Video: दिल्ली पुलिसकर्मी की AAP कार्यकर्ताओं ने सरेआम कर दी पिटाई, केजरीवाल के दौरे के दौरान सादे कपड़ों में था हेड कांस्टेबल

Video: राजधानी के तिलक नगर इलाके में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के दौरे के दौरान एक पुलिसकर्मी के साथ कथित तौर पर मारपीट और धक्का-मुक्की करने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस का एक हेड कॉन्स्टेबल सादे कपड़ों में मोबाइल फोन से केजरीवाल के दौरे की रिकॉर्डिंग कर रहा था। इसी दौरान कुछ आम आदमी पार्टी (AAP) कार्यकर्ताओं ने उसे घेर लिया। इस दौरान उसके साथ कथित तौर पर हाथापाई और मारपीट की।

घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। इसमें सादे कपड़ों में मौजूद पुलिसकर्मी को भीड़ के बीच घिरा हुआ देखा जा सकता है। वीडियो में लोग उसे धक्का देते और उसके साथ बहस करते नजर आ रहे हैं। पुलिसकर्मी ने जींस और शर्ट पहन रखी थी। इससे एक दिन पहले ही दिल्ली के मंत्री प्रवेश वर्मा और AAP से जुड़े एक युवक के बीच हुई झड़प ने इलाके में राजनीतिक और पुलिस विवाद खड़ा कर दिया था।

फ्लाईओवर के नीचे घेरकर जाने नहीं दिया

बताया गया है कि AAP कार्यकर्ताओं की भीड़ पुलिसकर्मी को घेरते हुए फ्लाईओवर के नीचे तक ले गई। आरोप है कि भीड़ ने कथित तौर पर उसे वहां से निकलने नहीं दिया। स्थिति बिगड़ने पर वर्दी में मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर अपने साथी को भीड़ से बाहर निकालने की कोशिश की।

पुलिस ने हेड कॉन्स्टेबल की मेडिकल जांच कराई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसे किसी तरह की चोट लगी है या नहीं। पुलिसकर्मी के साथ ड्यूटी के दौरान कथित मारपीट को लेकर FIR दर्ज करने पर भी विचार किया जा रहा है।

तिलक नगर में सड़क की क्वालिटी पर केजरीवाल ने उठाए सवाल

यह घटना पश्चिमी दिल्ली के तिलक नगर में सोमवार (28 सितंबर) को अरविंद केजरीवाल के दौरे के दौरान हुई। केजरीवाल के साथ AAP सांसद संजय सिंह, स्थानीय विधायक जरनैल सिंह और पार्टी के अन्य नेता भी मौजूद थे। केजरीवाल ने इलाके में हाल ही में बनी सड़क की क्वालिटी को लेकर दिल्ली की BJP सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि सड़क निर्माण के कुछ ही दिनों बाद उसकी हालत खराब हो गई है।

केजरीवाल ने कहा कि सड़क को हाथ से ही उखाड़ा जा सकता है। उन्होंने दिल्ली में इस तरह का निर्माण पहले कभी नहीं देखा। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी पिछली AAP सरकार के दौरान इस तरह के सड़क निर्माण पर पांच साल की गारंटी होती थी।

एक दिन पहले मंत्री प्रवेश वर्मा का वीडियो हुआ था वायरल

अरविंद केजरीवाल का तिलक नगर दौरा ऐसे समय हुआ, जब इससे एक दिन पहले दिल्ली के मंत्री प्रवेश वर्मा का एक वीडियो सामने आया था। वायरल वीडियो में उन्हें इलाके में नई बनी सड़क का निरीक्षण करते समय एक व्यक्ति को कथित तौर पर थप्पड़ मारते हुए देखा गया था।

हालांकि, बाद में पुलिस से जुड़ी जानकारी में सामने आया कि थप्पड़ खाने वाला व्यक्ति भी एक मामले में आरोपी है। 22 वर्षीय साहिब सिंह पर इस साल की शुरुआत में दिल्ली नगर निगम (MCD) के एक कर्मचारी के साथ कथित मारपीट के संबंध में पुलिस शिकायत और एफआईआर दर्ज होने की बात सामने आई।

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राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच सामने आई घटना

तिलक नगर की घटना ने दिल्ली में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विपक्षी AAP के बीच चल रहे राजनीतिक टकराव के बीच एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। एक तरफ केजरीवाल ने सड़क निर्माण की क्वालिटी पर सवाल उठाए। वहीं, उनके दौरे के दौरान पुलिसकर्मी के साथ कथित मारपीट का वीडियो सामने आने से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस अब वीडियो की जांच कर रही है। मामले में पुलिस कार्रवाई कर सकती है। NDTV के मुताबिक, पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। फिलहाल, दिल्ली पुलिस के आधिकारिक बयान का इंतजार है।

अमेरिका में गोल्डी बराड़ पर ₹10 करोड़ का इनाम:FBI की टॉप 10 मोस्ट वांटेंड लिस्ट में शामिल, लॉरेंस गैंग से जुड़ा, निज्जर की हत्या करवाने का आरोप

अमेरिकी जांच एजेंसी FBI ने गैंगस्टर सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ को टॉप 10 मोस्ट वांटेड की सूची में शामिल किया है। बराड़ की गिरफ्तारी में मदद करने वाली जानकारी देने वाले को 10 लाख डॉलर (करीब 9.5 करोड़ रुपए) तक का इनाम देने की घोषणा की गई है। यह घोषणा FBI के लॉस एंजिलिस फील्ड ऑफिस ने की। अमेरिका में बराड़ के खिलाफ साजिश रचने, जबरन वसूली और ड्रग्स की तस्करी समेत कई आरोप हैं। बराड़ को लॉरेंस ऑर्गनाइज्ड क्राइम ग्रुप का उत्तरी अमेरिका में प्रमुख ऑपरेशनल लीडर बताया गया है। लॉरेंस और गोल्डी बराड़ पर 2023 में खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप है। इसी साल जुलाई में निज्जर की हत्या को लेकर अमेरिका ने पहली बार चार्जशीट दाखिल की गई थी। इसमें दावा है कि हत्या का आदेश भारतीय जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई और फरार चल रहे गोल्डी बराड़ ने दिया था। अमेरिकी सरकार के मुताबिक, लॉरेंस बिश्नोई भारतीय जेल में रहते हुए भी अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क चला रहा था। वह जेल में तस्करी से पहुंचाए गए मोबाइल फोन और इंटरनेट कॉलिंग डिवाइस के जरिए हत्या, रंगदारी, अपहरण, ड्रग्स और मानव तस्करी जैसी गतिविधियों का निर्देश देता था।

