छत पर सोलर पैनल लगते ही जीरो हुआ बिजली बिल! जानिए बिहार की उमा और रीना की पूरी स्टोरी

बिजली बिल डराने के बजाय राहत देने लगे, तो इससे बेहतर क्या होगा! बिहार में सौर ऊर्जा की बढ़ती पहुंच के बीच समस्तीपुर की उमा कुमारी और पूर्णिया की रीना कुमारी की कहानी कुछ ऐसी ही है। दोनों ने अपने घरों की छत पर सोलर पैनल लगवाए और अब बिजली बिल में बड़ी राहत का लाभ उठा रही हैं। उमा को केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से आर्थिक मदद मिली, तो रीना का कहना है कि सोलर प्लांट लगने के बाद उनका दो हजार रुपये तक पहुंचने वाला बिजली बिल अब शून्य आ रहा है।

छत पर सोलर, घर में बचत की रोशनी

बिजली की बढ़ती जरूरतों के बीच रूफटॉप सोलर आम परिवारों के लिए बचत का एक ऑप्शन बनकर उभर रहा है। केंद्र सरकार की पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का उद्देश्य घरों की छतों पर सोलर प्लांट लगाकर परिवारों को बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बनाना है। इस योजना के तहत पात्र परिवारों को हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली का लाभ मिल सकता है। वहीं, सोलर प्लांट लगवाने के लिए निर्धारित मानकों के अनुसार सरकारी सब्सिडी भी दी जाती है।

योजना के तहत एक किलोवाट क्षमता के सोलर प्लांट पर 30 हजार रुपये, दो किलोवाट पर 60 हजार रुपये और तीन किलोवाट या उससे अधिक क्षमता के प्लांट पर अधिकतम 78 हजार रुपये की केंद्रीय सब्सिडी का प्रावधान है। नेट मीटरिंग की सुविधा से अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजने का विकल्प भी मिल सकता है।

समस्तीपुर की उमा ने लगवाया तीन किलोवाट का सोलर प्लांट

समस्तीपुर के आजाद नगर, मोहनपुर रोड की रहने वाली उमा कुमारी ने अपने घर की छत पर तीन किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट लगवाया है। उन्होंने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया में बिजली विभाग से सहयोग मिला और प्लांट भी जल्द स्थापित हो गया। सबसे खास बात यह रही कि उन्हें सोलर प्लांट लगने के करीब 15 दिन बाद ही सब्सिडी की राशि मिल गई।

उमा कुमारी बताती हैं कि सोलर पैनल लगवाने के बाद उन्हें काफी संतुष्टि मिली। सब्सिडी की रकम समय पर खाते में आने से उनका भरोसा भी बढ़ा। उनके लिए यह सिर्फ छत पर सोलर पैनल लगवाने का फैसला नहीं था, बल्कि बिजली खर्च को कम करने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम था।

बिहार सरकार ने दिया अलग से सब्सिडी

उमा की मानें तो पहले उन्हें बिजली बिल में 240 रुपये का फिक्स चार्ज देना पड़ता था। लेकिन मुख्यमंत्री की ओर से 125 यूनिट मुफ्त बिजली देने की घोषणा के बाद उनका बिजली बिल शून्य आने लगा। उन्होंने बताया कि इसके बाद उन्हें मुख्यमंत्री बिजली योजना के तहत 20 हजार रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी मिलने की जानकारी मिली और यह राशि भी उन्हें प्राप्त हो गई।

उमा कहती हैं कि सोलर प्लांट पर सब्सिडी मिलने और बिजली बिल शून्य होने से उन्हें काफी खुशी हुई। उनके अनुभव में सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने से घर के बिजली खर्च को लेकर बड़ी राहत मिली है।

पूर्णिया की रीना का भी बिजली बिल शून्य

पूर्णिया की रीना कुमारी की कहानी भी घरेलू बिजली खर्च में राहत की मिसाल है। सोलर पैनल लगवाने से पहले रीना के घर का बिजली बिल हर महीने करीब 1,500 से 2,000 रुपये तक आता था। अब उनके मुताबिक, बिजली बिल शून्य आ रहा है।

रीना बताती हैं कि सोलर प्लांट लगने के बाद उनके घर में सभी बिजली उपकरण चल रहे हैं। उन्हें सोलर प्लांट पर कुल 98 हजार रुपये की सब्सिडी मिली है। उनके लिए यह बदलाव आर्थिक बचत के साथ-साथ बिजली की जरूरतों को पूरा करने में मददगार साबित हुआ है। साथ ही रूफटॉप गार्डन को भी छाया मिल गया।

क्या आपके घर की छत भी बन सकती है बचत का जरिया?

