योगी सरकार का बड़ा एक्शन प्लान, IIT कानपुर, BHU और रुड़की को सौंपी कमान! यूपी में ₹100 करोड़ से बड़े प्रोजेक्ट्स का यूं होगा ऑडिट

UP News: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की क्वालिटी सुधारने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब 100 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली सड़क, पुल, सीवरेज और जलापूर्ति परियोजनाओं की क्वालिटीकी जांच देश के प्रतिष्ठित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) संस्थानों के एक्सपर्ट्स करेंगे। सरकार ने इसके लिए थर्ड पार्टी क्वालिटी ऑडिट (TPQA) की व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। इस नई व्यवस्था में IIT कानपुर, IIT-BHU वाराणसी और IIT रुड़की जैसे प्रमुख संस्थान बड़ी परियोजनाओं की टेक्निकल क्वालिटी की निगरानी करेंगे।

इसका मकसद यह है कि निर्माण में किसी भी तरह की तकनीकी कमी, घटिया सामग्री या सुरक्षा से जुड़ी समस्या का पता परियोजना पूरी होने के बाद नहीं। बल्कि निर्माण के दौरान ही चल जाए। थर्ड-पार्टी क्वालिटी ऑडिट (TPQA) में सड़कें, पुल, सीवरेज सिस्टम और पानी की सप्लाई वाले प्रोजेक्ट्स शामिल होंगे।

प्रोजेक्ट की शुरुआत से लेकर आखिर तक होगी जांच 

एक्सपर्ट्स हर प्रोजेक्ट की शुरुआत से लेकर आखिर तक जांच करेंगे। इसमें उसका डिजाइन, बनाने का तरीका, इस्तेमाल होने वाली सामग्री और जरूरी मानकों का पालन हो रहा है या नहीं, जैसे सभी कारण शामिल होगा। IIT की टीमें निर्माण के अलग-अलग चरणों की भी निगरानी करेंगी ताकि काम पूरा होने के बाद के बजाय शुरुआती दौर में ही किसी भी समस्या का पता लगाया जा सके।

शुरुआत से अंत तक होगी जांच

IIT के विशेषज्ञ केवल तैयार सड़क या पुल की जांच नहीं करेंगे, बल्कि परियोजना के अलग-अलग चरणों की निगरानी करेंगे। इसका उद्देश्य निर्माण पूरा होने के बाद खामियां मिलने के बजाय उन्हें समय रहते पहचानकर ठीक करना है। इसमें मुख्य रूप से-

  • प्रोजेक्ट के डिजाइन की जांच
  • निर्माण में अपनाई जा रही तकनीक
  • इस्तेमाल होने वाली निर्माण सामग्री की गुणवत्ता
  • निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन
  • निर्माण की सुरक्षा
  • काम की अलग-अलग स्टेज पर गुणवत्ता की जांच शामिल होगी।

IIT कानपुर को 8 डिवीजन की जिम्मेदारी

‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी व्यवस्था के तहत IIT कानपुर को उत्तर प्रदेश के 8 डिवीजन में प्रोजेक्ट की क्वालिटी जांच की जिम्मेदारी दी गई है। इनमें कानपुर, लखनऊ, बांदा, प्रयागराज, अयोध्या, आगरा, झांसी और देवीपाटन शामिल हैं। इन क्षेत्रों में ₹100 करोड़ से अधिक लागत वाले संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की तकनीकी जांच IIT कानपुर की टीम करेगी।

IIT-BHU के जिम्मे ये इलाके

IIT-BHU वाराणसी को भी कई महत्वपूर्ण डिवीजन की जिम्मेदारी दी गई है। इसके तहत बस्ती, गोरखपुर, आजमगढ़, वाराणसी और मिर्जापुर में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता की निगरानी की जाएगी। वहीं IIT रुड़की को सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, मेरठ और अलीगढ़ समेत पांच डिवीजन की जिम्मेदारी दी गई है।

₹100 करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट पर खास नजर

नई व्यवस्था के तहत ₹100 करोड़ से अधिक लागत वाले प्रमुख प्रोजेक्ट जांच के दायरे में आएंगे। टेक्निकल एक्सपर्ट निर्माण की क्वालिटी के साथ-साथ इस्तेमाल की जा रही सामग्री और परियोजना की सुरक्षा का भी परीक्षण करेंगे। सरकार का मानना है कि बाहरी और एक्सपर्ट्स संस्थानों से ऑडिट कराने से निर्माण एजेंसियों पर गुणवत्ता बनाए रखने का दबाव बढ़ेगा। साथ ही सरकारी पैसे से तैयार होने वाली बड़ी परियोजनाओं की विश्वसनीयता बेहतर होगी।

