YES Bank Share Price : सिटी की बुलिश रिपोर्ट ने भरा जोश, 5% भागा शेयर, जानिए क्या हो ट्रेडिंग रणनीति

YES Bank Share Price :बुधवार, 16 सितंबर को YES बैंक के शेयरों में लगभग 5% की तेजी आई। स्टॉक में यह तेजी कुछ खास यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) मर्चेंट ट्रांज़ैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR)लागू होने के बाद देखने को मिला। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है नए MDR फ्रेमवर्क से बैंकों और डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में शामिल दूसरी कंपनियों को कमाई का एक नया ज़रिया मिलेगा। फिलहाल 1.40 बजे के आसपास यह शेयर 0.27 रुपए यानी 1.17% की बढ़त के साथ 23.36 रुपए के आसपास कारोबार कर रहा था। आज का इसका दिन का हाई 24.10 रुपए और दिन का लो 23.29 रुपए है।

15 अक्टूबर से लागू होने वाले नए नियमों के तहत ₹2,000 से ज़्यादा के UPI पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) ट्रांज़ैक्शन पर 0.4% तक MDR लगेगा,जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 होगी। यह चार्ज मर्चेंट को देना होगा, जबकि ग्राहक बिना किसी ट्रांज़ैक्शन फ़ीस के UPI का इस्तेमाल करते रहेंगे।

YES बैंक के नोट में दिए गए अनुमानों के मुताबिक नया फ़्रेमवर्क मर्चेंट पेमेंट के लिए UPI के पहले वाले ज़ीरो-MDR मॉडल से अलग है और इससे सालाना लगभग ₹16,000-17,000 करोड़ का रेवेन्यू पूल बनने की उम्मीद है।

YES बैंक को इससे बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद

एक्पर्ट्स का कहना है कि MDR के नए नियमों से बैंकिंग सिस्टम को फायदा मिलेगा। इस बारे में सिटी ने एक रिपोर्ट निकाली है। सिटी के मुताबिक MDR चार्जेज का सबसे बड़ा बेनिफिशियरी यस बैंक हो सकता है। सिटी के मुताबिक इन नए नियमें से यस बैंक कर पूर्व मुनाफे में 6-12% का उछाल संभव है। वहीं, PPOP में 5–10% की बढ़त का अनुमान है। सिटी का कहना है कि यह चार्ज नेटवर्क विस्तार के लिए लिया जा रहा है। MDR कोई सरकारी टैक्स नहीं है। इससे UPI इकोसिस्टम में 16000–17,000 करोड़ रेवेन्यू जुड़ने का अनुमान है। यह UPI नेटवर्क पर काम करने वाले बैंकों और पेमेंट ऐप्स के लिए बड़ा स्ट्रक्चरल बूस्ट होगा। इसका 60% हिस्सा बैंकिंग सिस्टम की जेब में जाएगा। 25% हिस्सा UPI ऐप प्रोवाइडेर्स को मिलेगा। वहीं, 15% हिस्सा नॉन-बैंक पेमेंट एग्रीगेटर को मिलेगा।

स्टॉक पर टेक्निकल एक्सपर्ट की राय

एक्सिस सिक्योरिटीज में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट रिसर्च (हेड ऑफ़ रिसर्च) राजेश पलविया ने कहा कि शुक्रवार को हुई जबरदस्त खरीदारी और भारी ट्रेडिंग वॉल्यूम के कारण, यस बैंक ने ₹23 के अपने छह हफ्ते के सप्लाई बैरियर को मज़बूती से पार किया और ₹24 के आसपास बंद हुआ,जो बाज़ार में मज़बूत भागीदारी का संकेत है। ₹21.85 के अहम 200-डे सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) सपोर्ट लेवल से मज़बूत उछाल के बाद इस तेज़ी को और गति मिली, जिससे स्टॉक अपने 20, 50 और 100 डे SMA के स्तरों को फिर से हासिल करने में कामयाब रहा।

डेली,वीकली और मंथली RSI रीडिंग का बुलिश ज़ोन में मज़बूती से बने रहना स्टॉक में व्यापक तेज़ी को और पुख्ता करता है,जो सभी अहम टाइमफ्रेम में लगातार तेज़ी बने का संकेत है। इस स्टॉक में 23 रुपए के स्टॉप लॉस के साथ 27-30 रुपए के शॉर्ट टर्म टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है।

 

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UPI पर एमडीआर चार्ज का असर क्या शेयर बाजारों में निवेश पर भी पड़ेगा? जानिए NSE के चेयरमैन ने क्या कहा

