ही ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें कम हो गईं, जिससे सोने और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। उन्होंने US-ईरान शांति वार्ता के रुकने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से टैंकरों की आवाजाही कम होने के बाद सप्लाई में रुकावट की चिंताओं की ओर भी इशारा किया।

बता दें कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता एक और वजह है जो बुलियन (सोना-चांदी) को सहारा दे रही है। US-ईरान शांति वार्ता में कोई प्रगति न होने और तेल की सप्लाई को लेकर चिंताओं ने निवेशकों को सतर्क रखा है। ऐसी अनिश्चितता सोने जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली संपत्तियों की मांग बढ़ा सकती है।

अब आगे क्या करें निवेशक

सोने के लिए, फेडरल रिजर्व का रेट आउटलुक, US डॉलर, बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक घटनाक्रम मुख्य कारक बने रहेंगे। अगर फेड का रुख नरम (dovish) होता है तो कीमतों को सहारा मिल सकता है, जबकि महंगाई का नया झटका या सख्त (hawkish) पॉलिसी रुख बुलियन पर दबाव डाल सकता है।

VT मार्केट्स में ग्लोबल स्ट्रैटेजी ऑपरेशंस लीड, रॉस मैक्सवेल ने कहा कि $4,400-$4,450 प्रति औंस सोने के लिए तत्काल रेजिस्टेंस ज़ोन है। अगर कीमत $4,500 प्रति औंस से ऊपर बनी रहती है तो तेजी का रुझान (bullish trend) मजबूत हो सकता है, जबकि उन्होंने $4,150-$4,200 प्रति औंस को एक महत्वपूर्ण सपोर्ट एरिया बताया।

हालांकि, भारतीय निवेशकों के लिए, ग्लोबल सोना और चांदी की कीमतें समीकरण का सिर्फ़ एक हिस्सा हैं। रुपया-डॉलर एक्सचेंज रेट, इंटरनेशनल कीमतें और घरेलू बाजार की स्थितियां मिलकर MCX कीमतों की दिशा तय करती हैं।

एस्पेक्ट बुलियन एंड रिफाइनरी के CEO दर्शन देसाई ने कहा, “कमज़ोर अमेरिकी डॉलर, दरों को लेकर बदलती उम्मीदों और सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) के तौर पर लगातार बनी मांग के कारण सोने और चांदी की कीमतें नए हफ़्ते में मजबूती के साथ आगे बढ़ रही हैं।”

देसाई ने कहा, “भू-राजनीतिक जोखिम और ग्लोबल ग्रोथ को लेकर चिंताएं बुलियन को और सहारा दे रही हैं।” हालांकि, एनालिस्ट कीमतों में सीधी बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं कर रहे हैं। हालिया बढ़त के बाद, सोने और चांदी की कीमतों में कुछ ठहराव (कंसोलिडेशन) या मुनाफावसूली (प्रॉफिट-टेकिंग) देखी जा सकती है।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

‘खराब प्रदर्शन’ कहकर निकाला, अब कंपनी को देना पड़ा ₹19 लाख का हर्जाना

सिंगापुर में नौकरी से जुड़े एक मामले ने कंपनियों की प्रोबेशन प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक महिला कर्मचारी को खराब प्रदर्शन का आरोप लगाकर नौकरी से हटा दिया गया था, लेकिन बाद में Employment Claims Tribunal ने कंपनी के फैसले को अनुचित माना। ट्रिब्यूनल ने कहा कि अगर कर्मचारी को प्रदर्शन के मानकों की सही जानकारी नहीं दी गई थी, तो उसे उन्हीं आधारों पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

इस फैसले के बाद महिला को S$30,000 (करीब ₹19 लाख) का मुआवजा देने का आदेश दिया गया। यह मामला अब कंपनियों के लिए भी एक सीख बन गया है कि कर्मचारियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन स्पष्ट नियमों और सही प्रक्रिया के आधार पर किया जाना चाहिए।

6 महीने के प्रोबेशन के बाद लिया गया था फैसला

महिला ने अप्रैल 2025 में कंपनी जॉइन की थी और उसे छह महीने के प्रोबेशन पर रखा गया था। प्रोबेशन खत्म होने से पहले कंपनी ने उसे बताया कि उसका रोजगार आगे जारी नहीं रखा जाएगा, क्योंकि उसका प्रदर्शन उम्मीदों के मुताबिक नहीं था। हालांकि, महिला ने इस फैसले को चुनौती दी और दावा किया कि उसे कभी भी उसके काम को लेकर कोई मौखिक या लिखित चेतावनी नहीं दी गई थी।

महिला ने उठाए कई सवाल

कर्मचारी ने ट्रिब्यूनल में कहा कि कंपनी ने जिन प्रदर्शन मानकों के आधार पर उसे अयोग्य बताया, उनके बारे में उसे कभी स्पष्ट जानकारी ही नहीं दी गई थी।

उसने यह भी आरोप लगाया कि एक प्रोजेक्ट में व्हिसलब्लोअर की भूमिका निभाने के कारण उसके साथ गलत व्यवहार किया गया। इसके अलावा, उसने भाषा को लेकर भेदभाव का भी आरोप लगाया और कहा कि कोरियन भाषा न जानने की वजह से उसे निशाना बनाया गया।

