मुंबई में जंतर मंतर जैसा प्रदर्शन

मुंबई। कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने मुंबई के शिवाजी पार्क को जंतर मंतर में बदल दिया। शुक्रवार, दो अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती के दिन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग लेकर मुंबई के लोग सड़कों पर उतरे। बड़ी संख्या में लोग शिवाजी पार्क में इकट्ठा हुए और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आंदोलन का नेतृत्व किया। उनके साथ राजनीति और फिल्म जगत की बड़ी हस्तियां भी शामिल हुईं। देर शाम तक प्रदर्शनकारी शिवाजी पार्क में जमा रहे।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उनके बेटे आदित्य ठाकरे भी आंदोलन में शामिल हुए। फिल्मी हस्तियों की बात करें तो नसीरूद्दीन शाह से लेकर शबाना आजमी और विशाल ददलानी से लेकर विशाल भारद्वाज तक अनके अभिनेता, गायक, गीतकार, संगीतकार, निर्माता और निर्देशक शिवाजी पार्क पहुंचे और आंदोलन में शामिल हुए। इससे पहले सीजेपी ने ऐलान किया था कि अगर प्रशासन ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी तो जेल भरो अभियान चलेगा। हालांकि उसकी नौबत नहीं आई।

सीजेपी के इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए। वे सोशल मीडिया में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे मीम्स के पोस्टर बना कर पहुंचे थे। सब एक सुर में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान मंच पर मौजूद सभी लोगों ने महात्मा गांधी की तस्वीर वाली टीशर्ट पहनी थी। गौरतलब है कि इससे पहल सीजेपी ने 20 जून से 25 जुलाई तक दिल्ली में जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया था, जो धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ खत्म हुआ था।

बहरहाल, शुक्रवार के प्रदर्शन में अभिजीत दीपके ने कहा, ‘जब भारत के प्रधानमंत्री अमेरिका जाते हैं, तब भी वहां कहा जाता है कि ये गांधी के देश से आए हैं। गांधी देश की आत्मा हैं, आंबेडकर रीढ़ की हड्डी और नेहरू दिमाग हैं’। दीपके ने भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि भाजपा ‘एक देश, एक पार्टी’ चाहती है। प्रदर्शन के दौरान सीजेपी ने सरकार के सामने अपनी तीन मांगें रखीं, जिसमें पहली मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की है। इसके बाद जनवरी 2025 की मतदाता सूची बहाल करने और मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया को बंद करने की मांग की गई।

सीजेपी के प्रदर्शन में अभिनेत्री शबाना आजमी ने कहा, ‘हमारा वोट हमारा अधिकार है, हमारी आवाज है। जब मतदाता सूची से हमारे नाम हटा दिए जाएं, तो हम क्या करेंगे’? गायक संगीतकार विशाल ददलानी ने प्रदर्शन के दौरान गाना गाया। मशहूर फिल्मकार विशाल भारद्वाज अपनी पत्नी रेखा भारद्वाज के साथ प्रदर्शन में पहुंचे थे। उन्होंने इस दौरान कहा, ‘मैं यहां केवल अपना समर्थन देने आया हूं’। मुंबई में विरोध प्रदर्शन के दौरान सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई का जिक्र किया और कहा, ‘दिल्ली पुलिस ने फिर से बर्बरता की है, सुधर जाओ वरना हम तुम्हें सुधार देंगे’।

दिल्ली पुलिस नहीं रोक सकी प्रदर्शन

नई दिल्ली। जंतर मंतर पर पिछली बार हुए प्रदर्शन से सबक लेकर इस बार दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के भरपूर प्रयास किए। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन के लिए इकट्ठा हुए। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग करते हुए हजारों की संख्या में लोग नई दिल्ली में अलग अलग जगहों पर जमा हुए। पुलिस ने लोगों को जंतर मंतर पर पहुंचने से रोकने के लिए कई किलोमीटर पहले से रास्ते बंद कर दिए थे और 11 मेट्रो स्टेशन भी बंद कर दिए थे। फिर भी देर शाम तक हजारों लोग कनॉट प्लेस और आसपास के इलाके में जमा रहे। कई जगह पुलिस के साथ लोगों की झड़प हुई और कई जगह जम कर बवाल हुआ।

