कानपुर में नकली सीमेंट का कारोबार! तीन वर्षों में 11 लाख बोरी नकली सीमेंट की सप्लाई

कानपुर में नकली सीमेंट का कारोबार! तीन वर्षों में 11 लाख बोरी नकली सीमेंट की सप्लाई

Kanpur fake cement factory

Kanpur fake cement factory: औद्योगिक नगरी कानपुर के पनकी में नकली सीमेंट फैक्ट्री के खुलासे ने प्रदेश भर के निर्माण तंत्र और प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है। नामी कंपनियों की साख की आड़ में पिछले तीन सालों से चल रहे इस अवैध खेल में न सिर्फ 10 लाख से अधिक बोरियां खपाए जाने का संगीन आरोप है, बल्कि इसके तार मेरठ से लेकर सीएम ग्रिड और लखनऊ एयरपोर्ट जैसे हाई-प्रोफाइल निर्माण कार्यों तक जुड़ने के दावे सामने आ रहे है। अब योगी सरकार के एक्शन का इंतजार है।

 

यूपी के कानपुर में SOG और स्थानीय पुलिस ने पनकी थाना क्षेत्र के इस्पात नगर में छापेमारी कर नामी ब्रांडों (ACC और अंबुजा) के नाम पर नकली सीमेंट बनाने वाली एक विशाल अवैध फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। जांच में सामने आया है कि इस सिंडिकेट ने पिछले 3 वर्षों में करीब 10.80 लाख बोरी नकली सीमेंट उत्तर प्रदेश के कई जिलों और बड़े सरकारी व निजी प्रोजेक्ट्स में सप्लाई की है। इस पूरे मामले में एक स्थानीय भाजपा नेता द्वारा आरोपियों को संरक्षण देने के भी गंभीर आरोप लग रहे हैं। 

कैसे हुआ इस बड़े खेल का खुलासा?

अडानी ग्रुप की कानपुर शाखा के सीनियर सेल्स मैनेजर मुमताजुल हक को जब अचानक अपने ब्रांड्स की बिक्री में भारी गिरावट महसूस हुई, तो कंपनी की विजिलेंस टीम ने पिछले 15 दिनों से निजी स्तर पर खुफिया जांच शुरू की। कंपनी की पुख्ता शिकायत मिलने पर कानपुर के पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के निर्देश पर SOG और स्थानीय पुलिस की टीम ने पनकी के इस्पात नगर स्थित गोदाम पर अचानक छापेमारी कर इस अवैध सिंडिकेट का भंडाफोड़ कर दिया। छापेमारी के दौरान मौके से 1000 से अधिक भरी हुई नकली बोरियां, 3000 खाली बोरियां, अत्याधुनिक पैकिंग मशीनें और नकली सीमेंट से लदे दो ट्रक जब्त किए गए। 

​महज 30 रुपए की लागत और मुनाफा… 

​पुलिस जांच में सामने आया है कि यह सिंडिकेट बेहद शातिर तरीके से लोगों की जान और सरकारी संपत्ति के साथ खिलवाड़ कर रहा था। यह गैंग बुंदेलखंड इलाके से खराब और एक्सपायर्ड हो चुकी सीमेंट को महज ₹10 से ₹20 प्रति बोरी की दर से खरीदता था। मेरठ के सप्लायरों (सुनील मित्तल और निशांत मित्तल) की मदद से इस पुराने माल को मशीनों में दोबारा पीसकर, उसमें हानिकारक केमिकल्स और थोड़ी असली सीमेंट मिलाकर नामी कंपनियों के ब्रांडेड बैगों में पैक किया जाता था।

 

​मोटा मुनाफा : महज ₹30 की लागत में तैयार होने वाली इस जानलेवा नकली सीमेंट की बोरी को बाजार में असली बताकर ₹250 से ₹280 में बेचा जा रहा था। गिरोह हर महीने करीब 30,000 से ज्यादा बोरियां बाजार में खपा रहा था। 

Kanpur fake cement factory

​बड़े सरकारी प्रोजेक्ट्स पर मंडराया खतरा!

​इस खुलासे के बाद सबसे बड़ा सवाल प्रदेश के बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर उठ रहा है। जांच में सामने आया है कि ​CM ग्रिड सड़क योजना के तहत बन रही महत्वपूर्ण सड़कों में भी इसी घटिया सीमेंट का इस्तेमाल किया गया है। ​लखनऊ इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नए टर्मिनल के निर्माण कार्यों में भी इस नकली सीमेंट की भारी सप्लाई किए जाने का गंभीर दावा किया गया है।

​पुलिसिया कार्रवाई और गरमाई सियासत

​पुलिस ने फैक्ट्री के मुंशी/सुपरवाइजर राहुल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। वहीं, मुख्य संचालक भाई नीरज गुप्ता और धीरज गुप्ता अपने दो अन्य साझेदारों के साथ फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है, इंतजार योगी सरकार के बड़े एक्शन का है।

 

​इस खुलासे के बाद उत्तर प्रदेश का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार को घेरते हुए कड़ा तंज कसा है कि भाजपा का भ्रष्टाचार देश और प्रदेश की नींव को कमजोर कर रहा है। साथ ही, कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस-वे जैसे प्रोजेक्ट्स में भी इस सीमेंट के इस्तेमाल की उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई है।

KDA Plot Scheme: कानपुर में प्लॉट खरीदने का सुनहरा मौका! दशहरा के बाद KDA ला रहा 96 प्राइम प्लॉट

