Govt cracks down on E20 contamination: Petrol sales stopped at 2,573 pumps

Govt cracks down on E20 contamination: Petrol sales stopped at 2,573 pumps
E20 contamination crack down

The Ministry of Petroleum and Natural Gas has launched a massive quality-control campaign across India’s retail fuel network and, as of August 25, 2026, stopped petrol sales at 2,573 non-compliant outlets, according to highly placed ministry sources. Indian Oil Corporation (IOCL) leads with 1,257 halted pumps, followed by Hindustan Petroleum (HPCL) at 915 and Bharat Petroleum (BPCL) at 401.

The trigger was a letter from the Society of Indian Automobile Manufacturers (SIAM) to the ministry on July 28, leaked soon after, flagging alarmingly high levels of chloride contamination in E20 fuel samples tested across the country. SIAM withdrew the letter within days, saying the figures “needed further verification”, but the damage was done. A subsequent Reuters investigation into carmakers’ internal testing data kept the contamination question firmly in the public eye and has forced the government to react.

To restore consumer confidence and tackle contaminants and water in the supply chain, the government has mandated water-ingress testing of underground tanks 8 to 12 times a day, a rigorous regime already underway at 88,995 dealerships. A sweeping audit prioritising older retail outlets has covered 84,687 fuel stations; field teams are checking tank integrity during rainfall, and automation systems with monitoring probes are active at 85,649 outlets, with malfunctioning units being repaired on priority.

Oil-marketing companies (OMCs) have conducted 7,296 sulphur tests and 1,079 chloride tests on ethanol-carrying tankers, along with 151 chloride tests on their own storage tanks. 

The intensity of the crackdown reflects a government under pressure to protect the integrity of its green-energy transition. The rollout of E20 (petrol blended with 20 percent ethanol) was accelerated ahead of its original schedule. Since April 1, E20 has been the only petrol available at Indian pumps, leaving motorists with no option of buying the earlier E10 blend.

Automakers’ extensive fuel-testing drive

The move to ensure that the prescribed standards are met at the forecourts is a direct response to growing opposition from motorists and anxiety among the country’s leading vehicle manufacturers.

For motorists, the transition to E20 has brought tangible financial losses arising from lower fuel efficiency and potential mechanical risks. In a widely publicised dispute, a consumer court in Raipur recently directed Maruti Suzuki to replace a Grand Vitara over an E20-related engine complaint, underlining the legal and warranty vulnerabilities facing carmakers. Concerns over mileage loss, accelerated component wear and the compatibility of pre-2023 vehicles have simmered for months.

Behind closed doors, the anxiety ran deeper. While brands like Toyota, Maruti Suzuki and Hero MotoCorp publicly backed the government’s green mandate, a Reuters review of leaked internal communications revealed that Maruti Suzuki, Tata Motors and Mahindra & Mahindra had privately flagged severe contamination in E20 petrol. Over the course of a year, the three carmakers quietly conducted the most extensive fuel-testing drive since the national rollout, collecting and analysing over 250 samples from petrol pumps across 21 states and Union territories.

Leaked report rings alarm bells 

The industry findings, compiled by SIAM and reviewed by Reuters, painted a starkly different picture from official compliance narratives. Against the government’s permissible chloride limit of 3 parts per million (ppm) or 3mg/kg, automaker testing found alarming levels across 18 states: Rajasthan recorded 6 to 570ppm — 190 times the limit; Delhi-NCR ranged from 1.4 to 420ppm and Madhya Pradesh from 4.1 to 550ppm. Karnataka and Kerala, by contrast, stayed well within the safe zone at 1 to 2.2ppm.

Water content spiked to 13,000ppm in Andhra Pradesh and 12,500ppm in Uttar Pradesh, which is more than four times the official permissible limit of 3,000ppm.

In modern engines, these deviations can be damaging. Organic chloride is highly corrosive, and modern precision fuel injectors are engineered to tolerate just 1-3ppm to align with international standards. In a leaked July email, a senior Mahindra executive warned that organic chloride was the root cause of rapid vehicle failures, capable of destroying fuel systems and engines in as little as 200km. Mahindra has since described interpretations drawn from the email as baseless, calling the industry data limited and preliminary. 

Skoda Auto India brand director Ashish Gupta, in a recent interaction with Autocar Professional, acknowledged a genuine issue with EPC (Electronic Power Control) and fuel pump failures in certain parts of the country, particularly in Punjab. He added that while fuel-sample testing has not shown a definitive chemical difference, engineers suspect high chloride or high sulphur levels, which can clog the fuel-pump filters.

The regulatory gap

To be fair, BIS standards currently lack a formally mandated statutory threshold for inorganic chlorides in finished ethanol-blended petrol (like E20). However, the petroleum ministry and OMCs enforce internal procurement guidelines, capping the limit at 3ppm for ethanol manufacturers. Setting BIS standards that make chloride limits mandatory is urgently needed, as the main culprit for vehicle damage is not E20 petrol but the chloride levels in it.