‘उन्नाव एक्सप्रेसवे’ हादसे के बाद बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब उन्नाव में ग्रीनफील्ड नेशनल एलिवेटेड एक्सप्रेसवे के एक हिस्से के उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद ढहने की खबर सामने आई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब ₹4,200 करोड़ की लागत से तैयार इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई को हुआ था।

इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी मौजूद थे। इसके करीब 12 दिन बाद एक्सप्रेसवे के एक हिस्से के ढहने की खबर ने निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

अब निर्माण के दौरान ही पकड़ में आएंगी खामियां

नई TPQA व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि किसी परियोजना के पूरा होने के बाद सामने आने वाली तकनीकी खामियों को निर्माण के दौरान ही पकड़ा जा सकेगा। सरकार की कोशिश है कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट केवल समय और बजट के भीतर पूरे न हों। बल्कि उनकी गुणवत्ता, मजबूती और सुरक्षा भी सुनिश्चित हो। यानी अब यूपी में ₹100 करोड़ से बड़े प्रोजेक्ट पर सिर्फ सरकारी विभागों की नजर नहीं होगी। बल्कि IIT के टेक्निकल एक्सपर्ट भी निर्माण की क्वालिटी का हिसाब रखेंगे।

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Spinny partners with Nissan, MG and Tesla for exclusive benefits

Spinny partners with Nissan, MG and Tesla for exclusive benefits
Spinny

Spinny has expanded its partnerships with Nissan, JSW MG Motor and Tesla, covering new-car exchanges, pre-owned EVs and other vehicle ownership services. The tie-ups span different stages of the ownership cycle, including buying, selling, exchanging and upgrading vehicles.

  1. Nissan customers can get exchange benefits of up to Rs 75,000
  2. Tesla has appointed Spinny as a preferred exchange partner
  3. JSW MG Motor India partnership focuses on certified pre-owned EVs

Spinny operates across more than 80 cities with 57+ Car Hubs, 17 Spinny Parks and 15+ Integrated Restoration Centres, according to the company.

Nissan, Tesla exchange programmes

Under the Nissan partnership, customers buying a new Nissan can have their existing vehicle evaluated and exchanged through Spinny. The programme includes a 55-minute vehicle exchange process and benefits of up to Rs 75,000. A Spinny-issued Buying Letter is accepted as proof of exchange.

Tesla has appointed Spinny as a preferred exchange partner under its Switch and Save programme. The arrangement allows customers to sell an existing internal-combustion vehicle when buying a new Tesla.

Spinny expands pre-owned EV operations

The partnership with JSW MG Motor India focuses on the pre-owned EV market. It combines JSW MG Motor India’s electric-mobility expertise with Spinny’s vehicle evaluation, certification, refurbishment and retail capabilities.

The programme covers the MG Comet EV, MG Windsor EV and MG ZS EV. Customers buying certified pre-owned MG EVs through Spinny will receive a battery health assessment and certification, continuity of the OEM warranty and fixed pricing, along with Spinny’s inspection and refurbishment processes.

Spinny said its EV evaluation process also includes battery health assessment and certification for customers selling their electric vehicles. The service is currently available in Bengaluru, Chennai, Delhi NCR, Hyderabad, Kochi, Mumbai, Pune, Jaipur, Ahmedabad, Kolkata, Lucknow, Chandigarh and Coimbatore.

CM Yogi: योगी सरकार का बड़ा ऐलान, यूपी में 6 महीने में 1 लाख युवाओं को मिलेगी सरकारी नौकरी

उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा अपडेट दिया है। मंगलवार को लखनऊ में अपॉइंटमेंट लेटर वितरण कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बताया कि सरकार अगले छह महीनों में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देगी। ये नियुक्तियां अलग-अलग चरणों में हर सप्ताह की जाएंगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के अवसर मिलेंगे। मुख्यमंत्री के बताया, 2017 से अब तक राज्य में 9.3 लाख से ज्यादा युवाओं को सरकारी रोजगार मिल चुका है। उन्होंने कहा कि इन भर्तियों में प्रक्रिया को पारदर्शी रखने और बिना भेदभाव के चयन पर जोर दिया गया है।