KDA Kanpur Highway City Vistar 96 Plots: कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA) अपना घर बनाने की चाह रखने वालों के लिए दशहरा के बाद बड़ा मौका लाने जा रहा है। प्राधिकरण अपनी लोकप्रिय हाईवे सिटी विस्तार योजना के तहत 96 आवासीय प्लॉटों की बिक्री प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है। जो लोग कानपुर शहर में अपनी मनपसंद लोकेशन पर प्लॉट खरीदकर मकान बनाना चाहते हैं, उनके लिए यह एक शानदार अवसर साबित होगा।

केडीए की ओर से शहर की अलग-अलग आवासीय योजनाओं में खाली पड़े भूखंडों को बिक्री के लिए चरणबद्ध तरीके से लाया जा रहा है। हाईवे सिटी विस्तार योजना के इन 96 भूखंडों के लिए आवेदन की तारीख, प्लॉटों का क्षेत्रफल, निर्धारित दरें और नियम-शर्तों की विस्तृत जानकारी जल्द ही प्राधिकरण की ओर से आधिकारिक रूप से जारी की जाएगी।

केडीए सचिव अभय पांडेय ने बताया कि हाईवे सिटी विस्तार योजना के तहत 96 आवासीय भूखंडों की बिक्री की तैयारी अंतिम चरण में है। इच्छुक आवेदकों को मौका देने के लिए विभागीय प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।

844 अन्य प्लॉटों की बिक्री से भी खुलेंगे नए विकल्प

हाईवे सिटी के अलावा, केडीए ने शहर की विभिन्न प्राइम लोकेशनों पर कुल 844 आवासीय और व्यावसायिक भूखंडों की बिक्री की रूपरेखा तैयार की है।

किन-किन योजनाओं में मिलेंगे प्लॉट?

  • जवाहरपुरम
  • शताब्दी नगर
  • हाईवे सिटी विस्तार
  • अर्रा-बिनगवां एवं अन्य योजनाएं

इन योजनाओं में आम लोगों को रहने के लिए आवासीय प्लॉट मिलेंगे, वहीं कारोबारियों व निवेशकों के लिए कमर्शियल प्लॉट खरीदने के बेहतरीन विकल्प उपलब्ध होंगे।

ऑनलाइन आवेदन और ई-ऑक्शन पर रखें नजर

केडीए के इन प्लॉटों की बिक्री मुख्य रूप से ऑनलाइन माध्यम/ई-ऑक्शन के जरिए होगी। इच्छुक खरीदारों को केडीए की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी होने वाले नोटिफिकेशन पर नजर रखनी होगी।

जरूरी जानकारियां: नोटिफिकेशन में पंजीकरण शुल्क, प्लॉट का साइज, न्यूनतम बेस प्राइस और भुगतान की किस्तों की पूरी डिटेल दी जाएगी।

ई-ऑक्शन प्रक्रिया: जिन भूखंडों पर ई-ऑक्शन लागू होगा, वहां आवेदकों को निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन बोली लगानी होगी।

रिपोर्ट- अखंड प्रताप सिंह 

ये चायवाला अपनी कमाई का 80% Underprivileged बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करता है | Mahboob Malik

ये चायवाला अपनी कमाई का 80% Underprivileged बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करता है | Mahboob Malik

खुद आर्थिक तंगी की वजह से अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए…
लेकिन आज महबूब मलिक अपनी कमाई का करीब 80% हिस्सा जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करते हैं।
कानपुर में चाय बेचने से शुरू हुई उनकी छोटी-सी कोशिश आज 3500+ बच्चों को Education से जोड़ चुकी है।
कभी उनकी चाय की दुकान ही बच्चों की Classroom बनी थी। आज Foundation के जरिए बच्चों को Uniforms, Books, Courses और Teachers की सुविधा मिलती है।
इनमें कोई Doctor बनना चाहता है, तो कोई Engineer।
महबूब की कहानी सिर्फ एक इंसान की कहानी नहीं, बल्कि इस बात की याद है कि किसी के भविष्य को बदलने के लिए हमेशा बहुत कुछ होना जरूरी नहीं।
कभी-कभी शुरुआत करने की जरूरत होती है।
अगर आपके आसपास भी कोई ऐसा आम इंसान है जो चुपचाप बदलाव ला रहा है, हमें Comment में जरूर बताएं।
और अगर आप Mahboob Malik और Maa Tujhe Salaam Social Foundation की इस पहल में मदद करना चाहते हैं, तो दिए गए Contact details पर संपर्क करें।

@matujhesalamfoundation

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Kanpur: ₹4200 करोड़ की सड़क बदलेगी कानपुर की किस्मत! नए इंडस्ट्रियल बेल्ट में निवेशकों की लगेगी होड़!