With inputs from Shahkar Abidi 

योगी सरकार का बड़ा एक्शन प्लान, IIT कानपुर, BHU और रुड़की को सौंपी कमान! यूपी में ₹100 करोड़ से बड़े प्रोजेक्ट्स का यूं होगा ऑडिट

UP News: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की क्वालिटी सुधारने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब 100 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली सड़क, पुल, सीवरेज और जलापूर्ति परियोजनाओं की क्वालिटीकी जांच देश के प्रतिष्ठित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) संस्थानों के एक्सपर्ट्स करेंगे। सरकार ने इसके लिए थर्ड पार्टी क्वालिटी ऑडिट (TPQA) की व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। इस नई व्यवस्था में IIT कानपुर, IIT-BHU वाराणसी और IIT रुड़की जैसे प्रमुख संस्थान बड़ी परियोजनाओं की टेक्निकल क्वालिटी की निगरानी करेंगे।

इसका मकसद यह है कि निर्माण में किसी भी तरह की तकनीकी कमी, घटिया सामग्री या सुरक्षा से जुड़ी समस्या का पता परियोजना पूरी होने के बाद नहीं। बल्कि निर्माण के दौरान ही चल जाए। थर्ड-पार्टी क्वालिटी ऑडिट (TPQA) में सड़कें, पुल, सीवरेज सिस्टम और पानी की सप्लाई वाले प्रोजेक्ट्स शामिल होंगे।

प्रोजेक्ट की शुरुआत से लेकर आखिर तक होगी जांच 

एक्सपर्ट्स हर प्रोजेक्ट की शुरुआत से लेकर आखिर तक जांच करेंगे। इसमें उसका डिजाइन, बनाने का तरीका, इस्तेमाल होने वाली सामग्री और जरूरी मानकों का पालन हो रहा है या नहीं, जैसे सभी कारण शामिल होगा। IIT की टीमें निर्माण के अलग-अलग चरणों की भी निगरानी करेंगी ताकि काम पूरा होने के बाद के बजाय शुरुआती दौर में ही किसी भी समस्या का पता लगाया जा सके।

शुरुआत से अंत तक होगी जांच

IIT के विशेषज्ञ केवल तैयार सड़क या पुल की जांच नहीं करेंगे, बल्कि परियोजना के अलग-अलग चरणों की निगरानी करेंगे। इसका उद्देश्य निर्माण पूरा होने के बाद खामियां मिलने के बजाय उन्हें समय रहते पहचानकर ठीक करना है। इसमें मुख्य रूप से-

  • प्रोजेक्ट के डिजाइन की जांच
  • निर्माण में अपनाई जा रही तकनीक
  • इस्तेमाल होने वाली निर्माण सामग्री की गुणवत्ता
  • निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन
  • निर्माण की सुरक्षा
  • काम की अलग-अलग स्टेज पर गुणवत्ता की जांच शामिल होगी।

IIT कानपुर को 8 डिवीजन की जिम्मेदारी

‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी व्यवस्था के तहत IIT कानपुर को उत्तर प्रदेश के 8 डिवीजन में प्रोजेक्ट की क्वालिटी जांच की जिम्मेदारी दी गई है। इनमें कानपुर, लखनऊ, बांदा, प्रयागराज, अयोध्या, आगरा, झांसी और देवीपाटन शामिल हैं। इन क्षेत्रों में ₹100 करोड़ से अधिक लागत वाले संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की तकनीकी जांच IIT कानपुर की टीम करेगी।

IIT-BHU के जिम्मे ये इलाके

IIT-BHU वाराणसी को भी कई महत्वपूर्ण डिवीजन की जिम्मेदारी दी गई है। इसके तहत बस्ती, गोरखपुर, आजमगढ़, वाराणसी और मिर्जापुर में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता की निगरानी की जाएगी। वहीं IIT रुड़की को सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, मेरठ और अलीगढ़ समेत पांच डिवीजन की जिम्मेदारी दी गई है।

₹100 करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट पर खास नजर

नई व्यवस्था के तहत ₹100 करोड़ से अधिक लागत वाले प्रमुख प्रोजेक्ट जांच के दायरे में आएंगे। टेक्निकल एक्सपर्ट निर्माण की क्वालिटी के साथ-साथ इस्तेमाल की जा रही सामग्री और परियोजना की सुरक्षा का भी परीक्षण करेंगे। सरकार का मानना है कि बाहरी और एक्सपर्ट्स संस्थानों से ऑडिट कराने से निर्माण एजेंसियों पर गुणवत्ता बनाए रखने का दबाव बढ़ेगा। साथ ही सरकारी पैसे से तैयार होने वाली बड़ी परियोजनाओं की विश्वसनीयता बेहतर होगी।

‘उन्नाव एक्सप्रेसवे’ हादसे के बाद बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब उन्नाव में ग्रीनफील्ड नेशनल एलिवेटेड एक्सप्रेसवे के एक हिस्से के उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद ढहने की खबर सामने आई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब ₹4,200 करोड़ की लागत से तैयार इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई को हुआ था।

इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी मौजूद थे। इसके करीब 12 दिन बाद एक्सप्रेसवे के एक हिस्से के ढहने की खबर ने निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

अब निर्माण के दौरान ही पकड़ में आएंगी खामियां

नई TPQA व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि किसी परियोजना के पूरा होने के बाद सामने आने वाली तकनीकी खामियों को निर्माण के दौरान ही पकड़ा जा सकेगा। सरकार की कोशिश है कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट केवल समय और बजट के भीतर पूरे न हों। बल्कि उनकी गुणवत्ता, मजबूती और सुरक्षा भी सुनिश्चित हो। यानी अब यूपी में ₹100 करोड़ से बड़े प्रोजेक्ट पर सिर्फ सरकारी विभागों की नजर नहीं होगी। बल्कि IIT के टेक्निकल एक्सपर्ट भी निर्माण की क्वालिटी का हिसाब रखेंगे।

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CM Yogi: योगी सरकार का बड़ा ऐलान, यूपी में 6 महीने में 1 लाख युवाओं को मिलेगी सरकारी नौकरी

उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा अपडेट दिया है। मंगलवार को लखनऊ में अपॉइंटमेंट लेटर वितरण कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बताया कि सरकार अगले छह महीनों में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देगी। ये नियुक्तियां अलग-अलग चरणों में हर सप्ताह की जाएंगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के अवसर मिलेंगे। मुख्यमंत्री के बताया, 2017 से अब तक राज्य में 9.3 लाख से ज्यादा युवाओं को सरकारी रोजगार मिल चुका है। उन्होंने कहा कि इन भर्तियों में प्रक्रिया को पारदर्शी रखने और बिना भेदभाव के चयन पर जोर दिया गया है।

