Kareena Kapoor: एक्टिंग की वजह से स्कूल ड्रॉप करने का करीना कपूर को है अफसोस, 11वीं क्लास के बाद नहीं की पढ़ाई

Kareena Kapoor: करीना कपूर ने माना कि उन्हें एक्टिंग के लिए स्कूल छोड़ने का अफसोस है। करीना कपूर ने साल 2000 में अभिषेक बच्चन के साथ फिल्म ‘रिफ्यूजी’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। फिल्म की शूटिंग के समय वह 19 साल की थीं और फिल्म रिलीज होने के बाद 20 साल की हो गईं। इसके बाद उन्होंने सिर्फ एक्टिंग पर ध्यान देने का फैसला किया।

हाल ही में पॉडकास्टर हनुमान दास के साथ बातचीत में करीना ने कहा, “मैंने अपनी पढ़ाई पूरी नहीं की और यह बात कहीं न कहीं मेरे मन में रह गई। हालांकि मेरे पास मौका था, लेकिन मैं फिल्मों में आ गई। 11वीं क्लास के बाद आगे पढ़ाई नहीं की। मुझे पता है कि बहुत से लोग इसका मजाक उड़ा सकते हैं या जो चाहें कह सकते हैं, लेकिन मैं एक एक्टर के तौर पर खुद को साबित करना चाहती थी। मैं बस अपने दिल की बात सुनना चाहती थी।”

उन्होंने कहा, “मुझे अपनी पढ़ाई पूरी न कर पाने का अफसोस है। इसीलिए मैंने अपने बेटों को भी यही समझाया है कि वे पहले अपनी पढ़ाई पूरी करें और फिर अपने मन की सुनें। जब UNICEF ने मुझसे भारत में लड़कियों की शिक्षा को सपोर्ट करने के बारे में बात की, तो मुझे यह बात बहुत गहराई से महसूस हुई, क्योंकि मुझे हमेशा से अपनी अधूरी पढ़ाई का अफसोस रहा है।”

करीना कपूर की पढ़ाई-लिखाई

एक्ट्रेस बनने से पहले, करीना ने मुंबई के जमनाबाई नर्सी स्कूल में पढ़ाई की और बाद में देहरादून के वेलहम गर्ल्स स्कूल गईं। कहा जाता है कि उन्होंने कुछ समय के लिए मुंबई के मिठीबाई कॉलेज में कॉमर्स की पढ़ाई भी की थी, लेकिन उन्होंने अपनी डिग्री पूरी नहीं की।

करीना ने हार्वर्ड समर स्कूल में माइक्रो-कंप्यूटर्स का तीन महीने का समर कोर्स भी किया था। इससे पहले, करीना ने बताया था कि एक्टिंग शुरू करने से पहले वह वकील बनने के बारे में सोच रही थीं। आज, करीना इंडस्ट्री की सबसे पॉपुलर एक्ट्रेसेस में से एक हैं।

करीना कपूर की आने वाली फ़िल्में

वहीं, काम की बात करें तो करीना को आखिरी बार 2024 में ‘सिंघम अगेन’ और ‘क्रू’ में देखा गया था। अब, करीना कपूर और पृथ्वीराज सुकुमारन मेघना गुलज़ार की फ़िल्म ‘दायरा’ के लिए साथ आ रहे हैं। यह फ़िल्म क्राइम और जुडिशियल सिस्टम पर आधारित है और भारत के कई मामलों से प्रेरित है।

यह फ़िल्म 18 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी। इस फ़िल्म में करीना और पृथ्वीराज पहली बार साथ नज़र आएंगे। फ़िल्म का हाल ही में रिलीज़ हुआ ट्रेलर फ़ैन्स को बहुत पसंद आया है और वे फ़िल्म देखने के लिए बेताब हैं।

Nepal Flood News: नेपाल की उस लड़की की कहानी जिसके घर के 17 लोग विनाशकारी बाढ़ में मारे गए