यूपीआई यानी यूनिफायड पेमेंट्स इंटरफेस छोटे-बड़े पेमेंट के लिए लोगों की पहली पसंद बन गया है। अब तक यह फ्री है यानी इस्तेमाल पर किसी तरह की फीस नहीं लगती है। लेकिन, आगे यूपीआई के जरिए पेमेंट करने पर आपको फीस चुकानी होगी। हालांकि, 2,000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजेक्शन पर ही फीस लगेगी। लेकिन, प्राइमरी और सेकेंडरी मार्केट में निवेश के लिए अब काफी ज्यादा यूपीआई का इस्तेमाल होने लगा है। तो क्या यूपीआई पर फीस का असर शेयर मार्केट में निवेश पर भी पड़ेगा?

ट्रांजेक्शन वॉल्यूम पर कुछ समय के लिए पड़ सकता है असर

NSE का मानना है कि 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई ट्रांजेक्शन पर MDR का असर ट्रांजेक्शन वॉल्यूम पर कुछ समय समय के लिए पड़ेगा। लेकिन, उसके बाद स्थिति सामान्य हो जाएगी। एनएसई के एमडी और सीईओ आशीषकुमार चौहान ने कहा, “2000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट पर एमडीआर चार्जेज का असर ट्रांजेक्शन वॉल्यूम पर सिर्फ शुरुआत में पड़ेगा।” उनहोंने कहा कि कुछ समय बाद इसके सामान्य हो जाने की संभावना है।

एनएसई का आईपीओ 17 सितंबर को खुलने जा रहा है

चौहान ने यूपीआई ट्रांजेक्शन पर एमडीआर चार्ज के बारे में यह बात तब कही है, जब एनएसई का आईपीओ आ रहा है। यह इश्यू 17 सितंबर को खुल जाएगा। यह इश्यू पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल होगा। एक्सचेंज के कुछ पुराने इनवेस्टर्स ओएफएस में अपने शेयर बेच रहे हैं। कुछ 12.64 करोड़ शेयर ओएफएस में बेचे जाएंगे।

आईपीओ में एंकर इनवेस्टर्स की उम्मीद से ज्यादा दिलचस्पी

चौहान ने कहा कि एनएसई के आईपीओ में एंकर इनवेस्टर्स की उम्मीद से ज्यादा दिलचस्पी दिख रही है। खासकर आईपीओ का साइज घटने के बाद ऐसा दिख रहा है। उनहोंने कहा, “एनएसई आईपीओ के लिए एंकर इनवेस्टर्स की डिमांड अनुमान से काफी ज्यादा है…क्योंकि इश्यू का साइज घट गया है।”

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यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल होगा

उन्होंने कहा, “लोकल म्यूचुअल फंड्स जैसे हर ग्रुप को खास ऐलॉटमेंट करने होंगे। एंकर बुक काफी बड़ा है। यह हमारी उम्मीद से ज्यादा है।” इस आईपीओ से एनएसई को कोई पैसा नहीं मिलेगा। इसकी वजह यह है कि एनएसई इस इश्यू में इनवेस्टर्स को नए शेयर इश्यू नहीं करेगा। पहले एनएसई का प्लान 30,000 करोड़ रुपये का आईपीओ पेश करने का था। लेकिन, कई पुराने इनवेस्टर्स ने कम शेयर बेचने के फैसले लिए, जिससे इश्यू का आकार घट गया।

₹2,000 तक के RuPay डेबिट कार्ड और UPI पेमेंट पर नहीं लगेगा कोई चार्ज, सरकार ने बैंकों को दिया निर्देश

Digital payments News: डिजिटल पेमेंट करने वाले लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर आई है। केंद्र सरकार ने निर्देश दिया है कि ₹2,000 तक के RuPay डेबिट कार्ड और UPI लेनदेन पर ग्राहकों से किसी भी तरह का शुल्क नहीं लिया जा सकता। यह रोक सीधे तौर पर ही नहीं, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से लगाए जाने वाले चार्ज पर भी लागू होगी। वित्त मंत्रालय के अनुसार, यह फैसला Payment and Settlement Systems Act, 2007 की धारा 10A के तहत लिया गया है। इसके तहत केंद्र सरकार ने बैंकों और सिस्टम प्रोवाइडर्स को निर्देश दिया है कि वे RuPay डेबिट कार्ड के जरिए भुगतान करने या भुगतान प्राप्त करने वाले व्यक्ति से कोई शुल्क न वसूलें।

