Digital India: 35,000 गांवों में हाई-स्पीड नेटवर्क के लिए मोदी सरकार का मास्टर प्लान! खर्च होंगे ₹15,000 करोड़

Govt To Spend ₹15000 Crore Telecom Connectivity: दूरदराज के इलाकों में नेटवर्क की पहुंच बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुरुवार को ‘इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026’ में घोषणा की कि सरकार देश के लगभग 35,000 गांवों में टेलीकॉम टावर लगाने के लिए ₹12,000 करोड़ से ₹15,000 करोड़ के बीच खर्च कर रही है।

संचार मंत्री ने स्पष्ट किया कि जिन इलाकों में टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर व्यापारिक दृष्टिकोण से फायदे का सौदा नहीं है, वहां सरकार को खुद आगे आकर निवेश करना पड़ रहा है ताकि कोई भी क्षेत्र कनेक्टिविटी से अछूता न रहे।

जहां फायदा नहीं, वहां सरकार खुद करेगी निवेश

मंत्री सिंधिया ने इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरिंग और इंटर-ऑपरेबिलिटी पर जोर देते हुए कहा, ‘हर क्षेत्र रिटर्न या मुनाफा देने वाला नहीं हो सकता। कई दूरदराज के इलाकों में पहुंच एक बड़ी चुनौती है, जहां निजी कंपनियां मुनाफा न होने के कारण नेटवर्क नहीं लगा पातीं। ऐसे क्षेत्रों में सरकार का आगे आना अनिवार्य है और हमने यही काम किया है।’

ग्राहकों को ध्यान में रखकर स्पेक्ट्रम रिफार्मिंग

संचार मंत्री ने कहा कि सरकार स्पेक्ट्रम के बेहतर और सही इस्तेमाल के लिए ‘स्पेक्ट्रम रिफार्मिंग’ पर काम कर रही है। इससे मौजूदा स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा।

हाईवे की तरह बनेगा टेलीकॉम नेटवर्क

नेविगेशन और नेटवर्क कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए ‘मिडिल माइल’ इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण पर बल दिया गया। सिंधिया ने सरकार की भूमिका की तुलना हाईवे निर्माण से करते हुए कहा, ‘जैसे सरकार का काम हाईवे बनाना है, वैसे ही टेलीकॉम में हमारा काम ‘मिडिल माइल’ तैयार करना है। इसके बाद हमारा अगला कदम यह सुनिश्चित करना है कि लोग इस नेटवर्क हाईवे का सही और प्रभावी ढंग से इस्तेमाल कर सकें।’

भारतनेट और 4G सैचुरेशन स्कीम का विस्तार

संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के तहत सरकार ने ₹1.40 लाख करोड़ का बजट तय किया है। इसका मकसद केवल ग्राम पंचायतों तक ही नहीं, बल्कि सीधे गांवों और घरों तक ब्रॉडबैंड कनेक्शन पहुंचाना है।

इससे पहले सरकार ने ‘4G सैचुरेशन स्कीम’ के तहत करीब 30,000 गांवों की पहचान की थी, जहां 21,000 टेलीकॉम टावर लगाने का लक्ष्य रखा गया था। इनमें से 17,000 टावर पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सुरक्षा के नियम

इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज और AI के प्रभाव पर बात करते हुए सिंधिया ने 2000 के दशक से पहले के आईटी दौर का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी अपने आप में एक जरिया है, लेकिन आप इसका इस्तेमाल कैसे करते हैं, उसी से आपकी उत्पादकता तय होती है।

सिंधिया ने सचेत करते हुए कहा कि AI के विस्तार से कुछ नकारात्मक परिणाम भी सामने आएंगे। इसके लिए एक ‘कॉमन मिनिमम प्रोग्राम’ की जरूरत है ताकि लोगों को टेक्नोलॉजी के गलत प्रभावों से बचाया और सुरक्षित रखा जा सके।

देश में 4G और 5G की मौजूदा स्थिति

IMC 2026 में डेटा साझा करते हुए सिंधिया ने बताया, भारत के 99% से अधिक गांवों में अब 4G कनेक्टिविटी पहुंच चुकी है। वहीं देश के 99.9% जिलों को 5G नेटवर्क से कवर कर लिया गया है। अब भारत का मुख्य फोकस केवल बुनियादी नेटवर्क देने तक सीमित नहीं है, बल्कि 5G, 6G और AI-सक्षम सेवाओं के लिए मजबूत आधार तैयार करना है।

पीएम मोदी ने कहा डीबीटी ने लगभग 5 लाख करोड़ रुपये गलत हाथों में जाने से बचाए, मोबाइल फोन बना गवर्नेंस का हिस्सा