Nepal Flood News: नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने हजारों परिवारों की जिंदगी पूरी तरह बदल दी है। हिमालयी क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में से एक रासुवा में तबाही का मंजर अभी भी साफ दिखाई दे रहा है। घर, सड़कें और पुल बह चुके हैं। बड़ी संख्या में परिवार अपने घरों से विस्थापित होकर अस्थायी राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। इस त्रासदी के बीच एक युवती की कहानी ने इस आपदा की भयावहता को सामने ला दिया है।

CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, रासुवा के सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में रहने वाली एक युवती ने अपने परिवार के 17 सदस्यों को खो दिया। उसका घर भी बाढ़ में बह गया। उसके पास अब अपने परिवार की यादों के तौर पर सिर्फ मोबाइल फोन में मौजूद तस्वीरें बची हैं। नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,100 के पार हो गई है।

एक झटके में पूरा परिवार उजड़ गया

कॉपिला तमांग नाम की इस युवती के परिवार ने इससे पहले 2015 के विनाशकारी भूकंप की त्रासदी भी झेली थी। उस आपदा में उनका घर तबाह हुआ था। लेकिन परिवार ने दोबारा जिंदगी शुरू की और नया घर बनाया। इस बार बाढ़ ने उस नए घर को भी नहीं छोड़ा। अमेरिकी चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ में उनकी मां, बहन, दादी समेत परिवार के कुल 17 सदस्य मारे गए। इनमें महज एक महीने का एक बच्चा भी शामिल था।

वापस लौटने पर सबकुछ बर्बाद!

कॉपिला उस समय काठमांडू में थीं। जैसे ही उन्हें पहाड़ी इलाके में बाढ़ आने और परिवार के फंसने की खबर मिली, वह वापस लौट गईं। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उन्होंने CNN से कहा कि उन्हें बेहद अकेलापन महसूस हो रहा है। परिवार के छोटे बच्चे के लिए यह त्रासदी और भी मुश्किल है। उनका सात साल का छोटा भाई अभी यह समझ नहीं पा रहा कि उसकी मां अब वापस नहीं आएगी। कॉपिला ने कहा कि अब उसे अपने छोटे भाई के लिए खुद मजबूत बनना होगा।

राहत शिविर में रात होते ही सताने लगता है डर

बाढ़ से बचाए गए और विस्थापित परिवारों को फिलहाल अस्थायी शिविरों, स्कूलों और अधूरी इमारतों में शरण दी गई है। लेकिन यहां पहुंचने के बाद भी लोगों को सुरक्षा का भरोसा नहीं मिल पा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, कई परिवारों को अब भी डर है कि कहीं दोबारा बाढ़ न आ जाए। रात में जब भी पानी बढ़ने या नई बाढ़ की चेतावनी मिलती है, कुछ लोग सुरक्षित ऊंचाई की तलाश में जंगल और पहाड़ी इलाकों की ओर चले जाते हैं।

कई विस्थापित लोग खुले या अधूरे भवनों की छतों पर रात गुजार रहे हैं। एक 17 वर्षीय युवक ने सीएनएस से बातचीत में बताया कि उसके दो छोटे भाई-बहन भी बाढ़ में मारे गए। राहत शिविरों में रात के समय लोग अपने परिवार के सदस्यों को याद कर रोते हैं। कई लोगों के लिए नींद तक मुश्किल हो गई है।

13 साल की बच्ची भी बाढ़ के बीच फंसी

नेपाल की इस आपदा में बच्चों की मुश्किलें भी बेहद गंभीर हैं। एक 13 वर्षीय बच्ची ने बताया कि बाढ़ आने के समय वह अपने परिवार से अलग हो गई थी। उसे कुछ समय तक यह तक पता नहीं था कि उसके माता-पिता कहां हैं। UNICEF के अनुसार, 26 अगस्त को आई बाढ़ से नेपाल के रासुवा, नुवाकोट और धादिंग इलाकों में कम से कम 17,000 बच्चे प्रभावित हुए हैं।

इस विनाशकारी तबाही में कई स्कूल पूरी तरह नष्ट हो गए हैं। हजारों बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई है। एक अन्य मामले में स्कूल से लौटते समय बाढ़ की चपेट में आए बच्चों को अपनी जान बचाने के लिए ऊंचे स्थानों की ओर भागना पड़ा। कुछ बच्चों ने पेड़ों पर चढ़कर अपनी जान बचाई।

