क्या UPI पेमेंट पर चार्ज देना होगा? आखिर पेमेंट सिस्टम का बोझ कौन उठाएगा, RBI गवर्नर ने समझाया

UPI Payment Charge: क्या आने वाले समय में ₹2,000 से ऊपर के UPI पेमेंट पर चार्ज लग सकता है? इस सवाल पर RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि अभी इस बारे में कुछ कहना जल्दबाजी होगी। उन्होंने साफ किया कि पेमेंट सिस्टम चलाने की लागत किसी न किसी को उठानी ही पड़ती है। अब यह सरकार उठाएगी, कारोबारी या किसी और पर इसका बोझ आएगा, इस पर अभी फैसला नहीं हुआ है।

क्या अभी UPI पर कोई चार्ज लगेगा?

अभी नहीं। सरकार ने ग्राहकों, दुकानदारों या किसी भी तरह के UPI ट्रांजैक्शन पर कोई नया चार्ज लागू नहीं किया है। टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 में भी UPI पर MDR लगाने या ₹2,000 की सीमा तय करने का कोई प्रावधान नहीं है।

हालांकि, सरकारी अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि सरकार कारोबारियों को किए जाने वाले ₹2,000 से ऊपर के UPI पेमेंट पर 0.5% से कम MDR की अनुमति दे सकती है। फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है।

MDR क्या होता है?

MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है, जो डिजिटल पेमेंट प्रोसेस करने के बदले कारोबारी बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को देता है। यह सीधे ग्राहक से नहीं लिया जाता।

बिल में क्या बदलाव प्रस्तावित है?

अभी कानून के तहत UPI और RuPay डेबिट कार्ड जैसे कुछ डिजिटल पेमेंट मोड पर MDR नहीं लगाया जा सकता। नए बिल में सरकार को यह अधिकार देने का प्रस्ताव है कि वह तय करे किन डिजिटल पेमेंट माध्यमों पर जीरो-MDR जारी रहेगा और किन पर नहीं।

अगर यह बिल कानून बन जाता है, तो सरकार बाद में अलग से नियम बनाकर कुछ कैटेगरी के ट्रांजैक्शन पर MDR लागू कर सकती है।

₹2,000 की सीमा क्यों चर्चा में है?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ₹2,000 से ऊपर के UPI ट्रांजैक्शन कुल लेनदेन की संख्या का सिर्फ करीब 5% हैं, लेकिन इनकी वैल्यू लगभग 65% है। इसलिए सरकार इस कैटेगरी पर MDR लगाने के विकल्प पर विचार कर रही है। हालांकि, इस सीमा या दर को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

सरकार ने पहले MDR क्यों हटाया था?

सरकार ने जनवरी 2020 में UPI और RuPay डेबिट कार्ड पर MDR को जीरो कर दिया था। इसका मकसद डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देना था। बाद में बैंकों और पेमेंट कंपनियों को कुछ ट्रांजैक्शन पर प्रोत्साहन राशि भी दी गई।

हाल के महीनों में संसदीय समिति, बैंक और पेमेंट कंपनियां यह मांग कर रही हैं कि UPI नेटवर्क चलाने की लागत के लिए एक टिकाऊ रेवेन्यू मॉडल बनाया जाए। फिलहाल अंतिम फैसला सरकार को ही करना है।

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RBI Policy : फाइनेंशियल सेक्टर के दिग्गजों को आज की पॉलिसी आई पसंद, जानिए किन शेयरों में देखने में मिल सकता है एक्शन

