नेपाल में भूकंप जैसे आया पानी का बवंडर और उसी के साथ बहने लगा 24 साल का मजदूर बिबेक कुमाल! जीवन और मौत के बीच ऐसे हुआ मुकाबला

Nepal Flash Flood: नेपाल में बुधवार को हिमालयी क्षेत्र और तिब्बत सीमा के पास आई अचानक और भीषण बाढ़ हाल के कुछ सालों की की सबसे भयावह आपदा बन चुकी है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आई विनाशकारी बाढ़ में अब तक कम से कम 160 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि लगभग 1500 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाली विदेश मंत्री शिशिर खनाल के मुताबिक लापता लोगों में करीब 300 भारतीय पर्यटक भी शामिल हैं। इस फ्लैश फ्लड ने सड़कों और बेसिक इंफ्रा को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है जिससे राहत और बचाव टीमों को कई प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। इस बीच इस फ्लड का शिकार हुए लोगों की ऐसी कहानियां सामने आ रही हैं जो दहला रही हैं।

आम के पेड़ ने बचाई बिबेक की जिंदगी, देखते ही देखते गायब हो गया मकान

बाढ़ के इस तांडव से सुरक्षित बचे 24 साल के मजदूर बिबेक कुमाल की कहानी चमत्कार से कम नहीं है। जब यह आफत आई तब बिबेक बिदुर इलाके में मजदूरी कर रहे थे। हमारी सहयोगी वेबसाइट फर्स्ट पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में रॉयटर्स के हवाले से बताया है कि बिबेक एक नए बने मकान के बाहर शौचालय के लिए गड्ढा खोद रहे थे तभी उन्हें अचानक एक फुफकार जैसी तेज आवाज सुनाई दी। उनके ऊपर काम कर रहे चार साथियों ने उन्हें तुरंत बाहर निकलकर भागने के लिए चिल्लाया।

बिबेक गड्ढे से बाहर तो निकल गए लेकिन पानी की हाहाकारी धारा ने उन्हें तुरंत अपनी चपेट में ले लिया। काठमांडू के एक अस्पताल में इलाज करा रहे बिबेक ने कहा कि, ‘मैंने भागना शुरू किया तभी पानी की एक विशाल दीवार ऐसे गरजती हुई नीचे आई मानो भूकंप आ गया हो।’ बाढ़ का पानी, कीचड़ और मलबा उन्हें अपने साथ बहाकर ले जाने लगा। लेकिन तभी अचानक किस्मत से वे एक आम के पेड़ में जाकर अटक गए।

बिबेक ने कहा कि ‘सौभाग्य से मैं एक आम के पेड़ में अटक गया। अगर वह आम का पेड़ न होता तो मैं बहकर मौत के मुंह में चला जाता।’ बिबेक ने बताया कि जब वे पेड़ को पकड़े हुए थे तब उन्होंने अपनी आंखों के सामने उस पूरे मकान को गायब होते देखा जहां वे काम कर रहे थे। बाद में पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। पानी के तेज बहाव और एक बड़े पत्थर की चपेट में आने से उनके दाहिने पैर में काफी चोटें आई हैं।

कीचड़ की दीवार में बह गई पत्नी, हेलीकॉप्टर से बचाए गए केशव प्रसाद

ऐसी ही कुछ कहानी 68 साल के केशव प्रसाद बराल की है। बाढ़ आने पर उन्हें संभलने तक का मौका नहीं मिला। उन्होंने रॉयटर्स को बताया कि उन्होंने अपने घर की तरफ कीचड़ का एक विशाल गुबार आते देखा। उन्होंने कहा कि कीचड़ का एक बहुत बड़ा सैलाब सीधा हमारी ओर आ रहा था। जैसे-जैसे यह करीब आ रहा था, इसकी ऊंचाई और बढ़ती जा रही थी।

जब कीचड़ घर में दाखिल हुआ तो केशव ने अपनी पत्नी का हाथ पकड़कर उन्हें छत पर ले जाने की कोशिश की। लेकिन कीचड़ के प्रचंड बहाव ने उनकी पत्नी को खींच लिया और वे बह गईं। बाद में केशव प्रसाद को हेलीकॉप्टर के जरिए रेस्क्यू किया गया लेकिन उनकी पत्नी अब भी कीचड़ के नीचे लापता हैं। शायद उनकी जान नहीं बच पाई है।

पीने को एक गिलास पानी तक नहीं बचा

बाढ़ प्रभावित एक और बस्ती में रहने वाली दीपिका (बदला हुआ नाम) ने भी इस तबाही का खौफनाक मंजर देखा। वे सुबह करीब 9:30 बजे अपने घर के बाहर बर्तन धो रही थीं। तभी उन्होंने त्रिशूली नदी के बाढ़ के पानी को तेज स्पीड से आते देखा। एनडीटीवी को उन्होंने बताया कि बाहर होने की वजह से वे तुरंत अपने परिवार को अलर्ट कर पाईं और उन्हें लेकर घर की छत पर भाग कर गईं।

त्रिशूली नदी के जलस्तर में अचानक हुए इस इजाफे से उनके घर की पहली मंजिल पूरी तरह कीचड़ से भर गई। उनका परिवार तो बच गया लेकिन घर का सारा सामान और जमा पूंजी मलबे में दफन हो गई। दीपिका ने बताया कि उनके पास पीने के लिए एक गिलास पानी तक नहीं बचा है। उन्होंने अपने आंगन की ओर इशारा करते हुए कहा कि जहां पीने के पानी का मटका रखा हुआ करता था अब वहां कुछ नहीं है।

इसी तरह एक दूसरी पीड़िता कल्पना मल्ला ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने अपने पिता, मां, बहन और बहन के बच्चों को पानी के तेज बहाव में बहते देखा। कल्पना और उनका बेटा किसी तरह एक मकान की छत पर चढ़ने में सफल रहे। उन्होंने कहा कि उनके पास बचने का कोई मौका ही नहीं था। इस बाढ़ ने सब कुछ छीन लिया, लेकिन मैं और मेरा बेटा किसी तरह छत पर चढ़कर बच पाए।

सड़कों और बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान, इसरो ने बताई वजह

बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित इलाकों के लोग नेपाल सेना के ट्रेनिंग सेंटर के बाहर अपने लापता रिश्तेदारों की जानकारी पाने के लिए जमा हो रहे हैं। यहां से हेलीकॉप्टर रेस्क्यू ऑपरेशन का संचालन किया जा रहा है। पुलिस लापता लोगों के नाम दर्ज कर रही है। इस आपदा ने देश के बुनियादी ढांचे को तहस-नहस कर दिया है। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक प्रभावित इलाके के छह बड़े हाइड्रोपावर स्टेशनों को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़े पैमाने पर बिजली आपूर्ति ठप हो गई है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के शुरुआती विश्लेषण के मुताबिक नेपाल-तिब्बत सीमा के पास रसुवा जिले में आई इस विनाशकारी बाढ़ की मुख्य वजह ऊपरी हिमालयी क्षेत्र में एक बड़े ग्लेशियर का ढहना हो सकता है। तबाही के पूरे पैमाने का आकलन अभी जारी है और मौतों का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