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि भारत का मोबाइल और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर उम्मीद से ज्यादा विकसित हुआ है। यह अब शासन और सार्वजनिक सेवाओं की डिलीवरी का एक प्रमुख साधन बन गया है। सरकार के डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) सिस्टम के माध्यम से लगभग 5 लाख करोड़ रुपये गलत हाथों में जाने से बचाए गए हैं। नई दिल्ली के यशोभूमि में इंडिया मोबाइल कांग्रेस के 10वें संस्करण के उद्घाटन करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि सैकड़ों सरकारी सेवाएं अब मोबाइल फोन के माध्यम से उपलब्ध हैं और डीबीटी के परिणामस्वरूप 50 लाख करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों के खातों में जमा किए गए हैं।

पिछले दशक में टेलीकम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी की भूमिका में बदलाव पर प्रकाश डालते हुए पीएम मोदी ने कहा कि मोबाइल फोन सुशासन का एक उपकरण बन गया है। डीबीटी ने न केवल सरकारी पैसे के ट्रांसफर की सुविधा प्रदान की है बल्कि इस पैसे को गलत हाथों तक पहुंचने से रोकने में भी मदद की है।

जिन लोगों को पहले की व्यवस्था से फायदा हुआ था उनका जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि ऐसे लोगों ने कमाई खो दी है,उन्हें मोदी पसंद नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि बदलावों के विरोध के बावजूद,वह उन्हें लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और बचाए गए धन का इस्तेमाल अब सही उद्देश्य के लिए किया जा रहा है।

मोदी ने डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार और सार्वजनिक सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने में इसकी भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा मोबाइल फोन अब चैट का माध्यम नहीं रह गया है,लेकिन इससे यात्रा कम हो गई है, प्रतीक्षा का समय कम हो गया है और सुविधा अधिक हो गई है। यह देश के नागरिकों से टेक्नोलॉजी से मिलने वाला सबसे बड़ा फायदा है।

उन्होंने आगे कहा कि पिछले 10-12 सालों में मोबाइल फोन अपनी सिर्फ बातचीत की पारंपरिक भूमिका से काफी आगे बढ़ गए हैं और गरर्नेंस के लिए एक माध्यम बन गए हैं। उन्होंने कहा,एक दशक पहले डिजिटल विभाजन एक बड़ी चुनौती बना हुआ था। नई तकनीक तेजी से कुछ खास लोगों का विशेषाधिकार बनती जा रही थी। सरकार ने डिजिटल इंडिया के माध्यम से मोबाइल फोन को अपनी डिजिटल रणनीति का केंद्र बनाकर इसका जवाब दिया।

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि डीपफेक एक “बड़ी चुनौती” है और धोखाधड़ी और सुरक्षा जोखिमों से निपटने के लिए एक वैश्विक ढांचे की आवश्यकता है। उन्होंने इसके लिए एक समन्वित कार्रवाई का आह्वान किया क्योंकि डिजिटल खतरे तेजी से राष्ट्रीय सीमाओं को पार कर रहे हैं।

पीएम मोदी ने सरकारों, टेक्नोलॉजी कंपनियों, टेलीकॉम ऑपरेटरों और वित्तीय संस्थानों से साइबर धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत के पास ऐसे खतरों से निपटने का अनुभव है और वह अपनी सीख अन्य देशों के साथ साझा करने के लिए तैयार है।

व्यापारी 2 अक्टूबर ‘नो UPI डे’ नहीं मनाएंगे, वित्त मंत्री से मुलाकात के बाद विरोध का फैसला वापस लिया

UPI No Day: व्यापारियों के बड़े संगठनों ने 2 अक्टूबर को ‘नो UPI डे’ मनाने का ऐलान वापस ले लिया है। बुधवार को व्यापारिक नेताओं ने दिल्ली में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की। इसके बाद यह फैसला लिया गया।

हालांकि, ₹2,000 से ज्यादा के मर्चेंट UPI पेमेंट पर प्रस्तावित 0.4% फीस अभी भी 15 अक्टूबर से लागू होनी है। इसी फीस के विरोध में ‘नो UPI डे’ का ऐलान किया गया था।

20 व्यापारिक नेताओं से मीटिंग

इस बैठक में करीब 20 वरिष्ठ व्यापारिक नेता शामिल हुए। वे अलग-अलग राज्यों से आए थे। उन्होंने छोटे और मझोले कारोबारियों पर फीस के असर की चिंता जताई।

प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई चांदनी चौक से सांसद और Confederation of All India Traders (CAIT) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने की।

‘नो UPI डे’ का ऐलान किसने किया था?