शुक्रवार की सुबह से ही जंतर मंतर के आसपास हजारों की संख्या में पुलिसकर्मी और अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात थे। सुबह सबसे पहले आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज और पार्टी के विधायक संजीव झा पहुंचे थे। पुलिस ने उनको तत्काल हिरासत में लेकर बस में बैठाया और वहां से हटा दिया। आप की नेता व पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और आईसा की नेता नेहा बोरा को भी पुलिस ने हिरासत में लेकर वहां से हटाया। पुलिस ने करीब सात सौ लोगों को हिरासत में लिया। सबको जबरदस्ती बसों में भर कर जंतर मंतर से हटाया गया।

पुलिस ने इस प्रदर्शन को रोकने के लिए जंतर मंतर से पांच किलोमीटर दूर कर रास्ते बंद किए थे। लोगों को लोधी रोड पर रोका जा रहा था तो तीन मूर्ति के पास भी रास्ता बंद कर दिया गया था। सेंट्रल दिल्ली के आसपास के सारे मेट्रो स्टेशन बंद थे। कनॉट प्लेस से लेकर पटेल चौक, जीपीओ, टॉल्स्टॉय मार्ग, जंतर मंतर रोड, संसद मार्ग और आसपास की सड़कों पर ट्रैफिक बंद कर दिया गया था।

गौरतलब है कि 30 सितंबर को विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ब्लॉक के नेताओं की बैठक हुई थी, जिसमें दो से आठ अक्टूबर तक चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन का फैसला हुआ था। शुक्रवार को गांधी जयंती के मौके पर युवाओं, छात्रों और अलग अलग समूहों के लोगों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इसमें एसआईआर के जरिए वोट काटने से लेकर रोजगार की समस्या तक का मुद्दा उठाया गया। पुलिस ने हालांकि इस प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी थी। तब भी देर शाम तक हजारों नौजवान कनॉट प्लेस और आसपास के इलाके में जमा रहे।

इस प्रदर्शन में आम आदमी पार्टी और वामपंथी दलों के अलावा सीपीआई माले के छात्र संगठन आइसा, सीपीएम के छात्र संगठन एसएफआई और कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई के सदस्य शामिल हुए। इसके अलावा कई और सामाजिक समूहों के लोग प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पहुंचे थे। प्रदर्शन में लोगों की मुख्य मांग मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की थी। गौरतलब है कि एसआईआर में अब तक 13 करोड़ से ज्यादा नाम कट चुके हैं। राजनीतिक दल इसे चुनौती दे रहे हैं।

राहुल का ज्ञानेश कुमार पर हमला

नई दिल्ली। भले कांग्रेस पार्टी शुक्रवार को हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं हुई थी लेकिन जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई की राहुल गांधी ने निंदा की। राहुल ने कहा कि लाठी से लोगों को रोका जा सकता है, सवालों को नहीं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा और कहा कि उनको इस्तीफा देना होगा। राहुल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि हजारों नौजवान वोट चोरी के खिलाफ अपने संवैधानिक अधिकार के साथ शांतिपूर्वक सड़कों पर हैं। उनकी मांग साफ है कि ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें और लोकतंत्र बचे।

ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि युवाओं को सड़कों पर पीटा जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘आज गांधी जयंती के दिन हजारों नौजवान वोट चोरी के खिलाफ सड़कों पर हैं। ये लोग शांतिपूर्वक, बिना हिंसा के, अपने संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करते हुए प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांग साफ है, ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें। लोकतंत्र बचाओ और मोदी शाह सरकार का जवाब’? उन्होंने आगे लिखा, ‘लड़के, लड़कियों को सड़कों पर घसीटा जा रहा है। सैकड़ों हिरासत में हैं। उनका कसूर सिर्फ ये है कि उन्होंने वोट चोरी पर सवाल पूछा’।

राहुल गांधी ने महात्मा गांधी को उनकी जयंती पर याद करते हुए कहा, ‘बापू ने यही सिखाया था कि सच बोलो, शांति से लड़ो और यही सरकार को सबसे ज्यादा डराता है। क्योंकि लाठी से भीड़ रोकी जा सकती है, सवाल नहीं। ज्ञानेश कुमार जाएंगे और जिस सिस्टम ने उन्हें बिठाया है, वो भी जाएगा’।

‘CM विजय को गले लगाना है…’ जंतर-मंतर सड़क पर लेटी महिला की अनोखी मांग, Video वायरल

दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान एक महिला का अलग अंदाज देखने को मिला। सोशल मीडिया पर महिला का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में महिला प्रदर्शन स्थल से हटने से इनकार कर दिया। महिला ने कहा कि वह एक्टर और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय से मिलकर उन्हें गले लगाना चाहती है। महिला की इस बात को लेकर मौके पर कुछ देर तक लोगों के बीच चर्चा होती रही। सोशल मीडिया पर ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।

क्या है पूरा मामला

सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में एक महिला सड़क पर लेटी नजर आ रही है। वीडियो में दो महिला पुलिसकर्मी उस महिला के पास जाती नजर आती हैं और उसे वहां से उठाने की कोशिश करती हैं। लेकिन महिला वहां से हटने को तैयार नहीं होती। जब एक पुलिसकर्मी उसे उठाने की कोशिश करती हे महिला तुरंत विरोध करते हुए कहती है, “मुझे मत छुओ।” जब उससे इसकी वजह पूछी जाती है, तो वह कहती है कि वह एक्टर और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय थलपति से मिलना चाहती है और उन्हें गले लगाना चाहती है। इसके बाद महिला पुलिसकर्मी उसे वहां से अपने साथ ले जाती हैं।

चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग

शुक्रवार को दिल्ली के जंतर-मंतर के आसपास विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में राजनीतिक दलों और छात्र संगठनों के लोग जुटे। प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई गई। इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सुरक्षा बढ़ाई और कई लोगों को हिरासत में भी लिया। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर सवाल उठाए। आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में वोटरों के नाम हटाए गए हैं।

प्रदर्शन में आम आदमी पार्टी के नेताओं के साथ AISA, SFI, NSUI और दूसरे छात्र संगठन भी शामिल हुए। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। सुरक्षा के मद्देनजर जंतर-मंतर व आसपास के इलाकों में सख्त पाबंदियां लागू की गई थीं।

मेट्रो स्टेशन को किया गया बंद

शुक्रवार को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने 700 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया। इनमें आम आदमी पार्टी के नेता आतिशी, सौरभ भारद्वाज, संजीव झा और संजय सिंह भी शामिल थे। प्रदर्शन को देखते हुए मध्य दिल्ली में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में बैरिकेडिंग की गई और कई मेट्रो स्टेशनों पर कुछ समय के लिए आने-जाने पर रोक लगाई गई।

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कांग्रेस को सहयोगियों का मैसेज

विपक्षी गठबंधन यानी ‘इंडिया’ ब्लॉक की पार्टियों ने कांग्रेस पार्टी को बहुत साफ शब्दों में मैसेज दिया है। यह कांग्रेस के ऊपर है कि वह उस मैसेज को किस रूप में लेती है और आगे का राजनीतिक रास्ता कैसे बनाती है। इस समय देश के लोकतंत्र और संवैधानिक व्यवस्था के सामने जो अभूतपूर्व संकट दिख रहा है उस संकट के बीच विपक्षी गठबंधन की बैठक हुई थी। तभी कायदे से सभी पार्टियों को अपने रागद्वेष छोड़ कर उसमें शामिल होना चाहिए था। यह सबको पता है कि डीएमके ने किन परिस्थितियों में गठबंधन छोड़ा और पंजाब के चुनाव से ठीक पहले आम आदमी पार्टी के लिए कांग्रेस के साथ दिखना कितना मुश्किल है। इसके बावजूद एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त मनमानियों का मुद्दा पार्टियों के निजी लाभ हानि से बड़ा है। आप और डीएमके इस बात पर राजी भी हैं कि वे मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव में कांग्रेस का साथ देंगे। आप सांसद संजय सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी महाभियोग प्रस्ताव पर दस्तखत कर चुकी है।