अमेरिका में गोल्डी बराड़ पर ₹10 करोड़ का इनाम:FBI की टॉप 10 मोस्ट वांटेंड लिस्ट में शामिल, लॉरेंस गैंग से जुड़ा, निज्जर की हत्या करवाने का आरोप

अमेरिकी जांच एजेंसी FBI ने गैंगस्टर सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ को टॉप 10 मोस्ट वांटेड की सूची में शामिल किया है। बराड़ की जानकारी देने वाले को 10 लाख डॉलर (करीब 9.5 करोड़ रुपए) तक का इनाम देने की घोषणा की गई है। बराड़ को लॉरेंस ऑर्गनाइज्ड क्राइम ग्रुप का उत्तरी अमेरिका में प्रमुख ऑपरेशनल लीडर बताया गया है। लॉरेंस और गोल्डी बराड़ पर 2023 में खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप है। इसी साल जुलाई में निज्जर की हत्या को लेकर अमेरिका ने पहली बार चार्जशीट दाखिल की थी। अमेरिकी सरकार के मुताबिक, लॉरेंस भारतीय जेल में रहते हुए भी अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क चला रहा था। वह जेल में तस्करी से पहुंचाए गए मोबाइल फोन और इंटरनेट कॉलिंग डिवाइस के जरिए हत्या, रंगदारी, अपहरण, ड्रग्स और मानव तस्करी जैसी गतिविधियों का निर्देश देता था। जुलाई में आई अमेरिकी रिपोर्ट में गैंग को लेकर 5 दावे किए गए थे 1. आरोप सिर्फ अपराधियों पर, सरकार का जिक्र नहीं पूरे अमेरिकी आरोप पत्र और प्रेस रिलीज में भारत सरकार, RAW, NIA या किसी भारतीय सरकारी अधिकारी पर कोई आरोप नहीं लगाया गया। आरोप केवल कथित आपराधिक गिरोहों और उनके सदस्यों पर हैं। 2. ऑपरेशन हार्ड बॉल के तहत 37 पर आरोप, 24 गिरफ्तार अमेरिका, कनाडा और यूरोप ने संयुक्त अभियान ‘ऑपरेशन हार्ड बॉल’ चलाकर भारत से जुड़े तीन अंतरराष्ट्रीय अपराध गिरोहों पर कार्रवाई की। इसमें 37 लोगों पर आरोप लगाए गए और 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया। 3. बिश्नोई पर जेल से गैंग चलाने का आरोप अमेरिकी आरोपपत्र के मुताबिक, लॉरेंस बिश्नोई भारत की जेल में रहते हुए मोबाइल और इंटरनेट कॉलिंग (VoIP) डिवाइस के जरिए हत्या, रंगदारी, अपहरण, ड्रग्स और मानव तस्करी जैसे अपराधों का संचालन करता था। 4. निज्जर हत्या का आदेश देने का आरोप अमेरिकी न्याय विभाग का आरोप है कि 18 जून 2023 को कनाडा में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आदेश लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ ने दिया था। 5. रंगदारी और ड्रग्स तस्करी का नेटवर्क रिपोर्ट के मुताबिक, गिरोह वॉट्सऐप और अन्य एन्क्रिप्टेड ऐप के जरिए धमकी देकर रंगदारी वसूलता था। साथ ही ड्रग्स तस्करी और प्रतिद्वंद्वी गिरोहों से कोकीन लूटकर अपना नेटवर्क चलाता था। 2023 में हुई थी निज्जर की हत्या ———– ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका के खुलासे के बाद होशियारपुर SHO हटाया, अटॉर्नी जनरल ने कहा था- 4 लाख डॉलर फिरौती मांगी होशियारपुर के पुलिस थाना टांडा के SHO गुरिंदरजीत सिंह नागरा को 4 लाख डॉलर की फिरौती केस में लाइन हाजिर कर दिया गया है। अमेरिका के अटॉर्नी जनरल ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में नागरा का नाम लिया था। जनरल ने फिरौती के मामले में कई खुलासे किए। (पढ़ें पूरी खबर)

Monkey Viral Video: शराब की दुकान में घुसी रांची की बंदरिया, बोतल से गटक गई Vodka! नशा चढ़ा तो बक्से पर ही सो गई, देखने उमड़ी भीड़

Ranchi Monkey Viral Video: झारखंड की राजधानी में स्थित एक शराब की दुकान से अनोखा मामला सामने आया है। रांची में एक शराब की दुकान में उस वक्त अजीबोगरीब नजारा देखने को मिला, जब एक बंदरिया अचानक शॉप के अंदर घुस गई। इसके बाद उसने ऐसा कारनामा किया कि दुकान पर मौजूद लोग भी हैरान रह गए। बंदरिया ने कथित तौर पर शराब की बोतल से शराब पी और फिर दुकान के अंदर ही आराम से सो गई।

घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में दुकान के अंदर एक कथित गर्भवती बंदरिया दिख रही है। उसने कथित तौर पर दुकान के अंदर शराब पी और फिर नशे होने के बाद सो गई। उसका वीडियो जमकर वायरल हो रहा है।

पहले दुकान में घुसी, भगाने पर कर्मचारी को काटा

मामला रांची के ओरमांझी ब्लॉक चौक के पास स्थित शराब की दुकान का बताया जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, बंदरिया शुक्रवार 25 सितंबर को शराब की दुकान में घुस गई थी। उसे बाहर निकालने की कोशिश की गई। लेकिन वह आक्रामक हो गई। उसने कथित तौर पर एक कर्मचारी को काट लिया। इसके बाद लोगों ने उससे दूरी बना ली।

दुकान के अंदर अकेली रह गई बंदरिया कुछ देर तक इधर-उधर घूमती रही। तभी उसकी नजर वहां रखी शराब की बोतल पर पड़ी। प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया कि उसने बोतल (Vodka का क्वार्टर) से शराब पी। एक वीडियो में दुकान के अंदर सोई बंदरिया और पास में रखी शराब की बोतल दिखाई दे रही है।

