यूपी की आबादी चुनौती नहीं, बड़ी संभावना : CM योगी

यूपी की आबादी चुनौती नहीं, बड़ी संभावना : CM योगी

CM Yogi Adityanath: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दुनिया की सबसे प्रतिभाशाली, ऊर्जावान युवा वर्कफोर्स यूपी में है। इन्हें प्लेटफॉर्म उलब्ध कराना सरकार का काम है। राजदूत, उच्चायुक्त समेत विदेशी प्रतिनिधिमंडल मुझसे पूछते हैं कि उत्तर प्रदेश की आबादी 25 करोड़ से अधिक है, इसलिए आपके सामने बड़ी चुनौती है। मैं उनसे कहता हूं कि जितनी बड़ी चुनौती, उतनी ही बड़ी संभावना है। यूपी की जिस आबादी को लोग चुनौती कहते हैं, हम उसे डेमोग्रॉफिक डेविडेंड मानते हैं। इनके स्केल को स्किलिंग से जोड़कर इसका उपयोग डेमोग्रॉफिक डेविडेंड के रूप में कर पाते हैं।

 

मुख्यमंत्री गुरुवार को लोकभवन में स्टार्टअप नीति के अंतर्गत 107 स्टार्टअप्स को 3.42 करोड़ रुपए से अधिक और 9 इनक्यूबेटर्स को 1.79 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि का वितरण करने के उपरांत युवा उद्यमियों व उद्योग प्रतिनिधियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस अवसर पर उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति 2026 पुस्तिका का विमोचन तथा उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन पोर्टल का शुभारंभ भी किया। इस दौरान लघु फिल्म के माध्यम से यूपी के स्टार्टअप इकोसिस्टम से अवगत कराया गया।

2014 से पहले देश में 500 स्टार्टअप्स, अब ढाई लाख से अधिक 

सीएम योगी ने 2014 से पहले और इसके बाद भारत में स्टार्टअप इकोसिस्टम की चर्चा की। उन्होंने बताया कि भारत में व्यापक बदलाव दिख रहा है। 2014 के पहले देश में मात्र 500 स्टार्टअप्स थे, अब इनकी संख्या ढाई लाख से ऊपर है। स्टार्टअप इकोसिस्टम अब भारत के युवाओं के सपनों की उड़ान को गति दे रहा है। 2017 से पहले यही स्थिति उत्तर प्रदेश की भी थी। उस समय यहां कुल 120 स्टार्टअप थे, लेकिन डबल इंजन सरकार के प्रोत्साहन व सकारात्मक वातावरण के कारण आज इनकी संख्या 24 हजार से अधिक हो गई। इसमें 8 यूनिकॉर्न हैं। यूपी की स्टार्टअप पॉलिसी के अंतर्गत आज 107 स्टार्टअप व 9 इन्क्यूबेटर्स को प्रोत्साहन प्राप्त हो रहा है। यूपी स्टार्टअप नीति के तहत 12 नए इन्क्यूबेटर्स को भी मान्यता प्रदान कर रहे हैं।

2017 से रोजगार, इन्क्यूबेटर्स, शिक्षा, इनोवेशन की चर्चा एक सपना 

सीएम ने कहा कि ‘भारत इनोवेट्स’ के कई स्टार्टअप्स का मैंने दौरा किया था। अपने कार्यों की बदौलत उन्होंने यूपी की पहचान और धारणा को बदलने में बड़ी भूमिका का निर्वहन किया। सीएम ने 2017 से पहले यूपी के प्रति नकारात्मक धारणा का जिक्र करते हुए यहां की अव्यवस्था को भी उजागर किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के बाहर जाने पर सांसद के रूप में मैंने भी महसूस किया कि लोग शक की निगाहों से देखते थे। धारणा यह थी कि जहां सड़कों में गड्ढे और बिजली के अभाव में अंधेरा दिखने लगे, समझो यूपी आ गया। उत्सव से पहले उपद्रव होता था। स्कूल-कॉलेज, बाजार महीनों बंद रहते थे। आमजन कर्फ्यू के साये में जीने को विवश था। उस समय 5 वर्ष में 700 से अधिक दंगे हुए। उन परिस्थितियों में उत्तर प्रदेश के अंदर रोजगार, इन्क्यूबेटर्स, शिक्षा, इनोवेशन की चर्चा करना एक सपना ही था। 