दोनों पार्टियां इस मुद्दे के महत्व को समझ रही हैं फिर भी बैठक में नहीं शामिल हुईं। सबसे हैरान करने वाला रवैया समाजवादी पार्टी का था। उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव बैठक शामिल नहीं हुए। दिल्ली में पार्टी की सारी गतिविधियां संभालने वाले उनके चाचा रामगोपाल यादव भी बैठक में नहीं गए। यहां तक की अखिलेश के चचेरे भाई और कई बार के सांसद धर्मेंद्र यादव को भी अखिलेश ने बैठक में नहीं भेजा। सुबह के 11 बजे जिस समय बैठक शुरू हुई उसी समय अखिलेश यादव अपने चाचा रामगोपाल यादव और रिलायंस समूह में काम करने वाले धनराज परिमल नाथवानी का राज्यसभा सीट के लिए नामांकन करा रहे थे। सोचें, नामांकन की आखिरी तारीख छह अक्टूबर है। लेकिन अखिलेश ने नामांकन के लिए वही दिन चुना, जिस दिन बैठक हो रही थी और समय भी वही चुना जब बैठक शुरू हुई। यह भी कहा गया कि लखनऊ में किसानों का एक सम्मेलन था, जिसमें अखिलेश को शामिल होना था। यह एक बहाना बना।

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे वर्चुअल तरीके से जुड़े। जानकार सूत्रों का कहना है कि उद्धव ठाकरे ने इशारों में कहा कि कांग्रेस को एकला चलो की नीति छोड़नी चाहिए। सहयोगी पार्टियों की दूरी का यही असली कारण है। कांग्रेस इन दिनों इस उत्साह में है कि उसका समय आ गया है और अब उसको किसी दूसरी पार्टी की जरुरत नहीं है। सोशल मीडिया में कांग्रेस इकोसिस्टम के लोग बता रहे हैं कि भाजपा के बुरे दिन चल रहे हैं। हालांकि यह बात तब कही जा रही है, जब चार महीने पहले ही भाजपा पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में बड़ी जीत हासिल की और असम व पुडुचेरी में एनडीए की सत्ता बचाई है। फिर भी यह बात कही जा रही है और कांग्रेस इस पर यकीन भी कर रही है। कांग्रेस को यह भी यकीन हो गया है कि मुस्लिम और दलित तो उसके साथ आ गया है और अब बाकी बहुजन का आना बाकी है। उसने तय कर किया है कि उसको सामान्य जातियों का वोट नहीं चाहिए। कांग्रेस के इस एटीट्यूड से परेशान पार्टियों ने उसको मैसेज दिया है। यह समझाया है कि कांग्रेस को सभी पार्टियों को साथ लेकर चलने की कोशिश करनी चाहिए। जैसे सीपीएम ने बताया कि कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी को बैठक का न्योता ही नहीं दिया। यह बता था कि उसके नेता नहीं आएंगे। लेकिन जब कांग्रेस संसद में आप के साथ तालमेल बनाती है तो इस बैठक के लिए भी न्योता देना चाहिए था।

वोटर काटने में फॉर्म सात से भी धांधली

नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के बहाने वास्तविक मतदाताओं के नाम काटने के मामले में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को कठघरे में खड़ा कर रहे राहुल गांधी ने कुछ नए आरोप लगाए हैं। उन्होंने नए मतदाताओं के नाम जोड़ने वाले फॉर्म छह में बदलाव को लेकर पहली बार टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस का नाम लिया। राहुल ने कहा कि टीसीएस को किसने आदेश दिया? टीसीएस में किसने बदलाव के आदेश पर दस्तखत किए? राहुल ने इसके अलावा फॉर्म सात का दुरुपयोग कर कर्नाटक में बड़ी संख्या में नाम काटे जाने के मुद्दा भी उठाया।

राहुल गांधी ने गुरुवार को फॉर्म छह के बाद अब कर्नाटक में फॉर्म सात के दुरुपयोग का मुद्दा उठाया है। उन्होंने दावा किया है कि कर्नाटक में एक झटके में 15 हजार लोगों के नाम काट दिए गए। राहुल ने गुरुवार की शाम को एक सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया कि नाम काटने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म सात से एक झटके में कर्नाटक में 15 हजार लोगों के नाम काट दिए गए। राहुल ने यह भी दावा किया कि सुनियोजित तरीके से एससी, एसटी, मुस्लिम,और ओबीसी समाज के लोगों के नाम काटे गए हैं। उन्होंने एफआईआर दर्ज करने की मांग की है और आरोप लगाया है कि सेंट्रलाइज्ड तरीके से और कंप्यूटर के जरिए भाजपा थोक में फॉर्म सात भर कर मतदाताओं के नाम कटवा रही है।

