Nepal Flood News: नेपाल की उस लड़की की कहानी जिसके घर के 17 लोग विनाशकारी बाढ़ में मारे गए

Nepal Flood News: नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने हजारों परिवारों की जिंदगी पूरी तरह बदल दी है। हिमालयी क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में से एक रासुवा में तबाही का मंजर अभी भी साफ दिखाई दे रहा है। घर, सड़कें और पुल बह चुके हैं। बड़ी संख्या में परिवार अपने घरों से विस्थापित होकर अस्थायी राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। इस त्रासदी के बीच एक युवती की कहानी ने इस आपदा की भयावहता को सामने ला दिया है।

CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, रासुवा के सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में रहने वाली एक युवती ने अपने परिवार के 17 सदस्यों को खो दिया। उसका घर भी बाढ़ में बह गया। उसके पास अब अपने परिवार की यादों के तौर पर सिर्फ मोबाइल फोन में मौजूद तस्वीरें बची हैं। नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,100 के पार हो गई है।

एक झटके में पूरा परिवार उजड़ गया

कॉपिला तमांग नाम की इस युवती के परिवार ने इससे पहले 2015 के विनाशकारी भूकंप की त्रासदी भी झेली थी। उस आपदा में उनका घर तबाह हुआ था। लेकिन परिवार ने दोबारा जिंदगी शुरू की और नया घर बनाया। इस बार बाढ़ ने उस नए घर को भी नहीं छोड़ा। अमेरिकी चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ में उनकी मां, बहन, दादी समेत परिवार के कुल 17 सदस्य मारे गए। इनमें महज एक महीने का एक बच्चा भी शामिल था।

वापस लौटने पर सबकुछ बर्बाद!

कॉपिला उस समय काठमांडू में थीं। जैसे ही उन्हें पहाड़ी इलाके में बाढ़ आने और परिवार के फंसने की खबर मिली, वह वापस लौट गईं। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उन्होंने CNN से कहा कि उन्हें बेहद अकेलापन महसूस हो रहा है। परिवार के छोटे बच्चे के लिए यह त्रासदी और भी मुश्किल है। उनका सात साल का छोटा भाई अभी यह समझ नहीं पा रहा कि उसकी मां अब वापस नहीं आएगी। कॉपिला ने कहा कि अब उसे अपने छोटे भाई के लिए खुद मजबूत बनना होगा।

राहत शिविर में रात होते ही सताने लगता है डर

बाढ़ से बचाए गए और विस्थापित परिवारों को फिलहाल अस्थायी शिविरों, स्कूलों और अधूरी इमारतों में शरण दी गई है। लेकिन यहां पहुंचने के बाद भी लोगों को सुरक्षा का भरोसा नहीं मिल पा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, कई परिवारों को अब भी डर है कि कहीं दोबारा बाढ़ न आ जाए। रात में जब भी पानी बढ़ने या नई बाढ़ की चेतावनी मिलती है, कुछ लोग सुरक्षित ऊंचाई की तलाश में जंगल और पहाड़ी इलाकों की ओर चले जाते हैं।

कई विस्थापित लोग खुले या अधूरे भवनों की छतों पर रात गुजार रहे हैं। एक 17 वर्षीय युवक ने सीएनएस से बातचीत में बताया कि उसके दो छोटे भाई-बहन भी बाढ़ में मारे गए। राहत शिविरों में रात के समय लोग अपने परिवार के सदस्यों को याद कर रोते हैं। कई लोगों के लिए नींद तक मुश्किल हो गई है।

13 साल की बच्ची भी बाढ़ के बीच फंसी

नेपाल की इस आपदा में बच्चों की मुश्किलें भी बेहद गंभीर हैं। एक 13 वर्षीय बच्ची ने बताया कि बाढ़ आने के समय वह अपने परिवार से अलग हो गई थी। उसे कुछ समय तक यह तक पता नहीं था कि उसके माता-पिता कहां हैं। UNICEF के अनुसार, 26 अगस्त को आई बाढ़ से नेपाल के रासुवा, नुवाकोट और धादिंग इलाकों में कम से कम 17,000 बच्चे प्रभावित हुए हैं।

इस विनाशकारी तबाही में कई स्कूल पूरी तरह नष्ट हो गए हैं। हजारों बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई है। एक अन्य मामले में स्कूल से लौटते समय बाढ़ की चपेट में आए बच्चों को अपनी जान बचाने के लिए ऊंचे स्थानों की ओर भागना पड़ा। कुछ बच्चों ने पेड़ों पर चढ़कर अपनी जान बचाई।