RBI Policy : फाइनेंशियल सेक्टर के दिग्गजों को आज की पॉलिसी पसंद आई है। यूजीआरओ कैपिटा (UGRO Capita) में चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर शिल्पा भट्टर का कहना है कि RBI का रेपो रेट के 5.25% पर बनाए रखने का फैसला,दुनिया भर में छाई अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की मैक्रोइकॉनॉमिक मजबूती पर भरोसे को दिखाता है। पश्चिम एशिया युद्ध का शुरुआती असर काफी हद तक खत्म हो जाने के बाद, पॉलिसी की स्थिरता से बिज़नेस कम्युनिटी के भरोसे के मजबूती मिलनी चाहिए,लिक्विडिटी की स्थिति बेहतर होनी चाहिए और MSMEs को वर्किंग कैपिटल को बेहतर ढंग से मैनेज करने में मदद मिलनी चाहिए,जिससे बेहतर रीपेमेंट और मज़बूत क्रेडिट क्वालिटी में मदद मिलेगी। खास बात यह है कि पॉलिसी स्टेटमेंट का टोन काफी न्यूट्रल रहा, इससे यह नहीं लगता कि रेट में जल्द ही सख्ती आने वाली है।

मॉडुलस अल्टरनेटिव्स (Modulus Alternatives) के CEO और CIO संदीप अग्रवाल ने कहा कि RBI का रेपो रेट 5.25% पर बनाए रखने का फैसला,ग्रोथ और मैक्रोइकोनॉमिक स्टेबिलिटी के बीच बैलेंस बनाने के लिए एक सोच-समझकर लिया गया फैसला नजर आता है। महंगाई के दबाव पर करीब से नजर रखी जा रही है और दुनिया भर में आर्थिक अनिश्चितताएं लगातार बढ़ रही हैं,ऐसे में जैसा है वैसा बनाए रखने से स्टेबिलिटी मिलती है और पिछली पॉलिसी के उपायों का असर इकॉनमी में और आगे तक पहुंच पाता है।

उन्होंने आगे कहा कि आरबीआई के आज के फैसले से बैंकिंग सेक्टर को फंडिंग कॉस्ट और इंटरेस्ट रेट्स के बारे में बेहतर अंदाजा लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही रिटेल, MSME और बिज़नेस सेगमेंट में क्रेडिट डिमांड भी बढ़ सकती। आगे महंगाई,लिक्विडिटी की स्थिति और ग्लोबल डेवलपमेंट RBI की पॉलिसी तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। एक स्थिर पॉलिसी के साथ ही घरेलू इकोनॉमिक फंडामेंटल्स में सुधार से आने वाले महीनों में कर्ज की मांग टिकाऊ ग्रोथ देखने को मिलेगी।

एक्सिस डायरेक्ट की रिसर्च एनालिस्ट-BFSI, ज्ञानदा वैद्य का कहना है कि महंगाई का दबाव थोड़ा कम हुआ है और ग्रोथ मजबूत बनी रही है। इसको देखते हुए RBI का रेपो रेट में कोई बदलाव न करने और अपना न्यूट्रल रुख बनाए रखने का फैसला काफी हद तक उम्मीद के मुताबिक ही है। हालांकि तेल की कीमतों में नरमी आई है, लेकिन मानसून से जुड़ी चुनौतियां महंगाई के लिए एक बड़ा रिस्क बनी हुई हैं और इस पर पैनी नजर बनी हुई है।

आरबीआई ने महंगाई के अपने अनुमान को थोड़ा कम करके 5% कर दिया है, जो पहले 5.1% था। साथ ही, कोर महंगाई के अनुमान को भी घटाकर 4.3% कर दिया गया है, जो पहले 4.7% था। साथ ही, FY27 के लिए ग्रोथ के अनुमान को भी थोड़ा बढ़ाकर 6.7% कर दिया गया है, जो पहले 6.6% था।

बैंकिंग सेक्टर के नज़रिए से बात करें तो बैंकों ने सीजन के हिसाब से कमजोर रहने वाले Q1 में भी अच्छा काम किया है। इस अवधि में क्रेडिट ग्रोथ मजबूत रही और अर्निंग भी अच्छी रही। इसे क्रेडिट कॉस्ट को कंट्रोल करने और मामूली ओपेक्स ग्रोथ से सपोर्ट मिला, भले ही ज्यादातर बैंकों के मार्जिन में दिक्कतें रही। एसेट क्वालिटी में सुधार इस तिमाही की सबसे बड़ी पॉज़िटिव बात रही। नए एनपीए में नियंत्रण की वजह से ज्यादातर बैंकों में सुधार दिखा।