शराब पी और फिर दुकान में ही ‘पावर नैप’

शराब पीने के बाद बंदरिया दुकान के अंदर रखे सामान/बक्सों के ऊपर जाकर लेट गई। कुछ ही देर में वह गहरी नींद में नजर आने लगी। वीडियो बनाने वाला व्यक्ति उसे कैमरे में कैद करता है। लेकिन उसकी आवाज या हलचल से बंदरिया कुछ पल के लिए आंखें खोलती है। फिर दोबारा आंखें बंद कर लेती है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि बंदरिया ने करीब एक क्वार्टर Vodka पी थी। हालांकि, शराब की सही मात्रा की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।

खुद को गर्भवती बता रहे थे लोग

वीडियो में मौजूद व्यक्ति बंदरिया को मादा और गर्भवती बता रहा है। इसी वजह से सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट्स में उसे ‘प्रेग्नेंट मंकी’ कहा जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में इस गर्भावस्था की कोई स्वतंत्र पशु डॉक्टरों की तरफ से पुष्टि सामने नहीं आई है। घटना के वीडियो में दिख रहा है कि ग्राहक शराब खरीदने के लिए दुकान पर आ रहे हैं। स्टाफ सामान्य रूप से काम कर रहा है। जबकि बंदर पीछे सो रहा है।

देखने के लिए दुकान के बाहर जुट गई भीड़

कुछ ही देर बाद बंदरिया के शराब पीकर दुकान में सो जाने की खबर इलाके में तेजी से फैल गई। इसके बाद लोगों की भीड़ दुकान के बाहर जमा हो गई। कई लोगों ने मोबाइल फोन से इसका वीडियो बनाया। बाद में यही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। मामले की जानकारी मिलने के बाद एक रेस्क्यू टीम भी मौके पर पहुंची। उन्होंने बंदरिया को सुरक्षित तरीके से दुकान से बाहर निकालने की कोशिश की। कई रिपोर्टों के मुताबिक, उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है।

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यूजर्स के मजेदार रिएक्शन

सोशल मीडिया पर इस अजीब घटना को लेकर लोग तरह-तरह के मजेदार कमेंट कर रहे हैं। हालांकि, कुछ यूजर्स ने बंदरिया की हालत और शराब पीने के असर को लेकर चिंता भी जताई है।

वीडियो ने लोगों को इसलिए भी चौंका दिया क्योंकि इसमें एक तरफ शराब की दुकान, दूसरी तरफ बोतल से शराब पीती बंदरिया और उसके बाद दुकान के अंदर ही उसकी लंबी ‘नींद’ का मामला किसी फिल्मी सीन से कम नहीं लग रहा है। दुकानदारों और स्थानीय लोगों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से बंदर को फेंकी गई बोतलों से बची हुई शराब चाटते हुए देखा गया था।

Surat Employee News: ₹10 हजार बकाए के लिए बॉस की दुकान में लगाई आग! 14 दुकानें जलकर खाक; 24 करोड़ रुपये का माल स्वाहा

Surat Employee News: गुजरात के सूरत से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, महज 10 हजार रुपये के कथित बकाए पेमेंट को लेकर शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि इसका अंजाम करोड़ों रुपये के नुकसान के रूप में सामने आया। सूरत पुलिस के मुताबिक, एक पूर्व अकाउंटेंट ने अपने मालिक से नाराज होकर उसकी दुकान में कथित तौर पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। इसकी वजह से देखते ही देखते आग ने आसपास की दुकानों को भी अपनी चपेट में ले लिया। इस घटना में 14 दुकानें जलकर खाक हो गईं। इस दौरान करीब 24 करोड़ रुपये का कपड़ा एवं अन्य सामान नष्ट हो गया।

बताया जा रहा है कि यह घटना 9 सितंबर को सरोली इलाके के ‘श्याम संगिनी टेक्सटाइल मार्केट (Surat Shyam Sangini Textile Market)’ में हुई थी। शुरुआती तौर पर इसे आग लगने की घटना माना जा रहा था। लेकिन कई दिनों की जांच के बाद पुलिस ने इसे कथित रूप से सुनियोजित आगजनी बताया है। मामले में सूरत क्राइम ब्रांच ने 33 वर्षीय विनोद पंडित सावले (Vinod Pandit Sawale) को आगजनी के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस ने कहा कि 9 सितंबर को सरोली इलाके में लगी आग कोई हादसा नहीं थी। बल्कि कर्मचारी द्वारा अपने मालिक के खिलाफ जान-बूझकर लगाई गई आग थी।

अप्रैल में नौकरी शुरू की थी, कुछ समय बाद हुआ विवाद

पुलिस के अनुसार, सावले ने अप्रैल 2026 में मार्केट की छठी मंजिल स्थित एक दुकान में अकाउंटेंट के तौर पर काम शुरू किया था। उसे करीब 30 हजार रुपये सैलरी मिलती थी। बाद में उसके काम को लेकर दुकान मालिक के साथ विवाद हुआ। फिर उसने नौकरी छोड़ दी। पुलिस का कहना है कि सावले का करीब ₹10 हजार के कथित बकाया भुगतान को लेकर भी मालिक से विवाद था। इसी बकाए पेमेंट को लेकर वह नाराज था। कथित तौर पर उसने मालिक को सबक सिखाने के लिए आग लगाने की योजना बनाई।

पहली कोशिश नाकाम, दूसरी बार पेट्रोल लेकर पहुंचा

जांच में पुलिस ने दावा किया कि यह पहली बार नहीं था जब सावले ने दुकान में आग लगाने की कोशिश की। उसने कथित तौर पर पहले भी आग लगाने का प्रयास किया था। लेकिन वह सफल नहीं हुआ। इसके बाद उसने दूसरी योजना बनाई। पुलिस के मुताबिक, उसने करीब 150 रुपये का पेट्रोल खरीदा और उसे प्लास्टिक की थैली तथा एक बोतल में लेकर मार्केट पहुंचा।

