Hyundai Motor India has inaugurated its manufacturing plant in Talegaon, Pune, marking its first major manufacturing expansion outside Tamil Nadu. The facility currently has an installed annual production capacity of 1.7 lakh units, which is planned to increase to 3.2 lakh units by 2030. Managing director and CEO Tarun Garg announced that the company will invest Rs 11,000 crore in phases at the plant.
Hyundai Pune plant: Capacity and investment
Maharashtra Chief Minister Devendra Fadnavis inaugurated the plant on October 14, 2026. Hyundai Motor Group executive chair Euisun Chung and Hyundai Motor Company president and CEO Jose Munoz were also present.
Garg said, “We will invest INR 11,000 crore in phases at this facility. Beyond expanding manufacturing capacity, the facility will drive industrial development, innovation and employment generation in the region.”
The expansion will take Hyundai Motor India’s combined annual production capacity at its Pune and Chennai plants to nearly 11.4 lakh units by 2030, according to the company. The Pune facility also has an engine shop with an annual capacity of 1.5 lakh units.
The plant uses Hyundai’s E-FOREST digital factory platform, with AI-based quality checks, predictive maintenance, digital simulations and augmented reality-based worker training. Its production lines can support multiple internal combustion engine and hybrid models.
Hyundai Venue to be made at Pune plant
The Hyundai Venue will be manufactured exclusively at the Pune plant and exported to global markets. Hyundai plans to expand exports of the model to more than 35 countries.
The inauguration coincided with Hyundai Motor India marking cumulative exports of 40 lakh passenger vehicles since 1999 and domestic sales of nearly 1 crore passenger vehicles over its 30 years in India.
Chung said, “India remains one of Hyundai’s most important and strategic markets globally.” He added that the Pune plant reflected the group’s long-term commitment to India and that the export milestone highlighted the role of Indian manufacturing in its global operations.
Hyundai said 55 Tier-1 suppliers have invested nearly Rs 4,600 crore in Maharashtra. Nearly half of its supplier network is located within 50km of the plant. The combined Tier-1 and Tier-2 supplier network has generated more than 18,000 employment opportunities in the state, according to the company.
Hyundai also cited nearly 40 ongoing research projects with seven Indian academic institutions, covering battery technology, electrification and future mobility.
– ग्रेटर नोएडा में दो दिवसीय ‘प्रेरणा विमर्श-2026’ के समापन समारोह को मुख्यमंत्री योगी ने किया संबोधित
– मुख्यमंत्री योगी ने राहुल गांधी पर साधा निशाना, बोले- देश को उनसे उम्मीद करना छोड़ देना चाहिए, ये पथभ्रष्ट और मार्ग से भटके हुए लोग
– मुख्यमंत्री योगी ने कहा- समाज में भ्रम पैदा कर अव्यवस्था और अराजकता फैलाना इनका एकमात्र लक्ष्य
– मुख्यमंत्री योगी ने हामिद अंसारी पर भी साधा निशाना, बोले- भारत की समदृष्टि समझते तो हिंदू दृष्टि को नहीं कोसते
– मुख्यमंत्री योगी बोले- बीमारू राज्य से रेवेन्यू सरप्लस स्टेट बना यूपी, अर्थव्यवस्था, प्रति व्यक्ति आय और बजट हुआ तीन गुना
– मुख्यमंत्री योगी ने कहा- 9.5 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी, 96 लाख एमएसएमई इकाइयों में सवा तीन करोड़ को काम
– मुख्यमंत्री योगी बोले- यूपी में 24 हजार से अधिक स्टार्टअप, इनमें आधे महिलाओं के हाथ, महिला वर्कफोर्स 12 से बढ़कर 36-37 फीसदी
– मुख्यमंत्री योगी ने कहा- अगले तीन-चार महीने में यूपी पुलिस में 50 हजार से अधिक होगी महिलाओं की संख्या
Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी पर निशाना साधा। राहुल गांधी का नाम लिए बिना उन्हें ‘कांग्रेस का युवराज’ बताते हुए कहा कि अपने झूठ की गूंज में उन्होंने जिस प्रकार का आचरण किया, वह पूरी नारी शक्ति का अपमान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश को ऐसे लोगों से उम्मीद करना छोड़ देना चाहिए। ये पथभ्रष्ट और मार्ग से भटके हुए लोग हैं, जिनका लक्ष्य समाज में भ्रम पैदा कर अव्यवस्था और अराजकता फैलाना है।
ग्रेटर नोएडा में दो दिवसीय ‘प्रेरणा विमर्श-2026’ के समापन समारोह में मुख्यमंत्री योगी ने पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के वक्तव्य को दुर्भाग्यपूर्ण और डरावना बताया। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर रहे व्यक्ति से पद की गरिमा के अनुरूप आचरण की अपेक्षा होती है। काश वह भारत की समदृष्टि को समझ पाते तो भारत, भारतीयता और हिंदू दृष्टि को नहीं कोसते। मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तीकरण, युवाओं को रोजगार, स्टार्टअप और प्रदेश की अर्थव्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि बीमारू कहा जाने वाला उत्तर प्रदेश अब रेवेन्यू सरप्लस स्टेट और देश का ग्रोथ इंजन बन चुका है।
नारी सशक्तीकरण भाषण से नहीं, काम से होगा
मुख्यमंत्री ने कहा कि नारी गरिमा की रक्षा और महिला सशक्तीकरण केवल भाषणों से नहीं होगा। सरकार ने योजनाओं में महिलाओं को प्राथमिकता दी है। देश में तीन करोड़ परिवारों को घरौनी के माध्यम से मकान का मालिकाना अधिकार दिया गया, जिसमें पहला अधिकार महिलाओं का है। 12 करोड़ परिवारों को एलपीजी कनेक्शन और 12 करोड़ घरों में शौचालय की सुविधा दी गई। यूपी में 54 हजार बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट सखी गांवों में बैंकिंग सेवाएं दे रही हैं।
