सिर्फ कैश में पेमेंट करें… UPI पर चार्ज का बड़ा असर दिल्ली के बाजारों में दिखना शुरू, लोकल ट्रेडर्स अब नकद पर देने लगे जोर

UPI पर 0.4% फीस से बवाल: दिल्ली के दुकानदारों ने कहा- अब कैश लाओ, UPI नहीं चलेगा

New Delhi, Sep 16 (PTI) – केंद्र सरकार के 2000 रुपये से ऊपर के UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% फीस लगाने के फैसले के बाद दिल्ली के बाजारों में कैश की वापसी शुरू हो गई है। ट्रेडर्स एसोसिएशनों ने साफ कह दिया है कि वे अब कैश पेमेंट को पुश करेंगे ताकि डिजिटल पेमेंट की एक्स्ट्रा कॉस्ट से बचा जा सके।

सरकार ने मंगलवार को बड़े डिजिटल मर्चेंट पेमेंट के लिए नया फ्रेमवर्क लाकर जनवरी 2020 से चली आ रही जीरो-MDR व्यवस्था खत्म कर दी है। इस चार्ज को 75,000 रुपये और उससे ऊपर के पेमेंट पर 300 रुपये पर कैप किया गया है।

दिल्ली के बाजारों में क्या हो रहा है?

कमला नगर से ऐलान:

कमला नगर मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष नितिन गुप्ता ने कहा, “हमने सरकार के डिजिटल पेमेंट के पुश को सपोर्ट किया था, लेकिन अब अगर हम पर ही चार्ज लगेगा तो हम कैश ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देंगे। हम पहले से ही ट्रांजैक्शन चार्ज और 18% GST दे रहे हैं। अब अगर UPI पर भी MDR चार्ज किया तो हम कैश प्रमोट करेंगे। UPI आया था तो हमने सपोर्ट किया था, अब चार्ज लगेगा तो सपोर्ट नहीं करेंगे। हम ट्रांजैक्शन चार्ज क्यों दें?”

उन्होंने दुकानदारों से कैश पेमेंट को बढ़ावा देने की अपील की और कहा कि अगर अभी ये चार्ज मान लिया तो भविष्य में रेट और बढ़ सकता है। उन्होंने ये भी माना कि “हम डिजिटल पेमेंट के आदी हो चुके हैं। बाजार जाते वक्त कभी-कभी कैश भी नहीं रखते। अब वापस कैश पर जाना मुश्किल होगा।”

खान मार्केट और नई दिल्ली ट्रेडर्स का विरोध:

नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन के महासचिव अमित गुप्ता ने PTI से कहा, “UPI को ट्रेडर्स और ग्राहकों के लिए पेमेंट आसान बनाने के लिए लाया गया था। अगर अब 2000 रुपये से ऊपर के ट्रांजैक्शन पर अतिरिक्त चार्ज व्यापारियों को देना पड़ा तो कई लोग कैश को प्राथमिकता देंगे। हमें डिजिटल पेमेंट से कोई दिक्कत नहीं, लेकिन अतिरिक्त लागत व्यापारियों पर नहीं थोपनी चाहिए।”

खान मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव मेहरा ने कहा, “हम पहले से ही क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर MDR का विरोध कर रहे थे और अब UPI पर भी चार्ज देना होगा। अगर हमसे UPI पर चार्ज लिया गया तो हम कैश पेमेंट को बढ़ावा देंगे।” उन्होंने कहा कि व्यापारी अब बड़े पेमेंट के लिए चेक और दूसरे बैंकिंग चैनल पर भी विचार करेंगे।

छोटे दुकानदारों का दर्द:

कमला नगर के रिटेल दुकानदार रजत जैन ने कहा कि ये चार्ज रिटेलर्स के लिए मुश्किल होगा, खासकर दिल्ली यूनिवर्सिटी के पास जहां स्टूडेंट्स 10-20 रुपये की भी खरीदारी करते हैं। “हम उनसे एक पैसा भी एक्स्ट्रा नहीं मांग सकते, लेकिन हम GST और अब UPI का चार्ज भी दें। कस्टमर से कैश मांगो तो वो कहता है UPI से करूंगा। सारा बोझ हम पर है।”

सदर बाजार बड़ी मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष परमजीत सिंह पम्मा ने कहा कि ये कदम 2000 रुपये से ऊपर बड़ी संख्या में UPI ट्रांजैक्शन करने वाले छोटे, मध्यम और थोक व्यापारियों की लागत बढ़ा देगा। एक ट्रांजैक्शन पर छोटा चार्ज भी महीने-दर-महीने बड़ा खर्च बन जाएगा।

ग्राहक कपिल अरोड़ा ने कहा, “अगर व्यापारियों को ज्यादा चार्ज देना पड़ा तो वो हमसे ही वसूलेंगे। इस तरह न सिर्फ व्यापारी बल्कि ग्राहक भी परेशान होंगे।”

नए नियम में क्या है राहत?

सरकार ने कहा है कि UPI QR कोड के जरिए महीने में 1 लाख रुपये तक कमाने वाले छोटे मर्चेंट्स को छूट रहेगी। सरकार के मुताबिक इससे 96% मर्चेंट ट्रांजैक्शन कवर हो जाएंगे।

नया MDR ग्राहकों से नहीं वसूला जा सकता

  • व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) UPI ट्रांसफर, जो UPI वॉल्यूम का 37% और वैल्यू का 70% है, चार्ज से बाहर रहेगा
  • रेलवे, टेलीकॉम, फ्यूल जैसे एसेंशियल सेक्टर्स पर फ्लैट 5 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन फीस
  • कैपिटल मार्केट ट्रांजैक्शन पर 0.02% रेट

 

भारत की डिजिटल ताकत का नया मुकाम! इन 11 देशों में पहुंचा भारत का डिजिटल पेमेंट

भारत का UPI पिछले कुछ सालों में लोगों की रोज की जिंदगी का हिस्सा बन गया है। चाय की दुकान से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग तक, कुछ सेकंड में पेमेंट करने की सुविधा ने डिजिटल पेमेंट को काफी आसान बना दिया है। अब इसकी पहुंच सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि धीरे-धीरे दूसरे देशों में भी बढ़ रही है। ऐसे में विदेश जाने वाले भारतीयों के लिए भी UPI एक सुविधाजनक पेमेंट ऑप्शन बनता जा रहा है।

UPI की बढ़ती पॉपुलैरिटी का अंदाजा इसके बढ़ते इस्तेमाल से लगाया जा सकता है। जुलाई 2026 में इसके जरिए बड़े लेवल पर ट्रांजैक्शन हुए और अब इसकी इंटरनेशनल पहुंच 11 देशों तक हो गई है। ग्रीस और मालदीव के जुड़ने के बाद यह विस्तार और खास हो गया है।

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1. दुनियाभर में बढ़ी UPI की पहचान

पिछले करीब एक दशक में UPI का इस्तेमाल लगभग 12,000 गुना बढ़ा है। अब यह भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम का एक जरुरी भाग बन चुका है। इसकी पॉपुलैरिटी सिर्फ भारत तक नहीं है, बल्कि दूसरे देशों में भी लोग इसे पेमेंट के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में दुनियाभर में हुए रियल-टाइम पेमेंट ट्रांजैक्शन में UPI की हिस्सेदारी करीब 49% थी।

2. 11 देशों तक पहुंचा UPI

UPI अब भारत के अलावा 11 देशों में क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट की फैसिलिटी दे रहा है। भूटान, नेपाल, सिंगापुर, UAE और फ्रांस के साथ श्रीलंका, मॉरीशस, कतर, कंबोडिया, ग्रीस और मालदीव भी इस लिस्ट में शामिल हैं। ग्रीस और मालदीव UPI से जुड़ने वाले सबसे नए देश हैं। इससे विदेश जाने वाले भारतीयों के लिए डिजिटल पेमेंट का एक आसान ऑप्शन बढ़ा है।