6 महीने में मिलेंगे 1 लाख युवाओं को नौकरी

सीएम योगी ने कहा कि, “मैं प्रदेश के युवाओं को आश्वस्त कर रहा हूं कि अगले 6 महीनों में 1 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे। ये नियुक्ति पत्र अलग-अलग चरणों में हर सप्ताह बांटे जाएंगे।” सीएम योगी ने कहा, “उनकी सरकार के कार्यकाल में अब तक उत्तर प्रदेश के 9.30 लाख से ज्यादा युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष रखा गया है। इन नियुक्तियों में किसी तरह की अनियमितता या भेदभाव की गुंजाइश नहीं रखी गई है।”

पिछली सरकार पर साधा निशाना

सीएम योगी ने पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि, 2017 से पहले सरकारी भर्तियों में युवाओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। उन्होंने आरोप लगाया कि भर्ती का विज्ञापन जारी होने के बाद कथित तौर पर कुछ प्रभावशाली लोग पूरे प्रदेश में वसूली करते थे। योगी ने बिना किसी का नाम लिए ‘चाचा-भतीजा’ और ‘पूरा परिवार’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए पिछली व्यवस्था पर सवाल उठाए।

जीरो टॉलरेंस की नीति पर कर रही काम

उन्होंने कहा कि, ‘उस समय युवा भर्ती के नतीजों का इंतजार करते रह जाते थे और कई मामलों में अदालत को नियुक्तियों पर रोक लगानी पड़ती थी। इससे युवाओं का समय और मेहनत दोनों बर्बाद होते थे।’ मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘इसके लिए युवाओं को नहीं, बल्कि उस समय भर्ती व्यवस्था से जुड़े भ्रष्ट अधिकारियों, बोर्डों, आयोगों और नेताओं को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि ‘हमारी सरकार अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। साथ ही, नकल माफिया और भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि अब सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने पर जोर दिया है। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि युवाओं को बिना किसी भेदभाव के समय पर नौकरी दिलाना सरकार की प्राथमिकता है।

Stocks to Watch: 25 अगस्त को फोकस में रहेंगे ये 12 स्टॉक्स, मिल सकता है तगड़ी कमाई का मौका

Stocks to Watch: मंगलवार, 25 अगस्त के कारोबारी सत्र में कई कंपनियों के शेयर खबरों की वजह से फोकस में रह सकते हैं। इनमें डील, बड़े ऑर्डर, OFS, फंड जुटाने और मैनेजमेंट बदलाव से जुड़ी खबरें शामिल हैं। आइए जानते हैं किन 12 शेयरों पर खास नजर रहेगी।

Hindustan Copper

सरकारी कॉपर कंपनी Hindustan Copper में सरकार OFS के जरिए 6% तक हिस्सेदारी बेच सकती है। इसमें 3% की बेस हिस्सेदारी और 3% का ग्रीन-शू ऑप्शन शामिल है। OFS का फ्लोर प्राइस ₹514 प्रति शेयर रखा गया है।

TCS

टाटा ग्रुप की आईटी कंपनी TCS ने Porsche AG की 100% हिस्सेदारी वाली MHP को खरीदने की मंजूरी दी है। यह सौदा करीब 320 मिलियन यूरो का है। इसके अलावा Porsche ने TCS और MHP के साथ 5 साल का 1.25 बिलियन यूरो का समझौता किया है।

Suzlon Energy

विंड एनर्जी कंपनी Suzlon Energy आंध्र प्रदेश में 1,325 MW के नए विंड प्रोजेक्ट विकसित करने की योजना बना रही है। ये प्रोजेक्ट अनंतपुर जिले के Rayadurg विधानसभा क्षेत्र में लगाए जाएंगे। इससे राज्य में कंपनी की मौजूदगी और मजबूत हो सकती है।

ICICI Bank

प्राइवेट सेक्टर बैंक ICICI Bank ने अपने IFSC Banking Unit के जरिए 5 साल के $1 बिलियन के सीनियर अनसिक्योर्ड नोट्स की कीमत तय की है। इन डेट सिक्योरिटीज को S&P Global Ratings ने ‘BBB’ रेटिंग दी है।

Ceigall India

इंफ्रास्ट्रक्चर और रोड कंस्ट्रक्शन कंपनी Ceigall India को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से करीब ₹704.70 करोड़ का ऑर्डर मिला है। यह ऑर्डर अरुणाचल प्रदेश में Frontier Highway के निर्माण से जुड़ा है।

Lenskart

आईवियर और रिटेल कंपनी Lenskart में अगले 2-3 दिनों में करीब ₹2,800-2,900 करोड़ की ब्लॉक डील की खबर है। सूत्रों के मुताबिक Alfa अपनी कुछ हिस्सेदारी बेच सकता है। Alfa के पास कंपनी में करीब 3.4% हिस्सेदारी बताई गई है।

UCO Bank

सरकारी बैंक UCO Bank के बोर्ड ने 1 बिलियन डॉलर तक रकम जुटाने की मंजूरी दी है। बैंक इस रकम का इस्तेमाल अपनी जरूरतों और कारोबार को आगे बढ़ाने में कर सकता है।

Afcons Infrastructure

इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Afcons Infrastructure को Uttar Pradesh Expressways Industrial Development Authority से जुड़े मामले में ₹335.50 करोड़ का Arbitral Award मिला है। मध्यस्थता प्रक्रिया के बाद फैसला कंपनी के पक्ष में आया है।

Coal India

सरकारी कोयला कंपनी Coal India ने सिंगापुर में अपनी नई Wholly Owned Subsidiary बनाई है। इसका नाम CIL Global है। यह कंपनी दूसरे देशों में Critical Minerals से जुड़े कारोबारी अवसर तलाशेगी।