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 (2007 का 51) की धारा 10A के अनुसार, केंद्र सरकार ने बैंकों और सिस्टम प्रोवाइडर्स को RuPay-पावर्ड डेबिट कार्ड और UPI के जरिए 2,000 रुपये तक के पेमेंट करने या लेने वाले व्यक्ति पर सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से कोई भी चार्ज लगाने से रोक दिया है।”

UPI ट्रांजैक्शन पर भी लागू होगा नियम

सरकार का यह प्रावधान ₹2,000 तक के UPI लेनदेन पर भी लागू है। यानी इस लिमिट तक UPI के जरिए पैसे भेजने या प्राप्त करने वाले व्यक्ति पर किसी प्रकार का चार्ज नहीं लगाया जा सकता।

इसका मकसद डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देना। साथ ही छोटे मूल्य के लेनदेन को लोगों के लिए आसान और कम लागत वाला बनाए रखना है। खास तौर पर दुकानदारों, छोटे कारोबारियों और आम ग्राहकों के लिए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण है, क्योंकि छोटी रकम के डिजिटल भुगतान में एक्स्ट्रा चार्ज लगने से लोग कैश का इस्तेमाल करने की ओर वापस जा सकते हैं।

सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से चार्ज लेने पर भी रोक

वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि चार्ज पर रोक केवल सीधे तौर पर लगाए जाने वाले शुल्क तक सीमित नहीं है। प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष किसी भी तरीके से शुल्क वसूलने की अनुमति नहीं होगी। इसका मतलब है कि बैंक या संबंधित सिस्टम प्रोवाइडर किसी अन्य चार्ज के नाम पर भी इस तरह के भुगतान की लागत ग्राहक पर डालने की कोशिश नहीं कर सकते।

छोटे डिजिटल पेमेंट को मिलेगा बढ़ावा

भारत में UPI और कार्ड के जरिए डिजिटल भुगतान तेजी से बढ़ा है। खासकर छोटी दुकानों, किराना स्टोर, रेहड़ी-पटरी और रोजमर्रा की खरीदारी में UPI का इस्तेमाल काफी बढ़ चुका है। ऐसे में ₹2,000 तक के भुगतान पर शुल्क नहीं होने से डिजिटल लेनदेन को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। सरकार की यह व्यवस्था डिजिटल भुगतान को सस्ता, सुविधाजनक और अधिक सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे ग्राहकों के साथ-साथ छोटे कारोबारियों को भी फायदा हो सकता है और कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा मिलेगा।

भारत में कितना होता डिजीटल ट्रांजेक्शन?

भारत में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफ़ेस (UPI) के जरिए डिजिटल ट्रांजैक्शन हर रोज नया रिकॉर्ड बना रहा है। NPCI (National Payments Corporation of India) के लेटेस्ट आंकड़ों के मुताबिक भारत में अगस्त 2026 में UPI पर 24,508.96 मिलियन यानी करीब 2,450.9 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए। यानी औसतन करीब 79 करोड़ UPI ट्रांजैक्शन रोज हुए। इनकी कुल वैल्यू लगभग ₹29.82 लाख करोड़ रही। आपको जानकारी के लिए बता दें कि डिजिटल पेमेंट सिर्फ UPI नहीं होदा है। इसमें IMPS, NEFT, RTGS, कार्ड, FASTag आदि भी शामिल होते हैं।

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UPI Payment पर 6 साल बाद फिर लगेगा MDR! क्यों हो रही वापसी, किनमें बंटेगा इसका पैसा

UPI Payment Charges: लगभग छह साल बाद यूपीआई से लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वापस आ सकता है। दुकानदार को ₹2,000 या उससे अधिक के यूपीआई पेमेंट पर 0.3% का चार्ज लग सकता है। इसके लागू होने का कानूनी रास्ता तब साफ हुआ, जब सरकार ने अगस्त में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में बदलाव किया और जीरो-एमडीआर प्रोटेक्शन को हटा दिया। 21 अगस्त की फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक अब यूपीआई से पेमेंट पर जीरो की बजाय 0.3% के शुल्क का नियम अगले दो हफ्ते के भीतर लागू किया जा सकता है। हालांकि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ कर दिया है कि ग्राहकों और छोटे कारोबारियों पर इसका भार नहीं डाला जाएगा। सरकार की कोशिश इस पेमेंट सिस्टम से जुड़ी एंटिटीज को डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाए रखने पर होने वाले खर्च के कुछ हिस्से की भरपाई है। ₹2,000 या इससे अधिक के लेन-देन पर MDR लागू होने से इलेक्ट्रॉनिक्स, सिक्योरिटीज, कपड़े और अधिक दाम वाली खरीदारी प्रभावित हो सकती है।