Kanpur-Lucknow Expressway: कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद इसका असर सिर्फ लोगों के सफर पर नहीं, बल्कि शहर के उद्योग और कारोबार पर भी दिखाई देने की उम्मीद है। करीब 63 किलोमीटर लंबे और छह लेन के इस एक्सप्रेसवे पर करीब 4200 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।

इसके शुरू होने से कानपुर और लखनऊ के बीच सफर का समय घटकर करीब 35 से 45 मिनट रह गया है। कारोबारियों के लिए समय की यह बचत काफी अहम है, क्योंकि इससे माल की आवाजाही के साथ ही दूसरे शहरों से आने वाले निवेशकों और कारोबारियों के लिए कानपुर तक पहुंचना आसान होगा।

कानपुर-उन्नाव-लखनऊ के बीच बनेगा नया औद्योगिक बेल्ट

इस एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा फायदा कानपुर, उन्नाव और लखनऊ के बीच के औद्योगिक क्षेत्र को मिल सकता है। एक्सप्रेसवे पर तीन इंटरचेंज, दो फ्लाईओवर, एक रेलवे ओवरब्रिज, चार बड़े पुल, 25 छोटे पुल, 12 व्हीकल अंडरपास और 14 छोटे वाहनों के अंडरपास बनाए गए हैं। इसके अलावा यात्रियों के लिए दो रेस्ट एरिया भी तैयार किए गए हैं। बेहतर कनेक्टिविटी से इन तीनों शहरों के बीच माल ढुलाई और कारोबारी आवाजाही पहले से ज्यादा आसान हो सकती है।

उद्योगों के लिए इसका सीधा फायदा सप्लाई चेन पर पड़ेगा। कच्चा माल मंगाने और तैयार माल दूसरे बाजारों तक भेजने में लगने वाला समय कम होगा। इससे लॉजिस्टिक्स की लागत और समय दोनों को बेहतर तरीके से मैनेज करने में मदद मिल सकती है। साथ ही लखनऊ की राजधानी और एयरपोर्ट कनेक्टिविटी सीधे कानपुर के बड़े मैन्युफैक्चरिंग बेस से जुड़ जाएगी।

463 हेक्टेयर की ट्रांस गंगा सिटी को मिलेगा बड़ा फायदा

उन्नाव की ट्रांस गंगा सिटी करीब 463 हेक्टेयर में विकसित की जा रही है। यहां औद्योगिक, व्यावसायिक, आवासीय और अन्य सुविधाओं के लिए अलग-अलग क्षेत्र बनाए गए हैं। इसमें करीब 42 हेक्टेयर से अधिक जमीन औद्योगिक गतिविधियों और करीब 17 हेक्टेयर फ्लैटेड फैक्ट्री के लिए रखी गई है। यह क्षेत्र कानपुर-लखनऊ हाईवे के नजदीक है। कानपुर एयरपोर्ट करीब 26 किलोमीटर और लखनऊ एयरपोर्ट करीब 70 किलोमीटर की दूरी पर है।

अब एक्सप्रेसवे शुरू होने से ट्रांस गंगा सिटी में निवेश करने वाले कारोबारियों को दोनों बड़े शहरों तक बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। पहले यहां जमीन और औद्योगिक सुविधाएं होने के बावजूद कनेक्टिविटी एक बड़ी जरूरत थी। अब कानपुर से तेज संपर्क मिलने के बाद यहां नए कारखाने और कारोबारी गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।

कानपुर से ट्रांस गंगा सिटी तक सीधे पुल की भी तैयारी

ट्रांस गंगा सिटी को कानपुर से सीधे जोड़ने के लिए करीब 1.8 किलोमीटर लंबे चार लेन के गंगा पुल की योजना भी बनाई गई है। इसके साथ करीब 2.1 किलोमीटर एप्रोच रोड बनाई जानी है। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 538 करोड़ रुपये बताई गई थी। ट्रांस गंगा सिटी में पहले से ही सैकड़ों औद्योगिक और व्यावसायिक भूखंड विकसित किए जा चुके हैं। पुल बनने के बाद कानपुर से इस औद्योगिक क्षेत्र की दूरी और आसान हो जाएगी।

कानपुर से ट्रांस गंगा सिटी तक सीधे पुल की भी तैयारी

जाजमऊ के चमड़ा उद्योग को भी फायदा

कानपुर का जाजमऊ चमड़ा उद्योग भी बेहतर कनेक्टिविटी से लाभ उठा सकता है। यहां से तैयार माल देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों तक जाता है। एक्सप्रेसवे के जरिए लखनऊ और आगे दूसरे बाजारों तक तेज सड़क संपर्क मिलने से माल की आवाजाही आसान होगी। काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट्स के वाइस चेयरमैन मुख्तारुल अमीन के मुताबिक, उद्योग के विस्तार के लिए मजबूत सड़क और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क बेहद जरूरी है। बेहतर कनेक्टिविटी से कानपुर के चमड़ा कारोबार को नए बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है।

बड़े कारोबारी भी आसानी से पहुंच सकेंगे कानपुर

फीटा के महासचिव उमंग अग्रवाल का कहना है कि एक्सप्रेसवे का फायदा केवल माल ढुलाई तक सीमित नहीं रहेगा। दूसरे शहरों से आने वाले कारोबारी अब लखनऊ एयरपोर्ट से कम समय में कानपुर पहुंच सकेंगे। इससे एक दिन में फैक्ट्री विजिट, कारोबारी बैठक और वापस लौटना संभव होगा। पहले लखनऊ से कानपुर सड़क यात्रा में काफी समय लगने के कारण कारोबारियों को अतिरिक्त समय लगाना पड़ता था।

इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील वैश्य के मुताबिक, एक्सप्रेसवे और ट्रांस गंगा सिटी जैसी परियोजनाएं मिलकर कानपुर के औद्योगिक विस्तार को शहर की सीमा से आगे ले जा सकती हैं। खासकर उन्नाव की तरफ नए उद्योग, वेयरहाउस और लॉजिस्टिक्स गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।

रिपोर्ट- अखंड प्रताप सिंह

लेदर थ्रेड से मिलेट्स बिस्किट तक… 20 देशों में पहुंचे कानपुर की महिला कारोबारियों के उत्पाद, खड़ा किया करोड़ों का बिजनेस!

