यूपीआई पर शुल्क लगाने का फैसला टला

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने यूपीआई के जरिए होने वाले डिजिटल लेन देन पर शुल्क लगाने का फैसला टाल दिया है। दो हजार रुपए से ज्यादा के लेनदेन पर 0.40 फीसदी शुल्क लगाने का फैसला 15 अक्टूबर से लागू होने वाला था। लेकिन देश भर में हो रहे विरोध की वजह से सरकार ने इस फैसले के अमल पर दिवाली तक रोक लगा दिया है। नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी एनपीसीआई ने त्योहारी सीजन को देखते हुए इसे टालने का फैसला लिया है।

एनपीसीआई ने कहा है कि इसे दिवाली के तुरंत बाद लगाया जाएगा, हालांकि अभी तारीख नहीं बताई है। गौरतलब है कि सरकार ने पिछले महीने फैसला किया था कि अगर ग्राहक दुकानदार को दो हजार रुपए से ज्यादा का यूपीआई पेमेंट करता है, तो दुकानदार को कुल रकम पर 0.4 फीसदी एमडीआर शुल्क देना होगा। हालांकि दो लोगों के बीच नकद लेनदेन को इस शुल्क से अलग रखा गया था।

यह भी बताया गया था कि 75 हजार रुपए या उससे ज्यादा का भुगतान करने पर अधिकतम तीन सौ रुपए का फिक्स्ड चार्ज लगेगा। इसके साथ ही रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस या ईंधन पर दो हजार रुपए से ज्यादा के भुगतान पर पांच रुपए  का फिक्स्ड चार्ज तय किया गया था। बताया जा रहा है कि दशहरा औऱ दिवाली के दौरान देश भर के बाजारों में कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, गहने और सामानों की भारी बिक्री होती है। ऐसे में डिजिटल पेमेंट बढ़ जाता है।

कारोबारी संगठनों और पेमेंट कंपनियों का मानना था कि त्योहारों के बीच नया नियम लागू करने से दुकानों पर पेमेंट में रुकावट आ सकती है। व्यापारी संगठनों ने इसका खुल कर विरोध किया और यह भी कहा कि नकद लेनदेन बढ़ने पर छापेमारी की कार्रवाई तेज हो सकती है। तभी व्यापारियों के विरोध की वजह से एनपीसीआई ने दिवाली तक इस फैसले को आगे बढ़ा दिया है।

अप्रैल-सितंबर में 27% बढ़े UPI ट्रांजेक्शन, ₹177 लाख करोड़ पर पहुंची वैल्यू

UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) के जरिए लेनदेन की संख्या चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही यानि कि अप्रैल-सितंबर 2026 में 27 प्रतिशत बढ़कर करीब 145 अरब हो गई। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में UPI के जरिए 114 अरब लेनदेन हुए थे। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-सितंबर 2026 के दौरान UPI के जरिए 177 लाख करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ। यह आंकड़ा एक साल पहले के 148 लाख करोड़ रुपये से 20 प्रतिशत ज्यादा है।

हालांकि सितंबर में UPI के जरिए लेनदेन मासिक आधार पर 1.8 प्रतिशत घटकर 2,407 करोड़ रहा। अगस्त में UPI के जरिए 2,450 करोड़ लेनदेन हुए थे। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में UPI के जरिए लेनदेन की कुल वैल्यू भी 1.50 प्रतिशत घटकर 29.37 लाख करोड़ रुपये रही, जो अगस्त में 29.82 लाख करोड़ रुपये थी। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि लेनदेन में गिरावट का कारण अगस्त में 31 दिन और सितंबर में 30 दिन होना है। सितंबर में प्रतिदिन औसत लेनदेन 80.2 करोड़ रहा, जबकि अगस्त में यह 79.1 करोड़ था।

15 अक्टूबर से 2000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन पर MDR

सरकार ने 15 अक्टूबर 2026 से मर्चेंट्स के लिए 2,000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू किया है। छोटे पेमेंट्स पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। दो व्यक्तियों के बीच (पर्सन टू पर्सन) लेनदेन फ्री रहेगा, फिर चाहे भेजी गई राशि कितनी भी हो। UPI QR कोड के जरिए महीने में 1 लाख रुपये तक पेमेंट लेने वाले छोटे मर्चेंट किसी भी नए चार्ज से पूरी तरह मुक्त रहेंगे।