Great Eastern Shipping

शिपिंग कंपनी Great Eastern Shipping के बोर्ड की 27 अगस्त को बैठक होगी। इसमें कंपनी के शेयर बायबैक के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। फिलहाल यह सिर्फ प्रस्ताव पर विचार करने की जानकारी है। अंतिम फैसला बोर्ड की बैठक में होगा।

HEG

ग्रेफाइट और इलेक्ट्रिकल कार्बन प्रोडक्ट कंपनी HEG ने मैनेजमेंट में बदलाव किया है। Riju Jhunjhunwala को 1 सितंबर 2026 से CEO बनाया गया है। वहीं Neha Rajvanshi को CFO नियुक्त किया गया है। दोनों नियुक्तियों के कारण शेयर पर नजर रह सकती है।

Brigade Hotel Ventures

हॉस्पिटैलिटी कंपनी Brigade Hotel Ventures ने Vinay Gupta को नया CEO नियुक्त किया है। यह नियुक्ति शेयर बाजार बंद होने के बाद सामने आई। मैनेजमेंट में बदलाव के बाद निवेशकों की नजर कंपनी की आगे की रणनीति पर रहेगी।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

यूपी में 3000 करोड़ के जापानी निवेश से खुलेंगे 10000 से अधिक रोजगार के द्वार

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Uttar Pradesh-Japan Investment Meet-2026

Uttar Pradesh-Japan Investment Meet-2026: उत्तर प्रदेश और जापान के बीच बढ़ती औद्योगिक साझेदारी ने बुधवार को बड़ी छलांग लगाई। नई दिल्ली के ताज पैलेस में आयोजित उत्तर प्रदेश-जापान निवेश सम्मेलन 2026 में एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड और मिंडा कॉरपोरेशन लिमिटेड के ₹3,195 करोड़ के प्रोजेक्ट की वर्चुअल ग्राउंड ब्रेकिंग की गई। यीडा क्षेत्र में लगने वाली इन परियोजनाओं से 10 हजार से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होंगे। साथ ही प्रदेश में नई विनिर्माण क्षमताओं के विकास और जापानी निवेश को गति मिलेगी।

रोजगार के खुलेंगे अवसर

ट्रैक्टर और निर्माण उपकरण बनाने वाली एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड यीडा के सेक्टर-10 में ₹2,029 करोड़ का निवेश कर विनिर्माण इकाई स्थापित कर रही है। यहां ट्रैक्टर और उपकरण संबंधी उत्पादों का निर्माण किया जाएगा। परियोजना से 3,800 से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर मिलने की उम्मीद है। मिंडा कॉरपोरेशन लिमिटेड भी यीडा में दो बड़े विनिर्माण प्रोजेक्ट स्थापित कर रही है। कंपनी इन परियोजनाओं में कुल ₹1,166 करोड़ का निवेश करेगी। इससे करीब 6,440 रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

 

यीडा में औद्योगिक गतिविधियों के साथ सहायक उद्योगों और सप्लाई चेन के लिए भी पैदा होंगे नए अवसर

दोनों कंपनियों का कुल निवेश ₹3,195 करोड़ है और इनसे 10 हजार से अधिक रोजगार के अवसर तैयार होंगे। इन परियोजनाओं के जमीन पर उतरने से यीडा में औद्योगिक गतिविधियों के साथ सहायक उद्योगों और सप्लाई चेन के लिए भी नए अवसर पैदा होंगे। यह निवेश उत्तर प्रदेश और जापान के बीच मजबूत होते औद्योगिक रिश्तों और प्रदेश में जापानी कंपनियों के बढ़ते भरोसे का भी संकेत है।

 

2027 के चुनाव से पहले BJP को क्यों याद आईं स्मृति ईरानी? समझें पूरा सियासी समीकरण

Smriti Irani: BJP ने पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को फिर से राष्ट्रीय महासचिव बनाकर उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को एक बड़ा चेहरा दे दिया है। पार्टी को उम्मीद है कि उनकी राजनीतिक पकड़, दमदार भाषण शैली और खासतौर पर महिला वोटरों के बीच उनकी लोकप्रियता यूपी में चुनावी अभियान को मजबूती देने में मदद करेगी।

बता दें कि स्मृति ईरानी उन आठ नेताओं में शामिल हैं, जिन्हें उत्तर प्रदेश से BJP अध्यक्ष नितिन नबीन की नई राष्ट्रीय टीम में जगह मिली है। इससे साफ है कि पार्टी उत्तर प्रदेश को कितनी अहमियत दे रही है। ईरानी और पूर्व बस्ती सांसद हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है। वहीं, पूर्व धौरहरा सांसद रेखा वर्मा और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति प्रो. तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा डॉ. भोला सिंह और संगीता यादव को राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है। जबकि अमर पाल मौर्य को BJP OBC मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष कुंवर बासित अली को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है।

हालांकि, स्मृति ईरानी के लिए यह नई जिम्मेदारी खास तौर पर अहम मानी जा रही है। 2024 के लोकसभा चुनाव में अमेठी सीट से कांग्रेस उम्मीदवार किशोरी लाल शर्मा के हाथों हार के बाद से ईरानी के पास पार्टी में कोई बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं थी। अब उत्तर प्रदेश में होने वाले बेहद अहम चुनाव से पहले उन्हें राष्ट्रीय संगठन में वापस लाया गया है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि BJP इस चुनाव में महिला वोटरों के साथ-साथ अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में ईरानी की वापसी को पार्टी की चुनावी रणनीति के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषक मनोज भद्रा ने कहा,  “ऐसे समय में जब सभी राजनीतिक दल महिला मतदाताओं पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, तब भाजपा स्मृति ईरानी की वापसी के माध्यम से एक बड़ा राजनीतिक संदेश दे सकती है। वह एक प्रभावशाली वक्ता हैं और कई भाषाओं में भाषण दे सकती हैं। वह विशेष रूप से महिलाओं के बीच लोकप्रिय हैं। विधानसभा चुनाव नजदीक होने के कारण, राष्ट्रीय स्तर पर उनकी उपस्थिति से पार्टी महिला मतदाताओं को फिर से लुभाने और उन्हें अपने पाले में एकजुट करने के लिए जोरदार प्रयास करेगी।”

