UPSC CRT 2026: एनसीटी के शिक्षा विभाग में प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपल पद के लिए यूपीएससी सीआरटी पोस्टपोन, 828 पदों के लिए 9 जनवरी को होगी परीक्षा

UPSC CRT 2026: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCT) दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग में प्रिंसिपल और वाइस-प्रिंसिपल के पदों के लिए कंबाइंड रिक्रूटमेंट टेस्ट (CRT) को पोस्टपोन कर दिया है। यह परीक्षा पहले 1 नवंबर, 2026 को आयोजित की जानी थी। लेकिन 16 अक्टूबर, 2026 के एक करिजेंडम नोटिस के अनुसार, अब इस परीक्षा का आयोजन 9 जनवरी, 2027 को होगा।

यूपीएससी सीआरटी 2026 सुबह 9:30 बजे से 11:30 बजे तक सुबह के सत्र में होगी। इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए कुल 828 पदों पर नियुक्ति की जाएगी। बदला हुआ शेड्यूल प्रिंसिपल के 124 पदों और वाइस-प्रिंसिपल के 704 पदों पर भर्ती के लिए लागू होगा। के लिए के लिए भर्ती पर लागू होता है।

UPSC CRT 2026: पदों का विवरण

भर्ती प्रक्रिया में ये पद शामिल हैं :

प्रिंसिपल : एनसीटी दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग में 124 पद।

वाइस-प्रिंसिपल : एनसीटी दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग में 704 पद। इन पदों को विज्ञापन संख्या 51/2026 के तहत नोटिफाई किया गया था।

UPSC CRT 2026: संशोधित परीक्षा तारीख

इवेंट डिटेल्स

नियुक्ति करने वाली संस्था : यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन

परीक्षा : कंबाइंड रिक्रूटमेंट टेस्ट

पहले की परीक्षा तारीख : 1 नवंबर, 2026

संशोधित परीक्षा तारीख : 9 जनवरी, 2027

परीक्षा का समय : सुबह 9:30 बजे से 11:30 बजे तक

कुल पद 828

परीक्षार्थियों को आगे क्या करना चाहिए?

कैंडिडेट को संशोधित तारीख पर ध्यान देना चाहिए और नए कार्यक्रम के हिसाब से तैयारी करनी चाहिए। उन्हें भर्ती प्रक्रिया से जुड़े आगे के नोटिस और अपडेट के लिए संघ लोक सेवा आयोग की आधिकारिक वेबसाइट, upsc.gov.in भी चेक करनी चाहिए। करिजेंडम के अनुसार परीक्षा की तारीख 1 नवंबर, 2026 से बदलकर 9 जनवरी, 2027 कर दी गई है। नोटिस में भर्ती विवरण में किसी और बदलाव का जिक्र नहीं है।

प्रिंसिपल के पदों का वर्गों में बंटवारा

दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग में प्रिंसिपल के कुल 124 पदों पर भर्ती होनी है। इनमें सामान्य यानी अनारक्षित वर्ग के लिए 69 पद निर्धारित किए गए हैं। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 11 पद हैं। अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के उम्मीदवारों के लिए 18 रिक्तियां हैं। अनुसूचित जाति (SC) के लिए 16 पद और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए 10 पद निर्धारित हैं। इस तरह सभी श्रेणियों को मिलाकर प्रिंसिपल के कुल 124 पद हैं।

वाइस प्रिंसिपल के 704 पद 

यूपीएससी सीआरटी 2026 भर्ती में सबसे ज्यादा रिक्तियां वाइस प्रिंसिपल के पदों पर हैं। वाइस प्रिंसिपल के कुल 704 पदों में से सामान्य वर्ग के लिए 287 पद निर्धारित किए गए हैं। EWS वर्ग के लिए 71 रिक्तियां हैं। ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 189 पद रखे गए हैं। वहीं एससी वर्ग के लिए 103 और एसटी वर्ग के लिए 54 पद निर्धारित किए गए हैं। इन सभी श्रेणियों को मिलाकर वाइस प्रिंसिपल के कुल 704 पदों पर भर्ती की जाएगी।

कैसे होगा चयन?

इस भर्ती में उम्मीदवारों का चयन निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर किया जाएगा। यूपीएससी सीआरटी 2026 भर्ती परीक्षा के बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। इसके बाद दस्तावेज सत्यापन भी किया जाएगा। इस दौरान उम्मीदवारों के सभी जरूरी प्रमाणपत्रों की जांच की जाएगी। सभी निर्धारित चरण पूरे होने के बाद अंतिम चयन किया जाएगा।

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Delhi industrial policy: कैबिनेट ने दिल्ली को इंडस्ट्रियल हब बनाने की दी मंजूरी, मुख्यमंत्री उद्यमश्री योजना पर खर्च किए जाएंगे 1000 करोड़ रुपये

Delhi industrial policy: दिल्ली सरकार ने देश की राजधानी को इंडस्ट्रियल हब बनाने की दिशा में बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में दिल्ली औद्योगिक नीति 2026 को मंजूरी दी गई। इस योजना का मकसद अगले 10 सालों में राष्ट्रीय राजधानी को साफ, हाई-वैल्यू उद्योग, ज्ञान और प्राद्योगिकी आधारित बिजनेस को बढ़ावा देना है।

इसमें वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक, पांच सालों में मुख्यमंत्री उद्यमश्री योजना पर 1,000 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान है। इसका मकसद नए उद्योगों को बढ़ावा देना और रोजगार के ज्यादा मौके बनाना है। CM गुप्ता ने कहा कि दिल्ली इंडस्ट्रियल पॉलिसी 2026 का मकसद राजधानी को एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स, डेटा सेंटर्स, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, हेल्थकेयर सर्विसेज़, अर्बन लॉजिस्टिक्स, सर्कुलर इकॉनमी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक बड़ा हब बनाना है।