लोगों के सामने सिर्फ घर नहीं, पूरी जिंदगी दोबारा बसाने की चुनौती

इस बाढ़ ने नेपाल के प्रभावित इलाकों में लोगों से सिर्फ उनके घर और सामान ही नहीं छीने। बल्कि कई परिवारों के पूरे के पूरे सदस्य खत्म हो गए। कई लोगों को अभी तक अपने लापता परिजनों के शव नहीं मिले हैं, जिससे उनके लिए इस त्रासदी को स्वीकार करना और भी मुश्किल हो गया है।

CNN के अनुसार, कुछ परिवारों के लापता सदस्य अभी तक आधिकारिक लापता लोगों की लिस्ट में भी दर्ज नहीं हो पाए थे। अब राहत शिविरों में रहने वाले लोगों की सबसे बड़ी चिंता यही है कि अगली रात सुरक्षित होगी या फिर एक और बाढ़ उन्हें अपना सब कुछ छोड़कर भागने पर मजबूर कर देगी। उनके पास घर लौटने के लिए कई जगह घर ही नहीं बचे हैं।

मृतकों की संख्या 1,100 के पार

नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या बुधवार को बढ़कर 1,127 हो गई। हिमालयी क्षेत्र में आई इस आपदा के एक सप्ताह बाद भी बचावकर्मी हजारों लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं। नेपाल पुलिस के अनुसार, चितवन से 348, नवलपरासी पूर्व से 217, नवलपरासी पश्चिम से 190 और नुवाकोट से 155 शव बरामद किए गए हैं। इसी तरह गोरखा से 66, धादिंग से 59, रसुवा से 45 और तनाहूं से 38 शव बरामद हुए हैं।

पुलिस ने बताया कि 1,113 शवों का पोस्टमार्टम और कानूनी पहचान की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। जबकि 95 शव परिजनों को सौंपे जा चुके हैं। लापता परिजनों की पहचान में परिवारों की मदद के लिए 911 अज्ञात शवों का विवरण नेपाल पुलिस की वेबसाइट पर अपलोड किया गया है। पुलिस के मुताबिक, अब तक सुरक्षा बलों ने प्रभावित इलाकों से 6,541 लोगों को सुरक्षित निकाला है। जबकि 4,858 लापता लोगों की तलाश अभी जारी है।

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अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में 7,912 पुलिसकर्मियों को तैनात किया है।  नेपाल-तिब्बत सीमा के निकट 26 अगस्त को बर्फ और चट्टानों के ढहने या हिमस्खलन के कारण अचानक बाढ़ आ गई थी। इस बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों में भारी तबाही मचाई थी।

मां मान चुकी थी कि बेटा नहीं रहा फिर नेपाल बाढ़ के बीच हुआ चमत्कार! 8 साल के मासूम ने पेड़ पर चढ़ यूं बचा ली थी अपनी जान

नेपाल में आई भयानक बाढ़ ने हजारों परिवारों की जिंदगी बदलकर रख दी है। इस तबाही में कई परिवार अपनों से बिछड़ गए हैं। वहीं इस त्रासदी में कई बच्चे भी प्रभावित हुए है। वहीं इस बाढ़ के बीच 8 साल के जोयाल की कहानी काफी वायरल हो रही है। नेपाल में आई भयानक बाढ़ से बचने के लिए 8 साल के जोयाल जंगल की ओर भाग गया और कुछ समय तक पेड़ों पर चढ़कर अपनी जान बचाई। इस दौरान उसकी मां बेहद परेशान थी। बाद में वह आखिरकार अपनी मां से मिल गया। लंबे इंतजार के बाद बच्चे के सुरक्षित मिलने से परिवार ने राहत की सांस ली है। आइए जानते हैं पूरी कहानी