उमा और रीना के अनुभव बताते हैं कि रूफटॉप सोलर सही क्षमता और योजना के तहत लगाया जाए, तो घरेलू बिजली खर्च कम करने में मदद कर सकता है। सोलर पैनल लगवाने की योजना बना रहे परिवारों को आवेदन से पहले आधिकारिक योजना पोर्टल पर पात्रता, सब्सिडी, पंजीकृत विक्रेता और इंस्टॉलेशन से जुड़ी शर्तों की जानकारी लेनी चाहिए। इस तरह आपके घर की छत भी खर्च बचाने का जरिया बन सकता है।

बिहार से सच्चिदानंद की रिपोर्ट

Urmi Sinha IPS Story: मुंगेर की बेटी बनी देश की पहली सबसे कम उम्र की IPS, महज 21 साल की उम्र में यूपीएससी क्रैक कर रचा इतिहास

Urmi Sinha IPS Story: मुंगेर की बेटी बनी देश की पहली सबसे कम उम्र की IPS, महज 21 साल की उम्र में यूपीएससी क्रैक कर रचा इतिहास

Urmi Sinha IPS Story: बिहार के मुंगेर जिले से ताल्लुक रखने वाली उर्मी सिन्हा ने शायद खुद भी कभी नहीं सोचा होगा कि एक दिन पूरा देश उनका नाम सम्मान के साथ लेगा। लेकिन उनके बुलंद इरादों और सही दिशा में की गई मेहनत ने इस उपलब्धि को उनकी तरफ मोड़ दिया। उर्मी ने महज 21 साल की उम्र में देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा पास की। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने लिए आईपीएस सेवा चुनकर सबसे कम उम्र की अधिकारी बनने का खिताब अपने नाम कर लिया।

तेलंगाना स्थित हैदराबाद की सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (SVPNPA) में 17 अक्टूबर 2026 को पासिंग आउट परेड में 135 IPS अधिकारियों देश की पुलिस सेवा में शामिल हुए। इसमें उर्मी सिन्हा अपने बैच की सबसे कम उम्र की अधिकारी बनकर उभरी हैं। उर्मी ने प्रतिष्ठित संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया 170वीं रैंक हासिल की। उनकी आईपीएस ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है। अब वह बतौर आईपीएस आंध्र प्रदेश कैडर में अपनी सेवाएं देने के लिए तैयार हैं।

बिहार से है उर्मी सिन्हा का गहरा नाता

आईपीएस उर्मी सिन्हा का देश के पूर्वी राज्यों बिहार और पश्चिम बंगाल से गहरा नाता है। बिहार के मुंगेर जिले के हवेली खड़गपुर स्थित मारवाड़ी टोला से जुड़ी उर्मी के पिता डॉ. रंजीत सिन्हा हावड़ा के प्रसिद्ध बाल रोग विशेषज्ञ हैं और मां कुशल गृहिणी हैं। उनका परिवार पश्चिम बंगाल के हावड़ा में बस गया था, जहां उनकी शुरुआती पढ़ाई पूरी हुई। इसके बाद उन्होंने कोलकाता के सेंट जेवियर्स कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में बीए की डिग्री हासिल की। ग्रेजुएशन पूरी होने के साथ ही उर्मी ने यूपीएससी सीएसई की तैयारी शुरू कर दी थी।

घर पर रह कर पूरी की यूपीएससी की तैयारी

उर्मी सिन्हा ने यूपीएससी की तैयारी अपने घर पर रहकर करने का फैसला किया। उन्होंने 2023 में ग्रेजुएशन के बाद ऑनलाइन स्टडी मटीरियल, मेंटर्स के सही गाइडेंस और खुद के बनाए स्टडी प्लान पर भरोसा किया। उन्होंने प्रीलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू, तीनों चरण एक ही बार में पार कर लिए। UPSC CSE 2024 में AIR 170 हासिल कर उन्होंने अपना और अपने परिवार का नाम रोशन किया।

17 अक्टूबर को पासिंग आउट परेड में ली देश सेवा की शपथ

उर्मी 17 अक्टूबर 2026 को हैदराबाद के SVPNPA में 78वें नियमित बैच की पासिंग आउट परेड में शामिल थीं। इस बैच में 135 भारतीय आईपीएस अफसरों (37 महिला अधिकारी शामिल हैं) के अलावा नेपाल, भूटान और मालदीव के 16 विदेशी अधिकारी भी शामिल थे। इस बैच में 23 वर्षीय उर्मी सबसे युवा अधिकारी रहीं। पासिंग आउट परेड के बाद उर्मी सिन्हा अपने आवंटित आंध्र प्रदेश कैडर में तैनात होंगी और ट्रेनी आईपीएस अधिकारी पुलिस प्रशासन, कानून-व्यवस्था और फील्ड पुलिसिंग की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग हासिल करेंगी।

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Barda Wildlife Sanctuary: गुजरात की इस वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में फिर सुनाई देने लगी है शेरों की दहाड़, 144 साल बाद बर्दा बना 17 एशियाटिक शेरों का घर

Barda Wildlife Sanctuary: गुजरात में गिर के जंगलों में एशियाई शेरों की आबादी अब सीमित नहीं रह गई है। इसी राज्य का एक और इलाका शेरों की आबादी की पसंदीदा ठिकाना बनकर उभर रहा है। हाल की रिपोर्ट्स के मुताबिक, बर्दा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में लगभग 144 सालों से गायब एशियाई शेरों की दहाड़ फिर से सुनाई देने लगी है। यह जंगल अब 17 एशियाई शेरों का घर है।

