2 घंटे में ही 2500 से ज्यादा फ्लैट बुक! दशहरा पर DDA का 15 लाख वाला फ्लैट का ऑफर मचा रहा धूम, 25% डिस्काउंट संग सारी डिटेल जानिए

DDA Awas Nivesh Scheme: दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की आवास निवेश योजना 2026 को लोगों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा। दिल्ली के उपराज्यपाल और डीडीए अध्यक्ष सरदार तरनजीत सिंह संधू के मार्गदर्शन में इस योजना की शुरुआत हुई है। योजना के तहत 20 अक्टूबर 2026 को ऑनलाइन बुकिंग शुरू होने के केवल दो घंटे के अंदर ही निम्न आय वर्ग (एलआईजी) के 2,500 से ज्यादा फ्लैट बुक हो गए। इतने कम समय में बड़ी संख्या में फ्लैट बुक होने से पता चलता है कि दिल्ली में किफायती और अच्छी सुविधाओं वाले घरों की मांग बनी हुई है। डीडीए की इस योजना को मिली प्रतिक्रिया से आम लोगों को सस्ते आवास उपलब्ध कराने की उसकी कोशिशों को भी मजबूती मिली है।

कहां पर मिल रहे कितने फ्लैट

दिल्ली के नरेला इलाके में घर खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए डीडीए ने किफायती आवास का मौका दिया। योजना के तहत सेक्टर जी2 से जी6 के पॉकेट 3 और पॉकेट 6 में कुल 2,516 एलआईजी फ्लैट उपलब्ध कराए गए। इन फ्लैटों की ऑनलाइन बुकिंग 20 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजे से ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर शुरू हुई। खास बात यह है कि फ्लैटों की कीमत पर 25 प्रतिशत की छूट दी जा रही है और इनकी शुरुआती कीमत करीब 14.95 लाख रुपये रखी गई है। उपलब्ध फ्लैटों में से 1,020 पॉकेट 3 और 1,496 पॉकेट 6 में हैं।

डीडीए आवास में को मिल रही अच्छी प्रतिक्रिया

डीडीए आवास निवेश योजना 2026 को मिली अच्छी प्रतिक्रिया को दिल्ली में लोगों को घर उपलब्ध कराने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। दिल्ली का नरेला इलाका तेजी से विकसित हो रहा है। डीडीए यहां सड़क, परिवहन और अन्य जरूरी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर काम कर रहा है। आने वाले समय में नरेला आवास, शिक्षा और खेल सुविधाओं के लिहाज से एक अहम केंद्र बन सकता है। डीडीए के मुताबिक, वह राजधानी में लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कम कीमत पर अच्छे घर उपलब्ध कराने और शहर को बेहतर तरीके से विकसित करने के लिए लगातार काम कर रहा है।

DDA Awas Nivesh scheme: डीडीए के 2516 फ्लैटों पर 25% का बंपर डिस्काउंट, 20 अक्टूबर से बुकिंग शुरू, जानें कीमत और बाकी डिटेल्स

DDA Awas Nivesh scheme: अगर आप घर खरीदने की योजना बना रहे हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है। दशहरे के मौके पर दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने आवास निवेश योजना 2026 की शुरुआत की है। इस योजना के तहत नरेला में लो इनकम ग्रुप (LIG) लोगों के लिए 2,516 फ्लैट उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इन फ्लैटों की कीमत पर 25 फीसदी की छूट दी जाएगी। इन फ्लैट की शुरुआती कीमत 14.95 लाख रुपये रखी गई है। इस योजना का मकसद लोगों को कम कीमत पर दिल्ली में अपना घर खरीदने का मौका देना है। दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू के मार्गदर्शन में इस योजना को शुरू किया गया है। इस योजना का मकसद लोगों को सस्ते घर उपलब्ध कराना है। आइए जानते है इस योजना के बारे में सबकुछ

कब से शुरू होगी ऑनलाइन बुकिंग

दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की आवास निवेश योजना 2026 के तहत फ्लैट खरीदने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। इस योजना की शुरुआत 8 अक्टूबर 2026 को हुई थी और इसके लिए रजिस्ट्रेशन 14 अक्टूबर से शुरू हो चुका है। फ्लैटों की बुकिंग 20 अक्टूबर 2026 को दशहरे के दिन दोपहर 12 बजे से शुरू होगी। DDA की इस योजना के तहत फ्लैटों की बुकिंग ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर की जाएगी। इस योजना का लाभ लेने के इच्छुक लोग 31 जनवरी 2027 तक आवेदन और बुकिंग की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

नरेला में कहां मिलेंगे फ्लैट

DDA की इस योजना में सभी फ्लैट दिल्ली के नरेला इलाके के सेक्टर G2 से G6 के बीच पॉकेट 3 और पॉकेट 6 में स्थित हैं। कुल 2,516 फ्लैटों में से 1,020 पॉकेट 3 में और 1,496 पॉकेट 6 में उपलब्ध हैं। प्रत्येक फ्लैट का प्लिंथ एरिया करीब 49.90 वर्ग मीटर है, जिसमें साझा इस्तेमाल वाले हिस्से भी शामिल हैं। 25 फीसदी छूट के बाद पॉकेट 3 के फ्लैट की अनुमानित कीमत 15.01 लाख रुपये और पॉकेट 6 के फ्लैट की कीमत करीब 14.95 लाख रुपये रखी गई है।