नेपाल में कुदरत के कहर के बीच पीएम मोदी ने बालेन शाह से बात कर दिया मदद का भरोसा

नेपाल में कुदरत के कहर के बीच पीएम मोदी ने बालेन शाह से बात कर दिया मदद का भरोसा

Modi Balen Shah Telephonic Conversation

Modi Balen Shah Telephonic Conversation on Flood Tragedy: नेपाल में कुदरत का भयानक कहर जारी है। भीषण बारिश के बाद आई बाढ़ और भूस्खलन के कारण स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। संकट की इस कठिन घड़ी में भारत अपने पड़ोसी मित्र देश नेपाल की ओर पूरी मजबूती से मदद का हाथ बढ़ाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से टेलीफोन पर बात कर स्थिति का जायजा लिया और शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की।

नेपाल में भीषण बारिश और बाढ़ के कारण मची तबाही के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बात कर एकजुटता व्यक्त की है। पीएम मोदी ने इस प्राकृतिक आपदा में लोगों की मौत पर गहरा शोक व्यक्त किया और नेपाल को संकट की इस घड़ी में हरसंभव सहायता प्रदान करने का भरोसा दिया। उल्लेखनीय है कि नेपाल में भीषण बाढ़ के चलते 20 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है, जबकि 400 पर्यटक लापता हैं। इनमें 133 भारतीय भी शामिल हैं।


 ALSO READ: नेपाल में बाढ़ का सैलाब, 5 जिलों में हाई अलर्ट, 105 भारतीय पर्यटक लापता, हाई-रिस्क एडवाइजरी जारी

नेपाल के साथ खड़ा है भारत : पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया और आधिकारिक बातचीत में इस बात को रेखांकित किया कि भारत और नेपाल के बीच सिर्फ सीमाएं नहीं, बल्कि गहरी सांस्कृतिक और भाईचारे की भावना जुड़ी हुई है। पीएम मोदी ने कहा कि इस कठिन समय में भारत के लोग नेपाल के अपने भाइयों और बहनों के साथ एकजुटता से खड़े हैं। उन्होंने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह को आश्वस्त किया कि भारत सरकार संकट के इस समय में नेपाल को राहत सामग्री, बचाव कार्य और किसी भी प्रकार की आपातकालीन सहायता के लिए पूरी तरह तैयार है।


 ALSO READ: क्या होती है फ्लैश फ्लड? क्यों पहाड़ों से अचानक आता है बर्बादी का सैलाब और नेपाल प्रलय से भारत क्यों है अलर्ट पर

राहत और बचाव में मदद का आश्वासन

नेपाल के कई हिस्से भारी बारिश और उफनती नदियों के कारण पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं, जिससे बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत नेपाल की जरूरतों के आधार पर तुरंत मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री भेजने के लिए तत्पर है। गौरतलब है कि जब भी पड़ोसी देशों पर ऐसी प्राकृतिक आपदा आती है, तो भारत 'नेबरहुड फर्स्ट' (पड़ोसी प्रथम) की नीति के तहत सबसे पहले मदद का हाथ बढ़ाता है।

कल का मौसम: नेपाल में विनाशकारी सैलाब के बीच 27 अगस्त को UP, बिहार संग कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, IMD ने दी ये चेतावनी

India Weather Update: पड़ोसी देश नेपाल में भारी बारिश के कारण मची तबाही और विनाशकारी सैलाब के बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 27 अगस्त के लिए मौसम का ताजा बुलेटिन जारी कर दिया है। मौसम विभाग के मुताबिक 27 अगस्त को उत्तर प्रदेश और बिहार समेत देश के 13 राज्यों में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है।

इसके साथ ही पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत के कई हिस्सों में तेज आंधी, वज्रपात और गर्जना को लेकर चेतावनी जारी की गई है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में तूफानी हवाएं चलने की आशंका है जबकि तटीय क्षेत्रों में समुद्र में उथल-पुथल को देखते हुए विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।

उत्तर भारत का मौसम: यूपी और उत्तराखंड में मूसलाधार बारिश का अनुमान, पूर्वी राजस्थान में भी चेतावनी

उत्तर भारत के मैदानी व पहाड़ी इलाकों में मानसून की सक्रियता बनी हुई है। मौसम विभाग के मुताबिक 27 अगस्त को उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश होने की पूरी संभावना है। नेपाल से सटे इलाकों और यूपी के मैदानी भागों में बारिश की वजह से नदियों के जलस्तर पर असर पड़ सकता है।

पर्वतीय राज्य उत्तराखंड और पूर्वी राजस्थान में अलग-अलग जगहों पर गरज के साथ आकाशीय बिजली चमकने और गिरने की आशंका जताई गई है। मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों में लोगों को खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।

पूर्वी भारत: बिहार, झारखंड, बंगाल और ओडिशा में भारी बारिश और आंधी का संकट

आईएमडी के मुताबिक 27 अगस्त को बिहार, झारखंड, ओडिशा और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भारी बारिश होने का पूर्वानुमान दिया गया है। बारिश के साथ-साथ इन पूर्वी राज्यों में मौसम काफी खराब रह सकता है। बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल व सिक्किम में अलग-अलग जगहों पर 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलने, बिजली कड़कने और आंधी-तूफान आने की संभावना है।

पूर्वोत्तर भारत: असम, मेघालय और अरुणाचल समेत सभी 7 राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट

पूर्वोत्तर भारत में मानसून का प्रकोप लगातार जारी है। मौसम विभाग के अलर्ट के मुताबिक 27 अगस्त को अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है। इसके साथ ही नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी अलग-अलग स्थानों पर मूसलाधार बारिश दर्ज की जा सकती है।

इन सभी पूर्वोत्तर राज्यों में बारिश के साथ-साथ तेज गर्जना होने और आकाशीय बिजली चमकने को लेकर भी चेतावनी जारी की गई है। पूर्वोत्तर के राज्यों में लगातार हो रही बारिश से जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है।

मध्य और दक्षिण भारत: मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और केरल में होगी भारी बारिश

मध्य भारत के इलाकों में भी मानसून अपनी पूरी ताकत दिखा रहा है। 27 अगस्त को मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश होने का अनुमान जताया गया है। इसके साथ ही दोनों राज्यों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की गतिविधि भी देखने को मिल सकती है।

