उद्योगपति गौतम अडानी ने कर्नाटक CM डीके शिवकुमार से की मुलाकात, टनल रोड प्रोजेक्ट में Adani Group बनी है सबसे बड़ी दावेदार

Gautam Adani meets DK Shivakumar: अडानी ग्रुप के चेयरमैन और दिग्गज उद्योगपति गौतम अडानी ने रविवार 23 अगस्त को राजधानी बेंगलुरु में कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मुलाकात की। शिवकुमार के सदाशिवनगर स्थित आवास पर यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) बेंगलुरु के 16.75 किलोमीटर लंबे टनल रोड प्रोजेक्ट के दोनों पैकेजों के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी (L1) बनकर उभरी है।

हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) और अडानी ग्रुप की ओर से इस मुलाकात को लेकर अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सामने आए वीडियो में शिवकुमार को गौतम अडानी को विदा करते हुए देखा गया। सूत्रों के मुताबिक, अडानी आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर की यात्रा के बाद एयरपोर्ट जाते समय मुख्यमंत्री के आवास पहुंचे थे।

टनल रोड प्रोजेक्ट से जुड़ी है मुलाकात?

गौतम अडानी और सीएम डीके शिवकुमार की मुलाकात का समय इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दिसंबर 2025 में अडानी एंटरप्राइजेज ने सेंट्रल सिल्क बोर्ड से हेब्बाल तक प्रस्तावित 16.75 किलोमीटर टनल रोड प्रोजेक्ट के दोनों पैकेजों के लिए सबसे कम बोली लगाई थी। बेंगलुरु स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (B-SMILE) की ओर से दिसंबर 2025 में खोली गई फाइनेंशियल बिड्स से पता चलता है कि AEL ने दोनों पैकेजों में L1 रही थी यानी सबसे कम बोली लगाई थी।

राज्य सरकार ने पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 17,698 करोड़ रुपये रखी थी। वहीं, अडानी एंटरप्राइजेज ने करीब 22,267 करोड़ रुपये की बोली लगाई। यानी कंपनी की बोली सरकारी अनुमान से लगभग 4,600 करोड़ रुपये ज्यादा है। सूत्रों ने बताया कि प्रोजेक्ट को पूरा करने वाली स्पेशल पर्पस व्हीकल (SPV) B-SMILE ने 29 मई को राज्य सरकार को फाइल भेजी थी। उसी दिन राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का इस्तीफा औपचारिक रूप से स्वीकार किया था।

अभी नहीं मिला है ठेका

हालांकि, अडानी एंटरप्राइजेज के सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी बनने के बावजूद अभी तक उसे आधिकारिक तौर पर प्रोजेक्ट का ठेका नहीं दिया गया है। सूत्रों ने हमारे सहयोगी ‘मनीकंट्रोल’ को बताया कि इस प्रोजेक्ट को लागू करने वाली विशेष उद्देश्य कंपनी (SPV) B-SMILE ने 29 मई को संबंधित फाइल राज्य सरकार को भेजी थी। अधिकारियों के मुताबिक, अडानी की बोली परियोजना के स्वीकृत अनुमान से निर्धारित सीमा से अधिक होने के कारण अब कैबिनेट की मंजूरी जरूरी हो गई है।

शिवकुमार के लिए अहम है ये प्रोजेक्ट

बेंगलुरु का यह टनल रोड प्रोजेक्ट डीके शिवकुमार की प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं में शामिल माना जाता है। बेंगलुरु विकास मंत्री रहते हुए भी उन्होंने इस प्रोजेक्ट का लगातार समर्थन किया था। हालांकि, प्रोजेक्ट को लेकर नागरिक संगठनों और शहरी परिवहन विशेषज्ञों की ओर से विरोध भी सामने आया है। आलोचकों ने इसकी लागत, ट्रैफिक पर प्रभाव और बेंगलुरु की परिवहन व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं।