यह योजना साफ-सुथरी, हाई-वैल्यू इंडस्ट्रीज को बढ़ावा देगी, नया निवेश लाएगी, मौजूदा उद्योगों को आधुनिक बनाएगी, महिला उद्यमियों को बढ़ावा देगी और युवाओं के लिए रोजगार के मौके बढ़ाएगी। उन्होंने कहा कि 10 प्राथमिक क्षेत्रों की जरूरतों के हिसाब से प्रोत्साहन दिए जाएंगे। इसमें पूंजी निवेश, ऑफिस या वर्कस्पेस रेंटल, नई रिक्रूटमेंट, रिसर्च, सर्टिफिकेशन, टेक्नोलॉजिकल मॉडर्नाइजेशन, एनर्जी एफिशिएंसी और स्किल डेवलपमेंट शामिल हैं। यह नीति स्रोत के दोबारा इस्तेमाल और वेस्ट कम करने को भी बढ़ावा देगी।

दिल्ली कैबिनेट बैठक में इन क्षेत्रों को प्रोत्साहन पर जोर

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट पर 25% इंसेंटिव, जो 10 करोड़ रुपये तक (महिलाओं के लिए 12 करोड़ रुपये) होगा, तीन साल के लिए मिलेगा। ऑफिस रेंटल में 40 परसेंट की मदद, जो 2 करोड़ रुपये तक होगी, तीन साल के लिए भी दी जाएगी। बैंडविड्थ और क्लाउड सर्विसेज दो साल के लिए 25% मदद के लिए क्वालिफाई करेंगी, जिसकी सालाना सीमा 10 लाख रुपये होगी। हर नई नियुक्ति पर 40,000 से 50,000 रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जाएगा।

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश पर 25% प्रोत्साहन, 50 करोड़ रुपये तक (महिलाओं के लिए 60 करोड़ रुपये), पांच साल के लिए उपलब्ध होगा। 40% की ऑफिस किराया सहायता, 2 करोड़ रुपये तक, दो साल के लिए प्रदान की जाएगी। प्रत्येक नया कर्मचारी 1 लाख रुपये से 1.2 लाख रुपये के प्रोत्साहन के लिए पात्र होगा। यह नीति प्रमाणन के लिए 50% सहायता, 25 लाख रुपये तक, अनुसंधान और विकास के लिए 30% प्रोत्साहन, 5 करोड़ रुपये तक; और कार्यक्षेत्र विकसित करने वाली इकाइयों के लिए 25% सहायता, 10 करोड़ रुपये तक प्रदान करती है।

पूंजी निवेश पर 25 प्रतिशत प्रोत्साहन, 10 करोड़ रुपये तक (महिलाओं के लिए 12 करोड़ रुपये) उपलब्ध होगा। यह नीति कम पानी की खपत वाले शीतलन प्रणालियों के लिए 30% सहायता प्रदान करती है, और रेगुलेटरी कम्प्लायंस की तैयारी के लिए 50% मदद, 25 लाख रुपये तक।

पूंजीगत निवेश पर 25% इंसेंटिव, 10 करोड़ रुपये तक (महिलाओं के लिए 12 करोड़ रुपये) मिलेगा। शोध कार्य 50% ग्रांट के लिए क्वालिफाई करेंगी, जिसकी सीमा 50 लाख रुपये होगी। पेटेंट से जुड़ी मदद में लागत का 25% कवर होगा, जो हर पेटेंट के लिए 5 लाख रुपये तक होगा, अधिक से अधिक चार पेटेंट के लिए। लैबोरेटरी एक्रेडिटेशन से जुड़े खर्चों के लिए 25% प्रोत्साहन, 25 लाख रुपये तक, भी दिया जाएगा।

कैपिटल इन्वेस्टमेंट पर 25 % इंसेंटिव, जो आम तौर पर 10 करोड़ रुपये (महिलाओं के लिए 12 करोड़ रुपये) तक होगा, मिलेगा। 1,000 या उससे अधिक बेड वाले हॉस्पिटल 100 करोड़ रुपये तक की मदद के लिए योग्य होंगे। वेलनेस एक्टिविटीज को 5% प्रोत्साहन मिलेगा, जो ज्यादा से ज्यादा 1 करोड़ रुपये तक होगा, जबकि NABH, NABL और JCI जैसी संस्थाओं से प्रमाणन पर 50% मदद मिलेगी, जो ज्यादा से ज्यादा 20 लाख रुपये होगी। विशेषज्ञ डॉक्टर की हर नई अपॉइंटमेंट पर 50,000 रुपये से 60,000 रुपये तक का इंसेंटिव मिलेगा।

नई वेयरहाउसिंग यूनिट्स को 25% इंसेंटिव मिलेगा, जो ज्यादा से ज्यादा 10 करोड़ रुपये (महिलाओं के लिए 12 करोड़ रुपये) तक होगा, जबकि मौजूदा यूनिट्स को 25% मदद मिलेगी, जो अधिकतम 1 करोड़ रुपये होगी। कोल्ड-चेन फैसिलिटीज को 25% इंसेंटिव मिलेगा, जो अधिकतम 2 करोड़ रुपये होगा। लॉजिस्टिक्स में टेक्नोलॉजी अपनाने पर 40% मदद मिलेगी, जो ज्यादा से ज्यादा 50 लाख रुपये होगी, जबकि ग्रीन एनर्जी के इस्तेमाल पर 25% इंसेंटिव मिलेगा, जो अधिक से अधिक 2 करोड़ रुपये होगा।