75,000 रुपये और उससे अधिक के लेन-देन के लिए, MDR की मैक्सिमम लिमिट प्रति लेन-देन 300 रुपये तक ही रहेगी। रेलवे, टेलिकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट सहित आवश्यक और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के लेन-देन पर प्रति लेनदेन 5 रुपये का एकसमान MDR लागू होगा। म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज और शेयर ब्रोकर व डीलर के जरिए किए जाने वाले पेमेंट पर 0.02 प्रतिशत MDR लगेगा, जो अधिकतम 300 रुपये होगा।

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ऐसे बंटेगी MDR की रकम

MDR लगाने का मकसद डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम के लिए एक टिकाऊ रेवेन्यू सिस्टम बनाना है। MDR वह फीस है, जो मर्चेंट डिजिटल ट्रांजेक्शन को प्रोसेस करने के लिए पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को देते हैं। इकट्ठा की गई रकम को UPI इकोसिस्टम में बैंकों और दूसरी एंटिटीज के बीच बांटा जाएगा। इकट्ठा किए गए कुल MDR का 40% ग्राहकों के बैंकों को, 30% पेमेंट गेटवे को, 20% UPI ऐप को और बाकी 10% UPI ऐप के स्पॉन्सर बैंक को जाएगा।

व्यापारी 2 अक्टूबर ‘नो UPI डे’ नहीं मनाएंगे, वित्त मंत्री से मुलाकात के बाद विरोध का फैसला वापस लिया

UPI No Day: व्यापारियों के बड़े संगठनों ने 2 अक्टूबर को ‘नो UPI डे’ मनाने का ऐलान वापस ले लिया है। बुधवार को व्यापारिक नेताओं ने दिल्ली में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की। इसके बाद यह फैसला लिया गया।

हालांकि, ₹2,000 से ज्यादा के मर्चेंट UPI पेमेंट पर प्रस्तावित 0.4% फीस अभी भी 15 अक्टूबर से लागू होनी है। इसी फीस के विरोध में ‘नो UPI डे’ का ऐलान किया गया था।

20 व्यापारिक नेताओं से मीटिंग

इस बैठक में करीब 20 वरिष्ठ व्यापारिक नेता शामिल हुए। वे अलग-अलग राज्यों से आए थे। उन्होंने छोटे और मझोले कारोबारियों पर फीस के असर की चिंता जताई।

प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई चांदनी चौक से सांसद और Confederation of All India Traders (CAIT) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने की।

‘नो UPI डे’ का ऐलान किसने किया था?

All India Consumer Products Federation और All India Mobile Retailers Association ने 2 अक्टूबर को ‘नो UPI डे’ मनाने का ऐलान किया था। अब दोनों संगठनों ने यह फैसला वापस ले लिया है।

प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि वित्त मंत्री के साथ बातचीत सकारात्मक रही। सरकार ने व्यापारियों की चिंताओं पर विचार करने का भरोसा दिया है। इसके बाद दोनों संगठनों ने विरोध वापस लेने का फैसला किया।

UPI फीस टालने की मांग

व्यापारिक संगठनों ने प्रस्तावित MDR को फिलहाल टालने की मांग की है। उनका कहना है कि त्योहारों का सीजन आने वाला है। इस दौरान कारोबार काफी बढ़ जाता है।

ऐसे समय में नई फीस लागू होने से कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। इसलिए उन्होंने फीस लागू करने की तारीख आगे बढ़ाने की मांग की है।

₹1 लाख की सीमा बढ़ाने की मांग

व्यापारियों ने प्रस्तावित ₹1 लाख की सीमा की भी समीक्षा करने को कहा है। उनका सुझाव है कि इसे बढ़ाकर ₹5 लाख किया जाए।

इसके अलावा मर्चेंट टु मर्चेंट यानी M2M ट्रांजैक्शन को MDR के दायरे से बाहर रखने की मांग की गई है। व्यापारियों ने इस मामले को देखने के लिए एक विशेष समिति बनाने की मांग भी की है।

व्यापारियों ने सरकार से क्या कहा?