दक्षिण भारत की बात करें तो केरल और माहे में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में अलग-अलग जगहों पर 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली चमकने का अलर्ट है। इसके अलावा, आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में तेज सतह हवाएं चलने का भी अनुमान है।

अंडमान में तूफानी हवाओं का अलर्ट, समंदर में मछुआरों के लिए चेतावनी

मौसम विभाग ने द्वीपीय क्षेत्रों और समुद्री सीमाओं पर खराब मौसम को लेकर विशेष अलर्ट जारी किया है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 27 अगस्त को 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज तूफानी हवाएं चलने की आशंका है।

समुद्री स्थिति पर नजर डालें तो अरब सागर में सोमालिया और ओमान तटों के साथ-साथ उत्तर, पूर्व-मध्य और पश्चिम-मध्य अरब सागर के कई हिस्सों में 45 से 55 किमी प्रति घंटे की गति से हवाएं चल सकती हैं, जो बढ़कर 65 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं।

ये भी पढ़ें- Nepal Flood Video: नेपाल में अचानक आई बाढ़ में 291 विदेशी लापता, 105 भारतीय पर्यटक भी सैलाब में गायब

वहीं, बंगाल की खाड़ी में दक्षिण तमिलनाडु तट, मन्नार की खाड़ी, कोमोरिन क्षेत्र और श्रीलंका तट से सटे दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में भी 45 से 55 किमी प्रति घंटे से लेकर 65 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलने का अनुमान है। मौसम विभाग ने मछुआरों को इन खतरनाक समुद्री क्षेत्रों में न जाने की सख्त हिदायत दी है।

Bihar Flood Risk: नेपाल में आई बाढ़ से बिहार में हाई अलर्ट, जानें- क्यों रखी जा रही है बारीकी से नजर

Bihar Flood Risk: उत्तरी नेपाल के रसुवा जिले में अचानक आई जबरदस्त बाढ़ के कारण बिहार में खास सतर्कता बरती जा रही है, क्योंकि नेपाल में गंडक नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में अचानक बाढ़ की स्थिति बन गई है और पानी के बहाव में अचानक तेजी आने की आशंका है। हालांकि, अभी तक बाढ़ के सटीक कारण का पता नहीं चल पाया है, लेकिन पिछले साल इसी नदी में आई ऐसी ही अचानक बाढ़ का कारण बाद में एक ग्लेशियर झील का पानी निकलना बताया गया था।

नेपाल पर्यटन बोर्ड को ताजा जानकारी के अनुसार, नेपाल के नुवाकोट और धाडिंग जिलों में भोटे कोशी नदी में अचानक आई बाढ़ के बाद कम से कम 105 भारतीय लापता हैं।

बता दें कि बुधवार को नेपाल में आई जबरदस्त बाढ़ में कम से कम 8 लोगों की मौत हो गई। वहीं, चीन के सरकारी मीडिया ने बताया कि दोनों देशों की सीमा पर चीन की तरफ तिब्बत के एक व्यापारिक केंद्र पर मडस्लाइड (कीचड़ और मलबे का बहाव) हुआ, जिसकी चपेट में आने से “काफ़ी लोग हताहत” हुए हैं।

बिहार में क्यों बढ़ाई गई निगरानी?

नेपाल में बाढ़ के हालात को देखते हुए बिहार के अधिकारियों ने गंडक नदी में पानी का स्तर बढ़ने की आशंका के चलते हाई अलर्ट जारी किया है।

बिहार प्रशासन ने पश्चिमी चंपारण के बगहा इलाके, खासकर वाल्मीकिनगर बैराज के आसपास निगरानी बढ़ा दी है। उन्हें चिंता है कि नेपाल से बहकर आने वाला अतिरिक्त पानी दो से तीन घंटे में गंडक नदी तक पहुंच सकता है।

गंडक नदी के किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को भी सावधानी बरतने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।

बता दें कि भोटे कोशी नदी तिब्बत से निकलती है और नेपाल की त्रिशूली नदी में मिलती है, जो आगे चलकर भारत में गंडक नदी के रूप में प्रवेश करती है।

न्यूज एजेंसी ANI ने बिहार में आपदा प्रबंधन अधिकारियों के हवाले से बताया कि गंडक नदी के किनारे बसे जिलों में बाढ़ की संभावित स्थिति से निपटने के लिए सभी जरूरी तैयारियां की जा रही हैं।

ANI ने अधिकारियों के हवाले से बताया, “नेपाल के रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा, लमजुंग और तनहुं जिलों (गंडक कैचमेंट एरिया) और दोलखा और सिंधुपालचोक जिलों (कोसी कैचमेंट एरिया) में अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) का ज्यादा खतरा होने का अनुमान है।”

फरक्का बैराज क्यों एक नया विवाद का मुद्दा बन गया है?

जैसे-जैसे गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है और राज्य में बाढ़ का खतरा गहराता जा रहा है, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पश्चिम बंगाल के अपने समकक्ष सुवेंदु अधिकारी से फरक्का बैराज के सभी गेट खोलने का आग्रह किया है। उनका तर्क है कि बहाव बढ़ने से पूर्वी राज्य में बाढ़ का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।

यह अनुरोध ऐसे समय में आया है जब 1996 की भारत-बांग्लादेश गंगा जल बंटवारा संधि—जो फरक्का में नदी के कम बहाव वाले मौसम में पानी के बंटवारे को नियंत्रित करती है—इस साल दिसंबर में अपनी 30 साल की अवधि पूरी करने के बाद समाप्त होने वाली है। पटना लगातार इस बात पर जोर दे रहा है कि बांग्लादेश के साथ भविष्य में पानी के बंटवारे की किसी भी व्यवस्था में उसके हितों का ध्यान रखा जाए।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राज्य को आश्वासन दिया है कि नवीनीकरण प्रक्रिया के दौरान फरक्का बैराज और भारत-बांग्लादेश जल बंटवारा संधि को लेकर उसकी चिंताओं पर विचार किया जाएगा।

पटना की सबसे बड़ी चिंता क्या है?

