फ्रांस में महंगाई के खिलाफ येलो वेस्ट आंदोलन शुरू:प्रदर्शनकारियों और पुलिस में हिंसक झड़प; राजधानी पेरिस में 25 मेट्रो स्टेशन बंद किए गए

फ्रांस में बढ़ती महंगाई और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में शनिवार को हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। आंदोलन में छात्र, शिक्षक, मजदूर, किसान और बुजुर्ग शामिल हैं। कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुई हैं। देशभर में सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों ने हिंसा के लिए वामपंथी समूहों को जिम्मेदार ठहराया है। पुलिस ने राजधानी पेरिस में करीब 25 मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए हैं। इनमें राष्ट्रपति भवन, संसद व सरकारी कार्यालयों के आसपास के स्टेशन शामिल हैं। फ्रांस में प्रदर्शन से जुड़ीं 10 फोटोज… पुलिस से टकराव की 4 तस्वीरें आगजनी की 4 तस्वीरें… प्रतीकात्मक विरोध की 2 तस्वीरें स्कूलों से शुरू हुआ आंदोलन देशभर में फैला इस आंदोलन की शुरुआत पिछले महीने पेरिस के उत्तरी बाहरी इलाकों के स्कूलों में हुई थी। वहां शिक्षकों की गैरमौजूदगी और स्कूलों की खराब हालत को लेकर छात्रों में नाराजगी थी। धीरे-धीरे यह विरोध पूरे देश में फैल गया। अब इसमें सामाजिक असमानता, सरकारी खर्च में कमी और सार्वजनिक सेवाओं की खराब स्थिति जैसे मुद्दे भी शामिल हो गए हैं। फ्रांस की प्रमुख मजदूर यूनियनों में शामिल सीजीटी ने भी प्रदर्शन का समर्थन किया। यूनियन ने ज्यादा वेतन और पेंशन, कम कीमतों और लोगों की जरूरतें पूरी करने वाली सार्वजनिक सेवाओं की सुरक्षा की मांग की। प्रदर्शनकारियों की 4 अहम मांगें… 2018 के ‘येलो वेस्ट’ आंदोलन को दोहराने की अपील प्रदर्शन से पहले सोशल मीडिया पर लोगों से 2018 के ‘येलो वेस्ट’ आंदोलन को दोबारा शुरू करने की अपील की गई थी। इस आंदोलन में लोग पीले रंग की चमकदार जैकेट पहनकर सड़कों पर उतरते थे। फ्रांस में गाड़ियों के ड्राइवरों के लिए ऐसी जैकेट रखना जरूरी होता है, ताकि सड़क पर गाड़ी खराब होने या किसी आपात स्थिति में वे दूर से दिखाई दे सकें। प्रदर्शनकारियों ने इसी जैकेट को विरोध का प्रतीक बना लिया। इसलिए इस आंदोलन को फ्रेंच भाषा में ‘गिले जॉन’ और हिंदी में ‘येलो वेस्ट’ यानी ‘पीली जैकेट वाला आंदोलन’ कहा जाने लगा। मैक्रों ने शांति बनाए रखने की अपील की राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने शुक्रवार को लोगों से शांति बनाए रखने और सार्वजनिक व निजी संपत्ति का सम्मान करने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन करना और अपनी बात रखना संवैधानिक अधिकार है, लेकिन इसके साथ दूसरों का सम्मान करना भी जरूरी है।

IND vs WI 5th T20: चिन्नास्वामी स्टेडियम जाने से पहले जानें ये जरूरी नियम, कई जगहों पर रूट डायवर्जन

IND vs WI: भारत और वेस्टइंडीज के बीच 5 मैचों की टी20 सीरीज का पांचवां मुकाबला आज खेला जाएगा। भारत और वेस्टइंडीज के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज 2-2 की बराबरी पर है। अब दोनों टीमों के बीच आखिरी मुकाबला बेंगवुरू के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम खेला जाएगा, ये मुकाबला जीतने वाली टीम सीरीज अपने नाम कर लेगी। ऐसे में दोनों टीमों के लिए यह मैच काफी अहम है। वहीं अगर आप इस मुकाबले को देखने का प्लान कर रहे हैं तो स्टेडियम जाने से पहले पुलिस की ट्रैफिक एडवाइजरी जरूरी पढ़ लें।

किए गए हैं खास इंतजाम

भारत और वेस्टइंडीज के बीच होने वाले आखिरी टी20 मैच को देखते हुए बेंगलुरु में यातायात और सुरक्षा के खास इंतजाम किए गए हैं। चिन्नास्वामी स्टेडियम के आसपास की कई सड़कों पर गाड़ियों की पार्किंग पर रोक रहेगी। दर्शकों की सुविधा के लिए अलग-अलग पार्किंग स्थल बनाए गए हैं और स्टेडियम में आने-जाने के लिए खास गेट तय किए गए हैं। मैच खत्म होने के बाद घर लौटने वाले क्रिकेट प्रेमियों की मदद के लिए नम्मा मेट्रो की सेवाएं देर रात तक जारी रहेंगी। वहीं मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, बेंगलुरु में आसमान में बादल छाए रहने के साथ बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है।

