सपा को बड़ा झटका, यूपी चुनाव से पहले तीन बागी विधायक भाजपा में शामिल

सपा को बड़ा झटका, यूपी चुनाव से पहले तीन बागी विधायक भाजपा में शामिल

Samajwadi Party Rebel MLAs: उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव 2027 से ठीक पहले अमेठी में सियासी सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। अमेठी जनपद के गौरीगंज स्थित मंगलम भवन के सामने मैदान में आयोजित एक विशाल राजनीतिक कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी (सपा) के तीन बागी विधायकों ने अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ भाजपा की विधिवत सदस्यता ग्रहण कर ली है। अमेठी के राजनीतिक इतिहास में यह पहला मौका है जब एक साथ इतनी भारी संख्या में दिग्गज नेताओं ने दल-बदल किया है।

​समारोह में दिग्गजों की रही मौजूदगी

​भाजपा की राष्ट्रीय महामंत्री बनने के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री और अमेठी की पूर्व सांसद स्मृति ईरानी मंगलवार को पहली बार अमेठी पहुंचीं। उनकी अगुवाई और मौजूदगी में यह बड़ा राजनीतिक फेरबदल हुआ। इस दौरान मुख्य रूप से पंकज चौधरी (भाजपा प्रदेश अध्यक्ष), ​अमरपाल मौर्य (पिछड़ा वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष), ​दारा सिंह चौहान (यूपी सरकार के मंत्री) तथा कई अन्य सांसद, विधायक और स्थानीय वरिष्ठ नेता भी शामिल थे। 

कौन हैं भाजपा में शामिल होने वाले सपा विधायक?

  • ​राकेश प्रताप सिंह : गौरीगंज विधानसभा क्षेत्र से तीन बार के सपा विधायक। पार्टी विरोधी गतिविधियों और रामचरितमानस विवाद के बाद सपा ने इन्हें निष्कासित कर दिया था। 2024 के लोकसभा चुनाव में इन्होंने खुलकर भाजपा प्रत्याशी स्मृति ईरानी का समर्थन किया था और गौरीगंज से अयोध्या तक राम मंदिर पदयात्रा भी निकाली थी।
  • ​अभय सिंह (अभय प्रताप सिंह) : गोसाईगंज (अयोध्या) से विधायक हैं। उन्होंने अपनी पत्नी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य सरिता सिंह और पिता भगवान बख्श सिंह समेत भारी संख्या में समर्थकों के साथ भाजपा की सदस्यता ली।
  • ​विनोद चतुर्वेदी : जालौन के कालपी विधानसभा क्षेत्र से सपा विधायक, जो अपने कई समर्थकों के साथ भाजपा में शामिल हुए।

​क्या कहा राकेश प्रताप सिंह ने?

​सपा से निष्कासित और गौरीगंज विधायक राकेश प्रताप सिंह ने भाजपा में शामिल होने पर स्पष्ट कहा कि वे ‘राष्ट्र और राम’ के लिए भाजपा का साथ देने जा रहे हैं। गौरतलब है कि इन तीनों ही विधायकों ने पहले राज्यसभा चुनाव के दौरान भी पार्टी लाइन से हटकर क्रॉस वोटिंग करते हुए भाजपा उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान किया था।

​राजनीतिक समीकरण और आगे की राह

​यह पूरा घटनाक्रम अवध और बुंदेलखंड क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा के टिकट पर जीतकर सदन पहुंचे इन तीनों कद्दावर विधायकों का पार्टी छोड़कर भाजपा में जाना, समाजवादी पार्टी के लिए एक तगड़ा झटका है। वहीं, आगामी 2027 के चुनावों से पहले इस बड़े फेरबदल से भाजपा की ज़मीनी पकड़ कितनी मजबूत होती है, यह तो आने वाला वक्त ही तय करेगा, लेकिन फिलहाल अमेठी का यह सियासी घटनाक्रम राज्य की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

VinFast takes first step toward entering Indian two-wheeler market

VinFast takes first step toward entering Indian two-wheeler market
An outdoor image showing large group of people standing together in front of the Vinfast headquarter

VinFast entered the Indian market in 2025, with activities spanning from the distribution, manufacturing and assembly of electric cars. Following this, the brand also showed some e-scooters at Auto Expo and then subsequently patented designs of some of them in our market, all hinting at plans to enter the huge Indian two-wheeler market. The signing of these letters of intent (LOIs) and partnering with numerous electric two-wheeler dealers now marks a new phase in the brand’s expansion in the Indian market.

  1. Partnered with 50+ electric two-wheeler dealers across 15 states
  2. Plans to establish showrooms across 34 cities
  3. Line-up likely to feature the recently patented Viper and Rasad e-scooters

Retail network expansion details   

Over 50 showrooms panned 15 states

Vinfast and its dealer partners will work together to establish 50+ electric two-wheeler showrooms across 34 cities in 15 states and territories. The locations that the company is targeting to establish a presence in first include Delhi, Rajasthan, Punjab, Madhya Pradesh, Chhattisgarh, Uttar Pradesh, Maharashtra, Gujarat, Karnataka, Telangana, Tamil Nadu, Kerala, Andhra Pradesh, West Bengal and Odisha. Through these partnerships VinFast plans to bring its electric scooter line-up to the country, though it hasn’t shared any timelines so far. Initial line-up expected to feature the Viper and Rasad electric scooters, following design patents filed in India earlier this year.