रीसाइक्लिंग यूनिट्स को 25% इंसेंटिव मिलेगा, जो ज्यदा से ज्यादा 1 करोड़ रुपये होगा। रोज 10 टन से अधिक ऑर्गेनिक वेस्ट प्रोसेस करने वाली इकाइयों को 25% मदद मिलेगी, जो ज़्यादा से ज़्यादा 1 करोड़ रुपये (महिलाओं के लिए 1.2 करोड़ रुपये) तक होगी। ई-वेस्ट मैनेजमेंट को 25% इंसेंटिव मिलेगा, जो ज़्यादा से ज़्यादा 2 करोड़ रुपये होगा, जबकि एनवायरनमेंटल सर्टिफिकेशन के लिए 50% मदद मिलेगी, जो अधिकतम 10 लाख रुपये होगी। इन नियमों का मकसद वेस्ट मैनेजमेंट को बेहतर बनाना, रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देना और रिसोर्स के दोबारा इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।

कैपिटल इन्वेस्टमेंट पर 25% इंसेंटिव, जो अधिकतम 5 करोड़ रुपये (महिलाओं के लिए 6 करोड़ रुपये) तक होगा, मिलेगा। रेंटल में 20% मदद मिलेगी, जो अधिकतम 50 रुपये होगी। सालाना 2 लाख रुपये, दो साल तक दिए जाएंगे। अप्रेंटिस के स्टाइपेंड के लिए छह महीने तक अतिरिक्त मदद भी मिलेगी।

कौशल विकास ढांचे के लिए 25% इंसेंटिव, 2 करोड़ रुपये तक, मिलेगा, जिसके लिए कम से कम 50 लाख रुपये का निवेश करना होगा। सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस बनाने के लिए भी 25% मदद मिलेगी, जिसकी लिमिट 2 करोड़ रुपये होगी, जिसके लिए कम से कम 75 लाख रुपये का निवेश करना होगा।

तकनीकी आधुनिकीकरण के लिए 25% प्रोत्साहन, 5 करोड़ रुपये तक (महिलाओं के लिए 7 करोड़ रुपये) मिलेगा। एनर्जी एफिशिएंसी सुधारने और रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने के लिए 25% इंसेंटिव, जिसकी लिमिट 50 लाख रुपये होगी, भी दिया जाएगा। अप्रेंटिस के स्टाइपेंड के लिए छह महीने तक एक्स्ट्रा मदद मिलेगी। इन नियमों का मकसद MSMEs को मॉडर्न टेक्नोलॉजी अपनाने, प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ाने और एनर्जी बचाने में मदद करना है।

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Amit Shah: ‘2029 में भी हार के लिए रहें तैयार…’SIR पर राहुल गांधी को अमित शाह की दो टूक

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को उपचुनावों में कांग्रेस की हार को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि, राहुल गांधी को हार के लिए मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को जिम्मेदार ठहराने के बजाय अपनी पार्टी की कमियों पर ध्यान देना चाहिए। शाह ने ये भी दावा किया कि कांग्रेस पिछले 41 साल से गुजरात में कोई चुनाव नहीं जीत पाई है, जबकि वहां के मतदाता लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी पर भरोसा जता रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री का ये बयान उपचुनाव और गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में बीजेपी के प्रदर्शन पर बात करते हुए यह बयान दिया। वहीं, राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के नेता चुनाव आयोग के खिलाफ अपना विरोध जारी रखे हुए हैं। राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

शाह ने राहुल गांधी पर साधा निशाना

अमित शाह ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि गुजरात में कांग्रेस को पिछले 41 साल से चुनावी जीत नहीं मिली है। शाह ने कहा, “मैं यह बात साफ करना चाहता हूं और खास तौर पर राहुल गांधी को बताना चाहता हूं कि कांग्रेस ने पिछले 41 साल में गुजरात में एक भी चुनाव नहीं जीता है। पार्टी ने आखिरी बार 1985 में जीत हासिल की थी। इसके बाद से उसे लगातार हार का सामना करना पड़ा है।” उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस की लगातार चुनावी हार का कारण मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) है, जबकि यह प्रक्रिया 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद शुरू हुई थी।

हार का ठीकरा SIR पर फोड़े

शाह ने कहा कि, “राहुल गांधी को ये सोचना चाहिए कि क्या गुजरात में कांग्रेस की हार के लिए SIR जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को चुनाव में हार का ठीकरा SIR पर फोड़ने के बजाय अपनी कमियों पर विचार करना चाहिए।” केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस को 2029 के लोकसभा चुनाव में भी हार का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। शाह ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी बार-बार गलत जानकारी फैलाते हैं और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का विरोध करके घुसपैठियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

2029 में भी मिलेगा हार

अमित शाह ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस के विरोध पर राहुल गांधी की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि, राहुल गांधी लगातार झूठ बोल रहे हैं। शाह ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी को 2029 के लोकसभा चुनाव में चौथी बार हार का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। इस दौरान उन्होंने राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन पर भी सवाल उठाए।

गुजरात में बीजेपी का बेहतरीन प्रदर्शन

गुजरात में बीजेपी के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए अमित शाह ने कहा कि पार्टी ने नगर पालिकाओं और नगर निगम के चुनावों में शानदार जीत दर्ज की है। उन्होंने बताया कि दो नगर पालिकाओं और एक नगर निगम की कुल 104 सीटों में से बीजेपी ने 90 सीटों पर कब्जा किया। वहीं, गांधीनगर नगर निगम में पार्टी को 44 में से 38 सीटों पर जीत मिली। गांधीनगर शाह के संसदीय क्षेत्र में आता है। शाह ने दावा किया कि आम आदमी पार्टी ने सभी 32 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन किसी भी सीट पर उसके उम्मीदवार अपनी जमानत नहीं बचा सके। उन्होंने कहा कि चुनाव के नतीजों से साफ पता चलता है कि गुजरात के लोगों का रुझान बीजेपी की ओर है और वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन कर रहे हैं।