PLOS One जर्नल में छपी एक स्टडी में पाया गया है कि बर्दा में सही रहने की जगह, पर्याप्त शिकार और ऐसे माहौल के हालात हैं जो लंबे समय तक शेरों की आबादी को सहारा दे सकते हैं। ये नतीजे गिर के अलावा एशियाई शेरों के लिए इस सैंक्चुअरी को दूसरे घर के तौर पर तैयार करने लिए पर्याप्त बता रहे हैं। इससे एशियाई शेरों आबादी को एक ही जगह इकट्ठा करने से जुड़े खतरों को कम करने में मदद मिलेगी।

एशियाई शेर कैसे लौटे बर्दा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी

‘बियॉन्ड गिर: बर्दा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी एज ए पोटेंशियल स्ट्रॉन्गहोल्ड फॉर एशियन लायंस’ नाम की इस स्टडी में जानवरों की जांच की गई। शोधकर्ताओं ने छह शेरों, एक नर और पांच मादा को GPS कॉलर लगाए, और जनवरी 2023 और जुलाई 2025 के बीच 169,000 से अधिक लोकेशन पॉइंट रिकॉर्ड किए। आंकड़ों से पता चला कि जानवर बर्दा के जंगलों और घास के मैदानों का इस्तेमाल कर रहे थे और सैंक्चुअरी के अंदर अपना क्षेत्र बना रहे थे।

शेरों की वापसी में प्राकृतिक फैलाव और एक योजनाबद्ध संरक्षण कोशिश, दोनों शामिल थे। एक नर शेर गिर के दक्षिण-पश्चिमी हिस्सों से बर्दा में आया। गुजरात फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने बाद में आबादी बनाने में मदद के लिए पांच मादा शेरों को दाखिल किया।

राज्य सरकार ने दशकों पहले बर्दा को एक संभावित वैकल्पिक हैबिटैट के तौर पर पहचाना था। 1979 में, जिस साल सैंक्चुअरी को संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया था, उसने जंगल को एशियाई शेरों के लिए एक और घर के तौर पर विकसित करने के लिए गिर-बर्दा प्रोजेक्ट शुरू किया।

जंगली सूअर बने शेरों के भोजन का 55% हिस्सा

शेरों की आबादी के पनपने का एक अहम फैक्टर है शिकार की उपलब्धता। इससे तय होता है कि कोई हैबिटैट एक बड़ी शिकारी आबादी को बनाए रख सकता है या नहीं। बार्दा स्टडी में पाया गया कि जंगली सूअरों का रिकॉर्डेड डाइट में 55% हिस्सा था, जबकि पालतू मवेशियों का 17% हिस्सा था।

नतीजे इस बात पर जोर देते हैं कि जैसे-जैसे शेरों की संख्या बढ़ रही है, जंगली शिकार की आबादी को बचाना कितना जरूरी है। एक हैबिटैट उन्हें छिपने और रहने की जगह दे सकता है, लेकिन जानवरों के लंबे समय तक जिदा रहने के लिए एक टिकाऊ फूड सप्लाई भी उतनी ही जरूरी है।

एशियाई शेरों के संरक्षण के लिए बार्दा क्यों जरूरी है?

एशियाई शेर ज्यादातर गुजरात में पाए जाते हैं, और गिर उनका मुख्य गढ़ है। एक और रहने लायक आबादी बनाने से उन खतरों को कम करने में मदद मिल सकती है जो इतनी सारी प्रजातियों के एक ही इलाके में जमा होने से आते हैं। बार्दा गिर से फैलने वाले शेरों के लिए पॉपुलेशन बफर का भी काम कर सकता है। गुजरात के जंगल और एनवायरनमेंट मिनिस्टर अर्जुन मोढवाडिया ने छोटे हैबिटैट को बचाने और उनके बीच संपर्क बनाए रखने की अहमियत पर जोर दिया है, ताकि वाइल्डलाइफ लैंडस्केप में घूम सकें।

बर्दा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी कहां है?

बर्दा वाइल्डलाइफ़ सैंक्चुअरी गुजरात के सौराष्ट्र इलाके में, पोरबंदर और देवभूमि द्वारका जिलों के कुछ हिस्सों में है। यह 192.31 स्क्वायर किलोमीटर में फैला है और पोरबंदर शहर से लगभग 15 km दूर है। अपने बेहद छोटे आकार के बावजूद, यह सैंक्चुअरी बबूल, धव, रायन, बेर, जामुन, अमली और बांस सहित कई तरह के पेड़-पौधों का समर्थन करती है। यह गुग्गल जैसे औषधीय पौधों के साथ-साथ कई दुर्लभ पौधों की प्रजातियों का भी घर है। बड़े वाइल्डलाइफ समुदाय में तेंदुए, लकड़बग्घा और सियार के साथ-साथ सांभर, चीतल और चिंकारा जैसे हिरण भी शामिल हैं।

क्या टूरिस्ट बार्दा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी जा सकते हैं?