हालांकि, अभी सबसे बड़ी चिंता गंगा नदी के जलस्तर का बढ़ना है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल राज्य में सामान्य से कम बारिश होने के बावजूद, पटना और बक्सर समेत बिहार के कुछ हिस्सों में नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चला गया है।

पटना के लिए अभी जरूरी है कि बैराज से और पानी छोड़ा जाए ताकि ऊपरी हिस्से (अपस्ट्रीम) का दबाव कम हो सके। हालांकि, बैराज से जुड़ा कोई भी फैसला पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के साथ पानी के बंटवारे को लेकर भारत की प्रतिबद्धताओं पर भी असर डाल सकता है।

यह भी पढ़ें: Nepal Flood: नेपाल में अचानक आई बाढ़ ने मचाई तबाही, 105 भारतीय पर्यटकों समेत 291 विदेशी लापता

West Bengal SIR: ‘क्या हम नए चुनाव कराने का निर्देश दे सकते हैं?’; बंगाल SIR पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल

West Bengal SIR: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) मामले की सुनवाई के दौरान एक अहम कानूनी सवाल उठाए। शीर्ष अदालत ने पूछा कि क्या न्यायपालिका नए चुनाव का आदेश दे सकती है, जब ऐसे दावे किए जा रहे हों कि कई विधानसभा क्षेत्रों में हटाए गए वोटरों की संख्या जीत के अंतर (victory margin) से ज्यादा थी। न्यूज 18 के मुताबिक, चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) सदस्य की ओर से सीनियर एडवोकेट कल्याण बंदोपाध्याय द्वारा दायर याचिका पर विचार-विमर्श किया।

TMC याचिकाकर्ता का पक्ष रखते हुए, सीनियर एडवोकेट कल्याण बंदोपाध्याय ने 31 विधानसभा क्षेत्रों का ब्योरा पेश किया। इन क्षेत्रों में जीतने वाले BJP उम्मीदवारों की जीत का अंतर, SIR प्रक्रिया के दौरान हटाए गए कुल वोटरों की संख्या से कम था। एक विधानसभा क्षेत्र (AC-145) में हार का अंतर सिर्फ 401 वोट था। जबकि 8,785 वोटर हटाए गए थे। एक और सीट पर SIR के तहत बहुत ज्यादा वोटर हटाए जाने के बावजूद उम्मीदवार 316 वोटों से हार गया।

नतीजों पर असर

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि इतने बड़े पैमाने पर वोटर हटाने से चुनाव के नतीजों पर असर पड़ा। हजारों वैध नागरिकों को वोट देने के अधिकार से वंचित कर दिया गया। सार्वजनिक डेटा की कमी: TMC के वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि विधानसभा-वार अपील डेटा का हिसाब लगाना मुश्किल है क्योंकि भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने ये आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं।

सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

इन दलीलों के जवाब में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत ने मौखिक रूप से टिप्पणी की, “आप इस पर याचिका दायर कर सकते हैं, लेकिन क्या कोर्ट इस तरह नए चुनाव का आदेश दे सकता है?” चीफ जस्टिस ने पूछा कि क्या प्रभावित उम्मीदवारों ने उन 31 विधानसभा क्षेत्रों में जीते हुए उम्मीदवारों को चुनौती देने के लिए औपचारिक चुनाव याचिकाएं दायर की थीं। इस पर वकील ने जवाब दिया कि कुछ सीटों पर चुनाव याचिकाएं दायर की गई थीं, लेकिन सभी पर नहीं। इस पर जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने इस बात पर जोर दिया कि यह पता लगाना जरूरी है कि वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के बाद कितने लोगों ने असल में अपील दायर की थी।

देश की सबसे बड़ी अदालत ने कहा कि अगर नाम हटाए जाने वाले किसी वोटर ने अपील दायर किए बिना इसे स्वीकार कर लिया, तो उनकी ओर से नतीजों को चुनौती देना केवल सैद्धांतिक बात रह जाती है। हालांकि, अगर 100 लोगों के नाम हटाए गए, जीत का अंतर 50 था। हटाए गए वोटरों में से 60 या 70 ने अपील दायर की जो अभी भी लंबित है, तो नाम हटाने की इस प्रक्रिया को चुनौती देना एक अहम और बहुत जरूरी मामला बन जाता है।

लंबित अपील का आंकड़ा मांगा

इससे एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को चुनाव आयोग (ECI) को पश्चिम बंगाल में SIR के बाद मतदाता सूची से नाम हटाए जाने या नाम शामिल किए जाने को चुनौती देने वाली विभिन्न अपील पर अधिकारियों द्वारा निपटाए गए मामलों और लंबित मामलों का आंकड़ा पेश करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि इन मामलों का समयबद्ध तरीके से निपटारा किया जाना जरूरी है। पीठ ने निर्वाचन आयोग से यह बताने को कहा कि लंबित अपील के निपटारे की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने कहा कि लोगों को यह जानकारी नहीं मिल रही है कि न्यायाधिकरणों के समक्ष कितनी अपील लंबित हैं या कितनी अपील का निपटारा हो चुका है, क्योंकि यह जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। बनर्जी ने कहा कि नगर निकाय और पंचायत चुनाव होने वाले हैं। इस सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह मामले को केवल 31 विधानसभा क्षेत्रों तक सीमित नहीं रखेगा।

ये भी पढ़ें- Nepal Flood Video: नेपाल में अचानक आई बाढ़ में 291 विदेशी लापता, 105 भारतीय पर्यटक भी सैलाब में गायब

24 अप्रैल को शीर्ष अदालत ने अपीलीय न्यायाधिकरणों को निर्देश दिया था कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर के बाद मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ तत्काल सुनवाई की जरूरत साबित करने वाले मामलों की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई की जाए। करीब 60 लाख दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए पश्चिम बंगाल एवं पड़ोसी राज्यों ओडिशा और झारखंड के करीब 700 न्यायिक अधिकारियों को तैनात किया गया था।

क्या होती है फ्लैश फ्लड? क्यों पहाड़ों से अचानक आता है बर्बादी का सैलाब और नेपाल प्रलय से भारत क्यों है अलर्ट पर

क्या होती है फ्लैश फ्लड? क्यों पहाड़ों से अचानक आता है बर्बादी का सैलाब और नेपाल प्रलय से भारत क्यों है अलर्ट पर

What is Flash Flood: पहाड़ों पर जब मौसम बदलता है, तो तबाही का मंज़र आने में कुछ मिनट भी नहीं लगते। हाल ही में नेपाल में भूस्खलन और उफनती नदियों ने जिस तरह से तबाही मचाई है, उसने एक बार फिर पूरे भारतीय उपमहाद्वीप को दहला दिया है। नेपाल में आई इस प्रलय के बाद भारत के सीमावर्ती राज्यों— विशेषकर बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल—में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।

 

इस पूरी तबाही के पीछे सबसे बड़ा कारण 'फ्लैश फ्लड' (Flash Flood) यानी अचानक आने वाली बाढ़ है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि यह फ्लैश फ्लड क्या होती है, पहाड़ों पर यह इतनी खौफनाक क्यों हो जाती है और नेपाल के संकट से भारत पर क्या खतरा मंडरा रहा है। ALSO READ: नेपाल में बाढ़ का सैलाब, 5 जिलों में हाई अलर्ट, 105 भारतीय पर्यटक लापता, हाई-रिस्क एडवाइजरी जारी

क्या होती है फ्लैश फ्लड (Flash Flood)?