These selected cities and regions have large two-wheeler markets, providing significant room for the brand’s expansion. VinFast says in fiscal year 2025-2026 there were 21.41 million two-wheelers registered, of which electric vehicles accounted for only 6.54 percent. When VinFast does officially launch some of its models in our country, it will have to ward off stiff competition from both established legacy players as well as mould-breaking start-ups like Bajaj, TVS, Hero, Suzuki, Yamaha, Ather and River.

Virat Kohli को Premanand Maharaj के Ashram जाने के मिले 5 करोड़? सामने आया बड़ा सच

Premanand Maharaj ashram controversy

पूर्व भारतीय कप्तान Virat Kohli को लेकर सोशल मीडिया पर एक दावा तेजी से वायरल हो रहा है कि उन्हें Vrindavan स्थित Premanand Maharaj के Ashram जाने के लिए 5 करोड़ रुपए दिए गए थे। अब Kohli की टीम ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

 

 Team Virat Kohli ने क्या कहा?

 

Virat Kohli के spokesperson ने बयान जारी कर आरोप को “completely false, baseless and factually incorrect” बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि Kohli Premanand Maharaj से मिलने उनके प्रति अपनी व्यक्तिगत आस्था और श्रद्धा के चलते जाते हैं।

 

Spokesperson ने मीडिया से भी अपील की कि किसी भी ऐसे दावे को आगे बढ़ाने या प्रकाशित करने से पहले उसकी पूरी तरह fact-checking की जाए और जिम्मेदारी से रिपोर्ट किया जाए।

 

कहां से आया 5 करोड़ का दावा?

 

यह आरोप Dinesh Sharma उर्फ ‘Falahari Maharaj’ की ओर से सामने आया था। वह Shri Krishna Janmabhoomi Sangharsh Nyas के अध्यक्ष हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने Uttar Pradesh के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath को लिखे एक पत्र में दावा किया था कि Rajasthan की एक private company ने Virat Kohli को Premanand Maharaj के Ashram तक लाने के लिए 5 करोड़ रुपए खर्च किए।

 

हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। Kohli को इस यात्रा के लिए भुगतान किए जाने से जुड़ा कोई verified payment record, contract या अन्य सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है।

 

 Virat Kohli और Anushka Sharma कई बार मिल चुके हैं

 

Virat Kohli और उनकी पत्नी Anushka Sharma की Premanand Maharaj से मुलाकात पहले भी कई बार हो चुकी है। दोनों जनवरी 2023 में अपनी बेटी Vamika के साथ पहली बार Vrindavan Ashram पहुंचे थे। इसके बाद 2025 में भी दोनों ने Premanand Maharaj से मुलाकात की थी।

 

Kohli के Test cricket से retirement के बाद हुई एक मुलाकात में Premanand Maharaj ने उन्हें जीवन और सफलता को लेकर संदेश भी दिया था। उन्होंने Kohli को अपने काम को सेवा की तरह देखने, विनम्र रहने और ईश्वर के प्रति आस्था बनाए रखने की सलाह दी थी।

 

Cricket में भी जारी है Kohli का जलवा

 

Cricket की बात करें तो Virat Kohli ने हाल ही में West Indies के खिलाफ तीन मैचों की ODI series से वापसी की। पहले मैच में उन्होंने नाबाद 139 रन की शानदार पारी खेली और 15,000 ODI runs पूरे करने वाले दुनिया के दूसरे बल्लेबाज बने।

 

यह उपलब्धि हासिल करने वाले वह Sachin Tendulkar के बाद दूसरे बल्लेबाज हैं। पूरी series में Kohli ने 168 रन बनाए। अब उनकी नजर India के अगले ODI assignments और 2027 ODI World Cup पर है।

 

6 दिन के मेगा हेल्थ कैंप से गाजीपुर पहुंचीं सुपर स्पेशलिटी सेवाएं, डॉक्टरों की 35000 मरीजों की जांच और 346 सर्जरियां की गईं

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के ग्रामीणों को हाल ही में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी सुपर स्पेशलिटी सेवाओं का अनुभव प्राप्त हुआ। इससे पहले इन्हें अव्वल दर्जे की स्पेशलिस्ट हेल्थकेयर सेवाएं पाने के लिए वाराणसी या लखनऊ जैसे शहरों का रुख करना पड़ता था। लेकिन छह दिनों तक ऐसी कई सेवाओं का लाभ उन्हें अपने ही जिले में पाने का मौका मिला। यह अवसर उन्हें जिले में सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित एक मेगा हेल्थ कैंप के जरिए मिला।

