100 बच्चों को मुफ्त पढ़ा रहे 23 साल के कृष्णा | Aapka Krishna | Free Education | Rajasthan

100 बच्चों को मुफ्त पढ़ा रहे 23 साल के कृष्णा | Aapka Krishna | Free Education | Rajasthan

कृष्णा ने बचपन से ही एयरफोर्स में जाकर देश की सेवा का सपना देखा था, लेकिन एक्सीडेंट के बाद ऐसा हो ना सका। लेकिन 23 की उम्र में उन्होंने हार मानने के बजाय देश सेवा का एक नया रास्ता चुन लिया।

आज राजस्थान का ये लड़का अपने गाँव के 100 बच्चों को मुफ्त पढ़ा रहा है, ताकि जिन हाथों में कभी मजबूरी ने काम थमाया था, उनमें कल किताबें हों और अपने सपने चुनने की आज़ादी हो।

कृष्णा का सफर याद दिलाता है कि देश सेवा सिर्फ वर्दी पहनकर नहीं होती। कभी-कभी एक बच्चे को पढ़ने का मौका देना भी देश का भविष्य संवारना होता है। :heart:

आप भी कृष्णा से पढ़ने वाले एक बच्चे की मदद करें: ₹130 = 1 Stationery Kit & 1 Meal
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Kareena Kapoor: एक्टिंग की वजह से स्कूल ड्रॉप करने का करीना कपूर को है अफसोस, 11वीं क्लास के बाद नहीं की पढ़ाई

Kareena Kapoor: करीना कपूर ने माना कि उन्हें एक्टिंग के लिए स्कूल छोड़ने का अफसोस है। करीना कपूर ने साल 2000 में अभिषेक बच्चन के साथ फिल्म ‘रिफ्यूजी’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। फिल्म की शूटिंग के समय वह 19 साल की थीं और फिल्म रिलीज होने के बाद 20 साल की हो गईं। इसके बाद उन्होंने सिर्फ एक्टिंग पर ध्यान देने का फैसला किया।

हाल ही में पॉडकास्टर हनुमान दास के साथ बातचीत में करीना ने कहा, “मैंने अपनी पढ़ाई पूरी नहीं की और यह बात कहीं न कहीं मेरे मन में रह गई। हालांकि मेरे पास मौका था, लेकिन मैं फिल्मों में आ गई। 11वीं क्लास के बाद आगे पढ़ाई नहीं की। मुझे पता है कि बहुत से लोग इसका मजाक उड़ा सकते हैं या जो चाहें कह सकते हैं, लेकिन मैं एक एक्टर के तौर पर खुद को साबित करना चाहती थी। मैं बस अपने दिल की बात सुनना चाहती थी।”

उन्होंने कहा, “मुझे अपनी पढ़ाई पूरी न कर पाने का अफसोस है। इसीलिए मैंने अपने बेटों को भी यही समझाया है कि वे पहले अपनी पढ़ाई पूरी करें और फिर अपने मन की सुनें। जब UNICEF ने मुझसे भारत में लड़कियों की शिक्षा को सपोर्ट करने के बारे में बात की, तो मुझे यह बात बहुत गहराई से महसूस हुई, क्योंकि मुझे हमेशा से अपनी अधूरी पढ़ाई का अफसोस रहा है।”

करीना कपूर की पढ़ाई-लिखाई

एक्ट्रेस बनने से पहले, करीना ने मुंबई के जमनाबाई नर्सी स्कूल में पढ़ाई की और बाद में देहरादून के वेलहम गर्ल्स स्कूल गईं। कहा जाता है कि उन्होंने कुछ समय के लिए मुंबई के मिठीबाई कॉलेज में कॉमर्स की पढ़ाई भी की थी, लेकिन उन्होंने अपनी डिग्री पूरी नहीं की।

