बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मंगलवार को कहा है कि वह दिसंबर में अपने देश लौटेंगी। उन्होंने कहा, बांग्लादेश की मौजूदा तारिक रहमान सरकार मुझे गिरफ्तार कर सकती है, मार सकती है या टॉर्चर कर सकती है, लेकिन कितना भी खतरा हो, मुझे इसकी परवाह नहीं है। मुझे अपने देश लौटना ही है। उन्होंने आगे कहा कि वह तारिक रहमान की सरकार से डरती नहीं हैं और अपने देश वापस लौटना उनकी जिम्मेदारी है। हसीना अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गई थीं। तब से वह भारत में रह रही हैं। हसीना ने भारत सरकार को शुक्रिया कहा शेख हसीना ने मुश्किल समय में उन्हें शरण देने के लिए भारत सरकार और लोगों का शुक्रिया किया। उन्होंने 1975 की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भी भारत ने उन्हें सहारा दिया था। हसीना ने कहा, मैं भारत सरकार, यहां के लोगों और सभी राजनीतिक दलों की शुक्रगुजार हूं। उन्होंने मुझे वैसे ही अपनाया, जैसे 1975 में अपनाया था। दरअसल, 1975 में बांग्लादेश में सैन्य तख्तापलट के दौरान हसीना के पिता शेख मुजीबुर रहमान की हत्या कर दी गई थी। वह बांग्लादेश के संस्थापक थे। इस घटना में हसीना की मां, उनके तीन भाइयों और परिवार के कई दूसरे सदस्यों की भी हत्या कर दी गई थी। उस समय हसीना और उनकी बहन अपनी जान बचाने और सुरक्षा के लिए भारत आई थीं। हसीना बोलीं- मेरे खिलाफ मामले चलाकर विपक्ष को दबाया जा रहा शेख हसीना ने बांग्लादेश की मौजूदा सरकार पर आरोप लगाया कि वह उनके और उनकी पार्टी अवामी लीग के नेताओं के खिलाफ आपराधिक मामले चलाकर विपक्ष को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक नेताओं पर लगे आरोपों का फैसला निष्पक्ष सुनवाई के जरिए होना चाहिए। उनके मुताबिक, बांग्लादेश के लोगों को स्वतंत्र और सभी को शामिल करने वाली लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए अपनी सरकार चुनने का मौका मिलना चाहिए। हसीना के भारत आने के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में तनाव शेख हसीना के भारत आने के बाद से भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में तनाव बना हुआ है। बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार का कहना है कि हसीना की वापसी कानूनी प्रक्रिया के तहत होगी। बांग्लादेश सरकार हसीना को भगोड़ा अपराधी बताती है। उसने भारत से कहा है कि हसीना को भारतीय जमीन से राजनीतिक गतिविधियां करने या राजनीतिक बयान देने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। दूसरी ओर, बांग्लादेश में भारत के हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने कहा था कि शेख हसीना को पनाह देना भारत की मजबूरी थी। अगर भारत उन्हें उतरने की अनुमति नहीं देता तो स्थिति खराब हो सकती थी। दूसरी ओर, भारत ने बांग्लादेश की मौजूदा सरकार के साथ रिश्ते बनाए रखने में दिलचस्पी दिखाई है। प्रधानमंत्री मोदी उन शुरुआती नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने चुनाव में जीत के बाद तारिक रहमान को बधाई दी थी। रहमान की सरकार कई बार प्रत्यर्पण की मांग कर चुकी तारिक रहमान सरकार ने कई बार हसीना के प्रत्यर्पण की मांग दोहराई है। हसीना को वापस भेजने के मुद्दे का असर तारिक रहमान के भारत दौरे पर भी पड़ा है। भारत ने पिछले महीने हुए BRICS समिट में तारिक रहमान को शामिल होने का न्योता दिया था। इसके अलावा फरवरी से ही भारत की ओर से उन्हें अलग से भारत आने का निमंत्रण दिया गया था। लेकिन प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने एक भी बार भारत का दौरा नहीं किया। उनकी तरफ से हर बार हसीना को वापस लौटाने की शर्त रखी गई है। भारत-बांग्लादेश के बीच प्रत्यर्पण संधि है भारत और बांग्लादेश ने 2013 में प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें कुछ परिस्थितियों में किसी व्यक्ति को दूसरे देश को सौंपने से इनकार करने के प्रावधान हैं। इनमें राजनीतिक प्रकृति के अपराध से जुड़े मामले भी शामिल हैं। हसीना पर बांग्लादेश में 2024 के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और मौतों से जुड़े गंभीर आरोप हैं। बांग्लादेश की मौजूदा सरकार उन्हें वापस लाकर कानूनी कार्रवाई करना चाहती है। बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने नवंबर 2025 में हसीना और उनके तत्कालीन गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को मौत की सजा सुनाई थी। 15 सितंबर 2026 को हसीना सरकार के कुछ पूर्व सहयोगियों को भी सजा सुनाई गई। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की जांच के मुताबिक, जुलाई-अगस्त 2024 के आंदोलन के दौरान करीब 1,400 लोगों की मौत हुई थी। ——————— यह खबर भी पढ़ें… बांग्लादेश बोला-सऊदी ने बिना बताए हमारे नागरिकों को फांसी दी:मस्जिद में अश्लील हरकत करने पर पति-पत्नी को मौत की सजा मिली थी सऊदी अरब ने मक्का में पिछले बुधवार एक बांग्लादेशी पति-पत्नी को फांसी दे दी। दोनों को एक मस्जिद के अंदर अश्लील हरकत करने के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई थी। पूरी खबर पढ़ें…
बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर भारत ने कहा कि उन्हें पनाह देना भारत की मजबूरी थी। यह बात भारत के बांग्लादेश में हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने शनिवार कही है। दिनेश त्रिवेदी बे ऑफ बंगाल कन्वर्सेशन 2026 कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान एक छात्र ने हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर भी सवाल पूछा। जवाब में त्रिवेदी ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया जारी है। हसीना को बांग्लादेश कब भेजा जाएगा, इसकी समयसीमा नहीं बताई जा सकती। सत्ता से हटने के बाद वे 5 अगस्त 2024 को भारत आई थीं। बीते दो साल से हसीना भारत में रह रहींं हैं। ‘हसीना को भारत आने से रोकने का विकल्प नहीं था’ हसीना के भारत आने के फैसले पर भी त्रिवेदी ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि 5 अगस्त 2024 को जब हसीना ने ढाका छोड़ा, तब वह अभी भी बांग्लादेश की प्रधानमंत्री थीं और वहां हालात तेजी से बदल रहे थे। त्रिवेदी ने कहा कि उस समय भारत के पास हसीना को दिल्ली में उतरने की अनुमति देने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। अगर भारत उन्हें उतरने की अनुमति नहीं देता तो स्थिति अलग हो सकती थी। हसीना को भारतीय सेना नहीं लाई थी त्रिवेदी ने यह भी स्पष्ट किया कि हसीना को भारत भारतीय वायुसेना या भारतीय सेना नहीं लाई थी। 5 अगस्त को उन्हें पहले बांग्लादेश के सैन्य हेलिकॉप्टर से उनके आवास के पास से निकाला गया। इसके बाद वह बांग्लादेश एयरफोर्स के विमान से भारत पहुंचीं। भारत-बांग्लादेश के बीच प्रत्यर्पण संधि है भारत और बांग्लादेश ने 2013 में प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें कुछ परिस्थितियों में किसी व्यक्ति को दूसरे देश को सौंपने से इनकार करने के प्रावधान हैं। इनमें राजनीतिक प्रकृति के अपराध से जुड़े मामले भी शामिल हैं। हसीना पर बांग्लादेश में 2024 के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और मौतों से जुड़े गंभीर आरोप हैं। बांग्लादेश की मौजूदा सरकार उन्हें वापस लाकर कानूनी कार्रवाई करना चाहती है। बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने नवंबर 2025 में हसीना और उनके तत्कालीन गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को मौत की सजा सुनाई थी। 15 सितंबर 2026 को हसीना सरकार के कुछ पूर्व सहयोगियों को भी सजा सुनाई गई। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की जांच के मुताबिक, जुलाई-अगस्त 2024 के आंदोलन के दौरान करीब 1,400 लोगों की मौत हुई थी। हसीना ने कहा- दिसंबर में लौटूंगी हसीना ने 5 अगस्त 2026 को कहा था कि वह दिसंबर तक बांग्लादेश लौटेंगी। CNN-News18 को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि वह कानूनी कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्हें सुरक्षा, वकील तक पहुंच, अपना बचाव करने का अधिकार, स्वतंत्र न्यायपालिका और निष्पक्ष सुनवाई चाहिए। उन्होंने BNP के साथ किसी भी बैकचैनल बातचीत से इनकार किया था और कहा था कि भारत अब भी उनका दोस्त है। भारत बोला- बांग्लादेश अपने फैसले खुद ले शेख हसीना का भारत में रहना दोनों देशों के बीच एक संवेदनशील मुद्दा है। बांग्लादेश की मौजूदा सरकार भारत से हसीना को वापस भेजने की मांग करती रही है। वह यह भी चाहती है कि हसीना भारत से बांग्लादेश की राजनीति में दखल न दें। भारत ने कहा है कि बांग्लादेश एक आजाद देश है। उसे यह तय करने का पूरा अधिकार है कि वह किस देश के साथ कैसे रिश्ते रखेगा। ———————-
IND vs SL: हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में भारतीय टीम लगातार दूसरी बार एशियन गेम्स के महिला टी20 फाइनल में पहुंच गई है। भारत ने सेमीफाइनल में बांग्लादेश को 114 रन से हराकर फाइनल में अपनी जगह बनाई है। अब गोल्ड मेडल के लिए भारत का मुकाबला 22 सितंबर को श्रीलंका से होगा। जो भी टीम ये मुकाबला हारेगी उससे सिल्वर मेडल दिया जाएगा। इससे पहले 13 सितंबर को एशिया कप 2026 के फाइनल में दोनों टीमों का आमना-सामना हुआ था। इस मैच में भारत ने श्रीलंका को 72 रनों से मात दी थी। अब श्रीलंका की टीम भारत से इस हार का बदला लेने के इरादे से उतरेगी।
