DDA का रक्षाबंधन पर बड़ा तोहफा! नरेला में 1,287 HIG और MIG फ्लैट्स पर 25% डिस्काउंट, 28 अगस्त से बुकिंग शुरू

दिल्ली में घर खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने एक बड़ी खुशखबरी दी है। रक्षाबंधन के मौके पर DDA ने नागरिक आवास योजना 2026 में बदलाव करते हुए नरेला में 1,287 और नए फ्लैट जोड़े हैं। इन घरों की कीमत पर 25 फीसदी की छूट दी जाएगी। रक्षा बंधन से पहले की गई इस घोषणा से कम कीमत में घर खरीदने की योजना बना रहे लोगों को फायदा मिल सकता है। फ्लैट खरीदने के इच्छुक लोग 28 अगस्त 2026 से बुकिंग कर सकेंगे। आइए जानते है डीडीए की इस योजना के बारे में

डीडीए ने जोड़े 1,287 फ्लैट

DDA ने 18 अगस्त 2026 को एक सर्कुलर जारी कर ये जानकारी दी है। इस सर्कुलर में नरेला के सेक्टर A1-A4 के पॉकेट 3 और 4 में 1,287 फ्लैट जोड़ने की बात कही गई है। अथॉरिटी ने इन फ्लैटों की पूरी जानकारी के साथ उनकी छूट वाली कीमतों की लिस्ट भी जारी कर दी है। DDA की इस नई सूची में नरेला के सेक्टर A1-A4 के पॉकेट 3 और 4 के फ्लैट शामिल किए गए हैं। इनमें कुल 1,287 घर हैं, जिनमें 790 फ्लैट मिडिल इनकम ग्रुप (MIG) के लिए और 497 फ्लैट हाई इनकम ग्रुप (HIG) के लिए रखे गए हैं। इससे अलग-अलग आय वर्ग के लोगों को घर खरीदने का ऑप्शन मिलेगा।

कब से कर सकेंगे बुकिंग

DDA के नए फ्लैटों की बुकिंग 28 अगस्त को दोपहर 12 बजे से शुरू होगी। इन फ्लैटों का आवंटन ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर किया जाएगा। यानी जो पात्र लोग बुकिंग प्रक्रिया सबसे पहले पूरी करेंगे, उन्हें फ्लैट मिलने में प्राथमिकता दी जाएगी। ऐसे में घर खरीदने के इच्छुक लोगों के लिए बुकिंग शुरू होते ही आवेदन करना फायदेमंद रहेगा।

25% की मिलेगी छूट

DDA ने नए फ्लैटों की पूरी जानकारी जारी कर दी है। इसमें फ्लैट की मंजिल, उसका आकार और 25 फीसदी छूट के बाद की कीमत बताई गई है। कई MIG फ्लैट 126 से 140 वर्ग मीटर के हैं, जिनकी छूट के बाद कीमत करीब 73.7 लाख से 81.8 लाख रुपये तक है। अथॉरिटी की जारी सूची में हर फ्लैट की छूट के बाद वाली कीमत अलग-अलग बताई गई है। इन फ्लैटों पर नागरिक आवास योजना 2026 के सभी नियम और शर्तें लागू होंगी।

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ऐतिहासिक रोशनआरा क्लब की लाइफटाइम मेंबरशिप खोलने जा रहा DDA, जानिए कितनी है इसकी फीस और कौन-कैसे कर सकता है अप्लाई

DDA Roshanara Club Lifetime Membership: दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू के निर्देशों पर दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ऐतिहासिक डीडीए रोशनआरा क्लब की लाइफटाइम मेंबरशिप खोलने जा रहा है। कुल 750 सीटों के लिए यह मेंबरशिप स्कीम शुरू की जा रही है, जिसके जरिए दिल्लीवासियों को इस ऐतिहासिक क्लब की वर्ल्ड क्लास स्पोर्ट्स, फिटनेस और रिक्रिएशनल सुविधाओं का फायदा उठाने का मौका मिलेगा।

अगर आप भी 100 साल से ज्यादा पुराने और भारतीय क्रिकेट के इतिहास से जुड़े इस क्लब का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो जानिए फीस, योग्यता और ऑनलाइन आवेदन की पूरी प्रक्रिया।

मेंबरशिप कैटेगरी और फीस स्ट्रक्चर

डीडीए की ओर से कुल 750 लाइफटाइम मेंबरशिप दो अलग-अलग श्रेणियों में दी जा रही हैं:

नॉन-गवर्नमेंट कैटेगरी: आम नागरिकों और प्राइवेट सेक्टर के लोगों के लिए कुल 400 सीटें रखी गई हैं। इसके लिए मेंबरशिप चार्ज ₹12.50 लाख + GST तय किया गया है।

गवर्नमेंट / पीएसयू कैटेगरी: सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए 350 सीटें रिजर्व हैं। इसकी फीस ₹4 लाख + GST है।

कब से शुरू होंगे आवेदन और कैसे करें अप्लाई?

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 28 अगस्त 2026 की रात 12:00 बजे से शुरू होगी।आवेदक 27 अक्टूबर 2026 (रात 11:59 बजे) तक अपना फॉर्म और फीस जमा कर सकते हैं। इच्छुक लोग केवल डीडीए के आधिकारिक पोर्टल के जरिए ही अप्लाई कर सकते हैं।

आधिकारिक लिंक: [https://online.dda.org.in/golfcourse/RoshanaraClub/RoshanaraClubHome.aspx](https://online.dda.org.in/golfcourse/RoshanaraClub/RoshanaraClubHome.aspx)

क्लब में मिलेंगी कौन-कौन सी स्पोर्ट्स सुविधाएं?

22 एकड़ में फैले हरे-भरे रोशनआरा क्लब में सदस्यों को इन खेलों और फिटनेस गतिविधियों की सुविधा मिलेगी:

आउटडोर व इनडोर गेम्स: मेन क्रिकेट पिच और प्रैक्टिस पिच, टेनिस, स्क्वॉश, बास्केटबॉल, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, पिकलबॉल, बिलियर्ड्स और कार्ड रूम।

फिटनेस व स्विमिंग: स्विमिंग पूल, बच्चों के लिए टॉडलर पूल, मल्टी-जिम, फिटनेस सेंटर और योग क्लासेस।

कोचिंग फैसिलिटी: उभरते खिलाड़ियों के लिए योग्य कोचों द्वारा कोचिंग की सुविधा भी दी जाएगी। साथ ही क्रिकेट ग्राउंड को टूर्नामेंट्स और कॉरपोरेट इवेंट्स के लिए भी बुक किया जा सकेगा।

सोशल और क्लब हाउस सुविधाएं

स्पोर्ट्स के अलावा क्लब हाउस में सदस्यों के मनोरंजन और सोशल गैदरिंग के लिए ये सुविधाएं होंगी:

  • लाउंज, रेस्टोरेंट, कैफे और डाइनिंग एरिया
  • बार और बैंक्वेट सुविधाएं
  • किड्स जोन

क्या है रोशनआरा क्लब का इतिहास?