देर रात चलेगी मेट्रो

भारत और वेस्टइंडीज के बीच मैच देखने जाने वाले दर्शकों की सुविधा के लिए बेंगलुरु मेट्रो ने आखिरी ट्रेनों के समय की जानकारी दी है। टी20 मैच के बाद दर्शकों को घर लौटने में परेशानी न हो, इसके लिए बेंगलुरु मेट्रो ने खास व्यवस्था की है। मैच देखने जाने वाले दर्शकों की सुविधा के लिए नम्मा मेट्रो ने आखिरी ट्रेनों का समय जारी किया है। व्हाइटफ़ील्ड और बोम्मासांद्रा से आखिरी ट्रेन रात 12 बजे चलेगी, जबकि सिल्क इंस्टीट्यूट और मदावरा से रात 12:15 बजे रवाना होगी। वहीं, आर.वी. रोड से आखिरी मेट्रो रात 1:30 बजे और मैजेस्टिक स्टेशन से रात 1 बजे मिलेगी। इसके अलावा, मैजेस्टिक के नादप्रभु केम्पेगौड़ा मेट्रो स्टेशन से पर्पल लाइन की आखिरी ट्रेन भी रात 1 बजे तक चलेगी।

यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे सफर से पहले नम्मा मेट्रो की आधिकारिक वेबसाइट पर आखिरी ट्रेन का समय जांच लें, क्योंकि हर स्टेशन और रूट का समय अलग हो सकता है। इससे मैच के बाद घर लौटने में आसानी होगी।

इन जगहों पर यातायात रहेगा प्रतिबंध

भारत और वेस्टइंडीज के बीच होने वाले टी20 मैच के दौरान बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम के आसपास ट्रैफिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई सड़कों पर पार्किंग प्रतिबंधित रहेगी। इनमें क्वींस रोड, एमजी रोड, लिंक रोड, राजभवन रोड, टी. चौडैया रोड, रेस कोर्स रोड, सेंट्रल स्क्वायर रोड और कब्बन रोड के कुछ हिस्से शामिल हैं। इसके अलावा, कामराजा रोड, सेंट मार्क रोड, म्यूजियम क्रॉस रोड, कस्तूरबा रोड, लैवेल रोड और विट्ठल माल्या रोड पर भी गाड़ियां खड़ी करने की अनुमति नहीं होगी। कब्बन पार्क के आसपास के कुछ इलाकों और फाउंटेन रोड पर भी पार्किंग पर रोक लगाई गई है।

वहीं, सिद्दलिंगैया सर्कल से बिशप कॉटन गर्ल्स स्कूल की ओर जाने वाले रास्ते और सिद्दलिंगैया सर्कल से RRMR सर्कल के बीच भी यातायात प्रतिबंध लागू रहेंगे। ऐसे में वाहन चालकों को इन सड़कों पर गाड़ी खड़ी करने से बचना चाहिए और परेशानी से बचने के लिए प्रशासन की ओर से तय किए गए पार्किंग स्थलों का ही इस्तेमाल करना चाहिए।

बारिश डालेगी मुकाबले में खलल?

भारत और वेस्टइंडीज के बीच होने वाले सीरीज़ के आखिरी टी20 मुकाबले से पहले बेंगलुरु के मौसम ने चिंता बढ़ा दी है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 17 अक्टूबर को शहर में बादल छाए रह सकते हैं और दिन में एक-दो बार बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। इस दौरान तापमान करीब 21 डिग्री सेल्सियस से 29 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। शाम के समय बारिश होने से स्टेडियम पहुंचने वाले दर्शकों को गीली सड़कों और ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ सकता है। बारिश के कारण मैच में रुकावट आने की आशंका भी है, लेकिन इससे यह तय नहीं होता कि मुकाबला देर से शुरू होगा या रद्द हो जाएगा। ऐसे में दर्शकों को सलाह दी जाती है कि वे स्टेडियम के लिए निकलने से पहले मौसम का ताजा हाल और मैच से जुड़ी आधिकारिक जानकारी जरूर देख लें।

सचाई झुठलाने की सरकारी कोशिश

क्या दिल्ली में 10 अक्टूबर को मेट्रो की सेवा नहीं बंद थी? क्या मेडिकल में दाखिले के लिए होने वाली नीट की परीक्षा के पेपर लीक नहीं हुए थे? क्या नेशनल टेस्टिंग एजेंसी जिन परीक्षाओं का आयोजन कराती है उनमें से पिछले नौ साल में किसी परीक्षा के पेपर लीक नहीं हुए हैं? राजधानी दिल्ली में या दूसरे भी किसी शहर में किसी भी नागरिक से ये सवाल पूछेंगे तो उसका जवाब यही होगा कि मेट्रो बंद थी और पेपर लीक हुए हैं। दिल्ली और एनसीआर में रहने वाला हर व्यक्ति निजी अनुभव से जानता है कि मेट्रो की सेवा बंद थी। जहां तक इंटरनेट सेवा की बात है तो उस पर तो एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट गुरुवार, 15 अक्टूबर को ही छपी है, जिसके मुताबिक पूरी दुनिया में इंटरनेट बंद होने के मामले में भारत दूसरे स्थान पर है। पहले स्थान पर सैनिक तानाशाही वाला देश म्यांमार है। सो, मेट्रो बंद थी और इंटरनेट भी बंद थे।