वहीं दूसरी ओर सेमीफाइनल में पाकिस्तान और बांग्लादेश को हार का सामना करना पड़ा है। अब इन दोनों टीमों के बीच ब्रॉन्ज मेडल के लिए मुकाबला खेला जाएगा। आइए जानते हैं कब और कितने बजे से शुरू होगा मुकाबला
कब-कब होंगे मुकाबले
एशियन गेम्स में महिला क्रिकेट के गोल्ड और ब्रॉन्ज मेडल के दोनों मुकाबले एक ही दिन खेले जाएंगे। एशियन गेम्स में महिला क्रिकेट के मेडल मुकाबले 22 सितंबर को खेले जाएंगे। ब्रॉन्ज मेडल के मैच में पाकिस्तान और बांग्लादेश की टीमें सुबह 5:30 बजे आमने-सामने होंगी। इसके बाद गोल्ड मेडल के लिए भारत और श्रीलंका के बीच मुकाबला सुबह 10:30 बजे से खेला जाएगा। भारतीय टीम की नजर अब गोल्ड मेडल जीतने पर होगी।
कैसा था भारत-बांग्लादेश का मुकाबला
शैफाली वर्मा ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए सिर्फ 49 गेंदों में नाबाद 100 रन बनाए और अपना पहला टी20 इंटरनेशनल शतक पूरा किया। उनकी इस पारी की बदौलत भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 4 विकेट पर 195 रन का मजबूत स्कोर खड़ा किया। लक्ष्य का पीछा करने उतरी बांग्लादेश की टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सकी और लगातार अंतराल पर उसके विकेट गिरते रहे। पूरी टीम 15.4 ओवर में सिर्फ 81 रन पर ऑलआउट हो गई। इस तरह भारत ने बांग्लादेश को 114 रन से हराया, जो रनों के हिसाब से बांग्लादेश के खिलाफ भारत की दूसरी सबसे बड़ी जीत है। वहीं, श्रीलंका ने रविवार को पहले सेमीफाइनल में पाकिस्तान को 8 विकेट से हराकर फाइनल में जगह बनाई।
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बांग्लादेश ने रविवार को कहा कि वह भारत के साथ अपने रिश्ते को रीसेट करना चाहता है। यानी दोनों देशों के बीच संबंधों को नए सिरे से शुरू करना चाहता है। बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा कि दोनों देशों के बीच नया रिश्ता आपसी हितों के आधार पर बनाया जाना चाहिए। उन्होंने शेख हसीना के प्रधानमंत्री रहने के दौरान भारत-बांग्लादेश संबंधों को असहज बताया। कबीर ने कहा कि ढाका नई दिल्ली के साथ नए रिश्ते की ओर बढ़ना चाहता है और इसके लिए दोनों देशों के बीच सीधे बातचीत होनी चाहिए। यह बातचीत किसी बहुपक्षीय मंच के जरिए नहीं, बल्कि द्विपक्षीय स्तर पर होनी चाहिए। ‘भारत पर जरूरत से ज्यादा ध्यान देना बंद करना होगा’ कबीर ने कहा कि बांग्लादेश को भारत के साथ रिश्तों को लेकर जरूरत से ज्यादा ध्यान देने की सोच से बाहर निकलना होगा। उन्होंने कहा कि भारत के साथ संबंधों को संतुलित तरीके से देखना चाहिए और आपसी हितों पर ध्यान देना चाहिए। नई दिल्ली के साथ रिश्ता बांग्लादेश के दूसरे देशों के साथ संबंधों का भी एक हिस्सा है। BRICS समिट में PM रहमान शामिल नहीं हुए थे बांग्लादेश का यह बयान भारत में हुए BRICS समिट के खत्म होने के आया है। बांग्लादेश ने कहा था कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान BRICS समिट में शामिल नहीं होंगे, क्योंकि उन्हें व्यक्तिगत हैसियत से न्योता नहीं दिया गया था। ढाका के मुताबिक, उन्हें BIMSTEC के अध्यक्ष के तौर पर आमंत्रित किया गया था। BIMSTEC बंगाल की खाड़ी से जुड़े दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के 7 देशों का क्षेत्रीय संगठन है, जो आपसी सहयोग और विकास के लिए मिलकर काम करता है। अगस्त में भी टला था रहमान का भारत दौरा BRICS से पहले भारत ने दोनों देशों के बीच एक अलग द्विपक्षीय मुलाकात के लिए PM तारिक को निमंत्रण दिया था। उन्हें 22 अगस्त को भारत आना था, लेकिन दौरे से पहले ही यह कार्यक्रम टल गया था। उस समय बांग्लादेश ने भारत के सामने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा उठाया था। दोनों देशों के बीच इस मुद्दे को लेकर पहले से तनाव चल रहा है। इस पर बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने उस वक्त कहा था कि, जब माहौल सही होगा, तब द्विपक्षीय दौरे होंगे। जल्दबाजी करने की कोई जरूरत नहीं है। हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद भारत-बांग्लादेश में तनाव बढ़ा दरअसल 5 अगस्त को शेख हसीना ने दिल्ली में वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इसमें उन्होंने अवामी लीग सरकार के सत्ता से हटने की दूसरी बरसी पर पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए और बांग्लादेश की राजनीति पर भी अपनी बात रखी। इस पर बांग्लादेश सरकार ने कड़ी आपत्ति