30 साल तक निजी कंपनी को मिलेगा संचालन अधिकार

प्रस्तावित टनल रोड को संशोधित Build, Own, Operate and Transfer (BOOT) मॉडल के तहत विकसित किया जाना है। इस मॉडल के तहत कर्नाटक सरकार प्रोजेक्ट को आर्थिक रूप से मुमकिन बनाने के लिए ‘वायबिलिटी गैप फंडिंग (Viability Gap Funding)’ देगी। सरकार प्रोजेक्ट की लागत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा उठाएगी। जबकि प्राइवेट कंपनी लगभग 30 साल की अवधि में कंसेशन व्यवस्था के जरिए अपना निवेश वसूल करेगी।

अडानी ग्रुप की कर्नाटक में मौजूदगी

अडानी ग्रुप की कर्नाटक में पहले से ही मजूत बिजनेस मौजूदगी है। ग्रुप की कंपनियों ने राज्य में रिन्यूएबल एनर्जी, सीमेंट मैन्युफैक्चरिंग और फ़ूड प्रोसेसिंग जैसे सेक्टर में निवेश किया है। इसके अलावा, अडानी ग्रुप उडुपी थर्मल पावर प्लांट और मंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट का संचालन भी करता है।

राहुल गांधी के बयानों से बढ़ी नजर

अडानी की शिवकुमार से मुलाकात राजनीतिक रूप से भी चर्चा का विषय बन गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार अडानी ग्रुप को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर सवाल उठाते रहे हैं। सरकार पर उद्योग समूह को फायदा पहुंचाने के आरोप लगाते रहे हैं। राहुल गांधी कई अडानी से जुड़े प्रोजेक्टों, जिनमें ग्रेट निकोबार परियोजना भी शामिल है, लेकिन आपत्ति जता चुके हैं। हालांकि, केंद्र सरकार और अडानी ग्रुप दोनों ने इन आरोपों को खारिज किया है।

ऐसे में अडानी की मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मुलाकात और बेंगलुरु टनल रोड प्रोजेक्ट में उनकी कंपनी के L1 bidder बनने का घटनाक्रम अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर खासा ध्यान खींच रहा है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि बैठक में टनल रोड प्रोजेक्ट पर कोई चर्चा हुई या नहीं।

गुजरात में जैन मंदिर पहुंचे थे अडानी

इस मुलाकात से पहले गौतम अडानी गुजरात के गांधीनगर जिले स्थित प्रसिद्ध महुडी जैन तीर्थ पहुंचे थे। उनके साथ उनकी पत्नी प्रीति अडानी, बड़े बेटे करण अडानी और बहू परिधि अडानी भी थीं। अडानी ने मंदिर में पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया।

अडानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी यात्रा की जानकारी शेयर करते हुए कहा था कि उन्हें महुडी जैन तीर्थ के दर्शन का सौभाग्य मिला। उन्होंने जैन धर्म के अहिंसा, आत्म-अनुशासन और करुणा के संदेश का उल्लेख करते हुए सभी के शांति, समृद्धि और कल्याण की कामना की। यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब जैन समुदाय पर्युषण महापर्व की तैयारियों में जुटा है। इस वर्ष पर्युषण महापर्व 8 सितंबर से शुरू होगा।

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गौतम अदाणी ने लॉन्च किया ‘वंदे भारतम’, होनहार आंत्रप्रेन्योर्स और इनोवेटर्स को आगे बढ़ने का मौका देगा यह प्लेटफॉर्म

अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने 25 जून को ‘वंदे भारतम’ की शुरुआत की। यह आंत्रप्रेन्योर्स, इनोवेटर्स और जमीनी स्तर पर बुनियादी बदलाव लाने वाले लोगों की तलाश करने वाला एक देशव्यापी प्लेटफॉर्म है। इसकी पहुंच देश के हर कोने तक होगी। अदाणी ने अपने 64वें जन्मदिन के मौके पर इस प्रोग्राम का ऐलान किया।