परंतु दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा है कि मेट्रो सेवा बंद नहीं थी। उसने कहा है कि सिर्फ 45 मेट्रो स्टेशनों पर एंट्री और एग्जिट बंद किया गया था। यानी मेट्रो की सेवा सीमित की गई थी। सोचें, कितना आसान है सरकार के लिए यह कह देना! 45 मेट्रो स्टेशनों पर लोग अंदर नहीं जा सकते थे और न बाहर निकल सकते थे। फिर यह सेवा सीमित करना कैसे हुआ? जिन लोगों को इन 45 मेट्रो स्टेशनों पर ट्रेन पकड़नी थी या इन स्टेशनों पर उतरना था उनके लिए तो मेट्रो बंद ही हुई न! सो, लाखों लोगों के लिए मेट्रो की सेवा बंद थी। सरकार एक तकनीकी टर्म का इस्तेमाल करके अदालत को बता रही है कि उसने अदालत की अवमानना नहीं की है। वास्तव में 10 और 11 अक्टूबर को कई इलाकों में मेट्रो बंद थी और ऐसा नहीं था कि मेट्रो ने स्टेशनों पर एंट्री और एग्जिट बंद की तो यात्रियों के लिए कोई और बंदोबस्त किया। एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक पहुंचाने के लिए कोई फीडर बस सेवा नहीं चलाई गई थी। इसलिए यह कहना सरासर गलत है कि मेट्रो सेवा बंद नहीं थी। यह हलफनामा देकर झूठ बोलना है।

ऐसे ही एक रिपोर्ट आई है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए ने शिक्षा मामलों की संसदीय समिति के सामने कहा है कि 2017 में एनटीए के गठन के बाद से आज तक कोई पेपर लीक नहीं हुआ है। यह झूठ नहीं, बल्कि सफेद झूठ है। कांग्रेस सांसद मुकुल वासनिक की अध्यक्षता वाली कमेटी के सामने एनटीए ने कहा कि कुछ अनियमितता का शिकायत हुई है लेकिन पेपर लीक नहीं हुआ है। सवाल है कि तीन मई 2026 को हुई नीट की परीक्षा को क्यों रद्द किया गया? सात मई को पेपर लीक होने की खबर आई और 12 मई को एनटीए ने परीक्षा रद्द दी, जिसका आयोजन 21 जून को किया गया। एनटीए और शिक्षा मंत्रालय दोनों की ओर से कई बार कहा गया कि पेपर लीक होने के कारण परीक्षा रद्द हुई है। इस बार तो किसी और धांधली या अनियमितता की खबर भी नहीं थी। इसी तरह 2024 के नीट की परीक्षा पेपर लीक और धांधली दोनों कारणों से प्रभावित हुई थी और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कई जगह परीक्षा रद्द की गई। उसके बाद पेपर लीक रोकने का एक कानून बना। जिस रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार ने कानून बनाया उसमें अनियमितता को ‘पेपर लीक केस’ के तौर पर दर्ज किया गया। सोचें, नीट परीक्षा को लेकर 356 केस दर्ज हैं, जेईई मेन्स के 31, यूजीसी नेट के 26 और सीयूईटी यूजी के 14 केस दर्ज हैं। पर एनटीए कह रहा है कि सब कुछ ठीक है!

दिल्ली मेट्रो ने सुप्रीम कोर्ट से माफी मांगी

नई दिल्ली। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन यानी डीएमआरसी ने सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी है। लेकिन साथ ही यह भी कहा है कि 10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान दिल्ली मेट्रो को बंद नहीं किया गया था। डीएमआरसी ने कहा है कि प्रदर्शन के दौरान मेट्रो ट्रेन सेवाओं में न कटौती की गई नही सेवा रद्द की गई। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने नौ अक्टूबर को बहुत साफ निर्देश दिया था कि मेट्रो सेवा नहीं बंद की जाए। इसके बावजूद अगले दिन 45 मेट्रो स्टेशन बंद थे।

इस पर अदालत ने नोटिस जारी करके पूछा था कि क्यों नहीं डीएमआरसी के खिलाफ अवमानना का मुकदमा चलाया जाए। इसके जवाब में डीएमआरसी ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामे देकर बताया कि 303 में से 45 स्टेशनों पर एंट्री और एग्जिट सीमित की गई थी। वहीं, 258 स्टेशन यानी मेट्रो नेटवर्क का 85 फीसदी से ज्यादा हिस्सा पूरी तरह चालू रहा। डीएमआरसी ने कहा कि 45 स्टेशनों पर एंट्री और एग्जिट सीमित करने का फैसला पुलिस के आकलन के आधार पर किया गया था।

गौरतलब है कि पहले खबर आई थी कि 57 मेट्रो स्टेशन बंद होंगे। इसके बाद नौ अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि दिल्ली की मेट्रो सेना और दिल्ली आने या दिल्ली से बाहर जाने वाली ट्रेनों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक न लगे। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने डीएमआरसी और अन्य पक्षों को आदेश पालन हलफनामा दाखिल करने का भी निर्देश दिया था।