22 एकड़ का ऐतिहासिक परिसर और 100 साल से भी पुराना यह क्लब भारतीय क्रिकेट के शुरुआती इतिहास से जुड़ा हुआ है। इस क्लब को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के जन्मस्थान के रूप में जाना जाता है। डीडीए ने 29 सितंबर 2023 को इस ऐतिहासिक क्लब का आधिकारिक रूप से अधिग्रहण कर लिया था।

DDA रोशनआरा क्लब मेंबरशिप डिटेल्स

कुल उपलब्ध मेंबरशिप: 750

आम नागरिक फीस: ₹12.50 लाख + GST (400 सीटें)

सरकारी कर्मचारी फीस: ₹4.00 लाख + GST (350 सीटें)

रजिस्ट्रेशन शुरू होने की तिथि: 28 अगस्त 2026

रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि: 27 अक्टूबर 2026

क्लब का कुल क्षेत्रफल: 22 एकड़

दिल्ली के उपराज्यपाल के ‘ईज ऑफ लिविंग’ और एक्टिव लाइफस्टाइल को बढ़ावा देने के विजन के तहत यह कदम उठाया गया है। दिल्ली के 18 स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और 3 गोल्फ कोर्स चलाने वाला DDA अब खेल प्रेमियों को देश के सबसे पुराने और ऐतिहासिक क्लबों में से एक का हिस्सा बनने का यह सुनहरा मौका दे रहा है।

यमुना इवेंट केस में ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ को बड़ी राहत, SC ने NGT का फैसला पलटा; ₹5 करोड़ लौटाने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के 2017 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें ‘आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन’ को दिल्ली में 2016 में हुए ‘वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल’ के दौरान यमुना के बाढ़ वाले इलाके (फ्लडप्लेन) को हुए नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था। साथ ही, कोर्ट ने दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (DDA) को निर्देश दिया कि वह संगठन द्वारा जमा किए गए 5 करोड़ रुपये के पर्यावरण मुआवजे की रकम वापस करे।

सुनवाई के दौरान जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने ‘व्यक्ति विकास केंद्र इंडिया’ की अपील को मंजूरी दे दी। यह ‘आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन’ से जुड़ा एक रजिस्टर्ड पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई सीधा सबूत नहीं मिला, जिससे यह साबित हो सके कि वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल और यमुना के बाढ़ क्षेत्र को हुए नुकसान के बीच सीधा संबंध था। कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति या संस्था को पर्यावरण को हुए नुकसान के लिए पूरी तरह जिम्मेदार तभी ठहराया जा सकता है, जब उसके कथित काम और पर्यावरण को हुए नुकसान के बीच सीधा और स्पष्ट संबंध साबित हो।

कोर्ट ने यह भी पाया कि NGT ने अपील करने वाले को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त मौका नहीं दिया था और जरूरी जानकारी को नजरअंदाज किया था। कोर्ट ने ध्यान दिया कि कार्यक्रम स्थल पहले से ही जर्जर हालत में था।

सुप्रीम कोर्ट ने DDA की आलोचना की

‘आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन’ को राहत देते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने यमुना के सक्रिय बाढ़-मैदान (फ्लडप्लेन) पर कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति देने के लिए DDA की आलोचना की।

कोर्ट ने कहा, “जिस तरह से DDA ने यमुना के सक्रिय बाढ़-मैदान पर कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दी, वह गलत था।”

कोर्ट ने पाया कि DDA बाढ़-मैदान की सुरक्षा की अपनी कानूनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रहा और उस इलाके के लिए जिम्मेदार अथॉरिटी के तौर पर उस पर किए गए भरोसे का उल्लंघन किया।

हालांकि, कोर्ट ने साफ किया कि अपील में DDA द्वारा दी गई अनुमति की वैधता कोई मुद्दा नहीं थी।

सुप्रीम कोर्ट ने DDA को NGT के निर्देशों के अनुसार यमुना बाढ़-मैदान के पुनर्वास का काम जारी रखने का निर्देश दिया। कोर्ट ने देखा कि पुनर्वास का काम पहले ही शुरू हो चुका था और इसे जारी रखने का आदेश दिया।

5 करोड़ रुपये का मुआवजा कैसे तय हुआ

NGT ने दिसंबर 2017 में ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ पर 5 करोड़ रुपये का पर्यावरण मुआवजा लगाया था। यह मुआवजा 11 से 13 मार्च, 2016 तक हुए ‘वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल’ की तैयारियों के दौरान फ्लडप्लेन (नदी के किनारे की जमीन) को हुए नुकसान के लिए लगाया गया था।

फेस्टिवल के पहले दिन, यानी 11 मार्च को, आयोजकों ने NGT से पूरी रकम जमा करने के लिए चार हफ्ते का समय मांगा। ट्रिब्यूनल ने उस दिन शुरुआती तौर पर 25 लाख रुपये जमा करने की इजाजत दी और बाकी बचे 4.75 करोड़ रुपये जमा करने के लिए तीन हफ्ते का समय दिया।

संगठन ने 25 लाख रुपये जमा कर दिए। इसके बाद उसने NGT से अनुरोध किया कि बाकी 4.75 करोड़ रुपये को भुगतान के बजाय बैंक गारंटी के रूप में स्वीकार किया जाए। संगठन ने यह भी प्रस्ताव दिया कि इस रकम का इस्तेमाल इलाके में बायोडायवर्सिटी पार्क बनाने के लिए किया जाए।

बाद में पूरी 5 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि जमा कर दी गई। इसके बाद व्यक्ति विकास केंद्र ने NGT के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

कर्नाटक जमीन अतिक्रमण मामला

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला कर्नाटक हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाने के कुछ हफ्ते बाद आया है, जिसमें ‘आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन’, उससे जुड़ी संस्थाओं और अन्य लोगों पर बड़े पैमाने पर जमीन पर कब्जा करने के आरोपों की जांच के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाने का सरकारी आदेश दिया गया था।

3 अगस्त को जस्टिस ई.एस. इंदिरेश ने ‘वेद विज्ञान महा विद्या पीठ ट्रस्ट’ (जो ‘आर्ट ऑफ़ लिविंग’ से जुड़ी संस्था है) की याचिका पर एक अंतरिम आदेश पारित किया। इस ट्रस्ट ने SIT बनाने के 17 जुलाई, 2026 के सरकारी आदेश को चुनौती दी थी।

SIT को कग्गलिपुरा गांव के सर्वे नंबर 46 और आस-पास के इलाकों में कथित कब्जे की जांच का काम सौंपा गया था। इसमें कई अधिकारी शामिल थे, जिनमें बेंगलुरु डिवीजन के रीजनल कमिश्नर और रेवेन्यू डिपार्टमेंट के कानूनी सलाहकार के तौर पर काम कर रहे एक रिटायर्ड जिला जज शामिल थे।

SIT के खिलाफ तर्क

याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट श्रीरंगा एस. ने तर्क दिया कि ट्रस्ट और ‘आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन’ ने अपनी जमीन की ‘पोडी’ और ‘हुदबस्त’ (यानी सीमा तय करने और सर्वे) के लिए कई बार रेवेन्यू अधिकारियों से संपर्क किया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

याचिकाकर्ता ने कहा कि बिना जमीन की सीमाएं तय किए और कानून के मुताबिक संयुक्त सर्वे कराए सरकार यह नहीं कह सकती कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हुआ है।

एडवोकेट सुमना नागानंद के जरिए दायर याचिका में SIT बनाने के कानूनी आधार को चुनौती दी गई। इसमें तर्क दिया गया कि कर्नाटक लैंड रेवेन्यू एक्ट, 1964 की धारा 195 सरकारी अधिकारियों को अपनी शक्तियां दूसरों को सौंपने की इजाजत तो देती है, लेकिन SIT बनाने का अधिकार नहीं देती।

