केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने में मदद के लिए तैयार है। उन्होंने जरूरत पड़ने पर मध्यस्थता करने की भी पेशकश की है। जयशंकर ने यह बात गुरुवार को कीव दौरे के दौरान पत्रकारों से बातचीत में कही। वे यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा के साथ मौजूद थे। जयशंकर ने ब्लैक सी में भारतीयों समेत सभी नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत पर भी जोर दिया है। साथ ही उन्होंने कहा कि युद्ध का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए निकाला जाना चाहिए। ब्लैक सी दुनिया के प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। रूस और यूक्रेन से गेहूं, मक्का और सूरजमुखी तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से दुनिया के दूसरे देशों तक पहुंचता है। जयशंकर के यूक्रेन दौरे की तस्वीरें… यूक्रेन बोला- रूसी हमलों के बीच जयशंकर का दौरा अहम यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने जयशंकर के कीव दौरे को अहम बताया। उन्होंने कहा कि रूसी हमलों के बीच भारतीय विदेश मंत्री की यह यात्रा खास मायने रखती है। सिबिहा ने कहा कि रूस लगातार यूक्रेनी शहरों, बंदरगाहों और नागरिक जहाजों को निशाना बना रहा है। दोनों नेताओं ने ब्लैक सी में जहाजों की आवाजाही सामान्य करने और इससे जुड़ी वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर भी चर्चा की। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के उस रुख का भी स्वागत किया, जिसमें भारत लगातार बातचीत और कूटनीति के जरिए युद्ध खत्म करने की बात कहता रहा है। दोनों देश अगली अंतर-सरकारी आयोग की बैठक कराने पर भी सहमत हुए। दोनों नेताओं के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर, फार्मा, टेक्नोलॉजी और डिजिटल सेक्टर में भारत-यूक्रेन के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी बात हुई। जयशंकर 3 से 5 सितंबर तक यूक्रेन और पोलैंड दौरे पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर 3 से 5 सितंबर तक यूक्रेन और पोलैंड की आधिकारिक यात्रा पर हैं। यूक्रेन के बाद वे पोलैंड जाएंगे, जहां उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की से द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इस यात्रा का मकसद दोनों देशों के साथ भारत के रिश्तों को और मजबूत करना है। इस दौरान क्षेत्रीय हालात और आपसी हितों से जुड़े दूसरे अहम मुद्दों पर भी चर्चा होगी। खबर लगातार अपडेट हो रही है…
नेपाल-तिब्बत में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ के बाद लापता लोगों की संख्या करीब 2,500 पहुंच गई है। अब तक 584 शव बरामद हो चुके हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को बताया कि नेपाल में अभी भी 320 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पाया है। इसके अलावा करीब 400 भारतीय तिब्बत में फंसे हुए हैं। MEA ने बताया कि चीन की तरफ फंसे 153 भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से नेपाल पहुंच चुके हैं। इस बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सीनियर अफसरों के साथ हाईलेवल मीटिंग की और नेपाल में बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की। जयशंकर ने कहा कि एक जलविद्युत परियोजना वाली जगह पर लोगों के सुरंग में फंसे होने की आशंका है। इसलिए भारत मदद के लिए एक टीम भेज रहा है। सैटेलाइट तस्वीरों में बाढ़ से पहले और बाद का मंजर … नेपाल में तबाही के बाद की 3 तस्वीरें… खबर से जुड़े पल-पल के अपडेट्स के लिए नीचे दिए ब्लॉग से गुजर जाइए…
S. Jaishankar: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्रियों के एक समूह का स्वागत किया, जिन्हें नेपाल में आई बाढ़ से बचाया गया था। तीर्थयात्रियों से मिलने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए जयशंकर ने कहा, “मैंने अभी भारतीयों के एक समूह का स्वागत किया है जो कैलाश मानसरोवर की तीर्थयात्रा पर गए थे। उन्हें नेपाली सेना ने बचाया और काठमांडू पहुंचाया। इसके बाद, हमारे दूतावास ने उनकी वापसी का इंतजाम किया। मैं उनसे मिलने, इस बात पर खुशी जाहिर करने कि वे सुरक्षित हैं, और उनके अनुभवों के बारे में जानने के लिए यहां आया था।”
