E20 Fuel: क्या E20 पेट्रोल से इंजन खराब हुआ तो मिलेगा इंश्योरेंस क्लेम? समझिए नियम और एक्सपर्ट्स की राय

Motor Insurance Policy on E20 Fuel: भारत में 1 अप्रैल से E20 पेट्रोल यानी पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाया हुआ पेट्रोल स्टैंडर्ड फ्यूल बन चुका है। इसके बाद से ही पुरानी पेट्रोल गाड़ियों के मालिकों के मन में एक बड़ा सवाल उठ रहा है कि, अगर E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से गाड़ी का इंजन या फ्यूल सिस्टम खराब होता है, तो क्या कॉम्प्रिहेंसिव मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी में इसका क्लेम मिलेगा?

इस मुद्दे पर सरकार, इंश्योरेंस कंपनियों और ऑटोमोटिव एक्सपर्ट्स का रुख बिल्कुल साफ है। आइए आपको बताते हैं कि E20 पेट्रोल और कार इंश्योरेंस से जुड़े नियम क्या कहते हैं।

क्या केवल E20 फ्यूल इस्तेमाल करने से इंश्योरेंस रद्द हो जाता है?

बिल्कुल नहीं, सरकार और इंश्योरेंस कंपनियों ने साफ कर दिया है कि गाड़ी में E20 पेट्रोल का इस्तेमाल करने से आपकी इंश्योरेंस पॉलिसी रद्द नहीं होती। आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस ने विवाद के बाद साफ किया कि, ‘गाड़ी में E20 फ्यूल का इस्तेमाल करने से पॉलिसी अमान्य नहीं होती। क्लेम इस बात पर निर्भर करता है कि दुर्घटना या चोरी जैसी बीमित घटना हुई है या नहीं। पुरानी गाड़ियों में E20 के इस्तेमाल को लापरवाही नहीं माना जाएगा।’

पॉलिसीबाजार के मोटर इंश्योरेंस बिजनेस हेड पारस पसरीचा (Paras Pasricha) के मुताबिक, केवल E20 फ्यूल के इस्तेमाल से क्लेम रिजेक्ट नहीं होता। क्लेम इस बात पर तय होता है कि नुकसान की असली वजह क्या है।

क्या E20 से इंजन खराब होने पर क्लेम मिलेगा?

यहीं पर बीमा के नियमों का अंतर समझना जरूरी है:

क्या E20 से इंजन खराब होने पर क्लेम मिलेगा?

पारस पसरीचा के अनुसार, ‘अगर सर्वेयर की जांच में यह साबित होता है कि इंजन या फ्यूल सिस्टम का नुकसान सिर्फ और सिर्फ ऐसे फ्यूल (E20) का इस्तेमाल करने से हुआ है जो वाहन निर्माता द्वारा अनुशंसित नहीं था, तो इसे स्टैंडर्ड पॉलिसी के तहत मैकेनिकल ब्रेकडाउन या कन्सिक्वेंशियल डैमेज माना जाएगा। इस स्थिति में क्लासिकल कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी में क्लेम मिलना मुश्किल होगा।’

किस बात पर फंस रहा पेंच?

ICICI Lombard का ब्लॉग पोस्ट: जून 2026 में ICICI लोम्बार्ड के एक ब्लॉग में कहा गया था कि पुरानी गैर-E20 कंपैटिबल गाड़ियों में E20 फ्यूल से हुए नुकसान को लापरवाही के दायरे में देखा जा सकता है। हालांकि, विवाद बढ़ता देख कंपनी ने तुरंत स्पष्टीकरण जारी कर स्थिति साफ की। अप्रैल 2023 के बाद बनी सभी BS6 Phase-2 गाड़ियां पूरी तरह से E20 फ्यूल फ्रेंडली हैं और उनमें ऐसी कोई समस्या नहीं आती।

सरकार और इंडस्ट्री का क्या रुख है?

सरकार और एथेनॉल इंडस्ट्री ने E20 से बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने के दावों को पूरी तरह से खारिज किया है। संसद में केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने लोकसभा में लिखित जवाब में कहा कि सरकार को वाहन निर्माताओं या कंज्यूमर ग्रुप्स से E20 के कारण माइलेज घटने या इंजन/टैंक खराब होने की कोई आधिकारिक शिकायत नहीं मिली है।

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि इंश्योरेंस कंपनियों ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है और सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक खबरों पर ध्यान न दें।

सरकार के मुताबिक पिछले 2.5 सालों से देश में 20 करोड़ से ज्यादा टू-व्हीलर्स और 3 करोड़ कारें एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल पर बिना किसी परेशानी के चल रही हैं।

भारत इंडिपेंडेंट एथेनॉल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (BIEPA) के जॉइंट वाइस प्रेसिडेंट अक्षय मोदी ने कहा कि सोशल मीडिया पर चल रहा कैंपेन सिर्फ भ्रामक जानकारी पर आधारित है और एथेनॉल ब्लेंडिंग पूरी तरह से वैज्ञानिक जांच और OEM अप्रूवल के बाद ही लागू की गई है।

