Honda, Suzuki and Yamaha e-scooter sales cross 10,000 units in 2026

Honda, Suzuki and Yamaha e-scooter sales cross 10,000 units in 2026
Graphic with Honda, Suzuki and Yamaha e-scooters

Cumulative retail sales of the three Japanese electric scooter manufacturers in India – Honda, Suzuki and Yamaha – have crossed the 10,000-units mark for the first time in a calendar year. As per the latest Vahan statistics, this triumvirate have delivered 10,735 units to their customers between January 1 and October 8 in 2026. 

Last year, Honda, which was the sole e-2-wheeler OEM in India, had sold 7,730 units of the Activa-e and QC1, less of the former and more of the latter. While Suzuki entered the market in January 2026 with its e-Access, Yamaha plugged in two months later in March with its EC-O6. This makes 2026 the first year when all these three Japanese OEMs are part of the Indian electric scooter market.

A look at the OEMs’ monthly performance reveals that Honda Motorcycle & Scooter India has sold 5,536 units in this year to date, accounting for 51 percent of the total 10,735 Japanese e-scooters delivered. HMSI’s best monthly sales this year were in September (1,107 units), marking the first time the OEM has crossed 1,000 units. This number can only improve following the recent launch of its third e-scooter for India – the QC3. 

The initial rollout of the QC3 will be limited to five cities across the country: Delhi, Agra, Cuttack, Surat and Kollam, with a nationwide rollout to follow in a phased manner.. 

Suzuki Motorcycle India, which entered the India e-2W market with its e-Access in January this year as an alternative to the popular petrol-engined Suzuki Access 125, has delivered 4,133 units till October 8. This gives the company a 39 percent share of the three Japanese OEM’s total e2W retail sales. The monthly sales chart reveals that monthly sales have crossed 600 units for three months running: July (606 units), August (674 units) and September (657 units). Rather creditable considering this is an expensive product, priced at Rs 1.88 lakh (ex-showroom) and the costliest amongst the Japanese EVs. 

India Yamaha Motor, which plugged into the e-2W market this March, has retailed 1,066 units, which gives it a 10 percent share of the 10,735 units delivered by Honda, Suzuki and Yamaha. Yamaha’s vehicle of entry is the EC-06, its first electric scooter developed in collaboration with River Mobility. IYM’s highest monthly sales to date were in September (232 units)

Japanese OEMs have 0.66 percent share of e-2Ws sold in 2026 so far

As the monthly retail sales data table depicts, combined Honda-Suzuki-Yamaha sales were at their highest in September 2026 (1,996 units), which gives them a 1 percent share of the record 2,07,850 e-2Ws sold in India last month. Of the total 16,10,854 e-2Ws sold between January 1 and October 8, these three Japanese OEMs with 10,735 units have a meagre 0.66 percent share. 

Among the reasons for their minimal presence in this booming segment of the Indian EV industry is that Honda, Suzuki and Yamaha entered the e-2W market late, as compared to their ICE legacy rivals TVS Motor Co (January 2020), Bajaj Auto (January 2020) or Hero MotoCorp Vida (November 2022).

While market leader TVS has sold 4,22,274 iQubes and Orbiters for a 26 percent market share of the e-2W sales in 2026 to date, Bajaj Auto has delivered 3,61,988 Chetaks (22 percent share), Ather Energy has sold 2,67,579 units (17 percent share) and Hero Vida 1,77,541 e-scooters (11 percent share). 

There is also the issue of their stiff model pricing in a value-conscious market, which has a plethora of more affordable e-scooters which are also more tech-laden, as well as a limited sales network compared to the Indian legacy OEMs as well as a host of startups which are regulars in the monthly Top 10 e-2W OEM chart. 

Surat-Udaipur Vande Bharat Express: नई वंदे भारत एक्सप्रेस की बुकिंग शुरू! जानिए इसका टाइम-टेबल, रूट, स्टॉपेज और किराए की सारी डिटेल

Surat-Udaipur Vande Bharat Express: नई वंदे भारत ट्रेन सूरत और उदयपुर के बीच चलेगी। इस ट्रेन में यात्रा करने का इंतजार कर रहे यात्रियों के लिए खुशखबरी है। सूरत और उदयपुर के बीच प्रस्तावित नई वंदे भारत एक्सप्रेस के लिए बुकिंग गुरुवार, 1 अक्टूबर को शुरू हो गई है। इससे यात्रियों को दक्षिण गुजरात और राजस्थान के बीच तेज सेमी-हाई-स्पीड रेल कनेक्शन मिलेगा।