किसे मिलेगा UPI Payment में MDR का पैसा

एमडीआर का पैसा किसी एक को नहीं मिलेगा बल्कि बैंक, फिनटेक कंपनियां और इस लेन-देन में शामिल अन्य एंटिटीज में बंटेगा। साल 2019 तक एमडीआर वाली व्यवस्था लागू थी लेकिन फिर डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए इसे जीरो कर दिया गया। इसे हटाए जाने से पहले ₹100 से अधिक मूल्य वाले ऑफलाइन क्यूआर कोड के जरिए किए गए P2M (पर्सन-टू-मर्चेंट) पेमेंट पर 0.3% शुल्क लगता था, जिसे इश्यूअर (Issuer) और एक्वायरर (Acquirer) बैंकों के बीच बराबर बांटा जाता था। एमडीआर की अधिकतम सीमा भी ₹100 थी, जिसे साल 2020 में पूरी तरह समाप्त कर दिया गया।

अब इसे फिर लाया जा रहा है। इसका पैसा पेमेंट चेन में चार प्लेयर्स के बीच बंटेगा। एक हिस्सा ग्राहक के बैंक को, दूसरा हिस्सा पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और ट्रांजैक्शन हैंडल करने वाले इसके बैंक को, तीसरा हिस्सा दुकानदार की तरफ से यानी एक्वायरिंग बैंकों और उसके पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को तो चौथा हिस्सा यूपीआई नेटवर्क चलाने और लेन-देन का निपटारा करने वाली NPCI को मिलेगा। एमडीआर में सबसे अधिक हिस्सा इंटरचेंज शुल्क के रूप में इश्यूइंग बैंक यानी ग्राहकों के बैंक को तो सबसे कम हिस्सा एनपीसीआई को मिलेगा।

क्यों हुई वापसी

भर्तृहरि महताब के नेतृत्व में फाइनेंस से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति ने 12 अगस्त को अपनी रिपोर्ट में जिक्र किया कि यूपीआई को बढ़ावा देने और जीरो-MDR के कारण इंडस्ट्री के रेवेन्यू लॉस की भरपाई के लिए सरकार ने सिर्फ ₹2,000 करोड़ एलॉट किए हैं जोकि डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री की अनुमानित सालाना लागत ₹20,700 करोड़ से बहुत ही कम है। कमेटी ने आगाह किया है कि इसके चलते साइबर सिक्योरिटी, फर्जीवाड़े की रोकथाम और पेमेंट नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर में जरूरी निवेश प्रभावित हो सकता है। चूंकि अब एआई का इस्तेमाल बढ़ा है तो साइबर खतरे भी बढ़े हैं, जिससे चिंता और गंभीर हो गई है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा भी कह चुके हैं कि यूपीआई हमेशा फ्री नहीं रह सकता है और कोई न कोई इसका खर्च चुका रहा है।

हालांकि सिर्फ एमडीआर ही इन खर्चों की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं है। डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज ने संसदीय समिति को बताया कि फंडिंग के बोझ को कम करने के लिए दो विकल्पों पर विचार किया जा रहा है- अधिक वैल्यू वाले यूपीआई पेमेंट पर एमडीआर को दोबारा लागू करना या आने वाले वषों में सरकारी सहायता को धीरे-धीरे कम करना। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में देश में करीब ₹314 लाख करोड़ के 24,000 करोड़ से अधिक UPI लेनदेन हुए। इसमें से 71% P2P (पर्सन-टू-पर्सन) और बाकी P2M (पर्सन-टू-मर्चेंट) थे। पी2एम में सिर्फ 4% की वैल्यू ही ₹2,000 या उससे अधिक थी यानी कि अधिकतर यूपीआई पेमेंट एमडीआर के दायरे से बाहर रहेगा तो छोटे कारोबारियों को बाहर रखने से इसका दायरा और सीमित हो जाता है।

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क्या UPI पेमेंट पर आपको देना होगा चार्ज और कटेगा आपका पैसा? करोड़ों यूजर्स के लिए Payments Council of India ने दिया बड़ा अपडेट