पीएम मोदी के साथ खड़े हैं लोग

अमित शाह ने कहा कि, गुजरात में बीजेपी की बड़ी जीत से पता चलता है कि वहां के लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खड़े हैं। उन्होंने बताया कि पिछले चुनाव के मुकाबले गांधीनगर नगर निगम में बीजेपी का वोट शेयर 10 प्रतिशत बढ़ा है।

दिल्ली में बिजली सब्सिडी स्कीम का फायदा उठाने के लिए आधार नंबर अनिवार्य, दिल्ली सरकार का बिल हुआ 4,000 करोड़ के पार

दिल्ली में बिजली सब्सिडी स्कीम का फायदा उठाने के लिए आधार नंबर अनिवार्य, दिल्ली सरकार का बिल हुआ 4,000 करोड़ के पार

दिल्ली सरकार ने राज्य में बिजली सब्सिडी योजना के तहत लाभार्थियों की बढ़ती संख्या और सरकारी खजाने पर बढ़ते बिल को देख कर बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने बिजली सब्सिडी योजना का फायदा उठाने वाले उपभोक्ताओं के लिए आधार सत्यापन अनिवार्य करने का फैसला किया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी 2026 तक, दिल्ली सरकार का बिजली सब्सिडी के लिए आवंटन Rs 4,037.63 करोड़ तक पहुंच गया था। मौजूदा वित्तीय वर्ष (2026-27) के लिए, सरकार ने इस मकसद के लिए Rs 3,500 करोड़ का बजट रखा है।

पिछले दस सालों में दिल्ली में बिजली उपभाक्ताओं की संख्या लगभग 40% बढ़ी है, जो अभी 73 लाख से ज्यादा है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2024-25 में, दिल्ली में 73 लाख घरेलू उपभोक्ताओं में से लगभग 84% (52.3 लाख) ने बिजली सब्सिडी का फायदा उठाया, जो 2025-26 में बढ़कर 87% (55 लाख) हो गया। दिल्ली सरकार की स्कीम के तहत, उपभोक्ताओं को हर महीने 200 यूनिट बिजली मुफ्त दी जाती है। जो लोग 201 से 400 यूनिट बिजली इस्तेमाल करते हैं, उन्हें हर महीने 50% सब्सिडी (अधिक से अधिक 800 रुपये) मिलती है।

बिजली विभाग के हाल में जारी एक नोटिफिकेशन के मुताबिक, बिजली सब्सिडी स्कीम दिल्ली डिस्कॉम, यानी BSES राजधानी पावर लिमिटेड (BRPL), BSES यमुना पावर लिमिटेड (BYPL), टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (TPDDL), नई दिल्ली म्युनिसिपल काउंसिल (NDMC) और मिलिट्री इंजीनियर सर्विसेज (MES) के जरिए उनके इलाकों में चलाई जाती है। दिल्ली सरकार सब्सिडी का फायदा पाने की शर्त के तौर पर बेनिफिशियरी की पहचान बताना “ठीक समझती है”। इसमें कहा गया है कि ऐसा बेनिफिशियरी “असली आधार नंबर होने का सबूत” देगा।

आधार एक्ट, 2016 के सेक्शन 7 के तहत, दिल्ली के उप राज्यपाल ने नोटिफाई किया कि स्कीम का फायदा उठाने के लिए, लोगों को वेब पोर्टल पर या सरकार द्वारा तय किए गए किसी दूसरे तरीके से अपना आधार नंबर देना होगा। दिल्ली में जिन उपभोक्ताओं का आधार एनरोलमेंट नहीं है, उन्हें इसके लिए आवेदन करना होगा और 14-डिजिट के एनरोलमेंट ID नंबर के साथ सब्सिडी पाने के लिए जरूरी डिटेल्स जमा करनी होंगी।

आधार नंबर का इस्तेमाल करके पक्की पहचान बनाने से लोग आसानी से सब्सिडी, फायदे और सेवा पा सकते हैं, पहचान बनाने के लिए कई दस्तावेजों की जरूरत नहीं पड़ती, प्रक्रियाएं आसान हो जाती हैं और निष्पक्षता और कार्यक्षमता बढ़ती है।

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दिल्ली में कल क्या-क्या रहेगा बंद? मेट्रो, ट्रेन से लेकर शराब दुकानें तक, जानिए हर बड़ा अपडेट

Jantar Mantar Protest Delhi Band: शनिवार को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर पुलिस ने दिल्ली को किले में तब्दील कर दिया है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने और उपद्रव रोकने के लिए चप्पे-चप्पे पर अर्धसैनिक बलों की तैनाती के साथ-साथ अभेद्य नाकेबंदी की गई है। इस कड़े पहरे का सीधा असर आम जनता की जिंदगी पर पड़ने वाला है, क्योंकि मेट्रो के 57 प्रमुख स्टेशनों के एंट्री-एग्जिट गेट बंद करने, दिल्ली आने वाली कई ट्रेनों को निरस्त करने से लेकर शहर भर में शराब की दुकानों पर पूरी तरह ताला लटका दिया गया है।