पश्चिमी रेलवे के मुंबई सेंट्रल डिवीजन ने बताया कि ट्रेन संख्या 26903/26904 के लिए पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) काउंटर और IRCTC वेबसाइट के जरिए रिजर्वेशन शुरू हो गए हैं। नई वंदे भारत सेवा मंगलवार को छोड़कर, हफ्ते में सीभी छह दिन चलेगी। रेलवे अधिकारियों ने कहा कि यह ट्रेन सूरत और उदयपुर के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगी और बिजनेस, टूरिज्म और दूसरे कामों के लिए यात्रा करने वाले यात्रियों को फायदा पहुंचाएगी।

कब शुरू होगी सूरत-उदयपुर वंदे भारत?

सूरत-उदयपुर वंदे भारत एक्सप्रेस इस वीकेंड से चलना शुरू होगी। सूरत-उदयपुर ट्रेन (26903) रविवार, 4 अक्टूबर को सूरत से अपनी पहली यात्रा शुरू करेगी, जबकि वापसी उदयपुर-सूरत सर्विस (26904) शनिवार, 3 अक्टूबर से शुरू होगी।

वंदे भारत ट्रेन का समय क्या है?

सूरत-उदयपुर वंदे भारत एक्सप्रेस करीब 690 km का सफर करीब साढ़े सात घंटे में पूरा करेगी।

ट्रेन (26903) सूरत से सुबह 6:10 बजे निकलेगी और उसी दिन दोपहर 1:40 बजे उदयपुर पहुंचेगी।

वापसी वाली ट्रेन (26904) उदयपुर से दोपहर 3:35 बजे निकलेगी और रात 11 बजे सूरत पहुंचेगी।

सूरत से यात्रा करने वाले यात्री दोपहर तक उदयपुर पहुंच सकेंगे, जबकि राजस्थान से लौटने वाले यात्री देर रात सूरत पहुंच सकते हैं।

स्टेशन जहां ट्रेन रुकेगी

वंदे भारत एक्सप्रेस दोनों दिशाओं में नौ स्टेशनों पर रुकेगी।

स्टॉपेज में भरूच, वडोदरा, आनंद, मणिनगर, असरवा (अहमदाबाद), हिम्मतनगर, शामलाजी रोड, डूंगरपुर और जावर शामिल हैं।

यह सेवा वडोदरा, आणंद और अहमदाबाद सहित गुजरात के बड़े शहरों से यात्रियों को सीधी कनेक्टिविटी देगी, साथ ही उदयपुर और राजस्थान के दूसरे हिस्सों तक पहुंच को बेहतर बनाएगी।

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Surat Employee News: ₹10 हजार बकाए के लिए बॉस की दुकान में लगाई आग! 14 दुकानें जलकर खाक; 24 करोड़ रुपये का माल स्वाहा

Surat Employee News: गुजरात के सूरत से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, महज 10 हजार रुपये के कथित बकाए पेमेंट को लेकर शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि इसका अंजाम करोड़ों रुपये के नुकसान के रूप में सामने आया। सूरत पुलिस के मुताबिक, एक पूर्व अकाउंटेंट ने अपने मालिक से नाराज होकर उसकी दुकान में कथित तौर पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। इसकी वजह से देखते ही देखते आग ने आसपास की दुकानों को भी अपनी चपेट में ले लिया। इस घटना में 14 दुकानें जलकर खाक हो गईं। इस दौरान करीब 24 करोड़ रुपये का कपड़ा एवं अन्य सामान नष्ट हो गया।

बताया जा रहा है कि यह घटना 9 सितंबर को सरोली इलाके के ‘श्याम संगिनी टेक्सटाइल मार्केट (Surat Shyam Sangini Textile Market)’ में हुई थी। शुरुआती तौर पर इसे आग लगने की घटना माना जा रहा था। लेकिन कई दिनों की जांच के बाद पुलिस ने इसे कथित रूप से सुनियोजित आगजनी बताया है। मामले में सूरत क्राइम ब्रांच ने 33 वर्षीय विनोद पंडित सावले (Vinod Pandit Sawale) को आगजनी के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस ने कहा कि 9 सितंबर को सरोली इलाके में लगी आग कोई हादसा नहीं थी। बल्कि कर्मचारी द्वारा अपने मालिक के खिलाफ जान-बूझकर लगाई गई आग थी।