दिल्ली में प्रदर्शन पर वर्ल्ड मीडिया:NYT बोला- राजधानी किले में तब्दील, विरोध को दबाना मुश्किल, अल-जजीरा ने लिखा- सरकार के लिए सबसे गंभीर चुनौती

भारत में SIR को लेकर विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इस मामले को दुनियाभर के मीडिया संस्थानों को प्रमुखता से कवर किया गया है।

NYT – सरकार के लिए सत्ता बनाए रखने के तरीके कमजोर पड़े अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स लिखता है कि भारत में एक समय कमजोर पड़ चुका विपक्ष अब फिर सक्रिय होता दिखाई दे रहा है। विपक्षी दल युवाओं के आंदोलन से बनी राजनीतिक जगह का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं। शनिवार को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की राजधानी एक किले में तब्दील हो गई। भारतीय अधिकारियों ने जरूरत से ज्यादा ताकत का इस्तेमाल किया, तो देश के युवाओं ने भी उतने ताकतवर तरीके से इसका विरोध किया। मोदी समर्थक पहले विरोधियों के प्रदर्शन को कमजोर बताकर या ‘देशद्रोही’ कहकर उनका विरोध कम करने की कोशिश करते रहे हैं। लेकिन इस आंदोलन में समाज के अलग-अलग वर्गों के लोग शामिल हैं। इससे प्रदर्शनकारियों को उसी तरीके से निशाना बनाना सरकार के लिए मुश्किल हो रहा है। वॉशिंगटन पोस्ट – मोदी और चुनाव आयोग के खिलाफ गुस्सा बढ़ा अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा कि भारत में युवाओं के विरोध-प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ गुस्सा बढ़ रहा है। वोटर लिस्ट में बदलाव के विरोध में आंदोलन कर रहे युवाओं ने दिल्ली में प्रदर्शन का ऐलान किया था, लेकिन पुलिस ने जंतर-मंतर पहुंचने से पहले ही कई नेताओं, विपक्षी सांसदों और छात्र कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने दिल्ली में सुरक्षा बढ़ाई, जगह-जगह बैरिकेडिंग की और वाहनों की जांच की। यह आंदोलन ऐसे समय तेज हुआ है, जब इससे पहले पेपर लीक के मुद्दे पर हुए युवा प्रदर्शनों के बाद जुलाई में शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा था। CNN- सरकार ही नहीं CJP के लिए भी बड़ी परीक्षा अमेरिकी अखबार CNN लिखता है कि कई हफ्तों तक धरने और मार्च चलने के बाद जुलाई में धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया था। यह मोदी सरकार के लिए एक राजनीतिक झटका था। विपक्षी दल भी सरकार को इस तरह का झटका नहीं दे पाए थे।अब मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ हो रहा प्रदर्शन CJP के लिए एक परीक्षा है। पार्टी यह देखना चाहती है कि क्या शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के लिए अपनाई गई उसकी सफल रणनीति को देश की चुनाव व्यवस्था जैसे बड़े मुद्दे पर भी दोहराया जा सकता है। साउथ चाइना पोस्ट- भारत में चुनाव प्रक्रिया पर सवाल हॉन्गकॉन्ग के अखबार साउथ चाइना पोस्ट ने लिखा वोटर लिस्ट में करीब 13 करोड़ नाम हटाए जाने की खबर के बाद विरोध तेज हुआ है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वोटर लिस्ट में बदलाव से भाजपा को फायदा पहुंच सकता है। शनिवार को दिल्ली में प्रदर्शन रोकने के लिए हजारों पुलिस और पैरामिलिट्री जवान तैनात किए गए, कई मेट्रो स्टेशन और बाजार बंद रहे और 2,000 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया। रिपोर्ट ने इस विरोध को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अब तक की गंभीर राजनीतिक चुनौतियों में से एक बताया है। अल जजीरा – PM मोदी के लिए अब तक की सबसे गंभीर चुनौती अल जजीरा ने विरोध प्रदर्शन को लेकर लिखा है कि ये PM मोदी और उनकी सरकार के लिए अब तक की सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक हैं। पिछले हफ्ते इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद विरोध और तेज हो गया। रिपोर्ट में बताया गया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के वोटर लिस्ट में किए गए बदलावों पर सवाल उठाए थे। इन बदलावों के चलते वोटर लिस्ट से करीब 13 करोड़ नाम हटा दिए गए थे। भाजपा का कहना है कि चुनावों में उसकी सफलता मोदी की लोकप्रियता और भारत की आर्थिक तरक्की को दिखाती है। पार्टी ने विपक्ष पर गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया है। —————————- यह खबर भी पढ़ें… CJP का दिल्ली पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम: कहा- प्रदर्शन की इजाजत नहीं मिली तो फिर आंदोलन करेंगे कॉकरोच जनता पार्टी ने दिल्ली पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उसने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की तारीख नहीं मिली तो फिर आंदोलन करेंगे। पूरी खबर पढ़ें…