लोगों के सामने सिर्फ घर नहीं, पूरी जिंदगी दोबारा बसाने की चुनौती

इस बाढ़ ने नेपाल के प्रभावित इलाकों में लोगों से सिर्फ उनके घर और सामान ही नहीं छीने। बल्कि कई परिवारों के पूरे के पूरे सदस्य खत्म हो गए। कई लोगों को अभी तक अपने लापता परिजनों के शव नहीं मिले हैं, जिससे उनके लिए इस त्रासदी को स्वीकार करना और भी मुश्किल हो गया है।

CNN के अनुसार, कुछ परिवारों के लापता सदस्य अभी तक आधिकारिक लापता लोगों की लिस्ट में भी दर्ज नहीं हो पाए थे। अब राहत शिविरों में रहने वाले लोगों की सबसे बड़ी चिंता यही है कि अगली रात सुरक्षित होगी या फिर एक और बाढ़ उन्हें अपना सब कुछ छोड़कर भागने पर मजबूर कर देगी। उनके पास घर लौटने के लिए कई जगह घर ही नहीं बचे हैं।

मृतकों की संख्या 1,100 के पार

नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या बुधवार को बढ़कर 1,127 हो गई। हिमालयी क्षेत्र में आई इस आपदा के एक सप्ताह बाद भी बचावकर्मी हजारों लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं। नेपाल पुलिस के अनुसार, चितवन से 348, नवलपरासी पूर्व से 217, नवलपरासी पश्चिम से 190 और नुवाकोट से 155 शव बरामद किए गए हैं। इसी तरह गोरखा से 66, धादिंग से 59, रसुवा से 45 और तनाहूं से 38 शव बरामद हुए हैं।

पुलिस ने बताया कि 1,113 शवों का पोस्टमार्टम और कानूनी पहचान की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। जबकि 95 शव परिजनों को सौंपे जा चुके हैं। लापता परिजनों की पहचान में परिवारों की मदद के लिए 911 अज्ञात शवों का विवरण नेपाल पुलिस की वेबसाइट पर अपलोड किया गया है। पुलिस के मुताबिक, अब तक सुरक्षा बलों ने प्रभावित इलाकों से 6,541 लोगों को सुरक्षित निकाला है। जबकि 4,858 लापता लोगों की तलाश अभी जारी है।

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अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में 7,912 पुलिसकर्मियों को तैनात किया है।  नेपाल-तिब्बत सीमा के निकट 26 अगस्त को बर्फ और चट्टानों के ढहने या हिमस्खलन के कारण अचानक बाढ़ आ गई थी। इस बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों में भारी तबाही मचाई थी।

नेपाल बाढ़: त्रासदी से पहले टीचर ने बजाई ‘खतरे की घंटी’! तुरंत खाली कराई स्कूल, बसें रुकवाईं और बचा ली 1,643 बच्चों की जान

Nepal Floods: पड़ोसी देश नेपाल में ग्लेशियर से अचानक आई भयंकर बाढ़ ने कुछ ही मिनटों में तबाही मचाकर रख दी। पानी, बर्फ, चट्टानों और कीचड़ की करीब 9 मीटर ऊंची लहर ने उत्तर-मध्य नेपाल की त्रिशूली घाटी में कई गांवों को अपनी चपेट में ले लिया। इस भयावह स्थिति के बीच एक टीचर और प्रिंसिपल की सूझबूझ ने 1,643 बच्चों की जान बचा ली। 47 वर्षीय अंग्रेजी टीचर एवं प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी ने बिना किसी आधिकारिक आदेश का इंतजार किए ऐसे फैसले लिए, जिनसे स्कूल में एक बड़ी त्रासदी टल गई।

न्यूज 18 के मुताबिक, बुधवार सुबह करीब 9:20 बजे त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल में करीब 900 बच्चे मौजूद थे। वहीं, करीब 700 अन्य बच्चे पैदल या बसों से स्कूल पहुंचने के रास्ते में थे। इसी दौरान राजेंद्र दवाड़ी को ऊपर की तरफ करीब पांच मील दूर बेत्रावती में रहने वाले अपने एक दोस्त का फोन आया। दोस्त ने घबराई हुई आवाज में बताया कि नदी ने उनके गांव को तबाह कर दिया है। पानी तेजी से नीचे की ओर बढ़ रहा है।

उसने दवाड़ी से तुरंत भागने को कहा। शुरुआत में दवाड़ी को लगा कि स्कूल की तीन मंजिला कंक्रीट की इमारत सुरक्षित है। स्कूल नदी के तल से करीब 60 मीटर ऊंचाई पर था। लेकिन कुछ ही सेकंड बाद एक घबराया हुआ अभिभावक स्कूल पहुंचा और बताया कि पानी असामान्य गति से बढ़ रहा है। फिर दवाड़ी ने एक पल भी बर्बाद नहीं किया।