6 महीने में मिलेंगे 1 लाख युवाओं को नौकरी

सीएम योगी ने कहा कि, “मैं प्रदेश के युवाओं को आश्वस्त कर रहा हूं कि अगले 6 महीनों में 1 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे। ये नियुक्ति पत्र अलग-अलग चरणों में हर सप्ताह बांटे जाएंगे।” सीएम योगी ने कहा, “उनकी सरकार के कार्यकाल में अब तक उत्तर प्रदेश के 9.30 लाख से ज्यादा युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष रखा गया है। इन नियुक्तियों में किसी तरह की अनियमितता या भेदभाव की गुंजाइश नहीं रखी गई है।”

पिछली सरकार पर साधा निशाना

सीएम योगी ने पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि, 2017 से पहले सरकारी भर्तियों में युवाओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। उन्होंने आरोप लगाया कि भर्ती का विज्ञापन जारी होने के बाद कथित तौर पर कुछ प्रभावशाली लोग पूरे प्रदेश में वसूली करते थे। योगी ने बिना किसी का नाम लिए ‘चाचा-भतीजा’ और ‘पूरा परिवार’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए पिछली व्यवस्था पर सवाल उठाए।

जीरो टॉलरेंस की नीति पर कर रही काम

उन्होंने कहा कि, ‘उस समय युवा भर्ती के नतीजों का इंतजार करते रह जाते थे और कई मामलों में अदालत को नियुक्तियों पर रोक लगानी पड़ती थी। इससे युवाओं का समय और मेहनत दोनों बर्बाद होते थे।’ मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘इसके लिए युवाओं को नहीं, बल्कि उस समय भर्ती व्यवस्था से जुड़े भ्रष्ट अधिकारियों, बोर्डों, आयोगों और नेताओं को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि ‘हमारी सरकार अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। साथ ही, नकल माफिया और भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि अब सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने पर जोर दिया है। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि युवाओं को बिना किसी भेदभाव के समय पर नौकरी दिलाना सरकार की प्राथमिकता है।

Global Assure Roadside Assistance: When every minute matters

Global Assure Roadside Assistance: When every minute matters
Global Assure 30 minute Service Assurance

A car breaking down is inconvenient at the best of times. But on a busy commute, during a road trip or when you’re already running late, the problem isn’t simply that the car has stopped moving. It’s everything that comes next: finding help, waiting for it to arrive and wondering how long you’ll be stranded.

That’s where roadside assistance can make a real difference. And with its 30-Minute Service Assurance, Global Assure is putting a sharper focus on one of the biggest pain points of a breakdown: the wait.

Response Time

A flat tyre or drained battery might be relatively straightforward to address, but being stuck on the roadside can quickly become stressful. Plans get disrupted, schedules slip, and every additional minute spent waiting adds to the frustration.

Global Assure RSA waiting for roadside assistance

Global Assure’s approach is built around reducing that uncertainty. Once roadside assistance is called, its own fleet of trained technicians is deployed, with the appropriate equipment to assess and address the problem. Its 30-Minute Service Assurance is supported by strengthened field operations, an expanded service footprint and real-time service tracking capabilities. The service is currently available in 15 cities including Delhi, Mumbai, Bengaluru, Chennai, Kolkata, Hyderabad, Jaipur, Lucknow, Vadodara, Ahmedabad, Indore, Pune, Surat, Dehradun, and Chandigarh.

30-Minute Service Assurance

The advantage of having dedicated technicians and service vehicles is that assistance isn’t simply about arranging a third party and hoping for the best. The aim is to get the right help to the vehicle and start resolving the problem as quickly as possible. Depending on the situation, this can include assistance for a flat tyre and drained battery, as well as fuel assistance, towing and vehicle recovery. Global Assure also offers support for EV-related breakdowns, recognising that the roadside assistance landscape needs to evolve alongside the changing vehicle market.

On Time, Everytime

Global Assure RSA jump start

The 30-Minute Service Assurance is ultimately about putting a tangible number against response time. For someone stranded at the roadside, knowing that help is expected within 30 minutes can make the experience considerably less uncertain. It also changes the role of roadside assistance. Rather than being something you think about only after a breakdown, it becomes part of the ownership experience. It’s like a safety net that is designed to help you get back on the move with minimal disruption.