अगर आप शनिवार, 10 अक्टूबर को अपने घर से बाहर निकलने, दफ्तर जाने या सफर की योजना बना रहे हैं, तो अलर्ट हो जाइए। सड़कों पर ट्रैफिक के भारी जाम से लेकर मेट्रो के बंद दरवाजे और ट्रेनों का बदला शेड्यूल आपकी मुसीबत बढ़ा सकता है। यात्रा पर निकलने से पहले जानिए कल दिल्ली में कौन-कौन सी जरूरी सेवाएं ठप रहेंगी और प्रशासन ने क्या-क्या पाबंदियां लागू की हैं।

1. शराब की दुकानें पूरी तरह बंद

कानून-व्यवस्था और सुरक्षा कारणों से दिल्ली सरकार के आबकारी विभाग ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। 9 अक्टूबर और 10 अक्टूबर को दिल्ली में सभी खुदरा शराब की दुकानें पूरी तरह से बंद रहेंगी। इसके पीछे की वजह संवेदनशील इलाकों में शांति व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी प्रकार के हुड़दंग को रोकना है।

2. दिल्ली मेट्रो के 57 स्टेशनों पर एंट्री-एग्जिट बंद

दिल्ली पुलिस के जॉइंट कमिश्नर द्वारा दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) को जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, 9 अक्टूबर रात 9:00 बजे से लेकर 10 अक्टूबर को स्थिति सामान्य होने तक दिल्ली के 57 प्रमुख मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश/निकास गेट बंद किए जा सकते हैं और ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी कम की जा सकती है। प्रभावित मुख्य मेट्रो स्टेशन ये है:

सेंट्रल दिल्ली व राजीव चौक लाइन: जनपथ, पटेल चौक, सेंट्रल सेक्रेटरीएट, लोक कल्याण मार्ग, राजीव चौक, नई दिल्ली, सेवा तीर्थ (उद्योग भवन), मंडी हाउस, बाराखम्भा रोड, आईटीओ, दिल्ली गेट, खान मार्केट, आर.के. आश्रम मार्ग, झंडेवालान, शिवाजी स्टेडियम।

अन्य प्रमुख स्टेशन: सुप्रीम कोर्ट, कश्मीरी गेट, राजीव चौक, चांदनी चौक, विश्वविद्यालय, सिविल लाइन्स, जामा मस्जिद, करोल बाग, लाजपत नगर, एम्स, आईएनए, वसंत कुंज, साकेत, और बाहरी स्टेशनों में जहांगीरपुरी, सीलमपुर, वेलकम, शाहदरा, रिठाला, रोहिणी ईस्ट/वेस्ट आदि शामिल हैं।

3. नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन स्टेशन आने वाली कई ट्रेनें रद्द

रेलवे बोर्ड के कोचिंग निदेशालय द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, 10 अक्टूबर को सुबह 4:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे के बीच नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पहुंचने वाली सभी मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों को उनके शुरुआती स्टेशनों से ही रद्द कर दिया गया है। यह नियम 9 अक्टूबर दोपहर 2:00 बजे के बाद अपने शुरुआती स्टेशनों से रवाना होने वाली ट्रेनों पर लागू है।

4. जंतर-मंतर और सेंट्रल दिल्ली में आवाजाही पर प्रतिबंध

पुलिस ने जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों को किले में तब्दील कर दिया है। कहीं भी विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई है। जंतर-मंतर, लुटियंस दिल्ली और संसद मार्ग से सटे सभी रास्तों पर दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती की गई है। आम जनता के लिए इन इलाकों में आवाजाही प्रतिबंधित की गई है।

दिल्ली IGI एयरपोर्ट की इंटरनेशनल क्षमता बढ़ेगी, नया Pier E बनेगा, 2030 तक क्या है पूरा प्लान?

नई दिल्ली। दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGI) की सालाना पैसेंजर कैपेसिटी अगले चार साल में 10.4 करोड़ से बढ़ाकर 12.5 करोड़ से ज्यादा करने की तैयारी है। इसमें इंटरनेशनल पैसेंजर को संभालने की क्षमता 50 फीसदी से ज्यादा बढ़ाई जाएगी। इसके लिए T3 पर नया इंटरनेशनल Pier E बनाया जाएगा। वहीं T1 में बिना बड़े स्ट्रक्चरल बदलाव के चेक-इन और सिक्योरिटी काउंटर बढ़ाए जाएंगे। इंटरनेशनल ट्रैफिक बढ़ने को देखते हुए T3 के Pier C को भी घरेलू से इंटरनेशनल ऑपरेशन के लिए बदला गया है। इसे सितंबर 2026 से चरणबद्ध तरीके से शुरू किया गया और इसके बाद इंटरनेशनल पैसेंजर कैपेसिटी करीब 3.1 करोड़ सालाना हो गई है। यहां इमिग्रेशन और दूसरी इंटरनेशनल सुविधाएं बढ़ाई गई हैं, जिससे बड़े और वाइड-बॉडी विमानों को संभालने में भी मदद मिलेगी।

T3 पर बनेगा नया Pier E

• नए Pier E की सालाना कैपेसिटी करीब 1.6 करोड़ पैसेंजर की होगी। इसके बनने के बाद T3 की टोटल कैपेसिटी 5 करोड़ से बढ़कर 6.6 करोड़ पैसेंजर सालाना हो जाएगी।

• योजना में करीब 4.6 करोड़ इंटरनेशनल और 2 करोड़ घरेलू पैसेंजर को संभालने की क्षमता होगी। इससे T3 पर बढ़ते हवाई ट्रैफिक को संभालने में मदद मिलेगी।

• इस प्रोजेक्ट पर करीब 2,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। काम शुरू होने के बाद Pier E को तैयार करने में करीब तीन साल लग सकते हैं।