हालांकि, भाजपा के लिए ईरानी की राजनीतिक उपयोगिता केवल महिलाओं के बीच उनकी लोकप्रियता तक ही सीमित नहीं है। उनकी आक्रामक शैली और कांग्रेस नेतृत्व से उनकी अच्छी जान-पहचान उन्हें उस राज्य में पार्टी के प्रमुख प्रचारकों में से एक बना सकती है, जहां कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के भाजपा के खिलाफ संयुक्त रूप से चुनाव लड़ने की उम्मीद है। उनका राजनीतिक कद उन्हें कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव दोनों को चुनौती देने में भी सक्षम बनाता है।

बता दें कि उत्तर प्रदेश ईरानी के लिए एक जाना-पहचाना राजनीतिक क्षेत्र है। उन्होंने पहली बार 2014 में अमेठी से चुनाव लड़ा था, जहां उन्होंने कांग्रेस के गढ़ में राहुल गांधी को चुनौती दी थी। हालांकि, उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने निर्वाचन क्षेत्र का दौरा करना जारी रखा और मतदाताओं से संपर्क बनाए रखा। भाजपा नेता अमेठी में पार्टी का संगठनात्मक आधार मजबूत करने में उनकी निरंतर जमीनी भागीदारी को श्रेय देते हैं।

ईरानी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी को हराया था

उनके प्रयासों का फल 2019 के लोकसभा चुनाव में मिला, जब उन्होंने राहुल गांधी को सीधे मुकाबले में हराकर अमेठी पर गांधी परिवार के लंबे समय से चले आ रहे वर्चस्व को समाप्त कर दिया। इस जीत ने ईरानी को भाजपा के सबसे प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं में से एक बना दिया और उन्हें “जायंट किलर” का खिताब दिलाया।

हालांकि, 2024 की हार उनके राजनीतिक करियर में एक झटका साबित हुई। वह अमेठी सीट किशोरी लाल शर्मा से हार गईं। उस हार के बाद, उन्हें अपनी हालिया नियुक्ति तक कोई महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं दी गई।

अमेठी में भाजपा नेताओं का मानना ​​है कि उनकी वापसी से क्षेत्र में पार्टी के चुनाव प्रचार को नई ऊर्जा मिल सकती है। अमेठी और रायबरेली में पार्टी कार्यकर्ताओं ने पटाखे फोड़कर और मिठाई बांटकर उनकी नियुक्ति का जश्न मनाया। समर्थकों का कहना है कि ‘दीदी’ के नाम से मशहूर ईरानी जल्द ही जमीनी स्तर पर वापसी करेंगी।

भाजपा के अमेठी स्थानीय नेता जनमजय शर्मा ने कहा कि ईरानी ने इस क्षेत्र के लोगों के लिए बहुत कुछ किया है। उन्होंने कहा कि 2014 में राहुल गांधी से हारने के बावजूद, वह नियमित रूप से अमेठी आती रहीं और लोगों के दिलों में उनकी एक खास जगह है।

हालांकि, अमेठी और पड़ोसी रायबरेली में चुनावी समीकरण भाजपा के लिए अभी भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। 2022 के विधानसभा चुनावों में, भाजपा ने अमेठी की चार सीटों में से दो, तिलोई और जगदीशपुर सीटें जीतीं। जबकि सपा ने गौरीगंज और अमेठी की सीटें जीतीं थी। हालांकि, गौरीगंज के विधायक राकेश प्रताप सिंह बाद में भाजपा में शामिल हो गए।

वहीं, रायबरेली में सपा ने 6 विधानसभा सीटों में से चार सीटें – बछरावां, हरचंदपुर, सरेनी और ऊंचाहार – जीतीं, जबकि भाजपा ने रायबरेली और सलोन सीटें जीतीं। हालांकि, ऊंचाहार के विधायक मनोज पांडे बाद में भाजपा में शामिल हो गए और अब योगी आदित्यनाथ सरकार में मंत्री हैं।

ईरानी जल्द शुरू कर सकती हैं यूपी का दौरा

भाजपा सूत्रों के अनुसार, ईरानी जल्द ही उत्तर प्रदेश में व्यापक दौरे शुरू कर सकती हैं और विधानसभा चुनावों की तैयारियों को तेज करते हुए विशेष रूप से अमेठी और रायबरेली पर ध्यान केंद्रित कर सकती हैं।

एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा, “स्मृति ईरानी एक जाना-पहचाना चेहरा हैं, उन्होंने अमेठी से चुनाव जीता है और भाजपा के लिए भीड़ जुटाना आसान है।” उन्होंने आगे कहा, “दूसरा, वह राहुल गांधी का मुकाबला करने के लिए बेहतर स्थिति में होंगी… और इस खींचतान को मीडिया कवरेज मिलेगा, जिससे पार्टी को फायदा होगा।”

‘तुलसी’ से सियासत तक का सफर

बता दें कि ईरानी का राजनीतिक सफर टेलीविजन से शुरू हुआ, जहां लोकप्रिय धारावाहिक ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में तुलसी विरानी के किरदार से वे घर-घर में मशहूर हो गईं। उन्होंने 2003 में भाजपा में प्रवेश किया और भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष और राष्ट्रीय सचिव के रूप में कार्य किया। बाद में उन्होंने गुजरात और महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद के रूप में कार्य किया और 2014 से 2024 के बीच मोदी सरकार में शिक्षा, वस्त्र, सूचना एवं प्रसारण, महिला एवं बाल विकास और अल्पसंख्यक मामलों सहित कई विभागों का कार्यभार संभाला।