एक और खास बात यह रही है कि अब तक FCNR(B) डिपॉजिट में मजबूती आई है, जिससे Q2 में डिपॉज़िट ग्रोथ को सपोर्ट मिलना चाहिए। हमें उम्मीद है कि शॉर्ट-टर्म में मार्जिन काफी हद तक रेंज-बाउंड रहेंगे और कोई भी सुधार काफी हद तक पोर्टफोलियो मिक्स में अच्छे बदलाव से होगा।

ऐसे में निवेश के नजरिए से वह बैंक अच्छे लग रहे हैं जिनकी अर्निंग्स ग्रोथ, बैलेंस शीट और वैल्यूएशनम अच्छे हैं। नजरिए से कोटक महिंद्रा बैंक, ICICI बैंक, SBI, फेडरल बैंक और उज्जीवन SFB अच्छे लग रहे है। वहीं, NBFC में बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस और क्रेडिटएक्सेस ग्रामीण अच्छे नजर आ रहे हैं।

 

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RBI ने खराब ग्लोबल माहौल के बावजूद ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया, महंगाई कम होने की जताई उम्मीद, जानिए कहां से मिल रहा भरोसा

RBI ने खराब ग्लोबल माहौल के बावजूद ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया, महंगाई कम होने की जताई उम्मीद, जानिए कहां से मिल रहा भरोसा

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को घरेलू अर्थव्यवस्था को लेकर उम्मीद जताई और 2026-27 के लिए अपने ग्रोथ अनुमान को बढ़ा दिया। वहीं, महंगाई के अनुमान में कटौती की गई है। RBI ने कहा कि देश में घरेलू मांग मज़बूत है,एक्सपोर्ट बढ़ा है,निवेश गतिविधि भी अच्छी है और ग्लोबल फ्रंट में बनी अनिश्चितताओं में कमी आ रही है। मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी के फैसलों के बारे में बताते हुए RBI गवर्नर ने कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष,ट्रेड टेंशन और कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण ग्लोबल माहौल में अस्थिर के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती के संकेत कायम हैं।

दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी इकॉनमी के तौर पर भारत की पहचान हुई मजबूत

उन्होंने आगे कहा कि बढ़ती घरेलू मांग,मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज एक्टिविटी में लगातार बनी तेजी और मज़बूत एक्सपोर्ट से इकोनॉमी को सपोर्ट मिल रहा है,जिससे दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी इकॉनमी के तौर पर भारत की पहचान और मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में इंडियन इकॉनमी ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। इसको ध्यान में रखते हुए आरबीआई में 2026-27 के अपने रियल GDP ग्रोथ अनुमान को बदलकर 6.7 फीसदी कर दिया है। RBI को उम्मीद है कि पहली तिमाही में ग्रोथ रेट 7.0 फीसदी,दूसरी तिमाही में 6.4 फीसदी,तीसरी तिमाही में 6.5 फीसदी और चौथी तिमाही में 6.8 फीसदी रहेगी। हालांकि, कुछ जोखिम भी बने हुए हैं।

मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज सेक्टर में तेजी कायम

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज सेक्टर में तेजी, मज़बूत डिस्क्रिशनरी कंजम्प्शन,इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार हो रहे सरकारी खर्च, मजबूत क्रेडिट ग्रोथ और मर्चेंडाइज़ एक्सपोर्ट में बढ़त से इकोनॉमिक ग्रोथ को सपोर्ट मिल रहा। उन्होंने कहा कि ग्लोबल सप्लाई चेन में डाइवर्सिफिकेशन,बाइलेटरल ट्रेड एग्रीमेंट और मार्केट डाइवर्सिफिकेशन से भी एक्सटर्नल डिमांड को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है।

दूसरे फेज की महंगाई बढ़ने को जोखिम कायम

RBI ने अपने महंगाई के अनुमान में भी बदलाव किया। उसका मनना है कि वित्त वर्ष 2026-27 में रिटेल महंगाई 5.0 फीसदी रह सकती है। पहली तिमाही में महंगाई पहले के अनुमान से कम रही है, इसके चलते आगे के लिए भी अच्छे संकेत मिल रहे है। गवर्नर ने कहा कि महंगाई में हाल में देखने को मिली बढ़ोतरी की मेन वजह खाने-पीने की चीजों और ईंधन की कीमतों में आई तेजी है,न कि बड़े पैमाने पर आई डिमांड।