तीर्थयात्रियों को सुरक्षित बचाने के लिए नेपाल सरकार और वहां की सेना का आभार जताते हुए जयशंकर ने कहा कि सरकार प्रभावित इलाकों में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों से संपर्क करने पर ध्यान दे रही है।
उन्होंने कहा, “हम वहां मौजूद सभी भारतीयों से संपर्क करने पर पूरा ध्यान दे रहे हैं। हमारा मानना है कि 315 से ज्यादा भारतीयों से अभी तक संपर्क नहीं हो पाया है। अलग-अलग जगहों से लगभग 85 भारतीयों को बचाया गया है, जिनमें अभी आए 21 तीर्थयात्रियों का यह समूह भी शामिल है।”
मंत्री ने कहा कि बचाए गए तीर्थयात्री नेपाल सेना के बहुत आभारी हैं, क्योंकि उन्होंने बहुत मुश्किल इलाके में यह बचाव अभियान चलाया।
बचाव और राहत कार्यों में मदद करना पहली प्राथमिकता
जयशंकर ने कहा कि भारत की पहली प्राथमिकता नेपाल के अपने बचाव और राहत कार्यों में मदद करना है और साथ ही प्रभावित इलाकों में फंसे भारतीय नागरिकों का पता लगाकर उन्हें वापस लाना है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार सुबह उन्होंने नेपाल के विदेश मंत्री से बात की थी और भारत ने कई तरह की मदद की पेशकश की है, जिस पर काठमांडू अभी विचार कर रहा है।
विदेश मंत्री ने कहा, “हमने उन्हें कई तरह की मदद की पेशकश की है; वे उस पर विचार कर रहे हैं। उन्हें जो भी सही लगेगा, वे अपनी जरूरतों के हिसाब से उसे चुन लेंगे।”
जयशंकर ने तुरंत उठाए जाने वाले कदमों के बारे में कहा कि भारत एक हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट में मदद के लिए टनलिंग एक्सपर्ट्स की एक टीम भेजने की तैयारी कर रहा है, जहां लोगों के टनल के अंदर फंसे होने की आशंका है।
उनके अनुसार, भारत बेली ब्रिज भी भेजेगा, जिन्हें उन इलाकों में तेज़ी से जोड़ा और लगाया जा सकता है जहां बाढ़ की वजह से कनेक्टिविटी खराब हो गई है। इन पुलों को लगाने में मदद के लिए एक टीम भी साथ जाएगी।
जयशंकर ने कहा कि जरूरत पड़ने पर नेपाल मेडिकल टीमें भी भेजी जा सकती हैं। भारत ने नेशनल डिज़ास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) के कर्मियों को तैनात करने की भी पेशकश की है, अगर नेपाल सरकार ऐसी मदद मांगती है।
उन्होंने कहा, “अगर उन्हें NDRF के लोगों की जरूरत होगी, तो हम उन्हें भेज देंगे। हमने उन्हें यह विकल्प दिया है।”
आज नेपाल के लिए रवाना होगी भारत की तीसरी राहत उड़ान
भारत बाढ़ से प्रभावित नेपाल को मानवीय सहायता भी भेज रहा है। जयशंकर ने कहा कि राहत सामग्री लेकर दो विमान पहले ही भेजे जा चुके हैं, जबकि तीसरी राहत उड़ान शुक्रवार को रवाना होगी।
यह सहायता नेपाल की आपातकालीन प्रतिक्रिया में मदद करने के भारत के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है, क्योंकि अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित इलाकों में बचाव अभियान जारी हैं।
जयशंकर ने कहा, “अभी हमारे लिए यही सबसे बड़ी प्राथमिकता है – इस स्थिति से कैसे निपटा जाए, नेपाल में राहत कार्यों में कैसे मदद की जाए, और बचाव कार्य तथा हमारे लोगों और अन्य देशों के नागरिकों की वापसी में कैसे सहायता की जाए।”
भारत मदद के लिए आगे
जयशंकर ने इस बात पर भी जोर दिया कि मुख्य बचाव अभियान नेपाल के अधिकारियों और सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे हैं, और भारत जहां भी जरूरत हो, मदद दे रहा है।
उन्होंने कहा, “बचाव कार्य नेपाल के अधिकारियों और नेपाल के सुरक्षा बलों द्वारा किए जा रहे हैं। इसलिए, 21 लोगों का जो समूह अभी भारत पहुंचा है, उन्हें भी नेपाल की सेना ने ही बचाया था। हमारी तरफ से नेपाल सरकार को जो भी मदद दी जा सकती है, हम वह दे रहे हैं।”
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रूस के साथ रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में भारत की कूटनीतिक सक्रियता जारी है। इसी सिलसिले में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को मॉस्को में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच भारत-रूस के रिश्तों, आर्थिक सहयोग और दुनिया में तेजी से बदल रहे घटनाक्रमों पर अहम बातचीत हुई।
बता दें कि जयशंकर रविवार को दो दिवसीय रूस दौरे पर मॉस्को पहुंचे थे। अपनी मुलाकात के दौरान उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, उर्वरक और परमाणु क्षेत्र समेत कई क्षेत्रों में आर्थिक सहयोग लगातार मजबूत हुआ है।
जयशंकर ने क्या कहा?