अप्रैल में नौकरी शुरू की थी, कुछ समय बाद हुआ विवाद

पुलिस के अनुसार, सावले ने अप्रैल 2026 में मार्केट की छठी मंजिल स्थित एक दुकान में अकाउंटेंट के तौर पर काम शुरू किया था। उसे करीब 30 हजार रुपये सैलरी मिलती थी। बाद में उसके काम को लेकर दुकान मालिक के साथ विवाद हुआ। फिर उसने नौकरी छोड़ दी। पुलिस का कहना है कि सावले का करीब ₹10 हजार के कथित बकाया भुगतान को लेकर भी मालिक से विवाद था। इसी बकाए पेमेंट को लेकर वह नाराज था। कथित तौर पर उसने मालिक को सबक सिखाने के लिए आग लगाने की योजना बनाई।

पहली कोशिश नाकाम, दूसरी बार पेट्रोल लेकर पहुंचा

जांच में पुलिस ने दावा किया कि यह पहली बार नहीं था जब सावले ने दुकान में आग लगाने की कोशिश की। उसने कथित तौर पर पहले भी आग लगाने का प्रयास किया था। लेकिन वह सफल नहीं हुआ। इसके बाद उसने दूसरी योजना बनाई। पुलिस के मुताबिक, उसने करीब 150 रुपये का पेट्रोल खरीदा और उसे प्लास्टिक की थैली तथा एक बोतल में लेकर मार्केट पहुंचा।

12:30 बजे दुकान के बाहर पेट्रोल छिड़कने का आरोप

CCTV फुटेज के आधार पर पुलिस ने बताया कि एक सख्त चेहरे को सफेद रुमाल से ढककर और कंधे पर बैग लटकाए मार्केट में दाखिल हुआ था। पुलिस के मुताबिक, बाद में उसकी पहचान सावले के रूप में हुई। जांच के अनुसार, सावले ने देवध गांव स्थित एक पेट्रोल पंप से करीब 150 रुपये का पेट्रोल लिया। फिर 8 सितंबर की रात करीब 9 बजे वह मार्केट पहुंचा। वह 5वीं मंजिल की सीढ़ियों के पास बैठकर इंतजार करता रहा।

करीब रात 12:30 बजे जब मार्केट लगभग सुनसान हो गया, उसने कथित तौर पर दुकान के बाहर रखे कपड़े के बॉक्स और पार्सल पर पेट्रोल छिड़का। फिर उसमें आग लगा दी। इसके बाद वह मौके से भाग गया। आग ने कुछ ही समय में विकराल रूप ले लिया। देखते ही देखते आग आसपास की दुकानों तक फैल गई। पुलिस के मुताबिक, करीब 14 दुकानें पूरी तरह जल गईं। जबकि बड़ी मात्रा में कपड़ा और अन्य सामान नष्ट हो गया। आग पर काबू पाने में दमकलकर्मियों को करीब 38 घंटे लगे।

1,500 CCTV कैमरों से खुला राज

घटना के बाद सरोली पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए क्राइम ब्रांच ने मार्केट और आसपास के इलाकों में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान 1,500 से ज्यादा CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग का विश्लेषण किया गया। ये कैमरे सूरत पुलिस के ‘विश्वास प्रोजेक्ट’ फेज-2 के तहत लगाए गए हैं। जांचकर्ताओं ने संदिग्ध के आने-जाने के रास्ते को आगे और पीछे की दिशा में ट्रैक किया। इसी CCTV ट्रेल के आधार पर पुलिस कथित तौर पर सावले तक पहुंची।

FIR की जानकारी मिलते ही बंद किया मोबाइल, परिवार के साथ भागा

पुलिस के अनुसार, आग का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने और FIR दर्ज होने की जानकारी मिलने के बाद सावले ने अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया। इतना ही नहीं पत्नी तथा बच्चे के साथ वह सूरत से फरार हो गया। जांच में पुलिस को पता चला कि वह पहले राजस्थान के खाटू श्याम मंदिर गया और बाद में अयोध्या पहुंचा। बाद में जब वह सूरत लौटा तो क्राइम ब्रांच को उसके ठिकाने की जानकारी मिली। गणपति सुरक्षा व्यवस्था में तैनात क्राइम ब्रांच की टीम ने उसे डिंडोली के फ्लावर गार्डन के पास गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद उसे सरोली पुलिस के हवाले कर दिया गया।