उन्होंने झांसी के बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर का उदाहरण देते हुए कहा कि 2019 में पांच महिलाओं से शुरू समूह से आज 62 हजार महिलाएं जुड़ी हैं। इसका टर्नओवर 115 करोड़ रुपए है और प्रत्येक महिला आठ से 10 हजार रुपए महीने कमा रही है। आगरा, काशी, गोरखपुर और लखनऊ में भी मिल्क प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं। इनसे करीब चार लाख महिलाएं जुड़ी हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 में यूपी पुलिस में केवल 10 हजार महिलाएं थीं, जिनकी संख्या अब 44 हजार हो गई है। अगले तीन-चार महीने में यह आंकड़ा 50 हजार के पार होगा। प्रदेश में महिला वर्कफोर्स की भागीदारी भी 12 प्रतिशत से बढ़कर 36-37 प्रतिशत हो गई है। डिजिटल एंटरप्रेन्योरशिप की नई योजना के तहत आठ हजार न्याय पंचायतों में से चार हजार में महिला उद्यमियों को जोड़कर प्रशिक्षण दिया जाएगा।
9.5 लाख सरकारी नौकरियां, सवा तीन करोड़ को एमएसएमई में काम
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में सबसे बड़ी युवा शक्ति उत्तर प्रदेश के पास है और प्रदेश में 56 प्रतिशत युवा हैं। पिछले साढ़े नौ वर्ष में 9.5 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई। 96 लाख एमएसएमई इकाइयों में सवा तीन करोड़ युवा काम कर रहे हैं। बेहतर सुरक्षा व्यवस्था के कारण प्रदेश को 50 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिले। इनमें 15 लाख करोड़ रुपए से अधिक का निवेश धरातल पर उतरा और इससे 65 लाख से अधिक युवाओं को नौकरी मिली।
अब यूपी को कोई बीमारू राज्य नहीं कहता
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था, प्रति व्यक्ति आय और बजट तीन गुना हुआ है। नौ-दस वर्ष पहले बीमारू कहा जाने वाला उत्तर प्रदेश आज रेवेन्यू सरप्लस स्टेट और भारत का ग्रोथ इंजन है। अब प्रदेश के सामने पहचान का संकट नहीं है। यह बदलाव विरासत के सम्मान और अपराध व भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति से आया है।
विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग पहले यूपी के सामने पहचान का संकट खड़ा करते थे, वे फिर दंगा, कर्फ्यू, समाज को बांटने, भेदभाव, अव्यवस्था और अराजकता का दौर लाना चाहते हैं।
120 से कम थे स्टार्टअप, अब 24 हजार से अधिक
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले यूपी में 120 से भी कम स्टार्टअप थे, जबकि आज इनकी संख्या 24 हजार से अधिक है। इनमें करीब आधे महिलाओं द्वारा संचालित हैं। उन्होंने पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह, चंद्रशेखर आजाद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और वीर सावरकर का उल्लेख करते हुए युवाओं से राष्ट्रीय नायकों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए राष्ट्र प्रथम है। देश सुरक्षित है तो धर्म, उपासना पद्धति, जाति, परिवार और व्यक्ति भी सुरक्षित हैं। नारी और युवा शक्ति का स्वावलंबन ही उत्तर प्रदेश और भारत के स्वावलंबन का आधार बनेगा।
भूतकाल जानेंगे तभी भविष्य के सपने गढ़ेंगे
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांत रंजन ने महर्षि अरविंद का उल्लेख करते हुए कहा कि जो समाज अपने भूतकाल के गौरव, वर्तमान की पीड़ा और भविष्य के सपनों को समझता है, वही उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ता है। आचार्य धर्मपाल की पुस्तक ‘द ब्यूटीफुल ट्री’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने देश, संस्कृति और उपलब्धियों को जानकर भविष्य के सपने गढ़ने चाहिए।
2020 में शुरू हुई प्रेरणा विमर्श की यात्रा
संसद टीवी के संपादक श्याम किशोर ने कहा कि कृपा शंकर के मार्गदर्शन में 2020 में प्रेरणा विमर्श की यात्रा शुरू हुई। इसके तहत स्मारिका, पुस्तकें और ‘केशव संवाद’ प्रकाशित होते हैं। विषय आधारित प्रदर्शनी भी इसका प्रमुख हिस्सा है। समाज और राष्ट्रहित में सकारात्मक पत्रकारिता करने वाली एक महिला को हर वर्ष सम्मानित किया जाता है। उन्होंने बताया कि प्रेरणा विमर्श-2026 का विषय ‘उत्कर्ष नारी सम्मान, युवा स्वाभिमान’ है।
दीप प्रज्ज्वलन से हुआ समापन समारोह का शुभारंभ
मुख्यमंत्री योगी ने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में ‘केशव संवाद’ और ‘प्रेरणा विचार’ की वैचारिक यात्रा पर वीडियो दिखाया गया और मुख्यमंत्री को दोनों पत्रिकाओं की प्रतियां सौंपी गईं। एक अन्य वीडियो में प्रदेश की नारी और युवा शक्ति की बदलती तस्वीर प्रस्तुत की गई।
समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांत रंजन, गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह, प्रेरणा विमर्श के कार्यकारी अध्यक्ष वीके गुप्ता, अध्यक्ष अनिल त्यागी, डॉ. मनमोहन सिंह सिसोदिया, प्रेरणा शोध संस्थान की अध्यक्ष प्रीति दादू, सचिव मोनिका चौहान, गौतम बुद्ध नगर के जनप्रतिनिधि और स्वयंसेवक मौजूद रहे।
Satirical Resignation Letter MP CM: ‘मैं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देता हूं…’ सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस एक लाइन के लेटर ने हर किसी को हैरान कर दिया। लेकिन जब लोगों ने इस इस्तीफे के पीछे का नाम और असली कहानी जानी, तो पूरा मामला समझ आया।
दरअसल, यह कोई असली मुख्यमंत्री का इस्तीफा नहीं, बल्कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट अभिजीत दिपके का मध्य प्रदेश सरकार पर कसा गया एक तीखा प्रहार है।
अभिजीत दिपके ने मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में 30 से अधिक आदिवासी बच्चों की मौत और वहां के बदहाल स्वास्थ्य ढांचे के विरोध में एक ‘इस्तीफा पत्र’ लिखकर राज्य सरकार की लाचारी पर सवाल उठाए हैं।
तंज भरे इस्तीफे में क्या लिखा दीपके ने?