पुतिन से मुलाकात के दौरान जयशंकर ने कहा, “मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शुभकामनाओं से शुरुआत करना चाहता हूं। उन्होंने मुझे एक व्यक्तिगत संदेश दिया है, जिसे मैं आपको सौंपना चाहता हूं। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच अंतर-सरकारी आयोग की बैठक हुई और इसके नतीजे काफी अच्छे रहे। जयशंकर ने कहा कि भारत और रूस के बीच व्यापार, ऊर्जा, उर्वरक, परमाणु ऊर्जा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग तेजी से बढ़ा है।”
विदेश मंत्री ने आगे कहा, प्रधानमंत्री मोदी SCO शिखर सम्मेलन में आपसे मिलने, फिर ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भारत में आपका स्वागत करने और, उचित समय पर, आपकी आपसी सुविधा के अनुसार, वार्षिक शिखर सम्मेलन आयोजित करने के लिए उत्सुक हैं, इसलिए हमारे पास सहयोग की एक बहुत मजबूत तस्वीर प्रस्तुत करने के लिए है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर का यह रूस दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के 12-13 सितंबर को BRICS नेताओं के शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली आने की उम्मीद है।
जयशंकर और पुतिन की मुलाकात को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि भारत और रूस अपने आर्थिक रिश्तों को और मजबूत करना चाहते हैं। इसके साथ ही दोनों देश कई दूसरे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
रूस और भारत के बीच व्यापार बढ़ा
पुतिन ने कहा कि इस साल रूस और भारत के बीच व्यापार बढ़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि रूस भारत को उर्वरक की आपूर्ति बढ़ा रहा है और भविष्य में भी ऐसा करना जारी रखने के लिए तैयार है।
पुतिन ने विदेश मंत्री से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपनी शुभकामनाएं देने का अनुरोध किया। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक के दौरान उनकी प्रधानमंत्री मोदी से जल्द मुलाकात होगी।
बता दें कि इससे पहले दिन में, विदेश मंत्री ने रूसी प्रथम उप प्रधान मंत्री डेनिस मंटुरोव के साथ द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग को और अधिक विस्तार देने के तरीकों पर बातचीत की थी।
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बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा है कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान के भारत दौरे को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश भारत के साथ अच्छे रिश्ते चाहता है, लेकिन अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा। हुमायूं कबीर ने कहा कि प्रधानमंत्री के भारत दौरे का फैसला दोनों देशों के बीच बातचीत और जरूरी तैयारियों के बाद होगा। भारत ने रहमान को द्विपक्षीय दौरे का न्योता भेजा भारत ने तारिक रहमान को द्विपक्षीय दौरे के लिए आमंत्रित किया है। उन्हें 12-13 सितंबर को होने वाले BRICS समिट के आउटरीच सेशन में शामिल होने का न्योता भी मिला है। यह दौरा भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्ते सुधारने के लिए अहम माना जा रहा है। 2024 में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ा हुआ है। हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा बांग्लादेश अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना भारत आ गई थीं। उन्हें ढाका की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने हत्या के लिए उकसाने और हत्या का आदेश देने के लिए मौत की सजा दी है। बाकी मामलों में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। ICT ने उन्हें 5 मामलों में आरोपी बनाया था। ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना को छात्र आंदोलन के दौरान हुई हत्याओं का मास्टरमाइंड बताया था। इसी के चलते बांग्लादेश लगातार उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है। कबीर ने कहा कि हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा भी दोनों देशों के बीच जारी बातचीत का हिस्सा है। भारत का कहना है कि वह बांग्लादेश के अनुरोध की कानूनी प्रक्रिया के तहत समीक्षा कर रहा है। हसीना ने दिसंबर में बांग्लादेश लौटने का ऐलान किया 5 अगस्त को नई दिल्ली से एक वर्चुअल मीडिया कार्यक्रम में शेख हसीना ने कहा था कि वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी और देश को फिर से सही रास्ते पर लाने की कोशिश करेंगी। इस बयान पर बांग्लादेश ने कड़ी आपत्ति जताई थी और कहा था कि इससे बांग्लादेश के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। इसके बाद भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में फिर से तनाव बढ़ गया। ढाका ने कहा था कि भारत में हसीना के ऐसे कार्यक्रम दोनों देशों के रिश्ते बेहतर बनाने की कोशिशों पर असर डाल सकते हैं। हालांकि भारत सरकार ने साफ किया कि कार्यक्रम के आयोजन में उसकी कोई भूमिका नहीं थी। जयशंकर बोले- कोई भी रिश्ता तभी मजबूत जब उससे दोनों का फायदा भारत-बांग्लादेश संबंधों को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर का बयान भी काफी चर्चा में है। उन्होंने शनिवार को इकोनॉमिक टाइम्स के वर्ल्ड लीडर फोरम में कहा, कोई भी रिश्ता तभी मजबूत और सफल होता है, जब उससे दोनों पक्षों को फायदा हो। जयशंकर ने कहा कि भारत यह उम्मीद नहीं करता कि पड़ोसी देश सिर्फ उसके हितों के मुताबिक काम करें। जैसे भारत दूसरे देशों के हितों का सम्मान करता है, वैसे ही उम्मीद वह दूसरे देशों से रखता है। —————————— यह खबर भी पढ़ें… बांग्लादेश बोला- भारत से गंगा जल समझौते में गारंटी मांगेंगे: जरूरत पड़ी तो अंतरराष्ट्रीय मंच पर जाएंगे; 1996 का समझौता दिसंबर में खत्म होगा बांग्लादेश गंगा जल संधि में भारत से ‘गारंटी क्लॉज’ शामिल करने की मांग कर रहा है। बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी एनी ने मंगलवार को ढाका में यह बात कही। पूरी खबर पढ़ें…
साउथ अमेरिकी देश कोलंबिया में सोमवार रात आए 7.4 तीव्रता के भूकंप के करीब 48 घंटे बाद मलबे से एक बच्चे को जिंदा निकाला गया। बच्चा एक गिरी हुई पांच मंजिला रिहायशी इमारत के मलबे में फंसा था। उसके साथ एक आदमी भी दबा हुआ था। यह रेस्क्यू बुधवार को भूकंप के बाद चल रहे तीसरे दिन के सर्च ऑपरेशन के दौरान हुआ। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, रेस्क्यू टीम ने बताया कि उन्हें मलबे के नीचे से एक आदमी की आवाज सुनाई दी। आदमी ने कहा- ‘हां, मैं यहीं हूं। मैं एक बच्चे के साथ हूं।’ इसके बाद मौके पर मौजूद रेस्क्यू टीम और बाकी लोगों ने तुरंत हाथों से मलबा हटाना शुरू कर दिया। एक भारी कंक्रीट स्लैब के नीचे एक शख्स और नवजात बच्चा फंसा हुआ था। लोगों ने स्लैब को उठाया और दोनों को बचाया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बच्चे का सिर बैंगनी जैसा पड़ गया था, क्योंकि उसे सांस लेने में परेशानी हो रही थी। भारत बोला- हम हर संभव मदद के लिए तैयार भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि कोलंबिया में जान-माल के नुकसान से वे बेहद दुखी हैं। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई और घायलों के जल्द ठीक होने की कामना की। उन्होंने कहा कि भारत जरूरत पड़ने पर कोलंबिया को हर संभव मदद देने के लिए तैयार है। भूकंप से जुड़ी 5 फोटोज बेघर लोगों को आर्थिक मदद देगा कोलंबिया कोलंबिया के राष्ट्रपति अबेलार्डो डे ला एस्प्रिएला ने प्रभावित इलाकों का दौरा कर राहत और बचाव कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने रिसाराल्दा प्रांत में प्रभावित लोगों को 3 महीने तक घरेलू सेवाओं के बिल से राहत देने का आदेश दिया है। जिन लोगों के घर पूरी तरह तबाह हो गए हैं, उन्हें अस्थायी आवास के लिए आर्थिक मदद दी जाएगी। बाद में घरों की मरम्मत और दोबारा निर्माण में भी सहायता दी जाएगी। परेरा में सबसे ज्यादा मौतें परेरा शहर में अकेले 60 लोगों की मौत हुई है। करीब 5 लाख की आबादी वाला यह शहर भूकंप के केंद्र से 64 किलोमीटर से भी कम दूरी पर है। राजधानी बोगोटा समेत कई शहरों में भी तेज झटके महसूस किए गए। एहतियात के तौर पर लोग इमारतों से बाहर निकलकर सड़कों पर आ गए। चोको और रिसाराल्डा में भारी नुकसान अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, भूकंप सोमवार सुबह करीब 7:34 बजे आया। इसका केंद्र चोको इलाके में सैन जोसे डेल पालमार के पास था। भूकंप की गहराई 107 किलोमीटर थी। कोलंबिया में ज्यादा भूकंप क्यों आते हैं कोलंबिया दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंप प्रभावित देशों में से एक है। यहां हर साल हजार से ज्यादा छोटे-बड़े भूकंप आते हैं। कोलंबिया में बार-बार भूकंप आने की सबसे बड़ी वजह इसकी भौगोलिक स्थिति है। यह देश ‘रिंग ऑफ फायर’ नाम के भूकंप और ज्वालामुखी वाले क्षेत्र में आता है। यहां नाजका, कोकोस और दक्षिण अमेरिकी जैसी कई बड़ी टेक्टोनिक प्लेटें आपस में टकराती हैं। इनमें से एक प्लेट दूसरी के नीचे धंसती रहती है। इसी वजह से जमीन के अंदर लगातार हलचल होती रहती है, जिससे अक्सर तेज भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट होते हैं। ———————— यह खबर भी पढ़ें… कोलंबिया में 7.4 तीव्रता का भूकंप, 100 से ज्यादा मौतें:कई लोग मलबे में दबे, सैकड़ों घायल; इमारतें खाली कराई गईं दक्षिण अमेरिकी देश कोलंबिया में 7.4 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। इसमें अब तक 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई हैं। भूकंप स्थानीय समय के मुताबिक सोमवार सुबह करीब 7 बजे आया। लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए। कई इमारतें खाली कराई गई हैं। सैकड़ों लोगों के घायल होने की खबर है। पूरी खबर पढ़ें…
अमेरिका में H-1B वीजा के तहत काम कर रहे विदेशी कर्मचारियों की परेशानी बढ़ सकती है। सरकार नई नौकरी तलाशने के लिए मिलने वाली 60 दिन की छूट खत्म करने पर विचार कर रही है। यह प्रस्ताव फिलहाल व्हाइट हाउस के ऑफिस ऑफ मैनेजमेंट एंड बजट (OMB) में भेजा गया है। प्रस्ताव अभी नियम नहीं बना है। अगर ऐसा होता है तो इसका सबसे ज्यादा असर अमेरिका में H-1B वीजा पर काम कर रहे 5 लाख भारतीयों पर पड़ सकता है। जयशंकर ने भी उठाया था मुद्दा विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इसी साल मई में यह मामला अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के सामने उठाया था। रूबियो ने माना था कि नए इमिग्रेशन सिस्टम में बदलाव के दौरान कुछ दिक्कतें और तनाव हो सकते हैं। हालांकि, रूबियो ने कहा था कि अमेरिका इमिग्रेशन सिस्टम को ज्यादा प्रभावी बनाने की कोशिश कर रहा है और लंबे समय में इसका फायदा सभी पक्षों को मिलेगा। रूबियो ने यह भी कहा था कि यह कदम खासतौर पर भारत को निशाना बनाकर नहीं उठाया गया। उनके मुताबिक अमेरिका पिछले कुछ सालों में बड़े पैमाने पर अवैध प्रवासियों की समस्या से जूझ रहा है। 