पुलिस कर रही पेट्रोल खरीद और कथित साजिश की जांच

सूरत के अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर करणराज वाघेला के अनुसार, आग से करीब 25 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। वहीं, पुलिस की जांच में जले हुए कपड़े और अन्य सामान की कीमत करीब ₹24 करोड़ बताई गई है। सूरत पुलिस अब आरोपी से कथित साजिश, आग लगाने की पूरी योजना और पेट्रोल की खरीद से जुड़े पहलुओं पर पूछताछ कर रही है।

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जांचकर्ता उस पेट्रोल पंप संचालक की भूमिका की भी जांच कर रहे हैं, जिसने कथित तौर पर आरोपी को पेट्रोल बेचा था। पुलिस ने घटना का क्रम समझने के लिए आरोपी को श्याम संगिनी टेक्सटाइल मार्केट भी ले जाकर सीन का री-कंस्ट्रक्शन कराया। इस दौरान आरोपी हाथ जोड़े हुए नजर आया। फिलहाल, मामले की जांच जारी है।

भंगार से कला गढ़ रहे हैं सूरत के साकीरभाई, अब अपने हुनर को पहचान दिलाने की कोशिश | Creative Person

भंगार से कला गढ़ रहे हैं सूरत के साकीरभाई, अब अपने हुनर को पहचान दिलाने की कोशिश | Creative Person

बचपन पूरा मजदूरी में बीता…
आज साकीरभाई सूरत के सबसे क्रिएटिव लोगों में गिने जाते हैं।
पिछले 18 सालों से वो भंगार से मिनी व्हीकल्स और अनोखी एंटिक चीज़ें बनाकर लोगों का ध्यान खींच रहे हैं।
वो लोगों के लिए ऐसी यूनिक कलाकृतियां बनाते हैं, लेकिन अब उनका सपना है कि उनके इस हुनर को एक अलग पहचान मिले।
अगर आप भी भंगार से ऐसी एंटिक चीज़ें बनवाना चाहते हैं, तो साकीरभाई से 9898256082 पर संपर्क कर सकते हैं।
@shakirbatli

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भंगार से कला गढ़ रहे हैं सूरत के साकीरभाई, अब अपने हुनर को पहचान दिलाने की कोशिश | Creative Person | Best from Waste | Miniature Art | Surat

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Honda QC3 launched at Rs 1.35 lakh

Honda QC3 launched at Rs 1.35 lakh
Inside render showing the Honda QC3 in Pearl Precious White colour.

Honda has launched the QC3 at Rs 1.35 lakh, its third electric scooter for India after the QC1 and the Activa e:. The family EV scooter will have a 3kWh battery that can charge to full in approximately four hours, with a zero to 80 percent fill up taking 2 hours and 40 minutes. Honda has announced that the initial roll out of the QC3 will be limited to five cities across the country: Delhi, Agra, Cuttack, Surat, and Kollam with a nationwide rollout to follow in a phased manner.

  1. Gets 32 litres of under seat storage
  2. Has a hub-mounted motor, front disc brake

Honda QC3: What do we know so far?

QC3 will have the most range on any Honda e-scooter in India

Like we mentioned earlier, the QC3 will be Honda’s third EV product for India. Both the QC1 and the Activa e: were thought to be too under-equipped for their asking prices of Rs 90,408 and Rs 1.2 lakh, respectively. The QC3 aims to fix that with a bigger battery than the QC1’s 1.5kWh unit, and markedly more range than the Activa e:’s 102km (claimed, IDC).

Besides the charging times, we reported earlier that the QC3 will get a 5-inch TFT display capable of turn-by-turn navigation, via Honda Roadsync connectivity system. Honda has now revealed the under seat storage to be a respectable 32 litres, markedly higher than the QC1’s 26 litres. The Activa e:’s boot was almost completely occupied by its removable battery.

Thanks to local manufacturing, the QC3 is priced more competitively than Honda’s earlier EVs, at Rs 1.35 lakh, with four colours on offer: Matt Photon Gray Metallic, Pearl Precious White, Pearl Shallow Blue and Pearl Siren Blue. The price makes it a direct rival to the TVS iQube 3.1kWh at Rs 1.30 lakh, the Chetak C3502 at Rs 1.44 lakh, the Vida VX2 Plus 3.1 at Rs 1.03 lakh, and the newly launched Ather Konarc S 161 at Rs 1.45 lakh. All prices are ex-showroom, Delhi.