तुरंत बजाई स्कूल की घंटी

उन्होंने किसी सरकारी आदेश का इंतजार नहीं किया। तुरंत स्कूल की घंटी बजाई और सभी को क्लासेस खाली कराने का निर्देश दे दिया। टीचर्स बच्चों को तेजी से सुरक्षित स्थान की ओर निकालने लगे। इसी दौरान दवाड़ी ने स्कूल की ओर आ रही बसों को फोन करना शुरू किया। इन बसों में करीब 80-80 बच्चे सवार थे। दवाड़ी ने लगभग सभी बस चालकों से संपर्क कर लिया और उन्हें तत्काल वापस लौटने का निर्देश दिया। लेकिन एक बस ऐसी थी, जिसके ड्राइवर से संपर्क नहीं हो सका। तभी दवाड़ी की नजर उस बस पर पड़ी।

बस लोहे के पुल से होकर स्कूल की तरफ आ रही थी। उधर स्कूल परिसर में पानी तेजी से घुस रहा था। दवाड़ी ने बस चालक को दूर से ही चिल्लाकर और हाथों से इशारा करके वापस लौटने को कहा। ड्राइवर ने तुरंत बस को पीछे करना शुरू किया। बस किसी तरह सुरक्षित स्थान तक पहुंच गई। इसके कुछ ही पल बाद वह पुल तेज बहाव के कारण नदी में ढह गया। अगर बस कुछ सेकंड और आगे बढ़ जाती, तो उसमें सवार करीब 80 बच्चों की जिंदगी खतरे में पड़ सकती थी।

घबराई बच्ची को बाइक से पहुंचाया सुरक्षित स्थान

बाढ़ का पानी बढ़ता देख बच्चे पैदल ही ऊंचाई वाले स्थानों की ओर भागने लगे। चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल था। इसी दौरान एक छोटी बच्ची को तेज घबराहट का दौरा पड़ा और वह आगे नहीं बढ़ पा रही थी। स्कूल स्टाफ ने तुरंत उसकी मदद की और उसे मोटरसाइकिल के पीछे बैठाकर ढलान की ओर सुरक्षित ऊंचाई तक पहुंचाया।

राजेंद्र दवाड़ी की तेजी से लिए गए फैसलो जैसे स्कूल खाली कराने, बसों को वापस बुलाने और आखिरी बस को पुल पार करने से रोकने वाले एक्शन ने उस दिन एक बेहद बड़ी त्रासदी को टाल दिया। एक टीचर की समय पर दिखाई गई समझदारी और साहस ने 1,643 बच्चों को मौत के मुंह में जाने से बचा लिया।

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जयशंकर ने 21 भारतीय तीर्थयात्रियों का किया स्वागत, बोले- नेपाल में फंसे लोगों को निकालना पहली प्राथमिकता

S. Jaishankar: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्रियों के एक समूह का स्वागत किया, जिन्हें नेपाल में आई बाढ़ से बचाया गया था। तीर्थयात्रियों से मिलने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए जयशंकर ने कहा, “मैंने अभी भारतीयों के एक समूह का स्वागत किया है जो कैलाश मानसरोवर की तीर्थयात्रा पर गए थे। उन्हें नेपाली सेना ने बचाया और काठमांडू पहुंचाया। इसके बाद, हमारे दूतावास ने उनकी वापसी का इंतजाम किया। मैं उनसे मिलने, इस बात पर खुशी जाहिर करने कि वे सुरक्षित हैं, और उनके अनुभवों के बारे में जानने के लिए यहां आया था।”

तीर्थयात्रियों को सुरक्षित बचाने के लिए नेपाल सरकार और वहां की सेना का आभार जताते हुए जयशंकर ने कहा कि सरकार प्रभावित इलाकों में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों से संपर्क करने पर ध्यान दे रही है।

उन्होंने कहा, “हम वहां मौजूद सभी भारतीयों से संपर्क करने पर पूरा ध्यान दे रहे हैं। हमारा मानना ​​है कि 315 से ज्यादा भारतीयों से अभी तक संपर्क नहीं हो पाया है। अलग-अलग जगहों से लगभग 85 भारतीयों को बचाया गया है, जिनमें अभी आए 21 तीर्थयात्रियों का यह समूह भी शामिल है।”

मंत्री ने कहा कि बचाए गए तीर्थयात्री नेपाल सेना के बहुत आभारी हैं, क्योंकि उन्होंने बहुत मुश्किल इलाके में यह बचाव अभियान चलाया।

बचाव और राहत कार्यों में मदद करना पहली प्राथमिकता

जयशंकर ने कहा कि भारत की पहली प्राथमिकता नेपाल के अपने बचाव और राहत कार्यों में मदद करना है और साथ ही प्रभावित इलाकों में फंसे भारतीय नागरिकों का पता लगाकर उन्हें वापस लाना है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार सुबह उन्होंने नेपाल के विदेश मंत्री से बात की थी और भारत ने कई तरह की मदद की पेशकश की है, जिस पर काठमांडू अभी विचार कर रहा है।

