‘एक ही शहर में हों तो मिलना तय!’ एस जयशंकर संग अपनी केमिस्ट्री और Quad पर बोले मार्को रुबियो

Marco Rubio S Jaishankar Relation: भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत और अमेरिका के रिश्तों को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। नेटवर्क18 के एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी को दिए एक स्पेशल इंटरव्यू में रुबियो ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ अपने गहरे और मजबूत कामकाजी रिश्तों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि दोनों देश QUAD के जरिए अपने रणनीतिक सहयोग को एक नए मुकाम पर ले जा रहे हैं।

‘एक ही शहर में हों तो मिलना तय’: जयशंकर संग मजबूत केमिस्ट्री

मार्को रुबियो ने खुलासा किया कि पिछले डेढ़ साल के दौरान वे और विदेश मंत्री एस. जयशंकर कम से कम 12 बार मिल चुके हैं। रुबियो के अमेरिकी विदेश मंत्री बनने के बाद उनकी पहली मुलाकात भी जयशंकर के साथ ही हुई थी।

रुबियो ने कहा, ‘जब भी हम किसी वैश्विक सम्मेलन, अंतरराष्ट्रीय बैठक या एक ही शहर में होते हैं, तो हम एक-दूसरे से मिलना कभी नहीं भूलते। हमने एक बेहद सकारात्मक और मजबूत वर्किंग रिलेशनशिप बनाई है।’

उन्होंने जोर देकर कहा कि इसी मजबूत बॉन्डिंग की बदौलत दोनों देश पिछले डेढ़ साल में कई नाजुक और संवेदनशील मुद्दों को बहुत आसानी से सुलझाने में सफल रहे हैं।

Quad सम्मेलन में होंगे ऐतिहासिक फैसले

भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया की सदस्यता वाले ग्रुप Quad के भविष्य पर बात करते हुए रुबियो ने कहा कि यह संगठन अब सिर्फ बैठकों और समझौतों तक सीमित नहीं है, बल्कि धरातल पर ठोस कार्रवाई की ओर बढ़ रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि आगामी क्वाड लीडर्स समिट केवल एक ‘गेट-टुगेदर’ नहीं होगी। इस शिखर सम्मेलन में चारों देश ठोस और बड़े फैसलों का ऐलान करेंगे।

वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत-US के रिश्ते बेहद अहम

मार्को रुबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच वैश्विक मामलों को लेकर एक जैसी सोच है। दोनों देशों के पास रक्षा, सुरक्षा, तकनीक और व्यापार के क्षेत्र में अपने संबंधों को और गहराई तक ले जाने के ‘असाधारण अवसर’ मौजूद हैं।

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“एक आतंकवादी देश मुझसे सवाल पूछ रहा है?” पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल पर एस. जयशंकर का तीखा पलटवार

S Jaishankar: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तान में आतंकवाद को लेकर भारत पर सवाल उठाने वाले एक पत्रकार को करारा जवाब दिया। पत्रकार ने उनसे पूछा था कि भारत सरकार पाकिस्तान में “आतंकवाद को बढ़ावा देना कब बंद करेगी?” इस पर जयशंकर ने पलटकर सवाल किया, “क्या एक आतंकवादी देश मुझसे यह सवाल पूछ रहा है?”

दरअसल, यह पूरा मामला न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के दौरान हुआ। वहीं, जवाब देने के तुरंत बाद मंत्री और अन्य प्रतिनिधि अपनी कुर्सियों से उठे और कमरे से बाहर चले गए, जबकि पत्रकार अपनी बात कहता रहा।

बता दें कि भारत का हमेशा से यह कहना रहा है कि पाकिस्तान या पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादी संगठनों ने कई बार भारत में आतंकी हमलों को अंजाम दिया है। 22 अप्रैल 2025 को पाकिस्तान से आए आतंकवादियों ने जम्मू-कश्मीर के मशहूर पर्यटन स्थल पहलगाम में हमला किया था। इस हमले में नेपाल के एक नागरिक समेत 26 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए थे।

वहीं, इसके जवाब में, भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मौजूद आतंकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए। इन हमलों में मुजफ्फराबाद, कोटली, बहावलपुर, रावालाकोट, चकस्वारी, भीमबर, नीलम घाटी, झेलम और चकवाल की जगहों को निशाना बनाया गया।