याचिका में ‘कर्नाटक लैंड ग्रैबिंग प्रोहिबिशन एक्ट, 2011’ की धारा 8 का भी हवाला दिया गया। इसमें कहा गया कि यह कानून को लागू करने और उसका कामकाज देखने के लिए तहसीलदार के पद से नीचे के अधिकारी की नियुक्ति की इजाजत तो देता है, लेकिन सरकार को कोई जांच एजेंसी बनाने का अधिकार नहीं देता।

याचिकाकर्ता ने SIT में ‘शिरास्तेदारों’ (Shirastedars) को शामिल करने पर भी आपत्ति जताई। उनका तर्क था कि कानून तहसीलदार के पद से नीचे के अधिकारियों की नियुक्ति की इजाजत नहीं देता। साथ ही, एक रिटायर्ड जिला जज को “लिटिगेशन मैनेजमेंट कंसल्टेंट” के तौर पर नियुक्त करने पर भी सवाल उठाए गए।

उचित प्रक्रिया पर सवाल

याचिका में दलील दी गई कि कर्नाटक लैंड ग्रैबिंग प्रोहिबिशन एक्ट के तहत बनाई गई विशेष अदालत के पास जमीन अतिक्रमण के मामलों पर सुनवाई शुरू करने का अधिकार है। इसके बावजूद सरकार ने उस अदालत में कार्रवाई शुरू किए बिना ही SIT का गठन कर दिया।

याचिका में रीजनल कमिश्नर अमलान आदित्य बिस्वास को SIT का प्रमुख बनाए जाने पर भी सवाल उठाया गया। सरकार के आदेश में बिस्वास की एक रिपोर्ट का हवाला दिया गया था। उन्होंने 7 जुलाई को सरकार को पत्र लिखकर कहा था कि ट्रस्ट और अन्य लोगों ने प्रथम दृष्टया सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किया है।

याचिकाकर्ता ने दलील दी कि जिस अधिकारी ने पहले ही अतिक्रमण की बात कही है, उसी को SIT का प्रमुख बनाना पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण है।

सरकार के आदेश में सितंबर 2025 में हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के एक आदेश का भी हवाला दिया गया था। इस आदेश में अधिकारियों को कथित अतिक्रमण के मामले में कानून के मुताबिक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, याचिकाकर्ता ने दलील दी कि इसके बाद की कार्रवाई में कानूनी प्रक्रिया का ठीक से पालन नहीं किया गया।

कर्नाटक हाई कोर्ट को यह भी बताया गया कि कथित जमीन अतिक्रमण के मामले में ट्रस्ट के एक पदाधिकारी के खिलाफ आपराधिक मामला पहले से अदालत में लंबित है।

कर्नाटक का यह मामला SIT के गठन की वैधता और जमीन से जुड़े आरोपों की जांच में राज्य सरकार की ओर से अपनाई गई प्रक्रिया से जुड़ा है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील का मामला 2016 के वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल के दौरान यमुना के बाढ़ क्षेत्र को कथित नुकसान के लिए आर्ट ऑफ लिविंग की जिम्मेदारी से जुड़ा था।

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Delhi Master Plan 2047: दिल्ली के इन इलाकों में बदल जाएगी तस्वीर, 200 वर्ग किमी में नया शहर बसाने की तैयारी

दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) मास्टर प्लान दिल्ली-2047 (MPD-2047) के तहत राजधानी के बाहरी इलाकों के विकास को लेकर बड़ा प्लान तैयार किया गया है। MPD-2047 के तहत दिल्ली के बाहरी इलाकों में करीब 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को विकसित करने की योजना है। लैंड पूलिंग के जरिए यहां व्यवस्थित तरीके से विकास किया जाएगा। इस इलाके में करीब 600 किलोमीटर लंबी नई सड़कें बनाने की योजना है। 30 मीटर या उससे ज्यादा चौड़ी सड़कों को दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) विकसित करेगा। यह योजना विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है।

जानें इस विकास मॉडल के बारे में

अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 (UER-II) के आसपास घने और मिश्रित तरीके से विकास को बढ़ावा देने की योजना है। यहां सस्ते घरों के साथ दुकानों, दफ्तरों, संस्थानों, लॉजिस्टिक्स और गोदामों जैसी सुविधाओं को विकसित किया जा सकेगा। MPD-2047 में अलग-अलग विकास मॉडल रखे गए हैं, जिससे जरूरत के अनुसार इलाकों को विकसित किया जा सकेगा।

MPD-2047 के जरिए होगा विकास

दिल्ली-2047 मास्टर प्लान के तहत राजधानी के बाहरी इलाकों में विकास को गति देने की तैयारी है। इसके लिए करीब 200 वर्ग किलोमीटर के अर्बन एक्सटेंशन क्षेत्र में लैंड पूलिंग व्यवस्था को मजबूत किया गया है। योजना का उद्देश्य इन क्षेत्रों में सड़क और दूसरी जरूरी सुविधाओं के साथ व्यवस्थित विकास करना है। इसके तहत करीब 600 किलोमीटर का नया सड़क नेटवर्क तैयार करने की योजना है, जिससे लैंड पूलिंग वाले इलाकों में बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकेगी। MPD-2047 में जमीन मालिकों की सुविधा के लिए अलग-अलग विकास मॉडल हैं। इससे जमीन के मालिक अपनी सुविधा के अनुसार योजना में शामिल हो सकेंगे और इलाकों में जरूरी सुविधाएं समय पर तैयार करने में मदद मिलेगी। वहीं, DDA सड़क, परिवहन और अन्य जरूरी सुविधाएं विकसित करेगा।

बेहतर आवास के साथ मिलेगी अच्छी सुविधा

MPD-2047 में शहर के विकास को पहले से ज्यादा व्यवस्थित और सुविधाओं पर आधारित बनाने पर जोर दिया गया है। 30 मीटर या उससे ज्यादा चौड़ी सड़कों को DDA की ओर से विकसित किया जाएगा। नए शहरी क्षेत्रों में सिर्फ घर ही नहीं बनाए जाएंगे, बल्कि स्कूल, अस्पताल, पार्क, हरित क्षेत्र, बाजार और दूसरी जरूरी सार्वजनिक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। इसका उद्देश्य लोगों को बेहतर आवास के साथ अच्छी और सुविधाजनक जीवनशैली देना है।

20 हेक्टेयर जमीन की जरूरत

दिल्ली के बाहरी इलाकों में निजी जमीन को योजनाबद्ध तरीके से विकसित करने के लिए 2018 में लैंड पूलिंग पॉलिसी शुरू की गई थी। इसमें जमीन मालिक अपनी इच्छा से योजना में शामिल हो सकते हैं और DDA की भूमिका एक मददगार संस्था के तौर पर रहती है। अब MPD-2047 के तहत इस व्यवस्था को और आसान बनाने की तैयारी है। जमीन मालिक कंसोर्टियम के जरिए जमीन को एक साथ लाकर विकास कर सकते हैं। इसके अलावा टाउन प्लानिंग जैसे विकल्प भी दिए गए हैं, जिसमें कम से कम 20 हेक्टेयर जमीन की जरूरत होगी।