फ्लैश फ्लड का सीधा अर्थ है—अत्यंत कम समय में आने वाली भीषण बाढ़। सामान्य बाढ़ में नदियों का जलस्तर धीरे-धीरे घंटों या दिनों में बढ़ता है, जिससे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का समय मिल जाता है। लेकिन फ्लैश फ्लड में:

पहाड़ों से अचानक क्यों आता है बर्बादी का सैलाब?

मैदानी इलाकों की तुलना में पहाड़ों पर फ्लैश फ्लड कहीं अधिक विनाशकारी होती है। इसके पीछे मुख्य भौगोलिक और प्राकृतिक कारण निम्नलिखित हैं:

  • तीव्र ढलान (Steep Slopes): पहाड़ों की ढलान बहुत तेज होती है। जब बारिश का पानी नीचे गिरता है, तो गुरुत्वाकर्षण के कारण उसकी गति और शक्ति कई गुना बढ़ जाती है।
  • भूस्खलन और प्राकृतिक बांध (Landslides & Debris Damming): मूसलाधार बारिश के कारण पहाड़ों पर बड़े-बड़े चट्टान और मिट्टी खिसककर नदियों या संकरे नालों का रास्ता रोक लेते हैं। इससे एक अस्थायी 'प्राकृतिक बांध' बन जाता है। जब पानी का दबाव बढ़ता है, तो यह बांध अचानक टूट जाता है और करोड़ों लीटर पानी, मलबा व पत्थरों के साथ नीचे की ओर तबाही बनकर दौड़ पड़ता है।
  • संकरे नदी-घाटी रास्ते : पहाड़ों में नदियों के बहने के रास्ते संकरे होते हैं। जब अत्यधिक पानी आता है, तो नदियां अपनी सीमाओं को तोड़कर विकराल रूप ले लेती हैं।
  • अनियंत्रित निर्माण व जलवायु परिवर्तन : पहाड़ों पर निर्माण कार्य, जंगलों की कटाई और ग्लोबल वार्मिंग के कारण मौसम का मिजाज अप्रत्याशित हो गया है, जिससे ऐसी घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं।

नेपाल प्रलय से भारत में क्यों बजा खतरे का सायरन?

नेपाल में हुई भीषण बारिश और फ्लैश फ्लड का सीधा असर भारत पर पड़ता है, क्योंकि भौगोलिक रूप से दोनों देश एक-दूसरे से गहरे जुड़े हुए हैं:

  • साझा नदियां (Cross-Border Rivers) : नेपाल से बहने वाली प्रमुख नदियां—कोसी (Kosi), गंडक (Gandak), बागमती (Bagmati) और कर्णाली (घाघरा)—सीधे भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश में प्रवेश करती हैं।
  • पानी छोड़ने का दबाव : जब नेपाल के बैराजों और बांधों में पानी क्षमता से ऊपर चला जाता है, तो वहां से लाखों क्यूसेक पानी भारत की ओर छोड़ना पड़ता है।
  • 'बिहार का शोक' कोसी नदी : कोसी नदी को बिहार का शोक कहा जाता है। नेपाल में जब भी फ्लैश फ्लड आती है, तो उत्तर बिहार के दर्जनों जिलों (जैसे सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, मधुबनी) में रातों-रात बाढ़ का पानी घुस जाता है।

 

इसी वजह से नेपाल में आए संकट के बाद भारतीय गृह मंत्रालय, एनडीआरएफ (NDRF) और राज्य आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट मोड पर रखा गया है, ताकि निचले इलाकों को समय रहते खाली कराया जा सके।

फ्लैश फ्लड से बचाव के लिए क्या जरूरी है?

  • आधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम : पहाड़ी क्षेत्रों और सीमावर्ती नदियों पर रीयल-टाइम वेदर और वाटर-लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम लगाना।
  • पहाड़ों पर अनियंत्रित निर्माण पर रोक : संवेदनशील इको-जोन में बड़े पैमाने पर खोदाई और वनों की कटाई को नियंत्रित करना।
  • नदी तटबंधों की मजबूती : मानसून से पहले भारत-नेपाल सीमा पर स्थित बैराजों और तटबंधों (Embankments) की मरम्मत और निगरानी सुनिश्चित करना।

 

फ्लैश फ्लड प्रकृति की वह चेतावनी है जिसे नजरअंदाज करना जानलेवा साबित होता है। नेपाल में आई तबाही यह सबक देती है कि पहाड़ों पर बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन और सटीक आपदा प्रबंधन व्यवस्था का होना कितना अनिवार्य है।

 

UP Expressway Projects: यूपी में ₹24,000 करोड़ का मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर बूस्ट! दो नए एक्सप्रेसवे को मिली मंजूरी, इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स पर भी बड़ा दांव

UP Expressway Projects: उत्तर प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी और औद्योगिक विकास को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 24,000 करोड़ रुपये से अधिक के इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक निवेश से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इसमें दो बड़े एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट सुल्तानपुर में मैन्युफैक्चरिंग-लॉजिस्टिक्स क्लस्टर और राज्य के अलग-अलग जिलों में 11 बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स के लिए प्रोत्साहन शामिल हैं। योगी सरकार का फोकस अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। नए फैसलों के जरिए उभरते औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ने और प्रदेश के अलग-अलग जिलों में बड़े निवेश को आकर्षित करने की तैयारी है।

‘गंगा एक्सप्रेसवे’ पहुंचेगा हरिद्वार, 10,761 करोड़ होंगे खर्च

कैबिनेट ने 10,761 करोड़ रुपये की लागत से गंगा एक्सप्रेसवे को हरिद्वार तक बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके तहत छह लेन का ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बनाया जाएगा, जिसे भविष्य में आठ लेन तक विस्तारित करने का प्रावधान होगा। इस परियोजना का पूरा खर्च उत्तर प्रदेश सरकार उठाएगी। इसमें केंद्र की वित्तीय भागीदारी प्रस्तावित नहीं है।

इस एक्सप्रेसवे से बिजनौर और हरिद्वार के बीच कनेक्टिविटी काफी बेहतर होने की उम्मीद है। फिलहाल बिजनौर से हरिद्वार जाने के लिए मुख्य रूप से NH-34 यानी मेरठ-बिजनौर-हरिद्वार हाईवे पर निर्भरता है। नया एक्सप्रेसवे बनने के बाद बिजनौर की लखनऊ से कनेक्टिविटी भी गंगा एक्सप्रेसवे नेटवर्क के जरिए और मजबूत होगी।