UPI Payment Update: देश में डिजिटल पेमेंट का आधार बन चुके यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों यूजर्स के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या आने वाले समय में UPI पेमेंट पर चार्ज लगेगा? इस पूरे विवाद और चर्चाओं के बीच पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक डिटेल्ड Q&A शेयर कर कई जरूरी चीजों पर स्थिति साफ की है। हमारे सहयोगी सीएनबीसी टीवी 18 की रिपोर्ट के मुताबिक PCI और केंद्र सरकार दोनों ने साफ कर दिया है कि आम उपभोक्ताओं के लिए UPI पेमेंट पूरी तरह से मुफ्त है और रहेगा। इस पूरी बहस का मुख्य केंद्र उपभोक्ता नहीं बल्कि भारत के इस विशाल डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को चलाने पर आने वाली लागत है।

आम उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों के लिए UPI रहेगा बिल्कुल फ्री

पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) के मुताबिक UPI के इस्तेमाल और UPI पेमेंट्स स्वीकार करने के बीच के फर्क को समझना जरूरी है। 2016 में अपनी शुरुआत से लेकर अब तक आम यूजर्स के लिए UPI पूरी तरह से फ्री रहा है। कस्टमर बिना किसी ट्रांजैक्शन चार्ज के एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में तुरंत पैसे भेज सकते हैं। किराना दुकानों सहित देश के छोटे व्यापारियों के लिए भी UPI पेमेंट स्वीकार करने पर कोई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) नहीं लगता है। भारत के सबसे छोटे व्यवसायों तक डिजिटल भुगतान को सुलभ बनाए रखना इस प्लेटफॉर्म के विस्तार का मुख्य आधार रहा है।

फ्री होने के बावजूद क्यों उठ रहे हैं फंडिंग और लागत से जुड़े सवाल?

अगर ग्राहकों और छोटे व्यापारियों से कोई चार्ज नहीं लिया जा रहा है, तो फिर UPI पर खर्च कौन उठा रहा है? PCI ने स्पष्ट किया है कि भले ही यह सेवा यूजर्स के लिए मुफ्त है लेकिन इसका इंफ्रास्ट्रक्चर मुफ्त में काम नहीं करता। UPI इकोसिस्टम को चलाने के लिए टेक्नोलॉजी, साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी की रोकथाम, कंप्लायंस, कस्टमर सपोर्ट और इनोवेशन में लगातार इन्वेस्टमेंट की जरूरत होती है। पिछले लगभग एक दशक में बैंकों, पेमेंट कंपनियों, फिनटेक फर्मों, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मिलकर इस नेटवर्क को बनाने और इसे बनाए रखने में भारी निवेश किया है। PCI के मुताबिक यह बहस किसी यूजर के रोजमर्रा के ट्रांजैक्शन पर फीस लगाने के बारे में नहीं है बल्कि ट्रांजैक्शन वॉल्यूम बढ़ने के साथ पेमेंट सिस्टम के सस्टेनेबल फंडिंग को लेकर है।

मर्चेंट सर्विस चार्ज को लेकर क्या है स्थिति?

सीएनबीसी टीवी 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, मर्चेंट सर्विस चार्ज (जहां लागू हो) व्यापारियों और उनके पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स के बीच की वाणिज्यिक व्यवस्था होती है। ऐसे किसी भी शुल्क का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि आम ग्राहकों को UPI का इस्तेमाल करने के लिए पैसे देने पड़ेंगे। UPI अब सिर्फ एक पेमेंट ऑप्शन नहीं रह गया है बल्कि यह भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का एक अहम हिस्सा बन चुका है। इसका इस्तेमाल करोड़ों आम लोग और बिजनेस कर रहे हैं। 24×7 सुरक्षित, मजबूत और बिना किसी बाधा के सर्विस देने के लिए साइबर सुरक्षा और टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन पर लगातार फंडिंग की जरूरत होती है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का स्पष्टीकरण और संसद का नया विधेयक

UPI पर MDR और चार्जेस को लेकर हाल ही में उठी आशंकाओं पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि भविष्य में अगर कभी MDR पेश किया भी जाता है तो वह मर्चेंट्स (व्यापारियों) पर लागू होगा, ग्राहकों पर नहीं। यह स्पष्टीकरण टैक्सेशन और दूसरे कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 के बाद पैदा हुई चिंताओं के जवाब में आया है। हालांकि इस विधेयक के तहत UPI ट्रांजैक्शन पर कोई MDR या नई फीस लागू नहीं की गई है। यह बिल सिर्फ एक कानूनी ढांचा तैयार करता है, जो सरकार को भविष्य की अधिसूचनाओं के माध्यम से मौजूदा जीरो-MDR व्यवस्था में संशोधन करने का अधिकार देता है।

MDR क्या होता है और आगे क्या होगा?