नए इलाकों में घरों को किया जाएगा विकसित

MPD-2047 के तहत नए इलाकों में घरों के साथ लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने वाली सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। सड़क की चौड़ाई के अनुसार रिहायशी क्षेत्रों में दुकान, छोटे कारोबार और दूसरी सेवाओं की अनुमति दी जा सकेगी। वहीं, UER-II के आसपास सस्ते घरों के साथ बाजार, संस्थान, लॉजिस्टिक्स और गोदाम बनाने की योजना है। इससे इन क्षेत्रों में रोजगार और कारोबार के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।

जुलाई 2026 तक मिले इतने आवेदन

लैंड पूलिंग पॉलिसी को तेजी से लागू करने के लिए दिल्ली डेवलपमेंट एक्ट, 1957 में जरूरी बदलाव किए जाएंगे। यह योजना छह प्लानिंग जोन K-I, L, N, P-II, P-I का हिस्सा और J के 105 गांवों में लागू है, जिन्हें 138 सेक्टर में बांटा गया है। जुलाई 2026 तक इस योजना के तहत 7,615 से ज्यादा आवेदन मिल चुके थे और 7,885 हेक्टेयर से अधिक जमीन पूल की जा चुकी थी। 16 सेक्टर में तय लक्ष्य के 70 फीसदी से ज्यादा जमीन इकट्ठा हो चुकी है, जिसके बाद DDA ने वहां कंसोर्टियम बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

प्लानिंग जोन P-II का सेक्टर 8B लैंड पूलिंग योजना में आगे बढ़ने वाला पहला सेक्टर बन गया है। गाड़ी खसरो और इब्राहिम पुर गांवों में आने वाले इस सेक्टर में 70 फीसदी से ज्यादा जमीन एक साथ पूल हो चुकी है, इसलिए अब यहां विकास कार्य शुरू किए जा सकते हैं। इसके अलावा आठ अन्य सेक्टरों के जमीन मालिकों ने भी DDA को कंसोर्टियम बनाने की जानकारी दी है, जिससे योजना को जमीन पर लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

MPD-2047 के तहत लैंड पूलिंग के जरिए दिल्ली के बाहरी इलाकों को बेहतर तरीके से विकसित करने की योजना है। इन क्षेत्रों में सड़क और दूसरी जरूरी सुविधाओं के साथ घर, रोजगार के अवसर, सार्वजनिक सुविधाएं और हरित क्षेत्र भी तैयार किए जाएंगे।

40 लाख नए घर, 200 वर्ग किमी अर्बन एक्सपेंशन! दिल्ली मास्टर प्लान 2047 की वो 18 बातें जो बदल देंगी राजधानी की पूरी तस्वीर

Delhi Master Plan 2047: देश की राजधानी दिल्ली के भविष्य को एक नई दिशा देने के लिए दिल्ली मास्टर प्लान 2047 (MPD-2047) का औपचारिक ऐलान कर दिया गया है। केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य और बिजली मंत्री मनोहर लाल ने इस महत्वाकांक्षी मास्टर प्लान का अनावरण किया। इस मास्टर प्लान में मौजूदा निर्मित क्षेत्रों (ब्राउनफील्ड) के पुनर्विकास और नए क्षेत्रों (ग्रीनफील्ड) के विकास के लिए दो अलग-अलग योजना दृष्टिकोण अपनाए गए हैं। आइए जानते हैं दिल्ली मास्टर प्लान 2047 की वो 18 बड़ी बातें जो राजधानी की पूरी तस्वीर बदल कर रख देंगी।

1- 40 लाख से अधिक नए किफायती घर

भविष्य में सबके लिए घर हो, ये सपना दिल्ली मास्टर प्लान 2027 में देखा गया है। इसके लिए 40 लाख से अधिक नए किफायती मकान बनाए जाएंगे। इसके तहत ग्रुप हाउसिंग और डीडीए कॉलोनियों के पुनर्विकास के लिए न्यूनतम क्षेत्र की आवश्यकता को 40000 वर्ग मीटर से घटाकर 3000 वर्ग मीटर कर दिया गया है। इससे करीब 7 लाख एक्स्ट्रा मकान बनेंगे। ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) जोन यानी मेट्रो कॉरिडोर के किनारे लगभग 18 लाख किफायती मकान बनेंगे।

झुग्गी-झोपड़ी (JJ) क्लस्टर के निवासियों के लिए इन-सिटू यानी वहीं पर पुनर्विकास के जरिए 17 लाख से अधिक लोगों को सम्मानजनक घर दिए जाएंगे। 5000 वर्ग मीटर या उससे बड़े औद्योगिक भूखंडों पर श्रमिकों के आवास के लिए 15% अतिरिक्त FAR (फ्लोर एरिया रेशियो) मिलेगा। हाई डेंसिटी कॉरिडोर के पास भी किफायती घर बनेंगे। छात्रों, कामकाजी पेशेवरों, प्रवासी मजदूरों और कम आय वाले समूहों के लिए किराये के मकानों को बढ़ावा देने के लिए 50% FAR प्रोत्साहन दिया जाएगा।

2- लैंड पूलिंग नीति से 200 वर्ग किमी में नया शहरी विस्तार

दिल्ली में लैंड पूलिंग नीति के तहत करीब 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में नया सुनियोजित शहरी विस्तार होगा। इससे करीब 12 लाख नए घर बनेंगे। इसमें 600 किमी लंबा सड़कों का नेटवर्क बनेगा। डीडीए खुद पहले ही 30 मीटर या उससे चौड़ी सड़कें बनाएगा। जमीन जुटाकर कम से कम 20 हेक्टेयर की योजनाओं के जरिए तेजी से विकास किया जाएगा। यूईआर-II के किनारे 250 मीटर चौड़े कॉरिडोर में 400 तक FAR के साथ हाई-डेंसिटी विकास होगा। गढ़ी खसरो और इब्राहिमपुर गांव का सेक्टर 8B पहला अधिसूचित सेक्टर बन गया है जो लागू होने के लिए तैयार है।

3 – व्यापारिक और वाणिज्यिक स्थलों का कायाकल्प

व्यापारिक केंद्रों का पुनर्विकास अब न्यूनतम 1000 वर्ग मीटर के भूखंड पर प्रोत्साहन FAR के साथ करने की अनुमति होगी। इससे जिससे निवेश को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा 30 मीटर या उससे चौड़ी सड़कों पर मिक्स्ड-यूज डेवलपमेंट के तहत ग्राउंड फ्लोर और स्टिल्ट वाले भवनों के पहले निचले फ्लोर पर व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति होगी।

4- उद्योगों को बढ़ावा और आधुनिक सुविधाएं

औद्योगिक क्षेत्रों में आधुनिक औद्योगिक पार्क तैयार किए जाएंगे। औद्योगिक क्षेत्रों में बड़े रिटेल स्टोर, ई-कॉमर्स, वेयरहाउसिंग, को-वर्किंग स्पेस और डेटा सेंटर खोलने की अनुमति दी जाएगी ताकि नए स्टार्टअप और इनोवेशन को सपोर्ट मिल सके।

5- दिल्ली की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण

दिल्ली की करीब 1500 धरोहरों और ऐतिहासिक संपत्तियों के संरक्षण के लिए कल्चरल रिसोर्स मैनेजमेंट प्लान बनाया जाएगा। ऐतिहासिक चरित्र को बनाए रखते हुए इन इमारतों का उपयोग होटल, म्यूजियम, ऑफिस, लाइब्रेरी और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए करने की सुविधा मिलेगी। पहली बार हेरिटेज इंसेंटिव के तहत 50 TDR की व्यवस्था शुरू की गई है।