मध्य प्रदेश के राज्यपाल को संबोधित इस व्यंग्यात्मक पत्र में दिपके ने खुद को ‘मुख्यमंत्री’ बताते हुए लिखा, ‘मुख्यमंत्री के रूप में, मैं इन बच्चों को समय पर उचित चिकित्सा देखभाल और सहायता प्रदान करने में विफल रहने की पूरी जिम्मेदारी स्वीकार करता हूं।’
इसके साथ ही उन्होंने सरकार द्वारा घोषित मुआवजे और ‘हर घर नल से जल’ के दावों पर कड़ा तंज कसते हुए कहा कि आज भी बालाघाट के कई आदिवासी परिवार पीने के पानी के लिए नदियों और नालों पर निर्भर हैं।
I hereby resign as the Chief Minister of MP with immediate effect.
यह पूरा विवाद बालाघाट जिले के बैगा और गोंड आदिवासी समुदायों के 30 से अधिक बच्चों की संदिग्ध मौत (खसरा और मलेरिया के प्रकोप) के बाद खड़ा हुआ है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य के स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और बालाघाट कलेक्टर से जवाब तलब किया है।
कोर्ट में दायर जनहित याचिका (PIL) के मुताबिक, 50 बेड की क्षमता वाले अस्पताल में करीब 400 मासूम बच्चों का इलाज चल रहा है, जिससे साफ होता है कि वहां स्वास्थ्य सुविधाएं कितनी बदहाल हैं।
ग्राउंड पर पहुंचे दिपके का हुआ भारी विरोध
अभिजीत दिपके खुद पीड़ित परिवारों से मिलने बालाघाट के गांवों में पहुंचे थे। 13 सितंबर को जब वे क्षेत्र का दौरा कर रहे थे, तभी वहां कुछ तथाकथित ‘सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स’ की भीड़ ने उन्हें घेर लिया और उन पर ‘मौतों पर राजनीति करने’ का आरोप लगाकर हंगामा शुरू कर दिया।
विवाद इतना बढ़ गया कि माहौल खराब होता देख CJP कार्यकर्ताओं को दिपके को सुरक्षित वहां से बाहर निकालना पड़ा। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
If a holiday in Goa is a fixture on your calendar, you will have noticed that the state has changed a fair bit in the last few years. There is a new airport to fly into, new bridges replacing the old, not to mention the wider highways. The latest upgrade to the state’s road network is the Porvorim Elevated Corridor, targeting a major bottleneck on NH66. We were given an exclusive opportunity to experience it for ourselves before the official inauguration on Sep 9, and we brought along a very ‘Goa’ car for the occasion – the MG Cyberster.
First, a bit of quick history and geography. National Highway 66 is a 1,640km arterial highway running from Panvel in Maharashtra to Kanyakumari in Tamil Nadu. 124km of NH66 is in Goa and, for years, Porvorim has been its most notorious bottleneck. The new 5.15km Porvorim Elevated Corridor lets traffic sail clean over all that congestion below, connecting directly to the Atal Setu bridge that crosses the Mandovi River. It promises to cut travel time between Mapusa in the north and the capital Panaji by up to 30 minutes – a claim we set out to test.
Six-laned Porvorim Elevated Corridor brings North Goa and Panaji closer than ever.
Our starting point was the north end of the corridor, a couple of kilometres away from Guirim village near Mapusa. We started our stopwatch on the concrete ramp leading up the PEC – one we would only stop once we crossed over the Atal Setu Bridge and entered Panaji. And even with 510hp and 725Nm on tap and the road all to ourselves, we would be sticking to the 65kph speed limit.
From the concrete on-ramp, it’s only a few metres until you drive onto the actual viaduct section, which is paved tarmac broken up only by expansion joints. It is not completely straight either – the north end has some lovely sweeping curves. In a car like the Cyberster, it is quite tempting to push through the bends but, exercising restraint, we instead indulged in the joys of open-top motoring. The Cyberster drops its top in 10 seconds at speeds up to 50kph, giving us superb views all around. Importantly, it also raises the top just as quickly, which comes in handy during sudden showers.
No more jams! 5.15km flyover sails over congestion at Porvorim junction.
From the driver’s seat, the panoramic view of Porvorim’s greenery was quite stunning – something you would never notice stuck in traffic below. Drive on, and the road becomes arrow-straight, and you start to notice how close some of the buildings are to the corridor. This proximity to adjoining structures, along with the fact that NH66 had to stay operational below, were among the biggest challenges the engineers faced.
Some buildings were a little too close for comfort making construction quite challenging.
The 4.19km viaduct section is supported by 87 pillars. Each span running between two pillars requires between 13 and 17 individual pre-cast concrete sections. These sections are about 24 metres wide and weigh a whopping 120 tonnes each. They were cast in a yard down the road, trucked to the site, hoisted 11 metres high and installed in place – all in a narrow space between buildings with absolutely no room for error, while ensuring minimal traffic disruptions below.
Considering the challenges, it is quite remarkable that the Porvorim Elevated Corridor was completed in just two years and five months. Below the main structure, 10.30 kilometres of service roads and 28 minor junctions keep local traffic moving, while the corridor sails above it all. Also featured are eight box culverts and a rainwater harvesting system, so the monsoon doesn’t slow traffic down. A modern lighting setup with 515 streetlights has already been installed, while two high-mast lights and ten overhead gantries with cameras are to be put up soon. All constructed at a cost of Rs 641.46 crore.