जताई। ढाका का कहना था कि भारत में रहते हुए हसीना का सार्वजनिक रूप से राजनीतिक बयान देना दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य बनाने की कोशिशों को नुकसान पहुंचा सकता है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस बारे में भारत को पहले आगाह किया गया था लेकिन फिर भी भारत ने उन्हें यह प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की अनुमति दी। गौरतलब है कि भारत ने शेख हसीना का प्रेस कॉन्फ्रेंस रोकने से इनकार कर दिया था। भारत ने कहा था कि उनका कार्यक्रम एक निजी मीडिया संस्था आयोजित कर रही है। इससे सरकार का कोई लेना-देना नहीं है। ——————– बांग्लादेश से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… शेख हसीना बोलीं- दिसंबर में बांग्लादेश लौटूंगी: 2 साल बाद वर्चुअल भाषण दिया, कैमरा ऑफ था; बांग्लादेश सरकार बोली- दिल्ली में बैठकर जहर उगला बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दो साल बाद लोगों को वर्चुअली संबोधित किया। उन्होंने कहा कि वह दिसंबर में बांग्लादेश वापस लौटेंगी। पूरी खबर पढ़ें…
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान BRICS समिट में शामिल होने भारत नहीं आएंगे। विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने इसकी पुष्टि की है। गुरुवार को पत्रकारों ने रहमान के समिट में शामिल होने को लेकर सवाल पूछा। कबीर ने कहा, हमारे प्रधानमंत्री को तो न्योता नहीं मिला। न्योता BIMSTEC के चेयरमैन को मिला है। BRICS समिट 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में होगा। इसमें कई देशों के नेता शामिल होंगे। BRICS का सदस्य नहीं, फिर भी BIMSTEC चेयर के तौर पर न्योता बांग्लादेश BRICS का सदस्य नहीं है। भारत ने BIMSTEC के मौजूदा चेयरमैन के तौर पर तारिक रहमान को BRICS समिट के आउटरीच सेशन में शामिल होने का न्योता दिया था। BIMSTEC दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के 7 देशों का क्षेत्रीय संगठन है। इसका पूरा नाम बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी-सेक्टरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन है। इसमें भारत, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार और थाईलैंड शामिल हैं। संगठन का मकसद सदस्य देशों के बीच व्यापार, कनेक्टिविटी, सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है। अगस्त में भी टला था रहमान का भारत दौरा यह दूसरी बार है जब तारिक रहमान की भारत यात्रा टली है। इससे पहले उन्हें 22 अगस्त को भारत आना था, लेकिन दौरे से पहले ही यह कार्यक्रम टल गया था। उस समय बांग्लादेश ने भारत के सामने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा उठाया था। दोनों देशों के बीच इस मुद्दे को लेकर पहले से तनाव चल रहा है। अब बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा है कि सरकार तारिक रहमान की अलग द्विपक्षीय भारत यात्रा की तैयारी कर रही है। यह यात्रा दोनों देशों के लिए सही समय आने पर होगी। हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद भारत-बांग्लादेश में तनाव बढ़ा दरअसल 5 अगस्त को शेख हसीना ने दिल्ली में वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इसमें उन्होंने अवामी लीग सरकार के सत्ता से हटने की दूसरी बरसी पर पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए और बांग्लादेश की राजनीति पर भी अपनी बात रखी। इस पर बांग्लादेश सरकार ने कड़ी आपत्ति जताई। ढाका का कहना था कि भारत में रहते हुए हसीना का सार्वजनिक रूप से राजनीतिक बयान देना दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य बनाने की कोशिशों को नुकसान पहुंचा सकता है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस बारे में भारत को पहले आगाह किया गया था लेकिन फिर भी भारत ने उन्हें यह प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की अनुमति दी। गौरतलब है कि भारत ने शेख हसीना का प्रेस कॉन्फ्रेंस रोकने से इनकार कर दिया था। भारत ने कहा था कि उनका कार्यक्रम एक निजी मीडिया संस्था आयोजित कर रही है। इससे सरकार का कोई लेना-देना नहीं है। ———————————– यह खबर भी पढ़ें… चीनी राष्ट्रपति का गलवान झड़प के बाद पहला भारत दौरा:BRICS में शामिल होंगे जिनपिंग, PM मोदी से बैठक संभव; पहले 2019 में आए थे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत आएंगे। चीन के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