करीना ने हार्वर्ड समर स्कूल में माइक्रो-कंप्यूटर्स का तीन महीने का समर कोर्स भी किया था। इससे पहले, करीना ने बताया था कि एक्टिंग शुरू करने से पहले वह वकील बनने के बारे में सोच रही थीं। आज, करीना इंडस्ट्री की सबसे पॉपुलर एक्ट्रेसेस में से एक हैं।

करीना कपूर की आने वाली फ़िल्में

वहीं, काम की बात करें तो करीना को आखिरी बार 2024 में ‘सिंघम अगेन’ और ‘क्रू’ में देखा गया था। अब, करीना कपूर और पृथ्वीराज सुकुमारन मेघना गुलज़ार की फ़िल्म ‘दायरा’ के लिए साथ आ रहे हैं। यह फ़िल्म क्राइम और जुडिशियल सिस्टम पर आधारित है और भारत के कई मामलों से प्रेरित है।

यह फ़िल्म 18 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी। इस फ़िल्म में करीना और पृथ्वीराज पहली बार साथ नज़र आएंगे। फ़िल्म का हाल ही में रिलीज़ हुआ ट्रेलर फ़ैन्स को बहुत पसंद आया है और वे फ़िल्म देखने के लिए बेताब हैं।

शिक्षा को लेकर क्यों सड़क पर उतरने को मजबूर है Gen-Alfa 8 साल में 84 हजार स्कूल बंद!

शिक्षा को लेकर क्यों सड़क पर उतरने को मजबूर है Gen-Alfa 8 साल में 84 हजार स्कूल बंद!

84 thousand government schools closed in India

UDISE education data: देश की सबसे युवा पीढ़ी—Gen-Alfa (जनरेशन अल्फा)—आज किताबों के साथ-साथ अपने अधिकारों और बेहतर शिक्षा की मांग को लेकर सड़कों पर उतरने को मजबूर है। यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन (UDISE) के हालिया आंकड़ों ने देश की स्कूली शिक्षा प्रणाली की एक ऐसी तस्वीर पेश की है, जिसने नीति-निर्माताओं से लेकर आम जनता तक को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

एक तरफ कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के स्कूल ठीक करो अभियान ने ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों की बदहाली, शिक्षकों की कमी और डिजिटल सुविधाओं के अभाव को राष्ट्रीय मुद्दा बना दिया है, तो दूसरी तरफ सरकारी आंकड़ों ने पुष्टि कर दी है कि पिछले आठ वर्षों में देश के शिक्षा ढांचे में बड़ा संकुचन (Contraction) आया है।

84 thousand government schools closed in India

बड़ी चिंता : वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के मुताबिक, 3 से 17 वर्ष की आयु के लगभग 31 प्रतिशत पात्र बच्चे (करीब 11.1 करोड़) स्कूलों में नामांकित ही नहीं हैं। यह आंकड़ा 2018-19 से लगातार इसी स्तर पर बना हुआ है।

84 thousand government schools closed in India

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84 thousand government schools closed in India

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माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट और बजटीय आवंटन की चुनौती

छात्रों को उच्च स्तर तक स्कूल में बनाए रखना (Retention) एक बड़ी चुनौती बना हुआ है:

  • ड्रॉपआउट दर: माध्यमिक स्तर (Secondary level) पर ड्रॉपआउट दर 7% दर्ज की गई, जबकि प्राथमिक स्तर पर यह नगण्य है।
  • रिटेंशन रेट: माध्यमिक स्तर पर छात्रों को रोककर रखने की दर केवल 44% है—यानी आधे से ज्यादा छात्र माध्यमिक स्तर तक पहुंचते-पहुंचते शिक्षा छोड़ देते हैं।

शिक्षा बजट में बजटीय कटौती

सरकारी स्कूलों की संख्या और नामांकन में गिरावट का एक बड़ा कारण सार्वजनिक खर्च (Public Expenditure) में कमी भी है:

  • स्कूल शिक्षा व साक्षरता विभाग: केंद्रीय बजट में हिस्सेदारी FY2010 के 1.9% से घटकर FY2026 में 1.4% रह गई।
  • उच्च शिक्षा विभाग: बजटीय हिस्सेदारी 1.4% से घटकर 1.0% हो गई।

आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि भारत की स्कूली शिक्षा व्यवस्था एक गंभीर संकट और बड़े बदलाव के मुहाने पर खड़ी है। सरकारी स्कूलों का बंद होना, घटता नामांकन, बजट में कमी और डिजिटल असमानता ऐसे मुद्दे हैं, जो Gen-Alfa के भविष्य पर सवालिया निशान लगा रहे हैं। जब तक शिक्षा पर सार्वजनिक निवेश नहीं बढ़ेगा और बुनियादी ढांचे को आधुनिक तकनीकों से नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक 'हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा' का सपना अधूरा ही रहेगा।

CJP के दीपके ने लिखा शिक्षा मंत्रियों को पत्र, सरकारी स्कूलों की बदहाली पर उठाए 6 तीखे सवाल

CJP के दीपके ने लिखा शिक्षा मंत्रियों को पत्र, सरकारी स्कूलों की बदहाली पर उठाए 6 तीखे सवाल

Deepak letter to Education Ministers

Deepak letter to the Education Ministers: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दीपके ने देश और राज्यों में सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए संबंधित शिक्षा मंत्री को एक पत्र लिखा है। पत्र में आजादी के 80 साल बाद भी स्कूलों में पीने के पानी, शौचालय और डेस्क जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव पर सवाल उठाए गए हैं।

सरकारी स्कूलों की स्थिति चिंताजनक

CJP ने सरकारी शिक्षा व्यवस्था की स्थिति को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दीपके ने सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों को लिखे पत्र में कहा कि स्वतंत्रता के आठ दशकों बाद भी बच्चे मूलभूत सुविधाओं के बिना पढ़ाई करने को मजबूर हैं। पत्र में उल्लेख किया गया है कि सोशल मीडिया पर सरकारी स्कूलों की जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे बेहद चिंताजनक हैं। बच्चों को सुरक्षित पेयजल, चालू शौचालय, उचित कक्षाएं और बैठने के लिए बेंच तक उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं।

दीपके के 6 प्रमुख सवाल

  • पिछले पांच वर्षों में राज्य के कितने सरकारी स्कूलों का जीर्णोद्धार (Renovation) किया गया है और कितनों में मरम्मत या पूर्ण सुधार की आवश्यकता है?
  • वर्तमान में शिक्षकों के कितने पद स्वीकृत हैं, कितने भरे गए हैं और कितने पद खाली पड़े हैं?
  • बीते पांच वर्षों में सरकारी स्कूलों के लिए कितना बजट आवंटित किया गया और उसमें से वास्तव में कितना पैसा खर्च हुआ?
  • हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए कितने अतिरिक्त सरकारी स्कूलों की आवश्यकता है?
  • सरकारी स्कूल के शिक्षकों को शिक्षण कार्य के अलावा कौन-कौन से गैर-शैक्षणिक (Non-teaching) काम सौंपे गए हैं?
  • कितने सरकारी स्कूलों में वर्तमान में कंप्यूटर, डिजिटल लर्निंग, साफ शौचालय और खेल सुविधाएं उपलब्ध हैं?

पत्र के अंत में CJP ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा किसी राजनीति या किसी एक सरकार का नहीं है, बल्कि देश के बच्चों के भविष्य से जुड़ा है। उन्होंने मांग की कि सरकार इन जानकारियों को सार्वजनिक करे और बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए तत्काल कदम उठाए ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। ALSO READ: तमिलनाडु CM विजय के यू-टर्न पर भड़के CJP नेता अभिजीत दीपके, कहा डर लग रहा है तो सुधारो व्यवस्था