ये ठिकाने आतंकी नेटवर्क से जुड़े थे और इनका संबंध लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) जैसे संगठनों से था। इन दोनों संगठनों पर भारत में कई हमले करने का आरोप है।

भारत ने जिन 9 ठिकानों को निशाना बनाया था, उनमें से 5 पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में थे, जबकि 4 पाकिस्तान के मुख्य हिस्से में स्थित थे।

जानकारी के मुताबिक, बहावलपुर को लंबे समय से जैश-ए-मोहम्मद का गढ़ माना जाता रहा है और इस जगह को संगठन के एक अहम ठिकाने के तौर पर भी पहचाना गया है। वहीं, मुजफ्फराबाद और भीमबर को सुरक्षा एजेंसियां पहले भी ऐसे रास्तों और ठिकानों के रूप में पहचान चुकी हैं, जिनका इस्तेमाल आतंकवादियों की जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ के लिए किया जाता रहा है।

भारत ने UN में पाकिस्तान की आलोचना की

बुधवार को यूनाइटेड नेशंस ह्यूमन राइट्स काउंसिल में भारतीय राजनयिक क्षितिज त्यागी ने कहा कि पाकिस्तान को दूसरे देशों की जमीन पर कब्जा करने या आतंकवाद को बढ़ावा देने के बजाय अपनी आर्थिक समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।

त्यागी ने कहा, “पाकिस्तान दूसरों की जमीन पर कब्जा करने या आतंकवाद फैलाने के बजाय विकास पर ध्यान देकर अपने लोगों की बेहतर सेवा कर सकता है, क्योंकि न तो ये हरकतें और न ही काउंसिल में उसके ड्रामे, उन कर्जों को चुकाने में मदद करेंगे जिन पर उसकी अर्थव्यवस्था टिकी है।”

त्यागी ने पाकिस्तान पर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के हालात को ठीक से न संभालने का भी आरोप लगाया, जहां जून में विरोध प्रदर्शनों के दौरान कई आम नागरिक मारे गए थे। वहीं, इन विरोध प्रदर्शनों के साथ-साथ जरूरी चीजों की भारी कमी भी हो गई थी। जिस वजह से प्रदर्शनकारियों और उनके नेताओं ने पाकिस्तान सरकार पर खाना, ईंधन और दवाइयों की सप्लाई रोकने या उसमें रुकावट डालने का आरोप लगाया था।

त्यागी ने कहा, “पिछले शुक्रवार को इस काउंसिल को बताया गया था कि जून के बाद से पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाके में बहुत से आम नागरिक मारे गए हैं, इस्लामाबाद और रावलपिंडी में छात्रों को गिरफ्तार किया गया है, और खाना व दवाइयां रोकी गई हैं।

उन्होंने आगे कहा, जब ये बातें काउंसिल को बताई गईं, तो पाकिस्तान का जवाब ‘पॉइंट ऑफ ऑर्डर’ था। अगर इस कमरे में कोई प्रतिनिधिमंडल इस काउंसिल की जांच के सभी जरूरी मानदंडो पर खरा उतरता है, तो वह पाकिस्तान ही है।”

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जयशंकर ने 21 भारतीय तीर्थयात्रियों का किया स्वागत, बोले- नेपाल में फंसे लोगों को निकालना पहली प्राथमिकता

S. Jaishankar: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्रियों के एक समूह का स्वागत किया, जिन्हें नेपाल में आई बाढ़ से बचाया गया था। तीर्थयात्रियों से मिलने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए जयशंकर ने कहा, “मैंने अभी भारतीयों के एक समूह का स्वागत किया है जो कैलाश मानसरोवर की तीर्थयात्रा पर गए थे। उन्हें नेपाली सेना ने बचाया और काठमांडू पहुंचाया। इसके बाद, हमारे दूतावास ने उनकी वापसी का इंतजाम किया। मैं उनसे मिलने, इस बात पर खुशी जाहिर करने कि वे सुरक्षित हैं, और उनके अनुभवों के बारे में जानने के लिए यहां आया था।”

तीर्थयात्रियों को सुरक्षित बचाने के लिए नेपाल सरकार और वहां की सेना का आभार जताते हुए जयशंकर ने कहा कि सरकार प्रभावित इलाकों में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों से संपर्क करने पर ध्यान दे रही है।