All India Consumer Products Federation और All India Mobile Retailers Association ने 2 अक्टूबर को ‘नो UPI डे’ मनाने का ऐलान किया था। अब दोनों संगठनों ने यह फैसला वापस ले लिया है।

प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि वित्त मंत्री के साथ बातचीत सकारात्मक रही। सरकार ने व्यापारियों की चिंताओं पर विचार करने का भरोसा दिया है। इसके बाद दोनों संगठनों ने विरोध वापस लेने का फैसला किया।

UPI फीस टालने की मांग

व्यापारिक संगठनों ने प्रस्तावित MDR को फिलहाल टालने की मांग की है। उनका कहना है कि त्योहारों का सीजन आने वाला है। इस दौरान कारोबार काफी बढ़ जाता है।

ऐसे समय में नई फीस लागू होने से कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। इसलिए उन्होंने फीस लागू करने की तारीख आगे बढ़ाने की मांग की है।

₹1 लाख की सीमा बढ़ाने की मांग

व्यापारियों ने प्रस्तावित ₹1 लाख की सीमा की भी समीक्षा करने को कहा है। उनका सुझाव है कि इसे बढ़ाकर ₹5 लाख किया जाए।

इसके अलावा मर्चेंट टु मर्चेंट यानी M2M ट्रांजैक्शन को MDR के दायरे से बाहर रखने की मांग की गई है। व्यापारियों ने इस मामले को देखने के लिए एक विशेष समिति बनाने की मांग भी की है।

व्यापारियों ने सरकार से क्या कहा?

व्यापारियों ने कहा कि प्रस्तावित MDR का असर छोटे और मझोले कारोबारियों पर पड़ सकता है। उनका कहना है कि डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।

ऐसे में फीस की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिससे डिजिटल पेमेंट की रफ्तार न रुके। साथ ही कारोबारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी न पड़े।

UPI के खिलाफ नहीं हैं व्यापारी

व्यापारिक नेताओं ने कहा कि वे डिजिटल पेमेंट के खिलाफ नहीं हैं। उन्होंने Digital India मिशन और UPI की सफलता के लिए अपना समर्थन दोहराया।

उनका कहना है कि डिजिटल पेमेंट से जुड़े नियम उपभोक्ताओं और कारोबारियों दोनों के लिए संतुलित होने चाहिए। साथ ही इनसे कारोबार की ग्रोथ में भी मदद मिलनी चाहिए।

व्यापारियों को उम्मीद है कि सरकार के साथ बातचीत आगे भी जारी रहेगी। इससे डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने वाला ऐसा सिस्टम बन सकता है, जिसमें कारोबारियों और MSMEs पर ज्यादा बोझ न पड़े।

50 की उम्र घर खरीदना चाहिए या किराए के घर में रहने में है समझदारी?

Stocks to Watch: 9 लिस्टिंग्स समेत 28 स्टॉक्स फोकस में; Tata Steel, JSW Cement और KSB हैं लिस्ट में

Stocks to Watch: एशियाई बाजारों से मिले-जुले रुझानों के बीच गिफ्ट निफ्टी से आज घरेलू स्टॉक मार्केट में फ्लैट शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी फिलहाल 16.00 प्वाइंट्स यानी 0.07% की गिरावट के साथ 22,814.00 पर है। एक कारोबारी दिन पहले 29 सितंबर को निफ्टी और बैंक निफ्टी एक्सपायरी के दिन सेंसेक्स (Sensex) 242.65 प्वाइंट्स यानी 0.33% की गिरावट के साथ 72,529.07 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 64.05 प्वाइंट्स यानी 0.28% की फिसलन के साथ 22,716.20 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।

Stocks to Watch: आज इन स्टॉक्स पर फोकस

Avalon Technologies

सीएनबीसी-टीवी18 को सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक प्रमोटर ग्रुप भास्कर श्रीनिवासन, BBS फैमिली ट्रस्ट और KBS फैमिली ट्रस्ट ब्लॉक डील के जरिए एवलॉन टेक्नोलॉजीज में 6% तक की हिस्सेदारी बेच सकते हैं। ₹861.9 करोड़ के इस ऑफर के तहत ₹2,150–₹2,302 के भाव में शेयरों की बिक्री हो सकती है।

Power Mech Projects

पावर मेक प्रोजेक्ट्स को अदाणी ग्रुप के 2×600 MW मॉक्सी पावर जेनरेशन तूतीकोरिन TPP में ₹549.37 करोड़ का O&M (ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस) सर्विस ऑर्डर मिला है।

Ganesh Benzoplast

गणेश बेंजोप्लास्ट ने अपने लिक्विड स्टोरेज टैंक और रेलवे नेटवर्क बिजनेस को सिस्टर्निना लॉजिस्टिक्स को ₹1,154 करोड़ में बेचने के लिए डेफिनिटिव एग्रीमेंट किए हैं।

KSB

केएसबी को डैनगोट प्रोजेक्ट्स फ्री जोन एंटरप्राइज से बॉयलर फीड पंप पैकेज की सप्लाई के लिए ₹118 करोड़ तक का बड़ा एक्सपोर्ट ऑर्डर मिला है। इससे इंटरनेशनल फर्टिलाइजर और एनर्जी सेक्टर में कंपनी की मौजूदगी और मजबूत होगी।