2 करोड़ से ज्यादा लोग गैरकानूनी तरीके से अमेरिका में दाखिल हुए और उसी चुनौती से निपटने के लिए यह बदलाव किए जा रहे हैं। अमेरिका में 7 साल रहने वाले प्रवासियों को ग्रीन कार्ड मिलेगा अमेरिका में रह रहे भारतीय H-1B वीजा धारकों समेत लाखों लोगों के लिए ग्रीन कार्ड पाने का नया मौका मिल सकता है। अमेरिकी सीनेट में एक ऐसा विधेयक पेश किया गया है, जिसमें पिछले 7 साल से लगातार अमेरिका में रह रहे लोगों को ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने की अनुमति देने का प्रस्ताव है। ग्रीन कार्ड अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और काम करने की अनुमति देने वाला आधिकारिक दस्तावेज है। इसे आधिकारिक तौर पर परमानेंट रेजिडेंट कार्ड कहा जाता है।
अमेरिका में H-1B वीजा के तहत काम कर रहे विदेशी कर्मचारियों की परेशानी बढ़ सकती है। सरकार नई नौकरी तलाशने के लिए मिलने वाली 60 दिन की छूट खत्म करने पर विचार कर रही है। यह प्रस्ताव फिलहाल व्हाइट हाउस के ऑफिस ऑफ मैनेजमेंट एंड बजट (OMB) में भेजा गया है। प्रस्ताव अभी नियम नहीं बना है। अगर ऐसा होता है तो इसका सबसे ज्यादा असर अमेरिका में H-1B वीजा पर काम कर रहे 5 लाख भारतीयों पर पड़ सकता है। जयशंकर ने भी उठाया था मुद्दा विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इसी साल मई में यह मामला अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के सामने उठाया था। रूबियो ने माना था कि नए इमिग्रेशन सिस्टम में बदलाव के दौरान कुछ दिक्कतें और तनाव हो सकते हैं। हालांकि, रूबियो ने कहा था कि अमेरिका इमिग्रेशन सिस्टम को ज्यादा प्रभावी बनाने की कोशिश कर रहा है और लंबे समय में इसका फायदा सभी पक्षों को मिलेगा। रूबियो ने यह भी कहा था कि यह कदम खासतौर पर भारत को निशाना बनाकर नहीं उठाया गया। उनके मुताबिक अमेरिका पिछले कुछ सालों में बड़े पैमाने पर अवैध प्रवासियों की समस्या से जूझ रहा है। 2 करोड़ से ज्यादा लोग गैरकानूनी तरीके से अमेरिका में दाखिल हुए और उसी चुनौती से निपटने के लिए यह बदलाव किए जा रहे हैं। अमेरिका में 7 साल रहने वाले प्रवासियों को ग्रीन कार्ड मिलेगा अमेरिका में रह रहे भारतीय H-1B वीजा धारकों समेत लाखों लोगों के लिए ग्रीन कार्ड पाने का नया मौका मिल सकता है। अमेरिकी सीनेट में एक ऐसा विधेयक पेश किया गया है, जिसमें पिछले 7 साल से लगातार अमेरिका में रह रहे लोगों को ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने की अनुमति देने का प्रस्ताव है। ग्रीन कार्ड अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और काम करने की अनुमति देने वाला आधिकारिक दस्तावेज है। इसे आधिकारिक तौर पर परमानेंट रेजिडेंट कार्ड कहा जाता है।
UNSC Seat: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में साल 2028-29 के कार्यकाल के लिए भारत ने अपनी मजबूत दावेदारी पेश करते हुए आधिकारिक तौर पर अपना अभियान शुरू कर दिया है। न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत का सुपर प्लान पेश किया। इसे SHANTI कैंपेन का नाम दिया गया है। इस कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र के कई राजदूत, राजनयिक और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
PTI की रिपोर्ट के मुताबिक इस आधिकारिक कैंपेन को लॉन्च करने के साथ ही विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के साथ मुलाकात की और पश्चिम एशिया, यूक्रेन और सूडान सहित कई वैश्विक घटनाक्रमों पर विस्तृत चर्चा की। संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय से निकलते समय जब पीटीआई ने उनसे पूछा कि बैठक कैसी रही तो जयशंकर ने संक्षिप्त शब्दों में कहा कि हमेशा की तरह अच्छी।
क्या है भारत का SHANTI कैंपेन?