6- यमुना नदी का पुनरुद्धार और ग्रीन-ब्लू दिल्ली

यमुना नदी के करीब 1700 हेक्टेयर में फैले बाढ़ के मैदानों (फ्लडप्लेन्स) के संरक्षण और पारिस्थितिक सुधार के लिए 13 बड़ी परियोजनाएं चलाई जाएंगी। इसके साथ ही यमुना के किनारे 52 किलोमीटर लंबा साइकिल ट्रैक विकसित किया जाएगा।

7- नरेला बनेगा एजुकेशन हब

नरेला को वर्ल्ड क्लास एजुकेशन हब के रूप में बदला जाएगा। इसके लिए 138 हेक्टेयर जमीन आरक्षित की गई है, जहां सरकारी और प्राइवेट यूनिवर्सिटीज विकसित की जाएंगी।

8- द्वारका बनेगा नया इंटरनेशनल इन्वेस्ट-हब

द्वारका को दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय प्रवेश द्वार के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां आईटी, स्टार्टअप्स, डेटा सेंटर और इंडस्ट्रियल पार्क जैसे भविष्य के उद्योगों के लिए विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा।

9- बेहतर और आसान परिवहन व्यवस्था

यूनिफाइड ट्रांसपोर्ट सिस्टम के लिए ‘यूनिफाइड मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी’ बनाई जाएगी। मेट्रो, आरआरटीएस, बसों और पैदल चलने वालों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी के लिए मल्टी-मॉडल ट्रांजिट हब बनेंगे। अंतर-राज्यीय और शहर के भीतर आवाजाही आसान करने के लिए UER-I, UER-II और UER-III का विस्तार होगा। इसके साथ ही पार्किंग की एकीकृत योजना और प्रबंधन के लिए नया फ्रेमवर्क लागू होगा।

10- ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और सरल नियम

व्यापार और जीवन को आसान बनाने के लिए ऑनलाइन मंजूरी और सरल प्रक्रियाएं लागू की जाएंगी। नियमों को बेहद आसान बनाते हुए उपयोग की श्रेणियों को 133 से घटाकर सिर्फ 45 कर दिया गया है। इसके अलावा आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए नेगेटिव लिस्ट दृष्टिकोण लागू किया गया है, जिससे अधिक लचीलापन मिलेगा।

11- आसान पुनर्विकास रणनीति

प्लॉट-आधारित पुनर्विकास को बढ़ावा देने के लिए 4 हेक्टेयर जमीन की न्यूनतम आवश्यकता की शर्त हटा दी गई है। कम से कम 1000 वर्ग मीटर के भूखंडों पर उच्च FAR इंसेंटिव देकर कमर्शियल रिडेवलपमेंट को प्रोत्साहित किया जाएगा।

12- 1511 अनधिकृत कॉलोनियों का नियमितीकरण

1511 अनधिकृत कॉलोनियों में बने आवासीय भवनों को ‘जैसा है जहां है’ के आधार पर नियमित किया जाएगा। इसके लिए किसी लेआउट प्लान की जरूरत नहीं होगी। इस प्रक्रिया के सरल होने से लगभग 45 लाख निवासियों को उनके मकानों का मालिकाना हक और सुरक्षा मिलेगी।

13- 24×7 जीवंत और सुरक्षित शहर

दिल्ली को सभी के लिए समावेशी, सुरक्षित और 24 घंटे (24×7) जीवंत शहर के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए विशेष कल्चरल सर्किट बनाए जाएंगे।

14- आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और नेट जीरो डेवलपमेंट

यमुना को साफ रखने और जल गुणवत्ता सुधारने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और सीवरेज नेटवर्क का विस्तार होगा। ऊर्जा-कुशल इमारतों और कम कार्बन वाली शहरी योजना के जरिए नेट जीरो विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। छतों पर सोलर पैनल, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, वाटर रीसाइक्लिंग और कचरे से संसाधन बनाने की पहलों को लागू किया जाएगा।

15- टेक्नोलॉजी से संचालित प्रशासन

पारदर्शी, कुशल और डेटा-आधारित शहरी नियोजन के लिए जीआईएस आधारित प्लानिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा।

16- पार्क कनेक्टर्स और ग्रीन कवर का विस्तार

रीक्रिएशनल स्पेस तक लोगों के आसानी से जाने और यहां हरियाली बढ़ाने के लिए ग्रीन कनेक्ट नेटवर्क तैयार होगा। अर्बन फॉरेस्ट (शहरी जंगल), बायोडायवर्सिटी पार्क और इकोलॉजिकल कॉरिडोर के माध्यम से दिल्ली के हरित क्षेत्र का विस्तार किया जाएगा।

17- मुख्य प्रशासनिक क्षेत्र का विकास

राजधानी के प्रशासनिक और औपचारिक केंद्र को मजबूत किया जाएगा। कर्तव्य पथ का पुनरुद्धार कर उसे विश्वस्तरीय सार्वजनिक व सांस्कृतिक स्थल बनाया जाएगा। इसके साथ ही लगभग 1.25 लाख वर्ग मीटर में युगे युगीन राष्ट्रीय संग्रहालय बनाया जाएगा।

18- लो डेंसिटी वाले क्षेत्रों का नियोजित विकास

दिल्ली के सीमावर्ती गांवों और 23 अधिसूचित गांवों के करीब 150 वर्ग किलोमीटर के लो-डेंसिटी एरिया में सड़कों की कनेक्टिविटी के साथ आवासीय, मनोरंजक, जन-सुविधाओं और व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति देने वाला एक समान ढांचा लागू किया जाएगा।

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Iran-US War Update: ईरान और ओमान के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बड़ी डील, अब पूरी तरह खुलने के लिए अमेरिका की क्या होगी भूमिका?

Iran-US War News Update: ईरान और ओमान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल रूट में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक अहम समझौता किया है। इस डील के तहत होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरने वाले जहाजों के लिए निर्धारित एंट्री-एग्जिट रूट तय किए गए हैं। इसे लंबे समय से चले आ रहे समुद्री तनाव और अव्यवस्था के बीच एक बड़ी कूटनीतिक प्रगति के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, अभी इस समझौते पर तकनीकी स्तर की बातचीत जारी है। दोनों देशों की ओर से जॉइंट आधिकारिक बयान आना बाकी है। इसके बावजूद, ईरान और ओमान ने सुरक्षित वाणिज्यिक आवाजाही के लिए अलग-अलग समुद्री कॉरिडोर तैयार करने पर सहमति बना ली है।

क्या है समझौते का पूरा प्लान?