कितना लगेगा रजिस्ट्रेशन फीस

DDA आवास निवेश योजना 2026 के लिए इच्छुक लोग डीडीए की आधिकारिक वेबसाइट https://eservices.dda.org.in पर जाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और फ्लैट बुक कर सकते हैं। इस प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन रखा गया है, ताकि आवेदकों को आसानी हो और काम में पारदर्शिता बनी रहे। योजना के तहत एक फ्लैट बुक करने के लिए 1 लाख रुपये जमा करने होंगे। वहीं, पोर्टल पर पहली बार रजिस्ट्रेशन कराने वाले आवेदकों को 2,500 रुपये की फीस देनी होगी, जो वापस नहीं की जाएगी। जिन लोगों ने पहले ही DDA के आवास पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन करा लिया है, उन्हें दोबारा पंजीकरण करने की जरूरत नहीं है।

DDA आवास निवेश योजना 2026 के तहत फ्लैट बुक करने से पहले आवेदक DDA की वेबसाइट पर उपलब्ध ब्रोशर में जरूरी नियम और शर्तें पढ़ सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए टोल-फ्री नंबर 1800 110 332 पर संपर्क किया जा सकता है। इस योजना का उद्देश्य लोगों को सस्ते घर उपलब्ध कराना और नरेला के विकास को बढ़ावा देना है।

DDA का मास्टरप्लान: दिल्ली में बनेंगे 12 लाख नए घर, 600 किमी नई सड़कों के साथ UER-2 पर लगेगा विकास का पंख

Delhi Master Plan: दिल्ली में घरों की बढ़ती मांग को पूरा करने और राजधानी के इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक स्वरूप देने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने अपनी बहुप्रतीक्षित लैंड पूलिंग पॉलिसी पर काम तेज कर दिया है। उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू के मार्गदर्शन में डीडीए ने दिल्ली के देहाती इलाकों और गांवों में महीनेभर का विशेष जागरूकता और संवाद अभियान शुरू किया है।

इस अभियान के तहत किसानों, स्थानीय जमीन मालिकों और हितधारकों को लैंड पूलिंग के विकास मॉडल, वित्तीय फायदों और इसमें शामिल होने की आसान प्रक्रिया से अवगत कराया जा रहा है।

200 वर्ग किमी में फैलेगा नया शहर, बनेंगे 12 लाख घर

डीडीए के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, लैंड पूलिंग नीति के तहत राजधानी के बाहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 200 वर्ग किलोमीटर का बड़ा भूखंड विकसित किया जाएगा।

इस नीति के जरिए लगभग 12 लाख नए सुनियोजित घर तैयार करने की योजना है। इससे न केवल मध्यम और निम्न आय वर्ग को किफायती मकान मिलेंगे, बल्कि अवैध कॉलोनियों के बनने पर भी स्थायी रोक लगेगी।

मुख्य बिंदु विस्तृत जानकारी
कुल विकास क्षेत्रलगभग 200 वर्ग किलोमीटर
प्रस्तावित नए घरकरीब 12 लाख रेजिडेंशियल यूनिट्स
सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर600 किमी से अधिक का नया रोड नेटवर्क
प्रमुख कॉरिडोरअर्बन एक्सटेंशन रोड-2 (UER-II) के दोनों तरफ हाई डेंसिटी कॉरिडोर
विकास मॉडलटाउन प्लानिंग स्कीम्स (TPS) व पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप

इन्फ्रास्ट्रक्चर-फर्स्ट अप्रोच: 600 किमी से चौड़ी सड़कों का जाल

दिल्ली के मास्टर प्लान-2047 के तहत ‘इन्फ्रास्ट्रक्चर-फर्स्ट’ नीति अपनाई जा रही है। यानी पहले सड़कों, सीवर, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास होगा, उसके बाद ही आवासीय और व्यावसायिक सोसाइटियों का निर्माण शुरू किया जाएगा।

इस योजना में 600 किलोमीटर से अधिक अतिरिक्त सड़क नेटवर्क विकसित किया जाएगा। मुख्य फीडर और मुख्य सड़कों की राइट ऑफ वे (RoW) चौड़ाई 30 मीटर या उससे अधिक रखी जाएगी। कम से कम 20 हेक्टेयर जमीन एकत्र होने पर टाउन प्लानिंग स्कीम लागू कर निर्माण प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

UER-2 के किनारे बनेगा 250 मीटर चौड़ा हाई डेंसिटी कॉरिडोर

अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 (UER-II) दिल्ली की तीसरी रिंग रोड के रूप में जानी जाती है। मास्टर प्लान-2047 के तहत UER-2 के दोनों तरफ 250 मीटर चौड़ा हाई डेंसिटी कॉरिडोर विकसित करने का प्रावधान किया गया है।