New flyover part of NH 66 open to cars, two-wheelers and CVs. Speed limit 65kph.
Before long, we were passing the Mall de Goa – close enough to see the expressions on the faces of people in the food court, as they watched the bright red Cyberster whizz past their window. As we made our way down the off-ramp, the stopwatch showed that it had been just over four and a half minutes. Heading towards the Atal Setu, we merged with the dozens coming from the diversion and became part of regular traffic.
And just like that, we were climbing the Atal Setu bridge, which would take us across the Mandovi River and into Panaji. To the right, stunning views of Panaji city and Miramar beach in the distance, and to the left, Old Goa with its historic churches, while above me, through the open roof of the Cyberster, panoramic views of the bridge’s iconic pylons and yellow cable stays.
Drop top MG Cyberster a great match for Goa’s vibe
Coming down the Atal Setu into Panaji, our stopwatch read just under 10 minutes. Even if you factor in a couple of extra minutes for traffic once the PEC opens, it equates to a real-world saving of about 30 minutes in peak hours, which is quite significant. In fact, the PEC is said to have a capacity of 70,000 PCU, or passenger car units, per day, so traffic flow is expected to be quite swift. Simultaneously, it will reduce the burden on the service and other connecting roads below the corridor, improving flow for local traffic too.
Connects directly to (yet another) Atal Setu bridge and brings you closer to Goa’s historic sites.
The Porvorim Elevated Corridor, along with other recent infra projects such as the Atal Setu, the New Zuari Bridge and the widening of NH66, is expected to boost the economy by improving intra-state connectivity to Goa’s industrial hubs, as well as flow between the airports and ports. It should also make commutes easier for residents and change the way tourists experience Goa – less time spent travelling, more time to explore the beaches, the culture and everything Goa has to offer.
In conversation with Sandip Prabhu Chodnekar, Principal Chief Engineer, Goa Public Works Department (PWD)
On the challenges faced during construction
This bridge is about 24 metres wide, but the right of way is only 25 metres. Constructing such a wide structure when both sides are already fully developed was very challenging. One of the biggest challenges was lifting the segments. Each segment is nearly 24 metres wide and weighs around 120 tonnes. We could not divert the traffic, so we had to carry out most of the work at night. During the daytime, we stopped heavy traffic so that the segments could be lifted safely and normal traffic could resume quickly.
Lifting 25 metre wide sections that weigh 120 tonnes called for nerves of steel.
On other highlights of the project
We tried to harvest the rainwater to recharge the groundwater and increase the water table. There is a median between the service roads below, where we are also planting trees. The corridor’s rainwater harvesting system collects the water and directs it into this median. From there, the water flows into pits that we have dug and filled with aggregates and strainers, allowing the rainwater to percolate into the ground. This helps harvest the rainwater and increase the water table on the plateau during the monsoon.
On traffic and usage
Below the corridor, things will be quite different. Once around 50,000 PCUs of traffic are taken off the existing four-lane road, there could be a tendency for people to park on these lanes. So, we will have to manage parking as well. We have streamlined the junctions and completely reworked the at-grade traffic flow. Motorcycles are also allowed on the Porvorim Elevated Corridor.
In conversation with Dr. Pramod Sawant, Chief Minister, Goa
On the importance of the project
The Porvorim Elevated Corridor is actually important not only for Goa but also for Maharashtra, Karnataka and Kerala. Porvorim had become a problem because it is a congested and newly developed city, with development on both sides of the road. Even after the road was widened, it was very difficult to manage, and it had become an accident-prone zone. That is why the Porvorim flyover was required, to ensure smooth traffic on NH-66.
Greater connectivity a boon for residents, tourists and businesses.
On the project’s wider connectivity benefits
With the opening of Manohar International Airport in North Goa, there was a need to improve connectivity towards South Goa. People arriving at Manohar International Airport and travelling towards South Goa were facing a lot of congestion. Now, that congestion will be reduced and this will definitely help tourism and vehicle movement in the state.
Furthermore, there will be better connectivity between the airports and ports, which will havea positive economic impact. It is also a very important project for the people of Goa. Especially those travelling between North Goa and the capital; they will save time and money, and their daily commute will become much easier.
On Goa’s future infrastructure plans
Almost all the projects on the National Highway network in Goa have been completed. One of the remaining projects is the Borim Bridge, which will connect the Ponda side. The tendering process for it will happen in the next few days.
We are planning to improve connectivity across rural Goa, from one end of Maharashtra towards Karnataka. We are considering a ring road for Goa, because traffic currently comes into the interior areas and cities. In the future, we want traffic to be able to move around the interior villages and across the state without having to enter the cities.
– CM योगी ने बाढ़ प्रभावित चित्रकूट दौरे से पहले सेल्फी वीडियो जारी कर दिया बाढ़ राहत का संदेश
– बलिया, फर्रुखाबाद और वाराणसी का दौरा कर चुके हैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
– योगी ने कहा, हर जीवन की सुरक्षा और हर परिवार तक राहत हमारा संकल्प
Chief Minister Yogi Adityanath : उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश के बाद आई बाढ़ को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोगों को भरोसा दिलाया है कि सरकार उनके साथ खड़ी है। सीएम योगी ने रविवार को चित्रकूट के दौरे से पहले अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक सेल्फी वीडियो शेयर कर बाढ़ प्रभावित इलाकों में चल रहे राहत और बचाव कार्यों की जानकारी दी।
सीएम योगी ने कहा कि ज्यादा बारिश के कारण प्रदेश के कुछ जिलों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। सरकार पूरी तेजी के साथ लोगों तक मदद पहुंचाने में जुटी है। वह खुद बाढ़ प्रभावित इलाकों में जाकर हालात देख रहे हैं और राहत-बचाव के कामों का जायजा ले रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार के मंत्री भी बाढ़ प्रभावित इलाकों में जाकर लोगों से मिल रहे हैं और राहत सामग्री बांट रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए भी सरकार काम कर रही है। सीएम योगी ने बताया कि वह बलिया, फर्रुखाबाद और वाराणसी का दौरा कर चुके हैं और आज चित्रकूट जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के लिए लोगों की सेवा सिर्फ सरकारी जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि उनके सुख-दुख में साथ खड़े रहना भी है। उन्होंने बाढ़ पीड़ितों से कहा कि संकट की इस घड़ी में वे खुद को अकेला न समझें, सरकार पूरी तरह उनके साथ है।
सीएम योगी ने कहा कि हर व्यक्ति की जान की सुरक्षा, हर प्रभावित परिवार तक राहत पहुंचाना और जरूरतमंदों की मदद करना सरकार की पहली प्राथमिकता है।
Tamil Nadu Chief Minister C. Joseph Vijay has revealed plans to develop a dedicated motorsport city in Chennai. This will include a new race track, capable of hosting F1, F2, F3, F4 and other international races.