एयरपोर्ट का नया मास्टर प्लान तैयार

T1 में बिना बड़े निर्माण के ही पैसेंजर की क्षमता बढ़ाने की तैयारी है। DIAL चेक-इन और सिक्योरिटी काउंटर बढ़ाकर इसकी क्षमता 4 करोड़ से बढ़ाकर 4.5 करोड़ पैसेंजर सालाना करने की योजना बना रहा है। इस काम पर करीब 100 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

T2 फिलहाल पहले की तरह चलता रहेगा। आगे पैसेंजर की संख्या बढ़ने पर अगले दशक में T2 की जगह बड़ा T4 बनाने का ऑप्शन रखा गया है। एयरपोर्ट का 10 साल का मास्टर प्लान अभी तैयार किया जा रहा है।

बढ़ते ट्रैफिक के लिए बदलेगा रोड नेटवर्क

एयरपोर्ट पर पैसेंजर की संख्या बढ़ने के साथ सड़कों पर बढ़ने वाले ट्रैफिक को देखते हुए दिल्ली सरकार ने RITES से स्टडी कराई है। रिपोर्ट में T1 और T3 के बीच Y-शेप फ्लाईओवर बनाने का सुझाव दिया गया है। इससे उस जंक्शन पर सिग्नल की जरूरत कम होगी और वाहनों की आवाजाही आसान होगी।

इसके अलावा T3 तक जाने वाली सड़क को चौड़ा करने और रनवे के नीचे बनी सुरंग की क्षमता बढ़ाने का भी प्रस्ताव है। इन बदलावों का मकसद बढ़ते ट्रैफिक को बेहतर तरीके से संभालना है। पूरी योजना के तहत 2030 की शुरुआत तक IGI एयरपोर्ट की क्षमता 12.5 करोड़ से ज्यादा पैसेंजर की करने का लक्ष्य है।

दिल्ली के 1000 बड़े पार्कों की बदलेगी सूरत! एंट्री-एग्जिट पर लगेंगे CCTV, दो शिफ्टों में तैनात होंगे 2000 गार्ड्स

दिल्ली के बड़े पार्कों की सुरक्षा बेहतर करने के लिए MCD (Municipal Corporation of Delhi) ने योजना तैयार की है। इसके तहत राजधानी के करीब 1,000 बड़े पार्कों में CCTV कैमरे लगाने और सिक्योरिटी गार्ड तैनात करने की तैयारी है। इससे पार्कों में आने वाले लोगों की सिक्योरिटी बढ़ाने और सेंसेटिव एक्टिविटी पर नजर रखने में मदद मिल सकती है।

पार्कों में इस तरह किये जायेंगे सुरक्षा के इंतजाम

• MCD के अधिकारियों के मुताबिक, उनके अधिकार क्षेत्र में एक एकड़ या उससे ज्यादा एरिया में 1,000 पार्क हैं। इन बड़े पार्कों के आने और जाने वाले रास्तों पर CCTV कैमरे लगाए जाएंगे। जिससे वहां होने वाली एक्टिविटी पर नजर रखी जा सकेगी।

• इसके साथ ही कैमरों की देखभाल और खराब होने पर उन्हें ठीक करने का खर्च भी MCD को उठाना होगा।

• पार्कों की सुरक्षा के लिए करीब 2,000 गार्ड की जरूरत पड़ सकती है। दो पालियों में सुरक्षा व्यवस्था चलाने के लिए इन गार्डों को तैनात किया जा सकता है।

• नए गार्ड रखने या सुरक्षा कर्मचारियों की दूसरी व्यवस्था करने के लिए अलग बजट की जरूरत होगी। इसके साथ ही गार्डों की तनख्वाह और दूसरे खर्च भी लगातार होंगे।

रोशनी और बाउंड्री वॉल पर भी ध्यान दिया जायेगा

MCD की योजना में पार्कों की दूसरी सुरक्षा कमियों को दूर करना भी शामिल है। कई पार्कों में खराब लाइट, अंधेरे हिस्से, टूटी बाउंड्री, खराब गेट और ज्यादा झाड़ियां जैसी समस्याएं हैं। इन वजहों से पार्क के कुछ हिस्सों में साफ दिखाई नहीं देता।

MCD पार्कों की सुरक्षा जांच भी कर रही है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किस पार्क में लाइट, बाउंड्री, गेट या दूसरी सुरक्षा व्यवस्था की ज्यादा जरूरत है।

सुरक्षा पर लगातार नजर रखने के लिए खर्च होगा

इस योजना में CCTV लगाने के साथ उनकी बिजली, देखभाल और मरम्मत पर भी खर्च होगा। इसी तरह करीब 2,000 गार्ड रखने पर हर साल उनकी तनख्वाह और दूसरे खर्च का बोझ भी MCD पर आएगा।

MCD इस योजना के लिए दिल्ली सरकार से आर्थिक मदद मांग सकती है। इसके बाद यह तय होगा कि सुरक्षा व्यवस्था पर कितना खर्च किया जाएगा और इसे किस तरह धीरे-धीरे लागू किया जाएगा।

दिल्ली से शुभांगी तिवारी की रिपोर्ट

10 किमी लंबा कॉरिडोर, 9 लूप्स के साथ अब मयूर विहार-नोएडा से AIIMS अब सिर्फ 15 मिनट में! बारापुला फेज-3 की फुल डिटेल

Barapullah Phase-3 elevated Corridor: दिल्लीवासी बारापुला फेज III एलिवेटेड कॉरिडोर का लंबा इंतजार आखिरकार पूरा हो गया है। इस एलिवेटेड कॉरिडोर की मदद से मयूर विहार-नोएडा से एम्स की दूरी 45 मिनट से घटकर मात्र 15 मिनट रह जाएगी। यह फ्लाईओवर पूर्वी और दक्षिणी दिल्ली को न सिर्फ पास लाएगा, बल्कि दिल्लीवासियों को ट्रैफिक के जंजाल से राहत भी देगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को बारापुला फेज-III एलिवेटेड कॉरिडोर का उद्घाटन किया।