RBI को उम्मीद है कि खुदरा महंगाई इस फाइनेंशियल ईयर के तीसरे क्वार्टर में पीक पर होगी और उसके बाद कम हो जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि एल नीनो,कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और जियोपॉलिटिकल घटनाएं महंगाई के अनुमान पर असर डाल रहे हैं,जबकि खाने की चीजो,फ्यूल और दूसरी इनपुट लागतों में बढ़ोतरी से दूसरे दौर के असर एक बड़ा रिस्क बने हुए हैं।

कच्चे तेल के शॉर्ट-टर्म आउटलुक का अंदाजा लगाना मुश्किल

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि वेस्ट एशिया संघर्ष से सप्लाई में आई रुकावटें जून के बाद कम हो गई थीं, लेकिन जुलाई की शुरुआत से फिर से बढ़ी मुश्किलों ने एक बार फिर ग्लोबल एनर्जी मार्केट और सप्लाई चेन में उतार-चढ़ाव बढ़ा दिया है।

कच्चे तेल पर RBI ने कहा कि इंटरनेशनल मार्केट में इसकी कीमतें अभी भी बहुत वोलेटाइल हैं। जून में इंडियन बास्केट क्रूड में तेज गिरावट आई थी,लेकिन वेस्ट एशिया में फिर से तनाव बढ़ने की वजह से जुलाई में कच्चे तेल कीमतें काफी बढ़ गईं,जिससे इसके शॉर्ट-टर्म आउटलुक का अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से इनपुट कॉस्ट बढ़ सकता है। इससे दूसरे दौर का महंगाई का दबाव बन सकता है।

ग्लोबल ट्रेड में जारी अनिश्चितता का दिख सकता है असर

गवर्नर ने ग्लोबल ट्रेड में जारी अनिश्चितता की ओर इशारा करते हुए कहा कि नए US टैरिफ,ग्लोबल ट्रेड ग्रोथ में कमी और जियोपॉलिटिकल तनाव से बाहरी माहौल पर असर पड़ने की उम्मीद है। हालांकि,भारत को हाल ही में हुए बाइलेटरल ट्रेड एग्रीमेंट,हेल्दी सर्विसेज एक्सपोर्ट और मजबूत इनवर्ड रेमिटेंस से सपोर्ट मिलने की उम्मीद है। इससे करंट अकाउंट पर दबाव कम करने में मदद मिलेगी।

फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट के फ्लो में मजबूती

RBI ने कहा कि फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट के फ्लो में मजबूती बनी हई है। हाल के महीनों में फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट में भी सुधार देखने को मिला है। इससे डेट मार्केट में कैपिटल लाने के लिए पॉलिसीगत उपायों से मदद मिली है। नतीजतन,इस साल बैलेंस ऑफ पेमेंट्स में अच्छा सरप्लस हासिल होने की उम्मीद है।

भारत का फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व अच्छी स्थिति में

RBI गवर्नर ने कहा कि भारत का फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व लगभग 693 अरब डॉलर की अच्छी स्थिति में है। यह दस महीने से ज्यादा का इम्पोर्ट कवर दे सकता है। RBI की एक्सचेंज-रेट पॉलिसी पर उन्होंने कहा कि हम अपनी पॉलिसी जारी रखेंगे कि यह मार्केट की ताकतों के हिसाब से तय होगी। हालांकि एक्सेंज रेट में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव होने पर हस्तक्षेप किया जाएगा,सट्टेबाजी पर रोक लगेगी और गलत हरकतों को रोकेंगे ताकि यह पक्का हो सके कि इकोनॉमिक एक्टिविटी में कोई बाधा न आए।