यह 6 दिनों का था, जिसका उद्घाटन 26 सितंबर को राज्य के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने किया। इस कैंप में 35,200 मरीजों ने चेकअप कराया और 346 सर्जरी की गईं। इसमें ऐसे मुश्किल प्रोसीजर भी शामिल थे जिनके लिए आम तौर पर मरीजों को जिले से बाहर जाना पड़ता है। युवा बीजेपी नेता अभिनव सिन्हा के नेतृत्व में इस कैंप का आयोजन किया गया था। इसमें ओपीडी सेवा 28 सितंबर तक चलीं, जिसके बाद 28 सितंबर से 1 अक्टूबर तक सर्जरी हुईं।

इस पहल की खास बात यह थी कि एक ही जगह पर इतनी बड़ी मात्रा में स्पेशलिस्ट केयर उपलब्ध थी। इसमें 498 डॉक्टरों और हेल्थकेयर वर्कर्स की टीम ने हिस्सा लिया, जिसमें AIIMS दिल्ली, जसलोक हॉस्पिटल मुंबई, अपोलो हॉस्पिटल दिल्ली और हेरिटेज हॉस्पिटल वाराणसी से जुड़े स्पेशलिस्ट शामिल थे। मरीजों को कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी से लेकर ऑर्थोपेडिक्स, ऑप्थल्मोलॉजी, गायनेकोलॉजी, पीडियाट्रिक्स, डर्मेटोलॉजी, यूरोलॉजी और प्लास्टिक सर्जरी तक 15 विशेषज्ञ सेवाएं मिलीं। तीन दिन के ओपीडी फेज के दौरान, 35,828 लैब टेस्ट भी किए गए। कैंप में 346 सर्जरी हुईं, जिसमें 140 आंखों की सर्जरी और 206 दूसरे प्रोसीजर शामिल थे। इनमें ऑर्थोपेडिक्स, जनरल सर्जरी और प्लास्टिक सर्जरी से जुड़े 22 बड़े मुश्किल केस थे।

जनरल मेडिसिन, ऑर्थोपेडिक्स, ऑप्थल्मोलॉजी और न्यूरोलॉजी में कुल मिलाकर 21,120 मरीज आए – जो OPD में आने वालों का 60% है। बाकी 11 स्पेशलिटी OPD में और 14,080 मरीजों का इलाज किया गया। इस बड़े मेडिकल ऑपरेशन में 350 से ज्यादा वॉलंटियर्स ने मदद की, जिन्हें “गाजीपुर के स्वस्थ योद्धा” कहा गया, जिन्होंने मरीजों को रजिस्ट्रेशन, नेविगेशन और जगह पर देखभाल में मदद की। मेडिकल टीम में फैकल्टी और कंसल्टेंट, रेजिडेंट, इंटर्न, नर्स, पैरामेडिक्स और फार्मासिस्ट शामिल थे।

आयोजनकर्ता अभिनव सिन्हा ने कहा कि इस कैंप का मकसद अच्छी हेल्थकेयर ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में लोगों तक, बिना उन्हें लंबी दूरी तय किए पहुंचाना था। इस पहल को 2026 में उत्तर प्रदेश में आयोजित सबसे बड़ा हेल्थ कैंप बताया, और कहा कि इस मॉडल को राज्य में कहीं और भी दोहराया जा सकता है। गाजीपुर से बड़ी बात यह है कि सिर्फ छह दिनों में, एक अस्थायी हेल्थकेयर इकोसिस्टम ने कंसल्टेशन, डायग्नोस्टिक्स, स्पेशलिस्ट ट्रीटमेंट और सर्जरी को एक ही जगह पर ला दिया — जिससे हेल्थकेयर को मरीजों तक पहुंचाने पर ध्यान दिया गया, न कि मरीज़ों को हेल्थकेयर सेंटर जाने पर।

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अजय राय की छुट्टी! कांग्रेस ने आराधना मिश्रा ‘मोना’ को सौंपी यूपी की कमान, जानिए कौन हैं ये, क्यों बनाया गया इन्हें अध्यक्ष?

उत्तर प्रदेश में संगठन को नए सिरे से मजबूत करने और यूपी विधानसभा चुनाव 2027 की राजनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बड़ा संगठनात्मक बदलाव किया है। कांग्रेस आलाकमान ने अजय राय को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाते हुए उत्तर प्रदेश विधानमंडल दल की नेता और वरिष्ठ विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष बनाया है। लंबे समय से उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय और लगातार तीन बार विधायक चुनकर विधानसभा पहुंचने वाली आराधना मिश्रा को यह जिम्मेदारी सौंपकर कांग्रेस ने प्रदेश में अपने पारंपरिक वोट बैंक और महिला नेतृत्व दोनों को एक साथ साधने का बड़ा राजनीतिक दांव खेला है।