विदेश मंत्री ने कहा, “हमने उन्हें कई तरह की मदद की पेशकश की है; वे उस पर विचार कर रहे हैं। उन्हें जो भी सही लगेगा, वे अपनी जरूरतों के हिसाब से उसे चुन लेंगे।”

जयशंकर ने तुरंत उठाए जाने वाले कदमों के बारे में कहा कि भारत एक हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट में मदद के लिए टनलिंग एक्सपर्ट्स की एक टीम भेजने की तैयारी कर रहा है, जहां लोगों के टनल के अंदर फंसे होने की आशंका है।

उनके अनुसार, भारत बेली ब्रिज भी भेजेगा, जिन्हें उन इलाकों में तेज़ी से जोड़ा और लगाया जा सकता है जहां बाढ़ की वजह से कनेक्टिविटी खराब हो गई है। इन पुलों को लगाने में मदद के लिए एक टीम भी साथ जाएगी।

जयशंकर ने कहा कि जरूरत पड़ने पर नेपाल मेडिकल टीमें भी भेजी जा सकती हैं। भारत ने नेशनल डिज़ास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) के कर्मियों को तैनात करने की भी पेशकश की है, अगर नेपाल सरकार ऐसी मदद मांगती है।

उन्होंने कहा, “अगर उन्हें NDRF के लोगों की जरूरत होगी, तो हम उन्हें भेज देंगे। हमने उन्हें यह विकल्प दिया है।”

आज नेपाल के लिए रवाना होगी भारत की तीसरी राहत उड़ान

भारत बाढ़ से प्रभावित नेपाल को मानवीय सहायता भी भेज रहा है। जयशंकर ने कहा कि राहत सामग्री लेकर दो विमान पहले ही भेजे जा चुके हैं, जबकि तीसरी राहत उड़ान शुक्रवार को रवाना होगी।

यह सहायता नेपाल की आपातकालीन प्रतिक्रिया में मदद करने के भारत के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है, क्योंकि अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित इलाकों में बचाव अभियान जारी हैं।

जयशंकर ने कहा, “अभी हमारे लिए यही सबसे बड़ी प्राथमिकता है – इस स्थिति से कैसे निपटा जाए, नेपाल में राहत कार्यों में कैसे मदद की जाए, और बचाव कार्य तथा हमारे लोगों और अन्य देशों के नागरिकों की वापसी में कैसे सहायता की जाए।”

भारत मदद के लिए आगे

जयशंकर ने इस बात पर भी जोर दिया कि मुख्य बचाव अभियान नेपाल के अधिकारियों और सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे हैं, और भारत जहां भी जरूरत हो, मदद दे रहा है।

उन्होंने कहा, “बचाव कार्य नेपाल के अधिकारियों और नेपाल के सुरक्षा बलों द्वारा किए जा रहे हैं। इसलिए, 21 लोगों का जो समूह अभी भारत पहुंचा है, उन्हें भी नेपाल की सेना ने ही बचाया था। हमारी तरफ से नेपाल सरकार को जो भी मदद दी जा सकती है, हम वह दे रहे हैं।”

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चीन में 5.1 तीव्रता के भूकंप के बाद नेपाल में फिर हाई अलर्ट, तिब्बत में टूटा डैम, त्रिशूली से फिर भाग रहे लोग

Nepal Flood: नेपाल पुलिस ने शुक्रवार को देश में बाढ़ को लेकर एक नया अलर्ट जारी किया है। साथ ही त्रिशूली से लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है। ‘द काठमांडू पोस्ट’ की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने बताया कि बुधवार को आई भयानक भोटेकोशी बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 475 हो गई है।

पुलिस के एक अधिकारी ने ANI को बताया कि इलाके में सड़कों के पुनर्निर्माण समेत सभी तरह के काम रोक दिए गए हैं।

नेपाल पुलिस के अधिकारी पी. चौधरी ने कहा, “पानी का स्तर बढ़ने वाला है, इसलिए सभी को रोका जा रहा है। ऑपरेशन में लगी सभी गाड़ियां वापस लौट रही हैं। वे सभी वापस आ रहे हैं। वहां से सभी लोगों को निकालकर सुरक्षित जगह पर ले जाया जा रहा है। सारा काम रोक दिया गया है। अभी और भी भयानक बाढ़ आने की आशंका है। इसीलिए सभी को अलर्ट पर रखा जा रहा है।”

चीन के सिचुआन में आया भूकंप

वहीं, आज चीन के सिचुआन में 5.1 तीव्रता का भूकंप आया, जिसके बाद नेपाल में बाढ़ का अलर्ट जारी किया गया। नेपाल पुलिस ने बताया कि नेपाल के त्रिशूली इलाके से लोगों को फिर से सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया, क्योंकि ऊपर से पानी के तेज बहाव के कारण नदी का जलस्तर बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।