इससे पहले राहुल गांधी ने गुरुवार की सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट लिख कर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि फॉर्म छह में अवैध तरीके से बदलाव किया गया। राहुल ने पूछा, ‘टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टीसीएस को बदलाव करने का आदेश किसने दिया और कंपनी में इसे किसने मंजूरी दी’? उन्होंने आगे पूछा, ‘क्या टीसीएस पर कोई दबाव था’? राहुल के इस आरोप को आगे बढ़ाते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बीवी श्रीनिवास ने कहा कि कंप्यूटर अपने आप कोई काम नहीं कर सकता है। उसे कमांड देनी पड़ती है। गौरतलब है कि तकनीकी सलाह और सहयोग के लिए चुनाव आयोग ने टीसीएस की सेवाएं ली हैं।

गौरतलब है कि ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक खोजी रिपोर्ट में बताया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में फॉर्म छह में अतिरिक्त जानकारी मांगने और एसआईआर से जुड़े फैसलों पर 14 बार आपत्ति जताई। उनका कहना था कि नियम बदले बिना फॉर्म में नया हिस्सा जोड़ा गया। दोनों आयुक्तों का कहना था कि कानून में बदलाव का अधिकार संसद को है। इस विवाद के बाद आयोग ने कुछ बदलाव किए हैं। जिन राज्यों में एसआईआर खत्म हो गई है वहां चुनाव आयोग ने फॉर्म छह में मांगी जा रही अतिरिक्त जानकारी का कॉलम हटा दिया है।

दिल्ली में 2 अक्टूबर को CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन होगा या नहीं? जानिए कल का क्या होने वाला है

2 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ होने वाले इस प्रदर्शन के लिए दिल्ली पुलिस ने फिलहाल अनुमति नहीं दी है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आयोजकों की ओर से प्रदर्शन की तैयारी की जा रही है, लेकिन जंतर-मंतर पर सभा करने की मंजूरी अभी नहीं मिली है।

यह प्रदर्शन सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्र संगठनों की ओर से बुलाया गया है। प्रदर्शन में चुनाव आयोग के कामकाज और वोटर लिस्ट में होने वाले स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर सवाल उठाए जाएंगे।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि जंतर-मंतर पर प्रस्तावित इस प्रदर्शन के लिए अभी तक अनुमति नहीं दी गई है।

बता दें कि यह प्रदर्शन गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर को आयोजित किया जाना है। इस दौरान प्रदर्शन के आयोजकों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

वहीं, प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर इलाके की ओर जाने वाली सड़कों पर बैरिकेड्स भी लगा दिए हैं।

बता दें कि आम आदमी पार्टी (AAP) दिल्ली के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने सोमवार को लोगों से जंतर-मंतर पर हो रहे विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की सार्वजनिक अपील की थी। इसके अलावा, कुछ अन्य विपक्षी समूह भी इस प्रदर्शन में शामिल हो सकते हैं या अलग से प्रदर्शन कर सकते हैं।

इस बीच, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) आंदोलन के संस्थापक अभिजीत दिपके ने 2 अक्टूबर को शाम 4 बजे मुंबई के शिवाजी पार्क में समानांतर “जेल भरो आंदोलन” की घोषणा की है।

दिपके ने पहले कहा था कि मुंबई पुलिस ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP के 2 अक्टूबर को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन की इजाजत देने से इनकार कर दिया है। इसके बाद, उन्होंने गांधी जयंती के दिन ‘जेल भरो आंदोलन’ शुरू करने का ऐलान किया।

शिवाजी पार्क में प्रदर्शन की इजाजत क्यों नहीं मिली?

हालांकि, मुंबई पुलिस ने साफ किया कि बॉम्बे हाई कोर्ट के 2013 के आदेश को देखते हुए, उन्हें शिवाजी पार्क में सभा के लिए “इजाजत देने का अधिकार नहीं है” और यह इलाका एक “साइलेंस जोन” है। पुलिस ने कहा कि आवेदन करने वाले अजिंक्य शिंदे को सलाह दी गई थी कि वे मुंबई में कोई दूसरी जगह देखें और इजाजत के लिए आवेदन करें, जिस पर उचित रूप से विचार किया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, CJP ने मूल रूप से योजना बनाई थी कि अगर ज्ञानेश कुमार CEC के पद से इस्तीफा नहीं देते हैं, तो 2 अक्टूबर को मुंबई से देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।