Honda hasn’t specified when deliveries will start at the time of writing. However, if you live in one of the five cities, bookings can be made at Honda’s website, or at your nearest RedWing dealership for Rs 5,000. With this, we now have prices for seven of the ten products Honda had announced in July, leaving the XR300L, XR300 Rally and the twin-cyl Rebel 500 as the only ones pending to be launched.

देश की पहली बुलेट ट्रेन पर बड़ा अपडेट! 2027 में खुलेगा सूरत-वापी का 100 किमी का स्ट्रेच, स्क्वीज टेस्ट को लेकर आई ये जानकारी

भारत की पहली हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर देशवासियों का इंतजार अब बहुत जल्द खत्म होने वाला है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने केंद्रीय कैबिनेट की बैठक के बाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की प्रगति पर एक बड़ा अपडेट साझा करते हुए बताया है कि देश की पहली बुलेट ट्रेन का औपचारिक उद्घाटन साल 2027 में तय किया गया है। इसके तहत सबसे पहले गुजरात के सूरत और वापी के बीच 100 किलोमीटर लंबे सेक्शन की शुरुआत की जाएगी। इस रूट पर निर्माण कार्य बहुत ही तेज गति से आगे बढ़ रहा है और इस पूरे सेक्शन का काम इस साल दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा।

अगले साल मई-जून में पटरी पर उतरेगी ट्रेन, टेस्ट कोच बनकर तैयार

परियोजना के परीक्षण और सुरक्षा पहलुओं की जानकारी देते हुए रेल मंत्री ने बताया कि ट्रेन का पहला टेस्ट कोच पिछले हफ्ते ही बनकर तैयार हो चुका है। योजना के मुताबिक अगले साल मई-जून तक ट्रेन को औपचारिक टेस्टिंग के लिए पटरी पर उतार दिया जाएगा। ट्रेन को ट्रैक पर उतारने से पहले इसके विभिन्न तकनीकी और यांत्रिक परीक्षण किए जा रहे हैं। ट्रायल और टेस्टिंग की यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही 2027 में इस बहुप्रतीक्षित ट्रेन सेवा का उद्घाटन कर इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।

क्या होता है स्क्वीज टेस्ट और क्लाइमेट टेस्ट

ट्रेन कोच की सुरक्षा और मजबूती सुनिश्चित करने के लिए इसे कई कड़े परीक्षणों से गुजारा जा रहा है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, कोच का सबसे पहला और महत्वपूर्ण परीक्षण स्क्वीज टेस्ट होता है। इस टेस्ट में कोच के ढांचे पर भारी दबाव (प्रेशर) डाला जाता है, जिससे उसकी मैकेनिकल स्ट्रेंथ यानी यांत्रिक मजबूती और संरचनात्मक सहनशक्ति के फीचर्स की बारीकी से जांच की जा सके। स्क्वीज टेस्ट में खरा उतरने के बाद कोच क ‘क्लाइमेट टेस्ट किया जाएगा। इस टेस्ट के दौरान कोच को पानी में रखने के साथ-साथ अत्यधिक उच्च और निम्न तापमान की विपरीत परिस्थितियों में रखकर परखा जाएगा। इन सभी कड़े टेस्ट में सफल होने के बाद ही कोच की इंटीरियर फर्निशिंग और बाकी के अन्य कोचों के निर्माण का काम पूरा किया जाएगा।

508 किलोमीटर लंबा है मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर

आपको बता दें कि भारत की यह पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना महाराष्ट्र, गुजरात और केंद्र शासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली से होकर गुजरेगी। मुंबई से अहमदाबाद के बीच बन रहे इस पूरे बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की कुल लंबाई 508 किलोमीटर है। इस पूरे रूट पर कुल 12 अत्याधुनिक स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इनमें मुंबई, ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलीमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद और साबरमती शामिल हैं। इन सभी स्टेशनों को संबंधित शहर की सांस्कृतिक पहचान को ध्यान में रखकर खूबसूरत और आधुनिक रूप में डिजाइन किया जा रहा है, जहां यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं और बेहतर मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी मिलेगी।

2017 में रखी गई थी इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट की नींव

मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना की आधारशिला सितंबर 2017 में रखी गई थी, जिसे भारत के ट्रांसपोर्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर के इतिहास में एक मील का पत्थर माना गया। इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना का मुख्य उद्देश्य सिर्फ दो प्रमुख आर्थिक केंद्रों यानी मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा के समय को कई घंटे घटाना ही नहीं है बल्कि भारतीय रेल यात्रियों को विश्वस्तरीय सुरक्षा और आधुनिक तकनीक के साथ हाई-स्पीड यात्रा का एक नया और शानदार अनुभव प्रदान करना भी है।