3. UPI में जुड़े नए फीचर्स

2020 से 2022 के बीच UPI में कई नए बदलाव किए गए। UPI AutoPay की मदद से EMI और दूसरे नियमित पेमेंट आसान हुए, जबकि UPI 123PAY से फीचर फोन इस्तेमाल करने वालों को भी डिजिटल पेमेंट की सुविधा मिली। इसी दौरान UPI Lite आया और बाद में क्रेडिट कार्ड को UPI से जोड़ने का ऑप्शन भी दिया गया। इस दौरान भूटान में UPI की इंटरनेशनल शुरुआत भी हुई।

4. इजी और सिक्योर पेमेंट

2024 में UPI Circle जैसे फीचर की शुरुआत हुई, जिससे कोई भी लिमिट के अंदर दूसरे व्यक्ति को अपने UPI अकाउंट से पेमेंट करने की परमिशन दे सकता है। टैक्स पेमेंट और UPI से जुड़े दूसरे ट्रांजैक्शन की लिमिट में भी बदलाव किए गए। इसके बाद 2025 में ऑन-डिवाइस बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन और फेस बेस्ड फेस ऑथेंटिकेशन जैसे ऑप्शन जोड़े गए। इन चेंज का मकसद UPI को लोगों के लिए ज्यादा आसान, सुविधाजनक और सिक्योर बनाना है।

UPI की बढ़ती पहुंच से साफ है कि भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम अब देश की बॉर्डर से आगे भी पहचान बना रहा है। नए देशों और नए फीचर्स के जुड़ने से लोगों के लिए पेमेंट करना आसान और कनविनिएंट हो रहा है। आने वाले समय में UPI की पहुंच और बढ़ने की उम्मीद है।

‘UPI पेमेंट के लिए ग्राहकों पर कोई चार्ज नहीं लगेगा’, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 6 अगस्त को स्पष्ट किया कि अगर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होता है, तो इसका असर सिर्फ व्यापारियों (Merchants) पर होगा। आम UPI यूजर्स से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।

वित्त मंत्री ने कहा कि MDR से बैंकों और फिनटेक कंपनियों को इंफ्रास्ट्रक्चर, इनोवेशन और सुरक्षा पर ज्यादा निवेश करने में मदद मिलेगी। इसका फायदा आखिरकार सभी UPI यूजर्स को मिलेगा।

अभी MDR पर अंतिम फैसला नहीं

निर्मला सीतारमण ने कहा कि UPI पर MDR लागू होगा या नहीं, इस पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। यह फैसला UPI और NPCI की सर्विसेज स्टीरिंग कमेटी करेगी।

उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया तभी आगे बढ़ेगी, जब संसद टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 पारित करेगी। इस बिल में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट, 2007 की धारा 10A में संशोधन का प्रस्ताव है।

कांग्रेस ने क्या कहा था?

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दावा किया था कि नया विधेयक UPI ट्रांजैक्शन को फीस-मुक्त रखने वाली कानूनी गारंटी को खत्म कर देगा। उनके मुताबिक, इससे भविष्य में सभी तरह के UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लगाने का रास्ता खुल सकता है और इसका बोझ आखिरकार ग्राहकों पर पड़ेगा।

उन्होंने कहा था कि आम लोगों को भविष्य में UPI इस्तेमाल करने के लिए भी शुल्क देना पड़ सकता है।

वित्त मंत्री ने दावे को बताया गलत

निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस के दावों को भ्रामक बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के मुद्दों पर संसद के भीतर रचनात्मक चर्चा होनी चाहिए, न कि गलतफहमियां फैलानी चाहिए। उनके मुताबिक, फिलहाल ऐसा कोई फैसला नहीं हुआ है जिससे UPI यूजर्स पर कोई शुल्क लगाया जाए।