प्रयागराज से हरिद्वार तक बनेगा तेज कॉरिडोर

गंगा एक्सप्रेसवे का हरिद्वार तक विस्तार केवल सड़क परियोजना नहीं। बल्कि पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हरिद्वार जुड़ने के बाद एक्सप्रेसवे नेटवर्क प्रयागराज और हरिद्वार जैसे गंगा तट पर बसे दो प्रमुख कुंभ शहरों को एक्सेस-कंट्रोल्ड सड़क कनेक्टिविटी से जोड़ देगा।

यूपी सरकार को उम्मीद है कि इससे धार्मिक पर्यटन, व्यापार, निवेश और अन्य आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इसका फायदा बिजनौर, हरिद्वार और आसपास के इलाकों को मिलने की उम्मीद है। अब इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR तैयार की जाएगी।

झांसी लिंक एक्सप्रेसवे पर 7,968 करोड़

योगी कैबिनेट ने 7,968.30 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले झांसी लिंक एक्सप्रेसवे को भी मंजूरी दी है। इसका मुख्य उद्देश्य बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी BIDA क्षेत्र और झांसी के आसपास के डिफेंस कॉरिडोर को बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है। इस परियोजना का पूरा खर्च भी उत्तर प्रदेश सरकार उठाएगी। केंद्र से किसी वित्तीय भागीदारी का प्रस्ताव नहीं है। ॉ

सरकार का मानना है कि एक्सप्रेसवे बनने के बाद बुंदेलखंड के उभरते औद्योगिक क्षेत्रों से उत्तर प्रदेश के दूसरे हिस्सों और देश के अन्य क्षेत्रों तक सड़क संपर्क तेज होगा। निर्माण के दौरान प्रत्यक्ष रोजगार के साथ-साथ औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने पर अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है।

सुल्तानपुर में 272 करोड़ का इंडस्ट्रियल-लॉजिस्टिक्स क्लस्टर

कैबिनेट ने सुल्तानपुर में 272.25 करोड़ रुपये के निवेश से इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर यानी IMLC के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को भी मंजूरी दी है। यह क्लस्टर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के नजदीक विकसित किया जाएगा। इससे यहां आने वाली औद्योगिक इकाइयों को पहले से मौजूद तेज सड़क नेटवर्क का सीधा फायदा मिलेगा।

इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े काम का खर्च राज्य सरकार उठाएगी और निर्माण एजेंसी के चयन के लिए ग्लोबल बिड आमंत्रित की जाएगी। सरकार को उम्मीद है कि यह क्लस्टर मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स से जुड़े निवेश को आकर्षित करेगा तथा सुल्तानपुर और आसपास के क्षेत्रों में रोजगार पैदा करेगा।

11 बड़े प्रोजेक्ट्स को भी मंजूरी

इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ कैबिनेट ने 11 बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स के लिए भी प्रोत्साहन को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं में कुल प्रस्तावित निवेश 5,500 करोड़ रुपये से अधिक है। इनमें से आठ परियोजनाओं के लिए करीब 2,901.97 करोड़ रुपये के निवेश पर उत्तर प्रदेश इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट एंड एम्प्लॉयमेंट प्रमोशन पॉलिसी-2022 के तहत लेटर ऑफ कंफर्ट जारी करने को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं का विस्तार गौतम बुद्ध नगर (नोएडा), हमीरपुर, हाथरस, बाराबंकी, लखीमपुर खीरी, मथुरा और उन्नाव जैसे जिलों तक है।

इनमें प्रमुख निवेश इस प्रकार हैं:-

  • सूर्या ग्लोबल सुपर फ्लेक्सिफिल्म्स, गौतम बुद्ध नगर- 605.37 करोड़ रुपये
  • शाल्विस स्पेशियलिटीज, हमीरपुर- 297.30 करोड़ रुपये
  • साउंड कास्टिंग्स, हाथरस – 225 करोड़ रुपये
  • वृंदावन बॉटलर्स, बाराबंकी – 436.12 करोड़ रुपये
  • जुआरी एनविएन बायोएनर्जी, लखीमपुर खीरी- 294.72 करोड़ रुपये
  • पसवारा पेपर्स, हाथरस- 315 करोड़ रुपये
  • CRD फूड्स एंड बेवरेजेज, मथुरा- 363.94 करोड़ रुपये
  • माउंट एवरेस्ट ब्रेवरीज, उन्नाव- 363.52 करोड़ रुपये

(नोट- इन परियोजनाओं को पात्रता के आधार पर नीति के तहत नेट SGST और कैपिटल सब्सिडी समेत विभिन्न प्रोत्साहन मिल सकेंगे।)

तीन और प्रोजेक्ट्स में 2,606 करोड़ का निवेश

कैबिनेट ने तीन और परियोजनाओं के लिए लेटर ऑफ कम्फर्ट को मंजूरी दी है। इनका कुल प्रस्तावित निवेश 2,606.04 करोड़ रुपये है। ये परियोजनाएं बिजनौर, उन्नाव और कानपुर देहात में लगाई जाएंगी।

उन्नाव में एल्युमिनियम कैन फैक्ट्री

Canpack India उन्नाव में करीब 1,573.62 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। कंपनी एल्युमिनियम बेवरेज कैन बनाने की इकाई स्थापित करेगी। यह प्लांट करीब 26 हेक्टेयर क्षेत्र में UPEIDA द्वारा विकसित IMLC इंडस्ट्रियल कॉरिडोर क्षेत्र में लगाया जाएगा। इसकी अनुमानित वार्षिक उत्पादन क्षमता 130 करोड़ यूनिट होगी।

बिजनौर में फ्रेंच फ्राइज प्लांट

इसके अलावा Agristo Masa बिजनौर में 794.27 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। यह कंपनी मौजूदा पोटैटो फ्लेक्स कारोबार का विस्तार करने के साथ फ्रेंच फ्राइज बनाने की यूनिट स्थापित करेगी। प्रस्तावित प्लांट की अधिकतम स्थापित क्षमता हर साल 75,000 टन होगी। इसके मुकाबले कंपनी की मौजूदा पोटैटो फ्लेक्स उत्पादन क्षमता करीब 7,332 टन सालाना बताई गई है।

कानपुर देहात में प्लास्टिक प्रोडक्ट्स का होगा उत्पादन

एक बयान के मुताबिक, Supreme Industries कानपुर देहात में 238.15 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। यहां वैल्यू-एडेड प्लास्टिक बिल्डिंग सॉल्यूशन उत्पाद बनाए जाएंगे। कंपनी की स्थापना 1942 में हुई थी। यह भारत की प्रमुख प्लास्टिक प्रोसेसिंग कंपनियों में शामिल है।