रेलवे बोर्ड ने सूरत-उदयपुर वंदे भारत ट्रेन को दी मंजूरी, 9 स्टॉपेज के साथ जानें टाइमिंग और रूट

Surat-Udaipur Vande Bharat Express: रेल मंत्रालय ने गुजरात को राजस्थान से जोड़ने वाली एक नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन सेवा को मंज़ूरी दे दी है। यह नई सेमी-हाई स्पीड ट्रेन सूरत और उदयपुर के बीच चलेगी। इस ट्रेन का रखरखाव और संचालन वेस्टर्न रेलवे (WR) जोन करेगा।

वेस्टर्न रेलवे और नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे के जनरल मैनेजर (ऑपरेटिंग) को 31 अगस्त को लिखे एक पत्र में, रेलवे बोर्ड ने बताया कि उसने 26903/26904 सूरत-उदयपुर सिटी वंदे भारत एक्सप्रेस शुरू करने को मंजूरी दे दी है।

इंडियन रेलवे एक वंदे भारत ट्रेन बंद करेगा

रेलवे बोर्ड ने ट्रेन नंबर 26963/26964 उदयपुर सिटी-असारवा वंदे भारत एक्सप्रेस को बंद करने की भी मंजूरी दी है। उदयपुर सिटी-असारवा (अहमदाबाद) वंदे भारत एक्सप्रेस फरवरी 2026 में शुरू की गई थी। अभी यह ट्रेन मंगलवार को छोड़कर हफ्ते में छह दिन चलती है।

सूरत-उदयपुर वंदे भारत ट्रेन: दूरी और यात्रा का समय

सूरत-उदयपुर वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन लगभग 690 किलोमीटर की दूरी 7 घंटे 30 मिनट में तय करती है। यह अधिकतम 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है।

सूरत-उदयपुर वंदे भारत एक्सप्रेस: ​​स्टॉपेज और फ्रीक्वेंसी

सूरत-उदयपुर वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन मंगलवार को छोड़कर हफ्ते में 6 दिन चलेगी। सूरत और उदयपुर सिटी के बीच अपनी यात्रा के दौरान, यह ट्रेन 9 रेलवे स्टेशनों पर रुकेगी। ये स्टेशन हैं: भरूच, वडोदरा, आणंद, मणिनगर, असरवा, हिम्मतनगर, शामलाजी रोड, डूंगरपुर और जावर।

सूरत-उदयपुर सिटी वंदे भारत: कोच की संख्या और समय

सूरत-उदयपुर सिटी वंदे भारत एक्सप्रेस में 8 कोच होंगे। ट्रेन नंबर 26903 सूरत से सुबह 06:10 बजे चलेगी और दोपहर 13:40 बजे उदयपुर सिटी पहुंचेगी। वापसी में, ट्रेन नंबर 26904 उदयपुर सिटी से दोपहर 15:35 बजे चलेगी और रात 23:00 बजे सूरत पहुंचेगी।

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ये खाना है या चूहे की दावत? सूरत रेलवे स्टेशन के फूड स्टॉल का VIDEO देख भड़के लोग

सूरत रेलवे स्टेशन से सामने आए एक वीडियो ने यात्रियों का ध्यान खींच लिया है। इसमें एक चूहा कांच के फूड काउंटर के अंदर रखा आलू पेटिज खाते हुए दिखाई दे रहा है। एक यात्री ने इस घटना को कैमरे में रिकॉर्ड किया और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। मामला सामने आने के बाद रेलवे अधिकारियों ने तुरंत संबंधित स्टॉल पर कार्रवाई की। इस घटना ने रेलवे स्टेशनों पर मिलने वाले खाने की साफ-सफाई और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

यात्रियों के बीच अब सवाल उठ रहे हैं कि खाने के सामान को किस तरह सुरक्षित रखा जाता है और फूड स्टॉल्स की नियमित निगरानी कितनी प्रभावी है। घटना के बाद रेलवे ने भी मामले को गंभीरता से लिया है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।

सुबह-सुबह यात्री ने देखा पूरा मंजर

यह घटना 29 अगस्त की सुबह के शुरुआती घंटों की बताई जा रही है। एक यात्री ने देखा कि चूहा कांच के डिस्प्ले काउंटर के अंदर आराम से घूम रहा था और वहां रखे खाने में से पफ कुतर रहा था। काउंटर में यात्रियों के लिए दूसरे खाद्य पदार्थ भी रखे हुए थे। यात्री ने तुरंत इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया। बाद में यही वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया।