व्यापारियों ने कहा कि प्रस्तावित MDR का असर छोटे और मझोले कारोबारियों पर पड़ सकता है। उनका कहना है कि डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।

ऐसे में फीस की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिससे डिजिटल पेमेंट की रफ्तार न रुके। साथ ही कारोबारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी न पड़े।

UPI के खिलाफ नहीं हैं व्यापारी

व्यापारिक नेताओं ने कहा कि वे डिजिटल पेमेंट के खिलाफ नहीं हैं। उन्होंने Digital India मिशन और UPI की सफलता के लिए अपना समर्थन दोहराया।

उनका कहना है कि डिजिटल पेमेंट से जुड़े नियम उपभोक्ताओं और कारोबारियों दोनों के लिए संतुलित होने चाहिए। साथ ही इनसे कारोबार की ग्रोथ में भी मदद मिलनी चाहिए।

व्यापारियों को उम्मीद है कि सरकार के साथ बातचीत आगे भी जारी रहेगी। इससे डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने वाला ऐसा सिस्टम बन सकता है, जिसमें कारोबारियों और MSMEs पर ज्यादा बोझ न पड़े।

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यूपीआई शुल्क पर रोक से इनकार

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने यूपीआई के जरिए होने वाले लेनदेन पर शुल्क लगाने के केंद्र सरकार के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि सर्वोच्च अदालत ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है और यह पूछा है कि शुल्क लगाने के नए नियम को लागू करने का क्या आधार है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने यूपीआई के जरिए होने वाले दो हजार रुपए से ऊपर के लेनदेन पर 0.40 फीसदी शुल्क लगा दिया है। यह 15 अक्टूबर से लागू होगा।

इसे लेकर एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की तीन जजों की बेंच ने सुनवाई की। वकील अंजन दत्ता ने यह जनहित याचिका दायर की है। इस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सरकार के फैसले पर रोक लगाने से इनकार किया और सरकार को नोटिस जारी किया।

याचिका में सवाल उठाया गया है कि दो हजार रुपए की सीमा किस आधार पर तय की गई है? इसके अलावा यह भी पूछा गया है कि यूपीआई और रूपे कार्ड के लिए नियम अलग क्यों हैं? याचिका में इसे रद्द करने की मांग की गई है। एडवोकेट अंजन दत्ता की याचिका में यह भी कहा गया कि सरकार ने जनता से चर्चा किए बिना और कोई ठोस नियम बनाए बिना ही यह फीस तय कर दी। इसके अलावा, ‘पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007’ के एक नियम को भी अदालत में चुनौती दी गई। आरोप है कि यह नियम सरकार को अपनी मर्जी से यह फैसला करने की छूट देता है कि कौन सा डिजिटल पेमेंट फ्री रहेगा और किस पर चार्ज लगेगा।

बहरहाल, सोमवार की सुनवाई में सरकार की तरफ से एडिशनल सॉलिसीटर जनरल एन वेंकटरमण ने कहा कि आम लोगों के आपस में पैसे भेजने पर चार्ज नहीं लगेगा। उन्होंने यह भी कहा कि देश के करीब 96 फीसदी छोटे भुगतानों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि 0.40 फीसदी का शुल्क भी ग्राहकों को नहीं देना होगा, बल्कि दुकानदार को देना होगा।

दो अक्टूबर को देश भर में ‘नो यूपीआई डे’

नई दिल्ली। महात्मा गांधी की जयंती दो अक्टूबर को देश भर के व्यापारी सरकार के खिलाफ सविनय अवज्ञा आंदोलन करेंगे। व्यापारियों ने तय किया है कि वे दो अक्टूबर को यूपीआई से कोई पेमेंट नहीं लेंगे। व्यापारियों ने ‘नो यूपीआई डे’ मनाने का फैसला किया है। इसमें देश भर के तमाम बड़े व्यापारी संगठन शामिल होंगे इसलिए इसका असर व्यापक होगा। व्यापारियों ने दो हजार रुपए से ज्यादा के लेनदेन पर 0.4 फीसदी चार्ज के विरोध में यह फैसला किया है।