12:30 बजे दुकान के बाहर पेट्रोल छिड़कने का आरोप

CCTV फुटेज के आधार पर पुलिस ने बताया कि एक सख्त चेहरे को सफेद रुमाल से ढककर और कंधे पर बैग लटकाए मार्केट में दाखिल हुआ था। पुलिस के मुताबिक, बाद में उसकी पहचान सावले के रूप में हुई। जांच के अनुसार, सावले ने देवध गांव स्थित एक पेट्रोल पंप से करीब 150 रुपये का पेट्रोल लिया। फिर 8 सितंबर की रात करीब 9 बजे वह मार्केट पहुंचा। वह 5वीं मंजिल की सीढ़ियों के पास बैठकर इंतजार करता रहा।

करीब रात 12:30 बजे जब मार्केट लगभग सुनसान हो गया, उसने कथित तौर पर दुकान के बाहर रखे कपड़े के बॉक्स और पार्सल पर पेट्रोल छिड़का। फिर उसमें आग लगा दी। इसके बाद वह मौके से भाग गया। आग ने कुछ ही समय में विकराल रूप ले लिया। देखते ही देखते आग आसपास की दुकानों तक फैल गई। पुलिस के मुताबिक, करीब 14 दुकानें पूरी तरह जल गईं। जबकि बड़ी मात्रा में कपड़ा और अन्य सामान नष्ट हो गया। आग पर काबू पाने में दमकलकर्मियों को करीब 38 घंटे लगे।

1,500 CCTV कैमरों से खुला राज

घटना के बाद सरोली पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए क्राइम ब्रांच ने मार्केट और आसपास के इलाकों में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान 1,500 से ज्यादा CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग का विश्लेषण किया गया। ये कैमरे सूरत पुलिस के ‘विश्वास प्रोजेक्ट’ फेज-2 के तहत लगाए गए हैं। जांचकर्ताओं ने संदिग्ध के आने-जाने के रास्ते को आगे और पीछे की दिशा में ट्रैक किया। इसी CCTV ट्रेल के आधार पर पुलिस कथित तौर पर सावले तक पहुंची।

FIR की जानकारी मिलते ही बंद किया मोबाइल, परिवार के साथ भागा

पुलिस के अनुसार, आग का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने और FIR दर्ज होने की जानकारी मिलने के बाद सावले ने अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया। इतना ही नहीं पत्नी तथा बच्चे के साथ वह सूरत से फरार हो गया। जांच में पुलिस को पता चला कि वह पहले राजस्थान के खाटू श्याम मंदिर गया और बाद में अयोध्या पहुंचा। बाद में जब वह सूरत लौटा तो क्राइम ब्रांच को उसके ठिकाने की जानकारी मिली। गणपति सुरक्षा व्यवस्था में तैनात क्राइम ब्रांच की टीम ने उसे डिंडोली के फ्लावर गार्डन के पास गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद उसे सरोली पुलिस के हवाले कर दिया गया।

पुलिस कर रही पेट्रोल खरीद और कथित साजिश की जांच

सूरत के अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर करणराज वाघेला के अनुसार, आग से करीब 25 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। वहीं, पुलिस की जांच में जले हुए कपड़े और अन्य सामान की कीमत करीब ₹24 करोड़ बताई गई है। सूरत पुलिस अब आरोपी से कथित साजिश, आग लगाने की पूरी योजना और पेट्रोल की खरीद से जुड़े पहलुओं पर पूछताछ कर रही है।

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जांचकर्ता उस पेट्रोल पंप संचालक की भूमिका की भी जांच कर रहे हैं, जिसने कथित तौर पर आरोपी को पेट्रोल बेचा था। पुलिस ने घटना का क्रम समझने के लिए आरोपी को श्याम संगिनी टेक्सटाइल मार्केट भी ले जाकर सीन का री-कंस्ट्रक्शन कराया। इस दौरान आरोपी हाथ जोड़े हुए नजर आया। फिलहाल, मामले की जांच जारी है।

SIM card : अपनी सिम दूसरे को दी तो ₹50 लाख जुर्माना, 3 साल की जेल भी, जानिए अपने नाम पर एक्टिव सिम कैसे चेक करें

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मोबाइल SIM को लेकर दूरसंचार विभाग (DoT) ने देशभर के मोबाइल यूजर्स को अहम चेतावनी दी है। विभाग ने कहा है कि अपने नाम पर जारी SIM कार्ड किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए देना भारी पड़ सकता है। फर्जी तरीके से SIM जारी कराने, टेलीकॉम पहचान से जुड़े नंबरों का गलत इस्तेमाल करने या मोबाइल के IMEI नंबर से छेड़छाड़ करने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

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DoT ने 21 सितंबर को जारी एडवाइजरी में बताया कि Telecommunications Act, 2023 के तहत ऐसे मामलों में तीन साल तक की जेल और 50 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

 

आपके नाम पर किसी और ने SIM तो नहीं लिया?

 

DoT की यह चेतावनी उन लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण है जिनके पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल करके उनकी जानकारी के बिना मोबाइल कनेक्शन जारी कर दिया गया हो। इसके अलावा ऐसे लोगों को भी सावधान रहने की जरूरत है, जिन्होंने अपने नाम पर जारी SIM कार्ड किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए दे दिया है। विभाग ने मोबाइल यूजर्स को सलाह दी है कि वे समय-समय पर जांच करें कि उनके पहचान दस्तावेजों से कितने मोबाइल नंबर जारी हैं। इसके लिए सरकार के Sanchar Saathi पोर्टल या मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया जा सकता है।

 

क्यों जारी की गई DoT की चेतावनी?