Kanpur Women Entrepreneurs Success Story: जब भी हमारे जुबान पर इंडस्ट्री का नाम आता है तो इसको हम पुरुष प्रधान क्षेत्र समझते हैं वही कानपुर को लंबे समय से देश के बड़े औद्योगिक शहरों में गिना जाता है। यहां कारखानों और कारोबार की बात होती थी तो ज्यादातर पुरुष कारोबारी ही सामने आते थे। अब यह तस्वीर तेजी से बदल रही है। शहर की महिलाएं भी उद्योग और मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं।

जिन महिलाओं को पहले हम घर संभालते हुए देखे थे अब वह बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियां और इंडस्ट्रीज या संभाल रही है ,बीते पांच साल में कानपुर में महिला कारोबारियों और उद्यमियों की संख्या में करीब 15 से 20 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। खास बात यह है कि महिलाएं अब सिर्फ छोटे कारोबार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि खुद औद्योगिक इकाइयां चला रही हैं और दूसरे लोगों को रोजगार भी दे रही हैं।

लेदर, कपड़ा, पैकेजिंग और फूड प्रोसेसिंग जैसे सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। कई महिला उद्यमियों के उत्पाद देश के अलग-अलग शहरों में पहुंच रहे हैं, जबकि कुछ का माल विदेशों तक भी सप्लाई हो रहा है। यानी कानपुर की आधी आबादी अब कारोबार में सिर्फ हिस्सेदारी नहीं बढ़ा रही, बल्कि खुद कारोबार की कमान संभाल रही है।

केस 1: नौकरी छोड़ी, ट्रेडिंग से शुरू किया सफर, अब 20 देशों तक पहुंचा कारोबार

फजलगंज इंडस्ट्रियल एरिया में लेदर उद्योग से जुड़ी प्रेरणा वर्मा की कहानी इसकी बड़ी मिसाल है। प्रेरणा पहले एक प्राइवेट नौकरी करती थीं। नौकरी में मन नहीं लगा तो खुद का कारोबार शुरू करने का फैसला किया। शुरुआत में उन्होंने लेदर उत्पादों की ट्रेडिंग की। कारोबार बढ़ा तो अपनी फैक्ट्री लगाने का सपना देखा और उसे भी पूरा कर लिया।

केस 1: नौकरी छोड़ी, ट्रेडिंग से शुरू किया सफर, अब 20 देशों तक पहुंचा कारोबार

आज उनकी फैक्ट्री में लेदर थ्रेड, बैग और कस्टमाइज लेदर आइटम तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों की मांग देश के साथ विदेशों में भी है। उनके उत्पाद करीब 20 देशों तक पहुंच रहे हैं। फैक्ट्री में 100 से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला हुआ है, जिसमें बड़ी संख्या महिलाओं की है।

केस 1: नौकरी छोड़ी, ट्रेडिंग से शुरू किया सफर, अब 20 देशों तक पहुंचा कारोबार

केस 2: मोटे अनाज से बनाए बिस्किट और नमकीन, विदेश तक पहुंचा कारोबार

बर्रा-2 निवासी संगीता सिंह ने वर्ष 2023 में अपना कारोबार शुरू किया। उन्होंने मोटे अनाज से अलग तरह के बिस्किट और नमकीन तैयार किए। शुरुआत में कारोबार छोटा था, लेकिन लोगों को उत्पाद पसंद आए तो धीरे-धीरे इसकी मांग बढ़ने लगी। पहले उत्पाद देश के अलग-अलग शहरों तक पहुंचे और इसके बाद विदेशों में भी इनकी मांग बनने लगी।

केस 2: मोटे अनाज से बनाए बिस्किट और नमकीन, विदेश तक पहुंचा कारोबार

आज संगीता का कारोबार करोड़ों रुपये सालाना तक पहुंच चुका है। उनकी कहानी बताती है कि सही उत्पाद और मेहनत के दम पर महिलाएं भी बड़े कारोबार खड़े कर सकती हैं।

उद्योग से रोजगार तक, महिलाओं की बढ़ रही भागीदारी

कानपुर में महिला उद्यमिता का बढ़ता दायरा सिर्फ कारोबार तक सीमित नहीं है। इन उद्योगों के जरिए महिलाओं को रोजगार भी मिल रहा है। कई महिला कारोबारी अपने साथ दूसरी महिलाओं को भी काम से जोड़ रही हैं। इससे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का रास्ता खुल रहा है।

कभी जिन महिलाओं को उद्योग की दुनिया से दूर माना जाता था, वही अब मशीनों के बीच खड़े होकर प्रोडक्शन की कमान संभाल रही हैं। लेदर से लेकर फूड प्रोसेसिंग तक अलग-अलग क्षेत्रों में महिलाएं कारोबार को नई दिशा दे रही हैं। इनके उत्पाद अब कानपुर और देश के बाजार से निकलकर विदेशों तक पहुंच रहे हैं।

महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए IIA में बनी महिला विंग

कानपुर में महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन यानी IIA में महिला विंग भी बनाई गई है। इसका मकसद शहर की महिला उद्यमियों को एक मंच देना, उन्हें उद्योग से जुड़ी जानकारी और नए अवसरों से जोड़ना और कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद करना है। महिला उद्यमियों के बीच नेटवर्किंग बढ़ाने के साथ उन्हें बाजार, तकनीक और कारोबार से जुड़ी संभावनाओं की जानकारी देने पर भी जोर दिया जा रहा है।