CGTN की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन अर्थक्वेक नेटवर्क्स सेंटर ने बताया कि भूकंप के झटके दक्षिण-पश्चिम चीन के सिचुआन प्रांत के लॉन्गचांग शहर में महसूस किए गए।

अलर्ट जारी करते हुए नेपाल पुलिस ने कहा कि तिब्बत की तरफ एक बांध फिर से टूट गया है।

नेपाल पुलिस ने सोशल मीडिया के जरिए दी जानकारी

नेपाल पुलिस ने X पर पोस्ट कर बताया, “सूचना मिली है कि तिब्बत की तरफ पानी का बांध फिर से टूट गया है। इसलिए सभी सुरक्षा कर्मियों, राहत और बचाव कार्य में लगे लोगों और आम जनता से तुरंत सतर्क रहने और सुरक्षित जगह पर जाने की अपील की जाती है। साथ ही, आसपास के लोगों को भी इसकी जानकारी दें।”

नेपाल के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में विपक्ष के नेता भीष्म राज आंगदेम्बे ने कहा कि भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद नेपाल की सेना बचाव कार्य जारी रखे हुए है।

उन्होंने त्रिशूली में पत्रकारों से कहा, “यहां की भौगोलिक बनावट के कारण मौसम की स्थिति बचाव कार्यों के लिए अनुकूल नहीं है, फिर भी हमारी सेना और हमारी सभी हेलीकॉप्टर टीमें इस काम में पूरी तरह से जुटी हुई हैं। ऊपरी इलाकों की स्थिति को देखते हुए हम तुरंत कार्रवाई कर रहे हैं – संघीय, प्रांतीय और स्थानीय सरकारें सभी मिलकर काम कर रही हैं।”

उन्होंने आगे कहा, इस ऑपरेशन में सेना के दो हेलीकॉप्टरों के साथ-साथ निजी क्षेत्र के हेलीकॉप्टर भी तैनात किए गए हैं। हम अपने पास मौजूद हर संसाधन का इस्तेमाल कर रहे हैं। हम सभी को जानकारी दे रहे हैं और हमारी सुरक्षा एजेंसियां ​​लोगों से सुरक्षित रहने की अपील करते हुए एडवाइजरी जारी कर रही हैं।

बता दें कि त्रिशूली से रासुका तक बन रही सड़क का काम कुछ समय के लिए रोक दिया गया है। सभी JCB मशीनों को वापस बुला लिया गया है और सड़क बनाने का सारा काम बंद कर दिया गया है।

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Nepal Flood Video: नेपाल बाढ़ की तबाही के बीच हैवानियत! मृत महिला के बाल खींचकर कानोंर से उड़ाईं सोने की बालियां, ये शर्मनाक काम करने वाले कौन थे?

Nepal Flood News: नेपाल में आई अचानक और विनाशकारी बाढ़ के बीच एक दिल दहला देने वाली और इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। लोग नेपाल में कुदरत के इस कहर के बीच अभी भी अपनी जान और अपनों को बचाने के लिए जूझ रहे हैं लेकिन इस त्रासदी के बीच दो पुरुषों ने संवेदनहीनता और हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं। नेपाल में नारायणी नदी में बहकर आई एक मृत महिला के शव से सोने की बालियां चुराने का शर्मनाक मामला सामने आया है। नेपाल पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए इस घिनौनी वारदात को अंजाम देने वाले दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

वायरल वीडियो में दिखा हैवानियत का मंजर, मूकदर्शक बने रहे लोग

इस दर्दनाक और शर्मनाक घटना का खुलासा एक 41 सेकंड के वीडियो के सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद हुआ। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि दो शख्स बाढ़ के पानी में तैरती हुई महिला की लाश को लकड़ी के तख्तों की मदद से किनारे की ओर खींचते हैं।

इसके बाद दोनों आरोपियों ने महिला के शव को पानी से बाहर निकालने के नाम पर उसके बाल खींचे और फिर बेरहमी से उसके दोनों कानों से सोने की बालियां निकालकर अलग रख लीं। हैरान करने वाली बात यह भी रही कि जब यह घिनौना काम हो रहा था तब वहां मौजूद कई दूसरे लोग इसमें हस्तक्षेप करने या रोकने के बजाय अपने फोन से इस घटना का वीडियो बनाते रहे।

चितवन पुलिस ने की आरोपियों की पहचान, पोखरा बस पार्क के पास से हुए गिरफ्तार

शर्मनाक हरकत का यह वीडियो सामने आने के बाद नेपाल पुलिस ने मामले की तफ्तीश शुरू की। वीडियो के आधार पर नेपाल पुलिस ने दोनों आरोपियों की पहचान 25 वर्षीय मदन गुरुंग और 38 वर्षीय उमेश चौधरी के रूप में की।