“An Olympic city will be set up in Chennai. A Motor Sports city will also be set up in Chennai to host Formula 1 races. The talents of youth in motor sports will be identified, and training and racing opportunities will be provided to create national and international level champions,” Vijay said during the state Assembly.
He added, “Establishing world-class motor vehicle car racing arenas will provide opportunities for tourism, special vehicle manufacturing industries, employment, and economic development.”
New Chennai race track aims to host F1, F2 and more
Venue will also include training facilities
Chennai Motor Sports City plans revealed
Tamil Nadu is at the very heart of the motorsport scene in India, with tracks like the Madras International Circuit and Kari Motor Speedway hosting majority of our national championship races. There’s also the Madras International Karting arena, which is the first karting track in the country to meet global CIK (Commission Internationale de Karting) standards.
Vijay highlighted the business case behind setting up the new motorsport city in the state. Tamil Nadu is currently a leading state for the production of various two-wheelers and four-wheelers, as well as racing vehicles. He added that setting up “world class” racing venues will provide opportunities to boost tourism, specialised vehicle manufacturing industries and well as employment and the local economy in general.
While the precise location of this new motorsport city hasn’t been revealed, Vijay did share that the goal is for the venue to be capable of hosting international-level racing like F4, F3, F2 and even F1.
Driver development will be another key focus area. Vijay stated that the venue will also include training facilities to identify and nurture local racing talent in a bid to give them opportunities on the national and international stage.
India eyes F1 return
This announcement follows renewed interest from the Indian government to bring F1 back to India.
The Buddh International Circuit last hosted The F1 Indian GP from 2011 to 2013. But the race was then dropped, mainly due to the Uttar Pradesh government’s taxation policy at the time, which classified F1 as entertainment rather than sport.
However, speaking to media earlier this year, sports minister Mansukh Mandaviya shared that the government is working to make India a viable host country for international racing. “For instance, if the entertainment tax cannot be altogether repealed, we will try to ensure that reimbursements are provided to incentivise the project for the organisers. Discussions are ongoing on this issue. It is an interministerial matter, and we are trying our best to make it attractive for Formula 1,” he said at the time.
F1 CEO Stefano Domenicali has stated that there is “big interest” for the championship to return to India, but also stressed that this won’t happen any time soon and will require several conditions to be met. “There are the right things that we need to do – to again find back the right promoters, the right collaboration and the right timing, which will not be in the very short term. But when we talk about five years in Formula 1, it seems to be very far away, but it’s not,” he told F1 India broadcaster FanCode.
– प्रभावित लोगों तक आवश्यक राहत सामग्री पहुंचाई जाए
– 31 अगस्त और 1 सितंबर को सतना के स्कूलों की छुट्टी
– चित्रकूट में अतिवृष्टि से जनता प्रभावित
Chief Minister Dr. Mohan Yadav : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 30 अगस्त को सुबह सतना जिले के चित्रकूट में अतिवृष्टि से प्रभावित इलाकों का जायजा लिया और लोगों से भेंट की। इसके बाद उन्होंने सतना के जिला प्रशासन को आवश्यक कार्यों के लिए स्पष्ट निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ओरछा (जिला निवाड़ी) में हो रही संगठन की बैठक के दौरान भी दिनभर सतना जिला प्रशासन से राहत कार्यों के संबंध में जानकारी प्राप्त की।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जनता को राहत पहुंचाने में कोई कमी नहीं रहना चाहिए। सतना कलेक्टर द्वारा जानकारी दी गई कि अतिवृष्टि की स्थिति को देखते हुए विद्यार्थियों की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए जिले के सभी विद्यालयों में 31 अगस्त और 1 सितंबर को अवकाश घोषित किया गया है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशानुसार अतिवृष्टि के कारण प्रभावित नागरिकों की सहायता के लिए अधिकारियों को तीन दिन तक चित्रकूट में रहकर आवश्यक सहायता कार्यों को सुनिश्चित करने और क्षेत्र की निरंतर निगरानी के लिए कहा गया है। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रभावितों को राजस्व पुस्तक परिपत्र 6/4 के प्रावधानों के अनुसार विभिन्न तरह की हानि के लिए निर्धारित सहायता राशि प्रदान करने का कार्य किया जाए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश
सभी बाढ़ प्रभावित नागरिकों के लिए भोजन, वस्त्र, पेयजल, चिकित्सा सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं तत्काल सुनिश्चित की जाएं।
प्रभावित लोगों तक आवश्यक राहत सामग्री पहुंचाई जाए, रेस्यूत किए गए ग्रामीणों के लिए भी शुद्ध पेयजल और भोजन सुनिश्चित किया जाए।
बाढ़ से नुकसान के आकलन का कार्य समय पर हो।
जिला प्रशासन के सभी संबंधित अधिकारी प्रभावित क्षेत्र का निरंतर दौरा एवं वहीं रात्रि विश्राम करें। एसबीआरएफ और एनडीआरएफ का समुचित सहयोग प्राप्त किया जाए।