ArisInfra Solutions

एरिसइंफ्रा की सब्सिडियरी एरिसयूनिटर्न आरई सॉल्यूशंस को मुंबई के कलिना में एक रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट ट्रांसकॉन यूनो को DaaS सर्विसेज देने का ऑर्डर मिला है। कंपनी की यह ऑर्डर ट्रांसकॉन ग्रुप की एक एसपीवी (स्पेशल पर्पज वेईकल) ट्रांसकॉन बेलावियू प्राइवेट लिमिटेड से मिला है। इसकी अनुमानित ग्रास डेवलपमेंट वैल्यू ₹400 करोड़ है।

Endurance Technologies

एंड्योरेंस टेक की इटैलियन सब्सिडियरी एंड्योरेंस ओवरसीज ने स्टोफर्ले की एंटिटीज स्टोफर्ले ऑटोमोटिव और स्टोफर्ले में बची हुई 32% हिस्सेदारी 1.8 करोड़ यूरो में खरीदने के लिए शेयर पर्चेज एग्रीमेंट में बदलाव किया है।

NLC India

एनएलसी इंडिया ने नालको के साथ-साथ आधी-आधी हिस्सेदारी के साथ एक ज्वाइंट वेंचर बनाने का ऐलान किया है। इसका उद्देश्य नालको की कैप्टिव पावर की जरूरतों को पूरा करने के लिए चरणबद्ध तरीके से 270-270 मेगावाट के चार यानी 1080 मेगावाट के थर्मल कैप्टिव पावर प्लांट बनाना है और साथ ही इसकी रिन्यूएबल एनर्जी की जरूरतों के लिए लॉन्ग-टर्म PPA (पावर पर्चेज एग्रीमेंट) के विकल्पों पर विचार करना है।

Prestige Estates Projects

प्रेस्टिज एस्टेट प्रोजेक्ट्स ने हैदराबाद में दो रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट पूरे किए हैं और 1,047 घरों की डिलीवरी कर दी है। इनमें प्रेस्टिज क्लेयरमोंट में 928 घर और बेलाजियो में 119 विला शामिल हैं। वहीं कनाडा पेंशन प्लान इंवेस्टमेंट बोर्ड (CPP इंवेस्टमेंट्स) ने प्रेस्टिज हॉस्पिटैलिटी वेंचर्स ने ₹3 हजार करोड़ के निवेश का ऐलान किया है, जिससे कंपनी में इसकी करीब 27% हिस्सेदारी हो जाएगी।

STL Networks

रेलटेल के ₹249.8 करोड़ के ऑर्डर के लिए एसटीएळ नेटवर्क्स ने सबसे कम बोली लगाई है। इसमें रेलटेल के डेटा सेंटर और डिजास्टर रिकवरी साइट पर क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर सॉल्यूशन लगाने का काम है।

JSW Cement

बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स ने शिवा सीमेंट को जेएसडब्ल्यू सीमेंट में मिलाने की योजना को मंज़ूरी दे दी है।

Tata Steel

टाटा स्टील ने टी स्टील होल्डिंग्स के 393.51 करोड़ इक्विटी शेयर $34 करोड़ (₹3,260.32 करोड़) में खरीदे हैं।

Axiscades Technologies

जून 2026 तक एक्सिसकेड्स में जुपिटर कैपिटल की 58.03% थी। इसमें से 10.69% हिस्सेदारी यानी 45.48 लाख शेयर जुपिटर कैपिटल ने मंगलवार को ₹829.72 करोड़ में चार इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स को प्रति शेयर ₹1,824 के भाव पर बेच दिए। इसमें से 12.88 लाख शेयर (3.03% होल्डिंग) एबेकस एसेट मैनेजर ने, 20.83 लाख शेयर (4.89% हिस्सेदारी) कोटक महिंद्रा म्यूचुअल फंड ने ₹380 करोड़ में, 3 लाख शेयर ₹54.72 करोड़ में वनजा सुंदर ने और 8.77 लाख शेयर ₹160 करोड़ में स्वधा इंडिया इमर्जिंग अपॉर्चुनिटीज स्कीम 1 ने खरीदे।

Cube Highways Trust

अबू धाबी के सॉवरेन वेल्थ फंड मुबाडाला इन्वेस्टमेंट कंपनी की मालिकाना हक वाली सेवेंटी सेकंड इन्वेस्टमेंट कंपनी LLC ने क्यूब हाईवेज ट्रस्ट के 4.49 करोड़ यूनिट (3.34% हिस्सेदारी) ₹689.46 करोड़ में बेच दी। जून 2026 तक इसकी कंपनी में 6% हिस्सेदारी थी। इसने जो यूनिट बेचे हैं, वह नौ निवेशकों को प्रति यूनिट ₹153.30 के भाव पर बेचे गए हैं। एलएंडटी ने ₹150 करोड़ में 97.84 लाख यूनिट और कोटक महिंद्रा लाइफ इंश्योरेंस कंपनी ने ₹40 करोड़ में 26.09 लाख यूनिट के अलावा बिड़ला म्यूचुअल फंड, HSBC म्यूचुअल फंड, कोटक महिंद्रा म्यूचुअल फंड और मैक्स न्यूयॉर्क लाइफ इंश्योरेंस में से हर एक ने ₹40 करोड़ में 26.09 लाख यूनिट खरीदी हैं। इसके अलावा HDFC स्टैंडर्ड लाइफ इंश्योरेंस और ICICI प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस कंपनी ने ₹104.73 करोड़ में 68.31 लाख यूनिट्स तो व्हाइट ओक कैपिटल म्यूचुअल फंड ने ₹130 करोड़ में 84.8 लाख यूनिट्स खरीदी हैं।