गुजरात के जंगलों और वाइल्डलाइफ में दिलचस्पी रखने वाले यात्रियों के लिए बार्दा एक विकल्प है। सफारी के मौके सुबह और दोपहर में मिल सकते हैं, लेकिन आगंतुकों को ट्रिप प्लान करने से पहले गुजरात वन विभाग से मौजूदा व्यवस्था और टाइमिंग कन्फर्म कर लेनी चाहिए।

UPSC CRT 2026: एनसीटी के शिक्षा विभाग में प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपल पद के लिए यूपीएससी सीआरटी पोस्टपोन, 828 पदों के लिए 9 जनवरी को होगी परीक्षा

UPSC CRT 2026: एनसीटी के शिक्षा विभाग में प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपल पद के लिए यूपीएससी सीआरटी पोस्टपोन, 828 पदों के लिए 9 जनवरी को होगी परीक्षा

UPSC CRT 2026: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCT) दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग में प्रिंसिपल और वाइस-प्रिंसिपल के पदों के लिए कंबाइंड रिक्रूटमेंट टेस्ट (CRT) को पोस्टपोन कर दिया है। यह परीक्षा पहले 1 नवंबर, 2026 को आयोजित की जानी थी। लेकिन 16 अक्टूबर, 2026 के एक करिजेंडम नोटिस के अनुसार, अब इस परीक्षा का आयोजन 9 जनवरी, 2027 को होगा।

यूपीएससी सीआरटी 2026 सुबह 9:30 बजे से 11:30 बजे तक सुबह के सत्र में होगी। इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए कुल 828 पदों पर नियुक्ति की जाएगी। बदला हुआ शेड्यूल प्रिंसिपल के 124 पदों और वाइस-प्रिंसिपल के 704 पदों पर भर्ती के लिए लागू होगा। के लिए के लिए भर्ती पर लागू होता है।

UPSC CRT 2026: पदों का विवरण

भर्ती प्रक्रिया में ये पद शामिल हैं :

प्रिंसिपल : एनसीटी दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग में 124 पद।

वाइस-प्रिंसिपल : एनसीटी दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग में 704 पद। इन पदों को विज्ञापन संख्या 51/2026 के तहत नोटिफाई किया गया था।

UPSC CRT 2026: संशोधित परीक्षा तारीख

इवेंट डिटेल्स

नियुक्ति करने वाली संस्था : यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन

परीक्षा : कंबाइंड रिक्रूटमेंट टेस्ट

पहले की परीक्षा तारीख : 1 नवंबर, 2026

संशोधित परीक्षा तारीख : 9 जनवरी, 2027

परीक्षा का समय : सुबह 9:30 बजे से 11:30 बजे तक

कुल पद 828

परीक्षार्थियों को आगे क्या करना चाहिए?

कैंडिडेट को संशोधित तारीख पर ध्यान देना चाहिए और नए कार्यक्रम के हिसाब से तैयारी करनी चाहिए। उन्हें भर्ती प्रक्रिया से जुड़े आगे के नोटिस और अपडेट के लिए संघ लोक सेवा आयोग की आधिकारिक वेबसाइट, upsc.gov.in भी चेक करनी चाहिए। करिजेंडम के अनुसार परीक्षा की तारीख 1 नवंबर, 2026 से बदलकर 9 जनवरी, 2027 कर दी गई है। नोटिस में भर्ती विवरण में किसी और बदलाव का जिक्र नहीं है।

प्रिंसिपल के पदों का वर्गों में बंटवारा

दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग में प्रिंसिपल के कुल 124 पदों पर भर्ती होनी है। इनमें सामान्य यानी अनारक्षित वर्ग के लिए 69 पद निर्धारित किए गए हैं। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 11 पद हैं। अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के उम्मीदवारों के लिए 18 रिक्तियां हैं। अनुसूचित जाति (SC) के लिए 16 पद और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए 10 पद निर्धारित हैं। इस तरह सभी श्रेणियों को मिलाकर प्रिंसिपल के कुल 124 पद हैं।

वाइस प्रिंसिपल के 704 पद 

यूपीएससी सीआरटी 2026 भर्ती में सबसे ज्यादा रिक्तियां वाइस प्रिंसिपल के पदों पर हैं। वाइस प्रिंसिपल के कुल 704 पदों में से सामान्य वर्ग के लिए 287 पद निर्धारित किए गए हैं। EWS वर्ग के लिए 71 रिक्तियां हैं। ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 189 पद रखे गए हैं। वहीं एससी वर्ग के लिए 103 और एसटी वर्ग के लिए 54 पद निर्धारित किए गए हैं। इन सभी श्रेणियों को मिलाकर वाइस प्रिंसिपल के कुल 704 पदों पर भर्ती की जाएगी।

कैसे होगा चयन?