Back On The Move

No roadside assistance can prevent a breakdown from happening. What it can do is reduce the impact when one happens. By combining its own trained technician fleet with a 30-minute service assurance, strengthened field operations, real-time service tracking and support across a range of common roadside emergencies, Global Assure is looking beyond simply fixing a stranded vehicle. The objective is to give motorists something just as valuable: their time back.

लखनऊ-दिल्ली तेजस एक्सप्रेस पर चढ़ा Sprite का रंग, पहली बार किसी ब्रांड के नाम से चलेगी ट्रेन

Lucknow-Delhi Tejas Express: लखनऊ-दिल्ली-लखनऊ के बीच चलने वाली तेजस एक्सप्रेस अब करीब तीन महीने के लिए ‘Sprite’ Tejas Express के नाम से जानी जाएगी। यह ट्रेन इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) द्वारा संचालित की जाती है। इसे भारत की पहली ‘प्राइवेटली ब्रांडेड’ ट्रेन बताया जा रहा है।

‘द हिंदू’ की एक रिपोर्ट में रेलवे सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि IRCTC ने ट्रेन की ब्रांडिंग और विज्ञापन के अधिकार M/s स्प्राइट को छह महीने की अवधि के लिए दिए हैं। इसके अनुसार, नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे से कहा गया है कि वह 19 अगस्त और 11 नवंबर, 2026 के बीच ट्रेन 82501/82502 को ‘Sprite’ Tejas Express के रूप में घोषित करे।

खबरों के अनुसार, ट्रेन की ब्रांडिंग का यह अधिकार Letter of Acceptance (LOA) के जरिए दिया गया है। रेलवे सूत्रों ने बुधवार को बताया कि दोनों दिशाओं में यात्रा के दौरान इस प्राइवेट ट्रेन को उसके शुरुआती स्टेशन और रास्ते में आने वाले स्टेशनों पर ‘Sprite’ Tejas Express के नाम से अनाउंस किया जाएगा।

किसी ब्रांड के नाम पर रखी जाने वाली पहली ट्रेन

यह पहली बार है जब किसी ट्रेन का नाम किसी ब्रांड के नाम पर रखा जा रहा है। रिपोर्ट में बताए गए रेलवे के एक सीनियर अधिकारी के अनुसार, भले ही लखनऊ-दिल्ली तेजस एक्सप्रेस को प्राइवेट ट्रेन कहा जाता है, लेकिन IRCTC रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे ट्रैक और स्टेशन) के इस्तेमाल के लिए इंडियन रेलवे को पेमेंट करती है।

हालांकि, ब्रांडिंग का यह तरीका इंडियन रेलवे द्वारा ट्रेनों के रेगुलर ऑपरेशन से अलग है।

इस एडवरटाइजिंग मॉडल के तहत, प्राइवेट कंपनियां ट्रेन के बाहरी हिस्से और दूसरी तय जगहों पर अपने ब्रांड दिखा सकती हैं, जबकि रेलवे नेटवर्क जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराता रहता है। यानी ट्रेन पर ब्रांड का नाम और विज्ञापन तो नजर आएगा, लेकिन इसका संचालन रेलवे के मौजूदा नेटवर्क के जरिए ही होगा।

लखनऊ-दिल्ली तेजस एक्सप्रेस के बारे में सब कुछ

देश की पहली निजी ट्रेन के तौर पर लखनऊ-दिल्ली तेजस एक्सप्रेस को 3 दिसंबर 2021 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।

IRCTC द्वारा चलाई जाने वाली यह ट्रेन पूरी तरह से AC है और इसमें यात्रियों को कई आधुनिक सुविधाएं दी जाती हैं। इनमें ट्रेन के अंदर खाने-पीने की बेहतर सुविधा और मनोरंजन के लिए इंफोटेनमेंट सिस्टम शामिल हैं।

IRCTC इस ट्रेन में ग्रुप बुकिंग की सुविधा भी देता है। यानी कॉर्पोरेट मीटिंग, शादी या किसी अन्य कार्यक्रम के लिए यात्री पूरी AC चेयर कार कोच भी बुक कर सकते हैं। एक कोच में 78 सीटें होती हैं।

Sprite के साथ हुई नई ब्रांडिंग डील से इस सर्विस में एक नया कमर्शियल पहलू जुड़ गया है, जिससे यह देश की पहली ऐसी ट्रेन बन गई है जो विज्ञापन व्यवस्था के तहत आधिकारिक तौर पर किसी कमर्शियल ब्रांड का नाम इस्तेमाल कर रही है।