कानपुर की औद्योगिक तस्वीर में अब आधी आबादी की यह बढ़ती हिस्सेदारी साफ दिखाई दे रही है। महिलाएं खुद उद्योग चला रही हैं, लोगों को रोजगार दे रही हैं और अपने उत्पादों को देश ही नहीं, विदेशों के बाजार तक पहुंचा रही हैं। ऐसे में शहर की इंडस्ट्रियल पहचान में महिलाओं की यह बढ़ती भूमिका आने वाले समय में और बड़ी दिखाई दे सकती है।

पिछले पांच सालों में महिला उद्यमियों से जुड़े ये है प्रमुख आंकड़े

कुल उद्यम पंजीकरण हुए: 41008

कुल मैन्यूफेक्चरिंग यूनिट लगीं: 12711

कुल इंप्लॉयमेंट जेनरेट हुआ: 75622

कुल सर्विस यूनिट लगीं: 12234

कुल रोजगार मिला: 77071

कुल ट्रेडिंग संबंधी यूनिट लगीं: 16063

कुल रोजगार मिला: 74292

कुल निवेश कानपुर को मिला: 91961.66 लाख रुपये

रिपोर्ट- अखंड प्रताप सिंह

UP Board Exam 2027: स्कूल अब इस तारीख तक जमा कर सकेंगे 10वीं-12वीं के छात्रों की फीस, 1-6 अक्टूबर के बीच कर सकेंगे करेक्शन

UP Board Exam 2027: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP), प्रयागराज ने 10वीं (हाई स्कूल) और 12वीं (इंटरमीडिएट) कक्षा की सालाना बोर्ड परीक्षाओं के अपडेटेड शेड्यूल के लिए एक संशोधित नोटिफिकेशन जारी किया है। आधिकारिक वेबसाइट upmsp.edu.in पर जारी नोटिस के मुताबिक, साल 2027 की बोर्ड परीक्षा के लिए कक्षा 10 और 12 के संस्थागत और निजी परीक्षार्थियों की परीक्षा फीस जमा करने और ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरने की तारीखें बढ़ा दी गई हैं। इससे पहले, योग्य छात्रों से स्कूल प्रिंसिपलों के लिए परीक्षा फीस लेने की आखिरी तारीख 1 सितंबर, 2026 थी। इसे अब बदल दिया गया है।

यूपी बोर्ड कक्षा 10 और 12 परीक्षा 2027: जरूरी तारीखें

अपडेटेड बढ़ी हुई तारीख : कार्य

28 सितंबर, 2026: स्कूज प्रमुख के लिए सभी योग्य छात्रों से जमा की गई परीक्षा फीस एकमुश्त चालान के जरिए ट्रेजरी में जमा करने की आखिरी तारीख।

30 सितंबर, 2026 सुबह 12 बजे तक : स्कूल प्रमुख के लिए ट्रेजरी में जमा किए गए परीक्षा शुल्क का विवरण और छात्रों का शैक्षिक डिटेल बोर्ड की वेबसाइट upmsp.edu.in पर अपलोड करने की आखिरी तारीख।

1 – 6 अक्टूबर, 2026 सुबह 12 बजे तक : प्रिंसिपल के लिए वेबसाइट से छात्रों की डिटेल्स की चेकलिस्ट डाउनलोड करने, विवरण सत्यापित करने और जरूरत पड़ने पर करेक्शन/अपडेट करने का समय।

15 अक्टूबर, 2026: स्कूल प्रमुख के लिए परीक्षार्थियों की फोटो-रजिस्टर्ड रोल लिस्ट और उससे जुड़ी ट्रेजरी रसीद की एक कॉपी डिस्ट्रिक्ट इंस्पेक्टर ऑफ स्कूल्स (DIOS) ऑफिस में जमा करने की आखिरी तारीख, ताकि उसे बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालम में आगे जमा किया जा सके।

किसी भी सुधार के मामले में, अपडेट प्रक्रिया 1 से 6 अक्टूबर, 2026 के बीच एक साथ होनी चाहिए। इस समय के बाद सुधार के लिए कोई भी आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।

यूपी बोर्ड एचएस, इंटर एग्जाम 2027: खास बातें

परीक्षार्थी यूपी बोर्ड एचएस, इंटर परीक्षा 2027 की जरूरी बातें जानने के लिए नीचे दी गई टेबल देख सकते हैं:

एक नजर में

बोर्ड का नाम : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP), प्रयागराज

आधिकारिक पोर्टल : upmsp.edu.in

परीक्षा वर्ष : 2027

कक्षा : कक्षा 10 और कक्षा 12

छात्र श्रेणी : नियमित और निजी छात्र

चालान फीस जमा करने की आखिरी तारीख (ट्रेजरी में): 28 सितंबर, 2026

वेबसाइट पर ऑनलाइन डेटा अपलोड करने की आखिरी तारीख : 30 सितंबर, 2026 सुबह 12 बजे तक

डेटा चेकलिस्ट वेरिफिकेशन और करेक्शन विंडो : 1 – 6 अक्टूबर, 2026

DIOS को रोल लिस्ट और ट्रेजरी रसीदें जमा करने की आखिरी तारीख : 15 अक्टूबर, 2026

सभी स्कूलों के प्रिंसिपल को यह पक्का करने के लिए कहा गया है कि परीक्षा वर्ष 2027 के लिए कक्षा 10 और 12 के रेगुलर/प्राइवेट परीक्षार्थियों के ऑनलाइन परीक्षा आवेदन फॉर्म अपलोड करने का काम नई बदली हुई तारीखों के हिसाब से पूरा किया जाएगा। इसके बाद परीक्षा के लिए आवेदन करने का कोई और मौका नहीं दिया जाएगा।