बताया गया है कि दो अक्टूबर को व्यापारी अपनी दुकानों पर लगे यूपीआई क्यूआर कोड, स्कैनर, साउंड बॉक्स और अन्य डिजिटल पेमेंट डिवाइसेस को काले कपड़े से ढक कर विरोध जताएंगे। व्यापारियों ने सरकार से 15 अक्टूबर से लागू होने जा रहे चार्ज को हटाने की मांग है। महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर के अध्यक्ष रवींद्र मंगवे ने बताया कि यह आंदोलन सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश भर के पांच सौ से ज्यादा प्रमुख व्यापारी संगठन इसमें हिस्सा लेंगे।

बाद में खबर आई कि ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन, फेडरेशन ऑफ रिटेल ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन, ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन, ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन और अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ ने इस अभियान में शामिल होने का ऐलान किया है।

व्यापारियों का कहना है कि खुदरा व्यापारी और डिस्ट्रीब्यूटर कम मार्जिन पर काम करते हैं। ऐसे में डिजिटल लेनदेन पर अतिरिक्त चार्ज लगाने से लागत बढ़ेगी। उनका कहा है कि डिजिटल लेनदेन का मकसद भुगतान की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए होना चाहिए, व्यापारियों पर बोझ डालना के लिए नहीं। उन्होंने यह भी कहा है कि यूपीआई से कैश का चलन घटा है। व्यापारी सिस्टम को पारदर्शी बनाने में सहयोग कर रहे, तो उन पर शुल्क लगाना सही नहीं। उनका कहना है कि डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने के बजाय व्यापारियों पर चार्ज लगाना सजा देने जैसा है। उन्होंने चार्ज वापस नहीं लेने पर आंदोलन तेज करना का ऐलान भी किया है।

UPI MDR Charges: सरकार 15 अक्टूबर की डेडलाइन नहीं बढ़ाएगी, 18% GST का हो सकता है रिव्यू

UPI MDR Charges: सरकार UPI के चुनिंदा ट्रांजैक्शन पर MDR लागू करने की 15 अक्टूबर की तारीख को आगे बढ़ाने के मूड में नहीं है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, तय तारीख से ही नया सिस्टम लागू होगा। हालांकि, MDR पर लगने वाले 18% GST को लेकर GST काउंसिल समीक्षा कर सकती है।

7 अक्टूबर की बैठक में क्या होगा?

MDR पर GST का मुद्दा फिलहाल 7 अक्टूबर को होने वाली GST काउंसिल की बैठक के एजेंडे में नहीं है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि बैठक के दौरान काउंसिल इस मुद्दे को उठा सकती है। यानी अभी यह तय नहीं है कि GST पर कोई फैसला होगा या नहीं।

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब कारोबारियों के बीच MDR को लेकर चिंता है। उनका मानना है कि इससे मर्चेंट्स पर लागत बढ़ सकती है। साथ ही, पूरे UPI ट्रांजैक्शन सिस्टम की लागत पर भी इसका असर पड़ सकता है।

सरकार क्यों ला रही है MDR?

सरकार ने MDR लागू करने का बचाव किया है। सरकार का कहना है कि UPI इकोसिस्टम को चलाने में काफी खर्च होता है। मौजूदा MDR उस पूरी लागत की भरपाई नहीं करता।

सरकारी सूत्रों ने कहा कि UPI पर MDR से इकोसिस्टम को बनाए रखने की लागत की 100% भरपाई नहीं होती। सरकार के मुताबिक, UPI ट्रांजैक्शन बढ़ने के साथ टिकाऊ रेवेन्यू मॉडल की जरूरत भी बढ़ रही है।

₹2,000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR

नए सिस्टम के तहत ₹2,000 से ज्यादा के चुनिंदा UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR लगाया जाएगा। हालांकि, एक ट्रांजैक्शन पर इसकी अधिकतम सीमा ₹300 होगी।

MDR की दरें Indian Banks’ Association (IBA) ने संबंधित पक्षों से चर्चा के बाद तय की हैं। यानी इस दर को तय करने की प्रक्रिया में अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स से सलाह ली गई है।

ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा कोई चार्ज

सरकार ने साफ किया है कि UPI से पेमेंट करने वाले ग्राहकों से कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा। यानी आम ग्राहक पहले की तरह UPI के जरिए पेमेंट कर सकेंगे।

वहीं, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति यानी P2P ट्रांजैक्शन भी फ्री रहेंगे। नया MDR चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लागू होगा।

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PhonePe Rural India Plan: फोनपे में निकलेंगी 20000 नौकरियां! भारत के गांव-देहात में विस्तार के लिए कंपनी का बड़ा प्लान

PhonePe Rural India Plan: डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म फोनपे ने गुरुवार को अगले साल भारत के छोटे शहरों और गांवों में अपने बुनियादी ढांचे को और गहराई तक पहुंचाने की योजना की घोषणा की। इसके तहत डिजिटल पेमेंट कंपनी अपने मर्चेंट नेटवर्क को बढ़ाने के लिए 20,000 ऑन-रोल सेल्स कर्मचारियों की भर्ती करेगी। कंपनी अगले 12 महीनों में 50 लाख से अधिक पेमेंट डिवाइस भी लगाएगी। इनमें स्मार्टस्पीकर और पीओएस डिवाइस शामिल होंगे। इनमें से करीब 50% डिवाइस ग्रामीण भारत में लगाए जाएंगे। इससे टियर-6 कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की सुविधा और गहराई तक पहुंचेगी।

वॉलमार्ट के समर्थन वाली कंपनी फोनपे का यह कदम भारत के एनपीसीआई के उस फैसले के बाद आया है जिसमें चुनिंदा यूपीआई मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% शुल्क लगाने का फैसला किया गया है। इसका एक हिस्सा कम सेवा वाले इलाकों में छोटे व्यापारियों के बीच डिजिटल पेमेंट की स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए रखा जाएगा। फोनपे ने कहा, “हाल ही में घोषित एमडीआर ढांचा कंपनी को लंबे समय का नजरिया रखने और मर्चेंट बढ़ाने में निवेचश करने की इजाजत देता है।” अगस्त तक, फोनपे के भुगतान नेटवर्क में 72 करोड़ से अधिक पंजीकृत यूजर और 5 करोड़ से ज्यादा मर्चेंट शामिल थे।

पिछले साल लागू किए गए नए श्रम संहिताएं भी कंपनी को प्रक्रियाओं को सरल बनाकर तेजी से भर्ती करने में सक्षम बना रही हैं। इससे बड़ी संख्या में ऑन-रोल कर्मचारियों को आसानी से कंपनी में शामिल करने में मदद मिल रही है। भारत ने दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम में से एक तैयार किया है। इस यात्रा के अगले चरण में देश के हर हिस्से के छोटे कारोबारियों को डिजिटल अर्थव्यवस्था में भाग लेने में सक्षम बनाने वाले मर्चेंट पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार निवेश की जरूरत होगी।

फोनपे का प्रस्तावित विस्तार इसी अवसर को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। काफी बड़े फ्रंटलाइन ऑन-रोल कार्यबल की मदद से फोनपे छोटे कस्बों और गांवों में कारोबारियों तक पहुंच सकेगा, उन्हें डिजिटल भुगतान से जोड़ सकेगा, केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर सकेगा, पेमेंट डिवाइस लगा सकेगा और कारोबारियों को लगातार सहायता प्रदान कर सकेगा।

इस विस्तार से लाखों छोटे कारोबारियों को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से और अधिक जोड़ने में भी मदद मिलेगी। डिजिटल रूप से सक्रिय और केवाईसी-अनुपालन वाला मर्चेंट नेटवर्क कारोबारी गतिविधियों को अधिक स्पष्ट रूप से सामने ला सकता है और पात्र कारोबारियों को औपचारिक वित्तीय सेवाओं की व्यापक रेंज तक पहुंच उपलब्ध करा सकता है। इसमें ऋण देने वाली संस्थाओं द्वारा प्रदान किए जाने वाले कर्ज भी शामिल हैं।