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 2028-29 कार्यकाल के लिए देश की प्राथमिकताओं को स्पष्ट। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के प्रति भारत का दृष्टिकोण ‘SHANTI’ यानी ‘Securing Holistic Advancement through Norms, Trust and Integrity’ (नियमों, विश्वास और अखंडता के माध्यम से समग्र प्रगति सुनिश्चित करना) पर आधारित है। जयशंकर ने भारत के इस सुपर प्लान के तहत सुरक्षा परिषद के लिए अपनी 6 मुख्य प्राथमिकताओं को सामने रखा है।
पहली ग्लोबल साउथ की आवाज बनना। यानी अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के मंच पर ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) की चिंताओं और मुद्दों को मजबूती से उठाना। दूसरी सुधारित बहुपक्षवाद यानी वैश्विक शासन में सुधार को आगे बढ़ाना ताकि इसे अधिक लोकतांत्रिक और प्रभावी बनाया जा सके। तीसरी भविष्य के लिए तैयार पीसकीपिंग, जिसमें संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन को आधुनिक और भविष्य की चुनौतियों के अनुकूल बनाना। चौथी एआई (AI) के दुरुपयोग से निपटना, जिसके तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के गलत इस्तेमाल से पैदा होने वाले खतरों को एड्रेस करना। पांचवीं समुद्री सुरक्षा जिसके तहत वैश्विक समुद्री मार्गों और सुरक्षा को मजबूत करना। छठी टेरर फाइनेंसिंग पर लगाम। इसके तहत आतंकवाद को मिलने वाली वित्तीय मदद का कड़ा विरोध करना और इसे रोकना।
इस अभियान की शुरुआत के अवसर पर एक विशेष वीडियो भी दिखाया गया। इसमें वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका, उसके योगदान और यूएनएससी अभियान की प्राथमिकताओं को दिखाया गया। वीडियो में मिसाइल हमलों से तबाह होते शहरों और प्राकृतिक आपदाओं के फुटेज के बीच भारत द्वारा पहुंचाई गई मानवीय और राहत सहायता को दिखाया गया। वीडियो में कहा गया कि एक अव्यवस्थित दुनिया के लिए, एक सभ्यता ने हमेशा केवल एक ही शब्द में उत्तर दिया है – शांति (Shanti).
इस विशेष वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस ऐतिहासिक आह्वान को भी शामिल किया गया, जो उन्होंने जून 2023 में अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित करते हुए किया था कि यह युद्ध का युग नहीं है बल्कि यह संवाद और कूटनीति का युग है। जयशंकर ने कहा कि वैश्विक शासन में बदलाव लाने के लिए सुधार आवश्यक हैं। बहुपक्षवाद को लोकतांत्रिक, प्रतिनिधिमूलक और प्रभावी होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि भारत जैसे देशों का मतभेदों को पाटने और आम सहमति बनाने का एक लंबा इतिहास रहा है। ऐसे देश निश्चित रूप से इस दिशा में अपना उचित योगदान दे सकते हैं।
अगले साल जून में होगा मुकाबला, 9वीं बार सीट की तैयारी
यूएनएससी के 2028-29 कार्यकाल के लिए चुनाव अगले साल यानी जून 2027 में आयोजित किए जाएंगे। इस चुनाव में एशिया-पैसिफिक ग्रुप श्रेणी की इकलौती सीट के लिए भारत और ताजिकिस्तान के बीच मुकाबला होगा। भारत इससे पहले आठ बार संयुक्त राष्ट्र के इस शक्तिशाली 15-सदस्यीय निकाय में गैर-स्थायी सदस्य के रूप में बैठ चुका है। भारत का पिछला कार्यकाल 2021-22 में था। इससे पहले भारत 1950-1951, 1967-1968, 1972-1973, 1977-1978, 1984-1985, 1991-1992 और 2011-2012 में इस प्रतिष्ठित टेबल पर रह चुका है।
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत अपनी उम्मीदवारी ऐसे समय में पेश कर रहा है जब दुनिया एक गहरे विरोधाभास का सामना कर रही है। एक तरफ दुनिया के पास मानव कल्याण को बड़े पैमाने पर आगे बढ़ाने की अभूतपूर्व क्षमताएं हैं तो दूसरी तरफ हम संघर्ष, हिंसा और अस्थिरता का ऐसा दौर देख रहे हैं जो दूर बैठे लोगों के लिए भी खतरा पैदा कर रहा है। इस जटिलता से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र को नेतृत्व करना होगा और सुरक्षा परिषद को रास्ता दिखाना होगा इसलिए इस सदस्यता के चुनाव का महत्व बहुत ज्यादा बढ़ जाता है।
यूएन चीफ एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात
सप्ताहांत में न्यूयॉर्क पहुंचे विदेश मंत्री जयशंकर ने इस कैंपेन लॉन्च के बाद संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात की। इस बैठक में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वथनेनी और भारत के यूएन मिशन के अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।
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