कौन हैं आराधना मिश्रा ‘मोना’? जानिए पारिवारिक और व्यक्तिगत पृष्ठभूमि

20 अप्रैल 1974 को प्रयागराज (तत्कालीन इलाहाबाद) में जन्मी आराधना मिश्रा ‘मोना’ उत्तर प्रदेश के दिग्गजों में गिने जाने वाले वरिष्ठ कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की बेटी हैं। प्रमोद तिवारी का नाम उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक मिसाल माना जाता है। प्रमोद तिवारी ने प्रतापगढ़ जिले की ऐतिहासिक रामपुर खास विधानसभा सीट से लगातार 9 बार चुनाव जीतकर रिकॉर्ड कायम किया था। आराधना मिश्रा की शुरुआती और उच्च शिक्षा प्रयागराज में ही हुई। उन्होंने 1997 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बी.कॉम की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन किया और मानवाधिकार विषय की पढ़ाई भी पूरी की। चुनावी हलफनामे के मुताबिक वह एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं और उनकी कुल घोषित संपत्ति लगभग 34.1 करोड़ रुपये है। इसमें 6.1 करोड़ रुपये की चल संपत्ति और 28 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति शामिल है।

त्रिस्तरीय पंचायत से विधानमंडल तक: ऐसा रहा राजनीतिक सफर

आराधना मिश्रा को राजनीति विरासत में जरूर मिली, लेकिन उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत धरातल से की। उन्होंने वर्ष 2001 से लगातार तीन कार्यकाल के लिए ब्लॉक प्रमुख के रूप में काम किया और स्थानीय निकायों में काम करने का लंबा अनुभव हासिल किया। वह ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत मनरेगा की उत्तर प्रदेश राज्य निगरानी एवं सतर्कता समिति की सदस्य भी मनोनीत की गईं। इसके अलावा 2012 के विधानसभा चुनाव में वह कांग्रेस की मीडिया कैंपेन कमेटी की सक्रिय सदस्य रहीं।

वर्ष 2014 में जब उनके पिता प्रमोद तिवारी राज्यसभा के लिए चुने गए, तब रामपुर खास सीट पर हुए उपचुनाव में आराधना मिश्रा ने जीत दर्ज कर पहली बार उत्तर प्रदेश विधानसभा में कदम रखा। वर्ष 2017 की प्रचंड बीजेपी लहर में भी उन्होंने रामपुर खास सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा। वह उन चुनिंदा 7 कांग्रेस विधायकों में शामिल थीं जो उस चुनाव में जीत दर्ज कर पाए थे। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने फिर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार को 14000 से अधिक वोटों से हराकर लगातार तीसरी बार जीत हासिल की।

2019 से संभाल रही हैं विधानमंडल दल की नेता की कमान

आराधना मिश्रा ‘मोना’ की सांगठनिक क्षमता को देखते हुए कांग्रेस आलाकमान ने अक्टूबर 2019 में उन्हें उत्तर प्रदेश विधानमंडल दल का नेता नियुक्त किया था। इसके बाद से वह उत्तर प्रदेश विधानसभा के भीतर कांग्रेस की मुख्य रणनीतिकार बनी हुई हैं। इसके अलावा वह ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के प्रमुख पैनलों की सदस्य हैं और राष्ट्रीय टीवी बहसों में पार्टी का मजबूती से पक्ष रखती रही हैं।

क्यों बनाया गया उत्तर प्रदेश कांग्रेस का नया अध्यक्ष?

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस द्वारा आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के पीछे कई अहम रणनीतिक और राजनीतिक समीकरण काम कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण मतदाताओं का एक बड़ा प्रभाव रहा है। आराधना मिश्रा एक प्रमुख और स्थापित ब्राह्मण चेहरा हैं। कांग्रेस लंबे समय से अपने पारंपरिक ब्राह्मण वोट बैंक को वापस जोड़ने की कोशिश कर रही है, ऐसे में उन्हें कमान सौंपना एक बड़ा राजनीतिक कदम माना जा रहा है।

महिला नेतृत्व को बढ़ावा

कांग्रेस पार्टी उत्तर प्रदेश में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर लगातार जोर देती रही है। आराधना मिश्रा राज्य की अग्रिम पंक्ति की महिला नेताओं में शामिल हैं। इसके अलावा प्रतापगढ़ और आसपास के इलाकों में प्रमोद तिवारी का मजबूत जनाधार रहा है। आराधना मिश्रा ने उस विरासत को न सिर्फ संभाला है बल्कि तीन बार लगातार चुनाव जीतकर अपनी खुद की मजबूत जनस्वीकार्यता भी साबित की है। ब्लॉक स्तर से लेकर केंद्रीय नेतृत्व तक काम करने का उनका लंबा अनुभव पार्टी संगठन को नए सिरे से खड़ा करने में मददगार साबित हो सकता है। कांग्रेस आलाकमान को उम्मीद है कि आराधना मिश्रा के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में पार्टी एक नए उत्साह और मजबूत रणनीति के साथ जमीन पर उतरेगी।

UP-Bihar MLC polls: यूपी-बिहार MLC चुनाव के लिए BJP ने जारी की 10 उम्मीदवारों की लिस्ट, नवल किशोर यादव और केदारनाथ सिंह को मिला टिकट