शाह ने मुकरबा चौक अंडरपास का भी उद्घाटन किया और मोदी मिल-सावित्री सिनेमा फ्लाईओवर और लोनी अंडरपास का शिलान्यास किया। इन चार इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर कुल मिलाकर 1,941 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस मौके पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि नीति, नियोजन और कार्यान्वयन के स्तर पर केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच बेहतर तालमेल से शहर में बुनियादी विकास को नई गति मिल रही है।

उन्होंने कहा, “आज समर्पित प्रोजेक्ट्स सिर्फ सड़कें, फ्लाईओवर और अंडरपास नहीं हैं, बल्कि लाखों दिल्लीवासियों का समय बचाने, कनेक्टिविटी सुधारने, यात्रा को आसान बनाने और उनकी जीवन की क्वालिटी बढ़ाने से जुड़ी जरूरी सुविधाएं हैं।”

बारापुला फेज-III कॉरिडोर मयूर विहार फेज-I या नोएडा से सराय काले खां होते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) तक सिग्नल-फ्री कनेक्टिविटी देगा। साथ ही, इससे मुख्य रूट्स पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा। इसे मौजूदा बारापुला नेटवर्क से जोड़ा गया है और इसमें अलग-अलग दिशाओं में ट्रैफिक के आने-जाने के लिए नौ लूप हैं। पीडब्लूडी मंत्री परवेश वर्मा ने कहा कि पैदल चलने वालों और साइकिल चलाने वालों के लिए अलग-अलग सुविधाएं बनाई गई हैं।

इस प्रोजेक्ट में लगभग एक दशक की देरी हो गई थी, लेकिन पिछले साल विभाग का कार्यभार संभालने के बाद वर्मा ने इसे नए सिरे से आगे बढ़ाया। मुकरबा चौक अंडरपास, जिसका मंगलवार को उद्घाटन हुआ, आउटर रिंग रोड पर यातायात को बेहतर बनाने के लिए बनाया गया है। इसमें दो गाड़ियों के अंडरपास और एक पैदल चलने वालों के अंडरपास हैं और इससे हर दिन लगभग 15,800 गाड़ियों का आना-जाना आसान होने की उम्मीद है।

इस अंडरपास से बादली और रोहिणी से आजादपुर और जहांगीरपुरी की ओर जाने वाला ट्रैफिक मुकरबा चौक इंटरचेंज में घुसे बिना ही इस रास्ते से जा सकेगा। हैदरपुर बादली मोड़ मेट्रो स्टेशन के पास पैदल चलने वालों और नॉन-मोटराइज्ड ट्रैफिक के लिए एक अलग अंडरपास भी बनाया गया है। साउथ दिल्ली के सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी ने कहा, “सरकार का मकसद दिल्ली के बुनियादी ढांचे को इस तरह से विकसित करना है जिससे लोगों का रोजाना आना-जाना सीधे तौर पर बेहतर हो, समय बचे और यात्रा अधिक आसान हो।”

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Delhi Winter Pollution: 1 नवंबर से निर्माण पर पाबंदी, दफ्तरों के समय और WFH को लेकर दिल्ली में जारी हुआ नया एक्शन प्लान

Delhi Winter Pollution: सर्दियों का मौसम आने वाला है और इसके साथ ही दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने की चिंता भी शुरू हो गई है। इसी को देखते हुए दिल्ली सरकार ने प्रदूषण कम करने और सड़कों पर वाहनों की संख्या घटाने के लिए कई कदम उठाने की तैयारी की है। हालांकि, ये उपाय उन महीनों में लागू किए जाएंगे, जब राजधानी में हवा की गुणवत्ता आमतौर पर काफी खराब हो जाती है।

बता दें कि सोमवार को ‘कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट’ (CAQM) और ‘दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमिटी’ (DPCC) के साथ हुई समीक्षा बैठक में इन उपायों पर चर्चा की गई। सरकार की इस योजना में निर्माण कार्यों पर नियंत्रण से लेकर पार्किंग शुल्क बढ़ाने, ऑफिस के समय में बदलाव और वर्क फ्रॉम होम जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।

वहीं, इस प्लान के तहत 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक धूल उड़ाने वाले तोड़-फोड़ के काम और बाहर होने वाले सिविल कंस्ट्रक्शन के कामों पर रोक रहेगी। दिल्ली सरकार के अनुसार, इसके बाद और भी सख्त पाबंदी लागू होंगे, जिसमें 10 दिसंबर 2026 से 20 जनवरी 2027 तक कंस्ट्रक्शन और तोड़-फोड़ के सभी कामों पर पूरी तरह रोक रहेगी।

सरकार ने बिल्डिंग प्लान की मंजूरी के लिए ‘मलबे’ (Malba) ऐप पर रजिस्ट्रेशन भी जरूरी कर दिया है, जिससे कंस्ट्रक्शन की मंजूरी को कंस्ट्रक्शन और तोड़-फोड़ से निकलने वाले कचरे की निगरानी और मैनेजमेंट से जोड़ा जा सके।

पार्किंग महंगी, वर्क फ्रॉम होम पर भी जोर

दिल्ली में सड़कों पर निजी गाड़ियों के इस्तेमाल को कम करने के मकसद से, 1 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक अधिकृत पार्किंग जगहों पर पार्किंग के मौजूदा दाम दोगुने कर दिए जाएंगे। हालांकि, यह नियम दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) की अपनी और उनके द्वारा मैनेज की जाने वाली पार्किंग जगहों पर लागू नहीं होगा।