RBI गवर्नर ने क्या कहा था

UPI पर MDR को लेकर बहस RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के हालिया बयान के बाद तेज हुई। इसमें  उन्होंने कहा कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम को चलाने की एक लागत होती है और किसी न किसी को इसका बोझ उठाना होगा। हालांकि, उन्होंने साफ संकेत नहीं दिया था कि इसका बोझ कौन उठाएगा।

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क्या UPI पेमेंट पर चार्ज देना होगा? आखिर पेमेंट सिस्टम का बोझ कौन उठाएगा, RBI गवर्नर ने समझाया

UPI Payment Charge: क्या आने वाले समय में ₹2,000 से ऊपर के UPI पेमेंट पर चार्ज लग सकता है? इस सवाल पर RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि अभी इस बारे में कुछ कहना जल्दबाजी होगी। उन्होंने साफ किया कि पेमेंट सिस्टम चलाने की लागत किसी न किसी को उठानी ही पड़ती है। अब यह सरकार उठाएगी, कारोबारी या किसी और पर इसका बोझ आएगा, इस पर अभी फैसला नहीं हुआ है।

क्या अभी UPI पर कोई चार्ज लगेगा?

अभी नहीं। सरकार ने ग्राहकों, दुकानदारों या किसी भी तरह के UPI ट्रांजैक्शन पर कोई नया चार्ज लागू नहीं किया है। टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 में भी UPI पर MDR लगाने या ₹2,000 की सीमा तय करने का कोई प्रावधान नहीं है।

हालांकि, सरकारी अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि सरकार कारोबारियों को किए जाने वाले ₹2,000 से ऊपर के UPI पेमेंट पर 0.5% से कम MDR की अनुमति दे सकती है। फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है।

MDR क्या होता है?

MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है, जो डिजिटल पेमेंट प्रोसेस करने के बदले कारोबारी बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को देता है। यह सीधे ग्राहक से नहीं लिया जाता।

बिल में क्या बदलाव प्रस्तावित है?

अभी कानून के तहत UPI और RuPay डेबिट कार्ड जैसे कुछ डिजिटल पेमेंट मोड पर MDR नहीं लगाया जा सकता। नए बिल में सरकार को यह अधिकार देने का प्रस्ताव है कि वह तय करे किन डिजिटल पेमेंट माध्यमों पर जीरो-MDR जारी रहेगा और किन पर नहीं।

अगर यह बिल कानून बन जाता है, तो सरकार बाद में अलग से नियम बनाकर कुछ कैटेगरी के ट्रांजैक्शन पर MDR लागू कर सकती है।

₹2,000 की सीमा क्यों चर्चा में है?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ₹2,000 से ऊपर के UPI ट्रांजैक्शन कुल लेनदेन की संख्या का सिर्फ करीब 5% हैं, लेकिन इनकी वैल्यू लगभग 65% है। इसलिए सरकार इस कैटेगरी पर MDR लगाने के विकल्प पर विचार कर रही है। हालांकि, इस सीमा या दर को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

सरकार ने पहले MDR क्यों हटाया था?

सरकार ने जनवरी 2020 में UPI और RuPay डेबिट कार्ड पर MDR को जीरो कर दिया था। इसका मकसद डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देना था। बाद में बैंकों और पेमेंट कंपनियों को कुछ ट्रांजैक्शन पर प्रोत्साहन राशि भी दी गई।

हाल के महीनों में संसदीय समिति, बैंक और पेमेंट कंपनियां यह मांग कर रही हैं कि UPI नेटवर्क चलाने की लागत के लिए एक टिकाऊ रेवेन्यू मॉडल बनाया जाए। फिलहाल अंतिम फैसला सरकार को ही करना है।

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