सभी प्रभावितों को सूखा राशन एवं अन्य आवश्यक राहत सामग्री भी पहुंचाई जाए।
प्रभावित परिवारों को प्रशासन के साथ ही अन्य आवश्यक सामग्री देने वाले स्वैच्छिक सहयोगियों से प्राप्त सामग्री भी उपलब्ध करवाई जाए।
स्थानीय निवासियों के साथ ही जो श्रद्धालु इस समय चित्रकूट आए हुए हैं, उन्हें भी आवश्यक सहायता प्रदान की जाए।
– मुख्यमंत्री डॉ. मोहन की रीवा संभाग-शहडोल संभाग-जबलपुर के प्रशासन के साथ अहम बैठक
– मुख्यमंत्री ने किसी भी स्थिति में बीमारी को फैलने से रोकने के निर्देश
– प्रदेश के मुखिया ने किया जल भराव वाले इलाकों का निरीक्षण
Chief Minister Dr Mohan Yadav : मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 23 अगस्त को नई दिल्ली से रीवा पहुंचे। उन्होंने यहां रीवा संभाग-शहडोल संभाग-जबलपुर के कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों के साथ अतिवृष्टि और चल रहे राहत कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने निर्देश दिए कि जहां अभी भी बाढ़ का पानी है, वहां राहत कैंप अच्छी तरह से संचालित किए जाएं। राहत कैंपों में समुचित मात्रा में खाद्य सामग्री, पीने के पानी एवं चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करें।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यदि लोगों का खाने-पीने का सामान, घर इत्यादि नष्ट हो गए हों उन्हें तत्काल आरबीसी 6 (4) के तहत सहायता उपलब्ध कराएं। इसके अलावा उन्होंने रीवा के गुलाब नगर में जल भराव का निरीक्षण भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि शिविरों में साफ-सफाई का भी विशेष ध्यान रखा जाए।
जहां बाढ़ का पानी उतर गया है, वहां शासकीय अमले को भेजें, लोगों को खाने-पीने की किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। पीने के पानी की शुद्धता के लिए सभी जल स्रोतों एवं हैंडपंपों में ब्लीचिंग पाउडर इत्यादि से क्लोरिनेशन कराएं। उन्होंने कहा कि ऐसे सभी गांव में और नगरी क्षेत्र के वार्डों में जहां बाढ़ का प्रकोप रहा है वहां विशेष चिकित्सा शिविर आयोजित करें।
महामारी फैलने से बचाएं
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बुखार एवं सर्दी जुकाम के मरीज को भी गंभीरता से लिया जाए, किसी तरह की महामारी की स्थिति निर्मित ना हो। जिन गांवों में अति वर्षा से विद्युत आपूर्ति प्रभावित हुई हो, उसे तत्काल बहाल करें।
पशु चिकित्सा विभाग को भी बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में जानवरों के इलाज में भेजें, किसी तरह की महामारी नहीं फैलनी चाहिए और यदि पशुओं की मृत्यु हुई हो तो उनका वैज्ञानिक तरीके से डिस्पोजल करें। उन्होंने कहा कि गौशालाओं इत्यादि में पशुओं के खाने-पीने एवं चारे की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करें।
फील्ड में उतरें अधिकारी-कर्मचारी
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि यदि फसल क्षति की सूचना हो तो वहां तत्काल सर्वे कराएं। यदि बुवाई वगैरा प्रारंभिक अवस्था में हो तो उसके नष्ट होने पर बीज इत्यादि की व्यवस्था करें। राजस्व विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, चिकित्सा विभाग, पशु चिकित्सा विभाग, कृषि विभाग इत्यादि के अधिकारी एवं कर्मचारियों को उनके कार्य स्थल-फील्ड में रहना सुनिश्चित करवाएं। इनके दल बनाकर प्रभावित क्षेत्रों में भेजें। सीएम डॉ. यादव ने कहा कि सभी नगरी निकायों एवं गांव में साफ सफाई का एक विशेष अभियान प्रारंभ करें ताकि किसी तरह की बीमारी न फैले।
समीक्षा बैठक के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया से कहा कि आज रीवा, शहडोल और जबलपुर संभाग में अतिवृष्टि से प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा की। प्रशासन द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविर स्थापित कर नागरिकों को आवश्यक सुविधाएं एवं सहायता उपलब्ध कराई गई। बीते दो दिनों से वर्षा थमने के बाद अधिकांश नागरिक राहत शिविरों से अपने घरों को लौट चुके हैं।
अतिवृष्टि के दौरान जिन नागरिकों के घर क्षतिग्रस्त हुए हैं तथा जहां जनहानि एवं पशुहानि हुई है, उन्हें नियमानुसार सरकार की ओर से मुआवजा एवं आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि 24 से 27 अगस्त 2026 के बीच जिन जिलों में वर्षा चक्र सक्रिय होने की संभावना है, वहां सुरक्षा की दृष्टि से प्रशासनिक अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं। संभावित प्रभावित क्षेत्रों में सतत निगरानी रखने तथा आवश्यकता के अनुरूप राहत एवं बचाव की सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
वहीं इस वर्ष प्रदेश में अब तक सामान्य से लगभग 20% कम वर्षा हुई है। इसे ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग को कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलों को प्रोत्साहित करने तथा किसानों को आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि बदलती मौसम परिस्थितियों के बीच नागरिकों की सुरक्षा के साथ-साथ किसानों के हितों का भी पूरा ध्यान रखा जाए।
Gautam Adani meets DK Shivakumar: अडानी ग्रुप के चेयरमैन और दिग्गज उद्योगपति गौतम अडानी ने रविवार 23 अगस्त को राजधानी बेंगलुरु में कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मुलाकात की। शिवकुमार के सदाशिवनगर स्थित आवास पर यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) बेंगलुरु के 16.75 किलोमीटर लंबे टनल रोड प्रोजेक्ट के दोनों पैकेजों के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी (L1) बनकर उभरी है।
हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) और अडानी ग्रुप की ओर से इस मुलाकात को लेकर अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सामने आए वीडियो में शिवकुमार को गौतम अडानी को विदा करते हुए देखा गया। सूत्रों के मुताबिक, अडानी आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर की यात्रा के बाद एयरपोर्ट जाते समय मुख्यमंत्री के आवास पहुंचे थे।
टनल रोड प्रोजेक्ट से जुड़ी है मुलाकात?