सीजेपी टीम पर राजस्थान में हुआ था हमला

उल्लेखनीय है कि हाल ही में राजस्थान के जयपुर जिले के रामपुरा-कंवरपुरा गांव में 21 अगस्त 2026 को CJP के कार्यकर्ताओं और समर्थकों पर कथित रूप से हमला और पथराव हुआ था। CJP की टीम अपने 'स्कूल ठीक करो' अभियान के तहत इस सरकारी स्कूल की स्थिति का निरीक्षण करने पहुंची थी। पार्टी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि यह सरकारी स्कूल सालों से एक मवेशी शेड में चलाया जा रहा था। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और सह-संयोजक आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि स्कूल पहुंचने से पहले ही स्थानीय उपद्रवियों और विरोधियों ने उनकी गाड़ियों पर पथराव किया, गाड़ियों के शीशे तोड़े और कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की।

PM-YASASVI Scholarship: पीएम यशस्वी स्कॉलरशिप के लिए कक्षा 9 से 12 के छात्र कर सकते हैं आवेदन, जानें आवेदन का तरीका और लास्ट डेट

PM-YASASVI Scholarship: कक्षा 9 से 12 तक के बहुत छात्रों के लिए अपनी पढ़ाई पैसों की कमी के चलते जारी रखना मुश्किल होता है। इस वजह से असंख्य छात्र हर साल 10वीं या 12वीं कक्षा तक की शिक्षा पूरी करने से वंचित रह जाते हैं। पीएम यशस्वी छात्रवृत्ति ऐसे छात्रों को शिक्षा की उनकी मंजिल तक पहुंचाने का माध्यम बन सकती है। यह स्कॉलरशिप केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा दी जाती है। यह छात्रवृत्ति अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (EBC), और विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियों (DNT) के योग्य छात्रों को आर्थिक मदद देती है। इस स्कीम का मकसद इन समुदायों के छात्रों को बिना किसी आर्थिक परेशानी के अपनी पढ़ाई जारी रखने में मदद करना है। पात्र छात्र 31 अगस्त 2026 तक राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (एनएसपी) के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।

कक्षा 9 से 12 के लिए स्कॉलरशिप सपोर्ट

पीएम यशस्वी स्कीम कक्षा 9 से 12 में पढ़ने वाले योग्य छात्रों को सहयोग प्रदान करती है। इस स्कॉलरशिप का मकसद पढ़ाई से जुड़े खर्चों को पूरा करने और छात्रों को उनकी सेकेंडरी और हायर सेकेंडरी पढ़ाई के दौरान मदद करना है। इस आर्थिक मदद का इस्तेमाल लागू गाइडलाइन के अनुसार, ट्यूशन फीस, हॉस्टल चार्ज और दूसरी पढ़ाई की जरूरतों सहित पढ़ाई से जुड़े खर्चों के लिए किया जा सकता है। सरकार ने कहा है कि इस स्कीम का मकसद पिछड़े बैकग्राउंड के मेधावी छात्रों को अपनी पढ़ाई जारी रखने और अपने पढ़ाई के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

ऑनलाइन योग्यता चेक करें छात्र

पीएम यशस्वी योजना के तहत चयन प्रक्रिया ऑनलाइन होती है। इस प्रक्रियाका मकसद पारदर्शिता पक्का करना और योग्य छात्रों को स्कॉलरशिप के लिए अप्लाई करने का बराबर मौका देना है। केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्रालय ने हाल ही में एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस छात्रवृत्ति योजना के बारे में डिटेल्स शेयर कीं और छात्रों और अभिभावकों से गाइडलाइंस को ध्यान से पढ़ने को कहा। उन्हें और जानकारी पाने में मदद के लिए एक QR कोड भी दिया गया।

नोट करें आवेदन और वेरिफिकेशन की तारीख

इस स्कॉलरशिप के लिए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर नए और नवीनीकरण (रिन्यूअल) दोनों श्रेणी के छात्र 1 जून 2026 से 31 अगस्त 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद शिक्षण संस्थान 15 सितंबर 2026 तक आवेदनों का सत्यापन करेंगे। मंत्रालय स्तर पर अंतिम सत्यापन 30 नवंबर 2026 तक इस काम को पूरा किया जाएगा।

पीएम यशस्वी योजना के लिए आवेदन कैसे करें?