ANI के मुताबिक, 25 सितंबर को दिपके ने कहा था, “अगर ज्ञानेश कुमार कल तक इस्तीफा नहीं देते हैं, तो CJP 2 अक्टूबर को मुंबई से देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू करेगा और इसे भारत भर के शहरों तक ले जाएगा। आइए, इस गांधी जयंती पर लोकतंत्र को बचाने का संकल्प लें।”

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निर्वाचन सदन को घेरेगा विपक्ष

नई दिल्ली। विपक्षी पार्टियों के गठबंधन ‘इंडिया’ ब्लॉक की बैठक में बुधवार को बड़ा फैसला हुआ। बैठक में शामिल पार्टियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और इस्तीफा नहीं देने पर छह अक्टूबर को चुनाव आयोग के कार्यालय यानी नई दिल्ली के अशोक रोड पर स्थित निर्वाचन सदन का घेराव करेंगी। इस बीच दो से आठ अक्टूबर के बीच ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए विपक्षी पार्टियां पूरे देश में मार्च निकालेंगी।

गौरतलब है कि बुधवार को नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में ‘इंडिया’ ब्लॉक की पार्टियों की बैठक हुई, जिसमें 19 पार्टियों के दो दर्जन से ज्यादा नेता शामिल हुए। सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, सीपीएम महासचिव एमए बेबी सहित कई बड़े नेता बैठक में शामिल हुए। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे वर्चुअल तरीके से बैठक में शामिल हुए। डीएमके और आम आदमी पार्टी ने बैठक में हिस्सा नहीं लिया। समाजवादी पार्टी की ओर से दो सांसद बैठक में शामिल हुए।

करीब तीन घंटे चली बैठक में तीन बातों पर सहमति बनी। विपक्षी पार्टियों ने तय किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए संसद में प्रस्ताव लाया जाए। चुनाव आयोग से विपक्ष ने कहा कि मतदाता सूची से हटाए गए नामों को सार्वजनिक किया जाए। साथ ही नाम हटाने से पहले वोटर को नोटिस और अपील का मौका देने की मांग भी की गई। विपक्षी पार्टियों ने ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बताया कि बैठक में 19 पार्टियां शामिल हुईं, जिनके लोकसभा में 178 और राज्यसभा में 62 सांसद हैं।

बैठक के बाद खड़गे ने आरोप लगाया कि मोदी और शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयोग को कठपुतली बना दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा चुनाव आयोग के साथ वोट चोरी कर रही है। बैठक में ममता बनर्जी ने ज्ञानेश कुमार को चोर और डाकू कहा। उन्होंने कहा कि विपक्ष बड़ा आंदोलन करेगा और जरुरत हुई तो चांद, तारों तक जाएगा। राहुल गांधी ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ साथ प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी, अमित शाह और ज्ञानेश कुमार लोकतंत्र पर हमला कर रहे हैं। राहुल ने कहा, ‘हम एक गठबंधन हैं और देश में बड़ा बदलाव लाएंगे’। तेजस्वी यादव ने फॉर्म छह में किए गए बदलाव को विपक्ष की बड़ी जीत बताया।

हाल के चुनाव अवैध है: राहुल

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को कांग्रेस कार्य समिति यानी सीडब्लुसी की बैठक में कहा कि हाल के सभी चुनाव अवैध हैं। उन्होंने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त सरकार से समझौता कर चुके हैं। करीब ढाई घंटे तक चली सीडब्लुसी की बैठक के बारे में सूत्रों के हवाले से खबर आई है कि राहुल ने कांग्रेस नेताओं से उनके ऊपर भरोसा करने को कहा। उन्होंने एक नियुक्ति पैनल की बैठक के बाद का किस्सा सुनाते हुए कहा कि बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने माना की उनके बाद राहुल ही प्रधानमंत्री बनेंगे। यह किस्सा सुना कर राहुल ने कहा कि मोदी को जैसे उनके ऊपर भरोसा है वैसे ही कांग्रेस नेताओं को भी रखना चाहिए।

बहरहाल, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर हुए खुलासे पर विचार के लिए हुई कार्य समिति की बैठक में राहुल गांधी ने कहा, “मुख्य चुनाव आयुक्त पूरी तरह समझौता कर चुके हैं और देश की चुनाव व्यवस्था ‘फिक्स’ है। हाल के सभी चुनाव अवैध हैं”। राहुल गांधी ने आगे कहा, “चाहे ईवीएम हो या मतदाता सूची, दोनों से छेड़छाड़ की गई है। दोनों का इस्तेमाल भाजपा चुनाव जीतने की रणनीति के तौर पर कर रही है”।