गौतम अडानी और सीएम डीके शिवकुमार की मुलाकात का समय इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दिसंबर 2025 में अडानी एंटरप्राइजेज ने सेंट्रल सिल्क बोर्ड से हेब्बाल तक प्रस्तावित 16.75 किलोमीटर टनल रोड प्रोजेक्ट के दोनों पैकेजों के लिए सबसे कम बोली लगाई थी। बेंगलुरु स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (B-SMILE) की ओर से दिसंबर 2025 में खोली गई फाइनेंशियल बिड्स से पता चलता है कि AEL ने दोनों पैकेजों में L1 रही थी यानी सबसे कम बोली लगाई थी।
राज्य सरकार ने पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 17,698 करोड़ रुपये रखी थी। वहीं, अडानी एंटरप्राइजेज ने करीब 22,267 करोड़ रुपये की बोली लगाई। यानी कंपनी की बोली सरकारी अनुमान से लगभग 4,600 करोड़ रुपये ज्यादा है। सूत्रों ने बताया कि प्रोजेक्ट को पूरा करने वाली स्पेशल पर्पस व्हीकल (SPV) B-SMILE ने 29 मई को राज्य सरकार को फाइल भेजी थी। उसी दिन राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का इस्तीफा औपचारिक रूप से स्वीकार किया था।
अभी नहीं मिला है ठेका
हालांकि, अडानी एंटरप्राइजेज के सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी बनने के बावजूद अभी तक उसे आधिकारिक तौर पर प्रोजेक्ट का ठेका नहीं दिया गया है। सूत्रों ने हमारे सहयोगी ‘मनीकंट्रोल’ को बताया कि इस प्रोजेक्ट को लागू करने वाली विशेष उद्देश्य कंपनी (SPV) B-SMILE ने 29 मई को संबंधित फाइल राज्य सरकार को भेजी थी। अधिकारियों के मुताबिक, अडानी की बोली परियोजना के स्वीकृत अनुमान से निर्धारित सीमा से अधिक होने के कारण अब कैबिनेट की मंजूरी जरूरी हो गई है।
शिवकुमार के लिए अहम है ये प्रोजेक्ट
बेंगलुरु का यह टनल रोड प्रोजेक्ट डीके शिवकुमार की प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं में शामिल माना जाता है। बेंगलुरु विकास मंत्री रहते हुए भी उन्होंने इस प्रोजेक्ट का लगातार समर्थन किया था। हालांकि, प्रोजेक्ट को लेकर नागरिक संगठनों और शहरी परिवहन विशेषज्ञों की ओर से विरोध भी सामने आया है। आलोचकों ने इसकी लागत, ट्रैफिक पर प्रभाव और बेंगलुरु की परिवहन व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं।
30 साल तक निजी कंपनी को मिलेगा संचालन अधिकार
प्रस्तावित टनल रोड को संशोधित Build, Own, Operate and Transfer (BOOT) मॉडल के तहत विकसित किया जाना है। इस मॉडल के तहत कर्नाटक सरकार प्रोजेक्ट को आर्थिक रूप से मुमकिन बनाने के लिए ‘वायबिलिटी गैप फंडिंग (Viability Gap Funding)’ देगी। सरकार प्रोजेक्ट की लागत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा उठाएगी। जबकि प्राइवेट कंपनी लगभग 30 साल की अवधि में कंसेशन व्यवस्था के जरिए अपना निवेश वसूल करेगी।
अडानी ग्रुप की कर्नाटक में मौजूदगी
अडानी ग्रुप की कर्नाटक में पहले से ही मजूत बिजनेस मौजूदगी है। ग्रुप की कंपनियों ने राज्य में रिन्यूएबल एनर्जी, सीमेंट मैन्युफैक्चरिंग और फ़ूड प्रोसेसिंग जैसे सेक्टर में निवेश किया है। इसके अलावा, अडानी ग्रुप उडुपी थर्मल पावर प्लांट और मंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट का संचालन भी करता है।
राहुल गांधी के बयानों से बढ़ी नजर
अडानी की शिवकुमार से मुलाकात राजनीतिक रूप से भी चर्चा का विषय बन गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार अडानी ग्रुप को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर सवाल उठाते रहे हैं। सरकार पर उद्योग समूह को फायदा पहुंचाने के आरोप लगाते रहे हैं। राहुल गांधी कई अडानी से जुड़े प्रोजेक्टों, जिनमें ग्रेट निकोबार परियोजना भी शामिल है, लेकिन आपत्ति जता चुके हैं। हालांकि, केंद्र सरकार और अडानी ग्रुप दोनों ने इन आरोपों को खारिज किया है।
ऐसे में अडानी की मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मुलाकात और बेंगलुरु टनल रोड प्रोजेक्ट में उनकी कंपनी के L1 bidder बनने का घटनाक्रम अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर खासा ध्यान खींच रहा है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि बैठक में टनल रोड प्रोजेक्ट पर कोई चर्चा हुई या नहीं।
गुजरात में जैन मंदिर पहुंचे थे अडानी
इस मुलाकात से पहले गौतम अडानी गुजरात के गांधीनगर जिले स्थित प्रसिद्ध महुडी जैन तीर्थ पहुंचे थे। उनके साथ उनकी पत्नी प्रीति अडानी, बड़े बेटे करण अडानी और बहू परिधि अडानी भी थीं। अडानी ने मंदिर में पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया।
Bengaluru, Karnataka: Adani Group Chairman Gautam Adani leaves the residence of Chief Minister DK Shivakumar after meeting him pic.twitter.com/z9gjSc5HHO
अडानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी यात्रा की जानकारी शेयर करते हुए कहा था कि उन्हें महुडी जैन तीर्थ के दर्शन का सौभाग्य मिला। उन्होंने जैन धर्म के अहिंसा, आत्म-अनुशासन और करुणा के संदेश का उल्लेख करते हुए सभी के शांति, समृद्धि और कल्याण की कामना की। यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब जैन समुदाय पर्युषण महापर्व की तैयारियों में जुटा है। इस वर्ष पर्युषण महापर्व 8 सितंबर से शुरू होगा।
– कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण योजना बनी दिव्यांगजनों का मजबूत संबल
– ब्रेल किट और स्मार्ट केन से आसान हुआ दिव्यांगजनों का दैनिक जीवन