समझौते के मुताबिक, ईरान आने वाले यानी इनबाउंड कमर्शियल जहाजों की निगरानी करेगा। जबकि ओमान बाहर जाने वाले जहाजों यानी आउटबाउंड ट्रैफिक को संभालेगा। इसके लिए अलग-अलग निर्धारित शिपिंग लेन बनाई गई हैं। इनका उद्देश्य जहाजों के बीच टक्कर, सुरक्षा संबंधी घटनाओं और समुद्री तनाव को कम करना है। यह व्यवस्था दोनों देशों के बीच स्वतंत्र बातचीत के बाद तैयार हुई है।

इसका मकसद समुद्री ट्रैफिक को व्यवस्थित करना है। लेकिन साथ ही ईरान और ओमान की क्षेत्रीय संप्रभुता से समझौता न करना भी है। फिलहाल दोनों देशों की तकनीकी टीमें ऑपरेशनल प्रोटोकॉल, संचार व्यवस्था और पर्यावरण सुरक्षा से जुड़े नियमों को अंतिम रूप देने में जुटी हैं। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद संयुक्त औपचारिक घोषणा किए जाने की उम्मीद है।

सिर्फ रास्ते तय होने से नहीं खुलेगा होर्मुज

यह समझौता महत्वपूर्ण है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि होर्मुज जलडमरूमध्य तुरंत पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय कमर्शियल ट्रैफिक के लिए खोल दिया जाएगा। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि पूर्ण रूप से कमर्शियल जहाजों की आवाजाही बहाल करने का फैसला व्यापक भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

तेहरान की प्रमुख मांगों में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी जैसी कार्रवाइयों का अंत, सैन्य धमकियों को रोकना और आर्थिक प्रतिबंधों में राहत शामिल है। जब तक इन बाहरी परिस्थितियों पर सहमति नहीं बनती, तब तक नए निर्धारित समुद्री कॉरिडोर कड़ी निगरानी के तहत संचालित किए जाएंगे।

दुनिया के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है होर्मुज?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम एनर्जी चोकपॉइंट्स में से एक है। दुनिया की करीब 20 प्रतिशत पेट्रोलियम आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से गुजरती है। इसके अलावा बड़ी मात्रा में एलएनजी यानी तरलीकृत प्राकृतिक गैस भी इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचती है।

यही वजह है कि इस जलडमरूमध्य में तनाव या जहाजों की आवाजाही में किसी भी तरह की बड़ी रुकावट का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ता है। पिछले महीनों में बढ़े तनाव और समुद्री ट्रैफिक में आई बाधाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ी। कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा और जहाजों के लिए युद्ध जोखिम बीमा (War-Risk Insurance) की लागत भी काफी बढ़ गई।

क्या वैश्विक तेल बाजार को मिलेगी राहत?

ईरान और ओमान के बीच हुआ यह समझौता वैश्विक बाजारों के लिए अब तक का सबसे स्पष्ट संकेत माना जा रहा है कि होर्मुज संकट का कूटनीतिक समाधान संभव है। हालांकि, अभी इसे पूरी तरह संकट का अंत नहीं माना जा सकता। समुद्री मार्ग की पूर्ण और सामान्य आवाजाही इस बात पर निर्भर करेगी कि ईरान, अमेरिका और अन्य संबंधित पक्षों के बीच व्यापक भू-राजनीतिक मुद्दों पर किस तरह की सहमति बनती है। इसलिए फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर उम्मीद जरूर जगी है। लेकिन पूरी तरह सामान्य स्थिति लौटने में अभी कई अड़चनें बाकी हैं।

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द्वारका में बनेगा दिल्ली का सबसे भव्य 5-Star होटल! 1000 करोड़ के इस प्रोजेक्ट से मिलेंगी 800 नौकरियां

DDA Plan: दिल्ली के द्वारका सब-सिटी को एक इकॉनमिक, कॉर्मर्शियल और इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन बनाने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने एक बड़ा कदम उठाया है। डीडीए और जुनिपर होटल्स लिमिटेड ने द्वारका के सेक्टर-23 में एक भव्य 5-स्टार होटल बनाने के लिए MoU किया है। इस प्रोजेक्ट में 1000 करोड़ रुपये से अधिक का कैपिटल इन्वेस्टमेंट होगा। होटल बनने और इसके चलने करीब 800 लोगों के लिए डायरेक्ट एंप्लॉयमेंट के मौके तैयार होंगे। यह होटल दिल्ली-एनसीआर में गुणवत्तापूर्ण 5-स्टार आवास की उपलब्धता को काफी मजबूत करेगा।

यह प्रोजेक्ट जुनिपर द्वारा लाइसेंस शुल्क के आधार पर क्रियान्वित की जाएगी। इसके लिए जल्द ही जमीन जुनिपर होटल्स लिमिटेड को सौंप दी जाएगी। इस होटल को 2030 तक ऑपरेशनल करने का टारगेट बनाया गया है। 55 वर्षों की लाइसेंस अवधि के दौरान इस होटल से डीडीए के लिए 6000 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व आने का अनुमान है।

गोल्फ कोर्स और यशोभूमि के पास प्राइम लोकेशन

जुनिपर होटल्स लिमिटेड, सराफ होटल्स और अंतरराष्ट्रीय हॉस्पिटैलिटी ब्रांड हयात के बीच एक रणनीतिक साझेदारी है। अभी यह भारत के प्रमुख स्थलों पर 245 सर्विस अपार्टमेंट्स सहित 1895 कमरों वाले सात होटलों का प्रबंधन करता है। कंपनी द्वारका में प्रस्तावित इस 5-स्टार होटल को हयात के साथ साझेदारी में अपने प्रीमियम ग्रैंड हयात ब्रांड के तहत विकसित और संचालित करेगी।

यह होटल देश के सबसे लंबे 18-होल वाले डीडीए द्वारका गोल्फ कोर्स के ठीक सामने स्थित होगा। इससे गोल्फ खिलाड़ियों और मेहमानों की विशेष जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा। यह जगह क्षेत्रफल के हिसाब से भारत और एशिया के सबसे बड़े कन्वेंशन सेंटर यशोभूमि के बेहद करीब है। ये द्वारका स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स से भी नजदीकी दूरी पर होगा। इसके अलावा यह होटल ठीक सामने प्रस्तावित डिप्लोमैटिक एन्क्लेव के मेहमानों की जरूरतों को भी पूरा करेगा।

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Delhi 2047 का मास्टर प्लान पास, DDA के पुराने मकानों को मिलेगी नई जिंदगी! मेट्रो, सड़क सब पर असर

Delhi Master Plan 2047: दिल्ली के विकास को लेकर दिल्ली विकास प्राधिकरण यानी DDA ने कई बड़े फैसले लिए हैं। DDA की बैठक में Master Plan for Delhi-2047 को मंजूरी दी गई। बैठक की अध्यक्षता दिल्ली के उपराज्यपाल और DDA के चेयरमैन सरदार तरनजीत सिंह संधू ने की। अब इस प्लान को अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय को भेजा जाएगा।

दिल्ली का विकास कैसे होगा?

Master Plan 2047 में दिल्ली के आने वाले वर्षों के विकास की रूपरेखा तैयार की गई है। इसमें आवास, रोजगार, ट्रांसपोर्ट, पर्यावरण और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस रहेगा। बढ़ती आबादी को देखते हुए शहर के विकास को एक साथ कई क्षेत्रों से जोड़ने की कोशिश की गई है।

इसमें पुराने इलाकों को बेहतर बनाने, ऐतिहासिक जगहों को बचाने और लोगों को बेहतर सुविधाएं देने पर भी ध्यान दिया गया है। प्लान तैयार करने से पहले दिल्ली सरकार, MCD, NDMC, DJB, DMRC, NCRTC और RWAs समेत कई संस्थाओं से चर्चा की गई थी।

पुराने DDA मकानों का पुनर्निर्माण आसान होगा

DDA ने पुराने दो मंजिला मकानों के पुनर्निर्माण के लिए एक समान नीति को भी मंजूरी दी है। इसका फायदा 50 साल से ज्यादा पुराने उन DDA मकानों को मिलेगा, जो अब जर्जर या कमजोर हो चुके हैं।

