2 बार JEE में फेल हुआ लड़का, आज ₹2 लाख महीना कमाता है, Ankur Warikoo ने बताई कहानी

बिजनेसमैन अंकुर वारिकू की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने भारत में टैलेंट और सफलता को लेकर लोगों का ध्यान खींचा है। उन्होंने इंदौर के एक डिजाइनर नमन की कहानी साझा की, जो दो बार JEE में सफल नहीं हो सके। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और बिना किसी प्रतिष्ठित कॉलेज की डिग्री के अपने दम पर प्रोडक्ट डिजाइन सीखना शुरू किया। YouTube से सीखते हुए नमन ने धीरे-धीरे अपने कौशल को निखारा और फ्रीलांसिंग की दुनिया में अपनी पहचान बनाई। आज उनकी कमाई करीब 2 लाख रुपये प्रति माह बताई गई है।

नमन की कहानी साझा करते हुए वारिकू ने कहा कि भारत में टैलेंट की कमी नहीं है, बल्कि लोगों को पहचानने का नजरिया सीमित है। उनका मानना है कि किसी व्यक्ति की काबिलियत केवल कॉलेज, डिग्री या नौकरी के नाम से तय नहीं होनी चाहिए। उनकी पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर लोगों के बीच इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई कि सफलता के लिए डिग्री जरूरी है या असली हुनर।

‘भारत में टैलेंट की नहीं, लेबल की समस्या है’

अंकुर वारिकू ने इंस्टाग्राम पर लिखा, “India does not have a talent problem. It has a label problem.” उनका कहना है कि भारत में लोगों की काबिलियत को अक्सर उनके कॉलेज, डिग्री और नौकरी के नाम से आंका जाता है। उन्होंने कहा कि कई बार बेहतरीन टैलेंट सिर्फ इसलिए सामने नहीं आ पाता, क्योंकि उसके पास किसी बड़े कॉलेज की डिग्री या मशहूर कंपनी का अनुभव नहीं होता।

JEE में दो बार फेल, फिर YouTube से सीखा डिजाइन

वारिकू ने इंदौर के डिजाइनर नमन का उदाहरण दिया। उनके मुताबिक, नमन दो बार JEE में सफल नहीं हो पाए। इसके बाद उन्होंने रात में YouTube की मदद से खुद प्रोडक्ट डिजाइन सीखना शुरू किया। धीरे-धीरे उन्होंने अपना पोर्टफोलियो तैयार किया और फ्रीलांस काम शुरू किया। वारिकू के अनुसार, आज नमन हर महीने करीब 2 लाख रुपये कमाते हैं।

‘डिग्री यह नहीं बता सकती कि आप कितनी दूर जाएंगे’

वारिकू ने अपनी पोस्ट में कहा कि किसी व्यक्ति की डिग्री या पुराने अनुभव से यह तय नहीं किया जा सकता कि वह भविष्य में कितना सफल होगा। उनके मुताबिक, क्रेडेंशियल्स बताते हैं कि कोई व्यक्ति अब तक कहां पहुंचा है, लेकिन यह नहीं बताते कि वह आगे कितनी दूर जा सकता है।

सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग राय

वारिकू की पोस्ट पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी मिली-जुली रहीं। कुछ यूजर्स ने नमन की सफलता को प्रेरणादायक बताया, लेकिन कुछ लोगों का कहना था कि ऐसी कहानियां अपवाद हो सकती हैं। एक यूजर ने कहा कि कई IIT ग्रेजुएट भी कम उम्र में 2 लाख रुपये महीने नहीं कमा पाते। वहीं, दूसरे यूजर ने IIT से तुलना पर सवाल उठाते हुए कहा कि JEE जैसी कठिन परीक्षा पास करना भी किसी व्यक्ति की समस्या सुलझाने की क्षमता दिखाता है।

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Global Assure Roadside Assistance: When every minute matters

Global Assure Roadside Assistance: When every minute matters
Global Assure 30 minute Service Assurance

A car breaking down is inconvenient at the best of times. But on a busy commute, during a road trip or when you’re already running late, the problem isn’t simply that the car has stopped moving. It’s everything that comes next: finding help, waiting for it to arrive and wondering how long you’ll be stranded.

That’s where roadside assistance can make a real difference. And with its 30-Minute Service Assurance, Global Assure is putting a sharper focus on one of the biggest pain points of a breakdown: the wait.

Response Time

A flat tyre or drained battery might be relatively straightforward to address, but being stuck on the roadside can quickly become stressful. Plans get disrupted, schedules slip, and every additional minute spent waiting adds to the frustration.