सुरक्षित निकाला गया बाहर

बाढ़ से प्रभावित नेपाल के रसुवा जिले से जोयाल घाले को हेलिकॉप्टर की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला गया। जोयाल के पैर में चोट लगी थी और चेहरे पर भी कई कट और चोट के निशान थे। उसकी 28 वर्षीय मां मैटी माया तमांग पूरे दिन राहत शिविरों और लोगों को जुटाने वाली जगहों पर अपने दोनों बेटों को तलाशती रहीं। काफी समय तक बच्चों का कोई पता नहीं चलने पर उन्हें डर सताने लगा था कि शायद दोनों की बाढ़ में जान चली गई है।

कैसे पता चला बेटा जिंदा है

मैटी माया तमांग ने रॉयटर्स को बताया, “मुझे लगने लगा था कि मेरे दोनों बच्चे अब इस दुनिया में नहीं हैं। मैं सिर्फ रो रही थी और खुद को संभाल नहीं पा रही थी।” बाद में उन्हें पता चला कि उनका बेटा जोयाल जिंदा है। रॉयटर्स की पत्रकार सहाना बजराचार्य ने उनसे संपर्क किया और बताया कि वह पास के नुवाकोट के एक अस्पताल में जोयाल से मिली थीं। जब तमांग को पता चला कि जोयाल जिंदा है और उसे इलाज के लिए काठमांडू ले जाया गया है, तो उन्हें इस बात पर यकीन ही नहीं हुआ। उन्होंने कहा, “जब आपने बताया कि आपको पता है कि जोयाल कहां है, तो मुझे विश्वास नहीं हुआ। मैंने तो पहले ही उम्मीद छोड़ दी थी कि मैं उसे कभी ढूंढ पाऊंगी।” तमांग ने कहा, “जब मुझे अपने बड़े बेटे के बारे में पता चला, तो लगा जैसे मेरी जिंदगी वापस मिल गई हो।” तमांग को उनका छोटा बेटा भी सुरक्षित मिल चुका था।

हर तरफ फैले थे कीचड़

बुधवार सुबह जोयाल और उसका भाई स्कूल की गाड़ी से स्कूल गए थे, जबकि उनकी मां घर पर बुनाई का काम कर रही थीं। तभी उन्हें भूकंप जैसी तेज आवाज सुनाई दी। तमांग तुरंत स्कूल की ओर भागीं, लेकिन वहां पहुंचकर वह हैरान रह गईं। उन्होंने बताया, “समझ ही नहीं आ रहा था कि स्कूल कहां है और बाजार कहां था। हर तरफ सिर्फ पानी, पत्थर और कीचड़ नजर आ रहा था।” बाढ़ में स्कूल की पूरी इमारत तबाह हो गई थी। लेकिन, जोयाल किसी तरह अपनी जान बचाने में कामयाब रहा। बाद में उसने बचावकर्मियों को बताया कि जब बाढ़ आई, तब वह पढ़ाई कर रहा था और अचानक चारों तरफ “बहुत ज्यादा अंधेरा” छा गया।

करीब 17 हजार बच्चे हुए प्रभावित

बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ता देख जोयाल अपने एक दोस्त के साथ स्कूल से निकलकर पास के जंगल में चला गया। दोनों बच्चों ने पानी से बचने के लिए पेड़ों पर चढ़कर शरण ली। जब आठ साल के जोयाल से पूछा गया कि क्या उस समय उसे डर लगा था, तो उसने सिर्फ सिर हिलाकर “नहीं” कहा। जोयाल और उसका भाई भी उन हजारों बच्चों में शामिल हैं जो नेपाल में आई बाढ़ के कारण मुश्किल में फंस गए। यूनिसेफ के मुताबिक, रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जिलों में करीब 17 हजार बच्चे बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। संस्था नेपाल सरकार के साथ मिलकर ऐसे बच्चों की जानकारी जुटा रही है जो अपने परिवार से अलग हो गए हैं। इन बच्चों की पहचान कर उन्हें रजिस्टर किया जा रहा है और उनके परिवारों से मिलाने की कोशिश की जा रही है।

बता दें, लांगटांग लिरुंग पहाड़ के पास ग्लेशियर का एक हिस्सा अचानक टूट गया, जिससे बाढ़ आ गई। इसके बाद बर्फ और पत्थर तेजी से नीचे आने लगे और घाटी में पानी, कीचड़ और मलबा भर गया