Afghan Cricket Board Map Controversy: अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (ACB) ने भारत के साथ होने वाली अपनी आगामी सीरीज के लिए एक प्रमोशनल वीडियो जारी किया है, जिसमें भारत के नक्शे में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) और गिलगित-बाल्टिस्तान को दिखाया गया है। जिसके बाद पाकिस्तान के साथ एक नया राजनयिक विवाद खड़ा हो गया है।
बता दें कि नई दिल्ली में भारत और अफगानिस्तान के बीच होने वाली तीन मैचों की सीरीज से कुछ दिन पहले, रविवार को ACB ने अपने आधिकारिक X अकाउंट पर यह प्रोमो शेयर किया है।
सूत्रों ने CNN-News18 को बताया कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने नक्शे में दिखाए गए हिस्सों को लेकर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के सामने चिंता जाहिर की है। हालांकि, PCB ने विदेश मंत्रालय के सामने इस मामले में क्या-क्या बातें रखीं, इसकी पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
सूत्रों ने आगे बताया कि इस्लामाबाद इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने पर विचार कर सकता है, हालांकि अभी तक इस बारे में कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।
गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब काबुल और इस्लामाबाद के बीच रिश्ते काफी तनावपूर्ण हैं और दोनों देशों के बीच सीमा व सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर विवाद चल रहा है।
मैप विवाद से काबुल-इस्लामाबाद के बीच तनाव बढ़ा
यह नया विवाद अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच सामने आया है, जिसमें सीमा पर झड़पें और हवाई हमले भी शामिल हैं। वहीं, इस्लामाबाद ने बार-बार अफगान तालिबान पर ‘तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान’ (TTP) को पनाह देने का आरोप लगाया है। पाकिस्तान का कहना है कि TTP देश के अंदर होने वाले कई घातक हमलों के लिए जिम्मेदार है।
भारत के शीर्ष इंटेलिजेंस सूत्रों ने CNN-News18 को बताया कि इस तरह का तनाव सांस्कृतिक और खेल जैसे ‘सॉफ्ट पावर’ के जरिए भी बढ़ सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, मैप में दिखाए गए हिस्से को काबुल की ओर से एक कूटनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा सकता है। यह उसकी स्वतंत्र विदेश नीति और पाकिस्तान की क्षेत्रीय चिंताओं की परवाह किए बिना भारत के साथ जुड़ने की इच्छा को दर्शाता है।
सूत्र ने कहा, “पाकिस्तान की क्षेत्रीय चिंताओं को नजरअंदाज करते हुए अपनी ब्रांडिंग का इस्तेमाल करना, खेल कूटनीति में स्वतंत्र विदेश नीति का रुख बनाए रखना काबुल के इरादे को दिखाता है।”
ACB ने भारत के साथ होने वाली सीरीज का प्रमोशन किया
अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (ACB) ने आगामी सीरीज की अहमियत बताते हुए इसका प्रमोशनल वीडियो शेयर किया।
इसमें कहा गया, “यह एक ऐसी सीरीज है जो एक बार फिर दो देशों को एक साथ लाएगी।” इसमें इन मैचों को ऐसे दो देशों के बीच का मुकाबला बताया गया है जिनका गहरा इतिहास, संस्कृति और क्रिकेट के प्रति साझा जुनून है।”
ACB ने अपनी पोस्ट में लिखा, “ये सिर्फ मैच नहीं हैं। ये जुनून, उत्साह और अहमियत वाले मुकाबले हैं, जहां ‘अफगान-अटलान’ (अफगानिस्तान की टीम) अपने देश के लाखों लोगों की उम्मीदों और गर्व को साथ लेकर मैदान में उतरेगी।”
बता दें कि अफगानिस्तान और भारत के बीच यह सीरीज 13, 15 और 17 सितंबर को नई दिल्ली के अरुण जेटली क्रिकेट स्टेडियम में खेली जाएगी।
यह भी पढ़ें: भारत-बांग्लादेश के बीच फिर दौड़ेंगी यात्री ट्रेनें! ढाका रख सकता है नए राजशाही-कोलकाता रूट का प्रस्ताव
भारत और बांग्लादेश के बीच बंद पड़ी यात्री ट्रेन सेवाओं को दोबारा शुरू करने की दिशा में बातचीत हो सकती है। ढाका के अधिकारियों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच सीमा पार चलने वाली ट्रेनों को फिर से शुरू करने को लेकर चर्चा की जाएगी। ये ट्रेन सेवाएं 2024 में बांग्लादेश में हुए राजनीतिक बदलावों और अस्थिरता के बाद से बंद हैं। बांग्लादेश और भारत के रेलवे अधिकारी मंगलवार से ढाका में होने वाली दो दिन की बैठक में आमने-सामने बातचीत करेंगे। इस बैठक में मैत्री, बंधन और मिताली एक्सप्रेस ट्रेनों को फिर से शुरू करने पर चर्चा होने की उम्मीद है। इसके अलावा, बांग्लादेश राजशाही और कोलकाता के बीच नई ट्रेन सेवा शुरू करने का प्रस्ताव भी रख सकता है। अगर दोनों देशों के बीच सहमति बनती है, तो यात्रियों को एक बार फिर रेल के जरिए भारत-बांग्लादेश यात्रा करने की सुविधा मिल सकती है।