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रूफटॉप सोलर ऊर्जा : देश में लखनऊ का पहला स्थान, शीर्ष 100 में उत्तर प्रदेश के 17 जनपद

Lucknow Rooftop Solar: उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा के क्षेत्र में एक ओर उपलब्धि हासिल की है। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के अंतर्गत रूफटॉप सोलर ऊर्जा को जन-जन तक पहुंचाने के अभियान में प्रदेश ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश के शीर्ष 100 जनपदों की सूची में अपने 17 जनपदों को शामिल कराया है। यह उपलब्धि न केवल प्रदेश में सौर ऊर्जा के तेजी से बढ़ते विस्तार को दर्शाती है, बल्कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में उत्तर प्रदेश की मजबूत प्रगति का भी प्रमाण है।

 

इस दौरान यूपी नेडा डायरेक्टर रविन्दर सिंह ने बताया कि इस सूची में राजधानी लखनऊ में 1,24,167 रूफटॉप सोलर संयंत्रों के स्थापना के साथ-साथ देश का नंबर-1 जनपद बनने का गौरव बरकरार रखा है। लखनऊ में बड़ी संख्या में घरों,  द्वारा रूफटॉप सोलर अपनाए जाने से यह उपलब्धि संभव हुई है। वहीं, वाराणसी ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए देश में 10वां स्थान प्राप्त किया है। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में सौर ऊर्जा को लेकर चल रहे अभियान का सकारात्मक असर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। इसके अलावा कानपुर नगर 14वें स्थान पर पहुंचकर प्रदेश के औद्योगिक शहरों में हरित ऊर्जा अपनाने की दिशा में नई मिसाल पेश कर रहा है।

17 जनपद देश के शीर्ष 100 जिलों में शामिल

प्रदेश के 17 जनपदों का देश के शीर्ष 100 जिलों में शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि उत्तर प्रदेश में रूफटॉप सोलर को लेकर जागरूकता, सरकारी प्रोत्साहन और योजनाओं का प्रभाव तेजी से बढ़ा है। राज्य सरकार और केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं, विशेषकर प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना, के प्रभावी क्रियान्वयन से लाखों उपभोक्ता सौर ऊर्जा से जुड़ रहे हैं। रूफटॉप सोलर संयंत्रों के विस्तार से लोगों को बिजली बिल में उल्लेखनीय बचत हो रही है, साथ ही अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजकर आर्थिक लाभ प्राप्त करने का अवसर भी मिल रहा है। इससे स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ कार्बन उत्सर्जन में कमी और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिल रही है।

जनजागरूकता अभियान

उत्तर प्रदेश लगातार देश में रूफटॉप सोलर स्थापना की रफ्तार बढ़ा रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा जनजागरूकता अभियान, ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाना, समयबद्ध स्वीकृति, डिस्कॉम और संबंधित एजेंसियों के बेहतर समन्वय तथा सब्सिडी वितरण की प्रभावी व्यवस्था ने इस अभियान को नई गति दी है। जिस गति से उत्तर प्रदेश में रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित हो रहे हैं, उससे आने वाले समय में प्रदेश देश के स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा। देश के शीर्ष 100 जनपदों में 17 जिलों की मौजूदगी और लखनऊ का लगातार नंबर-1 स्थान, इस बात का स्पष्ट संकेत है कि उत्तर प्रदेश हरित ऊर्जा क्रांति का नेतृत्व कर रहा है।

राष्ट्रीय रैंकिंग में उत्तर प्रदेश के प्रमुख जनपद

रैंक जनपद संयंत्र स्थापना
1  लखनऊ  1,24,167
10  वाराणसी  48,829
14  कानपुर नगर  43,289
24  बरेली  28,315
29  आगरा  26,375
37  प्रयागराज  23,773
51  झांसी  18,354
56  रायबरेली  17,532
70  गोरखपुर  14,498
73  सहारनपुर  13,821
75  मुजफ्फरनगर  13,464
78  मेरठ  13,137
79  बाराबंकी  13,126
81  अलीगढ़  12,925
86  शाहजहांपुर  12,158
88  सीतापुर  12,008
90  उन्नाव  11,779

 

Delhi Weather Today: दिल्ली में आज हल्की से मध्यम बारिश की संभावना, अगले 2 दिन और तेज होगा बारिश का दौर, देखें IMD का अपडेट