उन्होंने कहा, “हम वहां मौजूद सभी भारतीयों से संपर्क करने पर पूरा ध्यान दे रहे हैं। हमारा मानना ​​है कि 315 से ज्यादा भारतीयों से अभी तक संपर्क नहीं हो पाया है। अलग-अलग जगहों से लगभग 85 भारतीयों को बचाया गया है, जिनमें अभी आए 21 तीर्थयात्रियों का यह समूह भी शामिल है।”

मंत्री ने कहा कि बचाए गए तीर्थयात्री नेपाल सेना के बहुत आभारी हैं, क्योंकि उन्होंने बहुत मुश्किल इलाके में यह बचाव अभियान चलाया।

बचाव और राहत कार्यों में मदद करना पहली प्राथमिकता

जयशंकर ने कहा कि भारत की पहली प्राथमिकता नेपाल के अपने बचाव और राहत कार्यों में मदद करना है और साथ ही प्रभावित इलाकों में फंसे भारतीय नागरिकों का पता लगाकर उन्हें वापस लाना है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार सुबह उन्होंने नेपाल के विदेश मंत्री से बात की थी और भारत ने कई तरह की मदद की पेशकश की है, जिस पर काठमांडू अभी विचार कर रहा है।

विदेश मंत्री ने कहा, “हमने उन्हें कई तरह की मदद की पेशकश की है; वे उस पर विचार कर रहे हैं। उन्हें जो भी सही लगेगा, वे अपनी जरूरतों के हिसाब से उसे चुन लेंगे।”

जयशंकर ने तुरंत उठाए जाने वाले कदमों के बारे में कहा कि भारत एक हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट में मदद के लिए टनलिंग एक्सपर्ट्स की एक टीम भेजने की तैयारी कर रहा है, जहां लोगों के टनल के अंदर फंसे होने की आशंका है।

उनके अनुसार, भारत बेली ब्रिज भी भेजेगा, जिन्हें उन इलाकों में तेज़ी से जोड़ा और लगाया जा सकता है जहां बाढ़ की वजह से कनेक्टिविटी खराब हो गई है। इन पुलों को लगाने में मदद के लिए एक टीम भी साथ जाएगी।

जयशंकर ने कहा कि जरूरत पड़ने पर नेपाल मेडिकल टीमें भी भेजी जा सकती हैं। भारत ने नेशनल डिज़ास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) के कर्मियों को तैनात करने की भी पेशकश की है, अगर नेपाल सरकार ऐसी मदद मांगती है।

उन्होंने कहा, “अगर उन्हें NDRF के लोगों की जरूरत होगी, तो हम उन्हें भेज देंगे। हमने उन्हें यह विकल्प दिया है।”

आज नेपाल के लिए रवाना होगी भारत की तीसरी राहत उड़ान

भारत बाढ़ से प्रभावित नेपाल को मानवीय सहायता भी भेज रहा है। जयशंकर ने कहा कि राहत सामग्री लेकर दो विमान पहले ही भेजे जा चुके हैं, जबकि तीसरी राहत उड़ान शुक्रवार को रवाना होगी।

यह सहायता नेपाल की आपातकालीन प्रतिक्रिया में मदद करने के भारत के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है, क्योंकि अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित इलाकों में बचाव अभियान जारी हैं।

जयशंकर ने कहा, “अभी हमारे लिए यही सबसे बड़ी प्राथमिकता है – इस स्थिति से कैसे निपटा जाए, नेपाल में राहत कार्यों में कैसे मदद की जाए, और बचाव कार्य तथा हमारे लोगों और अन्य देशों के नागरिकों की वापसी में कैसे सहायता की जाए।”

भारत मदद के लिए आगे

जयशंकर ने इस बात पर भी जोर दिया कि मुख्य बचाव अभियान नेपाल के अधिकारियों और सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे हैं, और भारत जहां भी जरूरत हो, मदद दे रहा है।

उन्होंने कहा, “बचाव कार्य नेपाल के अधिकारियों और नेपाल के सुरक्षा बलों द्वारा किए जा रहे हैं। इसलिए, 21 लोगों का जो समूह अभी भारत पहुंचा है, उन्हें भी नेपाल की सेना ने ही बचाया था। हमारी तरफ से नेपाल सरकार को जो भी मदद दी जा सकती है, हम वह दे रहे हैं।”

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