इस मामले की जानकारी रखने वाले बांग्लादेश रेलवे के एक अधिकारी ने कहा, “कल से शुरू होने वाली IGRM (इंटर-गवर्नमेंटल रेलवे मीटिंग) में हम मैत्री, बंधन और मिताली एक्सप्रेस ट्रेन सेवाओं को दोबारा शुरू करने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे।”
नई ट्रेन शुरू करने पर भी विचार
भारत और बांग्लादेश के बीच रेल संपर्क को बढ़ाने के लिए नई ट्रेन सेवा शुरू करने पर भी विचार किया जा रहा है। बांग्लादेश, राजशाही से कोलकाता के बीच सीधी यात्री ट्रेन चलाने का प्रस्ताव रख सकता है। फिलहाल मैत्री एक्सप्रेस ढाका-कोलकाता और बंधन एक्सप्रेस खुलना-कोलकाता के बीच चलती है। वहीं मिताली एक्सप्रेस ढाका को न्यू जलपाईगुड़ी से जोड़ती थी। नई ट्रेन सेवा शुरू होने से दोनों देशों के यात्रियों को सफर का एक और विकल्प मिल सकता है। बांग्लादेश, ढाका और कोलकाता के बीच चलने वाली मैत्री एक्सप्रेस के रूट में बदलाव का सुझाव भी दे सकता है। इसके तहत ट्रेन को पुराने जमुना ब्रिज की जगह नए पद्मा ब्रिज से चलाने का प्रस्ताव है।
बैठक में होगा फैसला
बांग्लादेश रेलवे के अधिकारी के मुताबिक, अगर दोनों देशों के बीच इस प्रस्ताव और ट्रेन सेवाओं को लेकर सहमति बन जाती है, तो मैत्री, बंधन और मिताली एक्सप्रेस को अगले महीने से दोबारा शुरू किया जा सकता है। अधिकारी के अनुसार, भारतीय रेलवे भी दोनों देशों के बीच यात्री ट्रेन सेवाएं दोबारा शुरू करने को लेकर पॉजिटिव है। लेकिन, ट्रेनों को फिर से चलाने या कोई नया रेल रूट शुरू करने से पहले भारत और बांग्लादेश के कई संबंधित मंत्रालयों से मंजूरी लेनी होगी। इस मुद्दे पर होने वाली दो दिवसीय बैठक में अलग-अलग मंत्रालयों के अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं। इसके बाद ट्रेन सेवाओं को बहाल करने का अंतिम फैसला दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की सहमति से लिया जाएगा।
दोनों देशों के बीच नहीं चल रही यात्री ट्रेनें
बांग्लादेश में जुलाई 2024 के दौरान हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद भारत और बांग्लादेश के बीच चलने वाली तीन यात्री ट्रेन सेवाएं बंद कर दी गई थीं। शुरुआत में मैत्री और बंधन एक्सप्रेस को 19 जुलाई से 6 अगस्त 2024 तक रोकने का फैसला किया गया था। लेकिन हालात नॉर्मल नहीं होने के कारण बाद में इन दोनों ट्रेनों का संचालन अनिश्चित समय के लिए बंद कर दिया गया। भारत और बांग्लादेश के बीच मालगाड़ी सेवा पिछले साल फरवरी में दोबारा शुरू कर दी गई थी। ये सेवा करीब नौ महीने तक बंद रही थी, लेकिन दोनों देशों के बीच यात्री ट्रेनें अब भी नहीं चल रही हैं। ऐसे में होने वाली रेलवे बैठक को काफी अहम माना जा रहा है।
कब चली थी आखिरी ट्रेन
भारतीय रेलवे के मुताबिक, मिताली एक्सप्रेस ने 17 जुलाई 2024 को ढाका के लिए आखिरी सफर किया था, लेकिन इसके बाद यह ट्रेन भारत वापस नहीं आई। बांग्लादेश में राजनीतिक हालात बिगड़ने के बाद ट्रेन सेवा बंद हो गई। 5 अगस्त 2024 को लंबे समय तक चले विरोध प्रदर्शनों के बीच शेख हसीना ने प्रधानमंत्री पद छोड़ दिया और भारत आ गईं। इसके बाद मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश में अंतरिम सरकार बनी।
इस दौरान भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में तनाव बढ़ा और शेख हसीना की भारत में मौजूदगी दोनों देशों के बीच बड़ा मुद्दा बनी रही। बांग्लादेश ने उन्हें वापस भेजने की मांग भी की। बाद में बांग्लादेश में चुनाव हुए और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी सत्ता में आई। लेकिन भारत और बांग्लादेश के बीच कई मुद्दों को लेकर अभी भी मतभेद बने हुए हैं।
Bihar Flood Risk: उत्तरी नेपाल के रसुवा जिले में अचानक आई जबरदस्त बाढ़ के कारण बिहार में खास सतर्कता बरती जा रही है, क्योंकि नेपाल में गंडक नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में अचानक बाढ़ की स्थिति बन गई है और पानी के बहाव में अचानक तेजी आने की आशंका है। हालांकि, अभी तक बाढ़ के सटीक कारण का पता नहीं चल पाया है, लेकिन पिछले साल इसी नदी में आई ऐसी ही अचानक बाढ़ का कारण बाद में एक ग्लेशियर झील का पानी निकलना बताया गया था।
नेपाल पर्यटन बोर्ड को ताजा जानकारी के अनुसार, नेपाल के नुवाकोट और धाडिंग जिलों में भोटे कोशी नदी में अचानक आई बाढ़ के बाद कम से कम 105 भारतीय लापता हैं।
बता दें कि बुधवार को नेपाल में आई जबरदस्त बाढ़ में कम से कम 8 लोगों की मौत हो गई। वहीं, चीन के सरकारी मीडिया ने बताया कि दोनों देशों की सीमा पर चीन की तरफ तिब्बत के एक व्यापारिक केंद्र पर मडस्लाइड (कीचड़ और मलबे का बहाव) हुआ, जिसकी चपेट में आने से “काफ़ी लोग हताहत” हुए हैं।
बिहार में क्यों बढ़ाई गई निगरानी?