UP-Bihar MLC polls 2026: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मंगलवार (29 सितंबर) को बिहार और उत्तर प्रदेश में होने वाले 2026 के विधान परिषद (MLC) चुनाव के लिए 10 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया। भगवा पार्टी ने स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए भी उम्मीदवार घोषित किए हैं। बिहार के लिए पार्टी ने नवल किशोर यादव और डॉ. एनके यादव समेत उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश के लिए घोषित छह प्रमुख उम्मीदवारों में केदारनाथ सिंह और हरि किशोर तिवारी के नाम शामिल हैं।

BJP की ओर से जारी लिस्ट में दोनों राज्यों की विधान परिषद की संबंधित स्नातक और शिक्षक सीटों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों का चयन किया गया है। इन चुनावों के जरिए विधान परिषद में संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों का चुनाव होगा। BJP के इस ऐलान के साथ ही बिहार और उत्तर प्रदेश में आगामी MLC चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।

बिहार MLC चुनाव के लिए BJP उम्मीदवारों के प्रमुख नाम

पटना शिक्षक: श्री नवल किशोर यादव

कोशी स्नातक: डॉ० एन.के. यादव

दरभंगा स्नातक: श्री सर्वेश कुमार

तिरहुत शिक्षक: श्री नरेंद्र प्रसाद सिंह

उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव 2026 के प्रमुख उम्मीदवार

वाराणसी स्नातक: केदार नाथ सिंह

मेरठ स्नातक: दिनेश गोयल

इलाहाबाद-झांसी स्नातक: अशोक कुमार राठौर

वाराणसी शिक्षक: डॉ. प्रमोद मिश्रा

आगरा शिक्षक: इंजीनियर हरि किशोर तिवारी

गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक: ध्रुव त्रिपाठी

राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव के लिए जोड़तोड़ तेज

उत्तर प्रदेश में आगामी राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों में जोड़तोड़ और लामबंदी तेज हो गई है। राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर और विधान परिषद की 11 सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान होगा। विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के आधार पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और समाजवादी पार्टी (SP) ही अपने उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने की स्थिति में हैं। ऐसे में दोनों दलों में उम्मीदवारों के चयन और रणनीति को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं।

निर्वाचन आयोग के अनुसार, राज्यसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की 10 सीट शामिल हैं। इन सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। चुनाव के लिए अधिसूचना 29 सितंबर को जारी होगी। जबकि नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख छह अक्टूबर और मतगणना 16 अक्टूबर को होगी।

ये होने वाले हैं रिटायर

उत्तर प्रदेश से रिटायर होने वाले राज्यसभा सदस्यों में BJP के अरुण सिंह, गीता शाक्य, नीरज शेखर, बृजलाल, बी.एल. वर्मा, सीमा द्विवेदी और हरदीप सिंह पुरी, सपा के रामगोपाल यादव तथा बहुजन समाज पार्टी (BSP) के रामजी गौतम शामिल हैं। पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा की सीट 11 सितंबर से रिक्त है। अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह के उपराज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद उनका इस्तीफा प्रभावी हुआ था। निवर्तमान 10 सीटों में से आठ भाजपा, एक सपा और एक बसपा के पास थीं।

मौजूदा विधानसभा में संख्या बल के आधार पर BJP को सर्वाधिक सीटें मिलने की संभावना है। जबकि उसके बाद सपा का प्रतिनिधित्व होगा। हाल ही में आगरा की फतेहाबाद सीट से BJP विधायक छोटेलाल वर्मा के निधन के बाद 403 सदस्यीय विधानसभा में BJP गठबंधन के 288 विधायक हैं। इनमें BJP के 255, अपना दल (सोनेलाल) के 13, राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के नौ, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के छह और निषाद पार्टी के पांच विधायक शामिल हैं।

सपा-कांग्रेस गठबंधन के पास करीब 103 विधायक हैं, जिनमें SP के 101 विधायक शामिल हैं। जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के दो और तीन निर्दलीय विधायक हैं। इन तीन निर्दलीय विधायकों में उत्तर प्रदेश सरकार के खाद्य मंत्री मनोज कुमार पांडेय भी शामिल हैं। ये तीनों विधायक सपा के टिकट पर चुनाव जीते थे। लेकिन राज्यसभा चुनाव के दौरान पार्टी से उनकी दूरियां बढ़ गई थीं।

23 अक्टूबर को होगा MLC चुनाव

विधान परिषद की 11 सीटों के लिए चुनाव 23 अक्टूबर को होगा। जबकि मतगणना 27 अक्टूबर को की जाएगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के अनुसार, पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए अधिसूचना 29 सितंबर को जारी होगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि छह अक्टूबर, नामांकन पत्रों की जांच सात अक्टूबर और नाम वापसी की अंतिम तारीख नौ अक्टूबर होगी।