इस भर्ती में उम्मीदवारों का चयन निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर किया जाएगा। यूपीएससी सीआरटी 2026 भर्ती परीक्षा के बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। इसके बाद दस्तावेज सत्यापन भी किया जाएगा। इस दौरान उम्मीदवारों के सभी जरूरी प्रमाणपत्रों की जांच की जाएगी। सभी निर्धारित चरण पूरे होने के बाद अंतिम चयन किया जाएगा।

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Bank Holiday: कल शनिवार को इस राज्य में बंद रहेंगे बैंक, जानिए RBI ने क्यों दी है 17 अक्टूबर की छुट्टी

Bank Holiday 17th October: अक्टूबर के महीने में त्योहारों का सिलसिला लगातार जारी है। त्योहारी सीजन के इस दौर में बैंक शाखाओं में कामकाज के लिए जाने से पहले आपको छुट्टियों की पूरी लिस्ट जरूर पता होनी चाहिए। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की बैंक हॉलिडे की ऑफिशियल लिस्ट के मुताबिक दुर्गा पूजा और महा सप्तमी जैसे पावन पर्वों के चलते देश के कुछ खास राज्यों में बैंक बंद रहने वाले हैं। अगर आपको इस सप्ताह या शनिवार-रविवार के दौरान बैंक शाखा में जाकर चेक क्लियरेंस, ड्राफ्ट बनवाने या दूसरे जरूरी फाइनेंशियल काम करने हैं तो घर से निकलने से पहले छुट्टियों का यह पूरा शेड्यूल चेक कर लें।

17 अक्टूबर को महा सप्तमी पर इस राज्य में बंद रहेंगे बैंक

आरबीआई की हॉलिडे लिस्ट के मुताबिक कल यानी 17 अक्टूबर को ‘महा सप्तमी’ के पावन अवसर पर अगरतला, त्रिपुरा में बैंक पूरी तरह बंद रहेंगे। हालांकि बैंक शाखाएं बंद रहने के बावजूद ग्राहकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए डिजिटल बैंकिंग सेवाएं हमेशा की तरह पूरी तरह सुचारू रहेंगी। बाकी भारत के लिए यह महीने का तीसरा शनिवार है और बैंक खुले रहेंगे।

इसके अगले दिन यानी 18 अक्टूबर को रविवार की साप्ताहिक छुट्टी के कारण पूरे देश में बैंक बंद रहेंगे। इसके तुरंत बाद अगले हफ्ते की शुरुआत में 19 और 20 अक्टूबर को महा अष्टमी, महा नवमी और विजयादशमी (दशहरा) के उपलक्ष्य में पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, ओडिशा, बिहार, झारखंड, असम, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश समेत देश के अधिकांश राज्यों में बैंक शाखाओं में कामकाज नहीं होगा।

अक्टूबर महीने में बैंक छुट्टियों की पूरी लिस्ट

अक्टूबर महीने के बचे हुए दिनों में विभिन्न त्योहारों और राष्ट्रीय छुट्टियों की वजह से बैंकों का शेड्यूल कुछ इस तरह रहेगा-

17 अक्टूबर: महा सप्तमी के अवसर पर त्रिपुरा राज्य में बैंक बंद रहेंगे।

18 अक्टूबर: रविवार की साप्ताहिक छुट्टी की वजह से पूरे देश में बैंक बंद रहेंगे।

19 अक्टूबर: महा अष्टमी और महा नवमी के उपलक्ष्य में पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में अवकाश रहेगा।

20 अक्टूबर: विजयादशमी (दशहरा) के पावन पर्व पर लगभग पूरे देश में बैंक बंद रहेंगे। (गंगटोक और इम्फाल को छोड़कर)।

21 अक्टूबर: दुर्गा पूजा / विजया दशमी- अगरतला, बेंगलुरु, गंगटोक, गुवाहाटी, कोच्चि, कोलकाता और तिरुवनंतपुरम।

22–23 अक्टूबर: दुर्गा पूजा / दसैन- सिर्फ गंगटोक (सिक्किम)।

24 अक्टूबर: महीने के चौथे शनिवार की साप्ताहिक छुट्टी के कारण देश भर में बैंक बंद रहेंगे।

25 अक्टूबर: रविवार का साप्ताहिक अवकाश होने के कारण पूरे देश में बैंक बंद रहेंगे।

26 अक्टूबर: महर्षि वाल्मीकि जयंती और लक्ष्मी पूजा के अवसर पर पंजाब, हरियाणा, कर्नाटक, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में बैंक अवकाश रहेगा।

29 अक्टूबर: करवा चौथ पर सिर्फ शिमला में लोकल छुट्टी।

31 अक्टूबर: सरदार वल्लभभाई पटेल जयंती और करवा चौथ के मौके पर गुजरात और हिमाचल प्रदेश सहित कुछ क्षेत्रों में बैंक बंद रहेंगे।

बैंक बंद रहने पर भी चालू रहेंगी डिजिटल और ऑनलाइन सेवाएं

छुट्टियों के दौरान बैंक शाखाएं बंद रहने से ग्राहकों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। बैंक की सभी डिजिटल और ऑनलाइन सेवाएं सामान्य रूप से काम करती रहेंगी। ग्राहक इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और यूपीआई के माध्यम से पैसों का लेन-देन कर सकेंगे। इसके अलावा कैश विड्रॉल और बैलेंस इंक्वायरी जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए देश भर के सभी एटीएम चौबीस घंटे काम करते रहेंगे।