सरकार की उदासीनता से प्रदेश हो गया था ‘बीमारू’

सीएम ने कहा शिक्षा, रोजगार, स्टैंडअप, स्टार्टअप, इन्क्यूबेटर्स आदि के बारे में इकोसिस्टम तब तैयार होता है, जब धारणा के साथ ही आमजन की मानसिकता भी उसके अनुरूप दिखाई दे। हम अनुकूल वातावरण बनाने के लिए मानसिक रूप से तैयार रहें। सरकार सकारात्मक मानसिकता की हो और उसका आमजन से जुड़ाव हो, लेकिन 2017 के पहले न पॉलिसी थी और न ही सरकार की इच्छाशक्ति। लोग अजीब वातावरण में जीने को मजबूर थे, इसका परिणाम था कि अनंत संभावनाओं वाला उत्तर प्रदेश ‘बीमारू’ हो गया। 

आधे स्टार्टअप का संचालन कर रही ‘आधी आबादी’ 

सीएम ने कहा कि आधे स्टार्टअप का संचालन ‘आधी आबादी’ कर रही है। सरकार ने आईआईटी कानपुर, बीएचयू, ट्रिपल आईटी, एकेटीयू, आईआईएम से आए हर प्रस्ताव को प्रोत्साहित करने के लिए फंड व सहयोग उपलब्ध कराया। स्टार्टअप इकोसिस्टम को प्रोत्साहित करने के लिए 2019 में सरकार ने सिडबी के साथ फंड ऑफ फंड्स की व्यवस्था की थी। हालांकि बीच में कुछ गतिरोध आया था, लेकिन बाद में परिवर्तन कर इसे तेजी से बढ़ाया भी गया। 

इनोवेशन व रिसर्च के लिए सभी विश्वविद्यालयों को दिया फंड

सीएम ने नए स्टार्टअप के लिए नया प्रोत्साहन देने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि नई पॉलिसी के तहत हमने हाल में इसे अच्छे ढंग से बढ़ाया है। सीएम ने उच्च शिक्षण संस्थानों का आह्वान किया कि केवल परंपरागत पाठ्यक्रम तक सीमित न रहें, बल्कि विश्वविद्यालयों-इंस्टीट्यूट में इनोवेशन को आरएंडडी के लिए बेहतरीन माहौल दें। सरकार ने इनोवेशन व रिसर्च की एक्टिविटी को प्रोत्साहित करने के लिए सभी विश्वविद्यालयों को अलग से फंड दिया है। इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश की छवि को और बेहतर करना है।

‘नया यूपी’ पीछे हटने वाला नहीं

सीएम ने कहा कि हम लोगों ने 2017 व 2018-19 में जो प्रयास किए, उसके सकारात्मक परिणाम अब दिख रहे हैं। 2017 के पहले का ‘बीमारू यूपी’ बॉटम-3 से देश की टॉप-3 इकॉनमी में शामिल हुआ है। 9 वर्ष में उप्र की अर्थव्यवस्था, प्रति व्यक्ति आय, महिला वर्कफोर्स की भागीदारी व बड़े उद्योगों की संख्या तीन गुनी हुई। ‘नया यूपी’ पीछे हटने वाला नहीं, बल्कि सबसे तेज उभरती अर्थव्यवस्था के रूप में खुद को साबित कर रहा है। 