MDR वह शुल्क होता है जो पेमेंट लेने वाला व्यापारी देता है, न कि पेमेंट करने वाला ग्राहक। आमतौर पर यह शुल्क ट्रांजैक्शन प्रोसेस करने वाले अधिग्रहणकर्ता बैंक, जारीकर्ता बैंक, पेमेंट नेटवर्क और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स के बीच बांटा जाता है। बैंकों और पेमेंट कंपनियों ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सुरक्षा और सिस्टम अपग्रेडेशन के बढ़ते खर्चों पर चिंता जताई है। वित्त मंत्री ने जानकारी दी है कि संसद द्वारा विधेयक पारित किए जाने के बाद ही NPCI की अध्यक्षता वाली UPI और सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी इस मुद्दे की समीक्षा करेगी। फिलहाल आम UPI यूजर्स के लिए कोई बदलाव नहीं हुआ है और जीरो-कॉस्ट पेमेंट की मौजूदा व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी।

क्या UPI पेमेंट पर चार्ज देना होगा? आखिर पेमेंट सिस्टम का बोझ कौन उठाएगा, RBI गवर्नर ने समझाया

UPI Payment Charge: क्या आने वाले समय में ₹2,000 से ऊपर के UPI पेमेंट पर चार्ज लग सकता है? इस सवाल पर RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि अभी इस बारे में कुछ कहना जल्दबाजी होगी। उन्होंने साफ किया कि पेमेंट सिस्टम चलाने की लागत किसी न किसी को उठानी ही पड़ती है। अब यह सरकार उठाएगी, कारोबारी या किसी और पर इसका बोझ आएगा, इस पर अभी फैसला नहीं हुआ है।

क्या अभी UPI पर कोई चार्ज लगेगा?

अभी नहीं। सरकार ने ग्राहकों, दुकानदारों या किसी भी तरह के UPI ट्रांजैक्शन पर कोई नया चार्ज लागू नहीं किया है। टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 में भी UPI पर MDR लगाने या ₹2,000 की सीमा तय करने का कोई प्रावधान नहीं है।

हालांकि, सरकारी अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि सरकार कारोबारियों को किए जाने वाले ₹2,000 से ऊपर के UPI पेमेंट पर 0.5% से कम MDR की अनुमति दे सकती है। फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है।

MDR क्या होता है?

MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है, जो डिजिटल पेमेंट प्रोसेस करने के बदले कारोबारी बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को देता है। यह सीधे ग्राहक से नहीं लिया जाता।

बिल में क्या बदलाव प्रस्तावित है?

अभी कानून के तहत UPI और RuPay डेबिट कार्ड जैसे कुछ डिजिटल पेमेंट मोड पर MDR नहीं लगाया जा सकता। नए बिल में सरकार को यह अधिकार देने का प्रस्ताव है कि वह तय करे किन डिजिटल पेमेंट माध्यमों पर जीरो-MDR जारी रहेगा और किन पर नहीं।

अगर यह बिल कानून बन जाता है, तो सरकार बाद में अलग से नियम बनाकर कुछ कैटेगरी के ट्रांजैक्शन पर MDR लागू कर सकती है।

₹2,000 की सीमा क्यों चर्चा में है?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ₹2,000 से ऊपर के UPI ट्रांजैक्शन कुल लेनदेन की संख्या का सिर्फ करीब 5% हैं, लेकिन इनकी वैल्यू लगभग 65% है। इसलिए सरकार इस कैटेगरी पर MDR लगाने के विकल्प पर विचार कर रही है। हालांकि, इस सीमा या दर को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

सरकार ने पहले MDR क्यों हटाया था?

सरकार ने जनवरी 2020 में UPI और RuPay डेबिट कार्ड पर MDR को जीरो कर दिया था। इसका मकसद डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देना था। बाद में बैंकों और पेमेंट कंपनियों को कुछ ट्रांजैक्शन पर प्रोत्साहन राशि भी दी गई।

हाल के महीनों में संसदीय समिति, बैंक और पेमेंट कंपनियां यह मांग कर रही हैं कि UPI नेटवर्क चलाने की लागत के लिए एक टिकाऊ रेवेन्यू मॉडल बनाया जाए। फिलहाल अंतिम फैसला सरकार को ही करना है।

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