Delhi Weather Today: दिल्ली में रविवार (26 जुलाई) को मौसम सामान्य से अधिक गर्म रहा और अधिकतम तापमान मौसमी औसत से ऊपर दर्ज किया गया। हालांकि, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने सोमवार के लिए हल्की से मध्यम बारिश और आसमान में बादल छाए रहने का पूर्वानुमान जताया है। मौसम विभाग के अनुसार, दिनभर रुक-रुक कर बारिश होने की संभावना है। इस दौरान अधिकतम तापमान करीब 36 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है, जिससे उमस से केवल मामूली राहत मिलने की उम्मीद है।

दिल्ली में रविवार का दिन सामान्य से ज्यादा गर्म रहा

IMD के अनुसार, रविवार को राजधानी का अधिकतम तापमान 36.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1.7 डिग्री ज्यादा था, जबकि न्यूनतम तापमान 27.6 डिग्री सेल्सियस रहा, जो मौसम के औसत से 0.3 डिग्री अधिक था।

वहीं, दिनभर हवा में नमी का स्तर भी ऊंचा बना रहा। शाम 5:30 बजे रिलेटिव ह्यूमिडिटी (सापेक्ष आर्द्रता) 63% दर्ज की गई, जिससे असल तापमान के मुकाबले ज्याद गर्मी महसूस हुई।

हालांकि, गर्मी के बावजूद दिल्ली की वायु गुणवत्ता (AQI) संतोषजनक बनी रही। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के समीर ऐप के अनुसार, सुबह 9 बजे दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 83 दर्ज किया गया, जो ‘संतोषजनक’ श्रेणी में आता है।

IMD का अनुमान: सोमवार तक बादल छाए रहेंगे और बारिश होगी

IMD ने सोमवार, 27 जुलाई के लिए शहर के कुछ हिस्सों में आम तौर पर बादल छाए रहने और हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान लगाया है। मौसम विभाग को उम्मीद है कि सुबह से दोपहर के बीच कुछ जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश होगी, और उसके बाद रात में बहुत हल्की से हल्की बारिश हो सकती है।

इस दौरान अधिकतम तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है, जबकि न्यूनतम तापमान 25 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। वहीं, सुबह के समय दक्षिण-पश्चिम दिशा से 10-15 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की उम्मीद है, जो दोपहर और शाम तक बढ़कर 15-20 किमी प्रति घंटे हो सकती हैं।

आने वाले दिनों में और बारिश की संभावना

मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान लगाया है और अगले दो दिनों में मौसम की गतिविधियां थोड़ी तेज हो सकती हैं। इसके अलावा, मंगलवार और बुधवार को राजधानी में आमतौर पर बादल छाए रहेंगे और मध्यम बारिश होने की संभावना है।

IMD के मुताबिक, मंगलवार से तापमान में थोड़ी गिरावट आने की उम्मीद है और बाकी हफ्ते तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। हालांकि, बारिश से गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन बारिश के दौरान लोगों को धीमी रफ्तार वाले ट्रैफिक और निचले इलाकों में जलभराव का सामना करना पड़ सकता है।

यह भी पढ़ें: Lucknow-Kanpur Expressway: उद्घाटन के 13वें दिन ही धंस गया कानपुर-लखनऊ एलिवेटेड एक्सप्रेसवे, NHAI ने कही ये बात

Lucknow-Kanpur Expressway: उद्घाटन के 13वें दिन ही धंस गया कानपुर-लखनऊ एलिवेटेड एक्सप्रेसवे, NHAI ने कही ये बात

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के महज 13 दिन बाद ही इसकी सड़क दो जगहों पर धंस गई है। 13 जुलाई को शुरू हुए इस एक्सप्रेसवे पर करीब 9 मीटर हिस्से में सड़क बैठ गई, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। उन्नाव से लखनऊ जाने वाली लेन में कोरारी के पास सड़क धंसने से गहरे गड्ढे बन गए हैं। लगातार बारिश के कारण इन गड्ढों में पानी भर गया है, जिससे वाहन चालकों के लिए खतरा बढ़ गया है। इसके अलावा इसी लेन में टोल प्लाजा से करीब एक किलोमीटर पहले भी सड़क का लगभग 8 फीट हिस्सा धंस गया है।

शुरू हुआ मरम्मत का काम

एक्सप्रेसवे का निर्माण करने वाली कंपनी पटेल इंफ्रास्ट्रक्चर ने क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत का काम शुरू कर दिया है। साथ ही, हादसों से बचाव के लिए प्रभावित जगहों पर बैरिकेड्स लगाकर वाहनों को सावधानी से गुजरने की सलाह दी जा रही है।