सरकार हर कदम पर रहेगी साथ 

सीएम ने कहा कि आईआईटी कानपुर मेडटेक व ड्रोन टेक्नोलॉजी के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाना चाहती थी, आईआईटी बीएचयू यूपीएग्रीज के साथ काम करना और एसजीपीआईजी भी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित करना चाहता था। सरकार ने इन सभी से कहा कि इमर्जिंग टेक्नोलॉजी, क्वांटम कंप्यूटिंग, स्पेस टेक्नोलॉजी, ड्रोन टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स, ग्रीन हाइड्रोजन आदि क्षेत्रों में जहां भी आवश्यकता पड़ेगी, सरकार हर सहयोग के लिए खड़ी है। हम एक दर्जन से अधिक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का संचालन/निर्माण कर रहे हैं। 

स्टार्टअप इकोसिस्टम में आबादी के अनुसार दर्ज हो यूपी की उपस्थिति 

सीएम ने उम्मीद जताई कि स्टार्टअप इकोसिस्टम में आबादी के अनुसार यूपी की उपस्थिति दर्ज होती दिखाई दे। भारत में आबादी के अनुरूप यूपी का हिस्सा 1/6 है, जबकि स्टार्टअप की तुलना में यह हिस्सा 1/10 है, यानी भारत के कुल स्टार्टअप का 20 प्रतिशत हिस्सा यूपी में होना चाहिए। इसके लिए तैयारी करनी होगी। डीपटेक के क्षेत्र में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित करने वालों समेत सभी स्टार्टअप्स का सीएम ने आह्वान किया कि वे इकोसिस्टम को गति प्रदान करने और युवाओं के सपनों को उड़ान देने के लिए आगे आएं। 

यूपी जितनी संभावनाएं देश व दुनिया में कहीं नहीं 

सीएम ने कहा कि यूपी में लैंड, सुरक्षा की दिक्कत नहीं है। पॉलिसी पैरालिसिस से उबर चुके हैं। यूपी में समर्पित पॉलिसी है। हर क्षेत्र में यहां जितनी संभावनाएं हैं, उतनी देश व दुनिया में कहीं नहीं प्राप्त होंगी। उन्होंने आश्वस्त किया कि आवश्यकता पड़ने पर सिडबी के साथ किए गए फंड ऑफ फंड्स की राशि बढ़ाई जाएगी। लीज पर लैंड, प्लग एंड प्ले मॉडल पर स्पेस उपलब्ध कराने में सरकार मदद करेगी, लेकिन आपको स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ाने के लिए गति देनी होगी।

हर कदम को प्रोत्साहित करेगी यूपी सरकार

सीएम ने आशा जताई कि डबल इंजन सरकार के साथ मिलकर आप सभी यूपी को बेहतरीन प्लेटफॉर्म दिलाने में सहयोग करेंगे। उन्होंने आश्वस्त किया कि युवाओं के हित में यूपी सरकार आपके हर कदम को प्रोत्साहित करेगी और यूपी में स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ाने में हरसंभव मदद करेगी। इस अवसर पर वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री सुनील कुमार शर्मा, अवस्थापना व औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार, प्रमुख सचिव आलोक कुमार, एकेटीयू के कुलपति प्रो. जेपी पांडेय आदि मौजूद रहे।

UP News : योगी सरकार का स्वास्थ्य क्षेत्र को बड़ा तोहफा, 2,023 रुपए करोड़ का प्रावधान, 5 मंडलों में खुलेंगे आयुष मेडिकल कॉलेज

CM Yogi Adityanath

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के प्रथम अनुपूरक बजट में आयुष और स्वास्थ्य क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त बजट का प्रावधान किया है। सरकार ने आयुष विभाग के लिए 23.25 करोड़ रुपये और चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के लिए 2,000.25 करोड़ रुपये की व्यवस्था कर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। 

 

पांच मंडलों में खुलेंगे नए आयुष मेडिकल कॉलेज

 

अनुपूरक बजट में आयुष क्षेत्र के आधुनिकीकरण और वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार और आईआईटी कानपुर के सहयोग से गंगवाल स्कूल ऑफ साइंसेज़ एंड टेक्नोलॉजी, आईआईटी कानपुर में आयुर्वेद अनुसंधान क्लीनिकल प्रमाणीकरण केंद्र स्थापित किया जाएगा। इसके लिए 3.25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार ने प्रदेश के उन पांच मंडलों आगरा, बस्ती, गोंडा, मेरठ और मिर्जापुर में नए राजकीय एकीकृत आयुष चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय स्थापित करने का निर्णय लिया है, जहां अभी कोई आयुष चिकित्सा महाविद्यालय संचालित नहीं है। इसके लिए 23.25 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।