इस दौरान सरकार ने ऑफिस के समय में भी बदलाव करने की योजना बनाई है। MCD के ऑफिस सुबह 8:30 बजे से शाम 5 बजे तक चलेंगे। वहीं, दिल्ली सरकार (GNCTD) के तहत आने वाले ऑफिस सुबह 10 बजे से शाम 6:30 बजे तक खुले रहेंगे। बता दें कि अलग-अलग समय पर ऑफिस शुरू होने से एक ही समय पर सड़कों पर ज्यादा ट्रैफिक जुटने से भी बचा जा सकेगा।

एक और अहम कदम के तहत, सरकारी और प्राइवेट ऑफिस को सलाह दी गई है कि वे 1 नवंबर से 28 फरवरी के बीच अपने 50% कर्मचारियों से घर से काम करवाएं और बाकी 50% कर्मचारी ऑफिस से काम करें।

दरअसल, ठंड के महीनों में दिल्ली-NCR की हवा अक्सर ज्यादा खराब हो जाती है क्योंकि प्रदूषण और खराब मौसम की स्थितियां आपस में मिल जाती हैं। CAQM का कहना है कि हवा की धीमी गति, कम ऊंचाई पर हवा का मिलना-जुलना, कोहरा और कम तापमान प्रदूषण फैलाने वाले कणों को दूर नहीं होने देते, जिससे ये कण जमीन के पास जमा होने लगते हैं।

CAQM के 2026 के आकलन में यह भी पाया गया कि दिल्ली में सर्दियों के दौरान PM2.5 प्रदूषण कई वजहों से होता है, जिनमें सेकेंडरी पार्टिकुलेट्स, ट्रांसपोर्ट, बायोमास जलाना, धूल और इंडस्ट्री शामिल हैं।

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अब मिलेगी शुद्ध पनीर! FSSAI की एनालॉग प्रोडक्ट को ‘पनीर’ नाम से बेचने पर रोक लगाने की तैयारी

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी FSSAI ने पनीर को लेकर एक बड़ा प्रस्ताव रखा है। इसके तहत दूध से नहीं बने एनालॉग प्रोडक्ट को ‘पनीर’ नाम से बनाने और बेचने पर रोक लग सकती है। इसका मकसद है कि ग्राहक को प्रोडक्ट की असली सामग्री को लेकर भ्रम न हो।

क्या है एनालॉग पनीर?

डेयरी के मामले में एनालॉग ऐसे फूड प्रोडक्ट होते हैं, जो दूध या दूध से बने सामान जैसे दिखते हैं। उनका स्वाद या इस्तेमाल भी वैसा ही हो सकता है। लेकिन इनमें दूध काफी कम या बिल्कुल नहीं होता। इसकी जगह गैर-डेयरी सामग्री का इस्तेमाल होता है।

FSSAI ने क्या प्रस्ताव दिया?

FSSAI ने Food Safety and Standards (Prohibition and Restrictions on Sales) Amendment Regulations, 2026 का ड्राफ्ट जारी किया है। इससे 2011 के नियमों में बदलाव किया जाएगा।

ड्राफ्ट में Regulation 2.1.1 के तहत एक नया क्लॉज जोड़ने का प्रस्ताव है। इसमें दूध से नहीं बनी सामग्री वाले पनीर को शामिल किया गया है।

60 दिन में मांगे सुझाव

FSSAI ने इस ड्राफ्ट पर आम लोगों और संबंधित पक्षों से आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। आधिकारिक राजपत्र में नोटिफिकेशन की कॉपी सार्वजनिक होने के 60 दिन बाद इस प्रस्ताव पर आगे विचार किया जाएगा।

कई राज्यों में पहले से कार्रवाई

FSSAI के मुताबिक, कई राज्यों ने पहले ही एनालॉग पनीर के निर्माण और बिक्री पर रोक लगा रखी है। अब केंद्रीय स्तर पर भी इसके नाम और लेबलिंग को लेकर नियम सख्त करने का प्रस्ताव आया है।

ई-कॉमर्स कंपनियों पर भी कार्रवाई

पिछले छह महीनों में FSSAI ने फूड बिजनेस ऑपरेटरों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के खिलाफ कार्रवाई तेज की है। इसमें भ्रामक दावे, गलत लेबलिंग, हाइजीन से जुड़ी कमियां और दूसरे खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन शामिल है।

बुधवार को FSSAI ने Amazon, Swiggy Instamart, BigBasket, Flipkart India और Zepto के खिलाफ भी पेनल कार्रवाई शुरू की। इन पर भ्रामक दावों और प्रतिबंधित प्रोडक्ट की बिक्री समेत नियमों के पालन में कमी के मामले सामने आए हैं। एनर्जी ड्रिंक बनाने वाली कंपनियों और अल्कोहलिक बेवरेज कंपनियों पर भी कार्रवाई की गई है।

दिल्ली में 4,100 किलो मिलावटी सामान जब्त

त्योहारों से पहले दिल्ली सरकार के फूड सेफ्टी विभाग ने एक महीने तक अभियान चलाया। इस दौरान 4,100 किलो से ज्यादा मिलावटी खोया, छेना और एनालॉग पनीर जब्त कर नष्ट किया गया।

दिल्ली मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक, मोरी गेट खोया मंडी से 30 सैंपल लिए गए थे। इनमें से 22 इंसानों के खाने के लिए असुरक्षित पाए गए। इसके अलावा खोया और छेना के 19 सैंपल में से 12 घटिया गुणवत्ता वाले मिले। ये दोनों चीजें मिठाई बनाने में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होती हैं।

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