नेपाल में बाढ़ के हालात को देखते हुए बिहार के अधिकारियों ने गंडक नदी में पानी का स्तर बढ़ने की आशंका के चलते हाई अलर्ट जारी किया है।
बिहार प्रशासन ने पश्चिमी चंपारण के बगहा इलाके, खासकर वाल्मीकिनगर बैराज के आसपास निगरानी बढ़ा दी है। उन्हें चिंता है कि नेपाल से बहकर आने वाला अतिरिक्त पानी दो से तीन घंटे में गंडक नदी तक पहुंच सकता है।
गंडक नदी के किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को भी सावधानी बरतने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
बता दें कि भोटे कोशी नदी तिब्बत से निकलती है और नेपाल की त्रिशूली नदी में मिलती है, जो आगे चलकर भारत में गंडक नदी के रूप में प्रवेश करती है।
न्यूज एजेंसी ANI ने बिहार में आपदा प्रबंधन अधिकारियों के हवाले से बताया कि गंडक नदी के किनारे बसे जिलों में बाढ़ की संभावित स्थिति से निपटने के लिए सभी जरूरी तैयारियां की जा रही हैं।
ANI ने अधिकारियों के हवाले से बताया, “नेपाल के रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा, लमजुंग और तनहुं जिलों (गंडक कैचमेंट एरिया) और दोलखा और सिंधुपालचोक जिलों (कोसी कैचमेंट एरिया) में अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) का ज्यादा खतरा होने का अनुमान है।”
फरक्का बैराज क्यों एक नया विवाद का मुद्दा बन गया है?
जैसे-जैसे गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है और राज्य में बाढ़ का खतरा गहराता जा रहा है, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पश्चिम बंगाल के अपने समकक्ष सुवेंदु अधिकारी से फरक्का बैराज के सभी गेट खोलने का आग्रह किया है। उनका तर्क है कि बहाव बढ़ने से पूर्वी राज्य में बाढ़ का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
यह अनुरोध ऐसे समय में आया है जब 1996 की भारत-बांग्लादेश गंगा जल बंटवारा संधि—जो फरक्का में नदी के कम बहाव वाले मौसम में पानी के बंटवारे को नियंत्रित करती है—इस साल दिसंबर में अपनी 30 साल की अवधि पूरी करने के बाद समाप्त होने वाली है। पटना लगातार इस बात पर जोर दे रहा है कि बांग्लादेश के साथ भविष्य में पानी के बंटवारे की किसी भी व्यवस्था में उसके हितों का ध्यान रखा जाए।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राज्य को आश्वासन दिया है कि नवीनीकरण प्रक्रिया के दौरान फरक्का बैराज और भारत-बांग्लादेश जल बंटवारा संधि को लेकर उसकी चिंताओं पर विचार किया जाएगा।
पटना की सबसे बड़ी चिंता क्या है?
हालांकि, अभी सबसे बड़ी चिंता गंगा नदी के जलस्तर का बढ़ना है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल राज्य में सामान्य से कम बारिश होने के बावजूद, पटना और बक्सर समेत बिहार के कुछ हिस्सों में नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चला गया है।
पटना के लिए अभी जरूरी है कि बैराज से और पानी छोड़ा जाए ताकि ऊपरी हिस्से (अपस्ट्रीम) का दबाव कम हो सके। हालांकि, बैराज से जुड़ा कोई भी फैसला पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के साथ पानी के बंटवारे को लेकर भारत की प्रतिबद्धताओं पर भी असर डाल सकता है।
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Murder of a Hindu family in Bangladesh : बांग्लादेश के रंगपुर में याबा नशे का विरोध करने पर हिंदू परिवार के एक रिटायर्ड शिक्षक समेत परिवार के 4 सदस्यों की हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। परिवार के चारों लोगों के शव शनिवार रात बंद घर से मिले थे। इस मामले में पुलिस ने 2 संदिग्धों को गिरफ़्तार किया है, जो कि रिश्ते में चचेरे भाई हैं। लेकिन मृतक के भाई ने सही जांच कर असली अपराधियों के पकड़ने की मांग की है। मामले में पुलिस ने खुलासा किया कि हत्या के बाद दोनों आरोपी करीब 6 घंटे घर में ही रहे। इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है।
बांग्लादेश के रंगपुर में याबा नशे का विरोध करने पर हिंदू परिवार के एक रिटायर्ड शिक्षक समेत परिवार के 4 सदस्यों की हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। परिवार के चारों लोगों के शव शनिवार रात बंद घर से मिले थे। इस मामले में पुलिस ने 2 संदिग्धों को गिरफ़्तार किया है, जो कि रिश्ते में चचेरे भाई हैं। लेकिन मृतक के भाई ने सही जांच कर असली अपराधियों के पकड़ने की मांग की है।
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मामले में पुलिस ने खुलासा किया कि हत्या के बाद दोनों आरोपी करीब 6 घंटे घर में ही रहे। इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। याबा एक बेहद नशीला पदार्थ है, जिसमें मुख्य रूप से मेथामफेटामाइन और कैफीन होता है। बांग्लादेश में इसके इस्तेमाल और तस्करी को लेकर लंबे समय से चिंता जताई जाती रही है। खबरों के मुताबिक, रिटायर्ड शिक्षक ने अपने घर की छत पर 2 युवकों को याबा का सेवन करते देखा था।