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सौरव जोशी ने पत्नी अवंतिका को दिया ऐसा चैलेंज, वीडियो देख भड़के लोग, यूपीएससी टीचर ने भी लगाई फटकार

सोशल मीडिया पर मनोरंजन के लिए बनाया गया वीडियो कब विवाद की वजह बन जाए, कहा नहीं जा सकता। मशहूर यूट्यूबर सौरव जोशी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। उनके एक पारिवारिक वीडियो की क्लिप इंटरनेट पर चर्चा में है, जिसमें उनकी पत्नी अवंतिका भट्ट को ऐसा चैलेंज दिया गया कि कई दर्शक नाराज हो गए। मामला केवल साफ-सफाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोगों ने इसे रिश्तों में सम्मान से भी जोड़ दिया। इस बीच यूपीएससी शिक्षक अमित किल्होर ने भी सौरव के व्यवहार पर सवाल उठाए हैं।

आखिर वीडियो में क्या हुआ था?

वायरल क्लिप में सौरव जोशी अपने परिवार के सदस्यों पीयूष और साहिल के साथ सच या चुनौती वाला खेल खेलते नजर आते हैं। खेल के दौरान अवंतिका की बारी आती है और वह चुनौती चुनती हैं। इसके बाद सौरव उन्हें अपने पालतू कुत्ते ओरियो के पानी के बर्तन से पानी पीने को कहते हैं।

वीडियो में इस चुनौती को मजाकिया अंदाज में पेश किया जाता है। बातचीत के दौरान कहा जाता है कि उन्हें सिर्फ एक घूंट पीना है और पानी साफ है। हालांकि, कैमरे पर दिखाई देने वाला यह पल सोशल मीडिया पर पहुंचने के बाद कई लोगों को पसंद नहीं आया।

मजाक के नाम पर ऐसा चैलेंज क्यों?

क्लिप देखने के बाद कुछ लोगों ने पालतू जानवर के बर्तन से पानी पीने की चुनौती पर साफ-सफाई को लेकर चिंता जताई। वहीं, कुछ दर्शकों ने सवाल किया कि मनोरंजन के लिए अवंतिका को ऐसी स्थिति में डालने की जरूरत ही क्या थी।

लोगों की नाराजगी का एक कारण यह भी रहा कि किसी चुनौती को मजेदार बनाने के लिए दूसरे व्यक्ति को असहज करना कितना सही है। हालांकि, कुछ लोग इसे परिवार के बीच का सामान्य मजाक भी मान सकते हैं। इस तरह वीडियो को लेकर लोगों की प्रतिक्रियाएं अलग-अलग हैं।

अमित किल्होर ने सौरव जोशी के बारे में क्या कहा?

इस विवाद में यूपीएससी शिक्षक, मार्गदर्शक और रिजॉल्व आईएएस के संस्थापक अमित किल्होर की प्रतिक्रिया ने भी ध्यान खींचा। उन्होंने वीडियो में सौरव के व्यवहार की आलोचना करते हुए उन्हें महिलाओं के प्रति भेदभावपूर्ण सोच रखने वाला व्यक्ति बताया। उनकी इस टिप्पणी के बाद मामला और चर्चा में आ गया।

यह किल्होर की व्यक्तिगत राय है। वीडियो को लेकर उठे सवालों के बीच बहस अब इस बात पर भी है कि क्या यह महज एक मजाक था या इसमें पत्नी के प्रति असम्मान नजर आता है।

पारिवारिक वीडियो बनाने वालों के लिए क्या है सबक?

आज सोशल मीडिया पर परिवार के साथ बिताए गए छोटे-छोटे पल भी बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचते हैं। ऐसे में वीडियो बनाने वालों के लिए यह समझना जरूरी है कि जो बात उन्हें निजी तौर पर मजेदार लगती है, जरूरी नहीं कि दर्शक भी उसे उसी नजर से देखें।

सौरव जोशी के इस वीडियो ने मनोरंजन और व्यक्तिगत सम्मान के बीच की सीमा पर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल, कुछ लोग इसे जरूरत से ज्यादा तूल देना मान रहे हैं, जबकि दूसरे दर्शकों को यह चुनौती अनुचित लगी। यही वजह है कि एक छोटे से खेल का हिस्सा बनी क्लिप अब सोशल मीडिया पर बहस का विषय बन गई है।

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यूपीआई पर शुल्क लगाने का फैसला टला

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने यूपीआई के जरिए होने वाले डिजिटल लेन देन पर शुल्क लगाने का फैसला टाल दिया है। दो हजार रुपए से ज्यादा के लेनदेन पर 0.40 फीसदी शुल्क लगाने का फैसला 15 अक्टूबर से लागू होने वाला था। लेकिन देश भर में हो रहे विरोध की वजह से सरकार ने इस फैसले के अमल पर दिवाली तक रोक लगा दिया है। नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी एनपीसीआई ने त्योहारी सीजन को देखते हुए इसे टालने का फैसला लिया है।