हमारी सहयोगी वेबसाइट News18 की रिपोर्ट में नेपाली मीडिया पोर्टल खबरहब के हवाले से बताया गया है कि पुलिस ने दोनों संदिग्धों को गुरुवार को भरतपुर महानगरपालिका-1 स्थित पोखरा बस पार्क के पास से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने सख्त लहजे में चेतावनी जारी की है कि ऐसे कठिन समय में बाढ़ पीड़ितों को निशाना बनाने वाली लूटपाट या किसी भी तरह की अमानवीय गतिविधि के खिलाफ बेहद सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

नेपाल में बाढ़ का कहर: 469 लोगों की मौत, सैकड़ों अभी भी लापता

यह शर्मनाक घटना ऐसे समय में हुई है जब नेपाल हिमालयी सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ की चपेट में है। बुधवार को नेपाल-तिब्बत सीमा पर ल्हेन्दे नदी के पास बर्फ और चट्टानों के ढहने से भोटे कोशी और त्रिशूली नदी में पानी, मलबे और पत्थरों का भयंकर सैलाब आ गया था। इस तबाही की वजह से नेपाल में अब तक कम से कम 469 लोगों की जान जा चुकी है जबकि चीन की तरफ 3 लोगों की मौत हुई है। सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं। इस आपदा का सबसे बड़ा असर रसुवा और धाडिंग जिलों में देखने को मिला।

बाढ़ का पानी नीचे बहते हुए नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी पूर्व तक पहुंच गया। सड़कें और पुल बह जाने और कम्युनेकेशन के साथ बिजली सेवाएं ठप होने से राहत और बचाव टीमों को कई प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

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खतरा अभी टला नहीं, नदियों के आसपास बना हुआ है जोखिम

नेपाल के बाढ़ पूर्वानुमान प्रभाग ने चेतावनी जारी की है कि खतरा अभी पूरी तरह से टला नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक नदी में रुकावट आने की वजह से बनी झील से पानी अभी पूरी तरह से बाहर नहीं निकला है। इस वजह से भोटे कोशी और त्रिशूली नदी के आसपास के इलाकों में अभी भी लगातार खतरा मंडरा रहा है और वहां अलर्ट जारी है।

नेपाल में भूकंप जैसे आया पानी का बवंडर और उसी के साथ बहने लगा 24 साल का मजदूर बिबेक कुमाल! जीवन और मौत के बीच ऐसे हुआ मुकाबला

Nepal Flash Flood: नेपाल में बुधवार को हिमालयी क्षेत्र और तिब्बत सीमा के पास आई अचानक और भीषण बाढ़ हाल के कुछ सालों की की सबसे भयावह आपदा बन चुकी है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आई विनाशकारी बाढ़ में अब तक कम से कम 160 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि लगभग 1500 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाली विदेश मंत्री शिशिर खनाल के मुताबिक लापता लोगों में करीब 300 भारतीय पर्यटक भी शामिल हैं। इस फ्लैश फ्लड ने सड़कों और बेसिक इंफ्रा को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है जिससे राहत और बचाव टीमों को कई प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। इस बीच इस फ्लड का शिकार हुए लोगों की ऐसी कहानियां सामने आ रही हैं जो दहला रही हैं।

आम के पेड़ ने बचाई बिबेक की जिंदगी, देखते ही देखते गायब हो गया मकान

बाढ़ के इस तांडव से सुरक्षित बचे 24 साल के मजदूर बिबेक कुमाल की कहानी चमत्कार से कम नहीं है। जब यह आफत आई तब बिबेक बिदुर इलाके में मजदूरी कर रहे थे। हमारी सहयोगी वेबसाइट फर्स्ट पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में रॉयटर्स के हवाले से बताया है कि बिबेक एक नए बने मकान के बाहर शौचालय के लिए गड्ढा खोद रहे थे तभी उन्हें अचानक एक फुफकार जैसी तेज आवाज सुनाई दी। उनके ऊपर काम कर रहे चार साथियों ने उन्हें तुरंत बाहर निकलकर भागने के लिए चिल्लाया।

बिबेक गड्ढे से बाहर तो निकल गए लेकिन पानी की हाहाकारी धारा ने उन्हें तुरंत अपनी चपेट में ले लिया। काठमांडू के एक अस्पताल में इलाज करा रहे बिबेक ने कहा कि, ‘मैंने भागना शुरू किया तभी पानी की एक विशाल दीवार ऐसे गरजती हुई नीचे आई मानो भूकंप आ गया हो।’ बाढ़ का पानी, कीचड़ और मलबा उन्हें अपने साथ बहाकर ले जाने लगा। लेकिन तभी अचानक किस्मत से वे एक आम के पेड़ में जाकर अटक गए।