Global Assure RSA waiting for roadside assistance

Global Assure’s approach is built around reducing that uncertainty. Once roadside assistance is called, its own fleet of trained technicians is deployed, with the appropriate equipment to assess and address the problem. Its 30-Minute Service Assurance is supported by strengthened field operations, an expanded service footprint and real-time service tracking capabilities. The service is currently available in 15 cities including Delhi, Mumbai, Bengaluru, Chennai, Kolkata, Hyderabad, Jaipur, Lucknow, Vadodara, Ahmedabad, Indore, Pune, Surat, Dehradun, and Chandigarh.

30-Minute Service Assurance

The advantage of having dedicated technicians and service vehicles is that assistance isn’t simply about arranging a third party and hoping for the best. The aim is to get the right help to the vehicle and start resolving the problem as quickly as possible. Depending on the situation, this can include assistance for a flat tyre and drained battery, as well as fuel assistance, towing and vehicle recovery. Global Assure also offers support for EV-related breakdowns, recognising that the roadside assistance landscape needs to evolve alongside the changing vehicle market.

On Time, Everytime

Global Assure RSA jump start

The 30-Minute Service Assurance is ultimately about putting a tangible number against response time. For someone stranded at the roadside, knowing that help is expected within 30 minutes can make the experience considerably less uncertain. It also changes the role of roadside assistance. Rather than being something you think about only after a breakdown, it becomes part of the ownership experience. It’s like a safety net that is designed to help you get back on the move with minimal disruption.

Back On The Move

No roadside assistance can prevent a breakdown from happening. What it can do is reduce the impact when one happens. By combining its own trained technician fleet with a 30-minute service assurance, strengthened field operations, real-time service tracking and support across a range of common roadside emergencies, Global Assure is looking beyond simply fixing a stranded vehicle. The objective is to give motorists something just as valuable: their time back.

इंदौर में हाथी को गुड़ खिलाना पड़ा भारी, युवक को सूंड में लपेटकर कुचला, CCTV वीडियो से मचा हड़कंप

Elephant attacks young man in Indore

Indore elephant attack News : इंदौर में एक हैरान कर देने वाला दर्दनाक हादसा सामने आया है। दरअसल, चंदन नगर थाना क्षेत्र में एक ऑटो रिक्शा चालक को हाथी को गुड़ खिलाना भारी पड़ गया। खबरों के अनुसार, यह घटना राजनगर इलाके की है, जहां एक धार्मिक कार्यक्रम के बाद हाथी को क्षेत्र में घुमाया जा रहा था। इसी बीच ऑटो चालक हाथी के पास पहुंचा और उसे गुड़ खिलाने लगा, तभी अचानक हाथी भड़क गया और उसने हमला कर दिया। बाद में इलाज के दौरान युवक की मौत हो गई। हादसे का CCTV वीडियो सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया।

 

इलाज के दौरान ऑटो रिक्शा चालक की मौत

इंदौर में एक हैरान कर देने वाला दर्दनाक हादसा सामने आया है। दरअसल, चंदन नगर थाना क्षेत्र में एक ऑटो रिक्शा चालक को हाथी को गुड़ खिलाना भारी पड़ गया। खबरों के अनुसार, यह घटना राजनगर इलाके की है, जहां एक धार्मिक कार्यक्रम के बाद हाथी को क्षेत्र में घुमाया जा रहा था। इसी बीच ऑटो चालक हाथी के पास पहुंचा और उसे गुड़ खिलाने लगा, तभी अचानक हाथी भड़क गया और उसने हमला कर दिया। बाद में इलाज के दौरान युवक की मौत हो गई। ऑटो चालक का नाम विजय राव बताया जा रहा है।

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हादसे का CCTV वीडियो आया सामने 

हादसे का CCTV वीडियो सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। मौके पर मौजूद लोगों में अफरातफरी मच गई और हर कोई स्तब्ध रह गया। CCTV वीडियो में साफ दिख रहा है कि हाथी पहले युवक को सूंड से मारता और फिर पैर से कुचलता हुआ दिखाई दे रहा है। हादसे के तुरंत बाद हाथी के महावत ने उसे काबू में करने की कोशिश भी की, लेकिन काबू में नहीं आया। 

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मामले की जांच में जुटी पुलिस 

खबरों के अनुसार, हाथी ने विजय राव को अपनी सूंड में उठाकर जोर से जमीन पर पटक दिया। इसके बाद हाथी ने उसे पैरों से कुचल दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। गंभीर रूप से घायल विजय राव को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन इलाज के दौरान डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। सीसीटीवी वीडियो फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।