Honasa Consumer

सिकोइया कैपिटल ग्लोबल ग्रोथ फंड III-US/इंडिया एनेक्स फंड LP ने होनासा कंज्यूमर के 25.02 लाख शेयर (0.76% होल्डिंग) ₹450 के भाव पर ₹112.6 करोड़ तो पीक XV पार्टनर्स इन्वेस्टमेंट्स VI ने ₹1.07 करोड़ शेयर (3.3% हिस्सेदारी) ₹450.22 के भाव पर ₹484.23 करोड़ में बेचे। जून 2026 तक होनासा कंज्यूमर में सिकोइया कैपिटल ग्लोबल फंड की हिस्सेदारी 3.44% और पीक XV पार्टनर्स की 14.8% थी। वहीं दूसरी तरफ ICICI प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस कंपनी ने ₹80 करोड़ में होनासा कंज्यूमर के अतिरिक्त 17.77 लाख शेयर, फ्रैंकलिन टेम्पलटन म्यूचुअल फंड ने प्रति शेयर ₹450 के भाव पर ₹150 करोड़ में अतिरिक्त 33.33 लाख शेयर खरीदे। जून 2026 तक ICICI प्रूडेंशियल लाइफ की कंपनी में 6.26% और फ्रैंकलिन टेम्पलटन म्यूचुअल फंड की 1.22% हिस्सेदारी थी।

BSE

गोल्डमैन सैक्स इन्वेस्टमेंट्स मॉरीशस I ने बीएसई के 23.81 लाख शेयर ₹3,200 के भाव पर ₹762.1 करोड़ में तो बीएनपी पारिबास फाइनेंशियल मार्केट्स ने 44.51 लाख शेयर ₹3,199.54 के भाव पर ₹1,424.33 करोड़ में बेचे। इन दोनों सौदों से कुल मिलाकर 1.67% हिस्सेदारी ₹2,186.4 करोड़ में बिकी। वहीं दूसरी तरफ यूटीआई म्यूचुअल फंड ने बीएसई के 27.12 लाख शेयर ₹868.14 करोड़ में और निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड ने 25.29 लाख अतिरिक्त शेयर ₹809.45 करोड़ में खरीदे। इन दोनों ने कुल मिलाकर 1.28% हिस्सेदारी ₹1,677.6 करोड़ में प्रति शेयर ₹3,200 के भाव पर खरीदी।

360 ONE WAM

द रीजेंट्स ऑफ द यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया-स्टेट स्ट्रीट ग्लोबल एडवाइजर्स ने 360 वन डब्ल्यूएएम के 36.33 लाख शेयर (0.89% हिस्सेदारी) ₹374.3 करोड़ में प्रति शेयर ₹1030.08 के भाव पर बेचे। जून 2026 तक कंपनी में इसकी हिस्सेदारी 1.87% थी।

Capital Small Finance Bank

ओमान इंडिया जॉइंट इन्वेस्टमेंट फंड II ने कैपिटल स्मॉल फाइनेंस बैंक के 11.02 लाख शेयर (2.42% हिस्सेदारी) ₹30.86 करोड़ में बेचे, तो फिडेलिटी इंस्टीट्यूशनल फंड्स ICVC-इमर्जिंग मार्केट्स फंड ने लगभग इतने ही शेयर खरीद लिए। इनकी खरीद-बिक्री प्रति शेयर ₹280 के भाव पर हुई। जून 2026 तक ओमान इंडिया जॉइंट इन्वेस्टमेंट फंड की इस स्मॉल फाइनेंस बैंक में 2.52% हिस्सेदारी थी।

Kajaria Ceramics

प्रमोटर एंटिटी चेतन कजारिया फैमिली प्राइवेट ट्रस्ट ने कजारिया सिरेमिक्स के 18 लाख शेयर (1.13% हिस्सेदारी) ₹214.2 करोड़ में प्रति शेयर ₹1,190.01 के भाव पर बेच दिए। वहीं पुणे की सेजवन इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स एलएलपी ने कजारिया सिरेमिक्स के 10.5 लाख शेयर (0.65% हिस्सेदारी) ₹124.95 करोड़ में प्रति शेयर ₹1,190 के भाव पर खरीदे।

Centum Electronics

मोतीलाल ओसवाल म्यूचुअल फंड ने सेंटम इलेक्ट्रॉनिक्स के 1.04 लाख शेयर (0.7% हिस्सेदारी) ₹51.52 करोड़ में प्रति शेयर ₹4,928.89 के भाव पर खरीदे।

Elevate Campuses, ArMee Infotech, Swastika Infra, Adroit Industries (India)