अपने संबोधन के खत्म करते हुए RBI गवर्नर ने कहा कि भारत के मजबूत मैक्रोइकोनॉमिक फंडामेंटल्स ग्लोबल झटकों के खिलाफ सपोर्ट देते रहेंगे। हालांकि पॉलिसी बनाने वाले भविष्य में कोई भी पॉलिसी एक्शन लेने से पहले महंगाई,कच्चे तेल की कीमतों,मौसम की स्थिति और जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट पर करीब से नजर रखेंगे।

 

 

RBI Policy Highlights : रेपो रेट में नहीं हुआ कोई बदलाव, जानिए महंगाई और ग्रोथ पर क्या है RBI गवर्नर की राय

RBI MPC Meeting August 2026: 10 बजे RBI गवर्नर करेंगे बड़ा ऐलान! जानिए कहां देखें पॉलिसी का लाइव टेलीकास्ट

RBI Monetary Policy Committee Live Updates: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय समीक्षा बैठक का फैसला आज यानी बुधवार, 5 अगस्त 2026 को आने वाला है। देश के करोड़ों बैंक ग्राहक, होम लोन की EMI चुकाने वाले आम लोग और शेयर बाजार के निवेशक इस फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा 10 बजे मौद्रिक नीति समिति के फैसलों की घोषणा करेंगे। इसके बाद दोपहर 12 बजे वे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को भी संबोधित करेंगे।

कब और कहां देखें RBI गवर्नर का संबोधन LIVE?

तारीख और समय: बुधवार, 5 अगस्त 2026 को सुबह 10:00 बजे पॉलिसी का ऐलान होगा।

प्रेस कॉन्फ्रेंस: दोपहर 12:00 बजे RBI गवर्नर मीडिया से रूबरू होंगे।

कहां देखें लाइव: RBI गवर्नर का यह संबोधन रिजर्व बैंक की आधिकारिक वेबसाइट, उसके आधिकारिक YouTube चैनल और X हैंडल पर लाइव स्ट्रीम किया जाएगा।

अगस्त पॉलिसी से क्या हैं बाजार की उम्मीदें?

मनीकंट्रोल के पोल में शामिल अधिकांश अर्थशास्त्रियों का मानना है कि छह सदस्यीय एमपीसी लगातार चौथी बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगी। वर्तमान में रेपो रेट 5.25% पर है और इसके इसी स्तर पर बरकरार रहने की पूरी संभावना जताई जा रही है। ग्लोबल अनिश्चितताओं और मिडिल ईस्ट के संघर्ष को देखते हुए केंद्रीय बैंक फिलहाल सतर्कता भरा रुख अपना सकता है।

जून की पिछली MPC बैठक में क्या हुआ था?

इससे पहले 3 से 5 जून 2026 के बीच हुई MPC बैठक में भी RBI ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा था और अपना रुख ‘न्यूट्रल’ बरकरार रखा था। स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) रेट को 5% और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) व बैंक रेट को 5.5% पर बरकरार रखा गया था। RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए भारत की वास्तविक जीडीपी ग्रोथ 6.6% और रिटेल महंगाई 5.1% रहने का अनुमान जताया है।

जून में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा था कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता और सप्लाई चेन में रुकावटें बनी हुई हैं, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था बाहरी झटकों को झेलने के लिए पूरी तरह मजबूत है।

आम जनता के लिए क्यों अहम है RBI MPC बैठक?

रेपो रेट वह दर होती है जिस पर रिजर्व बैंक कमर्शियल बैंकों को कर्ज देता है। अगर रेपो रेट बढ़ता है, तो बैंकों के लिए कर्ज महंगा होता है, जिससे आपके होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन की EMI बढ़ जाती है। वहीं, रेपो रेट स्थिर रहने से आपकी EMI पर तुरंत कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ता और एफडी (FD) के निवेशकों को भी स्थिर रिटर्न की गारंटी मिलती रहती है।

अगर आप RBI गवर्नर के इस बड़े ऐलान की हर छोटी-बड़ी अपडेट, लोन की EMI पर असर और शेयर बाजार का रिएक्शन सबसे पहले पाना चाहते हैं, तो मनीकंट्रोल हिन्दी के इस लाइव ब्लॉग से जुड़े रहें।