वीडियो वायरल होते ही हरकत में आया रेलवे

वीडियो के सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद रेलवे अधिकारियों तक मामला पहुंचा। इसके बाद संबंधित स्टॉल को तुरंत बंद करा दिया गया। वेस्टर्न रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी विनीत अभिषेक के मुताबिक, रेलवे को घटना की जानकारी मिलते ही स्टॉल पर कार्रवाई की गई। बंद किए गए काउंटर की सफाई भी कराई गई।

स्टॉल संचालक पर भी शुरू हुई कार्रवाई

मामले को सिर्फ सफाई तक सीमित नहीं रखा गया है। रेलवे के कमर्शियल विभाग ने स्टॉल संचालक के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। रेलवे की ओर से आगे ऐसी कार्रवाई पर भी विचार किया जा रहा है, जिससे संबंधित स्टॉल का कॉन्ट्रैक्ट स्थायी रूप से खत्म किया जा सकता है।

खास सफाई अभियान के बीच सामने आया मामला

हैरानी की बात यह है कि यह घटना रेलवे के एक विशेष सफाई अभियान के कुछ ही दिनों बाद सामने आई। वेस्टर्न रेलवे ने सूरत और उधना रेलवे स्टेशनों के फूड स्टॉल्स में डीप क्लीनिंग और सैनिटाइजेशन अभियान चलाने की घोषणा की थी। इस अभियान का उद्देश्य रेलवे के खानपान केंद्रों में साफ-सफाई और हाइजीन के स्तर को बेहतर बनाना था।

16 अगस्त को भी हुआ था पेस्ट कंट्रोल

रेलवे अधिकारी के अनुसार, 16 अगस्त को स्टेशन पर पेस्ट और रोडेंट कंट्रोल भी कराया गया था। इसके बावजूद फूड काउंटर के अंदर चूहे के पहुंचने की घटना ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यात्रियों की सेहत को लेकर बढ़ी चिंता

रेलवे स्टेशन पर लोग सफर के दौरान अक्सर फूड स्टॉल से खाना और नाश्ता खरीदते हैं। ऐसे में खाने के सामान के बीच चूहे का पहुंचना यात्रियों के लिए चिंता की बात है। वीडियो सामने आने के बाद लोगों का सवाल यही है कि अगर कांच के बंद काउंटर के अंदर चूहा पहुंच सकता है, तो वहां रखे खाने की सुरक्षा और साफ-सफाई कितनी भरोसेमंद है? फिलहाल रेलवे ने स्टॉल बंद कर कार्रवाई शुरू कर दी है, लेकिन यह घटना स्टेशन के फूड आउटलेट्स में नियमित सफाई और निगरानी को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करती है।

26 तारीख का अनसुलझा खौफ! सुनामी, भुज भूकंप से लेकर नेपाल में तबाही तक… आखिर क्यों बार-बार दोहराया जाता है यह मंजर?

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Global Assure Roadside Assistance: When every minute matters
Global Assure 30 minute Service Assurance

A car breaking down is inconvenient at the best of times. But on a busy commute, during a road trip or when you’re already running late, the problem isn’t simply that the car has stopped moving. It’s everything that comes next: finding help, waiting for it to arrive and wondering how long you’ll be stranded.

That’s where roadside assistance can make a real difference. And with its 30-Minute Service Assurance, Global Assure is putting a sharper focus on one of the biggest pain points of a breakdown: the wait.

Response Time

A flat tyre or drained battery might be relatively straightforward to address, but being stuck on the roadside can quickly become stressful. Plans get disrupted, schedules slip, and every additional minute spent waiting adds to the frustration.

Global Assure RSA waiting for roadside assistance

Global Assure’s approach is built around reducing that uncertainty. Once roadside assistance is called, its own fleet of trained technicians is deployed, with the appropriate equipment to assess and address the problem. Its 30-Minute Service Assurance is supported by strengthened field operations, an expanded service footprint and real-time service tracking capabilities. The service is currently available in 15 cities including Delhi, Mumbai, Bengaluru, Chennai, Kolkata, Hyderabad, Jaipur, Lucknow, Vadodara, Ahmedabad, Indore, Pune, Surat, Dehradun, and Chandigarh.