 

DoT की यह एडवाइजरी हाल की साइबर अपराध जांच के दौरान सामने आए एक मामले के बाद जारी की गई है। जांच में छत्तीसगढ़ में एक Point of Sale (PoS) एजेंट पर आरोप लगा कि उसने नागरिकों के पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल उनकी जानकारी और सहमति के बिना 25 मोबाइल कनेक्शन एक्टिवेट करने के लिए किया।

 

मामला सामने आने के बाद DoT और टेलीकॉम कंपनियों ने संबंधित PoS एजेंट को ब्लैकलिस्ट कर दिया। इसके बाद वह नए SIM कार्ड जारी नहीं कर सका। इन 25 मोबाइल कनेक्शनों की DoT के Digital Intelligence Platform के जरिए भी जांच की गई। संदिग्ध पाए गए कनेक्शनों को दोबारा सत्यापन यानी री-वेरिफिकेशन के लिए भेजा गया। जिन नंबरों का सत्यापन पूरा नहीं हो सका, उन्हें बाद में बंद कर दिया गया।

 

यह मामला बताता है कि किसी व्यक्ति के नाम पर मोबाइल नंबर जारी होने की जानकारी उसे हमेशा हो, यह जरूरी नहीं है।

 

अपना SIM किसी दूसरे को देना भी पड़ सकता है भारी

 

DoT ने मोबाइल ग्राहकों को अपने नाम पर जारी SIM कार्ड किसी दूसरे व्यक्ति को देने से भी बचने की सलाह दी है। विभाग के मुताबिक, अगर आपके नाम पर जारी SIM कार्ड का बाद में गलत गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होता है, तो कुछ परिस्थितियों में मूल ग्राहक भी कानूनी जांच के दायरे में आ सकता है। इसलिए अपना SIM किसी अन्य व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए देना जोखिम भरा हो सकता है।

 

कौन-कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए?

 

DoT ने मोबाइल यूजर्स को कई तरह की गतिविधियों से दूर रहने की सलाह दी है। इनमें शामिल हैं—

 

  • फर्जी दस्तावेजों के आधार पर SIM कार्ड लेना।
  • धोखाधड़ी, ठगी या किसी दूसरे व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल करके SIM लेना।
  • अपने नाम पर जारी SIM कार्ड को किसी दूसरे व्यक्ति को बेचना या ट्रांसफर करना।
  • अपने नाम का SIM किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए देना।
  • SIM को किराये या उधार पर देना।
  • अपने नाम के SIM का साइबर फ्रॉड या अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के लिए ‘म्यूल SIM’ के रूप में इस्तेमाल होने देना।

 

ऐसी स्थिति में SIM के मूल ग्राहक के लिए भी कानूनी परेशानी खड़ी हो सकती है।

 

IMEI नंबर से छेड़छाड़ से भी बचें

 

DoT ने सिर्फ SIM कार्ड ही नहीं, बल्कि मोबाइल डिवाइस के IMEI (International Mobile Equipment Identity) नंबर से छेड़छाड़ को लेकर भी चेतावनी दी है। विभाग ने ऐसे मॉडेम, SIM बॉक्स या अन्य उपकरणों के इस्तेमाल से बचने को कहा है जिनमें IMEI नंबर को बदला या कॉन्फिगर किया जा सकता है।

 

इसके अलावा ऐसे ऐप, वेबसाइट या टूल का इस्तेमाल भी नहीं करना चाहिए जो Calling Line Identity (CLI) या अन्य टेलीकॉम पहचान से जुड़ी जानकारी को बदलने का दावा करते हैं।

 

IMEI मोबाइल फोन से जुड़ी एक विशिष्ट पहचान संख्या होती है। इसके साथ छेड़छाड़ या टेलीकॉम पहचान से जुड़ी जानकारी का दुरुपयोग मोबाइल यूजर्स के साथ-साथ टेलीकॉम नेटवर्क की सुरक्षा और विश्वसनीयता के लिए भी जोखिम पैदा कर सकता है।

 

आपके नाम पर कितने SIM हैं, ऐसे करें चेक

 

मोबाइल यूजर्स सरकार के Sanchar Saathi प्लेटफॉर्म के जरिए अपने नाम पर जारी मोबाइल नंबरों की जानकारी देख सकते हैं।

 

अगर सूची में ऐसा कोई नंबर दिखाई देता है जिसे आपने नहीं लिया है या जिसकी आपको जरूरत नहीं है, तो उसे रिपोर्ट करके ब्लॉक कराने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

 

इसके अलावा Sanchar Saathi पर मौजूद ‘Check Genuineness of Your Mobile Handset’ सुविधा के जरिए मोबाइल फोन का IMEI भी चेक किया जा सकता है। इससे फोन के ब्रांड, मॉडल और निर्माता जैसी जानकारी देखी जा सकती है।

 

हर मोबाइल यूजर को दो काम जरूर करने चाहिए

 

मोबाइल यूजर्स के लिए DoT की इस एडवाइजरी से दो बातें खास तौर पर महत्वपूर्ण हैं। पहला, समय-समय पर यह जांचते रहें कि आपकी पहचान से कितने मोबाइल नंबर जुड़े हुए हैं। दूसरा, अगर किसी मोबाइल फोन की प्रामाणिकता पर संदेह हो तो उसका IMEI और हैंडसेट डिटेल्स सत्यापित करें।
 

कुल मिलाकर, अपने नाम पर जारी SIM कार्ड को किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए देना या टेलीकॉम पहचान से छेड़छाड़ करना सामान्य बात नहीं समझनी चाहिए। आपके नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शन का गलत इस्तेमाल आपकी जानकारी के बिना भी हो सकता है। ऐसे में समय-समय पर अपने नाम से जुड़े मोबाइल नंबरों की जांच करना साइबर और टेलीकॉम फ्रॉड से बचाव का एक अहम कदम है।

कहीं आपके नाम से तो नहीं चल रही फर्जी SIM तो सावधान, DoT की चेतावनी, 3 साल जेल और ₹50 लाख तक जुर्माना

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दूरसंचार विभाग (DoT) ने फर्जी तरीके से SIM कार्ड जारी करने और उसके गलत इस्तेमाल को लेकर नागरिकों को सतर्क किया है। विभाग के मुताबिक, किसी व्यक्ति की जानकारी या सहमति के बिना उसके पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल करके मोबाइल कनेक्शन जारी करना, SIM का गलत इस्तेमाल करना या IMEI नंबर से छेड़छाड़ करना कानूनी अपराध हो सकता है।  