पहले ऐसे बने-बनाए मकानों के पुनर्विकास के लिए एक समान नियम नहीं थे। अब इन मकानों को खाली रिहायशी प्लॉट की तरह रीडेवपलमेंट का अधिकार मिलेगा। हालांकि, इसके लिए FAR, ग्राउंड कवरेज, ऊंचाई, फायर सेफ्टी और स्ट्रक्चरल सेफ्टी जैसे नियमों का पालन करना होगा।

रिठाला-कुंडली मेट्रो को भी बढ़ावा

DDA ने नरेला सब-सिटी में रिठाला-कुंडली मेट्रो कॉरिडोर के डिपो के लिए 19.63 हेक्टेयर जमीन का लैंड यूज बदलने को मंजूरी दी है। जमीन का इस्तेमाल अब ट्रांसपोर्टेशन के लिए किया जा सकेगा।

रिठाला से कुंडली तक मेट्रो विस्तार से नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली, रोहिणी और नरेला की कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है। इससे हरियाणा के कुंडली तक पहुंच भी आसान होगी। DDA को उम्मीद है कि इससे नरेला में आवास, रिटेल, हॉस्पिटैलिटी और दूसरे कारोबार को बढ़ावा मिलेगा।

बिल्डिंग परमिशन में भी राहत

DDA ने Unified Building Bye-Laws यानी UBBL-2016 में बदलाव को मंजूरी दी है। इसका मकसद बिल्डिंग प्लान की मंजूरी को आसान बनाना है।

अब बिल्डिंग परमिट के लिए DPCC, Chief Inspector of Factories, Delhi Jal Board और Forest Department से पहले NOC लेने की जरूरत को हटाने का प्रावधान किया गया है। इससे प्रोजेक्ट की मंजूरी में लगने वाला समय कम हो सकता है।

कई जमीनों के लैंड यूज में बदलाव

DDA ने रोशनपुरा में 7,978 वर्ग मीटर जमीन का लैंड यूज बदलने को भी मंजूरी दी है। यहां Veterinary Council of India का मुख्यालय बनाया जाना है। सरोजिनी नगर के पास 24,400 वर्ग मीटर जमीन को ट्रांसपोर्टेशन से रेजिडेंशियल में बदलने का प्रस्ताव भी मंजूर हुआ है।

इसके अलावा Copernicus Lane में तीन प्लॉट का लैंड यूज रेजिडेंशियल से पब्लिक और सेमी-पब्लिक करने की मंजूरी दी गई। यहां भारतीय विद्या भवन अपनी उच्च शिक्षा और रिसर्च गतिविधियों का विस्तार करना चाहता है।

DDA ने मंगोलपुरी और केशोपुर के कुछ इंडस्ट्रियल एरिया को डी-नोटिफाई करने का फैसला भी लिया। वहीं, Gazipur में Waste-to-Energy प्लांट के लिए जमीन का लैंड यूज कमर्शियल से यूटिलिटी करने को मंजूरी दी गई है। इसके साथ ग्रीन एरिया बढ़ाने के लिए भी जमीन के इस्तेमाल में बदलाव किया गया है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

33.4 लाख के 1 BHK सरकारी फ्लैट की बुकिंग सिर्फ 50k में! DDA की इस धांसू स्कीम में 2-3 बीएचके का भी ऑप्शन

दिल्ली में अपना घर खरीदने का सपना देखने वाले लाखों लोगों के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने ‘कर्मजीवी आवास योजना 2026’ शुरू की है। इस योजना का मकसद सरकारी कर्मचारियों, सेवानिवृत्त कर्मियों और विभिन्न पेशों से जुड़े लोगों को रियायती दर पर तैयार फ्लैट उपलब्ध कराना है। सबसे बड़ी बात यह है कि योजना के तहत सभी श्रेणियों के फ्लैटों पर 25 फीसदी की सीधी छूट दी जा रही है। ये सभी फ्लैट दिल्ली के नरेला स्थित पॉकेट-11, सेक्टर ए1-ए4 में बने हैं और पूरी तरह तैयार हैं, यानी खरीदते ही इनमें रहने की सुविधा मिलेगी।

जानें कब शुरु होगा रजिस्ट्रेशन 

योजना की शुरुआत 24 जुलाई 2026 से हो चुकी है। इसी दिन से पंजीकरण भी शुरू हो गया है। फ्लैटों की बुकिंग 15 अगस्त 2026 दोपहर 12 बजे से ‘पहले आओ, पहले पाओ’ (First Come First Serve) के आधार पर शुरू होगी। योजना 30 अक्टूबर 2026 तक या सभी फ्लैट बिकने तक चलेगी।इस योजना के तहत कुल 1,224 फ्लैट बिक्री के लिए उपलब्ध हैं।

जानें कितनी होगी फ्लैट की कीमत

इनमें 384 एक बेडरूम (1-बीएचके), 432 दो बेडरूम (2-बीएचके) और 408 तीन बेडरूम (3-बीएचके) फ्लैट शामिल हैं। 25 फीसदी छूट के बाद 1-बीएचके फ्लैट की कीमत लगभग 33.40 लाख से 33.66 लाख रुपये, 2-बीएचके की कीमत 75.55 लाख से 83.58 लाख रुपये और 3-बीएचके की कीमत 1.06 करोड़ से 1.19 करोड़ रुपये के बीच होगी। हालांकि अंतिम कीमत फ्लैट के क्षेत्रफल के अनुसार तय होगी।

इस इलाके में बन हैं फ्लैट

योजना की एक और खासियत इसकी लोकेशन है। नरेला का यह इलाका तेजी से विकसित हो रहा है। यहां से प्रस्तावित रिठाला-नरेला-कुंडली मेट्रो कॉरिडोर का मेट्रो स्टेशन करीब 1.5 किलोमीटर दूर होगा। प्रस्तावित रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) स्टेशन भी करीब 1.9 किलोमीटर की दूरी पर है। इसके अलावा यूईआर-1, यूईआर-2 और जीटी करनाल रोड जैसी प्रमुख सड़कें भी पास हैं। आसपास शिक्षा केंद्र, खेल परिसर और हरियाली की अच्छी व्यवस्था है, जिससे यह इलाका भविष्य में और अधिक आकर्षक माना जा रहा है।

किन्हें मिलेगा फायदा

यह योजना सिर्फ सरकारी कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारी, सेवानिवृत्त कर्मचारी, सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारी, सरकारी विश्वविद्यालयों और अस्पतालों के कर्मचारी आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा डॉक्टर, वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट, इंजीनियर, आर्किटेक्ट, शिक्षक, प्रोफेसर, वैज्ञानिक और निजी क्षेत्र के पेशेवर भी इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। आवेदन के समय संबंधित नौकरी या पेशे से जुड़े दस्तावेज जमा करना अनिवार्य होगा।

आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन होगा। इच्छुक लोगों को डीडीए के आवास पोर्टल पर जाकर पंजीकरण करना होगा। इसके लिए 2,500 रुपये का गैर-वापसी योग्य पंजीकरण शुल्क देना होगा। जो लोग पहले से डीडीए आवास पोर्टल पर पंजीकृत हैं, उन्हें दोबारा शुल्क नहीं देना पड़ेगा। फ्लैट चुनने के बाद आवेदक को ऑनलाइन भुगतान के लिए 15 मिनट का समय मिलेगा। इस दौरान चुना गया फ्लैट किसी दूसरे व्यक्ति के लिए उपलब्ध नहीं रहेगा।