IIT Kanpur: आईआईटी कानपुर के इस प्रोफेसर को मिली नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज की फेलोशिप, 01 जनवरी से होगी शुरुआत

IIT Kanpur: आईआईटी कानपुर के इस प्रोफेसर को मिली नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज की फेलोशिप, 01 जनवरी से होगी शुरुआत

IIT Kanpur: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) कानपुर में मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रोफेसर शांतनु भट्टाचार्य को नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, इंडिया (NASI) का फेलो चुना गया है। प्रोफेसर भट्टाचार्य को यह सम्मान उनके शानदार साइंटिफिक योगदान को मान्यता देने के लिए दिया जा रहा है। रिकॉर्ड के मुताबिक, भट्टाचार्य की रिसर्च अलग-अलग लंबाई के स्केल पर फंक्शनल मटीरियल के डिजाइन और डेवलपमेंट और उनके फैब्रिकेशन प्रोसेस पर फोकस करती है। इसमें बायो-MEMS, लैब-ऑन-चिप सिस्टम, नैनोटेक्नोलॉजी, माइक्रोफ्लूइडिक सिस्टम डिज़ाइन और फैब्रिकेशन, सेंसर, अकूस्टिक मेटामटेरियल, वॉटर रेमेडिएशन और एनर्जी स्टोरेज डिवाइस जैसे एप्लीकेशन शामिल हैं।

आईआईटी कानपुर के साथ बतौर प्रोफेसर शिक्षण सेवा देने के अलावा, प्रोफेसर भट्टाचार्य अभी सीएसआईआर-सेंट्रल साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट्स ऑर्गनाइजेशन (CSIR-CSIO), चंडीगढ़ के निदेशक के तौर पर काम कर रहे हैं। साथ ही, वही सीएसआईआर-सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (CSIR-CEERI), पिलानी में डायरेक्टर का अतिरिक्त कार्यभार भी संभाल रहे हैं।

आईआईटी कानपुर ने प्रोफेसर शांतनु भट्टाचार्य की इस शानदार उपलब्धि पर बधाई देते हुए माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट एक्स पर एक सोशल मीडिया पोस्ट की। इसमें संस्थान की ओर से कहा गया, “प्रो. भट्टाचार्य की इनोवेटिव रिसर्च बायो एमईएमएस, लैब ऑन चिप, नैनो टेक्नोलॉजी, माइक्रोफ्लूइडिक सिस्टम डिजाइन और फैब्रिकेशन, सेंसर, अकूस्टिक मेटामटेरियल, वॉटर रेमेडिएशन और एनर्जी स्टोरेज डिवाइस के क्षेत्र में फंक्शनल मटीरियल और उनके फैब्रिकेशन प्रोसेस (अलग-अलग लंबाई के स्केल पर) के डिजाइन और डेवलपमेंट से संबंधित है।” साथ ही पोस्ट में कहा गया, ‘मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रो. शांतनु भट्टाचार्य को 1 जनवरी, 2027 से द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, इंडिया (NASI) का फेलो चुने जाने पर हार्दिक बधाई।’ यह फेलोशिप “वैज्ञानिक के शानदार साइंटिफिक योगदान को मान्यता देने के लिए” दी गई है।

आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, इंडिया 1930 में बनी थी। इसका मकसद साइंस और टेक्नोलॉजी को सभी ब्रांच में बढ़ाना और बढ़ावा देने के साथ ही भारतीय वैज्ञानिकों के शोधकार्य के विचारों के लेन-देन और प्रकाशन के लिए एक राष्ट्रीय मंच प्रदान करना है। इस एकेडमी को भारत सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (DST) से वित्तीय मदद मिलती है। इसे भारत सरकार के डिपार्टमेंट फॉर साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (DSIR) से साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च ऑर्गनाइजेशन के तौर पर भी पहचान मिली है।

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Kanpur Plane Crash: कानपुर में बड़ा विमान हादसा, गंगा बैराज के पास ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट क्रैश; 2 पायलटों की मौत

Kanpur Plane Crash: गुरुवार सुबह कानपुर में नत्था खेड़ा गंगा बैराज के पास एक दो इंजन वाले चार सीटर प्राइवेट ट्रेनिंग विमान के क्रैश होने से बड़ा हादसा हो गया। इस हादसे में विमान में सवार इंस्ट्रक्टर पायलट और ट्रेनी पायलट की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, हादसे के बाद कानपुर नगर से आग बुझाने वाली और इमरजेंसी रेस्क्यू टीमें नत्था खेड़ा गंगा बैराज के पास दुर्घटना स्थल पर भेजी गईं, जहां चीफ फायर ऑफिसर (CFO) की देखरेख में राहत और बचाव कार्य चल रहा है।

बता दें कि हादसे में मारे गए ट्रेनी पायलट की पहचान अभिषेक पुजारी के तौर पर हुई, जबकि ट्रेनर पायलट सचिन भाटिया थे।

जानकारी के मुताबिक, यह विमान ‘गर्ग एविएशन’ का था, जो एक लोकल फ्लाइट ट्रेनिंग स्कूल के तौर पर काम करता है।

पुलिस ने दी जानकारी

पुलिस ने बताया कि पायलट के पास 3,000 घंटे से ज्यादा की फ्लाइंग का अनुभव था और वह गुजरात का रहने वाला था, जबकि को-पायलट कर्नाटक का रहने वाला था।