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इन सीटों के लिए मतदान 23 अक्टूबर को सुबह आठ बजे से शाम चार बजे तक होगा। पूरी चुनाव प्रक्रिया 31 अक्टूबर तक पूरी कर ली जाएगी। संबंधित सदस्यों का कार्यकाल छह दिसंबर को समाप्त हो रहा है। विधान परिषद के जिन सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें BJP के अवनीश कुमार सिंह, मानवेन्द्र प्रताप सिंह, दिनेश कुमार गोयल, उमेश द्विवेदी, श्रीचंद शर्मा और हरि सिंह ढिल्लों; सपा के लाल बिहारी यादव, आशुतोष सिन्हा और डॉ. मान सिंह यादव, निर्दलीय आकाश अग्रवाल तथा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से ध्रुव कुमार त्रिपाठी शामिल हैं।

Sambhal Violence: संभल हिंसा मामले में आरोपी को बड़ी राहत! सुप्रीम कोर्ट ने NSA के तहत मुल्ला अफरोज की हिरासत रद्द की, UP सरकार पर लगाया ₹10 लाख का जुर्माना

Sambhal Violence Case: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (29 सितंबर) को 2024 की संभल हिंसा मामले के कथित मास्टरमाइंड मुल्ला अफरोज की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA), 1980 के तहत लिए गए हिरासत को रद्द कर दिया। कोर्ट ने इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को भी खारिज कर दिया, जिसमें हिरासत के आदेश को बरकरार रखा गया था। इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत के आदेश को अवैध बताते हुए उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि किसी आरोपी के इकबालिया बयान को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत उसे हिरासत में रखने का आधार नहीं बनाया जा सकता।

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए मुल्ला अफरोज की NSA हिरासत को रद्द कर दिया। उत्तर प्रदेश पुलिस ने 2024 में संभल में हुई सांप्रदायिक हिंसा में मुल्ला अफरोज की कथित भूमिका को लेकर अक्टूबर 2025 में उसके खिलाफ कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की थी। शीर्ष अदालत ने अवैध हिरासत का आदेश पारित करने के लिए सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।

क्या है NSA?

आपको बता दें कि रासुका यानी NSA केंद्र और राज्य सरकारों को व्यक्तियों को हिरासत में लेने का अधिकार देता है, ताकि उन्हें भारत की रक्षा के लिए प्रतिकूल तरीके से कार्य करने से रोका जा सके। हिरासत की अधिकतम अवधि 12 महीने है। हालांकि इसे इससे पहले भी रद्द किया जा सकता है। रासुका के तहत स्थानीय प्रशासन हिरासत का आदेश जारी कर सकता है, जिसे हाई कोर्ट के पूर्व जज की अध्यक्षता वाले एक बोर्ड से अनुमोदित कराना होता है। चूंकि यह गिरफ्तारी नहीं बल्कि हिरासत होती है। इसलिए हिरासत में लिए गए व्यक्ति को अदालत के समक्ष पेश करने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं होती।

संभल हिंसा क्या है?

नवंबर 2024 में संभल में तनाव उस समय बढ़ गया था, जब वहां स्थित शाही जामा मस्जिद का अदालत के आदेश पर सर्वे किया जा रहा था। यह सर्वे उन दावों के बाद कराया गया था कि इस स्थान पर पहले हरिहर मंदिर मौजूद था। सर्वेक्षण के दूसरे दौर के दौरान 24 नवंबर को प्रदर्शन कर रहे स्थानीय लोगों की सुरक्षा कर्मियों से झड़प हो गई थी। इस घटना में चार लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे।

घटना के करीब 54 दिन बाद अफरोज को गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि उसकी गिरफ्तारी पुलिस हिरासत में दिए गए एक कथित कबूलनामे के आधार पर हुई थी। बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसे जमानत दे दी थी। हालांकि, 13 अक्टूबर 2025 को उसके खिलाफ NSA के तहत हिरासत का आदेश जारी किया गया। इस आदेश को बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा। इसके बाद अफरोज ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

पुलिस हिरासत में कथित कबूलनामे पर उठे सवाल

‘लाइव लॉ’ के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिरासत के लिए जरूरी ‘subjective satisfaction’ (व्यक्तिपरक संतुष्टि) केवल ऐसे कथित कबूलनामे के आधार पर कायम नहीं की जा सकती, जो पुलिस हिरासत के दौरान लिया गया हो। 8 सितंबर को सुनवाई के दौरान आदेश सुरक्षित रखते समय भी पीठ ने पुलिस हिरासत में दिए गए कथित कबूलनामे की प्रासंगिकता और कानूनी महत्व पर सवाल उठाए थे। कोर्ट ने पूछा था कि क्या ऐसा बयान निवारक हिरासत का आदेश जारी करने के लिए आवश्यक ‘subjective satisfaction’ का आधार बन सकता है।

आरोपी ने पुलिस फायरिंग की जांच पर भी उठाए सवाल

शीर्ष अदालत में अफरोज की ओर से दलील दी गई कि हिंसा के दौरान पुलिस ने भी कथित तौर पर गोलीबारी की थी। इस पहलू की निष्पक्ष तरीके से जांच नहीं की गई। उसने इस संबंध में प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल करने की अनुमति मांगी। उसकी ओर से यह भी तर्क दिया गया कि पुलिस हिरासत में दिया गया कथित कबूलनामा कानूनन स्वीकार्य नहीं है। साथ ही कहा गया कि किसी व्यक्ति के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज होना अपने आप में कस्टडी का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता।