 

स्वास्थ्य क्षेत्र को 2000.25 करोड़ रुपये का प्रावधान

 

योगी सरकार ने चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के लिए 2000.25 करोड़ रुपये के अतिरिक्त प्रावधान में कई महत्वपूर्ण योजनाओं को शामिल किया है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए 1500 करोड़ रुपये का है। सरकार ने आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए भी बड़ा प्रावधान किया है। 

 

अनुपूरक बजट में 108 ई.एम.टी.एस 'स्वास्थ्य सेवा' के संचालन हेतु 200 करोड़ रुपये एवं 102 एम्बुलेंस के संचालन मद में भारत सरकार से प्राप्त अनुमोदन से अधिक की धनराशि का व्यवभार राज्य बजट से वहन किए जाने के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही प्रदेश के शहरी चिकित्सालयों में अग्निशमन व्यवस्था के लिए 96 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।

 

चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अत्याधुनिक और सुलभ बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। इसी क्रम में प्रदेश में राज्य कैंसर मिशन की स्थापना, एसजीपीजीआई में क्वार्टनरी हेल्थ केयर सेंटर की स्थापना, ऑपरेशन थिएटर सुदृढ़ीकरण कार्यक्रम और स्मार्ट आईसीयू नेटवर्क विकसित करने की पहल की गई है। इसके साथ ही एकीकृत ट्रामा एवं इमरजेंसी नेटवर्क की स्थापना की जा रही है।

Siddharth Saxena: कौन हैं सिद्धार्थ सक्सेना? जिन्होंने 26 साल की उम्र में एक दिन में कमाए 76.99 करोड़ रुपये!

Who is Siddharth Saxena: इंटरनेट और सोशल मीडिया पर इन दिनों एक भारतीय टेक एंटरप्रेन्योर की कहानी तेजी से वायरल हो रही है। इस शख्स का नाम है सिद्धार्थ सक्सेना। इन्होंने हाल ही में खुलासा किया है कि उन्होंने महज 26 साल की उम्र में एक ही दिन में 8 मिलियन डॉलर (करीब 76.99 करोड़ रुपये) की कमाई की थी। कंटेंट क्रिएटर विराज अला के साथ हुए एक स्ट्रीट इंटरव्यू में सिद्धार्थ ने भारत के एक छोटे से शहर से अमेरिका में मल्टी-मिलियन डॉलर की कंपनियां खड़ी करने तक के अपने इस शानदार सफर के बारे में खुलकर बात की है। आइए जानते हैं कि कौन हैं सिद्धार्थ सक्सेना और उन्होंने यह मुकाम कैसे हासिल किया।

IIT कानपुर से की पढ़ाई, बोले- हार्वर्ड से 20 गुना मुश्किल है एडमिशन

विराज अला को दिए इंटरव्यू में सिद्धार्थ सक्सेना ने अपनी पढ़ाई और करियर के बारे में कई दिलचस्प बातें साझा कीं। सिद्धार्थ ने देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी कानपुर से कंप्यूटर साइंस में बी. टेक की डिग्री हासिल की है। वह साल 2019 में आईआईटी कानपुर से ग्रेजुएट हुए थे। इंटरव्यू के दौरान सिद्धार्थ ने दावा किया कि आईआईटी कानपुर के कंप्यूटर साइंस प्रोग्राम में दाखिला पाना अमेरिका की प्रसिद्ध हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में एडमिशन मिलने से 20 गुना ज्यादा कठिन है।