– जरूरत के मुताबिक ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर और अन्य उपकरण उपलब्ध
– 40 प्रतिशत या अधिक दिव्यांगता वाले पात्र लाभार्थियों को मिल रहा लाभ
Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर, सम्मानजनक और सुविधाजनक जीवन उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रभावी कदम उठा रही है। दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा संचालित कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण योजना के माध्यम से पात्र दिव्यांगजनों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप कृत्रिम अंग एवं विभिन्न सहायक उपकरण निःशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। बदलते समय की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए योजना को आधुनिक तकनीक से भी जोड़ा गया है, जिसके तहत पात्र लाभार्थियों को स्मार्टफोन, टैबलेट और डेजी प्लेयर जैसे डिजिटल उपकरण भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
स्मार्टफोन और टैबलेट से बढ़ी डिजिटल पहुंच
डिजिटल युग में शिक्षा, संचार, सूचना और सरकारी सेवाओं तक पहुंच को आसान बनाने के उद्देश्य से योजना के अंतर्गत पात्र दिव्यांगजनों को स्मार्टफोन एवं टैबलेट जैसे डिजिटल उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे विशेष रूप से दिव्यांग छात्र-छात्राओं और युवाओं को ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल संचार, अध्ययन सामग्री तथा विभिन्न ऑनलाइन सरकारी सेवाओं एवं सूचनाओं तक पहुंच बनाने में मदद मिल रही है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में 34,420 पात्र दिव्यांगजनों को विभिन्न कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरित किए गए हैं। डिजिटल उपकरणों को योजना से जोड़ने से दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण को तकनीक का नया आयाम मिला है।
कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण योजना के अंतर्गत दिव्यांगजनों को उनकी शारीरिक आवश्यकता एवं चिकित्सकीय संस्तुति के आधार पर विभिन्न प्रकार के उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं। इनमें ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर, बैसाखी, श्रवण यंत्र, एमआर किट, ब्रेल किट, एडीएल किट, वॉकर, रोटेटर और स्मार्ट केन सहित अनेक सहायक उपकरण शामिल हैं।
दृष्टिबाधित दिव्यांगजनों के लिए ब्रेल किट एवं स्मार्ट केन जैसे उपकरण दैनिक जीवन को अधिक सुगम बनाने में सहायक हैं, जबकि गतिबाधित दिव्यांगजनों के लिए ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर एवं अन्य मोबिलिटी उपकरण आवागमन और स्वतंत्र गतिशीलता को बढ़ावा देते हैं। चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार विभिन्न प्रकार के कृत्रिम अंग भी उपलब्ध कराए जाते हैं। वर्तमान व्यवस्था के अंतर्गत पात्र दिव्यांगजनों को 15 हजार रुपये तक की लागत वाले निर्धारित कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण निःशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं।
योजना का लाभ लेने के लिए निर्धारित है पात्रता
कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण योजना का संचालन विभागीय पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन किया जा रहा है। योजना का लाभ सामान्यतः 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता प्रमाणित होने पर निर्धारित पात्रता के अनुसार दिया जाता है। संबंधित उपकरण की आवश्यकता के संबंध में चिकित्साधिकारी की संस्तुति भी आवश्यक होती है।
पात्रता के लिए आवेदक को निर्धारित आय सीमा एवं अन्य शर्तों को पूरा करना होता है। सामान्यतः ग्रामीण क्षेत्रों के लिए वार्षिक पारिवारिक आय सीमा 46,080 रुपये तथा शहरी क्षेत्रों के लिए 56,460 रुपये निर्धारित है। आवेदक को पिछले तीन वर्षों में उसी उद्देश्य के लिए समान उपकरण का लाभ नहीं मिला होना चाहिए।
नियमित शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए निर्धारित अवधि एक वर्ष है। आवेदन के लिए दिव्यांगता प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, फोटो तथा संबंधित उपकरण के लिए चिकित्सकीय संस्तुति सहित आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत करने होते हैं।
ऑनलाइन प्रक्रिया से पारदर्शिता और सुगमता
योजना को ऑनलाइन किए जाने से पात्र दिव्यांगजनों के लिए आवेदन एवं योजना तक पहुंच अधिक सुगम हुई है। विभाग का प्रयास है कि पात्र लाभार्थियों का चिन्हांकन, सत्यापन एवं उपकरण वितरण की प्रक्रिया पारदर्शी, समयबद्ध और सुगम तरीके से पूरी की जाए।
दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना प्राथमिकता
दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के उपनिदेशक डॉ. अमित कुमार राय ने बताया कि विभाग का उद्देश्य केवल दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि उन्हें शिक्षा, रोजगार, डिजिटल सेवाओं और समाज की मुख्यधारा से जोड़ते हुए आत्मनिर्भर बनाना है।
उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन, टैबलेट और डेजी प्लेयर जैसे डिजिटल उपकरणों के साथ-साथ मोबिलिटी एवं अन्य सहायक उपकरण दिव्यांगजनों की वास्तविक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उनके जीवन को अधिक सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।