दिल्ली के दो प्रदर्शनों का फर्क

राजधानी दिल्ली में छह से नौ अक्टूबर तक विपक्षी पार्टियों ने प्रदर्शन किया। राहुल गांधी के साथ 19 विपक्षी पार्टियों के 178 लोकसभा सदस्य और 62 राज्यसभा सदस्य प्रदर्शन कर रहे थे। विपक्ष ने 30 सितंबर को साझा बैठक करके तय किया था कि छह अक्टूबर को चुनाव आयोग के मुख्यालय निर्वाचन सदन का घेराव करेंगे। इसके बावजूद न तो निर्वाचन सदन को सुरक्षित रखने के लिए देश भर से अर्धसैनिक बुलाए गए और न विपक्ष को रोकने के लिए उनके लोगों को घरों में नजरबंद किया गया। सुरक्षा बलों ने किसी को नहीं रोका। संसद भवन से मार्च शुरू हुआ तो नीति आयोग के सामने उसे रोक दिया गया। उसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने थोड़ी उछलकूद की, राहुल बैरिकेड पर चढ़े और फिर आकाशवाणी परिसर में धरने पर बैठ गए, जहां से करीब आठ घंटे बाद उनको हटा दिया गया। दूसरे दिन भी इसी तरह का प्रदर्शन हुआ। विपक्षी सांसद जंतर मंतर की ओर बढ़े। पुलिस ने उन्हें दो सौ मीटर पहले रोक दिया। वहां प्रियंका गांधी वाड्रा जमीन पर लेट गईं, लेकिन पुलिस सबको उठा ले गई और दो घंटे में छोड़ दिया। उसके अगले दिन राजघाट और फिर राष्ट्रपति भवन तक मार्च हुआ। किसी को रोकने के लिए कोई अतिरिक्त प्रयास नहीं हुआ।

लेकिन 10 अक्टूबर के कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन को रोकने के लिए देश के अलग अलग राज्यों से अर्धसैनिक बलों की 221 टुकड़ियां दिल्ली बुलाई गईं। आठ से 12 अक्टूबर तक उनको दिल्ली में तैनात किया गया। दिल्ली पुलिस के जवानों, अधिकारियों की छुट्टी रद्द कर दी गई। 15 हजार जवान तैनात किए गए। ड्रोन से निगरानी शुरू हुई। मेट्रो स्टेशन बंद किए गए। ट्रेनें रद्द की गईं। कनॉट प्लेस और आसपास की दुकानें बंद करा दी गईं। इंटरनेट बंद करा दिया गया। दो दिन शराब की दुकानें बंद रहीं। सीजेपी के समर्थकों को उनके घरों से गिरफ्तार किया गया। पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने शनिवार को पूरी दुनिया के जंग का मैदान बना दिया। सेंट्रल दिल्ली से बहुत दूर के इलाकों में भी बैरिकेडिंग थी, चेकिंग हो रही थी और लोग पकड़े जा रहे थे।

ज्ञानेश के खिलाफ प्रदर्शन जारी

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग लेकर रविवार को लगातार दूसरे दिन दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी और लेफ्ट पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। शनिवार को मुकाबले रविवार को प्रदर्शन की तीव्रता कम थी लेकिन फिर सेंट्रल दिल्ली सहित अन्य कई हिस्सों में प्रदर्शन हुए और करीब दो सौ लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया। पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स ने प्रदर्शनकारियों को भगाने के बाद कनॉट प्लेस में फ्लैग मार्च किया। कई जगह युवाओं के अभिभावक भी सड़कों पर उतरे और उन्होंने आरोप लगाया कि बच्चों को पुलिस हिरासत में ले रही है।

रविवार को लगातार दूसरे दिन एक तरफ प्रदर्शन हो रहे थे तो दूसरी ओर पूरी दिल्ली में भारी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात रहे। इससे पहले सुबह 10 बजे के करीब कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को रिहा किया गया। वे करीब 23 घंटे हिरासत में रहे। उन्होंने एक बॉन्ड भी भरा, जिसके बाद उनको रिहा किया गया।

बहरहाल, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जंतर मंतर नहीं जाने दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारी कनॉट प्लेस के इलाके में जमा होने लगे। वहां पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया तो सीपीएम के छात्र संगठन एसएफआई की आईसी घोष पुलिस की बस के सामने आ गईं। सीपीएम के छात्रों ने बस के सामने बैठ कर प्रोटेस्ट किया। गौरतलब है कि एसएफआई ने दिल्ली पुलिस के ऊपर महिला प्रदर्शनकारियों से बदसलूकी का आरोप लगाया था।

इस बात को लेकर एसएफआई ने विरोध करते हुए राजीव चौक मेट्रो स्टेशन गेट नंबर सात के सामने कई महिला प्रदर्शनकारियों के साथ हाथों में तिरंगा झंडा लेकर प्रदर्शन किया। ये सभी लोग बस के आगे जमीन पर बैठ गए। करीब 10 मिनट की जद्दोजहद के बाद दिल्ली पुलिस और अतिरिक्त सुरक्षा बलों ने सभी हटा कर बस में बैठाया और वहां से हटाया। कुछ प्रदर्शनकारी हाथ में डंडे लेकर कनॉट प्लेस में घूम रहे थे। उनके साथ पुलिस की झड़प भी हुई। पुलिस ने लाउडस्पीकर के जरिए लोगों से भीड़ नहीं लगाने की अपील की। प्रदर्शन को देखते हुए कनॉट प्लेस के कई इलाकों में दुकानें बंद रहीं। लोगों ने प्रदर्शन का नया तरीका निकाल लिया। कई नावों पर सवार लोगों ने यमुना नदी में प्रदर्शन किया।