बुकिंग के लिए इतनी जमा करानी होगी राशि

बुकिंग के लिए भी अलग-अलग राशि तय की गई है। 3-बीएचके फ्लैट के लिए 10 लाख रुपये, 2-बीएचके के लिए 4 लाख रुपये और 1-बीएचके के लिए 50 हजार रुपये जमा करने होंगे। यह राशि फ्लैट की कुल कीमत में समायोजित कर दी जाएगी। लेकिन यदि आवेदक बाद में फ्लैट छोड़ता है या तय समय पर बाकी भुगतान नहीं करता, तो यह राशि जब्त हो सकती है। डीडीए के अनुसार, बुकिंग के बाद डिमांड-कम-अलॉटमेंट लेटर जारी किया जाएगा। इसके बाद फ्लैट की बाकी कीमत 60 दिनों के भीतर जमा करनी होगी। जरूरत पड़ने पर 30 दिन की अतिरिक्त मोहलत मिलेगी, लेकिन उस पर 10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। तय समय के बाद भुगतान नहीं करने पर फ्लैट का आवंटन रद्द किया जा सकता है।

योजना में दिव्यांग (पीडब्ल्यूबीडी) आवेदकों के लिए विशेष सुविधा भी दी गई है। उन्हें फ्लैट की कीमत पर 5 प्रतिशत तक की छूट (अधिकतम 1 लाख रुपये) मिलेगी। साथ ही वे पूरी राशि एक साथ देने के बजाय 15 साल की आसान किस्तों में भी भुगतान कर सकते हैं। डीडीए ने यह भी स्पष्ट किया है कि फ्लैट केवल रिहायशी उपयोग के लिए होंगे। कब्जा मिलने के बाद फ्लैट मालिकों को संबंधित रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) का सदस्य बनना होगा और रखरखाव शुल्क भी देना होगा। फ्लैट का स्वामित्व पूरी प्रक्रिया पूरी होने और कन्वेयंस डीड बनने के बाद ही मिलेगा।

कुल मिलाकर, डीडीए कर्मजीवी आवास योजना 2026 उन लोगों के लिए बड़ा अवसर है जो दिल्ली में अपना घर खरीदना चाहते हैं। 25 प्रतिशत की छूट, तैयार फ्लैट, बेहतर कनेक्टिविटी और पूरी तरह ऑनलाइन प्रक्रिया इस योजना को खास बनाती है। खासकर सरकारी कर्मचारियों, पेशेवरों और सेवानिवृत्त लोगों के लिए यह कम कीमत में दिल्ली में घर खरीदने का एक अच्छा मौका माना जा रहा है।

DDA ने नई स्कीम का किया ऐलान! 25% डिस्काउंट पर मिलेंगे रेडी-टू-मूव 1, 2 & 3 BHK फ्लैट, जानें कौन उठा सकता है फायदा

DDA New Housing Scheme: देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने घर खरीदने की चाहत रखने वालों को एक बड़ा तोहफा दिया है। प्राधिकरण ने एक विशेष हाउसिंग स्कीम कर्मजीवी आवास योजना 2026 की शुरुआत की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य कामकाजी पेशेवरों के लिए दिल्ली में घर खरीदना आसान और किफायती बनाना है।

कर्मजीवी आवास योजना 2026 को खास तौर पर उन लोगों के लिए डिजाइन किया गया है जो देश के निर्माण और आर्थिक विकास में लगातार अपना योगदान दे रहे हैं। सरकारी सेवाओं में कार्यरत व सेवानिवृत्त कर्मचारियों के साथ-साथ कॉर्पोरेट, बिजनेस, उद्यमी और प्रोफेशनल सेक्टर से जुड़े कामकाजी पेशेवर इस योजना का फायदा उठा सकते हैं।

क्या है DDA की नई हाउसिंग स्कीम? ये रहे सारे डिटेल्स

इस योजना के तहत नरेला के पॉकेट-11, सेक्टर A1-A4 में स्थित 1200 से अधिक रेडी-टू-मूव फ्लैटों पर फ्लैट 25 प्रतिशत की भारी छूट दी जा रही है। 25% डिस्काउंट के बाद 1 BHK फ्लैट की शुरुआती कीमत ₹33.40 लाख, 2 BHK फ्लैट की शुरुआती कीमत ₹75.55 लाख और 3 BHK फ्लैट की शुरुआती कीमत ₹1.065 करोड़ तय की गई है।

योजना में शामिल होने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की शुरुआत 24 जुलाई से हो रही है। वहीं, फ्लैटों की बुकिंग 15 अगस्तसे डीडीए आवास पोर्टल पर पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर खोली जाएगी। यह आवासीय परियोजना नरेला सब-सिटी के पॉकेट-11 (सेक्टर A1-A4) में स्थित है। ये इलाका दिल्ली के तेजी से उभरते ग्रोथ कॉरिडोर में शामिल है। यह पूरा परिसर मामूरपुर जंगल के सामने और हरे-भरे माहौल के बीच बना हुआ है।

कनेक्टिविटी के लिहाज से कैसा है ये इलाका?

डीडीए के मुताबिक कनेक्टिविटी के लिहाज से यह जगह काफी बेहतर है। यह प्रोजेक्ट अर्बन एक्सटेंशन रोड (UER)-I से सिर्फ 500 मीटर और जीटी करनाल रोड से 1.1 किमी की दूरी पर है। इसके अलावा आने वाले मेट्रो स्टेशन से यह करीब 1.2 किमी, प्रस्तावित RRTS स्टेशन से 1.9 किमी, नरेला स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स से 2 किमी, आगामी एजुकेशन हब से 5 किमी, UER-II से 6.15 किमी और आगामी इंटीग्रेटेड स्पोर्ट्स स्टेडियम से 9.2 किमी की दूरी पर स्थित है।

नरेला सब-सिटी की बढ़ती लोकप्रियता का अंदाजा डीडीए के हालिया बिक्री आंकड़ों से भी लगाया जा सकता है। डीडीए की प्रेस रिलीज के मुताबिक चालू वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में डीडीए ने कुल 1284 फ्लैट बेचे। इससे ₹1020 करोड़ से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ। इनमें से अकेले नरेला सब-सिटी से ही 1153 फ्लैटों की बिक्री हुई। ये कुल बिक्री का करीब 90 प्रतिशत है।

टैक्स छूट की भी व्यवस्था?

खरीदारों की सहूलियत के लिए इस योजना में कई छूट और विशेष नियम दिए गए हैं। योजना के तहत दिए जा रहे सभी फ्लैट फ्रीहोल्ड आधार पर हैं। अगर किसी आवेदक के पास पहले से कोई आवासीय संपत्ति है तब भी वह इस योजना में आवेदन कर सकता है। इसके अलावा डीडीए के तय मानकों के अनुसार पास-पास मौजूद दो फ्लैटों को आपस में जोड़ने का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पूरी बुकिंग प्रक्रिया ऑनलाइन होगी और खरीदार खरीदारी से पहले सैंपल फ्लैट्स का निरीक्षण भी कर सकते हैं।

इच्छुक आवेदक इस योजना, पात्रता मानदंड, मूल्य, बुकिंग प्रक्रिया और अन्य नियम-शर्तों की विस्तृत जानकारी के लिए डीडीए की आधिकारिक वेबसाइट www।dda।gov।in या डीडीए आवास पोर्टल (https://eservices।dda।org।in) पर जा सकते हैं। किसी भी तरह की सहायता के लिए डीडीए के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-110-332 पर भी संपर्क किया जा सकता है।