बिबेक ने कहा कि ‘सौभाग्य से मैं एक आम के पेड़ में अटक गया। अगर वह आम का पेड़ न होता तो मैं बहकर मौत के मुंह में चला जाता।’ बिबेक ने बताया कि जब वे पेड़ को पकड़े हुए थे तब उन्होंने अपनी आंखों के सामने उस पूरे मकान को गायब होते देखा जहां वे काम कर रहे थे। बाद में पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। पानी के तेज बहाव और एक बड़े पत्थर की चपेट में आने से उनके दाहिने पैर में काफी चोटें आई हैं।

कीचड़ की दीवार में बह गई पत्नी, हेलीकॉप्टर से बचाए गए केशव प्रसाद

ऐसी ही कुछ कहानी 68 साल के केशव प्रसाद बराल की है। बाढ़ आने पर उन्हें संभलने तक का मौका नहीं मिला। उन्होंने रॉयटर्स को बताया कि उन्होंने अपने घर की तरफ कीचड़ का एक विशाल गुबार आते देखा। उन्होंने कहा कि कीचड़ का एक बहुत बड़ा सैलाब सीधा हमारी ओर आ रहा था। जैसे-जैसे यह करीब आ रहा था, इसकी ऊंचाई और बढ़ती जा रही थी।

जब कीचड़ घर में दाखिल हुआ तो केशव ने अपनी पत्नी का हाथ पकड़कर उन्हें छत पर ले जाने की कोशिश की। लेकिन कीचड़ के प्रचंड बहाव ने उनकी पत्नी को खींच लिया और वे बह गईं। बाद में केशव प्रसाद को हेलीकॉप्टर के जरिए रेस्क्यू किया गया लेकिन उनकी पत्नी अब भी कीचड़ के नीचे लापता हैं। शायद उनकी जान नहीं बच पाई है।

पीने को एक गिलास पानी तक नहीं बचा

बाढ़ प्रभावित एक और बस्ती में रहने वाली दीपिका (बदला हुआ नाम) ने भी इस तबाही का खौफनाक मंजर देखा। वे सुबह करीब 9:30 बजे अपने घर के बाहर बर्तन धो रही थीं। तभी उन्होंने त्रिशूली नदी के बाढ़ के पानी को तेज स्पीड से आते देखा। एनडीटीवी को उन्होंने बताया कि बाहर होने की वजह से वे तुरंत अपने परिवार को अलर्ट कर पाईं और उन्हें लेकर घर की छत पर भाग कर गईं।

त्रिशूली नदी के जलस्तर में अचानक हुए इस इजाफे से उनके घर की पहली मंजिल पूरी तरह कीचड़ से भर गई। उनका परिवार तो बच गया लेकिन घर का सारा सामान और जमा पूंजी मलबे में दफन हो गई। दीपिका ने बताया कि उनके पास पीने के लिए एक गिलास पानी तक नहीं बचा है। उन्होंने अपने आंगन की ओर इशारा करते हुए कहा कि जहां पीने के पानी का मटका रखा हुआ करता था अब वहां कुछ नहीं है।

इसी तरह एक दूसरी पीड़िता कल्पना मल्ला ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने अपने पिता, मां, बहन और बहन के बच्चों को पानी के तेज बहाव में बहते देखा। कल्पना और उनका बेटा किसी तरह एक मकान की छत पर चढ़ने में सफल रहे। उन्होंने कहा कि उनके पास बचने का कोई मौका ही नहीं था। इस बाढ़ ने सब कुछ छीन लिया, लेकिन मैं और मेरा बेटा किसी तरह छत पर चढ़कर बच पाए।

सड़कों और बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान, इसरो ने बताई वजह

बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित इलाकों के लोग नेपाल सेना के ट्रेनिंग सेंटर के बाहर अपने लापता रिश्तेदारों की जानकारी पाने के लिए जमा हो रहे हैं। यहां से हेलीकॉप्टर रेस्क्यू ऑपरेशन का संचालन किया जा रहा है। पुलिस लापता लोगों के नाम दर्ज कर रही है। इस आपदा ने देश के बुनियादी ढांचे को तहस-नहस कर दिया है। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक प्रभावित इलाके के छह बड़े हाइड्रोपावर स्टेशनों को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़े पैमाने पर बिजली आपूर्ति ठप हो गई है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के शुरुआती विश्लेषण के मुताबिक नेपाल-तिब्बत सीमा के पास रसुवा जिले में आई इस विनाशकारी बाढ़ की मुख्य वजह ऊपरी हिमालयी क्षेत्र में एक बड़े ग्लेशियर का ढहना हो सकता है। तबाही के पूरे पैमाने का आकलन अभी जारी है और मौतों का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

नेपाल में तबाही के बाद यूपी अलर्ट पर! सीमावर्ती जिलों में बढ़ाई गई निगरानी, राकेश टिकैत भी बाढ़ में फंसे