मेट्रो, ट्रेन, इंटरनेट सेवा बहाल करने का आदेश

नई दिल्ली। शनिवार, 10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन से पहले मेट्रो और ट्रेन सेवाएं बंद करने, इंटरनेट बाधित करने और लोगों को हिरासत में लेने से जुड़ी याचिकाओं पर रविवार को छुट्टी के दिन सुप्रीम कोर्ट ने विशेष सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दिए गए अपने आदेश का पालन नहीं करके अदालत की अवमानना करने के मामले की भी सुनवाई की। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि मेट्रो सेवाएं सामान्य रूप से चलनी चाहिए, इंटरनेट बाधित नहीं होना चाहिए और लोगों की आवाजाही नहीं रोकी जानी चाहिए।

शैलेंद्र मणि त्रिपाठी और मेनका गुरुस्वामी की ओर से दायर याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि नौ अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया था कि प्रदर्शन के कारण दिल्ली मेट्रो और यहां आने वाली ट्रेनों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक न लगाई जाए। इसके बावजूद शनिवार को कोर्ट के आदेश का उल्लंघन हुआ। इस पर कोर्ट ने दिल्ली के अधिकारियों को नोटिस जारी कर मंगलवार तक जवाब मांगा। अदालत ने पूछा है कि क्यों नहीं उनके खिलाफ अवमानना का मुकदमा चलाया गया।

इसके साथ ही रविवार की सुनवाई में कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट परिसर के आसपास भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी बीएनएसएस की धारा 163 लागू होने की जानकारी देने वाला बोर्ड भी हटाने का निर्देश दिया। बेंच ने कहा कि बोर्ड हटाया जाए, ताकि नागरिकों और वकीलों को न्याय तक पहुंचने में परेशानी न हो। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि बीएनएसएस की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू क्षेत्रों से बाहर शांतिपूर्ण और बिना हथियार के प्रदर्शन कर रहे हैं, उन्हें हिरासत में न लिया जाए।

रविवार को विशेष सुनवाई जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने की। सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार और दिल्ली पुलिस का पक्ष रखा। दूसरी ओर कपिल सिब्बल, गोपाल शंकरनारायणन, मेनका गुरुस्वामी, संजय हेगड़े और शादान फरासत ने याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखा। केंद्र की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि दिल्ली में इंटरनेट सेवाएं बहाल कर दी गई हैं और सभी मेट्रो स्टेशन और ट्रेनें पूरी तरह चालू हैं। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य पेशेवरों के कामकाज में बाधा नहीं डाली जाएगी।

Delhi CJP Protest: माकपा सांसद संग मारपीट के बाद सड़क पर घायल छोड़ने का आरोप, कौन हैं MP जॉन ब्रिटास?

Delhi CJP Protest: राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया यानी CPI-M (मार्क्सवादी) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास को हिरासत में लिए जाने का मामला सामने आया है। CPI-M ने रविवार (11 अक्टूबर) को आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने उनके सांसद के साथ बर्बरतापूर्ण तरीके से मारपीट की और बाद में उन्हें सड़क किनारे छोड़ दिया। पार्टी के मुताबिक, उस समय ब्रिटास घायल थे। उन्हें चलने में भी परेशानी हो रही थी। हालांकि, सांसद को चोट कैसे और कहां लगी, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

माकपा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो शेयर करते हुए दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। पार्टी के अनुसार, वीडियो में ब्रिटास दिल्ली पुलिस की बस के पास बैठे नजर आ रहे हैं। एक व्यक्ति उन्हें उठने और चलने में मदद करता दिखाई देता है। वीडियो में एक पुलिसकर्मी भी उन्हें ऑटोरिक्शा तक पहुंचने में सहायता करता नजर आ रहा है।

जंतर-मंतर की ओर मार्च के दौरान हिरासत में लिए गए सांसद

जानकारी के मुताबिक, रविवार को ब्रिटास उन कई प्रदर्शनकारियों में शामिल थे, जिन्हें दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित इनर सर्कल और राजीव चौक से जंतर-मंतर की ओर मार्च करने के दौरान सुरक्षा कर्मियों ने हिरासत में लिया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बुलाए गए इस प्रदर्शन का रविवार को दूसरा दिन था।

माकपा ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने सांसद के साथ दुर्व्यवहार किया। पार्टी ने अपनी X पोस्ट में कहा कि दिल्ली पुलिस ने सभी सीमाएं पार कर दी हैं। हालांकि, ब्रिटास को लगी चोटों की परिस्थितियों और पुलिस के साथ कथित झड़प के पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

शनिवार को भी हिरासत में लिए गए थे जॉन ब्रिटास

जॉन ब्रिटास को शनिवार को भी प्रदर्शन के पहले दिन हिरासत में लिया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, उस दिन दिल्ली पुलिस ने करीब 7,000 लोगों को हिरासत में लिया था। कस्टडी में लिए गए नेताओं में चार पूर्व मुख्यमंत्री भी शामिल बताए गए। प्रदर्शन CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित किया गया था। रविवार को भी प्रदर्शनकारियों के मार्च के दौरान पुलिस की कार्रवाई जारी रही।