आज एलीवेट कैंपसेज, एर्मी इंफोटेक, स्वास्तिक इंफ्रा और एड्रायट इंडस्ट्रीज के शेयरों की बीएसई और एनएसई पर एंट्री होगी।

Pooja Logistics, Coreintegra Consulting Services, Liqvd Digital India, S K Offset, Unitec Fibres

पूजा लॉजिस्टिक्स और कोरइंटीग्रा कंसल्टिंग सर्विसेज के शेयर आज एनएसई एसएमई पर लिस्ट होंगे तो लिकवीडी डिजिटल इंडिया, एसके ऑफसेट और यूनीटेक फाइबर्स के शेयर बीएसई एसएमई पर लिस्ट होंगे।

स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचल के लिए यहां जुड़ें

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

एक अरब वोटरों की चाभी—सीमा खन्ना

भारत राष्ट्र-राज्य के 145 करोड़ लोगों, एक अरब यानी कोई सौ करोड़ मतदाताओं के रिकॉर्ड की डिजिटल चाबी और मतदाता सूचियों की धांधली के पासवर्ड का नाम है—सीमा खन्ना। दुनिया कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से निरंकुश राक्षसी तंत्र (Despotic System), डिजिटल तानाशाही की जिन आशंकाओं में उसके प्रोटोटाइप की झलक देखती है, उसकी एक भारतीय प्रतीक, नमूना हैं चुनाव आयोग की सीमा खन्ना (डायरेक्टर जनरल, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, चुनाव आयोग)।

सवाल है कैसे यह महिला भारत के एक अरब मतदाताओं की डिजिटल मतदाता सूची के दरवाजे की चाबी? तो जान ले बात मामूली वेबसाइट या ऐप की नहीं है। मतदाताओं को काटने-जोड़ने व मतदाता सूचियों को जैसा चाहे बनाने वाले, कंट्रोलर याकि ECINet की बनवाई डिजिटल व्यवस्था है। इसमें चुनाव आयोग ने अपने चालीस से अधिक apps और portals को समेटा-बांधा हुआ है। मतदाता का registration, application, voter list में नाम, e-EPIC, शिकायत—सब इसी ecosystem में। चुनाव आयोग इसे “one unified platform” कहता है। जनवरी में इसके औपचारिक लॉन्च पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बेशर्मी से झूठ बोला था कि इसे कानून के अनुरूप बनाया गया है। DG-IT सीमा खन्ना ने तब कहा—technology अब support function नहीं, strategic enabler है; ECINet transparency, efficiency, credibility और public trust बढ़ाता है।

पर इसी को लेकर चुनाव आयोग के बाकी दो चुनाव आयुक्त—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—ने फाइलों में अलग लिखा। चार नवंबर 2025 को Deputy Election Commissioner ने सीमा खन्ना और दूसरे वरिष्ठ अफसरों को लिखकर साफ किया—ERO, DEO और CEO के जो statutory functions हैं, वे उन्हीं को करने हैं, किसी और को नहीं। आईटी सिस्टम कानून के अनुरूप होना चाहिए, “without any exception”। फिर 2 जनवरी को सीमा खन्ना को दोबारा लिखा गया—software ऐसा हो कि ERO को कानून से मिली discretion किसी तरह restricted न हो।

भला क्यों लिखना पड़ा?

क्योंकि मतदाता सूची की संवैधानिक-वैधानिक व्यवस्था का मूल विचार उलटा पड़ रहा था। दिल्ली में कोई एक बाबू (यानी सीमा खन्ना की चाबी, उसका पासवर्ड, उसके access point) बैठकर देश की voter list नहीं बनाता। constituency में Electoral Registration Officer होता है। वही कानून से अधिकृत अधिकारी है। नागरिक उसके सामने दस्तावेज देता है। वह जांचता है। वह तय करता है कि नाम जुड़ेगा या हटेगा।

लेकिन अब बीच में मशीन थी। और मशीन की चाबी दिल्ली में! एक आईटी अफसर के हाथ में (मतलब प्रदेशों के चुनाव अधिकारियों, आईएएस अफसरों, कैबिनेट सचिव से लेकर पूरी नौकरशाही में किसी के भी पास नहीं। न मंत्रियों के पास। न ही मंत्रिमंडल, मंत्रालयों आदि किसी के प्रति accountable, जवाबदेह)।

16 अप्रैल 2026 को चुनाव आयुक्त संधू ने खुद फाइल पर दर्ज किया कि IT division ने पिछले कुछ महीनों में कई नए modules और portals विकसित किए, लेकिन उन्हें न तो इसकी जानकारी दी गई और न वे Commission के सामने रखे गए। उन्होंने यहां तक लिखा कि उन्हें नए developments का पता मीडिया से चल रहा है। उन्होंने कहा—DG-IT सभी Commissioners को जानकारी दें और जरूरी approvals लिए बिना गतिविधि न करें।