एनपीसीआई ने कहा है कि इसे दिवाली के तुरंत बाद लगाया जाएगा, हालांकि अभी तारीख नहीं बताई है। गौरतलब है कि सरकार ने पिछले महीने फैसला किया था कि अगर ग्राहक दुकानदार को दो हजार रुपए से ज्यादा का यूपीआई पेमेंट करता है, तो दुकानदार को कुल रकम पर 0.4 फीसदी एमडीआर शुल्क देना होगा। हालांकि दो लोगों के बीच नकद लेनदेन को इस शुल्क से अलग रखा गया था।

यह भी बताया गया था कि 75 हजार रुपए या उससे ज्यादा का भुगतान करने पर अधिकतम तीन सौ रुपए का फिक्स्ड चार्ज लगेगा। इसके साथ ही रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस या ईंधन पर दो हजार रुपए से ज्यादा के भुगतान पर पांच रुपए  का फिक्स्ड चार्ज तय किया गया था। बताया जा रहा है कि दशहरा औऱ दिवाली के दौरान देश भर के बाजारों में कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, गहने और सामानों की भारी बिक्री होती है। ऐसे में डिजिटल पेमेंट बढ़ जाता है।

कारोबारी संगठनों और पेमेंट कंपनियों का मानना था कि त्योहारों के बीच नया नियम लागू करने से दुकानों पर पेमेंट में रुकावट आ सकती है। व्यापारी संगठनों ने इसका खुल कर विरोध किया और यह भी कहा कि नकद लेनदेन बढ़ने पर छापेमारी की कार्रवाई तेज हो सकती है। तभी व्यापारियों के विरोध की वजह से एनपीसीआई ने दिवाली तक इस फैसले को आगे बढ़ा दिया है।

पाकिस्तान में ट्रेन पटरी से उतरी चार यात्रियों की मौत, 30 घायल

पाकिस्तान में पंजाब प्रांत के शेर शाह में एक यात्री ट्रेन के पटरी से उतरने से कम से कम चार लोगों की मौत हो गई और 30 लोग घायल हो गए। स्पुतनिक ने यह जानकारी दी। यह दुर्घटना मंगलवार तड़के हुई जब ट्रेन कराची से पेशावर जा रही थी और पटरी से उतर गई।

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बचाव कर्मियों ने ट्रेन की 14 बोगियों से चारों शव बरामद किए और घायलों को बाहर निकालकर इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया।

राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी और प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने इस दुर्घटना पर शोक व्यक्त किया और घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही।

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यूपीआई भुगतान पर दिवाली तक किसी प्रकार का कोई शुल्क नहीं

भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) ने व्यापारियों के लिए दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को दिवाली के बाद के लिए टाल दिया है। पहले के निर्णय के अनुसार, यह शुल्क 15 अक्टूबर से लागू किया जाना था।

एनपीसीआई ने मंगलवार को एक विज्ञप्ति में कहा कि उसकी यूपीआई एवं सेवा संचालन समिति ने त्योहारी मौसम को देखते हुए आज यह निर्णय लिया कि व्यक्ति से दुकानदार को (पी2एम) यूपीआई के जरिये किए जाने वाले चुनिंदा भुगतानों पर एमडीआर दिवाली के बाद लागू किया जाएगा। इसको लागू करने की तिथि बाद में अलग से तय की जाएगी।

गौरतलब है कि एनपीसीआई ने गत 15 सितंबर को घोषणा की थी कि यूपीआई के जरिये 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा जो 15 अक्टूबर से लागू होगा।रुपे डेबिट कार्ड से होने वाले ट्रांजेक्शन और 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन पर किसी भी तरह का शुल्क नहीं लगाया जा सकेगा।

वित्त मंत्रालय ने उस समय इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा था कि व्यक्तिगत यूपीआई खातों से मर्चेंट खातों में भुगतान पर 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू होगा। अधिकतम एमडीआर 300 रुपये होगा।

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इसी तरह अनिवार्य सेवाओं जैसे रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि क्षेत्र में बीज, खाद आदि के लिए पांच रुपये प्रति ट्रांजेक्शन का सपाट शुल्क तय किया गया है। पूंजी बाजार से संबंधित लेनदेन जैसे म्यूचुअल फंड, प्रतिभूति और स्टॉक ब्रोकर तथा डीलरों के लिए एमडीआर की दर 0.02 प्रतिशत तय की गई है। इसमें भी अधिकतम शुल्क 300 रुपये होगी।

सरकार यह भी स्पष्ट कर चुकी है कि व्यक्तिगत से व्यक्तिगत यूपीआई खातों में लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। यूपीआई से हर महीने एक लाख रुपये तक का लेनदेन करने वाले छोटे व्यापारियों को भी एमडीआर के दायरे से बाहर रखा गया है।