कार मालिकों के लिए निष्कर्ष और काम की सलाह

आपकी कार का इंश्योरेंस E20 पेट्रोल डालने से रद्द नहीं होता है, दुर्घटना या चोरी की स्थिति में क्लेम पहले की तरह ही मिलेगा। अगर E20 के कारण फ्यूल पाइप, इंजेक्टर या जंग लगने से मैकेनिकल ब्रेकडाउन होता है, तो सामान्य इंश्योरेंस इसे कवर नहीं करेगा। इसके लिए आपके पास Engine Protect Add-on या Extended Warranty होना जरूरी है। आप अपनी गाड़ी के यूजर मैनुअल में फ्यूल कंपैटिबिलिटी जरूर जांच लें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

E20 Petrol: एथेनॉल वाले पेट्रोल से इंजन खराब होता है या नहीं? IIT कानपुर की रिसर्च ने दिया बड़ा जवाब

E20 Petrol Row: देश भर में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल (E20) के रोलआउट को लेकर वाहन मालिकों के मन में कई तरह की चिंताएं और सवाल हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या एथेनॉल वाले पेट्रोल से गाड़ी का इंजन खराब हो जाता है? इस मामले पर चल रही तमाम बहसों और आशंकाओं के बीच देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी कानपुर के रिसर्चर ने एक बड़ा और राहत देने वाला दावा किया है।

संस्थान के शोधकर्ताओं का कहना है कि उनकी स्टडी में E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहनों के माइलेज में कोई खास गिरावट नहीं पाई गई है। इस बात के भी कोई सबूत नहीं मिले हैं कि E20 फ्यूल मौजूदा या पुरानी गाड़ियों के इंजन को किसी भी तरह का नुकसान पहुंचाता है।

माइलेज पर क्या होता है असर? IIT कानपुर की रिसर्च

आपको बता दें कि हाल ही में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि E20 फ्यूल के इस्तेमाल से कुछ वाहनों में माइलेज 5 प्रतिशत तक कम हो सकता है। हालांकि इसके फायदे इस मामूली नुकसान से कहीं अधिक हैं। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक इस पर आईआईटी कानपुर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के इंजन रिसर्च लेबोरेटरी के प्रोजेक्ट साइंटिस्ट ध्रुव राज कराना ने बताया है कि आईआईटी कानपुर में की गई रिसर्च के मुताबित E20 फ्यूल के इस्तेमाल से माइलेज में होने वाली कमी वास्तव में 5 प्रतिशत से भी कम है।

ध्रुव राज कराना ने स्पष्ट किया कि माइलेज में आने वाली 5 प्रतिशत तक की यह कमी फ्यूल के अलावा दूसरी वजहों से भी हो सकती है। अगर सामान्य या शुद्ध पेट्रोल के साथ भी लगातार दो बार बैक टू बैक टेस्ट किए जाएं तब भी इस तरह के परिणाम आ सकते हैं।

माइलेज कम होने की असली वजह: IIT की स्टडी के मुताबिक माइलेज में होने वाला कोई भी बदलाव फ्यूल से ज्यादा ड्राइवर की ड्राइविंग के तरीके, सड़क की स्थिति और गाड़ी के मेंटनेंस पर निर्भर करता है।

क्या सच में खराब होता है इंजन?

प्रोजेक्ट साइंटिस्ट ध्रुव राज कराना ने बताया कि काफी डिटेल्ड और एक्सटेंसिव टेस्टिंग से यह साबित हुआ है कि E20 फ्यूल के इस्तेमाल से इंजन को कोई नुकसान, जंग या अन्य तकनीकी समस्याएं नहीं होती हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रही उन खबरों को पूरी तरह से खारिज कर दिया जिनमें दावा किया जा रहा है कि E20 पेट्रोल से गाड़ियां खराब हो रही हैं।

कराना ने इन दावों को वैज्ञानिक रूप से निराधार बताया और गाड़ी चलाने वालों को सलाह दी कि वे इंटरनेट पर बिना किसी वेरिफिकेशन के साझा की जाने वाली पोस्ट पर भरोसा करने के बजाय अपनी गाड़ी के मैनुफैक्चरर के मैनुअल और पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के दिशानिर्देशों का पालन करें।

E85 फ्यूल का भी हो चुका है सफल परीक्षण

आईआईटी कानपुर की यह रिसर्च प्रोफेसर अविनाश कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में चल रही है। वो इस इंजन रिसर्च लेबोरेटरी के प्रमुख हैं। उनकी टीम लंबे समय से एथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल पर व्यापक शोध कर रही है। टीम ने E85 फ्यूल (जिसमें 85 प्रतिशत एथेनॉल होता है) का भी सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। हालांकि ध्रुव राज कराना ने यह भी स्पष्ट किया कि इतने उच्च स्तर के मिश्रण के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए इंजनों और उनके अनुकूल ईंधन प्रणालियों की जरूरत होती है।

मंत्रालय ने कहा- ‘यह अधिक स्वच्छ और बेहतर फ्यूल है’

एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल कार्यक्रम को लेकर हो रही आलोचनाओं का जवाब देने के लिए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने हाल ही में एक विस्तृत Q&A डॉक्युमेंट जारी किया था। मंत्रालय के मुताबिक E20 पेट्रोल, E10 या शुद्ध पेट्रोल की तुलना में अधिक स्वच्छ, उच्च गुणवत्ता वाला और अधिक कुशल ईंधन है। सरकार ने इसे देश में लागू करने से पहले वर्षों तक वैज्ञानिक परीक्षण किए हैं, वाहन निर्माताओं के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया है और देश के भीतर एथेनॉल के उत्पादन को बढ़ाया है। इससे कार्बन उत्सर्जन काफी कम होता है, जो पर्यावरण के लिए बेहद फायदेमंद है।

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E25 Petrol: सरकार E25 पेट्रोल लॉन्च करने से पहले सतर्क, इंजन और माइलेज पर असर की हो रही जांच

E25 Petrol: E25 पेट्रोल यानी 75% पेट्रोल और 25% एथेनॉल के मिश्रण को लागू करने की दिशा में सरकार धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है। हालांकि, अंतिम फैसला लेने से पहले सरकार ऑटो कंपनियों, ऑयल कंपनियों और दूसरे संबंधित पक्षों से सलाह ले रही है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेना चाहती।

पहले E20 का असर समझना चाहती है सरकार

सरकार फिलहाल यह जांच रही है कि E20 पेट्रोल का गाड़ियों के इंजन, दूसरे पुर्जों और माइलेज पर क्या असर पड़ा है। इन सभी पहलुओं की समीक्षा के बाद ही E25 को मंजूरी देने पर फैसला लिया जाएगा।

एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि सरकार इस दिशा में ‘सोच-समझकर’ आगे बढ़ना चाहती है। इंडस्ट्री से भी इसी तरह की राय मिली है।

ऑयल कंपनियां तैयार, मंजूरी का इंतजार

सरकारी ऑयल रिफाइनिंग कंपनियां E25 पेट्रोल की सप्लाई के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर चुकी हैं। अब उन्हें सिर्फ सरकार की मंजूरी का इंतजार है।

एक सरकारी रिफाइनरी के अधिकारी ने बताया कि मंजूरी मिलते ही E25 की सप्लाई शुरू की जा सकती है। हालांकि, सरकार की अनुमति के बिना इसे बाजार में नहीं उतारा जाएगा।

E20 का लक्ष्य समय से पहले पूरा

भारत ने एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) प्रोग्राम के तहत पूरे देश में E20 पेट्रोल उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय समय से 5 साल पहले हासिल कर लिया है। पहले यह लक्ष्य 2030 तक पूरा होना था।

सरकार ने पहले ही शुरू कर दी तैयारी

सरकार ने E20 से आगे बढ़ने की तैयारी भी शुरू कर दी है। मई में E22, E25, E27 और E30 पेट्रोल के लिए नए भारतीय मानक (Indian Standards) जारी किए गए थे।

इसके बाद जून में सरकार ने इन नए एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल्स पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में छूट भी दे दी। माना जा रहा है कि ये कदम भविष्य में E25 लागू करने की तैयारी का हिस्सा हैं। हालांकि, सरकार ने अभी तक E25 की लॉन्चिंग की कोई तारीख घोषित नहीं की है।

E20 को लेकर क्यों उठे सवाल?

हाल के दिनों में E20 पेट्रोल को लेकर बहस तेज हुई है। पिछले हफ्ते एक अदालत की सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कथित तौर पर E20 को ‘एक्सपेरिमेंट’ बताया था। उनका कहना था कि इसका पूरा असर अगले एक साल में साफ हो पाएगा।

वहीं, केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने E20 को लेकर फैल रही अफवाहों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि E20 से इंजन खराब होने या कीड़े लगने जैसी बातें वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। लोगों को अफवाहों के बजाय वैज्ञानिक प्रमाणों पर भरोसा करना चाहिए।

E25 के लिए गाड़ियों में बदलाव पड़ सकता है

इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि E25 जैसे ज्यादा एथेनॉल वाले ईंधन के लिए ऑटो कंपनियों को इंजन की ट्यूनिंग, फ्यूल सिस्टम और दूसरे पुर्जों में बदलाव करने पड़ सकते हैं।

Grain Ethanol Manufacturers Association के अध्यक्ष सीके जैन के मुताबिक, E20 पेट्रोल से आमतौर पर 3% से 7% तक माइलेज कम हो सकता है। हालांकि, आधुनिक इंजन बेहतर दहन तकनीक और इंजन मैनेजमेंट सिस्टम की मदद से इस असर को काफी हद तक कम कर देते हैं।

उन्होंने कहा कि एथेनॉल का ऑक्टेन नंबर ज्यादा होता है। इससे ईंधन बेहतर तरीके से जलता है। कार्बन मोनोऑक्साइड और कुछ अन्य प्रदूषक गैसों का उत्सर्जन भी कम होता है।

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