  • नेशनल स्कॉलरशिप की वेबसाइट scholarships.gov.in पर जाएं।
  • New Registration पर क्लिक करें, दिशानिर्देश पढ़ें और रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरें।
  • इसके बाद User ID और Password मिल जाएगा।
  • एनएसपी पोर्टल पर आईडी और पासवर्ड से Log-in करें।
  • स्कॉलरशिप चुनें और आवेदन फॉर्म भरें।
  • डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें और सबमिट करें।
  • इसके बाद स्कूल के नोडल अधिकारी ऑनलाइन वेरिफिकेशन करेंगे।
  • बाद में राज्य सरकार भी इसकी ऑनलाइन पुष्टि कर देगी।

पीएम यशस्वी योजना के लिए इन दस्तावेजों की जरूरत

  • आधार कार्ड
  • पासपोर्ट साइज फोटो
  • एजुकेशन सर्टिफिकेट
  • इनकम सर्टिफिकेट
  • निवास प्रमाण पत्र
  • जाति/समुदाय प्रमाण पत्र
  • विकलांगता प्रमाण पत्र, यदि लागू हो
  • बैंक खाता विवरण

UP Board Exam 2027: नए पैटर्न का होगा यूपी बोर्ड 12वीं के छात्र का प्रश्न पत्र, 80 नंबर की लिखित परीक्षा में हर यूनिट से आएंगे सवाल

Government School के 1,500 बच्चों ने अपने हक़ के लिए उठाई आवाज़ | Gen Alpha Protest

स्कूल में पढ़ाई होनी चाहिए, आंदोलन नहीं।
लेकिन जब बच्चों को साफ़ पानी, शौचालय, पंखे और शिक्षक जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए सड़क पर उतरना पड़े,
तो सवाल बच्चों पर नहीं, सिस्टम पर उठता है।
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर से शुरू हुई यह आवाज़ अब बिहार, राजस्थान, महाराष्ट्र और देश के कई हिस्सों तक पहुँच रही है।
क्या आपको लगता है कि बच्चों को अपने अधिकारों के लिए इस तरह प्रदर्शन करना पड़ना चाहिए?
अपनी राय कमेंट में ज़रूर बताइए।

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AI की ताकत से घर बैठे पाई 1.06 करोड़ की नौकरी! जानिए आंध्र प्रदेश के इस युवक ने कैसे हासिल किया यह मुकाम

आंध्र प्रदेश के एक दर्जी के बेटे ने कनाडा की कंपनी Fabrantic AI में AI इंजीनियर के तौर पर 1.06 करोड़ रुपये की रिमोट जॉब हासिल करके सफलता की एक प्रेरणादायक कहानी लिखी है।

अखिलेश माल्थी कौन हैं?

आदित्य कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग से B.Tech (डेटा साइंस) 2026 के ग्रेजुएट अखिलेश माल्थी ने कैंपस प्लेसमेंट के ज़रिए यह उपलब्धि हासिल की। ​​इससे साबित होता है कि दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत से सबसे मुश्किल हालात का भी सामना किया जा सकता है।

अखिलेश एक साधारण परिवार से आते हैं। उनके पिता एक दर्जी हैं जो सुन और बोल नहीं सकते, जबकि उनकी माँ सिलाई के काम में मदद करके परिवार का सहारा बनती हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद, उनके माता-पिता ने कभी भी अपनी मुश्किलों को बेटे की पढ़ाई में बाधा नहीं बनने दिया। उन्होंने हमेशा उन्हें पढ़ाई करने और बेहतर भविष्य बनाने के लिए प्रोत्साहित किया।