19 साल के कार्तिक ने अकेले साफ कर दी Tamsa River kartik Sahani another Bittu Tabahi | Civic Sense

19 साल के कार्तिक ने अकेले साफ कर दी Tamsa River kartik Sahani another Bittu Tabahi | Civic Sense

Bittu Tabahi की तरह 19 साल के Kartik Sahani ने भी बदलाव के लिए खुद कदम उठाया।
UP के Mau की Tamsa नदी कचरे से पट चुकी थी। इसी नदी पर कार्तिक के परिवार के खेत निर्भर हैं।
इसलिए उन्होंने फैसला किया-
नदी को तो साफ कर के रहेगे।
हर दिन 3-4 घंटे नदी में उतरकर सफाई की और सिर्फ 22 दिनों में 10 क्विंटल से ज्यादा कचरा निकाल दिया।
अब नदी के बाद उनका अगला लक्ष्य है, अपने इलाके का एक तालाब।
क्योंकि बदलाव के लिए हमेशा बड़ी टीम नहीं चाहिए, कभी-कभी एक इंसान का पहला कदम ही काफी होता है।
क्या आपके शहर में भी कोई ऐसी जगह है, जिसे साफ करने की जरूरत है?
@kartiksahaniii

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19 साल के कार्तिक ने अकेले साफ कर दी Tamsa River kartik Sahani another Bittu Tabahi | Civic Sense Hero | Uttar Pradesh
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Viral Video: मशहूर चाट युद्ध के बाद अब सामने आया ‘चटनी संग्राम’, हापुड़ की पकौड़ा दुकान का वीडियो वायरल

उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में एक छोटी-सी खाने की दुकान अचानक ऐसी जगह में बदल गई, जहां कुछ देर के लिए लात-घूंसे और डंडे चलने लगे। धौलाना थाना क्षेत्र के देहरा गांव में पकौड़े की दुकान पर चटनी को लेकर शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ा कि दो पक्ष आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते सड़क पर लोगों की भीड़ जुट गई और दुकान के आसपास मारपीट का माहौल बन गया।

घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। फुटेज में कई लोग एक-दूसरे से भिड़ते दिखाई दे रहे हैं, जबकि आसपास मौजूद लोग सहमे हुए इस पूरे घटनाक्रम को देखते नजर आते हैं।

हरी चटनी नहीं मिली तो बिगड़ गई बात

NDTV के रिपोर्ट के मुताबिकके मुताबिक, विवाद की शुरुआत कुछ ग्राहकों की नाराजगी से हुई। उन्हें पकौड़ों के साथ हरी चटनी के बजाय मीठी इमली की चटनी परोसी गई थी। चटनी को लेकर हुई कहासुनी ने कुछ ही समय में उग्र रूप ले लिया। आरोप है कि नाराज लोगों ने दुकानदार से मारपीट शुरू कर दी।

दुकानदार के पक्ष में आसपास के कई लोग पहुंच गए। इसके बाद मामला दो पक्षों के बीच भिड़ंत में बदल गया और सड़क पर जमकर हंगामा शुरू हो गया।

दुकान का सामान भी बना हथियार

वायरल वीडियो में मारपीट का दृश्य काफी उग्र दिखाई देता है। लोग एक-दूसरे पर लात-घूंसे चलाते नजर आते हैं। कुछ के हाथों में बेल्ट और पत्थर दिखाई देते हैं। इसी दौरान एक व्यक्ति ने पकौड़े बनाने में इस्तेमाल होने वाला बड़ा लोहे का छलना उठाया और उससे दूसरे व्यक्ति पर वार कर दिया।

मारपीट के दौरान एक शख्स की शर्ट तक खिंच गई। एक अन्य व्यक्ति पर पत्थर से हमला किए जाने का दृश्य भी वीडियो में नजर आता है। पास खड़ी एक महिला ने बीच-बचाव की कोशिश की, लेकिन झगड़ रहे लोगों को रोकना आसान नहीं था। पुलिस के मुताबिक, घटना में चार लोग घायल हुए हैं।

VIDEO सामने आते ही पुलिस ने शुरू की कार्रवाई

वीडियो सोशल मीडिया पर फैलने के बाद धौलाना थाना पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया। सर्किल ऑफिसर मुनीष चंद्र के मुताबिक, देहरा गांव में दो पक्षों के बीच मारपीट की जानकारी मिली है। पुलिस ने घायलों का मेडिकल परीक्षण शुरू कराया है और वीडियो के आधार पर घटना में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। पुलिस का कहना है कि सार्वजनिक शांति भंग करने वाले लोगों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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Gorakhpur Rain Alert: गोरखपुर में मूसलाधार बारिश का कहर! 4 लोगों की मौत, सांसद रवि किशन के आवास में भी घुसा पानी