फिलहाल, पुलिस ने दुर्घटना वाली जगह को सुरक्षित कर लिया है और वहां घेराबंदी कर दी है। साथ ही, इस घटना के बारे में डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) को भी जानकारी दे दी गई है। उम्मीद है कि DGCA की एक टीम दुर्घटना की जांच के तहत घटनास्थल का मुआयना करेगी। हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि दुर्घटना किन हालात में हुई।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने जताया दुख

वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना पर दुख जताया और पीड़ितों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की और शोक संतप्त परिवारों को इस दुख को सहने की हिम्मत देने की कामना की।

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योगी सरकार का बड़ा एक्शन प्लान, IIT कानपुर, BHU और रुड़की को सौंपी कमान! यूपी में ₹100 करोड़ से बड़े प्रोजेक्ट्स का यूं होगा ऑडिट

UP News: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की क्वालिटी सुधारने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब 100 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली सड़क, पुल, सीवरेज और जलापूर्ति परियोजनाओं की क्वालिटीकी जांच देश के प्रतिष्ठित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) संस्थानों के एक्सपर्ट्स करेंगे। सरकार ने इसके लिए थर्ड पार्टी क्वालिटी ऑडिट (TPQA) की व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। इस नई व्यवस्था में IIT कानपुर, IIT-BHU वाराणसी और IIT रुड़की जैसे प्रमुख संस्थान बड़ी परियोजनाओं की टेक्निकल क्वालिटी की निगरानी करेंगे।

इसका मकसद यह है कि निर्माण में किसी भी तरह की तकनीकी कमी, घटिया सामग्री या सुरक्षा से जुड़ी समस्या का पता परियोजना पूरी होने के बाद नहीं। बल्कि निर्माण के दौरान ही चल जाए। थर्ड-पार्टी क्वालिटी ऑडिट (TPQA) में सड़कें, पुल, सीवरेज सिस्टम और पानी की सप्लाई वाले प्रोजेक्ट्स शामिल होंगे।

प्रोजेक्ट की शुरुआत से लेकर आखिर तक होगी जांच 

एक्सपर्ट्स हर प्रोजेक्ट की शुरुआत से लेकर आखिर तक जांच करेंगे। इसमें उसका डिजाइन, बनाने का तरीका, इस्तेमाल होने वाली सामग्री और जरूरी मानकों का पालन हो रहा है या नहीं, जैसे सभी कारण शामिल होगा। IIT की टीमें निर्माण के अलग-अलग चरणों की भी निगरानी करेंगी ताकि काम पूरा होने के बाद के बजाय शुरुआती दौर में ही किसी भी समस्या का पता लगाया जा सके।

शुरुआत से अंत तक होगी जांच

IIT के विशेषज्ञ केवल तैयार सड़क या पुल की जांच नहीं करेंगे, बल्कि परियोजना के अलग-अलग चरणों की निगरानी करेंगे। इसका उद्देश्य निर्माण पूरा होने के बाद खामियां मिलने के बजाय उन्हें समय रहते पहचानकर ठीक करना है। इसमें मुख्य रूप से-

  • प्रोजेक्ट के डिजाइन की जांच
  • निर्माण में अपनाई जा रही तकनीक
  • इस्तेमाल होने वाली निर्माण सामग्री की गुणवत्ता
  • निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन
  • निर्माण की सुरक्षा
  • काम की अलग-अलग स्टेज पर गुणवत्ता की जांच शामिल होगी।

IIT कानपुर को 8 डिवीजन की जिम्मेदारी

‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी व्यवस्था के तहत IIT कानपुर को उत्तर प्रदेश के 8 डिवीजन में प्रोजेक्ट की क्वालिटी जांच की जिम्मेदारी दी गई है। इनमें कानपुर, लखनऊ, बांदा, प्रयागराज, अयोध्या, आगरा, झांसी और देवीपाटन शामिल हैं। इन क्षेत्रों में ₹100 करोड़ से अधिक लागत वाले संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की तकनीकी जांच IIT कानपुर की टीम करेगी।

IIT-BHU के जिम्मे ये इलाके

IIT-BHU वाराणसी को भी कई महत्वपूर्ण डिवीजन की जिम्मेदारी दी गई है। इसके तहत बस्ती, गोरखपुर, आजमगढ़, वाराणसी और मिर्जापुर में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता की निगरानी की जाएगी। वहीं IIT रुड़की को सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, मेरठ और अलीगढ़ समेत पांच डिवीजन की जिम्मेदारी दी गई है।

₹100 करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट पर खास नजर

नई व्यवस्था के तहत ₹100 करोड़ से अधिक लागत वाले प्रमुख प्रोजेक्ट जांच के दायरे में आएंगे। टेक्निकल एक्सपर्ट निर्माण की क्वालिटी के साथ-साथ इस्तेमाल की जा रही सामग्री और परियोजना की सुरक्षा का भी परीक्षण करेंगे। सरकार का मानना है कि बाहरी और एक्सपर्ट्स संस्थानों से ऑडिट कराने से निर्माण एजेंसियों पर गुणवत्ता बनाए रखने का दबाव बढ़ेगा। साथ ही सरकारी पैसे से तैयार होने वाली बड़ी परियोजनाओं की विश्वसनीयता बेहतर होगी।

‘उन्नाव एक्सप्रेसवे’ हादसे के बाद बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब उन्नाव में ग्रीनफील्ड नेशनल एलिवेटेड एक्सप्रेसवे के एक हिस्से के उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद ढहने की खबर सामने आई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब ₹4,200 करोड़ की लागत से तैयार इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई को हुआ था।

इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी मौजूद थे। इसके करीब 12 दिन बाद एक्सप्रेसवे के एक हिस्से के ढहने की खबर ने निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

अब निर्माण के दौरान ही पकड़ में आएंगी खामियां

नई TPQA व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि किसी परियोजना के पूरा होने के बाद सामने आने वाली तकनीकी खामियों को निर्माण के दौरान ही पकड़ा जा सकेगा। सरकार की कोशिश है कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट केवल समय और बजट के भीतर पूरे न हों। बल्कि उनकी गुणवत्ता, मजबूती और सुरक्षा भी सुनिश्चित हो। यानी अब यूपी में ₹100 करोड़ से बड़े प्रोजेक्ट पर सिर्फ सरकारी विभागों की नजर नहीं होगी। बल्कि IIT के टेक्निकल एक्सपर्ट भी निर्माण की क्वालिटी का हिसाब रखेंगे।

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Viral Video: कानपुर में कचरे के ढेर पर फेंकी गई एक्सपायर्ड चॉकलेट्स के लिए मची भयंकर लूट, क्या इसे बच्चों को खिलाएंगे?

Kanpur expired chocolate dump: सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश के कानपुर का एक चौंकाने वाला वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में दावा किया जा रहा है कि कानपुर के पनकी में कचरे के ढेर पर फेंकी गई एक्सपायर्ड टॉफियों और चॉकलेट्स को उठाने के लिए लोगों में होड़ मची हुई है। एक फैक्ट्री द्वारा कचरे में फेंकी गई इन मिठाइयों और चॉकलेट्स को इकट्ठा करने के लिए पुरुषों और महिलाएं टूट पड़े हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही फूड सेफ्टी, वेस्ट मैनेजमेंट और गरीबी को लेकर बहस छिड़ गई है कि कोई एक्सपायर्ड चॉकलेट के लिए कैसे क्रेजी हो सकता है और क्या लोग इसे घर ले जाकर अपने बच्चों को खिलाएंगे?

न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर @Delhiite नाम के यूजर ने इस वीडियो को शेयर करते हुए इसे अजीब होड़ बताया है। यूजर का कहना है कि एक्सपायर्ड चॉकलेट लूटने के लिए टूट पड़े लोगों में बुनियादी कॉमन सेंस पूरी तरह से गायब नजर आया।

वीडियो के वायरल होते ही इंटरनेट पर लोगों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने जहां एक्सपायर्ड चीजों को उठाने वालों की आलोचना की और इसके हेल्थ पर पड़ने वाले खराब असर की बात कही, तो दूसरे कुछ लोगों का मानना था कि इस घटना को गरीबी और महंगाई के नजरिए से भी देखा जाना चाहिए।

महंगाई और गरीबी पर छिड़ी तीखी बहस

कचरे के ढेर पर मची इस लूट को लेकर कई यूजर्स ने देश में बढ़ती महंगाई और आर्थिक तंगी पर चिंता जताई। एक यूजर ने कमेंट करते हुए तंज कसा कि भाई महंगाई इतनी बढ़ गई है कि अब कचरा भी बजट शॉपिंग डेस्टिनेशन बन गया है। वहीं दूसरे यूजर ने सहानुभूति जताते हुए लिखा कि यह सामान्य समझ की कमी से ज्यादा गरीबी और असमर्थता को दर्शाता है। इसी गरीबी ने लोगों को कचरे से खाना उठाने पर मजबूर किया होगा। एक दूसरे व्यक्ति ने लिखा कि सोचिए उस स्तर तक पहुंचने के लिए कितनी तंगी रही होगी कि लोग इस जोखिम को उठाने के लिए तैयार हो गए।

कुछ यूजर्स ने लोगों के पहनावे को लेकर सवाल उठाए। एक यूजर ने लिखा कि जिस तरह से लोगों ने कपड़े पहने हैं, उससे लगता है कि वे सभी स्कूल और कॉलेज गए होंगे। समझ नहीं आता कि उन्हें क्या सिखाया गया है कि वे एक्सपायर्ड सामान उठा रहे हैं। दूसरे यूजर ने लिखा कि लोग फ्री की टॉफियों के लिए इंफेक्शन का खतरा मोल ले रहे हैं, ऐसा लगता है जैसे कॉमन सेंस गायब हो चुका है।

कंपनी और FSSAI पर उठे सवाल, नियमों के उल्लंघन का आरोप

इस पूरी घटना के बाद कंपनियों द्वारा खराब और एक्सपायर्ड सामान को नष्ट करने के तरीके पर भी सवाल उठे हैं। सोशल मीडिया पर एफएसएसएआई और संबंधित अधिकारियों को टैग करते हुए एक यूजर ने लिखा कि उस फैक्ट्री मालिक को जल्द से जल्द पकड़ा जाना चाहिए और सजा मिलनी चाहिए क्योंकि एक्सपायर्ड सामान को नष्ट करने की एक तय प्रक्रिया होती है। एक दूसरे यूजर ने कहा कि एक्सपायर्ड आइटम को निपटाने का यह मानक तरीका नहीं है और इसके लिए दोषी ब्रांड के खिलाफ मामला दर्ज किया जाना चाहिए।

(डिस्क्लेमर: यह लेख यूजर-जनरेटेड कंटेंट और सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। ओरिजिनल पोस्ट में किए गए दावों की मनीकंट्रोल द्वारा स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है।)

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