4200 करोड़ की लागत से बना था एक्सप्रेसवे

नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने करीब 4,200 करोड़ रुपये की लागत से इस एक्सप्रेसवे का निर्माण कराया है। इसे ऑटोमेटेड इंटेलिजेंस मशीन गाइडेड कंस्ट्रक्शन (AIMGC) तकनीक से तैयार किया गया था। दावा किया गया था कि अमेरिका और जर्मनी के बाद भारत में इस तकनीक से बनने वाला यह पहला एक्सप्रेसवे है। हालांकि, पहली ही मानसूनी बारिश में सड़क पर आई खराबी ने इसकी गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 45 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड सेक्शन में किलोमीटर संख्या 64.200 के पास कई मीटर तक सड़क की डामर परत उखड़ गई है। इस क्षतिग्रस्त हिस्से के वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। लगातार हो रही भारी बारिश के कारण ग्रीनफील्ड सेक्शन के कई हिस्सों में डामर उखड़ने की शिकायत सामने आई है, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है।

इससे पहले भी एक्सप्रेसवे के किनारों पर कई जगह मिट्टी का कटाव देखने को मिला था। वहीं, अचलगंज के पास अप्रोच रोड का एक हिस्सा भी धंस गया था। कई स्थानों पर मरम्मत के लिए किए गए पैचवर्क की वजह से सड़क पहले जैसी समतल नहीं रह गई है। वाहन चालकों का कहना है कि पुलों और पुलियाओं पर बने एक्सपेंशन जॉइंट्स से गुजरते समय तेज झटके महसूस हो रहे हैं। एक्सप्रेसवे के प्रोजेक्ट मैनेजर वी. कुंडू ने बताया कि लगातार हो रही भारी बारिश के कारण कुछ जगहों पर सड़क को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि मरम्मत का काम तेजी से किया जा रहा है। उनके मुताबिक, नया एक्सप्रेसवे होने के कारण शुरुआती दौर में इस तरह की छोटी-मोटी दिक्कतें असामान्य नहीं हैं और फिलहाल यातायात सामान्य रूप से जारी है।

Lucknow Housing Scheme: लखनऊ समेत UP के 6 जिलों में बनेंगे 13.36 लाख सस्ते घर, जानिए LDA का पूरा प्लान

UP SCR Affordable Housing Plan: उत्तर प्रदेश के राज्य राजधानी क्षेत्र (SCR) में रहने वाले और घर खरीदने का सपना देखने वाले लोगों के लिए बड़ी खबर है। लखनऊ सहित एससीआर के 6 प्रमुख जिलों में बड़े स्तर पर आवासीय योजनाएं आकार लेने जा रही हैं। इस योजना के तहत कुल 48.75 लाख आवास बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें आम और गरीब लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 13.36 लाख किफायती यानी सस्ते मकान शामिल होंगे।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस महा-परियोजना से लगभग 33.40 लाख लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। आइए जानते हैं कि किस जिले में कितने घर बनेंगे, जमीन की क्या तैयारी है और किस एजेंसी को इसका जिम्मा दिया गया है।

वर्ष 2051 की जरूरतों को ध्यान में रखकर खींचा गया खांचा

SCR के गठन के बाद लखनऊ और इसके आसपास के क्षेत्र रोजगार और व्यापार के बड़े केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं। बाहरी जिलों से आने वाले लोगों के लिए किफायती आवास उपलब्ध कराने के मकसद से 10 जुलाई को हुई विभिन्न विभागों की समीक्षा बैठक में इस मेगा प्लान को मंजूरी दी गई।

2051 तक कुल जरूरत: 48.75 लाख घर।

सस्ते घर (EWS & LIG): 13.36 लाख घर।

योजना का क्षेत्रफल: कुल 70 हजार एकड़ में आवासीय योजनाएं विकसित होंगी।

पहला चरण: शुरुआती चरण में 9,940 एकड़ जमीन पर आवासीय परियोजनाएं धरातल पर उतारी जाएंगी।

जिला-वार डेटा: किस जिले में कितने बनेंगे सस्ते आवास?