Gorakhpur Rain Alert: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में शनिवार (26 सितंबर) को तेज हवा और भारी बारिश के कारण अलग-अलग स्थानों पर पेड़ गिरने से चार लोगों की मौत हो गई। वहीं, बारिश से जुड़ी अलग-अलग घटनाओं में 14 अन्य लोग घायल हो गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि जिले के कैंपियरगंज थाना क्षेत्र के लक्ष्मीपुर गांव के गजरहिया टोला में शाम करीब चार बजे एक पेड़ झोपड़ी पर गिर गया। इस हादसे में सुभाष (55), महानंद की पत्नी ज्ञानमती देवी (45) और किशन प्रजापति (13) की मौत हो गई। जबकि राममिलन एवं सिरजावती नाम की महिला गंभीर रूप से घायल हो गए।

अधिकारियों के अनुसार, तेज हवा के दौरान कई ग्रामीण गांव के बाहरी हिस्से में बनी इस झोपड़ी में शरण लिए हुए थे। उन्होंने बताया कि पेड़ गिरने के बाद स्थानीय लोगों ने मलबा हटाकर घायलों को बाहर निकाला। कैंपियरगंज के उपजिलाधिकारी (SDM) और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी की। एक अन्य घटना में गगहा थाना क्षेत्र के गजपुर पुलिस चौकी के पास महुआ का पेड़ गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई।

80 साल पुराना पेड़ गिरा, पूरा परिवार चपेट में आया

पुलिस ने बताया कि मृतक की पहचान गगहा निवासी भीम कुमार विश्वकर्मा के रूप में हुई। पुलिस के मुताबिक, करीब साढ़े तीन बजे धर्मशाला क्षेत्र के जटेपुर दक्षिणी मोहल्ले की काली मंदिर गली में करीब 80 वर्ष पुराना एक पेड़ एक मकान पर गिर गया। पुलिस ने बताया कि इस हादसे के समय घर में करीब 12 लोग मौजूद थे। पुलिस के मुताबिक, पेड़ गिरने से सुरेश, सुभाष, मुन्नी और चुन्नी गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।

पुलिस ने बताया कि पेड़ गिरने से बिजली के कई खंभे भी क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे क्षेत्र में बिजली आपूर्ति बाधित रही। जिलाधिकारी दीपक मीणा और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SP) कौस्तुभ ने जिला अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना। अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत और सहायता कार्य जारी है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार अगले कुछ दिनों तक गोरखपुर में मूसलाधार बारिश और गरज-चमक का दौर जारी रहने की आशंका है।

सांसद रवि किशन के आवास में घुसा पानी

लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण गोरखपुर शहर में कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। इसी दौरान बीजेपी सांसद रवि किशन के आवास में भी बारिश का पानी पहुंच गया। इसके बाद रवि किशन खुद बाहर निकले और शहर में जलभराव की स्थिति तथा जल निकासी व्यवस्था का जायजा लिया। गोरखपुर में लगातार बारिश के बीच प्रशासन और नगर निगम की टीमें जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त रखने में जुटी हैं। मंडलायुक्त इंद्र विक्रम सिंह ने शनिवार को शहर के प्रमुख नाले का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ जल निकासी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

भारी बारिश के कारण शहर के निचले इलाकों में भी जलभराव की समस्या सामने आई है। इससे पहले लगातार बारिश को देखते हुए प्रशासन ने 26 सितंबर को क्लास 1 से 12वीं तक के सभी स्कूल बंद रखने का आदेश जारी किया था। जलभराव की समस्या को लेकर स्थानीय लोगों ने भी नगर निगम के अधिकारियों से शिकायतें की हैं। विभिन्न इलाकों में जल निकासी की व्यवस्था की निगरानी की जा रही है। लोगों को जलभराव की वजह से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

रवि किशन ने जलभराव का निरीक्षण किया

भारी बारिश के बाद गोरखपुर के सांसद रवि किशन ने शहर के जलभराव वाले इलाकों का निरीक्षण किया। रवि किशन ने कहा, “15 से 19 साल में कभी किसी ने ऐसी बरसात नहीं देखी… पूरे शहर में काफी पानी भर गया। अब पानी काफी जगह से उतर रहा है… प्रशासन की तैयारी हमेशा रहती है… महादेव से प्रार्थना है कि बरसात न हो और अगर बरसात नहीं होती है तो यह कल-परसों तक स्थिति सामान्य हो जाएगी।”

अभिनेता से नेता बने बीजेपी सांसद ने आगे कहा, “अगर बरसात होती है तो आप सभी लोग कृपया बचें और घर से न निकलें…आकाशीय बिजली भी गिर रही है। कैंपियरगंज में पेड़ गिरने से 3 लोगों की मौत हुई है। उनके परिवार के प्रति संवेदना है… हम लोग 24 घंटा मुस्तैद हैं, प्रशासन मुस्तैद है तो पैनिक होने की जरूरत नहीं है।”

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