Delhi Paster Plan: UER-2 के किनारे बनेगा 250 मीटर चौड़ा हाई डेंसिटी कॉरिडोर अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 (UER-II) का रूट मैप

400 तक FAR: इस कॉरिडोर के तहत उच्च फ्लोर एरिया रेशियो (FAR 400 तक) दिया जाएगा, जिससे गगनचुंबी इमारतें बनाई जा सकेंगी।

मल्टी-पर्पज यूज: यहां किफायती और प्रीमियम आवासों के साथ-साथ कमर्शियल सेंटर, लॉजिस्टिक्स हब, वेयरहाउसिंग और रोजगार सृजन वाले उद्योग स्थापित होंगे।

पहला नोटिफाइड सेक्टर: जोन P-II के अंतर्गत गढ़ी खसरो और इब्राहिमपुर गांव में स्थित सेक्टर 8B को इस मॉडल के कार्यान्वयन के लिए पहला तैयार सेक्टर अधिसूचित कर दिया गया है।

जमीन मालिकों को क्या होगा फायदा?

लैंड पूलिंग नीति में जमीन अधिग्रहण के बजाय साझेदारी मॉडल काम करता है। किसान या जमीन मालिक अपनी जमीन डीडीए को पूलिंग के लिए सौंपते हैं। डीडीए पूरी जमीन का टाउन प्लान तैयार कर सड़कों, पार्क और सार्वजनिक सुविधाओं का निर्माण करता है और कुल विकसित जमीन का एक बड़ा तय हिस्सा (लगभग 60%) विकसित प्लॉट के रूप में वापस मालिक को सौंप देता है।

इससे जमीन मालिकों की संपत्ति की बाजार कीमत कई गुना बढ़ जाती है और वे खुद बिल्डर या डेवलपर के साथ साझेदारी कर प्रोजेक्ट बना सकते हैं।

DDA Plans: डीडीए ने दिल्ली के 45 जेजे क्लस्टर्स के इन-सिटू पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की, 1 लाख लोगों को मिलेगा फायदा

DDA Plans: राष्ट्रीय राजधानी में झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों में रहने वाले लोगों को बेहतर और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने की दिशा में दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने बड़ा कदम उठाया है। ‘दिल्ली मास्टर प्लान-2047’ के तहत DDA ने 45 JJ क्लस्टरों के इन-सिटू रिहैबिलिटेशन (उसी जगह पुनर्वास) की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए 15 परियोजनाओं की व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करने के लिए तीन ट्रांजैक्शन एडवाइजर नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इस पहल से करीब 21,229 परिवारों और एक लाख से अधिक लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

क्या है DDA की योजना?

दिल्ली के उपराज्यपाल (Delhi LG) सरदार तरनजीत सिंह संधू के मार्गदर्शन में DDA ने दिल्ली मास्टर प्लान-2047 में परिकल्पित In-Situ Rehabilitation (ISR) योजना को आगे बढ़ाने की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोगों को उनकी मौजूदा जगह या उसके आसपास ही बेहतर और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना है। DDA ने इसके लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी किया है। इसके तहत तीन ट्रांजेक्शन एडवाइजर्स(TA) नियुक्त किए जाएंगे। ये सलाहकार दिल्ली के 15 प्रोजेक्ट्स से जुड़े 45 JJ क्लस्टरों के लिए विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करेंगे।

45 JJ क्लस्टरों में कितने परिवार?

DDA के मुताबिक, इन 15 परियोजनाओं में शामिल 45 JJ क्लस्टर करीब 135.74 एकड़ जमीन पर फैले हुए हैं। इनमें लगभग 21,229 परिवार रहते हैं। प्रस्तावित पुनर्वास योजना से एक लाख से ज्यादा लोगों को बेहतर आवास, नागरिक सुविधाएं और रहने की बेहतर परिस्थितियां मिलने की संभावना है।

ट्रांजेक्शन एडवाइजर्स क्या करेंगे?

नियुक्त किए जाने वाले ट्रांजेक्शन एडवाइजर्स सिर्फ जमीन और मकानों का आकलन नहीं करेंगे। बल्कि प्रत्येक परियोजना की पूरी व्यवहार्यता जांचेंगे। इसमें मुख्य रूप से:-

– कितने लोगों और परिवारों के पुनर्वास की जरूरत है

– जमीन पर विकास की कितनी संभावनाएं हैं

– सड़क, पानी, सीवर और अन्य बुनियादी ढांचे की जरूरत

– परियोजना की वित्तीय व्यवहार्यता

– पुनर्वास के लिए उपयुक्त मॉडल

– परियोजना को व्यवस्थित और टिकाऊ तरीके से लागू करने की योजना जैसे पहलुओं का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।

17 लाख लोगों के पुनर्वास का लक्ष्य

दिल्ली मास्टर प्लान-2047 में दिल्ली के 650 से अधिक JJ क्लस्टरों में रहने वाले करीब 17 लाख लोगों के लिए सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। मौजूदा पहल को इसी बड़े लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। DDA के अनुसार, यह योजना प्रधानमंत्री के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के विजन के अनुरूप समावेशी शहरी विकास को बढ़ावा देने की दिशा में काम करेगी।