फिर 29 मई 2026 को दूसरे चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने खतरे का असली नाम लिखा—“gradual centralisation of the electoral roll database.” और इलाज भी सुझाया। स्वतंत्र audit हो। IIT जैसे बाहरी विशेषज्ञ से जांच कराई जाए और certify किया जाए कि voter database में बदलाव करने की credentials संबंधित statutory authorities के अलावा किसी के पास नहीं हैं।

सोचें, खुद भारत के Election Commissioner कह रहे है—जांच कराओ कि देश की voter list बदलने की digital credentials किस-किस के पास हैं! फिर अगस्त में संधू ने और साफ लिखा। राज्यों के CEO, DEO और ERO बता रहे थे कि उन्हें ERONet का “proper and complete access” नहीं है। उनकी वैधानिक शक्तियां DG-IT स्तर के centralised control से सीमित हो रही हैं। संधू ने सीमा खन्ना के पद के बारे में रिकॉर्ड पर लिखा कि DG-IT को statutory authorities को कानून से मिला पूरा access और operational freedom रोकने का कोई legal authority नहीं है।

पर न चुनाव आयुक्त की सुनना। न देश के जमीनी, चुनावी अफसरों की चिंता। जाहिर है सीमा खन्ना को सुनने, परवाह करने की भला क्या जरूरत है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को सीमा खन्ना के कंट्रोल से वह सब प्राप्त है जो चुनावी धांधलियों के आर्किटेक्ट या अपने ही पन्ना प्रमुखों से स्क्रीन पर नाम काटने-जोड़ने का काम धड़ल्ले से फ्रॉड डिजिटल इंडिया के जरिए प्राप्त हो रहा हो?

और ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में छपा उदाहरण हकीकत की पुष्टि है। सत्य गोवा के 97 नागरिकों के अनुभवों का है। इनके बतौर मतदाता नाम काटे जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट में जब याचिका हुई, तब सुप्रीम कोर्ट का निर्देश हुआ। गोवा ERO/AERO ने कागज देखे। 97 लोगों को योग्य पाया। पहले उन्हें हटाने का जो फैसला हुआ था, उसे reverse करना था।

लेकिन ECINet में reverse करने का option ERO अफसरों के पास नहीं!

सो गोवा के Chief Electoral Officer के कार्यालय ने सात दिनों में आठ ईमेल दिल्ली भेजे। सीमा खन्ना को हर बार copy किया गया। 18 फरवरी को चुनाव आयोग के अपने Deputy Election Commissioner ने DG-IT को साफ लिखा कि चुनाव आयोग का IT system सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार जरूरी कार्रवाई को block नहीं कर सकता। ERO के निर्णय के अनुसार कार्रवाई facilitate की जाए।

फिर?

21 फरवरी को final voter list प्रकाशित हुई। वे 97 मतदाता जस के तस बाहर।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने 20 सिंतबर को सभी 97 नाम जांचे। सभी 97 सूची से बाहर थे। Goa के CEO संजय गोयल ने अखबार से कहा कि उन्होंने आयोग को बताया था कि इन लोगों को शामिल किया जाना है। और फिर वह वाक्य जो पूरे Digital India को नंगा कर देता है—“The call (to not include) was theirs.” ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने सीमा खन्ना से पूछा कि final roll से पहले rollback facility क्यों enable नहीं की गई। अखबार के मुताबिक जवाब नहीं मिला।

तो सवाल सीमा खन्ना नाम की एक महिला का नहीं है। उन्हें कोई “एक अरब वोटरों की मालिक” नहीं कह सकता। लेकिन लोकतंत्र को यह जरूर जानना चाहिए कि एक अरब मतदाताओं के database की digital keys की architecture क्या है।

और इसका Super-admin कौन है? किसके पास read access है? किसके पास write access? कौन नाम बदल सकता है? कौन reversal रोक सकता है? प्रत्येक बदलाव का क्या immutable audit trail है या नहीं? क्या Commissioners उसे देख सकते हैं? क्या बाहरी independent audit कभी हुआ? चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने जो independent audit मांगा था उसका क्या हुआ?

और सबसे बड़ा सवाल—यदि देश के तीन चुनाव आयुक्तों में से दो को ही अपने चुनाव आयोग के IT architecture पर ये सवाल लिखने पड़ें, तो भारत का साधारण मतदाता किस भरोसे सोए?

पहले वोट की रखवाली कानून करता था। फिर चुनाव अधिकारी करता था। अब बीच में software खड़ा है। और यह software आया कहां से? किसने बनवाया? कैसे बना? देश में बना या विदेश में इजराइल जैसे किसी देश से बनवाया गया?

कानून मतदाता के बारे में दो टूक कहता है—ERO फैसला करेगा। और ERO कहता है कि फलां नागरिक योग्य है, वैध मतदाता है। फिर सुप्रीम कोर्ट भी कहता है—सुनो और निर्णय करो।

और सीमा खन्ना के software की screen कहती है—Access denied!