बैठक में पार्टी ने एक प्रस्ताव मंजूर किया, जिसमें कहा गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तत्काल इस्तीफा दें। इसके अलावा एसआईआर को तत्काल रोकने का प्रस्ताव भी मंजूर किया गया है। कांग्रेस ने इसमें कहा है कि हटाए गए 13 करोड़ 30 लाख नाम बहाल किए जाएं। मंगलवार को हुई बैठक में 68 सदस्यों ने हिस्सा लिया। कांग्रेस ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी वोटर लिस्ट और चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी के मुद्दों को संसद में उठाएगी और प्रदर्शन करेगी।

बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, “मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार मोदी सरकार की कठपुतली बन गए हैं। उन्हें तुरंत हटाया जाना चाहिए। मोदी सरकार ने व्यवस्थित रूप से उस मजबूत लोकतांत्रिक नींव को खोखला कर दिया है जिसे हमारे पूर्वजों ने बनाया था”। उन्होंने कहा, “पीएम मोदी ने युवाओं को वोट देने से रोकने की साजिश रची है। फॉर्म 6 से जुड़े नियमों में गैरकानूनी तरीके से बदलाव किया गया”।

विपक्ष की बैठक आज

नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर में हुई गड़बड़ियों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की मनमानियों को लेकर हुए खुलासे के बाद विपक्षी पार्टियों की एक अहम बैठक बुधवार को होगी। विपक्षी गठबंधन यानी ‘इंडिया’ ब्लॉक की पार्टियों के नेताओं की यह बैठक दिल्ली में होगी। हालांकि बैठक से पहले विपक्ष का बिखराव भी साफ दिख गया है। कई पार्टियों के नेता इसमें नहीं शामिल हो रहे हैं।

पिछली बैठक की ही तरह इस बार भी डीएमके और आम आदमी पार्टी इस बैठक में नहीं शामिल होंगे। गौरतलब है कि इस बैठक के समन्वय का काम कांग्रेस पार्टी देख रही है और बताया जा रहा है कि उसने आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल को न्योता नहीं दिया। बहरहाल, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव भी बैठक में नहीं शामिल होंगे। यह भी कहा जा रहा है कि उनके चाचा रामगोपाल यादव भी बैठक से दूर रहेंगे और पार्टी की ओर से कोई अन्य नेता शामिल होगा। उद्धव ठाकरे भी बैठक के लिए दिल्ली नहीं आ रहे हैं। वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में शामिल होंगे।

विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ब्लॉक की पिछले तीन साल में यह आठवीं बैठक है। जून 2024 में लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद यह तीसरी बैठक है। लोकसभा के चुनाव नतीजों के तुरंत बाद एक बैठक हुई थी। उसके दो साल बाद आठ जून 2026 को बैठक हुई थी। उसमें एसआईआर और चुनाव आयोग को लेकर चर्चा हुई। उसमें तय हुआ था कि दो महीन बाद अगस्त में हैदराबाद में बैठक होगी। लेकिन वह बैठक नहीं हुई। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की खोजी रिपोर्ट के बाद ममता बनर्जी ने विपक्ष की बैठक बुलाने की पहल की।

बहरहाल, बैठक से एक दिन पहले मंगलवार को बताया गया कि अखिलेश यादव 30 सितंबर को लखनऊ में किसानों के सम्मेलन में शामिल होंगे। कहा जा रहा है कि उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से इस बारे में बात भी की है। हालांकि कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि अखिलेश राज्यसभा चुनाव के नामांकन से जुड़ी व्यस्तता के कारण नहीं आएंगे।

बैठक में कांग्रेस की ओर से मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी शामिल होंगे। तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी भी इसमें शामिल होंगे। राजद के तेजस्वी यादव, जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और सीपीएम के महासचिव एमए बेबी बैठक में शामिल होंगे। शरद पवार की पार्टी के भी बैठक में शामिल होने की खबर है। गौरतलब है कि पिछले दिनों एमए बेबी ने दिल्ली में अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की थी। लेकिन उन्होंने केजरीवाल को बैठक का न्योता नहीं दिया क्योंकि यह काम कांग्रेस को करना है।