 

महावत को लिया हिरासत में 

पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज अपने कब्जे में ले ली है। पुलिस जांच कर रही है कि हाथी को सार्वजनिक क्षेत्र में लाने के दौरान सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक नियमों का पालन किया गया था या नहीं? पुलिस ने मामले में हाथी के महावत को भी हिरासत में लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है।

कचरे में फेंक दिया 7 लाख का चांदी का लोटा फिर इंदौर नगर निगम ने इसकी रिकवरी के लिए चला दिया पूरा अभियान

इंदौर से ईमानदारी और जिम्मेदारी की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसकी हर तरफ चर्चा हो रही है। शहर में एक बुजुर्ग का करीब 5 लाख रुपये कीमत का चांदी का लोटा गलती से घर के कचरे के साथ कचरा गाड़ी में चला गया। जब परिवार को अपनी भूल का एहसास हुआ तो उन्होंने तुरंत नगर निगम से मदद मांगी। इसके बाद नगर निगम की टीम ने बिना देर किए पूरे मामले को गंभीरता से लिया और कचरे के ढेर में उस कीमती सामान की तलाश शुरू कर दी। कई घंटों की मेहनत, सही योजना और तकनीक की मदद से आखिरकार चांदी का लोटा सुरक्षित खोज लिया गया।

इस घटना ने न सिर्फ नगर निगम कर्मचारियों की ईमानदारी और मेहनत को उजागर किया, बल्कि यह भी दिखाया कि जिम्मेदारी के साथ किया गया काम लोगों का भरोसा मजबूत करता है।

एक प्लास्टिक बैग ने बढ़ाई परेशानी

करीब 2 किलो वजन का चांदी का लोटा एक प्लास्टिक बैग में रखा हुआ था। घर की सफाई के दौरान यह बैग गलती से सामान्य कचरे वाले बैग के साथ नगर निगम की कचरा गाड़ी में पहुंच गया। परिवार को इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि जिस बैग को फेंका जा रहा है, उसमें इतनी कीमती चीज मौजूद है।

दो एक जैसे बैग के कारण हुई गलती

जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार सुबह एक महिला घर की सफाई कर रही थी। घर के बाहर रखे दो एक जैसे प्लास्टिक बैग देखकर उससे गलती हो गई और दोनों बैग कचरा वाहन में डाल दिए गए। शाम को जब परिवार को चांदी के लोटे के गायब होने का पता चला, तो उन्होंने तुरंत नगर निगम अधिकारियों से संपर्क किया।

 

कचरा गाड़ी से प्लांट तक शुरू हुई तलाश

शिकायत मिलने के बाद नगर निगम की टीम ने तुरंत खोज अभियान शुरू किया। कचरा वाहन चालक और सुपरवाइजर से जानकारी ली गई, लेकिन तब तक गाड़ी लालबाग ट्रांसफर स्टेशन पर कचरा खाली कर चुकी थी। इसके बाद कचरा आगे सूखे कचरे के प्रबंधन और रीसाइक्लिंग प्लांट तक पहुंच चुका था।

CCTV फुटेज ने दिखाई सही दिशा

लोटे को ढूंढने के लिए अधिकारियों ने प्लांट की CCTV फुटेज खंगाली। कई घंटों की मेहनत के बाद शनिवार सुबह सफाई कर्मचारियों ने प्रोसेस किए जा रहे कचरे के बीच से चांदी का लोटा खोज निकाला। अच्छी बात यह रही कि लोटा पूरी तरह सुरक्षित मिला।

ईमानदारी की मिसाल बनी नगर निगम टीम

सामान वापस करने से पहले नगर निगम ने जरूरी प्रक्रियाएं पूरी कीं। इस पूरे अभियान में सफाई कर्मचारियों, ड्राइवरों और अधिकारियों ने अहम भूमिका निभाई। इंदौर के महापौर Pushyamitra Bhargava और नगर निगम आयुक्त Kshitij Singhal ने टीम के प्रयासों की सराहना की।

कचरे के ढेर से वापस लौटी बुजुर्ग की अमानत

यह घटना दिखाती है कि सही व्यवस्था और कर्मचारियों की जिम्मेदारी से मुश्किल काम भी संभव हो सकता है। एक छोटी सी गलती से कचरे में पहुंचा कीमती लोटा आखिरकार नगर निगम की मेहनत से अपने असली मालिक तक वापस पहुंच गया।