माकपा के राज्यसभा सदस्यों जॉन ब्रिटास और ए. ए. रहीम ने शनिवार को मुंबई से दिल्ली पहुंचने पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके और अन्य लोगों के खिलाफ की गई कार्रवाई की रविवार को आलोचना की। CJP संस्थापक दीपके और दो अन्य नेताओं सौरव दास तथा आशुतोष रांका को शनिवार को इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोरट् पर विमान के उतरने के बाद दिल्ली पुलिस ने कथित तौर पर फ्लाइट के अंदर ही हिरासत में ले लिया था।

ब्रिटास ने दिल्ली में पत्रकारों से कहा कि CJP नेताओं के साथ अपहरणकर्ताओं या कथित तौर पर बड़े वित्तीय घोटालों को अंजाम देने वालों से भी बुरा व्यवहार किया गया। ब्रिटास ने पत्रकारों के खिलाफ की गई कार्रवाई की भी निंदा की और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए यह सब कर रहे हैं। रहीम ने आरोप लगाया कि कॉजपा के कई कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों को प्रताड़ित किया गया।

केजरीवाल के साथ भी धक्का-मुक्की का आरोप

इस मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी अपने राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के दो बार मुख्यमंत्री रह चुके अरविंद केजरीवाल के साथ शनिवार को कथित तौर पर धक्का-मुक्की किए जाने का आरोप लगाया था। पार्टी के अनुसार, हिरासत में लिए जाने के बाद केजरीवाल को जाफरपुर कलां पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जहां उन्हें करीब छह घंटे तक रखा गया। फिलहाल, जॉन ब्रिटास के साथ कथित मारपीट को लेकर माकपा के आरोपों और सामने आए वीडियो के आधार पर मामला चर्चा में है।

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जॉन ब्रिटास कौन हैं?

डॉ. जॉन ब्रिटास केरल से आने वाले भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी CPI(M) के वरिष्ठ नेता, राज्यसभा सांसद और अनुभवी पत्रकार हैं। वह मलयालम मीडिया जगत का भी जाना-पहचाना चेहरा हैं। जॉन ब्रिटास केरल से CPI(M) के टिकट पर राज्यसभा के लिए चुने गए थे। उन्होंने 24 अप्रैल 2021 को राज्यसभा सांसद के रूप में अपना कार्यकाल शुरू किया। राजनीति में आने से पहले उन्होंने तीन दशक से अधिक समय तक पत्रकारिता और टीवी के क्षेत्र में काम किया। वह मलयालम न्यूज चैनल कैराली टीवी नेटवर्क (Kairali TV) के मैनेजिंग डायरेक्टर और मुख्य संपादक भी रहे हैं।

Delhi CJP Protest: दिल्ली में सभी मेट्रो स्टेशन खुले! रेल और इंटरनेट सेवाएं भी बहाल, बैरिकेडिंग और पुलिस हिरासत पर भी सुप्रीम कोर्ट सख्त

Delhi CJP Protest News: राजधानी दिल्ली में 10 अक्टूबर को हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई, मेट्रो और रेल सेवाओं पर प्रतिबंध, इंटरनेट सेवाएं बंद करने तथा लोगों को हिरासत में लिए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रविवार (11 अक्टूबर) को अहम निर्देश जारी किए। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि शांतिपूर्ण ढंग से इकट्ठा होने वाले लोगों को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में नहीं लिया जा सकता। अदालत ने कहा, “ऐसे लोगों को अवैध रूप से हिरासत में न लिया जाए।” साथ ही शीर्ष अदालत ने मेट्रो और रेल सेवाओं को सामान्य रूप से चलाने, कानून के मुताबिक इंटरनेट सेवाएं बिना किसी रुकावट के जारी रखने और लोगों एवं ट्रैफिक की आवाजाही की अनुमति देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के बाहर लगी धारा 163 का बोर्ड हटाने का भी निर्देश दिया, ताकि न्याय तक पहुंच को लेकर कोई आशंका न रहे।

दिल्ली में मेट्रो-ट्रेन और इंटरनेट चालू रहेंगी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए मेट्रो, रेल और इंटरनेट सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहनी चाहिए। शीर्ष अदालत ने उसके निर्देश के उल्लंघन के आरोप में अधिकारियों के खिलाफ अवमानना ​​कार्यवाही शुरू करने के अनुरोध वाली याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया है। अदालत ने कहा कि वकीलों को उनके पेशेवर कर्तव्यों का निर्वहन करने में किसी तरह की बाधा नहीं पहुंचायी जानी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि शांतिपूर्ण तरीके से जुटने वालों को अवैध रूप से हिरासत में न लिया जाए। शीर्ष अदालत ने ट्रैफिक नियमों के अधीन लोगों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही बैरिकेड्स लगाने की जरूरत की समीक्षा करने को कहा। उच्चतम न्यायालय ने कहा, “कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए मेट्रो, रेल और इंटरनेट सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहनी चाहिए।”