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No UPI Day

No UPI Day : डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के बाद अब इस पर लगने वाले संभावित शुल्कों को लेकर व्यापारियों का गुस्सा फूट पड़ा है। मध्य प्रदेश में आज (बुधवार) व्यापारी संगठन ‘नो UPI डे’ मना रहे हैं। यह विरोध मुख्य रूप से 2,000 रुपए से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) या अन्य शुल्कों को थोपे जाने के खिलाफ किया जा रहा है। ALSO READ: UPI चार्ज के विरोध में व्यापारी इंदौर में शुरू करेंगे डिजिटल अभियान, 125 संगठन हुए एकजुट, 10 लाख लोगों तक पहुंचने का टारगेट

 

राज्यभर के बाजारों में व्यापारी अपने यूपीआई पेमेंट स्कैनर को काले कपड़े से ढककर अपना विरोध जता रहे हैं। कारोबारियों का कहना है कि थोक किराना और अन्य बाजारों में 90 फीसदी से ज्यादा ट्रांजैक्शन 2,000 रुपए से ऊपर के होते हैं। सरकार और बैंकिंग प्रणाली ने पहले ग्राहकों और व्यापारियों को कैशलेस बिजनेस की आदत डाली और अब इस तरह के शुल्क वसूले जा रहे हैं, जो पूरी तरह अनुचित है।

 

अनुमान के मुताबिक, सिर्फ MDR शुल्क के रूप में भोपाल के कारोबारियों पर 663.152 करोड़ रुपये और इंदौर के कारोबारियों पर करीब 2,265 करोड़ रुपये के भुगतान पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, जिससे व्यापारी काफी आक्रोशित हैं। ALSO READ: MP के पेट्रोल पंपों पर 2 हजार से ज्यादा के पेमेंट UPI से नहीं, नए नियमों के बाद पंप डीलर्स का फैसला

 

इन सेक्टरों पर पड़ेगा सबसे बुरा असर

व्यापारी संगठनों का मानना है कि इस नए शुल्क का सबसे भारी नुकसान उन व्यवसायों को उठाना पड़ेगा जिनमें मुनाफा या मार्जिन पहले से ही बहुत कम होता है। इनमें मुख्य रूप से किराना, पेट्रोल-डीजल, इलेक्ट्रॉनिक्स, अनाज और मोबाइल व्यापार शामिल हैं। कारोबारियों के मुताबिक, यदि ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत तक का शुल्क कटता है, तो उनका सारा मुनाफा इसी में खत्म हो जाएगा। ALSO READ: इतने विरोध के बाद भी सरकार UPI Charge पर क्यों अड़ी है? समझिए 2000 से ऊपर MDR फीस का गणित

 

पेट्रोल पंपों पर भी गूंजेगा विरोध

इस विरोध प्रदर्शन की आंच आने वाले दिनों में और तेज होने वाली है। व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि यह फैसला वापस नहीं लिया गया, तो आगामी 16 अक्टूबर से मध्य प्रदेश के सभी 4,700 पेट्रोल पंपों पर भी 2,000 रुपए से अधिक के यूपीआई भुगतान का कड़ा विरोध किया जाएगा। इस आर्थिक बोझ को लेकर व्यापारियों में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिल रहा है।

Indian Oil ने किया खारिज, 23 सितंबर को नहीं है कोई No-UPI Day, ये है पूरा मामला

Indian Oil on No-UPI Day: तेल बेचने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी इंडियन ऑयल इंडियन ऑयल ‘नो-यूपीआई डे’ को लेकर सफाई दी है। कंपनी का कहना है कि मध्य प्रदेश के इंदौर में 23 सितंबर को बिना यूपीआई के तेल बेचने वाली बात पूरी तरह आधारहीन है और पेट्रोल पंप मालिकों ने ऐसा कुछ नहीं कहा है। इंडियन ऑयल ने यह बात शनिवार 19 सितंबर को X (पूर्व नाम Twitter) पर कही। बता दें कि 15 अक्टूबर से कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन के लिए यूपीआई पेमेंट से जुड़े नियमों में बदलाव होने वाला है। नए नियमों के तहत ग्राहक बिना कोई फीस दिए यूपीआई से पेमेंट कर सकेंगे तो ₹2,000 से अधिक के कुछ खास मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगेगा।