एक्सप्रेसवे और उद्योग को एक साथ जोड़ने की रणनीति

यूपी सरकार के इन फैसलों से साफ संकेत मिलता है कि उत्तर प्रदेश अब एक्सप्रेसवे नेटवर्क को सीधे औद्योगिक विकास से जोड़ने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है। झांसी लिंक एक्सप्रेसवे को बुंदेलखंड के औद्योगिक और डिफेंस कॉरिडोर से जोड़ा जा रहा है। जबकि सुल्तानपुर का IMLC पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का फायदा उठाएगा। वहीं, गंगा एक्सप्रेसवे के हरिद्वार तक विस्तार से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरिद्वार के बीच आर्थिक संपर्क मजबूत होने की उम्मीद है।

उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि कैबिनेट के फैसले एक्सप्रेसवे विस्तार और औद्योगिक विकास को एक साथ आगे बढ़ाने की कोशिश को दिखाते हैं। सरकार का लक्ष्य बेहतर कनेक्टिविटी के जरिए निवेश, व्यापार, रोजगार और पर्यटन को बढ़ावा देना है।

ये भी पढे़ं- Nepal Flood Video: नेपाल में अचानक आई बाढ़ में 291 विदेशी लापता, 105 भारतीय पर्यटक भी सैलाब में गायब

उन्होंने कहा कि 24 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के इन प्रस्तावों को उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक नक्शे में बड़ा बदलाव लाने वाली पहल के तौर पर देखा जा रहा है। खास बात यह है कि इसका असर सिर्फ लखनऊ, नोएडा या दूसरे बड़े औद्योगिक केंद्रों तक सीमित न रहकर बुंदेलखंड, पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी के कई जिलों तक पहुंचने की उम्मीद है।

भारत की डिजिटल ताकत का नया मुकाम! इन 11 देशों में पहुंचा भारत का डिजिटल पेमेंट

भारत का UPI पिछले कुछ सालों में लोगों की रोज की जिंदगी का हिस्सा बन गया है। चाय की दुकान से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग तक, कुछ सेकंड में पेमेंट करने की सुविधा ने डिजिटल पेमेंट को काफी आसान बना दिया है। अब इसकी पहुंच सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि धीरे-धीरे दूसरे देशों में भी बढ़ रही है। ऐसे में विदेश जाने वाले भारतीयों के लिए भी UPI एक सुविधाजनक पेमेंट ऑप्शन बनता जा रहा है।

UPI की बढ़ती पॉपुलैरिटी का अंदाजा इसके बढ़ते इस्तेमाल से लगाया जा सकता है। जुलाई 2026 में इसके जरिए बड़े लेवल पर ट्रांजैक्शन हुए और अब इसकी इंटरनेशनल पहुंच 11 देशों तक हो गई है। ग्रीस और मालदीव के जुड़ने के बाद यह विस्तार और खास हो गया है।

 upi1

1. दुनियाभर में बढ़ी UPI की पहचान

पिछले करीब एक दशक में UPI का इस्तेमाल लगभग 12,000 गुना बढ़ा है। अब यह भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम का एक जरुरी भाग बन चुका है। इसकी पॉपुलैरिटी सिर्फ भारत तक नहीं है, बल्कि दूसरे देशों में भी लोग इसे पेमेंट के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में दुनियाभर में हुए रियल-टाइम पेमेंट ट्रांजैक्शन में UPI की हिस्सेदारी करीब 49% थी।

2. 11 देशों तक पहुंचा UPI

UPI अब भारत के अलावा 11 देशों में क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट की फैसिलिटी दे रहा है। भूटान, नेपाल, सिंगापुर, UAE और फ्रांस के साथ श्रीलंका, मॉरीशस, कतर, कंबोडिया, ग्रीस और मालदीव भी इस लिस्ट में शामिल हैं। ग्रीस और मालदीव UPI से जुड़ने वाले सबसे नए देश हैं। इससे विदेश जाने वाले भारतीयों के लिए डिजिटल पेमेंट का एक आसान ऑप्शन बढ़ा है।

3. UPI में जुड़े नए फीचर्स

2020 से 2022 के बीच UPI में कई नए बदलाव किए गए। UPI AutoPay की मदद से EMI और दूसरे नियमित पेमेंट आसान हुए, जबकि UPI 123PAY से फीचर फोन इस्तेमाल करने वालों को भी डिजिटल पेमेंट की सुविधा मिली। इसी दौरान UPI Lite आया और बाद में क्रेडिट कार्ड को UPI से जोड़ने का ऑप्शन भी दिया गया। इस दौरान भूटान में UPI की इंटरनेशनल शुरुआत भी हुई।

4. इजी और सिक्योर पेमेंट

2024 में UPI Circle जैसे फीचर की शुरुआत हुई, जिससे कोई भी लिमिट के अंदर दूसरे व्यक्ति को अपने UPI अकाउंट से पेमेंट करने की परमिशन दे सकता है। टैक्स पेमेंट और UPI से जुड़े दूसरे ट्रांजैक्शन की लिमिट में भी बदलाव किए गए। इसके बाद 2025 में ऑन-डिवाइस बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन और फेस बेस्ड फेस ऑथेंटिकेशन जैसे ऑप्शन जोड़े गए। इन चेंज का मकसद UPI को लोगों के लिए ज्यादा आसान, सुविधाजनक और सिक्योर बनाना है।

UPI की बढ़ती पहुंच से साफ है कि भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम अब देश की बॉर्डर से आगे भी पहचान बना रहा है। नए देशों और नए फीचर्स के जुड़ने से लोगों के लिए पेमेंट करना आसान और कनविनिएंट हो रहा है। आने वाले समय में UPI की पहुंच और बढ़ने की उम्मीद है।

जेब में ₹0 कैश, फिर भी घूमेंगे विदेश! देखें कहां काम करेगा भारतीय UPI

कभी भी अब्रॉड ट्रैवल में सबसे बड़ी परेशानी होती है पेमेंट करना। पहले लोगों को कैश बदलवाना पड़ता था या इंटरनेशनल कार्ड साथ रखना पड़ता था। लेकिन अब भारत के लोगों के लिए यह काम काफी आसान हो गया है। कई देशों में UPI से सीधे मोबाइल के जरिए पेमेंट की सुविधा मिलने लगी है, जिससे शॉपिंग करना, होटल का बिल पेमेंट या रेस्टोरेंट में पेमेंट करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है।

स्पेन की तैयारी 

जल्दी ही स्पेन भी अब वह देश होगा, जहां जाकर भारत के लोग UPI से आसानी से पेमेंट कर सकेंगे। होटल, रेस्टोरेंट, कैफे और दुकानों पर सिर्फ QR कोड स्कैन करके पेमेंट करना आसान हो जाएगा। इससे कैश रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी और ट्रैवल पहले से ज्यादा आसान होगा।