अब 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और ऐसे में स्मृति ईरानी की BJP के राष्ट्रीय संगठन में वापसी पार्टी के लिए काफी अहम मानी जा रही है। उनके पास उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रचार का अनुभव है और वह पार्टी के लिए एक पहचाना हुआ और आक्रामक चेहरा हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या स्मृति ईरानी 2019 में अमेठी की ऐतिहासिक जीत से बनी अपनी राजनीतिक पकड़ को पूरे उत्तर प्रदेश में BJP के लिए चुनावी फायदे में बदल पाएंगी? यह देखना दिलचस्प होगा क्योंकि पार्टी राज्य में अगले चुनाव के लिए अपना अभियान शुरू कर रही है।

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यूपी में सड़क सुरक्षा व शून्य मृत्युदर की दिशा में परिवहन विभाग ने उठाए कड़े कदम

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Transport Department in UP has taken stringent measures towards road safety and achieving a zero-fatality rate

– मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सड़क दुर्घटनाओं में शून्य मृत्युदर का लक्ष्य पाने का दे चुके हैं निर्देश

– ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों से पिछले वित्तीय वर्ष में वसूला 474 करोड़ का प्रशमन शुल्क

– चालू वित्तीय वर्ष के 4 महीने में 5 लाख चालान किए और 172 करोड़ रुपए लगाया जुर्माना

– परिवहन विभाग की कार्रवाई का उद्देश्य यातायात नियमों के प्रति अनुशासन बढ़ाना

Uttar Pradesh News : उत्तर प्रदेश में लगातार बढ़ती वाहन संख्या के बीच सड़क सुरक्षा को लेकर योगी सरकार का फोकस लगातार बढ़ा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और शून्य मृत्यु दर की दिशा में विभिन्न अवसरों पर विभागों को जरूरी निर्देश देते रहे हैं। इसका असर सड़क सुरक्षा से जुड़े नियमों के पालन को लेकर परिवहन विभाग की प्रवर्तन कार्रवाई में भी दिखाई दे रहा है। बीते वित्तीय वर्ष में 474 करोड़ रुपए और चालू वित्तीय वर्ष में 172 करोड़ रुपएप्रशमन शुल्क (जुर्माना) वसूला गया है। इस अवधि में 20 लाख से ज्यादा चालान भी किए गए हैं।

 

अपर परिवहन आयुक्त (प्रवर्तन) केडी सिंह गौर ने कहा कि सड़क पर सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने और यातायात नियमों का पालन कराना परिवहन विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इसी क्रम में विभाग के प्रवर्तन दल ने नियमों की अनदेखी करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ प्रदेशभर में अभियान चलाया। कार्रवाई का उद्देश्य महज जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि वाहन चालकों को यातायात नियमों के प्रति जिम्मेदार बनाना और सड़क सुरक्षा को मजबूत करना है।

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15 लाख चालान के जरिए 474 करोड़ का जुर्माना

वित्तीय वर्ष 2025-26 में परिवहन विभाग के प्रवर्तन दल ने प्रदेशभर में करीब 15 लाख चालान किए। इन कार्रवाई के माध्यम से 474 करोड़ रुपये का प्रशमन शुल्क वसूला गया। यह बड़े पैमाने पर की गई प्रवर्तन कार्रवाई को दर्शाता है, जिसके जरिए सड़क पर नियमों का पालन सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया।

 

इस वर्ष 5 लाख चालान काटे गए

वहीं, चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के शुरुआती चार महीनों में ही करीब 5 लाख चालान किए जा चुके हैं। इन कार्रवाई से 172 करोड़ रुपए का प्रशमन शुल्क प्राप्त हुआ है। इससे साफ है कि सड़क सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग की निगरानी और प्रवर्तन कार्रवाई लगातार जारी है।

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चालान से सड़क सुरक्षा पर असर

परिवहन विभाग के मुताबिक इस सख्ती का व्यापक उद्देश्य वाहन चालकों में यातायात नियमों के प्रति अनुशासन बढ़ाना है। नियमों का पालन होने से सड़क पर ओवरस्पीडिंग, बिना जरूरी दस्तावेज वाहन चलाने, क्षमता से अधिक सवारी या माल ढोने और अन्य यातायात नियमों के उल्लंघन जैसी स्थितियों पर प्रभावी नियंत्रण में मदद मिलती है।

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सुरक्षित यातायात के लिए वाहन चालकों और आम नागरिकों की भी बराबर भागीदारी जरूरी है। परिवहन विभाग की प्रवर्तन कार्रवाई इसी जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने का काम कर रही है। यही प्रयास प्रदेश को शून्य मृत्युदर के लक्ष्य की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

Kanpur Video: आधी रात में ₹16 में कपड़े खरीदने उमड़ी हजारों की भीड़! धक्का-मुक्की और भगदड़ जैसी स्थिति, पुलिस ने लाठियां भांजकर संभाला मोर्चा

Kanpur ₹16 Shopping Offer: उत्तर प्रदेश के कानपुर में महज 16 रुपये में कपड़े खरीदने का ऑफर एक दुकान मालिक को भारी पड़ गया। सोशल मीडिया पर वायरल हुए ऑफर के बाद इतनी बड़ी संख्या में लोग दुकान के बाहर पहुंच गए कि सड़क पर भीड़ बेकाबू हो गई। धक्का-मुक्की और भगदड़ जैसे हालात हो गए। इस दौरान भारी भीड़ के कारण कई लोग गिर पड़े। करीब एक दर्जन लोगों को मामूली चोटें आईं। स्थिति संभालने के लिए पुलिस को मौके पर पहुंचकर भीड़ को खदेड़ना पड़ा। यह घटना 15 अगस्त की रात कानपुर के व्यस्त आलम मार्केट इलाके में हुई। यह दुकान रईस आलम की है, जिनके बेटे का जन्मदिन था। इसी अवसर पर उन्होंने यह ऑफर दिया था।

16 मिनट में ₹16 में कोई भी कपड़ा!