एक दिन में ₹76.99 करोड़ की कमाई का सच

जब इंटरव्यूअर विराज अला ने सिद्धार्थ से पूछा कि उन्होंने एक साल में अधिकतम कितनी कमाई की है, तो सिद्धार्थ ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि उन्होंने एक ही दिन में 8 मिलियन डॉलर (लगभग 76.99 करोड़ रुपये) कमाए हैं। इस पर जब उनसे पूछा गया कि क्या इसका मतलब यह है कि वह रातों-रात करोड़पति बन गए, तो उन्होंने कहा कि हां, कुछ ऐसा ही कह सकते हैं। उन्होंने महज 26 साल की उम्र में यह मुकाम हासिल कर लिया था। सिद्धार्थ ने बताया कि जब वह 16 साल के थे तब उन्होंने अपने भविष्य में इस तरह की सफलता की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं की थी।

कैसा रहा है सिद्धार्थ का करियर और बिजनेस?

आईआईटी कानपुर से 2019 में पास आउट होने के बाद सिद्धार्थ ने मशीन लर्निंग इंजीनियर के रूप में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ काम किया। उनके करियर के सफर में Envestnet, Yodlee, Wadhwani AI जैसी कंपनियों और एल्टो यूनिवर्सिटी, जूमियो कॉर्पोरेशन जैसे संस्थान रहे।

Merlin और Thine के को-फाउंडर

नौकरी के बाद सिद्धार्थ ने एंटरप्रेन्योरशिप की राह चुनी। साल 2022 में सिद्धार्थ ने अपने आईआईटी कानपुर के बैचमेट्स प्रत्यूष राय और शीर्षेंदु सरकार के साथ मिलकर Merlin नाम की एक एआई-पावर्ड क्रोम एक्सटेंशन कंपनी की सह-स्थापना की। रिपोर्ट्स के मुताबिक आज इस कंपनी की वैल्यूएशन लगभग 50 मिलियन डॉलर (करीब 418 करोड़ रुपये से अधिक) है। इसके अलावा सिद्धार्थ एक दूसरे स्टार्टअप Thine के भी को-फाउंडर हैं।

स्टार्टअप्स को लेकर क्या है उनकी सोच?

स्टार्टअप और बिजनेस को लेकर सिद्धार्थ का मानना है कि भारत में सीमित संसाधनों की वजह से बहुत से लोग स्कार्सिटी माइंडसेट (कमी की सोच/सुरक्षित चलने की मानसिकता) के साथ बड़े होते हैं। उनका कहना है कि सफल उद्यमी बनने के लिए इस मानसिकता को बदलकर अबंडेंस माइंडसेट (प्रचुरता की सोच) अपनाना बेहद जरूरी है, जहां लोग खुलकर जोखिम लेने और नए अवसरों की तलाश करने के लिए तैयार रहें।

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सिद्धार्थ ने दोनों देशों के वर्क-कल्चर की तुलना करते हुए कहा कि अमेरिका में लोग अक्सर काम को इसलिए चुनते हैं क्योंकि वे उसे पसंद करते हैं जबकि भारत में कई बार लोग मजबूरी या जरूरत की वजह से काम करते हैं।

E20 Petrol: एथेनॉल वाले पेट्रोल से इंजन खराब होता है या नहीं? IIT कानपुर की रिसर्च ने दिया बड़ा जवाब

E20 Petrol Row: देश भर में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल (E20) के रोलआउट को लेकर वाहन मालिकों के मन में कई तरह की चिंताएं और सवाल हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या एथेनॉल वाले पेट्रोल से गाड़ी का इंजन खराब हो जाता है? इस मामले पर चल रही तमाम बहसों और आशंकाओं के बीच देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी कानपुर के रिसर्चर ने एक बड़ा और राहत देने वाला दावा किया है।

संस्थान के शोधकर्ताओं का कहना है कि उनकी स्टडी में E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहनों के माइलेज में कोई खास गिरावट नहीं पाई गई है। इस बात के भी कोई सबूत नहीं मिले हैं कि E20 फ्यूल मौजूदा या पुरानी गाड़ियों के इंजन को किसी भी तरह का नुकसान पहुंचाता है।