30-Minute Service Assurance

The advantage of having dedicated technicians and service vehicles is that assistance isn’t simply about arranging a third party and hoping for the best. The aim is to get the right help to the vehicle and start resolving the problem as quickly as possible. Depending on the situation, this can include assistance for a flat tyre and drained battery, as well as fuel assistance, towing and vehicle recovery. Global Assure also offers support for EV-related breakdowns, recognising that the roadside assistance landscape needs to evolve alongside the changing vehicle market.

On Time, Everytime

Global Assure RSA jump start

The 30-Minute Service Assurance is ultimately about putting a tangible number against response time. For someone stranded at the roadside, knowing that help is expected within 30 minutes can make the experience considerably less uncertain. It also changes the role of roadside assistance. Rather than being something you think about only after a breakdown, it becomes part of the ownership experience. It’s like a safety net that is designed to help you get back on the move with minimal disruption.

Back On The Move

No roadside assistance can prevent a breakdown from happening. What it can do is reduce the impact when one happens. By combining its own trained technician fleet with a 30-minute service assurance, strengthened field operations, real-time service tracking and support across a range of common roadside emergencies, Global Assure is looking beyond simply fixing a stranded vehicle. The objective is to give motorists something just as valuable: their time back.

पटरियों पर किसी के लिए धड़कती जिंदगी को लेकर दौड़ी ट्रेन! पहली बार वंदे भारत ट्रेन से पहुंचाया गया लाइव डोनर हार्ट

भारतीय रेलवे ने स्वास्थ्य सेवा और मानव जीवन को बचाने के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान बना दिया है। भारत में पहली बार ट्रेन के जरिए एक लाइव डोनर हार्ट एक शहर से दूसरे शहर पहुंचाया गया है। इस लाइफसेविंग मिशन को मुंबई सेंट्रल-गांधीनगर कैपिटल वंदे भारत एक्सप्रेस के जरिए अंजाम दिया गया। दिल को सूरत से अहमदाबाद लाया गया। यूएन मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर अहमदाबाद में ट्रांप्लांट के लिए इसके सफलतापूर्वक डिलिवर किया गया है।

तालमेल और ग्रीन कॉरिडोर से पूरा हुआ ये मिशन

आपको बता दें कि ऑर्गन ट्रांसप्लांट एक टाइम बाउंड वाली सेंसटिव प्रक्रिया है। इसमें एक-एक मिनट की कीमत होती है। इस ऑपरेशन के लिए भारतीय रेलवे, रेलवे सुरक्षा बल (RPF), गुजरात राज्य पुलिस और चिकित्सा टीमों के बीच सटीक योजना और बिना किसी ब्रेक के कोऑर्डिनेशन की जरूरत थी। ट्रांसप्लांट प्रक्रिया बिना किसी देरी के शुरू हो सके, इसके लिए रेलवे सुरक्षा बल और गुजरात पुलिस द्वारा अहमदाबाद रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 से यूएन मेहता अस्पताल तक एक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया।

इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर अहमदाबाद के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) वेद प्रकाश ने कहा कि यह भारतीय रेलवे के लिए बेहद गर्व और संतोष का क्षण है। वंदे भारत एक्सप्रेस के माध्यम से सूरत से अहमदाबाद तक लाइव डोनर हार्ट का सफल परिवहन पारंपरिक यात्री और माल ढुलाई से आगे बढ़कर समाज की सेवा करने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उन्होंने आगे कहा कि ऐसे जीवनरक्षक मिशनों में हर मिनट बेहद महत्वपूर्ण होता है। भारतीय रेलवे, आरपीएफ, गुजरात राज्य पुलिस और मेडिकल टीमों के बीच उत्कृष्ट समन्वय ने इस मिशन की सफलता सुनिश्चित की। मानव जीवन को बचाने में योगदान देना न सिर्फ हमारी जिम्मेदारी है बल्कि सेवा और मानवता के प्रति हमारा सर्वोच्च कर्तव्य भी है।

इस सफलता ने वंदे भारत एक्सप्रेस की गति, समय की पाबंदी और विश्वसनीयता को एक बार फिर साबित कर दिया है। यह मिशन दिखाता है कि कैसे देश का आधुनिक रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर भारत के आपातकालीन स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। भारतीय रेलवे ने इस चुनौतीपूर्ण मिशन को सफल बनाने के लिए रेलवे सुरक्षा बल, गुजरात पुलिस, डॉक्टरों, अंग प्रत्यारोपण समन्वयकों और रेलवे अधिकारियों सभी के प्रयासों की तारीफ की है।

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