क्यों? भला कौन है इसका SUPER ADMIN? उसकी credentials किसके पास हैं? यदि ERO के पास नहीं, राज्य के CEO के पास नहीं और खुद चुनाव आयुक्तों को इस पर सवाल लिखने पड़ रहे हैं, तो आखिर उस डिजिटल दरवाजे की आखिरी चाबी किसके पास है? नरेंद्र मोदी-अमित शाह की चुनावी मशीनरी से क्या उसका रिश्ता है? क्या इनके पन्ना प्रमुखों और उसके चुनावी control rooms की voter-data machinery तथा चुनाव आयोग के database के बीच कोई तकनीकी access, interface या data-flow है? यदि नहीं, तो चुनाव आयोग ने अब तक, ऐसे भंडाफोड के बाद भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट दवाब क्यों नहीं दिया?

हे राम! यह है मां भारत का Digital India—मनुष्य प्राणियों को वैध और अवैध ठहराने वाले यमराजों के दरवाजों के चौकीदारों का मोदी राज! क्या नहीं?

भारत की डिजिटल ताकत का नया मुकाम! इन 11 देशों में पहुंचा भारत का डिजिटल पेमेंट

भारत का UPI पिछले कुछ सालों में लोगों की रोज की जिंदगी का हिस्सा बन गया है। चाय की दुकान से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग तक, कुछ सेकंड में पेमेंट करने की सुविधा ने डिजिटल पेमेंट को काफी आसान बना दिया है। अब इसकी पहुंच सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि धीरे-धीरे दूसरे देशों में भी बढ़ रही है। ऐसे में विदेश जाने वाले भारतीयों के लिए भी UPI एक सुविधाजनक पेमेंट ऑप्शन बनता जा रहा है।

UPI की बढ़ती पॉपुलैरिटी का अंदाजा इसके बढ़ते इस्तेमाल से लगाया जा सकता है। जुलाई 2026 में इसके जरिए बड़े लेवल पर ट्रांजैक्शन हुए और अब इसकी इंटरनेशनल पहुंच 11 देशों तक हो गई है। ग्रीस और मालदीव के जुड़ने के बाद यह विस्तार और खास हो गया है।

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1. दुनियाभर में बढ़ी UPI की पहचान

पिछले करीब एक दशक में UPI का इस्तेमाल लगभग 12,000 गुना बढ़ा है। अब यह भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम का एक जरुरी भाग बन चुका है। इसकी पॉपुलैरिटी सिर्फ भारत तक नहीं है, बल्कि दूसरे देशों में भी लोग इसे पेमेंट के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में दुनियाभर में हुए रियल-टाइम पेमेंट ट्रांजैक्शन में UPI की हिस्सेदारी करीब 49% थी।

2. 11 देशों तक पहुंचा UPI

UPI अब भारत के अलावा 11 देशों में क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट की फैसिलिटी दे रहा है। भूटान, नेपाल, सिंगापुर, UAE और फ्रांस के साथ श्रीलंका, मॉरीशस, कतर, कंबोडिया, ग्रीस और मालदीव भी इस लिस्ट में शामिल हैं। ग्रीस और मालदीव UPI से जुड़ने वाले सबसे नए देश हैं। इससे विदेश जाने वाले भारतीयों के लिए डिजिटल पेमेंट का एक आसान ऑप्शन बढ़ा है।

3. UPI में जुड़े नए फीचर्स

2020 से 2022 के बीच UPI में कई नए बदलाव किए गए। UPI AutoPay की मदद से EMI और दूसरे नियमित पेमेंट आसान हुए, जबकि UPI 123PAY से फीचर फोन इस्तेमाल करने वालों को भी डिजिटल पेमेंट की सुविधा मिली। इसी दौरान UPI Lite आया और बाद में क्रेडिट कार्ड को UPI से जोड़ने का ऑप्शन भी दिया गया। इस दौरान भूटान में UPI की इंटरनेशनल शुरुआत भी हुई।

4. इजी और सिक्योर पेमेंट

2024 में UPI Circle जैसे फीचर की शुरुआत हुई, जिससे कोई भी लिमिट के अंदर दूसरे व्यक्ति को अपने UPI अकाउंट से पेमेंट करने की परमिशन दे सकता है। टैक्स पेमेंट और UPI से जुड़े दूसरे ट्रांजैक्शन की लिमिट में भी बदलाव किए गए। इसके बाद 2025 में ऑन-डिवाइस बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन और फेस बेस्ड फेस ऑथेंटिकेशन जैसे ऑप्शन जोड़े गए। इन चेंज का मकसद UPI को लोगों के लिए ज्यादा आसान, सुविधाजनक और सिक्योर बनाना है।

UPI की बढ़ती पहुंच से साफ है कि भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम अब देश की बॉर्डर से आगे भी पहचान बना रहा है। नए देशों और नए फीचर्स के जुड़ने से लोगों के लिए पेमेंट करना आसान और कनविनिएंट हो रहा है। आने वाले समय में UPI की पहुंच और बढ़ने की उम्मीद है।