उनके माता-पिता की मेहनत और त्याग का फल अब मिल गया है। अखिलेश को Fabrantic AI में रिमोट AI इंजीनियर की नौकरी मिली है, जिसका सालाना पैकेज ₹1.06 करोड़ है। यह उनके परिवार के लिए ज़िंदगी बदलने वाला पल है।

X पर किए गए पोस्ट में लिखा है, “बहुत गरीब बैकग्राउंड से आने वाले और एक दर्ज़ी के बेटे, अखिलेश को Fabrantic AI में AI इंजीनियर के तौर पर ₹1.06 करोड़ का पैकेज मिला है।” पोस्ट में आगे कहा गया है, “आज कैंपस प्लेसमेंट के ज़रिए अखिलेश को कनाडा की कंपनी Fabrantic AI में ₹1.06 करोड़ की रिमोट जॉब मिली है।”

सोशल मीडिया पर उनकी इस कामयाबी की खूब तारीफ़ हो रही है। कई लोग इसे इस बात का बेहतरीन उदाहरण मान रहे हैं कि कैसे शिक्षा, लगन और माता-पिता का साथ ज़िंदगी बदल सकता है। एक यूजर ने लिखा, “₹1.06 करोड़ और वो भी रिमोट जॉब! वाह, समय और उनकी मेहनत ने सच में उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बदल दी।”

एक और व्यक्ति ने कहा, “गरीब बैकग्राउंड से आकर 1 करोड़ का पैकेज मिलना बहुत बड़ी बात है।”तीसरे कमेंट करने वाले ने लिखा, “पैकेज से भी ज़्यादा अच्छी बात यह देखना है कि कैसे उनकी मेहनत ने उनके परिवार का भविष्य बदल दिया… आख़िरकार उनके त्याग का फल मिल ही गया।”

एक और व्यक्ति ने कहा, “B.Tech के दौरान हमारे पास काफ़ी समय होता है… अगर हम रोज़ाना कम से कम 2 घंटे नई स्किल्स सीखने में लगाएं… तो हम कुछ असाधारण हासिल कर सकते हैं।”

छात्रों को दया नहीं, पीएम मोदी की माफी चाहिए… पेपर लीक मुद्दे पर राहुल गांधी का PM पर तीखा हमला

Rahul Gandhi attacks PM Modi: देश में पेपर लीक और परीक्षाओं में धांधली के मुद्दों को लेकर विपक्ष के नेता और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है। राहुल गांधी ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म

Rahul Gandhi attacks PM Modi: देश में पेपर लीक और परीक्षाओं में धांधली के मुद्दों को लेकर विपक्ष के नेता और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है। राहुल गांधी ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक भावुक और तीखी पोस्ट साझा करते हुए कहा कि देश के लाखों मेहनती छात्रों को प्रधानमंत्री की किसी 'क्षमा' या दया की जरूरत नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री को खुद देश के छात्रों और उनके परिवारों से माफी मांगनी चाहिए।

 

विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हाल के समय में देश की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में हुए पेपर लीक प्रकरणों को लेकर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि लाखों युवाओं का भविष्य दांव पर लगा है और कई परिवार इस अव्यवस्था के कारण पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं।

क्या कहा राहुल गांधी ने?

राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में कहा कि अपने बच्चों को खोने वाले माता-पिता के आंसू, उनका बिलखना – इससे बड़ा कोई दुःख नहीं होता। ये एक ग़म उनके साथ हमेशा जिंदा रहेगा और साथ ही रह जाते हैं इस टूटी और भ्रष्ट शिक्षा व्यवस्था के बारे में कई सवाल। पेपर लीक, रद्द परीक्षाएं। सालों की तैयारी एक पल में बर्बाद – हमारे छात्रों को उस सिस्टम में ईमानदारी से मेहनत करने के लिए कहा जाता है जो खुद बेईमान है। और उसके बाद भी प्रधानमंत्री की ये हिम्मत है कि वो छात्रों को माफ़ करने की बात करते हैं। ALSO READ: 'Gen Z को डराकर चुप नहीं करा सकते': FIR पर राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर हमला, दिल्ली पुलिस के एक्शन पर उठाए सवाल