‘इंडिया टुडे’ की रिपोर्ट के मुताबिक, आलम मार्केट में ‘रायस आलम’ नाम की एक होजरी की दुकान है। उनके बेटे का जन्मदिन था। इसी मौके पर ग्राहकों के लिए सोशल मीडिया पर एक बेहद खास ऑफर का ऐलान किया गया। ऑफर के मुताबिक, रात 11:59 बजे से सिर्फ 16 मिनट तक ग्राहक कोई भी रेडीमेड कपड़ा महज ₹16 में खरीद सकते थे। इस ऑफर में सूट, जींस, शर्ट समेत कई तरह के कपड़े शामिल बताए गए थे।

11:30 बजे दुकान पर पहुंचे हजारों लोग

यह ऑफर तेज़ी से ऑनलाइन फैल गया। इससे आस-पास के इलाकों और कई किलोमीटर दूर से भी लोग दुकान पर आने लगे। रात करीब 11:30 बजे तक दुकान के बाहर हजारों लोग जमा हो गए। भीड़ सड़क तक फैल गई और लोग दुकान के करीब पहुंचने के लिए धक्का-मुक्की करने लगे। जैसे-जैसे भीड़ बढ़ी, दुकान के बाहर अफरातफरी मच गई। भीड़ में आगे बढ़ने की कोशिश में कई लोग गिर पड़े। कुछ लोग भागने लगे। इससे उनके जूते-चप्पल सड़क पर बिखर गए। इस आपाधापी में करीब एक दर्जन लोगों को मामूली चोटें आईं।

हंगामे की खबर मिलते ही अलग-अलग थानों की पुलिस को मौके पर भेजा गया। भीड़ के लगातार बढ़ने पर ACP मंजे सिंह भी अतिरिक्त पुलिस बल के साथ दुकान पर पहुंचे। हालात काबू से बाहर होते देख पुलिस ने लोगों से हटने के लिए अनाउंसमेंट किया। साथ ही भीड़ को पीछे धकेलने के लिए लाठियों का इस्तेमाल किया। आखिरकार अधिकारियों ने इलाके को खाली कराया। पुलिस ने इलाके में मार्च करते हुए लोगों से घर लौटने की अपील की।

सड़क पर बिखरी चप्पलें

अधिकारियों ने बताया कि भीड़ के दबाव के बीच कई लोग आगे बढ़ने की कोशिश में गिर गए। कुछ लोग अपनी जान बचाने के लिए भीड़ से बाहर भागने लगे। इस दौरान सड़क पर बड़ी संख्या में जूते-चप्पल बिखरे नजर आए। हंगामे में करीब एक दर्जन लोगों को मामूली चोटें आने की जानकारी सामने आई है। हालात बिगड़ते देख पुलिस को तुरंत सूचना दी गई।

कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची

भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग थानों से पुलिस बल मौके पर बुलाया गया। पुलिस ने लाउडस्पीकर और अन्य माध्यमों से लोगों से मौके से हटने और अपने घर लौटने की अपील की। लेकिन भीड़ लगातार बढ़ती रही। फिर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठियां चलाकर लोगों को पीछे हटाना पड़ा। काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने सड़क और दुकान के आसपास का इलाका खाली कराया। इसके बाद पुलिस ने इलाके में पैदल मार्च भी किया और लोगों से घर लौटने की अपील की।

दुकान बंद कर भाग गया मालिक

हंगामा बढ़ने के बाद दुकान मालिक रायस आलम ने दुकान पर ताला लगा दिया और मौके से चला गया। पुलिस को दुकान के बाहर उसका भाई मिला, जिसे पूछताछ के लिए थाने ले जाया गया। पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ऑफर का प्रचार किस तरह किया गया। साथ ही इतनी बड़ी संख्या में लोगों के जुटने के बावजूद सुरक्षा के लिए कोई व्यवस्था क्यों नहीं की गई।

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एक छोटे से जन्मदिन के ऑफर से शुरू हुई यह कहानी देखते ही देखते ऐसी भीड़ में बदल गई कि ₹16 की खरीदारी के लिए पहुंची भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को सड़क पर उतरना पड़ा। अधिकारी अब भगदड़ जैसे हालात पैदा करने के लिए आलम के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं।

Indian carmakers had flagged concerns about E20 fuel contamination: Reuters

Indian carmakers had flagged concerns about E20 fuel contamination: Reuters
Indian carmakers had flagged concerns about E20 fuel contamination: Reuters

Earlier this month, several media reports said the Society of Indian Automobile Manufacturers (SIAM) had urged the government to introduce mandatory chloride limits in fuel standards after high levels of chloride and moisture were found in E20 petrol. SIAM later withdrew the communication, saying some of the figures mentioned in it needed further verification.

The government has been trying to address growing concerns around E20 with support from the industry. Oil marketing companies (OMCs) have rejected claims of widespread E20 fuel contamination after conducting tests across the country. Brands such as Toyota, Maruti Suzuki and Hero MotoCorp have also publicly backed the E20 programme.

However, separate communications between industry executives investigated by Reuters show that earlier, Maruti Suzuki, Tata Motors and Mahindra had privately raised concerns about contamination in E20. The data compiled by these carmakers was the most extensive fuel testing since E20 was officially rolled out nationwide last year. Their emails reveal that the carmakers were concerned about contaminants such as chloride and moisture in the fuel, which they said were affecting vehicles, even as they publicly supported the government’s E20 rollout.