Nepal Flood: बुधवार को उत्तर प्रदेश प्रशासन ने महाराजगंज और कुशीनगर जैसे सीमावर्ती जिलों में निगरानी बढ़ा दी है। साथ ही, नेपाल में आई भयानक अचानक बाढ़ के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए किसी भी आपात स्थिति से निपटने की तैयारी शुरू कर दी है। अधिकारियों ने बताया कि नेपाल में आई बाढ़ से इन दोनों जिलों में गंडक और नारायणी नदियों का जलस्तर बढ़ने की संभावना है।

वहीं, राहत आयुक्त कार्यालय ने नेपाल में बाढ़ से प्रभावित उत्तर प्रदेश के निवासियों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। इसमें कहा गया है कि अगर राज्य का कोई व्यक्ति नेपाल में फंसा है या उसे किसी मदद की जरूरत है, तो उनके रिश्तेदार तुरंत राज्य के हेल्पलाइन नंबर 1070 पर संपर्क करें।

माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के कई लोग पड़ोसी देश में फंसे हुए हैं। किसान नेता राकेश टिकैत, जो अपने साथियों के साथ सड़क मार्ग से नेपाल गए थे, पोखरा में फंस गए।

बता दें कि बाढ़ ने चितवा, रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जिलों में कई सड़कों और पुलों को बहा दिया है।

भाकियू के नेता जारी किया वीडियो संदेश

भारतीय किसान यूनियन के नेता ने एक वीडियो संदेश में कहा, “हालात को देखते हुए हम कल फ्लाइट से काठमांडू पहुंचेंगे और वहां से फ्लाइट से दिल्ली जाएंगे। हम अपनी गाड़ियां वहीं छोड़ देंगे क्योंकि सड़क मार्ग से यात्रा करना संभव नहीं होगा।”

उन्होंने कहा कि यूपी के किसान संगठनों के सदस्य नेपाल में हैं और उनसे कहा गया है कि वे वहां फंसे भारतीयों और स्थानीय लोगों की मदद करें।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेपाल में अचानक आई बाढ़ से हुए नुकसान को गंभीर चिंता का विषय बताया और प्रभावित सभी लोगों की सुरक्षा और भलाई के लिए भगवान पशुपतिनाथ से प्रार्थना की। साथ ही स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिया कि वे नदी के जलस्तर पर कड़ी नजर रखें और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क रहें।

महराजगंज में अलर्ट, गंडक नदी की 24 घंटे निगरानी

वहीं, महाराजगंज में जिला प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है और गंडक नदी की चौबीसों घंटे निगरानी के आदेश दिए हैं, क्योंकि पानी का बढ़ा हुआ बहाव भोटेकोशी-त्रिशूली नदी प्रणाली के जरिए निचले इलाकों को प्रभावित कर सकता है।

जिला मजिस्ट्रेट गौरव सिंह सोगरवाल ने राजस्व विभाग, पुलिस, SDRF और अन्य एजेंसियों को अलर्ट पर रहने और जरूरत पड़ने पर निचले और नदी के किनारे बसे जोखिम वाले इलाकों से लोगों को सुरक्षित, ऊंचे स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था करने का निर्देश दिया है।

प्रशासन ने निवासियों से अपील की है कि वे नदियों, नालों और पानी से भरे इलाकों के पास न जाएं और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें, साथ ही बच्चों, बुज़ुर्गों और मवेशियों को जोखिम वाले इलाकों से दूर रखें।

कुशीनगर में गांवों को खाली कराने का आदेश, प्रशासन अलर्ट

कुशीनगर में जिला प्रशासन ने मर्चहवा, शिवपुर समेत कई गांवों को खाली कराने का आदेश दिया है। साथ ही लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने की सलाह देने के लिए लगातार लाउडस्पीकर से ऐलान भी किया जा रहा है।

अधिकारियों के मुताबिक, नारायणी नदी का जलस्तर अगले दो घंटे में और बढ़ सकता है। इसे देखते हुए प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने को कहा है।

जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने बताया कि नेपाल में हुई भारी बारिश से पैदा हुई स्थिति को देखते हुए सभी संबंधित विभागों को अलर्ट कर दिया गया है।

उन्होंने आगे कहा कि खड्डा तहसील में नारायणी नदी के किनारे बाढ़ की आशंका वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को खास तौर पर सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

गांव वालों से कहा गया है कि वे सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहें, क्योंकि नदी का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में बाढ़ आ सकती है।

खड्डा तहसील के दियारा इलाके में शिवपुर, हरिहरपुर, नारायणपुर, मरचहवा और बसंतपुर गांवों में खास निगरानी रखी जा रही है, क्योंकि नेपाल में बारिश से नारायणी नदी का जलस्तर प्रभावित हो सकता है।

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