DoT के मुताबिक फर्जी तरीके से SIM जारी करना, टेलीकॉम पहचानकर्ताओं का गलत इस्तेमाल करना और IMEI नंबर में छेड़छाड़ करना Telecommunications Act, 2023 के तहत दंडनीय अपराध हैं। दूरसंचार कानून के तहत ऐसे मामलों में 3 साल तक की जेल और ₹50 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आपके नाम पर कितने मोबाइल कनेक्शन चल रहे हैं और कोई नंबर आपकी जानकारी के बिना तो जारी नहीं हुआ है। DoT की यह एडवाइजरी मध्यप्रदेश लाइसेंस्ड सर्विस एरिया (MP LSA) की हालिया साइबर क्राइम जांच के बाद जारी की गई है। जांच में फर्जी तरीके से SIM कार्ड जारी किए जाने के मामले सामने आए हैं।

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 बिना जानकारी के जारी किए गए SIM का मामला सामने आया

DoT के अनुसार, साइबर जांच के दौरान छत्तीसगढ़ में ऐसे मामले सामने आए, जहां पॉइंट ऑफ सेल (POS) के जरिए नागरिकों की जानकारी या सहमति के बिना उनके पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल कर मोबाइल कनेक्शन एक्टिवेट किए गए।

आरोप है कि एजेंट ने नागरिकों के पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल उनकी जानकारी और सहमति के बिना 25 मोबाइल कनेक्शन एक्टिवेट कर दिए। जांच के बाद DoT और संबंधित टेलीकॉम कंपनियों ने इस PoS एजेंट को ब्लैकलिस्ट कर दिया। अब वह भविष्य में नए मोबाइल कनेक्शन जारी नहीं कर सकेगा।

 

मामले सामने आने के बाद दूरसंचार विभाग और संबंधित टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर ने संबंधित POS को ब्लैकलिस्ट किया। इसके अलावा कई मोबाइल कनेक्शनों की जांच इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म पर की गई और संदिग्ध पाए गए नंबरों का दोबारा सत्यापन किया गया। जांच के बाद कई नंबरों को ब्लॉक भी किया गया।

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अपने नाम का SIM किसी दूसरे को न दें

DoT ने नागरिकों को सलाह दी है कि अपने नाम पर जारी SIM कार्ड किसी दूसरे व्यक्ति को न दें और न ही उसे ट्रांसफर या बेचें। अगर उस नंबर का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड, धोखाधड़ी या किसी अन्य गैरकानूनी गतिविधि में होता है, तो वास्तविक सब्सक्राइबर के लिए कानूनी परेशानी खड़ी हो सकती है। इसलिए अपना SIM किसी को उधार देने, किराए  पर देने या किसी अन्य उद्देश्य से इस्तेमाल करने के लिए देने से बचें।

 

IMEI से छेड़छाड़ वाले फोन से रहें दूर

 

विभाग ने नागरिकों को ऐसे मोबाइल डिवाइस खरीदने या इस्तेमाल करने से भी बचने की सलाह दी है, जिनके IMEI नंबर के साथ छेड़छाड़ की गई हो। मोबाइल खरीदते समय डिवाइस की वैधता और उसकी पहचान की जानकारी जांचना जरूरी है। IMEI मोबाइल डिवाइस की विशिष्ट पहचान संख्या होती है।

कॉलिंग लाइन आइडेंटिटी बदलने वाले ऐप से बचें

 

DoT ने नागरिकों को मोबाइल ऐप या वेबसाइट के जरिए Calling Line Identity (CLI) में बदलाव करने वाली सेवाओं का इस्तेमाल न करने की सलाह दी है। किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर SIM लेकर उसका इस्तेमाल करना या अपने नाम पर जारी SIM को किसी अन्य व्यक्ति को देकर उससे साइबर अपराध करवाना गंभीर कानूनी समस्या पैदा कर सकता है।

 

संचार साथी से ऐसे जांचें अपने नाम के SIM

अपने नाम पर कितने मोबाइल कनेक्शन सक्रिय हैं, इसकी नियमित जांच करना नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है। इसके लिए सरकार के संचार साथी (Sanchar Saathi) पोर्टल और मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर आपको अपने नाम पर ऐसा मोबाइल नंबर दिखाई देता है जिसे आपने जारी नहीं कराया है या जिसका इस्तेमाल आप नहीं करते हैं, तो उपलब्ध सुविधा के जरिए उसके खिलाफ कार्रवाई या उसे ब्लॉक कराने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

 

मोबाइल फोन असली है या नहीं, ऐसे करें चेक

संचार साथी प्लेटफॉर्म पर ‘Genuineness of Your Mobile Handset’ सुविधा भी उपलब्ध है। इसके जरिए मोबाइल हैंडसेट से जुड़ी जानकारी की जांच की जा सकती है। इस सुविधा में मोबाइल ब्रांड, मॉडल और निर्माता से जुड़ी जानकारी देखी जा सकती है। नया या इस्तेमाल किया हुआ मोबाइल खरीदते समय यह जांच उपयोगी हो सकती है। DoT ने नागरिकों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शन और इस्तेमाल किए जा रहे हैंडसेट की समय-समय पर जांच करते रहें। Sanchar Saathi की सेवाएं पोर्टल के साथ-साथ Android और iOS के लिए उपलब्ध मोबाइल ऐप के जरिए भी इस्तेमाल की जा सकती हैं।

 

नागरिकों के लिए DoT की जरूरी सलाह

  • अपने नाम पर जारी SIM किसी दूसरे व्यक्ति को न दें।
  • SIM को बेचने या अनधिकृत रूप से ट्रांसफर करने से बचें।
  • अपने नाम पर सक्रिय मोबाइल कनेक्शन की नियमित जांच करें।
  • अनजान या संदिग्ध मोबाइल नंबर की जानकारी मिलने पर उसकी शिकायत करें।
  • IMEI से छेड़छाड़ किए गए मोबाइल फोन का इस्तेमाल न करें।
  • संदिग्ध मोबाइल डिवाइस खरीदने से पहले उसकी जानकारी जांचें।
  • CLI बदलने वाली संदिग्ध वेबसाइट या ऐप का इस्तेमाल न करें।
  •  संचार साथी के जरिए अपने मोबाइल कनेक्शन और हैंडसेट की जांच करें।
  • ऐसे मॉडेम, मॉड्यूल, SIM Box या अन्य उपकरणों का इस्तेमाल करना जिनमें IMEI नंबर बदला या छेड़छाड़ किया गया हो।
  • मोबाइल ऐप, वेबसाइट या किसी अन्य माध्यम से Calling Line Identity (CLI) या अन्य टेलीकॉम पहचानकर्ताओं में बदलाव करना।