उन्होंने दोनों को ऐसा करने से रोका। इसी बात को लेकर विवाद हुआ। आरोप है कि इसके बाद दोनों संदिग्ध घर में घुस गए और परिवार के सदस्यों पर हमला कर दिया। इस हमले में चारों की मौत हो गई। आरोपियों को डर था कि रिटायर्ड शिक्षक उन्हें पहचान लेंगे, इसलिए उन्होंने उनका गला दबा दिया। इस बीच आवाज सुनकर शिक्षक की पत्नी भी ऊपर पहुंचीं तो आरोपियों ने उनका भी गला दबा दिया और इसके बाद उनकी बेटी और 12 साल के बेटे की भी हत्या कर दी।
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पुलिस के मुताबिक, दोनों संदिग्ध करीब 6 घंटे तक घर के अंदर ही रहे। इस दौरान दोनों ने खजूर और खीरा खाया और घर में नहाया। इसके बाद वे वहां से फरार हो गए। पुलिस के मुताबिक, परिवार का किसी अन्य व्यक्ति के साथ कोई पुराना विवाद या दुश्मनी नहीं थी। ऐसे में नशे का विरोध ही वारदात की मुख्य वजह मानी जा रही है। रंगपुर की इस घटना ने बांग्लादेश में नशीले पदार्थों के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा है कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान के भारत दौरे को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश भारत के साथ अच्छे रिश्ते चाहता है, लेकिन अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा। हुमायूं कबीर ने कहा कि प्रधानमंत्री के भारत दौरे का फैसला दोनों देशों के बीच बातचीत और जरूरी तैयारियों के बाद होगा। भारत ने रहमान को द्विपक्षीय दौरे का न्योता भेजा भारत ने तारिक रहमान को द्विपक्षीय दौरे के लिए आमंत्रित किया है। उन्हें 12-13 सितंबर को होने वाले BRICS समिट के आउटरीच सेशन में शामिल होने का न्योता भी मिला है। यह दौरा भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्ते सुधारने के लिए अहम माना जा रहा है। 2024 में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ा हुआ है। हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा बांग्लादेश अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना भारत आ गई थीं। उन्हें ढाका की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने हत्या के लिए उकसाने और हत्या का आदेश देने के लिए मौत की सजा दी है। बाकी मामलों में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। ICT ने उन्हें 5 मामलों में आरोपी बनाया था। ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना को छात्र आंदोलन के दौरान हुई हत्याओं का मास्टरमाइंड बताया था। इसी के चलते बांग्लादेश लगातार उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है। कबीर ने कहा कि हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा भी दोनों देशों के बीच जारी बातचीत का हिस्सा है। भारत का कहना है कि वह बांग्लादेश के अनुरोध की कानूनी प्रक्रिया के तहत समीक्षा कर रहा है। हसीना ने दिसंबर में बांग्लादेश लौटने का ऐलान किया 5 अगस्त को नई दिल्ली से एक वर्चुअल मीडिया कार्यक्रम में शेख हसीना ने कहा था कि वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी और देश को फिर से सही रास्ते पर लाने की कोशिश करेंगी। इस बयान पर बांग्लादेश ने कड़ी आपत्ति जताई थी और कहा था कि इससे बांग्लादेश के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। इसके बाद भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में फिर से तनाव बढ़ गया। ढाका ने कहा था कि भारत में हसीना के ऐसे कार्यक्रम दोनों देशों के रिश्ते बेहतर बनाने की कोशिशों पर असर डाल सकते हैं। हालांकि भारत सरकार ने साफ किया कि कार्यक्रम के आयोजन में उसकी कोई भूमिका नहीं थी। जयशंकर बोले- कोई भी रिश्ता तभी मजबूत जब उससे दोनों का फायदा भारत-बांग्लादेश संबंधों को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर का बयान भी काफी चर्चा में है। उन्होंने शनिवार को इकोनॉमिक टाइम्स के वर्ल्ड लीडर फोरम में कहा, कोई भी रिश्ता तभी मजबूत और सफल होता है, जब उससे दोनों पक्षों को फायदा हो। जयशंकर ने कहा कि भारत यह उम्मीद नहीं करता कि पड़ोसी देश सिर्फ उसके हितों के मुताबिक काम करें। जैसे भारत दूसरे देशों के हितों का सम्मान करता है, वैसे ही उम्मीद वह दूसरे देशों से रखता है। —————————— यह खबर भी पढ़ें… बांग्लादेश बोला- भारत से गंगा जल समझौते में गारंटी मांगेंगे: जरूरत पड़ी तो अंतरराष्ट्रीय मंच पर जाएंगे; 1996 का समझौता दिसंबर में खत्म होगा बांग्लादेश गंगा जल संधि में भारत से ‘गारंटी क्लॉज’ शामिल करने की मांग कर रहा है। बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी एनी ने मंगलवार को ढाका में यह बात कही। पूरी खबर पढ़ें…
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