सिर्फ पुनर्वास नहीं, जमीन का भी बेहतर इस्तेमाल

इस योजना का उद्देश्य केवल झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोगों का पुनर्वास करना नहीं है। DDA के मुताबिक, इन-सिटू स्लम रिहैबिलिटेशन के जरिए झुग्गी बस्तियों की जमीन का योजनाबद्ध और बेहतर इस्तेमाल भी किया जा सकेगा। इससे एक तरफ मौजूदा निवासियों को बेहतर आवास और नागरिक सुविधाएं मिलेंगी, वहीं दूसरी तरफ बड़ी मात्रा में आवासीय और व्यावसायिक स्थान विकसित किया जा सकेगा। इससे दिल्ली की बढ़ती आबादी के लिए अतिरिक्त हाउसिंग स्टॉक और कमर्शियल स्पेस उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।

अब आगे क्या होगा?

पहले ट्रांजेक्शन एडवाइजर्स इन 15 परियोजनाओं की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेंगे। इन रिपोर्टों में तकनीकी और वित्तीय पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा। इसके आधार पर आगे परियोजनाओं की संरचना और क्रियान्वयन का मॉडल तैयार किया जाएगा। DDA का कहना है कि यह प्रक्रिया व्यवस्थित, पारदर्शी और टिकाऊ तरीके से JJ क्लस्टरों के पुनर्विकास का आधार तैयार करेगी। यह पहल दिल्ली में झुग्गी बस्तियों के पुनर्वास और समावेशी शहरी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है।

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Delhi Housing Scheme: दिल्ली में घर खरीदने का है प्लान? 1BHK, 2BHK या 3BHK… मिडिल क्लास के बजट के हिसाब से जानें कौन सा फ्लैट पड़ेगा सही

Delhi Housing Scheme: दिल्ली में अपना घर खरीदना हर मिडिल क्लास परिवार का बड़ा सपना होता है। लेकिन घर खरीदने से पहले सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि आखिर बजट के हिसाब से 1BHK लेना सही रहेगा। 2BHK या फिर 3BHK… दिल्ली में एक ही साइज के घर की कीमत भी इलाके के हिसाब से काफी बदल जाती है। ऐसे में घर खरीदने से पहले सिर्फ प्रॉपर्टी की कीमत नहीं, बल्कि अपनी कमाई, EMI, डाउन पेमेंट और भविष्य के खर्चों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

इलाके के हिसाब से बदलती है घर की कीमत

इकोनॉमिस्ट आकाश जिंदल के अनुसार, दिल्ली में प्रॉपर्टी की कीमतें पूरी तरह से लोकेशन पर निर्भर करती हैं। अगर आप वसंत विहार, चाणक्यपुरी या डिफेंस कॉलोनी जैसे प्रीमियम इलाकों में घर खरीदना चाहते हैं, तो कीमत काफी ज्यादा होगी। रोहिणी जैसे इलाकों में मिडिल क्लास परिवारों के बजट में अलग-अलग साइज के फ्लैट मिल सकते हैं।

उदाहरण के लिए, रोहिणी में 1BHK की कीमत लगभग ₹25-30 लाख से शुरू हो सकती है। जबकि 2BHK की कीमत ₹80 लाख से ₹1 करोड़ के बीच हो सकती है। एक अच्छे 3BHK की कीमत लगभग ₹1.5 करोड़ से ₹2.25 करोड़ तक हो सकती है। लेकिन असली कीमत प्रॉपर्टी की लोकेशन, उम्र, फ्लोर टाइप, सुविधाओं और कंस्ट्रक्शन के आधार पर अलग हो सकती है।

50 हजार, 1 लाख या 2 लाख कमाने वालों के लिए कौन सा घर

जिंदल के अनुसार, घर का साइज तय करते समय सबसे पहले परिवार की महीने की इनकम और भविष्य की जरूरतों पर विचार करना चाहिए। अगर परिवार की महीने की इनकम लगभग ₹50,000 है, तो 1BHK ज्यादा प्रैक्टिकल ऑप्शन हो सकता है। वहीं, जिन परिवारों की महीने की इनकम ₹1 लाख है, वे 2BHK के बारे में सोच सकते हैं।

अगर महीने की इनकम लगभग ₹2 लाख है और दूसरी फाइनेंशियल जिम्मेदारियां भी मैनेज की जा सकती हैं, तो 3BHK के बारे में सोचा जा सकता है। दूसरे शब्दों में सिर्फ घर के साइज के आधार पर फैसला करने के बजाय यह देखना जरूरी है कि EMI आपके फाइनेंस पर कितना बोझ डालेगी।

EMI कितनी होनी चाहिए?