छात्र आत्महत्या मामला: आईआईटी मुंबई के डीन सूर्यनारायण डूला पद से हटाए गए

मुंबई स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) ने छात्र की आत्महत्या के मामले में सोमवार को डीन सूर्यनारायण डूला को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया।

संस्थान के अधिकारियों के अनुसार, निदेशक प्रोफेसर शिरीष केदारे ने एक आधिकारिक ईमेल जारी कर बताया कि वर्तमान में डीन (प्रशासनिक मामले) के तौर पर कार्यरत प्रोफेसर डूला को पद से हटा दिया गया है। निदेशक ने कहा आगे की कार्रवाई जांच के बाद की जाएगी। इससे पहले प्रोफेसर डूला डीन (छात्र मामलों) के पद पर तैनात थे।

अधिकारियों के अनुसार, ऊर्जा विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग में बीटेक द्वितीय वर्ष के छात्र साहिल रवींद्र वाकोडे (22) का शव शुक्रवार शाम आईआईटी मुंबई के पवई परिसर स्थित छात्रावास के कमरे में पंखे से बनाए गए फंदे पर लटका मिला था।

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आरोप है कि परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए पकड़े जाने के कुछ ही घंटे बाद वाकोडे ने आत्महत्या कर ली।

महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के निवासी छात्र के परिवार ने आरोप लगाया है कि वाकोडे को संस्थान में प्रताड़ित किया गया और उसे जातिगत भेदभाव तक झेलना पड़ा जिसके बाद उसने यह कदम उठाया। छात्र की आत्महत्या के बाद परिसर में छात्रों ने विरोध-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि वाकोडे को निलंबित करने की धमकियां दी गईं।

छात्र के माता-पिता की शिकायत के बाद पुलिस ने शनिवार को भारतीय न्याय संहिता और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की। पुलिस के मुताबिक, मामले में एक प्रोफेसर को आरोपी बनाया गया है और अपराध शाखा मामले की जांच कर रही है।

Pic Credit : UNI

कौन हैं IIT Bombay के प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला? छात्र की मौत के बाद क्यों गई डीन की कुर्सी

शुक्रवार को IIT बॉम्बे के पवई कैंपस में एक छात्र के सुसाइड मामले में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला जांच के दायरे में आ गए हैं, जिस वजह से संस्थान ने उनसे डीन का पद छीन लिया है। बताया जा रहा है कि BTech के इस द्वितीय वर्ष के छात्र की मौत से ठीक पहले हुई घटना के समय डूला ही इंस्ट्रक्टर और परीक्षा के इनविजिलेटर (निरीक्षक) थे।

खबरों के मुताबिक, IIT बॉम्बे ने सोमवार को सूर्यनारायण डूला को डीन के पद से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई, जब संस्थान ने छात्र की मौत से जुड़ी अपनी पहले की कुछ बातों को वापस ले लिया।

IIT बॉम्बे ने यह भी माना कि जांच पूरी होने से पहले मौत की परिस्थितियों को लेकर कुछ बातें कही गई थीं। संस्थान ने इन दावों के लिए माफी भी मांगी है।

कौन हैं प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला?

LinkedIn प्रोफाइल के अनुसार, डूला पावर सिस्टम और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स के रिसर्चर हैं और उन्होंने IIT बॉम्बे में 17 साल से ज्यादा समय बिताया है।

उनका एकेडमिक काम स्मार्ट ग्रिड, माइक्रोग्रिड, पावर-सिस्टम कंट्रोल और डिस्ट्रिब्यूटेड एनर्जी रिसोर्स के इंटीग्रेशन जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित है।

उनकी प्रोफाइल में बताई गई रिसर्च की मौजूदा रुचियों में स्मार्ट ग्रिड और माइक्रोग्रिड, कन्वर्टर टोपोलॉजी और कंट्रोल, पावर सिस्टम के लिए कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल, डिस्ट्रिब्यूटेड एनर्जी रिसोर्स का ग्रिड इंटीग्रेशन, और पावर सिस्टम ऑपरेशन और कंट्रोल शामिल हैं।

सूर्यनारायण डूला के प्रोफाइल में बताया गया है कि उनका एकेडमिक बैकग्राउंड पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और पावर सिस्टम्स पर आधारित है।

IIT बॉम्बे में 17 साल

डूला सितंबर 2009 में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर IIT बॉम्बे से जुड़े और मार्च 2015 तक इस पद पर रहे। इसके बाद, मार्च 2015 से जुलाई 2019 तक वे एसोसिएट प्रोफेसर रहे।

उनकी लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, जुलाई 2019 से वे IIT बॉम्बे में फुल-टाइम प्रोफेसर हैं।

उन्होंने मार्च 2023 से जुलाई 2026 तक डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स के तौर पर भी काम किया। जुलाई 2026 में उन्होंने डीन ऑफ एडमिनिस्ट्रेटिव अफेयर्स का पद संभाला। उनकी प्रोफाइल के अनुसार, वे अभी भी इस पद पर हैं।

इस तरह, डूला IIT बॉम्बे में शिक्षण और रिसर्च के साथ-साथ कई अहम प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी संभाल रहे हैं।

एकेडमिक और प्रोफेशनल बैकग्राउंड

IIT बॉम्बे में शामिल होने से पहले, डूला ने जनवरी से सितंबर 2009 के बीच ‘पावर रिसर्च एंड डेवलपमेंट कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड’ में पावर-सिस्टम कंसल्टिंग का काम किया।

इससे पहले, उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, उन्होंने अगस्त 2006 से अक्टूबर 2008 के बीच ‘मशीन 2 मशीन’ में आर्किटेक्ट के तौर पर काम किया। उन्होंने 2002-03 में एलुरु के CRR कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में लेक्चरर के तौर पर भी काम किया।

डूला की एकेडमिक क्वालिफिकेशन भी पावर और एनर्जी सिस्टम के क्षेत्र में ही हैं। उन्होंने 2004 से 2006 के बीच IIT दिल्ली से पावर सिस्टम में PhD पूरी की। उससे पहले, उन्होंने 2000 से 2002 के बीच IIT बॉम्बे से एनर्जी सिस्टम्स एंड इंजीनियरिंग में M.Tech किया।

उन्होंने 1996 से 2000 के बीच बीच आचार्य नागार्जुन यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में B.Tech की डिग्री हासिल की।

विवाद के केंद्र में क्यों हैं डूला?