Data flags high chloride contamination, moisture content

The data reviewed by Reuters shows that the three automobile manufacturers had carried out detailed testing by collecting more than 250 fuel samples from petrol pumps across 21 states and Union Territories over a year. The tests found high chloride levels in many samples from 18 states, along with high moisture content. Interestingly, the emails reviewed by Reuters did not raise any concerns about the authenticity of the data. 

StateNumber of samplesChloride (ppm)
Uttar Pradesh361.2-175
Maharashtra3110-357
Delhi/NCR281.4-420
Tamil Nadu271.3-24.0
Kerala241.0-2.2
Punjab201.9-110
Karnataka151- 2.2
Rajasthan146.0-570
Madhya Pradesh114.1-550

Source: SIAM via Reuters.

The data showed chloride levels of 6 to 570 parts per million (ppm) in Rajasthan, 1.4 to 420ppm in New Delhi and 10 to 357ppm in Maharashtra. The government’s permissible limit is 3ppm.

High chloride levels in the fuel can corrode vehicle components, while high moisture content can cause a vehicle to stop working immediately after refuelling, SIAM had stated earlier. In group emails exchanged between Maruti, Tata, Mahindra and SIAM, a senior Maruti executive raised concerns about the high chloride readings and said the matter had even been privately discussed with the Ministry of Petroleum on July 26.

Moisture levels found 333 percent above limit

Additionally, the same data showed moisture levels of up to 13,000ppm in Andhra Pradesh and 12,500ppm in Uttar Pradesh, against the government’s permissible limit of 3,000ppm. The exact cause of the contamination is not known. However, SIAM said in its now-withdrawn letter that it had seen an increase in chloride levels since E20 was introduced and asked the government to direct OMCs to identify the root cause.

When asked about the private emails, SIAM told Reuters that the data was meant only for internal circulation, discussion and validation, and had been collected by a very small number of automakers. SIAM added that the communication was withdrawn because the testing basis and sample size were not enough to support firm conclusions and that it had been sent accidentally. The organisation stated further that it plans to conduct a proper scientific study.

As for the high moisture levels, SIAM’s letter said the cause could be poor maintenance of underground storage tanks and pipelines at petrol pumps.

Carmakers raise concerns over vehicle failures

In a July 26 email, a senior Maruti official said that current fuel injectors can tolerate a maximum chloride level of 1ppm, and keeping it below 1ppm in E20 would be in accordance with international standards and discussions with the petroleum ministry. Same is in line with discussion held with the petroleum ministry, he stated.

Meanwhile, a senior Mahindra official wrote that organic chloride was responsible for the rapid vehicle failures in recent times and could damage engines just within 200km. The executive said that most cases reported immediately after refuelling were due to organic chloride and added that Mahindra had “strong evidences” from fuel samples collected at retail outlets. Mahindra later said the conclusions drawn from its executive’s emails were “completely baseless and incorrect”. The company said the industry data was limited and preliminary and that it did not see any issues with E20. 

What does the government say?

The Ministry of Petroleum and Natural Gas did not respond to requests for comment made by Reuters. Petroleum Minister Hardeep Singh Puri said on Friday that OMCs had started “rigorous testing” at retail outlets to check for contamination two weeks before SIAM’s letter was received. According to Puri, only four cases of contamination had been found. OMCs, as mentioned earlier, said that their extensive testing had found no reason for alarm over fuel contamination.

इस एक आइडिया ने बचा दिए 10,000 पेड़ | FALDAAR Initiative | Revamp India Foundation | Uttar Pradesh

इस एक आइडिया ने बचा दिए 10,000 पेड़ | FALDAAR Initiative | Revamp India Foundation | Uttar Pradesh

हर साल लाखों पेड़ लगाए जाते हैं।
लेकिन उन्हें बचाने की ज़िम्मेदारी कौन लेता है?
उत्तर प्रदेश के 28 वर्षीय वैभव राठौर ने इसी सवाल का जवाब खोजा। उनकी संस्था Revamp India Foundation की ‘Faldaar’ पहल में पेड़ों को सिर्फ़ लगाया नहीं जाता, उनसे रिश्ता बनाया जाता है।
जब हर पौधे को एक पहचान मिली और हर बच्चे को उसकी ज़िम्मेदारी, तो नतीजा भी बदल गया।

40+ सरकारी स्कूल
10,000+ फलदार पेड़
करीब 75% सर्वाइवल रेट

आज ये पेड़ सिर्फ़ छाया और फल नहीं दे रहे, बल्कि बच्चों को ज़िम्मेदारी, टीमवर्क और प्रकृति से जुड़ाव भी सिखा रहे हैं।

लेकिन सफर अभी बाकी है।
कुछ पौधे आज भी जानवरों या ट्री गार्ड की कमी की वजह से नुकसान झेलते हैं।
अगर आप सिर्फ़ ₹200 का योगदान करते हैं, तो एक पौधे के लिए ट्री गार्ड लगाने में मदद कर सकते हैं।

Revamp India Foundation के साथ
आप वॉलंटियर बनकर भी इस मिशन से जुड़ सकते हैं।

Support Revamp India Foundation
Account Name: REVAMP INDIA FOUNDATION
Account Number: 00000041354317942
IFSC: SBIN0003752
UPI ID: revampindia@sbi
Volunteer: 9305716172

कभी-कभी बदलाव किसी बड़ी तकनीक से नहीं, बल्कि एक छोटे-से आइडिया से शुरू होता है।

क्या आपको लगता है कि हर स्कूल में ऐसी पहल होनी चाहिए? अपनी राय कमेंट में ज़रूर बताइए।:point_down:

@vaibhavrathoree

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