घर खरीदने वालों के लिए सबसे जरूरी सवाल EMI का होता है। आकाश जिंदल के अनुसार, अपनी मासिक आय के हिसाब से होम लोन की EMI ऐसी रखनी चाहिए जिसे आसानी से चुकाया जा सके। उन्होंने यह भी समझाया कि घर खरीदने के बाद सिर्फ EMI ही खर्च नहीं होती। रजिस्ट्री, डॉक्यूमेंटेशन, ट्रांसफर से जुड़े खर्च, घर की मरम्मत,फर्निशिंग और दूसरे खर्चों के लिए भी पैसा चाहिए।

पूरी बचत डाउन पेमेंट में लगाना कितना सही?

घर खरीदते समय अपनी सारी सेविंग्स डाउन पेमेंट में लगाना अच्छा आइडिया नहीं है। जिंदल के अनुसार, अपनी सेविंग्स का लगभग 70% डाउन पेमेंट में इन्वेस्ट करना और 30% इमरजेंसी के लिए अलग रखना सबसे अच्छा है। घर खरीदने में रजिस्ट्रेशन, डॉक्यूमेंटेशन, फर्निशिंग और दूसरे अचानक आने वाले खर्चे शामिल होते हैं।

घर खरीदने से पहले दस्तावेज जरूर जांचें

आकाश जिंदल कहते हैं कि घर खरीदने से पहले, आपको प्रॉपर्टी की ओनरशिप, अप्रूवल, गैर-कानूनी कंस्ट्रक्शन और सभी लीगल डॉक्यूमेंट्स जरूर चेक करने चाहिए। अगर जरूरी हो, तो डॉक्यूमेंट्स को किसी वकील से रिव्यू करवाएं और जल्दबाजी में कोई भी फैसले लेने से बचें।

(दिल्ली से शुभांगी तिवारी की रिपोर्ट)

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DDA बना रहा दिल्ली के 17 लाख लोगों को पक्के मकान देने का प्लान, इन-सिटू मॉडल से तैयार होंगे फ्लैट्स

दिल्ली की झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए DDA बड़ी योजना पर काम कर रहा है। इसके तहत करीब 17 लाख लोगों को पक्के घर देने की तैयारी है। इसमें लोगों को उनकी झुग्गियां की जगह या उसके पास नए घर बनाने योजना है। इसे इन-सिटू रिहैबिलिटेशन (In-situ rehabilitation) कहा जाता है।

दिल्ली-2047 योजना के तहत इस काम को बड़े स्तर पर करने की तैयारी है। DDA का लक्ष्य करीब 17 लाख JJ क्लस्टर निवासियों के लिए घर तैयार करना है।

इतने बड़े स्तर पर घर बनाने के लिए DDA प्राइवेट कंपनियों और डेवलपर्स को भी इस योजना से जोड़ने पर विचार कर रहा है। इसी सिलसिले में 25 सितंबर को इन्वेस्टर्स के साथ बैठक की गई। कंस्ट्रक्शन पर आने वाला खर्च, जमीन का इस्तेमाल और काम के दौरान आने वाली परेशानियों जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

घर के साथ कई दूसरी सुविधाएं भी मिलेंगी

योजना का मकसद झुग्गियों की जगह नए फ्लैट बनाने के साथ लोगों के लिए जरूरी सुविधाएं देने पर ध्यान देना है। इसमें सड़क, स्कूल, आंगनवाड़ी, हेल्थ सेंटर और बच्चों के खेलने की जगह जैसी सुविधाएं शामिल हैं। यानी कोशिश यह है कि लोगों को घर मिलने के साथ उनके आसपास रोज की जरूरी सुविधाएं भी मिले।

DDA दिल्ली में पहले भी इस तरह के प्रोजेक्ट पर काम कर चुका है। कालकाजी एक्सटेंशन और जेलरवाला बाग में झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले लोगों के लिए नए घर बनाए गए हैं।

करीब 4 लाख परिवारों के लिए सेपरेट पॉलिसी

जून 2026 में केंद्र सरकार ने दिल्ली की झुग्गी-बस्तियों के लिए एक अलग नीति की घोषणा भी की थी। इस नीति में बेहतर घरों के साथ स्कूल, आंगनवाड़ी और हेल्थ सेंटर जैसी सुविधाएं देने पर भी जोर है। इस तरह दिल्ली की झुग्गी-बस्तियों के लोगों के लिए अलग-अलग योजनाओं पर काम किया जा रहा है।

फिलहाल DDA इस बड़ी योजना को आगे बढ़ाने के लिए प्राइवेट कंपनियों से राय लेकर यह तय कि घर कहां बनाए जाएंगे, जमीन का इस्तेमाल कैसे होगा और पूरी योजना को किस तरीके से लागू किया जाएगा।

दिल्ली से शुभांगी तिवारी की रिपोर्ट

वाटर ग्रिड और रिवर ड्रेजिंग का फॉर्मूला… नितिन गडकरी लेकर आए वो प्लान जिससे खत्म हो जाएगी बिहार की बाढ़?