माइलेज पर क्या होता है असर? IIT कानपुर की रिसर्च

आपको बता दें कि हाल ही में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि E20 फ्यूल के इस्तेमाल से कुछ वाहनों में माइलेज 5 प्रतिशत तक कम हो सकता है। हालांकि इसके फायदे इस मामूली नुकसान से कहीं अधिक हैं। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक इस पर आईआईटी कानपुर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के इंजन रिसर्च लेबोरेटरी के प्रोजेक्ट साइंटिस्ट ध्रुव राज कराना ने बताया है कि आईआईटी कानपुर में की गई रिसर्च के मुताबित E20 फ्यूल के इस्तेमाल से माइलेज में होने वाली कमी वास्तव में 5 प्रतिशत से भी कम है।

ध्रुव राज कराना ने स्पष्ट किया कि माइलेज में आने वाली 5 प्रतिशत तक की यह कमी फ्यूल के अलावा दूसरी वजहों से भी हो सकती है। अगर सामान्य या शुद्ध पेट्रोल के साथ भी लगातार दो बार बैक टू बैक टेस्ट किए जाएं तब भी इस तरह के परिणाम आ सकते हैं।

माइलेज कम होने की असली वजह: IIT की स्टडी के मुताबिक माइलेज में होने वाला कोई भी बदलाव फ्यूल से ज्यादा ड्राइवर की ड्राइविंग के तरीके, सड़क की स्थिति और गाड़ी के मेंटनेंस पर निर्भर करता है।

क्या सच में खराब होता है इंजन?

प्रोजेक्ट साइंटिस्ट ध्रुव राज कराना ने बताया कि काफी डिटेल्ड और एक्सटेंसिव टेस्टिंग से यह साबित हुआ है कि E20 फ्यूल के इस्तेमाल से इंजन को कोई नुकसान, जंग या अन्य तकनीकी समस्याएं नहीं होती हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रही उन खबरों को पूरी तरह से खारिज कर दिया जिनमें दावा किया जा रहा है कि E20 पेट्रोल से गाड़ियां खराब हो रही हैं।

कराना ने इन दावों को वैज्ञानिक रूप से निराधार बताया और गाड़ी चलाने वालों को सलाह दी कि वे इंटरनेट पर बिना किसी वेरिफिकेशन के साझा की जाने वाली पोस्ट पर भरोसा करने के बजाय अपनी गाड़ी के मैनुफैक्चरर के मैनुअल और पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के दिशानिर्देशों का पालन करें।

E85 फ्यूल का भी हो चुका है सफल परीक्षण

आईआईटी कानपुर की यह रिसर्च प्रोफेसर अविनाश कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में चल रही है। वो इस इंजन रिसर्च लेबोरेटरी के प्रमुख हैं। उनकी टीम लंबे समय से एथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल पर व्यापक शोध कर रही है। टीम ने E85 फ्यूल (जिसमें 85 प्रतिशत एथेनॉल होता है) का भी सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। हालांकि ध्रुव राज कराना ने यह भी स्पष्ट किया कि इतने उच्च स्तर के मिश्रण के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए इंजनों और उनके अनुकूल ईंधन प्रणालियों की जरूरत होती है।

मंत्रालय ने कहा- ‘यह अधिक स्वच्छ और बेहतर फ्यूल है’

एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल कार्यक्रम को लेकर हो रही आलोचनाओं का जवाब देने के लिए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने हाल ही में एक विस्तृत Q&A डॉक्युमेंट जारी किया था। मंत्रालय के मुताबिक E20 पेट्रोल, E10 या शुद्ध पेट्रोल की तुलना में अधिक स्वच्छ, उच्च गुणवत्ता वाला और अधिक कुशल ईंधन है। सरकार ने इसे देश में लागू करने से पहले वर्षों तक वैज्ञानिक परीक्षण किए हैं, वाहन निर्माताओं के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया है और देश के भीतर एथेनॉल के उत्पादन को बढ़ाया है। इससे कार्बन उत्सर्जन काफी कम होता है, जो पर्यावरण के लिए बेहद फायदेमंद है।

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