 

क्या वो एक भी शोकाकुल परिवार से मिले जिन्होंने अपने बच्चे को खोया है या उन लोगों से जिनकी जमा पूंजी, ज़िंदगी, वक्त और सपने सब पेपर लीक से छीन लिए गए? जवाब है नहीं! भारत के छात्रों को प्रधानमंत्री की क्षमा की ज़रूरत नहीं – मोदी जी को उनसे माफ़ी मांगनी चाहिए। ALSO READ: अमित शाह को जाना होगा, छात्रों पर चलवाईं गोलियां, गृह मंत्री को हटाए सरकार, प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले राहुल गांधी

पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना

राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में उन लाचार माता-पिता के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं, जिन्होंने पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने से उपजे मानसिक तनाव के कारण अपने बच्चों को खो दिया है। राहुल ने कहा कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक नाकामी नहीं है, बल्कि लाखों युवाओं के सपनों और उनके संघर्ष के साथ खिलवाड़ है। इसमे कोई संदेह नहीं कि देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा कराने वाली एजेंसियों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कौन सा है भारत का सबसे महंगा बोर्डिंग स्कूल? जहां पढ़ाई के साथ दुनिया की भी होती है सैर

स्कूल का नाम सुनते ही क्लासरूम और किताबें याद आ जाती है, लेकिन भारत में एक ऐसा बोर्डिंग स्कूल भी है, जहां पढ़ाई के साथ हर दिन हिमालय के खूबसूरत नजारे देखने को मिलते है। उत्तराखंड के मसूरी में वुडस्टॉक स्कूल अपनी शानदार लोकेशन और पहचान के कारण दुनियाभर में पॉपुलर है।

 

हिमालय की गोद में कैंपस (Himalayan Location)

यह स्कूल मसूरी में हिमालय की वादियों के बीच है। चारों ओर हरियाली, पहाड़ और शांत माहौल स्टूडेंट को प्रकृति के करीब रहकर सीखने का मौका देता है।

 

इतिहास और प्रकृति का संगम (Heritage & Nature)

वुडस्टॉक स्कूल की पहचान सिर्फ उसकी पढ़ाई से नहीं, बल्कि उसकी बिल्डिंग, हरियाली और शांत माहौल से भी है। यही वजह है कि यह भारत के सबसे खास बोर्डिंग स्कूलों में गिना जाता है।

दुनियाभर में पहचान (Global Recognition)

वुडस्टॉक स्कूल को दुनिया के सबसे खूबसूरत बोर्डिंग स्कूलों में शामिल किया गया है। इसकी शानदार लोकेशन और हिस्टोरिक कैंपस ने इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है।

 

 

170 साल से ज्यादा पुराना इतिहास (Rich History)

करीब 172 साल पुराने इस स्कूल की शुरुआत एक छोटे इंस्टिट्यूट से हुई थी। समय के साथ यह भारत के इंटरनेशनल बोर्डिंग स्कूलों में शामिल हो गया।

वर्ल्ड-क्लास पढ़ाई (International Education)

यहां इंटरनेशनल बैकलॉरिएट (IB) पढ़ाया जाता है, जो दुनिया की कई बड़ी यूनिवर्सिटी में मान्य है। पढ़ाई के साथ स्टूडेंट के डेवलपमेंट पर भी ध्यान दिया जाता है।

दुनियाभर के छात्र (Diverse Community)

स्कूल में कई देशों के छात्र पढ़ते हैं। अलग-अलग कल्चर के बीच पढ़ाई करने से बच्चों को नई सोच बनाने का मौका मिलता है।

किताबों से आगे की सीख (Beyond Classroom)

यहां सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि स्पोर्ट्स, म्यूजिक, थिएटर, आउटडोर एक्टिविटी, पर्यावरण संरक्षण और भी कई एक्टिविटीज पर भी ध्यान दिया जाता है।