कोर्ट ने कहा- बताए बिना नहीं थोप सकते प्रदर्शन के नियम

ट्रिब्यूनल के मजिस्ट्रेट जोएल टैन ने कहा कि किसी कर्मचारी को ऐसे मानकों पर नहीं परखा जा सकता, जिनके बारे में उसे पहले बताया ही न गया हो। उन्होंने कहा कि अगर कंपनी ने अपने प्रदर्शन मानकों को स्पष्ट नहीं किया है, तो बाद में उन्हीं नियमों को आधार बनाकर कर्मचारी को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता।

कंपनी की प्रोबेशन प्रक्रिया में मिली कमी

मजिस्ट्रेट ने माना कि कर्मचारी के काम में सुधार की गुंजाइश हो सकती थी, लेकिन कंपनी ने यह साबित नहीं किया कि उसे किन स्पष्ट मानकों पर आंका गया था। उन्होंने कहा कि यह मामला गंभीर लापरवाही या बड़ी गलती का नहीं था, बल्कि अस्पष्ट अपेक्षाओं के आधार पर कर्मचारी का मूल्यांकन किया गया।

भेदभाव और व्हिसलब्लोअर के आरोप हुए खारिज

हालांकि, ट्रिब्यूनल ने महिला के उन आरोपों को सही नहीं माना, जिनमें उसने कहा था कि भाषा की वजह से उसके साथ भेदभाव हुआ और व्हिसलब्लोअर बनने के कारण कंपनी ने उसके खिलाफ कार्रवाई की।

कंपनियों के लिए बड़ा सबक

इस फैसले से कंपनियों को संदेश मिला है कि कर्मचारियों को नौकरी से हटाने से पहले प्रदर्शन के नियम, अपेक्षाएं और सुधार के मौके स्पष्ट रूप से बताना जरूरी है। ट्रिब्यूनल ने महिला को तीन महीने की सैलरी के बराबर S$34,500 का दावा योग्य माना, लेकिन कानूनी सीमा के कारण अधिकतम S$30,000 का मुआवजा दिया गया।

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IT में 12 साल काम करने के बाद नौकरी से निकाला गया तो गांव लौट आया ये शख्स! फिर बताया अपना एक्सपीरियंस

एक ही कंपनी में दस साल से ज्यादा समय बिताने के बाद नौकरी छूटने पर ज्यादातर लोग भविष्य को लेकर परेशान हो जाते हैं। लेकिन नौकरी से निकाले जाने पर एक व्यक्ति के रिएक्शन ने ऑनलाइन कई लोगों का ध्यान खींचा है। दूसरी IT नौकरी खोजने के बजाय, उसने अपने गांव लौटने और एक नई शुरुआत करने का फैसला किया।

यह कहानी वनेश माली ने X पर शेयर की। उन्होंने बताया कि उनके दोस्त ने ऐसी स्थिति के लिए बहुत पहले ही तैयारी कर ली थी और उनका मानना ​​है कि हर किसी के पास एक बैकअप प्लान होना चाहिए। अपना अनुभव शेयर करते हुए माली ने लिखा, “मेरा एक दोस्त 12 साल से ज्यादा समय तक एक बड़ी IT कंपनी में काम करता था। वह अपने काम में बहुत माहिर था। कुछ दिन पहले कंपनी ने उसे नौकरी से निकाल दिया। कई लोगों की नौकरी चली गई।”

लेकिन मेरा दोस्त, जिसकी नौकरी चली गई थी, दुखी नहीं था। उसने कहा, ‘मैं इसके लिए तैयार था। उसने तय किया कि अब वह IT में काम नहीं करेगा। IT की दुनिया बहुत तेजी से बदलती है।” वह अपने गांव वापस चला गया। वहां उसकी पहले से ही एक छोटी सी दुकान थी, जो किराए पर दी हुई थी। अब, वह उसे वापस ले लेगा और कपड़ों की अपनी दुकान खोलेगा। उसके पास परिवार की जमीन भी है और वह वहां बकरी पालन का फार्म शुरू करने की योजना बना रहा है।”

उसने मुझसे कहा, ‘हमारे पास हमेशा एक ‘प्लान B’ तैयार रहना चाहिए। जिंदगी में बहुत सारे बदलाव आते रहते हैं। अब वह गांव में अपनी नई जिंदगी को लेकर खुश और उत्साहित है। इस पोस्ट ने कई यूजर्स का दिल जीत लिया। उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि अचानक आने वाली मुश्किलों के लिए पहले से तैयारी करना कितना जरूरी है।

एक यूजर ने कहा, “लेकिन ‘प्लान B’ के लिए हमारे पास काफी बचत होनी चाहिए और हम अपनी 20s की शुरुआत में होने चाहिए। जब ‘प्लान A’ ही ठीक से काम नहीं कर रहा हो, तो ‘प्लान B’ के बारे में कैसे सोचें। एक और व्यक्ति ने लिखा, “जिन लोगों ने ऐसी जिंदगी की योजना बनाई है, वे अब चैन की नींद सो सकेंगे।”

IT हमें सिर्फ़ ज़िंदगी जीना सिखाता है। अगर कोई नया डिप्लॉयमेंट या सेटअप फ़ेल हो जाता है, तो हमेशा बैकअप होने से मदद मिलती है। सिर्फ़ बैकअप ही प्रोडक्शन को…। एक और यूज़र ने कहा, “वाह, यही तो पॉज़िटिविटी है, यही सही नज़रिया है। मैं उसकी ज़बरदस्त तरक्की की कामना करता हूं, और इस पोस्ट ने मुझे भी अपने ‘प्लान B’ के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया।”