बिहार में हर साल आने वाली विनाशकारी बाढ़ से राज्य को बचाने के लिए केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने वाटर ग्रिड और रिवर ड्रेजिंग का फॉमूला पेश किया है। उन्होंने गुरुवार को पटना में ‘बिहार इन्वेस्टर समिट 2026: भारत का उभरता हुआ इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन’ का उद्घाटन किया। इस मौके पर गडकरी ने कहा कि राज्य की बाढ़ की समस्या को कम खर्च में हल करने के लिए टेक्नोलॉजी को नई नीतियों और भविष्य के नजरिए के साथ जोड़ने की जरूरत है।

समिट के उद्घाटन के बाद केंद्रीय मंत्री ने बिहार को बाढ़-मुक्त बनाने के लिए बड़े पैमाने पर जल प्रबंधन, नदी की खुदाई, सुरक्षा दीवार बनाने और वॉटर ग्रिड की जरूरत पर जोर दिया। गडकरी ने कहा कि गडकरी ने कहा, “नेशनल हाईवे और पावर ग्रिड की तरह, वॉटर ग्रिड सिस्टम लागू करने और एक बेसिन से दूसरे बेसिन में पानी ट्रांसफर करने से राज्य में ज्यादा पानी के बहाव को मैनेज करने में मदद मिल सकती है।” उन्होंने बाढ़ के खतरे को कम करने के उपाय के तौर पर नदी की खुदाई पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा, “मैंने एनएचएआई के अधिकारियों से बात की। हम खुदाई करने और गाद को मुफ्त में हटाने को तैयार हैं। गाद का इस्तेमाल हाईवे बनाने के लिए मटीरियल के तौर पर किया जा सकता है। अगर बिहार सरकार ऐसी योजना की इजाजत देती है, तो मैं भरोसा दिला सकता हूं कि बाढ़ की समस्या को कम खर्च में अच्छे से हल किया जा सकता है।”

गडकरी ने कहा कि तटबंधों और सुरक्षात्मक दीवारों के निर्माण के जरिए गहरे जलमार्ग विकसित करने से जल परिवहन को बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे परिवहन लागत कम होगी और उद्योग, व्यापार तथा निवेश पर अनुकूल प्रभाव पड़ेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर हम तीन मीटर गहरा जलमार्ग बनाते हैं तो वाराणसी से बांग्लादेश के ढाका तक 3,000 टन क्षमता वाला बजरा ले जाया जा सकता है। भारत का कंटेनर बांग्लादेश जाने के लिए जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह (जेएनपीटी) और कोलंबो के रास्ते जाता है। प्रस्तावित मार्ग से लॉजिस्टिक्स लागत में काफी कमी आएगी। अगर आप उद्योग, व्यापार और कारोबार बढ़ाना चाहते हैं तो लॉजिस्टिक्स लागत कम करनी होगी।’’

गडकरी ने अपने कार्यकाल के दौरान नेपाल में कोसी नदी पर बांध परियोजना पूरी नहीं हो पाने पर अफसोस जताया।

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दिल्ली में 2 अक्टूबर को CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन होगा या नहीं? जानिए कल का क्या होने वाला है

2 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ होने वाले इस प्रदर्शन के लिए दिल्ली पुलिस ने फिलहाल अनुमति नहीं दी है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आयोजकों की ओर से प्रदर्शन की तैयारी की जा रही है, लेकिन जंतर-मंतर पर सभा करने की मंजूरी अभी नहीं मिली है।

यह प्रदर्शन सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्र संगठनों की ओर से बुलाया गया है। प्रदर्शन में चुनाव आयोग के कामकाज और वोटर लिस्ट में होने वाले स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर सवाल उठाए जाएंगे।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि जंतर-मंतर पर प्रस्तावित इस प्रदर्शन के लिए अभी तक अनुमति नहीं दी गई है।

बता दें कि यह प्रदर्शन गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर को आयोजित किया जाना है। इस दौरान प्रदर्शन के आयोजकों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

वहीं, प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर इलाके की ओर जाने वाली सड़कों पर बैरिकेड्स भी लगा दिए हैं।

बता दें कि आम आदमी पार्टी (AAP) दिल्ली के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने सोमवार को लोगों से जंतर-मंतर पर हो रहे विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की सार्वजनिक अपील की थी। इसके अलावा, कुछ अन्य विपक्षी समूह भी इस प्रदर्शन में शामिल हो सकते हैं या अलग से प्रदर्शन कर सकते हैं।

इस बीच, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) आंदोलन के संस्थापक अभिजीत दिपके ने 2 अक्टूबर को शाम 4 बजे मुंबई के शिवाजी पार्क में समानांतर “जेल भरो आंदोलन” की घोषणा की है।

दिपके ने पहले कहा था कि मुंबई पुलिस ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP के 2 अक्टूबर को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन की इजाजत देने से इनकार कर दिया है। इसके बाद, उन्होंने गांधी जयंती के दिन ‘जेल भरो आंदोलन’ शुरू करने का ऐलान किया।

शिवाजी पार्क में प्रदर्शन की इजाजत क्यों नहीं मिली?