यूपीआई पर लगने वाले एमडीआर में से 40 प्रतिशत उस बैंक को जाएगा जिसमें भुगतान करने वाले ग्राहक का खाता है। भुगतान स्वीकार करने वाले कारोबारी का जिस बैंक में खाता है या वह जिस भुगतान गेटवे का इस्तेमाल कर रहा है उसे 30 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। यूपीआई ऐप को 20 प्रतिशत और यूपीआई ऐप के बैंकिंग साझेदार को शुल्क में 10 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। सूत्रों का कहना है कि इसमें सरकार या रिजर्व बैंक को एक भी पैसा नहीं मिलेगा।

सरकार ने कहा है कि यूपीआई से होने वाले 96 प्रतिशत मर्चेंट ट्रांजेक्शन 2,000 रुपये या इससे से कम मूल्य के होते हैं और इसलिए ये शुल्क के दायरे से बाहर रहेंगे।

एनपीसीआई देश में खुदरा भुगतान और निपटान प्रणालियों के संचालन के लिए उत्तरदायी एक शीर्ष संस्था है। इसकी स्थापना भारतीय रिजर्व बैंक और बैंकों के फोरम भारतीय बैंक संघ (आईबीए) के जरिये की गई है। यह संस्था प्रौद्योगिकी के उपयोग के माध्यम से खुदरा भुगतान प्रणालियों में नवाचार लाने, परिचालन में अधिक दक्षता प्राप्त करने तथा भुगतान प्रणालियों की पहुंच को व्यापक बनाने पर केंद्रित है।

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UPI पर MDR चार्ज लागू होने की 15 अक्टूबर की तारीख टली, नए डेट को लेकर आया अब ये बड़ा अपडेट

UPI MDR Date Extended: देशभर के करोड़ों UPI यूजर्स और दुकानदारों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। त्योहारी सीजन की खरीदारी के बीच 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के नए नियमों को दिवाली के बाद तक के लिए आगे बढ़ा दिया गया है।

उद्योग जगत, मर्चेंट बॉडीज, फिनटेक कंपनियों और पेमेंट एग्रीगेटरों द्वारा नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और वित्त मंत्रालय के सामने उठाई गई चिंताओं के बाद इस डेडलाइन को बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया गया है।

क्यों बढ़ाई गई MDR लागू करने की तारीख?

पिछले महीने यूपीआई स्टीयरिंग कमेटी ने ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा P2M ट्रांजैक्शंस पर 0.4% MDR चार्ज लगाने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन जैसे-जैसे इसकी डेडलाइन (15 अक्टूबर) पास आ रही थी, बाजार में कई बड़ी व्यावहारिक और तकनीकी दिक्कतें सामने आ रही थीं:

त्योहारी सीजन का असर: दशहरा, दिवाली और छठ जैसे बड़े त्योहारों के दौरान देश में सबसे ज्यादा खुदरा कारोबार होता है। ऐसे में अचानक MDR लागू होने से व्यापारियों पर अतिरिक्त लागत का बोझ पड़ता, जिसके त्योहारी खरीदारी के दौरान महंगाई के रूप में ग्राहकों की जेब पर असर पड़ने की पूरी आशंका थी।

कैटेगिरी और तकनीकी भ्रम: कार्ड्स के मुकाबले UPI का ढांचा काफी अलग है। इसमें यूटिलिटी बिल, लोन रीपेमेंट (ऑटो-डेबिट फेल होने पर मैन्युअल पेमेंट) और कैपिटल मार्केट (शेयर बाजार/ब्रोकिंग अकाउंट में फंड ट्रांसफर) जैसे ट्रांजैक्शन्स के लिए अलग-अलग नियम तय किए गए हैं, जिन्हें लेकर पेमेंट कंपनियों और मर्चेंट्स में असमंजस की स्थिति बनी हुई थी।

कैपिटल मार्केट और लोन रीपेमेंट का पेंच: ब्रोकिंग और कैपिटल मार्केट एसोसिएशन ने भी सेबी के सामने यह बात रखी थी कि ट्रेडिंग अकाउंट में पैसे डालना पर्सन-टू-पर्सन (P2P) जैसा ही है, जिस पर अतिरिक्त MDR लादना सही नहीं है। इन सभी तकनीकी और सिस्टम अपग्रेड से जुड़ी अड़चनों को दूर करने के लिए उद्योग जगत ने इसे आगे बढ़ाने की मांग की थी।

अब क्या रहेगा मौजूदा नियम?

अब जब तक नई डेडलाइन नहीं आती, तब तक यूपीआई के जरिए होने वाले सभी सामान्य मर्चेंट पेमेंट और रोजमर्रा के लेनदेन पहले की तरह ही पूरी तरह सुरक्षित और बिना किसी अतिरिक्त MDR चार्ज के जारी रहेंगे। इसके साथ छोटे दुकानदारों, स्ट्रीट वेंडर्स और आम ग्राहकों को त्योहारी सीजन के दौरान किसी भी प्रकार के अतिरिक्त शुल्क की चिंता करने की जरूरत नहीं है।