एससीआर में शामिल लखनऊ, बाराबंकी, सीतापुर, उन्नाव, हरदोई और रायबरेली में घरों की जरूरत और सस्ते मकानों का आंकड़ा कुछ इस प्रकार है:

एससीआर में शामिल लखनऊ, बाराबंकी, सीतापुर, उन्नाव, हरदोई और रायबरेली में घरों की जरूरत और सस्ते मकानों का आंकड़ा कुछ इस प्रकार है:

किस जिले में कितनी भूमि की होगी जरूरत?

लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के अनुसार, इन योजनाओं को आकार देने के लिए कुल 70,000 एकड़ जमीन की जरूरत होगी।

लखनऊ: 35,600 एकड़

उन्नाव: 7,500 एकड़

रायबरेली: 7,400 एकड़

सीतापुर: 7,300 एकड़

बाराबंकी: 6,900 एकड़

हरदोई: 4,200 एकड़

किन-किन लोकेशनों पर आएंगी आवासीय योजनाएं?

इस पूरे प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने की मुख्य जिम्मेदारी लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA), सूडा (SUDA) और उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद को सौंपी गई है। सीतापुर रोड पर नैमिष नगर, आगरा एक्सप्रेसवे के पास वरुण विहार, सुलतानपुर रोड किसान पथ के पास आईटी सिटी और वेलनेस सिटी।  सीतापुर के नैमिषारण्य, हरदोई के संडीला इंडस्ट्रियल एरिया, बाराबंकी में सूडा, उन्नाव के नवाबगंज और रायबरेली के बछरावां में हाउसिंग बोर्ड की योजनाएं आएंगी।

मकान का साइज, स्टाइल और संभावित कीमत

एरिया साइज: इन सस्ते आवासों का क्षेत्रफल औसतन 83.5 वर्ग मीटर (लगभग 898.78 वर्ग फीट) रखा जाएगा।

ग्रुप हाउसिंग बनाम प्लॉट: रायबरेली में प्लॉट्स और ग्रुप हाउसिंग का अनुपात 50-50 प्रतिशत रहेगा। जबकि बाकी जिलों में ग्रुप हाउसिंग (फ्लैट्स) की संख्या अधिक होगी और प्लॉट्स अपेक्षाकृत कम रहेंगे।

कीमत: राजधानी लखनऊ में फिलहाल 15 से 20 लाख रुपये में सस्ते फ्लैट मिल जाते हैं। हालांकि, एससीआर भविष्य की दीर्घकालिक योजना है, इसलिए इन नए मकानों की अंतिम दरें आने वाले समय में तय की जाएंगी।

Used car study 2026: Maruti Ertiga holds its value best among MPVs

Maruti Ertiga resale value

Conducted in association with Spinny, India’s leading pre-owned car platform, the fourth edition of our Used Car Study analyses real-world resale values across a broad spectrum of vehicles sold in the Indian market to assess depreciation trends over a five-year ownership period. The study is based on actual transactional data shared by Spinny for vehicles sold between January 1 and August 31, 2025.

In this part of the resale value study series, we take a look at the MPV segment:

MPVs resale value 

The MPV segment spans a broad price spectrum, starting with the affordable Maruti Eeco and extending up to premium offerings such as the Kia Carens. Dominating the segment in terms of resale value retention, however, is the Maruti Ertiga, which continues to exhibit the flattest depreciation trend over a five-year period.

Meanwhile, the Renault Triber showed the highest depreciation, more so for the AMT variants. Due to limited used market transaction data, the Toyota Innova Crysta and Hycross have been excluded from this study. 

As per the study, the average selling price of a five-year-old MPV retailed through Spinny was Rs 7.47 lakh. Comparable figures for three-year-old and one-year-old MPVs were Rs 10.50 lakh and Rs 11.16 lakh, respectively. Average depreciation over the same periods worked out to 38.5 percent, 33.10 percent and 18.15 percent, respectively.

Autocar-Spinny resale value study methodology 

The analysis covers the average selling prices (ASPs) of vehicles retailed through Spinny’s network across nine cities – Delhi-NCR, Bengaluru, Hyderabad, Pune, Chennai, Mumbai, Lucknow, Ahmedabad and Kolkata.

For the purposes of this study, depreciation has been defined as the percentage difference between a vehicle’s original on-road price in its year of manufacture and its resale value in 2025. In instances where a model was offered with multiple engine options using the same fuel type, the data has been consolidated and averaged. Variant-wise differences have similarly been averaged out.

Discontinued models and powertrain options have been excluded. Additionally, premium vehicles priced above Rs 30 lakh, electric vehicles and certain low-volume models have not been included due to limited transaction data and insufficient sample sizes.