हालांकि, मुंबई पुलिस ने साफ किया कि बॉम्बे हाई कोर्ट के 2013 के आदेश को देखते हुए, उन्हें शिवाजी पार्क में सभा के लिए “इजाजत देने का अधिकार नहीं है” और यह इलाका एक “साइलेंस जोन” है। पुलिस ने कहा कि आवेदन करने वाले अजिंक्य शिंदे को सलाह दी गई थी कि वे मुंबई में कोई दूसरी जगह देखें और इजाजत के लिए आवेदन करें, जिस पर उचित रूप से विचार किया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, CJP ने मूल रूप से योजना बनाई थी कि अगर ज्ञानेश कुमार CEC के पद से इस्तीफा नहीं देते हैं, तो 2 अक्टूबर को मुंबई से देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।

ANI के मुताबिक, 25 सितंबर को दिपके ने कहा था, “अगर ज्ञानेश कुमार कल तक इस्तीफा नहीं देते हैं, तो CJP 2 अक्टूबर को मुंबई से देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू करेगा और इसे भारत भर के शहरों तक ले जाएगा। आइए, इस गांधी जयंती पर लोकतंत्र को बचाने का संकल्प लें।”

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दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर तरनजीत सिंह संधू ने द्वारका में डीडीए के एक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन किया। अधिकारियों ने बताया कि, इसमें इनडोर और आउटडोर स्पोर्ट्स एक्टिविटीज़ दोनों शामिल हैं। दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (DDA) ने इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग सिस्टम के साथ 8 हेक्टेयर की एक फैसिलिटी भी विकसित की है। डीडीए ने कहा, “स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की लोकेशन, स्केल और भविष्य में इसके विस्तार की संभावना को देखते हुए, इसे बाहरी और उत्तर पश्चिम दिल्ली के लिए एक स्पोर्टिंग और वेलनेस एसेट के तौर पर देखा जा रहा है।”

अधिकारियों के मुताबिक, कॉम्प्लेक्स में छह लॉन टेनिस सिंथेटिक कोर्ट, दो बास्केटबॉल सिंथेटिक कोर्ट, एक नेटबॉल सिंथेटिक कोर्ट, एक वॉलीबॉल सिंथेटिक कोर्ट, एक स्केटिंग रिंक, नेचुरल टर्फ वाला एक क्रिकेट ग्राउंड, मिट्टी की पिचों वाले दो क्रिकेट प्रैक्टिस नेट, नेचुरल टर्फ वाला फुटबॉल-कम-हॉकी ग्राउंड और एक जॉगिंग ट्रैक है। डीडीए के पब्लिक एक्सेस के वादे को ध्यान में रखते हुए, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स पे एंड प्ले बेसिस पर काम करना शुरू करेगा, जिससे लोग शुरू से ही उपलब्ध सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकें। इसके बाद मेंबरशिप के लिए बुलाया जाएगा, जिससे नियमित यूजर्स को कॉम्प्लेक्स में आने-जाने का एक और रास्ता मिलेगा।

डीडीए ने एक बयान में कहा, “इनडोर सुविधाओं में टेबल टेनिस, योगा हॉल, एरोबिक्स हॉल, जिम, मल्टीपर्पस हॉल और दूसरी सुविधाएं शामिल हैं। कॉम्प्लेक्स में एक प्रो-शॉप और उससे जुड़ी सुविधाएं भी हैं, साथ ही लगभग 1.3 किलोमीटर की अंदरूनी पेरिफेरल रोड और लगभग 155 गाड़ियों के लिए पार्किंग की जगह भी है।” अधिकारियों ने कहा कि जल्द ही पहली मंजिल पर एक फिटनेस सेंटर और रिहैबिलिटेशन सेंटर का प्रस्ताव है, और बाद में एक स्विमिंग पूल भी बनाया जा सकता है।

डीडीए अभी शहर भर में 18 स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, चार मिनी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और तीन गोल्फ कोर्स चलाता है। इसके रोहिणी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, सेक्टर-33, दिल्ली के लोगों की रोजमर्रा की ज़िंदगी को बेहतर बनाने वाले क्वालिटी पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर देने के डीडीए के विजन के लगातार विकास को दिखाता है। अपनी पूरी स्पोर्टिंग सुविधाओं और भविष्य में होने वाले प्लान के साथ, इस कॉम्प्लेक्स में बाहरी और उत्तर-पश्चिम दिल्ली के लिए एक अहम स्पोर्ट्स, फिटनेस और वेलनेस डेस्टिनेशन बनने की क्षमता है।

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Delhi Property Tax: पुराना प्रॉपर्टी टैक्स बकाया है तो राहत का मौका, MCD की इस स्कीम से बच सकता है ब्याज-जुर्माना

Delhi Property Tax: अगर दिल्ली में आपकी कोई प्रॉपर्टी है और आपने कई सालों से उसका प्रॉपर्टी टैक्स नहीं भरा है, तो आपके लिए एक काम की खबर है। दिल्ली नगर निगम यानी MCD ने पुराने प्रॉपर्टी टैक्स बकाए को चुकाने के लिए SUNIYO 2.0 वन प्लस सेवन स्कीम शुरू की है। यह स्कीम 29 सितंबर 2026 से लागू हो गई है। इसका फायदा 31 दिसंबर 2026 तक उठाया जा सकता है।

इस स्कीम का मकसद उन लोगों को अपना पुराना प्रॉपर्टी टैक्स अकाउंट क्लियर करने का मौका देना है जिन पर कई सालों से टैक्स बकाया है। खास बात यह है कि तय शर्तों के मुताबिक, पेमेंट करने पर 2019-20 से पहले के पुराने बकाए पर ब्याज और पेनल्टी में राहत मिलेगी। लेकिन इसके लिए पहले कुछ तय सालों का प्रिंसिपल टैक्स चुकाना जरूरी होगा।

क्या है SUNIYO 2.0 One Plus Seven स्कीम?