क्या है No-UPI Day से जुड़ा पूरा मामला

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया गया है कि मध्य प्रदेश के इंदौर में पेट्रोल पंप मालिकों ने 23 सितंबर को ‘नो-UPI डे’ मनाने का ऐलान किया है। अब इंडियन ऑयल ने इसे फर्जी बताया है। वायरल पोस्ट में दावा किया गया है कि पेट्रोल पंप वाले मर्चेंट फीस के विरोध में ₹2 हजार से अधिक के यूपीआई पेमेंट नहीं ले रहे और 23 सितंबर को ‘नो-यूपीआई डे’ मनाएंगे। इंडियन ऑयल का कहना है कि यह वायरल मैसेज फर्जी और गुमराह करने वाला है और मध्य प्रदेश में पेट्रोल पंप मालिकों ने ₹2,000 से अधिक के UPI पेमेंट पर ऐसी कोई पाबंदी लगाने का ऐलान नहीं किया है। कंपनी का कहना है कि पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन लगातार मिनिस्ट्री के अधिकारियों के संपर्क में हैं और ‘नो-यूपीआई डे’ जैसा कुछ ऐलान नहीं हुआ है बल्कि पेट्रोल पंप डीलर्स तो डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने में सबसे आगे रहे हैं।

कैसी है इंडियन ऑयल के शेयरों की हालत

इंडियन ऑयल के शेयर शुक्रवार 18 सितंबर को बीएसई पर 2.01% की बढ़त के साथ ₹136.80 के भाव पर बंद हुए थे। इस साल इसने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया है। 27 फरवरी 2026 को बीएसई पर यह ₹188.90 पर था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से दो ही महीने में यह 31.02% टूटकर 2 अप्रैल 2026 को ₹130.30 पर आ गया था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।

UPI पर ट्रांजेक्शन चार्ज को लेकर दुविधा में हैं? तो यहां जानें अपने हर सवाल का पूरा जवाब

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

अब डिजिटल पेमेंट के खिलाफ अभियान

भारत में सब कुछ अतिवादी अंदाज में होता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2016 में नोटबंदी की और पांच सौ व एक हजार रुपए को नोट चलन से बाहर किए तब भाजपा और सरकार की ओर से संस्थागत रूप से नकदी को बुरा बताने का अभियान चला था। यह प्रचार होता था कि नकद लेनदेन करना बहुत बुरी बात है और देशभक्त लोगों को डिजिटल लेनदेन करना चाहिए। हालांकि उस समय तक डिजिटल लेनदेन का इकोसिस्टम बहुत मजबूत नहीं था। लोगों को बड़ी परेशानी थी। फिर लोगों ने शुरू किया। लंबे समय तक कैश को डेमोनाइज करने यानी बुरा बताने का व्यवस्थित अभियान चला।

अब जब केंद्र सरकार ने यूपीआई के जरिए होने वाले लेनदेन पर शुल्क लगाने का फैसला किया है तो इसी तरह का एक दूसरा अभियान शुरू हो गया। अब डिजिटल लेनदेन को बुरा या नुकसान वाला बताने का अभियान शुरू हुआ है। अब डिजिटल लेनदेन को डेमोनाइज किया जा रहा है। सोशल मीडिया में मीम्स बन रहे हैं, जिनमें कहा जा रहा है कि गोलगप्पे वाला नकद खरीदने पर 20 के पांच देगा और यूपीआई से खरीदने पर 20 से चार देगा। एक मीम बना कि ढाई हजार की खरीद पर दुकानदार ग्राहक को समझा रहा है कि 19 सौ यूपीआई से कर दीजिए और छह सौ नकद दे दीजिए। ऐसे ही व्यापारियों के एक बड़े समूह ने सरकार से अपील की है कि वह इस शुल्क को समाप्त करे नहीं तो वे डिजिटल लेनदेन का बहिष्कार करके सारे कामकाज नकदी में करने लगेंगे। तभी सरकार विपक्ष से ज्यादा सोशल मीडिया और आम व्यापारियों के विरोध के कारण परेशान हो गई है।