केंद्र सरकार को नोटिस जारी

अदालत ने केंद्र सरकार को उस याचिका पर नोटिस भी जारी किया, जिसमें दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन के कारण मेट्रो और ट्रेन सेवाओं पर पूरी तरह रोक नहीं लगाने संबंधी न्यायालय के निर्देश के कथित उल्लंघन को लेकर अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का अनुरोध किया गया है। जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने विशेष सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से यह सुनिश्चित करने को कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत को ध्यान में रखते हुए दिल्ली मेट्रो अपनी सामान्य शेड्यूल के अनुसार चले और इंटरनेट सेवाएं बाधित न हों।

पीठ ने कहा, “9 अक्टूबर 2026 के हमारे पिछले आदेश के उल्लंघन और 10 अक्टूबर को दिल्ली में बड़ी संख्या में लोगों को अवैध रूप से हिरासत में लिए जाने के आरोपों वाली तत्काल सुनवाई की याचिकाओं के मद्देनजर न्यायालय ने विशेष सुनवाई की।”

‘निर्देशों का खुले तौर पर उल्लंघन किया गया’

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “वरिष्ठ वकीलों ने दलील दी कि निर्देशों का खुले तौर पर उल्लंघन किया गया। मेट्रो रेल सेवा संचालित नहीं हो रही थी। नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन बंद रहे। ट्रैफिक संबंधी कोई एडवाइजरी जारी नहीं किया गया। बड़ी संख्या में लोगों को अनुचित रूप से परेशान किया गया। लोगों को अवैध रूप से हिरासत में लिया गया। जिन स्थानों पर यह सब हुआ, उनमें वे इलाके भी शामिल थे, जो भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 163 के तहत जारी निषेधाज्ञा के दायरे में नहीं आते थे।”

पत्रकारों को लेकर पुलिस को निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने मेहता से यह सुनिश्चित करने को भी कहा कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य लोगों को अपने पेशेवर कर्तव्यों का निर्वहन करने से न रोका जाए। सुनवाई के दौरान मेहता ने कहा कि 10 अक्टूबर को मेट्रो नेटवर्क के कुल 303 स्टेशन में से केवल 45 पर एंट्री और एग्जिट प्रतिबंधित था। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के नौ अक्टूबर के आदेश का उल्लेख किया गया है। यह आदेश दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर 57 मेट्रो स्टेशन को बंद करने और दिल्ली आने वाली ट्रेनों को रद्द किए जाने के खिलाफ दायर एक अन्य याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार तक सरकार से जवाब मांगा है।

निर्वाचन आयोग के कामकाज में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP और कुछ छात्र संगठनों ने प्रदर्शन का ऐलान किया था। सरकार ने शनिवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था करके और 7,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर जंतर-मंतर पर प्रस्तावित बड़े प्रदर्शन को रोक दिया। हिरासत में लिए गए लोगों में CJP नेता अभिजीत दीपके, विपक्ष के कई नेता और यूट्यूबर ध्रुव राठी भी शामिल थे।

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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश की मुख्य बातें

  • दिल्ली मेट्रो और रेलवे सेवाएं सामान्य रूप से चलनी चाहिए। पाबंदियां तभी लगाई जा सकती हैं जब वे आर्टिकल 19(2) के तहत सही ठहराई जा सकें।
  • कानूनी पाबंदियां लगाने की वैधानिक शक्तियों पर असर डाले बिना, कानून के अनुसार इंटरनेट सेवाएं चालू रहनी चाहिए।
  • दिल्ली में लोगों और गाड़ियों की आवाजाही में बेवजह रुकावट नहीं आनी चाहिए। कानून-व्यवस्था और ट्रैफिक की जरूरतों के आधार पर बैरिकेड्स की तुरंत समीक्षा की जानी चाहिए।
  • किसी को भी गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में नहीं लिया जा सकता। किसी भी हिरासत के मामले में कानून द्वारा तय प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।
  • कानून के अनुसार शांतिपूर्ण सभाओं की अनुमति दी जानी चाहिए, खासकर उन इलाकों के बाहर जहां धारा 163 BNSS के तहत सख्ती लागू है।
  • सुप्रीम कोर्ट और अन्य अदालतों तक बिना रुकावट पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के पास धारा 163 की पाबंदियों वाला कोई भी नोटिस बोर्ड अगर अभी भी लगा है, तो उसे हटा दिया जाना चाहिए।
  • सुप्रीम कोर्ट ने इस आश्वासन को दर्ज किया कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य पेशेवरों को अपना काम करने में नहीं रोका जाएगा।
  • शीर्ष अदालत के 9 अक्टूबर के आदेश के उल्लंघन के आरोप में अवमानना ​​की कार्यवाही के तहत नोटिस जारी किया गया। अधिकारियों को मंगलवार, 13 अक्टूबर तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी, जिसमें मेट्रो पाबंदियों और रेलवे की सलाहों का विवरण शामिल हो।
  • बड़े पैमाने पर हिरासत और उससे जुड़े अन्य मामलों के आरोपों वाली ‘हेबियस कॉर्पस’ (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिकाओं पर 13 अक्टूबर को मुख्य मामलों के साथ सुनवाई होगी।
  • अदालत ने कहा कि राज्य को कथित हिरासत के हालात, तरीके और कानूनी आधार के बारे में बताना होगा, क्योंकि आर्टिकल 32 के तहत मौलिक अधिकारों की रक्षा और उन्हें लागू करना कोर्ट का कर्तव्य है।