MCD की इस स्कीम का नाम वन प्लस सेवन इसलिए रखा गया है क्योंकि इसमें पिछले सात फाइनेंशियल ईयर के साथ-साथ मौजूदा फाइनेंशियल ईयर 2026-27 का प्रिंसिपल प्रॉपर्टी टैक्स भी शामिल है। इसका मतलब है कि प्रॉपर्टी टैक्सपेयर को 2026-27 का प्रिंसिपल टैक्स और 2019-20 से 2025-26 तक के सात सालों का प्रिंसिपल टैक्स देना होगा।

इसके बाद, स्कीम में बताई गई शर्तों के तहत, 2019-20 से पहले के पुराने बकाया पर लगे इंटरेस्ट और पेनल्टी से राहत मिल सकती है। आसान शब्दों में कहूं तो अगर किसी प्रॉपर्टी पर टैक्स कई सालों से नहीं दिया गया है, तो MCD की यह स्कीम पुराना हिसाब चुकाने का मौका देती है। लेकिन, इसका फायदा उठाने के लिए सिर्फ पुराना इंटरेस्ट या पेनल्टी देना काफी नहीं है। बल्कि, स्कीम के तहत बताई गई प्रिंसिपल टैक्स लायबिलिटी देनी होगी।

31 दिसंबर है आखिरी तारीख

इस स्कीम का फायदा उठाने के लिए प्रॉपर्टी टैक्सपेयर्स को 31 दिसंबर, 2026 तक जरूरी प्रोसेस पूरे करने होंगे। उन्हें ‘MCD प्रॉपर्टी टैक्स पोर्टल’ पर अपना प्रॉपर्टी टैक्स रिटर्न ऑनलाइन फाइल करना होगा। इस दौरान जरूरी पेमेंट करना होगा। प्रॉपर्टी टैक्स से जुड़ी सर्विसेज के साथ-साथ SUNIYO स्कीम की जानकारी भी MCD पोर्टल पर मौजूद है।

₹5 लाख या उससे ज्यादा बकाया है तो किस्तों में भुगतान

यह स्कीम उन प्रॉपर्टी टैक्सपेयर्स के लिए भी एक सुविधा देती है जिन पर ज़्यादा बकाया है। अगर किसी टैक्सपेयर की कुल देनदारी ₹5 लाख या उससे ज्यादा है, तो वे स्कीम के समय के दौरान बराबर किश्तों में रकम चुका सकते हैं। इसका मतलब है कि जिन लोगों पर प्रॉपर्टी टैक्स की बड़ी देनदारी है, उनके पास एकमुश्त रकम चुकाने के बजाय, तय नियमों के मुताबिक पूरी रकम किश्तों में चुकाने का ऑप्शन होगा।

सिर्फ भुगतान करना ही काफी नहीं, रिटर्न भी भरना होगा

SUNIYO 2.0 का फायदा उठाने के लिए टैक्सपेयर्स को अपना प्रॉपर्टी टैक्स रिटर्न ऑनलाइन फाइल करना होगा। उसी हिसाब से जरूरी पेमेंट करना होगा। इसलिए, कोई भी पेमेंट करने से पहले अपनी प्रॉपर्टी की डिटेल्स, प्रॉपर्टी ID/UPIC और बकाया बैलेंस को ध्यान से चेक करना जरूरी है। MCD प्रॉपर्टी टैक्स पोर्टल टैक्सपेयर्स के लिए प्रॉपर्टी डिटेल्स और टैक्स ड्यू सर्टिफिकेट जैसे फीचर भी देता है।

बाद में MCD करेगी जांच

प्रॉपर्टी टैक्सपेयर्स को यहां खास तौर पर सावधान रहना चाहिए। MCD बाद में स्कीम के तहत फाइल किए गए रिटर्न की स्क्रूटनी करेगी। यह स्क्रूटनी 1 अप्रैल, 2027 और 31 मार्च, 2028 के बीच होगी। अगर स्क्रूटनी में पता चलता है कि टैक्सपेयर ने कम पेमेंट किया है, तो MCD अंतर वसूल सकता है और 30% पेनाल्टी लगा सकता है। इसलिए, सिर्फ स्कीम का फायदा उठाने के लिए गलत जानकारी के साथ रिटर्न फाइल करना महंगा पड़ सकता है।

(दिल्ली से शुभांगी तिवारी की रिपोर्ट)

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