इस प्रोग्राम के तहत देश के 800 जिलें आएंगे

वंदे भारतम प्रोग्राम के तहत देश के 36 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के 800 से ज्यादा जिले आएंगे। कई भारतीय भाषाओं के जरिए पार्टिसिपेंट्स इस प्रोग्राम का हिस्सा बन सकते हैं। इसका मकसद देश में आंत्रप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देना है। यह देश में पहले से मौजूद स्टार्टअप हब के अलावा काम करेगा।

भारत में टैलेंट की कमी नहीं, लेकिन मौकों की कमी

वंदे भारतम की लॉन्चिंग के मौके पर अदाणी ने अपने खुद के सफर के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल उनकी इस सोच से प्रेरित है कि टैलेंट पूरे देश में मौजूद है, लेकिन उसे बढ़ने के लिए एकसमान मौके उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने कहा, “मैंने बहुत छोटे स्तर से शुरुआत की थी। मैंने जो कुछ हासिल किया है, उसकी वजह वे मौके हैं, जो इस देश ने हमें दिया है।”

सिर्फ कुछ बड़े शहरों से निकल रहे आंत्रप्रेन्योर्स 

उन्होंने कहा कि भारत टैलेंट के मामले में समृद्ध है। लेकिन, कई योग्य लोगों को अपने आइडिया के बारे में बताने का प्लेटफॉर्म नहीं मिल पाता है। उन्होंने कहा कि इंडिया दुनिया के सबसे स्टार्टअप ईकोसिस्टम के रूप में उभरा है, लेकिन आंत्रप्रेन्योर्स की सफलता सिर्फ कुछ बड़े शहरों तक सीमित है।

देश के हर व्यक्ति के लिए खुला है यह प्रोग्राम 

अदाणी ने कहा कि वंदे भारतम के जरिए अदाणी ग्रुप को उम्मीद है कि वह ऐसे होनहार इनोवेटर्स की पहचान कर सकेगा, जिनके आइडिया का इस्तेमाल सही सपोर्ट ईकोसिस्टम के साथ बड़े उद्यम बनाने के लिए किया जा सकेगा। यह प्रोग्राम हर व्यक्ति के लिए खुला है। किसी भी बैकग्राउंड का व्यक्ति इसका हिस्सा बन सकता है। उम्र, शिक्षा, प्रोफेशन या बिजनेस से जुड़ी किसी तरह की शर्त नहीं रखी गई है।

अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े लोग भेज सकते हैं आवेदन

आवेदक अपने शुरुआती आइडिया या मौजूदा बिजनेसेज के प्रोटोटाइप सब्मिट कर सकते हैं। आवेदन करने के लिए रजिस्टर्ड स्टार्टअप जरूरी नहीं है। कंपनी ने बताया कि अलग-अलग क्षेत्रों से अप्लिकेंशन स्वीकार किए जाएंगे। इनमें टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग, एग्रीकल्चर, सस्टेनेबिलिटी, ट्रेडिशनल क्राफ्ट्स और कम्युनिटी आधारित इनोवेशंस शामिल हैं।

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प्रोग्राम के अंतिम दौर में 75 लोगों का चयन होगा

स्टेट और रीजनल राउंड्स के बाद इनटेंसिव मेंटॉरशिप प्रोग्राम के लिए 75 लोगों का अंतिम रूप से चयन किया जाएगा। अहमदाबाद में होने वाले इस मेंटॉरशिप प्रोग्राम के तहत चुने गए लोगों को इनवेस्टर्स, बिजनेस लीडर्स और इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स के साथ बातचीत करने का मौका मिलेगा। कार्यक्रम के आखिर में आयोजित फाइनल मौके पर चुने गए लोगों को नकद पुरस्कार और कैटेगरी से संबंधित सम्मान प्रदान किया जाएगा। इस प्रतियोगिता का समापन स्वतंत्रता दिवस के करीब होगा।