डूला इस विवाद के केंद्र में इसलिए आए क्योंकि वे मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान कोर्स इंस्ट्रक्टर और इनविजिलेटर (निरीक्षक) थे। ANI की रिपोर्ट के अनुसार, IIT बॉम्बे फैकल्टी फोरम के बयान में कहा गया है कि उन्होंने एक छात्र को बिना इजाजत स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हुए देखा था।

फैकल्टी फोरम ने बताया कि डूला 18 सितंबर को सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक परीक्षा की निगरानी कर रहे फोरम के मुताबिक, उन्होंने जिस घटना को शैक्षणिक नियमों का उल्लंघन बताया, उसे देखने के बाद उन्होंने संस्थान के नियमों के अनुसार अधिकारियों को इसकी जानकारी दी।

इसके बाद फोरम ने डूला का समर्थन करते हुए कहा कि वे संस्थान की सीनेट द्वारा मंजूर शैक्षणिक नीतियों के तहत अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे थे।

बता दें कि IIT बॉम्बे के पहले के बयान में कहा गया था कि छात्र ने कथित तौर पर परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया और जवाब पाने के लिए प्रश्न-पत्र को ChatGPT पर अपलोड किया।

बाद में संस्थान ने इस बात के लिए माफी मांगी कि उसने जांच की सही प्रक्रिया से पुष्टि होने से पहले ही ये विवरण सार्वजनिक कर दिए थे।

प्रोफेसर के खिलाफ पुलिस केस दर्ज

वहीं, छात्र के माता-पिता की ओर से उत्पीड़न और जाति-आधारित भेदभाव का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बाद यह विवाद बढ़ गया।

इसके बाद डूल्ला को आरोपी बनाते हुए एक FIR दर्ज की गई। आरोपों में यह भी शामिल था कि उन्होंने तीन महीने तक छात्र के खिलाफ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया।

फिलहाल, मामले को मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया है। डूल्ला पर लगे आरोप अभी चल रही जांच का हिस्सा हैं और इन्हें अभी तक तथ्य के तौर पर साबित नहीं किया गया है।

बता दें कि यह घटनाक्रम कैंपस में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों और संस्थान से जवाबदेही की बढ़ती मांगों के बीच सामने आया। इसके बाद IIT बॉम्बे ने डूल्ला की डीनशिप सस्पेंड कर दी और साथ ही घटनाओं के बारे में अपनी पिछली बात भी वापस ले ली।

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मरीज के परिवार से बहस के बीच डॉक्टर ने छोड़ी कुर्सी, मध्य प्रदेश के अस्पताल का वीडियो वायरल

मध्य प्रदेश के अंबाह सिविल अस्पताल का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में है। वीडियो में एक डॉक्टर और मरीज के परिजनों के बीच तीखी बहस होती दिखाई देती है। बातचीत बढ़ने के बाद डॉक्टर अपनी कुर्सी से उठती हैं और वहां से चली जाती हैं। कुछ लोगों ने वीडियो सामने आने के बाद सवाल उठाया कि आखिर डॉक्टर मरीज को छोड़कर क्यों चली गईं।

वहीं, दूसरी तरफ ये सवाल भी उठने लगा कि अगर किसी डॉक्टर को घेरकर उससे बहस की जाए और मोबाइल से रिकॉर्डिंग शुरू कर दी जाए, तो ऐसी स्थिति में उससे किस तरह की प्रतिक्रिया की उम्मीद की जानी चाहिए?

16 सितंबर को क्या हुआ था?

मामला 16 सितंबर का बताया जा रहा है। उस समय डॉ. आरती दंडोतिया अंबाह सिविल अस्पताल में ड्यूटी पर थीं। वायरल वीडियो में कई लोग उनके आसपास खड़े नजर आते हैं। एक व्यक्ति डॉक्टर से मरीज को देखने के लिए कहता सुनाई देता है। बहस के दौरान माहौल गर्म होता जाता है। इसके बाद डॉक्टर अपनी सीट से उठकर कमरे से बाहर चली जाती हैं। पीछे से एक व्यक्ति उन्हें आवाज लगाते हुए पूछता है, “जा कहां रही हो?” यही कुछ सेकंड का वीडियो सोशल मीडिया पर अलग-अलग दावों के साथ शेयर किया जाने लगा।

क्या डॉक्टर ने इलाज से इनकार किया था?

मरीज के परिजनों की ओर से डॉक्टर पर इलाज नहीं करने के आरोप लगाए गए। लेकिन अस्पताल प्रशासन की ओर से सामने आई जानकारी इससे अलग तस्वीर पेश करती है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, अंबाह के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) प्रमोद शर्मा ने बताया कि तीन घायल मरीजों का दो दिन पहले ही डॉ. दंडोतिया ने इलाज किया था। उनके अनुसार, बाद में मरीजों के परिजनों द्वारा डॉक्टर की मोबाइल फोन से रिकॉर्डिंग किए जाने को लेकर विवाद शुरू हुआ।इसलिए वायरल वीडियो में दिखाई देने वाली घटना को केवल कुछ सेकंड के फुटेज के आधार पर समझना पूरी तस्वीर नहीं बताता।

डॉक्टर की सुरक्षा भी क्यों जरूरी है?

इस घटना ने अस्पतालों में डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर पुरानी बहस फिर सामने ला दी है। मरीज और उनके परिजन स्वाभाविक रूप से चाहते हैं कि इलाज तुरंत हो और डॉक्टर उनकी बात सुने। लेकिन दूसरी ओर, डॉक्टर भी ऐसे माहौल में काम करते हैं जहां किसी विवाद के दौरान स्थिति अचानक नियंत्रण से बाहर हो सकती है। आईपीएस अधिकारी अरुण बोथरा ने भी सोशल मीडिया पोस्ट में डॉक्टर का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों का काम मरीजों का इलाज करना है, लेकिन उन्हें गाली-गलौज या डराने-धमकाने जैसी स्थिति सहने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।