नेपाल और भूटान 

नेपाल और भूटान घूमने जाने वाले भारतीयों के लिए UPI काफी काम की फैसिलिटी है। यहां कई दुकानों, होटलों और आउटलेट पर UPI से पेमेंट किया जा सकता है। इससे करेंसी चेंज करने की परेशानी कम हो जाती है और मोबाइल से कुछ ही सेकंड में पेमेंट हो जाता है।

ग्रीस 

ग्रीस भी कुछ समय पहले UPI फैसिलिटी अपनाने वाले देशों में जुड़ चूका है। अगर आप एथेंस की हिस्टोरिक साइट देखने जाएं या सेंटोरिनी और माइकोनोस आइलैंड की सैर करें, तो कई जगहों पर डिजिटल पेमेंट करने की फैसिलिटी मिल सकती है। इससे शॉपिंग करना और घूमना दोनों आसान हो जाते हैं।

सिंगापुर

सिंगापुर उन देशों में है, जहां भारतीय UPI को अपनाया गया। यहां टूरिस्ट शॉपिंग मॉल, कैफे, रेस्टोरेंट और कई जगहों पर आसानी से मोबाइल से पेमेंट कर सकते हैं। इससे बार-बार कैश निकालने या पैसे बदलवाने की जरूरत नहीं पड़ती।

कतर और यूएई

कतर, दुबई और अबू धाबी वाले पॉपुलर टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर भी UPI का इस्तेमाल धीरे-धीरे बढ़ रहा है। कई रिटेल स्टोर, एयरपोर्ट, रेस्टोरेंट और कुछ टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर QR कोड स्कैन करके आसानी से पेमेंट किया जा सकता है। इससे ट्रैवल में पेमेंट करना पहले से ज्यादा आसान हो गया है।

फ्रांस, मॉरिशस और श्रीलंका

फ्रांस यूरोप का पहला देश था, जिसने UPI पेमेंट की शुरुआत की। इसके बाद मॉरिशस और श्रीलंका ने भी यह फैसिलिटी शुरू कर दी थी। अब इन देशों में कई होटल, लोकल मार्केट, बीच, रेस्टोरेंट पर टूरिस्ट आसानी से डिजिटल पेमेंट कर सकते हैं। इससे घूमने-फिरने का एक्सपीरियंस आसान बन जाता है।

टूरिस्ट बेनिफिट 

दुनिया के कई देशों में UPI की सुविधा मिलने से भारत के लोग का काम पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। अब हर बार फॉरेन करेंसी साथ रखने या इंटरनेशनल कार्ड रखने की जरूरत नहीं पड़ती। जहां UPI अवेलेबल है, वहां मोबाइल से QR कोड स्कैन करके कुछ ही सेकंड में पेमेंट किया जा सकता है। जो भी देश इस फैसिलिटी को अपना रहे हैं, वहां ट्रैवल करना अब आसान और सेफ होता जा रहा है।

भारतीयों के लिए खुशखबरी! विदेश घूमने का मौका न चुके, अबू धाबी का 30 दिन का वीजा बिलकुल फ्री

अबू धाबी घूमने का सपना देख रहे भारतीय ट्रैवलर के लिए अब यह ट्रिप आसान हो गयी हैं अबू धाबी की यात्रा का खर्च और झंझट दोनों कम हो सकते हैं। क्योंकि एलिजिबल भारतीय ट्रैवलर को 30 दिन का फ्री यूएई टूरिस्ट वीजा फैसिलिटी लॉन्च की है। इससे अबू धाबी घूमने की प्लानिंग बना रहे लोगों के लिए वहां जाना पहले के मुकाबले आसान हो गया है।

फ्री वीजा स्कीम

Abu Dhabi Airports Reports Record Growth in First Half of 2025

एलिजिबल इंडियन पासपोर्ट होल्डर को इस स्कीम में 30 दिन का यूएई टूरिस्ट वीजा बिना किसी शुल्क के मिल सकता है। इस वीजा के लिए करीब Dh285 यानी लगभग 7,500 रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं। इस स्कीम का फायदा लेने के लिए ट्रिप की बुकिंग इसमें शामिल ट्रैवल पार्टनर या ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसी के जरिए करनी होगी।

 

बुकिंग का तरीका

Abu Dhabi Wallpapers (51 images) - WallpaperCat

इस फैसिलिटी का लाभ सीधे किसी भी बुकिंग से नहीं मिलेगा। ट्रैवलर को इस स्कीम में शामिल ट्रैवल पार्टनर या ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसी के जरिए अबू धाबी का हॉलिडे पैकेज बुक करना होगा। अगर कोई ट्रैवलर 31 अक्टूबर से पहले पैकेज बुक कर लेता है, लेकिन उसकी ट्रिप इस टाइम ड्यूरेशन के बाद है, तो उसे फ्री वीजा का फायदा नहीं मिलेगा।

वीजा प्रोसेस

फ्री वीजा की प्रोसेस ट्रैवल एजेंसियों के जरिए पूरी की जाएगी। एजेंसी अबू धाबी के तय डेस्टिनेशन मैनेजमेंट पार्टनर के साथ मिलकर वीजा प्रोसेस कर सकती है। कुछ एजेंसियां अपने मौजूदा पार्टनर के जरिए भी काम कर सकती हैं।

फैमिली ट्रिप

इस स्कीम में फैमिली मेंबर सभी जरूरी शर्तें पूरी करते हैं, तो वे भी इस सुविधा का फायदा उठा सकते हैं। लेकिन पूरी स्कीम फिलहाल 20,000 वीजा तक लिमिटेड है। वीजा के लिए कोई अलग से फास्ट ट्रैक सुविधा नहीं होगी।

ट्रैवल कंडीशन

फ्री वीजा पाने के लिए कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होंगी। ट्रैवलर के पास भारतीय पासपोर्ट होना चाहिए और उसे भारत से अबू धाबी की ट्रिप करनी होगी। बुकिंग में अबू धाबी के होटल में कम से कम लगातार तीन रात रुकना और भारत से आने-जाने की फ्लाइट शामिल होनी चाहिए। जर्नी 1 अगस्त से 31 अक्टूबर 2026 के बीच ही करनी होगी।

 ध्यान दे

आप भी इस टाइम पर अबू धाबी घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो जरूरी शर्तें पूरी करके इस ऑफर का फायदा उठा सकते हैं। लेकिन वीजा लिमिटेड है, इसलिए ट्रैवल और बुकिंग से पहले सभी रूल चेक करें।